* प्रत्येक दो वर्ष में गर्मी के समय एक बार खेत की गहरी जुताई अवश्य करायें
पन्ना। (www.radarnews.in) गर्मी के मौसम यानी ग्रीष्मकाल में खेत की गहरी जुताई कराना अत्यंत ही लाभदायक है। किसानों भाईयों को इससे अनेक फायदे होते हैं। विशेषज्ञों की मानें तो गर्मी के मौसम में गहरी जुताई कराने से जहां फसलों में रोग एवं कीट-व्याधि का प्रकोप कम होता है वहीं मिट्टी की जलधारण क्षमता बढ़ती है। इसका प्रत्यक्ष-परोक्ष लाभ फसल की पैदावार में वृद्धि के रूप में मिलता है। कृषि विज्ञान केन्द्र पन्ना के द्वारा जिले के सभी कृषकों को सलाह दी गई है कि वे ग्रीष्मकाल में अपने खेत की गहरी जुताई अवश्य करायें। केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डाॅ. पी.एन. त्रिपाठी ने बताया कि ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई के अनेक लाभ है। इससे मिट्टी की कठोर सतह टूटने से उसकी जलधारण क्षमता बढ़ती है साथ ही मिट्टी में जो रोग के रोगाणु एवं कीटव्याधि आदि रहते हैं वे सूर्य की तेज गर्मी से नष्ट हो जाते हैं। जिससे कि आगामी में फसलों में रोग एवं कीट-व्याधियों का प्रकोप कम होता है। इसके साथ ही खरपतवारों के बीज भी समाप्त हो जाते हैं। जिले के सभी कृषकों को सलाह दी जाती है कि प्रत्येक दो वर्ष में एक बार खेत की गहरी जुताई अवश्य करायें।
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नगर पालिका परिषद पार्क को बंद रखकर लोगों को आखिर इससे दूर रखना क्यों चाहती है ! इस सवाल का जबाव नगर पालिका के नुमाइंदे ही दे सकते हैं। बताते चलें, बेनीसागर मोहल्ला सहित आसपास रहने वाले लोग और बच्चे पार्क के खुलने की उम्मीद में चले आते हैं लेकिन गेट पर लटका ताला देखकर उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है। पार्क में तैनात कर्मचारी आसपास स्थित दुकानों में बैठे चुपचाप यह नजारा देखते रहते है। लोग बताते हैं कि पार्क का ताला कर्मचारी की इच्छा पर ही खुलता है लेकिन कर्मचारी कि इच्छा कब होगी यह किसी को पता नहीं है।



मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की यह निजी यात्रा बताई जा रही है। दो दिन की अपनी इस यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री का आज परिवार के साथ पन्ना टाइगर रिजर्व के भ्रमण का कार्यक्रम रहा। यह महज संयोग ही है कि, मुख्यमंत्री का पार्क भ्रमण ऐसे समय पर हुआ जब केन-बेतवा लिंक परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए सप्ताह भर पूर्व हुए एमओए को लेकर पन्ना के लोगों में गहरी नाराजगी व्याप्त है। सर्विदित है, केन-बेतवा लिंक परियोजना के निर्माण से पन्ना टाइगर रिजर्व का बड़ा क्षेत्र हमेशा के लिए पानी में डूब जायेगा। पर्यावरण के लिहाज से अत्यंत ही नुकसानदेह बताई जा रही इस नदी जोड़ो परियोजना के कारण बाघों के प्राकृतिक रहवास का इलाका काफी सिकुड़ जाएगा। करीब दर्जन भर गांवों के सैंकड़ों लोगों को विस्थापित होना पड़ेगा। साथ ही लाखों पेड़ इस परियोजना की बलि चढ़ जाएंगे। इतनी सब कुर्बानी देने के बाद केन-बेतवा लिंक परियोजना से पन्ना को आखिर हांसिल क्या होगा ? अपने हितों से जुड़े इस बाजिव सवाल का जबाव न मिलने से पन्ना के लोग बैचेन और नाराज़ हैं।
प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने एक अन्य ट्वीट में लोगों को होली की शुभकामनाएं दी। साथ ही कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने में अपना योगदान देने के लिए सभी से घर पर परिवार के साथ होली का त्यौहार मानाने की अपील की है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा- “रंगों का यह पर्व आपके जीवन को उल्लास, उत्साह, आनंद के नये रंगों से भर दे। सुख, समृद्धि, खुशहाली का नव सृजन हो; आप हर क्षण प्रसन्न रहें, यही कामना!“ साथ ही यह आग्रह भी कि होली का यह पर्व आप अपने घर पर परिवार के साथ मनायें और #COVID19 के संक्रमण को रोकने में योगदान दें।
पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक उत्तम कुमार शर्मा ने जानकारी देते बताया कि पन्ना में बाघों को पुनः बसाने की योजना अंतर्गत वर्ष 2014 में बाघिन टी-6 को प्रदेश के पेंच टाइगर रिजर्व से पन्ना लाया गया था। तब इसकी आयु लगभग 3 वर्ष थी। महज 7 वर्ष की अवधि में 6वीं बार माँ बनीं बाघिन टी-6 ने पन्ना को अब तक कुल 17 बाघ शावक दिए हैं। बाघों की वंशवृद्धि इसका विशेष योगदान रहा है। श्री शर्मा ने बताया कि बाघिन टी-6 और उसके शावक पूरी तरह से स्वस्थ हैं। एक सवाल के जबाव में क्षेत्र संचालक ने कहा कि पन्ना टाइगर रिजर्व में वर्तमान बाघ शावकों की संख्या 20-25 है एवं सभी आयु वर्ग के बाघों की कुल संख्या 70 से ऊपर जा चुकी है। उल्लेखनीय है कि, वर्तमान में बाघों की फेज-4 की गणना जारी है। कुछ समय बाद इसके नतीजे आने पर बाघों की वास्तविक संख्या का पता चल जाएगा।