लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई: पन्ना में 45 हजार रुपए की रिश्वत लेने के आरोप में जल संसाधन विभाग के डीए और लिपिक को पकड़ा

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पन्ना में जल संसाधन विभाग के दो कर्मचारियों के खिलाफ सागर लोकायुक्त ने की ट्रैप कार्रवाई।
  • मझगांय बांध स्लूस निर्माण के करीब 25 लाख रुपये के लंबित भुगतान के एवज में मांगे थे 60 हजार रुपये

  • कार्रवाई के बाद कार्यपालन यंत्री सीबी अहिरवार के बयान पर भी उठे सवाल

पन्ना।(www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में जल संसाधन विभाग के दो कर्मचारियों को सागर लोकायुक्त पुलिस ने बुधवार, 28 अक्टूबर को 45 हजार रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में पकड़ा है। पकड़े गए कर्मचारियों में संभागीय लेखा अधिकारी (डीए) दीपक सिंह परमार और सहायक ग्रेड-2 (लिपिक) अरविंद कुमार पाठक शामिल हैं। आरोप है कि दोनों ने मझगांय मध्यम सिंचाई परियोजना के अंतर्गत कैनाल स्लूस निर्माण कार्य के लंबित भुगतान के एवज में ठेकेदार गौरव तोमर से रिश्वत मांगी थी। शिकायत के सत्यापन के बाद पुलिस अधीक्षक कार्यालय लोकायुक्त सागर की टीम ने जल संसाधन विभाग के कार्यालय में ट्रैप कार्रवाई की। मामले में भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर प्रकरण को विवेचना में लिया है।

25 लाख के भुगतान के एवज में मांगी थी रिश्वत

शिकायतकर्ता ठेकेदार गौरव तोमर।
लोकायुक्त संगठन सागर के उप पुलिस अधीक्षक एवं ट्रैपकर्ता कमल सिंह उइके ने जानकारी देते हुए बताया, मां वैष्णव कंस्ट्रक्शन कंपनी के प्रोपराइटर ठेकेदार गौरव तोमर निवासी ग्वालियर को जल संसाधन विभाग पन्ना की निविदा के माध्यम से मझगांय मध्यम सिंचाई परियोजना के अंतर्गत ग्राम मझगांय मजरा बालूपुर में आरडी 1860 मीटर पर सेडल बांध नंबर-1 में कैनाल स्लूस निर्माण का काम मिला था। इस कार्य की प्राक्कलन राशि 118.58 लाख रुपये थी, जबकि ठेका 36.88 प्रतिशत कम दर पर 74.84 लाख रुपये में मिला था।
कार्यालय कार्यपालन यंत्री जल संसाधन संभाग पन्ना। (फाइल फोटो)
ठेकेदार के अनुसार, निर्माण कार्य शुरू होने के बाद विभाग ने तीन चरणों में लगभग 55 लाख रुपये का भुगतान किया। शेष कार्य के अंतिम भुगतान के रूप में करीब 25 लाख रुपये मिलना बाकी था। आरोप है कि पूर्व में किए गए भुगतानों की राशि के हिसाब से संभागीय लेखा अधिकारी दीपक सिंह परमार ने 0.35 पैसे और सहायक ग्रेड-2 अरविंद कुमार पाठक ने 0.70 पैसे प्रति रुपये के हिसाब से कुल लगभग 60 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। परेशान होकर ठेकेदार ने लोकायुक्त कार्यालय सागर में शिकायत दर्ज कराई थी।

टेबल की दराज़ और फाइलों में मिली रिश्वत की रकम

लोकायुक्त सागर की टीम ने ठेकेदार से रिश्वत लेने के आरोप में जल संसाधन सभाग पन्ना के संभागीय लेखाधिकारी दीपक सिंह परमार और लिपिक अरविन्द कुमार पाठक को पकड़ा।
शिकायत का सत्यापन करने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने बुधवार को कार्रवाई की। टीम ने आज दोपहर में कार्यपालन यंत्री जल संसाधन संभाग पन्ना के कार्यालय में दबिश देकर दीपक सिंह परमार से संबंधित 15 हजार रुपये और अरविंद कुमार पाठक से संबंधित 30 हजार रुपये की रिश्वत की राशि बरामद की। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रकम दीपक सिंह परमार की टेबल पर रखी फाइलों के बीच और अरविंद कुमार पाठक की टेबल की दराज से मिली।
बताया गया कि दोनों कर्मचारियों के हाथों पर केमिकल लगे नोटों का रंग नहीं मिला। हालांकि, लोकायुक्त पुलिस के अनुसार, रिश्वत की मांग और लेन-देन से जुड़े साक्ष्य उनके पास उपलब्ध हैं। लोकायुक्त टीम ने निर्माण कार्य से संबंधित फाइल और माप पुस्तिका (एमबी) भी जब्त की है। कार्रवाई में उप पुलिस अधीक्षक कमल सिंह उइके, निरीक्षक रोशनी जैन सहित लोकायुक्त पुलिस सागर का स्टाफ शामिल रहा। लोकायुक्त पुलिस ने दोनों कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

कार्यपालन यंत्री बोले- मैंने आज तक किसी से कमीशन नहीं मांगा, लेकिन…!

लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद जल संसाधन संभाग पन्ना के कार्यपालन यंत्री सीबी अहिरवार का मीडिया से बातचीत का एक वीडियो सामने आया है। इसमें वे भुगतान में देरी का कारण फंड की कमी बताते सुनाई दे रहे हैं। कथित कमीशन के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वे कभी किसी से कमीशन की मांग नहीं करते और न ही उनका या सब-इंजीनियर का कोई प्रतिशत तय है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई अपनी खुशी से कुछ दे तो वे ले लेते हैं, लेकिन रिश्वत मांगना या लेना अपराध है। कार्यपालन यंत्री ने यह भी कहा कि अपने सेवाकाल में उन्होंने अनुचित लाभ के लिए आज तक किसी ठेकेदार का काम या भुगतान नहीं रोका। उनका कहना था कि ठेकेदार गौरव तोमर ने उन्हें कभी यह नहीं बताया कि कार्यालय में कोई उनसे रिश्वत मांग रहा है। कार्यपालन यंत्री के इस बयान के बाद विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं।