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“गैरबराबरी, शोषण के चक्रव्यूह में हमारी युवा शक्ति फँसी है। राजनीतिक दलों के पास इन्हें छोड़कर दुनिया भर के मुद्दे हैं”

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सांकेतिक फोटो।

युवाओं के आक्रोश को समय रहते समझिए!

ज्वलंत/जयराम शुक्ल (वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तम्भकार) संपर्कः 8225812813

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इंदौर  के भँवर कुआँ इलाके में इन दिनों भुतहा सन्नाटा तो नहीं पर वह चहल-पहल भी गायब है जो सालभर पहले रहा करती थी। यह चहल-पहल उन मेधावी छात्रों की होती थी जो यूपीएससी, पीएससी में अपना भविष्य तजबीजते थे। दो साल से कोई नौकरी ही नहीं निकल रही और फिलहाल कोरोना एक मकम्मिल बहाना तो है ही। कोई एक लाख से ज्यादा बच्चे यहां विभिन्न कोचिंग संस्थानों मे पढ़ा करते हैं व विषय विशेषज्ञों से मार्गदर्शन लेते हैं। इंदौर की इकानामी में इन बच्चों का वैसा ही योगदान रहता था जैसा कि राजस्थान के कोटा में। ऐसे करियरिस्ट छात्रों के चलते इंदौर मध्यभारत का सबसे बड़ा शैक्षणिक केंद्र बनकर उभरा है। यहां वे मध्यवर्गीय, निम्न मध्यवर्गीय छात्र आते हैं जिनकी हैसियत दिल्ली के मुखर्जी नगर में रहकर बाजीराम जैसे बड़े संस्थानों में पढ़ने की नहीं रहती।
इंदौर के भँवरकुआँ क्षेत्र में सबसे बड़ी हिस्सेदारी हमारे विंध्यक्षेत्र के बच्चों की होती है। पिछले साल तक रेवांचल एक्सप्रेस में ऐसे प्रायः कई बच्चे मिल जाते थे जिनके पिट्ठूबैग में किताबें और सिर पर सीधा-पिसान की बोरियां लदी रहती थीं। वह दृश्य मुझे भूला नहीं जिसमें एक बच्ची सिरपर पचीस किलो की बोरी और पीठपर किताबों से भरा बैग लिए हबीबगंज स्टेशन की सीढ़ियां चढ़ते हुए डगमगा गई थी। मैंने उसका बोझ हल्का करने में सहारा दिया था। उसका पता और नंबर अभी भी मेरे पास है..फिलहाल वह बिटिया एक शहर में दबंग वाणिज्य कर अधिकारी है। ऐसे बच्चे ही भँवरकुँआ में भविष्य के भँवर से पार पाने का संघर्ष करते हैं।
अब प्रायः सभी अपना अपना डेरा-डकूला समेटकर घर लौट चुके हैं। इन दो सालों में उनके अभिभावकों ने पाँच से दस लाख खर्च किए। कइयों ने जमीन गिरवी की, तो कई एजुकेशन लोन लेकर बैठे हैं। नौकरियां हैं कि दूर-दूर तक नजर नहीं आतीं। कोरोना ने प्रायवेट सेक्टर की आधे से ज्यादा नौकरियाँ लील लीं। जो हैं वे तीस से पचास परसेंट की पगार पर वर्कफ्राम होम कर रहे हैं।
युवाओं और छात्रों को लेकर हर सरकारें एक सी दगाबाज हैं। उनके चुनावी वायदों में नौकरियों की बरसात रहती है पर सत्ता में आने के बाद युवा फिर उसी रेगिस्तान के बियावान टीले पर खड़ा मिलता है। 2018 में कमलनाथ की सरकार आई तो लगा कि युवाओं को लेकर यह गंभीर होगी.. क्योंकि कि भाजपा के सत्ता पलट में युवाओं की बड़ी भागीदारी थी।.लेकिन कमलनाथ सरकार और उसके ज्यादातर मंत्री गजनवी अंदाज में कूटने और तबादलों के एवज में उगाही करने में लग गए। पीएससी की जो जगह थीं भी उसे भी टालते गए। और अंततः पिछड़ों के सत्ताइस परसेंट आरक्षण का वह सियासी पैतरा भाँजा कि सभी नौकरियां वहीं फँस गईं। कमलनाथ को यह मालूम था कि यह आरक्षण संविधान सम्मत नहीं है और कोर्ट से स्थगन मिल जाएगा।
कमलनाथ सरकार को युवाओं की हाय लगी और वह कोरोना काल में ही भस्ममीभूत हो गई। अब आई शिवराज सरकार, तो उपचुनाव के चक्कर में वह भी हाईकोर्ट में तारीख पर तारीख लेते हुए चल रही है। इस 9 दिसम्बर को सुनवाई है..देखे फैसला का पथप्रशस्त होता है कि फिर कोई नई तारीख मिलती है। नवंबर 2018 में जब से भाजपा सरकार गई तब से आज तक एक भी नौकरी नहीं निकली। प्रायवेट सेक्टर में कोरोना इफेक्ट और सरकारी सेक्टर में रिजर्वेशन का पेंच। जो नौकरी में हैं वे बिना प्रमोशन के रिटायर्ड हो रहे हैं। और बच्चे इन्हीं दो पहलुओं में फँसकर अवसाद की स्थिति में पहुंच रहे हैं। मैं हूँ न..कहने वाले विरोधियों पर बुल्डोजर चढ़ाने में फँदे हैं।
वास्तव इन युवाओं का कोई घनी-घोरी नहीं जो इनकी चिंता करे। मध्यप्रदेश में आखिरी बार पटवारियों की भर्ती हुई थी तब से भरतीतंत्र ठहरा हुआ है। वह पटवारी की नौकरी ही इतने महत्व की थी कि तब यूपीएससी, पीएससी की तैयारी करवाने वाले कोचिंग संस्थान, पटवारी कोचिंग में बदल गए थे। नौ हजार पदों के लिए 13 लाख अर्जियां पड़ी थीं। उस भर्ती में नब्बे फीसद वही बच्चे थे जो कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर का ख्वाब पाले मेहनत कर रहे थे। अब वे बच्चे पछता रहे हैं जो कलेक्टरी के फेर में पटवारी परीक्षा को नहीं चुना।
पीएससी, पुलिस व कुछ नौकरियों को अलग कर दें तो पिछले सत्रह साल से यहां संविदा कर्मी संस्कृति चल रही है। यानी कि सबसे बडे़ नियोक्ता शिक्षा विभाग समेत सेवा प्रदाता व प्रशासन के क्षेत्र में कोई पाँच लाख के आसपास ऐसी संख्या है जो रोजनदारी, संविदा और टोकन मानदेय पर चल रही है। सरकारी क्षेत्र की उच्चशिक्षा तो लगभग पूरी तरह अतिथि विद्वानों पर निर्भर है। बड़ी संख्या में ऐसे महाविद्यालय हैं जिनके विभागाध्यक्ष संविदा कर्मी या अतिथि विद्वान हैं। विश्विविद्यालयों की स्थिति तो ऐसी है कि जितने विभाग उतने नियमित प्राध्यापक और वे भी मूलविभाग का काम छोड़कर पैसा कमाने और अधकचरे स्किल के बेरोजगार तैयार करने वाले विभाग संचालित कर रहे हैं। स्वास्थ्य, पंचायत और भी कई ऐसे सेवा प्रदाता विभाग हैं जिन्हें दिहाड़ी के नौकर चला रहे हैं और जो नियमित हैं वे उनकी नौकरी खा जाने का भय दिखाकर हुक्म चला रहे हैं।
दिहाड़ी, संविदा कर्मी, अतिथि विद्वान या जो अन्यनाम वाले अनियमित पद हैं जो काम करते हैं व उसकी एवज में जो नियमित हैं उनकी वेतन का फासला 15 बनाम 100 का है। जो अतिथि विद्वान कालेज में 15 हजार रुपये महीने में पढ़ाता है वही काम करने वाले नियमित प्राध्यापक को लगभग 1लाख रुपए महीने और फोकट की कई और सुविधाएं मिल जाती हैं। कई ऐसे हैं जो दिहाड़ी करते हुए ओवरएज हो गए, कहीं लायक नहीं बचे।अब तो इनकी शादी में भी मुश्किल होने लगी है। जबकि इनमें नब्बे प्रतिशत ऐसे हैं जो पीएचडी या एमफिल तो किए ही है। यही फ्रस्टेट पीढ़ी कालेज के बच्चों को पढा रही है।
सरकार नियमित भर्तियां इसलिए नहीं करती कि जब 15 हजार के गुलामों से काम चलता है तो 1 लाख वाले क्यों भरें। स्कूली शिक्षा में नधे हुए लड़कों को तो स्किल्ड लेबर जितना भी मेहनताना नहीं मिलता। हम सरकार पर भरोसा करते हैं कि वह अन्याय रोकेगी। यहां तो उल्टा वही दमन और शोषण कर रही है। कमाल की बात ये कि कोई इन अभागे लोगों के बारे में बोलने को तैय्यार भी नहीं। मीडिया भी इन्हें हाशिये पर रखता है। यह हाल उन युवाओं का है जो पढ़लिखकर कैसे भी नौकरी पाए हुएं हैं। जो बेरोजगार हैं उनकी संख्या इनसे दसबीस गुना ज्यादा ही होगी।
जब सरकार ही शोषण में जुटी है तो निजी क्षेत्र में कितना भीषण शोषण चल रहा है मत पूछिये। पटवारी पद के लिए अर्जी देने वालों में एनआईटी से निकले इंजीनियर व एमबीए के लड़के भी हैं। कभी इन्होंने उत्साह से पैकज पकड़ा था। पैकेज वाली कंपनियां छंटनी कर रही हैं व कम वेतन पर काम करने को मजबूर कर रही हैं। जो काम कर रहे हैं उनकी जवानी और प्रतिभा ऐसे निचुड़ रही है जैसे चरखी में गन्ना टटेर बनके निकलता है। जहाँ तक याद है 2008 से प्रदेश में ग्लोबल इनवेस्टर्स मीट हर अँतरे साल हो रही हैं। मुझे लगता है कि पूँजीपतियों को लुभाने में अब तक जितने अरब खर्च हुए उतने का पूँजीनिवेश नहीं आया। सरकार से पूछा जाना चाहिए कि कितने युवाओं को पूँजीनिवेश से खड़े उद्योगों में रोजगार मिला।
सरकार ने युवाओं के शोषण का एक और रास्ता खोल दिया है। यह आउटसोर्सिंग का मकड़जाल. है। सेवा क्षेत्र में यह अमरबेल की तरह फैल रहा है। एक दिन एक चैनल की डिबेट में आपातकालीन. स्वास्थ्य सेवा डायल 108 के ड्रायवरों का मुद्दा आया। मैं भी था उस बहस में। ड्रायवरों का प्रतिनिधि अपनी बात रखते हुए रो पड़ा। बारह घंटे की नौकरी, तनख्वाह 8 हजार महीना, वह भी हर महीने नहीं। न पीएफ न अन्य सुविधाएं। नौकरी से निकालने की धमकी। कहाँ चले जाएं बीबी बच्चों के साथ प्राणांत करने। कोई सुनने वाला नहीं। मध्यप्रदेश में डायल 108 जो कंपनी चलाती है वह इतनी अमीर है कि विदेशी बैंकों में बड़ा धन जमा कर रखा है। पैराडाइज लीक्स में इसका नाम है और यह भी सन्दर्भित है कि इस कंपनी में बड़े नेता की भागीदारी है। जितनी भी आउटसोर्सिंग की एजेंसियां हैं आप पता लगा लीजिए उसके पीछे कोई न कोई नेता या नौकरशाह खड़ा मिलेगा। ये अकूत धन कमाके विदेशों में गाड़ रहे हैं पर जिनको काम पर रखा है उनका खून पीने और माँस भूनकर खाने के अलावा जितना शोषित कर सकते हैं कर रहे हैं।
श्रम विभाग को नखदंत विहीन कर दिया गया है। और ये गरीब उच्च न्यायालयों में जाने का सामर्थ्य नहीं रखते इसलिए पिस रहे हैं। निजी सुरक्षा एजेंंसियों का गोरखधंधा और भीषण है। 6 हजार महीने की पगार पर बारह घंटे की ड्यूटी। जिन सरकारी गैर सरकारी विभागों से अनुबंध होता है उससे 15 से 20 हजार महीने में तय होता है लेकिन सुरक्षा गार्ड के हिस्से आता है महज छः हजार। बाँकी मिलबँट के हजम।
गैरबराबरी, शोषण के चक्रव्यूह में हमारी युवाशक्ति फँसी है। राजनीतिक दलों के पास इन्हें छोड़कर दुनिया भर के मुद्दे हैं। मैं इस मामले में ..कबिरा हाय गरीब की..पर विश्वास नहीं करता। मरने के पहले जीते जी विप्लव की उम्मीद करता हूँ। एक तूफान उठना चाहिए युवाओं की ओर से। यह काम नेता मथानियों की जयजयकार करने वाले नहीं कर सकते। ये चिंगारी युवाशक्ति के घर्षण से उठनी चाहिए। बिना रोये बच्चे को भी दूध नहीं मिलता ये तो हमारे हिस्से का छीन और छान के पी रहे हैं। मैं उम्मीद करता हूँ कि मेरी बात भले ही चंद युवाओं तक पहुंचे लेकिन इसे बड़े दायरे तक फैलाना होगा। एक समझ बने तो सामूहिकता भी आएगी, संगठन भी होगा और प्रतिरोध का उद्घोष भी। मैं अपनी उम्मीद पर कायम हूँ। आगे आओं मेरे प्यारो।
एक बार फिर दुष्यंतजी को याद करते हैं-
इन अंधी सुरंगों में बैठे हैं तो लगता है,
बाहर भी अँधेरों की बदशक्ल नकल होगी।
सियाही से इरादों की तस्वीर बनाते हो.
गर खूँ से लिखोगे तो तस्वीर असल होगी।
जयराम शुक्ल।
* डिस्क्लेमर – इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति Radar news उत्तरदायी नहीं है। इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार Radar news के नहीं हैं तथा Radar news उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

“गिद्धों” पर अध्ययन के लिए देश में पहली बार की जा रही रेडियो टैगिंग

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पन्ना टाइगर रिजर्व में ऊँचे पहाड़ पर झुंड में बैठे गिद्ध धूप सेंकते हुए।

पन्ना टाइगर रिजर्व में शुरू हुआ टैगिंग का कार्य

डब्ल्यूआईआई (देहरादून) से आई विशषज्ञों की टीम

सभी प्रजातियों के 25 गिद्धों की रेडियो टैगिंग का है लक्ष्य

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश का पन्ना टाइगर रिजर्व न सिर्फ बाघों बल्कि गिद्धों के लिए भी विश्व प्रसिद्ध है। पर्यावरण के सफाई कर्मी कहलाने वाले गिद्धों पर अध्ययन के लिए यहाँ बाघों की तर्ज पर उनकी भी रेडियो टैगिंग की जा रही है। देश में गिद्धों की रेडियो टैगिंग का यह अनूठा और महत्वपूर्ण प्रयोग पहली बार हो रहा है। इसका उद्देश्य गिद्धों के रहवास, प्रवास के मार्ग एवं पन्ना लेण्डस्केप में उनकी उपस्थिति आदि की जानकारी जुटाना है। जिससे भविष्य में इनके बेहतर प्रबंधन में मदद मिल सके। गिद्धों की रेडियो टैगिंग का कार्य भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून से आए विशेषज्ञों की टीम की देखरेख में किया जा रहा है।
रेडियो टैगिंग हेतु गिद्धों को पकड़ने के लिए पन्ना टाइगर रिजर्व के झालर नामक स्थान में लगाया गया विशाल पिंजरा।
आसमान में ऊँची उड़ान भरते हुए मरे हुए जानवर की गंध सूंघ लेने और उसे देख लेने की गजब की क्षमता वाले पक्षी गिद्ध के प्रवास मार्ग हमेशा से ही वन्यप्राणी प्रेमियों के लिये कौतुहल का विषय रहे हैं। गिद्ध न केवल एक प्रदेश से दूसरे प्रदेश बल्कि एक देश से दूसरे देश, मौसम अनुकूलता के हिसाब से प्रवास करते है। गिद्धों के रहवास एवं प्रवास के मार्ग के अध्ययन हेतु पन्ना टाइगर रिजर्व द्वारा भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून के विशेषज्ञों की मदद से गिद्धों की रेडियो टैगिंग का कार्य प्रारंभ किया गया है। जिसके अन्तर्गत पन्ना टाइगर रिजर्व में 25 गिद्धों को रेडियो टैगिंग किया जाएगा। पन्ना में गिद्धों की 7 प्रजातियां पाई जाती है। जिनमें से 4 प्रजातियां पन्ना टाइगर रिजर्व की निवासी प्रजातियां है एवं शेष 3 प्रजातियां प्रवासी हैं।
पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक उत्तम कुमार शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि रेडियो टैगिंग कार्य के लिए भारत सरकार से आवश्यक अनुमति प्राप्त हो चुकी है। रेडियो टैगिंग से गिद्धों के रहवास, प्रवास के मार्ग एवं पन्ना लेण्डस्केप में उनकी उपस्थिति आदि की जानकारी ज्ञात हो सकेगी। जिससे भविष्य में इनके प्रबंधन में काफी मदद मिलेगी। आपने बताया कि पन्ना टाइगर रिजर्व अंतर्गत झालर के घास मैदान में यह कार्य प्रारंभ किया गया है। गिद्धों को पकड़ने के लिए वहाँ एक बड़ा सा पिंजरा बनाया गया है। रेडियो टैगिंग कार्य लगभग एक माह में पूरा होगा। क्षेत्र संचालक ने बताया कि देश में यह पहला अवसर है जब गिद्धों के अध्ययन हेतु उनकी रेडियो टैगिंग का कार्य किया जा रहा है। पार्क प्रबंधन इसकी सफलता को लेकर आश्वस्त है एवं यह प्रयोग सफल हो इस दिशा में सभी संभव प्रयास भी कर रहा है। क्षेत्र संचालक श्री शर्मा ने उम्मीद जताई है कि भविष्य में रेडियो टैगिंग से प्राप्त जानकारी पन्ना टाइगर रिजर्व ही नहीं बल्कि पूरे देश-विदेश में गिद्धों के प्रबंधन के लिए लाभकारी साबित होगी।
गिद्धों की रेडियो टैगिंग के कार्य के लिए पन्ना टाइगर रिजर्व को ही आखिर क्यों चुना गया ? इस सवाल के जवाब में क्षेत्र संचालक उत्तम कुमार शर्मा बताते हैं कि पन्ना में टाइगर रिजर्व में गिद्धों की जितनी प्रजातियां पाई जाती हैं, किसी और टाइगर रिजर्व में उतनी प्रजातियां नहीं मिलती हैं। इसलिए पन्ना का चयन इस प्रयोग के लिए किया गया है। निश्चित ही यह हमारे लिए गौरव और हर्ष विषय है।

सैटेलाइट और मोबाइल टॉवर से होगी ट्रैकिंग

पन्ना टाइगर रिजर्व का हिनौता स्थित प्रवेश द्वार। (फाइल फोटो)
वन्य जीवों और पक्षियों के अनुश्रवण हेतु आमतौर पर उनकी रेडियो टैगिंग की जाती है। ताकि उनकी गतिविधियों और व्यवहार पर सतत नजर रखी जा सके। लेकिन गिद्धों के अध्ययन हेतु देश में पहली बार उनकी रेडियो टैगिंग की जा रही है। पन्ना टाइगर रिजर्व में जारी इस अभिनव प्रयोग की सफलता को सुनिश्चित करने के लिए गिद्धों को काफी उन्नत तकनीक के रेडियो टैग लगाए जा रहे हैं। इससे प्रसारित होने वाले संकेत सैटेलाइट और मोबाइल टॉवर के माध्यम से प्राप्त होंगे। उल्लेखनीय है कि पन्ना टाइगर रिजर्व में पाई जाने वाली सभी सात प्रजातियों के गिद्धों की रेडियो टैगिंग की जा रही है। जिसमें तीन प्रजातियां प्रवासी गिद्धों की हैं। हजारों मील लम्बा और बेहद मुश्किल सफर तय करके प्रत्येक वर्ष पन्ना पहुँचने वाले प्रवासी गिद्धों की ट्रैकिंग भी इस रेडियो टैग के द्वारा सुगमता से संभव होने का दावा पन्ना पार्क प्रबंधन द्वारा किया जा रहा है।

माँग : सरकारी नौकरियों से हटाओ रोक और बंद करो निजीकरण

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प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव के नाम 24 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपते हुए पन्ना जिले के कर्मचारी नेतागण।

तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ ने लंबित मांगों के निराकरण को लेकर किया प्रदर्शन

पन्ना।(www.radarnews.in) अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ तथा प्रांतीय आव्हान पर मध्य प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ जिला शाखा पन्ना के तत्वाधान में कर्मचारी हितैषी लंबित मांगों के निराकरण को लेकर गुरुवार 26 नवम्बर को शासकीय कर्मचारियों के द्वारा पन्ना के संयुक्त कलेक्ट्रेट भवन प्रांगण धरना-प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा गया। इस प्रदर्शन का नेतृत्व बी.पी. परौहा अध्यक्ष मध्य प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ एवं अरूण मिश्रा अध्यक्ष एस.डी.आई.ए. यूनिट पन्ना ने संयुक्त रूप से किया। धरना-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में शामिल रहे कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में जमकर नारेबाजी करते हुए इनके निरकारण को लेकर प्रदेश सरकार के उदासीन रवैये के खिलाफ आक्रोश जताया। अंत में जिले के समस्त संवर्ग के कर्मचारियों/अधिकारियों की लंबित मांगों के निराकरण हेतु प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव मध्यप्रदेश शासन भोपाल के नाम कलेक्टर पन्ना को ज्ञापन सौंपा गया।

ये हैं मुख्य माँगें

सौंपे गए ज्ञापन में शामिल 24 सूत्रीय मांगों में मुख्य रूप से महंगाई भत्ते पर लगाई गई रोक को वापस लेने, सरकारी विभागों में भर्ती पर अघोषित प्रतिबंध हटाये जाने, सरकारी विभागों के निजीकरण पर रोक लगाये जाने, नवीन पेंशन योजना को समाप्त कर पुरानी पेंशन योजना लागू करने, संविदा एवं आउटसोर्स पर रखे कर्मचारियों को नियमित करने तथा आगामी नियमित पदों पर भर्ती की जावे तथा जुलाई 2019 के डी.ए. स्थगन आदेश को समाप्त करने, सातवें केन्द्रीय वेतनमान के एरियर्स की अंतिम किस्त का पूर्ण भुगतान करने की अपील की गई है। ज्ञापन के माध्यम से चेतावनी दी गई है, यदि समय रहते इन मांगों का निराकरण नहीं किया जाता है तो संघ को बाध्य होकर प्रांतीय आव्हान पर आंदोलनात्मक कार्यवाही हेतु बाध्य होना पड़ेगा।

इनकी रही उपस्थिति

ज्ञापन सौपने में प्रमुख रूप से कृष्णपाल सिंह यादव अध्यक्ष संयुक्त मोर्चा, मुरारीलाल थापक संरक्षक मध्य प्रदेश तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ, विनोद मिश्रा महामंत्री भारतीय मजदूर संघ, संतोष मिश्रा अध्यक्ष कर्मचारी कांग्रेस, कमलेश त्रिपाठी महामंत्री शिक्षक कांग्रेस, आर.डी. चौरसिया अध्यक्ष लिपिक वर्गीय संघ, डॉ. आर.के. सोनी, शिव कुमार मिश्रा, राम प्यारे प्रजापति अध्यक्ष अजाक्स, राज किशोर शर्मा, दिनेश मिश्रा, राजेश मिश्रा, महमूद अहमद कुरैशी, मैकूलाल अहिरवार, संतोष प्रजापति, राजेन्द्र सिंह, सूर्य प्रकाश खरे वनरक्षक, नजीम खाॅन, अखिलेश सिंह चौहान, संजय पटेल, बृजेन्द्र पटेल, प्रदीप कुमार गर्ग वनरक्षक, अजय गुप्ता, लखन लाल धूरिया स्थाईकर्मी, भरत लुहरहा, कृष्ण विष्वकर्मा, राकेश बागरी, अजीत खरे, प्रदीप मिश्रा, दिनेश पाण्डेय, गणेश सोनी, सौरभ दुबे, प्रबल प्रताप सिंह, बैकुण्ठराम गर्ग, संतोष तिवारी, हेमराज अग्निहोत्री, धनेष रैकवार, उदय शंकर श्रीवास्तव, राहुल चनपुरिया, सुशील सिंह, हेमेन्द्र शुक्ला, संजय साहू आदि कर्मचारी-अधिकारी शामिल रहे।

संत शिरोमणि नामदेव जयंती पर गाजे-बाजे के साथ निकाली शोभायात्रा

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मोहन्द्रा/पन्ना ।(www.radarnews.in) संत शिरोमणि नामदेव जी महाराज की 750 जयंती मोहन्द्रा ग्राम में धूमधाम के साथ हर्षोल्लास से मनाई गई। इस अवसर पर नामदेव समाज के लोगों द्वारा गाजे-बाजे के साथ गाँव में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। महिलायें सिर में कलश रखकर धार्मिक गीत गाते हुए शोभायात्रा के साथ चल रहीं थी। शोभायत्रा जब गांव की गलियों से निकली तो पूरा पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। इस अवसर पर मानस भवन मंदिर परिसर में आयोजित हुये कार्यक्रम में क्षेत्र के स्वजातीय लोग सम्मलित हुए। कार्यक्रम में गांव के भी गणमान्य लोगों आमंत्रित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान समाज के पिछड़ेपन, नशामुक्ति, दहेजप्रथा और शिक्षा पर जोर देने जैसे विषयों पर चिंतन हुआ।कार्यक्रम में प्रमुख रुप से सीताराम नामदेव, दिनेश नामदेव, पप्पू नामदेव, राजकुमार नामदेव, नत्थू नामदेव, छोटेलाल नामदेव, दीपक नामदेव, अशोक नामदेव, भजन नामदेव, पंकज नामदेव, गणेश नामदेव, राजेंद्र नामदेव, देवप्रकाश नामदेव, जागेश्वर नामदेव, छकोड़ी नामदेव, भगवतदीन नामदेव, अवध नामदेव, राजू नामदेव, सिया नामदेव, क्रोधी नामदेव, इमरतलाल नामदेव, विजय, अमित, आशुतोष, बड्डे, बिरजू नामदेवस बड़ी संख्या में नामदेव समाज के लोग शामिल हुए। कार्यक्रम का सफल मंचसंचालन सियाराम नामदेव ने किया।

ट्रेड यूनियनों ने निकाला मशाल जुलूस, सतना का चप्पा-चप्पा गूंज उठा “इंकलाब” के नारों से

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ट्रेड यूनियन कौंसिल सतना के तत्वावधान में निकाले गए मशाल जुलूस में शामिल विभिन्न ट्रेड यूनियनों के पदाधिकारी एवं सदस्य।

गुरुवार 26 नवंबर को होने वाली राष्ट्रव्यापी हड़ताल के मुद्दों को लेकर जगाई अलख

सतना। (www.radarnews.in) केन्द्र सरकार की जन विरोधी, श्रमिक विरोधी, कर्मचारी विरोधी एवं किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ देश के 10 केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों ने गुरुवार 26 नवंबर को एक दिवसीय आम हड़ताल का ऐलान किया है। राष्ट्रव्यापी हड़ताल में जनमानस की अधिक से अधिक सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित कर इसे पूर्णतः सफल बनाने के उद्देश्य से जिला ट्रेड यूनियन कौंसिल सतना के तत्वावधान में मंगलवार 24 नवम्बर को शायं 5 बजे पुष्करणी पार्क से संयुक्त रूप से ट्रेड यूनियनों द्वारा शहर में मशाल जुलूस निकाला गया। इस दौरान हड़ताल के मुद्दों को लेकर लोगों में अलख जगाते हुए अब तक की इस सबसे बड़ी हड़ताल में शामिल होने का आव्हान किया गया।
टीयूसी अध्यक्ष कॉमरेड टीपी पाण्डेय ने इस अवसर पर जानकारी देते हुए बताया कि 26 नवंबर की आम हड़ताल देश की आजादी के बाद की सबसे महत्वपूर्ण हड़ताल है क्योंकि इस हड़ताल में देश की गरीब जनता, किसानों, बेरोजगारों, महिलाओं, मजदूर व कर्मचारियों की मांगें शामिल है। टीयूसी महासचिव कॉमरेड संजय सिंह तोमर के अनुसार आज का मशाल जुलूस देश के करोड़ों-करोड़ जनमानस की पीड़ा को लेकर है, सरकारों को ये संदेश है, जुल्मी जितना जुल्म करेगा सत्ता के गलियारों से -चप्पा चप्पा गूंज उठेगा इंकलाब के नारों से। इसलिए अभी भी समय है कि देश की बहुतायत जनता के हितों को बचाया जाय, यही चेतावनी है आज का मशाल जुलूस।
टीयूसी के वरिष्ट उपाध्यक्ष एवं बीएसएनएल से कॉमरेड योगेश शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि 26 नवम्बर की आम हड़ताल के दिन सभी यूनियने सुबह से अपने-अपने कार्यालयों में विरोध प्रदर्शन करेंगीं इसके उपरान्त टीयूसी के नेतृत्व में दोपहर 12 बजे से पुष्करणी पार्क मे एक विशाल जंगी सभा का आयोजन होगा जिसको सभी ट्रेड यूनियनों के पदाधिकारीगण सभा को संबोधित करेंगे।

ये रहे शामिल

मंगलवार शाम को निकाले गए मशाल जुलूस में प्रमुख रूप से पेंसनर्स समाज एवं टीयूसी के संरक्षक कॉमरेड हरी प्रकाश गोस्वामी, इंटक प्रादेशिक उपाध्यक्ष शंकर सिंह तिवारी, मनोज कुमार पांडेय, संतोष पांडे, सतना डिवीजन इंश्योरेंस एम्प्लाइज एशोसिएशन सतना के अध्यक्ष कॉम धर्मेंद्र सिंह बघेल, मध्यप्रदेश बैंक एम्पलाइज एसोसिएशन के कॉम राजीव उपाध्याय कॉम मनोज निगम, सीटू के कॉम तेज प्रताप दुबे, प्रिज्म एकता यूनियन अध्यक्ष कॉम गोविंद सिंह, कार्यकारी अध्यक्ष कॉमरेड अनिल द्विवेदी, महासचिव कॉमरेड राजेन्द्र तिवारी, केजेएस एकता यूनियन मैहर अध्यक्ष कॉम मनीष शुक्ला, टीयूसीसी जिला सचिव कॉमरेड सुनील सिंह, एमपीएमएसआरयू सतना यूनिट के सचिव आनंद पांडे, परिवेश खरे, जितेंद्र मिश्रा, आनंद सिंह, रणवीर सिंह, प्रशांत केसरवानी, एटक के कॉम रामसरोज कुशवाहा, अखिल भारतीय पोस्टल संघ के कॉम वीके शुक्ला, मध्यप्रदेश तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के कॉम प्रमेन्द्र गौतम, कॉमरेड भानु प्रताप सिंह, कॉमरेड आरडी द्विवेदी, कॉमरेड विकल्प गौतम एवं कॉमरेड केके शुक्ला शामिल थे।

सर्दी के सितम से बेसहारा गरीबों और अपाहिजों को बचाने समर्पित संस्था ने बाँटे गर्म कपड़े

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दीन-दुखियों और जरूरतमंदों को ठण्ड से बचाव के लिए गर्म कपड़े प्रदान करते हुए स्वयंसेवी संस्था समर्पित के पदाधिकारीगण।

*   जरुरतमंदों की मदद के लिए दे सकते हैं आर्थिक सहयोग

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) सामाजिक सरोकार से जुड़े कार्यों और गरीब जरूरतमंदों की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहने वाली स्वयंसेवी संस्था समर्पित ने शहर के मंदिरों के बाहर बैठने वाले गरीबों, अपाहिजों और मानसिक रूप से बीमार व्यक्तियों की सुध लेते हुए वर्तमान में पड़ रही कड़ाके की सर्दी से इनका बचाव करने के लिए उन्हें गर्म कपड़े वितरित किए हैं। अपने सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद समर्पित संस्था के द्वारा अब तक कई जरुरतमंदों को गर्म कपड़े उपलब्ध कराए जा चुके हैं। आमजन के आर्थिक सहयोग से पीड़ित मानवता की सेवा का यह पुनीत कार्य पन्ना सहित आसपास के ग्रामीण अंचल में अनवरत जारी है।
समर्पित संस्था के प्रमुख अनुराग शर्मा ने रडार न्यूज़ को बताया कि कुछ दिन पूर्व शाम के समय जब मैं किशोर जी मंदिर के सामने से गुजरा तो वहाँ मंदिर के बाहर बैठे गरीब और विकलांग वृद्ध बर्फीली सर्द हवाओं के चलते ठण्ड से ठिठुर रहे थे। ठण्ड से स्वयं का बचाव करने के लिए उनके पास गर्म कपड़े नहीं थे। इनकी गरीबी, वेबशी और मजबूरी देखकर हृदय द्रवित हो उठा। तत्परता से उन्हें राहत प्रदान करने के लिए उपलब्ध गर्म कपड़े मुहैया कराए गए। श्री शर्मा ने बताया कि इसके बाद संस्था के अन्य पदाधिकारियों चर्चा कर ठण्ड में ठिठुरने को विवश अन्य गरीबों की मदद करने के लिए योजना तैयार की गई। उन्होंने बताया कि अब तक नगर के सभी मंदिरों के बाहर बैठने वाले गरीब व्यक्तियों, मानसिक रुप से बीमार लोगों के साथ-साथ आदिवासी बाहुल्य ग्राम मनकी के 174 लोगों को गर्म कोट, कम्बल आदि कपड़े उपलब्ध कराए जा चुके हैं।
इस कार्य में संस्था से जुड़े आदित्य दीक्षित, विकास मिश्रा, रेशू मिश्रा, ऋतिक शुक्ला भोपाली, लव शर्मा, कुश शर्मा, अरुण जड़िया, रेशू खरे, शिवम् शुक्ला पटवारी, पत्रकार सचिन खरे का सराहनीय योगदान रहा। समर्पित संस्था के प्रमुख अनुराग शर्मा ने बताया कि हमारा संकल्प अपने कार्य क्षेत्र के अधिक से अधिक जरुरतमंदों को इस बेरहम ठण्ड से बचाव के लिए गर्म कपड़े वितरित करना है। उन्होंने मानव सेवा के इस कार्य के लिए इच्छुक लोगों से संस्था को सुविधानुसार आर्थिक सहयोग अथवा गर्म कपड़े प्रदान करने के लिए मोबाइल नंबर- 9770027351 पर सम्पर्क करने का अनुरोध किया है।

एनएमडीसी हीरा खनन परियोजना के श्रमिक संघों ने हड़ताल को लेकर बनाई रणनीति

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बैठक को संबोधित करते हुए एमपीआरएचकेएमएस महामंत्री समर बहादुर सिंह।
पन्ना।(www.radarnews.in) केन्द्र सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ 10 केन्द्रीय श्रमिक संगठनों ने गुरुवार 26 नवंबर को हड़ताल का ऐलान किया है। एनएमडीसी लिमिटेड की हीरा खनन परियोजना माझगवां के दोनों प्रमुख श्रमिक संघों द्वारा इस हड़ताल को सफल बनाने के लिए गत दिवस एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित कर रणनीति तैयार की गई। श्रमिक संघ प्रमुख समर बहादुर सिंह एवं भोला प्रसाद सोनी ने संयुक्त रूप से जानकारी देते हुए बताया कि बीते दिवस सायंकाल 05:00 बजे साधारण पारी की समाप्ति पर एनएमडीसी लिमिटेड हीरा खनन परियोजना मझगवां के टीओ गेट के बाहर बस स्टैण्ड में दोनों श्रमिक संघों क्रमश: मध्यप्रदेश राष्ट्रीय हीरा खदान मजदूर संघ (इंटक सम्बद्ध) और पन्ना हीरा खदान मजदूर संघ (बीएमएस सम्बद्ध) के संयुक्त तत्वधान में गेट मीटिंग आयोजित की गई।
हड़ताल के संबंध आयोजित हुई बैठक में शामिल हीरा खनन परियोजना के कर्मचारीगण ।
इस बैठक में राष्ट्रीय श्रमिक संगठनों एवं अखिल भारतीय एनएमडीसी कामगार संघ के एकजुट आव्हान पर केन्द्र की जनविरोधी, श्रमिक विरोधी, आर्थिक नीतियों, किसान विरोधी कानूनों के खिलाफ एवं विभिन्न मांगों के समर्थन में गुरुवार 26 नवंबर 2020 को परियोजना में आम हड़ताल का आव्हान किया गया। बैठक में पीएचकेएमएस महामंत्री भोला प्रसाद सोनी, एमपीआरएचकेएमएस महामंत्री समर बहादुर सिंह, अध्यक्ष वीरेन्द्र सिंह एवं बाबूलाल प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। इस बैठक में दोनों श्रमिक संघों के अन्य पदाधिकारी एवं सदस्यों समेत करीब 200 लोग उपस्थित रहे। जिनमें परियोजना कर्मचारी, ठेका श्रमिक व प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे अप्रेंटिस शामिल हैं।

मंत्री से घटिया सीसी सड़क का लोकार्पण कराया, किरकिरी होने पर अगले ही दिन नवनिर्मित सड़क के ऊपर डामरीकरण करा दिया

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नवनिर्मित सीसी सड़क की गड़बड़ियों को ढंकने के लिए रात के अंधेरे में उसके ऊपर डामरीकरण कराते हुए ठेकेदार।

बनने के साथ ही उखड़ने लगी थी 1 करोड़ की लागत वाली सड़क

पन्ना के बस स्टैण्ड में निर्मित सड़क की गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) एमपी अजब है सबसे गज़ब है और ये बात पन्ना जिले में साबित हो रही है, जहाँ मध्य प्रदेश अर्बन डेव्हलपमेंट कम्पनी के तकनीकी अधिकारियों व ठेकेदार ने मिलकर एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है जिसके बाद उनकी कार्यशैली पर सवालिया निशान लग गए हैं।मिनी स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के अंतर्गत पन्ना के बस में लगभग 1 करोड़ की लागत से नव निर्मित सीसी सड़क का लोकार्पण होने के महज़ 24 घण्टे बाद ही आनन्-फानन में उसके ऊपर बीटी यानी डामरीकरण कराना पड़ा।
दरअसल अत्यंत ही घटिया निर्माण कार्य के चलते सीसी सड़क में तेजी से बनते गड्ढों को रोकने और सड़क की उधड़ती हुई परतों के साथ बाहर आते भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने के लिए स्मार्ट तरीका अपनाया गया है। सीमेंट-कंक्रीट की सड़क पर रातोंरात डामरीकरण होना शहर में आमजन के बीच चर्चा का विषय बना है। मानकों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य संपन्न कराने की माला जाप के बीच सीसी सड़क के निर्माण में व्यापक पैमाने पर गड़बड़ी उजागर होने से स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के कार्यों के कार्यान्वयन एवं निगरानी से जुड़े तकनीकी और प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच आवश्यक हो गई है।
मिनी स्मार्ट सिटी घोषित पन्ना जिला मुख्यालय के बस स्टैण्ड में मध्य प्रदेश शासन के नगरीय विकास एवं आवास विभाग अंतर्गत आने वाली मध्य प्रदेश अर्बन डेव्हलपमेंट कम्पनी के द्वारा करीब एक करोड़ की लागत से सीसी सड़क निर्माण, हाई मास्क लाइट की स्थापना व यात्री प्रतीक्षालय का रंग-रोगन आदि कार्य कराए गए हैं। महज पखवाड़े भर पूर्व निर्मित बस स्टैण्ड की सीसी सड़क की तेजी से गिट्टी उखड़ने के चलते उसमें कई जगह गड्ढे हो गए।
खनिज मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ने बुधवार 18 नवंबर को पन्ना बस स्टैण्ड की सीसी सड़क का लोकार्पण किया, अगले ही दिन इस घटिया सड़क पर डामरीकरण करना पड़ा।
घटिया निर्माण कार्य को लेकर स्थानीय लोगों की नाराजगी के बीच बुधवार 18 नवंबर को प्रदेश के खनिज मंत्री एवं पन्ना विधायक बृजेन्द्र प्रताप सिंह से सीसी सड़क का लोकार्पण कराया गया। अगले दिन समाचार पत्रों में प्रकाशित इस कार्यक्रम से जुड़ीं ख़बरों में कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाते हुए आधे-अधूरे निर्माण कार्य का लोकार्पण कराए जाने के प्रशासन के फैसले की तीखी आलोचन की गई। फलस्वरूप गुरूवार 19 नवंबर को सोशल मीडिया पर भी दिनभर इस मुद्दे पर लोग टिप्पणी करते रहे। घटिया निर्माण कार्य को लेकर चौतरफा किरकिरी होने के चलते निर्माण एजेन्सी व ठेकेदार ने शाम को आनन-फानन में नवनिर्मित सीसी सड़क पर डामरीकरण कराने का काम शुरू करा दिया। लोकार्पण के अगले ही दिन सीसी सड़क के ऊपर डामरीकरण कराए जाने का मामले ने स्मार्ट सिटी के कार्यों में जारी मनमानी और गड़बड़ी की तरफ हर किसी ध्यान खींचा है।
पन्ना के बस स्टैण्ड परिसर में होटल चलाने वाले संजय समारी ने बताया कि सीसी सड़क के निर्माण कार्य में धांधली होने के कारण सड़क बनने के साथ ही उखड़ने लगी थी। लोकार्पण के पूर्व ही जगह-जगह गिट्टी उखड़ने से सड़क में गड्ढे हो गए थे। नवनिर्मित सड़क के घटिया कार्य के लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान सड़क की बदहाली का मामला जिम्मेदार अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के संज्ञान में लाया गया लेकिन उन्होंने इसे नजरअंदाज कर दिया। स्थानीय मीडिया में मामले के तूल पकड़ने के बाद सीसी सड़क की गड़बड़ी को छिपाने के लिए उसके ऊपर रातोंरात डामरीकरण करा दिया गया। संजय कहते हैं, नवनिर्मित सीसी सड़क की गिट्टी अभी तो सिर्फ लोगों की चहलकदमी से ही जगह-जगह उखड़ने लगी थी, कुछ दिन बाद बस स्टैण्ड में जब पुनः यात्री बसों की आवाजाही शुरू होगी तो इस सड़क का क्या हाल होगा इसका सहज अनुमान लगाया जा सकता है। उनके अनुसार सड़क के ऊपर बिछाई गई डामर की पतली परत ज्यादा दिन टिकने वाली नहीं है।

अफसरों ने कराई मंत्री की छीछालेदर

पन्ना बस स्टैण्ड की सीसी सड़क के निर्माण में लीपापोती के सामने आने से शहर में हुए स्मार्ट सिटी के कार्यों की गुणवत्ता पर लगा प्रश्न चिन्ह।
पन्ना में मिनी स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट से जुड़े लापरवाह तकनीकी व प्रशासनिक अधिकारियों ने सीसी सड़क का घटिया निर्माण कार्य कराकर अपनी भद्द तो पिटवाई, साथ ही खनिज मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह की अच्छी-ख़ासी छीछालेदर करा दी है। गुणवत्ता के मानकों की धज्जियां उड़ाते हुए बस स्टैण्ड में बनाई गई घटिया सीसी सड़क को लेकर स्थानीय लोगों की नाराजगी को जानबूझकर नजरअंदाज करके निर्माण एजेन्सी ने अपनी कारगुजारियों को शासन-सत्ता की आड़ में छिपाने के मकसद से बुधवार 18 नवंबर को खनिज एवं श्रम विभाग के मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह से सड़क का लोकार्पण करा दिया। गड्ढों में तब्दील होती नवनिर्मित सड़क के लोकार्पण को लेकर स्थानीय पत्रकारों ने अगले दिन प्रमुखता से ख़बरें प्रकाशित करके घटिया निर्माण कार्य को मुद्दा बनाते हुए मंत्री जी की भी जमकर खिंचाई की है। इससे शर्मनाक बात और क्या होगी, मंत्री से जिस नवनिर्मित सीसी सड़क का लोकार्पण कराया गया अगले ही दिन उसके ऊपर डामरीकरण कराने की नौबत आ गई। इससे पता चलता है कि स्मार्ट सिटी के कार्यों में किस हद तक भ्रष्टाचार हुआ है।
अपने इस कृत्य से मंत्री की छवि को धूमिल करने वाले अफसरों को सीसी सड़क के ऊपर डामरीकरण करने में कुछ भी गलत या आपत्तिजनक नजर नहीं आता। इनका कहना है कि नवनिर्मित सीसी सड़क की पांच साल की गारण्टी है। इस अवधि में सड़क में यदि कोई समस्या आती है तो उसके सुधार या मरम्मत के लिए ठेकेदार कानूनी रूप से जिम्मेदार है। गौरतलब है कि निर्माण कार्य के अनुबंध की शर्तों में शामिल पांच साल की गारण्टी के प्रावधान की जिम्मेदार अधिकारी जिस तरह से बेफिक्र अंदाज में व्याख्या कर रहे हैं वह घटिया निर्माण कार्य को संरक्षण देने जैसा है। तकनीकी जानकार मानते हैं कि निर्माण कार्य की गारण्टी का मतलब यह कदापि नहीं है कि नवनिर्मित सीसी सड़क के लोकार्पण के अगले ही दिन उसके ऊपर डामरीकरण कराना पड़े। गारण्टी का प्रावधान करके क्या ऐसी सड़कों के निर्माण को छूट दे दी गई है जिनकी पूरे समय सिर्फ मरम्मत ही होती रहे। अगर ऐसा हुआ तो वाहनों को चलने के अच्छी सड़क कब और कैसे मिल पाएगी यह प्रश्न विचारणीय है ?

इनका कहना है –

“बस स्टैण्ड में निर्मित सीसी सड़क की लागत करीब 1 करोड़ रुपये है, सड़क के ऊपर बीटी (डामरीकरण) कराए जाने की मुझे जानकारी नहीं है। वैसे नई बनी सीसी सड़क ऊपर डामरीकरण होता नहीं है। आखिर ऐसा क्यों करना पड़ा सम्बंधित तकनीकी अधिकारी ही बता सकते हैं। सड़क निर्माण की 5 वर्ष की गारण्टी है, इस अवधि में सड़क के क्षतिग्रस्त होने पर ठेकेदार को मरम्मत करानी पड़ेगी। मेरे पास निर्माण एजेन्सी के उपयंत्री का नम्बर उपलब्ध नहीं है।”

–  यशवंत वर्मा, सीएमओ, नगर पालिका परिषद पन्ना।

“निर्माण कार्य लोकार्पण की शिला पट्टिका में नाम का उल्लेख होने मात्र से कोई संबंधित कार्य के लिए जिम्मेदार नहीं हो जाता। स्मार्ट सिटी के कार्यों की निगरानी के लिए एक समिति गठित है, जिसमें कई विभागों के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी शामिल हैं। ऐसे में निर्माण कार्य को लेकर मैं क्या टिप्पणी कर सकता हूँ। वैसे भी मैं कुछ ही समय पूर्व पन्ना आया हूँ उक्त कार्य भी मेरे सामने नहीं हुआ है।”

–  सुरेश कुमार साहू, प्रभारी सहायक यंत्री, नगर पालिका परिषद पन्ना।

“सीसी सड़क पर डामरीकरण होने में घबराने या चिंता करने जैसी कोई बात नहीं है। निर्माण कार्य की 5 वर्ष की गारण्टी है, इसलिए सड़क में कोई समस्या आती है तो ठेकेदार को उसका सुधार करना पड़ेगा। नवनिर्मित सीसी सड़क के ऊपर डामरीकरण क्यों किया गया, तकनीकी अधिकारियों से जानकारी लेने के बाद ही इस संबंध में बता पाऊंगा। सड़क की ड्राइंग-डिजायन में क्या इसका प्रावधान था यह देखना पड़ेगा। कार्य की गुणवत्ता की जांच के लिए एक कमिटी गठित की गई है, जिसकी रिपोर्ट आने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। मेरे द्वारा किसी भी तरह की गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

–  संजय कुमार मिश्र, कलेक्टर, पन्ना।

हीरा कार्यालय के हवलदार का घर में मिला अधजला शव, हत्या की आशंका

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*  खाली पड़े घर में पूजा करने के लिए आया था मृतक

*  गले में बंधा मिला फांसी का फंदा, मकान के फर्श पर औंधे मुँह पड़ा था शव

*   थाना कोतवाली पन्ना पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की शुरू की जांच

पन्ना। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना जिला मुख्यालय में स्थित हीरा कार्यालय के हवलदार का अधजला शव संदिग्ध परिस्थितियों में उसके ही घर में मिलने से सनसनी व्याप्त है। मौके पर मिले साक्ष्यों के आधार पर परिजन हत्या की आशंका व्यक्त कर रहे हैं। उनका ऐसा मानना है अज्ञात हत्यारोपी ने बड़ी ही बेरहमी से गला घोंटकर हत्या करने के बाद अपराध को छिपाने के लिए शव में आग लगा दी और फिर मकान के पीछे से भाग निकला। शहर के बीचों-बीच बीटीआई तिराहा के समीप स्थित श्री राम कालोनी में घटित इस घटना पर कोतवाली थाना पन्ना पुलिस ने फिलहाल मर्ग कायम करते हुए घटना के हर पहलू की गहनता से पड़ताल शुरू कर दी है। वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन एवं निगरानी में जारी पुलिस की जांच में बिहारी लाल पाण्डेय 50 वर्ष की संदिग्ध मौत का सच जल्द से जल्द सामने आने की उम्मीद की जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार हीरा कार्यालय पन्ना में हवलदार के पद पर पदस्थ बिहारी लाल पाण्डेय 50 वर्ष अपने परिवार के साथ शहर के टिकुरिया मोहल्ला में किराए के मकान में रहता था। जबकि उसका निजी मकान पन्ना में बीटीआई तिराहा के समीप श्री राम कालोनी में खाली पड़ा है। रविवार 15 नवंबर की शाम बिहारी लाल पाण्डेय अपने खाली पड़े मकान में पूजा करने के लिए आया था। देर शाम घर के अंदर से तेज धुआँ और आग की लपटें उठने पर आसपास रहने वाले लोगों को जब इसकी भनक लगी तो वे दंग रह गए। आनन-फानन पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई।
कालोनी में रहने वाले बिहारी लाल पाण्डेय के रिश्तेदार ने साहस कर किसी तरह मकान का दरवाजा तोड़ दिया लेकिन आग की प्रचण्ड लपटों के कारण अंदर जाना सम्भव नहीं हो सका। फायर ब्रिगेड के पहुँचने पर करीब आधा घण्टे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। मौके पर मौजूद कोतवाली थाना प्रभारी अरुण सोनी एवं पुलिस की एफएसएल टीम ने अंदर जाकर देखा तो बिहारी लाल पाण्डेय 50 वर्ष का अधजला शव संदिग्ध परिस्थितियों के बीच फर्श पर औंधे मुँह पड़ा मिला। मृतक के गले में पीले रंग के दुपट्टे का फंदा लगा था और पीठ के ऊपर पत्थर की सिल रखी थी। इन तमाम साक्ष्यों के मद्देनजर पीड़ित परिजन इसे प्रथम दृष्टया हत्या का मामला बता रहे हैं। उन्होंने आशंका व्यक्त करते हुए कहा कि, अज्ञात आरोपी मकान के पिछले हिस्से से अंदर दाखिल हुआ और फिर गला दबाकर हत्या की गई। अपराध को छिपाने के लिए शव को आग के हवाले कर आरोपी फरार हो गए।
इस सनसनीखेज मामले के प्रकाश में आने के बाद से ही नगर में भी लोग हवलदार बिहारी लाल पाण्डेय की निर्ममतापूर्वक हत्या किये जाने की चर्चा दबी जुबान कर रहे हैं। चर्चाओं के अनुसार वारदात में किसी करीबी व जानकार व्यक्ति का हाथ हो सकता है। उधर, घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस के द्वारा हर पहलू की गहनता से पड़ताल की जा रही है। मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने व मामले जांच उपरांत हवलदार की मौत का सच सामने आने की उम्मीद है।

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