MP News: दवा एजेंसियों की आड़ में नशे का कारोबार? 1.34 लाख बोतल ऑनरेक्स कफ सिरप का हिसाब नहीं, दो एजेंसियां सील

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खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने बागरी एजेंसी में कफ सीरप खरीदी एवं बिक्री की जांच उपरांत एजेंसी को सील कर दिया।

  पन्ना की दो एजेंसियों ने महज 2-3माह में रिकॉर्ड मात्रा में खरीदा कफ सिरप

  बिक्री के दस्तावेज और प्रिस्क्रिप्शन रिकॉर्ड नहीं मिले

  जांच के दौरान एक एजेंसी संचालक प्रतिष्ठान बंद कर परिवार सहित गायब

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में क्या थोक एवं फुटकर दवा एजेंसियों की आड़ में नशे के लिए ऑनरेक्स कफ सिरप की अवैध आपूर्ति का नेटवर्क संचालित हो रहा था? खाद्य एवं औषधि प्रशासन की विशेष जांच में सामने आए तथ्य इस आशंका को बल देते नजर आ रहे हैं। जिले की दो दवा एजेंसियों द्वारा महज दो से तीन माह के भीतर लगभग 1 लाख 34 हजार बोतल ऑनरेक्स कफ सिरप खरीदे जाने के बावजूद उसकी बिक्री अथवा वितरण से संबंधित अनिवार्य अभिलेख और चिकित्सकीय प्रिस्क्रिप्शन रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किया जा सका। जांच के तीसरे दिन एक एजेंसी का संचालक प्रतिष्ठान बंद कर परिवार सहित गायब मिला, जिसके बाद दोनों एजेंसियों को नियमानुसार सीलबंद कर दिया गया। मामले में वैधानिक कार्रवाई जारी है।
नियंत्रक, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, मध्यप्रदेश, भोपाल के निर्देश तथा पन्ना कलेक्टर के मार्गदर्शन में वरिष्ठ कार्यालय भोपाल द्वारा गठित विशेष जांच दल ने 3 से 5 जुलाई 2026 तक जिले में व्यापक जांच अभियान चलाया। सूत्रों के अनुसार पन्ना जिले में कफ सिरप के नियमविरुद्ध वितरण और संभावित दुरुपयोग को लेकर पहली बार इतनी व्यापक कार्रवाई की गई है। इससे जिले सहित आसपास के क्षेत्रों के दवा कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। इस कार्रवाई की जानकारी सामने आने के बाद पन्ना जिले में भी इसकी व्यापक चर्चा है। आम लोगों का कहना है कि यदि महज दो-तीन माह के भीतर इतनी बड़ी मात्रा में ऑनरेक्स कफ सिरप खरीदा गया और उसका विधिवत बिक्री रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, तो यह अत्यंत गंभीर विषय है। लोगों ने युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

45 हजार बोतलों का रिकॉर्ड नहीं दे सकी बागरी एजेंसी

जांच दल ने ग्राम कटन, तहसील गुनौर स्थित मेसर्स बागरी ड्रग एजेंसी का निरीक्षण किया। जांच के दौरान पाया गया कि एजेंसी ने पिछले लगभग एक माह में करीब 45 हजार बोतल ऑनरेक्स कफ सिरप खरीदी थीं, लेकिन उनकी बिक्री अथवा वितरण से संबंधित आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए। निरीक्षण में औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 तथा नियम, 1945 के विभिन्न प्रावधानों के उल्लंघन भी पाए गए। इसके आधार पर एजेंसी को तत्काल प्रभाव से सीलबंद कर दिया गया।

89 हजार बोतलों की खरीद, संचालक गायब

इसी क्रम में देवेंद्रनगर स्थित मेसर्स देवनाथ फार्मा की जांच की गई। जांच में सामने आया कि एजेंसी अपने लाइसेंस में दर्ज स्थान के बजाय दूसरे स्थान से संचालित की जा रही थी। यहां पिछले दो माह में लगभग 89 हजार बोतल ऑनरेक्स कफ सिरप खरीदे जाने का रिकॉर्ड मिला। जांच दल ने लगातार दो दिन तक अभिलेखों का परीक्षण और अन्य औषधियों की जब्ती संबंधी कार्रवाई की। तीसरे दिन जब टीम दोबारा पहुंची तो प्रतिष्ठान पर ताला लगा मिला तथा मकान मालिक एवं एजेंसी संचालक परिवार सहित गायब था। इसके बाद नियमानुसार परिसर को भी सीलबंद कर दिया गया।

आखिर 1.34 लाख बोतल गई कहां?

दोनों एजेंसियां थोक एवं फुटकर दवा विक्रेता के रूप में पंजीकृत हैं। नियमानुसार इस प्रकार की दवाओं की बिक्री और वितरण का पूरा रिकॉर्ड, संबंधित चिकित्सकीय प्रिस्क्रिप्शन तथा अन्य आवश्यक अभिलेख सुरक्षित रखना अनिवार्य होता है। लेकिन जांच के दौरान एजेंसियां इतनी बड़ी मात्रा में खरीदे गए ऑनरेक्स कफ सिरप की बिक्री अथवा वितरण का वैध रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं कर सकीं। ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि आखिर करीब 1 लाख 34 हजार बोतल ऑनरेक्स कफ सिरप किन लोगों को और किस आधार पर उपलब्ध कराया गया। यही अब जांच का सबसे महत्वपूर्ण विषय बन गया है।

नशे के रूप में दुरुपयोग की आशंका 

कफ सिरप का चिकित्सकीय उपयोग पूरी तरह वैध और आवश्यक है, लेकिन लंबे समय से यह भी सामने आता रहा है कि कुछ लोग विशेष प्रकार के कफ सिरप का नशे के रूप में दुरुपयोग करते हैं। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र की दो एजेंसियों द्वारा बेहद कम समय में इतनी बड़ी मात्रा में ऑनरेक्स कफ सिरप की खरीद, उसके वितरण का रिकॉर्ड उपलब्ध न होना तथा जांच के दौरान एक संचालक का प्रतिष्ठान बंद कर गायब हो जाना पूरे मामले को और गंभीर बना रहा है। इसी कारण जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि दवा वास्तविक मरीजों तक पहुंची या उसका कहीं अवैध उपयोग अथवा दुरुपयोग हुआ।

जिलेभर के दवा कारोबारियों में मचा हड़कंप

विशेष जांच दल की कार्रवाई के बाद पन्ना सहित आसपास के जिलों के दवा कारोबारियों में हड़कंप की स्थिति है। माना जा रहा है कि अब ऐसे अन्य थोक एवं फुटकर दवा प्रतिष्ठानों की भी जांच की जा सकती है, जहां नियंत्रित औषधियों की असामान्य मात्रा में खरीद-बिक्री हुई है। यदि जांच में और अनियमितताएं सामने आती हैं तो कार्रवाई का दायरा और बढ़ सकता है। इस विशेष जांच दल में पन्ना की औषधि निरीक्षक महिमा जैन, छतरपुर के औषधि निरीक्षक अजीत जैन, सतना की औषधि निरीक्षक प्रियंका चौबे तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय, पन्ना का स्टाफ शामिल रहा।