ग्राउण्ड रिपोर्ट: पीटीआर ने जल निगम को दी जंगल और बेजुबान वन्यजीवों के रहवास उजाड़ने की अनुमति!

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पन्ना टाइगर रिजर्व अंतर्गत पन्ना बफर रेंज के पर्यटन क्षेत्र में पाइप लाइन बिछाने के लिए ठेका कंपनी द्वारा मनमाने तरीके से पेड़ उखाड़कर शर्तों का उल्लंघन करने के साथ वन्यप्राणियों के रहवास को नष्ट किया गया। देखें तबाही की तस्वीरें-

   वन चौकी के सामने पाइपलाइन बिछाने आधा सैकड़ा पेड़ उखाड़ डाले, तमाशबीन बने रहे वनरक्षक

   पन्ना बफर रेंज के पर्यटन क्षेत्र अंतर्गत अस्थायी कैंप घुर्रहो और अमरचुआ का मामला

   डेढ़ माह बाद भी न वन अपराध दर्ज हुआ, न ठेकेदार की पोकलेन मशीनें जब्त हुईं

   वन संपदा विनाश से जुड़े गंभीर मामले को रफा-दफा करने में जुटे रेंजर, एडी और डीडी

   800 करोड़ की परियोजना में व्यापक पर्यावरणीय नुकसान, ‘लेटर-लेटर’ खेल से उठे संदेह

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में न तो बाघ सुरक्षित हैं और न ही बहुमूल्य वन संपदा। महीने भर के भीतर दो बाघों की संदेहास्पद मौत की घटनाओं को लोग अभी भूले भी नहीं थे कि अब जनहित से जुड़े कार्यों की कथित अनुमति की आड़ में बेशकीमती वन संपदा के विनाश और निरीह वन्यजीवों के रहवास उजाड़ने का मामला उजागर हुआ है। पन्ना टाइगर रिजर्व की पन्ना बफर रेंज अंतर्गत समूह जल प्रदाय योजना की पाइपलाइन बिछाने के लिए जारी की गई अनुमति/अनापत्ति अब वन संपदा विनाश के लाइसेंस में तब्दील होती नजर आ रही है। वन एवं वन्यप्राणी संरक्षण कानूनों को ताक पर रखकर आरक्षित वन क्षेत्र में कराए जा रहे कार्यों को कथित तौर पर पार्क के जिम्मेदार अधिकारियों का खुला संरक्षण प्राप्त है।
लगभग 800 करोड़ रुपये लागत वाली सिंघौरा-2 समूह जल प्रदाय योजना में ठेका कंपनी की पोकलेन मशीनों ने दिनदहाड़े नियम-कानूनों और अनुमति की शर्तों की धज्जियां उड़ाते हुए आधा सैकड़ा पेड़ उखाड़ डाले। पाइपलाइन बिछाने के लिए अनियंत्रित तरीके से गहरी नालियां खोदकर बेजुबान वन्यजीवों का रहवास उजाड़ दिया गया। यह सब वन चौकी के सामने होता रहा, लेकिन मैदानी वन अमला पूरी तरह मूकदर्शक बना रहा। हद तो तब हो गई जब मामला रेंजर से लेकर सहायक संचालक और उप संचालक के संज्ञान में आने के डेढ़ माह बाद भी संबंधितों के विरुद्ध नियमानुसार वन अपराध प्रकरण कायम नहीं किया गया और न ही ठेका कंपनी की पोकलेन मशीनें जब्त की गईं। संवेदनशील मामले में जिम्मेदार वन अधिकारियों की उदासीनता से उनकी भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है।
जिला मुख्यालय पन्ना से लगभग 60 किलोमीटर दूर अजयगढ़ विकासखंड में पन्ना टाइगर रिजर्व (PTR) के वन परिक्षेत्र पन्ना बफर अंतर्गत जल जीवन मिशन के तहत सिंघौरा-2 प्रोजेक्ट की पाइपलाइन बिछाने का कार्य प्रगति पर है। 800 करोड़ रुपये की इस पेयजल परियोजना का निर्माण कार्य कल्पतरु प्रोजेक्ट इंटरनेशनल लिमिटेड (KPIL) को सौंपा गया है। वर्तमान में पन्ना बफर के पर्यटन क्षेत्र कैंप घुर्रहो के समीप तक अंडरग्राउंड पाइपलाइन डाली जा चुकी है। हालांकि इस कार्य के लिए जल निगम पन्ना ने पीटीआर से विधिवत अनुमति/अनापत्ति प्राप्त की है, लेकिन जिन कड़ी शर्तों के साथ जनहित से जुड़े इस विकास कार्य की अनुमति जारी की गई थी, उनका मौके पर पालन नहीं कराया जा रहा है।
टाइगर, तेंदुआ, भालू समेत अन्य वन्यजीवों के विचरण क्षेत्र वाले घने जंगल में ठेका कंपनी केपीआईएल द्वारा गंभीर लापरवाही बरतते हुए आधा सैकड़ा पेड़ों को उखाड़ डाला गया। पाइपलाइन बिछाने के लिए दो पोकलेन मशीनों से गहरी नालियों की खुदाई कराई गई और रास्ते में आने वाले या आसपास खड़े वर्षों पुराने हरे-भरे वृक्षों को उखाड़कर फेंक दिया गया। इस अनियंत्रित कार्य का सबसे बड़ा खामियाजा बेजुबान वन्यजीवों को भुगतना पड़ा। नालियों की खुदाई और मिट्टी की भराई के दौरान असंख्य वन्यजीवों के रहवास नष्ट हो गए। पन्ना बफर रेंज के बनहरी, घुर्रहो घाटी से लेकर छापर-दहलान चौकी तक के जंगलों में पाइपलाइन बिछाने के नाम पर बड़े पैमाने पर पेड़ उखाड़ने और वन्यजीवों के रहवास तबाह होने के साक्ष्य मौजूद हैं।
पन्ना बफर रेंज के अस्थाई कैंप धुर्रहो के आसपास बड़े पैमाने पर पेड़ों को क्षति पहुंचाई गई। साथ ही पेड़ उखाड़ने पाइप लाइन बिछाने नाली की खुदाई और पुराव में बेजुबान वन्यजीवों के रहवास को अपूरणीय क्षति पहुंची।
परियोजना के लिए वन संरक्षण अधिनियम 1980 के तहत स्पष्ट शर्तों के साथ अनुमति दी गई थी कि कार्य के दौरान वन संपदा और वन्यजीवों को किसी प्रकार की क्षति नहीं पहुंचाई जाएगी। इसके बावजूद न केवल पेड़ों का विनाश हुआ, बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को भी नुकसान पहुंचा। क्षेत्र में बाघ, तेंदुआ, भालू, चीतल और सांभर जैसे वन्यजीवों की मौजूदगी के बावजूद इस तरह की गतिविधियां गंभीर चिंता का विषय हैं। जानकारों का मानना है कि यदि यही स्थिति रही तो वन्यजीवों का विस्थापन बढ़ेगा और मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका भी बढ़ सकती है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि घटना के डेढ़ माह बाद भी न तो वन अपराध प्रकरण दर्ज किया गया और न ही मौके पर उपयोग की गई मशीनों को जब्त किया गया। जबकि भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 26 और 33 के तहत अवैध वृक्ष कटाई पर तत्काल कार्रवाई का प्रावधान है। वहीं वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 29 के अनुसार संरक्षित क्षेत्र में वन्यजीवों के आवास को नुकसान पहुंचाने पर अपराध दर्ज कर संबंधित उपकरण जब्त किए जाने चाहिए। इन स्पष्ट प्रावधानों के बावजूद कार्रवाई का अभाव अधिकारियों की मंशा पर सवाल खड़े करता है। सूत्रों की मानें तो समूह जल प्रदाय योजना से जुड़े तकनीकी अधिकारियों और ठेकेदार पर दबाव बनाने की मंशा से पीटीआर प्रबंधन कई दिनों तक ‘लेटर-लेटर’ का खेल खेलता रहा। बाद में कथित तौर पर अंदरखाने मामला सेट होने के बाद अब इसे रफा-दफा करने की कागजी कार्रवाई की जा रही है।

पेड़ कटाई की यह है प्रक्रिया

वन क्षेत्र में होने वाले विकास एवं निर्माण कार्यों के लिए सर्वप्रथम क्रियान्वयन एजेंसी द्वारा परिवेश पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर अनुमति प्राप्त की जाती है। संबंधित वन मंडल आवेदन एवं सहपत्रों की जांच के बाद उन्हें वरिष्ठ कार्यालय को अग्रेषित करता है। संरक्षित अथवा आरक्षित वन क्षेत्र में कार्य के लिए भारत सरकार द्वारा कड़ी शर्तों के साथ अनुमति जारी की जाती है। यदि किसी कार्य में पेड़ों की कटाई प्रस्तावित हो तो संबंधित एजेंसी और वन अधिकारी संयुक्त रूप से स्थल पर पेड़ों को चिन्हित करते हैं। इसके बाद वन मंडल द्वारा विदोहन योजना तैयार की जाती है। प्रभावित वृक्षों की कटाई और परिवहन की राशि निर्माण एजेंसी से जमा कराने के बाद वन अमला अपनी उपस्थिति में वैज्ञानिक तरीके से वृक्षों की सावधानीपूर्वक कटाई कराता है, ताकि राजस्व की हानि न हो।
यहां यह उल्लेखनीय है कि समूह जल प्रदाय योजना की पाइपलाइन बिछाने के दौरान वन क्षेत्र में पेड़ों की कटाई की निर्धारित प्रक्रिया का मौके पर पालन नहीं कराया गया। ठेका फर्म कल्पतरु प्रोजेक्ट इंटरनेशनल लिमिटेड (KPIL) की पोकलेन मशीनों ने पन्ना टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र में मनमाने तरीके से आधा सैकड़ा पेड़ उखाड़ फेंके। इससे वृक्ष और उनकी शाखाएं कई जगह से क्षतिग्रस्त हो गईं। जानकारों का मानना है कि पोकलेन से उखाड़े गए वृक्षों की काष्ठ नीलामी में वन विभाग को राजस्व की हानि भी उठानी पड़ सकती है।

न अपराध दर्ज, न मशीनों की जब्ती

जल निगम पन्ना के द्वारा सिंघौरा-2 प्रोजेक्ट अंतर्गत समूह जल प्रदाय योजना की पाइप लाइन बिछाने का कार्य जारी है।
प्रकरण में पन्ना टाइगर रिजर्व के उप संचालक बीरेंद्र कुमार पटेल की भूमिका भी चर्चा में है। उन्होंने मीडिया के सामने ऑन कैमरा बयान देने से परहेज किया और अनौपचारिक बातचीत में विरोधाभासी जवाब दिए। एक ओर वे समूह जल प्रदाय योजना में लगभग 1505 पेड़ों की कटाई की अनुमति का हवाला देते हैं, वहीं दूसरी ओर जल निगम महाप्रबंधक पन्ना को नोटिस जारी करने की बात स्वीकारते हैं। यदि कार्य पूरी तरह नियमों के तहत हो रहा था तो नोटिस क्यों? और यदि उल्लंघन हुआ तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? उनके जवाब इन सवालों को और उलझाते हैं। सूत्रों के अनुसार मामले को दबाने और संबंधित एजेंसी पर दबाव बनाकर आर्थिक लाभ लेने की कोशिशों की भी चर्चा है। 800 करोड़ रुपये की परियोजना में ‘लेटर-लेटर’ का खेल और कार्रवाई में देरी इन आशंकाओं को बल देती है।
अजयगढ़ के समीप स्थित जल शोधन संयत्र के निर्माणाधीन परिसर में स्थित ठेका कंपनी कल्पतरु प्रोजेक्ट इंटरनेशनल लिमिटेड (KPIL) का कार्यालय।
गौरतलब है कि हाल ही में पीटीआर क्षेत्र में दो बाघों की संदिग्ध मौतें भी सामने आई थीं। ऐसे में वन संपदा के इस खुले दोहन ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पन्ना टाइगर रिजर्व में जंगल और वन्यजीव वास्तव में सुरक्षित हैं या फिर संरक्षण के नाम पर विनाश की पटकथा लिखी जा रही है। पूरे मामले ने पीटीआर प्रबंधन की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब जरूरत निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की है, ताकि जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा केवल कागजों तक सीमित न रह जाए। इस खबर के संबंध में जल निगम पन्ना के महाप्रबंधक शिवम सिन्हा से संपर्क किया गया, लेकिन कई बार रिंग जाने के बावजूद उनका फोन रिसीव नहीं हुआ।

इनका कहना है-

“पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन द्वारा हमें नोटिस जारी किया गया था, जिसका जवाब अभी नहीं दिया गया है। फिलहाल वन क्षेत्र में काम बंद है, लेकिन हमारी मशीनरी जब्त नहीं हुई। अनुमति लेकर कार्य कराया जा रहा है, जिसमें पेड़ों की कटाई शामिल है। आपकी यह बात सही है कि पेड़ों की कटाई वन विभाग कराता है, ठेका कंपनी नहीं।”

– पतिराम गुर्जर, प्रोजेक्ट हेड, केपीआईएल कैंप पन्ना।

“जल निगम की दो परियोजनाओं को भारत सरकार द्वारा सशर्त अनुमति जारी की गई है। एक परियोजना में 724 तथा दूसरी में 781 वृक्ष काटे जाने हैं। ठेका कंपनी द्वारा पेड़ों को उखाड़ने की सूचना मिलने पर जल निगम को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। विदोहन की कार्रवाई के उपरांत कार्य शुरू कराया जाएगा।”

– बीरेन्द्र कुमार पटेल, उप संचालक, पन्ना टाइगर रिजर्व।