* कोरोना संकट के बीच राज्यपाल श्री टंडन ने राजभवन में दिलाई शपथ
* सिंधिया खेमे से तुलसी सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत को मंत्री बनाया
* भाजपा के कई वरिष्ठ विधायकों को मंत्री बनने के लिए करना होगा इंतजार
* मंत्रियों को फिलहाल विभाग नहीं दो-दो संभागों का प्रभार मिला
भोपाल। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश में कोरोना संकट के चलते लॉकडाउन के बीच आज आखिरकार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बहुप्रतीक्षित मंत्रिमण्डल का गठन हो गया। राज्यपाल लालजी टंडन ने मंगलवार को राजभवन में राज्य मंत्री-मण्डल के पाँच सदस्यों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। भाजपा के वरिष्ठ विधायक डॉ. नरोत्तम मिश्रा, कमल पटेल, सुश्री मीना सिंह ने मंत्री पद की शपथ ली। ज्योतिरादित्य सिंधिया गुट से तुलसी सिलावट व गोविंद सिंह राजपूत को मंत्री बनाया गया है। मंत्रियों के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, पूर्व केन्द्रीय मंत्री उमा भारती, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बी.डी.शर्मा, विधायकगण, अन्य जन-प्रतिनिधि और पुलिस महानिदेशक विवेक जौहरी उपस्थित थे। शपथ ग्रहण समारोह राजभवन के सांदीपनि सभागार में गरिमापूर्वक आयोजित किया गया। मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस ने शपथ ग्रहण समारोह की कार्यवाही का संचालन किया।

उल्लेखनीय है कि मंत्री पद की शपथ लेने वाले पाँचों नेता पूर्व में कमलनाथ और शिवराज सरकार में मंत्री रह चुके हैं। कमलनाथ सरकार में तुलसी सिलावट स्वास्थ्य मंत्री और गोविंद सिंह राजपूत राजस्व एवं परिवहन मंत्री थे। शिवराज की पिछली सरकार में नरोत्तम मिश्रा जनसंपर्क मंत्री और कमल पटेल चिकित्सा शिक्षा मंत्री थे। वहीं मीना सिंह महिला और बाल विकास राज्य मंत्री रह चुकी हैं। मंत्री मण्डल के गठन में जातीय समीकरणों को साधने के लिहाज से सभी वर्गों को स्थान दिया गया है। मुख्यमंत्री शिवराज ने मंत्रियों को फिलहाल विभाग नहीं दिए हैं बल्कि उन्हें दो-दो संभागों का प्रभारी बनाया है।

मध्य प्रदेश में छोटे आकार के मंत्रिमंडल का गठन होने से भाजपा के कई वरिष्ठ विधायकों इसमें स्थान नहीं मिल सका। लॉकडाउन समाप्त होने के बाद मंत्रिमंडल के विस्तार की संभावना जताई जा रही है। शिवराज ने 23 मार्च को रिकार्ड चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। वैश्विक महामारी कोरोना के संक्रमण को देखते हुए उन्होंने अकेले शपथ ली थी। कोरोना की आपदा के समय बिना मंत्रिमंडल के ही शिवराज काम रहे थे और इसे लेकर वे विपक्ष के निशाने पर रहे हैं। अभी कुछ दिन पहले पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रेस वार्ता कर शिवराज पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया था कि मध्यप्रदेश देश का इकलौता राज्य है, जहां कोरोना संकट के बावजूद कोई स्वास्थ्य मंत्री और गृहमंत्री नहीं है।
किस मंत्री को किस संभाग का प्रभार

तुलसी सिलावट – इंदौर और सागर संभाग
कमल पटेल – जबलपुर और नर्मदापुरम् संभाग
नरोत्तम मिश्रा – भोपाल और उज्जैन संभाग
मीना सिंह – रीवा और शहडोल संभाग
गोविंद सिंह राजपूत – चंबल और ग्वालियर संभाग







पीपीई किट तैयार करने वाले हजरत बाबा निजामी स्व सहायता समूह पुराना पन्ना की सदस्य सबीना बानो का कहना है कि कोरोना को हराने के लिए पूरा देश एकजुटता के साथ खड़ा है, मुझे इस बात की ख़ुशी और गर्व है कि हमारे समूह की महिलाएं कोरोना के खिलाफ फ्रंट लाइन पर खड़े होकर जंग लड़ रहे योद्धाओं डॉक्टर एवं पैरामेडिकल स्टॉफ के लिए सुरक्षा कवच रुपी पीपीई किट तैयार करने में अपना योगदान दे रहीं हैं। संकट के समय हमारा हुनर देश के काम आ सका यह हमारी खुशकिस्मती है। सबीना यह बात अच्छी तरह यह जानती हैं कि कोरोना संकट से मानवता को उबारने के लिए हमारे डॉक्टर एवं पैरामेडिकल स्टॉफ का इस खतरनाक संक्रमण से सुरक्षित रहना कितना जरुरी है। और इसके लिए उनके पास पीपीई किट समेत अन्य प्रोटेक्टिव गियर्स होना सबसे जरूरी है। सबीना बानो और माधवी सिंह ने बताया कि वे प्रतिदिन 8-10 पीपीई किट बना लेती हैं। पूर्व में इनके द्वारा सूती कपड़े के मास्क भी तैयार किये गए थे। उल्लेखनीय है कि पीपीई किट का उपयोग कोरोना वायरस संक्रमित रोगियों की जांच के नमूने लेने, उपचार करने एवं देखभाल करने वाले मेडिकल स्टॉफ एवं डाॅक्टरों के द्वारा किया जाता है। इसे पहनकर वे खतरनाक संक्रमण से स्वयं को सुरक्षित रख पाते हैं।

आजीविका मिशन पन्ना के जिला प्रबंधक डी. के. पाण्डेय ने बताया कि लॉकडाउन के शुरूआती दिनों में जिला प्रशासन कोरोना महामारी की प्रभावी रोकथाम के लिए प्रमुख सामग्रियों जैसे- मास्क, साबुन, पीपीई किट, सैनेटाइजर आदि की आपूर्ति को लकेर चिंतित था लेकिन आजीविका मिशन के स्व सहायता समूहों के द्वारा तेजी से आवश्यक सामग्रियों आपूर्ति सुनिश्चित की गई। जिसके फलस्वरूप कोरोना संक्रमण के खतरे को जिले में रोकने में काफी मदद मिली है। परियोजना प्रबंधक डी. के. पाण्डेय का मानना है कि लॉकडाउन के दौरान राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन पन्ना के स्व सहायता समूहों की महिलाएं रोजगार सृजन करने के साथ-साथ संकट की घड़ी में समाज की जरूरतों को पूरा करने में अग्रणी भूमिका निभाते हुए अपनी गजब की कार्य क्षमता और कुशलता को बखूबी साबित कर रहीं हैं।














मदर टेरेसा हॉस्पिटल के संचालक द्वारा कथित तौर पर स्टॉफ नर्स के ऊपर दबाब बनाकर नौकरी के बदले उसका यौन उत्पीड़न करने एवं आबरू लेने की कोशिश किए जाने का मामला सामने आने से पन्ना में मिशनरी संस्था के विद्यालय और हॉस्टल में पूर्व में हुई घिनौनी घटनाओं की यादें लोगों के जेहन में में ताजा हो गईं हैं। उल्लेखनीय है कि कुछ वर्ष लिस्यू आनंद विद्यालय पन्ना से सम्बद्ध जेसुपाल आश्रम (हॉस्टल) में रहने वाले एक बच्चे के साथ मेल वार्डन के द्वारा हैवानियत की गई थी। सभ्य समाज व शिक्षा जगत को शर्मसार करने एवं हॉस्टल में रहने वाले बच्चों के अभिभावकों के भरोसे को गहरा आघात पहुंचाने वाली इस घटना के बाद अधिकारियों ने हॉस्टल का निरीक्षण किया था। जिसमें अव्यवस्थाओं-असुरक्षा के बीच बच्चों के हॉस्टल में रहने की बात सामने आई थी। करीब डेढ़ दशक पूर्व लिस्यू आनंद विद्यालय पन्ना का एक कर्मचारी विद्यालय के अंदर संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाया गया था। उक्त कर्मचारी की मौत को लेकर शहर में लोगों के बीच शुरू से ही कई तरह की चर्चाएं रहीं हैं लेकिन आधिकारिक तौर पर आज तक इस बहुचर्चित मामले का सच पुलिस के द्वारा उजागर नहीं किया गया।
“युवती ने लिखित शिकायती आवदेन पत्र प्रस्तुत किया था जिसके आधार पर मदर टेरेसा हॉस्पिटल पन्ना के संचालक फादर टोजी के खिलाफ आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध कर मामले की जाँच महिला पुलिस अधिकारी के द्वारा की जा रही है। फादर टोजी को शीघ्र ही गिरफ्तार किया जाएगा।”

