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सड़क हादसा : स्कूल जा रहे शिक्षक की बाइक को अज्ञात बाइक सवार ने मारी ठोकर, सड़क पर गिरते ही थम गईं सांसें

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सड़क हादसे में मृत शिक्षक रज्जाक खान।

* पन्ना जिले के अमानगंज थाना अंतर्गत सिरी पहुँच मार्ग पर हुआ हादसा

* सोशल मीडिया पर दुखद हादसे की खबर आते ही शिक्षकों में दौड़ी शोक की लहर

पन्ना। (www.radarnews.in) जिले के अमानगंज थाना अंतर्गत समीपी ग्राम सिरी पहुँच मार्ग पर आज हुए सड़क हादसे में अज्ञात तेज रफ़्तार मोटर साइकिल की ठोकर लगने से एक शिक्षक की मौके पर ही असमय मौत हो गई। हादसे के समय शिक्षक रज्जाक खान रोज की तरह मोटर साइकिल चलाते हुए से अपने स्कूल जा रहे थे। उनके साथ मोटर साइकिल में पीछे बैठे शिक्षक उपेन्द्र खरे इस हादसे में बाल-बाल बच गए। लेकिन भीषण हादसे में अपने साथी को खोने का उन्हें ऐसा आघात लगा कि कुछ देर तक उनकी मानसिक स्थिति सामान्य नहीं रही। परिणामस्वरुप अज्ञात आरोपी मोटर साइकिल चालक मौके से भाग निकला।
प्राप्त जानकारी के अनुसार शनिवार 14 मार्च को सुबह करीब 10 बजे शिक्षक रज्जाक खान मोटर साइकिल से अपने स्कूल शासकीय प्राथमिक शाला सिरी जा रहे थे। उनके साथ मोटर साइकिल में पीछे शिक्षक उपेन्द्र खरे बैठे हुए थे। पन्ना-अमानगंज मार्ग से जैसे ही दोनों शिक्षकों ने सिरी पहुँच मार्ग में प्रवेश किया तभी करीब एक किलोमीटर चलने के बाद विपरीत दिशा से तेज रफ़्तार में आए अज्ञात मोटर साइकिल चालक ने अत्यंत ही लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाते हुए सीधी ठोकर मार दी। दोनों मोटरसाइकिलों की भिड़ंत इतनी भीषण हुई कि तेज आवाज के साथ दोनों शिक्षक उछलकर सड़क पर गिर गए।
इस हादसे में शिक्षक रज्जाक खान निवासी मोहल्ला रानीगंज पन्ना के सिर में अंदरूनी चोट आने से उनके कान से खून निकला और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। अपने साथी की मौत से शिक्षक उपेन्द्र खरे काफी घबरा गए इस बीच आरोपी मोटर साइकिल चालक मौके से भाग निकला। इस दुखद हादसे का पता चलते ही क्षेत्र के स्कूलों के शिक्षक तुरंत घटनास्थल पर पहुँच गए। अचेत अवस्था में शिक्षक रज्जाक खान को प्राथमिक उपचार हेतु तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र अमानगंज लाया गया जहां ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने सघन परीक्षण करने के पश्चात उन्हें मृत घोषित कर दिया।
सोशल मीडिया पर इस दुखद हादसे की खबर आने के बाद से जिले शिक्षक जगत में शोक की लहर व्याप्त है। राज्य अध्यापक संघ जिला ईकाई पन्ना के अध्यक्ष पुष्पराज सिंह परमार ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए बताया कि अमानगंज थाना पुलिस एवं क्षेत्र के लोगों के साथ मिलकर अज्ञात आरोपी मोटरसाइकिल चालक का सुराग लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस ने अज्ञात आरोपी चालक की पहचान कर उसे शीघ्र गिरफ्तार करने का भरोसा दिलाया है। उधर, पन्ना में इस दुखद हादसे की खबर जब शिक्षक रज्जाक खान के परिजनों को मिली तो घर में कोहराम मच गया। बदहवास हालत में पीड़ित परिजन कुछ ही देर बाद अमानगंज पहुँच चुके थे। उल्लेखनीय है कि सड़क हादसे में असमय काल-कवलित हुए शिक्षक रज्जाक खान पूर्व में सेना में थे।सेना में लम्बे समय तक देश के लिए अपनी सेवाएं देने के बाद सेवानिवृत्त होने के पश्चात उन्होंने शिक्षक के पेशे को चुना था।
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जघन्य हत्या : कुल्हाड़ी से हमला कर नवयुवक को गंभीर घायल किया फिर पत्थर से कुचल दिया सिर

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बृजपुर थाना पुलिस टीम की अभिरक्षा में बिजवाराधाम हत्याकाण्ड के आरोपी।

* पन्ना जिले के बृजपुर थाना अंतर्गत ग्राम बिजवाराधाम की घटना

* पुलिस ने 48 घण्टे के अंदर चार आरोपियों को किया गिरफ्तार

* होली पर्व के दौरान पन्ना जिले में घटित हुईं कई बड़ी घटनाएं

* शराब दुकानें बंद रहने के बाबजूद गाँव-गाँव गली-गली जमकर बिकी शराब

शादिक खान, रुपेश जैन। पन्ना/बृजपुर । (www.radarnews.in) जिले के बृजपुर थाना अंतर्गत ग्राम बिजवाराधाम में होली के दिन कथित तौर शराबखोरी के चलते हुए विवाद में तीन लोगों ने मिलकर एक नवयुवक के ऊपर पहले तो कुल्हाड़ी से प्राणघातक हमला कर उसे गम्भीर रूप से घायल कर दिया और फिर सिर पर पत्थर पटक-पटककर उसकी निर्ममता पूर्वक हत्या कर दी। त्यौहार के दिन इस सनसनीखेज घटना की खबर आते ही पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। हत्या की जघन्य वारदात की जानकारी मिलने के बाद हरकत में आई को बृजपुर थाना पुलिस ने घटना को अंजाम देने वाले सभी आरोपियों को 48 घण्टे के अंदर गिरफ्तार करने का दावा किया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मंगलवार 10 मार्च की शाम लगभग 6-7 बजे बाबू उर्फ इन्द्रपाल गौंड़ 19 वर्ष निवासी बिजवाराधाम का गांव के ही कुछ सजातीय लोगों हक्का कोंदर पिता रामदास कोंदर 55, रतन उर्फ रामरतन कोंदर पिता भूरा कोंदर 30 साल, अज्जू उर्फ अजय सिहं गौंड़ पिता निरपत गौंड़ 19 वर्ष से विवाद हो गया। चर्चा है कि विवाद एक-दूसरे के परिवारजनों को लेकर की गई आपत्तिजनक टिपण्णी के चलते हुआ। जिससे आक्रोशित हक्का कोंदर, रतन उर्फ रामरतन कोंदर व अजय सिहं गौंड़ ने एक राय होकर बाबू उर्फ इन्द्रपाल गौंड़ 19 वर्ष के ऊपर पहले तो कुल्हाड़ी से जानलेवा हमला कर उसे गम्भीर रूप से घायल कर दिया और फिर सिर पर पत्थर पटक-पटककर उसकी निर्ममता पूर्वक हत्या कर दी गई। हत्या की वारदात को हक्का गौंड़ के खेत में ही अंजाम दिया गया। मृतक के भाई बबलू गौंड़ की रिपोर्ट पर बृजपुर थाना पुलिस ने अपराध क्रमाँक 63/2020 धारा 302,34 ताहि का पंजीबद्ध किया।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा फरार हत्यारोपियों की गिरफ्तारी हेतु थाना प्रभारी बृजपुर उप निरीक्षक सिद्धार्थ शर्मा के नेतृत्व में एक टीम गठित की गई। फरार हत्यारोपियों की तलाश के दौरान शुक्रवार 13 मार्च को उनके मठली पाठा के जंगल में छिपे होने की सूचना मिलने पर पुलिस टीम ने जंगल की घेराबंदी कर तीनों को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए आरोपियों हक्का कोंदर, रतन उर्फ रामरतन कोंदर व अजय सिहं गौंड़ से पुलिस ने हत्या की वारदात में प्रयुक्त कुल्हाड़ी जप्त की है। हत्यारोपियों की 48 घण्टे के अंदर धरपकड़ करने में थाना प्रभारी बृजपुर सिद्धार्थ शर्मा, चौकी प्रभारी सिविल लाईन अभिषेक पाण्डेय, पी.एस.आई. स्मिता सिहं बघेल, एएसआई बी.पी.मिश्रा, एएसआई अशोक दिवेदी, प्रधान आरक्षक अशोक शर्मा, लवकेश सिंह, आरक्षक जागेन्द्र शर्मा, सुरेन्द्र, धीरेन्द्र, सोनू, गिरधारी, पदम, हेमराज, अनिल बागरी एवं सैनिक राजाराम साहू तथा सायबर सेल पन्ना टीम के आरक्षक नीरज रैकवार, अशीष अवस्थी, धर्मेन्द्र सिंह की महत्वूर्ण भूमिका रही। पुलिस अधीक्षक पन्ना मयंक अवस्थी द्वारा आरोपपियों को गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम को पुरस्कृत करने की घोषणा की गई है।

कहीं नजर नहीं आई पुलिस की मुस्तैदी

होली के दिन दबंगों के द्वारा की गई मारपीट के मामले में कार्रवाई की फ़रियाद लेकर पन्ना में एसपी के सरकारी आवास के बाहर खड़े पीड़ित।
होली के त्यौहार एवं अन्य विशेष अवसरों पर अपराधों, सड़क-वाहन दुर्घटनाओं की रोकथम और शान्ति व्यवस्था कायम रखने के उद्देश्य से शराब की दुकानों को बंद रखा जाता है। लेकिन शराब की बड़े पैमाने पर अवैध बिक्री और सहज उपलब्धता के चलते शराबखोरी के कारण होने वाली घटनाओं पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। पन्ना जिले में होली के पर्व पर एक ओर जहाँ जमकर अवैध शराब की बिक्री होती रही वहीं कई स्थानों पर हुड़दंग होने की ख़बरें भी आईं। ग्राम कमताना, अजयगढ़ थाना अंतर्गत ग्राम उदयपुर में जमकर बबाल हुआ। बृजपुर थाना के ग्राम बिजवाराधाम में नवयुवक की नृशंस हत्या कर दी गई। इसके अलावा अन्य थाना क्षेत्रों में भी मारपीट-विवाद की छिटपुट घटनाएं प्रकाश में आईं हैं।
सांकेतिक फोटो।
इस बार होली के त्यौहार पर जिले की पुलिस मुस्तैदी पूरी तरह नदारत रही। ऐसा इसलिए भी हुआ क्योंकि पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी सभी थाना प्रभारियों से पल-पल की स्थिति की जानकारी लेने के बजाय होली खलेने में व्यस्त रहे। थाना प्रभारियों एवं अनुविभागीय पुलिस अधिकारियों के स्तर क्षेत्र में गश्ती को लेकर शिथिलता बरती गई। वहीं पुलिस का मैदानी अमला अवैध शराब बिक्री को जानबूझकर नजर अंदाज करता रहा। इस दौरान छिटपुट विवाद के जो भी मामले थाना पहुंचे या फिर पता चले उनमें सेटिंग की उधेड़बुन में ही पुलिस अधिकारी-कर्मचारी काफी व्यस्त रहे। इसलिए अपराधों की रोकथाम को लेकर आवश्यक उपाय और पुलिस की सजगता कहीं नजर नहीं आई। शराब के नशे में धुत होकर वाहन दौड़ाने वालों को पकड़ना तो दूर किसी ने रोकना-टोकना भी उचित नहीं समझा। कई जगह तो नशेड़ी सरेआम गालियां बकते हुए रंगों के पर होली के उत्सव-आनंद को बदरंग करते रहे लेकिन पुलिसकर्मियों ने ऐसे लोगों से दूर रहने में ही अपनी भलाई समझी।
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एमपी का पीटीआर फिर हुआ गुलज़ार, तीन बाघ शावकों की गूँजी दहाड़

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पन्ना-टाईगर रिजर्व में पत्थरों की खखरी पर पूरे राजसी अंदाज में बैठे तीनों राजकुमार (नन्हें शावक)।

* पन्ना टाईगर रिजर्व की बाघिन पी-234 ने तीन शावकों को दिया जन्म

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना टाईगर रिजर्व में बाघ पुनर्स्थापना कार्यक्रम की अपार सफलता के फलस्वरूप यहां जंगल के राजा बाघ का कुनबा बड़ी तेजी से बढ़ रहा है। पन्ना पार्क में एक और बाघिन के द्वारा शावकों को जन्म देने की खुशखबरी आई है। बाघिन पी-234 ने अपने तीसरे लिटर में तीन शावकों को जन्म दिया है। एक साथ तीन नन्हें राजकुमारों के आने पन्ना टाईगर रिजर्व एक बार फिर गुलजार हो गया है। इस खबर के आने के बाद से पार्क प्रबंधन में जश्न का माहौल है। वर्तमान में पन्ना पार्क में बाघों की संख्या आधा सैंकड़ा के आंकड़े को पार कर रिकार्ड स्तर पर पहुँच चुकी है। पन्ना टाईगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक के. एस. भदौरिया ने इस उपलब्धि को कुशल प्रबंधन, सतत निगरानी और जन समर्थन से बाघ संरक्षण का प्रतिफल बताया है।
उल्लेखनीय है कि पन्ना टाईगर रिजर्व में वर्ष 2009 में कान्हा से लाई गई बाघिन टी-2 से तीसरे लिटर में जन्मी बाघिन पी-234 ने अपने तीसरे लिटर में तीन शावकों को जन्म दिया। बाघिन पी-234 के तीन शावक को पहली बार पन्ना टाईगर रिजर्व के वन क्षेत्र में देखा गया। शावक पूर्णतः स्वस्थ हैं तथा लगभग तीन माह के प्रतीत होते हैं। नवजात शावकों के आगमन से पन्ना टाईगर रिजर्व में खुशी का माहौल है। मालूम हो कि वर्ष 2009 में पन्ना टाईगर रिजर्व बाघों से वीरान हो गया था। तत्पश्चात बाघ पुर्नस्थापना योजना के तहत अन्य टाईगर रिजर्व से लाये गये बाघ व बाघिनों से यहां के बाघों का संसार पुनः आबाद हो गया। वर्तमान समय में यहां पर बाघों की संख्या शावकों सहित पचास से अधिक बताई जाती है। इसके अलावा यहां के बाघ टाईगर रिजर्व के बाहर के जंगलों में भी अपना बसेरा बनाये होने की खबरें आतीं रहतीं हैं। हाल ही में चित्रकूट के जंगलों में पन्ना टाईगर रिजर्व की बाघिन ने शावकों को जन्म दिया था। इस टाईगर रिजर्व में बाघ विहीन होने के बाद कई अनूठे प्रयोग किये गये। जिनको सारे विश्व में सराहा गया। यहां पर अर्द्धजंगली बाघिन को जंगली बनाने का भी प्रयास सफल रहा।
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विशेष : हम सुरक्षित तो सुरक्षित हमारा परिवार ?

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सांकेतिक फोटो।

* सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन कर रोक सकते हैं सड़क-वाहन दुर्घटना

वक्त के साथ सम्हल के चलना पड़ता है। जैसे-जैसे आप पर जिम्मेदारी बढ़ती जाती है, वैसे-वैसे आप जिम्मेदार होते जाते हैं। आपको अपनों और अपनी सुरक्षा की चिंता होने लगती है कि मैं नहीं तो मेरे बच्चों का क्या होगा? इसलिये आप खुद अपने आप को सुरक्षित रखने का प्रयास करते रहते हैं और करना भी चाहिये। हम सुरक्षित तो हमारा परिवार सुरक्षित।
हम बात कर रहे हैं, आप सुरक्षित कैसे रहेंगे ? आज सड़क पर चलना दूभर हो गया है, लेकिन आप सड़क सुरक्षा नियमों को अपनाकर जिम्मेदार नागरिक बन सकते हैं और अपने आप को सुरक्षित कर अपने परिवार को सुरक्षा दे सकते हैं।
काल के गाल में समाना का सबसे सटीक उदाहरण है सड़क-वाहन दुर्घटना, जो हमेशा असामयिक मृत्यु का कारण बनती है। इसके कई कारण हो सकते हैं, लेकिन सड़क-वाहन दुर्घटना एक ऐसा उदाहरण है, जिसे हम सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन कर रोक सकते हैं, लेकिन कई बार अपने परिवार का ख्याल नहीं रखकर सड़क सुरक्षा नियमों की उपेक्षा करते हैं।
वक्त के साथ बदलाव जरूरी है। पहले के समय, न तो इतने वाहन थे और न ही इतने लोग। आज सड़कों पर लोगों से ज्यादा वाहन हैं। इसलिये हमें अपनी सुरक्षा के लिये सड़क सुरक्षा के छोटे-छोटे नियमों का पालन करना आवश्यक होता है। सड़क सुरक्षा के नियमों को धीरे-धीरे भी अपनाना शुरू कर दें तो वे आदत में आ जाते हैं और आप एवं आपका परिवार सुरक्षित हो जाता है। इसका दूसरा फायदा यह भी होता है कि यातायात पुलिस-जाँच के समय आपका जो समय अनावश्यक व्यर्थ जाता है, वो भी बच सकता है। इसलिये भी सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन करना चाहिये। एक बात यह भी है कि सड़क सुरक्षा के नियमों को आपको खुद से अपनाना पड़ेगा, तभी आप सुरक्षित होंगे। यह कोई जोर-जबरदस्ती से अपनाने वाली चीज नहीं है, नहीं तो आप इसे हमेशा बोझ ही समझेंगे।
सांकेतिक फोटो।
हम सोच भी नहीं सकते सड़क-वाहन दुर्घटना इतनी भयावह होती है कि हम या हमारे परिजन दुर्घटना के बाद सड़क एवं अस्पताल में जिंदा लाश की तरह हो जाते हैं। कई उदाहरण अखबारों में पढ़ने को मिलते हैं कि माता-पिता ने बेटे की मृत्यु के बाद उसके अंगदान किये। यह दिल को दहलाने वाली खबर होती है। मुझे भी कुछ दिनों पहले अंगदान सम्मान समारोह में जाने का मौका मिला। उस सम्मान समारोह में कोई भी खुशी से सम्मान नहीं ले रहा था, लेकिन वे सबके प्रेरणा-स्त्रोत बने। समारोह में सभी की आँखें नम (गमगीन) थी। ऐसी ही एक खबर पढ़ी थी कि सड़क दुर्घटना में बेटे के सिर में चोट लगने के बाद उसकी मृत्यु हुई। पिता ने उसकी तेरहवीं के दिन लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से हेलमेट का वितरण किया। वे समाज में एक उदाहरण बने, लेकिन दिल पर पत्थर रखकर उन्होंने यह कार्य किया होगा, उन्हें प्रणाम।
सड़क पर चलना भी आपकी सोच-समझ की परीक्षा होती है। सड़क पर वाहन चलाने में आपके ज्ञान-चक्षु खुल जाते हैं। हम सड़क का उपयोग विभिन्न साधनों के माध्यम से परिवहन के लिये करते हैं। साईकिल, मोटरसाइकिल, कार, बस, ऑटो रिक्शा के साथ सड़क पर हम पैदल भी चलते हैं। इसलिये हमें सभी का ध्यान रख कर वाहन चलाना चाहिये।
हाँ सबसे बड़ी बात यह है कि आप ये सोच के वाहन चलाये कि सब नौसिखिये हैं। हमें सबको बचा के चलना है। हम गलती करे या नहीं करे सामने वाला गलती कर सकता है और थोड़ा सा भी गलत अनुमान दुर्घटना का कारण बन सकता है।
पदयात्रियों को अधिकतर देखा है कि वे ट्रेफिक सिग्नल के समय यातायात में बाधा बनते हैं। कभी-कभी तो वे वाहन चालक की दृष्टि से दूर होते हैं और एक दम से प्रकट हो जाते हैं। इसलिये पैदल यात्री भी यातायात संकेतों का पालन करें और सुरक्षित रहे। कभी भी एक हाथ से वाहन न चलाये। दोनों हाथों का उपयोग कर ही वाहन चलायें। वाहनों पर करतब नहीं दिखाये। उच्च गति पर नहीं मुड़े। सामने वाले वाहन से सुरक्षित दूरी बनाकर चलने में भी भलाई है।
सांकेतिक फोटो।
अनियंत्रित जेब्रा क्रॉसिंग पर पहले पैदल यात्रियों को सड़क पार करने दें। सीट-बेल्ट का प्रयोग दुर्घटना के दौरान मौत की सम्भापवना को 60 प्रतिशत तक घटाता है। दुर्घटना की रोकथाम के लिये यातायात नियमों और चिन्हों का पालन करे। सड़क पर परेशानी व दुर्घटना से बचने के लिये वाहन को दुरुस्त रखें। वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग न करें। अपने सिर की सलामती के लिये उच्च गुणवत्ता वाला हेलमेट पहने। इससे चोट की सम्भावनाओं को 70 प्रतिशत तक घटाया जा सकता है। सड़क का सबके साथ सहभाग करे। दूसरों का भी ध्यान रखे। सड़क पर क्रोध/रोष न करें। नम्र रहे। जिम्मेदार बने…. शराब पीकर वाहन नहीं चलाये।
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नायब तहसीलदार के 8 लाख रुपए और सोना रेस्ट हाउस से चोरी ! कहाँ से आई इतनी नकद राशि, क्या है चर्चा ? जानने के लिए पढ़िए पूरी खबर

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पन्ना जिले के अजयगढ़ क़स्बा में स्थित लोक निर्माण विभाग का रेस्ट हाउस जिसके एक कमरे में कई माह से रुके हैं नायब तहसीलदार उमेश तिवारी।

* पन्ना जिले के अजयगढ़ क़स्बा में स्थित रेस्ट हाउस की घटना

* चोरी को लेकर फैली अफवाह रेत माफियाओं ने रिश्वत के रूप में दी थी राशि

* नायब तहसीलदार ने रेत माफिया से रिश्वत और 8 लाख की चोरी को बताया बकवास

* बोले- रेत खदानें वर्तमान बंद हैं, अगर चालू होतीं तो इन आरोपों को मान भी लेता

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के अजयगढ़ क़स्बा में स्थित लोक निर्माण विभाग के रेस्ट हाउस से कथित तौर नायब तहसीलदार के आठ लाख रुपये नकद और सोना चोरी हो गया। चोरी की यह घटना रविवार 8 मार्च की दोपहर की है। उस समय नायब तहसीलदार उमेश तिवारी कलेक्टर की बैठक में शामिल होने के लिए पन्ना आए थे। शाम को जब वह वापस अजयगढ़ पहुंचे तो रेस्ट हाउस में उनके कमरे के अंदर रखे नकदी रुपए एवं सोने के आभूषण गायब मिले। सनसनीखेज चोरी की घटना को लेकर यह अफवाह तेजी से फैली कि चोरी गए रुपए और आभूषण नायब तहसीलतार को क्षेत्र में सक्रिय रेत माफियाओं से रिश्वत के रूप में मिले थे।
इस घटनाक्रम की भनक जब उच्चाधिकारियों को लगी तो अजयगढ़ से लेकर पन्ना तक प्रशासनिक हल्कों में अंदरखाने हड़कम्प मच गया। पन्ना जिले में लम्बे समय से प्रशासन के अघोषित संरक्षण में चल रहे रेत की लूट की छूट देने के एवज में वसूली के खेल का भंडाफोड़ होने तथा इसमें लिप्त बड़े खिलाड़ियों के बेनकाब होने के डर से चोरी की घटना पर पर्दा डाल दिया गया। इसलिए चोरी की घटना के चार दिन बाद भी रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई। नायब तहसीलदार उमेश तिवारी ने चोरी की घटना को लेकर फैली चर्चाओं पर हैरानी जताते हुए स्वीकार किया कि इस तरह की बातें मुझे भी सुनने को मिलीं है और कई लोगों ने इस सम्बंध उनसे बात भी की है। उन्होंने इन बातों को अफवाह बताते हुए कहा इसमें आधी हकीकत-आधा फ़साना (झूठ) है।

सिर्फ 22-23 हजार रुपये और चैन हुई चोरी

अजयगढ़ तहसील कार्यालय में स्थित बीरा मण्डल के नायब तहसीलदार उमेश तिवारी का कक्ष।
पन्ना जिले की अजयगढ़ तहसील में पदस्थ नायब तहसीलदार उमेश तिवारी ने चोरी की घटना को लेकर फैलीं कई तरह की चर्चाओं के रडार न्यूज़ से बात करते हुए बीच अपनी तरफ से वस्तु स्थिति स्पष्ट की है। उनका कहना है कि अजयगढ़ रेस्ट हाउस से मेरे सिर्फ 22-23 हजार रुपये नकद, सोने की एक चैन और सोने की एक अँगूठी चोरी गई है। श्री तिवारी ने आठ लाख रुपये नकद और सोना चोरी होने की खबर को कोरी बकवास बताते हुए स्वीकार किया कि इस तरह की अफवाह मुझे भी सुनने को मिली है और कई लोगों ने इस सम्बंध उनसे बात भी की है। उनसे पूँछा गया कि चोरी की घटना को लेकर यह भी चर्चाएं है कि कथित तौर पर उक्त आठ लाख रुपये नकद और सोना आपको अजयगढ़ क्षेत्र में सक्रिय रेत माफियाओं से रिश्वत के रूप मिला था। साथ ही जिस युवक पर संदेह है उसके सम्बन्ध में दबी जुबान सुगबुगाहट है कि वह आपके वसूली एजेण्ट के रूप में अजयगढ़ क्षेत्र में सक्रिय रेत माफियाओं से उगाही करता था ?
सांकेतिक तस्वीर।
नायब तहसीलदार श्री तिवारी ने हँसते हुए कहा कि रेत खदानें अगर चल रहीं होती तो इसको भी मान लेता कि रुपए आने चाहिए। मगर रेत खदानें अभी बंद है सिर्फ एक चाँदीपाठी खदान चालू है। उन्होंने अपनी सफाई में सवाल उठाते हुए कहा कि, अगर कोई कलेक्शन करेगा तो अपने घर रखेगा या फिर किसी और जगह रखेगा यहाँ रेस्ट हाउस में क्यों रखेगा। रेत माफियाओं से मेरे लिए कलेक्शन करने की बात पूरी तरह बकवास है। उल्लेखनीय है कि चर्चा के दौरान नायब तहसीलदार ने चोरी की घटना की खबर को फ़िलहाल ब्रेकिंग बनाकर प्रकाशित न करने का आग्रह करते हुए कहा, इससे बदनामी होगी कि पहले चोरी हुई फिर माल मिल गया। उनका कहना है कि एफआईआर दर्ज कराने के बाद आप लोग खबर छाप देना।
सूत्रों की मानें तो चोरी की इस घटना को लेकर प्रशासनिक हलकों में अंदर ही अंदर खलबली मची है। मामले को दबाने के लिए ही थाना में अब तक रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई। दरअसल रेत की लूट से लाभान्वित होने वाले अफसरों को डर है कि रिपोर्ट दर्ज कराने पर रेत का बचा-खुचा रायता भी फ़ैल सकता है और अंदर की बातें खुलकर बाहर आ सकतीं है। चोरी के मामले को बाहरी तौर पर इसलिए भी निपटाया जा रहा है क्योंकि अजयगढ़ जनपद अध्यक्ष एवं कांग्रेस नेता भरत मिलन पाण्डेय, सपा नेता दशरथ पहलवान और क्षेत्र के रेत माफियाओं के बीच प्रशासनिक मैनेजमेंट की चर्चा के वायरल वीडियो में किए गए दावों के जिन्न ने अभी तक पूरी तरह पीछा नहीं छोड़ा है।

पुलिस हिरासत में है संदेही युवक

फाइल फोटो।
नायब तहसीलदार उमेश तिवारी के कथित तौर पर आठ लाख रुपये नकद और सोना चोरी करने वाला संदेही व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि उनका ही विश्वस्त निजी सहयोगी पवन यादव निवासी ग्राम सीलोना (खड्डन पुरवा) थाना अजयगढ़ बताया जा रहा है। पवन को लेकर यह चर्चा है कि वह नायब तहसीलदार के एजेण्ट के रूप में अजयगढ़ क्षेत्र में सक्रिय रेत माफियाओं से उगाही करता रहा है। श्री तिवारी उनके लिए वसूली करने की बातों को बेबुनियाद और झूठ बताया है। हालाँकि पवन के ऊपर उन्हें पूरा संदेह है कि उसी ने 22-23 हजार रुपये नकद, सोने की एक चैन और सोने की एक अँगूठी चुराई है।
सूत्रों से जानकारी मिली है कि संदेही युवक पवन यादव घटना के बाद से ही अजयगढ़ थाना पुलिस की हिरासत में है। जहां उसने पूंछतांछ में चोरी करने की बात भी कबूल कर ली है। लेकिन इसकी आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हो सकी। अजयगढ़ थाना के निरीक्षक अरविन्द कुजूर से सम्पर्क करने का कई बार प्रयास किया गया लेकिन उनका मोबाइल फोन नम्बर- 8989220044 पिछले दो से दिनों बंद बता रहा है।
फाइल फोटो।
मालूम होकि रविवार 8 मार्च को चोरी की घटना का पता चलने पर नायब तहसीलदार ने सबसे पहले रेस्ट हाउस के कर्मचारियों पर संदेह जताते हुए उन्हें धमकाया था। उनके द्वारा मोबाइल पर इस घटना की सूचना अजयगढ़ थाना के निरीक्षक को दी गई। कुछ देर बाद दो पुलिसकर्मी रेस्ट हाउस पहुंचे और वहां तैनात कर्मचारियों के नाम-पता लिखकर पूँछताँछ के लिए बुलाए जाने पर थाना आने की बात कहकर वापस लौट गए। मगर इसके बाद चोरी के संदेह में पुलिस ने नायब तहसीलदार उमेश तिवारी के निजी सहयोगी पवन यादव निवासी ग्राम सीलोना (खड्डन पुरवा) को हिरासत में ले लिया। पवन के चार दिनों से पुलिस थाना अजयगढ़ में होने की पुष्टि वहाँ लगे सीसीटीव्ही कैमरों के फुटेज से की जा सकती है।

कई महीनों से रेस्ट हाउस में डटे साहब

पन्ना जिले की अजयगढ़ तहसील में पदस्थ युवा नायब तहसीलदार उमेश तिवारी अपनी कार्यशैली व अफसरी वाले अंदाज को लेकर अजयगढ़ क्षेत्र में आमजन के बीच अक्सर चर्चाओं में रहते हैं। इनके पास बीरा माण्डल का प्रभार है, इसी इलाके में अजयगढ़ तहसील की अधिकाँश रेत खदानें आतीं हैं। श्री तिवारी अजयगढ़ में अपनी पोस्टिंग के बाद से लोक निर्माण विभाग के स्थानीय रेस्ट हाउस के एक कमरे में रह रहे हैं। अजयगढ़ में कोई शासकीय आवास खाली न होने की वजह से उन्होंने रेस्ट हाउस को ही अपना आवास बना रखा है।
तहसील कार्यालय अजयगढ़। फाइल फोटो
श्री तिवारी से पूंछा गया, अजयगढ़ में यह आम चर्चा है कि रेस्ट हाउस में अक्सर रेत माफियाओं के साथ आपकी बैठकें होती रहती है और वहीं पर लेनदेन होता है। नायब तहसीलदार का कहना है कि रेस्ट हाउस में रुकने के लिए आपेक्षित लोग आते रहते हैं लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि सभी मुझसे मिलने के लिए वहाँ आते हैं। उन्होंने कहा कि यह कॉमन सेंस की बात है यदि किसी को कोई लेनदेन भी करना है तो क्या कोई सार्वजनिक स्थान पर ऐसा कुछ करेगा, वह तो कहीं दूर एकांत में चुपचाप बात करेगा। आपने बताया कि नवागत एसडीएम बी. बी. पाण्डेय भी रेस्ट हाउस में ही रुके हैं। इसलिए वहां किसी तरह की कोई आपत्तिजनक गतिविधि होने का सवाल ही नहीं उठता है।

अनियमितताएं उजागर होने के बाद भी कार्रवाई नहीं 

विदित हो कि अजयगढ़ क्षेत्र में करीब एक माह पूर्व तक संचालित रहीं पंचायतों की रेत खदानों पर पन्ना कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने स्वयं छापामार कार्रवाई करते हुए रेत खनन में उपयोग हो रहीं प्रतिबंधित मशीनों और अवैध रेत परिवहन कर रहे डेढ़ दर्जन ट्रकों को पकड़ा था। इस दौरान पंचायतों की रेत खदानों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं पाए जाने एवं अनुबंध शर्तों के उल्लंघन के मद्देनजर कलेक्टर श्री शर्मा ने सख्त कार्रवाई करते हुए पांच खदानों की ईटीपी पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई थी। जोकि अभी भी जारी है। इसके पश्चात कलेक्टर ने तत्कालीन अजयगढ़ एसडीएम सुरेश गुप्ता को भी वहां से हटा दिया था। लेकिन प्रभारी तहसीलदार और बीरा मण्डल के नायब तहसीलदार उमेश तिवारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
रेत से लोड वाहनों की धरपकड़ की कार्रवाई को अंजाम देते हुए पन्ना कलेक्टर कर्मवीर शर्मा। फाइल फोटो।
जबकि केन नदी में संचालित अजयगढ़ क्षेत्र की अधिकाँश रेत खदानें बीरा मण्डल के अंतर्गत ही आतीं है। कलेक्टर ने जिन पांच रेत खदानों की ईटीपी पर रोक लगाई थी उसमें चार खदानें बीरा मण्डल की हैं। इस कार्रवाई के दौरान कलेक्टर ने रडार न्यूज़ से चर्चा में कहा था कि पंचायतों की रेत खदानों में सामने आईं अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए सम्बंधितों की जबाबदेही सुनिश्चित करते हुए उनके खिलाफ भी एक्शन लिया जाएगा। लेकिन इस मामले में अजयगढ़ से मात्र एसडीएम को हटाने बाद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। बहरहाल, नायब तहसीलदार की चोरी की वास्तविकता और रेत खदानों में मिली गड़बड़ी पर आगे की कार्रवाई के सम्बन्ध में पन्ना कलेक्टर कर्मवीर शर्मा से उनका पक्ष जानने के लिए कई बार सम्पर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।

इनका कहना है –

“नायब तहसीलदार ने मुझे सिर्फ 22-23 हजार रुपए और कुछ सोने के कुछ आभूषण चोरी होने की जानकारी दी थी। मैं उस समय अजयगढ़ में नहीं था, इस सम्बन्ध में मेरी कलेक्टर साहब से बात हुई थी उन्होंने मुझसे कहा था कि नायब तहसीलदार उमेश तिवारी से रेस्ट हाउस का रूम खाली करा लें।”

– बी. बी. पाण्डेय एसडीएम अजयगढ़ जिला पन्ना।

“अजयगढ़ रेस्ट हाउस से नायब तहसीलदार का क्या सामान चोरी गया और वे कितने समय से वहां रुके हैं, इसकी मुझे ज्यादा जानकारी नहीं, आप एसडीओ अरुण पटैरिया से बात कर लें उन्हीं के अनुभाग अंतर्गत अजयगढ़ आता है। वही बेहतर बता पाएंगे।”

– ए. बी. साहू  प्रभारी कार्यपालन यंत्री लोनिवि संभाग पन्ना। 

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अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस : पुरातन काल से हमारी संस्कृति में महिलाओं का सम्मान रहा : कलेक्टर

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* अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ प्रचार-प्रसार रथ को किया गया रवाना

* राष्ट्रीय स्तर पर चयनित महिला एथलेटिक्स को किया सम्मानित

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर स्थानीय पालीटेक्निक काॅलेज पन्ना में समारोहपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर अन्तर्राष्ट्रीय दिवस मनाए जाने संबंधी जानकारी के साथ महिला के अधिकारों तथा महिलाओं के हित में चलाई जा रही शासन की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओें की जानकारी दी गयी। इस अवसर पर उपस्थितों को सम्बोधित करते हुए कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने कहा कि भारतीय संस्कृति में पुरातन काल से महिलाओं का प्रतिनिधित्व रहा है। हमेशा से महिलाओं का सम्मान होता रहा है। इस अवसर पर कलेक्टर एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ प्रचार-प्रसार रथ को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया गया।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को सम्मान एवं अधिक से अधिक जनभागीदारी महिलाओं की हो इसके लिए शासन द्वारा अनेक कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि जिले में बच्चों को कुपोषण से मुक्ति दिलाने के लिए संजीवनी अभियान चलाया गया। किशोरियों एवं महिलाओं को कुपोषण मुक्ति दिलाने के लिए स्वास्थ्य परीक्षण प्रारंभ कर आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रत्येक गर्भवती महिला को टीकाकरण के साथ अन्य आवश्यक दवाएं दी जा रही है।
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ माॅ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जलवन एवं माल्यार्पण कर किया गया। कार्यक्रम के शुभारंभ महिलाओं के संवेधानिक अधिकारों के बारे में जानकारी दी गयी। महिलाओं के कल्याण के लिए चलाई जा रही योजनाओं के संबंध में जानकारी देते हुए बताया गया कि शासन द्वारा प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना, जननी सुरक्षा, लाड़ली लक्ष्मी, सुकन्या समृद्धि आदि योजनाएं महिला सशक्तिकरण के लिए संचालित की जा रही है। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष रविराज सिंह यादव ने सम्बोधित करते हुए महिला अधिकारों पर प्रकाश डाला।
डॉ. मीना नामदेव ने महिला के मौलिक अधिकार, हित संरक्षण एवं शिक्षा पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही नगरपालिका की पूर्व अध्यक्ष श्रीमती शारदा पाठक ने वर्तमान में महिलाओं की स्थिति पर प्रकाश डाला। मनीष मिश्रा ने महिला अधिकारों एवं कलेक्टर द्वारा चलाई जा रही कुपोषण के विरूद्ध अभियान की चर्चा की गयी। इस अवसर पर श्रीमती सुमन गुप्ता, शिवजीत सिंह, आरआई देविका सिंह, अमिता बागरी आदि ने सम्बोधित किया। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्तर पर चयनित एथलेटिक्स खिलाड़ी अंजु एवं मंजु चौधरी को सम्मानित किया गया। इसके अलावा महिला कल्याण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं एवं अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र एवं शाल श्रीफल देकर सम्मानित किया गया। सम्पन्न हुए इस कार्यक्रम में बडी संख्या में महिलाएं व जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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आरएसएस नेता के पुत्र की गोली मारकर हत्या, आपसी विवाद के चलते दोस्त ही बन गए कातिल

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सिमरिया थाना में मौजूद पुलिस अधीक्षक पन्ना मयंक अवस्थी एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बी.के.एस. परिहार।

* पन्ना जिले के सिमरिया क़स्बा की घटना

* वारदात के बाद से क़स्बा तनावपूर्ण स्थिति निर्मित

* पुलिस ने तत्परता से कार्रवाई कर चारों आरोपियों को किया गिरफ्तार

पन्ना। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में आरएसएस नेता के बेटे की उसके ही दोस्तों ने मामूली सी बात पर गोली मारकर हत्या कर दी। हत्या की यह सनसनीखेज वारदात को शुक्रवार 6 मार्च की देर शाम की है। नवयुवक पंकज उर्फ़ छोटू यादव पुत्र रूद्र प्रताप यादव 18 वर्ष का खून से लथपथ शव मिलने के बाद सिमरिया क़स्बा में तनाव फ़ैल गया। पुलिस ने घटना की गंभीरता को देखते हुए तत्परता से कार्रवाई कर दबिश देकर चारों हत्यारोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। दोस्तों के द्वारा अपने ही दोस्त का क़त्ल करने की वजह आपसी विवाद बताई जा रही है। शनिवार 7 मार्च को बेहद ग़मगीन और तनावपूर्ण माहौल के बीच शव का पोस्टमार्टम होने के बाद अंतिम संस्कार किया गया।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार आरएसएस नेता रूद्र प्रताप यादव का छोटा बेटा पंकज उर्फ़ छोटू यादव 18 वर्ष निवासी सिमरिया शुक्रवार की शाम 6 अपने घर से निकला था। रात्रि करीब 9 पंकज उर्फ़ छोटू को खोजते हुए उसका बड़ा भाई जलज यादव सिमरिया-मोहन्द्रा मार्ग पर पहुंचा जहां उसे छोटू के दोस्त हर्ष ठाकुर, बंटी ठाकुर, रितु ठाकुर व एक अन्य साथी मिले। इनसे छोटू के सम्बंध पूँछतांछ करने पर चारों ने उसकी गोली मारकर हत्या की वारदात को अंजाम देने की बात कही। इतना ही नहीं उक्त आरोपियों द्वारा जलज को भी जान से मारने की धमकी दी गई। मौके से किसी तरह जान बचाकर भागे जलज यादव ने आसपास खोजबीन की तभी उसे सिमरिया के बाहरी इलाके में मोहन्द्रा मार्ग पर छोटे भाई पंकज उर्फ़ छोटू का खून से लथपथ शव मिला।
नवयुवक छोटू यादव की हत्या की दुखद खबर आते ही सिमरिया क़स्बा में हड़कंप मच गया। सिमरिया थाना प्रभारी सुबोध मिश्रा दलबल के साथ तुरंत मौके पर पहुँच गए। कुछ ही मिनिट में घटनास्थल पर बड़ी तादाद में लोग जमा हो गए। हत्या की वारदात का पता चलते ही पन्ना से पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी रात्रि में ही सिमरिया पहुंचे और पीड़ित परिजनों से मुलाकात करके अपनी सहनुभहुति एवं संवेदना व्यक्त कर आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिलाया गया। उधर, तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए सिमरिया में एहतियात के तौर पर भारी पुलिस बल को तैनात किया गया। पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी ने द्वारा बिना किसी देरी के पुलिस टीमें गठित कर हत्यारोपियों की धरपकड़ के लिए रवाना किया। ततपरता से की गई इस कार्रवाई के फलस्वरूप पुलिस ने कुछ ही घंटे के अंदर छोटू के सभी कातिलों को दबिश देकर गिरफ्तार कर लिया।
सिमरिया क़स्बा में शव विछेदन गृह के बाहर मौजूद शोकसंतृप्त परिजन एवं स्थानीय लोग।
पकड़े गए हत्यारोपियों में हर्ष ठाकुर, बंटी ठाकुर, रितु ठाकुर व एक अन्य युवक शामिल है। पुलिस ने इनके कब्जे से हत्या की वारदात में प्रयुक्त कट्टा भी बरामद किया है। शनिवार को पुलिस अधीक्षक ने पत्रकारों जानकारी देते हुए बताया कि छोटू यादव की हत्या उसके ही दोस्तों के द्वारा मामूली सी बात पर आपसी विवाद के चलते की गई। हालाँकि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका कि आखिर ऐसी क्या बात थी जिसकी वजह से पंकज उर्फ़ छोटू यादव के दोस्त ही उसके कातिल बन गए। इस मामले में सिमरिया थाना पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ हत्या और आर्मस एक्ट की धाराओं के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया है। नवयुवक की हत्या के बाद से सिमरिया क़स्बा में आक्रोश और मातम का माहौल है।
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रेत की लूट : स्वीकृत खदान क्षेत्र के बाहर बड़ी मात्रा में निकाली रेत, संयुक्त जाँच के बाद भी दर्ज नहीं हुआ अवैध उत्खनन का मामला

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पन्ना जिले की चाँदीपाठी रेत खदान में अवैध उत्खनन की संयुक्त रूप से जांच करते खनिज और राजस्व विभाग अधिकारी।

* पन्ना जिले की चाँदीपाठी रेत खदान में हुआ अवैध उत्खनन

* खनिज और राजस्व विभाग के अधिकारी कर रहे बहानेबाजी

* एक-दूसरे पर आवश्यक जानकारी न भेजने का लगा रहे आरोप

* रेत के लिए जीवनदायनी केन नदी को खोखला करने में जुटे माफिया

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में अजयगढ़ जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाली चाँदीपाठी रेत खदान लम्बे समय से सुर्ख़ियों में बनीं है। जिले के अंतिम छोर पर उत्तर प्रदेश की सीमा के नजदीक केन नदी में संचालित विशाल क्षेत्रफल वाली यह खदान बड़े पैमाने पर रेत के अवैध उत्खनन, दैत्याकार मशीनों से खनन और पर्दे के पीछे खदान में हिस्सेदारी रखने वाले हाई प्रोफ़ाइल पार्टनरों को लेकर अक्सर चर्चाओं में रहती है। लेकिन इस बार चाँदीपाटी खदान की चर्चा वहाँ हुए रेत अवैध उत्खनन की संयुक्त जाँच के बाद कार्रवाई में जानबूझकर की जा रही देरी को लेकर हो रही है। जांच में स्वीकृत खदान क्षेत्र के बाहर बड़े पैमाने पर रेत का अवैध खनन पाए जाने के बाद भी ठेकेदार के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने की कार्रवाई न होने से इस मामले में जिले के प्रशासनिक अधिकारियों की मंशा और उनकी भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
खदान की संयुक्त जांच करने वाले राजस्व व खनिज विभाग के अधिकारी कार्रवाई में देरी को लेकर बहानेबाजी करते हुए एक-दूसरे पर आवश्यक जानकारी न भेजने का आरोप लगा रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारियों की गोलमोल बातों से ऐसा लगता है जैसे वे किसी से ग्रीन सिग्नल मिलने का इंतजार कर रहे हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि चाँदीपाठी रेत खदान के सम्बन्ध प्रशासनिक स्तर भ्रम फैलाकर लोगों को गुमराह भी किया जा रहा है। इसका अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि पिछले दिनों खनिज और राजस्व विभाग के अमले की संयुक्त जांच में चाँदीपाठी खदान में स्वीकृत क्षेत्र के बाहर बड़े पैमाने पर रेत का अवैध उत्खनन पाया गया लेकिन इस मामले में अब तक प्रकरण दर्ज नहीं किया।
सांकेतिक तस्वीर।
लोगों को गुमराह करने के लिए चालाक अफसरों ने ऑफ रिकॉर्ड यह प्रचारित करा दिया कि अवैध उत्खनन के मद्देनजर खदान की ईटीपी बंद की गई है। जबकि सच्चाई यह है, रेत खदान ठेकेदार पर खनिज राजस्व की बड़ी राशि बकाया होने की वजह से 2 मार्च को ईटीपी को अस्थाई तौर पर बंद किया गया था। बकाया राशि का दो किश्तों में भुगतान किए जाने पर शुक्रवार 6 मार्च की शाम ईटीपी पर लगी रोक समाप्त भी हो चुकी है। अब खदान ठेकेदार पूर्व की तरह पुनः रेत परिवहन हेतु ईटीपी जारी कर सकेगा।
सांकेतिक तस्वीर।
उल्लेखनीय है कि चाँदीपाठी रेत खदान ठेकेदार के द्वारा स्वीकृत खदान क्षेत्र के बाहर मशीनों से बड़ी मात्रा में खनन कराकर पानी के अंदर से रेत निकालने की ख़बरें लम्बे समय से आ रहीं थीं। रेत की खुलेआम जारी इस लूट की कई दिनों तक अनदेखी करने बाद मीडिया के दबाब में जिला प्रशासन द्वारा खनिज और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम को चाँदीपाठी भेजकर 27 फरवरी को खदान की जांच कराई गई। जांच टीम में शामिल रहे अधिकारियों ने खदान की नापजोख करने के पश्चात स्वीकार किया खदान क्षेत्र के बाहर से रेत का खनन हुआ है। लेकिन सप्ताह भर से अधिक का समय गुजरने के बाद भी अवैध रेत खनन का प्रकरण सम्बंधित ठेकेदार के विरुद्ध पंजीबद्ध नहीं किया गया।
नवीन संयुक्त कलेक्ट्रेट भवन पन्ना का फाइल फोटो।
मजेदार बात यह है कि, इस सम्बंध में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व अजयगढ़ बी. बी. पाण्डेय से बात करने पर पहले तो उन्होंने अब तक प्रकरण दर्ज न होने पर हैरानी जताई और फिर कहा कि इस मामले में कार्रवाई नियमानुसार खनिज विभाग को ही करनी है। खदान की संयुक्त जाँच में खनिज निरीक्षक नूतन जैन शामिल रहीं है, अजयगढ़ तहसीलदार और बीरा मण्डल के नायब तहसीलदार तो उनके सहयोग के लिए गए थे। खदान के जांच सम्बंधी समस्त दस्तावेज उनके पास उपलब्ध हैं। अजयगढ़ एसडीएम श्री पाण्डेय का कहना है कि प्रकरण दर्ज करने में खनिज विभाग को यदि कोई समस्या है तो वे हमें दस्तावेज भेज दें प्रकरण हम दर्ज कर लेंगे। वहीं जब खनिज निरीक्षक नूतन जैन से बात की गई तो उन्होंने प्रकरण दर्ज करने में देरी की वजह अजयगढ़ के राजस्व अमले से आवश्यक जानकारी प्राप्त न होना बताया। इस तरह एक-दूसरे पर दस्तावेज न भेजने का आरोप लगाकर जिम्मेदार अधिकारी न सिर्फ अपनी जबावदेही से पल्ला झाड़ रहे हैं बल्कि अवैध उत्खनन के मामले को जानबूझकर लटकाए हुए हैं।
केन नदी में मशीनों से होने वाले रेत खनन का फाइल फोटो।
बहरहाल इस लेटलतीफी के कारण इन चर्चाओं को भी बल मिल रहा है कि मौजूदा प्रशासन चाँदीपाठी रेत खदान के खिलाफ कार्रवाई करने का नैतिक साहस नहीं जुटा पा रहा है। कथित तौर खदान में शामिल ऊँची पहुँच रखने वाले हिस्सेदारों को नाराज करके अधिकारी अपनी कुर्सी के लिए खतरा मोल लेना नहीं चाहते। सुगबुगाहट यह भी है कि निहित स्वार्थ पूर्ती के चक्कर में इस मामले को ठण्डे बस्ते में रखा गया है। खदान ठेकेदार से अघोषित समझौते के चलते पन्ना जिला प्रशासन 31 मार्च 2020 तक कोई भी ऐसी कार्रवाई करने से बच रहा है जिससे खदान के संचालन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े।
विदित होकि वर्तमान में पन्ना जिले की अधिकांश रेत खदानों की ईटीपी पर रोक लगी है, सरकारी रिकार्ड में सिर्फ तीन खदानें इससे बाहर हैं जिनमें शक्ति ट्रेडर्स की मोहना खदान, चाँदीपाठी और रामनई ग्राम में निजी भूमि पर फ़तेह सिंह की खदान शामिल है। फिलहाल कतिपय कारणों से मोहना खदान बंद होने से चाँदीपाठी खदान ठेकेदार और फ़तेह सिंह की चांदी हो गई है। चाँदीपाठी खदान में खनन की अनुमति 31 मार्च 2020 अथवा नए ठेकेदार मल्होत्रा कम्पनी की खदान चालू होने तक के लिए है। शायद इसीलिए पन्ना जिला प्रशासन इस खदान की अनियमितताओं को लम्बे समय तक नजरअंदाज करता रहा है, दबाब बढ़ने पर बेमन से संयुक्त जांच का दिखावा किया गया लेकिन उसका नतीजा कुछ नहीं निकला। उल्लेखनीय है इस सम्बंध में जब पन्ना कलेक्टर कर्मवीर शर्मा से बात करने का प्रयास किया गया तो कई बार रिंग जाने के बाद भी उनका मोबाइल फोन रिसीव नहीं हुआ।

इनका कहना है –

“खनिज राजस्व बकाया होने के कारण कुछ दिनों के लिए चाँदीपाठी रेत खदान की ईटीपी बंद की गई थी जोकि शुक्रवार शाम से पुनः शुरू हो चुकी है। राजस्व और खनिज विभाग की संयुक्त जांच में इस खदान में अवैध उत्खनन पाया गया था लेकिन अजयगढ़ के राजस्व अधिकारियों से कुछ दस्तावेज न मिलने के कारण अवैध उत्खनन का मामला फ़िलहाल दर्ज नहीं हो पाया है। सम्बंधितों से बात करके इस मामले में शीघ्र ही कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”

– आर. के. पाण्डेय जिला खनिज अधिकारी पन्ना।

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जंगली सुअर का शिकार करने बिछाया था करंट का जाल लेकिन उसकी चपेट में आकर मरा तेंदुआ

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वन विभाग की टीम की अभिरक्षा में तेंदुए के शिकारी एवं बाजू में खड़े उप वनमण्डलाधिकारी नरेन्द्र सिंह, धरमपुर रेन्जर बी. के. विश्वकर्मा।

* वन विभाग के हत्थे चढ़े दो शिकारियों ने किया खुलासा

* पन्ना जिले की धरमपुर रेन्ज की कुड़रा बीट में मिला था तेंदुए का कंकाल

* तेंदुए की खाल और पंजे ले गए थे शिकारी, दो मुख्य आरोपी अभी भी फरार

* उत्तर वन मण्डल पन्ना अंतर्गत एक माह में दो तेंदुओं की मौत पर उठ रहे सवाल

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) जिले के उत्तर वन मण्डल की धरमपुर रेन्ज अंतर्गत कुड़रा बीट में कुछ दिन पूर्व सामने आए तेंदुए के शिकार के बहुचर्चित मामले में वन विभाग की टीम ने दबिश देकर दो आरोपियों को गिरफ्तार करने का दावा किया है। पकड़े गए आरोपी बौना उर्फ़ जुगनू कुशवाहा व दिल्लीपत उर्फ़ दिलीप कुशवाहा दोनों निवासी ग्राम दिबिहा थाना धरमपुर ने पूँछतांछ में अपना जुर्म कबूल करते हुए बताया है कि उनके द्वारा दो अन्य लोगों के साथ मिलकर जंगली सुअर का शिकार करने के लिए कुड़रा के जंगल में प्राचीन बाबली के समीप करंट का जाल बिछाया गया था। लेकिन जब करंट की चपेट में आकर तेंदुआ मरा तो कथित तौर दोनों ने इससे खुद को अलग कर लिया। बाद में इनके अन्य दो साथियों ने मृत तेंदुए की खाल उतारी और उसके पंजे भी काट ले गए। पकड़े गए दोनों शिकारियों को सोमवार 2 फरवरी को न्यायालय में पेश किया गया जहाँ से उन्हें पन्ना जिला जेल भेजा गया है। वन विभाग को इस मामले में फरार चल रहे दो मुख्य आरोपियों की तलाश है। जिनमें दिबिहा गाँव का ही नत्थू कुशवाहा और उसका एक अन्य साथी शामिल है।
उल्लेखनीय है कि धरमपुर रेन्ज की कुड़रा बीट के कक्ष क्रमाँक पी-53 में 23 फरवरी को प्राचीन बाबली के समीप कुछ दिन पूर्व क्षत-विक्षत हालत में एक तेन्दुए का कंकाल मिला था। मौके पर कुछ खूँटियाँ गड़ी हुई मिलीं और जीआई तार भी पाया गया। जांच में पता चला कि पानी पीने के लिए आने वाले वन्य जीवों के शिकार के उद्देश्य से जल स्रोत के समीप करंट के तार बिछाए गए थे। जिसके सम्पर्क में आने से तेंदुए की मौत हुई है। तेंदुए के शरीर से खाल और उसके पंजे गायब थे। शव की अत्यंत ही क्षत-विक्षत हालत और उससे उठ रही भीषण दुर्गन्ध के मद्देनजर यह संभावना जताई गई कि तेंदुए के मौत करीब सप्ताह भर पूर्व हुई है।
कुड़रा के जंगल में शिकार हुए तेंदुए का शव इस स्थिति में मिला था।
शिकार की इस सनसनीखेज घटना के सामने आने से जिले के उत्तर वन मण्डल की काफी आलोचना हुई। क्योंकि वन्यजीवों के शिकार की घटनाओं और दूसरे गंभीर वन अपराधों की रोकथाम में वन मण्डल का अमला अब तक नाकाम साबित हुआ है। वन विभाग के मैदानी अमले की कार्यप्रणाली, जंगल की सुरक्षा और निगरानी को लेकर अफसरों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठे। दरअसल, शिकार के इस प्रकरण ने उत्तर वन मण्डल में व्याप्त अराजकता पूर्ण स्थिति को उजागर करने का काम किया। जंगल की सुरक्षा के मोर्चे से मैदानी अमले के अक्सर गायब रहने और इनकी कारगुजारियों से बेपरवाह अफसरों की उदासीनता के चलते शिकारियों ने बेखौफ होकर जंगल में न सिर्फ करंट जाल बिछाया बल्कि उसकी चपेट में आकर मृत तेंदुए की खाल और पंजे भी ले काट गए।
जंगल में तेन्दुए का शव कई दिनों तक सड़ता रहा लेकिन इसकी भनक तक मैदानी वन अमले को नहीं लगी। जंगल में लकड़ी लेने गए ग्रामीणों के द्वारा जब 23 फरवरी को इसकी सूचना रेन्जर को दी गई तब कहीं जाकर शिकार के इस हैरान करने वाले मामले का खुलासा हुआ। इससे एक बार फिर साबित हो गया कि जंगल की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पूरी तरह चौपट है। तेंदुए के शिकार के आरोप में गिरफ्तार बौना उर्फ़ जुगनू कुशवाहा पिता लोशन कुशवाहा व दिल्लीपत उर्फ़ दिलीप कुशवाहा पिता रामप्रसाद कुशवाहा निवासी दिबिहा ने पूंछतांछ में पहले भी कई बार शिकार करने की बात स्वीकार की है। पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे कुड़रा के जंगल में वन्यजीवों का शिकार और अवैध कटाई का सिलसिला लम्बे समय से चल रहा है। तेंदुए के शिकार के मामले में फरार चल रहे नत्थू कुशवाहा के घर की तलाशी लेने पर मोर के पंजे 2 नग, जंगली सुअर के दांत व जबड़ा, सांभर के सींग, जंगली सुअर व रीछ के बाल बरामद होना इस बात का प्रमाण है।

मुखबिर की सूचना पर पकड़े आरोपी

फाइल फोटो।
धरमपुर रेन्ज अंतर्गत तेंदुए के शिकार की घटना का पता चलने पर वन अमला सक्रिय हुआ तथा विभाग के आला अधिकारी भी मौके पर पहुँचे। मामले के खुलासे और अज्ञात शिकारियों का सुराग लगाने के लिये प्रशिक्षित डॉग की मदद ली गई। डॉग घटनास्थल की गंध लेकर बौना उर्फ़ जुगनू कुशवाहा पिता लोशन कुशवाहा, दिल्लीपत उर्फ़ दिलीप कुशवाहा पिता रामप्रसाद कुशवाहा व नत्थू कुशवाहा निवासी दिबिहा के घरों में पहुंचा। इस आधार पर तीनों को संदेही के रूप में चिन्हित करते हुए उनके घरों की तलाशी ली गई। इस दौरान नत्थू कुशवाहा के घर पर कई वन्यजीवों के अंग और शिकार में उपयोग होने वाला सामान बरामद हुआ।
सभी संदेहियों के फरार होने की वजह से उनके घरों एवं संभावित ठिकानों पर वन अमले के द्वारा मुखबिरों के माध्यम से नजर रखी जा रही थी। सोमवार 2 मार्च की सुबह वन अधिकारियों को मुखबिर से सूचना मिली कि दिल्लीपत उर्फ़ दिलीप कुशवाहा और बौना उर्फ़ जुगनू कुशवाहा अपने घर के आसपास देखे गए हैं। इस सूचना को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग की टीम ने दबिश देकर दोनों को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए आरोपियों के विरुद्ध वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम के तहत अपराध पहले से कायम था। इस मामले का मुख्य आरोपी नत्थू कुशवाहा और उसका साथी अभी भी फरार है। जिसकी वन अमले द्वारा सरगर्मी से तलाश की जा रही है। उत्तर वन मण्डल के उप वन मण्डलाधिकारी नरेन्द्र सिंह परिहार ने बताया कि शेष दोनों आरोपियों को शीघ्र ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

भ्रम फ़ैलाने प्रचारित किया था लकड़बग्घा

धरमपुर रेन्ज अंतर्गत कुड़रा के जंगल में क्षत-विक्षत हालत में मिले वन्यजीव के शव को देखने से स्पष्ट है कि वह तेन्दुआ है लकड़बग्घा नहीं।
कुड़रा बीट अंतर्गत करंट का तार बिछाकर तेंदुए का शिकार करने की वारदात में शामिल रहे दो शिकारियों दिल्लीपत उर्फ़ दिलीप कुशवाहा और बौना उर्फ़ जुगनू कुशवाहा निवासी दिबिहा की गिरफ्तारी और उनके कबूलनामे से यह स्पष्ट हो गया है कि शिकार तेंदुए का ही हुआ था। जबकि इस मामले के खुलासे के बाद वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी मृत वन्यजीव का शव काफी क्षत-विक्षत हालत में मिलने से उसकी पहचान कठिन होने का हवाला देकर लकड़बग्घा या तेंदुआ होने की संभावना व्यक्त करते रहे हैं। कथित तौर यह भ्रम जानबूझकर फैलाया गया। ताकि जंगल में करंट का जाल फैलाकर तेंदुए का शिकार किये जाने की घटना मीडिया में प्रमुखता से प्रकाशित-प्रसारित न हो।
जंगल लकड़ी लेने गए जिन ग्रामीणों ने इस घटना की सूचना वन अमले को दी थी उन्होंने भी तेंदुए का शव मिलने की ही बात बताई थी। सोशल मीडिया पर वायरल हुईं तस्वीरों में भी मृत वन्यजीव तेंदुआ नजर आ रहा था। मजेदार बात यह है कि इस घटना का वन अपराध दर्ज करने की कार्रवाई में भी तेंदुए की मौत होने का ही उल्लेख किया गया। बाबजूद इसके वन्यजीवों के जानकार कहलाने वाले अधिकारी सच्चाई जानने के बाद भी उसे ईमानदारी से स्वीकार करने के बजाए लकड़बग्घा या तेंदुआ होने का राग अलापते हुए संदेह पैदा करते रहे। दरअसल इन्हें डर था कि तेंदुआ की मौत होने की सीधी स्वीकारोक्ति से काफी हंगामा मच सकता है।
कुड़रा के जंगल में मृत तेंदुए के शव का मुआयना करतीं उत्तर वन मण्डल पन्ना की डीएफओ मीना मिश्रा व उप वनमण्डलाधिकारी नरेन्द्र सिंह।
ऐसा इसलिए भी किया गया क्योंकि माह फरवरी 2020 में ही इस घटना के कुछ दिन पूर्व उत्तर वन मण्डल की देवेन्द्रनगर रेन्ज अंतर्गत मकरी कुठार के जंगल में एक मादा तेंदुआ संदेहास्पद परिस्थितियों में मृत मिला था। एक माह में दो तेन्दुओं की मौत से उठने वाले सवालों को दबाने की योजना के तहत लकड़बग्घा होने का भ्रम फैलाया गया। इसके पूर्व जब धरमपुर रेन्ज की धरमपुर बीट के सीमावर्ती इलाके में शिकारियों के द्वारा लगाए गए फंदे में तेंदुआ के फंसने की खबर आई थी तब भी उत्तर वन मण्डल के अधिकारियों ने लकड़बग्घा के फंसे होने की बात कहकर मामले को जांच के नाम पर रफा-दफा कर दिया था।
मालूम हो कि पन्ना जिले उत्तर एवं दक्षिण वन मण्डल अंतर्गत पिछले दो साल में करीब दो दर्जन तेन्दुओं की मौत हो चुकी है। जिसमें अधिकांश का शिकार हुआ है। इसके अलावा बड़े पैमाने पर वनों की कटाई, वन क्षेत्र में हीरा और पत्थर का अवैध उत्खनन बेरोक-टोक चल रहा है। तेजी से बढ़ते वन अपराधों को रोकने में नाकाम वन विभाग के अधिकारी अपनी कारगुजारियों पर पर्दा डालने के लिए कुछ समय से इस तरह के हथकण्डे अपना रहे है। इसमें मीडियाकर्मियों के फोन रिसीव न करना, उन्हें घटना का कवरेज करने से रोकना, वन अपराधों को दबाने के लिए उनकी जानकारी के बाद भी अनभिज्ञता जाहिर कर पुष्टि करने से बचना और भ्रम फैलाना शामिल है।

कुछ दिन पूर्व मादा तेंदुआ का मिला था शव

बीट मकरी कुठार में मृत मिले मादा तेंदुए का शव और उसका पोस्टमार्टम करने के लिए समीप बैठे वन्यप्राणी चिकित्सक डॉक्टर संजीव गुप्ता।
उत्तर वन मण्डल पन्ना के जंगलों में माह फरवरी 2020 में दो तेन्दुओं के शव बरामद हुए। धरमपुर रेन्ज की कुड़रा बीट अंतर्गत करंट का जाल बिछाकर एक तेंदुए का शिकार किया गया था। जबकि दूसरी घटना इसके कुछ दिन पूर्व देवेन्द्रनगर वन परिक्षेत्र के बृजपुर सर्किल की बीट मकरी कुठार की है। इस घटना का पता कम ही लोगों को चला क्योंकि वन अधिकारियों ने बड़े ही गुपचुप तरीके से मृत मादा तेंदुआ के शव का जंगल में ही पोस्टमार्टम कराकर उसके शव को आनन-फानन में वहीं जलवा दिया था। बीट मकरी कुठार के कक्ष क्रमांक- पी-91 में 13 फरवरी को मादा तेंदुआ की संदेहास्पद मौत का मामला सामने आया था। महज एक वर्ष की आयु की मादा तेंदुआ का शव जंगल में झाड़ियों के समीप मिला। उसके शरीर के सभी अवयव (अंग) सुरक्षित होने के आधार पर तेंदुआ की मौत स्वाभाविक होने की बात कही गई। हालाँकि मादा तेंदुआ की मौत की वास्तविकता का पता लगाने के लिए जाँच हेतु भेजे शरीर के नमूनों की रिपोर्ट आना अभी बाकी है।
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Lockdown – Home alone and bad days

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