मच्छरों को पनपने से रोकेगी लार्वाभक्षी मछली, जिले के 82 जल स्रोतों में 1 लाख गैम्बूसिया मछली डाली

0
1193
जलस्रोतों में लार्वाभक्षी गैम्बूसिया मछली को छोड़ते मलेरिया विभाग पन्ना के कर्मचारी एवं मौके पर उपस्थित स्थानीय ग्रामीणजन।

* मलेरिया विभाग ने की मच्छरों के नियंत्रण की जैविक पहल

* जिले में मच्छर जनित बीमारियों का साल दर साल बढ़ रहा है ग्राफ

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) प्रत्येक वर्ष बारिश के मौसम में जल स्रोतों में जलभराव के चलते उनमें मच्छरों के लार्वा तेजी से पनपने लगते हैं जिससे मच्छर जनित बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसके मद्देनजर पन्ना जिले के मलेरिया विभाग ने मच्छरों की प्रभावी रोकथाम के उद्देश्य जलस्रोतों में लार्वाभक्षी मछली का संचयन शुरू कर दिया है। जिले के पाँच विकासखण्डों के 82 जल स्रोतों में अब तक 1 लाख गैम्बूसिया मछली डाली जा चुकी है। जिला मलेरिया अधिकारी हरिमोहन रावत ने जानकारी देते हुए बताया कि पन्ना जिले में 1 लाख लार्वाभक्षी मछली गैम्बूसिया की सप्लाई कटनी के सुर्खी मछली पालन केन्द्र से दिनांक 24 एवं 27 सितम्बर को की गई। दिनांक 24 सितम्बर को 60,000 गैम्बूसिया मछली को शाहनगर के 20 पवई के 14 एवं गुनौर ब्लॉक के 17 तालाबों में डाला गया। दिनांक 27 सितम्बर को प्राप्त 40,000 गैम्बूसिया मछली को पन्ना के 16 एवं अजयगढ़ ब्लॉक के 15 तालाबों में छोड़ा गया है।

22 दिनों में बढ़ा लेती है अपनी तादाद

गैम्बूसिया मछली।
जिला मलेरिया अधिकारी पन्ना हरिमोहन रावत ने गैम्बूसिया मछली की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह मछली मच्छर के लार्वा खाकर मलेरिया नियंत्रण में विशेष सहयोग प्रदान करती है। गैम्बूसिया मछली मात्र 22 दिन में प्रजनन कर अपनी संख्या को बढ़ा लेती है। आपने बताया कि चूकिं मच्छर के लार्वा भी पानी की सतह पर सांस लेने के लिए आते यह और गैम्बूसिया मछली जल सतह के नजदीक तैरती है शरीर से हल्की और लगभग 3 इंच लंबाई की यह छोटी सी मछली बड़े पैमाने पर लार्वा भक्षण कर जल स्त्रोतों में मच्छर को पनपने से रोकती है।
जिला मलेरिया अधिकारी हरिमोहन रावत ने बताया कि मलेरिया कार्यालय पन्ना के द्वारा गैम्बूसिया मछली जिले के जिन स्थानों के जल स्रोतों डाली गई है उनमें मुख्य रूप से – पटनाकला, जिजगांव, गढ़ोंखर, पगरा, महेवा, गुनौर, परसवारा, बिसानी, देवरा, कचोरी, उमरिया डूडी़, सुगरहा, लमतरा, इमलिया, गिरवारा, पुरैना, रैगढ़, पटिया, सिलगी, इटवां, डडवारियां, ककरहा, जिगधा, बड़ागांव, रैहूंटा, महेड़ा, हथकुरी, पवई नगर, कमता, किशनगढ़, करही, अजयगढ़, बहिरवारा एवं पिष्टा ग्राम शामिल है। जिला मलेरिया अधिकारी श्री रावत ने समस्त संबंधित ग्रामवासियों से अपील की है कि अभी लगभग 1 माह तक छोटी गैम्बूसिया मछली का पूरी तरह संरक्षण करें ताकि ये मछलियां प्रजनन कर अपनी संख्या बढ़ा सकें और जिले में मच्छरों को नियंत्रित करने की यह जैविक पहल सफल हो सके।

गरीबों को निःशुल्क बाँटी मच्छरदानी

जल स्रोतों में सभी तरह के मच्छरों के लार्वा खाकर उन्हें पैदा होने से पहले ही ख़त्म करने वाली गैम्बूसिया मछली वाकई कमाल की है। पन्ना जिले में मच्छर जनित बीमारियों के साल दर साल बढ़ते ग्राफ को देखते हुए मलेरिया विभाग द्वारा मच्छरों की रोकथाम के लिए कई तरह के उपाय किए जा रहे हैं। चिन्हिंत स्थानों पर मच्छर नाशक दवा के छिड़काव के अलावा वर्षाकाल की समाप्ति पर जल स्रोतों में गैम्बूसिया मछली का संचयन कराना आदि शामिल है। लोगों को मच्छरों के डंक से बचाने के लिए कुछ माह पूर्व मलेरिया विभाग के द्वारा मैदानी स्वास्थ्य कर्मचारियों के माध्यम से गाँव-गाँव बड़ी तादाद में मेडिकेटेड मच्छरदानी का निःशुल्क वितरण भी कराया गया है। इसके अलावा लोगों को मच्छर जनित बीमारियों की जानकारी देकर उनसे बचाव हेतु जागरूक किया जा रहा है।