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वन्य प्राणियों के शिकार की नहीं थम रहीं घटनाएं, खेत की बारी-बागड़ सर्चिंग के दौरान सेही के शिकार का चला पता

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वन अमले के द्वारा शिकारी पिता-पुत्र जब्त मृत सेही एवं अन्य सामान।

*  पन्ना टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र अंतर्गत बाँधीकला दक्षिण बीट की घटना

*  टाइगर रिजर्व के अमले ने दबिश देकर शिकारी पिता-पुत्र को रंगे हाथ पकड़ा

*  कुत्तों के सहयोग से किया सेही का शिकार, खेत की बारी में लगा रखा था फंदा

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) बाघों से आबाद हो चुके पन्ना जिले के जंगलों से बेजुबान वन्य जीवों के शिकार, उनके माँस एवं अंगों तस्करी की चिंताजनक घटनाएं लगातार सामने आ रहीं है। वन अपराधों की रोकथाम के प्रयासों के बाबजूद शिकार की घटनाएं थमने के बजाए तेजी से बढ़ रहीं है। कारण, जिले में लम्बे समय से सक्रिय शिकारियों ने पन्ना टाइगर रिजर्व समेत सामान्य वन क्षेत्र उत्तर एवं दक्षिण वन मण्डल अंतर्गत चप्पे-चप्पे में अपना जाल बिछा रखा है। इसके अलावा वन क्षेत्रों से सटे खेतों की बारी-बागड़ में शिकार के लिए फंदे लगा रखे हैं। जंगल में वायर बिछाकर उसमें करंट प्रवाहित करके और बारी में लगे फंदों के जरिए शातिर शिकारी बड़ी ही आसानी से बेजुबान वन्य जीवों को अपना शिकार बना रहे हैं।
पन्ना जिले में शिकारियों की बढ़ती सक्रियता का अंदजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि, बीते दिनों पन्ना के उत्तर वन मण्डल अंतर्गत करंट प्रवाहित कर मादा तेंदुए का शिकार किया गया था। हाल ही में उत्तर वन मण्डल के ही झलाई कोठी जंगल में सांभर, जंगली सूअर, जंगली खरगोश का शिकार कर उनके माँस की तस्करी किए जाने से जुड़ा सनसनीखेज खुलासा हुआ। जंगल की सुरक्षा व्यवस्था एवं निगरानी तंत्र की पोल खोलतीं बेहद हैरान करने वालीं इन घटनाओं को लोग अभी भूले भी नहीं थे कि इस बीच पन्ना टाइगर रिजर्व अंतर्गत सेही के शिकार का ताजा मामला प्रकाश में आया है।
टाइगर रिजर्व की पन्ना कोर रेन्ज अंतर्गत आने वाले बफ़र क्षेत्र बीट बाँधीकला दक्षिण के ग्राम इटवांकला में शनिवार 16 जनवरी की सुबह सेही के शिकार की घटना को अंजाम दिया गया। जिसकी भनक वन अमले को बारी-बागड़ की सर्चिंग के दौरान लगी। वन अमले ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए शिकार के सिलसिले में आदिवासी पिता-पुत्र को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। ग्राम इटवांकला निवासी आदेश आदिवासी के घर पर वनकर्मियों ने शनिवार को जिस वक्त दबिश दी उस समय आदेश अपने बेटे अनिल आदिवासी के साथ मिलकर सेही को काटने से पूर्व उसके काँटे निकाल रहा था।
पन्ना कोर रेन्ज के प्रभारी वन परिक्षेत्राधिकारी लालबाबू तिवारी ने जानकारी देते हुए बताया कि आदेश आदिवासीके द्वारा सेही का शिकार अपने खेत में पालतू कुत्तों की मदद से किया गया। पूँछतांछ में उसने सेही का मांस खाने के उद्देश्य से शिकार की घटना को अंजाम देने की बात कही है। मुखबिर से मिली जानकारी के आधार पर आदेश आदिवासी के खेत की बारी की सघन सर्चिंग करने पर वन्य जीवों के शिकार के लिए छिपाकर लगाया गया क्लिच वायर का एक फंदा भी मिला है। प्रभारी वन परिक्षेत्राधिकारी लालबाबू तिवारी ने बताया, शिकार के आरोपी आदेश आदिवासी एवं उसके बेटे अनिल से मृत सेही, सेही के काँटे, हंसिया जब्त कर दोनों को गिरफ्तार किया गया है।
सेही के शिकार के आरोप में गिरफ्तार आदेश आदिवासी एवं उसके पुत्र अनिल आदिवासी को न्यायालय में पेश करने के लिए ले जाते हुए वनकर्मी।
इस मामले में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत वन अपराध दर्ज कर रविवार को दोनों आरोपियों को न्यायलय में पेश किया गया। न्यायालय के आदेश पर उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जिला जेल पन्ना में दाखिल कराया गया है। उल्लेखनीय है कि गत वर्ष टाइगर रिजर्व की पन्ना कोर रेन्ज अंतर्गत बाघों की संदेहास्पद परिस्थितियों में मौत होने की घटनाएं सामने आई थीं। वन्यजीवों के शिकार के एवं अन्य वन अपराधों के लिहाज से पन्ना कोर रेन्ज का इलाका अत्यंत ही संवेदनशील है। इसलिए यहां की सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने की जरुरत है।

कोविड-19 टीकाकरण : पन्ना में सफाई कर्मी नरेन्द्र एवं पवई में नवल को लगा पहला टीका, जानिए उन्होंने अपने चयन पर क्या कहा

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पन्ना में टीकाकरण केन्द्र का फीता काटकर कोविड-19 टीकाकरण का शुभारंभ करते हुए मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह।

* पन्ना में मंत्री बृजेन्द्र प्रताप और पवई में विधायक प्रहलाद ने किया शुभारंभ

* जिले में पहले दिन दोनों केन्द्रों पर सिर्फ 200 फ़्रंट लाइन वर्कर्स को लगेगा टीका

खनिज मंत्री बोले- WHO ने की भारत में बनीं कोविड वैक्सीन की तारीफ

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) कोरोना से बचाव के लिये दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान का शनिवार 16 जनवरी से पूरे देश में शुरू हो गया। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में दो केन्द्रों पर कोविड-19 वैक्सीनेशन कार्यक्रम दोपहर 11 बजे से शुरू हुआ। जिला चिकित्सालय पन्ना स्थित केन्द्र पर प्रदेश के खनिज एवं श्रम विभाग के मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ने टीकाकरण अभियान का शुभारंभ किया। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पवई में इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम की शुरुआत क्षेत्रीय विधायक प्रह्लाद सिंह लोधी ने की।
पन्ना में कोविड वैक्सीन का पहला डोज सफाई कर्मी नरेन्द्र बाल्मीक दिया गया।
दोनों ही केन्द्रों पर सर्वप्रथम कोविड-19 वैक्सीन सफाई कर्मियों दी गई। जिला चिकित्सालय पन्ना में वहाँ कार्यरत सफाई कर्मी नरेन्द्र बाल्मीक और पवई में सफाई कर्मी नवल किशोर बाल्मीक को पहला टीका लगाया गया। इस दौरान वे काफी उत्साहित नजर आए। क्रमश: दूसरा टीका सेवानिवृत्त वरिष्ठ चिकित्सक पूर्व सीएमएचओ डॉ.एच.एन. शर्मा व डॉ. ओमहरि शर्मा मेडिकल ऑफिसर पवई को लगा। इसके पूर्व अखिल भारतीय स्तर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने टीकाकरण का शुभारंभ करते हुए राष्ट्र के नाम संदेश दिया, जिसका लाइव प्रसारण पन्ना व पवई के कार्यक्रम में उपस्थित लोगों के द्वारा देखा गया।
पवई में टीकाकरण केन्द्र का फीता काटकर कोविड-19 टीकाकरण का शुभारंभ करते हुए विधायक प्रहलाद सिंह लोधी।
उल्लेखनीय है कि, कोविड-19 वैक्सीनेशन के प्रथम चरण के लिए पन्ना जिले को कोविशील्‍ड (COVISHIELD) वैक्सीन की 6030 डोज प्राप्त हुई है। जिसे प्रथम चरण में हेतु पूर्व से पंजीकृत फ्रंट लाइन वर्कर्स को ही दिया जाएगा। पन्ना जिला चिकित्सालय में पूर्व से पंजीकृत 444 एवं पवई सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर 400 स्वास्थ्य कर्मियों और फ्रंट लाइन वर्कर्स का वैक्सीनेशन प्रथम चरण में किया जाना है।

सुरक्षित और प्रभावी है वैक्सीन – बृजेन्द्र प्रताप

पत्रकारों से मुखातिब होते हुए मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह।
पन्ना में कोविड-19 टीकाकरण का शुभारंभ करते हुए प्रदेश के खनिज एवं श्रम विभाग के मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि कोविड वैक्सीन पूर्ण रूप से सुरक्षित और कोरोना वायरस संक्रमण से सुरक्षा प्रदान करने में प्रभावी है। WHO ने भी हमारी वैक्सीन की तारीफ की है। भारत में बनायी गयी स्वदेश की वैक्सीन को देश-विदेश की उत्कृष्ट वैज्ञानिक संस्थाओं ने गहन परीक्षण और विश्लेषण के बाद स्वीकृत किया है। कई चरणों के वैज्ञानिक शोध एवं परीक्षण उपरांत कोविड वैक्सीन तैयार की गई है। इसलिए किसी भी तरह की अफवाह में न आएं और अपनी बारी आने पर कोविड से सुरक्षा हेतु टीकाकरण अवश्य कराएं।
पन्ना में कोविड टीकाकरण शुभारंभ कार्यक्रम में उपस्थित भाजपा नेता एवं अधिकारीगण।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष रविराज सिंह यादव, भाजपा नेता सतानंद गौतम, कलेक्टर संजय कुमार मिश्र, जिला पंचायत सीईओ बालगुरु के. (आईएएस), पन्ना एसडीएम शेर सिंह मीणा (आईएएस), जेपी धुर्वे अपर कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी पन्ना डॉ एल.के. तिवारी, सिविल सर्जन डॉ. व्ही. एस. उपाध्याय, जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. पी.के. गुप्ता, डॉ. प्रदीप दिवेदी, वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. विजय परमार, डॉ. गुन्जन सिंह, फार्मासिस्ट राजेश तिवारी, राजेश चौरहा, सहायक यंत्री लोनिवि बीके त्रिपाठी, उपयंत्री मनोज रिछारिया सहित स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी एवं पत्रकार उपस्थिति रहे।

खुश किस्मत हूँ कि मेरा चयन हुआ

नरेन्द्र बाल्मीक, सफाई कर्मी, पन्ना।
पन्ना जिला चिकित्सालय स्थित टीकाकरण केन्द्र पर कोविड वैक्सीन का पहला डोज वहाँ कार्यरत युवा सफाई कर्मी नरेन्द्र बाल्मीक को दिया गया। मीडिया के कैमरों की चकाचौंध से घिरे नरेन्द्र टीकाकरण के दौरान आत्म विश्वास और उत्साह से लबरेज़ नजर आए। रडार न्यूज़ से चर्चा में नरेन्द्र ने अपनी भावनाओं और अनुभव को साझा करते हुए हा कि मैं ख़ुश क़िस्मत हूँ, कोरोना के खिलाफ जिस वैक्सीन का कई महीनों से पूरा देश इंतजार कर रहा था पन्ना में उसका पहला डोज मुझे देकर इस अभियान का शुभारंभ किया गया।
नवल किशोर बाल्मीक, सफाई कर्मी, पवई।
वहीं पवई में पहला टीका लगवाने वाले सफाई कर्मी नवल किशोर बाल्मीक ने पत्रकारों को बताया कि उसके लिए यह क्षण हमेशा अविस्मरणीय रहेगा। टीका लगवाकर मैं खुश हूँ और गौरान्वित महसूस कर रहा हूँ। नवल का कहना कि वैक्सीन लगने से अब उसे कोरोना वायरस से बचाव के लिए सुरक्षा मिलेगी। पवई के टीकाकरण कार्यक्रम में एडीएम रचना शर्मा, तहसीलदार दीपा चतुर्वेदी, बीएमओ पवई डॉ. एम.एल. चौधरी, बीएमओ शाहनगर डॉ. सर्वेश लोधी, बीएमओ अमानगंज डॉ. अमित मिश्रा एवं गणमान्य नागरिक, स्वास्थ्य कर्मी व पत्रकार उपस्थित रहे।

COVID-19 वैक्सीनेशन : दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान की तैयारी पूर्ण, शनिवार 16 जनवरी को होगी शुरुआत

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सांकेतिक फोटो।

पन्ना जिले को प्रथम चरण के वैक्सीनेशन हेतु प्राप्त हुई 6030 डोज वैक्सीन

सफाई कर्मी को टीका लगाकर की जाएगी अभियान की शुरुआत

जिला चिकित्सालय स्थिति वैक्सीन डिपो में संधारित की गई कोविड वैक्सीन

प्रथम चरण में पूर्व से पंजीकृत फ्रंट लाइन वर्कर्स को ही लगाया जाएगा टीका

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) कोरोना वायरस संक्रमण को हारने के लिए विश्व के सबसे बड़े COVID-19 वैक्सीनेशन अभियान का शुभारंभ देश के साथ मध्यप्रदेश में शनिवार16 जनवरी की सुबह 9 बजे होगा। पन्ना जिले में कोविड-19 के टीकाकरण अभियान के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूर्ण हो चुकी हैं। जिले में इसका शुभारंभ दो स्थानों पर जिला चिकित्सालय पन्ना एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पवई में किया जाएगा।
COVID-19 वैक्सीनेशन के प्रथम चरण में पूर्व से पंजीकृत फ्रंट लाइन वर्कर को टीका लगाया जाएगा। पन्ना जिला चिकित्सालय में पूर्व से पंजीकृत 444 तथा पवई स्वास्थ्य केन्द्र में 400 फ्रंट लाइन वर्कर्स का वैक्सीनेशन किया जाएगा। प्रथम वैक्सीन का डोज सफाई कर्मी को देकर टीकाकरण अभियान प्रारंभ किया जाएगा। इसके पश्चात चिकित्सक, स्टॉफ नर्स, पैरामेडिकल स्टॉफ एवं अन्य फ्रंट लाइन वर्कर्स का वैक्सीनेशन होगा।
डॉ. एल.के. तिवारी, सीएमएचओ, पन्ना।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी पन्ना डॉ. एलके तिवारी ने जानकारी देते हुए बताया कि जिले को कोविड वैक्सीनेशन के प्रथम चरण के लिए कोविशील्‍ड (COVISHIELD) वैक्सीन की 6030 डोज वैक्सीन प्राप्त हो चुकी है। इसे जिला चिकित्सालय स्थित वैक्सीन डिपो में एलआईआर सिस्टम में संधारित किया गया है। कोविड वैक्सीन की सुरक्षा हेतु पन्ना एवं पवई में पुलिस विभाग द्वारा गनमैन आरक्षकों की 24 घण्टे ड्यूटी लगाई गई है।
कोविड टीकाकरण के प्रथम चरण दिनांक 16, 18, 20, 21 एवं 23 जनवरी 2021 तक चलेगा। जिसमें पन्ना जिला चिकित्सालय में पूर्व से पंजीकृत 444 स्वास्थ्य कर्मी एवं फ्रण्टलाईन कार्यकर्ताओं तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पवई में 400 स्वास्थ्य कर्मी एवं फ्रण्टलाईन कार्यकर्ताओं को कोविड वैक्सीन का टीका लगाया जाना है। श्री तिवारी ने बताया कि आज सशस्त्र पुलिस आरक्षकों की सुरक्षा में वैक्सीन पवई सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में पहुंचा दी गई है।
सीएमएचओ ने बताया कि कोविड टीकाकरण हेतु टीकाकरण केन्द्र पर मुख्य रूप से तीन कक्ष होगें, जिसके अंतर्गत प्रथम कक्ष में पंजीयन, द्वितीय कक्ष में टीकाकरण एवं तृतीय कक्ष ऑब्जर्वेशन कक्ष के रूप में होगा। जहां पर टीकाकरण के उपरांत हितग्राही को 30 मिनट तक ऑब्जर्वेशन में रखा जायेगा। इसके अतिरिक्त एक अतिरिक्त कक्ष होगा जिसमें टीका से होने वाले दुष्प्रभाव के तत्काल जांच उपचार हेतु एक टीम रहेगी, जिसमें एक चिकित्सक, फार्मासिस्ट एवं एक स्टाफ नर्स होगी तथा टीम के पास ए.ई.एफ.आई. किट उपलब्ध रहेगी।
पन्ना जिले को प्राप्त हुई कोविड-19 की वैक्सीन को दिखाते हुए जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. पीके गुप्ता एवं वैक्सीन डिपो में भण्डारित वैक्सीन।
वैक्सीनेशन स्थल पर पूरे टीकाकरण के दौरान एक 108 एम्बुलेन्स उपलब्ध रहेगी। कोविड वैक्सीनेशन सत्रों के निरीक्षण हेतु समस्त अनुविभागीय अधिकारियों को जोनल अधिकारी नियुक्त किया गया है जोकि टीकाकरण स्थल पर व्यवस्थाओं का भौतिक सत्यापन, वैक्सीन की उपलब्धता, एनाफाईलेक्सिस किट की उपलब्धता एवं सुपरविजन का कार्य करेगें। इसके साथ ही चिकित्सकों की टीम भी टीकाकरण सत्र स्थल पर उपस्थित रहेगी।
उन्होंने बताया कि पन्ना जिले को कोविशील्‍ड वैक्सीन उपलब्ध कराई गई है। एक दिन में प्रति सत्र स्थल पर केवल 100 हितग्राहियों को वैक्सीन दी जायेगी तथा अठारह वर्ष से नीचे, गर्भवती महिला एवं ऐसे व्यक्ति जिसे कोई पूर्व से किसी वैक्सीन/इंजेक्शन के रिएक्शन होने की जानकारी हो उनको वैक्सीन नहीं दी जायेगी।

Covid Vaccination Presentation

एशिया की इकलौती हीरा खदान में बंद नहीं होगा खनन कार्य !

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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्यप्रदेश राज्य वन्य प्राणी बोर्ड की बैठक ली।

वन्यप्राणी बोर्ड की बैठक में हीरा खनन परियोजना की स्वीकृति में वृद्धि के प्रकरण पर हुआ विचार-विमर्श

*  सीएम शिवराज बैठक में बोले- यह सुनिश्चित करें कि हीरा खनन का कार्य बंद न हो

भोपाल।(www.radarnews.in) मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर आज मध्यप्रदेश राज्य वन्यप्राणी बोर्ड की 19वीं बैठक राजधानी भोपाल में आयोजित हुई। बैठक में पन्ना जिले के गंगऊ अभ्यारण्य अंतर्गत एनएमडीसी लिमिटेड की 275 हेक्टेयर भूमि में हीरा खनन कार्य के संबंध में बोर्ड के सदस्यों ने विचार-विमर्श किया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि यह सुनिश्चित करें कि हीरा खनन का कार्य बंद न हो, साथ ही विकास भी हो और वन्य प्राणी संरक्षण भी हो। दोनों में संतुलन आवश्यक है। वन्य क्षेत्रों और वन्यप्राणियों का संरक्षण एवं वन क्षेत्रों में विकास कार्य इस तरह संपादित हों कि इससे मानव जीवन पर भी विपरीत प्रभाव न पड़े। दोनों के मध्य संतुलन स्थापित हो। अभ्यारण्य और राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्रों में सड़क निर्माण, संचार विकास और अन्य आवश्यक कार्य वन्यप्राणियों को क्षति पहुंचाए बिना सम्पन्न हों, इसका ध्यान रखा जाए। इस बैठक में वन मंत्री कुंवर विजय शाह, मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस, प्रमुख सचिव वन अशोक बर्णवाल और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

चीतों को बसाने के लिए अनुकूल है मध्यप्रदेश

बैठक में बताया गया कि प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान और नौरादेही वन्यप्राणी अभ्यारण्य में चीतों के रहवास के लिए उपयुक्त पाए जाने की स्थिति है। कूनो राष्ट्रीय उद्यान जो करीब 750 वर्ग किलोमीटर में स्थित है वहां मात्र एक गांव है जिसके विस्थापन की प्रक्रिया चल रही है।
इसी तरह एक हजार किलोमीटर से अधिक वर्ग किलोमीटर में स्थित नौरादेही वन्यप्राणी अभ्यारण्य सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों में स्थित है। यहाँ वर्तमान में 63 ग्रामों में से 13 गांव विस्थापित किए जा चुके हैं। अन्य 15 ग्रामों के विस्थापन की प्रक्रिया प्रचलन में है। इसके दृष्टिगत मध्यप्रदेश के इन संरक्षित क्षेत्रों में अफ्रीकी चीते की स्थापना की संभावनाएं देखी जा रही हैं। इस संबंध में वैधानिक रूप से आवश्यक अनुमतियों के पश्चात कार्य को गति दी जाएगी।
भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. वाय.वी. झाला द्वारा मध्यप्रदेश के संरक्षित क्षेत्रों में अफ्रीकी चीतों की अनुकूलता के संबंध में प्राथमिक सर्वेक्षण किया जाएगा। इसके लिए मध्यप्रदेश में तैयारियां प्रारंभ की गई हैं। प्रस्तावित वैकल्पिक संरक्षित क्षेत्र गांधीसागर अभ्यारण्य मंदसौर में शाकाहारी वन्यप्राणियों के ट्रांसलोकेशन के लिए नरसिंहगढ़ अभ्यारण्य राजगढ़ से 500 चीतल ट्रांसलोकेशन करने की अनुमति भी प्राप्त हुई है।

मध्यप्रदेश अब तेंदुआ स्टेट भी

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि बफर में सफर जैसी गतिविधियों से पर्यटन विकास संभव होगा। उन्होंने मध्यप्रदेश को टाइगर स्टेट के बाद तेंदुआ स्टेट बनने पर बधाई दी। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में 3421 तेंदुए होने पर भी प्रसन्नता व्यक्त की। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि राज्य में तेंदुआ संख्या लगभग साढ़े तीन हजार है। यह निश्चित ही एक उपलब्धि है। देश में कुल 12852 तेंदुएं हैं। मध्यप्रदेश को टाइगर के बाद तेंदुआ राज्य बनने के पश्चात अन्य वन्यप्राणियों की श्रेणी में भी अग्रणी बनने की संभावनाएं बढ़ी हैं। बोर्ड के सदस्य अभिलाष खांडेकर ने सुझाव दिया कि राजस्थान में तेंदुआ रिजर्व बनाया जा रहा है, मध्यप्रदेश में भी ऐसा संभव है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने श्री खांडेकर के इस सुझाव पर सहमति जताई।

मध्यप्रदेश पहले ही बना है बाघ प्रदेश

मध्यप्रदेश ने अखिल भारतीय बाघ गणना 2018 में 526 बाघ पाए जाने के साथ बाघ प्रदेश का दर्जा हासिल किया था। अब तेंदुआ स्टेट का दर्जा मिलने से मध्यप्रदेश प्रथम और कर्नाटक एवं महाराष्ट्र द्वितीय एवं तृतीय क्रम पर हैं। बैठक में बाघों के रहवासों और संरक्षित क्षेत्रों का भारत सरकार और राज्य सरकार की योजनाओं के साथ ही कैम्पा फण्ड से भी वित्त पोषण पर चर्चा हुई। संरक्षित क्षेत्रों में रहवास प्रबंधन, वन्यप्राणियों की सुरक्षा, अग्नि सुरक्षा, मानव-वन्यप्राणी द्वंद के प्रबंधन और बाघ एवं शाकाहारी वन्यप्राणियों के अधिक घनत्व के क्षेत्रों से कम घनत्व के संरक्षित क्षेत्रों में ट्रांसलोकेशन किए जाने पर चर्चा हुई। प्रदेश में वन्यप्राणियों के संरक्षण के लिए 16,794 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 6 टाइगर रिजर्व सहित 11 राष्ट्रीय उद्यान एवं 24 वन्यप्राणी अभ्यारण्यों का गठन किया गया है।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रदेश में वन्यप्राणी संरक्षण और प्रबंधन की गतिविधियां सुचारू रूप से संचालित हों। बैठक में बताया गया कि मध्यप्रदेश के सभी नेशनल पार्क में नाईट जंगल सफारी, बैलून सफारी शुरू करने, जंगली हाथियों के रेस्क्यू, घड़ियालों की पुनर्स्थापना के संबंध में गतिविधियां संचालित हैं। बैठक में मध्यप्रदेश की टाइगर स्टेट के रूप में स्थिति सुदृढ़ करने के लिए योजना पर भी चर्चा हुई। इसके साथ ही प्रदेश में बाघों की पुनर्स्थापना के लिए सतपुड़ा, नौरादेही, संजय गांधी अभ्यारण में आवश्यक परिस्थितियों के निर्माण के संबंध में और स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स के सशक्तिकरण पर भी चर्चा हुई। प्रदेश में माधव, गांधीसागर और नौरादेही राष्ट्रीय उद्यान में हो रहे कार्यों पर भी विचार किया गया। ये चारों राष्ट्रीय उद्यान भारत सरकार द्वारा चयनित हैं। यहाँ भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून द्वारा सर्वेक्षण कार्य पूर्ण किया गया है।

खरमोर संरक्षण

बैठक में बताया गया कि धार जिले के सरदारपुर में वन्यप्राणी अभ्यारण्य का गठन खरमोर प्रजाति के पक्षी के लिए किया गया है। यह पक्षी घास के मैदानों में पायी जाने वाली महत्वपूर्ण और संकटग्रस्त प्रजाति है। पश्चिमी मध्यप्रदेश के धार के अलावा झाबुआ, रतलाम, मंदसौर और नीमच में ये पाए जाते हैं। इनकी संख्या कम हुई है। प्रदेश में खरमोर संरक्षण के लिए कंजर्वेंशन ब्रीडिंग केन्द्र प्रारंभ करने पर सहमति हुई। इसके लिए करीब साढ़े तीन सौ वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को पूर्व में अधिसूचित किया गया था। खरमोर अभ्यारण्य सरदारपुर के क्षेत्र के अंतर्गत वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 का पालन करते हुए आवश्यक गतिविधियों के संचालन पर सहमति हुई। जिन क्षेत्रों में खरमोर पक्षी कुछ वर्ष से प्रवास नहीं कर रहे हैं उन क्षेत्रों को अभ्यारण्‍य क्षेत्र से बाहर करने के संबंध में विचार किया गया।
इसी तरह खरमोर के लिए सैलाना अभ्यारण्य के पुनर्गठन प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि खरमोर का संरक्षण महत्वपूर्ण है, इनके रहवास वाले क्षेत्रों में ऐसी फसलों को प्रोत्साहित किया जाए जिससे पक्षियों को भी भोजन मिल सके। इसी तरह सैलाना अभ्यारण्य की सीमा से 10 किलोमीटर परिधि में दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेस हाईवे एन.एच.-148एन के 8 लेन निर्माण के लिए वन्यप्राणियों की सुरक्षा की शर्त पर बोर्ड द्वारा स्वीकृति प्रदान की गई है।

राज्य मछली महाशीर को बचाएंगे

बैठक में बताया गया कि प्रदेश के बड़वाह वनमण्डल में महाशीर संरक्षण योजना लागू की गई है। राज्य शासन ने महाशीर संरक्षण और प्रजनन पर 61 लाख रूपए की राशि खर्च की है। वर्ष 2020 में महाशीर का चार बार कृत्रिम प्रजनन कराया गया जिसके फलस्वरूप 4000 फ्राई प्राप्त किए गए। ये स्वस्थ स्थिति में है, इन्हें नर्मदा के जल प्रवाह में छोड़ा जाएगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि एक समय नर्मदा में इन मछलियों की संख्या काफी अधिक थी। इनके संरक्षण के कार्य को गति दी जाए।
बोर्ड की बैठक में डब्ल्यू.डब्ल्यू.एफ के सदस्य ने सुझाव दिया कि उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में महाशीर संरक्षण के कार्यों का अध्ययन कर मध्यप्रदेश में श्रेष्ठ गतिविधियों को अपनाया जा सकता है। बैठक में जानकारी दी गई कि महाशीर संरक्षण के लिए प्रदेश में बीते नवम्बर माह में राज्य स्तरीय स्टियरिंग कमेटी भी बनाई गई है जिसकी शीघ्र ही बैठक होने वाली है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने मत्स्य पालन विभाग द्वारा भी महाशीर संरक्षण प्रयासों से जुड़ने के निर्देश दिये।

किसानों का भी पक्ष जानें, समाधान निकाला जाए

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश के कुछ स्थानों से नीलगाय और अन्य पशुओं द्वारा खेतों में नुकसान पहुंचाने के समाचार मिलते हैं। ऐसे मामलों में किसानों का पक्ष जानते हुए आवश्यक उपाय किए जाएं। वन्यप्राणियों और मनुष्यों के बीच द्वंद की स्थिति निर्मित हो तो उसका समाधान निकाला जाए। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने सागर जिले में प्रस्तावित डॉ. अम्बेडकर अभ्यारण्य के संबंध में जिला योजना समिति के अनुमोदन के पश्चात बोर्ड के समक्ष प्रस्ताव रखने के निर्देश दिए। यह अभ्यारण्य 258 वर्ग किलोमीटर में प्रस्तावित है। प्रस्तावित अभ्यारण्य क्षेत्र में कोई राजस्व ग्राम नहीं है।

संचार संबंधी अनुमतियां

बोर्ड की बैठक में गांधी सागर अभ्यारण्य क्षेत्र में सड़क निर्माण, वीरांगना दुर्गावती अभ्यारण्य दमोह के क्षेत्र में बेहतर संचार सुविधा के लिए ओ.एफ.सी. केबल डालने की अनुमति भी प्रदान की गई। इसी तरह की अनुमतियां ग्वालियर के घाटीगांव हुकना पक्षी सोनचिड़िया अभ्यारण्य, माधव राष्ट्रीय उद्यान शिवपुरी, नरसिंहगढ़ अभ्यारण्य एवं कान्हा टाइगर रिजर्व मण्डला के क्षेत्र के अंतर्गत भी प्रदान की गईं। इसके अलावा ओरछा अभ्यारण्य क्षेत्र में 132 के.व्ही. विद्युत पारेषण लाइन और 14 टॉवर के निर्माण के लिए 13.50 हेक्टयर भूमि मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कम्पनी सागर को प्रदान की गई। यह सभी अनुमतियां वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 के अंतर्गत प्रदान की गईं।

टाइगर स्टेट एमपी के पीटीआर से आई ख़ुशख़बरी, बाघिन पी-213 (32) ने चार शावकों को दिया जन्म

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पन्ना टाइगर रिजर्व की बाघिन पी-213 (32) अपने नवजात शावक को मुँह में दबाकर सुरक्षित स्थान पर ले जाते हुए।

पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन का दावा बाघों की संख्या बढ़कर 65 से अधिक हुई

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) देश के टाइगर स्टेट मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व से नए साल पर बड़ी खुशखबरी आई है। यहाँ पार्क में बाघों के कुनबे की सदस्य संख्या में उल्लेखनीय इजाफा हुआ। पन्ना टाइगर रिजर्व की युवा बाघिन पी-213 (32) ने चार शावकों को जन्म दिया है। नन्हें मेहमानों के आने से पार्क प्रबंधन में ख़ुशी की लहर दौड़ गई है। पन्ना टाइगर रिजर्व में जन्मी और पली-बढ़ी बाघिन पी-213 (32) ने पार्क की गहरीघाट रेन्ज में दूसरी बार शावकों को जन्म दिया है। इसके शावक अब 2 से 3 माह के हो चुके हैं। कैमरा ट्रेप से प्राप्त फोटोग्राफ में युवा बाघिन अपने नवजात शावकों को मुँह में दबाकर एक स्थान से किसी दूसरे सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करते हुए कैद हुई है।
पन्ना टाइगर रिजर्व का हिनौता स्थित प्रवेश द्वार। (फाइल फोटो)
पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक उत्तम कुमार शर्मा ने शावकों के जन्म पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि बाघिन पी-213 (32) और उसके शावकों की नियमित रूप से निगरानी की जा रही है। हाल ही में मॉनिटरिंग दल के सदस्यों ने चारों शावकों तथा बाघिन को प्रत्यक्ष तौर देखा है। आपने बताया सबसे अच्छी बात यह है कि बाघिन और चारों शावक स्वस्थ हैं। नन्हें शावक अब अपनी माँ के साथ विचरण भी करने लगे हैं।

पहले भी जन्में थे 4 शावक

उत्तम कुमार शर्मा, क्षेत्र संचालक पन्ना टाइगर रिजर्व।
यह महज सुखद संयोग ही है कि युवा बाघिन पी-213 (32) करीब दो साल पूर्व वर्ष 2019 की शुरुआत में जब पहली बार माँ बनी थी तब भी इसने चार शावकों को जन्म दिया था। इस बाघिन की आयु अभी पांच वर्ष से भी कम है। अपने दूसरे लिटर में पुनः चार शावकों को जन्म देने के बाद बाघिन पी-213 (32) को लेकर यह उम्मीद की जा रही है कि यह बाघिन पन्ना में बाघों की संख्या को बढ़ाने में आगे भी इसी तरह अपना अहम योगदान देते हुए कीर्तिमान स्थापित करेगी। बहरहाल चार शावकों के जन्म के बाद पन्ना में बाघ परिवार की कुल सदस्य संख्या बढ़कर 65 से अधिक हो चुकी है। इनमें व्यस्क, अर्ध व्यस्क बाघ और शावक शामिल हैं। पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक उत्तम कुमार शर्मा ने बताया कि वर्तमान फेज-4 की गणना जारी है, लगभग 2-3 माह में इसके नतीजे आने पर पन्ना में बाघों की वास्तविक संख्या पता चल जाएगी।

आरक्षित वर्गों के छात्र-छात्राओं ने शिवराज सरकार के खिलाफ आंदोलन करने की दी चेतावनी ! जानिए क्या है वजह

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पन्ना के संयुक्त कलेक्ट्रेट भवन के बाहर मुख्यमंत्री के नाम नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपते हुए आरक्षित वर्गों के छात्र-छात्राएं।
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) प्रदेश सरकार ने स्कूल और कॉलेजों को तो खोल दिया लेकिन छात्रावासों को खोलने की सुध अब तक नहीं ली है। छात्रावासों को खोलने में लगातार हो रही देरी का सीधा दुष्प्रभाव ग्रामीण अंचल से आने वाले आरक्षित वर्गों के गरीब छात्र-छात्राओं की शिक्षा पर पड़ रहा है। स्कूल-कॉलेजों को खोलने तथा छात्रावासों को बंद रखने से आरक्षित वर्गों के गरीब विद्यार्थियों के सामने यह समस्या उत्पन्न हो गई है कि वे शिक्षार्थ अपने घर-गांव से दूर बाहर आखिर कहाँ पर रहें ? क्योंकि समाज में विधमान जातिगत भेदभाव की अमानवीय भावना एवं संकीर्ण सोच के कारण अधिकाँश लोग आरक्षित वर्गों के छात्र-छात्राओं को आज भी अपने मकान में किराए से कमरा भी नहीं देते।
छात्रवासों को खोलने के मसले पर सरकार की उदासीनता ने आरक्षित वर्गों के छात्रों की समस्या को जटिल बना दिया है। इसका दंश झेलने को मजबूर समाज के कमजोर तबके के विद्यार्थी स्कूल-कॉलेजों को खोले जाने के बाद से ही छात्रावासों को भी खोलने की मांग कर रहे हैं। लेकिन छात्रों के भविष्य से जुड़ी इस मांग को सत्तासीन लगातार अनसुना कर रहे हैं।
इससे आक्रोशित पन्ना जिले के छात्रावासी छात्र-छात्राओं ने बीते दिवस युवा नेता संजय अहिरवार के नेतृत्व में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम नायब तहसीलदार पन्ना को एक ज्ञापन सौंपा है। छात्रों ने ज्ञापन के माध्यम से पुनः यह मांग की है कि छात्रावासों को खोलने पर गंभीरता पूर्वक विचार करते हुए छात्र हित में सप्ताह भर के अंदर इस पर निर्णय लिया जाए। क्योंकि यह माँग प्रदेश के हजारों छात्र-छात्राओं के भविष्य से सीधे तौर पर जुड़ी है। इस मुद्दे पर प्रदेश सरकार के उदासीनता पूर्ण रवैये के कारण वर्तमान शैक्षणिक सत्र में आरक्षित वर्गों के छात्र-छात्राओं की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
छात्रवासों को खोलने की मांग को के संबंध में नारेबाजी करते हुए ज्ञापन सौंपने के लिए जाते छात्रवासी छात्र-छात्राएं।
संजय का कहना है कि, कोरोना की आड़ लेकर छात्रावासों को अब और बंद नहीं रखा जा सकता है। वे पूंछते है कोरोना काल में जब चुनाव हो सकते है, नेताओं की सभाओं में हजारों-लाखों लोगों की भीड़ जुट सकती, बड़े-बड़े सरकारी कार्यक्रम आयोजित हो सकते हैं और वह सबकुछ हो सकता है जिसमें सरकार की रूचि है तो छात्रावास क्यों नहीं खुल सकते। स्कूल-कॉलेजों, मंदिर-मस्जिद, बाजार आदि को जब खोला ही जा चुका है तो छात्रावासों को खोलने से फिर परहेज क्यों ? वैसे भी मौजूदा सत्र में सभी छात्रावासों में छात्र-छात्राओं की संख्या निर्धारित सीट की आधी ही है।
दरअसल, कोरोना संक्रमण के लॉकडाउन के चलते छात्रावास 22 मार्च 2020 से बंद पड़े हैं, इस कारण अधिकाँश छात्र-छात्राएं उनमें प्रवेश ही नहीं ले सके। इसलिए छात्रावासों में सीमित छात्र संख्या के मद्देनजर कोरोना गाइडलाइंस का पालन सुनिश्चित कराते हुए उन्हें खोलने के आदेश अविलंब जारी किये जाएँ। आरक्षित वर्गों के छात्रों ने ज्ञापन के माध्यम से दो टूक शब्दों में यह चेतावनी भी दी है, यदि सप्ताह भर के अंदर छात्रावासों को संचालित नहीं किया गया तो उन्हें शिवराज सरकार के खिलाफ आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

सिर्फ छात्रावास खोल दो, भोजन की व्यवस्था कर लेंगे

सोमवार 11 जनवरी को नारेबाजी करते हुए पन्ना के संयुक्त कलेक्ट्रेट भवन पहुंचे आरक्षित वर्गों के छात्रावासी छात्र-छात्राओं ने नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपते हुए उनसे कहा कि सरकार हमारी समस्या पर सहानुभूति पूर्वक विचार करे। यदि राज्य शासन के समक्ष वित्तीय संकट है तो वह सिर्फ छात्रावासों को खोलकर हमें रहने की सुविधा प्रदान करे शेष भोजन आदि की व्यवस्था हम अपने घरों से राशन लाकर किसी तरह कर लेंगे। ज्ञापन सौंपने वालों में मुख्य रूप से युवा नेता संजय अहिरवार, पुष्पेंद्र अहिरवार, राजकुमार वर्मा, दिलीप अहिरवार, अभिषेक वर्मा, सुनैना कोरी, केशकली, चरण चौधरी, मुन्नी अहिरवार, शांति आदिवासी, पूजा यादव, मोहित, स्वतंत्र, मनोज, प्रमोद, जगजीवन, सचिन, अजय, आशीष, मोहित, वीरेन्द्र, राहुल, राजेंद्र, आशीष, भूपेंद्र, रितिक, ब्रजकिशोर, सत्येंद्र, राकेश, जीतेंद्र, लवकेश, अनुराग आदि छात्र-छात्राएं शामिल रहे।

पन्ना में मृत मिले दो दर्जन से अधिक कबूतर, जांच के लिए भेजे गए सैम्पल

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पन्ना में जगन्नाथ स्वामी मंदिर की छत पर मृत पड़े कबूतरों के शव का जायजा लेते हुए पशु चिकित्सा विभाग की टीम।

पशु चिकित्सा विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर लिया जायजा

बड़ी संख्या में कबूतरों की मौत होने की खबर फैलने से मचा हड़कंप

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के कई जिलों में बर्ड फ्लू की पुष्टि के बीच आज पन्ना जिले में भी बड़ी संख्या में पक्षियों अस्वाभाविक मौत होने का मामला प्रकाश में आया है। पन्ना के प्राचीन जगन्नाथ स्वामी मंदिर की छत पर दो दर्जन से अधिक कबूतर मृत पाए गए। बड़ी संख्या में कबूतरों मरने की सूचना मिलने पर सोमवार की सुबह पशु चिकित्सा सेवाएं विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। मंदिर की छत पर मृत मिले 26 कबूतरों के शव को उक्त टीम ने अपने कब्जे में लेकर जांच हेतु उनके सैम्पल भोपाल भेजे हैं। वहीं जांच रिपोर्ट के आने पर ही कबूतरों की मौत की स्थिति स्पष्ट होने की बात कही जा रही है। नगर के बीचों-बीच स्थित मंदिर में कबूतरों की मौत होने से जुड़ी जानकारी आज सुबह सोशल मीडिया पर आते ही हड़कम्प मच गया। कोरोना संकट को लेकर पहले से ही चिंतित जिले के लोग अब बर्ड फ्लू के रूप एक नए खतरे की आशंका से भयभीत नजर आ रहे हैं।
पशु चिकित्सा विभाग पन्ना के उप संचालक डॉ. व्हीके त्रिपाठी ने बताया कि सोमवार की सुबह उन्हें सूचना मिली थी कि जगन्नाथ स्वामी मंदिर में कई कबूतर मृत पड़े हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए डॉक्टर नरेन्द्र सिंह बुन्देला के नेतृत्व में एक टीम को तुरंत मौके पर भेजा गया। उन्होंने बताया, मंदिर में 26 मृत कबूतर पाये गए। कुछ कबूतरों के शव सड़े हुए मिले। जिससे उनकी मौत पिछले कई दिनों से जारी रहने की संभावना जताई जा रही है। प्रदेश के कई जिलों में बर्ड फ्लू की दस्तक के मद्देनजर पन्ना में कबूतरों की मौत को लेकर पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारी फ़िलहाल कुछ भी बोलने से बच रहे है। उनका कहना है जांच रिपोर्ट आने पर ही आधिकारिक तौर यह स्पष्ट हो पाएगा कि कबूतरों की मौत बर्ड फ्लू के कारण हुई या फिर इसके पीछे अन्य कोई वजह है।
जगन्नाथ स्वामी मंदिर में कबूतरों के मरने की जानकारी पशु चिकित्सा विभाग के द्वारा नगर पालिका परिषद पन्ना को दे दी गई है तथा मंदिर को सैनिटाइज करने के लिए कहा गया है। उल्लेखनीय है कि इसके पूर्व पन्ना के ककरहटी क़स्बा में कौवा मृत मिला था और अजयगढ़ व पवई में मुर्गियों के मरने की सूचना मिली थी। इनके सैम्पल भी जांच हेतु भोपाल स्थित लैब भेजे गए हैं।

गप-शप : जाँच कराएंगे पर रिपोर्ट नहीं बताएंगे !

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मारे यहाँ भ्रष्टाचार के मामलों की जांच अफसरों के लिए कमाई का जरिया बन चुकी है। जब कभी किसी मामले में बड़ी गड़बड़ी या फिर जिम्मेदारों की लापरवाही सामने आने पर हंगामा खड़ा होता है तो मामले को शांत कराने के लिए तुरंत जांच के आदेश जारी कर दिए जाते हैं। शीर्ष अफसरों की इस संवेदनशीलता को देखकर प्रभावित आमजन को एकबारगी यह लगता है, उनके साथ अब वाकई न्याय होगा ! मगर अधिकाँश प्रकरणों में ऐसा होता नहीं है। मीडिया की सुर्ख़ियों और लोगों की स्मृति से मामले के ओझल होते ही खेल हो जाता है। अपवाद स्वरूप किसी मामले में लम्बे इन्तजार के बाद निष्पक्ष जांच अगर हो भी गई तो उस पर कार्रवाई कराने में चप्पलें घिस जाती हैं।
यहां पर इतना सब जिक्र सिर्फ इसलिए किया ताकि जांच के आदेश से पैदा होने वाली खुशफहमी भरी तीरंदाजी से बाहर निकलकर उन बहुचर्चित मामलों की सुध ले सकें जिनमें जांच के आदेश दिए गए थे। पन्ना के बाहरी इलाके में स्थित नयापुरा-मुड़िया पहाड़ की बेशकीमती जमीन को कथित तौर पर हड़पने का प्रकरण, बस स्टेण्ड की नवनिर्मित सीसी सड़क के घटिया कार्य को छिपाने के लिए उसके ऊपर डामरीकरण कराने एवं नेशनल हाइवे के चौड़ीकरण के नाम पर कराये गए औचित्यहीन भू-अधिग्रहण के मामले की जांच का आज तक पता नहीं चल सका। यह हाल तब है जबकि सम्बंधित प्रकरणों की जाँच के लिए समयसीमा निर्धारित की गई थी। अब नये अर्थों में शायद यही सुशासन है।

अफवाह फ़ैलाने में सबसे तेज़ निकले नपा सीएमओ

नगर पालिका परिषद पन्ना में पिछले कुछ सालों से सत्ताधारी दल के नेताओं एवं जनप्रतिनिधियों की सिफारिशों पर मुख्य नगर पालिका अधिकारी की पोस्टिंग की जा रही है। बीते 5-6 सालों में नगर के लोगों का एक से बढ़कर एक सीएमओ से पाला पड़ा है। इनमें कोई ठेकेदार निकला तो किसी ने इवेंट मैनेजमेंट के दम पर हवा-हवाई किले खड़े करने का करतब दिखाया। मध्यप्रदेश के बेहतरीन प्रशासनिक चरागाह में शामिल पन्ना कुछ को इतना रास आया कि वे इस जिले का मोह छोड़ नहीं पा रहे हैं। लेकिन नगर पालिका पन्ना के मौजूदा सीएमओ यशवंत वर्मा की बात निराली है। पवई के रास्ते पन्ना में लैंडिंग करने वाले वर्मा जी पिछले दिनों दूर की कौंड़ी खोज लाए। उन्होंने 7 जनवरी 2021 को एक विवादित आदेश जारी कर बताया कि “वर्तमान में बर्ड फ्लू नामक बीमारी फ़ैल रही है जिस कारण से कई लोगों की मृत्यु हो रही है।”
कोरोना संकटकाल में बर्ड फ्लू के खतरे की आहट के बीच आए इस भ्रामक और कपोल-कल्पित आदेश ने खबरिया चैनलों से भी तेज़ सनसनी/अफवाह फ़ैलाने का काम किया। फिलहाल बर्ड फ्लू से देश या प्रदेश में एक भी व्यक्ति की मौत होने की खबर नहीं है। कोरोना के कारण लोगों में जहाँ पहले से ही डर और घबराहट का माहौल है वहाँ सीएमओ के इस आदेश ने उन्हें कहीं अधिक भयभीत करने और अफवाह फ़ैलाने का काम किया है। हैरानी की बात तो यह है कि बेहद महत्वपूर्ण पद पर बैठे अफसर की इस आपराधिक लापरवाही पर जिम्मेदार मौन हैं। सिर्फ सीएमओ के आदेश को निरस्त करके जिम्मेदारों ने अपने कर्तव्यों इतिश्री कर ली है। फर्ज कीजिए अगर यह कृत्य किसी आम आदमी ने किया होता तो वह अब तक कहाँ होता ?

कहीं पे निगाहें, कहीं पे निशाना

भारतीय जनता पार्टी की कद्दावर महिला नेत्री एवं पूर्व मंत्री सुश्री कुसुम सिंह महदेले ने बीते दिनों पन्ना में अपने निज निवास सफरबाग में पत्रकारों को आमंत्रित कर नेशनल हाइवे क्रमांक-39 के निर्माण कार्य की गुणवत्ता एवं उसके चौड़ीकरण का मुद्दा उठाते हुए जांच की मांग की। करीब पाँच दशक से बीजेपी में सक्रिय अनुभवी नेत्री सुश्री महदेले “जिज्जी” जनहित के मुद्दों, गरीबों एवं कमजोर तबकों के अधिकारों से जुड़े मसलों को लेकर हमेशा से ही मुखर रहीं है। बहरहाल मीडिया से काफी समय बाद जिज्जी जब इस तरह मुखातिब हुईं तो प्रशासनिक व राजनैतिक हलकों में खलबली मच गई। सर्वविदित है कि पिछले दिनों यह खुलासा हुआ था कि पन्ना नगर में नेशनल हाइवे की चौड़ाई बढ़ाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर भू-अर्जन कराया गया था।
निर्माण एजेंसी ने जिन लोगों की जमीनों का अधिग्रहण किया था वे आज भी उन्हीं के कब्जे में हैं। उक्त भूमियों का सड़क के चौड़ीकरण में उपयोग किए बगैर ही निर्माण एजेन्सी सड़क बना डाली। इस तरह कुछ लोगों करोड़ों रुपए का भू-अर्जन मुआवजा भी मिल गया और उनकी एक इंच जमीन भी नहीं गई। सियासत और इसके दांवपेंच समझने वालों को लगता है, सुश्री महदेले को पन्ना की चुनावी राजनीति से अपनी जबरिया विदाई की कसक अब तक साल रही है। शायद इसलिए उन्होंने नेशनल हाइवे के मुद्दे को नए सिरे से हवा देकर कहीं पे निगाहें-कहीं पे निशाने की तर्ज पर कुछ लोगों को असहज किया है। बताते चलें कि मुआवजा पाने वालों की सूची में पन्ना विधायक एवं प्रदेश के खनिज मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह का नाम भी शामिल है।

प्रशासन को ढूंडे नहीं मिल रहे माफिया

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जब से खुद को खतरनाक मूड में बताते हुए मसल पॉवर और रसूख का इस्तेमाल करके अवैध गतिविधियां संचालित करने वाले माफियाओं-गुण्डों को मध्यप्रदेश छोड़ने और दस फीट नीचे जमीन में गाड़ने की चेतावनी दी तब से लगता है कि पन्ना जिले में सक्रिय रहे सभी माफिया, गुण्डे, बदमाश भूमिगत हो गए हैं। शायद इसीलिये पन्ना जिला प्रशासन को रेत-पत्थर माफिया अब भी ढूँढे नहीं मिल रहे हैं। हीरा-सागौन-शराब तस्कर, राजनैतिक दलों से जुड़े भू-माफिया, परिवहन तथा शिक्षा माफिया भी लगता है सीएम के दबंग अंदाज वाली चेतावनी मात्र सुनकर भय के कारण कहीं दुबक गए है। इसलिए आमआदमी को ही माफिया बताकर अभियान के तहत कार्रवाई की खानापूर्ति का घालमेल चल रहा है। इसके उलट सच्चाई यह है कि माफियाओं-गुण्डों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर पन्ना जिला प्रशासन सांसत में है।
जिम्मेदार अधिकारी इस तरह का अभिनय कर रहे हैं जैसे कि, पन्ना में रेत-पत्थर माफिया और भू-माफिया सक्रिय ही नहीं है। यह अलग बात है कि रेत ठेके की आड़ में बड़े पैमाने पर खुलेआम रेत की लूट का खेल बेरोकटोक चल रहा है। राजनैतिक लोग व आपराधिक तत्व पहाड़ों को खोखला कर अवैध पत्थर खदानें चला रहे हैं। भू-माफिया प्रसाशनिक सांठगांठ के चलते बेशकीमती सरकारी भूमियों पर काबिज हैं। वहीं कतिपय ताकतवर लोग अपने बंधुआ श्रमिकों के नाम पर पत्थर खदान, बड़े प्रतिष्ठान संचालित कर रहे हैं और उनके नाम पर बैंकों से लिए गए लोन का भी उपभोग कर रहे हैं। लेकिन इन तमाम जानकारियों के बाद भी प्रशासनिक अधिकारी हाथ-हाथ रखे बैठे हैं। क्योंकि मैदानी पोस्टिंग की मलाई की छानने के लिए राजनैतिक आकाओं की कठपुतली बने इन अफसरों में प्रभावशाली लोगों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने का नैतिक साहस ही नहीं है।
                                                                                                    शादिक खान 

हिट एण्ड रन केस | साइकिल सवार दो लोगों को कुचलकर भाग निकला कार चालक, एक की दर्दनाक मौत, दूसरा गंभीर घायल

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सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल बलवन सिंह यादव एवं मौके पड़ीं क्षतिग्रस्त दोनों साइकिलें।

*  पन्ना से बाजार करके वापस गाँव लौट रहे थे दोनों व्यक्ति

*  पन्ना-पहाड़ीखेरा मार्ग पर लोकपाल सागर मोड़ के समीप हुआ हादसा

*  कोतवाली पुलिस के रवैये को लेकर पीड़ित परिजनों में दिखा आक्रोश

*  मृतक का शव तीन घण्टे तक जिला चिकित्सालय में रखा रहा

पन्ना। (www.radarnews.in) पन्ना के साप्ताहिक रविवारीय बाजार से सामान खरीदने के बाद साइकिल से वापस अपने गाँव जा रहे दो लोगों को सामने से आई एक तेज रफ़्तार कार बुरी तरह कुचलते हुए मौके से भाग निकली। पन्ना-पहाड़ीखेरा मार्ग पर लोकपाल सागर मोड़ के समीप ग्राम पुरुषोत्तमपुर में घटित हिट एण्ड रन की इस घटना में एक व्यक्ति की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई जबकि दूसरे को गंभीर चोटें आई हैं। घायल बलवन सिंह यादव निवासी ग्राम पटीबजरिया को उपचार के लिए जिला चिकित्सालय पन्ना में भर्ती कराया गया है। जहां उसका इलाज जारी है।
पन्ना नगर के नजदीक बाहरी इलाके में हुए इस सड़क हादसे पर कार्रवाई को लेकर पीड़ित परिजनों में कोतवाली थाना पुलिस के प्रति आक्रोश और असंतोष व्याप्त है। इनका आरोप है कि आरोपी चालाक व उसकी कार की तत्परता से धरपकड़ न करके कोतवाली थाना पन्ना पुलिस के द्वारा जानबूझकर शिथिलता बरती गई। हादसे की रिपोर्ट भी कथित तौर पर पुलिस ने अपने मनमाफिक दर्ज कर ली। नियमानुसार रिपोर्ट की एक कॉपी भी उन्हें नहीं दी गई। घटना के प्रत्यक्षदर्शियों के नाम तथा गाड़ी का नम्बर आदि जानकारी का उक्त रिपोर्ट में उल्लेख नहीं किया गया।
रविवार 10 जनवरी की शाम कोम प्रसाद कोरी पुत्र स्व. भग्गू उर्फ़ रामसहाय कोरी 40 वर्ष निवासी ग्राम तिलगवां और बलवन सिंह यादव 45 वर्ष निवासी ग्राम पटीबजरिया पन्ना के साप्ताहिक रविवारीय बाजार से सामान खरीदने के बाद साइकिल से वापस अपने गांव जा रहे थे। रास्ते में लोकपाल सागर मोड़ के समीप ग्राम पुरुषोत्तमपुर में सामने से आई एक तेज रफ़्तार कार क्रमाँक एमपी-35 सीए-2077 के चालक ने अत्यंत ही लापरवाही पूर्वक वाहन चलाते हुए पहले हाथ ठेला में ठोकर मारी और फिर दोनों साइकिल सवारों को कुचलते हुए मौके से फरार हो गया।
घटनास्थल पर पड़ा मृतक कोम प्रसाद कोरी का शव।
इस हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी फ़ैल गई। इस बीच अत्यंत ही गंभीर रूप से घायल कोम प्रसाद कोरी पुत्र स्व. भग्गू उर्फ़ रामसहाय कोरी 40 वर्ष निवासी ग्राम तिलगवां की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। पेशे से मजदूर मृतक अपने परिवार का मुखिया और पांच बच्चों का पिता था। वह अपने परिवार में अकेला कमाने वाला सदस्य था। वहीं इस हादसे में घायल बलवन सिंह यादव को इलाज हेतु जिला चिकित्सालय पन्ना में भर्ती कराया गया है। उसके दाहिनी हथेली, पैर, पेट और कमर में चोटें आई हैं।

.. तब पुलिस इस तरह शांत नहीं बैठती

जिला चिकित्सालय पन्ना में रखा मृतक का शव।
कोम प्रसाद कोरी की मौत की दुखद खबर मिलते ही उसके परिजन आनन्-फानन मौके पर पहुंचे। घटनास्थल पर मौजूद रहे प्रत्यक्षदर्शियों एवं आसपास के लोगों से कार का नम्बर आदि का पता लगाने के बाद वे रिपोर्ट दर्ज कराने कोतवाली थाना गए। मृतक के भांजे रमेश कोरी एवं भाई विशाल कोरी ने बताया कि कोतवाली थाना पन्ना में मिले पुलिसकर्मियों को गाड़ी का नम्बर बताने के बाद भी उन्होंने तत्परता से संबंधित वाहन और उसके चालक को पकड़ने में कोई रूचि नहीं ली। हादसे की रिपोर्ट दर्ज कराने की बात पर जिला चिकित्सालय से तहरीर आने के बाद मर्ग कायम करने की बात कहकर उन्हें चलता कर दिया। पुलिस के इस रवैये से क्षुब्ध पीड़ित परिजन आरोपी चालक को गिरफ्तार करने एवं उसकी कार को जब्त करने में जानबूझकर लापरवाही बरतने का गंभीर आरोप लगा रहे हैं।
उनका कहना है कि सड़क हादसे में चूँकि एक गरीब मजदूर की मौत हुई है इसलिए आरोपी चालक को बचाने के लिए के पुलिस शिथिलता बरत रही है। इसके उलट अगर कोई प्रभावशाली व्यक्ति मरता तब शायद पुलिस इस तरह शांत नहीं बैठती। रमेश कोरी एवं विशाल कोरी का यह भी आरोप है कि इस मामले में लीपापोती करने के लिए कोतवाली पुलिस ने कथित तौर अपने मनमाफिक रिपोर्ट भी दर्ज कर ली है। जिसके संबंध उन्हें न तो कोई जानकारी दी जा रही और ना ही नियमानुसार रिपोर्ट की एक कॉपी दी गई। घटना के प्रत्यक्षदर्शियों के नाम तथा गाड़ी नम्बर आदि जानकारी का उक्त रिपोर्ट में उल्लेख भी नहीं किया गया।

एसपी ने दिया कार्रवाई का आश्वासन

कोतवाली पुलिस के रवैये से आहत पीड़ित परिजन कई तरह की आशंकाओं के चलते मृतक के शव को शाम 6 बजे से लेकर रात्रि 9 बजे तक जिला चिकित्सालय में ही रखे रहे। इस दौरान कोंग्रेस के कतिपय युवा नेता वहाँ पहुंचे और शव रखकर आंदोलन करने की योजना बनने लगी। मगर तभी पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी के संज्ञान में मामला आने पर उन्होंने पीड़ित परिजनों के प्रति सहानुभूति प्रकट करते हुए उन्हें भरोसा दिलाया कि आरोपी चाहे जो हो इस प्रकरण को गंभीरता से लेकर निष्पक्षता के साथ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जायेगी। सड़क हादसे के संबंध उनके पास जो भी साक्ष्य या जानकारी है उसे प्रकरण की विवेचना में शामिल किया जाएगा।
इलाज हेतु जिला चिकित्सालय पन्ना में भर्ती घायल बलवन सिंह यादव।
पुलिस अधीक्षक से आश्वासन मिलने के बाद फ़िलहाल मामला शांत हो गया। परिणामस्वरूप पीड़ित परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम कराने के लिए उसे जिला चिकित्सालय से हटाकर शव विच्छेदन गृह में रखवा दिया। शव का पोस्टमार्टम सोमवार को होने की बात कही जा रही है।

केन-बेतवा लिंक परियोजना : जल आवंटन में मध्यप्रदेश का अहित नहीं होने देंगे और उत्तर प्रदेश के हितों की भी पूरी रक्षा की जाएगी – मंत्री श्री शेखावत

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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने मंत्रालय में अटल भूजल योजना एवं जल जीवन मिशन की प्रगति की समीक्षा की।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने पानी के बंटवारे को लेकर मंत्रालय में की बैठक

परियोजना से उत्तर प्रदेश को पूर्ववत 700 एमसीएम पानी देने के लिए तैयार

*  केंद्रीय मंत्री के समक्ष जल आवंटन को लेकर मजबूती से रखा गया मध्य प्रदेश का पक्ष

सीएम योगी और शिवराज के साथ बैठक कर पानी के बंटवारे का हल निकाला जाएगा

भोपाल।(www.radarnews.in) केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा है कि केन बेतवा लिंक परियोजना से जल आवंटन में मध्यप्रदेश का अहित नहीं होने देंगे। साथ ही उत्तरप्रदेश के हितों की भी पूरी रक्षा की जाएगी। इस संबंध शीघ्र ही वे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ संयुक्त बैठक कर अंतिम हल निकालेंगे।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश हमेशा से दूसरे राज्यों के हितों की परवाह करता रहा है परंतु प्रदेश का अहित न हो इसका भी पूरा ध्यान रखा जाएगा। केन-बेतवा परियोजना से मध्यप्रदेश उत्तरप्रदेश को 700 एमसीएम पानी देने के लिए सहमत है। शीघ्र ही केंद्रीय मंत्री श्री शेखावत के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ के साथ बातचीत कर योजना के गतिरोध को दूर किया जाएगा। बैठक में मुख्यमंत्री श्री चौहान ने जल आवंटन को लेकर मध्यप्रदेश का पक्ष मजबूती से रखा।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का मंत्रालय में स्वागत किया।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत आज मंत्रालय में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं सभी संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों के साथ केन बेतवा लिंक परियोजना के जल के बंटवारे के संबंध में बैठक कर रहे थे। बैठक में जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट, मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस, नेशनल जल जीवन मिशन के डायरेक्टर भरत लाल, अपर मुख्य सचिव जल संसाधन एस.एन. मिश्रा आदि उपस्थित थे।

परियोजना के संबंध में मध्यप्रदेश का पक्ष

मध्यप्रदेश की दौधन बांध पर 6590 एम.सी.एम जल उपलब्धता के आधार पर बांध से उत्तरप्रदेश के लिए 700 एम.सी.एम जल सभी प्रयोजनों के लिए लिंक केनाल सहित नॉन मानसून के दौरान आवंटित करने पर सहमति है। लिंक केनाल द्वारा उत्तरप्रदेश को प्रदत्त जल को शामिल करते हुए उत्तरप्रदेश को आवंटित 1700 एम.सी.एम जल की एकाउंटिग बरियारपुर पिकअप वीयर पर की जाए। शेष संपूर्ण जल 2733 एम.सी.एम के उपयोग करने के लिए मध्यप्रदेश स्वतंत्र रहेगा।

उत्तरप्रदेश का पक्ष

परियोजना अंतर्गत उत्तरप्रदेश गैर मानसून अवधि में दौधन बांध से नवम्बर से मई माह तक 935 एम.सी.एम पानी चाहता है।

राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण का सुझाव

राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण ने सुझाव दिया है कि परियोजना से नॉन मानसून मौसम में दौधन बांध पर उत्तरप्रदेश को 750 एम.सी.एम तथा मध्यप्रदेश को 1834 एम.सी.एम जल दें। अभिकरण द्वारा दौधन बांध पर जल उपलब्धता 6188 एम.सी.एम मानी गयी है।

मध्यप्रदेश का तर्क

परियोजना के अंतर्गत समस्त तकनीकी एवं जल योजना डिजाईन केन्द्रीय जल आयोग द्वारा दौधन बांध पर 6590 एम.सी.एम जल उपलब्धता के आधार पर की गई है, एवं समस्त अनुमोदन इसी आधार पर किए गए है।
यदि दौधन बांध पर जल उपलब्धता 6590 एम.सी.एम के स्थान पर 6188 एम.सी.एम मानी जाती है, उस स्थिति में भविष्य में मध्यप्रदेश को लगभग 400 एम.सी.एम जल की हानि होगी, साथ ही यदि 750 एम.सी.एम जल दौधन बांध से नॉन मानसून सीजन में उत्तरप्रदेश को उपलब्ध कराया जाता है, उस स्थिति में रनगवां बांध, अंतरिम जलग्रहण क्षेत्र और बरियारपुर स्टोरेज में लगभग 200 एम.सी.एम जल उत्तरप्रदेश को अतिरिक्त रूप से प्राप्त होगा।
अत: उत्तरप्रदेश को कुल आवंटित 1700 एम.सी.एम जल मौजूदा केन सिस्टम से बरियारपुर पर दिया जाना मध्यप्रदेश के हित में होगा।

केन-बेतवा परियोजना के प्रमुख बिन्दु

वर्ष 2009 में भारत सरकार द्वारा केन-बेतवा लिंक बहुउद्देशीय परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया एवं इसके वित्त पोषण हेतु 90:10 अनुपात में केन्द्र एवं संबंधित राज्यों के मध्य आधार सुनिश्चित किया गया।
परियोजना म.प्र. के छतरपुर/पन्ना जिले में स्थित है। परियोजना के क्रियान्वयन से होने वाली संपूर्ण क्षति जैसे- भूमि अधिग्रहण, जंगल क्षति, राजस्व भूमि की क्षति, प्रतिपूरक वनीकरण हेतु गैर वनभूमि की व्यवस्था, जनजातीय परिवारों का विस्थापन एवं पुनर्वास इत्यादि मध्यप्रदेश द्वारा वहन की जा रही है।
राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण द्वारा परियोजना की ड्राफ्ट एकजाई डी.पी.आर. (प्रथम चरण + द्वितीय चरण) अक्टूबर 2018 में तैयार की गई। ड्राफ्ट एकजाई डी.पी.आर. की कुल लागत लगभग 35111.24 करोड़ आंकलित की गई।
जल संसाधन विभाग मध्यप्रदेश द्वारा ड्राफ्ट एकजाई में उत्तरप्रदेश को रबी सीजन में 700 एम.सी.एम. के स्थान पर 930 एम.सी.एम. जल का उपयोग दर्शाया गया है, जबकि मध्यप्रदेश का रबी सीजन में जल एवं कमांड क्षेत्र कम किया गया है, जो मध्यप्रदेश को मान्य नहीं है। मध्यप्रदेश द्वारा एकजाई डी.पी.आर., आपत्तियां इंगित करते हुए महानिदेशक NWDA को प्रेषित की गईं।
दिनाँक 23 अप्रैल 2018 को सचिव, भारत सरकार द्वारा आयोजित बैठक में मध्यप्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं उत्तरप्रदेश के प्रमुख सचिव ने भाग लिया, जिसमें मध्यप्रदेश द्वारा रबी सीजन में सिंचाई व पीने के पानी हेतु बांध से कुल 700 मि.घ.मी. पानी उत्तप्रदेश को आबंटित करने हेतु अपनी सहमति दी गई। लेकिन बैठक में कार्यवृत्त में उत्तरप्रदेश को 788 मि.घ.मी. पानी आबंटित किया गया, जिसके लिए मध्यप्रदेश ने अपने पत्र दिनांक 24 मई 2018 द्वारा असहमति व्यक्त की।
दिनांक 20 जुलाई 2020 को नई दिल्ली में सचिव, जल संसाधन की अध्यक्षता में बैठक में उत्तरप्रदेश के मुख्य सचिव द्वारा रबी सीजन में सिंचाई एवं पीने के पानी के लिये पुन: मांग बढ़ाकर 930 मि.घ.मी. आबंटन हेतु अनुरोध किया गया। सचिव, जल संसाधन भारत सरकार द्वारा सीजनल (नवंबर से मई) जल की आवश्यकता की जांच करने हेतु राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण को निर्देशित किया गया।
प्रमुख अभियंता जल संसाधन विभाग मध्यप्रदेश के पत्र दिनांक 14 जनवरी 2020 द्वारा 700 मि.घ.मी. जल केन सिस्टम से (नवंबर से मई अवधि के दौरान बरियारपुर पिकअप वियर पर उत्तरप्रदेश को आवंटित करने एवं मानूसन अवधि (जून अक्टूबर) में उत्तरप्रदेश के महोबा जिले में निर्मित 10 जलाशयों में आवश्यकतानुसार उत्तरप्रदेश को अपने हिस्से के आबंटित जल से भरने की सहमति दी गई।
22 सितम्बर 2020 को केन्द्रीय मंत्री, जल शक्ति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा वीडियो कान्फ्रेंसिंग से मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के जल संसाधन मंत्री के साथ बैठक की गई। बैठक में चर्चा उपरांत निर्णय लिया गया कि दोनों राज्य भारत सरकार द्वारा भेजे गए मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (MOA) प्रारूप पर अपनी टिप्पणी पूर्ण जानकारी के साथ प्रस्तुत करें, जिससे जल शक्ति मंत्रालय द्वारा (MOA) प्रारूप को अंतिम रूप दिया जा सके।
दिनांक 6 नवम्बर 2020 को भोपाल में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी जी की नदी जोड़ो अभियान परिकल्पना के अनुक्रम में बनाई गई बहुउद्देशीय केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना के गतिरोध को दूर कर, इसका कार्य शीघ्र प्रारंभ करवाया जाएगा। मध्यप्रदेश एवं उत्तरप्रदेश के बीच सीजनल जल बंटवारे पर सहमति न बनने के कारण परियोजना में विलंब हो रहा है।
मध्यप्रदेश ने उत्तरप्रदेश को परियोजना से अवर्षाकाल के महीनों में रबी फसल व पेयजल के लिए 700 मि.घ.मी. पानी देने पर पूर्व में सहमति दी थी, जिसके लिए हम आज भी तैयार हैं। इस संबंध में भारत सरकार के समक्ष मध्यप्रदेश का पक्ष मजबूती से रखा जाएगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बैठक में ही केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत से परियोजना संबंधी गतिरोध शीघ्र दूर करने सबंधी आग्रह किया था।

आपसी बातचीत से 15 दिन में निकालें हल

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने मंत्रालय में जल जीवन मिशन की पुस्तिकाओं का विमोचन किया।
बैठक में ईस्टर्न राजस्थान नहर परियोजना सह पार्वती कालीसिंध चंबल लिंक परियोजना मैं मध्य प्रदेश एवं राजस्थान के बीच जल उपयोग को लेकर भी बातचीत हुई। इस संबंध में केंद्रीय मंत्री शेखावत ने निर्देश दिए कि 15 जनवरी से आगामी 15 दिनों में दोनों पक्ष निरंतर बातचीत कर हल निकालें। इस परियोजना की डीपीआर में प्रस्तावित बांध एवं बैराजों के लिए 50% जल निर्भरता पर जल उपयोग की गणना की गई है। मध्यप्रदेश का कहना है कि इसे 75% जल निर्भरता पर आकलन के आधार पर पुनरीक्षित किया जाए।