6 अगस्त 2026 को राजपत्र में प्रकाशित संशोधन 01 अक्टूबर से लागू
शादिक खान पन्ना।(www.radarnews.in) यदि आपने किसी कारणवश अपने परिवार में बच्चे के जन्म या किसी परिजन की मृत्यु का पंजीकरण दो वर्ष के भीतर नहीं कराया है, तो अब यह प्रक्रिया आपके लिए पहले जैसी आसान नहीं रहेगी। भारत के महारजिस्ट्रार कार्यालय द्वारा जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रेशन अधिनियम में किए गए नवीन संशोधनों के बाद अब दो वर्ष पुरानी घटना के पंजीकरण के लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (JMFC) का आदेश अनिवार्य कर दिया गया है। भारत के राजपत्र में 06 अगस्त 2026 को प्रकाशित यह नया प्रावधान 01 अक्टूबर 2026 से प्रभावशील हो चुका है, जिसके लागू होने से देरी से पंजीयन (विलंबित पंजीयन) कराने की प्रक्रिया अब काफी जटिल और पूर्णतः न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हो गई है।
नवीन संशोधनों के अनुसार समय सीमा के आधार पर सक्षम प्राधिकारियों के अधिकार तय किए गए हैं। यदि किसी घटना (जन्म या मृत्यु) की सूचना एक वर्ष के बाद और दो वर्ष के भीतर दी जाती है, तो पंजीकरण कराने के लिए जिला मजिस्ट्रेट (कलेक्टर), एसडीएम अथवा जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत किसी कार्यपालिक मजिस्ट्रेट की अनुमति व आदेश आवश्यक होगा। वहीं, यदि घटना की सूचना दो वर्ष के बाद दी जाती है, तो अब कोई प्रशासनिक अधिकारी इसका सीधा आदेश जारी नहीं कर सकेगा और ऐसी स्थिति में केवल प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही जन्म या मृत्यु का पंजीकरण किया जा सकेगा।
कलेक्टर ने आवश्यक कार्रवाई करने दिए निर्देश
इस संशोधित अधिनियम का पालन सुनिश्चित कराने के लिए कलेक्टर एवं अतिरिक्त मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) ऊषा परमार द्वारा पन्ना जिले के सभी तहसीलदारों को पत्र जारी कर निर्देशित किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि 01 अक्टूबर 2026 से प्रभावशील इन नए नियमों के अनुसार ही सभी लंबित एवं नए आवेदनों पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। जानकारों ने आमजन को सलाह दी है कि किसी भी कानूनी जटिलता और अदालती प्रक्रिया से बचने के लिए जन्म या मृत्यु की घटना का पंजीकरण निर्धारित समय सीमा के भीतर ही संबंधित स्थानीय निकाय, आंगनबाड़ी या अस्पताल के माध्यम से अनिवार्य रूप से करा लें।