MP : अरहर के खेत में जेसीबी से खुदाई करवाकर खोज निकाले 4 वन्यजीवों के शव

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खेत में निकले वन्य जीवों के क्षत-विक्षत शवों को ट्रैक्टर-ट्रॉली में रखकर दहन के लिए उपयुक्त स्थान पर ले जाय गया।

*     पन्ना जिले के उत्तर वन मंडल अंतर्गत राजस्व क्षेत्र में सामने आई शिकार की हैरतअंगेज वारदात

*     बेजुबान वन्यजीवों का शिकार करने के बाद अरहर के खेत में दफना दिए थे शव

शादिक खान/रुपेश जैन, पन्ना। (www.radarnews.in) जिले के जंगलों से पिछले कुछ महीनों से वन्य प्राणियों के अवैध शिकार एवं अन्य वन अपराधों से जुड़ी बेहद हैरान करने वाली ख़बरें लगातार बाहर आ रही हैं। पन्ना टाइगर रिजर्व सहित जिले के उत्तर एवं दक्षिण सामान्य वन मंडल अंतर्गत वन्य जीवों के शिकार की घटनाएं अत्यंत ही चिंताजनक तेजी से बढ़ी हैं। जिले में सक्रिय शिकारी जिस तरह बेख़ौफ़ अंदाज में एक के बाद एक बेजुबान वन्यजीवों के शिकार की वारदातों को अंजाम देकर सनसनी फैला रहे उससे मैदानी वन अमले की कथित सक्रियता सवालों के घेरे में आ गई है। इस बीच उत्तर वन मंडल पन्ना की विश्रामगंज रेंज के राजस्व क्षेत्र में अवैध शिकार की एक हैरतअंगेज वारदात का खुलासा हुआ है। वन विभाग की टीम ने सिरस्वाहा ग्राम के नजदीक स्थित एक खेत में लगी अरहर की फसल के बीचोंबीच जेसीबी मशीन से जमीन की खुदाई करवाकर 4 वन्यजीवों के क्षत-विक्षत शवों को बहार निकाला गया। बेजुवान वन्य प्राणियों का शिकार करने के बाद उन्हें खेत में ही गड्ढे खोदकर दफना दिया था। इस मामले में फॉरेस्ट टीम के द्वारा खेत मालिक के भतीजे शीतल पाण्डेय पुत्र बाबूलाल पाण्डेय को हिरासत में लेकर सघन पूंछतांछ की जा रही है। समूचे इलाके में यह घटना चर्चा का विषय बनी है।
शिकार करने के बाद वन्य जीवों के शवों को खेत में क़ब्रनुमा गड्ढे में दफना दिया था।
मुखबिर के द्वारा उत्तर वन मंडल के अधिकारियों को इस आशय की सूचना दी गई थी कि, सिरस्वाहा ग्राम से करीब 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित अरहर के एक खेत में वन्य जीवों को दफनाया गया है। घटना की गंभीरता को देखते हुए 14 फरवरी की शाम वन परिक्षेत्राधिकारी विश्रामगंज नितिन राजौरिया ने दल-बल के साथ मौके पर पहुंचकर खेत का मुआयना किया और फिर संदेह के आधार पर फसल के बीचों-बीच खुदाई कराई गई। इस दौरान देर शाम गड्ढे की खुदाई में एक वन्यजीव का शव बरामद हुआ। लेकिन तब तक अंधेरा घिर आने की वजह से खुदाई कार्य को बीच में ही रोक दिया गया। अगले दिन गुरूवार 15 फरवरी को जेसीबी मशीन बुलाकर खेत में पुनः खुदाई कराई गई। इस बार तीन अलग-अलग वन्य जीवों के सड़े-गले (क्षत-विक्षत) शव मिले।
वन विभाग की टीम को अरहर के खेत में खुदाई के दौरान मिला नीलगाय का शव।
प्रथम दृष्ट्या यह माना जा रहा है कि वन्यजीवों की मौत 10-15 पूर्व हुई थी। इस मामले में फॉरेस्ट टीम के द्वारा खेत मालिक के भतीजे शीतल पाण्डेय पुत्र बाबूलाल पाण्डेय निवासी ग्राम सिरस्वाहा को हिरासत लिया है। दरअसल, शीतल पाण्डेय के द्वारा ही अपने चाचा के खेत में खेती कराई जा रही है। खेत से बरामद वन्य जीवों के शवों की संख्या आधिकारिक तौर पर पता नहीं चल सकी। क्षेत्र में व्याप्त चर्चाओं के अनुसार 3 से 4 शव मिले हैं, जो कि नीलगाय, सांभर और जंगली सूअर के बताए जा रहे हैं।
बता दें कि, जंगली जानवरों से होने वाली फसल हानि को रोकने के लिए जिले में बड़ी संख्या में किसान अपने खेत की बारी में फंदे लगाने और करंट का तार बिछाने जैसे ग़ैरकानूनी उपाए करते हैं। इनमें फंसने या मरने वाले वन्य प्राणियों के मांस को अधिकांश किसान गुपचुप तरीके से मिल बांटकर खा लेते हैं। वहीं जो किसान मांसाहारी नहीं है वे अपने अपराध को छिपाने के लिए मृत वन्य प्राणियों को या तो अपने खेत से दूर ले जाकर फेंक देते हैं या फिर गड्ढा खोदकर गाड़ देते हैं। सूत्रों से पता चला है, शीतल के खेत में मिले वन्य जीवों के शवों का पोस्टमार्टम करवाने के लिए पन्ना टाइगर रिजर्व के वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ. संजीव गुप्ता को मौके पर बुलाया गया था। लेकिन सभी शव इतने अधिक सड़-गल चुके थे कि उनका पोस्टमार्टम करना संभव नहीं था। इस स्थिति में वन्य जीवों के उपलब्ध अवशेषों के सैंपल लेने के बाद शवों का दहन कर दिया गया।

शिकार को लेकर सुर्ख़ियों में विश्रामगंज रेंज

पन्ना जिले के उत्तर वन मण्डल की विश्रामगंज रेंज वन्य प्राणियों के अवैध शिकार सहित अन्य वन अपराध मसलन, वन क्षेत्र में अवैध हीरा-पत्थर खनन, सागौन और जलाऊ लकड़ी की अवैध कटाई के लिहाज़ अत्यंत ही संवेदनशील है। पन्ना टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र से सटे होने के कारण विश्रामगंज वन परिक्षेत्र के जंगलों में अक्सर ही बाघों और तेंदुओं का मूवमेंट (विचरण) बना रहता है। ऐसे में विश्रामगंज रेंज में महीने भर के अंदर शिकार की तीन सनसनीखेज घटनाओं के सामने आने से एक ओर जहां मैदानी वन अमले की सक्रियता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ बाघ एवं तेंदुआ जैसे संकटग्रस्त वन्य जीवों पर मंडराते गंभीर संकट को लेकर गहरी चिंता जताई जा रही है। विदित हो कि, 27 जनवरी को वन परिक्षेत्र की गुड़हा बीट अंतर्गत वन्यजीवों का शिकार करने के लिए सड़क किनारे करंट का तार बिछाने वाला शिकारी फरसू गौंड़ 55 वर्ष इसकी चपेट में आने खुद ही शिकार बन गया था। घटनास्थल पर फरसू आदिवासी का हल्का जला हुआ शव और करंट लगने से मृत नीलगाय का शव मिला था। जबकि चार दिन पूर्व रक्सेहा ग्राम के नजदीक एक खेत की बारी में लगाए गए फंदे में तेंदुआ फंसा हुआ मिला था। पन्ना टाइगर रिजर्व की रेस्क्यू टीम ने तेंदुए को ट्रैंकुलाइज करके उसकी जान बचाई थी।