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बाघ के अंग गायब होने के मामले में भदौरिया भोपाल अटैच, उत्तम कुमार होंगे पन्ना टाइगर रिजर्व के नए क्षेत्र संचालक

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पन्ना टाइगर रिजर्व का हिनौता स्थित प्रवेश द्वार। (फाइल फोटो)

*  पन्ना में बाघों की संदेहास्पद मौतों और पार्क के कुप्रबंधन को लेकर चर्चाओं में रहे भदौरिया

*  बाघ के अंगों की तस्करी से जुड़े अपराध को छिपाने के आरोप सही पाए जाने पर किया गया तबादला !

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में पिछले 9 माह में 5 बाघों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने और एक युवा नर बाघ का सिर समेत अन्य अंगों को तस्करों के द्वारा धारदार हथियार से काटकर ले जाने की घटना को छुपाने के संगीन आरोपों से घिरे क्षेत्र संचालक के.एस. भदौरिया को आख़िरकार राज्य सरकार ने पन्ना हटाकर भोपाल में अटैच कर दिया है। रिटायर्मेंट की कगार पर खड़े भदौरिया की नवीन पदस्थापना प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय भोपाल में की गई है। पन्ना टाइगर रिजर्व में क्षेत्र संचालक के रूप में उत्तम कुमार को पदस्थ किया गया है। श्री कुमार वर्ष 1999 बैच के भारतीय वन सेवा के अधिकारी हैं और वर्तमान में प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय भोपाल में मुख्य वन संरक्षक (विकास) के रूप में पदस्थ हैं।
इस फेरबदल को लेकर पन्ना चर्चा कई दिनों से रही है, लेकिन मंगलवार की सुबह सोशल मीडिया पर जब 16 आईएफएस के स्थानांतरण की सूची आई तो पन्ना टाइगर रिजर्व सहित जिले के सामान्य वन मण्डल उत्तर-दक्षिण में सनाका खिंच गया। सोमवार 28 सितंबर को वन विभाग के सचिव एच.एस. मोहन्ता के हस्ताक्षर से जारी इस सूची में क्रमांक-6 उत्तम कुमार की नवीन पदस्थापना पन्ना टाइगर रिजर्व में और क्रमांक-8 में के.एस. भदौरिया को क्षेत्र संचालक, पन्ना टाइगर रिजर्व के पद से हटाकर भोपाल स्थित मुख्यालय में पदस्थ किये जाने का उल्लेख है।

बाघों की मौत की जिम्मेदारी लेने से बचते रहे

पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक के.एस. भदौरिया।
कुछ दिन पूर्व अकोला गेट पर आयोजित हुई प्रेसवार्ता में पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों और हाथियों के कुनबे में वृद्धि के आंकड़े जारी कर क्षेत्र संचालक के.एस.भदौरिया ने इसका श्रेय अपने कुशल प्रबंधन को दिया था लेकिन इसके विपरीत बाघों की संदिग्ध मौत के मामले लगातार सामने आने पर वे इसकी जिम्मेदारी लेने से बचते रहे हैं। पन्ना टाइगर रिजर्व में वर्ष 2009 में बाघ पुनर्स्थापना कार्यक्रम लागू होने के बाद भदौरिया पहले ऐसे क्षेत्र संचालक हैं जिनके कार्यकाल में बाघों की संख्या 63 के रिकार्ड आंकड़े तक पहुंची तो वहीं दूसरी तरफ चिंताजनक रूप से बाघों की मौत के सर्वाधिक मामले भी इनके ही समय प्रकाश में आए हैं। पिछले 9 माह के अंदर 5 बाघों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने के कई दिन उनके शव अत्यंत ही सड़ी-गली स्थिति और कंकाल के रूप में बरामद हुए है। इसमें बाघ पी-123 की मौत और उसके शव के साथ तस्करों के द्वारा की गई छेड़छाड़ की अत्यंत ही हैरान करने वाली घटना भी शामिल है। माह अगस्त 2020 के शुरूआती दिनों में

शहीद-ए-आजम भगत सिंह के विचारों को जन-जन तक पहुंचाएं : कॉमरेड संजय सिंह

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सतना में शहीद भगत सिंह की जयंती पर उनका स्मरण करते हुए ट्रेड यूनियनों के पदाधिकारी एवं एमपीएमएसआरयू के सदस्य।

शहीद भगत सिंह की जयंती पर एमपीएमएसआरयू ने उन्हें याद कर अर्पित किए श्रद्धा सुमन

सतना।(www.radarnews.in) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानी और क्रांतिकारी शहीद भगत सिंह की 113 जयंती पर सोमवार को मध्य प्रदेश मेडिकल एण्ड सेल्स रिप्रजेंटेटिव्स यूनियन की सतना इकाई के द्वारा स्थानीय पन्नीलाल चौक में मोमबत्तियां जलाकर उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें याद किया गया। एमपीएमएसआरयू सतना इकाई के उपाध्यक्ष रणवीर सिंह ने प्रेस में जारी विज्ञप्ति में बताया कि जयंती कार्यक्रम में वक्ताओं ने अपने उद्बोधन में कहा कि युवाओं के प्रेरणा स्रोत शहीद भगत सिंह ऐसे क्रांतिकारी हैं जो देश को अंग्रेजी हुकूमत की जंजीरों की कैद से आजाद कराने के लिए महज 23 वर्ष की आयु में हँसते-हँसते फांसी पर चढ़ गए थे।
शहीद-ए-आजम भगत सिंह का जीवन अन्याय के खिलाफ संघर्ष में अपना सर्वस्व न्यौछावर करने की अदिव्तीय मिशाल के तौर अमिट अक्षरों में दर्ज है। उनका पूरा जीवन ही देश के मजदूरों-किसानों के लिए समर्पित था, तो ऐसे वक्त में जब हमारी अपनी ही सरकार जब देश के मेहनतकशों, मजदूर-किसानों पर साजिशन हमला बोल रही है, वो भी महामारी के दौर में तो निश्चित तौर पर उनका वंशज का दावा करने वाले ट्रेड यूनियन लीडर्स और सदस्यों की यह नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि उनके विचारों को हम देश के जनमानस तक पहुंचाएं। शहीद भगत सिंह के संदेशों को ज्यादा से ज्यादा प्रचारित और प्रसारित करें।
कार्यक्रम के अंत में उनके सपनों को पूरा करने का संकल्प लिया गया। इस अवसर पर एमपीएमएसआरयू के अध्यक्ष कॉमरेड संजय सिंह तोमर, प्रदेश सचिव वीरेन्द्र सिंह रावल, कार्यकारिणी सदस्य पुष्पेन्द्र श्रीवास्तव, बीएसएनएल एम्प्लाइज यूनियन से कॉमरेड योगेश शर्मा, तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ अध्यक्ष आर.डी. दिव्वेदी सहित एमपीएमएसआरयू के कई सदस्यों ने श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

कैसे करें यक़ीन कि, पन्ना में सुरक्षित हैं बाघ…? टाइगर रिज़र्व में बाघिन ने चीतल का किल किया, शिकारी उसके मांस का टुकड़ा काट ले गए

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पन्ना टाइगर रिजर्व का हिनौता स्थित प्रवेश द्वार। (फाइल फोटो)

पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने एक बार फिर घटना को छिपाया

पार्क में पिछले 9 माह के अंदर 5 बाघों की हो चुकी है संदेहास्पद मौत

पिछले माह बाघ पी-123 का सिर और दूसरे अंग काट ले गए थे तस्कर

बाघ के अंग गायब होने के मामले की STSF की टीम कर रही है जांच

जिले में लम्बे समय से सक्रिय रहे वन्यजीव तस्कर गिरोह का खुलासा कर STSF ने जब्त की थीं तेंदुए और चीतल की खाल

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्यप्रदेश का पन्ना टाइगर रिजर्व बाघों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की घटनाओं और उनके अंगों को यहां सक्रिय शिकारी-तस्कर गिरोह के द्वारा काट कर ले जाने की वजह से सुर्ख़ियों में बना है। बाघों की सुरक्षा-निगरानी व्यवस्था की अत्यंत ही चिंताजनक स्थिति के उजागर होने और बाघ पी-123 के सिर तथा दूसरे अंगों के गायब होने की सच्चाई को छिपाने के बेहद संगीन आरोपों के चलते पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन सवालों के घेरे में है। युवा बाघ के अंगों के गायब होने के मामले की जांच कर रही स्टेट टाइगर स्ट्राइक फ़ोर्स भोपाल की टीम ने हाल ही में पन्ना एवं पड़ोसी जिला छतरपुर में सक्रिय वन्य जीवों के अंगों की तस्करी करने वाले संगठित गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए सरगना समेत चार अपराधियों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से एसटीएसएफ की टीम ने तेंदुए और चीतल की चार खालें जब्त की हैं।
चीतल का शिकार करने के बाद बाघिन के द्वारा खाया गया उसका पिछला हिस्सा।
चौंकाने वाले इन खुलासों से मचे हड़कम्प के चलते पिछले सप्ताह प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यप्राणी आलोक कुमार पन्ना के दौरे पर आए थे। इस दौरान उनके द्वारा एटीएसएफ से अलग बाघ पी-123 के अंग गायब होने एवं इस घटनाक्रम के तथ्यों को छिपाने के मामले की विस्तृत जांच की गई। प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यप्राणी आलोक कुमार ने यहां पत्रकारों से अनौपचारिक चर्चा में यह दावा किया था कि, हालिया चिंताजनक घटनाओं के बाबजूद पन्ना में बाघों का संसार पूरी तरह सुरक्षित है और इनका भविष्य उज्जवल है। उन्होंने तमाम आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा था, पन्ना अब कभी पुनः बाघ विहीन नहीं होगा। लेकिन पन्ना के जमीनी हालात इन दावों से मेल नहीं खाते। पन्ना टाइगर रिजर्व का अमला जब कथित तौर पर हाई अलर्ट पर तब भी वहाँ शिकारी सक्रिय हैं। पार्क की अमानगंज बफर रेंज अंतर्गत मझौली बीट में सामने आई एक घटना इस बात का प्रमाण है।
मृत चीतल के पैर एवं गर्दन के समीप मांस को धारदार हथियार से काटने का निशान।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ग्राम मझौली में जंगल के नजदीक स्थित एक खेत में बाघिन पी-213/32 ने शनिवार-रविवार की दरम्यानी रात एक चीतल का शिकार किया। बाघिन ने चीतल के पिछले हिस्से का कुछ मांस खा लिया और रविवार की सुबह वह किल (शिकार) को खेत की झाड़ियों के समीप छोड़कर जंगल में चली गई। इस बीच अज्ञात शिकारी मृत चीतल के शरीर के अगले हिस्से का मांस धारदार हथियार से काट ले गए। टाइगर ट्रेकिंग टीम जब कुछ समय बाद इस इलाके से गुजरी तो किल के आसपास बाघिन की मौजूदगी और चीतल के शव के साथ छेड़छाड़ के निशान देखकर दंग रह गई। इसकी सूचना तुरंत अमानगंज बफर वन परिक्षेत्र के रेन्जर सुनील सुरिया को दी गई। रेंजर ने मौके पर पहुंचकर चीतल के शव का मुआयना करने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों को घटना की जानकारी दी। पन्ना से सहायक संचालक आर.के. गुरुदेव मझौली पहुंचें और मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉग स्क्वॉड से खेत मालिक के घर सहित गांव की सघन सर्चिंग कराई गई। लेकिन अज्ञात दुस्साहसी शिकारियों का कोई सुराग नहीं लग सका।
जिस खेत में चीतल का शव मिला उस किसान के घर की सर्चिंग करते हुए पन्ना टाइगर रिजर्व के कर्मचारी।
सोमवार 28 सितंबर को मृत चीतल का वन्यप्राणी चिकित्सक से पोस्टमार्टम कराने के बाद उसके शव का जला दिया गया। मझौली गांव में चीतल का शव जिस खेत से बरामद हुआ उसके मालिक को संदेह के आधार पर हिरासत में लेकर पूंछतांछ की जा रही है। उल्लेखनीय है कि पन्ना टाइगर रिजर्व की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलने वाली इस सनसनीखेज घटना को लेकर प्रबंधन ने चुप्पी साध रखी है। रविवार को घटना का पता चलने के बाद भी मीडिया के लिए इसका प्रेस नोट और फोटो-वीडियो जारी नहीं किए गए। सोमवार को समाचार लिखे जाने तक पार्क प्रबंधन ने चीतल के शव के साथ शिकारियों के द्वारा की गई छेड़छाड़ की घटना को सार्वजानिक नहीं किया था।
पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक के.एस. भदौरिया।
उधर, पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक के.एस. भदौरिया से जब इस संबंध में जानकारी प्राप्त करने के लिए मोबाइल पर सम्पर्क करने का प्रयास किया तो कई बार रिंग बजने के बाद भी उनका फोन रिसीव नहीं हुआ। मोबाइल पर भेजे गए मैसेज का भी क्षेत्र संचालक ने कोई जवाब नहीं दिया। पार्क के अन्य अधिकारी भी इस घटना के संबंध में बात करने से बच रहे हैं।
अज्ञात शिकारी का सुराग लगाने के लिए डॉग स्क्वॉड से गांव की सर्चिंग कराई गई।
बताते चलें कि पन्ना टाइगर रिजर्व समेत जिले के उत्तर एवं दक्षिण वन मण्डल अंतर्गत वन्यजीवों की संदिग्ध मौत और शिकार की घटानएं तेजी से बढ़ने के मद्देनजर मीडिया में तीखे सवाल उठने के बाद से इन घटनाओं को छिपाने की हर संभव कोशिश की जा रही है। दक्षिण वन मण्डल पन्ना की सलेहा रेन्ज अंतर्गत चार दिन पूर्व एक किसान के द्वारा जंगली सूअर के शिकार के लिए खेत में लगाए गए फंदे में फंसी मादा तेंदुआ की दर्दनाक मौत होने का मामला प्रकाश में आया था। शिकार की इस घटना का 24 घण्टे के अंदर खुलासा भी हो गया लेकिन वन मण्डल स्तर पर आधिकारिक तौर पर शिकार की घटना और इसके खुलासे का ब्यौरा प्रेस के लिए जारी नहीं किया गया। इसी तरह उत्तर वन मण्डल की विश्रामगंज रेन्ज अंतर्गत रक्सेहा के समीप तीन दिन पूर्व मादा तेंदुआ के संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिलने की घटना की भी प्रेस विज्ञप्ति जारी नहीं हुई। यह अलग बात है कि दक्षिण वन मण्डल की घटना के संबंध जानकारी प्राप्त करने के लिए जिसने भी डीएफओ या उनके अधीनस्थ अधिकारियों से सम्पर्क किया उन्हें आवश्यक जानकारी मुहैया कराई गई।

रेत माफिया के गुर्गों की गुण्डागर्दी, ट्रक चालाक को बंधक बनाकर बेरहमी से पीटा

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पन्ना जिले के ग्राम जिगनी ग्राम में निजी भूमि पर खुलेआम संचालित रही अवैध रेत खदान में मशीनों से कराए गए रेत खनन कराया गया। (फाइल फोटो)
  • फर्जी टोकन थमाकर रेत की लोडिंग से किया इंकार, पुलिस थाना पहुंचा मामला

  •  खनिज मंत्री के गृह जिले और निर्वाचन क्षेत्र में खुलेआम जारी है रेत की लूट का खेल

  • राजधानी भोपाल से लेकर पन्ना तक शासन-प्रशासन, विपक्ष और मीडिया है मौन !

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में रेत ठेका की आड़ में बहुमूल्य खनिज सम्पदा का अनियंत्रित दोहन कर रहे ठेकेदार रसमीत मल्होत्रा के गुर्गों की मनमानी और गुण्डागर्दी काफी बढ़ चुकी है। शासन-प्रशासन का प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से संरक्षण इन्हें प्राप्त होने से जिले के अजयगढ़ तहसील अंतर्गत केन नदी के पट्टी क्षेत्र में रेत ठेकेदार के गुर्गों का आतंक सिर चढ़कर बोल रहा है। रेत के अवैध उत्खनन-परिवहन एवं भण्डारण के खिलाफ आवाज़ उठाने वालों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध कराकर उन्हें जेल भिजवाने के बाद इनका ताण्डव लगातार जारी है। स्वयं को कानून से ऊपर समझने वाले भाड़े के इन गुण्डों ने लोगों को आतंकित कर रखा है। ऐसा ही एक मामला शनिवार को प्रकाश में आया है। रेत माफिया के गुर्गे परविंदर सिंह सरदार पर एक ट्रक चालक ने बंधक बनाकर उसके साथ बड़ी ही बेरहमी से मारपीट करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
रेत माफिया के गुर्गे के द्वारा की गई मारपीट में घायल ट्रक चालक विमल सोनकर।
उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के निवासी एवं पेशे से ट्रक चालक विमल सोनकर 35 वर्ष ने बताया कि शुक्रवार की शाम वह ट्रक क्रमांक- यूपी- 33 एटी- 8907 को लेकर रेत की लोडिंग करने के लिए बीरा स्थित डम्प पर आया था। जहां पर कई घण्टे के इंतजार के बाद बमुश्किल डम्प में तैनात कर्मचारियों के द्वारा उसका टोकन काटा गया। शनिवार 26 सितम्बर को तड़के जब उसके ट्रक में रेत लोडिंग का नम्बर आया तो टोकन को फर्जी बताकर रेत लोड करने से इंकार कर दिया। इस बात को लेकर कहासुनी होने पर परविंदर सिंह सरदार भड़क उठा। ट्रक चालक विमल पर फर्जी टोकन रखने का आरोप लगाते हुए परविंदर ने उसे ऑफिस में बंधक बनाकर बड़ी ही बेरहमी के साथ लात-घूंसों से पिटाई कर दी।
कथिततौर पर रेत ठकेदार के कर्मचारियों द्वारा ट्रक चालक विमल सोनकर को दिया गया टोकन।
इस घटना की शिकायत करने अजयगढ़ थाना पहुंचे ट्रक चालक विमल सोनकर ने स्थानीय मीडियाकर्मियों को अपने शरीर पर उभरे मारपीट के निशान दिखाते हुए बताया कि उसके चेहरे और कान में बार-बार पानी के छींटे डालकर उसे पीटा गया। ट्रक में रेत लोडिंग का टोकन जारी करने के लिए 36 हजार रुपए लिए गए लेकिन ईटीपी नहीं दिया गया।
फाइल फोटो।
थाना में शिकायत दर्ज कराने के दौरान ट्रक मालिक और रेत माफिया के कर्मचारी भी मौके पर मौजूद रहे। इन आरोपों के संबंध में जब रेत ठेकेदार के प्रतिनिधि से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने बताया कि हमें जो कहना था वह हमने थाना प्रभारी को बता दिया है, मीडिया से बात करने के लिए मैं अधिकृत नहीं हूँ। अजयगढ़ थाना प्रभारी एवं निरीक्षक अरविन्द कुजूर से जब इस मामले में की गई कार्रवाई के संबंध में जानकारी प्राप्त करने हेतु सम्पर्क किया गया तो उनसे बात नहीं हो सकी। पुलिस के द्वारा घायल ट्रक चालक का मेडिकल परीक्षण कराये जीने की जानकारी मिली है। सूत्रों से पता चला है कि ट्रक चालक को शांत कराने के लिए रेत ठेकेदार के कर्मचारियों के द्वारा उल्टा उसी के खिलाफ आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
पन्ना जिले में नियम-कानूनों की धज्जियाँ उड़ाते हुए जारी है रेत की लूट का खेल।
उल्लेखनीय है कि, मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में रेत खदानों के समूह ठेकेदार रसमीत मल्होत्रा को शासन-प्रशासन का खुला संरक्षण प्राप्त होने से वह रेत माफिया बन चुका है। फलस्वरूप जिले के अजयगढ़ तहसील क्षेत्र में नियम-कानूनों की धज्जियाँ उड़ाते हुए पिछले चार माह से बड़े पैमाने पर रेत की लूट का खेल चल रहा है। आपदा को अवसर में बदलते हुए ठेकेदार ने इन चार महीनों में रेत के अंधाधुंध दोहन का रिकार्ड कायम किया है। रेत ठेका की आड़ में खनन, पर्यावरण एवं अनुबंध शर्तों को ताक पर रखकर पन्ना जिले में खनिज सम्पदा की डकैती का हर दिन नया कीर्तिमान स्थापित किया जा रहा है। पन्ना जिले में रेत पहले भी लुटती रही है लेकिन कभी इतने वृहद पैमाने पर इस तरह खुलेआम नियम-शर्तों के उल्लंघन की छूट नहीं रही। लूट के खेल से लाभान्वित होने वाले जिम्मेदार समय-समय पर मशीनरी-वाहन जप्त कर और अवैध उत्खनन-परिवहन तथा भण्डारण के प्रकरण दर्ज करके कार्रवाई की औपचारिकतायें पूरी करते रहे हैं। लेकिन पिछले चार माह से पन्ना जिले में जो कुछ चल रहा है उसे देखकर तो यही लगता है कि ठेका के नाम पर रेत की लूट को अघोषित तौर पर वैधता मिल चुकी है।
शासन-प्रशासन की इस मेहरबानी पूरा लाभ उठाते वर्षाकाल में भण्डारण से रेत बिक्री की आड़ में रेत खनन का जारी है। अजयगढ़ के सीमावर्ती ग्राम रामनई, जिगनी, बरौली, चंदौरा, बीरा, भानपुर, मझगांय, बरकोला आदि में केन नदी किनारे स्थित खेतों को रेत खदानों में तब्दील कर दिया गया है। बिना स्वीकृति और वैधानिक अनुमति के निजी भूमि (खेतों) पर संचालित दर्जनों रेत खदानों से दैत्याकार मशीनों के जरिए रात-दिन रेत का खनन कराया जा रहा है। पूर्णतः अवैध तरीके से रेत खदानें संचालित करने के साथ-साथ बड़े पैमाने पर राजस्व की चोरी भी की जा रही है। अजयगढ़ क्षेत्र से उत्तर प्रदेश व पन्ना एवं सतना के लिए प्रतिदिन रेत का परिवहन करने वाले 90 फीसदी से अधिक वाहन निर्धारित क्षमता से अधिक और बगैर ईटीपी के रेत की ढुलाई कर रहे हैं। गौर करने वाली बात यह है कि, प्रदेश के खनिज संसाधन एवं श्रम विभाग के मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह के गृह जिले और निर्वाचन क्षेत्र अंतर्गत यह सब बड़े मजे से चल रहा है।
पन्ना जिले के खनिज अधिकारी आर. के. पाण्डेय।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ठेकेदार से बगैर ईटीपी के रेत की खरीदी करने पर वाहन मालिकों को रेत थोड़ी सस्ती मिल जाती है, जिसका परिवहन करने से वाहन मालिकों को प्रति चक्कर मोटी बचत होती है। बगैर पिटपास के सुविधाजनक तरीके से रेत का परिवहन करने के एवज में लोडिंग वाले स्थान से लेकर गंतव्य तक रास्ते में पड़ने वाले सभी पुलिस थानों-चौकियों, वनोपज जांच नाकों, संबंधित जिलों के यातायात थानों एवं आरटीओ कार्यालय में वाहन मालिक अथवा चालक को हर महीने समक्ष में उपस्थित होकर फीलगुड का एहसास कराना पड़ता है। बेहतर समन्वय और सहमति से चल रही रेत वाहनों की इंट्री वसूली से पन्ना जिले के तथाकथित पत्रकारों के ट्रेक्टरों को छूट प्राप्त है। इसके एवज में माइनिंग मीडिया “साहब” के गुणगान में गोदी मीडिया से भी चार कदम आगे रहता है।
वहीं रेत माफिया रसमीत के स्थानीय कर्मचारी अथवा पार्टनर पन्ना के उन पत्रकारों का भी पूरा ध्यान रख रहे हैं जिनके पास रेत की ढुलाई के लिए ट्रेक्टर-ट्रॉली उपलब्ध नहीं है। माह जून 2020 से इनकी भी मासिक संतुष्टि का कार्यक्रम लगातार जारी है। कोरोना की आपदा में मल्होत्रा की मासिक मिठाई की खुराक पन्ना के अधिकांश पत्रकारों के लिए बड़ा सहारा बनीं है। रेत के अवैध कारोबार को लेकर सदैव चिंतित रहने वाले पत्रकारों पर मल्होत्रा की मिठाई ने ऐसा असर दिखाया है कि उनके जेहन से फिलहाल रेत शब्द ही गायब हो चुका है। हालांकि अपवाद स्वरूप कुछेक पत्रकार इस नक्कारखाने में तूती की आवाज़ बने हुए हैं। सत्तापक्ष और विपक्ष के कतिपय नेताओं-जनप्रतिनिधियों को भी रेत माफिया ने रोजगार मुहैया करा दिया है। रेत के अवैध खनन के कुछ प्वाइंट में पन्ना के नेताओं की हिस्सेदारी और इनके माध्यम से रेत खनन करने वाली मशीनरी को भी काम पर लगाया गया है। राजधानी भोपाल से लेकर पन्ना तक मल्होत्रा के मैनजमेंट के चलते रेत की लूट से प्रभावित अजयगढ़ क्षेत्र के वाशिंदों की शिकायतें हर जगह धूल खा रहीं हैं। परिणामस्वरूप तराई अंचल में रेत लूटपाट के खिलाफ बड़े आंदोलन की सुगबुगाहट शुरू हो चुकी है।

पुलिस ने विशेष अभियान चलाकर पकड़ा 2 क्विंटल हरा गांजा, नशे की खेती करने वालों पर कसा शिकंजा

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 पन्ना जिले की सिमरिया और धरमपुर थाना पुलिस की कार्रवाई

*   मादक पदार्थों के कारोबारियों में मचा हड़कम्प

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में मादक पदार्थों के कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पुलिस ने गांजे की खेती और इसका कारोबार करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करते हुए 2 क्विंटल से अधिक हरा गांजा जप्त किया है। गांजा की खेती करने के आरोप में पुलिस ने 5 लोगों को गिरफ्तार उनके विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट के तहत आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध किया है। पुलिस के द्वारा जप्त गांजे की कीमत करीब साढ़े 12 लाख रुपए बताई जा रही है। नशे की खेती के खिलाफ इस महत्वपूर्ण कार्रवाई को जिले की सिमरिया और धरमपुर थाना पुलिस के द्वारा अपने-अपने थाना क्षेत्रांतर्गत अंजाम दिया गया। पन्ना पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी के निर्देशन में की गई इस महत्वपूर्ण कार्रवाई के बाद से गांजा की खेती करने वालों एवं जिले में सक्रिय रहे मादक पदार्थों के कारोबारियों में ख़ासा हड़कम्प मचा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार थाना प्रभारी सिमरिया एवं प्रशिक्षु उप पुलिस अधीक्षक अभिषेक गौतम को मुखबिर से सूचना मिली कि ग्राम मनिया में चार व्यक्ति अपने घरों में अवैध रूप से गांजे के पेड़ लगाये हुए हैं। थाना प्रभारी के द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों इसकी जानकारी दी गई और फिर उनके निर्देशन एवं मार्गदर्शन में गांजे की खेती के खिलाफ कार्रवाई करते हुए ग्राम मनिया में एक साथ चार पुलिस टीमों ने ताबड़तोड़ अंदाज में अलग-अलग घरों में छापेमारी की गई। पुलिस ने स्थानीय निवासी विक्रम सिंह पिता प्रतिपाल सिंह बुंदेला 30 वर्ष के यहां से 45 किलोग्राम गांजा के हरे पेड़, मंगल सिंह पिता नत्थू सिंह बुंदेला 60 साल के घर से 35 किलोग्राम हरे गांजे के पेड़, रमेश बेड़िया पिता कुंजीलाल बेड़िया 50 वर्ष से 22 किलोग्राम गांजा के हरे पेड़ व् शैलेंद्र सिंह पिता राजाराम सिंह राजपूत 25 साल के यहां से 45 किलो 200 ग्राम गांजे के हरे पेड़ जप्त किए। ये चारों व्यक्ति अपने घर के आँगन में गांजे की खेती कर रहे थे।
पुलिस ने मौके पर पेड़ों को जड़ों सहित उखाड़ कर पंचनामा कार्यवाही की और फिर उन्हें सील किया गया। चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर सिमरिया थाना पुलिस ने इनके विरुद्ध अपराध क्रमांक क्रमश:450/20, 451/20, 452/20, 453/20 धारा 8/20 एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला पंजीबद्ध किया है। जप्तशुदा करीब डेढ़ क्विंटल गांजा का मूल्य साढ़े सात लाख रुपए बताया गया है। इस सम्पूर्ण कार्यवाही में थाना प्रभारी सिमरिया एवं प्रशिक्षु उप पुलिस अधीक्षक अभिषेक गौतम, उप निरीक्षक सुरेंद्र कुमार द्विवेदी, उप निरीक्षक ईश्वर सिंह, उप निरीक्षक मनोरमा देवी मौर्य, उप निरीक्षक सरिता तिवारी चौकी प्रभारी मोहन्द्रा, सहायक उपनिरीक्षक आर.पी.प्रजापति, शिशिर मंडल, आरक्षक बलवंत लोधी, अतुल मेहरा, अश्विनी सिंह, अनिल गर्ग, राहुल पटेल, धीरेन्द्र यादव, सुरेन्द्र असाठी, अनिल बरकड़े, अजय, मुकेश, श्याम सिंह, महिला आरक्षक पप्पी सोलंकी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पन्ना पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी ने गांजे की खेती के खिलाफ सिमरिया थाना पुलिस की कार्रवाई की सराहना करते हुए इसे सफलता पूर्वक अंजाम देने वाली टीम को पुरस्कृत करने की घोषणा की है।

धरमपुर पुलिस पकड़ा 55 किलो गांजा

जिले के अजयगढ़ अनुभाग अंतर्गत आने वाले धरमपुर थाना की पुलिस ने मुखबिर से मिली सूचना पर ग्राम काजीपुर में स्थित एक घर पर दबिश देकर वहाँ से 55 किलोग्राम हरा गांजा जप्त किया है। थाना प्रभारी धरमपुर सुधीर कुमार बैगी ने बताया कि ग्राम काजीपुर में रामसनेही लोध अपने मकान के पीछे बाउण्ड्री के अंदर अवैध रूप से गांजा की खेती कर रहा था। शुक्रवार को कार्रवाई के दौरान पुलिस ने जब रामसनेही लोध से प्रतिबंधित गांजा की खेती से जुड़े अनुमति सम्बंधी दस्तावेज मंगाए तो उसके द्वारा किसी तरह के दस्तावेज होने से इंकार किया गया। मौके पर गांजा की खेती की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई गई। पुलिस ने रामसनेही पिता सुखलाल लोध 59 साल निवासी काजीपुर के घर से 107 नग छोटे-बड़े गांजे के पेड़ जप्त किए। जिसकी ऊंचाई 8 से 10 फुट के बीच और वजन 55 किलोग्राम है। हरे गांजे का मूल्य साढ़े पांच लाख रुपये बताया गया है।

दर्ज किया मामला

धरमपुर थाना के ग्राम काजीपुर में रामसनेही लोध के घर पर लगे गांजे के पेड़ उखाड़ते हुए पुलिसकर्मी।
धरमपुर थाना पुलिस ने गांजा की खेती करने के आरोप में रामसनेही लोध को गिरफ्तार कर उसके विरुद्ध अपराध क्रमांक 180/20 धारा 8/20 एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया है। इस कार्यवाही में उप निरीक्षक सुधीर कुमार बैगी थाना प्रभारी धरमपुर, उप निरीक्षक रतिराम प्रजापति चौकी प्रभारी खोरा, एएसआई रामफल शर्मा चौकी प्रभारी नरदहा, एएसआई बीएल पाण्डेय, एएसआई बी.डी. बाला, प्रधान आरक्षक सैयद समीमुल हक, रावेन्द्र सिंह, आरक्षक प्रदीप हरदेनिया, रोहित शिवहरे, गजेन्द्र सिंह, नीरज प्रजापति, भूपाल सिंह, प्रमोद पटेल, विजय सिंह, महिला आरक्षक वंदना दोहरे, पुष्पा अहिरवार की अहम भूमिका रही ।

कृषि बिल : कोंग्रेस और दूसरे विपक्षी दल कृषि सुधार विधेयक पर भ्रम फैलाकर किसानों को भड़का रहे हैं – सुशील त्रिपाठी

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पन्ना में पत्रकारों से चर्चा के दौरान कृषि सुधार संबंधी विधेयकों के लाभ गिनाते हुए भाजपा के पूर्व जिला महामंत्री सुशील त्रिपाठी एवं बाजू में बैठे भाजपा जिलाध्यक्ष रामबिहारी चौरसिया।

किसानों को सच्चाई बताने के लिए बीजेपी चलाएगी जन जागरण अभियान

कृषि सुधार विधेयकों से मुनाफा बढ़ने और अन्नदाता के सशक्त होने का दावा

न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था में नहीं होगा बदलाव, पूर्व की तरह रहेगी जारी

भाजपा कार्यालय में प्रेसवार्ता कर पार्टी के नेताओं ने गिनाए कृषि सुधार विधेयकों के फायदे

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) किसान बिल को लेकर देश भर में किसान संगठनों और विपक्षी दलों का पिछले कई दिनों से उग्र विरोध-प्रदर्शन जारी है। इस मुद्दे पर एनडीए में भी दरार पड़ गई है। पंजाब में भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख सहयोगी और एनडीए में शामिल दल आकाली दल ने पहले ही इस मसले पर केन्द्र सरकार का साथ छोड़ दिया है। अब बिहार में एनडीए के वरिष्ठ साथी जनता दल यूनाइटेड ने भी भाजपा से अलग अपनी राय जाहिर करते हुए किसान संगठनों की मांग का समर्थन किया है। इसके बाद भी भारतीय जनता पार्टी के नेता कृषि सुधार बिल को मोदी सरकार का ऐतिहासिक कदम बता रहे हैं। इस ज्वलंत मुद्दे पर वस्तुस्थिति स्पष्ट करने के लिए आज पन्ना जिला मुख्यालय में स्थिति भाजपा के कार्यालय में पार्टी के जिलाध्यक्ष रामबिहारी चौरसिया द्वारा प्रेसवार्ता आयोजित की गई। जिसमें बीजेपी के पूर्व जिला महामंत्री एवं कृषि सम्बंधी मामलों के जानकार सुशील त्रिपाठी ने पत्रकारों से विस्तार पूर्वक चर्चा करते हुए तीनों विधेयकों के लाभ गिनाए और इनके विरोध के पीछे की राजनीति को लेकर विपक्ष पर जमकर हमला बोला।
वरिष्ठ भाजपा श्री त्रिपाठी ने बताया कि कृषि सुधार विधेयकों के पास होने से किसानों को अपनी उपज बेंचने के लिए नए अवसर मिलेंगे, जिससे उनका मुनाफा बढ़ेगा। किसान नियम-कानूनों के बंधन से आजाद होंगें। किसानों के पास मण्डी में जाकर लाइसेंसी व्यापारियों को ही अपनी उपज बेंचने की विवशता नहीं होगी। इससे कृषि क्षेत्र को जहां अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी का लाभ मिलेगा वहीं अन्नदाता किसान भाई आर्थिक और तकनीकी रूप से सशक्त होंगे। आपने स्पष्ट किया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य और सरकारी खरीदी की व्यवस्था बनी रहेगी। ये विधेयक किसानों को अपनी फसल के भंडारण, बिक्री की आजादी देंगे और उन्हें बिचौलियों के चंगुल से मुक्त करेंगे, जिससे उनका आर्थिक लाभ होगा।
भाजपा नेता सुशील त्रिपाठी ने एक सवाल के जवाब में मुख्य विपक्षी दल कोंग्रेस पर कृषि सुधार विधेयक को लेकर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि कोंग्रेस ने शुरू से ही देश के किसानों को कानून के नाम पर जकड़ रखा है। इसने आज तक तो किसानों के हित में कोई फैसला लिया नहीं और आज जब मोदी सरकार के द्वारा बहुप्रतीक्षित कृषि सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं तो किसानों को गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि, कोंग्रेस और दूसरे विपक्षी दल देश के किसानों के बीच भ्रम फैलाकर उन्हें भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। किसानों को गुमराह कर राजनीति करना कोंग्रेस की पुरानी आदत रही है। जबकि कोंग्रेस ने 2019 के अपने चुनावी घोषणा पत्र में एपीएमसी हटाने की बात की थी। वर्ष 2013 में राहुल गांधी ने कोंग्रेस शासित राज्यों में फल-सब्जियों को एपीएमसी एक्ट से बाहर करने का बयान दिया था। अब कोंग्रेस पार्टी ही एपीएमसी एक्ट में बदलाव का विरोध कर रही है। इससे कोंग्रेस पार्टी के नेताओं का दोहरा चरित्र उजागर हो गया है।
प्रेसवार्ता को सम्बोधित करते हुए भाजपा के जिला मीडिया प्रभारी आशीष तिवारी।
कृषि सुधार विधेयक के मुद्दे पर एनडीए में दरार पड़ने और भाजपा पर अपने सहयोगियों को ही इन बदलावों को ना समझा पाने के सवाल पर श्री त्रिपाठी ने कहा, जेडीयू और शिरोमणि आकाली दल क्रमशः बिहार और पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राजनैतिक और चुनावी फायदे के लिए इसका विरोध कर रहे हैं। उन्होंने जो मुद्दे उठाए हैं उस पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व देश के कृषि मंत्री कई बार यह स्पष्ट कर चुके हैं कि देश भर में एमएसपी की व्यवस्था पूर्व की तरह जारी रहेगी और इसमें कोई बदलाव नहीं होगा। पन्ना के भाजपा जिलाध्यक्ष रामबिहारी चौरसिया ने पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि विरोधी दलों के द्वारा कृषि सुधार विधेयक के संबंध में फैलाए जा रहे झूठ और भ्रम का पर्दाफाश कर किसानों को वास्तविकता बताने के लिए प्रदेश संगठन के निर्देश पर जन जागरूकता अभियान जिले भर में चलाया जाएगा। प्रेसवार्ता का आयोजन भी इसी अभियान का हिस्सा है। इस अवसर पर भाजपा के जिला मीडिया प्रभारी आशीष तिवारी, अभिलाष साहू, राजकुमार वर्मा, राजेन्द्र कुशवाहा उपस्थित रहे।

वायर के फंदे में फंसा तेंदुआ आबादी क्षेत्र मिला, रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू होने से पहले हुई मौत

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जंगल से भागकर पटनातमोली गांव में पहुंचा तेंदुआ।

पन्ना जिले के दक्षिण वन मण्डल की सलेहा रेन्ज अंतर्गत पटनातमोली ग्राम की घटना

स्टेट टाइगर स्ट्राइक फ़ोर्स के खुलासे और कार्रवाई के बाद भी नहीं थम रहीं शिकार की घटनाएं !

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में बाघ-तेन्दुओं और दूसरे वन्य प्राणियों के शिकार की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रहीं हैं। जबकि पन्ना टाइगर रिजर्व में सिर विहीन बाघ का शव मिलने की जांच कर रही स्टेट टाइगर स्ट्राइक फ़ोर्स भोपाल की टीम के द्वारा जिले में सक्रिय वन्यजीवों का शिकार एवं उनके अंगों की तस्करी करने वाले संगठित गिरोह का सप्ताह भर पूर्व ही पर्दाफाश करते हुए सरगना समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इनके कब्जे से तेन्दुओं और चीतल की दो-दो खालें जप्त की गई हैं। एसटीएसएफ के इस बड़े भंडाफोड़ से जुड़ीं चर्चाओं और बाघ पी-123 का सिर एवं अन्य अंग काटकर ले जाने की दुस्साहसिक घटना को अंजाम देने वाले शिकारियों-तस्करों का सुराग लगाने के लिए जारी विशेष प्रयासों के बीच जिले के दक्षिण वन मण्डल की सलेहा रेन्ज अंतर्गत पटनातमोली ग्राम में एक तेंदुआ वायर के फंदे में बुरी तरह फंसा हुआ मिला। जंगल से भागकर आबादी क्षेत्र में स्थित नीम के पेड़ पर चढ़े इस तेंदुए की जान बचाने के लिए लकड़ी में बंधे वायर के फंदे से उसे मुक्त कराने रेस्क्यू टीम को मौके पर बुलाया गया लेकिन इस टीम के पहुँचने से पहले ही घायल तेन्दुए मौत हो चुकी थी।
तेंदुआ का देखने के लिए पेड़ के आसपास एकत्र हुए पटनातमोली गांव के लोग।
शाम होने के कारण तेन्दुए के शव को जांच के लिए पेड़ से नीचे नहीं उतारा गया। मामले की फोरेंसिक जांच हेतु घटनास्थल को सुरक्षित करते हुए मौके पर वनकर्मियों को तैनात किया गया है। दक्षिण वन मण्डल पन्ना की डीएफओ मीना कुमारी मिश्रा ने मोबाइल पर चर्चा के दौरान जानकारी देते हुए बताया कि आज दोपहर के समय सलेहा रेंज की धरवारा बीट अंतर्गत ग्राम पटनातमोली की इंदिरा आवास कॉलोनी में लगे नीम के पेड़ पर एक तेंदुए के चढ़े होने की सूचना मिली थी। रेंजर सलेहा आर.एस. पटेल ने स्टॉफ के साथ मौके पर पहुंचकर दूरबीन से देखा तो उसके शरीर लकड़ी में बंधा हुआ वायर का फंदा फंसा हुआ नजर आया। इसकी जानकारी मिलते एसडीओ फॉरेस्ट हेमंत यादव मौके पर पहुंचे।
वायर का फंदा कसने और जख्मी होने के कारण पेड़ पर ही दम तोड़ने वाला युवा तेंदुआ।
तेंदुए की जान बचाने के लिए पन्ना टाइगर रिजर्व की रेस्क्यू टीम को सूचित कर मौके पर बुलाया गया लेकिन गुरुवार को शाम के समय उक्त टीम जब मौके पर पहुंची तब तक जख्मी तेंदुए की साँसें हमेशा के लिए थम चुकी थीं। मृत तेन्दुए की अगले दिन शुक्रवार 25 सितंबर की सुबह पंचनामा कार्रवाई, घटनास्थल स्थल एवं शव की फोरेंसिक टीम से जांच कराने के लिए शव को पेड़ से नीचे नहीं उतारा गया। वहीं जांच के लिए घटनास्थल को भी सुरक्षित करते हुए मौके पर वनकर्मियों को तैनात किया गया है।
उल्लेखनीय है कि गुरुवार 24 सितंबर को दोपहर में वायर में फंसे युवा तेंदुए ने जब पटनातमोली की इंदिरा आवास कॉलोनी में स्थित नीम के पेड़ पर शरण ली तो बस्ती में अफरा-तफरी फ़ैल गई। वायर में फंसे होने से परेशान व जख्मी तेंदुए के द्वारा हमला करने के भय और आशंका के चलते बस्ती के लोग अपने घरों के दरवाजे बंद कर काफी देर तक अंदर दुबके रहे। हालांकि इस दौरान तेंदुए को देखने की उत्सुकता में गांव के दूसरे मोहल्लों के लोगों की भीड़ पेड़ से कुछ दूरी पर जमा रही। शाम के समय जब तेंदुए की मौत होने का पता चला तो ग्रामीण दुखी और निराश नजर आए।
फाइल फोटो।
क्योंकि आमतौर पर कम नजर आने वाले तेंदुए को जीवित देखने की इनकी इच्छा पूरी नहीं हो सकी। प्रारंभिक जांच-पड़ताल में यह स्पष्ट नहीं हो सका कि युवा तेन्दुआ शिकार के लिए लगाए गए क्लिच वायर के फंदे में फंसा है या फिर आबादी क्षेत्र में आने के दौरान वह किसी दुर्घटनावश वायर में फंसा है। शुक्रवार को तेंदुए के शव, घटनास्थल की जांच और पोस्टमार्टम होने पर इन सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है। मालूम होकि जिले के उत्तर-दक्षिण सामान्य वन मण्डल एवं पन्ना टाइगर रिजर्व अंतर्गत पिछले तीन साल के अंदर दो दर्जन तेंदुओं की संदेहास्पद मौत और शिकार की घटनाएं सामने आईं हैं।

“सिर विहीन बाघ के मामले में बड़ी चूक हुई, सही समय आने पर दोषियों के खिलाफ करेंगे उचित कार्रवाई” : पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ

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पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ आलोक कुमार से बाघ-तेंदुओं की मौत पर चर्चा करती हुईं पन्ना राजपरिवार की महारानी जीतेश्वरी देवी।

बाघ का सिर गायब होने के डेढ़ माह बाद घटनास्थल पर पहुंचे पीसीसीएफ अलोक कुमार

पन्ना टाइगर रिजर्व के भविष्य को उज्जवल बताते हुए बोले- अब पुनः बाघ विहीन नहीं होगा

लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई में देरी के सवाल पर मामला सरकार के संज्ञान होने की बात कहकर पल्ला झाड़ा

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यप्राणी आलोक कुमार पन्ना के दौरे पर है। पन्ना टाइगर रिजर्व में सिर विहीन बाघ का शव मिलने और उसके अन्य अंग गायब होने की जांच के सिलसिले में उनका आना हुआ है। पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों की सुरक्षा-निगरानी व्यवस्था एवं पार्क प्रबंधन की कार्यप्रणांली को कठघरे में खड़ा करने वाली इस घटना की सघन जांच-पड़ताल करने प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यप्राणी आलोक कुमार ने बुधवार 23 सितम्बर को हिनौता रेंज के उन स्थानों का निरीक्षण किया जहां डेढ़ माह पूर्व आपसी संघर्ष के बाद बाघ पी-123 केन नदी में गिरा था और सर्चिंग के दौरान तीसरे दिन नदी में जहां पर उसका धड़ बरामद हुआ था।
पार्क के अमले के हाई अलर्ट पर होने के बाबजूद मृत बाघ का सिर समेत अन्य अंगों को शिकारी-तस्कर गिरोह धारदार हथियार से काटकर के ले गए थे। पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक के.एस. भदौरिया पर इस गंभीर अपराध को छिपाने के उद्देश्य से तथ्यों तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करते हुए गुमराह करने का आरोप हैं। यह अप्रत्याशित घटना कैसे और क्यों हुई इसका पता लगाने के लिए पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ के द्वारा उन तमाम मैदानी कर्मचारियों से पूंछतांछ की गई जोकि बाघ के आपसी संघर्ष के प्रत्यक्षदर्शी हैं और उसके सर्चिंग अभियान में शामिल रहे हैं।
केन नदी में सर्चिंग के दौरान बाघ पी-123 का शव इस स्थिति में बरामद हुआ था, उसका सिर गायब था। (फाइल फोटो)
सर्वविदित है कि बाघ पी-123 के सिर के अलावा भी अन्य अंगों के गायब होने का खुलासा होने पर वन्यजीवों के अंगों की तस्करी से जुड़े इस मामले की जांच स्टेट टाइगर स्ट्राइक फ़ोर्स भोपाल को सौंपी गई है। वन अपराधों की रोकथाम करने वाली इस एजेन्सी ने हाल ही में पन्ना व पड़ोसी छतरपुर जिले में सक्रिय वन्यजीवों के शिकार और अंगों की तस्करी करने वाले संगठित गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए तेंदुआ और चीतल की दो-दो खाल जप्त की। बाघ के अंगों के गायब होने की जांच के दौरान हुए इस खुलासे ने हर किसी को हैरान कर दिया है। स्थानीय अधिकारी इस गिरोह की गतिविधियों से न सिर्फ पूरी तरह बेखबर रहे बल्कि अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए बाघों-तेन्दुओं और दूसरे वन्यजीवों की मौत पर पर्दा डालते रहे हैं।
पन्ना जिले के उत्तर-दक्षिण वन मण्डल एवं पन्ना टाइगर रिजर्व के अंतर्गत पिछले तीन साल में करीब दो दर्जन तेन्दुओं की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत और शिकार की घटनाएं घटित हुई हैं। इसके आलावा पन्ना टाइगर रिजर्व अंतर्गत महज 9 माह के अंदर 5 बाघों की संदेहास्पद मौत के मामले सामने आए हैं, इनमें बाघ पी-123 भी शामिल है। इन तमाम खुलासों के बीच पन्ना में वनों एवं वन्यजीवों की सुरक्षा-निगरानी की बद से बद्तर स्थिति सामने आने के मद्देनजर प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यप्राणी आलोक कुमार से यह पूंछा गया कि पन्ना टाइगर रिजर्व के भविष्य को आप कितना सुरक्षित मानते हैं ?
इस सवाल के जबाव में श्री कुमार ने बड़े ही आत्मविश्वास के साथ कहा कि पन्ना का भविष्य प्रदेश के अन्य टाइगर रिजर्व की तुलना में कहीं अधिक उज्जवल और सुरक्षित है। उनके अनुसार यहां बाघों की रिकार्ड संख्या और मेल-फीमेल का स्वस्थ अनुपात पन्ना का भविष्य उज्जवल होने का संकेत देता है। आपने दावे के साथ कहा कि अब पन्ना अब पुनः कभी बाघ विहीन नहीं होगा। जहां तक बाघों की सुरक्षा और मॉनिटरिंग का सवाल है, उसे हम लोग देख रहे हैं, मैनें सभी को स्पष्ट बता दिया है, किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पन्ना टाइगर रिजर्व का हिनौता स्थित प्रवेश द्वार। (फाइल फोटो)
उल्लेखनीय है कि बाघों की मौत की वास्तविकता को छिपाने की प्रवृत्ति के चलते करीब एक दशक पूर्व वर्ष 2009 में पन्ना टाइगर रिजर्व बाघ विहीन हो गया था। पन्ना के बाघ विहीन होने की सच्चाई का उच्च स्तरीय जांच में खुलासा होने के पूर्व यहां बाघों को लेकर इसी तरह के बड़े-बड़े दावे किये जाते थे। एक सवाल पर पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ ने सिर विहीन बाघ का शव मिलने को बड़ी चूक मानते हुए कहा कि इस प्रकरण में तथ्यों को छिपाने की बात प्रदेश सरकार के संज्ञान में है। इस मामले में सही समय पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
बताते चलें कि बाघ के अंगों की तस्करी से जुड़े इस संवेदनशील मामले के साक्ष्यों को छिपाने के आरोपों से घिरे पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक के.एस. भदौरिया के रिटायर्मेंट की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है, प्रारंभिक जांच में आरोप सही साबित होने के बाद भी क्षेत्र संचालक के आपराधिक कृत्य के लिए उनके विरुद्ध कार्रवाई करने शीर्ष अधिकारियों को उचित समय का इंतजार है ! क्या यह उचित समय उनके रिटायर्मेंट के बाद आएगा ? इस सवाल का पीसीसीएफ ने कोई जबाव नहीं दिया।
पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ आलोक कुमार का कहना है कि इस तरह की गलतियां सभी टाइगर रिजर्व में होती हैं, जो पैदा हुआ है उसका मरना तय है। बाघों की मौत कई बार स्वाभाविक होती कई बार दूसरे कारणों से मौत के मामले समने आते हैं, जिसे देखना और उनकी पुनरावृत्ति होने से रोकना हमारा काम है। इसके लिए सभी आवश्यक उपाए किये जा रहे हैं। उन्होंने वर्तमान में जारी एसटीएसएफ की जांच पर भरोसा और संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि मुझे पूरा विश्वास है, एसटीएसएफ टीम के द्वारा जल्दी ही बाघ के अंगों के गायब होने के मामले का खुलासा किया जाएगा। आपने बताया कि इस टीम में योग्य और अनुभवी अधिकारी शामिल हैं। प्रदेश की एसटीएफएस टीम की ख्याति पूरे देश में है। इसने देश भर से बड़ी संख्या में शिकारियों-तस्करों को पकड़कर अपनी काबलियत को साबित किया है। इतना ही नहीं दूसरे देशों में छिपे अपराधियों को भी यह टीम सफलता पूर्वक पकड़कर लाई है।

पारदर्शिता और जबावदेही सुनिश्चित की जाए- महारानी

पन्ना टाइगर रिजर्व के हिनौता गेट किनारे स्थित जंगल कॉटेज में प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यप्राणी आलोक कुमार से पन्ना राजपरिवार की सदस्य महारानी जीतेश्वरी देवी ने भेंट की। इस दौरान उन्होंने पन्ना जिले के सामान्य एवं संरक्षित वन क्षेत्रों में बाघ-तेंदुओं और दूसरे वन्यजीवों की संदिग्ध मौत तथा शिकार की बढ़ती घटनाओं पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पारदर्शिता और जबावदेही के आभाव के कारण यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति निर्मित हुई है। मृत बाघ-तेंदुओं का ईमानदारी से विस्तृत विवरण, फोटो और वीडियो जारी न करने तथा स्थानीय पत्रकारों को घटनास्थल पर न ले जाने अथवा मौके पर न बुलाने के कारण समय पर घटना की वास्तविकता सामने नहीं आ पाती है। सिर विहीन बाघ के मामले में भी यही हुआ है। अपनी कमियों को छिपाने के लिए मगरमच्छों के द्वारा बाघ के सिर को खाने की कहानी क्षेत्र संचालक के द्वारा गढ़ी गई। इस घटना को कई स्तर पर करीब महीने भर तक छिपाया गया है।
महारानी जीतेश्वरी देवी के द्वारा उठाए गए मुद्दों का जवाब देते हुए पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ आलोक कुमार।
महारानी जीतेश्वरी ने इस प्रकरण में दोषी अधिकारियों के विरुद्ध अब तक कार्रवाई न होने पर हैरानी और नाराजगी जाहिर की करते हुए कहा कि पन्ना में जो कुछ रहा है उसके लिए भोपाल में बैठे शीर्ष अधिकारी भी जिम्मेवार हैं। आप लोगों के द्वारा पन्ना में लंबे समय से जारी तेंदुओं और बाघों की मौत एवं शिकार की घटनाओं को घोर अनदेखी की गई, इन्हें गंभीरता से लेकर कार्रवाई न करने का ही यह दुष्परिणाम है कि पन्ना में अराजकता पूर्ण स्थिति निर्मित हो चुकी है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यप्राणी आलोक कुमार ने उन्हें आश्वस्त किया कि अतीत की गलतियों से सीखकर उनमें सुधार किया जाएगा। बाघ के प्रकरण में जो भी दोषी हैं उनके खिलाफ हर-हाल में कार्रवाई की जाएगी।

बड़ी खबर : जेके सीमेन्ट का पन्ना जिले में शीघ्र शुरू होगा उत्पादन ! लाईम स्टोन के उत्खनन के लिए 16 सौ हेक्टेयर की लीज़ 50 साल के लिए स्वीकृत

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उप पंजीयक कार्यालय पन्ना में लीज डीड के रजिस्ट्रीकरण उपरांत ई-पंजीयन के दस्तावेज प्राप्त करते हुए जेकेसेम सेन्ट्रल लिमिटेड के प्रतिनिधि।

* कम्पनी ने 36 करोड़ की स्टाम्प ड्यूटी देकर लीज डीड की रजिस्ट्री कराई

* अमानगंज तहसील के आधा दर्जन ग्रामों से होगा लाईम स्टोन का उत्खनन

* प्रशासन द्वारा लीज डीड निष्पादन की शर्तों को नहीं किया गया सार्वजानिक

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में बहुप्रतीक्षित जेके सीमेन्ट फैक्ट्री की स्थापना और सीमेंट उत्पादन का रास्ता साफ़ हो गया है। इस दिशा में शासन-प्रशासन स्तर महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। खनिज साधन विभाग ने जेकेसेम सेन्ट्रल लिमिटेड के पक्ष में जिले की अमानगंज तहसील के आधा दर्जन ग्रामों की 1594.34 हेक्टेयर भूमि पर लाईम स्टोन के उत्खनन हेतु 50 वर्ष के लिए लीज डीड (पट्टा लेख) का निष्पादन किया गया है। आज लीज डीड के रजिस्ट्रीकरण (पंजीयन) की कार्रवाई पूरी की गई। ।
प्राप्त जानकारी के अनुसार खनिज संसाधन विभाग मध्यप्रदेश द्वारा जेकेसेम सेन्ट्रल लिमिटेड के पक्ष में शनिवार 19 सितम्बर 2020 को पन्ना जिले की अमानगंज तहसील के ग्राम ककरा, सप्तई, देवरा, कमताना, जूड़ी, देवरी पुरोहित की 1594.34 हेक्टेयर भूमि पर लाईम स्टोन के उत्खनन हेतु 50 वर्ष की अवधि के लिए लीज डीड (पट्टा लेख) निष्पादन की कार्रवाई की गई। इसी क्रम में लीज डीड का पंजीयन (रजिस्ट्रीकरण) बुधवार 23 सितंबर 2020 को राज्य शासन की और से पन्ना कलेक्टर संजय कुमार मिश्र एवं जेकेसेम के प्रतिनिधि के द्वारा उप पंजीयक कार्यालय पन्ना में कराया गया। लीज की रजिस्ट्रीकरण से स्टाम्प ड्यूटी तथा पंजीयन शुल्क के रूप में कुल रुपए 36,06,77,747/-(छत्तीस करोड़, छः लाख, सतहत्तर हजार, सात सौ सैंतालीस रुपए) का राजस्व प्राप्त हुआ है। उक्त स्टाम्प ड्यूटी का भुगतान उप पंजीयक रामेश्वर प्रसाद अहिरवार के द्वारा ऑनलाइन मोड में करवाया गया है।
कलेक्टर कार्यालय पन्ना द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति।
फलस्वरूप ई-पंजीयन पर सर्विस प्रोवाइडर को स्टाम्प ड्यूटी पर कमीशन के रूप में प्राप्त होने वाली राशि अर्थात रुपये 32,16,855/-(बत्तीस लाख सोलह हजार आठ सौ पचपन रुपये) भी राज्य शासन के खजाने में सीधे प्राप्त हुई है। गौरतलब है कि खनिज संसाधन विभाग एवं पन्ना जिला प्रशासन द्वारा लीज डीड निष्पादन की शर्तों को सार्वजानिक नहीं किया गया है। जिससे फिलहाल यह पता नहीं चल सका जेकेसेम सेन्ट्रल लिमिटेड के पक्ष में सैंकड़ों हेक्टेयर भूमि पर लाईम स्टोन उत्खनन हेतु 50 वर्ष की अवधि के लिए लीज डीड का निष्पादन किन शर्तों के आधार पर किया गया है। जानकारों के अनुसार पारदर्शिता और सामाजिक निगरानी अथवा सामाजिक अंकेक्षण के लिहाज से शर्तों की जानकारी आमजन को होना आवश्यक है।

बिचौलियों के जरिए औने-पौने दाम पर खरीदी जमीन !

जेकेसेम सेन्ट्रल लिमिटेड की लाईम स्टोन की खदान अमानगंज तहसील क्षेत्र के जिन आधा दर्जन ग्रामों की भूमि पर स्वीकृत हुई वहाँ के अधिकाँश किसानों के निजी स्वामित्व की कृषि भूमि को सीमेन्ट कम्पनी के द्वारा बिचौलियों के जरिए क्रय किया गया है। यह सिलसिला अभी भी जारी है। प्रभावित किसान आरोप लगा रहे हैं कथित तौर पर उनकी अज्ञानता-अशिक्षा का गलत फायदा उठाकर उनकी कृषि भूमि को औने-पौने (बेहद सस्ते) दाम पर खरीदा गया है। एक ही समय पर भूमि खरीदी के एवज में कम्पनी की ओर से किसानों को सौदे के अनुसार अलग-अलग राशि का भुगतान किया गया है। शासन-प्रशासन के तटस्थ रहने के कारण बिचौलियों के जाल में फंसकर अपनी आजीविका के एकमात्र साधन कृषि भूमि की बेहद कम दाम पर बिक्री करने वाले किसान अब अपराध बोध से ग्रसित होकर हर घड़ी स्वयं को कोस रहे हैं। खुद को छला हुआ महसूस कर रहे किसानों को अपना सब-कुछ खोने का दर्द बेचैन कर रहा है।
शायद इसीलिये क्षेत्र के किसान लम्बे समय से जेकेसेम सेन्ट्रल लिमिटेड और इसके कथित बिचौलियों के खिलाफ आंदोलन करते रहे हैं। विडंबना यह है कि अन्नदाता किसानों को हमदर्द होने का दावा करने वाली प्रदेश सरकार के द्वारा अमानगंज तहसील क्षेत्र में प्रस्तावित सीमेन्ट फैक्ट्री प्रभावित किसानों के आर्थिक हितों के संरक्षण एवं उनके सुरक्षित भविष्य की लगातार घोर अनदेखी की गई। क्षेत्र के जागरूक लोगों का मानना है कि शासन-प्रशासन ने भूमि खरीदी के लिए कोई उचित न्यूनतम राशि निश्चित न करके भोले-भाले किसानों के शोषण की प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से खुली छूट दी गई। संभवतः उद्योगपतियों को लाभ पहुँचाने के मकसद से यह सब जानबूझकर किया गया है।

पन्ना टाइगर रिजर्व में दो शावकों के साथ नजर आई बाघिन, पी-141 ने दूसरी बार दिया शावकों को जन्म

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पन्ना टाइगर रिजर्व में अपने नवजात शावकों के साथ चहलकदमी करती हुई बाघिन पी-141

* शावकों के जन्म की ख़ुशी पर भारी पड़ रही सुरक्षा की चिंता और भय !

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) बाघों की संदेहास्पद परिस्थतियों में लगातार मौत व शिकार की बेहद हैरान करने वाली घटनाओं और स्टेट टाइगर स्ट्राइक फ़ोर्स भोपाल की जांच के चलते सुर्ख़ियों में बने मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व से कुछ अच्छी ख़बरें भी आ रहीं हैं। हथिनी रूपकली के द्वारा तीन दिन पूर्व मादा शिशु को जन्म देने के बाद पार्क की बाघिन पी-141 को दो नन्हें शावकों के साथ चहलकदमी करते हुए देखा गया है। इस युवा बाघिन ने दूसरी बार शावकों को जन्म दिया है। बाघिन के साथ विचरण करते कैमरे में कैद हुए नवजात शावक करीब ढाई माह के हो चुके हैं। पन्ना टाइगर रिजर्व की हिनौता रेन्ज अंतर्गत उत्तर हिनौता क्षेत्र में गश्ती दल के द्वारा पहली बार इन्हें देखा गया है।
पन्ना टाइगर रिजर्व का हिनौता स्थित प्रवेश द्वार। (फाइल फोटो)
पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों, दूसरे वन्यजीवों की सुरक्षा एवं निगरानी की बेहद लचर स्थिति को उजागर करने वाली घटनाओं के मद्देनजर बाघ के कुनबे में वृद्धि की ख़ुशी पर इनकी सुरक्षा से जुड़ी चिंता और भय भारी पड़ रहा है। इसकी ठोस वजह भी है। पन्ना टाइगर रिजर्व में पिछले 9 माह में 4 बाघों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने के कई दिन बाद इनके सड़े-गले कंकाल में तब्दील हो चुके शव बरामद होना, पिछले माह आपसी संघर्ष में घायल होने के बाद केन नदी में गिरे बाघ पी-123 का सिर विहीन शव मिलना एवं उसके अन्य अंगों के गायब होने और पिछले करीब 3 साल में जिले के उत्तर वन मण्डल, दक्षिण वन मण्डल, पन्ना टाइगर रिजर्व अंतर्गत करीब दो दर्जन तेंदुओं की संदेहास्पद मौत व शिकार की घटनाओं के सामने आने तथा इनसे जुड़े एसटीएसएफ के हालिया खुलासों को देखते हुए बाघ और दूसरे वन्यजीवों की सुरक्षा की चिंता होना स्वाभाविक है।

60 से अधिक हुई बाघों की संख्या

पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक के.एस. भदौरिया।
पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक के.एस. भदौरिया ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि बाघिन पी-141 ने दो शावकों को जन्म दिया है। बिना रेडियो कॉलर वाली इस बाघिन को शावकों के साथ हिनौता रेन्ज के उत्तर हिनौता क्षेत्र में पहली बार नवजात शावकों के साथ विचरण करते हुए देखा गया है। शावकों की आयु करीब ढाई माह है। बाघिन और उसके शावक स्वस्थ बताए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पन्ना टाइगर रिजर्व में वर्तमान में 47 व्यस्क बाघ-बाघिन हैं। शावकों के साथ पन्ना में बाघों की तादाद 60 से अधिक हो चुकी है। पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों की यह रिकार्ड संख्या है।