पन्ना: वन क्षेत्र में कथित अवैध खनन की जांच, राज्य स्तरीय उड़नदस्ता दल ने किया निरीक्षण

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भोपाल से आए वन विभाग के राज्य स्तरीय उड़नदस्ता दल द्वारा अमित साहू प्रभारी अधिकारी के नेतृत्व में अवैध खनन संबंधी शिकायत की जांच की गई।

*      उत्तर सामान्य वन मण्डल के वन परिक्षेत्र धरमपुर का मामला

*     कांग्रेस नेता की विस्तृत शिकायत पर हरकत में आया वन विभाग

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) जिले के उत्तर सामान्य वन मंडल की धरमपुर रेंज में कथित अवैध खनन और विभागीय अनियमितताओं का मामला अब राज्य स्तर तक पहुंच गया है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख के निर्देश पर वन विभाग के राज्य स्तरीय उड़नदस्ता (स्टेट लेवल फ्लाइंग स्क्वॉड) ने बीते सप्ताह पन्ना पहुंचकर 2 और 3 जुलाई को लगातार दो दिन धरमपुर वन क्षेत्र में कथित अवैध खनन से जुड़े स्थलों का सघन निरीक्षण किया। जांच दल ने वन सीमा चिन्हित कर मौके की स्थिति का परीक्षण किया और पंचनामा तैयार किए। कई माह से सुर्ख़ियों में बने वन परिक्षेत्र धरमपुर एवं अजयगढ़ की उच्च स्तरीय शिकायतों के बाद पन्ना से लेकर वन भवन भोपाल तक हलचल तेज हो गई है। जांच दल के अधिकारियों ने मीडिया में किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि इसके लिए वे अधिकृत नहीं है। स्थानीय कांग्रेस नेता की शिकायत पर हुई इस जांच की रिपोर्ट संभवतः इसी सप्ताह पीसीसीएफ को सौंपी जाएगी।

9 बिंदुओं की विस्तृत शिकायत

जांच के दौरान तैयार पंचनमा पर हस्ताक्षर करते हुए शिकायतकर्ता भरत मिलन पांडेय।
जानकारी के अनुसार वरिष्ठ कांग्रेस नेता भरत मिलन पांडेय ने 27 मई 2026 को प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) भोपाल से नौ बिंदुओं पर आधारित विस्तृत लिखित शिकायत की गई थी। शिकायत में धरमपुर वन परिक्षेत्र में अवैध खनन, वन भूमि के दुरुपयोग, वित्तीय अनियमितताओं तथा विभिन्न विकास कार्यों में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नीलम कंस्ट्रक्शन एवं भगवती कंस्ट्रक्शन द्वारा वन भूमि कथित रूप से से क्रेशर लगाकर बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया और वन एवं पर्यावरण के साथ शासन के राजस्व को भारी क्षति पहुंचाई गई। इसके अलावा शिकायत में पिष्टा क्षेत्र में भारा तालाब निर्माण की आड़ में बड़े पैमाने पर खनिज संपदा के अवैध उत्खनन का आरोप भी लगाया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि तालाब निर्माण की आड़ में निकाले गए खनिज का वैधानिक लेखा-जोखा उपलब्ध नहीं है, जिसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

पौधारोपण और सड़क निर्माण कार्य भी शामिल

कांग्रेस नेता की शिकायत केवल कथित अवैध खनन तक सीमित नहीं है। इसमें तेंदूपत्ता शाखा-कर्तन कार्यों में वन समिति अध्यक्षों के कथित फर्जी हस्ताक्षर कर भुगतान निकाले जाने, वन भूमि पर अतिक्रमण की अनदेखी, बिना वैधानिक स्वीकृति ग्रामीण पहुंच मार्गों का निर्माण कराने तथा पौधारोपण क्षेत्र तैयारी कार्यों में व्यापक आर्थिक अनियमितताओं और गुणवत्ताहीन कार्य कराए जाने के आरोप भी शामिल हैं। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि अटल भूजल योजना के तहत धरमपुर रेंज में निर्मित कई जल संरचनाएं गुणवत्ता के मानकों पर खरी नहीं उतरतीं और इनमें शासकीय राशि का दुरुपयोग हुआ है। हालांकि उड़नदस्ता दल ने स्पष्ट किया कि इन कार्यों की जांच उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आती। शिकायतकर्ता को उक्त कार्यों की जांच हेतु विभागीय शिकायत एवं सतर्कता प्रकोष्ठ से संपर्क करने का सुझाव दिया गया।

तत्कालीन रेंजर के संरक्षण में हुई अनियमितताएं

प्रधान मुख्य वन संरक्षक भोपाल से की गई शिकायत का प्रथम पृष्ठ।
शिकायत में तत्कालीन धरमपुर रेंजर वैभव सिंह चंदेल का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया है कि उनके द्वारा मैदानी वन अमले की मिलीभगत से वन संपदा के दोहन की अघोषित छूट देकर और विभागीय कार्यों में फर्जीवाड़ा करके अनुपातहीन संपत्ति अर्जित की गई। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाए। इसी शिकायत को गंभीरता से लेते हुए प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख शुभरंजन सेन ने राज्य स्तरीय उड़नदस्ता दल को जांच के निर्देश दिए। इसके बाद अमित साहू प्रभारी अधिकारी के नेतृत्व में उड़नदस्ता दल ने पन्ना पहुंचकर दो दिनों तक विभिन्न स्थलों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान उड़नदस्ता दल ने कथित अवैध खनन से जुड़े स्थलों का निरीक्षण कर वन सीमा का चिन्हांकन कराया तथा मौके की वास्तविक स्थिति के आधार पर पंचनामे तैयार किए। जांच के समय धरमपुर रेंज के प्रभारी रेंजर अजय बाजपेयी, संबंधित सर्किल प्रभारी, बीटगार्ड, शिकायतकर्ता भरत मिलन पांडेय तथा स्थानीय पत्रकार भी मौजूद रहे। सूत्रों के अनुसार राज्य स्तरीय उड़नदस्ता दल अपनी जांच रिपोर्ट इसी सप्ताह अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (संरक्षण) अमित दुबे को सौंपेगा। इसके बाद रिपोर्ट प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। स्थानीय स्तर पर इस बात को लेकर उत्सुकता बनी हुई है कि जांच में कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं और उनके आधार पर आगे क्या निर्णय लिया जाता है।

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़े विभागीय कार्य

राज्य स्तरीय उड़नदस्ता दल द्वारा वन क्षेत्र में कथित अवैध खनन की फोटोग्राफी-वीडियोग्राफी की गई।
धरमपुर और अजयगढ़ रेंज पिछले काफी समय से विभागीय कार्यों में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर चर्चा में है। विशेष रूप से पौधारोपण क्षेत्र तैयारी कार्य, अटल भूजल योजना के तहत निर्मित जल संरचनाएं, वन संरक्षण से जुड़े विकास कार्य तथा अन्य निर्माण गतिविधियों को लेकर समय-समय पर गंभीर सवाल उठते रहे हैं। इन मामलों से संबंधित शिकायतें लोकायुक्त संगठन से लेकर उच्च स्तर तक पहुंचने के बाद विभागीय स्तर पर हलचल तेज हुई और अंततः दोनों रेंजों के तत्कालीन रेंजरों का स्थानांतरण भी हो गया। हालांकि स्थानांतरण के बावजूद उनके कार्यकाल में कराए गए कार्यों को लेकर उठे सवाल अभी भी पूरी तरह शांत नहीं हुए हैं। बीते कुछ महीनों में धरमपुर और अजयगढ़ रेंज में पौधारोपण क्षेत्र तैयारी कार्यों की गुणवत्ता, अटल भूजल योजना के अंतर्गत बनाए गए तालाबों की उपयोगिता तथा अन्य निर्माण कार्यों में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सुर्खियों में हैं। इन मामलों में प्रकाशित समाचारों और उच्च स्तर पर हुई शिकायतों के बाद विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है।

शिकायत की टाइमिंग पर भी उठ रहे सवाल

वन विभाग के राज्य स्तरीय उड़नदस्ता दल ने शिकायत में उल्लेखित कथित अवैध खनन वाले स्थलों का दो दिन तक सघन निरीक्षण किया।
धरमपुर वन परिक्षेत्र में कथित अवैध खनन और विभागीय अनियमितताओं को लेकर की गई शिकायत की टाइमिंग चर्चा का विषय बनी है। पूरे मामले कुछ माह पहले हुई वन अपराध संबंधी कार्रवाई की पृष्ठभूमि से जोड़कर देखा जा रहा है। विदित हो कि लगभग तीन माह पूर्व धरमपुर वन परिक्षेत्र के मैदानी वन अमले ने कथित रूप से वन क्षेत्र से पत्थर का अवैध परिवहन करते हुए एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को पकड़ा था। वन विभाग का दावा था कि उक्त ट्रैक्टर-ट्रॉली कांग्रेस नेता भरत मिलन पांडेय के भाई से संबंधित थी। कार्रवाई की जानकारी मिलने पर भरत मिलन पांडेय, उनके बड़े भाई और भतीजे मौके पर पहुंच गए थे। इस दौरान वन अमले और संबंधित लोगों के बीच विवाद हुआ। विभाग का आरोप था कि विवाद के बाद ट्रैक्टर-ट्रॉली को जबरन छुड़ाकर ले जाया गया। इसके बाद वन विभाग की ओर से अजयगढ़ थाना में लिखित शिकायत करने पर पुलिस ने कई संगीन धाराओं में अपराध पंजीबद्ध किया। इस प्रकरण में पुलिस ने भरत मिलन पांडेय को जबलपुर से गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया। बाद में उन्हें उच्च न्यायालय से जमानत मिल गई। इस मामले में उनके भतीजे की भी गिरफ्तारी हुई थी। जेल से रिहा होने के बाद भरत मिलन पांडेय ने तत्कालीन धरमपुर रेंजर और मैदानी वन अमले के विरुद्ध विस्तृत शिकायत दर्ज कराई। वन विभाग और राजनीतिक हलकों में शिकायत को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कुछ लोग इस वन कर्मचारियों को सबक सिखाने अथवा बदले की भावना से जोड़कर देख रहे हैं। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस नेता भरत मिलन पांडेय और उनके परिजनों पर भी पहले भी कई बार अवैध खनन कारोबार से जुड़े होने गंभीर आरोप लग चुके हैं।