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फॉलोअप : पन्ना की रुन्ज नदी में सिर्फ एक शव मिला, पुलिस अधीक्षक बोले सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी

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ख़बरों में प्रसारित वीडियो में नदी के पानी में तैरते दोनों शव जिन्हें पत्रकारों ने अपने कैमरे में कैद किया था।

*   शव की हुई शिनाख्त, पुलिस का दावा वृद्ध की कोविड से नहीं हुई थी मौत

*   ग्रामीणों ने मीडिया कर्मियों को 5-6 शव नदी में देखने की दी थी जानकारी

पन्ना। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में नंदनपुर ग्राम के समीप रुन्ज नदी 3-4 दिन पूर्व आधा दर्जन शव पानी में तैरते हुए दिखने की ग्रामीणों के हवाले से मीडिया में आईं खबरों को पुलिस ने अत्यंत ही गंभीरता से लिया है। मंगलवार को मौके पर जांच करने पहुंची पुलिस को नदी में अब तक सिर्फ एकमात्र वृद्ध का शव मिला है। जिसकी पहचान ग्राम बीहरसरवरिया निवासी के रूप में हुई है। पुलिस का दावा है कि 90 वर्षीय बुजुर्ग की मौत कोविड से नहीं हुई है। पुलिस कप्तान धर्मराज सिंह मीना ने जानकारी देते हुए बताया कि मृतक के परिजनों के अनुसार वह चर्म रोग से पीड़ित था। इसलिए वृद्ध का दाह संस्कार न करके उसे परिजनों के द्वारा नंदनपुर लाकर स्थानीय ग्रामीणों की जानकारी में रीति-रिवाज के अनुसार नदी में प्रवाहित किया गया।
मंगलवार को रुन्ज नदी के पानी में किनारे की तरफ तैरते मिले वृद्ध के शव का विचलित करने वाला फोटो।
पुलिस अधीक्षक मीना ने बताया कि मंगलवार 11 मई को नंदनपुर ग्राम के नागरिकों की उपस्थिति में पुलिस के द्वारा रुन्ज नदी में सघन सर्च ऑपरेशन चलाया गया था। पानी में दूर से देखने पर एक अन्य जो शव प्रतीत हो रहा था वह दरअसल किसी का मृत शरीर नहीं बल्कि रजाई थी। वास्तविकता को सामने लाने के लिए उसे भी सबके सामने पानी से बाहर निकाला गया। ताकि अफवाहों को फैलने से रोका जा सके।
अजयगढ़ से पहुंचे मीडिया कर्मियों को नदी में उस स्थान पर ले जाते ग्रामीण जहां उनके द्वारा शव देखे गए।
उल्लेखनीय है कि कोरोनकाल में देश भर में हो रहीं असमय मौतों के बीच गत दिनों बिहार के बक्सर और उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में गंगा नदी में बड़ी संख्या में तैरते हुए शव बरामद होने की अत्यंत ही भयावह और विचलित करने वालीं ख़बरें आई थीं। कुछ इसी तर्ज पर पन्ना जिले की रुंज नदी में कथित तौर पर 3-4 दिन पूर्व आधा दर्जन शव पानी में तैरते हुए कतिपय ग्रामीणों के द्वारा देखे जाने की पुष्टि की गई। फलस्वरूप पुलिस की जांच के बीच ग्रामीणों के हवाले से आईं खबरों के प्रसारित/प्रकाशित होने के बाद से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों ने बाकायदा कैमरे पर यह बताया कि नदी में शव पड़े होने की सूचना पंचायत के सरपंच-सचिव को दी। लेकिन उनके द्वारा पानी को दूषित होने से रोकने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गई। साथ ही यह भी कहा कि शवों के कारण उनका निस्तार प्रभावित और वे काफी डरे हुए हैं।
धर्मराज सिंह मीना, पुलिस अधीक्षक, जिला पन्ना।
पन्ना पुलिस अधीक्षक धर्मराज मीना का कहना है नदी में 5-6 शव देखे जाने का दावा पुलिस की अब तक की जांच में साबित नहीं हो पाया है। नदी से अब तक सिर्फ एकमात्र वृद्ध का शव बरामद हुआ था, जिसका पुलिस की मौजूदगी अंतिम संस्कार कराया जा चुका है। रुन्ज नदी में आज भी पुलिस का सर्च ऑपरेशन जारी है ताकि सनसनीखेज भ्रामक दावों की सच्चाई को उजागर किया जा सके। पुलिस कप्तान का कहना है यह मामला बेहद संवेदनशील है, सिर्फ एकाध ग्रामीण के बयान के आधार पर खबर प्रसारित करने की जल्दबाजी की ना दिखाकर मीडियाकर्मी जिम्मेदारी से सभी तथ्यों को अच्छी तरह पड़ताल करते तो शायद बेहतर होता। क्योंकि इससे जनमानस में गलत सन्देश जाता है। मालूम होकि इन दिनों रुन्ज नदी में पानी काफी कम है इसलिए पुलिस का सर्च ऑपरेशन जल्द पूरा होने की उम्मीद है।

कोरोनकाल की भयावह हक़ीक़त फिर सामने आई ! बिहार और यूपी के बाद मध्यप्रदेश की इस नदी में शव मिलने से डर का माहौल

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ख़बरों में प्रसारित वीडियो में नदी के पानी में तैरते दोनों शव जिन्हें पत्रकारों ने अपने कैमरे में कैद किया था।

*  पन्ना जिले की रुन्ज नदी में आधा दर्जन शव दिखने का ग्रामीणों ने किया दावा

*  नंदनपुर ग्राम के रहवासियों ने सरपंच-सचिव को 3-4 दिन पूर्व दी थी सूचना

*  मीडिया के मौके पर पहुँचने के बाद हरकत में आए प्रशासन ने शुरू की जांच

पन्ना। (www.radarnews.in) कोरोनाकाल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में अकाल और गुमनाम मौतें हो रहीं है। देश में कई जगह शमशानों में वोटिंग चल रही है, लकड़ियों की कमी होने तथा कब्रिस्तानों में जगह कम पड़ने जैसीं ख़बरों के बीच बिहार के बक्सर में और उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में गंगा नदी में फेंके गए कई शव तैरते हुए मिलने से मचा हड़कम्प अभी पूरी तरह से शांत ही नहीं हुआ था कि अब मध्यप्रदेश के पन्ना जिले की रुन्ज नदी में शव मिलने से सनसनी व्याप्त है।
जिले के धरमपुर थाना अंतर्गत आने वाले ग्राम नंदनपुर के समीप रुन्ज नदी के पानी में 3-4 दिन पूर्व आधा दर्जन शव तैरते हुए ग्रामीणों के द्वारा देखे गए। जिससे भयभीत ग्रामीणों ने तुरंत इस अप्रत्याशित और विचलित करने वाले घटनाक्रम की जानकारी सरपंच-सचिव को दी। अत्यंत ही संवेदनशील मामले की जिम्मेदारों ने जब कोई सुध नहीं ली तो निस्तार प्रभावित होने से परेशान ग्रामीणों ने जहां-तहां अपना दुखड़ा सुनाना शुरू कर दिया।
अजयगढ़ से पहुंचे मीडिया कर्मियों को नदी में उस स्थान पर ले जाते ग्रामीण जहां उनके द्वारा शव देखे गए।
फलस्वरूप मंगलवार 11 मई को रुन्ज नदी में शव पड़े होने की भनक लगने पर अजयगढ़ तहसील मुख्यालय के मीडिया कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर जब छानबीन की तो पानी की सतह पर तैर रहे दो शव कैमरे में कैद हुए। हालांकि इस दौरान वहां मौजूद ग्रामीण नदी में आधा दर्जन शव देखे जाने का दावा करते रहे। नदी में शव मिलने के बाद स्थानीय लोगों ने वहां बदबू फैलने-पानी दूषित होने की शिकायत की है और पंचायत के नुमाइंदों की घोर उदासीनता के खिलाफ नाराजगी जाहिर की है। रुन्ज नदी में अज्ञात शव मिलने से पूरे इलाके में जबरदस्त भय का माहौल निर्मित है।
पन्ना जिले की अजयगढ़ जनपद अंतर्गत आने वाली नंदनपुर ग्राम पंचायत का कार्यालय।
इससे जुड़ीं खबरों के प्रसारित के बाद हरकत में आए पुलिस और प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पन्ना जिले में कोरोना संक्रमण की वास्तविक स्थिति और इससे होने वाली मौतों के आंकड़ों को छिपाने के आरोपों से घिरे प्रशासन ने अब नदी में तैरते मिले अज्ञात शवों की संख्या को लेकर गोलमोल जवाब देते हुए लीपापोती शुरू कर दी है। उधर, नंदनपुर के ग्रामीणों का कहना है कि नदी में दिखे शव उनके इलाके के नहीं हैं क्योंकि हमारे यहां शवों को पानी में बहाने की परम्परा नहीं है।

कोरोना संक्रमित मरीजों के शव होने की आशंका

रुन्ज नदी में किनारे की तरफ पड़े अज्ञात शव की विचलित करने वाली तस्वीर।
गौरतलब है कि पन्ना जिले के ग्रामीण अंचल में कोरोना संक्रमण लगातार बेहद तेजी से फ़ैल रहा है। इसके मद्देनज़र नंदनपुर ग्राम के लोगों को आशंका है कि 3-4 दिन पूर्व नदी में तैरते दिखे शव कोविड मरीजों के हो सकते हैं। अभी तक ये साफ नहीं हो पाया है कि ये लाशें आसपास के गावों से ही बहाई गई थीं या फिर पन्ना की ओर से बहकर आई थीं। नदी में कई जगह फिलहाल इतना पानी नहीं है कि शव कहीं ज्यादा दूर से बहकर आ पाएं। आखिर ये शव आए कहां से ? इस सवाल का जवाब अभी नहीं मिल पाया है।
नदी में शव मिलने की वजह से स्थानीय लोगों को डर है कि इस वजह से पानी दूषित होगा। जिससे आने वाले दिनों में जलसंकट की स्थिति गंभीर होने पर पानी की व्यवस्था के लिए उन्हें परेशान होना और भटकना पड़ेगा। साथ ही नदी में बहाए गए शवों के कारण कोरोना संक्रमण फैलेगा।
नदी में बहाए गए शवों के संबंध मीडिया कर्मियों को मौके पर आवश्यक जानकारी देते हुए नंदनपुर के ग्रामीण।
प्रशासन ने इस मामले के जांच की बात कही है। अब देखना यह है कि जांच उपरांत प्रशासन इस मामले में आधिकारिक तौर पर क्या खुलासा करता है। बताते चलें कि रुन्ज नदी पन्ना जिले के बृजपुर क्षेत्र से प्रवाहित होकर लखनपुर सेहा होते हुए तराई अंचल में उतरती है। यह बरसाती नदी आरामगंज, हरदी, नयागांव, नंदनपुर होते हुए पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के बड़ेछा नामक स्थान पर दूसरी नदी में जाकर मिलती है।

पूर्व मंत्री मलैया को नोटिस दिए जाने से नाराज़ वरिष्ठ नेत्री कुसुम महदेले ने “BJP” को लेकर कही ये चुभने वाली बात !

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पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेत्री कुसुम सिंह मेहदेले।

*   “अब भाजपा में वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की उपेक्षा करना और उनकी निष्ठा पर असत्य लांछन लगाना भी शुरू हो गया…यह दुर्भाग्यपूर्ण है”

*   पूर्व मंत्री महदेले ने ट्वीट कर प्रदेश भाजपा नेतृत्व के फैसले पर उठाया सवाल

*   दमोह विधानसभा सीट पर संपन्न उपचुनाव पर बोलीं- उपचुनाव करवाना भी उचित नहीं था

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश की दमोह विधानसभा सीट पर संपन्न उपचुनाव में भारतीय जनता को मिली करारी हार के बाद शुरू हुए आरोप-प्रत्यारोप के दौर के बीच पार्टी के द्वारा इस हार के लिए भितरघात के आरोप में पूर्व मंत्री जयंत मलैया और उनके पुत्र सिद्धार्थ के खिलाफ की गई को लेकर शुरू हुआ विवाद अब थमने का नाम नहीं ले रहा है। मलैया को हार के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए नोटिस देने पर भाजपा विधायक अजय विश्नोई ने कड़ा विरोध करते हुए बाजिव सवाल उठाए थे। इसी कड़ी में अब पूर्व मंत्री कुसुम सिंह महदेले ने भी इस मामले में पार्टी के प्रदेश नेतृत्व फैसले की तीखी आलोचना की है।
अपने बेबाक बायनों के लिए चर्चित भाजपा की कद्दावर नेत्री एवं मध्यप्रदेश की पूर्व मंत्री सुश्री कुसुम सिंह महदेले ने अपने ट्वीट से एक बार फिर प्रदेश में सत्ता और संगठन के खेमे खलबली मचा दी है। दमोह में हार के बाद भितरघात एवं पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में पूर्व मंत्री जयंत मलैया को नोटिस देने एवं उनके पुत्र युवा नेता सिद्धार्थ मलैया को पार्टी से बाहर करने के प्रदेश नेतृत्व के फैसले पर वरिष्ठ नेत्री महदेले ने सवाल उठाते हुए इसे दुर्भायपूर्ण बताया है।
पूर्व मंत्री कुसुम सिंह महदेले के ट्वीट का स्क्रीनशॉट।
बगैर किसी लाग-लपेट के बड़ी ही साफगोई से अपनी बात कहने वालीं पूर्व मंत्री कुसुम महदेले ने सिलसिलेवार तीन ट्वीट कर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश नेतृत्व पर बड़ा हमला बोला है। साथ ही, बीजेपी विधायक अजय विश्नोई के बयान का समर्थन किया है। उन्होंने अपने एक ट्वीट में कहा- अब भाजपा में वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की उपेक्षा-अवमानना करना और उनकी निष्ठा पर झूठे लांछन लगाना भी शुरू हो गया है। श्री जयंत मलैया को कारण बताओ नोटिस और सिद्धार्थ की सदस्य्ता समाप्त करना दुर्भाग्यपूर्ण है।”
पूर्व मंत्री कुसुम सिंह महदेले के ट्वीट का स्क्रीनशॉट।
पूर्व मंत्री महदेले ने दूसरे ट्वीट में कहा- “मलैया जी और सिद्धार्थ पर आरोप-प्रत्यारोप कतई उचित नहीं है।” वे यहीं नहीं रुकीं, उन्होंने इशारों-इशारों में दमोह से कोंग्रेस विधायक रहे राहुल लोधी को इस्तीफ़ा दिलाकर भाजपा में शामिल कराने और फिर वहाँ हुए उपचुनाव में राहुल को भाजपा उम्मीदवार घोषित करने के पश्चात आए शर्मनाक नतीज़ों को लेकर इस पटकथा के पर्दे के पीछे के लेखकों या रणनीतिकारों की आलोचना करते हुए कहा- उपचुनाव करवाना भी उचित नहीं था।”
उन्होंने वरिष्ठ विधायक अजय विश्नोई के बयान का समर्थन करते हुए ट्विटर पर लिखा है- अजय विश्नोई जी आपने दमोह उपचुनाव को लेकर सही टिप्पणी की है।” मालूम हो कि दो दिन पूर्व विधायक विश्नोई ने सोशल मीडिया पर सवाल किया था कि दमोह उपचुनाव में हार की जवाबदारी क्या टिकिट बांटने वाले और चुनाव प्रभारी लेंगे।
सुश्री महदेले के इन ट्वीट की पन्ना और दमोह से लेकर भोपाल तक भाजपा के अंदर और बाहर काफी चर्चा हो रही है। कई बड़े नेता दबी जुबान यह मानते हैं कि राहुल लोधी को भाजपा में शामिल करने व उपचुनाव में टिकिट देने के फैसले से पार्टी को काफी नुकसान हुआ है। समय-समय पर विभिन्न मुद्दों पर खुलकर अपनी राय जाहिर करने वाली वरिष्ठ नेत्री कुसुम महदेले ने इसके पूर्व केन-बेतवा लिंक परियोजना का विरोध करते हुए उसे विनाशकारी बताया था।
भाजपा नेता राहुल लोधी एवं कोंग्रेस के नव निर्वाचित दमोह विधायक अजय टंडन।
उल्लेखनीय है कि दमोह से कोंग्रेस प्रत्याशी अजय टंडन ने 17 हजार से अधिक मतों से भाजपा के राहुल लोधी को करारी शिकस्त दी है। दमोह विधानसभा सीट पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता जयंत मलैया की परंपरागत सीट रही है। मलैया इस सीट से 7 बार विधायक चुने गए। लेकिन वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में मलैया को कोंग्रेस के उम्मीदवार रहे राहुल लोधी ने मात दी थी। इसके करीब डेढ़ साल बाद प्रदेश में नाटकीय अंदाज में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद राहुल ने भी पाला बदल लिया। वे कोंग्रेस से इस्तीफ़ा देकर भाजपा में शामिल हो गए।
साभार : दैनिक भास्कर।
उपचुनाव में भाजपा ने जब राहुल को दमोह से प्रत्याशी घोषित किया तो पार्टी के स्थानीय वरिष्ठ नेता खुद को नजरअंदाज किए जाने से नाराज हो गए। इस उपचुनाव को जीतने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा सहित कई मंत्रियों ने पूरी ताकत झोंक रखी थी इसके बाद भी भाजपा को बड़ी हार मिली। दमोह के चुनावी नतीजों को लेकर विश्लेषकों का मानना है कि वहाँ के मतदाताओं ने दलबदल को नकारा है।

शिवराज हार की जिम्मेदारी तो लेंगे नहीं- मलैया

जयंत मलैया, पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता।
गौरतलब है कि दमोह उपचुनाव में भाजपाके उम्मीदवार राहुल सिंह लोधी की हार के लिए पार्टी ने पूर्व मंत्री जयंत मलैया को जिम्मेदार मानते हुए नोटिस दिया है। इससे नाराज मलैया का कहना है- सिर्फ मेरा बूथ भाजपा नहीं हारी है। राहुल खुद अपना वार्ड हार गए। केन्द्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल जहाँ रहते हैं वह वार्ड भी हारे। जिला पंचायत अध्यक्ष और नगर पालिका अध्यक्ष का वार्ड भी हार गए। अब इस हार का ठीकरा किसी पर तो फोड़ना था, तो मुझ पर और मेरे बेटे पर फोड़ दिया। शिवराज हार की जिम्मेदारी तो लेंगे नहीं।”

पन्ना जिले के रैपुरा क्षेत्र में झमाझम बारिश के साथ ओले भी गिरे

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रैपुरा में अचानक हुई झमाझम बारिश के कारण कई जगह जल-भराव हो गया।

 मौसम में आए बदलाव के चलते गर्मी से मिली राहत

रैपुरा।(www.radarnews.in) पन्ना जिले के दूरस्थ इलाके रैपुरा में आज दोपहर के समय अचानक मौसम के मिजाज में आए बदलाव के चलते तेज बारिश के साथ ओले भी गिरे। बिन मौसम हुई बारिश से क्षेत्र के लोगों को फिलहाल गर्मी से फौरी तौर पर राहत मिल गई है। भीषण जल संकट से जूझ रहे रैपुरा के पठारी अंचल के लोग झमाझम बारिश होने से काफी खुश नजर आ रहे हैं। लगभग आधा घण्टे से अधिक समय तक हुई बारिश ने पूरे इलाके को तरबतर कर दिया है।
बारिश का सबसे ज्यादा लाभ सब्जी उत्पादक एवं ग्रीष्म कालीन खेती करने वाले किसानों को हुआ है। रविवार को दोपहर करीब 2 बजे मौसम ने जब करवट ली तो किसी ने यह सोचा भी नहीं था कि आधा घण्टे से ज्यादा देर तक बारिश होगी और ओले भी गिरेंगे। समाचार लिखे जाने तक बेमौसम बारिश के कारण रैपुरा के आसपास स्थित गेहूं खरीदी केन्द्रों एवं दलहन-तिलहन खरीदी केन्द्रों में परिवहन के इंतजार में रखीं फसलों की स्थिति के संबंध में जानकारी नहीं मिल सकी।

गरीबों के राशन वितरण में गड़बड़ी-कालाबाजरी को रोकने सार्वजनिक स्थानों पर चस्पा की जाएं लाभार्थियों की सूची : बुन्देला

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सांकेतिक फोटो।

*   राष्ट्रीय खाद्य विभाग मजदूर संघ जिलाध्यक्ष ने जनहित में की मांग

*   पिछले वर्ष कमीशनखोरी की भेंट चढ़ गया था कोरोना काल का खाद्यान्न

पन्ना।(www.radarnews.in) मध्यप्रदेश में कोरोना संकट से उत्पन्न बेहद गंभीर हालात को दृष्टिगत रखते हुए राज्य सरकार द्वारा हाल ही में प्रदेश के कमजोर वर्ग एवं प्रवासी मजदूरों समेत राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम की 25 पात्र श्रेणियों के तहत प्रत्येक पात्र परिवार को निःशुल्क खाद्यान्न वितरण का लाभ देने के निर्देश दिए गए हैं। मुख़्यमंत्री की घोषणा के अनुसार तीन माह का तथा प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना का दो माह के निःशुल्क खाद्यान्न सहित प्रत्येक पात्र परिवार को 5 माह का निःशुल्क खाद्यान्न वितरण किया जाना है। प्रत्येक पात्र गरीब परिवार को निःशुल्क राशन मिले, इसमें पिछले वर्ष की तरह किसी भी प्रकार की लापरवाही या गड़बड़ी न हो इसके लिए राशन वितरण में पारदर्शिता अत्यंत ही जरुरी है।
राष्ट्रीय खाद्य विभाग मजदूर संघ जिला इकाई पन्ना के अध्यक्ष एवं समाजसेवी के.पी. सिंह बुन्देला ने इस संबंध में मांग की है कि निःशुल्क राशन वितरण पश्चात योजना के लाभार्थियों की सूची प्रत्येक ग्राम/नगरीय निकायों में वार्डवार सार्वजनिक स्थानों पर चस्पा कराई जाए। साथ ही ग्राम पंचायत एवं राशन दुकानों में इन सूचियों का संधारण कराया जाए ताकि आवश्यकता पड़ने पर लोगों के अवलोकन हेतु सुगमता से उपलब्ध हो सकें। दुकानवार वितरित राशन की सूची को खाद्य विभाग की वेबसाइट एवं प्रत्येक जिलों के एनआईसी पोर्टल पर डाला जाए जिससे उन्हें ऑनलाइन भी देखा जा सके।
श्री बुन्देला ने प्रेस में जारी अपने बयान में कहा कि इन सूचियाँ में निःशुल्क खाद्यान्न से लाभान्वित हितग्राही का नाम, पता, वितरित अनाज की मात्रा तथा कितने माह का खाद्यान्न दिया आदि जानकारी का स्पष्ट तौर पर उल्लेख किया जाए ताकि आमजन के लिए सोशल ऑडिट (सामाजिक अंकेक्षण/सत्यापन) करना आसान हो।

गरीबों के राशन में कालाबजारी-कमीशनखोरी का खेल

के.पी. सिंह बुन्देला, अध्यक्ष, राष्ट्रीय खाद्य विभाग मजदूर संघ, जिला इकाई पन्ना।
राष्ट्रीय खाद्य विभाग मजदूर संघ जिला इकाई पन्ना के अध्यक्ष एवं कोंग्रेस नेता के.पी. सिंह बुन्देला का आरोप है कि पन्ना जिले में गरीबों के राशन को डकारने का खेल हर माह चल रहा है। इस लूट को खुला राजनैतिक एवं प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है। वे याद दिलाते हैं लॉकडाउन लगने के पूर्व कलेक्टर की जनसुनवाई में तथा विकासखण्ड स्तर पर राजस्व अधिकारियों के द्वारा की जाने वाली जनसुनवाई में राशन वितरण में धांधली की कई हैरान करने वाली शिकायतें आती रहीं हैं। इसके अलावा राशन न मिलने अथवा निर्धारित मात्रा से कम मिलने से प्रभावित परिवारों के द्वारा बड़ी संख्या में सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई गई है।
श्री बुंदेला का आरोप है कि गरीबों के राशन की कालाबजारी-कमीशनखोरी की बंदरबांट में सेल्समैन से लेकर प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के पदाधिकारी, खाद्य विभाग, सहकारिता, राजस्व विभाग के अधिकारी तथा सहकारी बैंक का अमला शामिल है। हर माह होने वाले इस संगठित भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए खाद्यान्न वितरण में पारदर्शिता लाना जरुरी है। कोंग्रेस नेता के.पी. सिंह बुन्देला का कहना है प्रदेश की भाजपा सरकार यदि वाकई ईमानदारी से गरीबों को उनका हक़ दिलाना चाहती है तो उनके सुझाव पर तुरंत अमल किया जाना चाहिए।

एमपी : दमोह उपचुनाव में BJP की हार के बाद कलेक्टर-एसपी का तबादला

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तरुण राठी, कलेक्टर, दमोह।
भोपाल। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश की दमोह विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी को मिली करारी हार के बाद शिवराज सरकार ने वहाँ बड़ी प्रशासनिक सर्जरी करते हुए कलेक्टर व एसपी का तबादला कर दिया है। शुक्रवार 7 मई की देर रात दमोह कलेक्टर तरुण राठी के बाद एसपी हेमंत चौहान का भी तबादला होने की खबर आते ही दमोह में हलचल बढ़ गई। सोशल मीडिया पर दोनों अफसरों के तबादला आदेश जमकर शेयर किए गए। वहीं लोगों ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया भी जाहिर की है।
दमोह कलेक्टर का स्थानांतरण आदेश।
उल्लेखनीय है कि दमोह कलेक्टर तरुण राठी का ट्रांसफर भोपाल किया गया है। उनकी जगह अनूप सिंह को तैनात किया गया है। वर्ष 2013 बैच के आईएएस अनूप कुमार सिंह वर्तमान में जबलपुर में अपर कलेक्टर के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैस के हस्ताक्षर से जारी आईएएस अधिकारियों के तबादला आदेश की सूची में दमोह कलेक्टर के अलावा 4 अन्य अफसरों के नाम शामिल हैं।
दमोह एसपी का तबादला आदेश।
उधर, गृह विभाग ने एक आदेश जारी कर दमोह जिले के एसपी हेमंत चौहान का भी भोपाल तबादला का दिया है। उनके स्थान पर 2009 बैच के आईपीएस डी.आर. तेनीवार की पोस्टिंग की गई है। श्री तेनीवार वर्तमान में 24वीं वाहनी, विसबल के सेनानी के पद जावरा रतलाम जिले में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मालूम हो कि दमोह जिले में कोरोना वायरस संक्रमण बेहद तेजी फैल रहा है। कोरोना संक्रमण से बचाव एवं रोकथाम को लेकर किये गए उपाए प्रभावी न रहने से स्थिति लगातार बिगड़ रही है।

कोरोना संकटकाल में लड़खड़ा सकती हैं एमपी की स्वास्थ्य सेवाएं, 19 हजार संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने हड़ताल पर जाने का दिया अल्टीमेटम

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सांकेतिक चित्र।

संविदा नीति अनुसार 90 प्रतिशत वेतनमान का लाभ न मिलने से हैं आक्रोशित

3 वर्ष पूर्व दिए निर्देश पर आज तक नहीं हुआ अमल, वित्त विभाग में अटकी है फाइल

भोपाल। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमण की बेहद खतरनाक दूसरी लहर के भीषण कहर से मचे त्राहिमाम के बीच एक चिंताजनक खबर आई है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में कार्यरत प्रदेश के 19,000 संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी 90 प्रतिशत वेतनमान की अपनी लंबित मांग का निराकरण न होने पर आगामी 15 मई से अनिश्चित काम बंद हड़ताल पर जा सकते हैं।
संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सुनील यादव ने इस संबंध में 5 मई को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को एक पत्र प्रेषित किया है। जिसमें अपनी लंबित मांग का विस्तारपूर्वक उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया है, कोरोना संकट के चलते संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी पिछले एक साल से अपनी जान हथेली पर रखकर समाज को स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं और भविष्य में भी पूरे मनोयोग से देना चाहते हैं लेकिन पिछले 3 साल से हमारी जायज़ मांग का निराकरण नहीं हो पा रहा है।
इस कारण निराश और मजबूर होकर संघ ने कामबंद हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है। पत्र के माध्यम से शिवराज सरकार को अल्टीमेटम दिया है यदि अति शीघ्र 90 प्रतिशत वेतनमान देने का आदेश जारी नहीं किया गया तो 15 मई से प्रदेश के समस्त संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी कामबंद हड़ताल पर जाने एवं चरणबद्ध आंदोलन करने को मजबूर होंगे। पत्र में कहा गया है, हड़ताल से होने वाली असुविधा के लिए शासन-प्रशासन पूर्णतः जिम्मेदार होगा।

संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों के साथ भेदभाव

मध्यप्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में अहम योगदान देने वाले संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों के साथ वेतनमान के मामले में लम्बे समय से भेदभाव किया जा रहा है। मालूम होकि प्रदेश में 5 जून 2018 संविदा कर्मचारियों के लिए नीति कैबिनेट में पारित की गई थी। सामान्य प्रशासन विभाग ने इसके मद्देनजर सभी संविदा कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों का न्यूनतम 90 प्रतिशत वेतनमान देने के आदेश भी प्रसारित किए। फलस्वरूप महिला एवं बाल विकास विभाग, राजस्व विभाग, खेल एवं युवा कल्याण विभाग, पशुपालन विभाग, लोकसेवा प्रबंधन समेत अन्य विभागों के द्वारा अपने कर्मचारियों को 90 प्रतिशत वेतनमान का लाभ दिया गया। लेकिन संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी आज भी इससे वंचित हैं।
यह स्थिति तब है जब सम्बंधित विभागों के शीर्ष अधिकारी, मंत्रीगण तथा कैबिनेट में 90 प्रतिशत वेतनमान के प्रस्ताव को सहमति प्रदान की जा चुकी है। इसके बाद भी पिछले 3 वषों से वित्त विभाग में संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की फाइल पेंडिंग है। वित्त विभाग के द्वारा इसे आज दिनांक तक स्वीकति प्रदान न करने से प्रदेश सरकार की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं। संघ के द्वारा लगातार मांग करने के बाद भी इसके निराकरण को लेकर राज्य सरकार के स्तर उदासीनता/उपेक्षा जारी है। अल्प वेतनभोगी संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी इसे अपने आर्थिक हितों पर कुठाराघात के तौर देख रहे हैं। जाहिर है प्रदेश सरकार के इस रवैये को लेकर वे खासे आक्रोशित हैं।

जान जोखिम में डालकर निभा रहे फर्ज

कोरोना संकट के चलते प्रदेश के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी पिछले एक साल से अपनी जान हथेली पर रखकर पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ समाज को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने का अपना फर्ज बखूबी निभा रहे हैं। इस विपदा के चलते अब तक कई स्वास्थ्य कर्मचारी असमय ही अपनी जान गंवा चुके हैं। वहीं प्रतिदिन बड़ी संख्या में स्वास्थ्य कर्मचारी कोरोना संक्रमित हो रहे हैं।
कुछ कर्मचारियों के संक्रमित होने के कारण उनके परिजन भी संक्रमित हुए और उनकी मृत्यु हो जाने से घर में अब सिर्फ बच्चे ही बचे हैं। संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सुनील यादव पूंछते है ऐसे परिवारों और मानवता की सेवा के लिए इतना त्याग करने वाले कर्मचारियों को उनके हक़ से वंचित रखना क्या उचित है।
अपनी एक सूत्रीय मांग के निराकरण को लेकर प्रदेश सरकार की उदासीनता से नाराज डॉ. यादव कहते हैं हम अब और इंतजार नहीं कर सकते है। अगर संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों का न्यूनतम 90 प्रतिशत वेतनमान देने के आदेश शीघ्रता से प्रसारित नहीं किए गए तो पूरे प्रदेश के 19 हजार कर्मचारी 15 मई से कामबंद हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगें। इससे होने वाली असुविधा के लिए शासन-प्रशासन जिम्मेदार होगा।

15 मई तक सब कुछ बंद कर दें, शादी-विवाह आगे बढ़ा दें : सीएम शिवराज

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वीडियो कॉफ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी जिलों के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देते मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान।

*    संक्रमण की चेन तोड़ने कड़ाई से जनता कर्फ्यू का पालन करें

 मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से किया आह्वान, सभी से सहयोग का आग्रह

भोपाल। (www.radarnews.in) मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश वासियों से आह्वान करते हुए कहा है कि कोरोना मानवता पर बड़ा संकट है। कोरोना को नियंत्रित करने का एकमात्र उपाय संक्रमण की चेन तोड़ना है। यह कार्य सभी के सहयोग के बिना संभव नहीं है। हम लंबे समय तक बंद नहीं रख सकते, जन-जीवन सामान्य भी करना है। अतः आगामी 15 मई तक सब कुछ बंद कर दें। जनता कर्फ्यू का कड़ाई से पालन करें और संक्रमण की चेन तोड़ दें। शादी विवाह आगे बढ़ा दें। जिस गाँव में एक भी कोरोना मरीज़ है, वहाँ मनरेगा के कार्य बंद कर दें। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने इस कार्य में सभी के सहयोग की अपील की है।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा है कि कोरोना को समाप्त करने के लिए गाँव-गाँव, शहर-शहर में किल कोरोना अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर सर्वे कर मरीजों की पहचान कर उनका तुरंत इलाज प्रारंभ किया जा रहा है, शहरी क्षेत्रों में कोविड सहायता केंद्र बनाए जाकर वहाँ जाँच, मेडिकल किट वितरण आदि की व्यवस्था की जा रही है।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि सरकार गरीब, आम आदमी, मध्यमवर्गीय व्यक्तियों को भी कोरोना का नि:शुल्क इलाज तुरंत उपलब्ध कराएगी। इसके लिए सरकार कल से ही योजना प्रारंभ कर रही है। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पैकेज घोषित किया जा रहा है। निजी अस्पतालों के साथ सरकार अनुबंध करेगी। सीटी स्केन आदि जाँचें भी नि:शुल्क होंगी।

कोरोना पर नियंत्रण हुआ है

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में कोरोना पर नियंत्रण हुआ है। कोरोना संक्रमण में मध्यप्रदेश पहले देश में सातवें स्थान पर था, अब वह चौदहवें स्थान पर आ गया है। प्रदेश का साप्ताहिक पॉजिटिविटी रेट 19.8% है, वहीं रिकवरी रेट बढ़ कर 85.13% हो गया है। प्रदेश में ऑक्सीजन की आपूर्ति पर्याप्त हो गई है। बेड्स की संख्या बढ़कर 63 हजार से अधिक हो गई है। आईसीयू बेड्स भी बढ़ाए जा रहे हैं।

जनपद पंचायतों में विधायक नेतृत्व लें

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि जिलों की तरह जनपद पंचायतों में भी क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप गठित किए जायें, जिसमें विधायक, एसडीएम, सीईओ जनपद, समाजसेवी आदि हों। विधायक इस कार्य का नेतृत्व करें।

मेरा गाँव कोराना मुक्त गाँव

मुख्यमंत्री ने कहा कि गाँव में बाहर से आने वाले व्यक्तियों को बिना जाँच एवं क्वॉरेंटाइन किए अंदर न आने दें। इस तरह मेरा गाँव कोरोना मुक्त गाँव और मेरा क्षेत्र कोरोना मुक्त क्षेत्र बनाएं।

पात्रता पर्ची नहीं है तब भी मिलेगा राशन

शिवराज ने कहा कि सरकार हर गरीब को नि:शुल्क राशन उपलब्ध करा रही है। प्रत्येक गरीब को 10 किलो नि:शुल्क राशन दिया जा रहा है। इसके लिए पात्रता पर्ची, अंगूठे की छाप देना, आधार नंबर देना आदि की कोई जरूरत नहीं है। ग्रामीण एवं शहरी पथ विक्रेताओं को एक-एक हज़ार रुपये की राशि दी जा रही है।

जनता को लूटा तो छोड़ूंगा नहीं

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने ऐसे लोगों को जो कि दवाओं आदि की कालाबाज़ारी कर रहे हैं, जनता से ज्यादा पैसे ले रहे हैं, सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि में जनता को लूटने वालों को छोड़ूंगा नहीं। कड़ी से कड़ी कार्रवाई होगी।

तीसरी लहर के लिए हेल्थ इंफ़्रा

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रदेश में यदि कोरोना की तीसरी लहर आती है, तो उसके लिए भी हेल्थ इंफ़्रा तैयार किया जा रहा है। प्रत्येक जिले में ऑक्सीजन प्लांट लगाए जा रहे हैं, सीटी स्केन आदि मशीनें लगाई जा रही हैं। प्रदेश में 95 नए ऑक्सीजन प्लांट लगाए जा रहे हैं।

एमपी : पन्ना जिले में जेके सीमेंट के 2500 करोड़ वाले प्लांट से वर्ष 2022 शरू में हो जाएगा उत्पादन

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सांकेतिक चित्र।

*   अत्याधुनिक प्लांट की स्थापना का भूमि पूजन कार्यक्रम संपन्न

*   प्रतिवर्ष होगा 2.65 मिलियन टन सीमेंट का उत्पादन

 सीमेंट प्लांट की स्थापना से क्षेत्र के लोगों को मिलेगा बेहतर रोजगार

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना जिले की अमानगंज तहसील में जेकेसेम (सेंट्रल) लिमिटेड एकीकृत के सीमेंट प्लांट की स्थापना का भूमि पूजन बुधवार 5 मई को संपन्न हुआ। भूमि पूजन कार्यक्रम खजुराहो सांसद एवं प्रदेश अध्यक्ष भाजपा विष्णुदत्त शर्मा, खनिज एवं श्रम मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह, कलेक्टर संजय कुमार मिश्रा एवं पुलिस अधीक्षक धर्मराज मीणा के आथित्य में सम्पन्न हुआ। पुलिस अधीक्षक के अलावा अन्य सभी अथितिगण वर्चुअल रूप से कार्यक्रम सम्मिलित हुए।
मालूम हो कि यह सीमेंट प्लांट लगभग 2500 करोड़ का प्रस्तावित प्रोजेक्ट है, जिससे बुंदेलखंड क्षेत्र और ख़ासकर पन्ना ज़िले को अब सीमेंट उद्योग के नाम से भी जाना जाएगा। प्लांट की सालाना उत्पादन क्षमता 2.65 मिलियन टन क्लिंकर रहेगी। सीमेंट प्लांट के आने से क्षेत्र के लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोज़गार के अनेक अवसर प्राप्त होंगे।
जेके सीमेंट प्लांट के भूमि पूजन कार्यक्रम में वर्चुअल रूप से सम्मलित हुए अतिथिगण।
सीमेंट प्लांट के आज संपन्न हुए भूमि पूजन कार्यक्रम में जे.के. सीमेंट कम्पनी के प्रबंध निदेशक राघव पत सिंघानिया, उप प्रबंध निदेशक व CEO माधव कृष्णा सिंघानिया, उप प्रबंध निदेशक व CFO अजय कुमार सरावगी एवं समूह के अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण भीवर्चुअल रूप से सम्मिलित हुए।
कार्यक्रम के दौरान प्लांट के प्रोजेक्ट हेड अनिल बड़गोत्री, आदित्य प्रताप सिंह एवं अन्य समस्त अधिकारी-कर्मचारी गण के साथ विधि-विधान से मंत्रो-उच्चारण के साथ भूमिपूजन एवं शिलान्यास का कार्य सम्पन्न करते हुए समस्त क्षेत्र वसियों को बधाई प्रेषित की गई। इस अवसर दिए गए संदेश बताया गया की प्लांट में सितंबर-अक्टूबर 2022 तक उत्पादन कार्य प्रारम्भ करने के लिए हम सभी प्रतिबद्ध है और इस लक्ष्य को सभी क्षेत्र वासियों और प्रशासन के सहयोग से प्राप्त करेंगे।
कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए शामिल होते हुए सांसद बीडी शर्मा ने जेके कम्पनी के मैनज्मेंट, कर्मचारी एवम् सभी क्षेत्रवासियों को बधाई देते हुए बताया कि जेके समूह न सिर्फ़ आने वाले समय में क्षेत्र के लोगों को रोज़गार का अवसर देगा बल्कि क्षेत्र का सर्वांगीण विकास करेगा।
पन्ना जिले के अमानगंज में जेकेसेम (सेंट्रल) लिमिटेड एकीकृत के सीमेंट प्लांट की स्थापना हेतु भूमि पूजन करते कंपनी के अधिकारीगण।
वर्तमान में भी जेकेसेम (सेंट्रल)लिमिटेड द्वारा कोविड की लड़ाई में प्रशासन का कंधे से कंधा मिलाकर साथ देते हुए अस्पताल इकाई में मेडिसिन, ऑक्सिजन इत्यादि उपलब्ध कराई जा रही है और आगे भी कम्पनी से उम्मीद है कि सीएसआर स्कीम के अंतर्गत क्षेत्र में आवश्यक एवं महत्वपूर्ण सुविधाएँ उपलब्ध करवाएँगे। साथ ही उन्होंने ने बताया की प्रदेश के मुख्यमंत्री जी को भी इस प्लांट से क्षेत्र के लोगों को रोज़गार का अवसर प्रदान करने एवं क्षेत्र के लोगों के जीवन स्तर को ऊँचा उठाने में मदद मिलेगी।
कम्पनी के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं डेप्युटी मैनेजिंग डायरेक्टर ने कार्यक्रम में अतिथियों के सम्मिलित होने के पर धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि कम्पनी सदैव सामाजिक उत्थान के कार्य में अग्रणी रही है और इस प्लांट की स्थापना के माध्यम से भी कम्पनी अपने सामाजिक विकास के कार्य के उद्देशय को निश्चित ही प्राप्त करेगी।
कम्पनी के चीफ़ फ़ाइनैन्स ऑफ़िसर (CFO) श्री सरावगी ने बताया की यह प्लांट जेके ग्रुप के मालिक स्वर्गीय यदुपति सिंघानिया जी का सपना था,जो अब आप सब के सहयोग और मेहनत से साकार हो रहा है।
कार्यक्रम में सम्मिलित खनिज संसाधन एवं श्रम मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ने क्षेत्रवासियों और जेके कम्पनी को क्षेत्र के पहले सीमेंट प्लांट की स्थापना में महत्वपूर्ण कदम उठाए जाने पर बधाई दी। उन्होंने बताया कि पन्ना ज़िला अभी तक कई सुविधाओं से वंचित रहा है ,अतः जेके ग्रुप इन सुविधाओं को सीएसआर स्कीम के माध्यम से ज़िले को प्रदान करेगा ,विशेषकर स्वास्थ्य ,शिक्षा ,पानी और सड़क के विकास कार्य में सहयोग रहेगा।
सीमेंट प्लांट की स्थापना हेतु भूमि पूजन एवं शिलान्यास कार्यक्रम विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ।
कलेक्टर संजय कुमार मिश्र ने सम्पूर्ण जेके परिवार क़ो इस उपलब्धि पर बधाई दी। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि यह प्लांट पन्ना ज़िले का पहला वृहद प्लांट है एवं जेके ग्रुप ऐसा पहला औद्योगिक परिवार है जिसने इस क्षेत्र में प्लांट की स्थापना की पहल की है। कलेक्टर ने आश्वासन दिया कि प्लांट की तीव्र गति से स्थापना के लिए सम्पूर्ण पन्ना ज़िले का प्रशासन हर तरीक़े से सहयोग तत्परता से करता रहा है और भविष्य में भी करेगा।
कार्यक्रम में प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित पुलिस अधीक्षक धर्मराज मीणा ने बधाई देते हुए बताया कि पुलिस प्रशासन, क्षेत्र के विकास को नई ऊँचाई तक पहुँचाने वाले इस प्लांट की स्थापना हेतु चौबीसों घण्टे सुरक्षा मुहैया कराने एवं समस्त प्रकार की बाधाओं से बचाने हेतु पहले भी तत्पर था और भविष्य में भी तत्पर रहेगा। पुलिस कप्तान श्री मीणा ने उम्मीद जताई है कि इस प्लांट कि स्थापना से क्षेत्र के लोगों को बेहतर रोज़गार मिलेगा जिससे काम के आभाव में होने वाला पलायन रुकेगा।

फॉलोअप : कोरोना संक्रमितों एवं संदिग्ध मरीजों की असमय मौत के बीच बड़ी लापरवाही उजागर !

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जिला चिकित्सालय पन्ना के कोविड केयर सेंटर का प्रवेश द्वार।

बंद पड़े वेंटिलेटर्स को चालू कराने का आदेश जारी कर सालभर तक भूले रहे सिविल सर्जन

पन्ना के कोविड केयर सेंटर का मामला, ख़बर प्रकाशित होने के बाद टूटी जिम्मेदारों की नींद

जिला चिकित्सालय पन्ना के सिविल सर्जन ने दो डॉक्टरों को जारी किए नोटिस

निश्चेतना विशेषज्ञ डॉक्टरों को वेंटिलेटर संचालन का प्रशिक्षण लेने दिया था आदेश

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) कोरोना की बेहद खतरनाक दूसरी लहर के जबरदस्त कहर से हर तरफ गूँजतीं मातमी चीखों, हालात के आगे बेबस और लाचार हो चुके आम इंसान की दर्द भरी सिसकियों के बीच मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज को लेकर जिम्मेदारों की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। मामला जिला चिकित्सालय के कोविड केयर सेंटर में रखे आधा दर्जन वेंटिलेटर  सालभर से अधिक समय से बंद होने का है। रडार न्यूज़ ने रविवार 2 मई को इस संबंध में “कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज की नहीं समुचित व्यवस्था” नामक शीर्षक से एक खबर प्रकाशित करते हुए कोरोना संकटकाल में पन्ना के कोविड केयर सेंटर समेत अन्य वार्डों में रखे वेंटिलेटर्स के सालभर से बंद पड़े होने के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। इसमें बताया था कि, योग्य-अनुभवी ऑपरेटर के आभाव में जीवनरक्षक उपकरण बेकार (अनुपयोगी) पड़े हैं।
रडार न्यूज़ के द्वारा दिनांक 02 मई 2021 वेंटिलेटर बंद होने के संबंध में प्रकाशित खबर का स्क्रीनशॉट।
प्रकाशित खबर में इस सवाल को प्रमुखता से उठाया गया था कि दिन-प्रतिदिन भयावह होते कोरोना संकट में लोगों की जान बचाने के लिए वेंटिलेटर संचालन को लेकर उदासीनता का यह आलम ऐसे समय है जब आए दिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान स्वयं कोरोना संक्रमण की स्थिति एवं स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा कर रहे हैं साथ ही जिले के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी कलेक्टर व जिला पंचायत सीईओ प्रतिदिन कोविड केयर सेंटर पहुंचकर वहाँ भर्ती मरीजों के इलाज तथा व्यवस्थाओं आदि का जायजा ले रहे हैं। बाबजूद इसके कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज से जुड़ीं व्यवस्थाओं को लेकर हर स्तर पर घोर लापरवाही बरती जा रही है।
इस तथ्य परक खबर के प्रकाशित होने से मचे हड़कंप के चलते जिला चिकित्सालय पन्ना के सिविल सर्जन की नींद टूटी है। अब जाकर उन्हें बंद पड़े वेंटिलेटर्स को चालू करने की याद आई है। सिविल सर्जन डॉ. व्ही. एस. ने उपाध्याय ने इस मामले में जिला चिकित्सालय पन्ना के दो चिकित्सकों डॉ. स्मृति गुप्ता, प्रभारी निश्चेतना विशेषज्ञ एवं डॉ. नीरज जैन, निश्चेतना चिकित्सक को आनन-फानन में मंगलवार 4 मई 2021 को नोटिस जारी करते हुए संबंधितों से 24 घण्टे के अंदर लिखित रूप से अपना जवाब प्रस्तुत करने को कहा है।

क्या लिखा है नोटिस में ?

वेंटिलेटर बंद होने की खबर प्रकाशित होने पर सिविल सर्जन पन्ना के द्वारा डॉक्टरों को जारी किए गए नोटिस की कॉपी।
सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक पन्ना के द्वारा डॉ. स्मृति गुप्ता एवं डॉ. नीरज जैन को जारी नोटिस में उल्लेख किया गया है कि- “आप लोगों को कोविड-19 (नोवल कोरोना वायरस) बीमारी के परिपेक्ष्य में वेंटिलेटर के उपयोग के संबंध में प्रशिक्षण हेतु नामांकित/आदेशित किया गया था। आप लोगों के द्वारा उक्त प्रशिक्षण प्राप्त किया गया कि नहीं यदि किया गया तो प्रमाण पत्र प्रस्तुत करें यदि नहीं किया गया तो क्यों नहीं किया गया। उक्त जानकारी लिखित रूप से अधोहस्ताक्षरी के समक्ष 24 घण्टे के अंदर प्रस्तुत करें।”
गौर करने वाली बात यह है कि, इस नोटिस में जिस संदर्भित पत्र का हवाला दिया गया है उसे दिनांक 14 मार्च 2020 को जारी किया गया था। इस पत्र के माध्यम से ही उक्त चिकित्सकों को प्रशिक्षण हेतु नामांकित/आदेशित किया गया था। इससे साफ़ जाहिर है कि प्रशिक्षण प्राप्त करने का आदेश जारी करने के बाद उस पर हुए अमल की जानकारी लेना सिविल सर्जन ने साल भर तक उचित नहीं समझा। विगत दिनों बंद पड़े वेंटिलेटर की खबर प्रकाशित होने पर साहब के द्वारा अपनी उदासीनता/बेपरवाही को छिपाने आनन-फानन में संबंधित चिकित्सकों को नोटिस जारी कर दिए गए।
वेंटिलेटर संचालन हेतु निश्चेतना विशेषज्ञ डॉक्टरों को प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए सालभर पूर्व दिनांक 14 मार्च 2020 को जारी आदेश की कॉपी।
इस मामले से पता चलता है, कोरोना की मौजूदा भयवाह आपदा के समय इस खतरनाक बीमारी से संक्रमित मरीजों की जान बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कितने संवेदनशील हैं। सबसे ज्याद हैरानी तब होती है जब क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि, प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आए दिन कोरोना संक्रमण की स्थिति एवं स्वास्थ्य सेवाओं आदि की समीक्षा कर और पन्ना जिले के प्रशासनिक अधिकारी कोविड सेंटर का प्रतिदिन जायजा लेकर कोरोना संक्रमित मरीजों के उपचार हेतु सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने का दावा करते हैं।
कोरोना काल में वेंटिलेटर जैसी अहम सुविधा का लाभ मरीजों को मिलने के संबंध इनके द्वारा समीक्षा बैठकों व निरीक्षण के दौरान जानकारी प्राप्त की गई या नहीं, इस सवाल का जवाब मिलना इसलिए जरुरी हो जाता है क्योंकि सरकारी आंकड़ों के अनुसार कोविड संक्रमण जिले के लगभग दो दर्जन लोगों की अब तक जान ले चुका है। इसके आलावा पिछले एक से डेढ़ माह में पन्ना जिला चिकित्सालय के दूसरे वार्डों में भर्ती मरीजों की मौत के मामले असमान्य और चिंताजनक रूप बढ़े हैं। इन मौतों पर जवाबदेही के आभाव में आपदा के समय भी पूर्व की तरह हद दर्जे की लापरवाही तथा अंधेरगर्दी का माहौल है।

डॉक्टरों को प्रशिक्षण की क्या वाकई जरुरत है

निश्चेतना विशेषज्ञ (एनेस्थेटिस्ट) डॉक्टर को क्या वाकई वेंटिलेटर संचालित करने के लिए पृथक से प्रशिक्षण लेने की आश्यकता है। इस सवाल का जवाब जानने के लिए रडार न्यूज़ ने जब एक सेवानिवृत्त चिकित्सक से बात की तो उन्होंने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर जानकारी देते हुए बताया कि एमडी एनस्थिसिया का मतलब यही होता है कि संबंधित व्यक्ति अपने 3 साल के ट्रेनिंग पीरियड में वेंटिलेटर संचालन का प्रशिक्षण प्राप्त कर चुका है। पूर्व से दक्ष चिकित्सक को वेंटिलेटर संचालन के लिए अलग से पुनः प्रशिक्षण पर भजने का कोई औचित्य नहीं है। अब सवाल यह उठता है कि जिला चिकित्सालय पन्ना के सिविल सर्जन को क्या यह बुनियादी जानकारी भी नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष अधिकारियों को इस पर विशेष गौर करने की जरुरत है। क

कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए जरुरी है वेंटिलेटर

सांकेतिक फोटो।
वेंटिलेटर है क्या है और कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों के लिए यह कितना और क्यों जरूरी है ? इन सवालों का जबाव देते हुए एक सेवानिवृत्त चिकित्सक ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर जानकारी देते हुए सरल भाषा में बताया कि वेंटिलेटर एक मशीन है जो ऐसे मरीजों की जिंदगी बचाती है जिन्हें सांस लेने में तकलीफ है या फिर वे खुद सांस नहीं ले पा रहे हैं। यदि बीमारी की वजह से फेफड़े अपना काम नहीं कर पाते हैं तो वेंटिलेटर सांस लेने की प्रक्रिया को संभालते हैं। इस बीच डॉक्टर इलाज के जरिए फेफड़ों को दोबारा काम करने लायक बनाते हैं।
डॉक्टर के मुताबिक, कोविड-19 से संक्रमित अधिकांश मरीज अस्पताल गए बिना घर पर होम आइसोलेट रहते हुए आवश्यक दवाईयां लेकर ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ मरीजों की स्थिति गंभीर हो जाती है और उन्हें सांस लेने में कठिनाई होने लगती है। ऐसे मरीजों में वायरस फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है। जिससे सांस लेना बहुत मुश्किल हो जाता है। शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने लगती है। इसलिए वेंटिलेटर्स की आवश्यकता होती है। इसके जरिए मरीज के शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा को समान्य बनाया जाता है।

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कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज की पन्ना जिले में नहीं समुचित व्यवस्थाएं !