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बिना पेनिक करें हमें कोरोना को परास्त करना है : मुख्यमंत्री शिवराज
* प्रदेश को 5 लाख टीकाकरण प्रति दिव की स्थिति में लाना है
* मुख्यमंत्री ने की कोरोना पर कलेक्टर्स-कमिश्नर्स से वीडियो कॉन्फ्रेंस
भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि कोरोना संक्रमण पुन: तेजी से फैल रहा है। इसके नियंत्रण केलिए आर्थिक गतिविधियों पर रोक नहीं लगाई जा सकती। व्यापार और रोजगार में कोरोना से बचाव की सावधानियों का कड़ाई से पालन करें, नहीं तो सरकार कड़ाई करेगी। यह प्रदेश में गुड गवर्नेंस की पुन: परीक्षा है। बिना पेनिक करें हमें कोरोना को परास्त करना है। मुख्यमंत्री श्री चौहान प्रदेश में कोरोना की स्थिति पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समस्त कमिश्नर्स-कलेक्टर्स तथा मेडिकल कॉलेज के डीन आदि से गुरुवार 18 मार्च को चर्चा कर रहे थे। इस वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी, मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस, अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य मोहम्मद सुलेमान, पुलिस महानिदेशक विवेक जौहरी सम्मिलित हुए।
रात्रि 10 बजे से प्रात: 6 बजे तक बाजार बंद रहेंगे
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने ग्वालियर, जबलपुर सहित प्रदेश के सर्वाधिक प्रभावित जिलों उज्जैन, सागर, बैतूल, बुरहानपुर, खरगोन, रतलाम और छिंदवाड़ा में भी रात्रि 10 बजे से प्रात: 06 बजे तक व्यावसायिक प्रतिष्ठान और बाजार बंद रखने के निर्देश दिए।
महाराष्ट्र से आने-जाने वाली यात्री बसों पर रोक
महाराष्ट्र में बनी कोरोना की विस्फोटक स्थिति को देखते हुए महाराष्ट्र से आने-जाने वाली यात्री बसों के आवागमन पर 20 मार्च से रोक लगाने के निर्देश भी दिए गए। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कोरोना वेक्सीन टीकाकरण में प्रदेश को 5 लाख डोज प्रति दिवस की स्थिति में लाने के लिए तत्काल आवश्यक व्यवस्थाएँ करने के निर्देश भी दिए।
कोरोना नियंत्रण के लिये हरसंभव प्रयास करें
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में कोरोना संक्रमण पुन: फैलना आरंभ हुआ है। इस पर नियंत्रण के लिए हरसंभव प्रयास अभी से आरंभ करना आवश्यक है। इसके साथ ही प्रदेश को कठिनतम परिस्थितियों से निपटने के लिए भी तैयार भी रहना होगा। बैठक में जानकारी दी गई कि पिछले सात दिनों में इंदौर में 1778, भोपाल में 1170, जबलपुर में 358, ग्वालियर में 185, उज्जैन में 187, रतलाम में 162, छिंदवाड़ा में 147, बुरहानपुर में 130, बैतूल में 110 और खरगोन में 92 कोरोना पॉजिटिव प्रकरण दर्ज किए गए हैं। ग्वालियर मेले की अवधि के संबंध में क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप निर्णय लें।
जनप्रतिनिधियों, समाज-सेवियों का सहयोग लें
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना से बचाव के लिए आवश्यक सावधानियों के लिए अभियान में जनप्रतिनिधियों, समाज-सेवियों और धर्म गुरूओं का सहयोग लें। साथ ही जन-जन को मास्क का उपयोग करने, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने और टीकाकरण के लिए प्रेरित करें। कोरोना के कारण हमें होली सावधानी से निकालनी होगी। होली के जुलूसों, गेर और मेलों आदि का आयोजन नहीं हो सकेगा। सामाजिक और बड़े आयोजनों में भी सतर्कता बरतना होगी।
श्रमिकों के लिए रोजगार की व्यवस्था करें
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि होली त्यौहार में बड़ी संख्या में श्रमिक साथी अपने पैतृक ग्रामों और नगरों में लौटेंगे। उन्होंने मनरेगा तथा अन्य योजनाओं में पर्याप्त रोजगार देने की व्यवस्था करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि ग्रामों में पर्याप्त रोजगार के अवसर सृजित किए जाएँ ताकि श्रमिक भाई संक्रमण प्रभावित शहरों की ओर जाने के लिए मजबूर न हों।
इलाज की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित की जाए
मुख्यमंत्री शिवराज ने कहा कि कोरोना से प्रभावित व्यक्तियों के इलाज की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। होम आइसोलेशन में टेली कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा उनको पर्याप्त इलाज, सुझाव देने और सतर्क निगरानी की व्यवस्था हो। इसके साथ ही छोटे घरों में जहाँ आइसोलेशन संभव नहीं हैं, वहाँ शासकीय अस्पतालों में पृथक वार्ड बनाकर आइसोलेशन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। निजी अस्पतालों की क्षमताओं का उपयोग करते हुए उन्हें एप पर जोड़कर वहाँ आ रहे मरीजों की जानकारी और उनकी स्थिति से भी जिला प्रशासन लगातार अवगत रहे। निजी अस्पतालों के लिए जारी गाइडलाइन का सख्ती से पालन किया जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी निजी अस्पताल मरीजों से मनमानी वसूली न करें।
कलेक्टर जबलपुर का हाल जाना मुख्यमंत्री ने
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, रतलाम, छिंदवाड़ा, बुरहानपुर, बैतूल, खरगोन, खण्डवा और सागर के कलेक्टर्स से बात कर कोरोना संक्रमण की स्थिति और उसके नियंत्रण के लिए किए जा रहे उपायों की जानकारी ली। जबलपुर कलेक्टर श्री कर्मवीर शर्मा स्वयं कोरोना पॉजिटिव हैं, फिर भी वे कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में सम्मिलित हुए। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने उनके स्वास्थ्य की जानकारी लेते हुए उन्हें पर्याप्त सावधानी बरतने का सुझाव दिया।
भोपाल में तीन दिन में हुए 5 हजार चालान
भोपाल कलेक्टर ने बताया कि 42 फीवर क्लीनिक संचालित किए जा रहे हैं। मास्क लगाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। पिछले 3 दिन में 5 हजार चालानी कार्यवाहियाँ की गई हैं। रात्रि कर्फ्यू का कड़ाई से पालन किया जा रहा है।
ख़बर का असर : टेण्डर फिक्सिंग का बिगड़ा खेल, पूरक पोषण आहार ठेका की बढ़ानी पड़ी डेट
* महिला एवं बाल विकास विभाग पन्ना ने जारी की संशोधित विज्ञप्ति
* महिला स्व सहायता समूह अब 22 मार्च तक प्रस्ताव क्रय एवं जमा कर सकेंगे
* “रडार न्यूज़” ने सर्वप्रथम खबर प्रकाशित कर प्रमुखता से उठाया था मामला
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) जिले के समस्त नगरीय निकाय क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले आंगनवाड़ी केन्द्रों में पूरक पोषण आहार प्रदाय करने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग के द्वारा महिला स्व सहायता समूहों से ऑफ लाइन प्रस्ताव (निविदा) आमंत्रित करने में टेण्डर फिक्सिंग की कवायद का “रडार न्यूज़” के द्वारा भंडाफोड़ करने के बाद आखिरकार जिला स्तरीय समिति ने प्रस्ताव आमंत्रण की तिथि को संशोधित करते हुए इसे 22 मार्च 2021 तक बढ़ा दिया है।
इस संबंध में सोमवार 15 मार्च को ही जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग पन्ना ने संशोधित विज्ञप्ति (आम सूचना) जारी कर दी है। इसके अनुसार महिला स्व सहायता समूह अब संशोधित तिथि 22 मार्च तक प्रस्ताव प्रपत्र (निविदा फार्म) क्रय एवं जमा कर सकेंगे। पूरक पोषण आहार (रेडी-टू-ईट-फ़ूड) प्रदाय करने में अभिरुचि की अभिव्यक्ति हेतु आमंत्रित प्रस्ताव की तिथि संशोधित कर 15 से बढ़ाकर 22 मार्च किए जाने के फैसले का जिले के स्व सहायता समूहों ने स्वागत किया है। तिथि में वृद्धि होने से समूहों को अपने प्रस्ताव प्रस्तुत करने अर्थात इस प्रक्रिया में सम्मलित होने के लिए जरुरी शर्तों को पूरा करने के लिए अब जाकर पर्याप्त समय मिला है।

दरअसल, पूर्व में जो समयावधि निर्धारित की गई थी वह अवकाश के चलते इस कार्रवाई को पूर्ण करने के लिए बहुत कम थी। इसलिए सप्ताह भर से भी कम समय में समूहों से अभिरुचि की अभिव्यक्ति के तहत प्रस्ताव मांगे जाने के फैसले की कड़ी आलोचना होने लगी। इसे एक तरह से बगैर किसी विशेष परिस्थितियों के शार्ट नोटिस पर टेण्डर कॉल करने की प्रक्रिया बताया गया। नतीजतन, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग की मंशा पर गंभीर सवाल उठने एवं विभाग की सुगबुगाहट के जरिए अंदरखाने की योजना का असल खेल उजागर होने के बाद न सिर्फ तारीख़ बदली(संशोधित) गई बल्कि “ठाकुर साहब“ (जिला कार्यक्रम अधिकारी) के सुर भी अचानक बदल गए।
जिससे यह उम्मीद की जा रही है समाज के संवेदनशील वर्ग से जुड़े पूरक पोषण आहार (रेडी-टू-ईट-फ़ूड) प्रदाय करने के लिए समूहों के चयन की इस प्रक्रिया के प्रथम चरण में कड़ा कॉम्पटिशन होने पर सुपात्र समूह चयनित हो सकेंगे।
8 दिन की समयसीमा में 3 दिन रहा अवकाश
जिले के समस्त नगरीय निकाय क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले 144 आंगनवाड़ी केन्द्रों में दर्ज 3-6 वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती/धात्री माताओं एवं किशोरी बालिकाओं को ताजा पका हुआ पूरक पोषण आहार (भोजन) प्रदाय करने के लिए जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग पन्ना के द्वारा महिला स्व सहायता समूहों से ऑफ लाइन प्रस्ताव आमंत्रित करने के लिए जन सम्पर्क संचालनालय भोपाल के माध्यम से समाचार पत्रों में विज्ञप्ति प्रकाशित कराई गई।

पन्ना जिले से प्रकाशित बताए जा रहे एक हिंदी दैनिक में छपी विज्ञप्ति के प्रारूप में क्रमांक के दाहिनी तरफ दिनांक 01 मार्च 2021 दर्ज है। जबकि इसका प्रकाशन समाचार पत्र में दिनांक 8 मार्च को हुआ। विज्ञप्ति में दिनांक 8 से लेकर 15 मार्च तक कार्यालयीन समय प्रातः 10:30 से सायं 5 बजे तक प्रस्ताव आमंत्रित किए गए थे। विज्ञप्ति में उल्लेख था कि निर्धारित प्रारूप (आवदेन फार्म) एवं शर्तें दिनांक 14 मार्च 2021 तक कार्यालयीन समय में निर्धारित मूल्य 100/- (एक सौ रुपए मात्र) के चालान की मूल प्रति जमाकर कार्यालय से प्राप्त की जा सकती है। अर्थात प्रस्ताव आमंत्रण हेतु निर्धारित फार्मेट (प्रारूप) एवं इससे संबंधित शर्तें सिर्फ 14 मार्च तक ही मिलेंगी जबकि फार्म (प्रस्ताव) जमा 15 मार्च तक होंगे।
यहां गौर करने वाली बात यह है कि, पूर्व में प्रकाशित विज्ञप्ति अनुसार 8 मार्च से 14 मार्च तक 7 दिनों का समय फार्म खरीदी एवं शर्तों की जानकारी हेतु निर्धारित किया गया। लेकिन इस बीच तीन दिन अवकाश रहा। बताते चलें कि 11 मार्च को महाशिवरात्रि, 13 को महीने का दूसरा शनिवार एवं 14 को रविवारीय अवकाश रहा। इन तिथियों में बैंक बंद रहने कारण महिला समूहों को प्रारूप (फ़ार्म) खरीदी हेतु चालान एवं धरोहर राशि का एफडीआर/डीडी बनवाने के लिए सिर्फ चार कार्य दिवस का ही समय मिला। क्योंकि 15 मार्च से बैंकों की दो दिवसीय हड़ताल प्रस्तावित रही।
पहले सच्चाई को नकारा बाद में स्वीकारा

प्रस्ताव आमंत्रण को लेकर इतना कम समय निर्धारित करने अथवा शार्ट नोटिस पर प्रस्ताव बुलाने को लेकर “रडार न्यूज़“ के द्वारा रविवार 14 मार्च को जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग पन्ना ऊदल सिंह ठाकुर से सवाल पूंछा गया तो उन्होंने बेहद ही गैर जिम्मेदाराना तरीके से जवाब देते हुए बताया था कि समय जरा भी कम नहीं है। उनका कहना था कि हमने 7-8 दिन का पर्याप्त समय दिया है। साहब को याद दिलाया कि इस अवधि में 3 दिन तो शासकीय ही अवकाश रहा। इस पर ठाकुर साहब ने तथ्यों को नजरअंदाज कर कुतर्क के जरिए अपनी बात को सही साबित करते हुए कहा था अवकाश के दिनों में भी हमने अपना कार्यालय खोलकर फ़ार्म बिक्री एवं जमा करने का कार्य किया है। लेकिन प्रकाशित विज्ञप्ति में इसका कहीं उल्लेख नहीं किया गया था कि उपरोक्त अवधि में अवकाश के दिनों में कार्यालय खुलेगा और समूह को प्रस्ताव बिक्री करने एवं जमा करने का काम किया जाएगा।
बहरहाल, अधिकांश समूहों को तो प्रस्ताव आमंत्रण की विज्ञप्ति जारी होने की ख़बर ही काफी देर से लगी और फिर अवकाश के चलते बैंक चालान, एफडीआर/डीडी न बनवा पाने के कारण वे इस निविदा प्रक्रिया शामिल नहीं हो सके।
रडार न्यूज़ के द्वारा इस संबंध में 15 मार्च की सुबह खबर प्रकाशित करने के बाद शाम को जब तिथि संशोधित की गई तो जिला कार्यक्रम अधिकारी से पुनः चर्चा कर फैसले में बदलाव का कारण पूंछा गया। इस पर उन्होंने जवाब देते हुए बताया कि सोमवार 15 मार्च तक की स्थिति में कुल 30 प्रस्ताव समूहों के द्वारा क्रय किए गए थे। जिसमें मात्र 3 प्रस्ताव ही पूर्व निर्धारित अंतिम तिथि तक जमा हुए, शेष 26 समूहों के प्रस्ताव धरोहर राशि की बैंक एफडीआर/डीडी अवकाश एवं बैंक की हड़ताल के चलते नहीं बन सके। इस कारण उक्त प्रस्ताव जमा नहीं हुए। उल्लेखनीय है कि इस बार एक समूह को सिर्फ 10 आंगनवाड़ी केन्द्र का ठेका मिलना है। किसी भी समूह को इस प्रक्रिया में शामिल होने के लिए दो बार बैंक जाकर औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती है। पहली बार प्रस्ताव प्रपत्र एवं शर्तों के दस्तावेज क्रय करने के लिए चालान बनवाने और फिर भरे हुए प्रपत्र को जमा करने निर्धारित धरोहर राशि का बैंक एफडीआर/डीडी बनवाने के लिए।
विभाग में पक रही थी टेण्डर फिक्सिंग की खिचड़ी ?

महिला एवं बाल विकास विभाग पन्ना के अंदरखाने इसे मामले को लेकर चर्चा रही है कि पूरक पोषण आहार के ठेके में इस बार सत्ताधारी दल के नेताओं से प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से जुड़े समूहों को आसानी से दिलाने की सोची-समझी योजना के तहत जानबूझकर प्रस्ताव आमंत्रण के लिए अल्प समयावधि तय की गई। ठेके में होने वाला खेल इसकी विज्ञप्ति सूचना प्रकाशन के प्रारूप की अघोषित/अस्पष्ट जानकारी एवं टाइमिंग को हथियार बनाकर ही खेला जाना था। लेकिन तथ्यपरक खबर के प्रकाशित होने से वास्तविक स्थिति सामने आने एवं तीन मात्र प्रस्ताव जमा होने से प्रक्रिया पूर्ण न होने के कारण आखिरकार तिथि को संशोधित कर बढ़ाना पड़ा है। जिससे फ़िलहाल टेण्डर फिक्सिंग के इस खेल पर पानी फिर गया है। जिला स्तरीय समिति के द्वारा संशोधित की गई तिथि अनुसार अब 22 मार्च 2021 तक कार्यालयीन समय पर प्रस्ताव क्रय एवं जमा किए जा सकते हैं। पूर्व में इस प्रक्रिया में शामिल होने से वंचित रहे स्व सहायता समूहों को तिथि संशोधित होने से इसमें भाग लेने एक ओर मौका मिल गया है।
पूरक पोषण आहार ठेका : आंगनवाड़ी के बच्चों के निवाले पर नेताओं की नजर, चहेतों को उपकृत करने महिला एवं बाल विकास विभाग ने किया बड़ा खेल !
* स्व सहायता समूहों से प्रस्ताव आमंत्रित करने सिर्फ 8 दिन समय दिया
* उसमें भी 3 दिन अवकाश रहने से बैंक चालान बनवाकर फार्म नहीं खरीद पाए कई समूह
* विज्ञप्ति सूचना की जानकारी देर से मिलने के कारण प्रस्ताव प्रस्तुत करने से हुए वंचित
* फार्म जमा करने का आज अंतिम दिन, फ़ार्म बिक्री की समयसीमा एक दिन पूर्व हो चुकी है समाप्त
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) महिला एवं बाल विकास विभाग में व्याप्त अंधेरगर्दी एवं कमीशनखोरी के चलते पन्ना जिले में योजनाओं का क्रियान्वयन शासन की मंशानुरूप धरातल पर सही तरीके से नहीं हो पा रहा है। जिसका दुष्परिणाम यह है कि पन्ना के माथे लगा कुपोषण एवं मातृ-शिशु मृत्यु दर की अधिकता कलंक मिटने का नाम नहीं ले रहा है। कागजों पर कुपोषण मिटाकर योजनाओं के बजट को पलीता लगाने में जुटे इस महकमे के अफसरों के धतकर्मों की फेहरिस्त यूँ तो काफी लंबी है लेकिन इनका एक बेहद चौंकाने वाला कारनामा प्रकाश में आया है।
मामला पूरक पोषण आहार को शहरी क्षेत्रों में ठेके पर देने से जुड़ा है। जिले के समस्त नगरीय निकाय क्षेत्रों के 144 आंगनवाड़ी केन्द्रों में दर्ज 3-6 वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती/धात्री माताओं एवं किशोरी बालिकाओं को ताजा पका हुआ पूरक पोषण आहार (भोजन) प्रदाय करने के लिए महिला स्व सहायता समूहों से ऑफ लाइन प्रस्ताव आमंत्रित किये गए हैं। समूहों से प्रस्ताव आमंत्रण (ठेका) को लेकर जारी की गई विज्ञप्ति सूचना में कई पेंच हैं। जिसे लेकर विभाग के अंदर-बाहर हलचल तेज हो गई है।
आम चर्चा है कि पूरक पोषण आहार के ठेके में होने वाला खेल इसकी विज्ञप्ति सूचना प्रकाशन के प्रारूप की अघोषित/अस्पष्ट जानकारी एवं टाइमिंग को हथियार बनाकर खेला जाना है। चतुर-चालाक अफसरों ने राजनैतिक संरक्षण प्राप्त करने के लिए कथित तौर पर सत्ताधारी दल के नेताओं को पूरक पोषण आहार का ठेका देने का मन बना लिया है। विभाग के अंदरखाने से छन-छनकर बाहर आ रहीं सूचनाओं पर भरोसा करें तो इस कवायद के पीछे अफसरों की मंशा नेताओं के साथ सांठगांठ कर बच्चों के पोषण आहार को डकार कर अपने सुपोषण के स्तर को बढ़ाना है। अगर कभी-कभार शिकवा-शिकायत हुई तो सत्तपक्ष के नेताओं के प्रभाव की मदद से उसे निपटाया जाएगा।
जानिए विज्ञप्ति में क्या है झोल

पन्ना जिले से प्रकाशित बताए जा रहे एक हिंदी दैनिक में जनसम्पर्क संचालनालय भोपाल के माध्यम से जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग पन्ना के द्वारा पूरक पोषण आहार प्रदाय करने हेतु महिला स्व सहायता समूहों के प्रस्ताव आमंत्रण सूचना की विज्ञप्ति प्रकाशित कराई गई। विज्ञप्ति के प्रारूप में क्रमांक के दाहिनी तरफ दिनांक 01 मार्च 2021 दर्ज है। जबकि इसका प्रकाशन समाचार पत्र में दिनांक 8 मार्च को हुआ। विज्ञप्ति में दिनांक 8 से लेकर 15 मार्च तक कार्यालयीन समय प्रातः 10:30 से सायं 5 बजे तक प्रस्ताव आमंत्रित किए गए। विज्ञप्ति में उल्लेख है कि निर्धारित प्रारूप (आवदेन फार्म) एवं शर्तें दिनांक 14 मार्च 2021 तक कार्यालयीन समय में निर्धारित मूल्य 100/- (एक सौ रुपए मात्र) के चालान की मूल प्रति जमाकर कार्यालय से प्राप्त की जा सकती है। अर्थात प्रस्ताव आमंत्रण हेतु निर्धारित फार्मेट (प्रारूप) एवं इससे संबंधित शर्तें सिर्फ 14 मार्च तक ही मिलेंगी जबकि फार्म (प्रस्ताव) जमा 15 मार्च तक होंगे।
यहां गौर करने वाली बात यह है कि, 8 मार्च से 14 मार्च तक 7 दिनों का समय फार्म खरीदी एवं शर्तों की जानकारी हेतु निर्धारित किया गया। लेकिन इस बीच तीन दिन अवकाश रहा। बताते चलें कि 11 मार्च को महाशिवरात्रि, 13 को महीने का दूसरा शनिवार एवं 14 को रविवारीय अवकाश रहा। इन तिथियों में बैंक बंद रहने कारण महिला समूहों को प्रारूप (फ़ार्म) खरीदी हेतु चालान बनवाने के लिए सिर्फ चार कार्य दिवस का ही समय मिला।
छुट्टी के दिन कार्यालय खोलकर बेंचे और जमा किये फार्म
प्रस्ताव आमंत्रण को लेकर इतना कम निर्धारित करने अथवा शार्ट नोटिस पर प्रस्ताव बुलाने को लेकर जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग पन्ना ऊदल सिंह ठाकुर से सवाल पूंछा गया तो उन्होंने अपनी रौ में बताया कि 7-8 दिन का पर्याप्त समय दिया गया। समय जरा भी कम नहीं रहा। साहब को याद दिलाया कि इस अवधि में 3 दिन तो शासकीय अवकाश रहा। थोड़ा विचार करने के उपरांत ठाकुर साहब बोले अवकाश रहा तो क्या हुआ हमारा कार्यालय तो बंद नहीं रहा। अवकाश के दिनों में भी हमने फ़ार्म बिक्री एवं जमा करने का कार्य किया है। आमतौर पर सरकारी अवकाश के दिनों में न तो कार्यालय खुलते हैं और न ही कोई सामान्य कार्य होता है। इसलिए अवकाश के दिन आमजन सरकारी कार्यालय में नहीं जाते।
महिला बाल विकास विभाग को अगर शासकीय अवकाश के दिनों में भी कार्यालय खोलकर सेवाएं प्रदान करनी थीं तो इसकी जानकारी आम-ख़ास को उसी विज्ञप्ति में दी जानी चाहिए थी। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इस संबंध में सवाल करने पर जिला कार्यक्रम अधिकारी खांटी बाबू स्टाइल में विज्ञापन की भाषा का लेकुना समझाते हुए बोले- उसमें कार्यालयीन समय (शब्द) का उल्लेख किया गया है, शासकीय कार्य दिवस का कहीं जिक्र नहीं है इसलिए अवकाश के दिनों में भी कार्यालयीन समय पर प्रस्ताव जमा किए और निर्धारित प्रारूप (आवेदन पत्र) की बिक्री भी की गई है।
क्या यह नई तरह की टेण्डर फिक्सिंग है ?
























