* लापरवाह आंगनवाडी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं का मानदेय काटने के आदेश
शादिक खान,पन्ना।(www.radarnews.in) शासन की महत्वपूर्ण योजनाओं-कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की जमीनी सच्चाई का पता लगाकर व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से जिले में ई-निरीक्षण शुरू किया गया। निरीक्षण की इस नई व्यवस्था से विभिन्न विभागों के मैदानी अमले की कामचोरी और लापरवाही लगातार उजागर हो रही है। अच्छी बात यह है कि ई-निरीक्षण रिपोर्ट को संबंधित विभाग के जिला प्रमुख अधिकारी गंभीरता से लेते हुए लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ सख्त एक्शन ले रहे हैं। जिससे ई-निरीक्षण को लेकर मैदानी अमले में हड़कंप मचा है। ई-निरीक्षण के तहत ताजा कार्रवाई आंगनवाडी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं के खिलाफ की गई है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास पन्ना उदल सिंह ने बताया है कि कलेक्टर के आदेशानुसार विभिन्न विभागों के अधिकारियों द्वारा आंगनवाडी केन्द्रों का ई-निरीक्षण किया गया है। निरीक्षण के दौरान आंगनवाडी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं द्वारा की गयी अनियमितताओं के संबंध में मानदेय काटने के आदेश दिए गए हैं।
उन्होंने बताया है कि बाल विकास परियोजना पवई अन्तर्गत सेक्टर कल्दा आंगनवाडी केन्द्र बिरवाही का निरीक्षण राकेश कुमार प्रजापति राजस्व विभाग द्वारा किया गया। जिसमें कार्यकर्ता श्रीमती काशी बाई अनुपस्थित पाई गईं । पन्ना ग्रामीण अन्तर्गत सेक्टर मझगवा आंगनवाडी केन्द्र जरधोवा का निरीक्षण विष्णु त्रिपाठी स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा किया गया। जिसमें कार्यकर्ता श्रीमती हल्की बाई अनुपस्थित पायी गयी। पवई अन्तर्गत सेक्टर बिसानी आंगनवाडी केन्द्र बिसानी-डी का निरीक्षण डाॅ. एल.के. तिवारी स्वास्थ्य विभाग द्वारा किया गया। जिसमें कार्यकर्ता श्रीमती निर्मला तिवारी अनुपस्थित पायी गयी। इन सभी का 7-7 दिवस का मानदेय काटने के आदेश दिए गए हैं।

इसी प्रकार परियोजना शाहनगर अन्तर्गत सेक्टर बिसानी आंगनवाडी केन्द्र सतधारा का निरीक्षण विष्णु त्रिपाठी स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा किया गया। जिसमें कार्यकर्ता श्रीमती सेठिया एवं सहायिका श्रीमती रामसखी यादव के केन्द्र में बच्चों की उपस्थति बहुत कम पायी गयी। इसी प्रकार सेक्टर बिसानी आगंनवाडी केन्द्र शाहपुरकला का निरीक्षण किया गया। जिसमें कार्यकर्ता कु. प्रीति गौतम एवं सहायिका श्रीमती गंगो बाई वर्मन के केन्द्र में बच्चों की उपस्थिति बहुत कम पायी गयी। इन सभी का 5-5 दिवस का मानदेय काटने के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने आंगनवाडी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं को अंतिम बार चेतावनी देते हुए निर्देशित किया है कि यदि भविष्य में इसी प्रकार की पुनरावृत्ति होती है तो बिना सूचना दिए सेवा से पृथक करने की कार्यवाही की जाएगी।
2













किस्मत से रामचरण जुआ में बड़ी रकम जीत गया। ऐसी चर्चा है कि बुधवार तड़के जब वह वापस अपने गाँव जाने लगा तो जुआ में रुपए हारने वालों की नियत में खोट आ गया। उन सब लोगों ने मिलकर रामचरण लोधी से पूरे रुपए छीन लिए और फिर बड़ी ही बेरहमी से उसकी हत्या भी कर दी गई। अज्ञात कातिलों ने अपने गुनाह को छिपाने के लिए शव को घटनास्थल से थोड़ी दूर सड़क पर फेंक दिया। शव के ही पास हेलमेट तोड़कर डाल दिया और अन्य सामान भी आसपास बिखेर दिया गया। ताकि लोग समझें कि रामचरण की मौत सड़क हादसे में हुई है। लेकिन उसकी बाइक शव से 500 मीटर दूर पड़ी थी।









एक संदिग्ध के घर के बाहरी हिस्से में वन अमले को तलाशी के दौरान कई आपत्तिजनक चीजें मिलीं हैं। जिनमें वन्यजीवों के शिकार में प्रयुक्त होने वाला क्लिच वायर का फंदा, चीतल के सींग और सेही के काँटे आदि शामिल हैं। उक्त सामग्री बरामद होने की पुष्टि उत्तर वन मण्डल पन्ना के उप वनमण्डलाधिकारी नरेन्द्र सिंह ने की है। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि संदिग्ध व्यक्ति घर पर नहीं है, उसके घर पर ताला पड़ा है। घर के अंदर की तलाशी लेने के लिए सर्च वारंट जारी कर किया जा चुका है, उसकी पत्नी को वारंट तामील कराकर आज ही अंदर की तलाशी ली जाएगी। समाचार लिखे जाने तक इस मामले में एक भी आरोपी की गिरफ़्तारी नहीं हो सकी थी।
धरमपुर रेन्ज की कुड़रा बीट अंतर्गत जिस स्थान क्षत-विक्षत हालत में तेंदुए का शव मिला हैं, वहीं जमीन में कई खूंटियाँ गड़ी पाई गईं। जिससे यह संभावना जताई जा रही है कि इन्हीं खूँटियों के जरिए बीहर (जलस्रोत) के आसपास करंट का जाल बिछाया गया ताकि पानी पीने के लिए आने वाले वन्यजीवों को आसानी से निशाना बनाया जा सके। इस करंट की चपेट में आने से ही तेंदुए की मौत हुई है। अज्ञात शिकारी तेंदुए की खाल निकालकर उसके पंजे भी काट ले गए। इस घटना ने वन विभाग में व्याप्त अराजकता की पोल खोलकर रख दी है। मृत तेंदुए का शव जंगल में सप्ताह भर तक सड़ता रहा लेकिन इसकी भनक तक मैदानी वन अमले को नहीं लगी।
शिकार की घटनाओं तथा दूसरे वन अपराधों की रोकथाम में नाकाम साबित हो रहे वन विभाग के कतिपय अधिकारी अब अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए तरह-तरह के शर्मनाक प्रयास कर रहे हैं। शिकार आदि की घटना को पहले तो इनके द्वारा झुठलाने की कोशिश की जाती है या फिर जानकारी के बाद भी अनभिज्ञ होने की नौटंकी करते हैं। इसके बाद भी यदि कोई मामला उजागर होता है तो वन विभाग के कतिपय अधिकारी मीडियाकर्मियों को जानकारी देने से बचने के लिए फोन रिसीव तक नहीं करते। शाहनगर, पवई एवं धरमपुर रेन्ज अंतर्गत पूर्व में प्रकाश में आईं शिकार की घटनाओं की जानकारी जुटाने में पत्रकारों को वन विभाग के अफसरों के असहयोग से का सामना करना पड़ा। कुड़रा की घटना के संबंध में भी रविवार शाम से ही धरमपुर रेन्जर से संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन रविवार और सोमवार को कई बार कॉल करने के बाद भी उनका मोबाइल फोन रिसीव नहीं हुआ।
मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के वन विभाग में विगत दो वर्षों बेहद अराजकता पूर्ण स्थिति निर्मित होने से यहाँ न तो जंगल सुरक्षित हैं और न जानवर। वन्यजीवों के शिकार और वनों के विनाश से जुड़ी घटनाओं का चिंताजनक तेजी बढ़ता ग्राफ हालात के बेकाबू होने की खबर दे रहा है। लेकिन दुर्भाग्य यह है, इस गंभीर संकट की आहट को राजधानी भोपाल में बैठे वन विभाग के जिम्मेदार अनसुना करने के साथ-साथ पन्ना के नाकारा अफसरों की कारगुजारियों जानबूझकर नजरअंदाज भी कर रहे हैं। यह स्थिति बताती है सत्ता परिवर्तन होने का मतलब व्यवस्था में परिवर्तन होना नहीं है।
पन्ना जिले के उत्तर व दक्षिण सामान्य वन मण्डल तथा टाईगर रिजर्व अंतर्गत विगत दो वर्षों में करीब डेढ़ दर्जन तेन्दुओं, दो बाघों, एक भालू, एक मोर सहित दर्जनों की संख्या में शाकाहारी वन्यजीवों का शिकार होने, एक युवा हाथी की संदिग्ध मौत और शिकार के लिए जंगल में बिछाए गए विधुत तार के सम्पर्क में आने से एक व्यक्ति के असमय काल-कवलित होने सरीके हैरान करने वाले मामले सामने आए हैं। इन घटनाओं पर दिखावे के लिए डिप्टी रेंजर से लेकर नीचे के मैदानी अमले पर तो कार्रवाई की गई लेकिन अफसरों का बाल भी बाँका नहीं हुआ। वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर जबाबदेही का आभाव होने का ही यह दुष्परिणाम है कि जिले में बेजुबान वन्यजीवों के शिकार की घटनाएं और दीगर वन अपराध लगातार बढ़ रहे हैं।









