Home Blog Page 153

ई-निरीक्षण में आँगनवाड़ी केन्द्रों के संचालन की सच्चाई उजागर, कहीं अनुपस्थित मिलीं कार्यकर्ता-सहायिका, तो कहीं पर बच्चों की उपस्थिति रही कम

0
सांकेतिक फोटो।

* लापरवाह आंगनवाडी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं का मानदेय काटने के आदेश

शादिक खान,पन्ना।(www.radarnews.in) शासन की महत्वपूर्ण योजनाओं-कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की जमीनी सच्चाई का पता लगाकर व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से जिले में ई-निरीक्षण शुरू किया गया। निरीक्षण की इस नई व्यवस्था से विभिन्न विभागों के मैदानी अमले की कामचोरी और लापरवाही लगातार उजागर हो रही है। अच्छी बात यह है कि ई-निरीक्षण रिपोर्ट को संबंधित विभाग के जिला प्रमुख अधिकारी गंभीरता से लेते हुए लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ सख्त एक्शन ले रहे हैं। जिससे ई-निरीक्षण को लेकर मैदानी अमले में हड़कंप मचा है। ई-निरीक्षण के तहत ताजा कार्रवाई आंगनवाडी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं के खिलाफ की गई है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास पन्ना उदल सिंह ने बताया है कि कलेक्टर के आदेशानुसार विभिन्न विभागों के अधिकारियों द्वारा आंगनवाडी केन्द्रों का ई-निरीक्षण किया गया है। निरीक्षण के दौरान आंगनवाडी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं द्वारा की गयी अनियमितताओं के संबंध में मानदेय काटने के आदेश दिए गए हैं।
उन्होंने बताया है कि बाल विकास परियोजना पवई अन्तर्गत सेक्टर कल्दा आंगनवाडी केन्द्र बिरवाही का निरीक्षण राकेश कुमार प्रजापति राजस्व विभाग द्वारा किया गया। जिसमें कार्यकर्ता श्रीमती काशी बाई अनुपस्थित पाई गईं । पन्ना ग्रामीण अन्तर्गत सेक्टर मझगवा आंगनवाडी केन्द्र जरधोवा का निरीक्षण विष्णु त्रिपाठी स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा किया गया। जिसमें कार्यकर्ता श्रीमती हल्की बाई अनुपस्थित पायी गयी। पवई अन्तर्गत सेक्टर बिसानी आंगनवाडी केन्द्र बिसानी-डी का निरीक्षण डाॅ. एल.के. तिवारी स्वास्थ्य विभाग द्वारा किया गया। जिसमें कार्यकर्ता श्रीमती निर्मला तिवारी अनुपस्थित पायी गयी। इन सभी का 7-7 दिवस का मानदेय काटने के आदेश दिए गए हैं।
सांकेतिक फोटो।
इसी प्रकार परियोजना शाहनगर अन्तर्गत सेक्टर बिसानी आंगनवाडी केन्द्र सतधारा का निरीक्षण विष्णु त्रिपाठी स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा किया गया। जिसमें कार्यकर्ता श्रीमती सेठिया एवं सहायिका श्रीमती रामसखी यादव के केन्द्र में बच्चों की उपस्थति बहुत कम पायी गयी। इसी प्रकार सेक्टर बिसानी आगंनवाडी केन्द्र शाहपुरकला का निरीक्षण किया गया। जिसमें कार्यकर्ता कु. प्रीति गौतम एवं सहायिका श्रीमती गंगो बाई वर्मन के केन्द्र में बच्चों की उपस्थिति बहुत कम पायी गयी। इन सभी का 5-5 दिवस का मानदेय काटने के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने आंगनवाडी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं को अंतिम बार चेतावनी देते हुए निर्देशित किया है कि यदि भविष्य में इसी प्रकार की पुनरावृत्ति होती है तो बिना सूचना दिए सेवा से पृथक करने की कार्यवाही की जाएगी।
2

माशिमं की बोर्ड परीक्षाएं सोमवार से, जिले में 47 केन्द्रों पर कक्षा 12 वीं की परीक्षा में 11316 परीक्षार्थी होंगे शामिल

0
सांकेतिक फोटो।

* मंगलवार 3 मार्च से शुरू होंगी हाईस्कूल की परीक्षाएं

* परीक्षा केन्द्रों के पास लगाई प्रतिबंधात्मक धारा- 144

* कलेक्टर ने परीक्षार्थियों को दी शुभकामनाएं, बोले- तनाव रहित होकर दें परीक्षा

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) माध्यमिक शिक्षा मण्डल बोर्ड की परीक्षाएं सोमवार 02 मार्च से शुरू हो रहीं हैं। सोमवार को बोर्ड परीक्षाओं का आगाज कक्षा 12 वीं के हिन्दी के प्रश्न पत्र से होगा। जबकि कक्षा 10 वीं हाईस्कूल की परीक्षा मंगलवार 03 मार्च से प्रारम्भ होंगी। इस वर्ष पन्ना जिले में बोर्ड परीक्षाओं के लिए 47 केन्द्र बनाए गए हैं। सोमवार को इन केन्द्रों पर कक्षा 12 वीं के 11361 विद्यार्थी परीक्षा में सम्मलित होंगे। पन्ना जिला मुख्यालय में 05 केन्द्रों पर बोर्ड परीक्षाएं आयोजित होंगी। परीक्षा का समय प्रातः 09:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक रहेगा। परीक्षा केन्द्रों पर विद्यार्थियों को प्रातः 08:30 बजे से प्रवेश दिया जायेगा। शांतिपूर्वक एवं निर्विध्न परीक्षाएं आयोजित कराने के लिए पन्ना कलेक्टर कर्मवीर शर्मा द्वारा परीक्षा केन्द्रों के पास 144 धारा लगाई गयी है। रविवार को इस संबंध आम सूचना जारी की गई। परीक्षा की अवधि में जिले में रात्रि 10 बजे से सुबह 06 बजे तक ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर पूर्णतः प्रतिबंध लगा दिया गया है।

नकल रोकने के पुख्ता इंतजाम

सांकेतिक फोटो।
जिला शिक्षा अधिकारी पन्ना कमल सिंह कुशवाहा ने बताया कि मण्डल के द्वारा जारी निर्देशों के अनुरूप जिले में बोर्ड परीक्षाओं के व्यवस्थित आयोजन हेतु सभी आवश्यक तैयारियां पूरी की जा चुकीं है। परीक्षाओं में नकल को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। उड़नदस्ता दल परीक्षा के दौरान नियमित रूप से केन्द्रों का औचक निरीक्षण कर नक़ल की प्रभावी रोकथाम सुनिश्चित करने के साथ-साथ परीक्षा केन्द्रों की प्रत्येक गतिविधि पर पैनी नजर रखेंगे। प्रत्येक केन्द्र पर नकल रोकने की जबाबदारी संबंधित केंद्र अध्यक्ष की भी होगी। श्री कुशवाहा ने बताया कि संवेदनशील परीक्षा केन्द्रों की वीडियो रिकॉर्डिंग कराई जाएगी। जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि मंगलवार 03 मार्च से शुरू होने वाली कक्षा 10वीं हाईस्कूल परीक्षा में जिले के 16943 परीक्षार्थी शामिल होंगे।

नम्बर महत्वपूर्ण नहीं बल्कि आत्ममूल्यांकन जरूरी

पन्ना कलेक्टर कर्मवीर शर्मा।
कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले बच्चों एवं पालकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बच्चे निश्चिंत एवं तनावरहित होकर परीक्षाएं दें। नम्बर महत्वपूर्ण नहीं हैं बल्कि आत्ममूल्यांकन जरूरी है। उन्होंने कहा कि परीक्षार्थियों को ध्यान में रखते हुए परीक्षा केन्द्रों के पास 144 धारा लगाई गयी है। जिससे परीक्षा में किसी भी प्रकार का व्यवधान न हो। जिले में रात्रि 10 बजे से सुबह 06 बजे तक ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर पूर्णतः प्रतिबंध लगा दिया गया है। उन्होंने बच्चों के माता.पिता से अपील करते हुए कहा है कि बच्चों पर परीक्षा का दबाव व तनाव न डालें। उन्हें संबल प्रदान करने के साथ उनका आत्म विश्वास बढ़ाने में मदद करें। जिला प्रशासन आप सभी के साथ है।
2

प्राइवेट पार्ट पर लाठी से हमला कर भतीजे ने की चाचा की हत्या, जुआ खेलने के दौरान हुआ था विवाद

0
पन्ना जिले की पवई थाना पुलिस की अभिरक्षा में बहुचर्चित पटोरी हत्याकाण्ड का मुख्य अभियुक्त पुरुषोत्तम लोधी।

* पटोरी हत्याकाण्ड का पुलिस ने किया खुलासा

* मुख्य आरोपी पुरुषोत्तम लोधी गिरफ्तार, उसका भाई फरार

पवई/पन्ना। (www.radarnews.in) बहुचर्चित पटोरी हत्याकाण्ड का खुलासा करने का दावा करते हुए पुलिस ने इस मामले के मुख्य अभियुक्त पुरुषोत्तम लोधी पिता बद्री लोधी 33 वर्ष निवासी ग्राम सिमरा कला को गिरफ्तार किया है।
2

पवई मध्यम सिंचाई परियोजना का कलेक्टर ने किया निरीक्षण, सिंचाई परियोजनाओं में पेयजल सुरक्षित रखने के दिए निर्देश

0
जिले के शाहनगर विकासखण्ड अंतर्गत नवनिर्मत पवई मध्यम सिंचाई परियोजना का निरीक्षण करते पन्ना कलेक्टर कर्मवीर शर्मा।

* नहरों का शेष निर्माण कार्य जल्द पूर्ण करायें

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) जिले की शाहनगर जनपद पंचायत के ग्राम देवरा में आयोजित आपकी सरकार आपके द्वार शिविर में कलेक्टर कर्मवीर शर्मा द्वारा भाग लेने के उपरांत क्षेत्रीय लोगों के अनुरोध पर पवई मध्यम सिंचाई परियोजना तेंदूघाट का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान मुख्य कार्यपालन यंत्री जल संसाधन संभाग पवई बी.एल. दादौरिया को निर्देश दिए कि परियोजना में गर्मी के दिनों में इतना पानी भण्डारित रखें जिससे समूल नलजल योजना के लिए पानी की कमी न पड़े।
मौके पर उपस्थित कार्यपालन यंत्री जल संसाधन श्री दादौरिया ने बताया कि यह मध्यम सिंचाई परियोजना 174 मीटर लम्बी एवं 37.50 मीटर पक्के बांध की ऊचाई है। इसके अलावा 632 मीटर लम्बाई एवं 23 मीटर ऊचाई मिट्टी का बांध है। इस परियोजना में 9 गेट लगाए गए हैं। इसका जल ग्रहण क्षेत्र 995 किलो मीटर तथा बांध में जल भराव की क्षमता 138.60 मिली. घन मीटर तथा जीवित जल भराव क्षमता 122.25 मिली घन मीटर है। इस बांध से बनने वाली नहरों का काम लगभग पूरा हो गया है। इसकी वायी तरफ नहर से 6643 तथा दाई तरह नहर से 1720 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई इस बांध से समूह नलजल योजना के माध्यम से लगभग 150 ग्रामों को पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा।
कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने बांध एवं नहर का निरीक्षण करने के उपरांत निर्देश दिए कि नहरों का कार्य शीघ्र पूर्ण कराया जाए। जिससे आगामी मौसम में किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिल सके। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि यदि कही भूमि अधिग्रहण करने की आवश्यकता है तो पटवारी से सम्पर्क स्थापित कर भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि जिले में जो भी बांध अथवा नहरें निर्माणाधीन हैं उन सभी के भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही शीघ्र पूर्ण कर ली जाए। जिन सिंचाई बांधों पर समूह नलजल योजना स्थापित की गयी हैं उनके लिए हर समय आवश्यकतानुसार जल की उपलब्धता सुनिश्चित करें। निरीक्षण के दौरान जिला पंचायत सीईओ बालगुरु के. एवं अतिरिक्त सीईओ अशोक चतुर्वेदी भी उपस्थित रहे।
2

गौवंशीय पशुओं का अवैध रूप से परिवहन कर रहे ट्रक को पकड़ा

0
इस तरह ले जाए जा रहे थे गौवंशीय पशु।

* वाहन चैकिंग के दौरान 79 वाहनों पर की गयी कार्यवाही

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) यातायात थाना पुलिस पन्ना ने वाहन चेकिंग के दौरान अजयगढ़-छतरपुर बाईपास मार्ग पर गौवंशीय पशुओं का परिवहन करते हुए एक ट्रक को पकड़ा है। पशुओं का अवैध रूप से परिवहन कर उन्हें बूचड़खाने ले जाने का संदेह है। गुरुवार 27 फरवरी को प्रातः 6:30 बजे छतरपुर बाईपास रोड में मुखबिर की सूचना पर आईसर ट्रक क्रमाँक एमएच-48/जे-1699 को पकड़ा गया। यातायात पुलिस के अनुसार इस ट्रक में अवैध रूप से 16 नग गौवंशीय पशुओं का परिवहन किया जा रहा था। इस मामले में अग्रिम कार्यवाही हेतु ट्रक को थाना कोतवाली पन्ना को सुपुर्द किया गया है।
यातायात थाना पुलिस पन्ना द्वारा पकड़ा गया ट्रक।
इसके अलावा दिनाँक 25 एवं 26 फरवरी को 79 वाहनों के विरूद्ध चालानी कार्यवाही की जाकर 34,500/- रूपये समन शुल्क वसूल किया गया। वाहन चैकिंग की कार्रवाई में थाना प्रभारी नीतू ठाकुर, प्रधान आरक्षक सज्जन प्रसाद, आरक्षक उमाशंकर सिंह, सुनील पाण्डेय, चालक सत्येन्द्र सिंह शामिल रहे। इस कार्रवाई को वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देशन में सफलता पूर्वक अंजाम दिया गया।
2

क्राइम : जुआ की जीत में हार गया जिंदगी, बेटी का फलदान लेकर जाने की थी तैयारी लेकिन चंद घण्टे पहले हुई पिता की हत्या, बेरहमी से क़त्ल कर सड़क पर फेंका शव !

0
घटनास्थल का मुआयना करते पुलिस अधिकारी एवं मौके पर मौजूद ग्रामीण।

* पन्ना जिले के पवई थाना क्षेत्र के पटोरी ग्राम की घटना

* हत्या की सनसनीखेज़ वारदात के बाद इलाके में उपजा तनाव

* आक्रोशित परिजनों ने पवई-दमोह मार्ग पर किया चक्काजाम

* संदिग्धों को हिरासत में लेकर पुलिस कर रही सघन पूँछताँछ

अजित बढ़ौलिया, पन्ना/पवई। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में हत्या की एक बेहद खौफनाक और विचलित करने वाली वारदात सामने आई है। जिले के पवई थाना अंतर्गत पटोरी गाँव में आटा चक्की संचालक रामचरण लोधी 48 वर्ष की बुधवार तड़के बड़ी ही बेरहमी से हत्या कर दी गई। अज्ञात कातिलों ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए रामचरण लोधी के प्रायवेट पार्ट (गुदा) में लोहे की रॉड या सब्बल डालकर उसकी निर्ममता पूर्वक हत्या कर दी।
सड़क पर मोटरसाइकिल खड़ी कर चक्काजाम करते हुए आक्रोशित लोग।
इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने के बाद अज्ञात कातिलों ने अपने जुर्म को छिपाने के मकसद से शव को सड़क पर फेंककर इसे दुर्घटना में मौत होना दिखाकर गुमराह करने की कोशिश की गई। लेकिन शव की हालत और घटनास्थल के साक्ष्य चींख-चींख कर सच्चाई बयाँ कर रहे थे। हत्या की जघन्य वारदात की खबर आते ही इलाके में तनाव फ़ैल गया। आक्रोशित परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जाँच और हत्यारोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने की माँग को लेकर पवई-दमोह मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों के विशेष प्रयासों के फलस्वरूप करीब 4 घण्टे बाद बमुश्किल चक्काजाम समाप्त होने पर वाहनों आवागमन बहाल हो सका।
फाइल फोटो।
प्राप्त जानकारी के अनुसार रामचरण पिता कढ़ोरी लोधी 48 वर्ष निवासी सिमराकलाँ की तहसील मुख्यालय पवई में आटा चक्की स्थापित है। रामचरण लोधी प्रतिदिन की तरह मंगलवार 25 फरवरी की देर शाम चक्की बंद करने के बाद अपने पवई से अपने गाँव सिमराकलाँ के लिए मोटरसाइकिल से निकला था। बुधवार को उसे अपनी बेटी का विवाह पक्का करने लिए फलदान लेकर जाना था, इसलिए वह करीब 2 लाख रूपये भी लिए था। रास्ते में रामचरण लोधी पटोरी गाँव में रुका जहाँ उसने कथित तौर अपने परचितों-रिश्तेदारों के साथ शराब पी और फिर जुआ भी खेला।
किस्मत से रामचरण जुआ में बड़ी रकम जीत गया। ऐसी चर्चा है कि बुधवार तड़के जब वह वापस अपने गाँव जाने लगा तो जुआ में रुपए हारने वालों की नियत में खोट आ गया। उन सब लोगों ने मिलकर रामचरण लोधी से पूरे रुपए छीन लिए और फिर बड़ी ही बेरहमी से उसकी हत्या भी कर दी गई। अज्ञात कातिलों ने अपने गुनाह को छिपाने के लिए शव को घटनास्थल से थोड़ी दूर सड़क पर फेंक दिया। शव के ही पास हेलमेट तोड़कर डाल दिया और अन्य सामान भी आसपास बिखेर दिया गया। ताकि लोग समझें कि रामचरण की मौत सड़क हादसे में हुई है। लेकिन उसकी बाइक शव से 500 मीटर दूर पड़ी थी।
रामचरण लोधी की हत्या की खबर फैलने के बाद पटोरी गांव जमा भीड़।
आज सुबह जब लोग नींद से जागे तो सड़क पर रामचरण को संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पड़ा देखकर दंग रह गए। उसके पैंट में काफी खून लगा था। यह खबर जंगल की आग की तरह पूरे क्षेत्र फ़ैल गई और कुछ ही देर में मृतक के परिजनों समेत गाँव के लोग बड़ी तादाद में मौके पर जमा हो गए। हत्या की वारदात की जानकारी मिलते ही पवई थाना प्रभारी एस.पी. शुक्ला व एसडीओपी विक्रम सिंह परिहार दलबल के साथ तुरंत पटोरी पहुंचे। शव की हालत, घटनास्थल के साक्ष्य एवं समग्र परिस्थितयों के मद्देनजर लोगों को यह समझने में देर नहीं लगी कि रामचरण लोधी की बेहद खौफनाक तरीके से हत्या करने के बाद शव को लाकर सड़क पर फेंका गया है।
एक घर में मिले खून के धब्बे देखते पुलिस अधिकारी एवं समीप बैठा पुलिस डॉग।
घटना की गंभीरता को देखते हुए पन्ना से पुलिस की फोरेंसिक टीम व प्रशिक्षित डॉग को मौके पर बुलाया गया। प्रारंभिक जाँच के आधार पर यह आशंका जताई जा रही है कि अज्ञात कातिलों द्वारा रामचरण लोधी के प्रायवेट पार्ट (गुदा) में लोहे की रॉड या सब्बल डालकर उसकी निर्ममता पूर्वक हत्या की गई। पुलिस ने शव के पास से टूटा हुआ हेलमेट, थैला, जूते आदि सामान बरामद किया है। एक घर में खून के धब्बे भी मिले हैं। पुलिस का डॉग भी शव के आसपास की गंध लेने के बाद उसी घर में गया था। इस दौरान कतिपय ग्रामीणों ने पुलिस को उन लोगों के नाम भी बताए हैं जिनके साथ रात्रि में रामचरण को देखा गया था। पवई थाना पुलिस ने इस घटना पर फिलहाल मर्ग कायम कर मामले को जाँच में लिया है।

चार घण्टे तक बंद रहा पवई-दमोह मार्ग

चक्काजाम के चलते सड़क किनारे खड़े वाहन।
हत्या की इस जघन्य वारदात से उपजे जबरदस्त तनाव के बीच आक्रोशित परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जाँच और हत्यारोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने की माँग को लेकर पवई-दमोह मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। चक्काजाम के चलते इस मार्ग के दोनों तरफ वाहनों की लम्बी कतार लग गई। मौके पर पहुंचे पवई एसडीएम एवं पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाईश और आश्वासन देकर बमुशिकल चक्काजाम को समाप्त कराया। इस तरह करीब चार घण्टे चक्काजाम समाप्त होने पर पवई-दमोह मार्ग वाहनों की आवाजाही शुरू हो सकी।

मातम में बदलीं खुशियाँ

पीड़ित परिजनों एवं ग्रामीणों से चर्चा करते हुए पवई एसडीएम एवं एसडीओपी।
पीड़ित परिजनों ने पुलिस को जानकारी देते हुए बताया कि बुधवार 26 फरवरी की सुबह रामचरण लोधी को अपनी बेटी का विवाह पक्का करने की रस्म के तौर पर फलदान लेकर जाना था। पिछले कई दिनों से घर पर इस कार्यक्रम की तैयारियां चल रहीं थी। पूरे परिवार में ख़ुशी और उत्सव का माहौल था। लेकिन फलदान की रस्म के लिए रवाना होने के कुछ घण्टे पहले ही रामचरण की नृशंस हत्या की दुखद खबर आने से लोधी परिवार में कोहराम मच गया। कुछ घण्टे पहले तक जिस घर में सब खुश और उत्साहित थे अब वहाँ मातमी चींखें सुनाई दे रहीं हैं। पीड़ित परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। मृतक के गाँव सिमराकलाँ में भी मातम का माहौल है।

इनका कहना है –

“मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है, इसके आधार पर ही प्रकरण में आगे कार्रवाई की जाएगी। रात्रि में जो लोग रामचरण के साथ रहे उन सभी की तालश में पुलिस पार्टियां जुटीं है। इस घटना के सभी पहलुओं की बारीकी से जाँच की जा रही है, उम्मीद है बहुत जल्द सब स्पष्ट हो जाएगा।”

– विक्रम सिंह परिहार, एसडीओपी पवई।

“रामचरण लोधी ने रात्रि में शराब पीने के बाद जुआ खेला था जिसे लेकर विवाद होने की बातें सामने आई है। इनकी सच्चाई का पता लगाने के लिए कुछ संदेहियों से पूँछताँछ की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यदि हत्या होना पाया जाता है तो उसके आधार पर आपराधिक प्रकरण दर्ज कर मामले का जल्द से जल्द खुलासा किया जाएगा।”

– एस.पी. शुक्ला, थाना प्रभारी पवई जिला पन्ना।

2

कृषि सीजन में प्रदेश के कृषकों को 10 घंटे बिजली प्रदाय सुनिश्चित करने समय सारणी निर्धारित

0
सांकेतिक फोटो।
भोपाल। (www.radarnews.in) ऊर्जा मंत्री प्रियव्रत सिंह के निर्देशानुसार प्रदेश की तीनों विद्युत वितरण कंपनियों द्वारा रबी के मौसम के दौरान कृषकों को 10 घंटे बिजली देने के लिए प्रभारी मंत्री से अनुमोदन के बाद समय सारणी का निर्धारण कर दिया गया है।
मध्यप्रदेश विद्युत वितरण कंपनी के अंतर्गत होशंगाबाद, ग्वालियर, भिण्ड, मुरैना, दतिया, गुना, अशोक नगर एवं श्योपुर जिलों में कृषि कार्य के लिये लगातार 10 घंटे विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। सीहोर, राजगढ़, बैतूल, रायसेन, विदिशा, भोपाल एवं हरदा में जिला योजना समिति के अनुमोदन से 4+6 घंटे की समय सारणी लागू कर दी गई है।
पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अंतर्गत गैर कृषि फीडर पर 24 घंटे तथा 11 केव्ही कृषि फीडरों को दो भागों में क्रमश: ग्रुप ए व ग्रुप बी में विभक्त कर 10 घंटे विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। छिंदवाड़ा, दमोह, जिले में लगातार 10 घंटे विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। इसी तरह बाकी शेष जिले कटनी, जबलपुर, मंडला, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सागर, सिवनी, छतरपुर, टीकमगढ़, रीवा, सीधी, सतना, शहडोल में 4+6 घंटे विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। समय सारणी को पाक्षिक स्तर पर आपस में बदल दिया जाता है।
पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अंतर्गत 11 जिलों में प्रभारी मंत्री के अनुमोदन के बाद 4+6 घंटे की समय सारणी लागू कर दी गई है। खंडवा, बुरहानपुर, झाबुआ एवं रतलाम जिला योजना समिति की बैठक होना शेष होने के कारण पूर्ववत 4+6 समय सारणी लागू है।
2

जरूरतमंदों की मदद कर हम अपने धर्मों का पालन करते हैं : कमलनाथ

0
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मसाजिद कमेटी के नए भवन का लोकार्पण किया।

* मुख्यमंत्री ने मसाजिद कमेटी के नए भवन का लोकार्पण

* इमाम का 5000 एवं मोईज्जन का 4500 रुपये होगा मानदेय

भोपाल। (www.radarnews.in) मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा है कि मानव सेवा सबसे बड़ा धर्म है। इसके जरिए हम जरूरतमंद लोगों की मदद करके अपने धर्म और धर्म द्वारा दिए गए संदेश का पालन करते हैं। मुख्यमंत्री आज ताजुल मसाजिद के समीप मध्यप्रदेश मसाजिद कमेटी के नए भवन का लोकार्पण कर रहे थे। कमल नाथ ने इस मौके पर अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री आरिफ अकील द्वारा इमाम के मानदेय को 2200 से बढ़ाकर 5000 एवं मोईज्जनों के मानदेय को 1900 से बढा़कर 4500 रूपये करने के प्रस्ताव पर सहमति प्रदान की।
मुख्यमंत्री कमल नाथ ने मसाजिद कमेटी के नए भवन के लोकार्पण समारोह को संबोधित किया।
मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा कि हमारा देश और हमारी संस्कृति इसलिए महान है क्योंकि इसमें एक-दूसरे के प्रति आदर और सम्मान की भावना के साथ ही एकजुट होकर रहने की विशेषता है। कमल नाथ ने कहा कि हमारी यह अनेकता में एकता की संस्कृति आज तक इसलिए अक्षुण्ण है क्योंकि पुरानी पीढ़ी के लोगों ने इसे न केवल निभाया बल्कि सुरक्षित रखने के लिए समर्पित भी रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि हम अपने देश की महान संस्कृति के मूल, सभ्यता और विविधता को युवा पीढ़ी तक पहुंचाएँ और वे इसे आत्मसात करें, जिससे हमारा देश सदैव सुरक्षित और एकजुट रह सके। कमल नाथ ने कहा कि बुजुर्गों का यह दायित्व है कि वे भावी पीढ़ी को सही दिशा और दृष्टि प्रदान करें।
मुख्यमंत्री कमल नाथ ने मसाजिद कमेटी के नए भवन के लोकार्पण समारोह में बालिकाओं को छात्रवृत्ति वितरित की।
भोपाल जिले के प्रभारी सहकारिता मंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने कहा कि मसाजिद कमेटी सेवा के क्षेत्र में अनुकरणीय संस्था है, जो समाज के गरीब वर्गों को मदद और संबल प्रदान करती है। अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री आरिफ अकील ने कहा कि मसाजिद कमेटी का नए भवन बनने से लोगों की मदद करने के काम को व्यवस्थित किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर मसाजिद कमेटी द्वारा जरूरतमंद बालिकाओं को दी जाने वाली छात्रवृत्ति का वितरण किया।
2

बेकाबू हुए हालात : जंगल में करंट बिछाकर तेंदुए का शिकार, खाल और पंजे ले गए अज्ञात शिकारी, बेजुबान वन्यजीवों के शिकार की नहीं थम रहीं घटनाएं

0
पन्ना के उत्तर वन मण्डल अंतर्गत कुछ समय पूर्व जंगल में करंट बिछाकर शिकार किये गए तेंदुए का शव।

* उत्तर वन मण्डल पन्ना अंतर्गत धरमपुर रेन्ज का मामला

* सोता रहा मैदानी वन अमला सप्ताह भर बाद लगी भनक

* पन्ना में अब महफूज़ नहीं वन्यजीव, वृक्ष और बहुमूल्य खनिज संपदा

* जिले जंगलों में सक्रिय है शिकारी, वन्यजीव तस्कर और खनन माफिया

* दो वर्ष में डेढ़ दर्जन तेन्दुओं, दो बाघों सहित अन्य वन्यजीवों का हुआ शिकार

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश का पन्ना जिला बेजुबान वन्यजीवों के शिकार की बढ़ती घटनाओं एवं दूसरे वन अपराधों को लेकर लम्बे समय सुर्ख़ियों में बना है। जिले के जंगलों में शिकारी गिरोहों और वन्यजीव तस्करों के सक्रिय होने से यहाँ के उत्तर-दक्षिण वन मण्डल व टाईगर रिजर्व अंतर्गत शिकार की घटनाएं लगातार सामने आ रहीं हैं। निरीह वन्य प्राणियों के शिकार और वनों की विनाशलीला पर रोक लगाने में वन विभाग के अफसर अब तक नाकाम साबित हुए हैं। इनके प्रयासों में दृढ़ इच्छाशक्ति, रणनीति और आपसी समन्वय का आभाव साफ़ नजर आता है। फील्ड में वनों की सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था लगभग ठप्प होने से हालात बेकाबू हो चुके हैं। परिणामस्वरूप शिकार की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रहीं।
ताजा मामला पन्ना जिले के उत्तर वन मण्डल की धरमपुर रेन्ज अंतर्गत सामने आया है। यहाँ की कुड़रा बीट के वन कक्ष क्रमाँक -53 में प्राचीन बीहर के समीप सप्ताह भर पुराना एक वन्यजीव का क्षत-विक्षत शव मिला है, मृत वन्यजीव तेंदुआ है या लकड़बग्घा अधिकारिक तौर यह स्पष्ट नहीं हो सका। लेकिन जानकार उसे तेंदुआ बता रहे हैं। घटनास्थल पर मिले साक्ष्यों से इतना तय है कि उक्त तेंदुए का शिकार किया गया है। शिकार की घटना को अंजाम देने के लिए जंगल में विधुत तार बिछाकर उसमें करंट प्रवाहित किया गया लेकिन इसकी भनक तक मैदानी अमले और वन विभाग के अफसरों को नहीं लगी।
घटनास्थल का मुआयना करतीं उत्तर वन मण्डल पन्ना की डीएफओ मीना मिश्रा व उप वनमण्डलाधिकारी नरेन्द्र सिंह।
शिकार की इस हैरान करने वाली घटना का खुलासा रविवार 23 फरवरी को तब हुआ जब दूरस्थ पहुँच विहीन ग्राम कुड़रा के जंगल में कुछ ग्रामीण लकड़ियां लेने गए। धरमपुर-कुड़रा के बीच जंगल में स्थित प्राचीन बीहर के समीप भीषण दुर्गन्ध आने पर ग्रामीणों ने जब समीप जाकर देखा तो मौके पर तेंदुए का कंकालनुमा क्षत-विक्षत शव पड़ा था। ग्रामीणों के द्वारा इसकी सूचना शाम के समय धरमपुर रेंजर बी.के. विश्वकर्मा को दी गई। रविवार देर शाम को धरमपुर रेंजर मैदानी अमले के साथ मौके पर पहुंचे लेकिन तब तक काफी अंधेरा हो चुका था। वन्यजीव के शव की सुरक्षा की दृष्टि से रात्रि में मैदानी अमले को तैनात किया गया।
अगले दिन सोमवार 24 फरवरी की सुबह धरमपुर रेंजर बी.के. विश्वकर्मा पुनः कुड़रा के जंगल पहुँचे। घटना की गंभीरता को देखते हुए उत्तर वन मण्डल पन्ना की डीएफओ मीना मिश्रा व उप वनमण्डलाधिकारी नरेन्द्र सिंह ने मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का जायजा लिया। शिकार की सनसनीखेज घटना के खुलासे एवं अज्ञात शिकारियों का सुराग लगाने के लिए प्रशिक्षित डॉग की मदद ली गई। प्रशिक्षित डॉग मौके की गंध लेकर कुछ घरों तक गया जिसके आधार पर कुछ संदिग्धों की पहचान हुई है। संदिग्धों के घर पर न मिलने से सर्च वारंट जारी कर इनके घरों की तलाशी ली जा रही है।

क्लिच वायर के फंदा और चीतल के सींग मिले

एक संदिग्ध के घर के बाहरी हिस्से में वन अमले को तलाशी के दौरान कई आपत्तिजनक चीजें मिलीं हैं। जिनमें वन्यजीवों के शिकार में प्रयुक्त होने वाला क्लिच वायर का फंदा, चीतल के सींग और सेही के काँटे आदि शामिल हैं। उक्त सामग्री बरामद होने की पुष्टि उत्तर वन मण्डल पन्ना के उप वनमण्डलाधिकारी नरेन्द्र सिंह ने की है। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि संदिग्ध व्यक्ति घर पर नहीं है, उसके घर पर ताला पड़ा है। घर के अंदर की तलाशी लेने के लिए सर्च वारंट जारी कर किया जा चुका है, उसकी पत्नी को वारंट तामील कराकर आज ही अंदर की तलाशी ली जाएगी। समाचार लिखे जाने तक इस मामले में एक भी आरोपी की गिरफ़्तारी नहीं हो सकी थी।

जंगल में गड़ी मिलीं खूंटियाँ

धरमपुर रेन्ज की कुड़रा बीट अंतर्गत जिस स्थान क्षत-विक्षत हालत में तेंदुए का शव मिला हैं, वहीं जमीन में कई खूंटियाँ गड़ी पाई गईं। जिससे यह संभावना जताई जा रही है कि इन्हीं खूँटियों के जरिए बीहर (जलस्रोत) के आसपास करंट का जाल बिछाया गया ताकि पानी पीने के लिए आने वाले वन्यजीवों को आसानी से निशाना बनाया जा सके। इस करंट की चपेट में आने से ही तेंदुए की मौत हुई है। अज्ञात शिकारी तेंदुए की खाल निकालकर उसके पंजे भी काट ले गए। इस घटना ने वन विभाग में व्याप्त अराजकता की पोल खोलकर रख दी है। मृत तेंदुए का शव जंगल में सप्ताह भर तक सड़ता रहा लेकिन इसकी भनक तक मैदानी वन अमले को नहीं लगी।
इससे पता चलता है कि फील्ड स्टॉफ वनों एवं वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर कितना सजग और ईमानदार है। अधिकाँश वनकर्मी जंगल में रहकर ड्यूटी करने के बजाए अपने घरों में आराम फरमाते हैं, जिससे जंगल की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चौपट हो चुकी है। मैदानी अमले की गतिविधियों की निगरानी करने वाले जिम्मेदार अधिकारी भी बेपरवाह बने है। इस लचर स्थिति का लाभ उठाते हुए शिकारी बैखोफ होकर शिकार की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। अपुष्ट सूत्रों से पता चला है जिस स्थान पर तेंदुआ मृत मिला वहां आसपास बड़ी तादाद में वन्यजीवों के अवशेष बिखरे पड़े हैं। जिससे यह संभावना जताई जा रही है कि वहाँ नियमित रूप से शिकार होता है। कुड़रा का जंगल पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश की सीमा के नजदीक होने से वहाँ यूपी के शिकारियों के भी आने की चर्चाएं हैं।

बाघ और तेंदुए निशाने पर

सांकेतिक फोटो।
पन्ना के जंगलों में विचरण करने वाले बाघ और तेंदुए शिकारियों-तस्करों के निशाने पर हैं, विगत दो वर्षों में हुई शिकार की घटनाओं से यह बात साफ़ हो चुकी है। यहाँ के जंगलों में शिकारियों ने चप्पे-चप्पे पर अपना जाल बिछा रखा है। परिणामस्वरूप कड़ी सुरक्षा वाले पन्ना टाईगर रिजर्व के कोर जोन तक में बाघ और दूसरे वन्यजीव सुरक्षित नहीं हैं। शिकारियों की बढ़ती सक्रियता के मद्देनजर पन्ना में पुनः आबाद हुए बाघों के संसार पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। सर्वविदित है कि कई बाघ पन्ना टाईगर रिजर्व से निकलकर उत्तर एवं दक्षिण वन मण्डल के जंगलों में विचरण कर रहे हैं। सामान्य वन मण्डलों में सुरक्षा व्यवस्था की स्थित अत्यंत ही लचर होने से बाघों पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। यदि शीघ्र ही सुरक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं की गई तो जिले के सामान्य वन क्षेत्रों से बाघ और तेन्दुओं का नामो-निशान मिट सकता है।

घटना पर पर्दा डालने का प्रयास

शिकार की घटनाओं तथा दूसरे वन अपराधों की रोकथाम में नाकाम साबित हो रहे वन विभाग के कतिपय अधिकारी अब अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए तरह-तरह के शर्मनाक प्रयास कर रहे हैं। शिकार आदि की घटना को पहले तो इनके द्वारा झुठलाने की कोशिश की जाती है या फिर जानकारी के बाद भी अनभिज्ञ होने की नौटंकी करते हैं। इसके बाद भी यदि कोई मामला उजागर होता है तो वन विभाग के कतिपय अधिकारी मीडियाकर्मियों को जानकारी देने से बचने के लिए फोन रिसीव तक नहीं करते। शाहनगर, पवई एवं धरमपुर रेन्ज अंतर्गत पूर्व में प्रकाश में आईं शिकार की घटनाओं की जानकारी जुटाने में पत्रकारों को वन विभाग के अफसरों के असहयोग से का सामना करना पड़ा। कुड़रा की घटना के संबंध में भी रविवार शाम से ही धरमपुर रेन्जर से संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन रविवार और सोमवार को कई बार कॉल करने के बाद भी उनका मोबाइल फोन रिसीव नहीं हुआ।
इसी तरह उत्तर वन मण्डल पन्ना की डीएफओ के मोबाइल पर रिंग जाने के बाद भी उनका फोन रिसीव नहीं हुआ। अफसरों के इस रवैये से उनकी स्वेक्षाचारिता पूर्ण कार्यशैली परिलक्षित होती है। इससे पता चलता है कि वे कितने जबाबदेह और संवेदनशील हैं। विभाग में चर्चा है कि अफसरों ने कुड़रा की घटना को दबाने के लिए मौके पर गए वन अमले के मोबाइल फोन बंद करा दिए थे। किसी से भी बात करने और मृत तेंदुए के फोटो लेने की वनकर्मियों को सख्त मनाही थी। इतना ही नहीं अजयगढ़ के एक मीडियाकर्मी को भी घटनास्थल का वीडियो बनाने से रोका गया। विदित होकि इसके पूर्व धरमपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत जब फंदे में तेंदुआ फंसा था तो रेंजर पहले घटना को ही झुठलाया फिर बाद में संदेह पैदा करने के लिए लकड़बग्घा के फँसे होने की संभावना व्यक्त कर मामले को जाँच के नाम पर रफा-दफा कर दिया गया।

अधिकारियों पर नहीं होती कार्रवाई

मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के वन विभाग में विगत दो वर्षों बेहद अराजकता पूर्ण स्थिति निर्मित होने से यहाँ न तो जंगल सुरक्षित हैं और न जानवर। वन्यजीवों के शिकार और वनों के विनाश से जुड़ी घटनाओं का चिंताजनक तेजी बढ़ता ग्राफ हालात के बेकाबू होने की खबर दे रहा है। लेकिन दुर्भाग्य यह है, इस गंभीर संकट की आहट को राजधानी भोपाल में बैठे वन विभाग के जिम्मेदार अनसुना करने के साथ-साथ पन्ना के नाकारा अफसरों की कारगुजारियों जानबूझकर नजरअंदाज भी कर रहे हैं। यह स्थिति बताती है सत्ता परिवर्तन होने का मतलब व्यवस्था में परिवर्तन होना नहीं है।
पन्ना जिले के उत्तर व दक्षिण सामान्य वन मण्डल तथा टाईगर रिजर्व अंतर्गत विगत दो वर्षों में करीब डेढ़ दर्जन तेन्दुओं, दो बाघों, एक भालू, एक मोर सहित दर्जनों की संख्या में शाकाहारी वन्यजीवों का शिकार होने, एक युवा हाथी की संदिग्ध मौत और शिकार के लिए जंगल में बिछाए गए विधुत तार के सम्पर्क में आने से एक व्यक्ति के असमय काल-कवलित होने सरीके हैरान करने वाले मामले सामने आए हैं। इन घटनाओं पर दिखावे के लिए डिप्टी रेंजर से लेकर नीचे के मैदानी अमले पर तो कार्रवाई की गई लेकिन अफसरों का बाल भी बाँका नहीं हुआ। वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर जबाबदेही का आभाव होने का ही यह दुष्परिणाम है कि जिले में बेजुबान वन्यजीवों के शिकार की घटनाएं और दीगर वन अपराध लगातार बढ़ रहे हैं।

इनका कहना है –

“मृत वन्यजीव का शव क्षत-विक्षत होने से उसकी पहचान काफी मुश्किल हो रही है, शव तेंदुए का भी हो सकता है। लेकिन मुँह देखकर लगता है कि लकड़बग्घा है। मृत वन्यप्राणी की पहचान डीएनए जाँच के जरिए होगी। इसके लिए वन्यप्राणी के सैम्पल लेकर उन्हें जाँच के लिए भेजा जा रहा है, जाँच रिपोर्ट आने पर ही अधिकारिक तौर पहचान स्पष्ट हो पाएगी। शिकार की यह घटना मैदानी अमले की लापरवाही के कारण हुई है।”

–  नरेन्द्र सिंह, उप वनमण्डलाधिकारी उत्तर वन मण्डल पन्ना।

2

विशेष लेख : प्रकृति के सफाईकर्मी कहलाने वाले गिद्धों के संरक्षण के जारी हैं कारगर प्रयास, मध्य प्रदेश में पाई जाती हैं इनकी सात प्रजातियाँ

0
सांकेतिक फोटो।

* मृत जानवरों को खाकर पर्यावरण को बनाते हैं स्वच्छ

* पहाड़ की कंदराओं अथवा ऊँचे पेड़ों पर करते हैं बसेरा

पारिस्थितिकीय संतुलन में गिद्ध की महत्वपूर्ण भूमिका है। जानवरों का सड़ा, बदबूदार माँस और गंदगी मिनटों में चट कर ये पर्यावरण को स्वच्छ और सम्पूर्ण पृथ्वी को महामारी से बचाते हैं। भारत सहित विश्व में गिद्धों की चिंतनीय ढंग से कम हुई संख्या को देखते हुए मध्यप्रदेश में गिद्धों के संरक्षण के कारगर प्रयास किये जा रहे हैं। गिद्धों को विलुप्तप्राय बनाने में सबसे बड़ा कारण डायक्लोफिनेक नामक दवा की मृत पशु अवशेषों में मौजूदगी है।
मध्यप्रदेश में 7 प्रजाति के, भारत में 9 और विश्व में 22 प्रकार के गिद्ध पाये जाते हैं। प्रदेश में सफेद गिद्ध, चमर गिद्ध, देशी गिद्ध, पतल चोंच गिद्ध, राज गिद्ध, हिमालयी गिद्ध, यूरेशियाई गिद्ध और काला गिद्ध की मौजूदगी मिली है।

सफेद गिद्ध

सफेद गिद्ध (Egyptian Vulture) मध्यप्रदेश के अलावा गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान और उत्तराखण्ड में भी दिखाई पड़ता है।
वर्णन – छोटे गिद्ध, जिनमें लम्बे नुकीले पंख, छोटा नुकीला सिर तथा फनाकार पूँछ। वयस्क मुख्यत: मटमैले-श्वेत, जिनका मुँह पंख-रहित पीताभ तथा उड़ान-पंख काले। तरुण काले-भूरे, जिनका मुँह पंख-रहित धूसर। वयस्कता के साथ-साथ पूँछ, शरीर तथा पर पंखनी सफेद तथा मुँह पीताभ होते चले जाते हैं। मानव आवासीय स्थलों के समीप खुले स्थानों में व्याप्त। हिमालय में 2500 मी. की ऊँचाई तक दिखाई देते हैं। सम्भवत: अब यह क्षेत्र (फील्ड) का सबसे आम गिद्ध है। भोजन की तलाश में व्यापक क्षेत्रों का भ्रमण करता है। घोसला चट्टानों, पेड़ों तथा पुराने भवनों में बनाता है।
पंख सफेद होते हैं, जो किनारों पर काले होते हैं। चेहरा छोटा, रोएंदार एवं पीले रंग का होता है। चोंच पतली तथा पीले या ग्रे रंग की होती है। लिंग एक समान दिखते हैं। आकार में चील से मिलता-जुलता है। बच्चा काले रंग का होता है।

चमर गिद्ध

चमर गिद्ध (White-rumped Vulture) मध्यप्रदेश के अलावा गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड आदि में पाया जाता है।
वर्णन – जिप्स गिद्धों में सबसे छोटे। वयस्क मुख्यत: काले, जिनमें पुट्ठा तथा पृष्ठ सफेद तथा निचले पर पंखनी सफेद होते हैं। तरुणावस्था के मुख्य लक्षण : गहरा भूरा रंग, धारीदार अधरभाग तथा ऊपरी पर-पंखनी, गहरे पुट्ठा तथा पृष्ठ भाग, सफेद सिर और गला तथा पूर्णत: गहरी चोंच। उड़ान के समय अधर भाग तथा चिले पर पंखनी देसी गिद्ध तथा पतलचोंच गिद्ध के समान भागों के रंगों से विशिष्ट रूप से गहरे। तरुणावस्था में रंग हिमालयी गिद्ध के तरुण के समान परंतु अत्यधिक छोटा तथा अल्पाकार, पंख पतले तथा दुम छोटी। इसके अधरभाग पर भी अल्प धारियाँ तथा अग्रपीठ तथा कंधे पर स्पष्ट धारियों की अनुपस्थिति। बस्तियों के समीप स्थानों में व्याप्त समतल तथा पहाड़ियों पर 2500 मी. की ऊँचाई तक दिखाई देते हैं। इनका ज्यादातर समय उड़ते हुए बीतता है। बहुत मिलनसार होते हैं। रात्रि निवास ऊँचे वृक्षों के अलावा, ऐतिहासिक इमारतों, पहाड़ों की कंदराओं में करते हैं। इनका घोंसला ऊँचे पेड़ों पर, चट्टानों पर तथा पुराने भवनों पर पाया जाता है।
इनकी विशेषता पंख विहीन सर तथा गला पतला होता है। पीठ पर एक बड़ा सफेद चिन्ह रहता है, जो उड़ते समय दिखाई देता है।

देशी गिद्ध

देशी गिद्ध (Indian Vulture) मध्यप्रदेश के अतिरिक्त गुजरात, हरियाणा, राजस्थान आदि में दिखाई पड़ता है।
वर्णन – वयस्क देसी गिद्ध में शरीर तथा ऊपरी पर-पंखनी का रंग रेतीला-भूरा, सिर तथा गर्दन काली, पश्च-ग्रीवा पर हलके पंख, सफेद रोम कण्ठ-वेष्ठन, पीताभ चोंच तथा सिर तथा अधर भाग में धुंधली धारियों की कमी, उड़ान के समय पहाड़ी गिद्ध की तरह मध्य निचले पर पंखनी पर चौड़ी सफेद पट्टी की अनुपस्थिति तथा पुट्ठा और पृष्ठ श्वेत। हिमालयी गिद्ध की अपेक्षा छोटा तथा कम भारी शरीर, जिसमें अधिक गहरे सिर तथा ग्रीवा, सफेद कण्ठ-वेष्ठन तथा गहरे पैर तथा पंजे। तरुणावस्था में कण्ठ-वेष्ठन कोमल पाण्डुरंग युक्त, चोंच तथा सेयर गहरे, जिस पर धुंधला कलमेन तथा सफेद रोमाच्छादित सिर तथा गर्दन। तरुण को तरुण चमर गिद्ध से अलग करने में सहायक लक्षण : धुंधले तथा अल्प स्पष्ट धारियों युक्त अधरभाग, धुंधले ऊपरी तथा निचले पर पंखनी तथा सफेद पुट्ठा तथा पृष्ठ की उपस्थिति। बस्तियों तथा खुले वनों में व्याप्त। ये ज्यादातर लम्बी उड़ान भरते हैं। जमीन पर धीरे-धीरे बतख की तरह चलते हैं और झुक कर बैठते हैं। इनका घोंसला ऐतिहासिक इमारतों पर अथवा पहाड़ों की कंदराओं में मिलता है।
पैरों के ऊपरी भाग पर सफेद तथा नर्म पंख इनकी विशेषता है। पर रहित गर्दन के निचले हिस्से पर नर्म हल्के भूरे, श्वेत पंखों की कालर-सी होती है।

राज गिद्ध

राज गिद्ध (Red-headed Vulture) मध्यप्रदेश के साथ-साथ उत्तर भारत के कई प्रदेशों में दिखायी पड़ता है।
वर्णन – अपेक्षाकृत पतले नुकीले पंख। वयस्क में नग्न लाल सिर तथा सेयर, गर्दन के आधार तथा ऊपरी जंघा पर सफेद धब्बे तथा लाल पैर तथा पंजी, उड़ान के समय द्वितीयक-पंखों के आधार पर सिलेटी-श्वेत रंग। तरुणावस्था में सिर पर सफेद रोम, सिर तथा गर्दन का गुलाबी रंग, ऊपरी जंघा पर सफेद धब्बे तथा सफेद निचली दुम पंखनी। बस्तियों के समीप खुले स्थानों में तथा अच्छी वृक्षदार पहाड़ियों में व्याप्त। हिमालच में 2500 मी. की ऊँचाई तक मिलते हैं।
ये दूसरे प्रकार के गिद्धों की तुलना में सहिष्णु होते हैं। मृत जानवर भी यह बाकी गिद्धों के जाने के बाद खाते हैं और मनुष्य के आने से पहले उड़ जाते हैं। इनका घोंसला ऊँचे पेड़ों पर पाया जाता है। इसका सिर, टांग, गर्दन एवं सीना रक्त वर्ण के होते हैं। लाल और काले पंखों के बीच सफेद परों की पट्टी होती है, शेष देह काली होती है। राज गिद्धों की सम्पूर्ण संरचना अलंकृत-सी दिखाई देती है, जिसके कारण राज गिद्ध अन्य गिद्धों से अलग पहचाना जाता है।

हिमालयी गिद्ध

हिमालयी गिद्ध (Himalayan Griffon) प्राय: उत्तरी भारत के कुछ प्रदेशों में पाया जाता है। यह मध्यप्रदेश में भी दिखाई पड़ता है।
वर्णन – यूरेशियाई गिद्ध से बड़ा, अधिक चौड़े शरीर तथा कुछ अधिक लम्बी पूँछ युक्त। धुंधले पाण्डु-श्वेत पर-पंखनी तथा शरीर, गहरे उड़ान-पंख तथा पूँछ से स्पष्ट विभेद करते हैं तथा पाण्डुरंग का झालरदार गुलुबंद। अधरभाग में स्पष्ट धारियों की कमी। गहरे नख युक्त गुलाबी पैर तथा पंजे एवं पीत चोंच तथा सेयर। तरुणावस्था में भूरे रोमयुक्त गुलुबंद, चोंच तथा सेयर प्रारंभिक तौर पर काली, गहरा भूरा शरीर तथा सुस्पष्ट पाण्डु धारियों युक्त ऊपरी पंख-पंखनी (पर-पंखनी का रंग लगभग उड़ान-पिच्छों से मेल खाता हुआ) एवं पृष्ठ भाग तथा पुट्ठा भी गहरे भूरे। तरुणावस्था में उपस्थित धारीदार पृष्ठभाग तथा अधर भाग तथा निचले पंख-पिच्छों पर स्पष्ट सफेद पट्टिका इसे काला गिद्ध से अलग करने में महत्वपूर्ण लक्षण; इसके तरुण के पक्षति तरुण चमर गिद्ध के पूरा समापन परंतु शरीर अधिक बड़ा तथा अधिक भार वाला, जिसमें अधिक चौड़े पंख तथा लम्बी पूँछ, अधरभाग अधिक घनी धारियों से युक्त तथा अग्रपीठ एवं कंधे पर भी धारियाँ। पहाड़ियों में स्थित खुले स्थानों में व्याप्त। 600 मी. से अधिक ऊँचाई पर मिलते हैं, 5000 मी. से ऊपर तक भोजन की तलाश में घूमते हुए मिल जाते हैं, शीतकाल में समतल मैदानों पर आ जाते हैं।
ये अधिकतर पहाड़ों के ऊपर छोटे समूहों में या अकेले रहते हैं। भोजन की तलाश में लम्बी दूरियाँ तय करते हैं। समूह में पहाड़ों पर रात्रि निवास करते हैं। ये समूह में ऊँची चट्टानों की सुरक्षित कंदराओं में घोंसला बनाते हैं। इसके भूरे काले पंखों के मध्य सीने पर लाल रंग का मांसल स्थल दिखता है। पर-रहित गर्दन के निचले हिस्से पर नर्म भूरे श्वेत पंखों की कालर-सी होती है। चोंच पीली-सी तथा पैर गुलाबी होते हैं।

युरेशियाई गिद्ध

यूरेशियाई गिद्ध (Eurasian Griffion) मध्यप्रदेश के साथ-साथ उत्तर भारत के कई प्रदेशों में दिखायी पड़ता है।
वर्णन – देसी गिद्ध से अधिक बड़े तथा पुष्ट चोंच युक्त। वयस्क के मुख्य लक्षण पीली चोंच, जिस पर काली सेयर, सफेद सिर तथा गर्दन ऊनी सफेद गुलुबंद, आरक्ती आभा युक्त पाण्डु पृष्ठभाग, आरक्ती-भूरे अधरभाग तथा जांघ, जिस पर स्पष्ट पाण्डु धारियाँ तथा गहरे सिलेटी पैर तथा पंजे। आरक्ती-भूरे निचले पर पंखनी, जिस पर सामान्यत: स्पष्ट सफेद पट्टिका, विशेषकर मध्य-पिच्छों के ऊपर। अवयस्क में वयस्क की अपेक्षा पृष्ठभाग तथा ऊपरी पर-पंखनी पर अधिक आरक्ती भूरा रंग (जिन पर स्पष्ट पाण्डु धारियाँ); अवयस्क में आरक्ती-भूरा रोम युक्त गुलुबंद, सिलेटी सिर तथा गर्दन पर अधिक सफेद रोम, चोंच काली तथा गहरी परितारिका (जो वयस्क में पीत-भूरी होती है)। खुले स्थानों में, मुख्यत: : 910 मी. के नीचे ग्रीष्म में 3000 मी. की ऊँचाई तक मिलते हैं।
यह पहाड़ों पर रहता है तथा सर्दियों में सूखे मैदानों में घूमता है। अधिकांशत: जोड़े अथवा छोटे समूहों में रहते हैं। ज्यादातर भोजन की तलाश में उड़ते रहते हैं। ये चट्टानों की कंदराओं में घोंसला बनाते हैं। हिमालयी गिद्ध से छोटा तथा गहरे भूरे रंग का होता है। सिर तथा गर्दन सफेद और चोंच पीलीहोती है ।

काला गिद्ध

काला गिद्ध (Cinereous Vulture) मध्यप्रदेश के साथ-साथ उत्तर भारत के कई प्रदेशों में दिखाई पड़ता है।
वर्णन – अत्यधिक बड़े गिद्ध, जिनमें चौड़े समानान्तर किनारे वाले पंख होते हैं। विड्यन करते समय पंख समतल (सामान्यत: जिप्स प्रजातियों में परों को हलके ‘V’ आकृति में रखा जाता है) सिर तथा चोंच के धुंधले भाग के अतिरिक्त दूर से सम्पूर्ण एक समान गहरे रंग का दिखाई देता है। वयस्क काला-भूरा, जिसमें हलका भूरा गुलुबंद, वृहद निचले पर पंखनी पर धुंधली पट्टी भी दिखाई दे सकती है परंतु निचले पंख भाग जिप्स की अपेक्षा अधिक गहरे तथा एकरूपता लिये हुए। तरुणावस्था में वयस्क से अधिक एकरूपता लिये हुए। खुले स्थानों में 3000 मी. से नीचे व्याप्त।
यह मैदानी क्षेत्रों में अकेले ही भोजन ढूँढता दिखता है, अधिकांशत: नदियों के समीप दिखाई पड़ता है। इनका घोंसला पहाड़ों की कंदराओं में अथवा पहाड़ों पर उगे छोटे वृक्षों पर पाया जाता है। सिर का आकार कोणीय, आँखें गहरी, कालर भूरा, पंख चौड़े तथा पूँछ छोटी होती है। उड़ते समय पंखों को फड़फड़ाता है। इससे यह चीलों में आसानी से पहचाना जाता है।

पतल चोंच गिद्ध

पतल चोंच गिद्ध (Slender-billed Vulture) उत्तरी भारत के कई प्रदेशों में पाया जाने वाला यह गिद्ध यदा-कदा उत्तरी मध्यप्रदेश में दिखाई पड़ता है।
वर्णन – देसी गिद्ध की अपेक्षा चोंच, सिर तथा ग्रीवा अधिक पतले तथा कोणीय चोटी (एवं सुस्पष्ट कर्ण नाल)। देसी की अपेक्षा शरीर का रंग गहरा तथा भूरा एवं शरीर पतला, जिसके जंघा पर सफेद धब्बे (जो उड़ते समय सुस्पष्ट)। उड़ते समय, ‘परों’ के पिछले किनारे गोलाई युक्त तथा शरीर से चिपके हुए तथा बाहरी प्राथमिक-पिच्छों की लम्बाई अन्त: प्राथमिक-पिच्छों से अधिक। उड़ान-पिच्छों के आन्तर भाग एकरूप लिये हुए गहरे (जो देसी गिद्ध में गहरे सिरे युक्त धुंधले होते हैं)। निचली दुम पंखनी भी गहरी (देसी में हलके) तथा उड़ते समय पंजे पूँछ के सिरे तक पहुँचते हैं। (जो देसी में पूँछ सिरे तक नहीं पहुँचते)। वयस्क में गहरी चोंच तथा सेयर, जिसमें धुंधला कालमेन, सिर तथा गर्दन रोम रहित छोटे तथा रुक्ष गंदले सफेद कण्ठ-वेष्ठन तथा गहरे नख (देसी में पीत) तरुणावस्था में मुख्यत: गहरी चोंच सफेद रोमयुक्त सिर तथा गर्दन एवं अधरभाग पर धुंधली धारियाँ। खुले वनों में व्याप्त। 1500 मी. की ऊँचाई तक दिखाई देते हैं।
ये मरे जानवरों को खाते हैं। प्रजनन गाँवों से दूर एकांत में करते हैं। इनका घोंसला ऊँचे पेड़ों पर मिलता है। साँप की तरह पतली गर्दन, पतली लम्बी चोंच। आँखों के घेरे गहरे होते हैं तथा चेहरे से अलग दिखते हैं। सिर तथा गर्दन की खाल बाल रहित तथा सिकुड़ी होती है।
पहाड़ की कंदराओं में स्थित गिद्धों का घोंसला। फाइल फोटो
गिद्ध प्राय: सुरक्षित स्थान यथा ऊँचे स्थलों अथवा वृक्षों पर विश्राम करते हैं। पुरानी इमारतों एवं पहाड़ी कंदराओं में इन्हें देखा जा सकता है। कई बार ये खेतों में या फिर जलाशय के किनारे भी विश्राम करते पाये जाते हैं। सुरक्षा की दृष्टि से गिद्ध प्राय: ऊँचे स्थलों अथवा वृक्षों पर अपना घोंसला बनाते हैं। मैदानी क्षेत्रों के जंगलों में ऐसे वृक्ष सागौन, शीशम, हल्दू, सेमल, पीपल आदि होते हैं। ऊँचे वृक्षों के अभाव में जंगल के बाहर कम ऊँचाई के वृक्ष भी घोंसला बनाने के लिये उपयुक्त पाये गये हैं। ऐसे वृक्ष आम, बबूल, नारियल आदि हैं।
2