बड़ा बदलाव: बाघों की मौजूदगी वाले सामान्य वन क्षेत्रों में भी अब एम-स्ट्राइप्स एप से होगी निगरानी

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एम-स्ट्राइप्स ऐप संचालन का प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले सामान्य वनमण्डल के वनकर्मी।

   1 जून से डिजिटल गश्त शुरू करने की तैयारी, वन अमले को दिया जा रहा प्रशिक्षण

*      वन्यजीव सुरक्षा मजबूत करने और मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने पर फोकस

*      प्रदेश में बढ़ती बाघ आबादी के बीच वन विभाग का बड़ा फैसला

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्यप्रदेश में बाघ, तेंदुओं और अन्य वन्यजीवों की लगातार बढ़ती आबादी को देखते हुए वन विभाग ने उनकी सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को और अधिक वैज्ञानिक एवं तकनीकी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब तक प्रदेश के टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में सफलतापूर्वक उपयोग किए जा रहे एम-स्ट्राइप्स (M-STrIPES) एप का विस्तार सामान्य वन क्षेत्रों तक किया जा रहा है। इसके तहत उन सभी वन मंडलों में, जहां बाघों की उपस्थिति दर्ज की गई है, 1 जून 2026 से एम-स्ट्राइप्स आधारित गश्त शुरू की जाएगी।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक, मध्यप्रदेश के निर्देश पर यह व्यवस्था लागू की जा रही है। इसका उद्देश्य केवल वन्यजीवों की गतिविधियों पर निगरानी रखना ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना, अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाना तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को कम करना भी है। वन विभाग का मानना है कि वन क्षेत्रों में वन्यजीवों की सटीक लोकेशन और गतिविधियों की नियमित निगरानी से संभावित संघर्ष वाले क्षेत्रों की समय रहते पहचान की जा सकेगी और आवश्यक प्रबंधन उपाय किए जा सकेंगे। इसी क्रम में पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन द्वारा विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।
पन्ना टाइगर रिजर्व लंबे समय से एम-स्ट्राइप्स तकनीक के माध्यम से बाघों की निगरानी और सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। अब इसी अनुभव का लाभ सामान्य वन मंडलों के मैदानी अमले को दिया जा रहा है, ताकि टाइगर रिजर्व के बाहर भी वन्यजीव संरक्षण के लिए एक समान, आधुनिक और वैज्ञानिक निगरानी प्रणाली विकसित की जा सके। प्रशिक्षण के दौरान वन कर्मचारियों को एम-स्ट्राइप्स के नवीनतम सॉफ्टवेयर, डेटा एंट्री प्रणाली और फील्ड मॉनिटरिंग की तकनीकों की जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि किस प्रकार इस एप के माध्यम से मानव हस्तक्षेप, जल स्रोतों की उपलब्धता, शिकार की घटनाओं, शाकाहारी एवं मांसाहारी वन्यजीवों की उपस्थिति तथा अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियों से जुड़े वैज्ञानिक साक्ष्य डिजिटल रूप से दर्ज किए जा सकते हैं।
वैज्ञानिक डेटा के आधार पर बनेगी संरक्षण रणनीति
एम-स्ट्राइप्स प्रणाली के जरिए एकत्र होने वाला डेटा वन विभाग को वन्यजीवों की गतिविधियों का वास्तविक आकलन करने में मदद करेगा। इससे संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, गश्त की प्रभावशीलता बढ़ाने और वन्यजीव संरक्षण संबंधी निर्णयों को अधिक सटीक बनाने में सहायता मिलेगी। पन्ना टाइगर रिजर्व की विशेषज्ञ टीम ने प्रशिक्षण के दौरान कर्मचारियों की तकनीकी जिज्ञासाओं का समाधान भी किया, जिससे उन्हें फील्ड में एप के प्रभावी उपयोग की व्यावहारिक समझ प्राप्त हुई। प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत 26 मई को उत्तर पन्ना वन मंडल तथा 28 मई को दक्षिण पन्ना एवं छतरपुर वन मंडल के अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया गया। वन अधिकारियों के अनुसार टाइगर रिजर्व में सफल साबित हुई यह तकनीक अब सामान्य वन क्षेत्रों में भी वन्यजीव सुरक्षा का मजबूत आधार बनेगी। इससे बाघों और अन्य वन्यजीवों की गतिविधियों पर अधिक सटीक एवं रियल टाइम निगरानी संभव होगी, वहीं मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम और संरक्षण प्रयासों को भी नई मजबूती मिलेगी।