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बाघिन टी-6 बनी 10 साल की उम्र में 6वीं बार माँ, जन्में 4 शावक, अब तक कुल 17 बाघ शावक दिए

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पन्ना टाइगर रिजर्व के घास के मैदान में अपने नवजात शावकों के साथ विचरण करते हुए बाघिन टी-6 .

पेंच टाइगर रिजर्व से 2014 पन्ना लाई गई थी बाघिन टी-6

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व से पिछले कुछ समय से लगातार बाघ शावकों के जन्म के ख़बरें आ रहीं हैं। पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघ पुनर्स्थापना कार्यक्रम की ऐतिहासिक सफलता के चलते यहां जंगल के राजा बाघों का कुनबा तेजी से बढ़ रहा है। संकटग्रस्त बड़ी बिल्लियों (बाघों) के संरक्षण के लिहाज से यह अच्छी खबर है। पन्ना की खूबसूरत बाघिन टी-6 करीब 10 साल की उम्र में 6वीं बार माँ बनी है। इस बाघिन ने 4 शावकों को जन्म दिया है। अपनी माँ के साथ अठखेलियाँ करते और घास के मैदान में विचरण करते कैमरे में कैद हुए नवजात शावकों की आयु लगभग 2-3 माह बताई जा रही है। टाइगर ट्रैकिंग दल ने शुक्रवार 26 मार्च को पहली बार बाघिन और उसके नवजात शावकों की कुछ तस्वीरें उतारीं साथ ही वीडियो भी बनाए हैं।
पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक उत्तम कुमार शर्मा ने जानकारी देते बताया कि पन्ना में बाघों को पुनः बसाने की योजना अंतर्गत वर्ष 2014 में बाघिन टी-6 को प्रदेश के पेंच टाइगर रिजर्व से पन्ना लाया गया था। तब इसकी आयु लगभग 3 वर्ष थी। महज 7 वर्ष की अवधि में 6वीं बार माँ बनीं बाघिन टी-6 ने पन्ना को अब तक कुल 17 बाघ शावक दिए हैं। बाघों की वंशवृद्धि इसका विशेष योगदान रहा है। श्री शर्मा ने बताया कि बाघिन टी-6 और उसके शावक पूरी तरह से स्वस्थ हैं। एक सवाल के जबाव में क्षेत्र संचालक ने कहा कि पन्ना टाइगर रिजर्व में वर्तमान बाघ शावकों की संख्या 20-25 है एवं सभी आयु वर्ग के बाघों की कुल संख्या 70 से ऊपर जा चुकी है। उल्लेखनीय है कि, वर्तमान में बाघों की फेज-4 की गणना जारी है। कुछ समय बाद इसके नतीजे आने पर बाघों की वास्तविक संख्या का पता चल जाएगा।

लोक सुनवाई : “साहब” रेत खदान ठेका की आड़ में खुलेआम जारी है अवैध खनन का खेल, प्रशासन के सामने ग्रामीणों ने खोला रेत ठेकेदार के कारनामों का कच्चा चिट्ठा

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नई रेत खदानों की पर्यावर्णीय स्वीकृति को लेकर लोक सुनवाई करते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी एवं अपर कलेक्टर पन्ना।

अजयगढ़ क्षेत्र में 4 नई रेत खदानों की पर्यावर्णीय स्वीकृति के लिए की गई लोक सुनवाई

रेत ठेकेदार ने उदयपुर, मझगांय, फरस्वाहा एवं चंदौरा खदान की के लिए किया आवेदन

ग्रामीणों का आरोप आवेदित स्थानों पर पिछले 9 माह से रेत का खनन कर रहा है ठेकेदार

*  लोक सुनवाई में अवैध खनन का मुद्दा गरमाने पर एडीएम बोले टीम बनाकर कराएंगे जांच

शादिक खान, पन्ना/अजयगढ़। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में अजयगढ़ तहसील क्षेत्र अंतर्गत रेत खदान ठेका की आड़ में रेत की लूट का खेल खुलेआम चल रहा है। “रडार न्यूज़” प्रमाणित साक्ष्यों एवं तथ्यों के साथ इस बात को समय-समय पर प्रमुखता से कहता रहा है। लेकिन, इस ज्वलंत मुद्दे पर अजयगढ़ क्षेत्र के वाशिंदों ने पहली बार किसी सार्वजानिक मंच से अवैध खनन के व्यापक दुष्प्रभावों को लेकर अपनी पीड़ा जाहिर की है। रेत की लूटपाट का दंश झेलने को मजबूर केन नदी पट्टी क्षेत्र लोगों ने प्रशासनिक अधिकारियों व रेत ठेकेदार के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में रडार न्यूज़ की खबरों पर मुहर लगाते हुए खुलकर बताया कि उनके क्षेत्र में रेत खदान ठेका के नाम पर बहुमूल्य खनिज सम्पदा का अनियंत्रित तरीके से दोहन किया जा रहा है। सत्ता और प्रशासन के संरक्षण में चल रहे अवैध खनन के इस खेल का भंडाफोड़ ग्रामीणों के द्वारा गुरुवार 25 मार्च को अजयगढ़ के ग्राम फरस्वाहा एवं उदयपुर में आयोजित हुई प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की लोक सुनवाई में किया गया।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की लोक सुनवाई में उपस्थित फरस्वाहा एवं उदयपुर ग्राम के रहवासी।
दरअसल, पन्ना जिले के रेत ठेकेदार रसमीत सिंह मल्होत्रा ने अजयगढ़ तहसील क्षेत्र में केन नदी पर चार नई रेत खदानों की स्वीकृति हेतु आवेदन पत्र प्रस्तुत किया है। भारत सरकार के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के द्वारा दिनांक 14 सितंबर 2006 को जारी अधिसूचना के अनुसार खनन परियोजनाओं को पर्यावर्णीय स्वीकृति लेने का प्रावधान किया गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड क्षेत्रीय कार्यालय सागर एवं पन्ना जिला प्रशासन के द्वारा इसी संबंध में लोक सुनवाई आयोजित कर स्थानीय ग्रामीणों की आपत्ती-सुझाव लिए गए। लोक सुनवाई में रेत खदान ठेकेदार की ओर से उपस्थित कंसल्टेंट ने माइनिंग प्लान का प्रजेंटेशन दिया। साथ ही रेत के खनन से होने वाली समस्याओं के समाधान को लेकर किए जाने वाले उपायों एवं सीएसआर (नैगम सामाजिक दायित्व) के तहत किए जाने वाले जनकल्याण के कार्यों की जानकारी दी गई। नई खदानों को पर्यावर्णीय स्वीकृति हेतु आयोजित की गई लोक सुनवाई में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सागर के क्षेत्रीय अधिकारी व्ही.एस. राय एवं पन्ना जिला प्रशासन की ओर से जे.पी. धुर्वे अपर कलेक्टर उपस्थित थे।

खेतों में खोद डाली रेत खदान, नहीं मिलता काम

पन्ना जिले के ग्राम जिगनी एवं रामनई में निजी भूमि पर संचालित अवैध रेत खदानों में वर्षाकाल के बाद धड़ल्ले से जारी है रेत खनन। (देखिए चित्र)
लोक सुनवाई में ग्रामीणों ने क्षेत्र के बदतर हो चुके हालात को सिलसिलेवार बयां करते हए बताया कि रेत ठेकेदार के द्वारा विभिन्न ग्रामों में दर्जनों स्थानों पर निजी भूमि (खेतों) एवं शासकीय भूमि पर अवैध खदानें खोदकर बड़े पैमाने में रेत निकाली गई है। कुछेक स्थानों पर इसके लिए भूमि स्वामी से अनुबंध किया गया तो वहीं अधिकांश जगह प्रशासनिक संरक्षण एवं स्थानीय आपराधिक तत्वों के सहयोग से आतंक के बल पर रेत खनन किया गया। नदी के अंदर से अच्छी क्वालिटी की रेत निकालने के लिए प्रतिबंधित पोकलेन मशीनों एवं लिफ्टरों को नदी में उतारकर पानी के अंदर से रेत निकाली जा रही है। प्रतिबंध के बाबजूद मशीनों से रेत खनन के चलते स्थानीय लोगों को रेत खदान ठेके से एक ओर जहां रोजगार नहीं मिल रहा है वहीं मशीनों से केन नदी का सीना और कोख़ को छलनी कर रेत को मनमाने तरीके से लूटा जा रहा है। इसका व्यापक दुष्प्रभाव यह है कि मशीनों के संचालन से इलाके में ध्वनि प्रदूषण का स्तर खतरनाक तरीके से बढ़ने के साथ-साथ केन नदी के बड़े इलाके में जलीय जीव, जलीय वनस्पति चिंताजनक तेजी से घट रही है।
नदी के तल से पानी के अंदर की रेत निकाले जाने के कारण नदी की जल धारण क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। जिसका दुष्परिणाम केन पट्टी क्षेत्र में गंभीर रूप ले चुके जल संकट के रूप में साफ़ नजर आ रहा है। केन नदी का कछार और तटबंध भी पूरी तरह तबाह हो चुका है। कई पीढ़ियों से केन नदी से आजीविका प्राप्त करने वाले मछुआरे, तरबूज एवं सब्जी उत्पादक किसान भी सबसे मुश्किल दौर का सामना करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों की मानें तो मोहना से लेकर रामनई तक केन नदी में मशीनों के जरिए रेत के अंधाधुंध दोहन के चलते मछलियों की तादाद में भारी कमी आई है। नदी के बीचों-बीच अथवा किनारों पर प्राकृतिक रूप से बनने वाले रेत के टापूनुमा खेतों की तादाद एवं क्षेत्रफल घटकर अब नाममात्र का रह गया है। नतीजतन कमजोर तबके के फल-सब्जी उत्पादक किसानों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।

केन नदी का घटा जल स्तर,बढ़ा प्रदूषण

केन नदी में खुलेआम लिफ्टर चलाकर पानी के अंदर से रेत निकालते हुए ठेकेदार के गुर्गे।
लोक सुनवाई में उपस्थित अधिकारियों को ग्रामीणों ने बताया कि रेत के ओवरलोड हैवी वाहनों की रात-दिन निकासी के चलते गांवों के पहुँच मार्ग, आंतरिक मार्ग, नालियां एवं बरियारपुर बाँध की नहर के पुल अत्यंत ही जर्जर हो चुके हैं। सड़कों के गड्ढों में तब्दील होने के कारण वाहनों की आवाजाही से उड़ने वाली धूल बीमारियों के फैलाव की वजह बन रही। धूल की रोकथाम के लिए ठेकेदार की ओर से आज तक कोई उपाए नहीं किया गया। ग्रामीण इस बात को लेकर भी चिंतित है कि नदी में लिफ्टर और पोकलेन मशीनों को उतारे जाने से पानी तेजी से प्रदूषित हो रहा है। पानी की सतह पर मशीनों के मोबिल ऑयल, इंजन ऑयल एवं ग्रीज़ के कारण दूर तक मोटी तेलीय परत बनने से जलीय जीव तेजी से असमय काल-कवलित हो रहे हैं। ग्रामीणों के इन तमाम गंभीर आरोपों के जबाव में अपर कलेक्टर जे.पी. धुर्वे ने आश्वस्त किया कि शीघ्र ही खनिज एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम से अवैध उत्खनन सहित अन्य मामलों की जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट के तथ्यों के आधार पर दोषियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

पिछले 9 माह से जारी है अवैध खनन

उल्लेखनीय बड़े पैमाने पर रेत के अवैध खनन के लिए बदनाम जिले का अजयगढ़ विकासखंड पन्ना विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जोकि मध्य प्रदेश के खनिज एवं श्रम विभाग के मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह का निर्वाचन क्षेत्र है। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष एवं खजुराहो सांसद विष्णु दत्त शर्मा के संसदीय क्षेत्र में भी अजयगढ़ का इलाका शामिल है। सत्ता में प्रभावी दखल रखने वाले इन कद्दावर एवं राजनैतिक रूप सक्षम जनप्रतिनिधियों के निर्वाचन क्षेत्र में बेरोकटोक जारी बहुमूल्य खनिज संपदा की लूट का खेल न सिर्फ हैरान करने वाला है बल्कि माननीयों भूमिका पर भी कई गंभीर सवाल खड़े करता है। अजयगढ़ क्षेत्र में पिछले 9 माह से रसमीत सिंह मल्होत्रा के द्वारा आतंक के बल पर जिस तरह ताबड़तोड़ तरीके से मशीनों के जरिए रेत का अवैध खनन किया जा रहा है उसे लेकर क्षेत्रीय लोगों में जबर्दस्त आक्रोश एवं असंतोष व्याप्त है। गुरुवार को फरस्वाहा एवं उदयपुर ग्राम में संपन्न हुई लोक सुनवाई में अवैध खनन के खिलाफ मुखरता से बोलने वालों ग्रामीणों की बातों से तो यही साबित होता है।
मजेदार बात यह है कि रेत ठेकेदार ने जिन 4 स्थानों पर नई खदानों की स्वीकृति के लिए आवेदन दिया है वहाँ कथित तौर पर पिछले 9 माह से उसके द्वारा निजी भूमियों से एवं नदी के अंदर से लिफ्टर और पोकलेन मशीनों के जरिए रेत निकाली जा रही है। ग्रामीणों की मानें तो मझगांय, उदयपुर, फरस्वाहा एवं चंदौरा में पहले से ही चल रही रेत की लूट के साक्ष्य भी मौके पर मौजूद हैं। ग्रामीणों को यह बात जरा भी समझ नहीं आ रही है कि जब बगैर खदान की स्वीकृति के रेत ठेकेदार के द्वारा उक्त चारों स्थानों से धड़ल्ले से लगातार रेत निकाली जा रही है तो अब इन्हें स्वीकृत कराने के पीछे आखिर मंशा क्या है। पूर्व में ठेकेदार रसमीत सिंह अपनी सभी रेत खदानों को सरेंडर करने के लिए आवेदन भी दे चुका है। इस पर अभी भले ही कोई निर्णय नहीं हुआ लेकिन इस बीच चार नई खदानों की स्वीकृति के लिए आवेदन करने का परस्पर विरोधाभासी कदम किसी ख़ास रणनीति की तरफ इशारा करता है। जिसका खुलासा आगामी समय में होने की उम्मीद की जा रही है।बहरहाल यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ग्रामीणों की कड़ी आपत्ती एवं गंभीर आरोपों के मद्देनजर ठेकेदार को नई खदानों की पर्यावर्णीय स्वीकृति को लेकर संबंधित विभाग क्या निर्णय लेता है।

ब्रेकिंग न्यूज़ : पन्ना में कोरोना वायरस से संक्रमित युवक की मौत

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सांकेतिक फोटो।

*   सीएमएचओ एवं सिविल सर्जन ने की पुष्टि

*   जिले में अब तक कोविड से मरने वालों की संख्या बढ़कर 6 हुई

पन्ना। (www.radarnews.in) कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में आज एक बुरी खबर आई है। गुरुवार 25 मार्च को पन्ना में कोविड-19 संक्रमण से एक युवक की असमय मौत हो गई। मृतक की आयु लगभग 35 वर्ष बताई जा रही है। जिले के पवई विकासखण्ड मुख्यालय में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र से अत्यंत ही गंभीर एवं अचेत हालत में ईलाज हेतु पन्ना जिला चिकित्सालय लाए गए कोरोना संक्रमित युवक की नाजुक हालत को देखते हुए ड्यूटी डॉक्टर ने प्राथमिक उपचार के बाद उसे तुरंत मेडीकल कॉलिज सागर के लिए रिफर कर दिया। युवक को सागर ले जाने की तैयारी के बीच कुछ ही देर पहले उसकी मौत हो गई।
कोविड-19 संक्रमित युवक की मौत होने की पुष्टि पन्ना के सीएमएचओ डॉ. आर.एस. पाण्डेय एवं जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन डॉ. व्ही.एस. उपाध्याय ने की है। पन्ना जिले में कोरोना वायरस संक्रमण के सरकारी रिकार्ड के अनुसार 24 मार्च 2021 तक की स्थिति में इस महामारी से मरने वालों की संख्या 05 रही है। जोकि अब बढ़कर 06 हो जाएगी। सीएमएचओ डॉ. आर.एस. पाण्डेय ने “रडार न्यूज़” से चर्चा में बताया कि उक्त युवक की कोरोना संक्रमण की जांच पवई सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में हुई थी जोकि पॉजिटिव आई थी। युवक को गुरुवार 25 मार्च को गंभीर हालत में पवई से पन्ना के लिए रेफर किया गया। दोपहर करीब 2:30 बजे कोविड-19 संक्रमित मरीज के जिला चिकित्सालय पहुँचने पर तुरंत उसका प्राथमिक उपचार किया गया लेकिन कुछ ही देर बाद उसकी मृत्यु हो गई। आपने बताया कि युवक के संबंध में मुझे ज्यादा जानकारी नहीं है, पवई के बीएमओ को उसकी केस हिस्ट्री सहित आवश्यक जानकारी भेजने के निर्देश दिए हैं।
सांकेतिक फोटो।
सीएमएचओ डॉ. आर.एस. पाण्डेय ने कहा कि पवई से जानकारी आने पर इस केस की पोर्टल में विधिवत इन्ट्री की जाएगी। उल्लेखनीय है कि पन्ना जिले में 24 मार्च तक की स्थिति में कोविड-19 के कुल संक्रमित मरीजों की संख्या 1187 रही है। जिनमें 1140 मरीजों के स्वस्थ्य होने के बाद कोविड-19 एक्टिव पुष्ट केस (मरीज) संख्या 42 थी। कोरोना संक्रमित मरीजों को कोविड संस्थानों में भर्ती कर/होम आइसोलेशन में चिकित्सकों की देखरेख में आवश्यक उपचार प्रदान करने का का दावा स्वास्थ्य विभाग द्वारा किया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि कोरोना से राहत मिलती देख लोग लापरवाही बरतने लगे थे। लेकिन, यह गलती अब भारी पड़ने लगी है। मार्च महीने की शुरुआत से ही देश-प्रदेश सहित पन्ना जिले में कोरोना वायरस संक्रमण पुनः तेजी से फैलने लगा है। कोरोना संक्रमण के मरीजों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर लोगों को विशेष सतर्कता बरतने एवं विशेषज्ञों द्वारा बताए जा रहे सुरक्षात्मक उपाए अपनाने जैसे कि मास्क लगाना, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना एवं कई बार हाथों को अच्छी तरह से साबुन-पानी से धोने आदि का कड़ाई से पालन करने की जरुरत है।

पिता-पुत्री के पवित्र रिश्ते को शर्मसार करने वाले अभियुक्त को 5 वर्ष का कठोर कारावास

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जिला एवं सत्र न्यायालय पन्ना। (फाइल फोटो)

*  द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्‍यायाधीश पन्ना ने सुनाया फैसला

*  नाबालिग से अश्‍लील हरकत कर हवश का शिकार बनाने किया था प्रयास

पन्ना। (www.radarnews.in) पिता-पुत्री के पवित्र रिश्ते को कलंकित कर सभ्य समाज को शर्मसार करने के मामले में कामांध आरोपी को पोक्सो एक्ट सहित अन्य धाराओं के तहत दोषी पाते हुए द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्‍यायाधीश पन्ना ने पांच वर्ष के कठोर कारवास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने अभियुक्त को पांच हजार रुपए के अर्थदण्ड से भी दंडित किया है। सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी एवं मीडिया सेल प्रभारी पन्ना ऋषिकांत द्विवेदी ने प्रकरण के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि घटना दिनांक 29 अगस्त 2019 को पीड़ित नाबालिग ने कोतवाली पन्ना में लिखित शिकायती आवेदन पत्र प्रस्तुत किया था।
जिसमें अपनी आपबीती का उल्लेख करते हुए बताया कि दिनांक 27 अगस्त 2019 उसकी माँ मजदूरी करने ट्रेन से जम्मू गई थी। घर में उसका छोटा भाई व छोटी बहन एवं पापा थे। दो दिन बाद रात्रि में करीब 2 बजे पिता ने उसे नींद से जागकर गलत काम करने का प्रयास किया। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम से व्यथित और हैरान नाबालिग रोने लगी। उसके छोटे भाई-बहन भी रोने लगे। इससे नाराज आरोपी ने गालियां देते हुए मारपीट कर पीड़िता को चुप करा दिया।
सुबह उठकर नाबालिग ने अपनी रिश्‍ते की दीदी व जीजा को पूरी बात बताई। फरियादिया की रिपोर्ट पर थाना कोतवाली पन्ना में उसके पिता के विरुद्ध अपराध क्रमांक 596/19 में धारा 354क, 294, 323, 506 भारतीय दण्ड संहिता एवं 7/8 पोस्को एक्ट के अंतर्गत प्रथम सूचना रिपोर्ट पंजीबद्ध कर मामले को विवेचना में लिया गया। प्रकरण की जांच उपरांत चालान न्‍यायालय में पेश किया। इस प्रकरण का विचारण न्‍यायालय द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्‍यायाधीश (पोस्को) पन्‍ना के न्‍यायालय मे हुआ। शासन की ओर से प्रकरण की पैरवी दिनेश खरे सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी पन्ना के द्वारा की गई। न्‍यायालय के द्वारा दस्तावेजी साक्ष्‍यों, अभियोजन के तर्कों तथा न्‍यायिक-दृष्‍टांतो से सहमत होते हुए अभियुक्‍त को पोस्को एक्ट की धारा 9एन/10 के अन्‍तर्गत अपराध का दोषी पाते हुये 5 वर्ष के कठोर कारावास एवं 5 हजार रूपये के अर्थदण्‍ड से दंडित किया है।

शिकार के लिए लगाए गए फंदे में फंसा तेंदुआ, रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर बचाई जान

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तेंदुए को रेस्क्यू वाहन के पिंजड़े में कैद कर सुरक्षित स्थान पर छोड़ने के लिए रवाना करातीं हुई दक्षिण वन मंडल पन्ना की डीएफओ मीना कुमारी मिश्रा।

पन्ना जिले के दक्षिण वन मण्डल अंतर्गत शाहनगर रेन्ज की घटना

शिकारियों-तस्करों की सक्रियता के चलते खतरे में बेजुबान वन्यजीव

पिछले 3 साल में करीब दर्जन भर तेंदुए हो चुके है असमय काल-कवलित

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश का पन्ना जिला बाघों-तेंदुओं के शिकार की चिंताजनक घटनाओं, उनके अंगों की तस्करी एवं अन्य गंभीर प्रकृति के वन अपराधों को लेकर लंबे समय से सुर्ख़ियों में बना है। जिले में शिकारियों की बढ़ती सक्रियता यहां के जंगलों में विचरण करने वाले वन्य जीवों के लिए बेहद गंभीर खतरा बन चुकी है। शिकार की घटनाओं की रोकथाम को लेकर जंगल से सटे खेतों की बारी-बागड़ की सघन जांच कराने, सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर विशेष सतर्कता बरतने संबंधी वन विभाग के अफसरों के दावों के बीच मंगलवार 23 मार्च की सुबह एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है।
पन्ना जिले ग्राम चौपरा में एक खेत की बारी में लगाए गए फंदे में फंसने के कारण बेवश और लाचार सा पड़ा नर तेंदुआ।
पन्ना के दक्षिण वन मण्डल की दूरस्थ रेन्ज शाहनगर के ग्राम चौपरा में एक व्यस्क नर तेंदुआ क्लिच वायर के फंदे में फंसा मिला। वन्य जीव का शिकार करने के इरादे से खेत की बारी में लगाए गए फंदे में तेंदुए के फंसने की खबर आते ही सुबह-सुबह हड़कंप मच गया। शाहनगर के वन अमले की तत्परता एवं पन्ना टाइगर रिजर्व की रेस्क्यू टीम ने करीब 3 घण्टे की कड़ी मशक्कत कर संकटग्रस्त तेंदुए को सफलतापूर्वक रेस्क्यू करके आखिरकार उसकी जान बचा ली। तेंदुए को फंदे से आजाद कर प्राथमिक उपचार के बाद देर शाम समीपी जंगल में स्वछंद विचरण करने छोड़ दिया गया। इस मामले में खेत मालिक अशोक राठौर निवासी ग्राम चौपरा के खिलाफ वन अपराध पंजीबद्ध किया गया है। अशोक पर शिकार करने की नियत से अपने खेत की बारी में फंदा लगाने का आरोप है।
पन्ना जिले के दक्षिण वन मंडल अंतर्गत शाहनगर वन परिक्षेत्र के ग्राम चौपरा में तेंदुए के रेस्क्यू ऑपरेशन को देखते हुए स्थानीय लोग।
चौपरा ग्राम के कुछ लोगों ने सुबह-सुबह फंदे में फंसे एक तेंदुए को छटपटाते और चींखते-चिल्लाते हुए देखा तो तुरंत इसकी सूचना आनन-फानन में परिक्षेत्र अधिकारी शाहनगर आनंद शिवहरे को दी। मामले की गंभीरता को देखते रेंजर श्री शिवहरे दल-बल के साथ तुरंत मौके पर पहुंच गए। उनके द्वारा पन्ना में बैठे वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों को घटना की जानकारी दी गई और रेस्क्यू ऑपरेशन की आवश्यकता के मद्देनजर पन्ना टाइगर रिजर्व की रेस्क्यू टीम को मौके पर बुलाया गया।
दोपहर करीब 11 चौपरा पहुंची रेस्क्यू टीम के प्रमुख वन्यप्राणी चिकित्सक डॉ. संजीव कुमार गुप्ता के द्वारा अत्यंत ही सावधानी पूर्वक व्यस्क नर तेंदुए को ट्रैंकुलाइज किया गया। तेंदुए के बेहोश होने पर बड़ी ही सतर्कता के साथ उसके शरीर के पिछले हिस्से में कसे फंदे को काटकर उसका प्राथमिक उपचार किया। तत्पश्चात दक्षिण वन की डीएफओ मीना कुमारी मिश्रा के निर्देश पर तेंदुए को रेस्क्यू वाहन के पिंजरे में कैद कर उसे नजदीकी मरहा के जंगल स्वछंद विचरण हेतु छोड़ा गया। तब कहीं जाकर दक्षिण वन मंडल के अधिकारियों एवं मैदानी अमले ने राहत की सांस ली।

पांच घण्टे बाद पिंजड़े से बाहर निकला तेंदुआ

पन्ना टाइगर रिजर्व की रेस्क्यू टीम के द्वारा ट्रैंकुलाइज किए जाने के बाद अचेत अवस्था में पड़ा नर तेंदुआ।
खेत की बारी में शिकार की मंशा से लगाए गए फंदे में दरम्यानी रात से फंसा तेंदुआ खुद से आजाद होने की छटपटाहट में थक-हार कर वहीं पड़ा था। इस जद्दोजहद में उसके शरीर के पिछले हिस्से में क्लिच वायर का फंदा अत्याधिक तेजी से कसने के कारण उसका हिलना-डुलना मुशिकल हो गया। दोपहर में करीब 2 बजे उसे सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर जब मरहा के जंगल में छोड़ने के लिए ले जाया गया तो वह पिंजड़े से 5 घण्टे तक बाहर ही नहीं निकला। जिससे मौके पर मौजूद रेस्क्यू टीम के सदस्य एवं दक्षिण वन मंडल पन्ना के अधिकारी-कर्मचारी चिंतित और परेशान नजर आए। तेंदुए को बाहर निकालने के लिए वाहनों के हार्न बजाए गए एवं अन्य दूसरे तरीके से थोड़ा शोर मचाया गया। फलस्वरूप तेंदुआ दो बार पिंजड़े से बाहर तो निकला लेकिन वापिस फिर से पिंजड़े में ही चला गया। शाम करीब 7 बजे थोड़ा अँधेरा होने के बाद तेंदुआ को जब माहौल सुरक्षित और अनुकूल लगा तब वह पिंजड़े से बाहर आया और फिर जंगल की तरफ चला गया। इस तरह तेंदुए ने पिंजड़े से बाहर निकलने के लिए लगभग 5 घण्टे तक इंतजार कराया।

फिर सामने आया गैर जिम्मेदाराना रवैया

मंगलवार 23 मार्च की सुबह शाहनगर बीट अंतर्गत ग्राम चौपरा के वन कक्ष क्रमांक पी-988 में एक तेंदुए के फंदे में फंसे होने की खबर फैलते ही दक्षिण वन मण्डल के अधिकारियों के द्वारा अपनी फितरत के अनुसार घटना की वास्तविकता को छिपाते हुए गांव (आबादी क्षेत्र) में तेंदुआ के घुसने की बात कही जाती रही। लेकिन स्थानीय लोग फंदे में फंसे तेंदुए का फोटो और वीडियो बनाकर पहले ही वायरल कर चुके थे,जिससे क्षेत्र में शिकारियों की सक्रियता छिपाने का कथित प्रयास विफल हो गया। मालूम हो कि, दक्षिण वन मंडल अंतर्गत पिछले तीन साल में करीब एक दर्जन तेंदुओं का शिकार अथवा संदेहास्पद परिस्थितियों में मौत होने के मामले सामने आए हैं।
वन मण्डलाधिकारी दक्षिण वन मण्डल पन्ना का कार्यालय। (फोटो)
शिकार की बढ़ती घटनाओं की रोकथाम में असफल रहने एवं अपनी अक्षम्य लापरवाही पर पर्दा डालने के लिए जिम्मेदारों के द्वारा पूर्व में भी शिकार की घटनाओं को छिपाने के लिए तमाम कोशिशें की जाती रहीं हैं। किसी मामले के सामने आने के बाद मीडिया कर्मियों के फोन रिसीव न करना अथवा वन मण्डल के अधिकारियों के मोबाइल फोन बंद हो जाना अब आम बात हो चुकी है। दक्षिण वन मण्डल पन्ना के अफसरों का यह रवैया मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के “कथित सुशासन के ढोल की पोल” खोलने वाला है। दरअसल दर्जन भर तेंदुओं की मौत के बाद भी सरकार में बैठे लोगों एवं वन मुख्यालय भोपाल के अफसरों की उदासीनता के चलते पन्ना में उनके मातहत जबावदेही के आभाव में पूरी तरह गैर जिम्मेदाराना तरीके से बर्ताव कर रहे हैं। चौपरा की घटना में एक बार फिर इनका यही रवैया सामने आया है।

अच्छी खबर :  इन 18 मजरे-टोलों को राजस्व ग्राम घोषित करने की अधिसूचना जारी

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पन्ना का नवीन संयुक्त कलेक्ट्रेट भवन। (फाइल फोटो)

* मंत्री बृजेन्द्र प्रताप की पहल से शुरू हुई कार्रवाई

पन्ना। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के खनिज साधन एवं श्रम विभाग मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह के प्रयासों से पन्ना विधानसभा क्षेत्र के अजयगढ़ जनपद अन्तर्गत 18 मजरे टोलों को राजस्व ग्राम घोषित करने की अधिसूचना जारी कर दी गयी है। मंत्री श्री सिंह ने अजयगढ़ जनपद क्षेत्र के भ्रमण के दौरान पाया कि इस क्षेत्र में 18 मजरे टोले ऐसे हैं जिन्हें अभी तक राजस्व ग्राम घोषित नहीं किया गया। जिसके कारण इन ग्रामों में शासन की योजनाओं का लाभ नही मिल रहा है। यहां के निवासियों को शासन से ग्रामीण अंचलों के लिए दी जा रही सुविधाएं और विकास के कार्य नहीं हुए हैं। विकास कार्यो के लिए इन क्षेत्रों के लोगों द्वारा मंत्री श्री सिंह से मांग की गयी। उन्होंने इन मजरे टोलों लोगों को आश्वासन दिया कि शीघ्र ही इन मजरे टोलों को राजस्व ग्राम घोषित कराया जाएगा।
मंत्री श्री सिंह द्वारा इन मजरे टोलों को राजस्व ग्राम घोषित करने के लिए निरंतर प्रयास किए गए। इस संबंध में उन्होंने कलेक्टर संजय कुमार मिश्र को निर्देश दिए कि इन मजरे टोलों को राजस्व ग्राम घोषित करने की कार्यवाही प्रारंभ की जाए। जिससे इन मजरे टोलों का विकास हो सके। इन्हें शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त हो सके। इन मजरे टोलों में बगहा, मेंहदीपुरवा, दलपतपुरा, मोहनपुरा, टिकुरी, पुखरा, देवपुर, ममनीपुरवा, सुहावा, बड़ी बनकी, रमजूपुर, अमलिहा, पैकनपुर, लामी, गुलाबीपुर, पंचमपुर, दुर्गापुर एवं छनिहापुरवा शामिल हैं। इनके राजस्व ग्राम घोषित होते ही विकास कार्यो के साथ साथ जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लोगों को मिलना प्रारंभ हो जाएगा।

रिश्वत लेने के मामले में रेंजर को 4 वर्ष का सश्रम कारावास

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जिला एवं सत्र न्यायालय पन्ना। (फाइल फोटो)

*  विशेष न्‍यायाधीश, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम पन्ना ने सुनाया फैसला

*  जप्त ट्रेक्टर को छोड़ने एवं वन अपराध दर्ज न करने के एवज में ली थी रिश्वत

पन्ना। (www.radarnews.in) एक किसान के जप्त ट्रेक्टर को छोड़ने और वन अपराध दर्ज न करने के एवज में उससे रिश्वत लेने के मामले में अभियुक्त रेंजर संतोष मर्सकोले को विशेष न्‍यायाधीश पन्ना अनुराग द्विवेदी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी मानते हुए चार वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 10 हजार रूपए के अर्थदण्ड से भी दण्डित किया है।
प्रकरण के संबंध में सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी पन्ना ऋषिकांत द्विवेदी ने जानकारी देते हुए बताया कि दिनांक 5 जुलाई 2016 को जीतेन्‍द्र गिरि गोस्‍वामी 28 साल निवासी ग्राम भडार,जिला-पन्‍ना ने रिश्‍वत मांग संबधी एक शिकायती-पत्र पुलिस अधीक्षक लोकायुक्‍त सागर को दिया था। जिसमें बताया था कि वह ग्राम-मेहगुवा (खुर्द) निवासी मुन्‍नी आदिवासी का खेत ठेके पर लिये था जो कि कचनारी हार में स्थि‍त है। दिनांक 01 जुलाई 2016 को ट्रेक्टर से खेत की जुताई करने के बाद बारिश होने पर ड्राइवर ट्रेक्टर को लेकर वापिस घर आ गया। तभी पीछे से तत्कालीन अमानगंज रेंजर संतोष मर्सकोले स्टॉफ के साथ आए और वन भूमि पर अतिक्रमण करने का आरोप लगाते हुए बोले अपना ट्रेक्‍टर लेकर रेंज आफिस चलो।
अपनी शिकायत में जीतेन्द्र गिरी ने बताया कि उक्‍त ट्रेक्‍टर को छोड़ने एवं केश न बनाने के एवज में रेंजर 20 हजार रूपये के अनुचित मांग कर रहे है।मैं उन्हें रिश्‍वत के 20 हजार रूपये नहीं देना चाहता बल्कि उन्‍हें रिश्‍वत लेते रंगे हाथों पकड़वाना चाहता हूँ। रिश्वत की मांग संबंधी बातचीत रिकार्ड कर शिकायत का सत्यापन करने के बाद लोकायुक्त पुलिस के द्वारा ट्रेप कार्रवाई की योजना तैयार की गई। दिनांक 7 जुलाई 2016 फरियादी जीतेन्‍द्र गिरि गोस्‍वामी ने रेंजर संतोष मर्सकोले के शासकीय आवास पहुंचकर रिश्‍वत के रूप में जैसे ही 2500 रूपये दिए और पूर्व निर्धारित इशारा किया तभी लोकायुक्‍त पुलिस द्वारा मौके पर पहुंचकर ट्रेप कार्रवाई की गई। कैमिकल युक्त रुपए जप्‍त कर आरोपी संतोष मसकोले के विरूद्ध धारा 7,13(1) डी,13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम का अपराध पंजीबद्ध कर उसे गिरफ्तार कर लिया। प्रकरण की विवेचना उपरांत अभियोग-पत्र न्‍यायालय में प्रस्‍तुत किया गया।
प्रकरण का विचारण न्‍यायालय अनुराग द्विवेदी,विशेष न्‍यायाधीश (भ्रष्‍टाचार निवारण अधिनियम) जिला पन्ना के न्यायालय में हुआ। शासन की ओर से प्रकरण की पैरवी करते हुये सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी दिनेश खरे द्वारा साक्षियों की साक्ष्‍य को सावधानीपूर्वक बिंदुवार तरीके से लेखबद्ध कराकर न्‍यायालय में आरोपी के विरूद्ध अपराध संदेह से परे प्रमाणित किया गया। आरोपी रेंजर के कृत्‍य को गंभीरतम अपराध मानते हुये न्‍यायालय से अधिकतम दंड से दंडित किये जाने का निवेदन किया।
न्‍यायालय ने अभिलेख पर आए साक्ष्‍यों, अभियोजन के तर्कों तथा न्‍यायिक-दृष्‍टांतो से सहमत होते हुए अभियुक्‍त रेंजर, संतोष मर्सकोले पिता सेवकराम मर्सकोले 32 वर्ष को रिश्वत लेने का दोषी माना है। न्यायालय ने अभियुक्त को भ्रष्‍टाचार निवारण अधिनियम के तहत की धारा 7 एवं धारा 13(1) डी, सहपठित 13(2) में. क्रमश: दोषी पाते हुये 4 वर्ष का सश्रम कारावास और 5 हजार रूपये का अर्थदण्‍ड एवं 4 वर्ष का सश्रम कारावास व 5 हजार रूपये के अर्थदण्‍ड से दण्डित किया है। अर्थदण्‍ड की राशि जमा न करने पर अभियुक्त को 01-01 वर्ष के अतिरिक्‍त सश्रम कारावास के दण्‍ड से दण्डित किया गया ।

वर्ल्ड कप शूटिंग प्रतियोगिता | मध्यप्रदेश शूटिंग अकादमी के खिलाड़ी एश्वर्य प्रताप ने देश को दिलाया रजत पदक

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आईएसएसएफ वर्ल्ड कप शूटिंग प्रतियोगिता में देश को रजत पदक दिलाने वाले मध्यप्रदेश राज्य शूटिंग अकादमी के प्रतिभावान खिलाड़ी एश्वर्य प्रताप सिंह तोमर।

*   खेल मंत्री ने एश्वर्य प्रताप को मैडल पहनाकर किया सम्मानित

भोपाल। (www.radarnews.in) दिल्ली में 18 से 29 मार्च 2021 तक आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप शूटिंग प्रतियोगिता में मध्यप्रदेश राज्य शूटिंग अकादमी के प्रतिभावान खिलाड़ी एश्वर्य प्रताप सिंह तोमर ने देश को रजत पदक दिलाया। एश्वर्य प्रताप ने यह पदक 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा में 14 अंकों के साथ अर्जित किया। एयर फोर्स के खिलाड़ी दीपक कुमार और आर्मी के पंकज कुमार टीम में शामिल थे। यूएसए के खिलाड़ी 16 अंक हासिल कर पहले स्थान पर रहे। कोरिया ने तीसरा स्थान हासिल किया।
उल्लेखनीय है कि आईएसएसएफ वर्ल्ड कप शूटिंग प्रतियोगिता में इस बार नया इवेंट जोड़ा गया है। इसके अनुसार क्वालिफिकेशन राउंड में पहले और दूसरे स्थान पर रहने वाली जो टीम पहले 16 अंक प्राप्त करेगी वह स्वर्ण पदक विजेता होगी। इसी तरह तीसरे और चौथे स्थान पर रहने वाली टीम के बीच कांस्य पदक के लिए मुकाबला होगा और जो टीम पहले 16 अंक प्राप्त करेगी उसे कांस्य पदक मिलेगा।

देश हुआ गौरवान्वित

आईएसएसएफ वर्ल्ड कप शूटिंग प्रतियोगिता में रजत पदक पर निशाना लगाने वाले प्रतिभावान खिलाड़ी एश्वर्य प्रताप सिंह तोमर प्रदेश की खेल मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया के साथ।
दिल्ली में खेली जा रही वर्ल्ड कप शूटिंग प्रतियोगिता में प्रदेश की खेल और युवा कल्याण मंत्री श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया भी शामिल हुईं। उन्होंने खिलाड़ियों का प्रतिभा प्रदर्शन देखा और उनका उत्साहवर्धन किया। मैडल सेरेमनी में उन्होंने एश्वर्य प्रताप सिंह तोमर सहित अन्य खिलाड़ियों को मैडल पहनाकर सम्मानित किया और सभी खिलाड़ियों को बधाई दी।
खेल मंत्री ने कहा कि एश्वर्य प्रताप सिंह तोमर मध्यप्रदेश की एक्सीलेंस शूटिंग अकादमी के प्रतिभावान स्टार खिलाड़ी हैं, जिन्होंने वर्ल्ड कप में रजत पदक जीतकर देश का मान बढाया है।
इस अवसर पर मध्यप्रदेश राज्य शूटिंग अकादमी की मुख्य प्रशिक्षक सुश्री सुमा शिरूर भी उपस्थित थी। प्रतियोगिता में मध्यप्रदेश राज्य शूटिंग अकादमी के तीन खिलाड़ी भागीदारी कर रहे हैं। इनमें एश्वर्य प्रताप के अलावा चिंकी यादव और सुनिधि चौहान शामिल हैं।
संचालक खेल और युवा कल्याण पवन जैन ने भी एश्वर्य प्रताप सिंह तोमर के शानदार प्रदर्शन की सराहना की है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया है कि एश्वर्य प्रताप अगले इवेंट में स्वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाएंगे।