सांसद विष्णु दत्त शर्मा द्वारा दिए गए ऑक्सीजन कंसंट्रेटर सौंपते समय फोटो निकलवाते हुए पन्ना के भाजपा नेता साथ में खड़े कलेक्टर एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी।
* आपदा की स्थिति में भी जारी है भाजपा नेताओं का प्रचार-प्रसार !
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) खजुराहो सांसद एवं मध्य प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा ने अपने संसदीय क्षेत्र अंतर्गत आने वाले पन्ना जिले में कोरोना संक्रमित मरीजों को ऑक्सीजन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 25 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर प्रदान किए हैं। ताकि ऑक्सीज़न की बढ़ती किल्लत के कारण किसी भी मरीज की सांसें न थमने पाएं। कुछ दिन पूर्व पन्ना विधायक एवं प्रदेश खनिज मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ने भी अपनी विधायक निधि से जिला चिकित्सालय को ऑक्सीजन कंसंट्रेटर दिए थे।
पन्ना में अब पर्याप्त संख्या में ऑक्सीज़न कंसंट्रेटर उपलब्ध हैं, यह निश्चित राहत भरी खबर है। इसके अलावा जिला चिकित्सालय में मेडिकल ऑक्सीज़न के प्लांट की स्थापना का कार्य भी प्रगति पर है। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इस प्लांट के शुरू होने पर पन्ना के कोविड मरीजों को सुगमता से हर समय पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन उपलब्ध हो सकेगी।
वर्तमान में जारी ऑक्सीजन संकट के बीच ऑक्सीज़न कंसंट्रेटर इन दिनों काफी चर्चा में है। बिजली से चलने वाला यह छोटा सा मेडिकल उपकरण हवा में मौजूद ऑक्सीजन को खींचकर उसे फ़िल्टर करके मरीज को उपलब्ध कराता है। यानी ऑक्सीजन सिलेण्डर की तरह इसे रिफिल नहीं कराना पड़ता है, यह उपयोग में भी काफी सुविधाजनक और आसान है।
खजुराहो सांसद विष्णु दत्त शर्मा द्वारा सांसद निधि से दिए गए ऑक्सीजन कंसंट्रेटर पर अंकित उनका राजनैतिक पद।
खजुराहो सांसद विष्णु दत्त शर्मा के द्वारा पन्ना जिला चिकित्सालय के कोविड केयर सेंटर के लिए दिए गए ऑक्सीजन कंसंट्रेटर आज स्थानीय भाजपा नेता बृजेन्द्र मिश्रा, तरुण पाठक, रामअवतार उर्फ बबलू पाठक ने पन्ना कलेक्टर संजय कुमार मिश्र को सौंपे हैं। इस दौरान भाजपा नेताओं के द्वारा सभी ऑक्सीज़न कंसंट्रेटर को व्यवस्थित तरीके से कतारबद्ध रखवाकर बक़ायदा फोटो उतरवाए गए। सोशल मीडिया पर जारी इन तस्वीरों में भाजपा नेताओं के साथ पन्ना कलेक्टर संजय कुमार मिश्र, सीएमएचओ डॉ. आर.एस. पाण्डेय एवं जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन डॉ. व्ही.एस. उपाध्याय भी खड़े नजर आ रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि कोरोना की वैश्विक महामारी के समय भी मध्यप्रदेश के भाजपा नेता प्रचार-प्रसार का मोह नहीं छोड़ पा रहे। इस आपदा को भी भाजपा के नेताओं ने प्रचार-प्रसार के अवसर में तब्दील कर दिया है। पिछले दिनों राजधानी भोपाल में भाजपा नेता एवं पूर्व महापौर आलोक शर्मा शव वाहनों को समारोहपूर्वक हरी झण्डी दिखाकर रवाना करते हुए नजर आए थे।
वहीं इंदौर में ऑक्सीजन संकट के बीच इसकी आपूर्ति का श्रेय लेने के चक्कर में कतिपय भाजपा नेता ऑक्सीज़न के टैंकर को रोककर लगभग 2 घण्टे तक पूजा-पाठ का आडम्बर करते रहे। इन दोनों ही मामलों में सोशल मीडिया समेत मीडिया के अन्य माध्यमों पर तीखी आलोचना होने के बाद भी बीजेपी नेताओं की सेहत पर कोई ख़ास अंतर नहीं पड़ा। पन्ना में आज जिस तरह का दिखावा किया गया उससे तो यही साबित होता है।
भारतीय जनता पार्टी पन्ना के मीडिया प्रभारी अशीष तिवारी ने रडार न्यूज़ को बताया कि सांसद बीडी शर्मा ने ऑक्सीज़न कंसंट्रेटर सम्भवतः अपनी सांसद निधि से दिए हैं। गौर करने वाली बात यह है कि सभी ऑक्सीजन कंसंट्रेटर में विष्णु दत्त शर्मा के नाम के साथ उनके दोनों पद सांसद एवं प्रदेशाध्यक्ष मध्य प्रदेश भाजपा लिखे गए है। सवाल यह है कि, सांसद निधि की राशि से भारतीय जनता पार्टी का प्रचार-प्रसार करना क्या उचित है। फिलहाल इस सबकी आवश्यकता क्या है।
कोरोना के कहर से उत्पन्न इतने भीषण संकट के समय भी हमारे जनप्रतिनिधियों/नेताओं को अगर यह सब सूझ रहा है तो निश्चित ही यह चिंताजनक है। आमतौर पर इस तरह की विषम परिस्थितियों में माननीयों से यह उम्मीद की जाती है कि वे किसी भी तरह के प्रचार-प्रसार, दिखावे या राजनीति को दरकिनार कर पूरी संवेदनशीलता के साथ लोगों को राहत पहुंचाने के अपने कर्तव्यों का बखूबी निर्वाहन करते हुए जनसेवा की अनुकरणीय मिशाल कायम करेंगे।
* सिर्फ अधिमान्य पत्रकार फ्रंट लाइन वर्कर घोषित, गैर अधिमान्य पत्रकार हुए नाराज़
* सरकार के विभाजनकारी फैसले के खिलाफ सोशल मीडिया पर उठ रही आवाज
* फील्ड रिपोर्टिंग करने वालों में 95 फीसदी से अधिक हैं गैर अधिमान्य पत्रकार
भोपाल।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के अधिमान्यता प्राप्त पत्रकारों को फ्रंट लाइन वर्कर की श्रेणी में शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कोरोना संक्रमण में वास्तविकता को जन-जन तक पहुँचाने वाले पत्रकार भी वास्तव में कोरोना वॉरियर्स हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिमान्य पत्रकारों को भी फ्रंट लाइन वर्कर्स को दी जाने वाली सभी सुविधाओं का लाभ दिया जायेगा। सोमवार 3 मई प्रेस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शिवराज सरकार के द्वारा लिए गए इस फैसले से गैर अधिमान्य पत्रकारों में निराशा और नाराज़गी साफ़ देखी जा रही है। गैर अधिमान्य पत्रकारों ने इस फैसले को भेदभाव पूर्ण एवं विभाजकारी बताते हुए अपने हक़ के लिए आवाज़ बुलंद की है।
सिर्फ अधिमान्य पत्रकारों को फ्रंट लाइन वर्कर्स का दर्जा दिए जाने की खबर आने के बाद से ही सोशल मीडिया पर जिस तरह की प्रतिक्रियाएं लगातार आ रहीं वे अधिकांश असंतोषजनक हैं। गैर अधिमान्य पत्रकारों को जानबूझकर नजर अंदाज करते हुए लिए गए इस फैसले की चौतरफा कड़ी आलोचना हो रही है। वहीं इससे प्रभावित पत्रकार अपनी उपेक्षा से न सिर्फ आहत हैं बल्कि वे खुलकर अपनी नाखुशी जाहिर करते हुए तथ्यों के साथ बाजिव सवाल भी उठा रहे हैं।
एक अनुमान के मुताबिक मध्य प्रदेश के कुल पत्रकारों में बमुश्किल 2-3 फीसदी को ही इसका लाभ मिलेगा। इससे जाहिर है बहुसंख्यक पत्रकार गैर अधिमान्य हैं। एक सच्चाई यह भी है कि ग्राउण्ड रिपोर्टिंग/फील्ड में काम करने वाले पत्रकारों में भी 95 फीसदी से अधिक पत्रकार ऐसे हैं जिनके पास अधिमान्यता नहीं है। अर्थात ये वही पत्रकार हैं जोकि कोरोना वायरस संक्रमण की वैश्विक महामारी के इस भीषण संकट के दौर में अपनी जान हथेली पर रखकर सजग प्रहरी की भूमिका का बखूबी निर्वहन करते हुए जमीनी हालात को सामने लाने का काम पूरी ईमानदारी से कर रहे हैं। साथ ही आम नागरिकों और प्रशासन के बीच की महत्वपूर्ण कड़ी बने हुए हैं।
तमाम तथ्यों की जानकारी के बाद भी पत्रकारों की सुरक्षा की चिंता और उनके प्रति सहानुभूति के नाम सिर्फ अधिमान्यता प्राप्त गिनती के पत्रकारों को फ्रंट लाइन वर्कर घोषित करने का फैसला प्रदेश के सैंकड़ों पत्रकारों के साथ अन्याय करने जैसा है। शिवराज सरकार के इस कदम से गैर अधिमान्य पत्रकारों में हलचल बढ़ गई है, क्योंकि इसे वे अपने वजूद/पत्रकारिता को नकारे जाने के तौर पर देख रहे हैं।
शायद यही वजह है कि इस विवादित फैसले पर सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म पर असंतोष के स्वर बेहद तेजी और मुखरता से बुलंद हो रहे हैं। बहरहाल, यह मुद्दा मध्य प्रदेश के गैर अधिमान्य पत्रकारों को अपने हितों के लिए संगठित होकर संघर्ष करने के लिए प्रेरित कर रहा है। प्रदेश में वैसे तो पत्रकारों के तमाम संगठन है लेकिन इसके बाद भी पत्रकार असंगठित हैं। इसका एक बड़ा कारण तथाकथित पत्रकार संगठन पत्रकारों के हितों का संरक्षण करने में नाकाम रहे हैं।
पत्रकारों के संगठनों की आड़ में इनके मुखिया एक सूत्रीय एजेण्डे के तहत सरकारी सुविधाभोगी बनकर स्वयं के फीलगुड तक ही सीमित हो गए हैं। जाहिर है ऐसे संगठनों से पत्रकारों का मोह भंग हो चुका है।
प्रदेश सरकार के द्वारा गैर अधिमान्य पत्रकारों को फ्रंट लाइन वर्कर घोषित न करने से उनमें जिस तरह से तीव्र असंतोष और गहरी नाराजगी व्याप्त है उससे एक बात स्पष्ट है कि उनके लिए यह मसला किसी दर्जे/तमगे से ज्यादा अब स्वयं के अस्तित्व का सवाल बन चुका है। इन हालात में गैर अधिमान्य पत्रकार अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए क्या कदम उठाते आने वाले दिनों इस पर सबकी नजरें रहेंगी।
सरकार के फैसले पर कौन-क्या बोला
सिर्फ अधिमान्य पत्रकारों को फ्रंट लाइन वर्कर घोषित करने के फैसले पर घिरी शिवराज सरकार की सोशल मीडिया पर कड़ी आलोचना हो रही है। इस मामले में सैंकड़ों की संख्या में पत्रकारों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उनमें से ट्विटर पर आईं कुछ चुनिंदा टिप्पणियों को आप यहां पढ़ सकते हैं –
प्रशांत मिश्रा ने ट्विटर हैंडल @pkshujalpur से मुख्यमंत्री कार्यालय (CMOMadhyaPradesh) को जवाब देते लिखा कि – “जिन्हें अधिमान्यता का सरकारी तमगा नहीं मिला वे पत्रकार नहीं हैं क्या ? शिवराज जी का भेदभावपूर्ण निर्णय।”
अरुण साथी@arunsathi लिखते हैं- “ईमानदारी से करना है तो सभी पत्रकारों के लिए करिये। नीतीश जी की तरह।”
कनिका अरोरा@KANIKAJOURNO ने अपने ट्वीट में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के फैसले पर आभार जताते हुए उनसे यह मांग भी की है, गैर अधिमान्य पत्रकारों को भी फ्रंट लाइन वर्कर घोषित किया जाए। कनिका लिखतीं हैं- “मुख्यमंत्री जी का आभार और एक और गुहार, आपसे एक और निवेदन है कि सभी पत्रकारों को फ्रंट लाइन वर्कर घोषित कीजिये क्योंकि गैर अधिमान्य पत्रकार भी कोरोना काल में अपने कर्तव्य पथ पर अपनी जान जोखिम में डालकर पूरी शिद्दत से जुटे हैं।”
हर्ष बंशल@hbansal18 ने लिखा है- “मामा जी, जो पत्रकार अधिमान्य नहीं है तो क्या वे सभी पत्रकार नहीं है??? जरा सोचिए अपने शब्दों को और पत्रकारिता क्षेत्र में कार्यरत सभी पत्रकारों को यह अधिकार दीजिए!!!“
ट्विटर यूजर नीतेन्द्र झा@NitendraJha1 ने अपनी नाराजगी कुछ इस तरह जाहिर की है- “बिना अधिमान्यता के कलम के सिपाही जान जोखिम में नहीं डालते क्या। पत्रकारिता में भी राजनीति। अंग्रेज चले गये लेकिन फूट डालो राज्य करो की नीति छोड़ गये। सभी पत्रकारों को फ्रंट लाईन वारियर्स घोषित होना चाहिए।”
विवेक अग्निहोत्री @VivekAgni1 ने अपना दुःख और पीड़ा जाहिर करते हुए लिखा- “प्रदेश के लीडिंग मीडिया संस्थान के पत्रकार के रूप में संक्रमण का खतरा उठा कर हम भी फ्रंट लाइन में डटे हुए हैं, क्या सिर्फ अधिमान्यता नहीं होने के कारण प्रदेश सरकार हमें नकार देगी ? मा. मुख्यमंत्री जी, इस गंभीर आपदा में हमे यूं बेसहारा न छोड़ें हमारा भी हाथ थामें।”
शिव शंकर पाण्डेय @sonushive11 ने की मांग है कि- “आदरणीय मुख्यमंत्री महोदय, आपके द्वारा अधिमान्य पत्रकारों को फ्रंट लाइन वर्कर मानने का निर्णय प्रशंसनीय है लेकिन अधिमान्य पत्रकार के साथ वे पत्रकार भी फील्ड में जान दांव पर लगाकर काम कर रहे है जो अधिमान्य नही है। कृपया उनको ध्यान में रख निर्णय लेने की कृपा करें।”
डेविड दास @David_Das_ ने तंज भरे अंदाज में अपनी प्रतिक्रिया में शिवराज सरकार को आगाह करते लिखा- “वाह साहेब बढ़िया ऑफर है और देर से ही सही पर सराहनीय पर ऐसा करके आपकी कमियों को ये न उजागर करे ऐसा संभव नहीं आदरणीय अभी भी कई ऐसे सही पत्रकार जिंदा है जो हमें सत्य जरूर बताएंगे आपके ऑफर पर ये अपनी जिम्मेदारी छोड़ दे ये असम्भव।”
हमारे पत्रकार मित्र #COVID19 काल में अपनी जान जोखिम में डालकर अपने कर्तव्यों का निर्वाह कर रहे हैं। मध्यप्रदेश में सभी अधिमान्यता प्राप्त पत्रकारों को हमने 'फ्रंटलाइन वर्कर' घोषित करने का निर्णय लिया है। उनका पूरा ध्यान रखा जाएगा और उनकी पूरी चिंता की जाएगी। pic.twitter.com/ZfjVWHIyln
— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) May 3, 2021
जिला चिकित्सालय पन्ना के कोविड केयर सेंटर का प्रवेश द्वार।
* बेकार पड़े हैं वेंटिलेटर क्योंकि नहीं है ऑपरेटर, कब आएगी सीटी स्कैन मशीन ?
* महत्वपूर्ण उपकरणों को लेकर शासन-प्रशासन एवं जनप्रतिनिधि हैं उदासीन
* कोरोना संक्रमितों के बेहतर इलाज के लिए जानिए ये उपकरण क्यों हैं जरुरी ?
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर के कहर में वो सब देखने को मिल रहा है, जो शायद ही कभी पहले देखने को मिला हो। देश-प्रदेश में प्रतिदिन रिकॉर्ड संख्या में नए संक्रमित मरीज मिल रहे हैं और संक्रमण की वजह से बड़ी संख्या में असमय काल कवलित भी हो रहे हैं।
हालात इतने बद्तर हैं कि अस्पतालों में बेड तक खाली नहीं हैं कि मरीजों को भर्ती किया जा सके और ना ही मरीजों को ऑक्सीजन ही पर्याप्त मात्रा में मिल पा रहा है। लोग अपनों की जान बचाने के लिए कभी अस्पताल में बिस्तर के लिए, कभी ऑक्सीजन सिलेंडर तो कभी रेमडेसिविर इंजेक्शन का इंतजाम करने के लिए दर-बदर भटक रहे हैं। कोरोना संकटकाल में बेकाबू हो चुके हालात के बीच आजकल वेंटिलेटर्स बेड एवं सीटी स्कैन मशीन की काफी चर्चा हो रही है।
मध्यप्रदेश के पन्ना जिले की बात करें तो सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर पूरी तरह से निर्भर इस जिले में कोरोना मरीजों के इलाज से जुड़ीं समुचित व्यवस्थाओं का आभाव है। पन्ना के जिला चिकित्सालय में वैसे तो आधा दर्जन वेंटिलेटर उपलब्ध हैं लेकिन वे सभी शो-पीस बने हुए हैं। कोविड केयर सेंटर में रखे इन वेंटिलेटर को इमरजेंसी की स्थिति में कोई चलाने वाला ही नहीं है। कोरोना संकट के साल भर बाद भी जिला चिकित्सालय प्रबंधन/स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी वेंटिलेटर्स को चलाने के लिए योग्य एवं अनुभवी ऑपरेटर की व्यवस्था नहीं कर सके।
सांकेतिक फोटो।
इसी तरह कोरोना संक्रमित मरीजों के फेंफड़ों की जांच के लिए आवश्यक सीटी स्कैन मशीन जिला चिकित्सालय में कब उपलब्ध होगी, कुछ भी बता पाना मुश्किल है। फ़िलहाल सीटी स्कैन मशीन के लिए आर्थिक सहयोग राशि जुटाने का कार्य प्रगति पर है। जबकि पूर्व में यह बताया गया था कि पन्ना को सीटी स्कैन मशीन जल्द से जल्द राज्य सरकार के द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी।
इससे कोरोना संक्रमित मरीजों के उपचार हेतु सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने संबंधी शासन-प्रशासन के दावों की आधी-अधूरी सच्चाई उजागर होती है। दिन-प्रतिदिन भयावह होते कोरोना संकट से लोगों की जान बचाने के लिए वेंटिलेटर के संचालन को लेकर उदासीनता का यह आलम तब है जबकि आए दिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान स्वयं कोरोना संक्रमण की समीक्षा कर रहे हैं। वहीं जिले के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी प्रतिदिन कोविड केयर सेंटर पहुंचकर मरीजों के इलाज एवं व्यवस्थों आदि का जायजा ले रहे हैं। इसके बाद भी कोरोना संक्रमित मरीजों के बेहतर इलाज हेतु आवश्यक उपकरणों को लेकर हर स्तर पर लापरवाही बरती जा रही है।
सीटी स्कैन के लिए सहयोग राशि जुटाने की पहल
बिरला सीमेंट कंपनी द्वारा विगत दिनों पन्ना जिले में सीटी स्कैन मशीन एवं मेडिकल सुविधाओं हेतु 50 लाख की सहायता राशि का चेक कलेक्टर संजय कुमार मिश्र सौंपा गया।
पिछले माह क्षेत्रीय सांसद विष्णु दत्त शर्मा ने पन्ना में जब कोरोना संक्रमण की स्थिति को लेकर समीक्षा की थी। इस बैठक में सीटी स्कैन मशीन की उपलब्धता की मांग को प्रमुखता से उठाया गया था। क्षेत्रीय सांसद ने तब आश्वासन दिया था कि मुख्यमंत्री के संज्ञान में इस विषय को लाकर शासन स्तर से शीघ्र ही सीटी स्कैन मशीन पन्ना जिला चिकित्सालय को उपलब्ध कराई जाएगी। दावे यहां तक किये गए कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने पन्ना की मांग को तत्परता से पूरा करने के लिए स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को निर्देश भी दे दिए हैं।
लम्बे होते इंतजार के बीच विगत दिनों प्रदेश के खनिज मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह के द्वारा पड़ोसी जिलों की सीमेंट कंपनियों को पत्र लिखकर सीटी स्कैन मशीन के लिए उनसे आर्थिक सहयोग की अपील की गई। सीमेंट कंपनियों ने इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए अपनी ओर से आर्थिक सहयोग राशि के चैक जारी किए हैं। अब तक दो सीमेंट कंपनियों की ओर से दिए आर्थिक सहयोग के फलस्वरूप सीटी स्कैन मशीन के लिए 60 लाख रुपए एकत्र हो चुके हैं।
इससे अघोषित तौर पर एक बात स्पष्ट हो चुकी है कि, राज्य सरकार के स्तर पर पन्ना को सीटी स्कैन मशीन उपलब्ध नहीं कराई जा रही है, मंत्री की विशेष पहल से एकत्र होने वाली सहयोग राशि से ही उक्त मशीन को क्रय किया जाना है।
वेंटिलेटर आखिर क्यों है जरुरी ?
सांकेतिक फोटो।
वेंटिलेटर है क्या है और कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों के लिए यह कितना और क्यों जरूरी है ? एक सेवानिवृत्त चिकित्सक ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर इन सवालों का जबाव देते हुए सरल भाषा में बताया कि वेंटिलेटर एक मशीन है जो ऐसे मरीजों की जिंदगी बचाती है जिन्हें सांस लेने में तकलीफ है या फिर वे खुद सांस नहीं ले पा रहे हैं। यदि बीमारी की वजह से फेफड़े अपना काम नहीं कर पाते हैं तो वेंटिलेटर सांस लेने की प्रक्रिया को संभालते हैं। इस बीच डॉक्टर इलाज के जरिए फेफड़ों को दोबारा काम करने लायक बनाते हैं।
डॉक्टर के मुताबिक, कोविड-19 से संक्रमित अधिकांश मरीज अस्पताल गए बिना घर पर होम आइसोलेट रहते हुए आवश्यक दवाईयां लेकर ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ मरीजों की स्थिति गंभीर हो जाती है और उन्हें सांस लेने में कठिनाई होने लगती है। ऐसे मरीजों में वायरस फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है। जिससे सांस लेना बहुत मुश्किल हो जाता है। शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने लगती है। इसलिए वेंटिलेटर्स की आवश्यकता होती है। इसके जरिए मरीज के शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा को समान्य बनाया जाता है।
सीटी स्कैन से फेंफड़ों में इंफेक्शन का चलता है पता
कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर और कोरोना के नए वैरिएंट्स (नए रूप) बेहद खतरनाक हैं। अनेक मामलों में यह बात निकलकर सामने आई है कि आरटी-पीसीआर टेस्ट कोरोना के कुछ वेरिएंट्स को नहीं पकड़ पा रहा है। अर्थात आरटी-पीसीआर टेस्ट(RT-PCR Test) निगेटिव रहने के बाद भी कुछेक व्यक्तियों के फेंफड़े कोरोना संक्रमित पाए गए। इसका पता उनके फेंफड़ों की सीटी स्कैन मशीन के द्वारा की गई जांच से चला।
सांकेतिक फोटो।
विभिन्न समाचार माध्यमों पर ख़बरें आईं है कि वायरस के नए वैरिएंट्स टेस्ट में पता ही नहीं चलते। जब तक CT स्कैन कराया गया, तब तक फेफड़े को काफी नुकसान पहुंच चुका था। ऐसी स्थिति निर्मित न हो, बीमार व्यक्तियों में कोरोना संक्रमण की वास्तविक स्थिति का समय रहते पता चल सके इसके लिए CT स्कैन मशीन से जांच कराना जरुरी है। ताकि बीमार व्यक्ति को सही इलाज देकर उसकी जान बचाई जा सके। इसी तरह कोविड केयर सेंटर के वेंटिलेटर चालू हालत में होना जरुरी है जिससे इमरजेंसी की हालत में गंभीर मरीज को सांस लेने में मदद मिल सके।
इनका कहना है –
“पन्ना जिला चिकित्सालय के कोविड केयर सेंटर में 5 वेंटिलेटर्स उपलब्ध हैं लेकिन टेक्नीशियन/ऑपरेटर के न होने के कारण वे सभी बंद पड़े हैं। इसके अलावा एक दो वेंटिलेटर्स दूसरे वार्डों में भी हैं। कोरोना के गंभीर मरीजों को वेंटिलेटर की आवश्यकता पड़ती है। इसलिए हम गंभीर मरीजों को सागर रिफर कर देते हैं। पन्ना के कोविड केयर सेंटर में उपलब्ध संसाधनों की जानकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों समेत शासन-प्रशासन स्तर पर सभी को है।”
– डॉ. आर.एस. पाण्डेय, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जिला पन्ना।
अजयगढ़ के शव विच्छेदन गृह के बाहर पोस्टमार्टम होने के इंतजार में खड़े शोक संतृप्त परिजन।
* पन्ना जिले के अजयगढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत केन नदी की घटना
पन्ना। (www.radarnews.in) पड़ोसी जिला छतरपुर के राजनगर से वापस अपने गांव गुमानगंज लौट रहे दंपत्ति की बाइक रात के अँधेरे में केन नदी के उबड़-खाबड़ रपटे को पार करते समय अचानक अनियंत्रित होकर नदी में जा गिरी। इस दुर्घटना में अत्यंत ही गंभीर रूप से जख्मी महिला की उपचार के दौरान सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र अजयगढ़ में मौत हो गई। जबकि मृतिका के पति की हालत गंभीर होने पर उसे जिला चिकित्सालय पन्ना के लिए रेफरल किया गया है। यह हादसा जिले के अजयगढ़ थाना की हनुमतपुर पुलिस चौकी अंतर्गत गुमानगंज के रपटे पर गुरुवार 29 अप्रैल की रात लगभग 8 बजे हुआ।
प्राप्त जानकारी के अनुसार गणेशा यादव निवासी गुमानगंज अपनी पत्नी रामदेवी को लेकर गुरुवार की शाम राजनगर से बाइक से वापस गांव लौट रहा था। रास्ते में केन नदी को पार करते समय गुमानगंज के उबड़-खाबड़ रपटे को पार करते समय बाइक अनियंत्रित होने से यादव दंपत्ति बाइक समेत नदी में निकले पत्थरों पर जा गिरे। इस दुर्घटना की जानकारी मिलने पर आनन-फानन मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने घायल दंपत्ति को नदी से बाहर निकाला और डायल-100 पुलिस वाहन को बुलाकर उन्हें उपचार हेतु अजयगढ़ रवाना किया गया।
अजयगढ़ के शव विच्छेदन गृह के बाहर मौजूद पुलिस के जवान पंचनामा कार्रवाई एवं परिजनों के बयान दर्ज करते हुए।
सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र अजयगढ़ में उपचार के दौरान रामदेवी का दुखांत हो गया। जबकि गणेशा यादव की गंभीर हालत को देखते हुए उसे प्राथमिक उपचार के बाद जिला चिकित्सालय पन्ना के लिए रेफरल कर दिया। शुक्रवार 30 अप्रैल को अजयगढ़ में मृतिका का पोस्टमार्टम कराने के पश्चात पुलिस ने शव को अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया। घटना पर हनुमतपुर चौकी पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले को विवेचना में लिया है। इस हादसे के बाद से ग्राम हनुमतपुर में शोक व्यापत है।
उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस संक्रमण के कहर से बचाव एवं रोकथाम को लेकर पिछले 20 दिनों से मध्यप्रदेश के पन्ना समेत अन्य जिलों में टोटल लॉकडाउन/जनता कर्फ्यू जारी है। इस कारण पर्याप्त संख्या में सवारियां न मिलने से प्रदेश के अंदर बसों का संचालन लगभग बंद है। ऐसी स्थिति में आवश्यक कार्य आने पर लोगों को निजी वाहनों से आवागमन करना पड़ रहा है।
* पन्ना जिले के धरमपुर थाना अंतर्गत ग्राम रामपुर की घटना
पन्ना। (www.radarnews.in) कोरोना संकट के चलते मचे त्राहिमाम के बीच जिले के धरमपुर थाना अंतर्गत ग्राम पंचायत कल्याणपुर के ग्राम रामपुर में एक 17 वर्षीय नाबालिग़ युवती ने अज्ञात कारणों के चलते फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। यह दुखद घटना गुरुवार 29 अप्रैल की रात्रि की लगभग 9 बजे की है। रात्रि में जैसे ही परिजनों को घटना की भनक लगी उनके द्वारा तुरंत धरमपुर थाना पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंचीं पुलिस के द्वारा शव को फांसी के फंदे से उतारकर पंचनामा तैयार किया गया। नाबालिग युवती नेहा अहिरवार पिता लालाराम अहिरवार 17 वर्ष अपने घर के ही एक कमरे में दुपट्टे से बने फंदे पर लटकी थी।
पुलिस की प्रारंभिक जांच में नाबालिग के द्वारा आत्महत्या करने का कारण पता नहीं चल सका। घटना के अगले दिन शुक्रवार 30 अप्रैल को मृतिका के शव का अजयगढ़ में पोस्टमार्टम कराने के बाद पुलिस ने शव परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया। इस घटना पर धरमपुर थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की विवेचना शुरू कर दी है। इस घटना की वास्तविता मृतिका की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर तथा प्रकरण की विवेचना उपरांत सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है।
* महिलाओं के नाम पंजीयन कराने पर पूर्व की तरह जारी रहेगी छूट
भोपाल। (www.radarnews.in) मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रदेश में संपत्ति की खरीदी-बिक्री के लिए प्रति वर्ष एक अप्रैल से नई गाइडलाईन जारी की जाती है। परंतु कोरोना संक्रमण को देखते हुए वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए गाइडलाईन में 30 जून तक कोई परिवर्तन न करते हुए इसे पूर्ववत रखा गया है।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने जनता के नाम जारी अपने सन्देश में कहा कि आम नागरिकों की सुविधा को देखते हुए संपत्ति की पंजीयन दर में कोई वृद्धि नहीं की गई है। गाइडलाईन अनुसार महिलाओं के नाम से पंजीयन शुल्क में 2 प्रतिशत की छूट भी पूर्ववत जारी रहेगी। सामान्य पंजीयन की दर 3 प्रतिशत है जबकि महिला आवेदकों के लिए यह दर 1 प्रतिशत रखी गई है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि हमारा प्रयास है कि उप पंजीयक कार्यालय चरणबद्ध तरीके से खोले जायें।, जिससे आम जनता पंजीयन भी करा सके और अर्थ-व्यवस्था भी प्रभावित न हो।
भोपाल। (www.radarnews.in) प्रदेश के परिवहन एवं राजस्व मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया की राज्य में कोरोना संक्रमण की प्रभावी रोकथाम के लिए महाराष्ट्र, राजस्थान एवं छत्तीसगढ़ की और जाने और आने वाली बसों का संचालन पूर्ण रूप से 7 मई तक स्थगित किया गया है। उन्होंने बताया की इस संबंध में दोनों राज्यों के लिए पृथक-पृथक आदेश जारी किये गये है। जिसके अनुसार स्थगन की अवधि 30 अप्रैल से बड़ा कर 7 मई 2021 तक कर दी गई है।
18 वर्ष से अधिक के व्यक्तियों का कोरोना टीकाकरण हेतु रजिस्ट्रेशन संबंधी आवश्यक जानकारी।
* सीएम बोले कंपनियों से वैक्सीन के डोज़ मिलने पर किया जाएगा टीकाकरण
* 45 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्तियों का वैक्सीनेशन निरंतर जारी रहेगा
* मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की टीकाकरण अभियान की समीक्षा की
भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश में 1 मई से 18 वर्ष से अधिक आयु वाले व्यक्तियों का कोरोना वैक्सीनेशन अभियान प्रारंभ किया जाना था, परंतु वैक्सीन निर्माता कंपनियों से वैक्सीन प्राप्त नहीं होने के कारण यह अभियान 1 मई से प्रारंभ नहीं किया जा सकेगा। प्रदेश में 3 मई को वैक्सीन के डोसेज मिलने की संभावना है, तदनुसार वैक्सीनेशन कार्य किया जाएगा।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि 45 वर्ष से अधिक उम्र वाले व्यक्तियों के वैक्सीनेशन का कार्य निरंतर जारी रहेगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज निवास से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश में कोरोना टीकाकरण कार्य की समीक्षा कर रहे थे। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस, अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य मोहम्मद सुलेमान तथा सभी संबंधित उपस्थित थे।
नि:शुल्क लगाया जाएगा टीका
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना का टीका 18 वर्ष से अधिक उम्र वाले व्यक्तियों को भी नि:शुल्क लगाया जाएगा। जैसे-जैसे निर्माता कंपनियों से वैक्सीन के डोज़ प्राप्त होंगे, वैसे वैसे टीकाकरण किया जाएगा।
अस्पतालों में न लगाई जाये वैक्सीन
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने निर्देश दिए कि कोरोना संक्रमण के मद्देनजर वैक्सीनेशन के लिए नए केंद्र स्थापित किए जायें, अस्पतालों में वैक्सीनेशन कार्य नहीं किया जाए।
अब तक 80 लाख 66 हजार 980 डोज़ लगाए गए
प्रदेश में कोरोना वैक्सीन के 28 अप्रैल तक 80 लाख 66 हजार 980 डोज़ लगाए गये हैं, जिनमें से 70 लाख 19 हज़ार 763 फर्स्ट तथा 10 लाख 47 हज़ार 217 सेकंड डोज़ लगाए गए हैं। वैक्सीनेशन कार्य में 7 लाख 53 हजार 333 स्वास्थ्य कर्मियों को, 6 लाख 54 हजार 268 फ्रंट लाइन वर्कर्स को, 45 से 59 वर्ष के बीच के 33 लाख 26 हजार 172 व्यक्तियों को तथा 60 वर्ष से अधिक उम्र के 33 लाख 33 हजार 207 व्यक्तियों को वैक्सीन डोज लगाए गए हैं।
जिला चिकित्सालय पन्ना को मिले ऑक्सीजन कंसंट्रेटर को दिखाते हुए सीएमएचओ डॉ. आर.एस. पाण्डेय (बाईं तरफ), डॉ. भास्कर दिवेदी एवं कोविड वार्ड प्रभारी नर्स अंजू सिस्टर।
मंत्री बृजेन्द्र प्रताप ने जिला चिकित्सालय को 20 नग ऑक्सीजन कंसंट्रेटर दिए
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) कहर बरपाते कोरोना वायरस संक्रमण के कारण देश भर के अस्पतालों में मेडिकल ऑक्सीजन की किल्लत की ख़बरें कई दिनों से सुर्ख़ियों में बनीं हैं। कोरोना संक्रमित मरीजों को समय पर ऑक्सीजन न मिलने से असमय ही उनकी साँसें थमने की हृदय विदारक घटनाओं से हा-हाकार की स्थिति निर्मित है। कोरोना संक्रमितों की तादाद प्रतिदिन जिस तेजी से बढ़ रही है उससे ऑक्सीजन की मांग और आपूर्ति (उपलब्धता) में आए बड़े अंतर के कारण हालात बेकाबू हो चुके हैं। लोग अपनों की जान बचाने के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर के पीछे भाग रहे हैं। इस गंभीर संकट के समय मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में कोरोना संक्रमित मरीजों को ऑक्सीजन की किल्लत की जानलेवा स्थिति का सामना न करना पड़े इसके लिए क्षेत्रीय विधायक एवं प्रदेश के खनिज एवं श्रम विभाग के मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह द्वारा जिला चिकित्सालय को विधायक निधि से 10 लीटर वाले 20 नग ऑक्सीजन कंसंट्रेटर उपलब्ध कराए गए हैं। जिसके माध्यम से कोविड-19 के मरीजों को नियमित रूप से न सिर्फ ऑक्सीजन की पर्याप्त मात्रा मिल सकेगी बल्कि सिलेंडरों से सप्लाई की जाने वाली ऑक्सीजन की किल्लत से भी निजात मिलेगी। ऑक्सीजन कंसंट्रेटर उपलब्ध कराकर यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया किया गया है कि पन्ना में ऑक्सीजन की कमी के कारण अब किसी भी मरीज की साँसें ना थमने पाए।
पन्ना कलेक्टर संजय कुमार मिश्र ने जानकारी देते हुए बताया कि यह ऑक्सीजन कंसंट्रेटर का उपयोग जिला चिकित्सालय के कोविड केयर सेंटर में कोविड-19 मरीजों को ऑक्सीजन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए किया जाएगा। वर्तमान में जिला चिकित्सालय में ढाई सौ ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध हैं, जिनका उपयोग कोरोना संक्रमित मरीजों को आवश्यकतानुसार मेडिकल ऑक्सीजन प्रदान करने के लिए किया जा रहा है। इन सिलेण्डरों के खाली होने पर तत्काल पुरैना स्थित ऑक्सीजन संयंत्र से रिफिल करवाया जाता है। उल्लेखनीय है कि कोरोना संक्रमण के अधिकांश मामलों में मरीज का ऑक्सीजन लेवल कम हो जाता है और संक्रमण फेंफड़ों तक पहुँचने पर मरीज को सांस लेने में परेशानी होती है। ऐसे मरीजों को मेडिकल ऑक्सीजन के जरिए कृतिम साँसें दी जाती हैं।
जानिए कैसे काम करता है ऑक्सीजन कंसंट्रेटर
ऑक्सीजन कंसंट्रेटर।
कोरोना काल में ऑक्सीजन संकट के बीच ऑक्सीजन कंसंट्रेटर इन दिनों काफी चर्चा में है। तो ये ऑक्सीजन कंसंट्रेटर आखिर होता क्या है ? ये मेडिकल ऑक्सीजन कैसे बनाता है ? कोरोना मरीजों के लिए ये कितना फायदेमंद है ? ऑक्सीजन के सिलिंडर से ये कितना अलग है और इसका ऑक्सीजन कितना शुद्ध होता है, इन सब सवालों के जवाब जानने के लिए हमने पन्ना के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर.एस. पाण्डेय से बात की। उन्होंने रडार न्यूज़ को बताया कि ऑक्सीजन कंसंट्रेटर बिजली से चलने वाला मेडिकल उपकरण है। यह छोटी सी मशीन हवा में से ऑक्सीजन को अलग करता है। दरअसल, हमारे वातावरण में मौजूद हवा में कई तरह की गैसें मौजूद होती हैं और ये कंसंट्रेटर उसी हवा को अपने अंदर लेता है और उसमें से दूसरी गैसों को अलग करके शुद्ध ऑक्सीजन सप्लाई करता है। ऑक्सीजन कंसंट्रेटर के माध्यम से मिलने वाली ऑक्सीजन की शुद्धता 95 प्रतिशत से अधिक रहती है।
आपने कहा कि वर्तमान में जारी ऑक्सीजन की किल्लत के समय ऑक्सीजन कंसंट्रेटर कोविड के मरीजों को लिए बहुत उपयोगी साबित होगा। इसकी सबसे खास बात है कि ऑक्सीजन सिलेंडर की तरह इसे बार-बार रिफिल करने की जरूरत नहीं पड़ती है और बिजली नहीं होने पर इसमें 1-2 घण्टे का बैटरी बैकअप होता है। साथ ही इसे इनवर्टर की मदद से भी चलाया जा सकता है। सीएमएचओ डॉ. आर.एस. पाण्डेय ने बताया कि पन्ना जिला चिकित्सालय में करीब आधा दर्जन ऑक्सीजन कंसंट्रेटर पूर्व से भी मौजूद हैं। इसके अलावा जिला चिकित्सालय में ऑक्सीजन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ऑक्सीजन उत्पादन प्लांट भी स्थापित किया जा रहा है।
भोपाल। महानिदेशक, जेल एवं सुधारात्मक सेवाएँ अरविंद कुमार ने बताया है कि कोरोना महामारी की दूसरी लहर से उत्पन्न परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए बंदियों के लिये 60 दिवस की आपात छुट्टी स्वीकृत करने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया है कि आपात छुट्टी की अवधि की गणना बंदी के कुल दण्डादेश की अवधि में सम्मिलित की जायेगी। अरविंद कुमार ने बताया है कि इस संबंध में आदेश जारी कर दिये गये हैं। उन्होंने बताया है कि पूर्व से स्वीकृत सामान्य छुट्टी का लाभ ले रहे ऐसे बंदियों को, जिन्होंने पैरोल शर्तों का पूर्णत: पालन किया है, को सामान्य छुट्टी के लिये प्रस्तुत जमानतनामा एवं बंधपत्र पर ही 60 दिवस की आपात छुट्टी स्वीकृत की जायेगी।