* रोकथाम के लिए रैपिड रिस्पांस टीम गठित, जिला स्तरीय नियंत्रण कक्ष भी स्थापित
* जिले के नागरिकों को बर्ड फ्लू से बचाव के लिए विशेष सतर्कता बरतनी होगी
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) वैश्विक महामारी घोषित नोवल कोरोना वायरस संक्रमण के गम्भीर खतरे से समूचा देश व प्रदेश अभी जूझ ही रहा है कि इस बीच एक और वायरस की दस्तक ने पहले से जारी संकट को कहीं अधिक बढ़ा दिया है। इस वायरस का नाम एबियन इन्फ्लुएंजा है, जिससे (बर्ड फ्लू) फैलता है। पन्ना के लोगों लिए चिंताजनक बात यह है कि पड़ोसी जिला कटनी के रीठी में बर्ड फ्लू पाए जाने की अधिकारिक तौर पर पुष्टि हुई है। इसके मद्देनजर जिले के नागरिकों को विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।

बर्ड फ्लू पक्षियों और मुर्गे-मुर्गियों के जरिए इंसानों में फैलने वाला सर्दी-जुकाम है। आमतौर पर ये बीमारी एक पक्षी से दूसरे को होती है मगर कभी-कभी पक्षियों-मुर्गियों से इंसानों में भी हो जाती है। इसके बाद संक्रमित व्यक्ति के करीबी सम्पर्क में आने वाले दूसरे व्यक्ति में ये बीमारी फैलती है। जिले में इस वायरस से बचाव एवं रोकथाम के लिए जिला एवं खण्ड स्तरीय रैपिड रिस्पांस टीम गठन करने के साथ नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है। यह टीम अपने-अपने क्षेत्र में सघन भ्रमण कर जलाशयों में प्रवासी पक्षियों के सेम्पल के साथ आसपास के गांव में पाले जाने वाली कुक्कुट (मुर्गे-मुर्गियों) के सेम्पल एकत्र करेंगी। इन सेम्पलों को परीक्षण के लिए दा डायरेक्टर नेशनल इन्स्टिट्यूट ऑफ हाई सिक्योरिटी डिजिज आनन्द नगर हाथखेडा भोपाल भेजा जाएगा।

इस कार्य के लिए जिला स्तरीय रैपिड रिस्पांस टीम एवं कन्ट्रोल रूम का प्रभारी डाॅ. प्रियंका सिंह पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ मोबाइल नम्बर- 9406631543 है। इनके दल में 5 अधिकारी, कर्मचारी शामिल किए गए हैं। विकासखण्ड स्तरीय रैपिड रिस्पांस टीम पन्ना के प्रभारी डाॅ. भावना कुशवाहा पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ, अजयगढ टीम के प्रभारी डाॅ. एम.एल. प्रजापति पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ, गुनौर की टीम के प्रभारी डाॅ. सी.पी. चौरसिया पशु चिकित्सा अधिकारी, पवई टीम के प्रभारी डाॅ. जी.आर. नापित पशु चिकित्सा अधिकारी तथा शाहनगर विकासखण्ड की टीम के प्रभारी डाॅ. अंशू तुमराम पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ को नियुक्त किया गया है।
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प्राप्त जानकारी के अनुसार पन्ना जिले के अजयगढ़ तहसील क्षेत्र के ग्राम बरियारपुर भूमियान के बालिका छात्रावास में बनाए गये आईसोलेशन सेंटर में रूकी मजदूर महिला कल्ली बाई केवट पति रामदीन केवट 24 वर्ष को 1-2 अप्रैल की दरम्यानी रात में प्रसव पीड़ा उठी जिसकी सूचना छात्रावास अधीक्षिका द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र अजयगढ़ के डाॅक्टर के. पी. राजपूत को दी गई। जिनके द्वारा स्टाफ नर्स विमलेश सिंह को निर्देश देकर तुरंत श्रमिक महिला को छात्रावास परिसर में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में भर्ती कराया गया। जहां गुरुवार 2 अप्रैल की सुबह लगभग 09ः45 बजे कल्ली बाई ने एक बच्चे को जन्म दिया। बच्चे का वजन 2 किलो 600 ग्राम बताया गया है। रामनवमीं के दिन बच्चे का जन्म होने की खबर आते ही बरियारपुर भूमियान के आइसोलेशन परिसर में ठहरे श्रमिकों एवं महिला के परिजनों में ख़ुशी की लहर दौड़ गई। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और छात्रावास स्टॉफ सहित ग्राम पंचायत के कर्मचारियों द्वारा इस नवजात और प्रसूता का विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि अजयगढ़ क्षेत्र के ग्राम बरियारपुर भूमियान निवासी रामदीन केवट सपरिवार उत्तर प्रदेश के मथुरा के पालीखेड़ा में रहकर मजदूरी करता था। लाॅकडाउन के बाद अपने गांव पहुंचने वापस जाने के लिए केवट परिवार 29 मार्च 2020 को मथुरा से मिनी ट्रक में सवार होकर आगरा के लिए निकला। उक्त वाहन चालक ने रामदीन केवट और परिजनों को आगरा से 22 किलोमीटर पहले छोड़ दिया। इसके बाद वे पैदल चलकर आगरा पहुंचे, जहां से एक ट्रक ने झांसी छोड़ दिया और झांसी से 407 वाहन ने बरुआसागर तक पहुंचा दिया। वहां से ये लोग रेवाड़ी पहुंचे। रेवाड़ी से एक स्कूल बस ने इन्हें हरपालपुर पहुँचाया। हरपालपुर से बस में सवार होकर बमीठा तक आए। और फिर रामदीन केवट अपनी गर्भवती पत्नी के साथ 39 किलोमीटर पैदल चलकर 31 मार्च को अपने गाँव के नजदीक स्थित बरियारपुर डैम के तक पहुंचा। जहां से कोविड-19 दल प्रभारी द्वारा सचिव पप्पू लाल द्वारा इस श्रमिक परिवार को स्क्रीनिंग उपरान्त बरियारपुर छात्रावास के आइसोलेशन केन्द्र में एहतियात के तौर ठहराया गया। बहरहाल कोरोना संकट के बीच लॉकडाउन में सकुशल वापस गृहग्राम लौटने और बच्चे के जन्म से हर्षित यह मजदूर परिवार उन्हें मदद करने सभी लोगों और ईश्वर के प्रति अनुग्रहीत है।



कलेक्टर ने किराना दुकान खोलने हेतु 03, 05, 07, 09, 11 एवं 15 अप्रैल 2020 की तिथि निर्धारित की है इस बीच अन्य दिवसों पर दुकानें पूर्णतः बंद रहेगी। किराना दुकान खोलने हेतु प्रातः 10 बजे से शाम 5 बजे तक का समय निर्धारित किया है। इसी प्रकार दूध की दुकान प्रत्येक दिवस प्रातः 7 बजे से 11 बजे तक एवं शाम 5 बजे से शाम 7 बजे तक खोली जाएंगी। फल एवं सब्जी विक्रेता हाथ ठेला सहित केवल अपने-अपने वार्डो में हाथ ठेला के माध्यम से या ऑनकॉल सब्जी उपलब्ध कराएंगे। इसका समय प्रातः 7 बजे से 11 बजे तक एवं दोपहर बाद 3 बजे से शाम 5 बजे तक निर्धारित किया गया है। दवाईयों की दुकान प्रत्येक दिवस खोली जाएगी। इसके अतिरिक्त कार्यालयीन आदेश के द्वारा दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144 के तहत लाॅकडाउन संबंधी शेष निर्धारित शर्ते यथावत रहेंगी। यह आदेश तत्काल प्रभावशील होगा। इस आदेश का उल्लंघन धारा 188 भारतीय दण्ड विधान के तहत दण्डनीय होगा।




हैरानी इस बात को लेकर भी है कि इन सर्वे टीमों को गठित करने का निर्णय लेने वाले अधिकारियों ने टीम के सदस्यों की सुरक्षा के सम्बंध में एक बार भी नहीं सोचा। जबकि कोरोना संक्रमण के गंभीर खतरे को दृष्टिगत रखते हुए घर-घर जाकर बीमार व्यक्तियों की जानकारी जुटाने वाली टीम के प्रत्येक सदस्य को खुद के बचाव के लिए मास्क और ग्लब्स तो बेहद जरूरी हैं। देश और प्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमण की चिंताजनक स्थिति को देखते हुए इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि पन्ना जिले में बीमार व्यक्ति की जानकारी जुटाने और घर पर ही उन्हें दवा मुहैया कराने के काम में जुटीं टीमों के सदस्य आवश्यक सुरक्षा सामग्री के बगैर कितने सुरक्षित हैं।
पन्ना जिले में कोरोना वायरस संक्रमण की प्रभावी रोकथाम करने के लिए हेतु जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की टीमें युद्ध स्तर पर कार्य कर रही हैं। इसमें आमजन का आपेक्षित सहयोग भी प्रशासन को मिल रहा है। कुछ दिन पूर्व पन्ना कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी थी कि जिले की प्रत्येक पंचायत और नगरीय निकायों के प्रत्येक वार्ड में एक-एक टीम गठित की गई हैं, ये टीमें घर-घर जाकर सर्दी-खांसी, बुखार या सांस लेने में तकलीफ के लक्षणों वाले मरीजों की जानकारी एकत्र कर रहीं है। पूरे जिले में 450 टीमें इस काम में जुटीं हैं। इसके अलावा डॉक्टरों की 30 टीमें भी भ्रमण कर रहीं हैं।
बीमार व्यक्तियों की जानकारी जुटाने के काम में लगीं टीमों को उन सभी व्यक्तियों की वांछित जानकारी हांसिल करनी है जो कि पहले से ही जिले में हैं या फिर कुछ समय पूर्व बाहर से वापस पन्ना आए हैं। बीमार व्यक्ति के मिलने पर इन्हें उसकी तकलीफ से लेकर यात्रा से सम्बंधित और अन्य जानकारी प्राप्त करनी पड़ती है। अर्थात बीमार व्यक्ति से टीम के सदस्यों को बात करने में करीब 10-15 मिनिट लगते हैं। अभी तक बीमार व्यक्तियों की जो संख्या सामने आई है, उसके मद्देनजर बीमार व्यक्ति को साधारण सर्दी-जुकाम, बुखार हो सकता और वह कोरोना संदिग्ध भी हो सकता है। जरा सोचिए, जरूरी सुरक्षा सामान के बगैर ऐसे लोगों से रूबरू होना कितना जोखिम भरा काम है। सर्वे टीमों में शामिल मैदानी शासकीय कर्मचारियों को इसका अहसास है। और शायद यही वजह है कि सुरक्षा सामान के बगैर सर्वे का काम कर रहीं टीमों के अधिकाँश सदस्य मानसिक परेशानी महसूस कर रहे हैं। निजी बातचीत में वे अपने स्वास्थ्य और जीवन सुरक्षा से जुड़ी चिंता को खुलकर व्यक्त करते हैं लेकिन सार्वजानिक तौर पर कुछ भी कहने से डरते हैं।




