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घटना की सूचना मिलने पन्ना टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा, डिप्टी डायरेक्टर जरांडे ईश्वर रामहरि एवं वन्यप्राणी चिकित्सक संजीव कुमार गुप्ता सहित तमाम अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का जायजा लिया। बाघिन की मौत की जांच शुरू कर दी गई है। उसके शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। दीपावली के त्यौहार के दिन सड़क दुर्घटना में बाघिन की असमय मौत होने की दुखद खबर आने के बाद से पन्ना टाइगर रिजर्व में शोक की लहर व्याप्त है। पार्क के अधिकारियों के घटना स्थल पर मौजूद होने के कारण उनसे सम्पर्क नहीं हो सका। इस कारण सड़क दुर्घटना के संबंध में विस्तृत एवं आधिकारिक तौर पर जानकारी नहीं मिल सकी।
सूत्रों से पता चला है, सड़क दुर्घटना का शिकार हुई बाघिन का सिर बुरी तरह से कुचलने के कारण उसकी मौत हुई है। मृत बाघिन की पहचान बाघिन पी-235 की संतान के रूप में होने की चर्चा है। उल्लेखनीय है कि, पन्ना में लगभग 11 माह के अंदर बाघ की मौत की यह छठवीं घटना है। कुछ समय पूर्व पन्ना की केन नदी में गिरे एक युवा बाघ का अज्ञात शिकारी सिर समेत अन्य अंग काटकर ले गए थे। हालांकि इस मामले का खुलासा हो चुका और शिकारी जेल में हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरुवार 5 नवंबर को ट्रक क्रमांक एमपी-16-एच-1831 सीमेन्ट लेकर मैहर से भिण्ड के लिए निकला था। पन्ना से छतरपुर जाने पर घाट शुरू होने के पूर्व सड़क किनारे मोड़ पर प्रसिद्ध भैरव मंदिर पड़ता है, जहां सुरक्षित यात्रा के लिए मान्यता अनुसार राहगीर सिर झुकाते और भगवान को प्रसाद चढ़ाते हैं। दोपहर लगभग 2:30 बजे जब उक्त ट्रक हादसों की घाटी बन चुकी मड़ला घाटी पर पहुंचा तो आगे का रास्ता तय करने के पूर्व ड्राइवर अनिल अहिरवार पिता अजुद्दी अहिरवार 25 वर्ष निवासी ग्राम लहेरापुरवा थाना नौगांव जिला छतरपुर ने भैरव टेक मंदिर के सामने ट्रक रोक दिया। ट्रक का क्लीनर/हेल्पर तुरंत नीचे उतरा और मंदिर में प्रसाद चढ़ाने के लिए चला गया। क्लीनर को थोड़ा समय लगते देख ड्रायवर अनिल ट्रक को साइड में व्यवस्थित तरीके से खड़ा करने के बाद स्वयं भी नीचे उतर आया और मंदिर में माथा टेकने चला गया।
तभी ढलान पर खड़ा ट्रक अचानक बगैर स्टार्ट किए और बिना ड्राइवर के ही चल पड़ा। ट्रक को रोकने के लिए अनिल दौड़कर उस पर चढ़ तो गया लेकिन तब तक घाटी की सुरक्षा दीवार को तोड़कर उसका अगला हिस्सा हवा में लटक गया। ट्रक को गहरी खाई में गिरते देख ड्राइवर अनिल अहिरवार ने अंतिम क्षणों में अपनी जान बचाने के लिए सड़क की तरफ छलांग लगा दी। उधर, पलक झपकते ही तेज धमाके जैसी तेज़ आवाज के साथ ट्रक करीब 100 गहरी खाई में समा गया। धड़कने रोक देने और मौत के ख़ौफ़ की सिहरन पैदा कर देने वाली इस भीषण दुर्घटना में बाल-बाल बचा ड्राइवर, हेल्पर एवं आसपास मौजूद प्रत्यक्षदर्शी कुछ देर के लिए सन्न रह गए। थोड़ी देर बाद खुद को संभालने के उपरान्त जब गहरी खाई में गिरे ट्रक को देखा तो उसकी बॉडी और चेचिस अलग हो चुकी थी। ट्रक की बॉडी के परखच्चे उड़ने से वह पूरी कबाड़ में तब्दील हो चुका है।

इस अवसर पर मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि एनएमडीसी लम्बे समय से जिले में हीरे का उत्खनन कर रही है। यह एशिया महाद्वीप की एक मात्र ऐसी खदान है जो पूरी तरह आधुनिक, तकनीकी संचालित है। इस परियोजना द्वारा खदान क्षेत्र के आसपास बहुत सारे समाज सेवा के कार्य किए जाते हैं। समीप के गांव में शिक्षा, पेयजल, परिवहन आदि की सुविधाएं दी जा रहीं हैं। इसके अलावा इनके द्वारा जिला चिकित्सालय में निरंतर सहयोग प्रदान किया जा रहा है। आगे भी अन्य सहयोग प्रदान करते रहेंगे। मंत्री श्री सिंह ने कहा कि परियोजना प्रबंधक द्वारा मैंने चर्चा करते हुए कहा है कि नगर मुख्यालय पर कोई ऐसा काम किया जाए जिससे जिला मुख्यालय में पहचान बन सके। इसके लिए धरम सागर तालाब के चारों ओर पाथ-वे बनाने के संबंध में कहा गया है। इस पर परियोजना प्रबंधक द्वारा कार्य कराने का आश्वासन दिया गया है।
कार्यक्रम में हीरा खनन परियोजना के मुख्य महाप्रबंधक एनएमडीसी एस.के. जैन ने कहा कि परियोजना को आगे संचालित रखने की स्वीकृति प्राप्त हो जाने पर यह परियोजना निरंतर सामाजिक कार्यों में अपना सहयोग करती रहेगी। सम्पन्न हुए कार्यक्रम में वरिष्ठ प्रबंधक भूपेन्द्र कुमार द्वारा उपस्थितों के प्रति विनम्र आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम में हीरा खनन परियोजना के श्रमिक संघ के पदाधिकारी समरबहादुर सिंह, भोला प्रसाद सोनी, सोमेन्द्र प्रताप सिंह, सिविल सर्जन डाॅ. व्ही.एस. उपाध्याय, डाॅ. गुंजन सिंह, अन्य चिकित्सकगण, पत्रकारगण एवं चिकित्सा विभाग के अधिकारी, कर्मचारी उपस्थित रहे।


प्राप्त जानकारी के अनुसार पन्ना के बाहरी इलाके में स्थित एनएमडीसी कॉलोनी के समीप रहने वाले लखन यादव को कृष्णा कल्याणपुर पटी उथली हीरा खदान क्षेत्र में 14.98 कैरेट वजन का हीरा मिला है। जबकि ग्राम जरुआपुर निवासी दिलीप कुमार मिस्त्री को जरुआपुर में ही निजी भूमि पर 7.44 कैरेट वजन का हीरा मिला है। दोनों ही हीरे उज्जवल क़िस्म के बताए जा रहे हैं। अचानक मालामाल हुए दोनों किसानों के चेहरे उनके हीरों की तरह ख़ुशी से चमक रहे हैं। हीरा मिलने को ईश्वर की अनुकम्पा बताते हुए वे कहते हैं कि वर्षों पहले उन्होंने जो सपना देखा था वह अब पूरा हो चुका है।

इसके आलावा कंकाल के ही पास नायलॉन के काले रंग जूते और सफेद शर्ट व तौलिया रखी हुई पाई गई है। पुलिस द्वारा मर्ग कायम कर शव की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। मड़ला थाना प्रभारी के द्वारा आसपास के थानों को शव मिलने के संबंध में सूचना भेजी गई है। ताकि इस तरह का कोई व्यक्ति अगर गुम हो तो वह दस्तयाब हो सके। वहीं कंकाल का फोटो जारी करते हुए मृतक की पहचान के मड़ला थाना पुलिस अथवा पुलिस कंट्रोल रूम पन्ना को सूचना देने की आमजन से अपील की गई है।

अपुष्ट सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सुसाइड नोट में 31 अक्टूबर 2020 की दिनांक दर्ज है। हरिशन्द्र ने इसमें उन तीन व्यक्तियों के नाम और मोबाइल नंबर लिखें जिनसे उसने ब्याज़ पर रुपए उधार लिए थे। साथ ही रुपयों के लेन-देन के हिसाब-किताब का भी उल्लेख किया है। चर्चा है कि उक्त तीनों व्यक्तियों ने ब्याज पर उधार रुपए देने से पूर्व हरिश्चन्द्र से उसकी कई खाली चेकें हस्ताक्षर कराकर अपने पास रख ली थीं। काफी पहले ब्याज़ समेत कर्ज की अदायगी करने के बाबजूद सूदखोर बैंक में चेक लगाने की धमकी देकर उसे मानसिक रूप से लगातार प्रताड़ित कर रहे थे। परिणामस्वरूप रोज-रोज की इस ब्लैकमेलिंग से परेशान होकर हरिश्चन्द्र आत्महत्या करने को मजबूर हो गया।
उल्लेखनीय है कि पन्ना जिला मुख्यालय समेत आंचलिक क्षेत्रों में सक्रिय सूदखोर बिना किसी वैध लाइसेंस के मनमाने ब्याज जमकर कर्ज बांट रहे हैं। इनके कर्ज के कुचक्र में फंसकर सैंकड़ों लोग आर्थिक रूप से कंगाल हो चुके हैं या फिर अपनी चल-अचल सम्पत्ति गँवा चुके हैं। कुछ ऐसे भी लोग हैं जो इनकी आए दिन की धमकियों से तंग आकर ख़ामोशी से मौत को गले लगा चुके हैं। सूदखोरी के इस धंधे में दबंग, आपराधिक तत्व अथवा पहुंच वाले लोग शामिल हैं। परिणामस्वरूप इनसे जरूरत पर उधार रुपए लेने वाले लोग इनके खिलाफ मुँह खोलने से भी डरते हैं। अपवाद स्वरूप कभी-कभार इनकी ज्यादती/प्रताड़ना से जुड़ा कोई प्रकरण सामने आता भी है तो वह ऐनकेन-प्रकारेण रफादफा हो जाता है। इसलिए आने वाले दिनों में यह देखना काफी महत्वपूर्ण होगा कि हरिश्चन्द्र की मौत के लिए जिम्मेदार सूदखोरों के खिलाफ पन्ना पुलिस क्या कार्रवाई करती है और कब तक करती है।

