प्रदेश में जल्द शुरू होगी मरीज मित्र योजना
* चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री सारंग ने किया शहडोल मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण
भोपाल।(www.radarnews.in) चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा है कि प्रदेश में जल्द ही ‘मरीज मित्र’ योजना शुरू की जायेगी। इसमें समाज के प्रबुद्ध वर्ग अपनी सेवाएँ नि:शुल्क रूप से चिकित्सा क्षेत्र में दे सकेंगे। यह बात चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने के दौरान ली गई समीक्षा बैठक में कही।
श्री सारंग ने मेडिकल कॉलेज के विभिन्न वार्डों, ओपीडी, ओ.टी. रूम, ड्राय रन रूम आदि का निरीक्षण किया। उन्होंने कोविड-19 वैक्सीन लगाने संबंधी व्यवस्थाओं को देखा। साथ ही विभिन्न लैब का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि शहडोल मेडिकल कॉलेज अभी बाल्यावस्था में है। आने वाले समय में कॉलेज को तकनीक और आई.टी. से समृद्ध किया जायेगा। प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेज को नये लुक में आगे बढ़ाने के उद्देश्य से 12-13 विषयों पर मंथन किया जा रहा है। शासकीय अमला और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोग इसे मूर्त रूप देंगे।
मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि डॉक्टर्स चिकित्सा के साथ शिक्षक की भूमिका बखूबी निभाएं और नये विशेषज्ञ डॉक्टर्स तैयार करें। उन्होंने कहा कि विभागाध्यक्ष आपसी सामंजस्य, सहयोग एवं सहभागिता से आगे बढ़ अपना अमूल्य योगदान दें। विभागाध्यक्ष, डीन और कमिश्नर एक साथ बैठकर मानव संसाधन सहित अन्य चिकित्सकीय आवश्यकता की व्यवस्थाओं के संबंध में विचार-विमर्श कर उचित निर्णय लें और मेडिकल कॉलेज को बेहतर बनाने में अपना सहयोग दें। इसके लिये निर्वाचित जन-प्रतिनिधियों से भी सतत सम्पर्क बनायें। व्यवस्थाएँ सुदृढ़ करने में सामाजिक कार्यकर्ताओं का सहयोग भी सुनिश्चित करें।
मंत्री श्री सारंग ने कॉलेज के विद्यार्थियों से पढ़ाई और कॅरियर के बारे में चर्चा की। उन्होंने कहा कि मानव को ऐसा सुअवसर बहुत कम मिलता है, जब वह दूसरों की जान बचाता है। इसलिये डॉक्टर ईश्वरीय शक्ति से परिपूर्ण माना गया है, जो लोगों को नया जीवन देता है। उन्होंने छात्रों की माँग पर निर्देश दिये कि मेडिकल कॉलेज में लायब्रेरी 24 घंटे खुलवाने की पहल करें। साथ ही आवश्यक तकनीकी सुविधाएँ भी शीघ्र मुहैया करवाने को कहा। इस मौके पर विधायक मनीषा सिंह, जय सिंह मरावी सहित अन्य जन-प्रतिनिधि उपस्थित थे।
प्रदेश के इन नौ जिलों में हुई बर्ड फ्लू की पुष्टि, 885 कौओं और 9 बगुलों की मौत की सूचना मिली
भोपाल।(www.radarnews.in) कोरोना वायरस संक्रमण के बीच प्रदेश में बर्ड फ्लू की पुष्टि होने से लोगों की चिंता बढ़ गई है। पक्षियों और मुर्गे-मुर्गियों से फैलने वाली इस बीमारी (बर्ड फ्लू) की रोकथाम के हर संभव प्रयास राज्य शासन द्वारा किये जा रहे है। नए खतरे की आहट को देखते हुए लोगों को अब पहले से कहीं अधिक विशेष सतर्कता एवं सावधानी बरतने की जरुरत है। प्रदेश में अब-तक 9 जिलों – इंदौर, मंदसौर, आगर, नीमच, देवास, उज्जैन, खण्डवा, खरगौन और गुना में कौओं में बर्ड फ्लू वायरस की पुष्टि हो चुकी है। अब-तक 21 जिलों से 885 कौओं और 9 बगुलों की मृत्यु की सूचना मिली है। विभिन्न जिलों से 293 सेम्पल राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा रोग अनुसंधान प्रयोगशाल NIHSAD भोपाल को जाँच के लिये भेजे गये हैं।
इंदौर और नीमच जिले में बर्ड फ्लू से प्रभावित क्षेत्र के आस-पास कुक्कुट बाजार आदि को सतर्कता एवं सावधानी की दृष्टि से अगले सात दिनों के लिये बंद किया गया है। इंदौर के चिकन मार्केट में लगभग 200 मुर्गियों और 700 अण्डों तथा नीमच जिले के चिकिन मार्केट की दुकानों में लगभग 450 मुर्गियों का निस्तारण संक्रमण की रोकथाम के लिये किया गया है।
संचालक पशुपालन ने कुक्कुट पालकों से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न देते हुए अनावश्यक भ्रम या भय की स्थिति उत्पन्न न होने दें। सभी जिलों में रोग नियंत्रण की कार्यवाही भारत सरकार की एडवाइजरी के अनुसार की जा रही है। केन्द्र एवं राज्य शासन की एडवाइजरी के अनुसार पूर्ण सावधानी एवं सतर्कता बरतें।
सीएम शिवराज ने किया आश्वस्त, कहा- “पन्ना स्थित एशिया की इकलौती हीरा खदान को बंद नहीं होने देंगे”

* संचालन हेतु स्वीकृत अवधि समाप्त होने पर बंद करनी पड़ी हीरा खदान
* जिले के लोगों की चिंता व नाराजगी को देखते हुए सांसद और मंत्री ने सीएम से की मुलाक़ात
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) बेशकीमती रत्न हीरों के खनन के लिए विख्यात मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में मझगवां स्थित एनएनडीसी हीरा खनन परियोजना में हीरों का उत्पादन नए वर्ष 2021 के पहले दिन से बंद हो चुका है। हीरा खनन परियोजना संचालन की स्वीकृति अवधि 31 दिसम्बर 2020 को समाप्त होने के कारण पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक के निर्देश पर इसे तत्काल प्रभाव से पूरी तरह बन्द करना पड़ा है।
एशिया महद्वीप की इकलौती मैकेनाइज्ड हीरा खदान के बंद होने की खबर आने के बाद से ही पन्ना से लेकर राजधानी भोपाल और एनएमडीसी मुख्यालय हैदराबाद तक हड़कम्प मचा है। उद्योग विहीन अति पिछड़े पन्ना जिले के हजारों लोगों के रोजगार के साथ जिले के विकास एवं पहचान से जुड़ी इस महत्पूर्ण परियोजना को आगे संचालित रखने के लिए समय रहते आवश्यक अनुमतियाँ न मिलने के कारण हीरों का उत्पादन बंद होने से स्थानीय लोग खासे चिंतित हैं।
हीरा खदान को आवश्यक स्वीकृतियां दिलाने के मामले में प्रदेश सरकार के द्वारा बरती गई शिथिलता एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर भी पन्ना के लोगों में गहरी नाराजगी व्याप्त है। मीडिया की सुर्ख़ियों में बने इस मुद्दे पर उठ रहे गंभीर सवालों से प्रदेश सरकार की नींद आखिरकार टूट गई है।

देर आये पर दुरुस्त आये की तर्ज पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पन्ना जिले नागरिकों की व्यापक चिंताओं से जुड़े जनहित के इस मामले को संज्ञान लिया है। रविवार 3 जनवरी की देर शाम मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि पन्ना स्थित एनएमडीसी लिमिटेड की हीरा खनन परियोजना को बंद नहीं होने दिया जाएगा। इसे निरंतर चालू रखने के लिए सभी आवश्यक पहलुओं पर विचार होगा। पन्ना स्थिति हीरा खदान क्षेत्र के लोगों के रोजगार के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने प्रदेश के मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि इस संबंध में तत्काल कार्रवाई करने के लिए बैठक आयोजित की जाए।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह आश्वासन भी दिया कि, हीरा खदान के संबंध में केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से बात कर इसे स्वीकृति दिलाने के प्रयास के किये जाएंगे। मुख्यमंत्री ने यह बात खजुराहो-पन्ना सांसद विष्णु दत्त शर्मा एवं खनिज मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह से अपने आवास पर चर्चा के दौरान कही।
दोनों ही जनप्रतिनिधि हीरा खनन परियोजना के बंद होने के दुष्परिणामों एवं इससे जुड़ीं जिले के लोगों से चिंताओं से मुख्यमंत्री को अवगत कराने के लिए उनसे मिले थे। इस चर्चा के दौरान सीएम शिवराज ने माना कि हीरा खदान में उत्खनन पुनः शुरू होने से पन्ना जिले के लोगों को रोजगार उपलब्ध होने के साथ-साथ जिले का विकास होगा।

जिला मुख्यालय पन्ना से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित एशिया महाद्वीप की इकलौती मैकेनाइज्ड एनएमडीसी खदान में वर्ष 1968 से लेकर अब तक लगभग 13 लाख कैरेट हीरों का उत्पादन किया जा चुका है। इस खदान में अभी भी 8.5 लाख कैरेट हीरों का उत्पादन होना शेष है। ऐसी स्थिति में आगे खदान संचालन की अनुमति यदि नहीं मिलती तो अरबों रुपए कीमत के हीरे जमीन के भीतर ही दफन रह जाएंगे। इसका व्यापक दुष्परिणाम हजारों लोगों को प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से मिल रहे रोजगार पर पड़ेगा। साथ ही परियोजना के आसपास के क्षेत्र के लोगों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं से वंचित होना पड़ सकता है।
उल्लेखनीय है कि पन्ना टाइगर रिजर्व के गंगऊ अभ्यारण वन भूमि पर स्थित हीरा खदान को संचालित रखने के लिए आवश्यक अनुमति की अवधि 31 दिसंबर 2020 को समाप्त हो जाने के कारण इसे 1 जनवरी 21 से उत्खनन बंद कर दिया गया है। हीरा खनन परियोजना को आगे संचालित रखने के लिए आवश्यक स्वीकृति प्राप्त करने परियोजना प्रबंधन ने कई माह पूर्व ही आवेदन पत्र राज्य वन्य प्राणी बोर्ड तथा वन एवं पर्यावरण मंत्रालय में प्रस्तुत किए थे। लेकिन ये निर्णय के इंतजार में ये आज भी लंबित पड़े है।

कोरोना महामारी के कारण हीरा खनन परियोजना को आवश्यक स्वीकृतियां मिलने में काफी विलम्ब हुआ है। यह पहला मौका नहीं है जब हीरा खनन परियोजना को यथावत चालू रखने के लिए आवश्यक अनुमतियाँ मिलने में देरी होने के कारण इसे बंद करना पड़ा है। पूर्व में भी इस तरह की स्थिति निर्मित हो चुकी है। बहरहाल इस मसले पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के द्वारा आश्वासन देने के बाद पन्ना के लोगों और हीरा खनन परियोजना प्रबंधन में जल्द से जल्द अच्छी खबर मिलने की उम्मीद जाग उठी है।
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के नवनियुक्त चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक को राज्यपाल ने दिलाई शपथ

भोपाल।(www.radarnews.in) राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने नवनियुक्त मुख्य न्यायाधिपति मोहम्मद रफीक को मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति की शपथ राजभवन में दिलाई। शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन रविवार को सांदीपनि सभागार राजभवन में किया गया था। इस अवसर पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मौजूद थे।
कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, गृह एवं विधि विधाई मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा, मंत्री किसान कल्याण एवं कृषि विकास कमल पटेल, मंत्री लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण प्रभूराम चौधरी, मंत्री सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम ओम प्रकाश सखलेचा, मंत्री औद्योगिक नीति और निवेश प्रोत्साहन राजवर्धन सिंह दत्ती गांव, प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा, विभिन्न आयोगों के अध्यक्ष, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधिपतिगण, अधिवक्तागण, विधि-विधायी कार्य एवं अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुये। इस अवसर पर मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस ने शपथ विधि कार्यवाही का संचालन किया।
सम्मान में भोज का आयोजन

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज मुख्यमंत्री निवास पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के नवनियुक्त मुख्य न्यायाधीश जस्टिस मोहम्मद रफीक के सम्मान में दोपहर भोज का आयोजन किया। राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल, पूर्व मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ के अलावा राज्य मंत्रिपरिषद के अनेक सदस्य, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश गण, महाधिवक्ता पुरूषेन्द्र कौरव और वरिष्ठ अधिकारी सम्मिलित हुए। प्रारंभ में मुख्यमंत्री श्री चौहान ने अतिथियों का स्वागत किया।
मध्यप्रदेश : शिवराज कैबिनेट का विस्तार, सिंधिया समर्थक गोविन्द सिंह और तुलसी सिलावट मंत्री बने

* राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने दोनों मंत्रियों को दिलाई शपथ
* कतिपय विधायकों को फिर होना पड़ा निराश
भोपाल।(www.radarnews.in) नए साल 2021 में आखिरकार शिवराज मंत्रिमंडल का विस्तार हो गया। सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के कट्टर समर्थक तुलसी सिलावट और गोविन्द सिंह राजपूत को मंत्रिमण्डल में शामिल किया गया है। राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने नवनियुक्त दोनों मंत्रियों तुलसीराम सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत को मंत्री पद एवं गोपनीयता की शपथ ग्रहण कराई। मंत्रिमंडल विस्तार शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन राजभवन के सांदीपनि सभागार में रविवार 3 जनवरी को किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी उपस्थित थे। शपथ ग्रहण समारोह की कार्यवाही का संचालन मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस ने किया।
इस मौके पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने दोनों करीबी नेताओं को बधाई दी। सिंधिया ने अपने ट्वीट में लिखा है, “लोकप्रिय जननेता तुलसी सिलावट व गोविन्द सिंह राजपूत को मंत्री पद की शपथ लेने पर बधाई एवं शुभकामनाएं। आप मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा दिए गए अपने नए दायित्वों को सफलता से निभाएं, यही कामना करता हूँ।”
उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश की 28 विधानसभा सीटों पर माह नवंबर में हुए उपचुनाव के नतीजे आने के बाद से ही इस मंत्रिमंडल के विस्तार की चर्चा राजनीतिक गलियारों में चल रही थी। इस उपचुनाव में भाजपा ने 28 में से 19 सीटें जीती थी, जबकि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को सिर्फ 9 सीटें मिली थी। इससे 230 सदस्यों के सदन में भाजपा की सीटें बढ़कर126 हो गई, जबकि कोंग्रेस के विधायकों की संख्या घटकर 96 पर पहुँच गई।
राष्ट्रीय नेतृत्व से अनुमति मिलने पर हुआ विस्तार

उपचुनाव के नतीजे आने के बाद से शिवराज मंत्रिमंडल विस्तार का इंतजार किया जा रहा था। इसे लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा एवं ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच पिछले दिनों कई बैठकें भी हुई। सूत्रों ने बताया कि गत दिनों भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व की ओर से मंत्रिमंडल के विस्तार की अनुमति मिली। इसके बाद कार्यक्रम तय किया गया। आज हुए मंत्रिमण्डल के विस्तार से बीजेपी के कुछ विधायकों को एक बार फिर निराश होना पड़ा है। दरअसल मंत्री पद के लिए स्वयं को योग्य एवं प्रबल दावेदार मानने वाले कतिपय विधायक इस बार भी मंत्रिमंडल में जगह पाने से वंचित रह गए।
इनकी रही उपस्थिति

राजभवन में आयोजित हुए नवनियुक्त मंत्रियों के शपथ ग्रहण समारोह में गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा, मंत्री आदिम जाति कल्याण मीना सिंह, मंत्री किसान कल्याण एवं कृषि विकास कमल पटेल, मंत्री खनिज संसाधन और श्रम बृजेन्द्र प्रताप सिंह, मंत्री चिकित्सा शिक्षा विश्वास सारंग, मंत्री लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण प्रभूराम चौधरी, मंत्री सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम ओम प्रकाश सखलेचा, मंत्री औद्योगिक नीति और निवेश प्रोत्साहन राजवर्धन सिंह दत्तीगांव, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) भारत सिंह कुशवाहा और प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा उपस्थित थे। कार्यक्रम में पुलिस महानिदेशक विवेक जौहरी एवं मध्यप्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव ए.पी. सिंह सहित अन्य विभागों के अधिकारीगण मौजूद थे।
8 लाख कैरेट हीरों का खजाना क्या जमीन में ही दफन रहेगा !
* पन्ना में स्थित एशिया की एकमात्र हीरा खदान हुई बंद
* परियोजना संचालन के लिए 31 दिसंबर 2020 तक थी अनुमति
* हीरा खदान में उत्खनन कार्य पूरी तरह बंद करने पन्ना टाइगर रिजर्व ने भेजा पत्र
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) बहुमूल्य रत्न हीरों के खनन के लिए विश्व विख्यात मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में मझगवाँ स्थित एनएमडीसी लिमिटेड की हीरा खनन परियोजना में हीरों का उत्पादन नए साल के पहले दिन से ही बंद हो गया है। पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक उत्तम कुमार शर्मा ने महाप्रबंधक, हीरा खनन परियोजना को एक पत्र जारी कर दिनांक 01 जनवरी 2021 से परियोजना में उत्खनन कार्य पूरी तरह से बंद करने के निर्देश दिए थे। जिसके परिपालन में हीरा खदान व प्लांट को बंद कर दिया गया है। परियोजना के संचालन की स्वीकृति सम्बंधी अवधि के समाप्त होने के कारण हीरों के उत्पादन को तत्काल प्रभाव से बंद करना पड़ा है।
विदित हो कि एनएमडीसी लिमिटेड की हीरा खदान पन्ना टाइगर रिजर्व के गंगऊ अभ्यारण्य के अंतर्गत आने वाली वन भूमि रकवा 74.018 हेक्टेयर पर संचालित है। हीरा खदान के संचालन की स्वीकृति 31 दिसम्बर 2020 तक रही है। परियोजना की स्वीकृति अवधि समाप्त होने पर हीरा खदान को बंद करना पड़ा है। जिससे परियोजना से लेकर एनएमडीसी लिमिटेड के मुख्यालय हैदराबाद तक हड़कम्प मचा हुआ है। इधर, हीरा खनन परियोजना के बंद होने की खबर से पन्ना जिले के लोग निराश और नाराज़ है। अधिकाँश लोग इसे स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उदासीनता व नाकारेपन के तौर पर देख रहे हैं।
पन्ना जिला मुख्यालय से महज 20 किलोमीटर की दूरी पर मझगवाँ स्थित हीरा खनन परियोजना एशिया महाद्वीप की एकमात्र मैकेनाइज्ड परियोजना है। पर्यावरण हितैषी खनन के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान कायम करने वाली एनएमडीसी लिमिटेड की इस खदान में नवीनतम यंत्रीकृत तकनीक का उपयोग एवं उच्चतम सुरक्षा मापदण्डों का पालन करते हुए हीरों का उत्पादन किया जाता है। जिसकी उत्पादन क्षमता एक लाख कैरेट हीरे प्रतिवर्ष है। वर्ष 1968 से लेकर अब तक इस खदान से कुल 13 लाख कैरेट हीरे का उत्पादन किया जा चुका है।

बेशक़ीमती हीरे उगलने वाली इस खदान से अभी भी 8.50 लाख कैरेट हीरे का उत्पादन (खनन) होना शेष है। इस स्थिति में परियोजना को अगर संचालन हेतु समस्त आवश्यक अनुमति/स्वीकृति नहीं मिलती है तो अरबों रुपए मूल्य के हीरों का यह अकूत खजाना जमीन में ही दफ़न रह जाएगा। जानकारों का मानना है, देश की आर्थिक मजबूती के लिहाज से मझगवां खदान में उपलब्ध हीरों के भण्डार का सम्पूर्ण उत्खनन होना आवश्यक है।
हीरा खनन परियोजना मझगवां के मुख्य महाप्रबंधक एस. के. जैन भी इस बात इत्तेफाक रखते हैं। उन्होंने रडार न्यूज़ को बताया कि परियोजना के संचालन की स्वीकृति अवधि समाप्त हो जाने के कारण 01 जनवरी 2021 से उत्खनन कार्य को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। परियोजना को आगे संचालित रखने के लिए आवश्यक अनुमति हाँसिल करने आवेदन पत्र राज्य वन्य प्राणी बोर्ड तथा वन एवं पर्यावरण मंत्रालय में लंबित है।
श्री जैन ने बताया कि परियोजना के खनन पट्टे (लीज) की अवधि मध्य प्रदेश सरकार के द्वारा 30 जून 2040 बढ़ाई गई है। कोरोना महामारी के कारण शेष अन्य स्वीकृतियां मिलने में देरी हुई है। लेकिन इन पर जल्दी ही निर्णय होने उम्मीद है। आवश्यक स्वीकृति मिलते ही हीरों का उत्पादन पुनः शुरू हो जाएगा।
इस्पात राज्य मंत्री को श्रमिक संघों ने सौंपा ज्ञापन

हीरा खनन परियोजना को शीघ्रता से पुनः संचालित कराने के लिए एनएमडीसी लिमिटेड के शीर्ष अधिकारी जहाँ हर सम्भव प्रयास कर रहे है वहीं श्रमिक संघों की अगुवाई में परियोजना के कर्मचारी भी अपने स्तर इस मुहिम को आगे बढाने में जुटे हैं। उल्लेखनीय है कि हीरा खनन परियोजना पर गहराते संकट के बीच केन्द्रीय इस्पात राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते नव वर्ष पर जब मझगवाँ पहुंचे तो परियोजना के दोनों प्रमुख श्रमिक संघों पीएचकेएमएस एवं एमपीआरएचकेएमएस की ओर से उन्हें संयुक्त रूप से एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया।
श्रमिक संघों के पदाधिकारियों ने परियोजना के संचालन में उत्पन्न संकट की विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि खनिज संपदा प्रकृति में विशेष परिस्थितियों में निर्मित होती है, जिसका स्थानांतरण असंभव होता है। खनन कार्य खनिज संपदा के प्राप्ति स्थल पर ही करना होता है।
ज्ञातव्य हो कि हीरा खनन परियोजना का प्रारंभ सन 1958 में हुआ था, जबकि वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 में लागू हुआ है। बीते 5 वर्षों में परियोजना द्वारा नैगम सामाजिक दायित्व के तहत 1037.56 लाख रुपये व्यय किए गए हैं। परियोजना बंद होने की स्थिति में पन्ना जिले के लोग मिलने वाले इस लाभ से वंचित हो जाएंगे।
श्रमिक नेता भोला प्रसाद सोनी एवं समर बहादुर सिंह ने केन्द्रीय इस्पात राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते से मांग की है, हीरा खनन परियोजना के निर्विध्न संचालन हेतु राज्य वन्य प्राणी बोर्ड एवं केन्द्र सरकार से समस्त अपेक्षित अनुमति/स्वीकृति दीर्घकालीन अवधि के लिए स्थायी तौर दिलाई जाएँ।
हजारों लोग होंगे प्रभावित

हीरा खनन परियोजना मझगवां के बंद होने की खबर आने के बाद से ही पन्ना जिले के लोगों की चिंता बढ़ गई है। इससे सबसे ज्यादा परेशान परियोजना के समीप स्थित आधा दर्जन ग्रामों के रहवासी हैं। क्योंकि परियोजना के द्वारा उन्हें स्वच्छ पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवागमन एवं अन्य मूलभूत सुविधायें निःशुल्क प्रदान की जाती है। इसके अलावा समीपी ग्राम पंचायतों को विकास के लिए आर्थिक सहयोग भी दिया जाता है। एनएमडीसी लिमिटेड नैगम सामाजिक दायित्व के तहत के परियोजना के आसपास के क्षेत्र के रहवासियों के कल्याण व उनके जीवन स्तर में सकारात्मक सुधार के लिए निरंतर प्रयत्नशील है।
गौरतलब है कि जंगल व खनिज संपदा से समृद्ध पन्ना जिले में ऐसी कोई बड़ी परियोजना व उद्योग स्थापित नहीं हुए जिनसे इस पिछड़े जिले के विकास को गति मिलती। यहां पर सिर्फ एनएमडीसी की हीरा खनन परियोजना है, जिससे पन्ना की वैश्विक पहचान है। इस परियोजना के कारण ही पन्ना शहर को देश व दुनिया में डायमंड सिटी के रूप में जाना जाता है।

यदि परियोजना को वन एवं पर्यावरण विभाग से उत्खनन की अनुमति नहीं मिली और परियोजना स्थाई रूप से बंद हो जाती है तो इससे हजारों लोग जहाँ सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। वहीं हीरों की रायल्टी के रूप में शासन को प्रतिवर्ष मिलने वाले करोड़ों रुपए के राजस्व की जहां हानि होगी। डायमण्ड सिटी के रूप में पन्ना की जो पहचान है उस पर ग्रहण लग जाएगा। इसके अलावा पन्ना में डायमण्ड पार्क की स्थापना से जुड़ी घोषणा पर अमल का मामला भी खटाई में पड़ सकता है।
निकाय चुनाव टलने पर कांग्रेस नेता केके मिश्रा का तंज : बीजेपी का अनुषांगिक संगठन बन गया है “कोरोना”
* झंझावातों में उलझे सत्ताधारी दल को सता रहा है लोगों की नाराजगी डर !
भोपाल। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश में नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव एक बार फिर टाल दिए गए हैं। प्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमण को देखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग ने इस संबंध में शनिवार को आदेश जारी किया है। स्थानीय निकाय चुनावों पर अब 20 फरवरी 2021 के बाद फैसला लिया जाएगा। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव एवं नगरीय निकायों के चुनाव तीन माह के लिए स्थगित किए जाने पर विपक्ष के नेता और एक्टिविस्ट सवाल उठा रहे हैं।
कोंग्रेस के वरिष्ठ नेता केके मिश्रा ने इसे लेकर प्रदेश की शिवराज सरकार और सत्ताधारी दल बीजेपी पर तंज कसा है। उन्होंने रडार न्यूज़ से मोबाइल पर चर्चा में कहा कि कोरोना वायरस संक्रमण (कोविड-19) भारतीय जनता पार्टी का अनुषांगिक संगठन बन गया है। अपनी सुविधानुसार बीजेपी इस महामारी (कोरोना संक्रमण) के डर का इस्तेमाल कर रही है।
मिश्रा के अनुसार मध्य प्रदेश में बीजेपी और उसकी सरकार वर्तमान में कई झंझावातों से उलझी है। जिसमें खींचतान के कारण शिवराज सरकार के मंत्रिमण्डल का विस्तार न हो पाना, भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी अब घोषित न होना और ज्योतिरादित्य सिंधिया की ब्लैकमेलिंग सत्ता-संगठन के लिए परेशानी का सबब बनना शामिल है।
इसके अलावा पेट्रोल-डीजल-रसोई गैस की मनमानी मूल्य वृद्धि, बेतहाशा बढ़ती महंगाई तथा किसान आंदोलन के चलते प्रदेश के नागरिकों में व्याप्त नारजगी को लेकर भी शिवराज सरकार काफी डरी हुई है। कुल मिलाकर मौजूदा माहौल में स्थानीय निकाय चुनाव होने पर बीजेपी को बड़ा नुकसान होने की आशंका थी। इसलिए पहले चुनावी तैयारियों में सरकार की ओर से शिथिलता बरती गई। अब कोरोना संक्रमण की आड़ लेकर शिवराज सरकार ने निकाय चुनाव को पुनः टलवा दिया है।

कोंग्रेस नेता केके मिश्रा सवाल उठाते हुए कहते हैं, प्रदेश में जब कोरोना के दौरान दो दर्जन से अधिक विधानसभा सीटों पर उपचुनाव सम्पन्न हो सकते हैं और आये दिन हजारों लोगों को जोड़कर सरकारी कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, तो निकाय चुनाव कराने में फिर क्या समस्या है ?
मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग के आदेश का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि कोविड-19 संक्रमण के दौरान भारत निर्वाचन आयोग के द्वारा हाल ही में बिहार विधानसभा का सामान्य निर्वाचन एवं देश में आकस्मिक रूप से रिक्त लोकसभा एवं विधानसभा के उप चुनाव संपन्न कराए गए।
इसी प्रकार कई अन्य राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा कोरोना संकटकाल में ही राज्य में नगरीय निकायों एवं पंचायतों के चुनाव सम्पन्न करा रहे हैं जिसमें राजस्थान, जम्मू-कश्मीर एवं तेलंगाना प्रमुख हैं। हैदराबाद में भी कुछ ही दिन पूर्व नगरपालिका निगम के चुनाव हुए। सरकारी आंकड़ों को देखें तो एमपी में फिलहाल कोरोना संक्रमण की स्थिति इतनी अधिक चिंताजनक या भयावह नहीं है, फिर भी स्थानीय निकाय चुनाव कराने से प्रदेश सरकार पीछे हट रही है।
श्री मिश्रा का आरोप है कि चुनावी हार की आशंका भयभीत भाजपा सरकार कोरोना की आड़ लेकर जानबूझकर निकाय चुनावों को लगातार टाल रही है। दरअसल, माहौल अनुकूल होने की मंशा से चुनावी लाभ के लिए यह सब किया जा रहा है। प्रदेश सरकार की इस चाल को लोग भलीभांति समझ चुके हैं।




बैठक में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. एल.के. तिवारी द्वारा बर्ड फ्लू के संबंध में जानकारी देते हुए बताया गया कि बर्ड फ्लू की बीमारी पूर्व में भी प्रदेश में पक्षियों में फैल चुकी है। मानव में यह बीमारी बहुत कम ही फैलती है। बर्ड फ्लू की बीमारी का ईलाज उपलब्ध है। जिला चिकित्सालय में भी इस बीमारी की दवाएं उपलब्ध है। इस बीमारी में भी मरीज को सर्दी, जुखाम, बुखार होता है। लापरवाही बरतने पर इसका असर फेंफड़ों में हो जाने पर रोगी गंभीर अवस्था में पहुंच जाता है। किसी भी व्यक्ति को सर्दी, जुखाम, बुखार होने पर तुरंत डाॅक्टर की सलाह लेनी चाहिए।






