* पारम्परिक महारास में भी देर रात शामिल हुए मुख्यमंत्री
पन्ना। (www.radarnews.in) मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज शरद पूर्णिमा के अवसर पर पन्ना में देर रात कार्यक्रम में शामिल होते हुए महारास में भागीदारी की। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आज शरद महोत्सव में पन्ना आकर इस तीर्थ स्थल के दर्शन और एक आध्यात्मिक संत के जीवन और उनके कार्यों को जानने का अवसर मिला है। यह मेरे लिये सौभाग्य का विषय है।
मुख्यमंत्री ने प्राणनाथ प्यारे की जय के उद्धघोष के साथ संबोधन प्रारंभ किया। उन्होंने कहा कि संपूर्ण दुनिया एक परिवार है। प्राणनाथ जी की हम सभी पर कृपा है। कहा भी गया है सियाराम में सब जग जानी। इस भावना के अनुसार हम सभी प्राणनाथ प्यारे के प्रिय हैं। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती साधना सिंह के अलावा खनिज मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह, सांसद व्ही.डी. शर्मा, जन-प्रतिनिधि सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
प्राणनाथ जी के आगमन से पावन हुई यह धरा
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्राणनाथ जी गुजरात से मध्यप्रदेश आए। उनके आगमन से यह धरा पावन हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि मेरी प्रार्थना है कि सर्वे भवन्तु सुखिन:, सर्वे सन्तु निरामया। सभी सुखी हों, सभी निरोग हों और सभी का कल्याण हो। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्राणनाथ जी ने महाराजा छत्रसाल का भी मार्गदर्शन किया। सत्रहवीं सदी में उन्हें पराक्रम के लिये प्रोत्साहित किया। छत्रसाल जी के लिये कहावत है- ‘‘छत्ता तेरे राज में, धक-धक धरती होय, जित-जित घोड़ा मुख करे, तित-तित फत्ते होय’’।
निजानंद संप्रदाय में प्रेम की बड़ी महिमा है
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पन्ना प्रणामी पंथ का पवित्र धाम है। यहाँ श्री गुम्बट जी मंदिर के प्रांगण को ब्रह्र चबूतरा (रास मण्डल) कहा जाता है। यहीं पर श्री प्राणनाथ जी ने परम स्नेही सुन्दरसाथ को श्री राज जी-श्यामा जी की अलौकिक अखण्ड रासलीला, जागिनी रास का दर्शन करवाया था। इसलिये इसे जागिनी लीला भी कहा जाता है। तबसे अंतर्राष्ट्रीय शरद पूर्णिमा महोत्सव प्रतिवर्ष होता है। निजानंद संप्रदाय में प्रेम की बड़ी महिमा है। यहाँ प्रेम ही सब कुछ है। शरद पूर्णिमा में श्री कृष्ण ने प्रेम को ही प्रतिष्ठा प्रदान की। पाँच दिवसीय शरद पूर्णिमा महोत्सव पूरी भक्ति, प्रेम और श्रद्धा का प्रतीक है।
छत्रसाल जयंती का आयोजन संस्कृति विभाग कराए
खनिज मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ने शरद पूर्णिमा के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री चौहान के आगमन पर प्रसन्नता व्यक्त की। मंत्री श्री सिंह ने कहा कि पहली बार कोई मुख्यमंत्री परिवार सहित इस पावन नगरी में पधारे हैं। मंत्री श्री सिंह ने कहा कि प्राणनाथ महाराज छत्रसाल के आध्यात्मिक गुरू थे। श्री सिंह ने छत्रसाल जयंती पर संस्कृति विभाग द्वारा कार्यक्रम का सुझाव भी दिया। सांसद व्ही. डी शर्मा ने कहा कि प्राणनाथ जी के मंदिर में शरद महोत्सव में हिस्सा लेना सौभाग्य का क्षण हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान के साथ पन्ना आकर स्थानीय नागरिकों को प्रत्यक्ष रूप से शरद महोत्सव की शुभकामनाएँ देने का अवसर मिला है।
कार्यक्रम के प्रारंभ में मंदिर समिति के वॉईस चेयरमेन प्रमोद शर्मा ने संबोधित करते हुुये विस्तार से अपनी बात रखी। इस अवसर पर कार्यक्रम में जिला पंचायत प्रधान रविराज सिंह, जिला भाजपा अध्यक्ष पन्ना रामबिहारी चौरसिया सहित जनप्रतिनिधिगण, अधिकारी उपस्थित रहे। इसके साथ ही प्रणामी सुन्दरसाथ बड़ी संख्या में मौजूद थे।
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पूर्व सांसद एवं पूर्व मंत्री डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया ने अपनी अनुभूति व्यक्त करते हुए कहा कि, यह पूजनीय स्थल अनेक प्रकार की सकरात्मक ऊर्जा और शांति से परिपूर्ण है। यहां आकर महसूस होता है गुरूजी का आशीर्वाद हमारे साथ है।
ज्योतिषाचार्य पंडित श्री अयोध्या प्रसाद गौतम जी के गृह ग्राम श्यामारडाड़ा में उनकी प्रतिमा की स्थापना के पूर्व भव्य कलश यात्रा निकाली गई। तत्पश्चात विधि-विधान के साथ मंत्रोच्चार के बीच गुरु जी की प्रतिमा की स्थापना की गई एवं ग्रह नक्षत्र तथा राशि प्रतिष्ठा समारोह आयोजित हुआ।
इस अवसर पर गुरूजी के ज्येष्ठ सुपुत्र डॉ. प्रकाश गौतम ने कहा कि, हमारे माता-पिता इस धरती पर साक्षात ईश्वर का रूप हैं। हम चाहे जितना भी पूजा-पाठ या धर्म-कर्म कर लें यदि हम अपने माता-पिता और बुजुर्गों का आदर-सम्मान नहीं करते तो सब व्यर्थ है। उस पूजा-पाठ या धर्म-कर्म का हमें कोई लाभ होने वाला नहीं है। आपने कहा कि हमारे माता-पिता पूज्यनीय हैं, उनका आशीर्वाद प्राप्त कर जीवन में हम सबकुछ प्राप्त कर सकते हैं। सनातन धर्म भी ऐसा ही करने की लिए प्रेरित करता है, इसलिए गुरूजी की प्रतिमा की स्थापना कराई गई है।








