अजयगढ़ तहसीलदार पर विधि विरुद्ध आदेश पारित करने का गंभीर आरोप, पन्ना कलेक्टर से की गई शिकायत

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तहसील कार्यालय अजयगढ़, जिला पन्ना (म.प्र.)। (फाइल फोटो)
  •   प्रमाण के तौर पर संलग्न किए गए आवश्यक दस्तावेज

  •   सभी प्रकरणों की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच करवाने की मांग
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिले की अजयगढ़ तहसील इन दिनों प्रभारी तहसीलदार सुरेन्द्र कुमार अहिरवार द्वारा कथित तौर पर नियम-कायदों को ताक पर रखकर मनमाने और विधि विरुद्ध आदेश पारित किए जाने को लेकर सुर्खियों में आ गई है। इस मामले में अजयगढ़ के एडवोकेट एम.के. यादव ने पन्ना कलेक्टर को एक गंभीर शिकायती पत्र सौंपा है, जिसमें तहसीलदार के कार्यकाल के दौरान लिए गए कई विवादित निर्णयों को चुनौती देते हुए उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ता अधिवक्ता का आरोप है कि इन मनमाने आदेशों के कारण न केवल आम नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि शासन के हितों को भी भारी क्षति पहुंच रही है। शिकायत के साथ प्रमाण के तौर पर आवश्यक दस्तावेज भी संलग्न किए गए हैं।
गौरतलब है कि प्रभारी तहसीलदार अजयगढ़ सुरेन्द्र कुमार अहिरवार लंबे समय से अजयगढ़ में पदस्थ हैं। रेल लाइन निर्माण हेतु प्रस्तावित भूमियों के नामांतरण तथा अन्य राजस्व प्रकरणों में इनके द्वारा पारित आदेशों को लेकर पूर्व में भी गंभीर शिकायतें सामने आ चुकी हैं।

ग्राम कगरे का बारा और सब्दुआ में शासकीय भूमि का नामांतरण

शिकायत में पहला प्रमुख मामला ग्राम कगरे का बारा और सब्दुआ से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि ग्राम कगरे का बारा स्थित आराजी नंबर 551/01/01 कुल रकबा 0.460 हेक्टेयर शासन से बंटन व्यवस्थापन के द्वारा प्राप्त हुई थी, जो शासकीय रिकॉर्ड अधिकार अभिलेख में शासकीय पट्टेदार के रूप में दर्ज थी। इस भूमि का नामांतरण रजिस्टर्ड विक्रय पत्र के आधार पर राजस्व प्रकरण क्रमांक 0197/अ-6/2023-24 के तहत 16 अगस्त 2023 को पारित आदेश से कर दिया गया, जबकि इसी भूमि के अंश भाग का नामांतरण राजस्व प्रकरण क्रमांक 0196/अ-6/2023-24 के जरिए भी उसी तिथि 16 अगस्त 2023 को किया गया। इसी प्रकार, ग्राम सबदुआ स्थित आराजी नंबर 1148 रकबा 0.2500 हेक्टेयर भी शासकीय अभिलेखों में पट्टेदार के नाम दर्ज है, जिसका रजिस्टर्ड विक्रय पत्र के आधार पर नामांतरण राजस्व प्रकरण क्रमांक 0195/अ-6/2026-27 के अंतर्गत पारित आदेश दिनांक 08 जुलाई 2026 के माध्यम से क्रेता के पक्ष में किया गया है। शिकायतकर्ता का तर्क है कि शासकीय पट्टे की जमीनों के संबंध में कानूनी प्रावधानों की अनदेखी कर ये आदेश पारित किए गए हैं।

रेलवे लाइन निर्माण हेतु प्रस्तावित भूमि पर विरोधाभासी निर्णय

दूसरा मामला ग्राम मझगांय की बड़ी आराजी (नंबर 641/01/01/01/01/01/01/01/01/01) से संबंधित है। शिकायती पत्र में बताया गया है कि इस भूमि के संबंध में भूमिस्वामियों द्वारा कई रजिस्टर्ड विक्रय पत्र निष्पादित किए गए थे। पूर्व में न्यायालय तहसीलदार अजयगढ़ द्वारा मुख्य रूप से इस आधार पर नामांतरण आवेदन निरस्त कर दिए गए थे कि उक्त भूमि ललितपुर-सतना-रीवा-सिंगरौली-महोबा-खजुराहो बड़ी रेल लाइन के निर्माण हेतु प्रस्तावित सीमा के अंतर्गत आती है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस संबंध में जब दोबारा नामांतरण आवेदन प्रस्तुत किए गए, तो उन्हें स्वीकार कर लिया गया, और कुछ मामलों में तो प्रथम आवेदन प्राप्त होने पर ही नामांतरण मंजूर कर दिए गए। इस विरोधाभासी कार्यप्रणाली से न्यायिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

वर्ष 1943-44 के शासकीय अभिलेख में ‘जंगल’ दर्ज भूमि का नामांतरण

तीसरा और बेहद संवेदनशील मामला ग्राम बहादुरगंज की आराजी नंबर 100 से जुड़ा है। रिकॉर्ड के अनुसार, यह भूमि वर्ष 1943-44 के शासकीय अभिलेखों में स्पष्ट रूप से ‘जंगल’ के रूप में दर्ज है। इसके बावजूद, इस भूमि को लेकर कई रजिस्टर्ड विक्रय पत्र निष्पादित किए गए हैं। तहसीलदार अजयगढ़ द्वारा इनमें से कुछ विक्रय पत्रों के आधार पर तो नामांतरण की कार्रवाई कर दी गई, जबकि कुछ अन्य विक्रय पत्रों के नामांतरण आवेदन पत्र निरस्त कर दिए गए। एक ही प्रकृति की भूमि पर अलग-अलग तरह के आदेश पारित किए जाने से मनमानी और अनियमितता की आशंका बलवती होती है।

निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग

शिकायतकर्ता एडवोकेट एम.के. यादव ने पन्ना कलेक्टर का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा है कि उपर्युक्त तमाम प्रकरण इस बात की गवाही देते हैं कि अजयगढ़ तहसीलदार मनमाने ढंग से विधि विरुद्ध आदेश पारित करने के आदी हो चुके हैं। उन्होंने मांग की है कि तहसीलदार के कार्यकाल में पारित किए गए समस्त आदेशों की एक स्वतंत्र और निष्पक्ष समिति से जांच कराई जानी चाहिए। अधिवक्ता ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते ऐसे लापरवाह और पक्षपातपूर्ण आदेशों की समीक्षा कर उचित वैधानिक कार्रवाई नहीं की गई, तो सरकारी संपत्तियों और व्यवस्था के प्रति लोगों का विश्वास डगमगा जाएगा।
इनका कहना है-
“शिकायतकर्ता मुझसे और एसडीएम सर से नाराज हैं। उनके द्वारा शिकायत में जिन मामलों को उठाया गया है, उसकी वास्तविक स्थिति की उन्हें जानकारी नहीं है। आधी-अधूरी जानकारी के आधार पर की गई शिकायत पूर्णतः असत्य और आधारहीन है। मैंने जो भी निर्णय पारित किए हैं, वे नियमानुसार और विधि सम्मत हैं।”

– सुरेन्द्र कुमार अहिरवार, प्रभारी तहसीलदार, अजयगढ़, जिला पन्ना।