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पन्ना में रेलवे स्टेशन बनने से निवेश, उद्योग एवं रोजगार के अवसर बढ़ेंगे : शिवराज

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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान।

*     मुख्यमंत्री ने पन्ना में रेलवे स्टेशन निर्माण कार्य का भूमि-पूजन किया

*      स्थापत्य कला के मामले में दुनिया में सबसे अनूठा होगा पन्ना का रेलवे स्टेशन : रेल मंत्री श्री वैष्णव

*      वंदे भारत ट्रेन की अगले महीने मिलेगी सौगात

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि रेल जनता और संस्कृति को जोड़ने का बेहतर जरिया है। पन्ना में रेल लाइन बनने और ट्रेन शुरू होने पर यह निवेश की दृष्टि से पसंदीदा क्षेत्र बनेगा। यहाँ निवेश, उद्योग एवं रोजगार के अवसर बढे़ंगे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आज जनकपुर में पन्ना रेलवे स्टेशन का भूमि-पूजन किया। इस मौके पर उन्होंने जनता को रेल की सौगात मिलने पर बधाई व शुभकामनाएं भी दीं। साथ ही कहा कि रेल शुरू होने से हीरा की तरह पन्ना की चमक भी बढ़ेगी। लोगों की वर्षों पुरानी रेल लाइन की मांग पुरी हुई है।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का पन्ना में रेलवे स्टेशन भवन के शिलान्यास कार्यक्रम में रेलवे अधिकारियों द्वारा स्वागत किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराजा छत्रसाल जयंती पर पन्ना गौरव दिवस का आयोजन भी सराहनीय है। महाराजा छत्रसाल पराक्रमी शासक थे। महाराजा छत्रसाल ने पन्ना को राजधानी बनाया था। उन्होंने कहा कि अब ललितपुर-सिंगरौली रेल लाइन पर तेजी से काम होगा। डायमण्ड के स्वरूप में बनने वाले पन्ना रेलवे स्टेशन की अलग पहचान होगी। हीरा नगरी पन्ना की चमक बढ़ाने के लिए हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव ने पन्ना के मुकुट में एक नया रत्न जड़ा है, वो रत्न पन्ना का रेलवे स्टेशन है। रेल मंत्री और स्थानीय सांसद का इस सौगात के लिए आभार भी जताया। खनिज मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह द्वारा क्षेत्रवासियों की समृद्धि के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए पन्ना को नये मुकाम पर पहुँचाने की अपेक्षा की।

13 हजार करोड़ रुपए का बजट उपलब्ध कराया

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान,कन्द्रीय कृषि एवं किसान-कल्याण मंत्री श्री तोमर ने पन्ना में रेलवे स्टेशन भवन का शिलान्यास किया।
रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव ने अपने वर्चुअल संबोधन में कहा कि हीरे के डिजाईन पर केन्द्रित पन्ना रेलवे स्टेशन पर्यटन की दृष्टि से भी विकसित होगा। पन्ना में ऐसे अद्भुत रेलवे स्टेशन का शिलान्यास हुआ है जैसा दुनिया में कहीं नहीं है, इसकी स्थापत्य कला अनूठी होगी। रेल मंत्री ने कहा मैं विश्वास दिलाता हूं कि पन्ना का रेलवे स्टेशन भारत के रेल नेटवर्क में हीरे की तरह माना जाएगा। उन्होंने खजुराहो एवं पन्ना टाइगर रिजर्व में पर्यटकों को सौगातस्वरूप शीघ्र ही जून माह के अंत तक वंदे भारत ट्रेन की सौगात देने की बात कही। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी रेल के चहुँमुखी विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस वित्तीय वर्ष में 13 हजार 600 करोड़ रूपए का बजट रेलवे के विकास के लिए उपलब्ध कराया गया है। साथ ही 31 मार्च तक प्रतिदिन 5 हजार 200 किलोमीटर रेल पटरी बिछाने का काम हुआ है। नौ वर्ष में 40 हजार किलोमीटर रेलवे लाइन का विद्युतीकरण किया गया। रेल मंत्री ने मध्यप्रदेश को सांस्कृतिक धरा बताया। साथ ही मध्यप्रदेश में रेलवे के तीव्र गति से हो रहे कार्यों की जानकारी दी।

अथक प्रयास से मिली उपलब्धि के लिए दी बधाई

सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि पन्नावासियों को रेल की सौगात मिलना सौभाग्य का अवसर है। अथक प्रयास से हासिल उपलब्धि पर जनता को बधाई दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री बुन्देलखण्ड के सतत विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं। खनिज साधन एवं श्रम मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ने इस बड़ी सौगात पर रेल मंत्री एवं सांसद का आभार जताते हुए खजुराहो सतना रेल लाइन के सभी अवरोध दूर कराकर जल्द पूरा करवाने का आग्रह किया। कार्यक्रम में मंडल रेल प्रबंधक पश्चिम-मध्य रेल जबलपुर द्वारा स्वागत उद्बोधन दिया गया। कार्यक्रम में केन्द्रीय कृषि एवं किसान-कल्याण मंत्री नरेन्द्र सिह तोमर, प्रदेश के कृषि एवं किसान-कल्याण मंत्री कमल पटेल सहित अन्य जन-प्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे।

MP : चर्चित कलेक्टर का नया कारनामा, सरकारी कर्मचारियों के लिए जारी किया तुग़लकी फ़रमान !

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संजय कुमार मिश्र, कलेक्टर, पन्ना।

*     आईएएस संजय कुमार मिश्र को पूर्व में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने लगाई थी कड़ी फटकार

*     कहा था- “पॉलिटकल एजेंट की तरह कर रहे काम, ये पद पर रहने के लायक नहीं; इन्हें हटा देना चाहिए

*      सरकारी कार्यक्रम में भाजपा के समर्थन की अपील करते कलेक्टर का वीडियो हो चुका है वायरल

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) “एमपी अजब है, सबसे गजब है” यह स्लोगन भले ही मध्य प्रदेश में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए बनाया गया हो, मगर वाकई में यह प्रदेश अजब और गजब है, तभी तो पन्ना के चर्चित कलेक्टर संजय कुमार मिश्र (आईएएस) ने पन्ना गौरव दिवस के तीन दिवसीय कार्यक्रम में जिला मुख्यालय के सभी शासकीय कार्यालयों के शासकीय सेवकों को सपरिवार अनिवार्य रूप से उपस्थिति दर्ज कराने का निर्देश जारी कर दिया। पन्ना कलेक्टर के इस तुग़लकी फरमान की हर तरफ चर्चा हो रही है। वहीं सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों में इसे लेकर आंतरिक तौर पर गहरी नाराज़गी देखी जा रही है।
शनिवार 20 मई से शुरू हुए पन्ना नगर के प्रथम गौरव दिवस एवं छत्रसाल जयंती महोत्सव के कार्यक्रम में सोमवार 22 मई को प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का पन्ना आगमन हो रहा है। वर्तमान में पड़ रही लू के थपेड़ों वाली प्रचंड गर्मी और उमस के मद्देनजर मुख्यमत्री के कार्यक्रम में पर्याप्त भीड़ जुटाने के लिए सरकारी कर्मचारियों को पन्ना गौरव दिवस के कार्यक्रम में सपरिवार अनिवार्य रूप से उपस्थिति दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं। इस संबंध में पन्ना कलेक्टर संजय कुमार मिश्र के हवाले से जिला जनसम्पर्क कार्यालय पन्ना के द्वारा शुक्रवार 19 मई को समाचार क्रमांक/94/751/ जारी किया गया है। स्थानीय समाचार पत्रों एवं डिजिटल मीडिया में प्रकाशित इस खबर में स्पष्ट तौर पर उल्लेख है कि, “कलेक्टर श्री संजय कुमार मिश्र ने 20 मई से शुरू होने वाले तीन दिवसीय पन्ना गौरव दिवस के कार्यक्रम में जिला मुख्यालय के सभी शासकीय कार्यालयों के शासकीय सेवकों को सपरिवार अनिवार्य रूप से उपस्थिति दर्ज कराने के लिए निर्देशित किया है। उन्होंने कहा है कि छत्रसाल जयंती पर आयोजित गौरव दिवस के कार्यक्रमों में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करें।” बता दें कि चुनावी साल में पहली बार पन्ना नगर का गौरव दिवस मनाने का फैसला लिया गया है।
पन्ना के वरिष्ठ कांग्रेस नेता दीपचन्द्र अग्रवाल ने कलेक्टर संजय कुमार मिश्र के इस निर्देश को तुगलकी फरमान करार दिया है। उन्होंने कहा कि, सरकारी कर्मचारियों पर इस तरह दबाव बनाना घोर आपत्तिजनक और पूर्णतः अनुचित है। इसकी जितनी भी आलोचना की जाए शायद वह कम है। कांग्रेस नेता दीपचंद का मानना है कि सत्ता के मद में चूर प्रदेश की शिवराज सरकार और उसके चहेते कलेक्टर के इस कारनामे से उनकी तुच्छ मानसिकता का पता चलता है। ये लोग सरकारी कर्मचारी के साथ उनके परिजनों को भी अपना बंधुआ मजदूर समझते हैं, तभी तो इस तरह के निर्देश जारी कर रहे हैं।

https://twitter.com/i/status/1554801951073656832

पूर्व जिला पंचायत सदस्य अनिल तिवारी ने कहा कि आईएएस संजय कुमार मिश्र ऐसे अफसर हैं जो कि भारतीय जनता पार्टी की भक्ति के चक्कर में पूर्व कई बार एक्सपोज़ हो चुके हैं। लोकसेवक की मर्यादा भुलाकर पदीय गरिमा को गिराने वाले संजय कुमार को मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने पिछले साल कड़े शब्दों में फटकार लगाई थी। साथ ही उनकी कार्यप्रणाली पर भी बेहद गंभीर सवाल उठाए थे। जबलपुर हाईकोर्ट ने गुनौर जनपद उपाध्यक्ष के निर्वाचन संबंधी मामले की सुनवाई के दौरान अपनी टिप्पणी में कहा था कि- “पन्ना कलेक्टर पॉलिटिकल एजेंट की तरह काम कर रहे हैं। इसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। इन्हें पद से हटा देना चाहिए’।” इसके बाद भी प्रदेश सरकार ने निर्लज्जता दिखाते हुए संजय कुमार मिश्र को पन्ना से नहीं हटाया।
उल्लेखनीय है कि पन्ना कलेक्टर संजय मिश्र का एक वीडियो भी कुछ माह पूर्व वायरल हुआ था। जिसमें वे यह दावा करते नज़र आ रहे हैं कि अगले 25 वर्षों तक बीजेपी सत्ता में रहने वाली है, इसलिए लोगों को किसी तरह बहकावे में न आकर भाजपा का समर्थन करना चाहिए। जिले के अमानगंज क़स्बा में विकास यात्रा के सरकारी कार्यक्रम के बताए गए इस वीडियो में वे सीएम शिवराज और प्रधानमंत्री मोदी की तारीफों में पुल बांधते नज़र आ रहे हैं। पन्ना कलेक्टर यह कह रहे हैं कि सीएम कहते हैं कि आप ही लोगों की दुआओं व आशीर्वाद से से वे चौथी बार मुख्यमंत्री बने हैं। वहीं इस समय देश की आज़ादी के 75 साल पूरे हुए हैं। प्रधानमंत्री का सपना है कि जब आज़ादी की शताब्दी पूरी हो तब यही सरकार रहे।

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का निधन : राजकीय सम्मान के साथ सुंदर लाल विश्वकर्मा को दी अंतिम विदाई

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*      102 वर्ष की आयु में हुआ देहांत, धर्म ग्रंथों के थे प्रकाण्ड विद्वान

पन्ना। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना जिले के अजयगढ़ क़स्बा निवासी वयोवृद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सुंदर लाल विश्वकर्मा के निधन से क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। शनिवार 20 मई को 102 वर्ष की आयु में उन्होंने अपने निज निवास पर अंतिम सांस ली। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्री विश्वकर्मा को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। मुक्तिधाम में पुलिस जवानों की टुकड़ी के द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। गणमान्य नागरिकों ने उनके निधन को अपूर्णीय क्षति बताया है।
युवा अवस्था के दिनों में सुंदर लाल विश्वकर्मा देश को अंग्रेजी हुकूमत की गुलामी से आज़ादी दिलाने के संघर्ष में बढ़चढ़ कर शामिल रहे। समूचे बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र में स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाने वाले सेनानियों के रूप में उन्हें जाना जाता था। श्री विश्वकर्मा धर्म ग्रंथों के प्रकाण्ड विद्वान् के रूप में भी विख्यात थे। गीता और रामचरित्र मानस उन्हें कंठस्थ थी। इसके अलावा वह अपने फर्नीचर के पैतृक व्यवसाय में भी काफी सफल थे। अपने हुनर के चलते सुंदर लाल जी फर्नीचर के बेहतरीन कारीगरों में शुमार करते थे। लंबे संघर्ष के बाद देश को आज़ादी मिलने पर उनका झुकाव समाजसेवा की ओर रहा। अपने पैतृक व्यवसाय के साथ-साथ समाजसेवा से जुड़े कार्यों में श्री विश्वकर्मा काफी सक्रिय रहे। शनिवार 20 मई को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सुंदर लाल विश्वकर्मा (102 वर्ष) का निधन होने की खबर आते ही अजयगढ़ सहित समूचे जिले में शोक की लहर दौड़ गई।
प्रशासन के द्वारा पूरे राजकीय सम्मान के साथ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी को अंतिम विदाई दी गई। श्री विश्वकर्मा की पार्थिव देह को राष्ट्रीय धव्ज में लपेटा गया। उनके निज निवास से अंतिम यात्रा जब मुक्तिधाम के लिए रवाना हुई तो लोगों की आंखें नम हो गई। शव यात्रा में साथ चल रहे गणमान्य नागरिकों ने अर्थी को कांधा दिया। अजयगढ़ के मुक्तिधाम में पुलिस जवानों की टुकड़ी के द्वारा गार्ड ऑफ़ ऑनर दिया गया। साथ ही पुलिस जवानों ने सलामी देते हुए आसमान में फायरिंग की। तदुपरांत वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उनके बेटे ने मुखाग्नि दी। अंतिम विदाई के दौरान तहसीलदार सुरेन्द्र कुमार, एसडीओपी कल्याणी वरकड़े, थाना प्रभारी हरिसिंह ठाकुर कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष भरत मिलन पाण्डेय, ब्लॉक अध्यक्ष दादूराम मिश्रा, भाजपा मंडल अध्यक्ष गोविंद उर्फ बब्लू कुशवाहा, नगर कांग्रेस अध्यक्ष आशीष जड़िया, पत्रकार मुस्तकीम खान, मोहम्मद आज़ाद, अनिल गुप्ता सहित काफी संख्या में नगरवासी समाजसेवी उपस्थित रहे। सभी ने उनके निधन पर गहरा व्यक्त किया है।

मप्र : सत्ता के संरक्षण में जारी रेत की लूट बनीं समस्या, जनमानस में भारी आक्रोश

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प्रतिबंधित मशीनों के जरिए केन नदी पर रात-दिन बड़े पैमाने पर जारी है रेत का अवैध खनन।

*     रेत परिवहन करने वाले ओवरलोड वाहनों के कारण अजयगढ़ घाटी में आए दिन लग रहा चक्काजाम

*     शुक्रवार को घाटी में लगे चक्काजाम में कई घंटों तक प्रचंड गर्मी फंसे रहे सैंकड़ों वाहन

   रेत के वाहनों की भागम-भाग के चलते तराई अंचल में सड़क हादसों का लगातार बढ़ रहा ग्राफ

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के छतरपुर और पन्ना जिले में केन नदी पर रेत का अवैध खनन ताबड़तोड़ अंदाज में चल रहा है। शासन-प्रशासन के संरक्षण में खुलेआम जारी सुनहरी रेत की संगठित लूट का खेल इलाके के लोगों के लिए बड़ी समस्या बन चुका है। रेत माफिया के द्वारा नदी में दैत्याकार मशीनें उतारकर अंधाधुंध रेत खनन कराने से एक ओर जहां केन का अस्तित्व गंभीर संकट में आ गया है, वहीं दूसरी तरफ इस रेत का परिवहन करने वाले हाइवा-डंपरों की भागम-भाग के कारण पन्ना के तराई अंचल में सड़क हादसों का ग्राफ बढ़ने के साथ अजयगढ़ घाटी (कटनी-कानपूर मार्ग) पर आए दिन चक्काजाम लगने से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है। रेत के अवैध खनन और परिवहन पर सख्ती से रोक लगाने के बजाए जिम्मेदार अफसर काली कमाई के चक्कर में तमाशबीन बने हुए हैं। परिणामस्वरूप रेत की लूट का कई तरह से ख़ामियाज़ा भुगतने को मज़बूर निर्दोष क्षेत्रवासियों में शिवराज सरकार और व्यवस्था को लेकर तीव्र आक्रोश व्याप्त है।
रेत के हैवी ओवरलोड वाहनों की रेलमपेल के कारण पन्ना की अजयगढ़ घाटी में लगे चक्क्जाम का नजारा।
रेत के अवैध परिवहन से उपजी समस्या की जटिलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्टेट हाइवे क्रमांक- 49 पर पन्ना-अजयगढ़ के बीच आए दिन लगने वाले चक्क्जाम से बचने के लिए वाहन चालक अपने गंतव्य तक पहुँचने वैकल्पिक मार्गों से होकर यात्रा कर रहे हैं। अजयगढ़ घाटी में शुक्रवार 19 मई की सुबह रेत के हैवी ओवरलोड वाहनों के रेलमपेल के चलते एक बार फिर चक्काजाम लग गया। फिर क्या था प्रचंड गर्मी-उमस के बीच अजयगढ़ घाटी में सैंकड़ों वाहन कई घण्टे तक जाम के झाम में फंसे रहे। इस दौरान थाना पुलिस, यातायात पुलिस और उक्त सड़क पर टोल टैक्स की वसूली करने वाले ठेकेदार के कर्मचारी करीब 2 घण्टे तक नदारत रहे। चक्काजाम में फंसे छोटे चार पहिया वाहन, यात्री बस और मालवाहक वाहनों के चालक व राहगीर जाम को खुलवाने के लिए अपने स्तर पर काफी देर तक मशक्कत करते रहे। इस दौरान चक्काजाम में फंसे वाहनों में सवार छोटे बच्चे, महिलायें एवं बुजुर्ग भीषण गर्मी, प्यास और भूख से बेहाल नजर आए।

दरअसल, अजयगढ़ घाटी में हनुमान मंदिर के पास जहां पर चक्काजाम लगा था वहां से दोनों तरफ आसपास पेयजल व जलपान आदि की कोई व्यवस्था नहीं है। अगर कुछ है तो खतरनाक घाटी और बियाबान जंगल। चक्काजाम में फंसे वाहनों की दोनों तरफ दूर तक लंबी कतार लगने के वीडियो-फोटोग्राफ्स और ख़बरें सोशल मीडिया पर आने के बाद भी जिम्मेदार उदासीन बने रहे। तत्परता से चक्काजाम को खुलवाने के लिए कोई पहल नहीं की गई। दोपहर में धूप चढ़ने के बाद चक्काजाम को खुलने अजयगढ़ थाना का पुलिस बल मौके पर पहुंचा। पुलिस जवानों के द्वारा क्षेत्रीय लोगों और जाम में फंसे राहगीरों की मदद से कड़ी मशक्कत के बाद दोपहर करीब 1 बजे बमुश्किल चक्काजाम खुलवाया गया। तब कहीं जाकर अजयगढ़-पन्ना मार्ग पर वाहनों का आवगमन बहाल हो सका।

केन नदी को खोखला करने में जुटा माफिया

केन नदी के जिगनी घाट में गहरे पानी के अंदर से रेत निकालते लिफ्टर।
केन नदी के दोनों किनारों (छतरपुर एवं पन्ना जिले की सीमा) पर रेत माफिया के द्वारा पिछले 4 साल से बड़े पैमाने पर रेत का अनियंत्रित तरीके से दोहन किया जा रहा है। एक अनुमान के मुताबिक दोनों ही जिलों से प्रतिदिन 500 डंपर से अधिक रेत निकाली जा रही है। केन नदी के दोनों किनारों पर 40-50 किलोमीटर क्षेत्र में दर्जनों स्थानों पर मशीनों के जरिए रेत का अवैध खनन खुलेआम जारी है। रेत माफिया के द्वारा नदी में बड़ी संख्या में पोकलेन मशीनें व लिफ्टर उतारकर केन की कोख और सीना छलनी कर रेत निकलने से केन नदी का अस्तित्व पर गंभीर संकट मंडराने लगा है। वर्तमान में नदी का जल स्तर कम होने पर माफिया के द्वारा ज्यादा से ज्यादा रेत निकालने के लिए नियम-कानूनों की धज्जियाँ उड़ाते हुए पोकलेन मशीनों के नुकीले जबड़ों से पानी के अंदर नदी की खुदाई करवाई जा रही है। पन्ना जिले के अजयगढ़ क्षेत्र अंतर्गत बीरा, चंदौरा, जिगनी, रामनई, मोहना, भानपुर, उदयपुर आदि नदी घाटों को खोखला कर पर रात-दिन मशीनों से जरिए केन की रेत को लूटा जा रहा है।

खनिज मंत्री के क्षेत्र में बेख़ौफ़ जारी अवैध खनन

केन नदी की जलधारा को रोककर माफिया के द्वारा जगह-जगह से निकाली जा रही रेत।
हैरानी की बात है कि रेत के अवैध खनन का यह खेल शिवराज सरकार के खनिज मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह और भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष एवं खजुराहो सांसद विष्णु दत्त शर्मा के निर्वाचन अंतर्गत चल रहा है। रेत की लूट पर दोनों ही जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों की रहस्मयी चुप्पी लंबे समय से बरकरार है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने 2 वर्ष पूर्व अजयगढ़ क्षेत्र की अवैध रेत खदानों का दौरा करने के बाद भाजपा के इन दोनों जनप्रतिनिधियों पर रेत माफिया को संरक्षण देकर बेतहाशा काली कमाई करने का बेहद गंभीर आरोप लगाया था। जिस पर खनिज मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह और सांसद विष्णु दत्त शर्मा ने खुद पर लगे आरोपों को सिरे नकारते हुए पलटवार किया था। लेकिन लाख टके सवाल यही है छतरपुर और पन्ना जिले में पिछले 4 साल से केन नदी पर वृहद पैमाने पर खुलेआम जारी रेत की लूट सत्ता प्रतिष्ठान के संरक्षण के बगैर क्या संभव है ? आमसभाओं के मंच से माफिया को 10 फिट नीचे गड्ढे में दफन करने की सख्त चेतावनी देने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के रहते हुए पन्ना में खुलेआम तांडव कर रहे रेत माफिया को इतना साहस आखिर कहां से मिल रहा है ?

मानसून के पूर्व रेत का पहाड़ लगाने में जुटा माफिया

शुक्रवार 19 मई को अजयगढ़ घाटी में लगे चक्क्जाम करीब 4 घण्टे तक सैंकड़ों वाहन फंसे रहे।
पिछले एक माह से छतरपुर और पन्ना जिले की खदानों से प्रतिदिन जितनी भी रेत निकाली जा रही उसकी 30-40 फीसदी मात्रा का भंडारण पन्ना के नजदीक नेशनल हाइवे किनारे स्थित बहेरा ग्राम में किया जा रहा है। महीने भर से रेत माफिया के करीब एक सैंकड़ा हैवी ओवरलोड डंपर-हाइवा अजयगढ़ के रास्ते पन्ना होकर बहेरा डंप पहुंच रहे हैं लेकिन अब तक किसी ने भी इनके खिलाफ कार्रवाई करने हिम्मत नहीं दिखाई। मानसून की दस्तक़ के पूर्व बहेरा में लाखों घनमीटर रेत का पहाड़ लगाने में जुटे माफ़िया के लिए पन्ना जिले का प्रशासन और पुलिस रेड कार्पेट की तरह बिछ गया है। जनचर्चा है कि रेत की लूट पर अपनी आंख-कान और मुंह बंद रखने के एवज़ में प्रशासनिक अफसरों व पुलिस को माफिया से सिस्टम के तहत काली कमाई के रूप में मोटी रकम मिल रही है। फलस्वरूप डबल इंजन की सरकार में बहुमूल्य खनिज संपदा की लूट का खेल दोगुनी क्षमता के साथ बेरोकटोक जारी है।

प्रतिदिन निकलते हैं सैंकड़ों ओवरलोड वाहन

क्षमता से अधिक रेत का धड़ल्ले से परिवहन करते रेत माफिया के हाइवा-डंपर।
केन की तबाही को नजर अंदाज करने के एवज में जिले के प्रशासनिक एवं पुलिस अफसरों के साथ-साथ खनिज विभाग, जिला परिवहन विभाग, राजस्व अधिकारी, पत्रकार और रेत खनन प्वाइंट क्षेत्र लेकर रेत भंडारण क्षेत्र तक रास्ते में पड़ने सभी पुलिस थानों व चौकियों का मासिक नजराना फिक्स है। इसके अलावा अजयगढ़ से होकर प्रतिदिन पन्ना, सतना व उत्तर प्रदेश के बांदा और चित्रकूट जिलों के लिए बगैर ईटीपी के रेत का परिवहन करने वाले सैंकड़ा भर से अधिक हैवी ओवरलोड डंपर-हाइवा तथा टैक्टर-ट्रॉली से भी एंट्री वसूली का गोरखधंधा बड़े मजे से चल रहा है। कुल मिलाकर अवैध कमाई के चक्कर में जिम्मेदार अफसर केन नदी की विनाशलीला, रेत के ओवरलोड वाहनों की भागमभाग से होने वाले सड़क हादसों और अजयगढ़ घाटी में आए दिन लगने वाले चक्काजाम से जानबूझकर मुंह फेरे हुए हैं।

मप्र : प्रभारी बदलने मात्र से क्या शांत हो जाएगी कांग्रेस संगठन की अंतर्कलह ?

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फाइल फोटो।

*     जिला कांग्रेस कमेटी पन्ना के नए प्रभारी बने जीवन पटेल

*     पूर्व जिला प्रभारी सम्मति सैनी के कांग्रेसियों ने जिले भर में फूंके थे पुतले

*     कांग्रेस की जिला कार्यकारिणी और ब्लॉक अध्यक्षों की मनमानी नियुक्ति का जारी है विरोध

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) जिला कांग्रेस कमेटी पन्ना की अप्रैल माह में घोषित जंबो कार्यकारिणी में मनमाने तरीके से नियुक्तियां किए जाने पर मचे जबरदस्त बवाल के बीच मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने पन्ना के लिए अनुभवी नेता जीवन पटेल को नया प्रभारी नियुक्त किया है। सागर जिले के रहली निवासी जीवन पटेल मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव हैं। पीसीसी चीफ कमलनाथ के निर्देश पर श्री पटेल को पन्ना जिला प्रभारी का दायित्व सौंपा गया है। इसके पूर्व जबलपुर जिले के कांग्रेस नेता सम्मति सैनी पन्ना जिला कांग्रेस प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। जिला कार्यकारिणी की नियुक्तियों को लेकर नाराज़ स्थानीय कांग्रेसियों ने पिछले माह सड़क पर उतरकर जिला कांग्रेस अध्यक्ष पन्ना श्रीमती शारदा पाठक और जिला प्रभारी सम्मति सैनी के खिलाफ उग्र प्रदर्शन किया था। इसी मुद्दे को लेकर हाल ही में कांग्रेस समर्थित आदिवासी-दलित क्रांति सेना ने जिले भर में कांग्रेस अध्यक्ष और जिला प्रभारी सैनी के पुतले दहन कर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया था।
पन्ना जिला कांग्रेस के नव नियुक्त प्रभारी जीवन पटेल।
आदिवासी क्रांति सेना के मुखिया केपी सिंह बुंदेला ने कांग्रेस की जिला कार्यकारिणीं में आदिवासी, दलित, अल्पसंख्यक और पिछड़े वर्गों की उपेक्षा किए जाने और कांग्रेस संगठन में प्रदत्त आरक्षण प्रावधान अनुसार प्रतिनिधित्व प्रदान न करने के गंभीर आरोप लगाए थे। बता दें कि पिछले सप्ताह सम्मति सैनी जिला प्रभारी की हैसियत से जब पन्ना जिले के दौरे पर आए थे उस दिन जिले भर में उनके पुतले फूंके गए थे। उसी दिन उन्होंने पार्टी के एक कार्यक्रम में पन्ना जिले का प्रभार छोड़ने का ऐलान कर दिया था। सैनी ने इस निर्णय की वजह अपनी वृद्ध बीमार माँ की देखभाल में स्वयं का व्यस्त होना बताया था। सम्मति सैनी के पूर्व पड़ोसी जिला छतरपुर निवासी कांग्रेस नेता मनोज त्रिवेदी भी चंद माह पन्ना के प्रभारी रहे हैं। लेकिन पीसीसी चीफ कमलनाथ के निर्देश पर कुछ माह पूर्व पन्ना के दौरे पर आए वरिष्ठ नेता जेपी धनोपिया ने जब यहां कांग्रेसजनों से मुलाकत कर संगठन की नब्ज़ टटोली तो उसके बाद तत्काल प्रभाव से मनोज त्रिवेदी के प्रभार में परिवर्तन कर उन्हें टीकमगढ़ जिले का दायित्व सौंपा गया था।
जिला कार्यकारिणी में की गई मनमानी नियुक्तियों के विरोध स्वरूप पन्ना के गांधी चौक पर प्रदर्शन करते हुए नाराज कांग्रेस पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता। (फाइल फोटो)
ग़ौरतलब हो कि जिला कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती शारदा पाठक के अब तक के कार्यकाल में पन्ना जिले के दो प्रभारी बदले जा चुके हैं। अंदरखाने चर्चा है कि पन्ना के जिला सह प्रभारी प्रवीण खरे भी मौजूदा जिला कांग्रेस अध्यक्ष के साथ कार्य करने में असहज महसूस कर रहे हैं। सह प्रभारी ने बक़ायदा मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी को लिखित और मौखिक तौर पर अवगत कराते हुए पन्ना के प्रभार से मुक्त करने का आग्रह किया है। वहीं पन्ना में जिला कार्यकारिणी को लेकर मचे घमासान के बीच जब सैंकड़ा भर पदाधिकारियों ने जिला कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करते हुए अपने पदों से सामूहिक इस्तीफ़ा दिया तो प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने मामले को संज्ञान लिया था। मध्य प्रदेश के सह प्रभारी एवं कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव सीपी मित्तल को आनन-फानन में पन्ना जिले की संगठनात्मक समीक्षा के लिए पन्ना भेजा गया। जिसकी रिपोर्ट श्री मित्तल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को सौंप चुके हैं। लेकिन इस रिपोर्ट पर क्या कार्रवाई की गई इसका किसी को पता नहीं चल सका। हालांकि इस बीच पन्ना जिले के प्रभार में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिला। मध्यप्रदेश कांग्रेस के सह प्रभारी के तौर पर अभी तक पन्ना जिले का प्रभार संजय कपूर के पास था जिसे अब प्रदेश के दूसरे सह प्रभारी सीपी मित्तल को सौंपा गया है। यहां महत्वपूर्ण सवाल यही है कि प्रभारियों के प्रभार बदलने मात्र से क्या पन्ना में संगठन की अंतर्कलह शांत हो जाएगी ?
पन्ना जिला कांग्रेस अध्यक्ष शारदा पाठक को निर्वाचन संबंधी प्रमाण पत्र देते पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा एवं प्रदेश कांग्रेस प्रभारी जेपी अग्रवाल। (फाइल फोटो)
मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के मुहाने पर खड़ा है, जहां कांग्रेस नेतृत्व प्रदेश की सत्ता में मजबूती के साथ वापसी की उम्मीद लगाए हुए है। लेकिन यह तभी संभव है जब कांग्रेस पार्टी बेहतर रणनीति के साथ पूरी एकजुटता से भाजपा की चुनौती का ज्वलंत मुद्दों के आधार पर सामना करे। इसके लिए कांग्रेस संगठन का धरातल पर अधिक सक्रिय, मजबूत होना और पूरी ईमानदारी से विपक्ष की भूमिका निभाना जरुरी है। विधानसभा चुनाव के समय संगठन में घमासान मचना विपक्षी दल कांग्रेस के लिए अच्छा संकेत नहीं हैं। और इस पर भी उठाई गई आपत्तियों का तत्परता से सर्वमान्य हल न निकालना प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व मंशा पर सवाल खड़े करता है। पन्ना के मामले का पटाक्षेप करने पीसीसी द्वारा अब तक किए गए उपाए ठीक वैसे ही जैसे समस्या पेड़ की जड़ में है और टहनियों की छंटाई की जा रही है। चुनाव पूर्व अनिर्णय की स्थिति को देखकर लगता है कहीं ऐसा न हो जिम्मेदारों को जब पूर्ण सर्जरी का ख्याल आये तब तक बीमारी ही कहीं लाइलाज़ न हो जाए।
पन्ना की संगठनात्मक समीक्षा करने आए कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव सीपी मित्तल से सर्किट हाउस में मुलाकत कर असंतुष्ट नेताओं ने अपना पक्ष रखा। (फाइल फोटो)
दरअसल, पन्ना का मामला जिला कार्यकारिणी की नियुक्तियों में की गई मनमानी से भी कहीं अधिक चिंताजनक कांग्रेस का विपक्ष की भूमिका से लगभग गायब होना है। जिला कार्यकारिणी से असंतुष्ट और इस्तीफ़ा देने वाले कांग्रेस नेतागण सरेआम पार्टी अध्यक्ष को भाजपा का एजेंट बता रहे हैं। उनके अनुसार यह आरोप हवा-हवाई नहीं बल्कि इसके पीछे अनेक ठोस आधार हैं जैसे नगरीय निकाय चुनाव और जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में कांग्रेस पार्टी का बेहद शर्मनाक प्रदर्शन, पिछले चार साल से जिले में लगातार जारी रेत व पत्थर की खुली लूट के खिलाफ कांग्रेस संगठन का सड़कों पर न उतरना।
कांग्रेस जिला कार्यकारिणी में आदिवासी एवं दलितों को समुचित प्रतिनिधित्व न देने के विरोधस्वरूप प्रदर्शन करते आदिवासी-दलित क्रांति सेना के पदाधिकारी। (फाइल फोटो)
इसके अलावा पन्ना विधायक एवं प्रदेश के खनिज मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह और क्षेत्रीय सांसद एवं भाजपा प्रदेशाध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा के क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार तथा प्रशासनिक अराजकता के मुद्दे पर भाजपा के दोनों दिग्गजों के खिलाफ खुलकर हल्ला न बोलना भी गंभीर चिंता का सबब है। हालांकि जिला कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती शारदा पाठक स्वयं के ऊपर लगे आरोपों को सिरे से ख़ारिज करते हुए पूरी क्षमता और निष्ठा के साथ पार्टी का कार्य करने का दावा करती हैं। उधर, नाराज कांग्रेस नेताओं का स्पष्ट कहना है उनके द्वारा उठाए गए तथ्यात्मक और प्रमाणित आरोपों का जब तक ठोस निराकरण नहीं होता पन्ना में फूलछाप कांग्रेसियों से पार्टी को बचाने के लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा। इन परिस्थितियों में पन्ना जिले की तीनों विधानसभा सीटों पर आने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन कैसा रहेगा इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।

मेधावी छात्रा अविका ने पन्ना जिले का नाम किया रोशन

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सीबीएसई बोर्ड की हाईस्कूल परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली होनहार छात्रा अविका श्रीवास्तव।

*     सीबीएसई बोर्ड की हाईस्कूल परीक्षा में 98.4 प्रतिशत अंक अर्जित किए

पन्ना।(www.radarnews.in) कई दिनों के इंतजार के बाद सीबीएसई बोर्ड का हाईस्कूल का परीक्षा परिणाम शुक्रवार को जारी हुआ। मेधावी छात्रा अविका श्रीवास्तव ने हाईस्कूल की परीक्षा में 98.4 प्रतिशत अंक अर्जित करके रत्नगर्भा वसुंधरा पन्ना जिले का नाम रोशन किया है। नोएडा उत्तर प्रदेश स्थित फादर एंजेल स्कूल की होनहार छात्रा अविका श्रीवास्तव पन्ना के सिंचाई कॉलोनी निवासी विवेक श्रीवास्तव और श्रीमती आभा श्रीवास्तव की बेटी हैं। मीडिया मार्केटिंग क्षेत्र से जुड़े विवेक श्रीवास्तव वर्तमान में नई दिल्ली में कार्यरत है। बेटी अविका को मिली शानदार सफ़लता से पूरे परिवार में ख़ुशी की लहर देखी जा रही है।
बचपन से पढ़ाई में अव्वल रहने वाली कुशाग्र बुद्धि की धनी अविका के उत्कृष्ट प्रदर्शन पर परचितों, रिश्तेदारों और विधयालय स्टॉफ ने ख़ुशी जाहिर की है। साथ ही अविका और उनके माता-पिता को बधाई देते हुए छात्रा के उज्जवल भविष्य की कामना की है। उल्लेखनीय है कि सीबीएसई बोर्ड की हाईस्कूल परीक्षा में पन्ना जिले का नाम रोशन करने वाली छात्रा अविका श्रीवास्तव लोकतंत्र सेनानी (मीसाबंदी) एवं वरिष्ठ अधिवक्ता शिव बिहारी श्रीवास्तव जी की नातिन और पन्ना के शासकीय लोक अभियोजक किशोर श्रीवास्तव की भतीजी हैं। परिजनों का कहना है बेटी अविका ने अपनी मेहनत और लगन से पूरे परिवार को गौरान्वित किया है। स्वाभाव से विनम्र एवं मृदुभाषी छात्रा अविका ने अपनी इस सफलता का श्रेय गुरुजनों और माता-पिता के आशीर्वाद को दिया है।

स्मृति शेष- पंडित देवीदयाल पाठक | “प्रधानाध्यापक की नौकरी से इस्तीफ़ा दे दिया था लेकिन सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया”

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स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. पंडित देवीदयाल पाठक जी की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा में गणमान्य नागरिकों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

*      पुण्यतिथि पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पाठक जी को अर्पित की श्रद्धांजलि

*      स्व. पंडित देवीदयाल पाठक जी की स्मृति में काव्य गोष्ठी का हुआ आयोजन

मुस्तक़ीम खान, पन्ना/अजयगढ़।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड अंचल के सीमावर्ती इलाके में देश की आज़ादी की अलख जगाने वाले विख्यात साहित्यकार, पत्रकार, शिक्षक व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय पंडित देवीदयाल पाठक जी की पुण्यतिथि पर गणमान्य नागरिकों और साहित्यकारों ने उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। पन्ना जिले अजयगढ़ क़स्बा में गुरुवार 11 मई को स्व. श्री पाठक के निज निवास पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन हुआ। जहां उपस्थित लोगों ने पाठक जी के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर विद्वानजनों ने कहा कि स्व. देवीदयाल पाठक जी के समग्र चिंतन में मनुष्यता, स्वतंत्रता, राष्ट्र प्रेम, सिद्धांतों के प्रति दृंढता, समरसता और शालीनता का आव्हान है। उनकी शिक्षायें शांति, भाईचारे और लोक कल्याण की संकल्पना की सिद्धि का मार्ग प्रशस्त करती हैं। श्रद्धांजलि सभा के अंत में सभी ने दो मिनिट का मौन धारण कर उनकी आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।

बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. पंडित देवीदयाल पाठक जी। (फाइल फोटो)
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. पंडित देवीदयाल पाठक की पुण्यतिथि पर उनकी स्मृति में काव्य गोष्ठी का आयोजन भी हुआ। जिसका संचालन वीर रस के विख्यात कवि रामबाबू अग्निहोत्री विश्वास द्वारा किया गया। अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार बद्री प्रसाद त्यागी ने की। इस अवसर पर वरिष्ठ कवि मानस मर्मज्ञ राम अवतार तिवारी ने स्वर्गीय पाठक जी के विराट व्यक्तित्व और उनकी बहुमुखी प्रतिभा के बारे में बताते हुए कहा कि वह सभी को सदैव आदर सम्मान देते थे। लेकिन जरुरत पड़ने पर घमंडी अधिकारियों और नेताओं को खरी-खोटी भी सुनाते थे। उन्होंने जीवन पर्यन्त अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया। यहां तक कि तत्कालीन राजनेताओं से मतभेद होने के कारण सरकारी स्कूल के प्रधानाध्यापक के पद से इस्तीफ़ा दे दिया था।

जीवन पर्यन्त राष्ट्र सेवा में रहे सक्रिय

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. पंडित देवीदयाल पाठक जी की पुण्यतिथि के अवसर पर काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ।
इस अवसर पर रिटायर्ड पटवारी रामेश्वर खरे ने काव्य पाठ करते हुए स्वर्गीय पाठक को भारत माता का महान सपूत बताया। उन्होंने कहा कि देश को अंग्रेजी हुकूमत से देश को आज़ादी मिलने के बाद भी पाठक जी की सक्रियता में जरा भी कमी नहीं आई। अजयगढ़ क़स्बा से साप्ताहिक अख़बार दिव्य प्रहरी प्रकाशित कर वह बतौर संपादक जनसेवा और राष्ट्र सेवा में लंबे समय तक अपना योगदान देते रहे। भारतीय सेना में धर्मगुरु के पद पर कार्य करने वाले हरिओम द्विवेदी ने वेदों और सनातन धर्म के बारे में बताया। साथ ही कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय पाठक जी हमारे क्षेत्र के सर्वमान्य व्यक्ति थे, यह हम सब के लिए गर्व की बात है।

इनकी रही उपस्थिति

काव्य गोष्ठी में सहभागिता करने वाले सभी साहित्यकारों-कवियों को समाजसेवी श्रीराम पाठक के द्वारा सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान कवि रामबाबू अग्निहोत्री जी ने पाठक जी के व्यक्तिव एवं कृतित्व की स्मृतियों को स्मृति पत्र के रूप में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय श्री देवीदयाल पाठक स्मारक संस्थान के अध्यक्ष वरिष्ठ समाजसेवी पंडित श्रीराम पाठक को भेंट किया। काव्य गोष्ठी में पधारे सभी सम्मानित रचनाकारों-साहित्यकारों को स्मारक संस्थान की ओर से पीले वस्त्र एवं श्री पाठक जी द्वारा रचित मतंगेस्वर स्त्रोत भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर रामचन्द्र मिश्रा, दयाशंकर तिवारी, डॉक्टर रमाशंकर द्विवेदी, सुरेश गुप्ता, जन्मेजय अरजरिया, सतीश द्विवेदी, महबूब खान, सगीर बेग, लखनलाल यादव, आशीष जड़िया, जयराम पाठक, फूलचंद्र प्रजापति, महेन्द्र मिश्रा, आलोक पाठक, प्रभात पाठक सहित नगर के प्रतिष्ठित जन उपस्थित थे।

कर्नाटक का जनादेश : नफ़रत की सियासत को नकारा, असल मुद्दों पर लगाई मुहर

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सांकेतिक फोटो।

*      कांग्रेस को मिली प्रचंड जीत, सीटों का आंकड़ा 135 पार; भाजपा 66 सीटों पर सिमटी

    भाजपा के धार्मिक ध्रुवीकरण के दांव पर भारी पड़े महंगाई, रोज़गार और भ्रष्टाचार के मुद्दे

शादिक खान। (www.radarnews.in) कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने प्रचंड बहुमत के साथ शानदार जीत हांसिल की है। शनिवार 13 मई को घोषित नतीजों के अनुसार 224 सीटों वाले कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी को 135 सीटों पर जीत दर्ज कराई है। वहीं कर्नाटक में पूरी ताकत झोंकने वाली भारतीय जनता पार्टी को निराशा मिली है। भाजपा सिर्फ 66 सीटें ही जीत सकी। जबकि जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) 19 सीटों पर सिमट गई। निर्दलीय सहित अन्य को 4 सीटों पर सफलता मिली है। निर्वाचन आयोग के द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक कांग्रेस पार्टी को 42.9 प्रतिशत वोट मिले हैं। वहीं भाजपा को 36 और जेडीएस को 13.3 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए हैं। अन्य के हिस्से में 4 फीसदी वोट आए हैं। कर्नाटक में बीते 38 सालों से चला आ रहा सत्ता परिवर्तन का रिवाज़ इस बार भी बरक़रार रहा। तमाम हथकंडे अपनाने एवं चुनाव में पूरी ताकत झोंकने के बाद भी बीजेपी इस रिवाज़ को तोड़ नहीं पाई। मालूम हो कि वर्ष 1985 के बाद से कर्नाटक में कोई भी दल सत्ता में लगातार दूसरी बार वापसी नहीं कर सका।

रिवाज़ बदलने की उम्मीद को लगा झटका

दक्षिण भारत के राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य कर्नाटक में ऐतिहासिक जीत मिलने से कांग्रेस पार्टी में नए उत्साह, ऊर्जा और आशा का संचार हुआ। जबकि कर्नाटक का रिवाज़ बदलने की उम्मीद लगाए बैठी भाजपा को चुनावी नतीजों से तगड़ा झटका लगा है। पिछले चुनाव में 104 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी भाजपा इस बार सिर्फ 66 सीटों पर ही सिमट गई। वर्ष 2019 तमाम तिकड़म भिड़ाकर सरकार में आई भाजपा के मौजूदा प्रदर्शन को करारी शिकस्त के तौर पर देखा जा रहा है। राज्य में सत्ता विरोधी प्रचंड लहर को भांपते हुए भाजपा के द्वारा साल भर पहले से सांप्रदयिक ध्रुवीकरण का दांव चला गया था। सबसे पहले शैक्षणिक संस्थानों में हिज़ाब विवाद गरमाया और हलाल फिर उसके बाद भगवान बजरंगबली के कथित अपमान तथा मुस्लिम आरक्षण समाप्त करने जैसे मुद्दे उछालकर चुनाव में हिन्दू वोटों के ध्रुवीकरण की पुरजोर कोशिश की गई। लेकिन यह कोशिशें पार्टी के काम न आ सकीं।

पीएम मोदी का प्रचार भी काम न आया

कांग्रेस के द्वारा अपने घोषणा पत्र में जब बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई तो प्रधानमंत्री मोदी सहित पूरी भाजपा ने इसे भगवान बजरंगबली के अपमान से जोड़ दिया। प्रधानमंत्री ने अपनी चुनावी रैलियों में इस मुद्दे पर कांग्रेस को जमकर घेरा। हालांकि पार्टी के इस दांव का कर्नाटक की जनता पर कोई असर नहीं पड़ा। कर्नाटक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह एवं भाजपा के अन्य बड़े नेताओं ने धुंआधार चुनाव प्रचार किया। सत्ताधारी दल भाजपा की ओर से इस चुनाव को अपने पक्ष में करने के लिए तमाम संसाधनों का भी भरपूर उपयोग किया गया। बाबजूद इसके पार्टी का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। प्रधानमंत्री ने चुनाव प्रचार के दौरान कर्नाटक में विक्टिम कार्ड खेलते हुए आम जनमानस की सहानुभूति हांसिल करने के लिए कांग्रेस पार्टी पर उन्हें गालियां देने का आरोप लगाया। प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा हर तरह से अपनी प्रतिष्ठा को दांव पर लगाने के बाद भी कर्नाटक में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा। चुनावी नतीजों के विश्लेषण और भाजपा की हार के कारणों पर गौर करने से साफ़ पता चलता है कि कर्नाटक में कांग्रेस के द्वारा उठाए गए जमीनीं मुद्दों के सामने भाजपा के सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का दांव चारों खाने चित हो गया।

धार्मिक ध्रुवीकरण का दांव हुआ फेल

सांकेतिक फोटो।
साल भर पहले भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने प्रदेश की शैक्षिणक संस्थाओं में हिज़ाब पर बैन लगा दिया था। विपक्षी दलों ने जहां इसके खिलाफ प्रदर्शन किया तो हिंदूवादी संगठनों ने इस फैसले के समर्थन में हंगामा खड़ा किया। बवाल बढ़ने पर भाजपा ने हिजाब और हलाल जैसे मुद्दों को सही बताया। लेकिन जब चुनाव आया तो भारतीय जनता पार्टी के ही राज्य के बड़े नेताओं ने इन मुद्दों को गैरजरूरी बताते हुए इनसे किनारा लिया। चुनाव प्रचार के दौरान इन मुद्दों का किसी ने जिक्र तक नहीं किया। दरअसल इन मुद्दों के जरिए हिन्दू वोटों के ध्रुवीकरण की आस लगाए बैठी भाजपा के रणनीतिकारों को चुनावी समर में इस बात का भलीभांति एहसास हो चुका था कि हिज़ाब और हलाल जैसे मुद्दों से पार्टी को नुकसान होगा। इतना ही नहीं चुनाव से ठीक पहले 4 फीसदी मुस्लिम आरक्षण को समाप्त करने का दांव भी भाजपा को चुनावी शिकस्त से बचा नहीं सका। पार्टी को उम्मीद थी कि इससे चुनाव में उसके पक्ष में हिन्दू वोटों का ध्रुवीकरण होगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

BJP पर भारी पड़ा भ्रष्टाचार का मुद्दा

प्रदेश में भाजपा की सरकार की हार का सबसे बड़ा कारण भ्रष्टाचार का मुद्दा रहा। इस ज्वलंत मुद्दे को कांग्रेस पार्टी ने प्रभावी तरीके से उठाते हुए चुनाव के साल भर पहले से ही भजपा की सरकार को घेरना शुरू कर दिया था। कांग्रेस पार्टी ने कर्नाटक की भाजपा सरकार पर सरकारी ठेकों में 40 में चालीस फीसदी कमीशन खाने का आरोप लगाया और इस सरकार को 40 प्रतिशत कमीशन की सरकार के तौर पर जमकर प्रचारित किया। मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई को पे-सीएम बताते हुए राज्य भर में पोस्टर लगाए गए। चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी कर्नाटक में व्याप्त भ्रष्टाचार पर जमकर हमला बोलते हुए पीएम मोदी पर इसे नजर अंदाज करने का आरोप लगाया था। चुनाव के समय कर्नाटक के बीजेपी विधायक का पुत्र 8 करोड़ रुपए के साथ पकड़ा गया। वहीं बीजेपी के एक विधायक के द्वारा यह कहना कि 2500 करोड़ रुपए में मुख्यमंत्री की कुर्सी खरीदी जा सकती है जैसे बयान पर राहुल गांधी ने बीजेपी को आड़े हाथ लेते हुए कर्नाटक की सरकार को सवालों के कठघरे में खड़ा कर दिया।

5 गारंटी बनीं जीत का आधार

बेतहाशा बढ़ती महंगाई, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर परेशान कर्नाटक के मतदाताओं ने इस चुनाव में भाजपा के सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और नफरती एजेंडे को नकारते हुए सम्मानपूर्वक जीवनयापन की उम्मीद में कांग्रेस की पांच गारंटियों पर अपना भरोसा जताया है। चुनावी नतीजे इस बात की तस्दीक करते हैं। भाजपा ने चुनावी कैंपेन के दौरान सत्ता विरोधी लहर को कमज़ोर करने और सरकार की नाकामियों से ध्यान हटाने के लिए अपनी जीत के सबसे सफल फार्मूले में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण पर फोकस किया। जिसका खामियाजा उसे हार के रूप में भुगतना पड़ा। बता दें कि राज्य में चुनाव पूर्व हुए अनेक सर्वेक्षणों में जनता ने महंगाई, भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी को ज्वलंत मुद्दा बताया था। फलस्वरूप कांग्रेस पार्टी ने अपनी 5 गारंटियों को इन्हीं स्थानीय मुद्दों को आधार बनाकर फ्रेम किया। जिसने महिलाओं, युवाओं और सर्वसमाज को कांग्रेस की तरफ आकर्षित किया। कांग्रेस ने चुनाव प्रचार अभियान के दौरान पूरे समय स्थानीय मुद्दों को ही तरजीह दी। दूसरी तरफ भाजपा ने इस चुनाव में समान नागरिक संहिता, एनआरसी, भक्तों को मंदिर प्रशासन की पूर्ण स्वायत्तता देने जैसे मुद्दों को उठाया। माना जा रहा था कि बीजेपी की कोशिश इन मुद्दों के जरिए हिन्दू वोटरों को अपने पक्ष में करना था। लेकिन कांग्रेस की 5 गारंटी सहित गैस सिलेंडर के दाम में रियायत के राहत भरे ऐलान ने भाजपा की कोशिश को असफल कर दिया। इसके अलावा बजरंग दल और पीएफआई जैसे संगठनों पर बैन लगाने की घोषणा का भी कांग्रेस को फायदा मिला। जिसका असर चुनावी नतीजों पर साफ़ दिख रहा है।

गांधी परिवार और खरगे के प्रचार का मिला फायदा  

कर्नाटक के दिग्गज कांग्रेस नेता सिद्धारमैया एवं डीके शिवकुमार।
कर्नाटक के विधानसभा चुनाव में पूरे गांधी परिवार यानी राहुल, प्रियंका और सोनिया गांधी ने प्रचार किया। एक और जहां राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने सीधे वोटरों से संवाद किया। वहीं लंबे समय बाद सोनिया गांधी ने चुनावी सभा को संबोधित करके कर्नाटक में कांग्रेस के चुनाव प्रचार अभियान को गति प्रदान करने का काम किया। चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी आम आदमी की तरह कभी नंदनी मिल्क पार्लर पहुंचकर दुकान संचालक से बात करते दिखे तो कभी डिलेवरी ब्वाय की बाइक पर बैठकर मुद्दे समझते नजर आये। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की इन तस्वीरों और वीडियो को पार्टी के द्वारा सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया गया जिसे लोगों ने काफी पसंद किया। उल्लेखनीय है कि कर्नाटक कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का गृह राज्य है, जहां उन्होंने डेरा डालकर चुनाव प्रचार अभियान का जिम्मा संभाला। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की मौजूदगी ने राज्य के पार्टी कार्यकर्ताओं के उत्साह और मनोबल को बढ़ाने का काम किया। इसके आलावा कर्नाटक कांग्रेस के दिग्गज़ नेता सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच पूरे समय नजर आई एकजुटता से भी वोटर्स के बीच सकारत्मक सन्देश गया। कर्नाटक में कांग्रेस की जीत में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा भी सहायक सिद्ध हुई है। कर्नाटक के जिन जिलों से भारत जोड़ो यात्रा गुजरी थी वहां की लगभग 70 फीसदी सीटों पर कांग्रेस पार्टी ने जीत दर्ज की है।

“परिवर्तन लाओ-पन्ना बचाओ रैली” आज अजयगढ़ में निकाली जाएगी

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पीसीसी मेम्बर श्रीकान्त पप्पू दीक्षित।

*      पीसीसी मेंबर श्रीकांत पप्पू दीक्षित की अगुवाई में हुंकार भरेंगे कांग्रेसी

पन्ना। (www.radarnews.in) पन्ना जिले के अजयगढ़ तहसील की ज्वलंत समस्याओं, अवैध रेत उत्खनन, फर्जी मुकदमा, पानी, बिजली जैसे मूलभूत सुविधाओं के मुद्दे को लेकर शनिवार 29 अप्रैल को जिला युवक कांग्रेस पन्ना के तत्वाधान में पीसीसी मेंबर श्रीकांत पप्पू दीक्षित के नेतृत्व में परिवर्तन लाओ पन्ना बचाओ रैली आयोजित की जा रही है। इस संबंध में जानकारी देते हुए कांग्रेस नेता श्रीकांत पप्पू दीक्षित ने बताया की प्रातः 11:00 अजयगढ़ की छोटी फील्ड में तहसील अंतर्गत आने वाले ग्रामीण क्षेत्र के पार्टी के वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी, कार्यकर्ता सहित ग्रामीण क्षेत्र की जनता एकत्रित होगी यहां से पैदल मार्च करते हुए तहसील कार्यालय पहुंचेंगे वहां पर समस्याओं को लेकर एक ज्ञापन प्रदेश के महामहिम राज्यपाल के नाम सौंपा जाएगा। उन्होंने बताया कि भाजपा के शासनकाल में आम जनमानस त्रस्त हो चुका है और वह परिवर्तन की मांग को बुलंद कर रहा है और इसी के चलते यह परिवर्तन लाओ रैली आयोजित की जा रही है। पीसीसी मेंबर श्री दीक्षित ने पार्टी की सभी नेताओं पदाधिकारियों कार्यकर्ताओं व मंडलम- सेक्टर के पदाधिकारियों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने की अपील की है।

किसान भाई अब ऑनलाइन प्राप्त कर सकेंगे भू-अधिकार ऋण पुस्तिका, पटवारी के चक्कर काटने की नहीं पड़ेगी जरुरत

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  ई-तकनीक का फायदा उठाकर ऑनलाइन प्राप्त करें राजस्व विभाग की सेवाएं

पन्ना। (www.radarnews.in) किसानों और आम जनता को भू-अधिकार ऋण पुस्तिका प्राप्त करने के लिए अब पटवारी के पास जाने की जरूरत नहीं है। आम जनता की सुविधा के लिये भू-अधिकार ऋण पुस्तिका को ऑनलाइन कर दिया गया है। कोई भी व्यक्ति अपनी भू-अधिकार ऋण पुस्तिका को नजदीकी कियोस्क सेंटर अथवा कॉमन सर्विस सेंटर या स्वयं के एन्ड्रायड मोबाइल से निर्धारित शुल्क 10 रूपये अदा कर ले सकता है। प्रदेश की जनता की सुविधा को ध्यान में रखते हुए राजस्व विभाग ई-तकनीक को बढ़ावा दे रहा है, ताकि किसानों एवं आमजन को तहसील एवं पटवारी के चक्कर न लगाने पड़ें। जनमानस की परेशानी को ध्यान में रखते हुए राजस्व विभाग के नियमों में बदलाव कर जन-सुविधा से जुड़े अभिनव प्रयोग किए जा रहे हैं। राजस्व महकमे द्वारा सुविधाजनक रूप से किए गए बदलाव का ई-तकनीक के माध्यम से लाभ उठाएँ और परेशानी से बचें। किसानों या आमजन को उनके खाते की खसरा, बी-1 एवं ऋृण-पुस्तिका की प्रति वाट्सएप पर उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है।

भूमि रिकॉर्ड ऑनलाइन

राजस्व विभाग द्वारा भूमि रिकॉर्ड को ऑनलाइन कर दिया गया है। अब भूमि रिकॉर्ड को जनता ऑनलाइन घर बैठे देख सकती है। अब जनमानस को सरकारी कार्यालयों में छोटी-छोटी सूचनाओं को प्राप्त करने के लिए बार-बार नहीं जाना पड़ेगा। मध्यप्रदेश भू-अभिलेख पोर्टल के माध्यम से खसरा-खतौनी की नकल, भू-अभिलेख का रिकॉर्ड, आबादी सर्वे का रिकॉर्ड, बंधक भूमि की स्थिति, बंदोबस्त अधिकार अभिलेख, बंदोबस्त निस्तार पत्रक की स्केन प्रति, जमा बंधी नकल, खेत का नक्शा, विवादित भूमि का विवरण ऑनलाइन प्राप्त कर सकते हैं।