फ्रंट लाइन योद्धाओं को कोराना से बचाने वितरित की सुरक्षा सामग्री
* राष्ट्रीय लोधी युवा महासभा की अनूठी पहल
* पुलिस जवानों को मास्क एवं हैण्ड सेनेटाईजर किया भेंट
* समाज के अध्यक्ष बोले बोले- “इन योद्धाओं की करो देखभाल-तो कोरोना से देश
जीतेगा हर हाल”
राजेन्द्र कुमार, पन्ना।(www.radarnews.in) कोरोना वायरस संक्रमण यानी कोविड 19 की महामारी से पिछले तीन माह से पूरा देश एकजुटता के साथ लड़ रहा है। इस खतरनाक संक्रमण से लोगों को बचाने के लिए हमारे फ्रण्ट लाइन वर्कर जैसे पुलिसकर्मी, स्वास्थ्यकर्मी, सफाईकर्मी आदि अपनी जान की परवाह किये बगैर पूरी निष्ठा के साथ चौबीसों घंटे अपने दायित्व का ईमानदारी से निर्वाहन कर रहे है। संकट में ढाल बनकर खड़े इन योद्धाओं की सुरक्षा को लेकर आमजन भी चितिंत और संवेदनशील है। राष्ट्रीय लोधी युवा महासभा ने इसी उद्देष्य से आज पन्ना में कोतवाली थाना प्रभारी, सिविल लाइन पुलिस चौकी प्रभारी में पुलिस जवानों एवं महिला बाल विकास के जिला कार्यक्रम अधिकारी उदल सिंह ठाकुर को आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं वितरित करने के लिए बड़ी मात्रा में मास्क एवं सेनेटाईजर उपलब्ध कराया गया है।
इस अवसर पर लोधी युवा महासभा के जिलाध्यक्ष लोधी चन्द्रशेखर सिंह एवं अन्य समाजनों ने कोरोना योद्धाओं के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि आपदा काल में आपकी बहुमूल्य सेवाओं के लिए हम सब कृतज्ञ है। हम सबका यह मामना है कि कोरोना को हराने के लिए योद्धाओं की सुरक्षा सबसे ज्यादा जरूरी है। इसलिए हमारे समाज ने योद्धाओं सुरक्षा कवच रूपी मास्क और कोरोना से बचाव के लिए हैण्ड सेनेटाईजर वितरित करने का निर्णय लिया है। कोतवाली थाना प्रभारी हरि सिंह ठाकुर ने लोधी समाज के इस प्रयास को सामाजिक सरोकरों से जुड़ी अनूठी पहल बताते हुए इसकी सराहना की है। इस अवसर पर व्याख्याता नंदपाल सिंह, शिवमोहन सिंह लोधी, विजय सिंह लोधी, राजा सिंह महदेले, विक्रम महदेले, मनीष महदेले, भूपेंद्र महदेले, रामबरन सिंह, हरिपाल लोधी, राजेंद्र सिंह लोधी आदि समाजजन उपस्थित थे।
हजारों क्विंटल गेहूं बारिश में बर्बाद होने के बाद “एक्शन मोड में आए साहब” लापरवाहों पर चलाया कार्रवाई का चाबुक

* जिले के 8 उपार्जन केन्द्र और उनके कर्मचारी ब्लैक लिस्टेड
* उपार्जन केन्द्र प्रशासकों की एक-एक वार्षिक वेतनवृद्धि रूकी
* समिति प्रबंधकों एवं सर्वेयरों से को थमाए नुकसान की वसूली के नोटिस
* लापरवाह सहकारिता निरीक्षकों की दो वेतनवृद्धि रोकने का नोटिस जारी
* खरीदी बंद होने 12 दिन बाद भी केन्द्रों में खुले आसमान के नीचे डंप 1 लाख 39 हजार क्विंटल गेहूं
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) चक्रवाती तूफ़ान के असर से प्रदेश में तेज बारिश होने की चेतावनी के बाद भी पन्ना जिले के उपार्जन केन्द्रों में सवा लाख क्विंटल से अधिक गेहूं खुले आसमान के नीचे पूर्णतः अव्यवस्थित एवं असुरक्षित तरीके से डंप रहा। जिसका दुष्परिणाम यह हुआ कि विगत दिवस 4-5 जून को करीब 24 घण्टे से अधिक समय तक हुई प्री-मानसून की बारिश में करोड़ों रुपये मूल्य का गेहूं के भीगकर बर्बाद हो गया। उपार्जन एवं भंडारण की इस बदहाल व्यवस्था को लेकर पिछले दो दिनों से विभिन्न समाचार माध्यमों की ख़बरों में तीखी आलोचना हो रही है साथ ही कथित जिम्मेदार अफसरों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। इन ख़बरों से मची हलचल से बड़े अफसरों की नींद अब जाकर टूटी है। एक्शन मोड में आए पन्ना कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने इस बेहद गंभीर मामले को संज्ञान लेकर कई लापरवाहों के खिलाफ ताबड़तोड़ अंदाज में कार्रवाई का चाबुक चलाया है।

कलेक्टर ने आज पांच लापरवाह उपार्जन केन्द्र प्रशासकों की एक-एक वार्षिक वेतनवृद्धि रोक दी। खरीदे गए अनाज की गुणवत्ता से समझौता होने से जुड़े मामले में उन्होंने जिले के 8 उपार्जन केन्द्र और उनमें तैनात अमले को उपार्जन कार्य के लिए ब्लैक लिस्टेड कर दिया। इसके आलावा बारिश से अनाज को हुए भारी नुकसान के मद्देनजर 3 समिति प्रबंधकों एवं सर्वेयरों को उपार्जन संबंधी नुकसान की वसूली के नोटिस थमाए गए। साथ ही उपार्जन केन्द्रों पर उचित व्यवस्था सुनिश्चित न कराने पर दो लापरवाह सहकारिता निरीक्षकों की दो वेतनवृद्धि रोकने का नोटिस जारी किया है। उपार्जन केन्द्रों में पसरी अराजकता के कारण वहां डंप हजारों क्विंटल गेहूं के बारिश की भेंट चढ़ने के बाद उच्चाधिकारियों के हरकत में आने को कतिपय लोग सवालों की सलीब से खुद को और अपनी कुर्सी को बचाने की कवायद के तौर पर देख रहे हैं। इस तरह का नजरिया रखने वाले कितने सही हैं यह तो संबंधित अधिकारी ही बेहतर जानते हैं। बहरहाल लापरवाहों के खिलाफ कार्रवाई होने से यह उम्मीद की जा रही है कि गेहूं उपार्जन को मजाक बनाने वालों को सबक मिलने से भविष्य में इस तरह की पुनरावृत्ति नहीं होगी।
एक-एक वार्षिक वेतनवृद्धि रूकी
रबी उपार्जन 2020-21 के तहत गेंहू उपार्जन के लिए चयनित उपार्जन केन्द्रों की जांच के दौरान पाया गया कि प्रशासकों द्वारा उपार्जन कार्य में लापरवाही बरती जा रही है। इन सभी लापरवाह प्रशासकों को पूर्व में स्पष्टीकरण दिया गया था। इनके द्वारा प्रस्तुत उत्तर समयावधि में समाधानकारक नहीं पाया गया। कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने सौंपे गए दायित्वों का निर्वहन सही ढंग से न करने के कारण ऐसी समितियों के प्रशासकों की असंचयी प्रभाव से एक-एक वेतनवृद्धि रोकने के आदेश दिए हैं। इनमें उपार्जन केन्द्र पवई के सहकारिता निरीक्षक पी.सी. सोनी, अहिरगवां की सुश्री दीपशिखा, जिगदहा के विनोद कुमार मिश्रा एवं सुडौर, बिसानी, बघवारकला, सिमरिया के राजीव तिवारी तथा महेबा के सहकारिता निरीक्षक उमेश श्रीवास्तव की वार्षिक वेतनवृद्धि रोकी गयी है।
गुणवत्ता से समझौता करने पर ब्लैक लिस्टेड
पन्ना कलेक्टर ने गेहूं उपार्जन कर रहे केन्द्रों की कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी एवं गुणवत्ता नियंत्रक से शिकायतें मिलने पर जांच कराई गयी। जांच के दौरान जिले के 08 उपार्जन केन्द्रों में उपार्जन नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर ब्लैक लिस्टेड किया गया। उन्होंने आदेश दिए हैं कि इन केन्द्रों के समस्त कर्मचारियों को भविष्य में उपार्जन के कार्य में न लगाया जाए। इनके संबंध में की गयी कार्यवाही का प्रतिवेदन कार्यालय कलेक्टर खाद्य शाखा ने तलब किया है।
नुकसान की वसूली के नोटिस

जिले के जिन उपार्जन केन्द्रों में बारिश के कारण गेहूं को हानि हुई है उसकी भरपाई के लिए ऐसे समिति प्रबंधकों एवं सर्वेयरों को हानि की वसूली संबंधी कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। इन समिति प्रबंधकों एवं सर्वेयरों को मौसम विभाग द्वारा जारी अलर्ट एवं समय रहते उपार्जित गेंहू को परिवहन कर भण्डारित करने अथवा केन्द्र परिसर में रखें गेहूं को तिरपाल से ढकने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे। किन्तु संबंधित समिति प्रबंधक एवं सर्वेयर द्वारा गेहूं को तिरपाल से नहीं ढका गया। जिससे 4 एवं 5 जून को हुई बारिश से गेहूं भीग गया। कलेक्टर द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि, इससे यह स्पष्ट प्रतीत होता है कि संबंधित समिति प्रबंधकों एवं सर्वेयरों द्वारा घोर लापरवाही, अनुशासनहीनता, स्वैच्छाचारिता की गयी जो कदाचरण की श्रेणी में आता है। यह कृत्य मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम में निहित प्रावधानों के विपरित है। इस कृत्य के लिए बारिश में खराब हुए आनाज की बाजार मूल्य पर राशि आपसे वसूली की जाए।

इस संबंध में भागीरथ पटेल समिति प्रबंधक एवं सर्वेयर राघवेन्द्र सिंह प्राथमिक सहकारी समिति सुनवानीकला, रामदास साहू समिति प्रबंधक एवं सर्वेयर मनीष खरे प्राथमिक सहकारी समिति सिमरिया तथा बृजमोहन सिंह तोमर समिति प्रबंधक एवं सर्वेयर मुकेश पटेल प्राथमिक सहकारी समिति महेबा को कारण बताओ पत्र देते हुए आदेशित किया गया है कि दो दिवस के अन्दर समक्ष में उपस्थित होकर उत्तर प्रस्तुत करें। उत्तर प्राप्त होना अथवा समाधानकारक न होने पर तदानुसार कार्यवाही की जाएगी।
सहकारिता निरीक्षकों की रुकेगी वेतनवृद्धि ?

उपार्जन के लिए निर्धारित महेबा एवं सिमरिया उपार्जन केन्द्रों में नियुक्त प्रशासकों द्वारा उपार्जन केन्द्रों पर उचित व्यवस्था न किए जाने पर कलेक्टर कर्मवीर शर्मा द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इनमें विष्णु दीक्षित सहकारिता निरीक्षक प्रशासक उपार्जन केन्द्र महेबा एवं विनोद मिश्रा सहकारिता निरीक्षक प्रशासक उपार्जन केन्द्र सिमरिया शामिल हैं।

जारी किए गए स्पष्टीकरण में लेख किया गया है कि इन दोनों प्रशासकों द्वारा मौसम विभाग के एलर्ट एवं वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों के बाद भी समय रहते उपार्जित आनाज का परिवहन कराकर सुरक्षित भण्डारण नहीं कराया गया। इस प्रकार इनके द्वारा शासन के निर्देशों की अवहेलना करना तथा अपने कार्य के प्रति लापरवाही के कारण खुले में रखे आनाज को वर्षा से नुकसान हुआ है इससे यह स्पष्ट होता है कि इनका यह कृत्य पदीय दायित्वों के प्रति घोर लापरवाही, अनुशासनहीनता एवं स्वैच्छाचारिता का प्रतीत होकर कदाचरण की श्रेणी में आता है। इनका यह कृत्य मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम में निहित प्रावधानों के वितरित है। इस कृत्य के लिए क्यों न इनकी दो वार्षिक वेतनवृद्धि रोके जाने की कार्यवाही प्रस्तावित की जाए। पत्र में लेख किया गया है कि पत्र का जबाव दो दिवस के अन्दर समक्ष में उपस्थित होकर प्रस्तुत करें। जबाव प्राप्त न होना अथवा समाधानकारक न होने की दशा में तदानुसार कार्यवाही की जाएगी।
ओपन कैप की मजबूती की अनदेखी कर कराया भंडारण

पन्ना जिले में गेहूं उपार्जन कार्य में इस बार जैसी अंधेरगर्दी पहले कभी नहीं देखी गई। खरीदी के दौरान जहां पूरे समय किसानों का शोषण होने, उनसे अतिरिक्त अनाज और रुपये की उगाही केन्द्रों पर होने की ख़बरें सुर्ख़ियों में रहीं हैं वहीं जिले में भंडारण सरंचना का नितांत आभाव होने के कारण केन्द्रों से गेहूं का परिवहन समय पर नहीं हो सका। इससे अधिकाँश समय केन्द्रों पर हजारों क्विंटल गेहूँ की बोरियों का अंबार लगा रहा। ओपन कैप लक्ष्मीपुर, शाहनगर और अजयगढ़ के निर्माण में काफी देरी होने की वजह से पन्ना से बड़ी मात्रा में गेहूं को भंडारण के लिए पड़ोसी जिला कटनी और दमोह भेजना पड़ा है।

जिले में ओपन कैप निर्माण में हुई लेटलतीफी के कारण जब गेहूं परिवहन व्यवस्था पूरी तरह चरमराने लगी तो अपनी उदासीनता को छिपाने के लिए अधिकारियों ने आनन-फानन में ओपन कैप के विशालकाय चबूतरों के मजबूत होने का इंतजार किये बगैर ही उनमें लाखों क्विंटल अनाज भंडारित कराने की चर्चाएं हैं। लक्ष्मीपुर और अजयगढ़ के चबूतरों (ओपन-कैप) की सेंटरिंग को कथित तौर पर महज 5-6 दिन में ही खुलवा दिया गया जबकि आमतौर पर निर्मित संरचना की मजबूती के लिए इसे 20 दिन से लेकर एक माह तक लगाकर रखा जाता है। इसका दुष्परिणाम अब मौके पर दिखने लगा है। नवनिर्मित ओपन कैप के चबूतरे कई जगह से धंस चुके हैं। इनमें अभी से दरारें फटने से लाखों क्विंटल अनाज के वजन से चबूतरों के धराशाई होने की आशंका निर्माण कार्य से जुड़े जानकार जाता रहे हैं।
25 केन्द्रों पर 1 से 10 हजार क्विंटल तक अनाज

उल्लेखनीय है कि पन्ना जिले में किसानों से समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी 26 मई को बंद हो गई थी। इस तरह 12 दिन बाद भी जिले के खरीदी केन्द्रों में 6 जून तक की स्थिति में 1 लाख 39 हजार क्विंटल से अधिक अनाज भंडारण के लिए परिवहन होने के इंतजार में डंप है। उपार्जन केन्द्रवार भंडारण हेतु शेष अनाज की मात्रा पर गौर करें तो जिले के 71 केन्द्रों में से 25 में 1 से लेकर 10 हजार क्विंटल तक गेहूं आज भी खुले आसमान के नीचे रखा है। जबकि अन्य जिलों में अनाज का सुरक्षित भंडारण कब का हो चुका है। जिले के जिन केन्द्रों अनाज की बोरियों का ढेर लगा है उनमें सुनवानीकला, ककरहटी, अहिरगवां, बनहरीकला, पहाड़ीखेरा, जवाहर विपणन समिति देवेन्द्रनगर, समिति जसवंतपुरा, झरकुआ, सिमरिया, सिंगवारा, मोहन्द्रा, बिसानी, रैय्यासांटा, झुमटा, आमा, द्वारी, महेवा, पुरैना आदि शामिल हैं। अनाज भंडारण की बेहद लचर व्यवस्था के चलते पन्ना के केन्द्रों में शेष बचे अनाज का पूर्ण भंडारण कब तक हो संभव हो पायेगा कहना मुश्किल है। लेकिन इसमें अब यदि जरा भी लापरवाही हुई तो केन्द्रों में रखे अनाज को मानसून की मार झेलनी पड़ सकती। अगर ऐसा हुआ तो शेष अनाज को बारिश में बर्बाद होने से बचा पाना आसान नहीं होगा।
कोरोना को हराकर खुशी-ख़ुशी वापस गाँव लौटे बरबसपुरा के प्रवासी श्रमिक, डीएच स्टॉफ ने फूल देकर और तालियां बजाकर किया विदा

* कोरोना का हाई रिस्क विलेज बने बरबसपुरा के लोगों ने ली राहत की सांस
* जिले में कोरोना के कुल 20 संक्रमितों में 9 हुए स्वस्थ, अब सिर्फ 11 मरीज भर्ती
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) जिले में कोरोना संक्रमित मरीजों के स्वस्थ होने की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है। जिला चिकित्सालय से आज कोरोना संक्रमित पांच मरीजों को छुट्टी दे दी गई। कोरोना संक्रमितों के इलाज से जुड़ी नई गाइडलाइन के तहत इन मरीजों के भर्ती रहने के दौरान बीमारी का किसी तरह का कोई लक्षण प्रकट न होने पर इन्हें स्वस्थ्य मानते हुए जिला चिकित्सालय से दोपहर के समय डिस्चार्ज कर दिया गया। कोरोना को हारने वाले इन मरीजों को डॉक्टर्स, नर्सेस एवं पैरामेडिकल स्टॉफ ने फूल देकर और तालियां बजाकर ख़ुशी के माहौल में यादगार विदाई दी। जिला चिकित्सालय के कोविड केयर हेल्थ सेंटर में अभी तक 16 संक्रमित मरीज भर्ती रहे हैं। लेकिन बरबसपुरा गांव के पांच मरीजों के स्वस्थ्य होने पर आज उन्हें छुट्टी मिलने से भर्ती मरीजों की संख्या घटकर अब 11 बची है।
पन्ना जिले में कोरोना केस की संख्या के लिहाज से बरबसपुरा गांव हाई रिस्क विलेज बना है। जिले में कोरोना के अब तक कुल 20 केस पाए गए, जिसमें अकेले बरबसपुरा गांव में ही कुल 9 संक्रमित मिले हैं। गांव के सभी संक्रमित मरीज एक ही परिवार के हैं और सभी पिछले दिनों कोरोना हॉटस्पॉट बनीं राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से लौटे थे। बरबसपुरा गांव में पहले लॉकडाउन के बाद से अब तक करीब 250 प्रवासी श्रमिक दूसरे राज्यों से वापस आये हैं। इनमें दिल्ली से लौटे कुछ मजदूरों के जांच में कोरोना संक्रमित होने की पुष्टि के बाद इस गांव के लोग संक्रमण के फैलाव को लेकर काफी भयभीत रहे हैं। साथ ही संक्रमित मरीजों की चिंता भी उन्हें सताती रही है। आज जब एक साथ पांच कोविड मरीज स्वस्थ होकर एम्बुलेंस से गांव पहुंचे तो स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली। कोरोना को लेकर उनके मन में जिस तरह का खौफ रहा है वह काम हुआ है।
उधर, करीब एक सप्ताह तक चले इलाज के बाद संक्रमितों के कोरोना से मुक्त होने पर जिला चिकित्सालय स्टॉफ भी काफी खुश नजर आ रहा है। अच्छे इलाज और देखभाल से कोविड-19 के अब तक 9 मरीजों के स्वस्थ होकर घर लौटने से डॉक्टर्स, नर्सेस एवं पैरामेडिकल स्टॉफ के चेहरे पर आत्म संतोष का भाव और सफलता की ख़ुशी साफ़ झलक रही है। कोरोना को हर हाल में हारने का इनका जज़्बा और हौसला लगातार बुलंद हो रहा है। कोरोना से मुक्त होने वाले प्रवासी श्रमिकों ने डॉक्टरों एवं अस्पताल प्रबंधन का हृदय से आभार प्रकट करते हुए कहा कि बेहतर इलाज, भावनात्मक सहयोग और अच्छी व्यवस्थाएं मिलने से हम लोग स्वस्थ्य होकर अपने घर लौट पा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि बरबसपुरा गांव में मिला पहला कोरोना संक्रमित युवा श्रमिक इसके पूर्व 3 जून को स्वस्थ्य होकर अपने घर जा चुका है। इस तरह अब तक बरबसपुरा गांव के 6 और कुल 9 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। श्रमिकों की विदाई की बेला पर उपस्थित रहे डॉक्टर भास्कर द्विवेदी ने बताया कि शेष जो 11 मरीज अभी भर्ती हैं उनके भी शीघ्र स्वस्थ होकर घर लौटने की पूरी उम्मीद है। आपने कहा कि पूरा स्टॉफ सीएमएचओ और सिविल सर्जन के मार्गदर्शन में रात-दिन कड़ी मेहनत कर रहा है, जिससे हमें लगातार उत्साहजनक नतीजे मिल रहे हैं। आपने बताया कि डिस्चार्ज हुए सभी मरीजों को आवश्यक सतर्कता बरतने एवं अपने घर पर 14 दिनों तक आइसोलेशन में रहकर प्रोटोकॉल का पालन करने के आदेश दिया गया है। वहीं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी पन्ना डॉ. एल. के तिवारी ने दवा किया है कि वर्तमान में जिला चिकित्सालय के कोविड हेल्थ केयर सेंटर में भर्ती सभी 11 मरीज भी स्वस्थ हैं।
निसर्ग की झड़ी ने 24 घण्टे तक खरीदी केन्द्रों में मचाई तबाही, खुले आसमान के नीचे रखा हजारों क्विंटल अनाज बारिश में हुआ तरबतर, 9 दिन पूर्व खरीदी बंद होने के बाद भी केन्द्रों में डंप सवा लाख क्विंटल गेहूँ का नहीं हो पाया परिवहन
* बारिश के अलर्ट के बाद भी नींद से नहीं जागे जिम्मेदार अधिकारी
* सिर्फ निर्देश जारी कर खानापूर्ति करने तक सीमित रही भूमिका
* 50 हजार क्विंटल चना-सरसों भी परिवहन के इंतजार में पड़ा
* अनाज की बर्बादी के लिए जबावदेही तय कर क्या की जाएगी कार्रवाई ?
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) अरब सागर में उठा चक्रवाती तूफ़ान निसर्ग महाराष्ट्र होता हुआ मध्य प्रदेश तक आ पहुंचा है। इस तूफ़ान के असर से प्रदेश के पन्ना जिले में पिछले 24 घण्टे तक रुक-रुककर बारिश होती रही। ज्येष्ठ के महीने में सावन जैसी झड़ी लगने जिले के अधिकांश गेहूं और दलहन-तिलहन खरीदी केन्द्रों में तबाही का मंजर नजर आ रहा है। खरीदी केन्द्रों में डंप करीब पौने दो लाख क्विंटल आनाज का समय रहते परिवहन न होने और बारिश की चेतावनी के बाद भी खरीदी केन्द्रों में खुले आसमान के नीचे रखे अनाज के बचाव के पुख्ता इंतजाम न करने का दुष्परिणाम हजारों क्विंटल गेहूं तथा चना-सरसों के पानी में तरबतर होने के रूप में सामने आया है।

जिले के अधिकांश खरीदी केन्द्रों से जिस तरह की तस्वीरें और वीडियो आ रहे हैं वे लापरवाही की भेंट चढ़े अनाज की बर्बादी के मंजर को चींख-चींखकर बयां कर रहीं हैं। खरीदी केन्द्रों पर लबालब भरे पानी के बीच कहीं अनाज के बारदाना अव्यवस्थित तरीके से फैलाव में रखे होने के कारण बारिश के पानी में भीगते रहे हैं तो कहीं पर बारदानों को बारिश के पानी से बचाने के लिए पॉलिथीन तक उपलब्ध नहीं रही। आवश्यक व्यस्थाओं को मजाक बनाने के कारण सबसे ज्यादा अनाज सिमरिया, रैपुरा, महेवा, तारा, सुनवानी आदि केन्द्रों पर भीगा है।

गौरतलब है कि 26 मई को समर्थन मूल्य पर किसानों से गेहूं की खरीदी बंद होने के 9 दिन बाद भी खरीदी केन्द्रों से अनाज का पूर्ण परिवहन भण्डारण केन्द्रों के लिए नहीं हो सका। सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो 4 जून तक की स्थिति में जिले के गेहूं उपार्जन केन्द्रों में करीब 1 लाख 30 हजार क्विंटल से अधिक गेहूं डंप था। इसके अलावा 57704 क्विंटल चना-सरसों परिवाहन के इंतजार में पड़ा है। जिले में हजारों क्विंटल अनाज के बारिश में भीगने से जहां खरीदी करने वाली समितियों के नाकाफी इंतजामों की पोल खुल गई है वहीं इसने जिले में व्याप्त प्रशासनिक अंधेरगर्दी को भी उजागर किया है। मई महीने में जिले में चार बार बेमौसम बारिश में आनाज भीगने के बाद भी करोड़ों रुपए मूल्य के अनाज की सुरक्षा को लेकर जिम्मेदार उदासीन बने रहे। जिससे चक्रवाती तूफ़ान के असर से गुरुवार से जारी प्री-मानसून की बारिश में 24 घण्टे से अधिक समय तक हजारों क्विंटल अनाज भीगकर बर्बाद होता रहा।

मालूम हो कि चक्रवाती तूफ़ान निसर्ग के असर से प्रदेश में तेज बारिश होने का अलर्ट मौसम विभाग ने काफी पहले जारी कर दिया था। लेकिन गेहूं और चना-सरसों की समर्थन मूल्य पर खरीदी एवं निगरानी व्यवस्था से जुड़े आधा दर्जन विभागों के अधिकारी समय रहते बारिश से अनाज के बचाव की व्यवस्थाएं सुनिश्चित नहीं करा सके। इनकी भूमिका सिर्फ कोरे निर्देश जारी करने तक ही सीमित रही। दिए गए निर्देशों का धरातल पर कितना अमल हुआ उससे इन अफसरों कोई सरोकार नहीं रहा। जिसका नतीजा करोड़ों रूपये मूल्य का अनाज बारिश में बुरी तरह भीगने के रूप में सामने आया है। अब अपनी लापरवाही को छिपाने के लिए कई अधिकारी यह दलील दे रहे हैं कि पिछले वर्ष जिले में 8 लाख क्विंटल से अधिक गेहूं का खरीदी हुई थी जबकि इस बार लगभग दो गुना 15 लाख क्विंटल उपार्जन होने से व्यवस्थाएं चौपट हुई हैं। इनकी दलील है कि उन्हें अधिकतम 11-12 लाख क्विंटल खरीदी होने की उम्मीद थी।

विचारणीय बात यह है कि इस बार रबी सीजन में मौसम की मेहरबानी से गेहूं का बम्फर उत्पादन होने की बात मार्च के महीने में स्पष्ट हो चुकी थी। अब सवाल यह है कि गेहूं खरीदी व्यवस्था से जुड़े जानकार क्या इस तथ्य से अनभिज्ञ रहे। इसके अलावा कोरोना महामारी की रोकथाम हेतु मार्च माह के ही अंतिम सप्ताह में पहले देशव्यापी लॉकडाउन का ऐलान हो चुका था। जिसके बाद लगातार चार लॉकडाउन तक जिले में अधिकाँश गतिविधियां बंद रहीं और इसी बीच 71 केन्द्रों पर गेहूं की खरीदी समर्थन मूल्य पर संपन्न हुई। लॉकडाउन के चलते यह भी तय माना जा रहा था कि इस बार मण्डियों में गेहूं की बिक्री न होने से खरीदी केन्द्रों में ही अधिकतम गेहूँ की बिक्री किसानों के द्वारा की जायेगी। लेकिन इन सब बातों नजरअंदाज कर प्रशासनिक बेपरवाही जारी रही। फलस्वरूप गेहूं खरीदी कार्य शुरू होने के बाद से लेकर अब तक परिवहन की व्यस्था असंतोषजनक बनीं है। मगर इसकी साहब लोगों को जरा भी चिंता नहीं रही।

खरीदी के दौरान केन्द्रों का निरीक्षण करने वाले कथित जिम्मेदार अफसर चद्दर का चश्मा लगाकर फोटो खिंचवाते रहे और व्यवस्था में सुधार कराने के बजाए रटे-रटाए निर्देश देकर औपचारिकता पूरी करते दिखे। खरीदी केन्द्रों में बड़े क्षेत्र में अव्यवस्थित तरीके से फैलीं अनाज की बोरियां को स्टेक में रखवाने और केन्द्रों में अनाज को बारिश से बचाने के लिए पॉलिथीन आदि की पर्याप्त उपलब्धता की जानकारी लेना तक जिम्मेदारों ने उचित नहीं समझा। इसलिए गुरुवार तड़के 3 बजे के आसपास से बारिश का सिलसिला शुरू होने के बाद दोपहर तक कई जगह उपार्जन केन्द्र प्रभारी पॉलिथीन खरीदे करते नजर आये। सिमरिया केन्द्र में बारिश के बीच मैदान में फैली रखीं बोरियों को उस स्थान से दूसरी जगह शिफ्ट कराया जा रहा था जहां पानी का भराव हो गया था। खरीदी केंद्र तारा में तो अनाज से भरी बोरियों को ढकने के लिए नागरिक आपूर्ति निगम पन्ना के प्रबंधक स्वयं पॉलिथीन मंगवाने की बात स्वीकार कर रहे हैं। इनके प्रयास आग लगने के बाद कुंआ खोदने वाली कहावत जैसे ही हैं।

उधर, जब चना-मसूर-सरसों की खरीदी करने वाली संस्था मध्य प्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित पन्ना के प्रमुख डीएमओ इंद्रपाल राजपूत से खरीदे गए दलहन-तिलहन की मात्रा और भण्डारण हेतु शेष अनाज की मात्रा के संबंध में पूंछने पर पहले तो उन्होंने जानकारी देने से ही इंकार करते हुए नोडल अधिकारी एवं उप संचालक कृषि ए.पी. सुमन से सम्पर्क करने की सलाह दी। लेकिन बाद में खरीदी को लेकर उनकी भूमिका से जुड़ा सवाल पूंछने पर अचानक साहब की भाषा ही बदल गई और फिर उनके द्वारा जानकारी उपलब्ध कराई गई। लेकिन गुरुवार को दिन भर बारिश होने के बाबजूद उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि किन केन्द्रों पर चना-सरसों भीगा है। इससे जिले के अधिकारियों की कार्यप्रणाली का स्वतः अंदाजा लगाया जा सकता है।

खरीदी केन्द्रों में रखे अनाज के बारिश में भीगने के संबंध में पन्ना कलेक्टर कर्मवीर शर्मा से सम्पर्क करने का काफी प्रयास किया गया लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि करोड़ों रुपये मूल्य का हजारों क्विंटल अनाज बारिश में बर्बाद होने के मामले में लापरवाहों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की जाती है और यह कब तक हो पाती है। या फिर दूसरे मामलों की तरह इसे भी कुछ दिन बाद माहौल शांत होने पर लीपापोती कर ठण्डे बस्ते में डाल दिया जाएगा।
इनका कहना है –
“खरीदी केन्द्र रैपुरा, सिमरिया, सुनवानी, तारा, महेवा आदि स्थानों पर बड़ी मात्रा में अनाज भीगने के जानकारी मिली है, कई जगह मैंने स्वयं भी जाकर देखा है। केन्द्रों में बोरियां स्टेक में न रखकर उनका फैलाव पूरे परिसर में होने के कारण पानी की मार ज्यादा पड़ी है। कई केन्द्रों पर पॉलिथीन हवा में फटने से भी अनाज भीगा है। खरीदे गए अनाज को व्यवस्थित एवं सुरक्षित तरीके से स्टेक में न रखने की वजह से पूर्व में कई केन्द्र प्रभारियों को नोटिस जारी किये गए थे। आनाज भण्डारण हेतु जिले में भण्डारण संरचनाओं का आभाव होने एवं परिवहन व्यवस्था भी संतोषजनक न होना इस समस्या के अहम कारण हैं।”
– आर. के. श्रीवास्तव, जिला आपूर्ति अधिकारी, पन्ना।
परिवहन व्यवस्था में कहीं कोई कमी नहीं है, गेहूं भीगने की मुख्य वजह केन्द्रों में रखे अनाज के बारदानों को व्यवस्थित तरीके से पॉलिथीन से ढंककर न रखना है। कई केन्द्रों के पास तो पर्याप्त पॉलिथीन तक नहीं है जबकि इसके लिए उन्हें राशि मिलती है। कल मैंनें जब तारा केन्द्र की दुर्दशा देखी तो स्वयं पॉलिथीन मंगवाकर हजारों बोरियों को अपने सामने ही ढकवाया। जिले में पिछले वर्ष की तुलना में इस बार गेहूं की खरीदी दोगुनी हुई है। जिले में भण्डारण संरचनाओं का आभाव होने से अपने यहां के गेहूं को कटनी और दमोह जिलों में कई जगह भण्डारित कराना पड़ा है। इसके अलावा लाखों क्विंटल गेहूं ओपन कैप में भी रखना पड़ा। अजयगढ़ के ओपन कैप का निर्माण समय पर पूर्ण न होने से भी गेहूं की भंडारण व्यवस्था प्रभावित हुई है। दूसरे जिलों में गेहूं लेकर जाने वाली गाड़ियों की अनलोडिंग में वहां की लेबर के द्वारा अपने जिले की गाड़ियों को प्राथमिकता देने के कारण दो-दो दिन तक पन्ना की गाड़ियां खड़ीं रहीं जिससे समय की काफी बर्बादी हुई है।”
– शिव प्रकाश गुप्ता जिला प्रबंधक, म. प्र. नागरिक आपूर्ति निगम पन्ना।
“हमने बारिश को लेकर चेतावनी के सम्बंध समतियों को पत्र जारी किया था। गेहूं और चना-सरसों अधिकांश केन्द्रों पर सुरक्षित है सिर्फ महेवा और सिमरिया केन्द्र पर थोड़ा-बहुत अनाज भीगा है। समितियों के पास अनाज को बारिश से बचाने के लिए पॉलिथीन-त्रिपाल आदि उपलब्ध है। गेहूं की परिवहन व्यवस्था ठीक न होने के कारण गेहूं खरीदी बंद होने के सप्ताह भर बाद तक इसका परिवहन नहीं हो सका। बारिश रुकने के बाद सभी केन्द्रों से नुकसानी की जानकारी ली जायेगी। यदि मौसम साफ़ हो जाता है और धूप निकल आती है तो कोई नुकसान नहीं होगा, भीगा हुआ गेहूं सूख जाएगा।”
– राजयश कुरील, सहायक पंजीयक, सहकारी समितियां जिला पन्ना।
कोरोना योद्धा स्व. एमडी शाहिद के परिजनों को 50 लाख की राशि स्वीकृत, पत्नी को शीघ्र मिलेगी अनुकम्पा नियुक्ति
पन्ना। (www.radarnews.in) मुख्यमंत्री कोविड-19 योद्धा कल्याण योजना के तहत कोविड योद्धा स्व. एमडी शाहिद की मृत्यु शासकीय दायित्व निर्वहन के दौरान होने के कारण योजना की कल्याण राशि 50 लाख रूपये की स्वीकृति की गई है। स्वीकृति आदेश पत्र कलेक्टर कर्मवीर शर्मा एवं पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी ने उनकी पत्नी श्रीमती नूर मदीना को परिवारजनों की उपस्थिति में सौंपा।
कलेक्टर श्री शर्मा ने कहा कि कोविड योद्धा स्व. श्री मोहम्मद शाहिद एक ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ पुलिस अधिकारी थे। उनके द्वारा किए गए कार्यों एवं योगदान के लिए हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने उनके परिवारजनों को समझाईश देते हुए कहा कि बच्चों की अच्छी पढ़ाई-लिखाई कराएं। शासन से जुड़ी कोई भी समस्या हो तो उसकी जानकारी दें, हरसंभव सहायता की जाएगी।
पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी ने बताया कि कोविड योद्धा स्व. एमडी शाहिद की पत्नी को पुलिस विभाग में अनुकम्पा नियुक्ति की कार्यवाही की जा रही है। शीघ्र ही उनको उनकी योग्यता अनुसार पद पर नियुक्ति मिल जाएगी। पुलिस प्रशासन द्वारा परिवार की हरसंभव मदद की जा रही है।

उल्लेखनीय है कि पन्ना जिले के धरमपुर थाना क्षेत्र की सीमा पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के बाँदा जिले जुड़ी है। जिले में कोरोना संक्रमण के फैलाव की दृष्टि से धरमपुर थाना क्षेत्र की गिनती अत्यंत ही संवेदनशील इलाकों में होती है। इसी थाना क्षेत्र के ही ग्राम हरदी का एक प्रवासी श्रमिक जोकि मुंबई से लौटा था पन्ना जिले का पहला कोरोना संक्रमित मरीज निकला था। उपचार के दौरान उसकी रिपोर्ट निगेटिव आने और हॉस्पिटल से शीघ्र छुट्टी होने की संभावना के मद्देनजर विगत माह धरमपुर थाना प्रभारी रहते हुए उप निरीक्षक एमडी शाहिद अपने थाना क्षेत्रान्तर्गत कोरोना संक्रमण की प्रभावी रोकथाम से जुड़ी रणनीति के सम्बंध पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी से आवश्यक मार्गदर्शन प्राप्त करने पन्ना आए थे। शाम को जीप से जब वे वापस धरमपुर लौट रहे थे तो रास्ते में अचानक नीलगाय के सामने आ जाने से उसे बचाने के चक्कर उनका वाहन सड़क किनारे स्थित पेड़ से टकरा गया था। इस हादसे में श्री शाहिद के सीने में अंदरूनी चोटें आने से गंभीर हालत में इलाज के दौरान जबलपुर में उनका दुखांत हो गया था।
वन क्षेत्र से पत्थर का अवैध परिवहन करने पर ट्रेक्टर-ट्राली जप्त, वनकर्मियों को देख भाग निकला चालक

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) बढ़ते वन अपराधों के मद्देनजर इनकी रोकथाम को लेकर जिले के उत्तर वन मण्डल के अधिकारियों और मैदानी अमले ने जंगल की निगरानी व्यवस्था और मुखबिर तंत्र को मजबूत कर तत्परता से प्रभावी कार्रवाई शरू कर दी है। जिससे वन क्षेत्र में अवैध कटाई, शिकार, अवैध उत्खनन एवं अतिक्रमण करने वालों में हड़कम्प मचा है। गत दिवस उत्तर वन मंडल की पन्ना रेन्ज अंतर्गत विक्रमपुर के जंगल में वनकर्मियों ने महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए वन क्षेत्र से बोल्डर पत्थर का अवैध रूप से परिवहन कर रहे एक ट्रेक्टर-ट्राली को जप्त किया है। हालाँकि वनकर्मियों की मौजूदगी की भनक लगने पर ट्रेक्टर का चालक अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से भाग निकला। फरार आरोपी चालक की पहचान कर ली गई है। इस मामले में वन अपराध कायम किया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार रविवार 31 मई की रात करीब 10 बजे बीटगार्ड तिलगवां अरुण कुमार त्रिवेदी को मुखबिर के द्वारा विक्रमपुर जंगल से बोल्डर पत्थर का अवैध परिवहन होने की सूचना दी गई। वनरक्षक ने तुरंत इसकी जानकारी परिक्षेत्राधिकारी पन्ना कौशलेन्द्र पाण्डेय को दी। रेन्जर श्री पाण्डेय ने उच्चाधिकारियों को अवगत कराकर उनके निर्देशानुसार वनपाल सीताराम साहू के नेतृत्व में एक टीम गठित कर तत्परता से कार्रवाई हेतु इसे रवाना किया गया। रात्रि में वन अमला जब मौके पर पहुंचा तो जंगल की तरफ से वाहन की हेड लाइट की रोशनी नजर आई। नजदीक जाने पर लाल रंग का एक महिंद्रा ट्रेक्टर-ट्राली रस्ते में खड़ा मिला। जिसका अज्ञात चालक वनकर्मियों की मौजूदगी की भनक लगते ही मौके से भाग चुका था। बोल्डर-पत्थर से भरे ट्रेक्टर-ट्राली को जप्त कर बीटगार्ड तिलगवां अरुण कुमार त्रिवेदी द्वारा इस मामले में वन अपराध कायम कराया गया है। फरार आरोपी चालक का सुराग लगाकर उसकी सरगर्मी से तलाश की जा रही है। वाहन जप्ती की कार्रवाई में सीताराम साहू वनपाल, वनरक्षक खेमचन्द, कृष्ण कुमार विश्वकर्मा, जगदीश अहिरवार आदि की अहम भूमिका रही।
कोरोना के “हाई रिस्क विलेज़” समेत 8 गाँवों में बीमार व्यक्तियों के सर्वे में जुटीं स्वास्थ्य विभाग की टीमें

* बीमार व्यक्तियों की जानकारी प्राप्त कर मुहैया कराया जा रहा है उपचार
रमेश अग्रवाल, राजेन्द्र कुमार लोधी- देवेन्द्रनगर/पन्ना।(www.radarnews.in) जिले में प्रवासियों की वापसी के चलते कोविड-19 संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ने के मद्देनजर इस संक्रमण की प्रभावी रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग का अमला पूरी मुस्तैदी के साथ आवश्यक कार्रवाई करने में जुटा है। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र देवेन्द्रनगर अंतर्गत आने वाले छोटे से गाँव बरबसपुरा में कोरोना हॉटस्पॉट दिल्ली एवं अन्य स्थानों से लौटे करीब 250 श्रमिकों में 9 व्यक्तियों की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद से इसे “हाई रिस्क विलेज़” मानते हुए गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर बीमार व्यक्तियों का सर्वे करने में जुटीं हैं। सर्वे कर बीमार व्यक्तियों को चिन्हित करने एवं आवश्यक उपचार मुहैया कराने का कार्य बीएमओ देवेन्द्रनगर डॉ. अभिषेक जैन की देखरख में कई दिनों से चल रहा है। कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने बीएमओ और प्रशासनिक अधिकारियों अमानगंज तहसीलदार अवंतिका तिवारी एवं देवेन्द्रनगर तहसीलदार दिव्या जैन द्वारा लगातार सर्वे कार्य की मॉनिटरिंग की जा रही है।

हाई रिस्क विलेज़ बरबसपुरा के अलावा इसके बफर एरिया में आने गांव बाँधीकला, सिमरिया, नरेन्द्रपुरा, इंटवाकला, मकरंदगंज एवं कंटेनमेंट जोन घोषित ग्राम देवरी और इसके समीपी ग्राम रनवाहा में भी सर्वे कार्य कराया जा रहा है। सर्वे टीमों में शामिल स्वास्थ्यकर्मी, पंचायतकर्मी, आशा कार्यकर्ता, आंगनवाडी कार्यकर्ता, गांव के वालेंटियर घर-घर दस्तक देकर प्रत्येक सदस्य की थर्मल स्क्रीनिंग कर उसके स्वास्थ्य सम्बंधी आवश्यक जानकारी प्राप्त कर रही हैं। कोरोना संक्रमण के मद्देनजर सर्वे का कार्य पूरी सतर्कता एवं बचाव के साथ किया जा रहा है। थर्मल स्क्रीनिंग के दौरान किसी भी व्यक्ति के शरीर का तापमान अधिक होने अथवा सर्दी-खांसी-जुकाम एवं बुखार से ग्रसित होने की स्थिति में तुरंत उसकी जानकारी पृथक से दर्ज कर आरआरटी दलों को दी जा रही है।




जिला चिकित्सालय से आज डिस्चार्ज होने वाले मरीजों में अजयगढ़ क़स्बा निवासी पिता-पुत्र शामिल हैं। जोकि कोरोना हॉटस्पॉट बने इंदौर से वापस लौटने के बाद जांच में संक्रमित पाए गए थे। इसके अलावा अजयगढ़ के ही मकरी गांव का प्रवासी श्रमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र देवेन्द्रनगर अंतर्गत आने वाले ग्राम देवरी तथा बरबसपुरा के दो व्यक्ति शामिल हैं। जिनमें एक महिला है। इसके पूर्व शनिवार 6 जून को जिले के दूरस्थ पठारी ग्राम श्यामगिरी के 22 वर्षीय कोरोना संक्रमित प्रवासी युवा श्रमिक के स्वस्थ होने पर उसे जिला चिकित्सालय के कोविड वार्ड से छुट्टी देकर घर भेजा गया था। स्वस्थ होकर घर लौटने वाले सभी व्यक्तियों को आगामी सात दिनों तक स्वास्थ्य विभाग की टीम की निगरानी में होम आइसोलेशन में रहना होगा।


विगत दिनों ग्राम बरबसपुरा एवं देवरी में कोरोना पाॅजिटिव मरीज पाए जाने के कारण अन्य ग्रामों के साथ इन ग्रामों को भी कन्टेनमेंट क्षेत्र घोषित किया गया है। पन्ना कलेक्टर कर्मवीर शर्मा एवं पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी द्वारा पूर्व कन्टेनमेंट ग्रामों का भ्रमण गत दिनों करने के उपरांत सोमवार 1 जून को देर शाम तक बरबसपुरा एवं देवरी गांव का भ्रमण किया गया। भ्रमण के दौरान कलेक्टर श्री शर्मा ने वहां नियुक्त आरआरटी दल के डाॅक्टर, ग्राम पंचायत सचिव कमलेन्द्र सिंह बुन्देला से ग्राम की समस्याओं की जानकारी हांसिल की। उन्हें ज्ञात हुआ कि ग्राम में अति गरीब लोग निवास करते हैं। उनके घरों पर रोजमर्रा के उपयोग संबंधी साधन नहीं हैं। कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक द्वारा अन्य अधिकारियों के साथ ग्राम का भ्रमण किया गया। भ्रमण के दौरान ग्राम के लोगों से रूबरू होकर उनकी समस्याओं की जानकारी ली। लोगों ने खाद्यान्न, पेयजल, बच्चों के लिए दूध, शौंचालय आदि की समस्या की जानकारी दी गयी।
कलेक्टर श्री शर्मा ने मौके पर 60 परिवारों को संयुक्त खाद्य सामग्री के पैकेट उपलब्ध कराए। इन पैकेटों में आटा, चावल, दाल, तेल, मसाला, नमक, साबुन आदि रखा गया है। इसके अलावा बच्चों के लिए दूध के पैकेट उपलब्ध कराए गए। मौके पर उपस्थित तहसीलदार को निर्देश दिए कि नगर परिषद अमानगंज से ग्राम में चलित शौचालय स्थापित कराए। पेयजल के लिए टेंकर लगाया जाए। ग्राम में स्थापित हैण्डपम्प को पानी भरने के बाद प्रत्येक बार सेनेटाइज करने की व्यवस्था की जाए।
इसी प्रकार कलेक्टर कर्मवीर शर्मा एवं पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी ने ग्राम देवरी में पहुंचकर लोगों से उनकी समस्याओं की जानकारी ली। मौके पर उपस्थित तहसीलदार एवं अधिकारियों को निर्देश देकर ग्राम के लोगों को घर पर ही किराना एवं सब्जी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। गांव में पशु आहार उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए तहसीलदार को निर्देश दिए। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक श्री अवस्थी द्वारा गांव के लोगों को समझाईश दी गयी कि वे अनावश्यक घरों से बाहर न निकलें। किसी प्रकार की आवश्यकता होने पर गांव में नियुक्त किए गए शासकीय अमले को जानकारी दें। किसी भी का स्वास्थ्य खराब होता है तो गांव में नियुक्त आशा कार्यकर्ता अथवा आंगनवाडी कार्यकर्ता को तत्काल सूचना दें। जिससे आरआरटी दल द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण कराकर उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
कलेक्टर श्री शर्मा ने गुनौर के महाविद्यालय में स्थापित केयर सेंटर का निरीक्षण सोमवार 1 जून को रात्रि में पहुंच कर किया। यहां की गयी व्यवस्थाओं का सूक्ष्म अवलोकन करने के साथ मौके पर उपस्थित अनुविभागीय अधिकारी, चिकित्सक, तहसीलदार एवं संबंधितों को आवश्यक निर्देश देते हुए कहा कि सेंटर हर समय कोविड संबंधी व्यक्तियों को भर्ती करने के लिए तैयार रहें।
