गड़बड़ी : एनएच-39 के चौड़ीकरण के लिए 7 करोड़ का भू-अर्जन मुआवजा बाँटा, एक इंच अधिग्रहित भूमि लिए बगैर टू-लेन सड़क भी बन गई
* प्रदेश के खनिज मंत्री बृजेन्द्र प्रताप, कोंग्रेस अध्यक्ष दिव्यारानी समेत 10 लोगों को मिला भू-अर्जन मुआवजा
* महारानी पन्ना ने मुआवजा राशि वसूली की मांग को लेकर सौंपा ज्ञापन
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) भ्रष्टाचार के लिए बदनाम मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में नित नई और हैरान करने वाली गड़बड़ियां सामने आ रहीं हैं। ताजा मामला नेशनल हाइवे के चौड़ीकरण के लिए हुए भू-अर्जन के मुआवजा वितरण से जुड़ा है। पन्ना शहर के बाहरी इलाके से निकले नेशनल हाइवे-75 (वर्तमान क्रमांक-39) के चौड़ीकरण के लिए तत्कालीन निर्माण एजेन्सी मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम रीवा के द्वारा कुछ भूमियों का अधिग्रहण कर उसके एवज में करीब 7 करोड़ रुपये का मुआवजा वितरण किया गया। लेकिन अधिग्रहित की गई भूमियों का एक इंच उपयोग किये बगैर ही सड़क का चौड़ीकरण करते हुए इसे टू-लेन सड़क में परिवर्तित कर दिया गया। दरअसल, नेशनल हाइवे के दोनों तरफ पहले से ही काफी शासकीय भूमि पड़ी थी जिसका उपयोग कर टू-लेन मय पेव्ड शोल्डर सहित चौंड़ी सड़क एवं दोनों तरफ नाली का भी निर्माण हो गया।
इस तरह बगैर आवश्यकता के भूमि अधिग्रहण करके 7 करोड़ का मुआवजा बांटने के औचित्य पर सवाल उठना स्वभाविक है। मजेदार बात यह कि कथित तौर भू-अर्जन में हुए इस गड़बड़ी का लाभ पन्ना के जिन आधा दर्जन से अधिक लोगों को मिला है उनमें शिवराज सरकार के खनिज एवं श्रम मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह, जिला कोंग्रेस अध्यक्ष दिव्यारानी सिंह मुख्य रूप से शामिल हैं। हालाँकि जब यह भू-अर्जन हुआ था उस समय बृजेन्द्र प्रताप सिंह मंत्री नहीं थे।
पन्ना के ज्वलंत मुद्दों को उठाकर पिछले कुछ समय से सुर्ख़ियों में बनीं महारानी जीतेश्वरी देवी ने नेशनल हाइवे के भू-अर्जन मामले में अनियमितता पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नाम पन्ना कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपकर भू-अर्जन मुआवजा राशि ब्याज समेत वापस लिए की मांग की है। महारानी के अनुसार अधिग्रहित भूमि भारतीय सेना की है। उन्होंने शुक्रवार को इस मुद्दे पर एक प्रेस वार्ता भी की। जिसमें मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह एवं उनकी भाभी जिला कोंग्रेस अध्यक्ष दिव्यारानी सिंह पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अति पिछड़े पन्ना जिले को कतिपय भाजपाई और कोंग्रेसी नेता मिलकर लूट रहे हैं। नेशनल हाइवे के चौड़ीकरण हेतु भू-अर्जन कर उक्त भूमियों को उपयोग से मुक्त रखने का मामला इसका एक जीवंत उदाहरण है। महारनी जीतेश्वरी देवी ने पन्ना के अहम मुद्दों पर क्षेत्रीय सांसद एवं प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा की रहस्मयी चुप्पी को लेकर सवाल उठाते हुए उनकी भूमिका की तीखी आलोचना की है।
उल्लेखनीय है कि, नेशनल हाइवे क्रमांक-39 के पन्ना-सतना खण्ड अंतर्गत पन्ना शहर के अंदर चौड़ीकरण हेतु निर्माण एजेंसी एमपीआरडीसी रीवा की मांग पर पन्ना जिला प्रशासन के द्वारा कराये गए भू-अर्जन में कुल 10 लोगों को अर्जित भूमि, मकान, वृक्ष, भूमि के मूल्य पर 10 प्रतिशत विकास राशि तथा 10 प्रतिशत सर्विस चार्ज सहित कुल प्रतिकर राशि- 6,98,28,804.10/- रुपए का भुगतान किया गया। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार इसमें जिला कोंग्रेस अध्यक्ष दिव्यारानी सिंह एवं कोंग्रेस नेता किशन शिवहरे की भूमि का सर्वाधिक अधिग्रहण हुआ और दोनों को इसके एवज में सबसे अधिक राशि भी मिली। जबकि मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह एवं उनके छोटे भाई लोकेन्द्र प्रताप सिंह को 49,87,015/- की मुआवजा राशि प्राप्त हुई है।
यहां बड़ा सवाल यह कि जब अधिग्रहीत की गई भूमि का कथित तौर उपयोग किये बगैर ही सड़क का चौड़ीकरण हो गया तो फिर बेबजह भू-अर्जन पर शासन के 7 करोड़ रुपए क्यों खर्चे गए। इस मामले में निर्माण एजेंसी एमपीआरडीसी रीवा के तत्कालीन तकनीकी अधिकारियों की भूमिका की जांच भी बेहद जरुरी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भू-अर्जन के इस बहुचर्चित मामले कथित लाभार्थी भू-स्वामियों से मुआवजा राशि की वसूली होती है या नहीं।
इनका कहना है –

“अपर कलेक्टर को भूमि-अधिग्रहण सम्बंधी मामले की जांच के लिए निर्देश दिए गए हैं। संभवतः एक सप्ताह के अंदर इस मामले की वास्तविकता सामने आ जायेगी। जांच रिपोर्ट के तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।”
– संजय कुमार मिश्र, कलेक्टर, पन्ना।
देश में जो कृषि सुधार 25-30 वर्ष पहले हो जाने थे वे अब हुए हैं : मोदी
* प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रदेश के लाखों किसानों को सीधे (वर्चुअली) संबोधित किया
* सीएम शिवराज ने 35 लाख किसानों को 1600 करोड़ रूपए की राहत राशि अंतरित की
भोपाल। (www.radarnews.in)प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि मध्यप्रदेश सरकार पूरी तरह से किसानों को समर्पित है तथा यहाँ किसानों की भलाई के लिए निरंतर कार्य हो रहे हैं। आज प्रदेश के 35 लाख से अधिक किसानों के खातों में फसल नुकसानी के 1600 करोड़ रूपए की राशि सीधे उनके खातों में अंतरित की जा रही है, कोई बिचौलिए नहीं, कोई कमीशन नहीं। यह भारत में पिछले 5-6 वर्षों में बनाई गई व्यवस्था का परिणाम है, जिसकी पूरे विश्व में आज प्रशंसा हो रही है। किसानों को खेती से जुड़े कार्यों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड दिलाए जा रहे हैं, जिससे उन्हें कम ब्याज दर पर ऋण प्राप्त हो रहा है। आज यहां कोल्ड स्टोरेज, वेयर हाऊस आदि कृषि अधोसंरचनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास भी हुआ है, जो कि किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी होंगे। देश में भंडारण की कमी के चलते प्रतिवर्ष एक लाख करोड़ के फल, सब्जी, अनाज खराब हो जाते हैं। देश में भंडारण केन्द्रों का नेटवर्क बनाना तथा फूड प्रोसेसिंग के उद्यम स्थापित करना हमारी प्राथमिकता है।
लाखों किसान वर्चुअली शामिल हुए
कार्यक्रम में प्रदेश की समस्त 22 हजार 810 ग्राम पंचायतों, 52 जिला मुख्यालयों, 313 विकासखण्ड मुख्यालयों, 237 मंडियों तथा कृषि विज्ञान केन्द्रों से लाखों किसान वर्चुअली शामिल हुए। कार्यक्रम को देखने के लिए एक करोड़ 11 लाख व्यक्तियों ने वेबसाइट पर प्री-रजिस्ट्रेशन कराया था। किसानों ने फीडबैक के रूप में अपने फोटो भी भिजवाये।
प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि तीनों कृषि कानून किसानों के लिए अत्यंत लाभदायक एवं कृषि की उन्नति के लिए परम आवश्यक है। ये कानून 25-30 वर्ष पहले ही देश में लागू हो जाने थे। पिछली सरकारों ने अपने घोषणा पत्रों में इन्हें लागू करने का जिक्र तो किया परंतु कार्य नहीं किया। कृषि सुधार के संबंध में स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट को गत सरकार ने दबा दिया, जबकि हमने उसे लागू किया है। आज जब हमारी सरकार ने किसानों के हित में कृषि सुधारों को लागू किया है तो किसानों में भ्रम एवं डर फैलाया जा रहा है। किसान भाई इसे समझें और बिल्कुल भी भ्रमित न हों। हमारी नीयत माँ गंगा एवं माँ नर्मदा के जल जैसी पवित्र है। हमारा हर कदम किसानों के हित में है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज प्रदेश के रायसेन में आयोजित किसान महासम्मेलन में प्रदेश के लाखों किसानों को सीधे (वर्चुअली) संबोधित किया। किसान कार्यक्रम स्थल से तथा प्रदेश के सभी जिला, जनपद तथा ग्राम पंचायतों से वर्चुअली जुड़े थे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रदेश के साढ़े 35 लाख किसानों के खातों में फसल नुकसानी की प्रथम किश्त के रूप में 1600 करोड़ रूपए की राशि अंतरण की शुरूआत की। मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा कार्यक्रम में 70 करोड़ रूपए से अधिक के कृषि अधोसंरचना विकास के कार्यों का शिलान्यास/लोकार्पण किया। इसके साथ ही 2 हजार मछुआ पालक एवं पशुपालकों को किसान क्रेडिट कार्ड का वितरण भी किया गया। कार्यक्रम में सांसद व्ही.डी. शर्मा, कृषि मंत्री कमल पटेल, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी आदि उपस्थित थे।
कर्जमाफी का वादा पूरा नहीं किया
प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि गत सरकार ने किसानों से किया गया कर्जमाफी का वादा पूरा नहीं किया। किसानों के कर्ज माफ नहीं हुए तथा उन्हें कर्जमाफी के स्थान पर बैंकों के नोटिस व गिरफ्तारी के वारंट मिले। आज किसानों के हित में किए जा रहे सुधारों का विपक्षी विरोध कर रहे हैं तथा भ्रम फैला रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि हमारी सरकार किसानों को पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध करा रही है। हमने यूरिया की कालाबाजारी रोकी है।
एम.एस.पी. बंद हो जाएगी, इससे बड़ा नहीं है कोई झूठ
प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि विपक्षी यह भ्रम फैला रहे हैं कि एम.एस.पी. बंद हो जाएगी। इससे बड़ा कोई झूठ नहीं है। हमने न केवल विभिन्न फसलों की एम.एस.पी. में पर्याप्त वृद्धि की है बल्कि गत वर्षों में एम.एस.पी. खरीदी भी कई गुना बढ़ गई है। पुरानी सरकार में जहाँ गेहूँ की एम.एस.पी. दर 1400 रूपए प्रति क्विंटल थी अब वह 1975 रूपए प्रति क्विंटल है, धान की एम.एस.पी. 1310 के स्थान पर 1870, ज्वार की 1520 के स्थान पर 2640, मसूर की 1950 के स्थान पर 5100, चने की 3100 के स्थान पर 5100, तुअर की 4300 के स्थान पर 6000 तथा मूंग की एम.एस.पी. 4500 के स्थान पर अब 7200 रूपए प्रति क्विंटल है।
मंडियों के आधुनिकीकरण पर 5 हजार करोड़ खर्च करेंगे
प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि दूसरा बड़ा झूठ यह है कि मंडियां बंद हो जाएंगी। देश की कोई भी कृषि उपज मंडी बंद नहीं होगी, बल्कि हम उनके आधुनिकीकरण पर 5 हजार करोड़ रूपए से ज्यादा खर्च करने जा रहे हैं। नए कानून के माध्यम से किसान को यह विकल्प दिया गया है कि वो अपनी फसल अपनी इच्छानुसार, जहां उसे अधिक लाभ प्राप्त हो, मंडी के भीतर या मंडी के बाहर कहीं भी बेचे। पिछले छह महीने से ये नए कानून देश में लागू किए गए हैं, आज तक कोई मंडी बंद नहीं हुई है, और न ही आगे बंद होगी।
कृषि अनुबंध कानून देता है किसानों को सुरक्षा
हमने जो फार्मिंग एग्रीमेंट (कृषि अनुबंध) कानून बनाया है, वह किसानों को सुरक्षा प्रदान करता है। बुवाई के समय ही किसान अपनी उपज का अनुबंध किसी से भी कर सकता है। यह अनुबंध उसकी फसल का ही होगा न कि उसकी भूमि का। किसानों को यह अधिकार दिया गया है कि वे उसे समाप्त कर सकेंगे परंतु व्यापारी अनुबंध को समाप्त नहीं कर पाएगा। नए कानून के अनुसार व्यापारी अनुबंध की गई दर पर किसानों की फसल खरीदने के लिए बाध्य होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य सरकारें सरल भाषा में एक अनुबंध फार्म बनाकर किसानों को उपलब्ध कराएं, जिससे उन्हें अनुबंध करने में सुविधा हो।
प्रदेश के सभी किसान प्रधानमंत्री के साथ

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश के सारे किसान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के साथ हैं तथा नए कृषि कानून लागू करने के लिए उनका अभिनंदन एवं धन्यवाद ज्ञापित करते हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी किसानों के सबसे बड़े हितैषी नेता हैं। किसानों की आय दोगुना करना उनका जुनून एवं जज्बा है। उन्होंने फसल बीमा योजना बनाई, किसानों को प्रतिवर्ष 6 हजार रूपए किसान सम्मान निधि दी जा रही है। देश के किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से 02 लाख करोड़ रूपए का रियायती दरों पर ऋण दिलवाया तथा कृषि अधोसंरचना विकास के लिए 01 लाख करोड़ रूपए की राशि दी। वे निरंतर किसानों के हित में कार्य कर रहे हैं।
किसान सम्मेलन : एमपी में सियासी फायदे के लिए “अन्नदाता की जान से खिलवाड़” कर रही शिवराज सरकार !

* पन्ना के किसान सम्मेलन में कोरोना गाइडलाइंस की उड़ी धज्जियाँ
* मास्क या फेस कवर लगाए बगैर सम्मेलन में शामिल हुए अधिकांश किसान
* कार्यक्रम में सोशल डिस्टेंसिंग का नहीं रखा ख्याल, कुर्सियों में सटकर बैठे रहे लोग
* कोरोना संक्रमण के प्रसार के खतरे को नजर अंदाज कर तमाशबीन बने रहे मंचासीन जिम्मेदार
* राहत राशि अंतरण के बहाने सम्मेलन में “3 नए विवादित कृषि कानूनों” के किसानों को गिनाए लाभ
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) देश में कोरोना महामारी के तेजी से पुनः बढ़ते संक्रमण के गंभीर खतरे को दृष्टिगत रखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कुछ समय पूर्व देशवासियों को सतर्क करते हुए कहा था, “जब तक दवाई नहीं, तब तक ढिलाई नहीं।” लेकिन प्रधानमंत्री की इस नसीहत को मध्यप्रदेश में उनकी अपनी ही पार्टी की सरकार ने पूरी तरह से नकार दिया है। प्रदेश में शुक्रवार 18 दिसम्बर को आयोजित हुए चार स्तरीय किसान कल्याण सम्मेलनों की जिस तरह की तस्वीरें एवं वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं उससे तो यही साबित होता है।
खरीफ सीजन 2020 में फसलों को हुए नुकसान की राहत राशि किसानों के खातों में अंतरित करने के नाम पर मध्य प्रदेश में शुक्रवार को राज्य स्तर से लेकर जिला, विकासखंड और ग्राम पंचायत स्तर पर इन सम्मेलनों का आयोजन कोरोना गाइडलाइंस को ताक पर रखकर किया गया। इससे खुद को किसान हितैषी बताने वाली मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार पर अपने राजनैतिक लाभ के लिए अन्नदाता किसानों के जीवन को संकट में डालने के बेहद गंभीर आरोप लग रहे हैं। और इसकी तीखी आलोचना भी हो रही है। हालांकि भाजपा नेता एवं प्रशासनिक अधिकारी इन आरोपों को असत्य और आधारहीन बता रहे हैं।
प्रदेश में किसान सम्मेलन ऐसे पर आयोजित किये गए जब कृषि सुधार के नाम पर लाये गए तीन नए विवादित कानूनों के खिलाफ देश के कई राज्यों के किसान इस कड़ाके की सर्दी में पिछले कई दिनों से सड़कों पर उतरकर आंदोलन कर रहे हैं। इधर, किसान सम्मेलनों के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एमपी के किसानों को यह बात समझाने का प्रयास किया कि, तीनों कृषि कानून किसानों के लिए अत्यंत लाभदायक एवं कृषि की उन्नति के लिए परम आवश्यक है।

मध्य प्रदेश के पन्ना जिला मुख्यालय के पॉलिटेक्निक महाविद्यालय के ग्राउण्ड में शुक्रवार को आयोजित हुए किसान सम्मेलन को लेकर सीएम के निर्देशानुसार जिला प्रशासन ने कड़ी मेहनत कर अधिकतम किसानों को तो इसमें जोड़ा लेकिन भीड़ जुटाकर नम्बर बढ़ाने के चक्कर में कोरोना संकटकाल में किसानों की जीवन सुरक्षा को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। इस सम्मलेन के टेण्ट के अंदर बैठे कई किसानों ने मास्क या फेस कवर नहीं पहना हुआ था। सैंकड़ों गरीब किसान अपने नाक-मुंह को ढके बगैर ही सम्मलेन में पूरे समय बैठे रहे। कार्यक्रम में सोशल डिस्टेंसिंग की भी धज्जियाँ उड़ती रहीं। टेण्ट के अंदर किसानों के बैठने के लिए लगाई गईं कुर्सियों की लाइन के बीच निर्धारित फासला नहीं रखा गया। जबकि कोरोना संक्रमण से बचाव के प्रति आमजन को जागरूक करने “2 गज़ दूरी और मास्क है जरुरी” संदेश का प्रचार-प्रसार किया जाता है।

पन्ना के किसान सम्मेलन में प्रदेश के खनिज एवं श्रम विभाग के मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह, पन्ना कलेक्टर संजय कुमार मिश्र एवं भाजपा के अन्य नेता-जनप्रतिनिधि मंचासीन रहे। इसे विडंबना ही कहा जाएगा कि कोरोना संक्रमण को लेकर लोगों को लापरवाही न बरतने की नसीहत देने एवं इसकी रोकथाम को लेकर दिशा-निर्देश जारी करने वाले मंत्री व अफसरों के सामने ही किसान सम्मेलन में कोरोना गाइडलाइंस की धज्जियाँ उड़ती रहीं और वे इसे नजरअंदाज करते हुए तमाशबीन बने बैठे रहे। राजनैतिक उद्देश्य की पूर्ती को लेकर किसान हितैषी सरकार के नुमाइंदे किसानों के जीवन सुरक्षा से जुड़े मुद्दे पर इस हद तक संवेदनहीन हो जाएंगे इसकी कल्पना भी किसी ने नहीं की थी।
भीड़ जुटाने गांव से बुलाए गए किसान

उल्लेखनीय है कि पन्ना के जिला स्तरीय किसान सम्मेलन में पंचायतों के सचिव एवं रोजगार सहयक चार पहिया वाहनों में 20 से 50 किसानों को लेकर कार्यक्रम में सम्मलित हुए। इसके आलावा कृषि, सहकारिता, मत्स्य पालन, उद्यानिकी आदि विभागों के अधिकारियों ने कार्यक्रम में भीड़ जोड़ने अहम भूमिका निभाई। इस सम्मलेन में करीब 1500 किसान शामिल हुए। जिसे लेकर विपक्षी दलों के नेताओं का आरोप है कि भीड़ जुटाऊ इन कार्यक्रमों में प्रशासनिक मशीनरी का खुलकर दुरूपयोग किया गया है। भीड़ लाने वाले प्रशासनिक अमले के द्वारा अधिकाँश व्यवस्थाएं भ्रष्टाचार के मद से की गई हैं। इस तरह के आयोजनों से पंचायतों में भ्रष्टाचार बढ़ने की बात भी कही जा रही है।
आपराधिक कृत्य किया

जिला कोंग्रेस कमिटी पन्ना के महामंत्री दीपचन्द्र अग्रवाल ने किसान सम्मेलनों के आयोजन को सत्ता का खुलकर दुरूपयोग करार दिया है। उनका कहना है कि किसानों की भीड़ जुटाने के लिए तो लाखों रुपए खर्च किये गए लेकिन कोरोना महामारी से बचाव के लिए प्रशासन उन किसानों को एक मास्क भी उपलब्ध नहीं करा सका जिनके पास मास्क/फेस कवर नहीं था। वर्तमान में शादी-विवाह एवं धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन की अनुमति कड़ी शर्तों के साथ दी जा रही है। इनमें शामिल होने वालों की सख्या भी निर्धारित है। कुल मिलाकर आम आदमी के लिए कोरोना की पाबंदियां हैं लेकिन इस तरह के सरकारी कार्यक्रम को कोरोना गाइडलाइंस के पालन से छूट देकर प्रदेश सरकार ही कोरोना संक्रमण फ़ैलाने का अक्षम्य अपराध कर रही है। श्री अग्रवाल की मांग है कि इस मामले में शासन-प्रशासन में बैठे लोगों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई होनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो यह दोहरा मापदंड कहलाएगा।
कोरोना सिर्फ आम लोगों और विपक्ष के लिए

जिला कोंग्रेस कमिटी पन्ना की अध्यक्ष दिव्यरानी सिंह ने कहा कि किसानों को कृषि संबंधी कानूनों पर भ्रमित करने के लिए भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने बेहद ही गैर जिम्मेदार तरीके से किसान सम्मेलन आयोजित करके उनके जीवन को खतरे में डालने कृत्य किया है। यह घोर निंदनीय है। सम्मेलनों में कोरोना गाइडलाइंस का खुला उल्लंघन करते हुए इतनी अधिक भीड़ जोड़ने से समुदाय में कोरोना वायरस संक्रमण अधिक तेजी फैलने की आशंका है। भाजपा सरकारों के क्रिया-कलापों से यह साफ़ हो चुका है कि कोरोना की रोकथाम के कानूनी प्रावधान सिर्फ आम लोगों और सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वाले विपक्ष को चुप कराने के लिए है, मगर सरकार के लिए ऐसा कुछ भी नहीं है। श्री मती सिंह का कहना है कि नए कानून किसानों के हित में नहीं है यह बात देश के किसान समझ चुके इसलिए वे अपने हितों की रक्षा के लिए आंदोलन कर रहे हैं। कोंग्रेस पार्टी अन्नदाता किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है।
देश-प्रदेश को बर्बाद कर रही भाजपा सरकार

किसान नेता जयराम यादव का आरोप है कि केन्द्र की मोदी और प्रदेश की शिवराज सरकार देश व प्रदेश को पूरी तरह से बर्बाद करने पर आमदा है। नोटबंदी, जीएसटी, बेहद सख्त लॉकडाउन आदि निर्णयों को बगैर तैयारी के मनमाने तरीके से लागू करने और अब किसान विरोधी कानून बनाकर मोदी सरकार ने यह साबित कर दिया है कि उसे गरीब-मजदूर-किसान से कोई लेना देना नहीं है। भाजपा की सरकारें पूरी तरह से अडानी-अंबानी तथा दूसरे उद्योगपतियों के हितों को साधने के लिए काम कर रहीं है। कोरोना गाइडलाइंस को धता बताते हुए किसान सम्मलेन में भीड़ जोड़ना बताता है कि इस सरकार को किसानों की वाकई कितनी चिंता है। श्री यादव का मानना है कि देश के अधिकाँश मीडिया समूह बिके हुए हैं और कोंग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों के नेता डरे हुए हैं इसलिए वे भाजपा सरकारों की इस मनमानी का खुलकर कड़ा विरोध नहीं करते हैं। इसका अनुचित लाभ उठाते हुए भाजपा की सरकारें पूरी तरह निरंकुश तानाशाही तरीके से काम कर रहीं है।
भ्रम फैला रहे कोंग्रेस और विपक्षी दल

भारतीय जनता पार्टी पन्ना के मीडिया प्रभारी आशीष तिवारी की मानें तो पन्ना या अन्य स्थानों पर आयोजित हुए किसान सम्मेलनों में कोरोना गाइडलाइंस का जरा भी उल्लंघन नहीं हुआ है। सम्मेलन में किसान मास्क लगाकर शामिल हुए और सोशल डिस्टेंसिंग (आपस में उचित दूरी) का भी पालन किया गया। श्री तिवारी कहते हैं कि देश की जनता के द्वारा नकार दिए गए राजनैतिक दल कोंग्रेस एवं अन्य विपक्षी पार्टियां हर मुद्दे पर झूठ बोलकर भ्रम फ़ैलाने का काम करते हैं। एमपी के किसान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के साथ कृषि कानूनों के समर्थन में खड़े हैं, यह बात विपक्षी दलों को रास नहीं आ रही है इसलिए वे कोरोना के नाम पर बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। कृषि सुधार के लिए लाये गए कृषि कानून पूरी तरह किसानों के हित में हैं। इन कानूनों के जरिए अन्नदाता के अधिकारों को सुरक्षित करने का काम किया गया है।
कोरोना गाइडलाइंस का किया पालन

पन्ना जिले के प्रशासनिक मुखिया कलेक्टर संजय कुमार मिश्र का दावा है कि जिला स्तरीय किसान सम्मेलन शासन के निर्देशानुसार कोरोना गाइडलाइंस का पालन करते हुए आयोजित किया गया है। सम्मेलन में भाग लेने वाले जिन किसानों के पास मास्क नहीं थे उन्हें मास्क उपलब्ध कराए गए। साथ ही बैठक व्यवस्था में भी सोशल डिस्टेंसिंग का पूरी तरह पालन किया गया। कलेक्टर श्री मिश्र का कहना पॉलिटेक्निक महाविद्यालय के विशाल ग्राउण्ड में कार्यक्रम सिर्फ इसीलिए रखा गया था ताकि आपस में उचित दूरी बनी रहे।
क्राइम : लाठी-कुल्हाड़ी से हमला कर वृद्ध किसान की दिनदहाड़े नृशंस हत्या
* आरोपियों ने पुरानी बुराई के चलते वारदात को दिया अंजाम
* पन्ना जिले के देवेन्द्रनगर थाना क्षेत्र के बड़ागाँव की घटना
* चार दिन पूर्व मृतक की पत्नी के साथ की गई थी मारपीट
* पुलिस पर आरोप समय रहते आरोपियों के खिलाफ नहीं की कार्रवाई
देवेन्द्रनगर (पन्ना) ।(www.radarnews.in) पन्ना जिले के देवेन्द्रनगर थाना क्षेत्रान्तर्गत ग्राम बड़ागांव में पुरानी बुराई के चलते गांव के ही कुछ लोगों ने वृद्ध किसान छोटे लाल चौधरी निवासी लल्ली चौधरी 50 वर्ष की हत्या कर दी। बेखौफ अपराधियों द्वारा दिनदहाड़े लाठी-कुल्हाड़ी से हमला कर बड़ी ही नृशंसता के साथ हत्या की वारदात को अंजाम दिया गया। आरोपियों ने हत्या की वारदात के चश्मदीद मृतक के 22 वर्षीय पुत्र प्रमोद चौधरी को भी जान से मारने का प्रयास किया लेकिन वह किसी तरह अपनी जान बचाकर मौके से भाग निकलने में सफल रहा। हत्या की वारदात की खबर आने के बाद से ग्राम बड़ागांव सहित इलाके में सनसनी व्याप्त है।
बुधवार 16 दिसम्बर की सुबह प्रमोद चौधरी 22 वर्ष निवासी ग्राम बड़ागाँव खेत में काम कर रहे अपने पिता को खाना देने के लिए गया था। प्रमोद जब वहां पहुंचा तो उसने देखा कि गांव का ही धनपत कुशवाहा व अन्य 2 लोग उसके पिता छोटे लाल चौधरी निवासी लल्ली चौधरी 50 वर्ष के ऊपर लाठी-कुल्हाड़ी से हमला कर उसे मार रहे थे। हमलावरों ने जब प्रमोद को आते हुए देखा तो वे उसे भी जान से मारने के लिए दौड़े लेकिन वह किसी तरह मौके से भाग निकला। प्रमोद ने गांव पहुंचकर घटना की जानकारी ग्रामीणों और अपने परिजनों को दी। साथ ही तुरंत देवेन्द्रनगर थाना पुलिस को सूचना दी गई। आनन-फानन मौके पर पहुंची थाना पुलिस ने दबिश देकर हत्यारोपियों को तत्परता से हिरासत में ले लिया। हालांकि समाचार लिखे जाने तक इस खबर की आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हो सकी।

उल्लेखनीय है कि छोटे लाल चौधरी के कातिलों ने चार दिन पूर्व उसकी पत्नी के साथ मारपीट की थी। पीड़ित दलित परिवार के द्वारा मारपीट की घटना की सूचना देवेन्द्रनगर थाना में दी गई। पीड़िता का आरोप है कि पुलिस ने उसकी शिकायत को हल्के में लेते हुए आरोपियों के ख़िलाफ समय रहते ठोस कार्रवाई (गिरफ्तारी) नहीं की। पुलिस की इस लापरवाही एवं उदासीनता का खामियाजा पीड़िता को अपने पति की नृशंस हत्या के रूप में भुगतना पड़ा है। इस बात की चर्चा पूरे इलाके में हो रही है। उधर, हत्याकाण्ड की सूचना मिलने पर एडीशनल एसपी बीकेएस परिहार, एसडीओपी एवं एफएसएल टीम ने मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का मुआयना किया और मृतक के पुत्र से घटना के संबंध जानकारी प्राप्त की। इस दौरान एडीशनल एसपी द्वारा हत्यारोपियों की गिरफ्तारी एवं मामले की जांच को लेकर थाना प्रभारी देवेन्द्रनगर को आवश्यक निर्देश दिए गए।
एमडीए कार्यक्रम : जिला पंचायत अध्यक्ष व कलेक्टर ने फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन कर अभियान का किया शुभारम्भ
* जिले में 10 लाख 77 हजार लोगों को फाइलेरिया रोधी दवा खिलाने का लक्ष्य
* स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर-घर जाकर अपने सामने करायेंगी दवा का सेवन
* प्रदेश के फाइलेरिया से सर्वाधिक प्रभावित जिलों में शामिल है पन्ना
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) जिले में फाइलेरिया रोधी सामूहिक दवा सेवन के 17वें अभियान का शुभारंभ रविवार 13 दिसम्बर को पाॅलीटेक्निक काॅलेज पन्ना में आयोजित हुए एक गरिमामयी सादे समारोह से हुआ। कोरोना गाइड लाइन्स का पालन करते हुए उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जिला पंचायत पन्ना अध्यक्ष रविराज सिंह यादव एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में पन्ना कलेक्टर संजय कुमार मिश्र शामिल हुए। इस कार्यक्रम में अपर संचालक व्ही.बी.डी.सी.पी. डाॅ. संतोष जैन, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी पन्ना डाॅ. एल.के. तिवारी, डब्ल्यूएचओ की स्टेट कोर्डीनेटर एन.टी.डी. डाॅ. मंजुलता शर्मा, डीपीएम पन्ना, डाॅ. प्रितेश सिंह ठाकुर, ऐपीडेमियोलाॅजिस्ट डाॅ. गुन्जन सिंह, पी.सी.आई. स्टेट कंसल्टेन्ट शेलेष वैरागी मुख्य रूप से उपस्थित रहे। उक्त सभी मंचासीन अतिथियों ने जिले में फाइलेरिया रोधी सामूहिक दवा सेवन की शुरुआत करने के साथ-साथ आमजन को इसके सेवन हेतु प्रेरित करने के उद्देश्य से मंच पर ही स्वयं दवा का सेवन किया।
इस अवसर पर कार्यक्रम की रुपरेखा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी पन्ना डाॅ. एल.के. तिवारी के द्वारा प्रस्तुत की गई। उन्होने बताया कि जिले में यह 17वां राष्ट्रीय फाइलेरिया दिवस मनाया जा रहा है। जिसमें 10,77,000 लक्षित जनसंख्या को उम्र और पात्रता के अनुसार दवा सेवन कराया जाएगा। इस अभियान में 13, 14,15 दिसम्बर 2020 तक विशेष रुप से स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर-घर जाकर फाईलेरिया रोधी दवा का सेवन करायेंगी। वहीं छूटे हुए लोगों को 16 से 22 दिसम्बर 2020 तक दवा सेवन कराया जाएगा। कार्यक्रम में राज्य स्तर द्वारा किये जा रहे प्रयासों और फाइलेरिया के मेडीकल एवं तकनीकी पक्ष के संबंध में अपर संचालक डाॅ.संतोष जैन द्वारा जानकारी दी गई। डब्ल्यूएचओ की स्टेट कोर्डीनेटर एन.टी.डी. डाॅ. मंजुलता शर्मा द्वारा कोविड-19 के प्रोटोकाॅल का पालन करते हुए दवा सेवन कराने की बात कही गई।
दवा वितरण नहीं सेवन कराना है

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पन्ना कलेक्टर संजय कुमार मिश्र ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि इस बार दवा का वितरण नहीं होना चाहिये, स्वास्थ्य कार्यकर्ता अपने समक्ष लोगों को दवा का सेवन कराएं। जिससे लक्षित जनसंख्या को शत-प्रतिशत दवा सेवन कराने का लक्ष्य हांसिल कर पन्ना जिले को फाइलेरिया मुक्त किया जा सके। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष रविराज सिंह एवं उपस्थित सभी अधिकारियों द्वारा स्वयं दवा सेवन कर इस महत्वाकांक्षी अभियान का औपचारिक शुभारम्भ किया गया। कार्यक्रम के अंत में जिला मलेरिया अधिकारी पन्ना एच.एम.रावत द्वारा कार्यक्रम में मंचासीन अतिथि एवं समस्त उपस्थितजनों का धन्यवाद ज्ञापित किया गया।
कार्यक्रम में एमआई प्रकाश आठ्या, एफआई बलीराम भूमिया, कुष्ठ सलाहकार संजय अहिरवार, शौकत अली, सलीम खान बाबू जी, उमाशंकर खरे, गोकुल यादव, अमर बाल्मीक, संतोष बाल्मीक, हैदर अली, सजनीश शर्मा, इदरीश मोहम्मद, विनोद बाल्मीक, अरविन्द बाल्मीक, रिंकू बाल्मीक, सागर बाल्मीक, राधे गोविन्द सरकार सहित मलेरिया-फायलेरिया विभाग के अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
आंचलिक स्वास्थ्य केन्द्रों में हुए कार्यक्रम
जिला स्तर के साथ-साथ खण्ड स्तर पर भी राष्ट्रीय फाइलेरिया दिवस के उदघाटन कार्यक्रम सम्पन्न हुए जिसमें राज्य स्तर एवं डब्ल्यूएचओ से आमंत्रित पर्यवेक्षक सम्मिलित हुए। स्टेट कन्सल्टेन्ट ऐन्टोमोलाॅजिस्ट डाॅ. सत्येन्द्र पाण्डेय, पूर्व नगर पलिका अध्यक्ष संदीप विश्वकर्मा, एस.डी.एम. अजयगढ़ बी.बी. पाण्डेय एवं बी.एम.ओ. डाॅ. पवन द्विवेदी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र-अजयगढ़ के इस कार्यक्रम में सम्मिलत हुए। ब्लाॅक पवई में बी.एम.ओ. पवई डाॅ.एम.एल.चौधरी, डाॅ.ओमहरि शर्मा एवं राज्य स्तर से आमंत्रित पर्यवेक्षक डाॅ. प्रवीण तिवारी द्वारा राष्ट्रीय फाइलेरिया दिवस कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया। अमानगंज में बी.एम.ओ. डाॅ. अमित मिश्रा द्वारा राज्य स्तर से आमंत्रित पर्यवेक्षक डाॅ. एम.एम. महुलिया की उपस्थिति में उदघाटन कार्यक्रम संपन्न कराया गया। शाहनगर में बी.एम.ओ. डाॅ. सर्वेश लोधी द्वारा डब्ल्यू.एच.ओ. पर्यवेक्षक डाॅ. मनजीत चौधरी की उपस्थिति में उदघाटन कार्यक्रम कराया गया और देवेन्द्रनगर में बी.एम.ओ. डाॅ. अभिषेक जैन द्वारा भाजपा मण्डल अध्यक्ष देवेन्द्रनगर अनिल गुप्ता, राज्य स्तर से आमंत्रित पर्यवेक्षक श्रीमति भावना दुबे एवं जिला व्ही.बी.डी. सलाहकार श्रीमति सदब खान की उपस्थिति में उदघाटन कार्यक्रम आयोजित कराया गया।
हादसा : बाँदा से नागपुर जा रही स्लीपर बस अनियंत्रित होकर पलटी, एक यात्री की मौत, 25 घायल
* पन्ना जिले की पहाड़ीखेरा चौकी क्षेत्र अंतर्गत हुआ हादसा
* घायलों का इलाज पन्ना, सतना और बाँदा में जारी
* महिला यात्री ने बताया, बस में 80-85 यात्री सवार थे
पन्ना।(www.radarnews.in) उत्तर प्रदेश के बाँदा से नागपुर (महाराष्ट्र) के लिए रवाना हुई मैंगो ट्रेवल्स की यात्री बस शनिवार की शाम पन्ना जिले के सीमावर्ती इलाके में अनियंत्रित होकर पलट गई। जेसीबी मशीन की मदद से अंधेरे में दुर्घटनाग्रस्त बस के शीशे तोड़कर घायल यात्रियों बमुश्किल बाहर निकाला गया। पहाड़ीखेरा चौकी क्षेत्र अंतर्गत हुए इस हादसे में करीब 25 यात्रियों को चोटें आई हैं। जबकि एक यात्री की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। घायलों में 3-4 लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है। घायलों को इलाज हेतु उनकी सुविधानुसार पन्ना, बांदा और सतना में भर्ती कराया गया है। इस हादसे के बाद से बस का अज्ञात चालक एवं अन्य स्टॉफ फरार है।

बस में सवार रही महिला यात्री सोनम शुक्ला ने पन्ना में पत्रकार टाइगर खान को जानकारी देते हुए बताया कि बाँदा से नागपुर जाने वाली मैंगो कम्पनी की बस क्रमाँक-यूपी 78 सीटी-7227 में हादसे के समय करीब 80-85 यात्री सवार थे। शाम तकरीबन 6:30 बजे पहाड़ीखेरा से 5 किलोमीटर पहले घाट चढ़ने के बाद बस अचानक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पलट गई। हादसे में कुछ यात्री स्लीपर कोच बस के नीचे दब गए। वहीं तेज झटके के साथ बस के पलटने से ऊपर स्लीपर केबिन में सो रहे यात्री सीटों पर बैठे यात्रियों के ऊपर जा गिरे। जिससे बस के अंदर चींख-पुकार मच गई। सड़क हादसे की सूचना मिलने पर पहाड़ीखेरा चौकी प्रभारी हमराही स्टॉफ के साथ मौके पर पहुंचे तो घायल यात्री अफरा-तफरी के बीच दुर्घटनाग्रस्त बस से बाहर निकलने के लिए जद्दोजहद कर रहे थे। आनन-फानन पहाड़ीखेरा से जेसीबी मशीन को मौके पर बुलाकर बस के शीशे तुड़वाए गए और फिर घायलों तथा अंदर फंसे हुए लोगों को स्थानीय ग्रामीणों की मदद से बाहर निकाला गया।

इस हादसे में करीब 25 यात्रियों को चोटें आई हैं। जबकि एक 40 वर्षीय व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई। मृतक की शिनाख्त रामबाबू यादव निवासी ग्राम बरछा थाना कालिंजर जिला बाँदा के रूप में हुई है। आधा दर्जन घायलों को इलाज हेतु पन्ना जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है। जबकि शेष घायलों के पड़ोसी जिला सतना एवं बाँदा में भर्ती होने की बात सामने आई है। घायलों में महिलाएं, बच्चे, वृद्ध और युवा शामिल हैं। इस हादसे में 3 से 4 घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है। उल्लेखनीय है कि दुर्घटना ग्रस्त बस के आधा दर्जन घायलों को पहाड़ीखेरा से इलाज हेतु पन्ना के लिए रवाना करने की सूचना मिलते ही पन्ना एसडीओपी आर.एस. रावत और नायब तहसीलदार पन्ना ममता शर्मा दलबल के साथ तुरंत जिला चिकित्सालय पहुंचीं। इनके द्वारा घायलों के उपचार आदि की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित कराई गई।
मध्य प्रदेश के खनिज मंत्री के गृह जिले में रेत माफ़िया से मैनेज है प्रशासन !

* रेत खदानों के पेटी ठेका की अनुबंध शर्तों से “बेशर्म सांठगांठ” का हुआ खुलासा
* मैनेजमेंट के दम पर खुलेआम जारी है बहुमूल्य खनिज सम्पदा की लूट का खेल
* पन्ना की केन नदी, पहाड़ और पर्यावरण के विनाश पर मौन हैं जिम्मेदार
* प्रशासन के मैनेजमेंट को लेकर पूर्व में रेत माफियाओं की बातचीत का वीडियो हुआ था वायरल
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रूख अख्तियार करने का संदेश देते हुए कुछ वर्ष पूर्व कहा था कि, “ना खाऊँगा, ना खाने दूँगा”। उन्होंने देश से भ्रष्टाचार समाप्त करने का वादा करते हुए अपने चिरपरिचित अंदाज में यह सख्त चेतावनी भ्रष्ट नेताओं और अधिकारियों को दी थी। प्रधानमंत्री की ही तर्ज पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भ्रष्टाचार को किसी भी सूरत में बर्दाश्त न करने की बात कई अवसरों पर कहते रहे हैं। शिवराज ने तो एमपी में भ्रष्टाचार के ख़िलाफ जीरो टॉलरेन्स की नीति अपनाने का बकायदा ऐलान भी किया था। लेकिन इन इरादों और दावों के बीच भारत हाल ही में एशिया महाद्वीप का सबसे भ्रष्ट देश बन गया है। यह बात भ्रष्टाचार पर आने वाली ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की ताजा रिपोर्ट में सामने आई है। हालांकि भ्रष्टाचार की जमीनी सच्चाई इस रिपोर्ट से भी कहीं अधिक शर्मनाक और विकराल है।
हमारे यहां भ्रष्टाचार/घूसख़ोरी की जड़ें व्यवस्था में काफी गहराई तक फैली हैं, इन्हें सिर्फ कोरी बयानबाजी से उखाड़ पाना असंभव है। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले की बात करें तो भ्रष्टाचार के लिए बदनाम अति पिछड़े इस जिले में चौतरफा खुलेआम लूटपाट मची है। शिव “राज” में सत्ता का संरक्षण प्राप्त माफिया और प्रशासन के बीच यहां ग़जब की सांठगांठ है। इसका खुलासा जिले की रेत खदान समूह ठेकेदार के द्वारा रेत खदानों को पेटी ठेका पर देने के लिए तैयार कराए गए अनुबंध पत्र के मसौदे में शामिल शर्तों से हुआ है। इसमें रेत खदान ठेकेदार के द्वारा “प्रशासनिक मैनेजमेंट” के संबंध में पेटी ठेकेदारों के लिए वस्तुस्थिति स्पष्ट की गई है।
अनुबंध पत्र के मसौदे के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद से जिले के प्रशासनिक हल्कों में आंतरिक खलबली मची है। मजेदार बात यह है कि रेत की लूट की खुली छूट देकर कमीशन खाने वाले भ्रष्ट अफसर और पन्ना को खनन से खोखला करने वाला रेत ठेकेदार दोनों ही डैमेज कण्ट्रोल की रणनीति के तहत अपने इस “गुप्त इकरारनामे” को झुठला रहे हैं। मालुम हो कि पन्ना में लम्बे समय से फल-फूल रहे माफिया और प्रशासन के नापाक रिश्ते पहले भी उजागर हो चुके हैं। थोड़ा फ़्लैश बैक में जाएं तो कमलनाथ सरकार के समय पन्ना के पूर्व कलेक्टर कर्मवीर शर्मा के कार्यकाल के दौरान रेत माफियाओं की बातचीत का एक वीडियो वायरल हुआ था। जिसमें रेत के अवैध उत्खनन के एवज में कलेक्टर व माइनिंग ऑफिसर को क्रमशः पाँच और तीन लाख रुपए एडवांस देने पड़ते हैं, जैसी हैरान करने वाली बात सामने आई थी।
अनुबंध पत्र के प्रारूप में क्या है ?

पन्ना जिले की रेत खदान समूह के ठेकेदार रसमीत सिंह मल्होत्रा के द्वारा कथित तौर पर अजयगढ़ तहसील क्षेत्र की अनुबंधित रेत खदानों को पेटी ठेका पर देने के उद्देश्य से मैन पावर प्रोवाईडर/सर्विस प्रोवाइडर के लिए 14 बिंदुओं का एक अनुबंध पत्र तैयार कराया गया है। जिसमें नियम-शर्तों का विस्तृत उल्लेख है। इस अनुबंध पत्र का बिंदु क्रमाँक-4 खासा चर्चाओं में बना है। दरअसल इसमें उल्लेख है कि- “रायल्टी व अन्य प्रशासनिक व मैनेजमेंट खर्च जिले के अनुबंधित वैध ठेकेदार (आर.एस.एम.) द्वारा खर्च किया जावेगा।” अनुबंध पत्र में ठेकेदार रसमीत सिंह मल्होत्रा का पूरा नाम न लिखकर शार्ट में जिले के अनुबंधित वैध ठेकेदार (आर.एस.आम) लिखा गया है।

जनचर्चा है कि, मानसून के समापन उपरांत माह अक्टूबर 2020 से इसी अनुबंध पत्र के आधार पर रेत खदानों को पेटी ठेका पर दिया गया है। अनुबंध पत्र की इस शर्त से साफ़ तौर पर जाहिर है कि जिले में बड़े पैमाने पर चल रही रेत की लूट में अधिकारियों को उनका हिस्सा मुख्य ठेकेदार के द्वारा दिया जा रहा है। इसके एवज में संबंधित अधिकारियों ने ठेकेदार को रेत की लूट की खुली छूट दे रखी है। पन्ना की जीवनदायनी केन नदी और पर्यावरण के विनाश की कीमत पर निहित स्वार्थ पूर्ती का यह खेल पिछले छह माह से अनवरत जारी है। उल्लेखनीय है कि रडार न्यूज़ इस वायरल अनुबंध पत्र के मसौदे (प्रारूप) की स्वतंत्र रूप से इस पुष्टि नहीं करता है। मालुम हो कि वायरल अनुबंध पत्र के आलावा रेत ठेकेदार ने निजी भूमि पर रेत की अवैध खदानें संचालित करने के लिए अजयगढ़ क्षेत्र के कई ग्रामों में दर्जनों किसानों से बाकायदा अनुबंध निष्पादित किए हैं। हाल ही में रेत ठेकेदार के खिलाफ एनजीटी में प्रकरण दर्ज कराने वाले आवेदक ने इन अनुबंध को अवैध खनन के महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में पेश किया है।
विभागीय मंत्री हैं मौन

मध्यप्रदेश शासन के खनिज एवं श्रम विभाग के मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह के गृह जिले एवं निर्वाचन क्षेत्र पन्ना की अजयगढ़ तहसील अंतर्गत खुलेआम जारी रेत की लूट ने अवैध उत्खनन के पिछले सभी रिकार्ड तोड़ दिए हैं। इस क्षेत्र में रेत का अवैध खनन पहले भी होता रहा है लेकिन इतने वृहद पैमाने पर और इस तरह बेख़ौफ़ अंदाज रेत की लूट कभी नहीं हुई। आश्चर्य की बात है कि, खनिज मंत्री इस ज्वलंत मुद्दे पर न सिर्फ मौन हैं बल्कि इसकी पूरी तरह से अनदेखी भी कर रहे हैं। जबकि कुछ माह पूर्व बृजेन्द्र प्रताप ने मंत्री के रूप में खनिज विभाग का पदभार गृहण करने के पश्चात अपनी प्राथमिकताएं गिनाते हुए अवैध खनन पर प्रभावी अंकुश लगाने की बात कही थी।
पन्ना जिले को वर्तमान में रेत, पत्थर और हीरे के लिए रात-दिन जिस तरह खोखला किया जा रहा है उसे देखकर लगता है, मंत्री जी की प्राथमिकताएं अब शायद बदल चुकी हैं। कुछ इसी तर्ज पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के स्वार्थी नेता भी अवैध खनन पर खामोश हैं। चर्चा है कि अग्रिम पंक्ति कुछ नेताओं को रेत ठेकेदार ने रोजगार दे दिया है। कुछ को रेत खदान में हिस्सेदारी मिल गई तो कतिपय नेताओं के माध्यम से मशीनरी को किराया/ठेके पर लगाया गया है। वहीं पन्ना-अजयगढ़ के अधिकाँश पत्रकार और प्रशासनिक अफसर पहले से ही मैनेज हैं। ये सभी रेत की लूट से निकलने वाले घी को कम्बल ओढ़कर पी रहे हैं। अपवाद स्वरूप गिनती के चंद लोगों को छोड़कर।
बदल गया केन किनारे का भूगोल

रेत के ठेके की आड़ में पन्ना जिले की अजयगढ़ तहसील अंतर्गत खनन-पर्यावरण सम्बंधी नियम-कानूनों की धज्जियाँ उड़ाते हुए ताबड़तोड़ अंदाज में जारी अवैध खनन का दुष्परिणाम केन नदी तथा इसके कछार में मोहना ग्राम से लेकर रामनई तक साफ़ देखा जा सकता। रेत के लिए ठेकेदार ने केन नदी किनारे स्थित आधा दर्जन से अधिक ग्रामों में टीलानुमा संरचना वाले खेतों को अवैध खनन से खोखला कर दिया है। नदी किनारे शासकीय भूमि पर भी जहां कहीं रेत मौजूद है, उसे दैत्याकार मशीनों से निकाला जा रहा है। निजी एवं शासकीय भूमियों पर रेत की पूर्णतः अवैध खदानों के चलते केन नदी के कछार का भूगोल बदल चुका है। अति वृष्टि की स्थिति में केन नदी की बाढ़ से सुरक्षा प्रदान करने वाले चम्बल के बीहड़ जैसे टीलेनुमा संरचना वाले खेतों को खदान में तब्दील करने से जहां नदी किनारे स्थित गांवों में जल भराव का खतरा बढ़ गया है वहीं इस इलाके में भू-कटाव बढ़ने तथा नदी के प्रवाह में बदलाव आने की आशंका भी जताई जा रही है।
आने वाले समय में अजयगढ़ तहसील के केन पट्टी क्षेत्र के लिए निश्चित ही यह मानव निर्मित बड़ी त्रासदी साबित होगी। जिसका खामियाजा बहुसंख्यक निर्दोष लोगों को भुगतना पड़ेगा। जानकारों का मानना है कि बाढ़ से सुरक्षा प्रदान करने वाले टीलों की गहरी खुदाई के कारण नदी किनारे स्थित ग्रामों को बाढ़ की विभीषिका झेलनी पड़ सकती है। रेत ठेकेदार ने निजी एवं शासकीय भूमि पर अवैध खदानें खोदकर केन नदी के कछार के बड़े इलाके को तबाह-बर्बाद तो किया ही है, इसके आलावा सैंकड़ों लोगों के जीवन को संकट में डालने का अक्षम्य अपराध किया है। लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस भ्रष्ट और बिकाऊ व्यवस्था में जहां धन के हाथों सभी बिक गए हैं, वहां अब किसी जुर्म (अपराध) के लिए क्या कोई सजा हो सकती है ?
रेत के अवैध कारोबार पर नहीं होती कार्रवाई

रेत माफिया और प्रशासनिक अफसर लेनदेन के अपने रिश्ते को चाहे जितना भी नकारें मगर अजयगढ़ क्षेत्र में नियम-कानूनों की धज्जियाँ उड़ाते हुए जारी रेत के अनियंत्रित दोहन की विनाशलीला चींख-चींखकर कर जमीनी सच्चाई बयां कर रही है। रेत माफिया से बतौर प्रशासनिक मैनेजमेंट के रूप में मिलने वाली रिश्वत ने जिम्मेदारों की आँखों और हाथों पर पट्टी बाँध दी है। शायद यही वजह है कि रेत के अवैध खनन, परिवहन एवं भण्डारण के खिलाफ होने वाली शिकायतें जिला स्तर पर ठण्डे बास्ते में डाल दी जाती हैं। पिछले साल तक जिले में रेत के अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई भी होती रहती थी लेकिन अब यह औपचारिकता भी लगभग बंद हो चुकी है। पहले पुलिस अधिकारी भी अवैध रेत खनन-परिवहन में लगी मशीनरी-वाहन जब्त करते रहते थे। लेकिन रेत के वैध ठेके की आड़ में सत्ता के संरक्षण में जब से अवैध खनन का नया खेल शुरू हुआ है, पुलिस-राजस्व तथा खनिज विभाग के अफसर किसी अदृश्य शक्ति के दबाव में आ गए हैं।
बदली हुई परिस्थितियों में अफसरों की प्राथमिकता अपनी कुर्सी और रेत से मिलने वाली रिश्वत को बचाए रखने तक सिमट गई है। इसलिए अब इन्हें रेत का अवैध खनन-परिवहन दिखना लगभग बंद हो गया है। रेत माफिया की लूट से प्रभावित ग्रामीणों का दुःख-दर्द भी जिम्मेदारों को सुनाई नहीं देता। बताते चलें कि पन्ना जिले में जारी रेत के अवैध खनन एवं रेत खदानों को पेटी ठेका पर देने संबंधी वायरल अनुबंध पत्र की शर्तों को लेकर खनिज मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह, रेत ठेकेदार के प्रतिनिधि मोंटू अग्रवाल, पन्ना पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी एवं जिला खनिज अधिकारी रवि पटेल से उनका पक्ष जानने के लिए कई बार सम्पर्क किया गया लेकिन उनके मोबाइल फोन या तो रिसीव नहीं हुए या फिर अपनी व्यस्तता का हवाला देकर कुछ भी बोलने से बचते रहे।
इनका कहना है –

“अनुबंध पत्र के प्रारूप मात्र के आधार पर मैं कोई टिप्पणी नहीं कर सकता, अगर किसी ने इस अनुबंध को निष्पादित किया है तो उसकी कॉपी उपलब्ध कराएं मैं उचित कार्रवाई करूँगा। रेत के अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई को लेकर जिला प्रशासन जरा भी उदासीन नहीं है, जहां भी सूचना मिलती है हम उस पर कार्रवाई करते हैं। यदि कोई व्यक्ति एनजीटी या न्यायालय में जाता है यह उसका अधिकार है। हम माननीय न्यायालय के निर्देशों का अक्षरशः पालन करेंगे। मैं फिर भी इस अनुबंध पत्र के प्रारूप के संबंध में पता करता हूँ।”
– संजय कुमार मिश्र, कलेक्टर, जिला पन्ना।
महापौर/अध्यक्ष का आरक्षण : प्रदेश की 16 नगर निगम, 99 नगर पालिका एवं 292 नगर परिषद के आरक्षण की प्रक्रिया सम्पन्न
* पन्ना नगर पालिका और नगर परिषद अजयगढ़ व देवेन्द्रनगर का अध्यक्ष पद अनारक्षित महिला
* नगर परिषद ककरहटी, अमानगंज व गुनौर अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित
भोपाल/पन्ना(www.radarnews.in) प्रदेश में नए साल 2021 में होने वाले शहर सरकार के चुनाव के लिए बुधवार 9 दिसम्बर को राजधानी भोपाल के रवीन्द्र भवन में नगर निगम के महापौर, नगर पालिका व नगर परिषद अध्यक्ष पद के आरक्षण की प्रक्रिया सम्पन्न हुई। आरक्षण की कार्रवाई नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त की उपस्थिति में शुरू हुई। इस दौरान प्रदेश की 16 नगर निगम, 99 नगर पालिका एवं 292 नगर परिषद की आरक्षण प्रक्रिया पूर्ण की गई। महापौर एवं अध्यक्ष पद का आरक्षण पिछली बार की तरह वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर किया गया। नगरीय निकाय चुनाव में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत पदों का आरक्षण बाय रोटेशन किया गया है। आरक्षण की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया था। सोशल मीडिया में आई जानकारी के अनुसार आरक्षण की संपन्न हुई प्रक्रिया में किस वर्ग के लिए कौन सा नगर निगम, नगर पालिका परिषद या नगर परिषद आरक्षित हुआ यह जानने के लिए नीचे दी गई सूची देखें-
आरक्षण की स्थिति |
नगर निगम का नाम |
अनुसूचित जनजाति |
छिंदवाड़ा |
अनुसूचित जाति महिला |
मुरैना |
अनुसूचित जाति |
उज्जैन |
अन्य पिछड़ा वर्ग |
सतना, रतलाम |
अन्य पिछड़ा वर्ग महिला |
भोपाल, खंडवा |
अनारक्षित महिला |
देवास, बुरहानपुर, सागर, कटनी, ग्वालियर |
अनारक्षित |
जबलपुर, इंदौर, रीवा, सिंगरौली |
आरक्षण नगर पालिका का नाम
अनारक्षित |
सारंगपुर, सिवनीमालवा, बेगमगंज, टीकमगढ़, नोगांव, पोरसा, अशोकनगर, डोंगर परासिया, कोतमा, सिहोरा, पसान, सीधी, बड़नगर, गंजबासौदा, नरसिंहगढ़, सिहोर,पीथमपुर, बड़वाह, सेंधवा, नरसिहपुर, आगर, शाजापुर, दमोह, खाचरोद, उमरिया, गाडरवारा व अनूपपुर। |
अनारक्षित महिला |
बैतूल, विदिशा, राजगढ़, पिपरिया, गढ़ाकोटा, पन्ना, खरगोन बालाघाट, नैनपुर, धनपुरी, महिदपुर, शिवपुरी, बैरसिया, मुलताई, देवरी, दतिया, गुना, वारासिवनी, चौरई, सौसर, अमरवाड़ा, करेली, नीमच, अंबा, मंडीदीप, सुजालपुर। |
अन्य पिछड़ा वर्ग महिला |
धार, आस्था, रायसेन, होशंगाबाद, छतरपुर, हरदा, मंदसौर, सनावद, शिवपुर, कला,ब्यावरा, पांढुर्ना, जावरा तथा नेपानगर। |
अन्य पिछड़ा वर्ग |
सबलगढ़, सिरोंज, शहडोल, पनागर, राघोगढ़, जुन्नारदेव, मनावर, मेहर, सिवनी, मंडला, रहली तथा इटारसी। |
अनुसूचित जाति |
मकरोनिया, डबरा, आमला, चंदेरी, बीना, लहार व महाराजपुर। |
अनुसूचित जाति महिला |
दमोह, गोहद सारणी खुरई गोटेगांव नागदा भिंड तथा हटा। |
अनुसूचित जनजाति |
मलाजखंड झाबुआ तथा पाली |
अनुसूचित जनजाति महिला |
अलीराजपुर, बड़वानी व बिजुरी। |
आरक्षण नगर परिषद का नाम
अनारक्षित महिला |
सुठालिया, लखनादौन, नामली, झुंडपुरा, न्यूटन चिकली, नईगढ़ी, शामगढ़, खनियाधाना, शाहपुर, न्यू रामनगर, चाचौड़ा, मंगवा, सोयत कला, साईं खेड़ा, चिंचोली, अठाना, शमशाबाद, करैरा, भांडेर देपालपुर, कुरवाई, कसरावद, बक्सवाहा, देवेंद्र नग,र मक्सी, कन्नौद, नगरी्, सेवड़ा, खातेगांव मनासा, गैरतगंज, लोहारदा, पिपला नारायणवार, तराना, बड़ा मलहरा, आरोन, अजय गढ़, शाहगंज, सुल्तानपुर, कैमोर, विजय राघोगढ़, बूंदी, सिलवानी बैकुंठपुर, लांजी बल्देवगढ़ नारायणगढ़ रतनगढ़ राजपुर नागौद राव बाबई अंतरी कुकड़ेश्वर कोलारस गौतमपुरा गुड पंधाना मानपुर कोठरी आठनेर लोधी खेड़ा बैतूल उदयपुर रामपुरा कांड वाली भैंस देही सोनकच्छ बागली। |
अन्य पिछड़ा वर्ग महिला |
खिलचीपुर सुहागपुर राहतगढ़ मो फूफकला ईसागढ़ बेटमा धामनोद राजगढ़ भीकनगांव बरघाट सिमरिया चुरहट पिपलिया मंडी सिराली शाहपुर भैसौदा मगरोनी रॉन्ग मानपुर डूमर कछार भनगावा सुर्खी माल्थोन बांदरी केवलारी छपारा ठीकरी धर्मपुरी पिपलोदा बदनावर बड़ोद जयसिंहनगर नलखेड़ा चांदामेटा पिछोर खुजनेर। |
अन्य पिछड़ा वर्ग |
जीरापुर ओबैदुल्लागंज बड़ागांव राजनगर मेहगांव होना नरवर अंजड़ कटंगी ताल मल्हारगढ़ डिकेन उन्हेल महोना रन्नौद पोहरी बकहो कोटर ओरछा पथरिया बिजावर बिलवा टोंक खुर्द मऊगंज बरेली जावद विजयपुर पाटन आलमपुर चाकघाट कारी छनेरा पोलाय कला। |
अनुसूचित जाति |
तरिचरकलां, निवाड़ी, पलेरा, पवई, जैतवारा, बामोर खेतिया लवकुश नगर पीपलरवां बरौनी हर्रई साली चौका पटेरा उचेहरा साडोरा करही हातोद छापीहेड़ा बंडा माचलपुर बड़कुही बदरवास गढ़ी मलहरा। |
अनुसूचित जाति महिला |
मालनपुर गोरमी माकड़ोन बारीगढ़, ककरहटी, लिधौरा, खास दिल हारा सांची खेतिया जावर चंदला बिरसिंहपुर खरगापुर मधुसूदनगढ़ कोठी पृथ्वीपुर इंदरगढ़ सुवासरा बड़ागांव शाहगढ़, अमानगंज, पिपरई, गुनौर, दबोह। |
अनुसूचित जनजाति |
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अनुसूचित जनजाति महिला |
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उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय उद्यान का मतलब यह नही होना चाहिए कि क्षेत्र का विकास अवरूद्ध हो जाए। राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र से निकलने वाली सड़कों को बनाने की स्वीकृति देने के साथ अन्य विकास कार्य भी किए जाना चाहिए। वर्तमान में पन्ना राष्ट्रीय उद्यान का नाम दुनियाभर में स्थापित हुआ है क्योंकि यहां वन्य जीवों की संख्या में निरंतर बढ़ोत्तरी हो रही है। इसके साथ ही विकास कार्य होंगे तो लोगों को सुविधाए मिलेंगी। लोगों में राष्ट्रीय उद्यान के प्रति लगाव बढेगा जिससे उद्यान का संरक्षण भी होगा।
क्षेत्र संचालक पन्ना टाइगर रिजर्व उत्तम कुमार शर्मा ने बताया कि पार्क में पर्यटन से होने वाली आय का 25 प्रतिशत राशि बफर जोन में रहने वाले लोगों पर खर्च की जाती है। जिससे पर्यटन को बढावा मिले और यहां के लोग जंगल को सुरक्षित रखें। उन्होंने यह भी बताया कि राष्ट्रीय उद्यान में प्रवेश टिकट विक्रय का केन्द्र पन्ना नगर के डायमण्ड चैराहे पर प्रारंभ किया जा रहा है। उन्होंने पार्क के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी दी।
इस अवसर पर रघु चुंढावत के सौजन्य से इको विकास समिति झिन्ना को जिप्सी वाहन उपलब्ध कराया गया। इसके अलावा इको विकास समिति झिन्ना सुकई पाल, गणेश सिंह यादव, परमलाल यादव को 50-50 हजार रूपये के पौधे वितरित किए गए। वहीं वनाधिकार पत्रों का वितरण किया गया। इनमें खेत सिंह, पूजा देवी, प्रेम सिंह, वीरेन्द्र सिंह एवं अनुरूद्ध सिंह को किए गए। इसके अलावा सुकई पाल, विश्वनाथ पटेल, लक्ष्मण पटेल, लक्ष्मी केवट एवं भागचन्द्र पटेल को पौधे वितरित किए गए।