पन्ना जिले के पर्यटक ग्राम मड़ला निवासी अमर सिंह यादव और उनके परिजनों ने कब्जे की शासकीय भूमि से बेदखल करने की कार्यवाही पर रोक लगाने आवेदन सौंपा।
* प्रभावितों ने मुख्यमंत्री के नाम पन्ना कलेक्टर को सौंपा आवेदन
* पर्यटक ग्राम मड़ला में केन किनारे स्थित है बेशकीमती कृषि भूमि
* कई दशकों से खेती कर जीवनयापन कर रहा गरीब परिवार
* राजस्व कार्रवाई को लेकर आवेदन में लगाए गए राजनीतिक प्रभाव के आरोप
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) जिला मुख्यालय पन्ना के नजदीकी ग्राम मनौर में स्थित आदिवासी महिलाओं की भूमि हड़पने को लेकर चल रहे विवाद के बीच अब एक नया भूमि प्रकरण भी चर्चा में आ गया है। पन्ना तहसील के पर्यटक ग्राम मड़ला की शासकीय भूमि से जुड़े एक राजस्व मामले ने बेदखली की कार्रवाई के बीच नया मोड़ ले लिया है। मामले में पूर्व मंत्री एवं पन्ना विधायक का नाम आवेदन पत्र में आने के बाद यह विवाद स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। तहसीलदार न्यायालय पन्ना द्वारा शासकीय भूमि पर लंबे समय से चले आ रहे कब्जे को अतिक्रमण की श्रेणी में मानते हुए एक व्यक्ति को भूमि से बेदखल करने तथा 2 हजार रुपये का अर्थदंड लगाने के आदेश के बाद मामला अब अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) न्यायालय तक पहुंच गया है। इस बीच प्रभावित परिवार ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को आवेदन पत्र प्रस्तुत कर पन्ना विधायक बृजेंद्र प्रताप सिंह तथा उनके भाई लोकेंद्र प्रताप सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
शासकीय भूमि से अनाधिकृत कब्जा हटाने तहसीलदार पन्ना द्वारा दल गठित करने का आदेश।
राजस्व अभिलेखों के अनुसार ग्राम मड़ला स्थित लगभग 1.600 हेक्टेयर शासकीय भूमि के संबंध में तहसीलदार न्यायालय पन्ना में प्रकरण दर्ज किया गया था। पटवारी प्रतिवेदन के आधार पर दर्ज मामले में गजराज यादव पिता भगवानदास यादव निवासी मड़ला के उक्त भूमि पर कब्जे का उल्लेख किया गया था। सुनवाई के दौरान गजराज यादव ने न्यायालय के समक्ष दावा किया कि उनके परिवार का उक्त भूमि पर लगभग 100 वर्षों से कब्जा रहा है तथा उनके पिता भगवानदास यादव के नाम पुराने राजस्व अभिलेखों में भी प्रविष्टियां दर्ज रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि परिवार लंबे समय से उक्त भूमि पर खेती कर अपने उदर-पोषण का साधन जुटाता रहा है और उनके कब्जे को अतिक्रमण नहीं माना जाना चाहिए। उनके अनुसार कब्जे से संबंधित अर्थदंड की पुरानी रसीदें भी उपलब्ध हैं। हालांकि उपलब्ध अभिलेखों और प्रस्तुत दस्तावेजों के परीक्षण के बाद तहसीलदार न्यायालय पन्ना ने 14 अक्टूबर 2025 को पारित आदेश में संबंधित भूमि को शासकीय भूमि मानते हुए कब्जे को अतिक्रमण की श्रेणी में माना। न्यायालय ने गजराज यादव पर 2 हजार रुपये का अर्थदंड अधिरोपित किया तथा शासकीय भूमि से बेदखली का आदेश पारित किया।
अपील स्वीकार, लेकिन तत्काल राहत नहीं
तहसीलदार के आदेश के विरुद्ध गजराज यादव ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) न्यायालय पन्ना में अपील प्रस्तुत की। अपील को 22 दिसंबर 2025 को स्वीकार करते हुए न्यायालय ने तहसीलदार न्यायालय से संबंधित अभिलेख तलब किए हैं। हालांकि उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार अपील लंबित रहने के दौरान बेदखली आदेश पर तत्काल स्थगन (स्टे) प्रदान नहीं किया गया। इसी बीच 20 मई 2026 को तहसीलदार पन्ना अखिलेश प्रजापति ने अपने पूर्व आदेश के पालन के लिए राजस्व कर्मचारियों की दस सदस्यीय टीम गठित कर 26 मई 2026 को मौके पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। आदेश की प्रति थाना प्रभारी मड़ला को भी भेजी गई, जिसमें आवश्यक पुलिस बल उपलब्ध कराने लेख किया गया था। इस प्रकार संबंधित भूमि से अतिक्रमण हटाने की प्रशासनिक तैयारी कर ली गई थी। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व भी गजराज यादव को शासकीय भूमि से अपना कथित अनाधिकृत कब्जा हटाने के संबंध में नोटिस जारी किए जा चुके थे।
राजनीतिक प्रभाव में कार्रवाई का आरोप
प्रभावित कृषक परिवार द्वारा मुख्यमंत्री के नाम पन्ना कलेक्टर को सौंपे गए आवेदन की कॉपी।
बेदखली की कार्रवाई की संभावना से चिंतित यादव परिवार गत माह पन्ना पहुंचा और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम कलेक्टर ऊषा परमार को आवेदन सौंपा। 22 मई 2026 को दिए गए आवेदन में परिवार ने आरोप लगाया है कि राजस्व कार्रवाई पर प्रभावशाली व्यक्तियों का दबाव होने की आशंका है। आवेदन में विशेष रूप से पूर्व मंत्री एवं पन्ना विधायक बृजेंद्र प्रताप सिंह तथा उनके भाई लोकेंद्र प्रताप सिंह का उल्लेख करते हुए कई आरोप लगाए गए हैं। आवेदनकर्ताओं का दावा है कि उनकी भूमि के आसपास विधायक और उनके भाई द्वारा भूमि क्रय की गई है तथा वहां पर्यटन गतिविधियों से जुड़ी परियोजना अथवा रिसोर्ट विकसित करने की योजना है। परिवार का आरोप है कि इसी कारण उन्हें उक्त भूमि से हटाने की कार्रवाई की जा रही है।
प्रभावित कृषक अमर सिंह यादव, हरी सिंह, गुमान सिंह, वंदना यादव, ममता यादव, सरोज, सुम्मेर सिंह सहित अन्य लोगों का कहना है कि उनके परिवार के उदर-पोषण का प्रमुख साधन यही कृषि भूमि है और उनके पास अन्य कोई भूमि नहीं है। आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि भूमि छोड़ने के लिए उन्हें आर्थिक प्रस्ताव दिए गए। परिवार का कहना है कि यदि उन्हें भूमि से बेदखल किया गया तो उनके समक्ष आजीविका का संकट खड़ा हो जाएगा।
आवेदनकर्ताओं ने दीर्घकालिक कब्जे तथा पुराने राजस्व अभिलेखों का हवाला देते हुए बेदखली की कार्रवाई पर पुनर्विचार करने और राहत प्रदान करने की मांग की है। आवेदन के साथ वर्ष 1974-75 के खसरे की सत्यापित प्रति भी संलग्न किए जाने का उल्लेख किया गया है, जिसमें भगवानदास यादव के नाम अतिक्रमण दर्ज होने का दावा किया गया है।
पहुंच मार्ग निर्माण पर भी उठाए सवाल
कलेक्टर को सौंपे गए आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि विधायक एवं उनके भाई द्वारा खरीदी गई भूमि तक पहुंच के लिए ग्राम पंचायत मड़ला द्वारा सड़क निर्माण कराया जा रहा है। आवेदनकर्ताओं का दावा है कि यदि मार्ग का निर्माण दूसरे विकल्प के अनुसार किया जाता तो सड़क की लंबाई, लागत और दूरी कम रहती तथा आसपास के ग्रामीणों को भी अधिक सुविधा मिलती। आवेदनकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि पंचायत द्वारा तैयार किया जा रहा पहुंच मार्ग आम ग्रामीणों की सुविधा के बजाय कुछ विशेष भूमि स्वामियों को लाभ पहुंचाने वाला प्रतीत होता है। हालांकि इस संबंध में पंचायत अथवा संबंधित जनप्रतिनिधि का पक्ष समाचार लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हो सका।
इनका कहना है-
“शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाने की इस कार्यवाही का किसी तरह की राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। अनावेदक ने स्वयं स्वीकार किया है शासकीय भूमि पर उसका कब्जा है, पूर्व में जारी नोटिस पर उसने फसल की कटाई करने तक का समय मांगते हुए अपना अतिक्रमण हटाने का पत्र दिया था। लेकिन कई माह गुजरने के बाद भी अनाधिकृत कब्जा नहीं हटाया इसलिए कार्यवाही हेतु दल गठित किया गया।”
अखिलेश प्रजापति, तहसीलदार, पन्ना।
“मड़ला ग्राम में मेरे द्वारा जमीन क्रय की गई है उससे मेरे बड़े भाई का दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है, जहां तक मुझे जानकारी है मेरे द्वारा भूमि क्रय करने के पूर्व से ही शासकीय भूमि से बेदखली का प्रकरण चल रहा है। उक्त भूमि पर कौन व्यक्ति काबिज हैं न तो मैं जानता हूं ना ही आज तक उनसे मिला हूं। राजनितिक पृष्ठभूमि वाले कतिपय षड्यंत्रकारी तत्व आमलोगों को बरगलाकर दुर्भावनावश हमारे परिवार को बदनाम करने के लिए झूठे आरोप लगाने का काम कर रहे हैं।”