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हृदय विदारक घटना : आग से जलकर माँ-बेटे का दर्दनाक दुखांत

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स्थानीय लोगों से घटना की जानकारी प्राप्त करते हुए पन्ना कलेक्टर संजय कुमार मिश्र।

*  पन्ना नगर के गल्ला मण्डी क्षेत्र में बीती रात सामने आई घटना

*  गरीबी-बेरोज़गारी के चलते आग लगाकर आत्महत्या करने की चर्चा

पन्ना। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिला मुख्यालय में शनिवार की रात एक वृद्धा और उसके जवान बेटे की आग से जलकर दर्दनाक मौत हो गई। आगजनी की यह घटना घर के अंदर की है और उस समय घर के दरवाजे अंदर से बंद थे। फिलहाल प्रारंभिक पुलिस जांच में घटना के कारणों का आधिकारिक तौर पर पता नहीं चल सका। मृतक के रिश्तेदार और पड़ोसियों की मानें तो गरीबी-बेरोजगारी के चलते माँ-बेटे ने स्वयं को आग के हवाले कर आत्महत्या की है। ह्रदय विदारक घटना की खबर आने के बाद से पन्ना नगर में शोक की लहर व्याप्त है। कोतवाली थाना पुलिस ने घटना की वास्तविकता का पता लगाने के लिए मर्ग कायम कर घटना के हर पहलू की गहनता से पड़ताल शुरू कर दी है।
घटनास्थल पर पंचनामा कार्रवाई करते हुए पन्ना कोतवाली थाना पुलिसकर्मी।
पन्ना नगर के गल्ला मण्डी क्षेत्र अंतर्गत वार्ड क्रमांक-04 में स्थित एक घर से शनिवार 05 दिसम्बर की रात करीब 10 आग की तेज लपटें उठने से इलाके में अफरा-तफरी फ़ैल गई। गंभीर हादसे की आशंका से घिरे आस-पड़ोस के लोगों द्वारा तुरंत पुलिस और फायर ब्रिगेड को कॉल कर आगजनी की सूचना दी गई। फायर ब्रिगेड के मौके पर पहुँचने तक स्थानीय लोग बिना समय गंवाए अपने स्तर पर आग को बुझाने में जुट गए। इस दौरान घर के दरवाजे अंदर से पाए गए। साथ ही दरवाजे के पीछे ईंटें रखी हुई मिलीं। कुछ देर बाद मौके पर पहुंची नगर पालिका की फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों ने पानी की बौछारें छोड़कर आग पर काबू पाया। कोतवाली थाना पुलिस के जवानों एवं पड़ोसियों ने जब अंदर जाकर देखा तो वही हुआ जिसका सबको डर था ! कमरे के अंदर विनोद जाटव पुत्र स्व. बिहारी लाल जाटव 35 वर्ष व उसकी माँ धंती बाई जाटव पत्नी स्व. बिहारी लाल जाटव 65 वर्ष की आग से जलने के कारण मौके पर ही दर्दनाक मौत हो चुकी थी। माँ-बेटे के शव आग की लपटों से बुरी तरह झुलस चुके थे। फिलहाल इस घटना के कारणों का आधिकारिक तौर पर पता नहीं चल सका। लेकिन मृतक के पड़ोसियों और रिश्तेदारों का ऐसा मानना है कि, गरीबी-बेरोजगारी के चलते माँ-बेटे ने आत्मघाती कदम उठाया है। दिल दहला देने वाली इस घटना की खबर आने के बाद से नगर में शोक की लहर व्याप्त है।

कई माह से रिश्तेदार खिला रहे थे खाना

शव विच्छेदन गृह के बाहर बैठे शोक संतृप्त परिजन।
रविवार को शवों के पोस्टमार्टम के दौरान शव विच्छेदन गृह के बाहर बैठे हेमन्त जाटव ने पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि मृतक विनोद जाटव उसका चचेरा भाई था। जोकि पेशे से मोटर साईकिल मैकेनिक था। विनोद की दो बहनें और एक छोटा भाई गणेश जाटव है। उसकी दोनों बहनों का विवाह हो चुका है जबकि छोटा भाई गणेश अविवाहित है और वर्तमान में ग्वालियर में रहकर मजदूरी करता है। करीब 10 वर्ष पूर्व विनोद का विवाह हुआ था। लेकिन पति से अलगाव के चलते कई सालों से उसकी पत्नी अपने मायके में रह रही है। दोनों का एक पुत्र भी है वह अपनी माँ के साथ रहता है। दाम्पत्य जीवन में दरार पड़ने के बाद से विनोद नशे का आदी हो गया था। गरीबी से जूझ रहे इस दलित परिवार की मुश्किलें कोरोना लॉकडाउन के चलते काफी बढ़ गईं थी। बेरोजगार हो चुका विनोद अपना और वृद्ध माँ का भरण-पोषण करने असमर्थ हो गया था। कोरोना की आपदा के इस कठिन समय में हेमन्त व अन्य रिश्तेदार उन्हें खाना देते थे। हेमन्त ने एक सवाल के जवाब में बताया कि विनोद का बीपीएल कार्ड बना था जिसमें उसे राशन भी मिलता था। लेकिन सूखा राशन तो नहीं खाया जा सकता, खाना पकाने के लिए और भी बहुत कुछ लगता है। हेमन्त के अनुसार गरीबी-बेरोजगारी एवं जबरदस्त आर्थिक तंगी के चलते ही उसके चचेरे भाई तथा चाची ने खुद को आग लगाकर आत्महत्या की है।

शाम के समय भी किया था आत्महत्या का प्रयास

शवों को पोस्टमार्टम के लिए ले जाते हुए परिजन।
गल्ला मण्डी के समीप रहने वाले बलीराम जाटव ने बताया कि मृतक विनोद रिश्ते में उसका साला लगता था। शनिवार की शाम को विनोद ने अपने घर के बाहर कुछ कपड़े रखकर और कैरोसीन डालकर स्वयं को आग लगाकर आत्महत्या करने की कोशिश की थी। तब पड़ोस में रहने वाले लोगों ने समय रहते उसे देख लिया और डांट-फटकार कर भगा दिया था। बलीराम के अनुसार विनोद अपनी निजी जिंदगी में कई परेशानियों व चुनौतियों से जूझ रहा था जिससे उसकी मानसिक स्थिति भी ठीक नहीं थी। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि शाम के समय खुदखुशी करने में असफल रहने पर विनोद जाटव ने रात के समय घर के अंदर आखिरकार कैरोसीन डालकर खुद को आग के हवाले कर दिया। विनोद की वृद्ध माँ ने भी आत्महत्या की या फिर कमरे में लगी आग में जलने से उनकी मौत हुई, इसे लेकर कई तरह की चर्चाएं व्याप्त हैं।

कलेक्टर ने दी आर्थिक सहायता

मृतकों के आश्रितों को आर्थिक सहायता राशि प्रदान करते हुए पन्ना कलेक्टर संजय कुमार मिश्र।
माँ-बेटे की जिंदा जलने से मौत होने की स्तब्ध कर देने वाली घटना की जानकारी मिलने पर पन्ना कलेक्टर संजय कुमार मिश्र ने रविवार की सुबह मौके पर पहुंचकर घटना की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। इस घटना पर गहरा दुःख और शोक संतृप्त परिवार के प्रति अपनी सवेदनायें व्यक्त करते हुए उन्होंने मृतकों के आश्रितों को फौरी तौर पर बीस हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की। कलेक्टर ने घटना की सच्चाई का पता लगाने के लिए पुलिस अधिकारियों को सूक्ष्मता से जांच करने के आदेश दिए हैं। इस दौरान पन्ना एसडीएम शेर सिंह मीणा (आईएएस) भी मौके पर मौजूद रहे। वहीं पन्ना पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी ने भी घटनास्थल का मुआयना किया। पुलिस अधीक्षक ने कोतवाली थाना पन्ना के निरीक्षक एवं फोरेंसिक टीम को घटना की जांच के संबंध आवश्यक निर्देश दिए हैं।
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नगरीय निकायों के महापौर एवं अध्यक्ष पद का आरक्षण 9 दिसम्बर को

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भोपाल। (www.radarnews.in) प्रदेश के नगरपालिक निगमों, नगरपालिका और नगर परिषदों के आगामी सामान्य निर्वाचन के लिये महापौर/अध्यक्ष पद के आरक्षण की कार्यवाही 9 दिसम्बर, 2020 को सुबह 11 बजे से रवीन्द्र भवन, भोपाल के सभागृह में की जायेगी। महापौर/अध्यक्ष पद के आरक्षण की कार्यवाही 407 नगरीय निकायों के लिये की जायेगी। इनमें 16 नगरपालिक निगम, 99 नगरपालिका और 292 नगर परिषद हैं।
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पीएम आवास घोटाला : अध्यक्ष, सीएमओ, उपयंत्री समेत 7 के खिलाफ एफआईआर दर्ज

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फाइल फोटो।

* पन्ना जिले की पवई नगर परिषद का मामला

* अध्यक्ष पति को भी पुलिस ने बनाया आरोपी

* स्वीकृत सूची से 139 पात्र हितग्राहियों के नाम काटकर अपात्रों को बांटी आवास की राशि

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in)  मध्य प्रदेश के पन्ना जिले की नगर परिषद पवई में प्रधानमंत्री आवास योजना में हुए घोटाले पर स्थानीय थाना पुलिस ने सात आरोपियों के खिलाफ नामजद आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध किया है। आवास योजना के पात्र हितग्राहियों की स्वीकृत सूची में छेड़छाड़ करते हुए अपात्रों के नाम जोड़कर उनके बैंक खातों में राशि जारी करने के बहुचर्चित फर्जीवाड़े में पुलिस ने नगर पंचायत अध्यक्ष पवई किरण बागरी, अध्यक्ष पति बृजपाल बागरी उर्फ़ भोलू, तत्कालीन सीएमओ विजय रैकवार, उपयंत्री विक्रम बागरी समेत सात लोगों के विरुद्ध जालसाजी, गबन और भ्रष्टाचार की धाराओं के तहत प्रकरण पंजीबद्ध करते हुए मामले को विवेचना में लिया है। इस प्रकरण में अब तक किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हो सकी।
किरण बागरी, पूर्व अध्यक्ष, नगर परिषद पवई।
आसन्न नगरीय निकाय चुनाव के ठीक पहले कोंग्रेस की पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष किरण बागरी, उनके पति समेत अन्य के खिलाफ आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध होने से पवई में सियासी हलचल अचानक तेज हो गई है। नगर परिषद पवई में करीब दो दशक से काबिज रहे बागरी परिवार के प्रमुख सदस्यों पर एफआईआर दर्ज होने से उनके राजनैतिक विरोधियों एवं परिषद में विपक्ष में रही भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की बाछें खिल गई हैं। दरअसल, इन्हें लगता है कि पवई नगर परिषद में वापसी का यह सुनहरा अवसर है।
नगर परिषद पवई में केन्द्र सरकार की महत्वकांक्षी प्रधानमंत्री योजना में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं करते हुए जमकर पलीता लगाए जाने की शिकायतें मिलने पर कलेक्टर ने करीब 2 माह पूर्व जांच हेतु चार सदस्सीय समिति गठित की थी। समिति ने जांच उपरान्त प्रस्तुत की गई अपनी रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा करते हुए उल्लेख किया है कि, वर्ष 2018-19 में प्रधानमंत्री आवास योजना के 774 हितग्राहियों की कलेक्टर पन्ना द्वारा स्वीकृत सूची में शामिल 139 पात्र हितग्राहियों के नाम हटाकर इतने ही अपात्रों के नाम जोड़े गए। कूटरचना कर दस्तावेजों में हेराफेरी करने के पश्चात अपात्र हितग्राहियों के खातों में आवास की राशि दो-दो लाख रुपए डाल दिए गए। जांच में कमिटी ने पाया कि 9 हितग्राही ऐसे भी हैं जिनके मकान पूर्व से निर्मित हैं।
बृजपाल बागरी उर्फ़ भोलू, अध्यक्ष पति।
आवास योजना में हुए इस घपले के लिए जांच कमिटी ने तत्कालीन नगर परिषद अध्यक्ष किरण बागरी, उनके पति बृजपाल बागरी, तत्कालीन सीएमओ विजय रैकवार, उपयंत्री विक्रम बागरी समेत सात लोगों को दोषी ठहराया है। जांच में यह बात भी उभरकर सामने आई है कि पूर्व अध्यक्ष किरण बागरी की भूमिका कथित रूप से रबर स्टाम्प की रही है, परिषद के कार्य उनके पति बृजपाल बागरी उर्फ़ भोलू करते थे। आवास योजना के फर्जीवाड़े में अध्यक्ष पति को आरोपी बनाए जाने को लेकर भी यही वजह बताई जा रही है। बृजपाल बागरी उर्फ़ भोलू पर यह आरोप है कि उनके द्वारा नगर परिषद के कार्य में अवांछनीय हस्तक्षेप करके एवं अस्थाई कर्मचारियों पर दवाब बनाकर आवास योजना की सूची से पात्र हितग्राहियों के नाम हटवाकर अपात्रों के नाम जुड़वाए गए।
आवास योजना में हुई धांधली को लेकर शिकवा-शिकायतों चलते मामला मीडिया की सुर्ख़ियों में आने पर जिला प्रशासन हरकत में आया। कलेक्टर ने प्रकरण की गहनता से जांच हेतु आदेश जारी करते हुए समिति गठित की। जांच रिपोर्ट आने के बाद भी कुछ समय तक सियासी दवाब या निहित स्वार्थपूर्ती के चक्कर में इसे ठण्डे बस्ते रखा गया। इसकी भनक लगने पर सत्ताधारी दल भाजपा के नेताओं एवं जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के बाद जांच रिपोर्ट पर एक्शन की कार्रवाई शुरू हो सकी। कलेक्टर के निर्देश पर नगर परिषद पवई के सीएमओ हरि वल्लभ शर्मा के द्वारा गत दिनों दोषियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध कराने के लिए आवास घोटाले की जांच रिपोर्ट सहित आवश्यक दस्तावेज पवई थाना पुलिस को सौंपें गए।
विजय कुमार रैकवार, पूर्व सीएमओ, नगर परिषद पवई।
नगर निरीक्षक सुदामा प्रसाद शुक्ला ने बताया कि नगर परिषद पवई में आवास योजना की स्वीकृत सूची में फेरबदल कर घोटाला करने के मामले में दिनांक 02 दिसम्बर को तत्कालीन नगर पंचायत अध्यक्ष पवई किरण बागरी, अध्यक्ष पति बृजपाल बागरी उर्फ़ भोलू, तत्कालीन सीएमओ विजय रैकवार, उपयंत्री विक्रम बागरी, अस्थाई कर्मचारी सच्चिदानंद पटेल, बलराम पटेल, नीलेश विश्वकर्मा के विरुद्ध धारा 420, 467, 468, 471, 34 ताहि एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर मामले को जांच में लिया गया है। उल्लेखनीय है कि इस मामले में अभी तक किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हुई है। प्रकरण में आरोपी बनाए गए तत्कालीन सीएमओ विजय रैकवार वर्तमान में पड़ोसी जिला सतना की न्यू रामनगर नगर परिषद में पदस्थ हैं। जबकि शेष आरोपी पवई में ही मौजूद हैं।
फाइल फोटो।
चर्चा है कि कोंग्रेस पार्टी की पूर्व पवई नगर परिषद अध्यक्ष किरण बागरी के कार्यकाल में हुए अन्य घपले-घोटाले भी आने वाले दिनों में उजागर हो सकते हैं। उधर, प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद और निकाय चुनाव की तारीखों के ऐलान से पूर्व कोंग्रेस नेत्री किरण बागरी और उनके पति की कारगुजारियों को लेकर दोनों पर तेजी से कानूनी शिकंजा कसने की टाइमिंग के मद्देनज़र पवई में कतिपय लोग इसे राजनैतिक एवं चुनावी लाभ की मंशा से की जा रही कार्रवाई के रूप में देख रहे हैं।
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इंसाफ के लिए पैदल मार्च : प्रदर्शनकारियों को प्रशासनिक अमले ने धौंस दिखाकर रोकने का किया प्रयास, पीड़ित परिजनों ने पूंछा- “बहन-बेटियों पर जब अत्याचार हो रहा था तब कहाँ थे” ?

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अपनी बेटियों को इंसाफ दिलाने के लिए पदयात्रा कर पन्ना से सागर जाते पीड़ित परिजन एवं प्रदर्शनकारी ग्रामीण।

*   अमानगंज पहुंची न्याय यात्रा को मिल रहा जनसमर्थन

पन्ना।(www.radarnews.in) वहशी दरिंदों के द्वारा हवश का शिकार बनाकर बेरहमी से क़त्ल कर दी गईं बेटियों को इंसाफ दिलाने के लिए “मामा शिवराज” के राज में पीड़ित परिजन इस गलन भरी सर्दी में पन्ना से संभागीय मुख्यालय सागर तक करीब 250 किलोमीटर लम्बी पदयात्रा करने को मजबूर हैं। स्थानीय पुलिस, प्रशासन, जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर निराश और नाराज ग्राम मड़ैयन की निर्भया (परिवर्तित नाम) तथा ग्राम कोहनी की कीर्ति लोधी के परिजन काफी समय से अपनी बेटियों को इन्साफ दिलाने के लिए अकेले ही संघर्षरत रहे हैं। पन्ना में बैठे अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर काट-काटकर थक-हार चुके परिजनों को सिर्फ कोरे आश्वासन ही मिले। पुलिस उनकी बेटियों के फरार कातिल को अब तक गिरफ्तार भी नहीं कर सकी।
इन दोनों ही बहुचर्चित मामलों की जांच में सामने आए तथ्यों पर पीड़ित परिजनों के समक्ष स्थिति स्पष्ट न करने एवं आरोपियों की धरपकड़ को लेकर जानबूझकर लापरवाही बरतने जैसे आरोप पन्ना पुलिस पर लग रहे हैं। कुल मिलाकर पन्ना पुलिस के प्रति अविश्वास एवं उसकी भूमिका को लेकर संदेह के चलते स्थानीय स्तर पर न्याय मिलने की उम्मीद टूटने से पीड़ित परिजनों ने वरिष्ठ अधिकारियों से गुहार लगाने के लिए मंगलवार 01 दिसम्बर को सागर के लिए पैदल कूच कर दिया।
बहन-बेटियों के हत्यारों एवं बलात्कारियों को फांसी दिलाने की मांग को लेकर पन्ना से सागर के लिए निकाली जा रही इस पदयात्रा को न्याय यात्रा का नाम दिया गया है। किसान यूनियन, ग्रामीण अधिकार संगठन एवं हम हैं किसान-एक क्रांति संगठन के तत्वाधान में निकाली जा रही पदयात्रा का नेतृत्व संयुक्त रूप से किसान नेता ईश्वरचंद्र त्रिपाठी, समाजसेवी अमित भटनागर व दीपक शर्मा कर रहे हैं। रास्ते में अमानगंज में न्याय यात्रा को स्थानीय प्रशासनिक अमले के द्वारा धौंस दिखाते हुए रोकने का प्रयास किया गया। लेकिन वे अपने मंसूबे में सफल नहीं हो सके। पदयात्रियों ने तीखे तेवर दिखाते हुए प्रशासनिक अमले को कड़ी फटकार लगाई। साथ ही शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लोकतांत्रिक अधिकार में किसी भी प्रकार की दखलंदाजी ना करने की हिदायत दे डाली।
पन्ना जिले के अमानगंज क़स्बा में पदयात्रा का स्वागत व समर्थन करते हुए स्थानीय लोग।
उल्लेखनीय है कि बुधवार 2 दिसंबर 2020 को दोपहर यह यात्रा जिले के अमानगंज क्षेत्र में पहुंची। इस दौरान गांव-गांव भ्रमण कर एवं चौपाल लगाकर ग्रामीणों से चर्चा की गई। इस दौरान पदयात्रियों की मांग को ग्रामीणों ने समर्थन करते हुए उनकी हौसला अफजाई की। अमानगंज क़स्बा में स्थानीय लोगों एवं कॉलेज की छात्राओं ने पदयात्रियों का स्वागत करते हुए उनका समर्थन किया। इस दौरान राजस्व विभाग के अधिकारियों द्वारा पद यात्रियों को रोके जाने और तहसीलदार द्वारा उनके वाहन जप्त करते हुए और पदयात्रा रोकने की बात कही गई। इससे नाराज प्रदर्शनकारियों के नेता अमित भटनागर, ईश्वरचंद्र त्रिपाठी, दीपक शर्मा ने कहा कि जब आम नागरिकों की बहन-बेटियों के साथ अत्याचार होता है और उनकी हत्या होती है तब आपका प्रशासन कहां रहता है। जब न्याय मांगने के लिए आम नागरिक पदयात्रा करता है तो आप लोग उन्हें रोकने की कोशिश करते हैं। आम नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर अतिक्रमण की यह कौन सी नीति है। दांव उल्टा पड़ने से मामला बिगड़ते देख राजस्व अधिकारियों ने पदयात्रा को सुरक्षा प्रदान करने की बात कहते हुए उनका रास्ता छोड़ा दिया।
इस घटनाक्रम के संबंध में युवा नेता अमित भटनागर ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि बहन-बेटियों को न्याय, सुरक्षा, सम्मान-स्वाभिमान और अधिकारों के लिए हमारा संघर्ष जारी रहेगा। हम प्रशासन के दमन के आगे झुकने या रुकने वाले नहीं हैं। हमें 15 दिनों में सागर पहुंचना है, इसके बाद जरूरत पड़ने पर भोपाल और दिल्ली भी जाने को तैयार हैं।
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कड़ी सुरक्षा के बीच 183 नग हीरों की नीलामी गुरुवार से

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फाइल फोटो।
  •  पन्ना के संयुक्त कलेक्ट्रट भवन में होगा नीलामी का आयोजन

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) जिले की उथली खदानों से प्राप्त कुल 183 नग हीरों की नीलामी हीरा कार्यालय संयुक्त कलेक्ट्रेट भवन पन्ना में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच की जाएगी। इस संबंध में कलेक्टर संजय कुमार मिश्र ने बताया कि नीलामी गुरुवार 3 दिसंबर 2020 से प्रारंभ होगी जोकि कुल हीरों की नीलामी पूर्ण होने तक शासकीय अवकाश को छोड़कर चालू रहेगी। इस दौरान प्रतिदिन सुबह 9 बजे से लेकर 11 बजे तक नीलामी में भाग लेने के इच्छुक बोलीदारों को हीरों का निरीक्षण कराया जाएगा तत्पश्चात उनकी बोली की जाएगी। कलेक्टर श्री मिश्र ने बताया कि नीलामी में उज्जवल, मैले एवं औद्योगिक किस्म के लगभग 183 नग हीरों को रखा जाएगा। जिनका कुल वजन लगभग 251.83 कैरेट है। इनकी अनुमानित राशि लगभग 2 करोड़ 4 लाख 92 हजार 928 रूपये है। इच्छुक बोलीदार 5 हजार रूपये की अमानत राशि जमा करके बोली में भाग ले सकते हैं। उच्चतम बोली लगाने वाले बोलीदार को अंतिम निर्णय के तुरन्त बाद नीलामी राशि का 20 प्रतिशत तत्काल जमा करना होगा। शेष राशि 30 दिन में जमा करना अनिवार्य है।
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क़त्ल की गईं बेटियों को इंसाफ़ दिलाने पीड़ित परिजनों ने गलन भरी सर्दी में सागर के लिए किया पैदल कूच

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*  कीर्ति लोधी व पिंकी कुशवाहा के हत्यारों को फांसी दिलाने पदयात्रा प्रारंभ

*  किसान यूनियन व ग्रामीण अधिकार संगठन के तत्वधान में निकाली जा रही पदयात्रा

पन्ना। (www.radarnews.in) जिले के थाना कोतवाली अंतर्गत बराछ चौकी क्षेत्र के ग्राम मड़ैयन निवासी पिंकी कुशवाहा हत्याकाण्ड एवं ग्राम कोहनी निवासी कीर्ति लोधी हत्याकांड के आरोपियों को फांसी दिलाने की मांग को लेकर ग्राम मड़ैयन से संभाग मुख्यालय सागर के लिए मंगलवार 01 दिसंबर 2020 को दोपहर लगभग 2 किसान यूनियन और ग्रामीण अधिकार संगठन के संयुक्त तत्वाधान में ईश्वरचंद्र त्रिपाठी, अमित भटनागर एवं दीपक शर्मा के नेतृत्व में पदयात्रा प्रारंभ शुरू की गई है। जिसमें बहादुर आदिवासी, आरती केवट, दुलीचंद, इंजीनियर राजबहादुर लोधी, नरेश, सीताराम कुशवाहा, मशमी कुशवाहा, जगदीश कुशवाहा, अखिलेश आदिवासी, चाहना कुशवाहा, साधना, प्रियंका सहित काफी संख्या में ग्रामीण शामिल हैं।
युवा नेता अमित भटनागर ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि न्याय के लिये ग्रामीणों द्वारा काफी समय से आवेदन ज्ञापन और धरना प्रदर्शन किए जा रहे हैं, इसके बावजूद शासन प्रशासन द्वारा हत्याकांड के आरोपियों को सजा दिलाने एवं पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने का प्रयास नहीं किया जा रहा, जिससे क्षेत्र में आक्रोश व्याप्त है ग्रामीणों ने हत्यारों को फांसी दिलाने यह न्याय पदयात्रा शुरू की है। उन्होंने बताया कि पदयात्रा 1 दिसंबर 2020 को पन्ना जिले के ग्राम मड़ैयन से शुरू होकर 15 दिसंबर 2020 को सागर पहुंचेगी, जरूरत पड़ने पर भोपाल और दिल्ली की ओर भी कूच किया जायेगा।
पीड़ित परिजनों ने बताया कि पन्ना कोतवाली अंतर्गत ग्राम कोहनी में कीर्ति लोधी की निर्ममता पूर्वक धारदार हथियार से दिन दहाड़े हत्या कर दी गई थी। जिसके आरोपी को पुलिस द्वारा आज दिनांक तक नहीं पकड़ा गया। हत्यारोपी के फरार होने से परिवार दहशत में जी रहा है। इसी प्रकार ग्राम मड़ैयन की पिंकी कुशवाहा को कथित तौर पर कुछ वहशी दरिंदों द्वारा बेरहमी से सिर का मुण्डन कर निर्दयता पूर्वक गला घोंटकर एवं चाकुओं से गोदकर मौत के घट उतार कर गुंदलहा जंगल के नाला में फेंक दिया गया था। पीड़ित परिजनों का आरोप है कि उनकी बेटी का अर्धनग्न शव बरामद होने एवं घटनास्थल के आसपास शराब की बोतल एवं अन्य साक्ष्य मिलने के बावजूद कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म के इस मामले को दिया गया। पुलिस ने इस मामले में सिर्फ एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पीड़ित परिजनों ने इन आरोपों के साथ मामले की उच्चस्तरीय जांच करवाने एवं बेटियों के हत्यारों को फांसी दिलाने की मांग करते हुये पदयात्रा प्रारंभ की है।
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क्राइम : सतना जिले से लापता युवक का पन्ना के सीमावर्ती जंगल में मिला शव, बेरहमी हत्या किए जाने की आशंका

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सांकेतिक फोटो।

*  बृजपुर थाना अंतर्गत पहाड़ीखेरा चौकी क्षेत्र की घटना

पन्ना। (www.radarnews.in) जिले के बृजपुर थाना के पहाड़ीखेरा चौकी क्षेत्र अंतर्गत खनू से लथपथ एक युवक की लाश मिलने से सनसनी फ़ैल गई। घटना पहाड़ीखेरा-मझगवाँ मार्ग में पड़ने वाले चर्चित चहला नाला जंगल की है। मृतक की पहचान लखन लाल खैरवार पिता गौरेलाल खैरवार 35 वर्ष निवासी ग्राम कठवरिया थाना बरौंधा जिला सतना के रूप में की गई है। लखन लाल के संबंध में पता चला है कि वह तीन दिन से लापता था। जिसकी गुमशुदगी की सूचना उसके पिता ने बरौंधा थाना में दर्ज कराई थी। कथित तौर पर वृद्ध गौरेलाल खैरवार ने पुलिस को बताया था कि उसके पुत्र को सुरेश सेन कौंहारी थाना बरौंधा जिला सतना शनिवार 28 नवम्बर की सुबह करीब 9 बजे घर से अपने साथ किसी काम से ले गया था। देर रात्रि तक जब लखनलाल खैरवार जब वापस घर नहीं लौटा तो अनहोनी की आशंका से घिरे उसके पिता ने 29 नवम्बर को बरौंधा थाना पुलिस को बेटे की गुमशुदगी की सूचना दी। उधर, चिंतित परिजनों ने अपने स्तर पर खोजबीन जारी रखी।
इस बीच मंगलवार की सुबह पहाड़ीखेरा से करीब 10 किलोमीटर दूर मझगवाँ मार्ग किनारे सतना-पन्ना जिले के सीमावर्ती इलाके चहला नाला के समीप खून से लथपथ अज्ञात शव मिलने की भनक लगने पर गौरेलाल खैरवार जब मौके पर पहुंचा तो वही हुआ जिसका जिसका उसे डर था। बेटे को मृत पड़ा देख वह फूट-फूटकर रोने लगा। शव की हालत और घटना स्थल साक्ष्यों के आधार पर लखनलाल खैरवार निर्ममतापूर्वक हत्या किये जाने की आशंका जताई जा रही है। मृतक के सिर गहरे घाव के निशान मौजूद हैं। अंधे क़त्ल की इस सनसनीखेज वारदात को उसी व्यक्ति के द्वारा अंजाम दिए जाने का संदेह जताया जा रहा है जोकि उसे किसी जरुरी काम के बहाने घर से अपने साथ ले गया था।
फिलहाल घटना कारण स्पष्ट नहीं सका। मौके पर पहुंचे पहाड़ीखेरा चौकी प्रभारी आर. जी. द्विवेदी ने फिलहाल इस घटना पर मर्ग कायम किया है। मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के तथ्यों के आधार अग्रिम कार्रवाई करने की बात पुलिस के द्वारा कही जा रही है। हालाँकि प्रकरण की गंभीरता को देखते पुलिस के द्वारा इस घटना के सभी पहलुओं बारीकी से पड़ताल की जा रही है। उल्लेखनीय है कि इसके पूर्व भी चहला नाला के समीप कुछ समय पहले एक महिला का शव मिला था। लेकिन उस वारदात का अब तक खुलासा नहीं हो सका। अपराधों के लिहाज से उक्त सीमावर्ती स्थल बेहद संवेदनशील है। चूँकि पूर्व में वहां हत्या, लूटपाट, अपहरण सरीखी कई संगीन वारदातें घटित हो चुकीं हैं।
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पन्ना : दिग्विजय सिंह ने पत्नी अमृता के साथ किया टाइगर रिजर्व का भ्रमण, सांभर के झुण्ड और बर्ड वाचिंग में दिखाई दिलचस्पी

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पन्ना टाइगर रिजर्व के हिनौता गेट के बाहर पार्क के अधिकारियों से चर्चा करते हुए पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह एवं उनकी पत्नी अमृता सिंह।

*  वन्यजीवों को अपने कैमरे में किया कैद, लगभग तीन घण्टे तक की पार्क की सैर

*  गिद्धों की रेडियो टैगिंग करने के संबंध में पार्क के अधिकारियों ने दी जानकारी

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्य सभा सांसद दिग्विजय सिंह ने अपनी पत्नी श्रीमती अमृता सिंह के साथ आज सुबह पन्ना टाइगर रिजर्व का भ्रमण किया। बाघों और अनेकों प्रजाति के पक्षियों के प्राकृतिक रहवास के रूप में विश्व प्रसिद्द पन्ना टाइगर रिजर्व की सैर कर पूर्व मुख्यमंत्री काफी आनंदित नजर आए। पार्क भ्रमण के दौरान दिग्विजय सिंह को जंगल के राजा टाइगर का दीदार तो नहीं हुआ लेकिन सांभर, चीतल के झुण्ड, आसमान में उड़ते ईगल, वल्चर, अन्य पक्षियों, पार्क के अप्रतिम सौंदर्य और मनोरम प्राकृतिक स्थलों को देखकर वे मंत्रमुग्ध हो उठे।
राज्य सभा सांसद दिग्विजय सिंह एवं उनकी पत्नी अमृता सिंह पन्ना के हिनौता ग्राम में स्थानीय कोंग्रेस नेता, उनके परिजनों एवं ग्रामीणों के साथ।
एक वैवाहिक कार्यक्रम में सम्मलित होने के लिए निजी यात्रा पर सपत्नीक पन्ना पहुंचे राज्य सभा सांसद दिग्विजय सिंह ने मंगलवार 01 दिसम्बर की सुबह पन्ना टाइगर रिजर्व का भ्रमण किया। उन्होंने सुबह करीब 7 बजे मड़ला स्थित गेट से पार्क में प्रवेश किया। पैंट-शर्ट पहने और सिर में कैप लगाए श्री सिंह काफी कूल अंदाज में दिखे। उन्होंने अपनी पत्नी अमृता सिंह के साथ करीब तीन घण्टे तक पार्क का भ्रमण किया। इस दौरान पूर्व सीएम को सांभर और चीतल के झुण्डों को काफी नजदीक से देखने का अवसर मिला। वन्य प्राणियों के संबंध में काफी जानकारी रखने वाले दिग्विजय सिंह ने सांभरों और बर्ड वाचिंग (पक्षी दर्शन) में खासी दिलचस्पी दिखाई। पन्ना में पाए जाने वाले सांभरों की कद-काठी ने उन्हें काफी प्रभावित किया।
पन्ना टाइगर रिजर्व का हिनौता स्थित प्रवेश द्वार। (फाइल फोटो)
मालूम होकि, जैव विविधता से परिपूर्ण पन्ना के जंगल को हाल ही में यूनेस्को के द्वारा बायोस्फीयर रिजर्व घोषित किया गया है। पन्ना टाइगर रिजर्व की अपनी सैर के दौरान दिग्विजय सिंह और उनकी धर्मपत्नी अमृता सिंह यहां की खूबसूरत हरी-भरी वादियों, जल प्रपात, शांति-सुकून देने वाला वातावरण, मनोरम प्राकृतिक स्थल, कुलांचें भरते वन्यजीवों, पक्षियों के कर्ण प्रिय कलरव और अप्रतिम सौंदर्य को समेटे यहां के दिलकश नजारों को देख रोमांचित हो उठे। इस दौरान उन्होंने वन्य जीवों, प्राकृतिक सौन्दर्य से परिपूर्ण मनोरम स्थलों तथा यहां के भ्रमण से जुड़ीं सुखद स्मृतियों को सहेजकर रखने के लिए अपने कैमरे में कैद किया। पार्क के अंदर बड़गड़ी में स्थित रेस्ट हाउस में ही श्री सिंह ने स्वल्पाहार गृहण किया। मौके पर उपस्थित पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक उत्तम कुमार शर्मा व उप संचालक ईश्वर रामहरी जरांडे ने उन्हें पार्क की उपलब्धियों एवं वर्तमान में चल रहीं गतिविधियों के संबंध में संक्षिप्त जानकारी दी।
क्षेत्र संचालक के द्वारा पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह को बताया गया कि वर्तमान पन्ना पार्क में गिद्धों पर अध्ययन करने के लिए उनकी रेडियो टैगिंग की जा रही है। देश में गिद्धों की रेडियो टैगिंग पहली बार होने के संबंध में जानकर श्री सिंह ने सुखद आश्चर्य प्रकट करते हुए इस अनूठे प्रयोग व अध्ययन की सफलता हेतु पार्क के अधिकारियों को शुभकामनाएं दीं। लगभग तीन घण्टे तक पार्क भ्रमण करने के पश्चात कोंग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह अपनी पत्नी अमृता सिंह के साथ जब हिनौता गेट से बाहर निकले तो वे प्रफुल्लित और आनंदित नजर आए। कुछ क्षण हिनौता गेट पर रुकने बाद श्री सिंह स्थानीय कोंग्रेस नेता रामप्रसाद यादव के घर पहुंचे और फिर थोड़ी देर बाद पन्ना के लिए रवाना हो गए।
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केन्द्र सरकार की नीतियों के ख़िलाफ़ श्रमिक संगठनों ने भरी हुंकार, राष्ट्रव्यापी हड़ताल का दिखा व्यापक असर

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राष्ट्रव्यापी हड़ताल में शामिल हीरा खनन परियोजना मझगवाँ के कर्मचारियों ने कोरोना गाइडलाइन्स का पालन करते हुए धरना-प्रदर्शन किया।

*  एनएमडीसी हीरा खनन परियोजना, बीएसएनएल और एलआईसी के कर्मचारियों ने किया धरना-प्रदर्शन

*  हड़ताल के चलते केन्द्र सरकार से संबंधित कार्यालयों में ठप्प रहा कामकाज

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) केन्द्र सरकार की जनविरोधी एवं श्रमिक विरोधी नीतियों खिलाफ देश के विभिन्न श्रम संगठनों के आव्हान पर गुरुवार 26 नवम्बर को आयोजित एक दिवसीय हड़ताल का मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में व्यापक असर देखा गया। हड़ताली कर्मचारियों-अधिकारियों ने केन्द्र सरकार की नीतियों की तीखी आलोचना करते जमकर हल्ला-बोला। राष्ट्रव्यापी हड़ताल के चलते एनएमडीसी लिमिटेड की हीरा खनन परियोजना मझगवाँ, भारत संचार निगम लिमिटेड, भारतीय जीवन बीमा निगम समेत केन्द्र सरकार से संबंधित अन्य कार्यालयों में कामकाज लगभग ठप्प रहा। हड़ताल का सबसे ज्यादा असर एनएमडीसी लिमिटेड, हीरा खनन परियोजना, मझगवाँ में देखने को मिला।
मंचासीन हीरा हीरा खनन परियोजना मझगवाँ के श्रमिक संगठनों के पदाधिकारी।
परियोजना का प्लांट तो पूर्णतः बंद ही रहा इसके आलावा कार्यालयीन कार्य भी नहीं हो सका। गुरुवार को मझगवां टाउनशिप का नजारा दिनभर मुक़म्मल बंद जैसा रहा। हीरा खनन परियोजना से अनुबंधित यात्री बसों के पहिये 12-13 घण्टे तक थमे रहने से मझगवां क्षेत्र से सटे ग्रामों का सामान्य जनजीवन भी हड़ताल से प्रभावित हुआ। क्योंकि, मझगवां और आसपास के आधा दर्जन ग्रामों से जिला मुख्यालय पन्ना आने-जाने के लिए सार्वजानिक परिवहन के साधन के रूप में सिर्फ एनएमडीसी लिमिटेड से अनुबंधित निःशुल्क बसें ही इस रुट पर चलतीं हैं।
उल्लेखनीय है कि, केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों एवं अखिल भारतीय एनएमडीसी कामगार महासंघ के के एकजुट आव्हान पर हीरा खनन परियोजना मझगवाँ के दोनों प्रमुख श्रमिक संघ एमपीआरएचकेएमएस (समबद्ध इंटक) एवं पीएचकेएमएस (सम्बद्ध बीएमएस) से जुड़े शत-प्रतिशत कर्मचारी हड़ताल में शामिल रहे। परियोजना के टीओ गेट के सामने दोनों श्रमिक संगठनों ने कोरोना की गाइडलाइन्स का पालन करते हुए संयुक्त रूप से अपनी 20 सूत्रीय मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन किया। मझगवाँ में गलन भरी सर्दी के बीच सुबह 6 बजे से शुरू हुआ धरना-प्रदर्शन शाम को 6-7 बजे तक चला। इस दौरान हड़ताली कर्मचारियों ने केन्द्र सरकार की नीतियों को श्रमिक विरोधी, कर्मचारी-अधिकारी विरोधी, किसान विरोधी करार देते हुए जमकर नारेबाजी की।

सरकारी कंपनियों की बिक्री बंद करो : समर बहादुर

हीरा खनन परियोजना मझगवाँ के हड़ताली कर्मचारियों को सम्बोधित करते हुए श्रमिक नेता समर बहादुर सिंह।
हीरा खनन परियोजना के हड़ताली कर्मचारियों के धरना-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए एमपीआरएचकेएमएस के महामंत्री समर बहादुर सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि, यह संघर्ष देश को बचने के लिए है। केन्द्र की सरकार विनिवेश के नाम पर सार्वजानिक उपक्रमों को बेंचने पर आमदा है। ये सरकार मजदूर, किसान और कर्मचारी विरोधी है। इसने श्रम सुधारों के नाम श्रमिकों के अधिकारों को छीनने वाले तथा उनके शोषण को बढ़ावा देने वाले कानून बनाए हैं। श्रमिक संगठनों ने इस हड़ताल के जरिये सरकार को संदेश देने की कोशिश है कि श्रम सुधार के कानून हमें स्वीकार नहीं। इन सुधारों को लागू करने की पहल का हम पुरजोर विरोध करेंगे। ये असल में लेबर कोड नहीं लेबर लोड है, इसलिए देश के श्रमिक व कर्मचारी आंदोलन करने को मजबूर हैं।
श्री सिंह जोर देते हुए कहा कि एनआईएसपी नगरनार संयंत्र के डिमर्जर विनिवेशीकरण एवं सार्वजानिक उपक्रमों में विनिवेश/निजीकरण को राष्ट्रहित में तत्काल वापस लिया जाए। किसानों के हितों पर कुठाराघात करने वाले मनमाने कानून बनाकर इस सरकार ने देश भर के अन्नदाताओं को भी सड़कों पर उतरने के लिए विवश कर दिया है। श्रमिक नेता समर बहादुर सिंह ने कहा कि श्रमिक संगठनों की हड़ताल ऐसे समय पर हो रही है, जब कथित तौर पर कृषि सुधारों से जुड़े तीन कानूनों के खिलाफ अन्नदाता किसानों ने भी आंदोलन का बिगुल फूंक रखा है। किसान संगठन सरकार से कृषि सुधार संबंधी काले कानून वापस लेने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।

ठेका प्रथा बंद कर नियमित रोजगार दो : भोला प्रसाद

पीएचकेएमएस के महामंत्री भोला प्रसाद सोनी ने हड़ताली कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि मजदूरों की चिंताजनक स्थिति को सुधारने के लिए केन्द्र सरकार यदि वाकई संजीदा है तो देश के प्रत्येक श्रमिक को ईपीएफ, ईएसआई, ग्रेच्युटी, नियमित रोजगार, पेंशन व दुर्घटना की स्थिति में आर्थिक सहायता का लाभ प्रदान किया जाए। प्रत्येक श्रमिक को सामजिक सुरक्षा के दायरे में लाया जाए। न्यूनतम वेतन को 21 हजार रुपये किया जाए और केन्द्र व राज्यों में एक समान वेतन व्यवस्था को लागू किया जाए। कर्मचारी हित में नई पेंशन नीति की जगह पुरानी पेंशन नीति को बहाल किया जाए। ठेका, फिक्स टर्म, आउटसोर्स व ठेका प्रणाली की शोषण वाली व्यवस्था को समाप्त करके नियमित रोजगार दिया जाए।
श्री सोनी ने कहा कि केन्द्र सरकार की कार्यप्रणाली की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि यह सरकार हर मोर्चे पर नाकाम साबित हो रही है। सरकारी खजाने को भरने के लिए लोगों से पेट्रोलियम पदार्थों जैसे पेट्रोल-डीजल-रसोई गैस के मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में पेट्रोलियम पदार्थों के दाम निम्नतम स्तर पर होने के बाद भी लोगों के ऊपर महंगाई का बोझ डाला जा रहा है। खाद्य सामग्री के दाम भी कई गुना बढ़ चुके हैं। इस कारण आम-आदमी के लिए अपने परिवार का उदर-पोषण करना मुश्किल हो गया है।

मुख्य महाप्रबंधक को सौंपा ज्ञापन

मालूम हो कि धरना-प्रदर्शन के पूर्व हीरा खनन परियोजना के दोनों श्रमिक संगठनों एमपीआरएचकेएमएस के महामंत्री एवं पीएचकेएमएस के महामत्री भोला प्रसाद सोनी एवं अन्य पदाधिकारियों के द्वारा संयुक्त रूप से 20 सूत्रीय मांगों का एक ज्ञापन एमएमडीसी लिमिटेड, हीरा खनन परियोजना मझगवाँ के मुख्य महाप्रबंधक एस. के. जैन को सौंपा गया। इस ज्ञापन के ही जरिए राष्ट्रव्यापी हड़ताल में जाने की सूचना प्रबंधन को दी गई। बीस सूत्रीय ज्ञापन में राष्ट्रव्यापी हड़ताल से संबंधित अहम मांगों के 16 बिन्दु शामिल हैं।
इसके आलावा ज्ञापन के चार बिन्दुओं में स्थानीय मुद्दों को शामिल किया गया है। जिसमें हीरा खनन परियोजना के नियमित संचालन की प्रक्रिया को दिसम्बर 2020 के उपरान्त भी खनन कार्य अनवरत और निर्बाध रूप से चालू रखने की माँग को प्रमुखता से उठाया गया है। इसके आलावा परियोजना में कार्यरत संविदा कर्मचारियों को नियमित करने, एनएमडीसी में यथाशीघ्र कर्मचारियों की भर्ती करने तथा कोरोना महामारी से मृत व्यक्ति के परिवार के किसी एक सदस्य को अनुकम्पा नियुक्ति एवं पीड़ित परिवार को 50 लाख की आर्थिक सहायता देने की मांग की है।
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“गैरबराबरी, शोषण के चक्रव्यूह में हमारी युवा शक्ति फँसी है। राजनीतिक दलों के पास इन्हें छोड़कर दुनिया भर के मुद्दे हैं”

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सांकेतिक फोटो।

युवाओं के आक्रोश को समय रहते समझिए!

ज्वलंत/जयराम शुक्ल (वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तम्भकार) संपर्कः 8225812813

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इंदौर  के भँवर कुआँ इलाके में इन दिनों भुतहा सन्नाटा तो नहीं पर वह चहल-पहल भी गायब है जो सालभर पहले रहा करती थी। यह चहल-पहल उन मेधावी छात्रों की होती थी जो यूपीएससी, पीएससी में अपना भविष्य तजबीजते थे। दो साल से कोई नौकरी ही नहीं निकल रही और फिलहाल कोरोना एक मकम्मिल बहाना तो है ही। कोई एक लाख से ज्यादा बच्चे यहां विभिन्न कोचिंग संस्थानों मे पढ़ा करते हैं व विषय विशेषज्ञों से मार्गदर्शन लेते हैं। इंदौर की इकानामी में इन बच्चों का वैसा ही योगदान रहता था जैसा कि राजस्थान के कोटा में। ऐसे करियरिस्ट छात्रों के चलते इंदौर मध्यभारत का सबसे बड़ा शैक्षणिक केंद्र बनकर उभरा है। यहां वे मध्यवर्गीय, निम्न मध्यवर्गीय छात्र आते हैं जिनकी हैसियत दिल्ली के मुखर्जी नगर में रहकर बाजीराम जैसे बड़े संस्थानों में पढ़ने की नहीं रहती।
इंदौर के भँवरकुआँ क्षेत्र में सबसे बड़ी हिस्सेदारी हमारे विंध्यक्षेत्र के बच्चों की होती है। पिछले साल तक रेवांचल एक्सप्रेस में ऐसे प्रायः कई बच्चे मिल जाते थे जिनके पिट्ठूबैग में किताबें और सिर पर सीधा-पिसान की बोरियां लदी रहती थीं। वह दृश्य मुझे भूला नहीं जिसमें एक बच्ची सिरपर पचीस किलो की बोरी और पीठपर किताबों से भरा बैग लिए हबीबगंज स्टेशन की सीढ़ियां चढ़ते हुए डगमगा गई थी। मैंने उसका बोझ हल्का करने में सहारा दिया था। उसका पता और नंबर अभी भी मेरे पास है..फिलहाल वह बिटिया एक शहर में दबंग वाणिज्य कर अधिकारी है। ऐसे बच्चे ही भँवरकुँआ में भविष्य के भँवर से पार पाने का संघर्ष करते हैं।
अब प्रायः सभी अपना अपना डेरा-डकूला समेटकर घर लौट चुके हैं। इन दो सालों में उनके अभिभावकों ने पाँच से दस लाख खर्च किए। कइयों ने जमीन गिरवी की, तो कई एजुकेशन लोन लेकर बैठे हैं। नौकरियां हैं कि दूर-दूर तक नजर नहीं आतीं। कोरोना ने प्रायवेट सेक्टर की आधे से ज्यादा नौकरियाँ लील लीं। जो हैं वे तीस से पचास परसेंट की पगार पर वर्कफ्राम होम कर रहे हैं।
युवाओं और छात्रों को लेकर हर सरकारें एक सी दगाबाज हैं। उनके चुनावी वायदों में नौकरियों की बरसात रहती है पर सत्ता में आने के बाद युवा फिर उसी रेगिस्तान के बियावान टीले पर खड़ा मिलता है। 2018 में कमलनाथ की सरकार आई तो लगा कि युवाओं को लेकर यह गंभीर होगी.. क्योंकि कि भाजपा के सत्ता पलट में युवाओं की बड़ी भागीदारी थी।.लेकिन कमलनाथ सरकार और उसके ज्यादातर मंत्री गजनवी अंदाज में कूटने और तबादलों के एवज में उगाही करने में लग गए। पीएससी की जो जगह थीं भी उसे भी टालते गए। और अंततः पिछड़ों के सत्ताइस परसेंट आरक्षण का वह सियासी पैतरा भाँजा कि सभी नौकरियां वहीं फँस गईं। कमलनाथ को यह मालूम था कि यह आरक्षण संविधान सम्मत नहीं है और कोर्ट से स्थगन मिल जाएगा।
कमलनाथ सरकार को युवाओं की हाय लगी और वह कोरोना काल में ही भस्ममीभूत हो गई। अब आई शिवराज सरकार, तो उपचुनाव के चक्कर में वह भी हाईकोर्ट में तारीख पर तारीख लेते हुए चल रही है। इस 9 दिसम्बर को सुनवाई है..देखे फैसला का पथप्रशस्त होता है कि फिर कोई नई तारीख मिलती है। नवंबर 2018 में जब से भाजपा सरकार गई तब से आज तक एक भी नौकरी नहीं निकली। प्रायवेट सेक्टर में कोरोना इफेक्ट और सरकारी सेक्टर में रिजर्वेशन का पेंच। जो नौकरी में हैं वे बिना प्रमोशन के रिटायर्ड हो रहे हैं। और बच्चे इन्हीं दो पहलुओं में फँसकर अवसाद की स्थिति में पहुंच रहे हैं। मैं हूँ न..कहने वाले विरोधियों पर बुल्डोजर चढ़ाने में फँदे हैं।
वास्तव इन युवाओं का कोई घनी-घोरी नहीं जो इनकी चिंता करे। मध्यप्रदेश में आखिरी बार पटवारियों की भर्ती हुई थी तब से भरतीतंत्र ठहरा हुआ है। वह पटवारी की नौकरी ही इतने महत्व की थी कि तब यूपीएससी, पीएससी की तैयारी करवाने वाले कोचिंग संस्थान, पटवारी कोचिंग में बदल गए थे। नौ हजार पदों के लिए 13 लाख अर्जियां पड़ी थीं। उस भर्ती में नब्बे फीसद वही बच्चे थे जो कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर का ख्वाब पाले मेहनत कर रहे थे। अब वे बच्चे पछता रहे हैं जो कलेक्टरी के फेर में पटवारी परीक्षा को नहीं चुना।
पीएससी, पुलिस व कुछ नौकरियों को अलग कर दें तो पिछले सत्रह साल से यहां संविदा कर्मी संस्कृति चल रही है। यानी कि सबसे बडे़ नियोक्ता शिक्षा विभाग समेत सेवा प्रदाता व प्रशासन के क्षेत्र में कोई पाँच लाख के आसपास ऐसी संख्या है जो रोजनदारी, संविदा और टोकन मानदेय पर चल रही है। सरकारी क्षेत्र की उच्चशिक्षा तो लगभग पूरी तरह अतिथि विद्वानों पर निर्भर है। बड़ी संख्या में ऐसे महाविद्यालय हैं जिनके विभागाध्यक्ष संविदा कर्मी या अतिथि विद्वान हैं। विश्विविद्यालयों की स्थिति तो ऐसी है कि जितने विभाग उतने नियमित प्राध्यापक और वे भी मूलविभाग का काम छोड़कर पैसा कमाने और अधकचरे स्किल के बेरोजगार तैयार करने वाले विभाग संचालित कर रहे हैं। स्वास्थ्य, पंचायत और भी कई ऐसे सेवा प्रदाता विभाग हैं जिन्हें दिहाड़ी के नौकर चला रहे हैं और जो नियमित हैं वे उनकी नौकरी खा जाने का भय दिखाकर हुक्म चला रहे हैं।
दिहाड़ी, संविदा कर्मी, अतिथि विद्वान या जो अन्यनाम वाले अनियमित पद हैं जो काम करते हैं व उसकी एवज में जो नियमित हैं उनकी वेतन का फासला 15 बनाम 100 का है। जो अतिथि विद्वान कालेज में 15 हजार रुपये महीने में पढ़ाता है वही काम करने वाले नियमित प्राध्यापक को लगभग 1लाख रुपए महीने और फोकट की कई और सुविधाएं मिल जाती हैं। कई ऐसे हैं जो दिहाड़ी करते हुए ओवरएज हो गए, कहीं लायक नहीं बचे।अब तो इनकी शादी में भी मुश्किल होने लगी है। जबकि इनमें नब्बे प्रतिशत ऐसे हैं जो पीएचडी या एमफिल तो किए ही है। यही फ्रस्टेट पीढ़ी कालेज के बच्चों को पढा रही है।
सरकार नियमित भर्तियां इसलिए नहीं करती कि जब 15 हजार के गुलामों से काम चलता है तो 1 लाख वाले क्यों भरें। स्कूली शिक्षा में नधे हुए लड़कों को तो स्किल्ड लेबर जितना भी मेहनताना नहीं मिलता। हम सरकार पर भरोसा करते हैं कि वह अन्याय रोकेगी। यहां तो उल्टा वही दमन और शोषण कर रही है। कमाल की बात ये कि कोई इन अभागे लोगों के बारे में बोलने को तैय्यार भी नहीं। मीडिया भी इन्हें हाशिये पर रखता है। यह हाल उन युवाओं का है जो पढ़लिखकर कैसे भी नौकरी पाए हुएं हैं। जो बेरोजगार हैं उनकी संख्या इनसे दसबीस गुना ज्यादा ही होगी।
जब सरकार ही शोषण में जुटी है तो निजी क्षेत्र में कितना भीषण शोषण चल रहा है मत पूछिये। पटवारी पद के लिए अर्जी देने वालों में एनआईटी से निकले इंजीनियर व एमबीए के लड़के भी हैं। कभी इन्होंने उत्साह से पैकज पकड़ा था। पैकेज वाली कंपनियां छंटनी कर रही हैं व कम वेतन पर काम करने को मजबूर कर रही हैं। जो काम कर रहे हैं उनकी जवानी और प्रतिभा ऐसे निचुड़ रही है जैसे चरखी में गन्ना टटेर बनके निकलता है। जहाँ तक याद है 2008 से प्रदेश में ग्लोबल इनवेस्टर्स मीट हर अँतरे साल हो रही हैं। मुझे लगता है कि पूँजीपतियों को लुभाने में अब तक जितने अरब खर्च हुए उतने का पूँजीनिवेश नहीं आया। सरकार से पूछा जाना चाहिए कि कितने युवाओं को पूँजीनिवेश से खड़े उद्योगों में रोजगार मिला।
सरकार ने युवाओं के शोषण का एक और रास्ता खोल दिया है। यह आउटसोर्सिंग का मकड़जाल. है। सेवा क्षेत्र में यह अमरबेल की तरह फैल रहा है। एक दिन एक चैनल की डिबेट में आपातकालीन. स्वास्थ्य सेवा डायल 108 के ड्रायवरों का मुद्दा आया। मैं भी था उस बहस में। ड्रायवरों का प्रतिनिधि अपनी बात रखते हुए रो पड़ा। बारह घंटे की नौकरी, तनख्वाह 8 हजार महीना, वह भी हर महीने नहीं। न पीएफ न अन्य सुविधाएं। नौकरी से निकालने की धमकी। कहाँ चले जाएं बीबी बच्चों के साथ प्राणांत करने। कोई सुनने वाला नहीं। मध्यप्रदेश में डायल 108 जो कंपनी चलाती है वह इतनी अमीर है कि विदेशी बैंकों में बड़ा धन जमा कर रखा है। पैराडाइज लीक्स में इसका नाम है और यह भी सन्दर्भित है कि इस कंपनी में बड़े नेता की भागीदारी है। जितनी भी आउटसोर्सिंग की एजेंसियां हैं आप पता लगा लीजिए उसके पीछे कोई न कोई नेता या नौकरशाह खड़ा मिलेगा। ये अकूत धन कमाके विदेशों में गाड़ रहे हैं पर जिनको काम पर रखा है उनका खून पीने और माँस भूनकर खाने के अलावा जितना शोषित कर सकते हैं कर रहे हैं।
श्रम विभाग को नखदंत विहीन कर दिया गया है। और ये गरीब उच्च न्यायालयों में जाने का सामर्थ्य नहीं रखते इसलिए पिस रहे हैं। निजी सुरक्षा एजेंंसियों का गोरखधंधा और भीषण है। 6 हजार महीने की पगार पर बारह घंटे की ड्यूटी। जिन सरकारी गैर सरकारी विभागों से अनुबंध होता है उससे 15 से 20 हजार महीने में तय होता है लेकिन सुरक्षा गार्ड के हिस्से आता है महज छः हजार। बाँकी मिलबँट के हजम।
गैरबराबरी, शोषण के चक्रव्यूह में हमारी युवाशक्ति फँसी है। राजनीतिक दलों के पास इन्हें छोड़कर दुनिया भर के मुद्दे हैं। मैं इस मामले में ..कबिरा हाय गरीब की..पर विश्वास नहीं करता। मरने के पहले जीते जी विप्लव की उम्मीद करता हूँ। एक तूफान उठना चाहिए युवाओं की ओर से। यह काम नेता मथानियों की जयजयकार करने वाले नहीं कर सकते। ये चिंगारी युवाशक्ति के घर्षण से उठनी चाहिए। बिना रोये बच्चे को भी दूध नहीं मिलता ये तो हमारे हिस्से का छीन और छान के पी रहे हैं। मैं उम्मीद करता हूँ कि मेरी बात भले ही चंद युवाओं तक पहुंचे लेकिन इसे बड़े दायरे तक फैलाना होगा। एक समझ बने तो सामूहिकता भी आएगी, संगठन भी होगा और प्रतिरोध का उद्घोष भी। मैं अपनी उम्मीद पर कायम हूँ। आगे आओं मेरे प्यारो।
एक बार फिर दुष्यंतजी को याद करते हैं-
इन अंधी सुरंगों में बैठे हैं तो लगता है,
बाहर भी अँधेरों की बदशक्ल नकल होगी।
सियाही से इरादों की तस्वीर बनाते हो.
गर खूँ से लिखोगे तो तस्वीर असल होगी।।
जयराम शुक्ल।
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