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योग से मन को शाँति और मस्तिष्क को ताकत मिलती है – राज्यपाल श्रीमती पटेल

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राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर 21 जून को राजभवन में आयोजित होने वाले योग कार्यक्रम के पूर्वाभ्यास में शामिल हुई।

राजभवन परिसर में योगाभ्यास कार्यक्रम में शामिल हुईं राज्यपाल 

भोपाल। राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने कहा है कि योग शरीर को रोगमुक्त रखने के लिए सबसे सस्ता और सरल उपाय है। योग से मन को शांति तथा मस्तिष्क को ताकत मिलती है। मन में अच्छे विचार उत्पन्न होते हैं। काम करने में मन लगता है। श्रीमती पटेल ने बतायाकि हमारे ऋषि-मुनियों ने भी योग के द्वारा अपने मन, मस्तिष्क को स्वस्थ रखकर दीर्घायु तक तपस्या और आराधना की। राज्यपाल आज अंतराष्ट्रीय योग दिवस पर 21 जून, 2018 को राजभवन में होने वाले योग कार्यक्रम के पूर्व अभ्यास कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। राजभवन में आज हुए योगाभ्यास में राज्यपाल के साथ राजभवन के अधिकारी, कर्मचारी और गणमान्य लोगों ने भाग लिया।

राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर 21 जून को राजभवन में आयोजित होने वाले योग कार्यक्रम के पूर्वाभ्यास में शामिल हुई।

योग गुरू राजेश जैन त्रिलोक ने योगाभ्यास करवाया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के योग दिवस संदेश का प्रसारण भी किया गया। राज्यपाल श्रीमती पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योग को जन-आंदोलन बनाकर इससे लोगों को जोड़ने और मानवता के बंधन को मजबूत करने का आव्हान किया है। संपूर्ण वैश्विक समुदाय 21 जून को योग के पहले अंतर्राष्ट्रीय दिवस का जश्न मनाने के समर्थन में एक साथ है। दुनिया भर में कई लोग और संगठन योग के पहले अंतर्राष्ट्रीय दिवस को यादगार बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। राज्यपाल ने प्रदेशवासियों से आग्रह किया है कि प्रधानमंत्री के योग दिवस संकल्प को पूरा करने के लिए 21 जून को अधिक से अधिक संख्या में योग कार्यक्रम में शामिल हों। इस अवसर राज्यपाल के सचिव भरत महेश्वरी तथा बड़ी संख्या में योग प्रेमी उपस्थित थे। कार्यक्रम में लगभग 500 पुरूष और महिलाओं ने योगाभ्यास किया।

 

राज्यपाल ने राजभवन परिसर में किया आवासीय प्रोजेक्ट का भूमि-पूजन

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पाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने राजभवन परिसर में आवासीय भवनो के निर्माण कार्य का भूमि-पूजन एवं शिलान्यास किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी उपस्थित थे।

राज्यपाल ने जीत लिया है जनता का विश्वास – मुख्यमंत्री श्री चौहान

निर्माण कार्य समय-सीमा में गुणवत्तापूर्वक पूर्ण करवाने के निर्देश 

भोपाल। राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने आज राजभवन परिसर में आवासीय प्रोजेक्ट का भूमि-पूजन एवं शिलान्यास करते हुए कहा कि कहा कि निर्माण कार्य समय सीमा में पूरा किया जाये तथा गुणवत्ता का विशेष ध्यान दिया जाये। इस अवसर पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी उपस्थित थे। राज्यपाल श्रीमती पटेल ने मुख्यमंत्री श्री चौहान की आम जनता के प्रति संवेदनशीलता की सराहना करते हुए कहा कि शासकीय कार्य में गति लाने, आम लोगों को शासकीय योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ पहुँचाने तथा जनसमस्याओं के जल्द निपटारे में शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि राजभवन के कर्मचारियों और अधिकारियों को अच्छा पारिवारिक वातावरण देने की मंशा से नये आवासीय भवनों का निर्माण करवाया जा रहा है।

राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने राजभवन परिसर में आवासीय भवनो के निर्माण कार्य के भूमि-पूजन कार्यक्रम को संबोधित किया।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि राज्यपाल श्रीमती पटेल ने प्रदेश की जनता का विश्वास जीत लिया है। श्रीमती पटेल ने प्रदेशवासियों में एक नई ऊर्जा का संचार किया है। इससे लोगों में नई आशायें जागी हैं । उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार शासकीय कर्मचारियों और अधिकारियों के कल्याण के लिए हर समय तत्पर रहती है। आज विश्व में भारत के योग की चर्चा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योग को विश्व में सर्वोच्च स्थान दिलवाया है। राज्यपाल ने राजभवन की दीवारों पर योग और सूर्य-नमस्कार को चित्रित करवाकर योग को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया गया है।

उल्लेखनीय है कि राज्यपाल श्रीमती पटेल ने विगत फरवरी माह में राजभवन कर्मचारियों की आवासीय कालोनी का निरीक्षण किया था और आवासों की जर्जर स्थिति देखकर लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की तुरंत बैठक बुलाकर नये आवास बनवाने के निर्देश दिये थे। राज्यपाल के निर्देशानुसार पीआईयू द्वारा राजभवन परिसर में आवासीय ईकाईयों के लिए 1321.49 लाख लागत का आवासीय प्रोजेक्ट प्रस्तुत किया गया। राज्यपाल श्रीमती पटेल ने विशेष रूचि लेकर इस प्रोजेक्ट को स्वीकृत करवाया है। कार्यक्रम में राजभवन के सचिव भरत महेश्वरी ने अतिथियों का स्वागत किया और परियोजना संचालक विजय सिंह वर्मा ने प्रोजेक्ट की जानकारी दी। इस मौके पर सांसद आलोक संजर ओर महापौर आलोक शर्मा भी मौजूद थे।

हर बच्चे को अनिवार्य स्कूली शिक्षा देना समाज और सरकार की साझा जिम्मेदारी – मुख्यमंत्री

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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज “स्कूल चलें हम” अभियान-2018 के शुभारंभ अवसर पर पठन-पाठन में नवाचार सामग्री का अवलोकन किया।

“स्कूल चलें हम अभियान 2018” का शुभारंभ

मुख्यमंत्री ने बच्चों से कहा “पढ़ाई को बनायें आनंददायी, न डरें न झिझकें” 
“गिफ्ट ए बुक अभियान” का किया शुभारंभ:प्रतिभाओं को किया सम्मानित 

भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज ‘स्कूल चलें हम अभियान 2018’ का शुभारंभ किया। उन्होंने समाज के सक्षम नागरिकों से अपील की कि वे सचेत रहें और देखें कि पास-पड़ोस, शहर-गाँव का हर बच्चा स्कूल जाए। उन्होंने कहा कि हर बच्चे को अनिवार्य स्कूली शिक्षा देना समाज और सरकार की साझा जिम्मेदारी है। श्री चौहान ने स्थानीय समन्वय भवन में आयोजित कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा पठन-पाठन में नवाचार की सराहना करते हुए कहा कि पढ़ाई आनंददायक होना चाहिए।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज “स्कूल चलें हम” अभियान-2018 के शुभारंभ अवसर पर बच्चों को संबोधित किया।

पढ़ाई बोझ नहीं लगना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर बच्चे में प्रतिभा, ऊर्जा और क्षमता होती है। बच्चों में झिझक और हिचक टूटना चाहिए। झिझक से प्रतिभा दब जाती है। उन्होंने बच्चों से कहा कि कभी भी झिझकें नहीं और न ही डरें। उन्होंने बच्चों से जीवन में महान काम करने का मंत्र साझा करते हुए बताया कि जो भी अच्छा पढ़ो, उसे जीवन में उतारो। उन्होंने धर्मराज युधिष्ठिर और महात्मा गांधी का उदाहरण दिया। श्री चौहान ने कहा कि बच्चों में भारत का निर्माण करने की क्षमता है । उनकी क्षमता को निखारने और आगे लाने की जिम्मेदारी शिक्षक और समाज दोनों की है । उन्होंने बच्चों को आश्वस्त किया कि शिक्षा के लिए पैसे कभी भी बाधा नहीं बनेंगे । उन्होंने बताया कि 12वीं कक्षा में अच्छे नम्बर लाने के बाद उच्च स्तर की शिक्षा में खर्च होने वाले पैसे सरकार भरेगी।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर बच्चों द्वारा निकाली गई पत्रिका ‘गुल्लक’ और प्रकाशित किये गये समाचार पत्र ‘नन्ही कलम से’ का विमोचन किया। उन्होंने ‘मिल बाँचे मध्यप्रदेश’ के पोर्टल का शुभारंभ भी किया। पोर्टल का शुभारंभ सात अगस्त को होगा।

‘गिफ्ट ए बुक अभियान’ का शुभारंभ-

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने “स्कूल चलें हम” अभियान-2018 के शुभारंभ अवसर पर प्रोफेशनल मॅर्निंग कम्यूनिटी पोर्टल का शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर ‘गिफ्ट ए बुक अभियान’ का शुभारंभ किया। उन्होंने अभियान की शुरुआत करते हुए अपने निजी संग्रह से शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय को कुछ किताबें भेंट की। यह शिक्षा विभाग की नई पहल है। इसका उद्देश्य समाज के सहयोग से शालाओं में लाइब्रेरी को समृद्ध बनाना है। समाज के प्रबुद्ध नागरिकों को बच्चों के उपयोग की किताबें दान करने के लिए प्रेरित भी किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने प्रोफेशनल लर्निंग कम्युनिटी पोर्टल और इसके अंतर्गत ई-लर्निंग मॉड्यूल का भी शुभारंभ किया। इन्हें शिक्षक और विद्यार्थी दोनों उपयोग कर सकते हैं। स्कूल शिक्षा मंत्री कुंवर विजय शाह ने कहा कि स्कूली शिक्षा में नवाचारों के माध्यम से परिवर्तन लाते हुए शिक्षा में गुणवत्ता को बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। शासकीय शालाओं की गुणवत्ता निरंतर बढ़ रही है। स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री दीपक जोशी ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री चौहान के मार्गदर्शन में स्कूली शिक्षा में परिवर्तन आया है।

नन्ही प्रतिभाओं ने किया प्रभावित, मिला उपहार-

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज “स्कूल चलें हम” अभियान-2018 के शुभारंभ अवसर पर बच्चों को खेल का महत्व बताया और बच्चों के साथ खेले भी।

मुख्यमंत्री को विद्यार्थियों की प्रतिभा ने इतना प्रभावित किया कि वे भी उन्हें सम्मानित करने में पीछे नहीं रहे। उन्होंने तत्काल मंच से ही उपहारों की घोषणा की। कहानी उत्सव में प्रथम आने वाले खंडवा के पाँचवी कक्षा के विद्यार्थी रामकृष्ण कान्हारे ने जब महादेव गोविंद रानाडे के जीवन से जुड़ी प्रेरणादायी कहानी सुनाई तो मुख्यमंत्री और अन्य अतिथि मंत्र-मुग्ध हो गये। कहानी सुनाने की शैली इतनी सम्मोहक थी कि मुख्यमंत्री ने कहानी समाप्त होते ही उसे गले लगा लिया और पुरस्कार स्वरूप 25 हजार रूपये की सम्मान राशि देने की घोषणा की। उन्होंने शाला छोड़ने वाले बच्चों को फिर से दाखिला लेने पर उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें सम्मानित किया।

प्रारंभ में दृष्टि-बाधित बालिका फाल्गुनी और माडल स्कूल, भोपाल के विद्यार्थियों द्वारा ‘वंदे-मातरम’ की प्रस्तुति से भाव-विभोर होकर मुख्यमंत्री ने फाल्गुनी को ब्रेल लिपि का लैपटाप देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि फाल्गुनी मन की आँखों से दुनिया देखती- समझती है। उन्होंने ‘वंदे-मातरम्’ की प्रस्तुति में साथी बालिकाओं को 25 हजार की सम्मान निधि देने की भी घोषणा की । श्री चौहान ने पहली बार स्कूल में कदम रख रहे बच्चों को स्कूल बेग, पानी की बॉटल और स्टेशनरी का सेट भेंट कर उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने खेल-खेल में पढ़ाई करने के तरीकों पर आधारित प्रदर्शनी भी देखी। इस अवसर पर प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा श्रीमती दीप्ति गौड़ मुखर्जी, प्रमुख सचिव आदिमजाति कल्याण एस. एन. मिश्रा, आयुक्त लोक शिक्षण श्रीमती जयश्री कियावत और विद्यार्थी उपस्थित थे। संचालक राज्य शिक्षा केंद्र लोकेश जाटव ने आभार माना।

 पशुओं के लिये भूसा और पानी की व्यवस्था अब आया ख़्याल 

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 पन्ना शहर के निकट बायपास मार्ग में भूखे मवेशी कचरे में भोजन कीतलाश करते हुये।

सागर कमिश्नर ने कलेक्टरों को 6 जून को जारी किया  आदेश

अप्रैल व मई में भूख और प्यास से बेहाल पशुओं की नहीं ली गई सुध

कार्यवाही के संबंध 14 जून तक प्रतिवेदन  उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिये हैं 

पन्ना। भीषण गर्मी व भूख और प्यास से बेहाल सैकड़ों पशु जिले में असमय काल कवलित हो गये। अल्प वर्षा के कारण इस साल पन्ना सहित संभाग के अन्य सभी जिलों में ज्यादातर जल श्रोतों के सूख जाने से अप्रैल व मई के महीने में पशुओं के लिये पानी उपलब्ध कराना पशु पालकों के सामने एक बड़ी समस्या रही है। जिसके चलते पशु पालकों ने अपने मवेशियों को बांधकर रखने के बजाय खुला छोड़ दिया था। ऐसी स्थिति में भूखे और प्यासे पशु पानी की तलाश में यहां-वहां भटकते फिर रहे थे। जिले के जल संकटग्रस्त इलाकों में बीते दो माह के दौरान प्यास से बेहाल पशुओं की बड़ी संख्या में मौतें हुई हैं लेकिन उस समय इन बेजुवानों की किसी ने भी सुध नहीं ली। अब जब मानसून ने दस्तक दे दी है उस समय संभाग आयुक्त महोदय को इन बेजुवानों की सुध आई है और उन्होंने मवेशियों के लिये भूसा-चारा और पानी की व्यवस्था करने हेतु पाँचों जिलों के उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाओं को निर्देश जा किये हैं। उल्लेखनीय है कि कमिश्नर कार्यालय सागर से 6 जून 18 को जारी हुये आदेश में यह लेख किया गया है कि उन्हें इस तरह की सूचना प्राप्त हो रही है कि संभाग के जिलों में कम वर्षा होने के कारण कतिपय स्थानों पर पशुओं के लिये भूसा- चारा एवं पानी की कमी हो रही है। पानी की कमी व अनुपलब्धता को दृष्टिगत रखते हुये कमिश्नर सागर मनोहर दुबे जी ने सभी उप संचालकों को दिशा-निर्देश जारी किये हैं। आदेश में उन्होंने कहा है कि यह सुनिश्चित करें कि सभी जिलों में पशुओं के लिये पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध रहे। पूर्व में पशुओं के लिये बनाये गये हौदों की साफ-सफाई कर उनमें पानी भरा जाना सुनिश्चित करें। ग्राम पंचायतों को निर्देश प्रदान करें कि यदि उनके पंचायत क्षेत्र में पशुओं के लिये भूसाए चारा और पानी की कमी है तो वे इसके लिये सम्यक व्यवस्था करें। कमिश्नर ने की गई कार्यवाही के संबंध में एक प्रतिवेदन 14 जून 18 तक उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिये हैं।

कमिश्नर सागर द्वारा 6 जून को जारी किया गया आदेश।

संभागायुक्त द्वारा जारी इस आदेश से भूखे प्यासे बेजुवान पशुओं को कितनी राहत मिलेगी इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आदेश तब जारी किया गया जब मानसून ने दस्तक देना शुरू कर दिया है। भीषण गर्मी में जब हर तरफ पानी के लिये हाहाकार मचा था उस समय प्यासे पशुओं के प्रति ऐसी संवेदना नहीं जगी। यदि समय पर मार्च व अप्रैल के महीने में चारा पानी की व्यवस्था करा दी जाती तो सैकड़ों बेजुवान पशु असमय काल कवलित होने से बच जाते। लेकिन अब 6 जून को आदेश जारी किये गये हैंए जिसका क्रियान्वयन होते-होते मानसूनी बारिश शुरू हो जायेगी। जाहिर है कि सब कुछ कागजों में होगा और कार्यवाही प्रतिवेदन भी भेज दिया जायेगा। इस तरह से पशुओं के लिये भूसा-चारा व पानी की व्यवस्था किये जाने के नाम पर लाखों रुपए खर्च हो जायेंगे जिसकी कोई खोज खबर नहीं ली जा सकेगी। क्योंकि तब तक न तो पानी की कमी होगी और चारा भी सहज उपलब्ध होगा। इस लिहाज से कमिश्नर सागर द्वारा पशुओं के लिये भूसा-चारा व पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु 6 जून को जारी आदेश के औचित्य पर विचार किया जाना आवश्यक प्रतीत होता है।

इनका कहना है –

        आदेश जारी करके मैंने कुछ गलत नहीं किया, जब मेरे संज्ञान में बात आई तो मैंने पशुओं के लिए तत्परता          से आवश्यक व्यवस्था करने के निर्देश दिए है।

                                                                                मनोहर दुबे, कमिश्नर सागर संभाग

स्विमसूट मेें फोटो शेयर करने पर गई टीचर की नौकरी

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टीचर विक्टोरिया की तस्वीर वायरल होने रूस में छिड़ी बहस

समर्थन मेें आये कई लोग, स्कूल के फैसले का किया विरोध

इंस्टाग्राम पर फोटो शेयर करते समय विक्टोरिया पोपोवा को ये अंदाजा भी नहीं था कि एक फोटो की वजह से उनकी नौकरी छिन जाएगी। 26 साल की विक्टोरिया रूस के ओम्स्क में एक स्कूल में पढ़ाती थीं। कुछ दिनों पहले उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपनी एक फोटो शेयर की थी जिसमें वो स्विम सूट पहने हुई थीं। इस फोटो की वजह से उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया है।

साइबेरियन टाइम्स ने स्कूल के हवाले से लिखा है कि ऐसा करके विक्टोरिया ने स्कूल और टीचिंग के पेशे को अपमानित किया है। लेकिन अब बहुत से सोशल मीडिया यूजर्स उनके समर्थन में आ खड़े हुए हैं।
ये पागलपन कब बंद होगा?
ज्यादातर लोग स्कूल के इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। विक्टोरिया को लोगों का काफी समर्थन मिल रहा है। एक शख़्स ने इंटरनेट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा है ये पूरी तरह से दिखावा है। ऐसा करना मूर्खता है और बेहद अपमानजनक भी है। एक महिला ने लिखा है हम टीचर हैं लेकिन हम इंसान भी हैं। हमें भी हक है कि हम स्कूल के बाहर या फिर सोशल मीडिया पर अगर अलग दिखना चाहें तो दिखें।

एक अन्य व्यक्ति ने इस फैसले को पूरी तरह बेवकूफी बताया है। वहीं एक शख़्स लिखते हैं कि इतनी बेतुकी बात पर खुद का बचाव तक करने की जरूरत नहीं है।

एक इंस्टाग्राम यूजर ने लोगों से विक्टोरिया का समर्थन करने की बात कही है।
ऐसा नहीं है कि सारे लोग सिर्फ विक्टोरिया का समर्थन ही कर रहे हैं। बहुत से लोगों का मानना है कि यह गलत है। लोगों का कहना है कि पर्सनल स्पेस की बात कहकर आप कुछ भी तो नहीं कह सकते हैं।

वहीं खुद को टीचर बताने वाली एक महिला का कहना है कि यह कोई नियम नहीं है। टीचर भी इंसान है लेकिन ये इंसान पढ़ाने का काम करते हैं। वो कहती हैं, बेशक सबका अपना एक निजी जीवन होता है। लेकिन क्या आप पसंद करेंगे कि कोई टीचर स्कूल के पीछे शराब पिए…क्योंकि वो भी तो इंसान हैं।

टीचर या फिर मॉडल?
स्विमसूट में टीचर की तस्वीर वायरल होने के बाद ओम्स्क प्रांत की सरकार ने घोषणा की है कि विक्टोरिया काम पर वापस लौट सकती हैं। सरकार की ओर से कहा गया है कि विक्टोरिया के भविष्य का फैसला हो गया है, अब ये उन्हें तय करना है कि क्या वो इसी स्कूल में पढ़ाना चाहती हैं या फिर किसी दूसरे स्कूल में। रूस की एक मॉडलिंग एजेंसी प्लस साइज ओम्स्क ने विक्टोरिया से संपर्क किया है और उन्हें एक ऑफर भी दिया है।                                                                                           

                                        (साभार : बीबीसी हिन्‍दी)

मोदी बोले- किसी को दिखे या न दिखे, देश बदल रहा है

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फाईल फोटो

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि देश में विकास हो रहा है, भले ही लोग इसे नहीं देख पा रहे हैं। उन्होंने कहा, डिजिटल इंडिया के तहत तीन लाख कॉमन सर्विस सेंटर (सीएसई) पर काम हो रहे है। किसी को दिखे या न दिखे, देश बदल रहा है। नमो एप के जरिए डिजिटल इंडिया का लाभ उठाने वालों से बात करते हुए उन्होंने लोगों के अनुभव सुने और इस योजना की खूबियां गिनाईं।

उन्होंने कहा कि इस योजना से न सिर्फ लाखों लोगों को रोजगार मिला है बल्कि गांव में रहने वाले लोगों की जिंदगी भी बदली है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि डिजिटल इंडिया से सबसे ज्यादा फायदा गांवों की महिलाओं को हुआ है। उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया के तहत शुरू किए गए वाई फाई चैपाल योजना से गांवों की बेटियां नौकरी पा रही हैं।

फाईल फोटो

प्रधानमंत्री से बात करते हुए लाभान्वित सचियत्री ने बताया कि उनका चयन उत्तर प्रदेश पुलिस में हुआ, जिसकी तैयारी उन्होंने सीएससी सेंटर की मदद से की थी। कई सीएससी सेंटर के संचालकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बताया कि वो इस योजना से हजारों ग्रामीणों को डिजिटल साक्षर कर चुके हैं।

नरेंद्र मोदी ने कहा कि डिजिटल इंडिया ने भारतीयों की पैसे की लेन-देन की आदत बदल दी है। अब गांव-गांव में डिजिटल पेमेंट के जरिए भुगतान किया जा रहा है।

कॉल सेंटर में मिला काम-

फाईल फोटो

विभिन्न सेंटरों से कई लोगों ने ये बताया कि इस योजना से उन्हें पेंशन पाने में आसानी होती है। पहले उन्हें बैंक के लिए कई किलोमीटर दूर जाना होता था। राजस्थान के अलवर जिला की पूनम सपेरा ने बताया कि वो बीए में पढ़ रही हैं और डिजिटल इंडिया से उन्हें लाभ मिल रहा है। पूनम घुमंतू जाति से हैं।

नरेंद्र मोदी ने नागालैंड के कोहिमा में चल रहे बीपीओ के कर्मियों से भी बात की। कर्मियों ने बताया कि उन्हें अब अपने शहर के कॉल सेंटर में काम मिल रहा है और वो ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और अमरीका की कंपनियों के लिए काम करते हैं। पटना की खुशबू ने बताया कि इस योजना के तहत शुरू किए गए कॉल सेंटर में उन्हें नौकरी मिली है, जहां वो क्षेत्रीय भाषा में ग्राहकों से बात करती हैं।

एससी-एसटी समुदाय को फायदा-

डिजिटल इंडिया के तहत देशभर के एक लाख 83 हजार ग्राम पंचायतों में तीन लाख कॉमन सर्विस सेंटर खोले गए हैं। इन सेंटरों को खोलने का सरकार का मकसद था कि गांव में लोग सरकारी और गैर-सरकारी योजनाओं का लाभ ऑनलाइन प्राप्त कर सके।

नरेंद्र मोदी ने दावा किया कि इन सेंटरों से 10 लाख लोगों को रोजगार मिला है। उन्होंने यह भी दावा किया कि डिजिटल साक्षर योजना के तहत करीब 1.25 करोड़ लोगों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इन 1.25 करोड़ लोगों में 70 फीसदी लाभान्वित एससी-एसटी समुदाय से है।

                                                                                                (साभार: बीबीसी हिन्दी)

कश्मीर पर यूएन की रिपोर्ट को भारत ने किया खारिज

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संयुक्त राष्ट्र में मानवाधिकारों के उच्चायुक्त ज़ायद बिन राड अल हुसैन

मानव अधिकारों के गंभीर उल्लंघन की जांच के लिए गठित हो सकता है आयोग

संयुक्त राष्ट्र ने कश्मीर में मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन और उसकी जांच की बात कही है। संयुक्त राष्ट्र ने गुरुवार को कहा कि भारत के साथ पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में भी मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। संयुक्त राष्ट्र में मानवाधिकारों के उच्चायुक्त जायद बिन राड अल हुसैन ने कहा है कि वो मानवाधिकार काउंसिल से अगले हफ्ते नए सत्र के लिए कहेंगे, जिसमें एक जांच आयोग गठित करने पर विचार किया जाएगा। अगर यह जांच आयोग बनता है तो कश्मीर में मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन की स्वतंत्र जांच की जाएगी।

भारत ने संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट को पूरी तरह से ख़ारिज करते हुए कहा है कि यह भारत की संप्रभुता का उल्लंघन और उसकी क्षेत्रीय एकता के खलिाफ है। भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि यूएन की रिपोर्ट अपुष्ट सूचनाओं पर आधारित है और साथ ही पक्षपातपूर्ण है। भारत ने कहा है कि यह एक झूठे ब्यौरे के सिवाय कुछ नहीं है।

प्रतीकात्‍मक फोटो

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भारत प्रशासित कश्मीर में कथित मानवाधिकारों के उल्लंघन पर संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट का स्वागत किया है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत ने कश्मीर में बहुत ज्यादा सुरक्षा बलों की तैनाती की है और 2016 के बाद से कई नागरिक मारे गए हैं।

कश्मीर पर 1947 में विभाजन के बाद से ही दोनों देशों के बीच विवाद है और कई बार दोनों देशों के बीच युद्ध की स्थिति बनी है। यूएन की इस रिपोर्ट में पाकिस्तान से कहा गया है कि वो आतंकवाद विरोधी कानून का दुरुपयोग शांतिपूर्ण विरोध और असहमति को ख़त्म करने में नहीं करे।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार यूएन की रिपोर्ट का बड़ा हिस्सा भारत के जम्मू-कश्मीर पर केंद्रित है। इसमें जुलाई 2016 से अप्रैल 2018 के वाक़यों का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि भारत प्रशासित कश्मीर में 130 से 145 के बीच नागरिक सुरक्षाबलों के हाथों मारे गए और इसी दौरान चरमपंथियों के हाथों 20 नागरिक मारे गए।

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रिपोर्ट में लिखा गया है कि 2016 में विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ और इसकी प्रतिक्रिया में सुरक्षा बलों ने ज्यादा ताक़त का इस्तेमाल किया।

यूएन की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय सुरक्षाबलों पर कोई मुक़दमा नहीं चलता है, क्योंकि जम्मू-कश्मीर में इन्हें 1990 के नियम के तहत ज्यादा अधिकार मिले हुए है। जायद ने कहा है कि कथित रूप से जम्मू-कश्मीर में सामूहिक क़ब्रों की जांच होनी चाहिए। भारत ने इस रिपोर्ट को ख़ारिज करते हुए कहा है कि यह रिपोर्ट फर्जी, गलत मंशा से और प्रेरित है।

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भारत ने सवाल किया कि आख़िर इस रिपोर्ट को जारी करने की मंशा क्या है। भारत लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि पाकिस्तान चरमपंथियों को ट्रेनिंग देकर कश्मीर में घुसपैठ कराता है। दूसरी तरफ पाकिस्तान भारत के इन आरोपों को ख़ारिज करता रहा है। यूएन का कहना है कि मानवाधिकारों का उल्लंघन दोनों तरफ हो रहा है। पाकिस्तान ने कहा है कि वो पहले से ही कश्मीर में भारतीय सेना द्वारा किए जा रहे मानवाधिकारों के उल्लंघन की बात को उठाता रहा है।

वहीं पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन पर यूएन की रिपोर्ट पर पाकिस्तान ने कहा है कि इसकी तुलना भारत प्रशासित कश्मीर से नहीं की जा सकती। कश्मीर के मानवाधिकार कार्यकर्ता खुर्रम परवेज ने रिपोर्ट का स्वागत किया है। उन्होंने रॉयटर्स से कहा कि यूएन की रिपोर्ट कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोपों की पुष्टि है।

प्रतीकात्‍मक फोटो

कश्मीर के अलगाववादी नेता मीरवाइज फारूक़ ने यूएन की रिपोर्ट का स्वागत किया है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, कश्‍मीर के लोग संयुक्त राष्ट्र के शुक्रगुजार हैं। ख़ासकर मानवाधिकार उच्चायुक्त जायद राड अल हुसैन का यह साहसपूर्ण क़दम प्रशंसनीय है। यह आत्मनिर्णय के अधिकारों का समर्थन है।

भारत ने यूएन की रिपोर्ट पर कहा है, यह काफी तकलीफदेह है कि यूएन की रिपोर्ट में अंतरराष्ट्रीय रूप से चिन्हित और ख़ुद यूएन ने जिन समूहों को प्रतिबंधित किया है उसे श्हथियारबंद समूह कहा है और चरमपंथियों को लीडर्स कहा गया है। ऐसा तब है जब यूएन आतंकवाद के ख़िलाफ सख़्ती की बात करता है।

                                                                                                  (साभार:बीबीसी हिन्‍दी)

वर्चुअल क्लॉस-रूम में पढ़ेेेेगें सरकारी स्‍कूलों के बच्‍चे

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प्रतीकात्‍मक फोटो

प्रदेश के 224 सरकारी स्कूलों में बनाये गये वर्चुअल क्लॉस-रूम

छात्रवृत्ति वितरण के लिये मिशन वन क्लिक 

भोपाल। प्रदेश में कक्षा-9 से 12 तक पढ़ने वाले विद्यार्थियों को डिजिटल स्टडी मटेरियल के माध्यम से अध्यापन कराने के लिये विकासखण्ड-स्तर के 224 सरकारी विद्यालयों का चयन किया गया है। इन विद्यालयों में वर्चुअल क्लॉस-रूम बनाये गये हैं। चयनित विद्यालय में एक कक्ष को लर्निंग एण्ड के रूप में विकसित किया गया है, जिसमें आवश्यक उपकरण कम्प्यूटर, टी.व्ही., प्रोजेक्टर और कैमरा स्थापित किये गये हैं। वर्चुअल क्लॉस के माध्यम से अध्यापन कार्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने में सहायक सिद्ध हुआ है। प्रदेश के दूरस्थ ग्रामीण अंचल के विद्यार्थियों के लिये यह कक्षाएँ उपयोगी साबित हुई हैं। इससे सभी विद्यार्थियों के लिये उत्कृष्ट अध्यापन एवं सीखने की प्रक्रिया रुचिकर एवं प्रभावी हुई है। वर्चुअल क्लॉस-रूम का उपयोग राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा मिशन के अंतर्गत प्रशिक्षित स्रोत शिक्षकों द्वारा शिक्षण कार्य के लिये किया जा रहा है।

मिशन वन क्लिक से छात्रवृत्ति वितरण-

प्रदेश के स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को विभिन्न विभागों की ओर से दी जाने वाली छात्रवृत्ति को ऑनलाइन कर दिया गया है। आठ विभागों की 30 प्रकार की छात्रवृत्ति समग्र शिक्षा पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन वितरित करने के लिये स्कूल शिक्षा विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है। इस प्रक्रिया में सभी सरकारी, गैर-सरकारी स्कूल, शिक्षण संस्थाओं में अध्ययनरत करीब एक करोड़ 48 लाख विद्यार्थियों की प्रोफाइल को ऑनलाइन कर छात्रवृत्ति की गणना की गई है। प्रत्येक स्कूली विद्यार्थी का समग्र यूनिक आई.डी. के आधार पर उसके स्कूल के डाइस कोड के साथ मेपिंग कर कक्षावार, स्कूलवार नामांकन ऑनलाइन किये जाने के लिये समग्र शिक्षा पोर्टल तैयार किया गया है। वर्ष 2017-18 में मिशन वन क्लिक में विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति उनके बैंक खाते में ट्रांसफर की गई है।

केला उत्पादक किसानों की मुआवजा राशि मेें होगी साढ़े सात गुना वृद्धि

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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुरहानपुर जिले के शाहपुर में किसानों को संबोधित किया।

केले की क्षतिग्रस्त फसलों को देखने खेतों में पहुँचे मुख्यमंत्री श्री चौहान 

मुख्यमंत्री ने केला उत्पादक किसानों के लिये कीं महत्वपूर्ण घोषणाएँ 

भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आज बुरहानपुर जिले में आँधी-तूफान से क्षतिग्रस्त केले की फसलों का जायजा लेने सीधे खेतों में पहुँचे। फसलों को हुए नुकसान से किसानों को राहत देने का भरोसा दिलाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केला उत्पादक किसानों को प्राकृतिक आपदा से हुई क्षति का अधिकतम मुआवजा दिलाया जाएगा। श्री चौहान ने घोषणा की कि राज्य सरकार राजस्व पुस्तक परिपत्र के प्रावधानों में शीघ्र ही संशोधन करेगी और किसानों को देय 13 हजार 500 रुपये प्रति हैक्टेयर मुआवजा राशि में लगभग साढ़े सात गुना वृद्धि करते हुए एक लाख रुपये प्रति हैक्टेयर मुआवजा देगी।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुरहानपुर जिले में केले की क्षतिग्रस्त फसल का जायजा लिया।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्राकृतिक आपदा की इस घड़ी में राज्य सरकार केला उत्पादक किसानों के साथ है। किसानों को हर संकट से राहत दिलवाई जाएगी। उन्होंने कहा कि मैं जानता हूँ कि केले की फसल बहुत नाजुक होती है, आँधी-तूफान से एक बार अगर पौधे का तना टेड़ा हो जाये, तो पूरा पौधा खराब हो जाता है। श्री चौहान ने किसानों को राहत देने के लिये महत्वपूर्ण घोषणाएँ करते हुए कहा कि केला उत्पादक किसानों को फसल बीमा योजना में अधिकतम बीमा राशि दिलवाने के लिये बीमा कम्पनी और भारत सरकार के अधिकारियों से चर्चा की जाएगी। क्षतिग्रस्त फसलों के लिये संबंधित किसानों का बिजली बिल राज्य सरकार भरेगी। फसल ऋण की वसूली को फिलहाल स्थगित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुरहानपुर जिले में केले की क्षतिग्रस्त फसल का जायजा लिया।

खेतों से केले की क्षतिग्रस्त फसल को हटाकर खेत को साफ करने के कार्य के लिये छोटे और सीमांत किसानों को रोजगार गारंटी योजना में मजदूरी का भुगतान करवाया जाएगा। केला उत्पादक किसानों के फसल ऋण का ब्याज राज्य सरकार भरेगी और केले की अगली फसल के लिये किसानों को बिना ब्याज का ऋण उपलब्ध करवाया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने ग्राम उमरदा में कृषक काशीनाथ और शहपुर में कृषक अनिल महाजन और भागवत के खेतों में जाकर केले की क्षतिग्रस्त फसलों का जायजा लिया। इस मौके पर महिला बाल विकास मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस, सांसद नन्दकुमार सिंह चौहान, विधायक सुश्री मंजु दादू, महापौर अनिल भोंसले, जिला पंचायत अध्यक्षसंजय जाधव, स्थानीय जन-प्रतिनिधि और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद थे।

प्रदेश में आपदा प्रबंधन के लिए विशेष बल गठित होगा

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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंत्रालय में हुई बैठक में शासकीय सेवा में विभिन्न पदो पर भर्ती की समीक्षा की।

इस वर्ष 40 हजार पदों पर हुई नियुक्ति और 52 हजार पदों पर होंगी नयी नियुक्तियाँ 

भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश में आपदा प्रबंधन के लिए विशेष बल का गठन किया जाये। इस बल के सदस्यों को आपदा प्रबंधन से जुड़ी विभिन्न विधाओं के विस्तृत प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाए। श्री चौहान आज मंत्रालय में शासकीय सेवा में विभिन्न पदों पर भर्ती की समीक्षा कर रहे थे। मुख्य सचिव बी.पी. सिंह भी मौजूद थे। बताया गया कि इस वर्ष शासकीय सेवा में 40 हजार विभिन्न पदों पर नियुक्ति की गई है तथा लगभग 52 हजार पदों पर नयी नियुक्तियाँ की जा रही हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बैठक में विभागवार की गई नियुक्तियों और रिक्तियों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि भर्ती कार्य पूरी पारदर्शिता से किया जाए। नियुक्ति की समस्त कार्रवाईयाँ समय-सीमा में पूरी की जाएं। बताया गया कि उच्च शिक्षा विभाग द्वारा 3268 पदों पर नियुक्ति की जाएगी। इसी तरह राजस्व विभाग में 1447, स्कूल शिक्षा विभाग में 30,000, स्वास्थ्य विभाग में 4607, गृह विभाग में 8520, महिला-बाल विकास में 3741 पदों और अन्य विभागों सहित कुल 52 हजार पदों पर भर्ती की कार्रवाई की जाएगी। बताया गया कि राजस्व विभाग द्वारा 9,540, स्वास्थ्य विभाग द्वारा 3,020, गृह विभाग द्वारा 16 हजार 443, महिला-बाल विकास विभाग द्वारा 620, उच्च शिक्षा विभाग द्वारा 5150 और अन्य विभागों सहित कुल 40 हजार नयी नियुक्तियां की गई है। बैठक में अपर मुख्य सचिव वित्त ए.पी. श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव गृह मलय श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव महिला-बाल विकास जे.एन. कंसोटिया, प्रमुख सचिव राजस्व अरुण पांडे, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव अशोक वर्णवाल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।