* पूर्व प्रभारी मंत्री एवं आयुष विभाग के राज्यमंत्री के समक्ष प्रमुखता से उठाई गई थी मांग
* आयुष चिकित्सालय में मरीजों को भर्ती कर आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी से किया जाएगा उपचार
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) जिला मुख्यालय पन्ना को आयुष (आयुर्वेद) चिकित्सालय की बहुप्रतीक्षित सौगात मिल गई है। पन्ना में 50 बिस्तर के आयुष चिकित्सालय की स्थापना के लिए प्रशासकीय स्वीकृति का आदेश जारी किया गया है। निर्माण एजेंसी लोक निर्माण विभाग द्वारा 13 करोड़ 37 लाख 47 हजार रूपए की लागत से आयुष चिकित्सालय भवन का निर्माण कराया जाएगा। लोक निर्माण विभाग (भवन) से प्राप्त तकनीकी स्वीकृति अनुसार विभाग की आयुक्त सोनाली पोंक्षे वायंगणकर द्वारा प्रशासकीय स्वीकृति का आदेश जारी किया गया है। आयुष चिकित्सालय बनकर तैयार होने पर वहां आयुष चिकित्सकों के द्वारा मरीजों को भर्ती करके आयुष पद्धति (प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति) के तहत स्वास्थ्य सेवाएं एवं उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। विदित हो कि आयुष पद्धति में आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्धा और होम्योपैथी की स्वास्थ्य देखभाल एवं उपचार की प्रणालियाँ शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि, पन्ना जिले के पूर्व प्रभारी मंत्री एवं आयुष विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रामकिशोर नानो कांवरे के समक्ष आयुष चिकित्सालय का मुद्दा अनेकों बार प्रमुखता से उठाया गया था। जिस पर राज्यमंत्री श्री कांवरे ने जनहित से जुड़ी मांग को गंभीरता से लेते हुए तत्परता से पूरा करने का आश्वासन दिया था। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को पन्ना में 50 बिस्तर के आयुष चिकित्सालय की स्थापना संबंधी प्रस्ताव तैयार कर प्रेषित करने के भी निर्देश दिए थे। पन्ना विधायक बृजेन्द्र सिंह द्वारा विधानसभा सत्र में भी प्रश्न के माध्यम से चिकित्सालय निर्माण के संबंध में प्रशासकीय स्वीकृति की मांग रखी गई थी, जिस पर मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव ने त्वरित संज्ञान लेकर कार्यवाही की।
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कामथीन सिक्योरिटी सर्विस के शोषण का शिकार सुखवंत चौबे, उर्मिला वंशकार, मिनीबाई बाल्मीक, यूनिस खान आदि ने पत्रकारों के समक्ष अपनी आपबीती सुनाने बताया कि, उनसे और उनके साथियों से स्वास्थ्य संस्थाओं में सिर्फ 3, 4, 5 हजार रुपए से लेकर 6 हजार रुपए तक मासिक मानदेय पर कई महीनों तक कार्य कराया गया है। किसी को भी निविदा/अनुबंध शर्तों तथा श्रम विभाग के नियमों के अनुसार प्रचलित कुशल/अकुशल/अर्धकुशल श्रमिकों की निर्धारित कलेक्टर दर के अनुसार मानदेय भुगतान नहीं किया गया। साथ ही एक भी कर्मचारी को नियमनुसार ईपीएफ एवं आईएसआईसी की राशि का भी भुगतान नहीं किया। इस तरह कामथीन सिक्योरिटी सर्विस स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से ठेका कर्मचारियों का पिछले दस साल से लगातार दो तरफा बेइंतहा शोषण कर रही है। पीड़ित सुखवंत चौबे व उर्मिला वंशकार का आरोप है कि, उक्त कंपनी ने उनके कई माह के मानदेय का भुगतान न कर उन्हें काम से ही निकाल दिया था। स्वास्थ्य विभाग में शिकायत करने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं की गई। इतना ही ठेका कर्मचारियों को कभी भी हर माह की 5 तारीख को भुगतान न देकर 2-3 में मानदेय का भुगतान किया जाता है। कुल मिलाकर आधा-अधूरा मानदेय देकर और ईपीएफ एवं आईएसआईसी की राशि का भुगतान न करके कामथीन सिक्योरिटी सर्विस ने कथित तौर पर करोड़ों रुपए का घपला किया है।











