मध्यप्रदेश : सांप्रदायिक तनाव भड़काने के मामले में संलिप्तता पर युवा नेता को कोंग्रेस पार्टी ने दी यह सज़ा !

* उपद्रवियों के साथ नजर आए युवा कोंग्रेस विधानसभा अध्यक्ष को किया निलंबित
* पन्ना जिले में पुलिस की मौजूदगी में धार्मिक स्थलों को तोड़ने की घटना ने पकड़ा तूल
पन्ना। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना जिले के गुनौर क़स्बा में शनिवार 3 जुलाई को सामाजिक सौहार्द बिगाड़कर दो समुदायों के बीच तनाव और हिंसा भड़काने के मकसद से धार्मिक स्थलों का अपमान कर उनमें तोड़फोड़ किए जाने की घटना को लेकर लोगों के गुस्से को देखते हुए सियासी हलचल बढ़ गई है। खुलेआम बवाल काटने वाले कतिपय भाजपा नेताओं एवं विभिन्न संगठन से जुड़े उपद्रवियों के वायरल वीडियो में उनके साथ कथित तौर पर युवा कोंग्रेस के गुनौर विधानसभा अध्यक्ष मानवेन्द्र सिंह बुंदेला के सक्रिय नजर आने पर पार्टी ने उसके खिलाफ फौरी तौर पर सख्त एक्शन लिया है। मध्यप्रदेश युवा कोंग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया के आदेश पर युवा कोंग्रेस के कार्यालय सचिव रमाशंकर दुबे ने मंगलवार 6 जुलाई को मानवेन्द्र सिंह बुंदेला उर्फ़ सनी को विधानसभा अध्यक्ष के पद से आगामी आदेश तक तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
कोंग्रेस पार्टी ने इस कार्रवाई के माध्यम से स्पष्ट तौर पर यह संदेश दिया है कि अमन-चैन और भाईचारे को क्षति पहुंचाने वाले अपराध चाहे किसी भी धर्म या समुदाय के खिलाफ हों वे नाक़ाबिले बर्दाश्त हैं। समाज की एकता को नफरत की आग में झोंक कर राजनैतिक रोटियां सेंकना कोंग्रेस पार्टी की विचारधारा के खिलाफ है। क्योंकि, कोंग्रेस इस तरह के घृणित कृत्य को मानवता के खिलाफ अपराध मानती है।

युवा कोंग्रेस जिलाध्यक्ष पन्ना, स्वतंत्र प्रभाकर अवस्थी ने रडार न्यूज़ से चर्चा में गुनौर विधानसभा अध्यक्ष मानवेन्द्र सिंह बुंदेला को निलंबित किये जाने की पुष्टि करते हुए बताया कि, प्रथम दृष्टया प्रकाश में आए तथ्यों के आधार पर आगामी आदेश तक के लिए निलंबन की कार्रवाई की गई है। प्रदेश युवा कोंग्रेस के द्वारा इस मामले की विस्तृत जांच की जायेगी और मानवेन्द्र से जवाब मांगा जाएगा। इस जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे उनके आधार पर ही आगे निर्णय लिया जाएगा।
उल्लेखनीय है, कोंग्रेस संगठन में आमतौर फैसले देरी से लिए जाते हैं लेकिन गुनौर के बेहद संवेदनशील घटनाक्रम को लेकर प्रदेश युवा कोंग्रेस अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया ने जिस तरह की गंभीरता और तत्परता दिखाते हुए इस दुर्भाग्यपूर्ण प्रकरण में कथित संलिप्तता को लेकर गुनौर विधानसभा के अध्यक्ष तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का काम किया है, उससे पार्टी के अंदर और बाहर एक सख्त सन्देश गया है। अधिकांश लोगों का मानना है कि कोंग्रेस पार्टी ने दृढ़ता के साथ यह बताने की कोशिश की है कि, पार्टी की छवि धूमिल करने वाले कृत्यों में भागीदारी करने वालों को उसके यहां संरक्षण या प्रोत्साहन नहीं मिलता है, फिर चाहे वह कोई भी हो।
मालूम हो कि, पन्ना जिले के गुनौर में क़स्बा में बीते दिनों अज्ञात शरारती तत्व ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने एवं दो समुदायों के बीच नफरत फैलाने की सुनियोजित साजिश के तहत रात के अंधेरे में देव प्रतिमा का अपमान कर उसे हरे रंग से रंग दिया था। शनिवार 3 जुलाई की सुबह जब इस घटिया हरकत की खबर आई तो क्षेत्र में तनाव और आक्रोश फ़ैल गया। इस तरह के संवेदनशील और विवादित मामलों में जनाक्रोश की आग भड़काकर अपनी राजनीति चमकाने की फिराक में रहने वाले समाज विरोधी तत्वों ने दिनदहाड़े भारी पुलिस की मौजूदगी में बेख़ौफ़ अंदाज में जमकर उपद्रव कराया। गुस्से से भरी भीड़ का नेतृत्व करके कतिपय भाजपा नेताओं एवं विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं ने पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों की आँखों के सामने समुदाय विशेष के 3 धार्मिक स्थलों में तोड़फोड़ कर पवित्र धार्मिक ग्रन्थ का अपमान किया। इस दौरान जमकर भड़काऊ नारेबाजी भी की गई थी।

शांति प्रिय पन्ना जिले को बदनाम करने वाले इस दुर्भाग्यपूर्ण घटनाक्रम पर पुलिस ने दो आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध किए हैं। जिसमें एक एफआईआर देव प्रतिमा के अपमान को लेकर दर्ज की गई और दूसरी समुदाय विशेष के धार्मिक स्थलों में तोड़फोड़ व उपद्रव करने से संबंधित है। इस घटना के बताए जा रहे कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हैं, जिनके आधार कोंग्रेस पार्टी के भोपाल में बैठे पदाधिकारियों ने अपने युवा नेता की कथित संलिप्तता को संज्ञान लेते हुए उसके खिलाफ एक्शन लिया है। जबकि घटना के प्रत्यक्षदर्शी रहे पन्ना पुलिस के अधिकारी नफरत फैलाने वालों को चिन्हित कर उन्हें अब तक जेल नहीं भेज पाए हैं।
गुनौर के घटनाक्रम के संबंध में अधिक जानकारी के लिए नीचे दी गई लिंक पर क्लिक करें –
जिला मुख्यालय के नजदीक आदिवासी बस्ती चाँदमारी में 3 बच्चों की मौत 14 बीमार

* स्वास्थ्य और महिला बाल विकास का मैदानी अमला निष्क्रिय
* कोरोना की तीसरी आने लहर की चेतावनी को लेकर लापरवाही कहीं भारी न पड़ जाए !
शादिक खान, पन्ना।(wwwradarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना जिला मुख्यालय से सटी छोटी सी आदिवासी बस्ती मजरा ग्राम चांदमारी (मानस नगर) में सप्ताह भर के दौरान तीन परिवारों के चिराग हमेशा के लिए बुझ गए। मासूम किलकारियों के असमय खामोश होने के वज्रपात से अब यहां हर तरफ मातमी चींखें गूँज रहीं हैं। जिन गरीबों की गोद सूनी हुई है वे इस त्रासदी के कारण गहरे सदमे में हैं, वहीं गांव में जिनके बच्चे अभी भी बीमार हैं उन दंपत्तियों की साँसें हलक में अटकीं हैं। मालूम हो कि चांदमारी में रहने वाले अधिकांश आदिवासी पेशे से मजदूर हैं, जोकि अशिक्षा-जागरूकता के आभाव में भीषण गरीबी-बेरोज़गारी से जकड़े होने के कारण बदहाल जिंदगी जीने को मजबूर हैं।
इस बस्ती से मासूम बच्चों की मौत की स्तब्ध करने वाली खबर ऐसे समय पर आई है, जब कोरोना महामारी की दूसरी लहर काफी कमजोर पड़ चुकी है और तीसरी लहर के जल्द ही दस्तक देने की संभावना विशेषज्ञों के द्वारा जताई जा चुकी है। आशंका जाहिर की गई है, तीसरी लहर का सबसे अधिक कहर हमारे बच्चों पर टूटेगा। कोरोना की पहली और दूसरी लहर की रोकथाम में बुरी तरह नाकाम रहीं सरकारों की आपराधिक लापरवाही के कारण मौत के भयावह तांडव को हरेक इंसान ने देखा और महसूस किया है। शवों से पट चुके शमशानों और कब्रिस्तानों से आए रूह कंपा देने वाले दृश्यों, मेडिकल ऑक्सीजन की किल्लत, समय पर दवाई और इलाज न मिलने से दम तोड़ती सांसों की चीत्कारें अभी भी गूँज रहीं हैं। मानवता पर कहर बनकर टूटी इस आपदा में जीवनदायिनी नदियों को हमने शववाहिनीं में तब्दील होते भी देखा है।

कोरोना की पहली और दूसरी लहर के प्रदेश व देश में तबाही मचाने से पहले अदूरदर्शी सत्तासीनों के द्वारा जिस तरह के दावे आवश्यक तैयारियों को लेकर किए जा रहे थे उनका खोखलापन इतिहास के पन्नों में आपराधिक कुप्रबंधन की सबसे भयानक त्रासदी के रूप में दर्ज हो चुका है। लाखों-लाख परिवार इस त्रासदी से मिले कभी न भरने वाले जख्म की असहनीय पीड़ा को अब हर पल झेल रहे हैं। ऐसे में कोरोना की अब तक की सबसे विनाशकारी बताई जा रही तीसरी लहर की चर्चा सिहरन पैदा करने वाली है, लेकिन जिक्र इसलिए करना पड़ा क्योंकि एक बार फिर हमें बताया जा रहा है की तीसरी लहर की रोकथाम को लेकर सरकारें पूरी तरह तैयार हैं, सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की जा चुकीं हैं और नीचे से लेकर ऊपर तक शासन-प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। मगर, जब चांदमारी सरीकी हैरान करने वालीं घटनाएं उजागर होतीं हैं तो मैदानी अमले से लेकर कथित जिम्मेदारों की सजगता सवालों के कठघरे में खड़ी नजर आती है।
पन्ना जिला मुख्यालय से लगी चांदमारी बस्ती में महज आधा सैंकड़ा परिवार ही रहते हैं। इतनी कम आबादी वाले मजरा ग्राम में सप्ताह भर में तीन बच्चों की अज्ञात कारणों के चलते मौत हो जाना और 14 बच्चों के बीमार होने की खबर चिंता पैदा करती है। इससे पता चलता है कि महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग का मैदानी अमला अपने कर्तव्यों का निर्वाहन ईमानदारी से नहीं कर रहा है। अगर, मैदानी अमला सजग होता तो शायद चांदमारी के हालात इतने खराब नहीं हो पाते। बहरहाल, सभी बीमार बच्चों का इलाज शुरू हो चुका है। स्वास्थ विभाग के अधिकारियों ने बताया कि, बीमार बच्चों का कोरोना टेस्ट कराया गया है। राहत की बात यह है कि उनमें कोई भी पॉजिटिव नहीं पाया गया। सभी बच्चे सर्दी-जुखाम-खांसी-बुखार से पीड़ित हैं। बीमारी की रोकथाम के लिए प्रशासन ने राजस्व, महिला एवं बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग की टीम को चांदमारी भेजा है। डॉक्टरों की निगरानी में सभी बीमार बच्चों का इलाज जारी है।
कुंए का पीते हैं पानी

वर्तमान में पड़ रही भीषण उमस भरी बेहाल करने वाली गर्मी में चांदमारी के 3 बीमार बच्चों की मौत किन कारणों से हुई और इतने अधिक बच्चे कैसे बीमार पड़े यह फिहलहाल स्पष्ट नहीं हो सका। ग्राम पंचायत पुरुषोत्तमपुर के अंतर्गत आने वाली इस बस्ती (मानस नगर) के लोग लम्बे समय से बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं। बस्ती के लोग पीने का पानी कुछ दूरी पर स्थित कब्रिस्तान परिसर के कुंए से लाते हैं। चांदमारी में बीमारी की रोकथाम को लेकर किए जा रहे प्रयासों की सफलता के लिए कुंए के पानी की जांच कराने की ओर ध्यान दिए जाने की जरुरत है। ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि बस्ती के लोग जो पानी पी रहे हैं वह दूषित तो नहीं है।
मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में उपजा सांप्रदायिक तनाव, धार्मिक स्थलों में की गई तोड़फोड़; पुलिस ने दोनों पक्षों के ख़िलाफ़ दर्ज किया मामला

* देव प्रतिमा को हरे रंग में रंगने-खंडित करने की घटना के बाद भड़का आक्रोश
* समुदाय विशेष के प्रार्थना स्थलों में तोड़फोड़, पवित्र ग्रंथ को फाड़ने का आरोप
* पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी गुनौर में जमकर हुआ उपद्रव
* कोरोना की निषेधाज्ञा का उल्लंघन कर जुटी भारी भीड़, देर रात्रि तक चला हंगामा
* मौका परस्त उत्पाती तत्वों व नेताओं ने जन भावनाएं भड़का कर फैलाई अराजकता
पन्ना। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना जिले के तहसील मुख्यालय गुनौर में पिछले दो दिनों से जबरदस्त सांप्रदायिक तनाव बरकरार है। अज्ञात शरारती तत्वों ने धार्मिक भावनाओं को आघात पहुंचाने व सौहार्द को बिगाड़ने के मकसद से बीती रात एक देव प्रतिमा को हरे रंग में रंगते हुए उसे खंडित कर दिया। इस घटना से उपजे तनाव-जनाक्रोश को सत्ताधारी दल के कतिपय मौका परस्त नेताओं एवं विभिन्न संगठनों के उपद्रवी तत्वों द्वारा भड़काते हुए समुदाय विशेष के तीन प्रार्थना स्थलों में दिनदहाड़े तोड़फोड़ की गई। साथ ही प्रार्थना स्थल के अंदर रखे पवित्र धार्मिक ग्रन्थ का अपमान कर जमकर उत्पात मचाया गया। गुनौर का माहौल ख़राब कर दो समुदायों के बीच सीधे टकराव की स्थिति निर्मित करने वाली इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना को भारी पुलिस बल की तैनाती के दौरान अंजाम दिया गया।
हैरानी की बात है कि उग्र भीड़ के द्वारा प्रार्थना स्थलों में तोड़फोड़ कर बवाल काटने के पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस मूकदर्शक बनीं रही। गुनौर क़स्बा में अभी भी तनाव बरक़रार है, जिसके मद्देनज़र वहाँ पिछले 48 घण्टे भारी पुलिस बल तैनात है। छतरपुर रेंज के डीआईजी विवेक राज सिंह व पन्ना पुलिस अधीक्षक धर्मराज मीना ने गुनौर में डेरा जमाते हुए स्वयं कमान संभाल रखी है। फिलहाल पुलिस अधिकारियों ने गुनौर में स्थिति सामान्य होने का दावा किया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार शुक्रवार-शनिवार की दरम्यानी रात गुनौर क़स्बा के बाहरी इलाके में अर्जुन ताल के समीप स्थित धार्मिक स्थल (चबूतरे) पर विरजमान देव प्रतिमा को अज्ञात शरारती तत्व ने हरे रंग में रंगते हुए धर्म विशेष के शुभांक लिख दिए। इसके अलावा प्रतिमा को खंडित भी कर दिया। सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने की सुनियोजित साजिश के तहत की गई इस घटना की खबर आते ही शनिवार 3 जुलाई की सुबह गुनौर सहित क्षेत्रांचल में जबरदस्त तनाव फ़ैल गया। कुछ ही देर में बड़ी संख्या में सत्ताधारी दल एवं विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता अलग-अलग क्षेत्रों से गुनौर पहुँच गए।
धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाली इस अप्रत्याशित घटना से आक्रोशित लोगों ने कड़ा विरोध-प्रदर्शन करते हुए स्थानीय बाजार बंद करा दिया। स्थिति तनावपूर्ण होते देख स्थानीय पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकरियों के द्वारा अपने वरिष्ठ अधिकारियों को हालात की जानकारी दी गई। कुछ देर बाद आक्रोशित लोग एकजुट होकर धार्मिक स्थल पर पहुंचे जहां देव प्रतिमा के अपमान को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए विरोध-प्रदर्शन किया गया।

अक्सर इस तरह की संवेदनशील घटनाओं को भड़काकर राजनैतिक माइलेज़ हांसिल करने की फ़िराक में रहने वाले कतिपय असमाजिक तत्वों ने इस मामले में भी हालात को बिगाड़ने में कोई कसार नहीं छोड़ी। विरोध-प्रदर्शन के बीच देव प्रतिमा से थोड़ी ही दूरी पर स्थित समाज विशेष के धार्मिक स्थल पर कुछ उपद्रवियों ने भारी हंगामा करते हुए तोड़फोड़ कर दी। इतना ही नहीं वहाँ कई वर्षों से काबिज एक गरीब की झोपड़ी पर मानसून सीजन में जेसीबी मशीन चलवाकर उसे ध्वस्त करवा दिया।
इस घटनाक्रम के वायरल वीडियो जिनकी आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हुई, में झोपड़ी को गिराए जाने के दौरान मौके पर मौजूद भीड़ धार्मिक नारे लगाते हुए समुदाय विशेष के लिए भद्दी टिप्पणी कर रही है। मौके पर मौजूद पुलिस के जवान उपद्रवियों को सख्ती से रोकने के बजाए तमाशबीन की भूमिका में खड़े रहकर उन्हें अघोषित तौर पर मनमानी करने की खुली छूट देते हुए प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से तनाव और दहशत फैलाने के समाज विरोधी अपराध में संलिप्त नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर आए घटना के वीडियो को देखने से स्पष्ट हो जाता है कि पन्ना पुलिस ने इस दौरान अपना फर्ज कितनी ईमानदारी से निभाया ?
बढ़ते तनाव और उपद्रव को देखते हुए शनिवार दोपहर तक गुनौर में भारी पुलिस बल को तैनात कर दिया गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बीकेएस परिहार ने गुनौर पहुंचकर मोर्चा संभाला। हालांकि, तब तक वहां आक्रोशित लोगों की भारी भीड़ जमा हो चुकी थी। जिससे समाज विशेष के लोग जिनकी संख्या गुनौर में काफी कम है, दहशत में आ गए। कई घण्टों तक चले हंगामे के बीच आक्रोशित लोगों ने स्थानीय पुलिस थाना का घेराव कर दिया। समय रहते स्थिति को संभालने व लोगों को समझाने में पुलिस एवं प्रशासन के नाकाम रहने के कारण गुनौर में शाम के समय एक बार फिर जमकर उपद्रव हुआ।
शनिवार 3 जुलाई को गुनौर में कई घण्टे तक चले पुलिस थाना के घेराव के बीच शाम लगभग 4 बजे प्रदर्शनकारियों की भीड़ में से कुछ लोगों ने नारेबाजी करते हुए बस्ती की तरफ पैदल कूच किया। जहां बस्ती के अंदर स्थित धर्म विशेष के प्रार्थना स्थल पहुंचे इस हुजूम में शामिल दो दर्जन से अधिक उपद्रवियों के द्वारा जबरन अंदर घुसकर तोड़फोड़ की गई। प्रार्थना स्थल में रखे पवित्र धार्मिक ग्रंथ का भी अपमान किया और घोर आपत्तिजनक नारेबाजी की गई। धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाली उकसावे की इस तनावपूर्ण घटना की भनक लगने पर पुलिस का अमला अब मौके पर पहुंचा तो उपद्रवियों की भीड़ धार्मिक स्थल से बाहर निकलकर वापस थाना की तरफ चल पड़ी।

धार्मिक स्थल में तोड़फोड़ करने के बाद वापस लौटती भीड़ के वायरल वीडियो में पुलिस के जवान पीछे-पीछे इस तरह आराम से चलते दिख रहे है जैसा कुछ हुआ ही नहीं है। कथित तौर पर पुलिस की यह भूमिका मूकदर्शक सरीकी जान पड़ती है। शान्ति का टापू कहलाने वाले पन्ना जिले के गुनौर क़स्बा में सांप्रदायिक हिंसा को भड़काने की कोशिश करने वाली इन दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं को भारी पुलिस बल के तैनात रहने और वरिष्ठ पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी के बीच उपद्रवियों के द्वारा बड़े दुस्साहसिक अंदाज में अंजाम देना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
कोरोना संक्रमण की रोकथाम को लेकर जिले भर में लागू जनता कर्फ्यू की निषेधाज्ञा का उल्लंघन कर भारी भीड़ का जुटना और फिर कई घण्टे तक चले बवाल के बाद पुनः धर्म विशेष के दो अन्य प्रार्थना स्थलों में उपद्रवियों के द्वारा खुलेआम तोड़फोड़ करने के दौरान पुलिस बल का आश्चर्यजनक रूप से किंकर्तव्य विमूढ़ बने रहने से इस मामले को लेकर पुलिस और प्रशासन पर दवाब में काम करने के आरोप लग रहे हैं। जिले की कानून व्यवस्था को लेकर गहरी चिंता पैदा करने वाले इस घटनाक्रम के संबंध में जिला प्रशासन का पक्ष जानने के लिए पन्ना कलेक्टर संजय कुमार मिश्र से संपर्क करने लगातार प्रयास किया गया लेकिन उन्होंने न तो मोबाइल फोन रिसीव किया और ना ही व्हाट्सएप एवं टेक्स्ट मैसेज का कोई जवाब दिया।
मालूम हो कि लगभग दो वर्ष पूर्व गुनौर क़स्बा में भोपाल निवासी समुदाय विशेष के दो युवकों के साथ पुलिस थाना के समीप मॉब लिंचिंग की घटना को दिनदहाड़े अंजाम दिया गया था। विगत वर्षों में गुनौर क्षेत्र के महेवा, ककरहटी, अमानगंज, मुड़वारी आदि स्थानों पर भी किसी न किसी बहाने से सांप्रदायिक तनाव फैलाने के घृणित प्रयास किए गए हैं। इसके बाद भी गुनौर के मामले में पुलिस और प्रशासन के द्वारा पर्याप्त सतर्कता नहीं बरती गई। दो समुदायों के बीच नफरत फैलाने की घटनाओं से जिले का नाम तो बदनाम होता ही है, वहीं इसका दुष्प्रभाव अमन-चैन एवं भाईचारा पसंद सर्व समाज के लोगों को लंबे समय तक भुगतना पड़ता है।
पूर्व विधायक ने पुलिस की मौजूदगी में SDM को फटकारा
गुनौर के घटनाक्रम से जुड़े बताए जा रहे अनेकों वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हैं। इन्हीं में से एक वीडियो में गुनौर के पूर्व विधायक राजेश वर्मा भारी भीड़ के बीच SDM सुरेश गुप्ता के रवैये को लेकर बेहद गुस्से में बात करते हुए दिख रहे हैं। भाजपा नेता राजेश, SDM को फटकारते हुए कहते हैं- “गुप्ता जी तुम्हारा बिस्तर यहां बंधा रखा है, ये ध्यान रखना, हम यहां रखकर नहीं छोड़ सकते तुम्हें, हमने आज तक नजर नहीं डाली आपके ऊपर।” उल्लेखनीय है कि एसडीएम को सरेआम धमकी भरे अंदाज में हड़काने के दौरान वीडियो में पुलिस के अधिकारी उनके अगल-बगल में खामोश खड़े नजर आ रहे हैं। पूर्व विधायक के द्वारा बेहद सख्त लहजे में सार्वजनिक तौर पर SDM को जमकर फटकार लगाने पर वहां मौजूद भीड़ ख़ुशी जाहिर करते हुए तालियां बजाती है। अंत में राजेश वर्मा हाथ हिलाकर सबको शांत कराते हैं।
इनका कहना है –
“भारतीय जनता पार्टी के कतिपय नेता और अन्य संगठनों के कुछ लोग माहौल को खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। मेरी थाना प्रभारी गुनौर और पुलिस अधीक्षक पन्ना से मोबाइल पर बात हुई थी, मैंने उनसे साफ़ शब्दों में कहा था, शांति और सद्भाव को बिगाड़ने वाले असमाजिक तत्व चाहे जिस भी पक्ष के हों उनके खिलाफ निष्पक्षता के साथ सख्त कार्रवाई की जाए। प्रतिमा को रंगे जाने की घटना एवं उसके बाद की गई तोड़फोड़ अत्यंत ही निंदनीय है। इसकी जानकारी भोपाल में कोंग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को दी गई है। क्षेत्र का जनप्रतिनिधि होने के नाते मैं स्वयं गुनौर जाकर दोनों पक्षों से बात करूंगा और आपसी सद्भाव-विश्वास की बहाली के लिए प्रशासन के साथ मिलकर हर संभव प्रयास किया जाएगा।”
– शिवदयाल बागरी, विधायक, गुनौर विधानसभा क्षेत्र, जिला पन्ना।
“गुनौर में शनिवार शाम से ही स्थिति पूरी तरह सामान्य है, दोनों पक्षों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध किये गए हैं, जिनके आरोपियों को शीघ्र ही गिरफ्तार किया जाएगा। नगरवासियों को शांति और सौहार्द बनाए रखने की समझाइश दी गई है। शांति व्यवस्था को भंग करने वालों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।”
– धर्मराज मीना, पुलिस अधीक्षक, जिला पन्ना।
एमपी के पन्ना जिले के तहसील मुख्यालय गुनौर में शनिवार 3 जुलाई 2021 को हुई सांप्रादियक तनाव, उपद्रव एवं धार्मिक स्थलों में तोड़फोड़ की घटना से जुड़े कई वीडियो वायरल हैं। उनमें से एक वीडियो में गुनौर के पूर्व विधायक राजेश वर्मा सार्वजानिक तौर SDM सुरेश गुप्ता को डांटते-धमकाते हुए। pic.twitter.com/hfhieHjwms
— Radar News (@RadarNews4) July 5, 2021
लोकायुक्त पुलिस की बड़ी कार्रवाई : डिप्टी रेंजर और वनरक्षक को रिश्वत लेते रंगे हाँथ किया गिरफ्तार

* पन्ना जिले के दक्षिण वन मण्डल अंतर्गत मोहन्द्रा रेन्ज के मड़वा ग्राम में हुई कार्रवाई
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में लोकायुक्त पुलिस सागर की टीम ने आज डिप्टी रेंजर और वनरक्षक को 4 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाँथ गिरफ्तार किया है। जिले के दक्षिण वन मण्डल की मोहन्द्रा रेन्ज अंतर्गत मड़वा ग्राम में स्थित वन परिक्षेत्र सहायक के शासकीय आवास पर दोपहर के समय इस ट्रैप कार्रवाई को अंजाम दिया गया। पकड़े गए डिप्टी रेंजर श्रवण कुमार शुक्ला और वनरक्षक लोकेन्द्र सिंह राजपूत पर आरोप है कि उनके द्वारा कमल किशोर कुशवाहा से तेंदूपत्ता संग्रहण में फड़ मुंशी के पद पर कार्य करते रहने के एवज में चार हजार रुपए की रिश्वत की मांग की गई थी।
उप पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त सागर राजेश खेड़े ने जानकारी देते हुए बताया कि आवेदक कमल किशोर पिता झगड़ू कुशवाहा निवासी ग्राम कछरन, ग्राम पंचायत मड़वा तहसील रैपुरा जिला पन्ना की शिकायत पर आज दोपहर लगभग 3 बजे वन परिक्षेत्र मोहन्द्रा अंतर्गत मड़वा ग्राम में स्थित वन परिक्षेत्र सहायक के शासकीय आवास पर छापामार कार्यवाही की गई। लोकायुक्त पुलिस टीम ने कमल किशोर से रिश्वत के रूप में 4 हजार रुपए लेते हुए वनपाल (डिप्टी रेंजर) श्रवण कुमार शुक्ला, उप परिक्षेत्र मड़वा और वनरक्षक लोकेन्द्र सिंह राजपूत, वन चौकी मड़वा वन परिक्षेत्र मोहन्द्रा को रंगे हाँथ गिरफ्तार किया है।
जिले के दूरस्थ इलाके में लोकायुक्त पुलिस के द्वारा की गई इस ट्रैप कार्रवाई की खबर सोशल मीडिया पर आते ही हड़कम्प मच गया। समाचार लिखे जाने तक मौके पर लोकायुक्त पुलिस की कार्रवाई जारी थी। इस मामले में लोकायुक्त पुलिस सागर ने आरोपी डिप्टी रेंजर और वनरक्षक के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध किया है। उल्लेखनीय है कि, बेइंतहा भ्रष्टाचार के लिए बदनाम पन्ना जिले के वन विभाग में महज डेढ़ वर्ष के अंतराल में लोकायुक्त पुलिस की यह दूसरी बड़ी ट्रैप कार्रवाई है। इसके पूर्व जिला मुख्यालय पन्ना में क्षेत्र संचालक पन्ना टाइगर रिजर्व के कार्यालय में लोकायुक्त पुलिस ने छापामार कार्रवाई करते हुए दो लिपिकों को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
सूखे तालाब शहर में पेयजल को लेकर मचने लगी हाहाकार, नपा ने संकट के समय नगरवासियों को अपने हाल पर छोड़ा

* पन्ना नगर की बड़ी आबादी बूँद-बूँद पानी को मोहताज
* मानसून की देरी के कारण बद से बद्तर होने लगे हालात
* नेताओं की सिफारिश पर मनमाने तरीके से दौड़ाए जा रहे नपा के टैंकर
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) जिला मुख्यालय पन्ना में पेयजल सप्लाई करने वाले झीलनुमा विशाल तालाबों के सूखने अथवा उनका पानी तेजी से समाप्त होने की कगार पर पहुँचने से पेयजल को लेकर हाहाकार की स्थिति निर्मित हो चुकी है। इन दिनों पन्ना नगर की बड़ी आबादी को पीने के पानी की व्यवस्था के लिए जद्दोज़हद करनी पड़ रही है। मानसून की बेरुखी और नगर पालिका परिषद के कुप्रबंधन के कारण हर गुजरते दिन के साथ हालात बद से बद्तर हो रहे हैं।

नगर की नई और पुरानी पाइप लाइन में कीचड़ की भीषण दुर्गंध वाले दूषित पानी की सप्लाई की जा रही है, जो पीने तो क्या निस्तार के लायक भी नहीं है। कई इलाके ऐसे भी हैं, जहां पानी पहुँच ही नहीं रहा है। आग-उगलती उमस भरी गर्मी में पन्ना में पानी को लेकर चौतरफा त्राहिमाम की स्थिति निर्मित है। अलसुबह से ही लोग यहां खाली डिब्बे-पीपे-बर्तन लेकर पानी की व्यवस्था करने के लिए निकल पड़ते है, मध्य रात्रि तक बोरबेल और कुओं में पानी भरने वालों का तांता लगा रहता। जल संकटग्रस्त बस्तियों में नगर पालिका के द्वारा टैंकरों से पानी की सप्लाई करने के दावों के बीच पानी को लेकर दर-दर भटकते लोग पेयजल परिवहन व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं।
पानी बेंचने वालों का चल पड़ा धंधा

पानी को लेकर बढ़ती परेशानी ने शहर के कई परिवारों एवं नौकरी पेशा लोगों के खर्च में इजाफ़ा कर दिया है। दरअसल जिन परिवारों के सदस्य बाहर से पीने का पानी भरकर लाने से झिझकते हैं, उन्हें पानी खरीदना पड़ रहा है। गंभीर रूप ले चुके पेयजल संकट के बीच बदबूदार पानी की सप्लाई के कारण पानी बेंचने वालों का धंधा चल पड़ा है। यह सब ऐसे समय पर हो रहा है जब कई माह पूर्व पन्ना जिले को जल आभाव ग्रस्त घोषित कर पानी के व्यवसायिक उपयोग पर रोक लगा दी गई थी।
पेयजल के अलावा निर्माण कार्यों के लिए भी पानी की बिक्री खुलेआम जारी है, जबकि निर्माण कार्यों पर भी प्रशासन ने कागजी रोक लगा रखी है। कुल मिलाकर पेयजल संकट से निपटने में नाकाम नगर पालिका के नुमाइंदों की उदासीनता ने इस संकट को बेहद जटिल बना दिया है। उधर, आपदा में अवसर की खोज के महामंत्र को आत्मसात कर चुके पानी बेंचने वाले पूरी क्षमता के साथ भू-जल का दोहन कर नोट छापने में जुटे हैं। मजेदार बात तो यह कि पन्ना के पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष भी पानी के धंधे से जुड़े हैं।
इन इलाकों में पेयजल का गंभीर संकट

पन्ना नगर में पेयजल आपूर्ति करने वाले तीन तालाबों में शामिल धरमसागर तालाब पूरी तरह सूख चुका है। इस विशाल तालाब के दो गड्ढों में ही नाम मात्र का पानी नजर आता है। जबकि गहरा ग्राम में स्थित निरपत सागर एवं लोकपाल सागर तालाब में अब कुछ ही दिनों का पानी शेष बचा है। मानसून के सक्रिय होने में हो रही देरी और तालाबों के तेजी सूखने के कारण पन्ना नगर की बड़ी आबादी पेयजल संकट से जूझ रही है। लेकिन सबसे अधिक चिंताजनक स्थिति इन्द्रपुरी कॉलोनी की आंतरिक बस्ती, टिकुरिया मोहल्ला, बीटीआई के पीछे नहर किनारे स्थित बस्ती, पहाड़कोठी, रानीगंज मोहल्ला, सिंचाई कॉलोनी, आगरा मोहल्ला की है।
नगर पालिका परिषद के द्वारा इन संकटग्रस्त इलाकों में टैंकर से पेयजल परिवहन कर आपूर्ति का कार्य प्राथमिकता के साथ योजनाबद्ध तरीके से सुनिश्चित नहीं किया जा रहा है। मुश्किल वक्त में अघोषित तौर पर नगर पालिका के अकर्मण्य और असंवेदनशील अधिकारियों ने नगरवासियों को उनके हाल पर छोड़कर “आत्मनिर्भर” बना दिया है। उनके द्वारा सिर्फ नेताओं की सिफारिश पर पानी के टैंकर भेजे जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि इस संबंध में जब नगर पालिका के सीएमओ यशवंत वर्मा से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया तो उनका मोबाइल फोन रिसीव नहीं हुआ।
सड़क निर्माण कंपनी के कैम्प से ड्राइवर ने हाइवा चोरी कर ढाबा के पीछे छिपाया, पुलिस ने 6 घण्टे के अंदर किया चोरी का खुलासा
* पन्ना जिले के धरमपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत सलैया ग्राम की घटना
* चोरी का तत्परता से खुलासा करने वाली टीम को पुरुष्कृत करने की घोषणा
पन्ना/अजयगढ़।(www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना जिले की धरमपुर थाना पुलिस ने एक हाइवा (हैवी ट्रक) चोरी होने की सनसनीखेज वारदात का महज 6 घण्टे के अंदर खुलासा करने का दावा किया है। सड़क निर्माता कम्पनी हिलवेज के कैम्प से चोरी गए हाइवा को बरामद कर पुलिस ने आरोपी चालक को गिरफ्तार कर लिया है। चोरी की बड़ी घटना का तत्परता से खुलासा करने वाले धरमपुर थाना प्रभारी सुधीर कुमार बैगी एवं उनकी टीम की पन्ना पुलिस अधीक्षक धर्मराज मीना ने सराहना की है। साथ ही उक्त पुलिस टीम को पुरुष्कृत करने का घोषणा की गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सिंहपुर से रामनगर तक सड़क निर्माण कार्य कर रही हिलवेज कम्पनी का कैम्प कार्यालय ग्राम सलैया में स्थित है। बुधवार 30 जून की देर रात करीब 1 बजे कैम्प कार्यालय परिसर में खड़ा हाइवा क्रमांक-MP-04HE-4772 चोरी हो गया। कम्पनी के एक चालक के गायब होने से चोरी की घटना में उसकी भूमिका को लेकर संदेह गहराने लगा। आसपास खोजबीन करने के बाद भी जब इस 10 चक्का हाइवा और संदेही चालक का कोई सुराग नहीं लगा तो सड़क निर्माता कम्पनी के कैम्प कार्यालय में हड़कंप मच गया। चोरी की सनसनीखेज घटना से चिंतित और परेशान सड़क कम्पनी के अधिकारियों के द्वारा रात्रि में लगभग 2:30 धरमपुर थाना पहुंचकर पुलिस को घटना की सूचना दी गई।
थाना प्रभारी धरमपुर उप निरीक्षक सुधीर कुमार बैगी ने तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को हाइवा चोरी होने की घटना की जानकारी दी। कम्पनी के कर्मचारी सत्यदेव शर्मा पिता नत्थूलाल शर्मा निवासी सुभास नगर बरेली उत्तर प्रदेश हाल निवास हिलवेज कम्पनी कैम्प कार्यालय सलैया की रिपोर्ट पर थाना पुलिस के द्वारा चोरी का मामला पंजीबद्ध किया गया। पुलिस अधीक्षक धर्मराज मीना के निर्देशानुसार धरमपुर थाना प्रभारी ने हाइवा चोर की पतारसी कर उसे गिरफ्तार करने के लिए बिना समय गंवाए आनन-फानन रामपुर एवं कालिंजर पहुंचकर वहाँ लगे सीसीटीव्ही कैमरों के फुटेज खंगाले। इसके अलावा रेत कम्पनी के नाकों से होकर गुजरने वाले वाहनों की इंट्री की जानकारी ली गई।
हाइवा के वहाँ से होकर ना गुजरने की तस्दीक करने के उपरांत पुलिस टीम सिंहपुर तिराहा पहुंची, जहां कम्पनी का गायब चालक एवं संदेही आरोपी रघुनाथ सिंह 35 वर्ष निवासी ग्राम मुड़ेरी जिला छतरपुर पुलिस के हत्थे चढ़ गया। संदेही से सख्ती से पूंछतांछ करने पर उसने हाइवा चोरी कर सिंहपुर के नजदीक बुंदेला ढावा के पीछे छिपाने की जानकारी दी। पुलिस टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर चोरी गए हाइवा को बरामद कर लिया। उक्त आरोपी की योजना मौका पाकर हाईवा को सुरक्षित स्थान पर ले जाकर उसे बेंचने की थी। उक्त हाइवा का मूल्य 25 लाख रुपए बताया जा रहा है। चोरी की इस चुनौतीपूर्ण घटना का तत्परता से खुलासा करने को धरमपुर थाना पुलिस की महत्वपूर्ण सफलता के तौर पर देखा जा रहा है।
टीकाकरण महाअभियान में लापरवाही पर एआरसीएस व सीडीपीओ को थमाया वेतनवृद्धि रोकने का नोटिस
* तीन दिन के अंदर समक्ष में उपस्थित होकर कलेक्टर ने माँगा जवाब
पन्ना। जिले में कोरोना टीकाकरण के महाअभियान को सफतापूर्वक संचालित करने एवं शत-प्रतिशत टीकाकरण के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए जिले भर के शासकीय अधिकारियों-कर्मचारियों को दायित्व सौंपे गए हैं। पन्ना कलेक्टर संजय कुमार मिश्र टीकाकरण महाअभियान की सफलता के लिये निरंतर नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित टीकाकरण केन्द्रों का निरीक्षण कर आवश्यक मार्गदर्शन करने के साथ टीकाकरण में आ रही कठिनाईयों का त्वारित निराकरण किया जा रहा है। इसी क्रम में कलेक्टर श्री मिश्रा द्वारा शाहनगर जनपद पंचायत के ग्राम रोहनियां में स्थापित टीकाकरण केंन्द्र का निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण के दौरान पाया गया कि कोरोना टीकाकरण अभियान के लिये राजयश कुरील सहायक पंजीयक सहकारी समितियां पन्ना को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया था। वहीं इसी क्षेत्र के लिये डॉ. शैकून कुुरैशी परियोजना अधिकारी महिला एवं बाल विकास परियोजना शाहनगर को सेक्टर ऑफिसर का दायित्व सौंपा गया था। इन दोनों अधिकारियों द्वारा सौंपे गये दायित्वों का पालन न करने एवं निरीक्षण के दौरान अपने क्षेत्र में उपस्थित ना पाये जाने पर दोनो अधिकारियों को पांच-पांच वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने संबंधी स्पष्टीकरण दिया गया है। संबंधित से स्पष्टीकरण का जवाब तीन दिवस के अंदर कलेक्टर श्री मिश्रा के समक्ष उपस्थित होकर चाहा गया है। जवाब समयसीमा में प्रस्तुत न करने अथवा समाधान कारक न होने की स्थिति में अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रस्तावित की जायेगी।
एमपी : जादू-टोना के संदेह में महिला की हत्या पर जमकर हुआ बवाल, आक्रोशित ग्रामीणों ने पुलिस थाना में किया पथराव; हालात को काबू करने पुलिस ने किया लाठी चार्ज
* पन्ना जिले के अमानगंज क़स्बा में उपद्रव के बाद क्षेत्र में तनाव पूर्ण स्थिति निर्मित
* पुलिस की भूमिका पर संदेह और कार्यवाही को लेकर असंतोष बना हंगामे का कारण
* जिले में प्रतिबंधात्मक आदेश लागू होने के दौरान कानून-व्यवस्था की खुली पोल
पन्ना/अमानगंज (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में अमानगंज थाना अंतर्गत चाका ग्राम में जादू-टोना करने के संदेह पर कुछ अंधविश्वासी लोगों की क्रूरता का शिकार बनी महिला घसुटिया बाई चौधरी 50 वर्ष ने इलाज के दौरान जबलपुर में रविवार 26 जून की सुबह दम तोड़ दिया। महिला की मौत होने की खबर आते ही क्षेत्र में जबरदस्त तनाव फ़ैल गया। अमानगंज क़स्बा में बड़ी संख्या में जुटे महिला के रिश्तेदार एवं चौधरी समाज के लोगों ने इस जघन्य घटना पर पहले से दर्ज आपराधिक प्रकरण में पुलिस की कार्यवाही को लेकर गहरा असंतोष व्यक्त किया और कुछ हत्यारोपियों को बचाने का आरोप लगाते हुए स्थानीय पुलिस थाना परिसर में ही धरने पर बैठ गए। वारदात में कथित तौर पर शामिल रहे 3 अन्य हत्यारोपियों के नाम प्रकरण में जोड़ने तथा उन्हें गिरफ्तार करने की मांग को लेकर आक्रोशित ग्रामीणों ने बाद में थाना के ही सामने कटनी-कानपुर स्टेट हाईवे पर शव रखकर चक्काजाम कर दिया।
स्थिति बेहद तनावपूर्ण होते देख पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा घटना में अन्य लोगों की संलिप्तता की जांच कराकर आवश्यक कार्यवाही करने का आश्वासन दिया गया लेकिन गतिरोध बरकरार रहा। काफी समझाइश के बाद भी जब प्रदर्शनकारी नहीं माने तो देर शाम पुलिस के द्वारा चक्काजम समाप्त कराने के लिए थोड़ी सख़्ती की गई। जिससे प्रदर्शनकारी भड़क उठे और अमानगंज पुलिस थाना समेत पुलिस के वाहनों पुलिसकर्मियों पर पथराव शुरू कर दिया। गुस्साए ग्रामीणों ने करीब आधा घण्टे तक जमकर बवाल काटा। पुलिस को हालात काबू करने के लिए हल्का बल प्रयोग करते हुए लाठी चार्ज करना पड़ा।
इस घटनाक्रम के बाद से अमानगंज क्षेत्र में तनावपूर्ण शांति निर्मित है। बवाल को देखते हुए अमानगंज क़स्बा में रविवार रात्रि में ही बड़ी तादाद में अतिरिक्त पुलिस बल को तैनात किया गया है। वहीं चाका ग्राम में भी पुलिस जवानों की तैनाती की गई है। आज सुबह पुलिस की मौजूदगी के बीच चाका ग्राम में बेहद ग़मगीन माहौल में घसुटिया बाई चौधरी का अंतिम संस्कार किया गया। उधर, रविवार शाम हुए उपद्रव के मामले में अमानगंज थाना पुलिस ने देर रात 17 उपद्रवियों के खिलाफ नामजद एवं 25 अन्य के विरुद्ध विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध किया है।
गिफ्ट को लेकर लेकर हुआ था विवाद

अमानगंज थाना के ग्राम चाका निवासी रामप्रसाद प्रजापति की बेटी और घसुटिया बाई चौधरी पत्नी हल्के चौधरी बेटी दोनों अच्छी सहेली हैं। रविवार 20 जून को रामप्रसाद की बेटी का विवाह था। घसुटिया बाई की बेटी अपनी सहेली के वैवाहिक कार्यक्रम में तो सम्मलित नहीं हुई लेकिन उसने अपने भाई देवीदीन चौधरी से विवाह के गिफ्ट के रूप में एक घड़ी भेजी। रामप्रसाद का आरोप है कि गिफ्ट के रूप में उसके घर पर जादू-टोना कर भूत-प्रेत भेजे गए जिससे उसकी बहू कविता चौधरी की तबियत ख़राब हो गई। अंधविश्वास के चलते कथित तौर पर मंगलवार 22 जून की रात करीब 8 बजे घसुटिया बाई को पकड़कर रामप्रसाद प्रजापति, आनंदी प्रजापति, मस्तराम प्रजापति, बृजेश, धम्मा व कविता जबरन अपने घर ले गए और फिर वहां लाठी-डण्डों से बेदम मारपीट की गई। उसके बेटे को भी पीटा गया।
घसुटिया बाई को बचाने जब उसके परिजन रामप्रसाद के घर पहुंचे तो वह चबूतरे पर अचेत अवस्था में पड़ी मिली। वहीं रामप्रसाद का आरोप है कि घसुटिया बाई और छिदियां चौधरी ने एक राय होकर उसकी बहू कविता के साथ मारपीट की है। इस घटना पर पुलिस ने 23 जून को घसुटिया बाई की ओर से रामप्रसाद प्रजापति, धर्मदास प्रजापति एवं मस्तराम के विरुद्ध अपराध क्रमांक 365/21 धारा 294, 323, 506, 34 आईपीसी के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया। वहीं रामप्रसाद की रिपोर्ट पर भी इन्हीं धाराओं के तहत घसुटिया बाई और उसके रिश्तेदार छिदियां चौधरी के खिलाफ जवाबी मामला (काउंटर केस) दर्ज कर लिया।
पुलिस पर आरोपियों को बचाने का आरोप

इस मामले में जिले के अमानगंज थाना पुलिस की भूमिका शुरू से ही संदेह और सवालों के घेरे में है। घसुटिया बाई के बच्चे और रिश्तेदार खुलकर थाना पुलिस पर आरोपीगणों को बचाने का आरोप लगा रहे हैं। मालूम हो कि, कथित तौर पर बंधक बनाकर बेदम मारपीट किए जाने के कारण घसुटिया बाई को प्राणघातक चोटें आईं थीं। जिससे उसकी हालत बेहद नाजुक होने के बावजूद थाना पुलिस ने साधारण मारपीट का अपराध पंजीबद्ध किया था। थाना प्रभारी विजय कुमार अहिरवार ने अपनी सफाई में बताया कि प्रथम दृष्टया माँ-बेटे को आईं चोटों को देखते हुए मारपीट का मामला दर्ज किया गया था।
उन्होंने बताया कि दोनों घायलों को चोटों की जांच के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र अमानगंज भेजा था। जिसकी एमएलसी रिपोर्ट थाना में 25 जून को प्राप्त हुई। इस रिपोर्ट में डॉक्टर ने घसुटिया बाई की नाजुक हालत का उल्लेख करते हुए उसे बेहतर इलाज हेतु उच्च स्वास्थ्य संस्था में रिफर करना बताया गया। साथ ही महिला के सिर में आई चोट की प्रकृति के संबंध में उल्लेख किया है। मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर पुलिस के द्वारा पूर्व से दर्ज प्रकरण में आईपीसी की धारा 307 का इजाफा किया गया। शनिवार 26 जून को इलाज के दौरान जबलपुर में घसुटिया बाई की मौत होने पर पुलिस के द्वारा पोस्टमार्टम रिपोर्ट और केस डायरी प्राप्त होने पर दर्ज प्रकरण में आईपीसी की धारा 302 का इजाफा करने की बात कही जा रही है।
उल्लेखनीय है कि शनिवार को अमांगज क़स्बा में महिला के परिजन थाना में धरना-प्रदर्शन एवं चक्काजाम करने के दौरान पुलिस पर खुलकर आरोप लगाते रहे कि, घसुटिया बाई की हालत बेहद नाजुक होने के बाद भी जानबूझकर पहले मारपीट की साधारण धाराओं के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया गया। दर्ज प्रकरण में पुलिस के द्वारा सिर्फ रामदास प्रजापति, धर्मदास प्रजापति और मस्तराम प्रजापति को ही आरोपी बनाया। जबकि उनके बार-बार कहने के बाद भी बृजेश प्रजापति, आनंदी प्रजापति और कविता प्रजापति के नाम नहीं जोड़े गए। इतना ही नहीं रामदास प्रजापति की रिपोर्ट पर भी अमानगंज थाना पुलिस के द्वारा घासुटिया बाई और उसके रिश्तेदार छिदियां चौधरी के खिलाफ मारपीट का काउंटर केस दर्ज किया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार घसुटिया बाई और उसके पुत्र को आईं चोटों का मेडिकल परीक्षण अमानगंज स्वास्थ्य केन्द्र के चिकित्सक ड़ॉ. अमित मिश्रा ने किया था। उन्होंने पीड़िता की नाजुक हालत को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद उसे तुरंत रेफरल कर दिया था फिर इन घायलों की एमएलसी रिपोर्ट को थाना भेजने में दो दिन का समय क्यों लगा। थाना प्रभारी अमानगंज व पुलिस के आला अधिकारियों के से बात करने पर मेडिकल रिपोर्ट में देरी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं सकी। रडार न्यूज़ ने ड़ॉ. अमित मिश्रा से जब इस संबंध में बात करने के लिए संपर्क किया तो उनका मोबाइल फोन रिसीव नहीं हुआ।
पुलिस और प्रशासन के प्रति अविश्वास बना बवाल का कारण ?

अमानगंज क़स्बा में 26 जून को हुए बवाल को समाज के कमजोर वर्गों में पन्ना पुलिस और जिला प्रशासन के प्रति कमजोर पड़ चुके भरोसे की परिणीति के तौर पर देखा जा रहा है। इससे बड़ी विडंबना भला और क्या होगी, हमारा संविधान और कानून जिन वर्गों के प्रति सहानुभूति रखने, उनसे जुड़े मामलों को लेकर संवेदनशील रहने की बात करता है, पन्ना जिले में प्रशासन के प्रति उन्हीं वर्गों के द्वारा अविश्वास जाहिर करना निःसंदेह चिंताजनक है। चाका की घटना के दोनों पक्ष दलित हैं, लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि अमानगंज में दोपहर 2 बजे के आसपास मृतका घसुटिया बाई चौधरी के परिजनों एवं रिश्तेदारों ने थाना परिसर में धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया था। शाम को जबलपुर से शव आने पर प्रदर्शनकारियों के द्वारा थाना के ही सामने तिराहा पर चक्काजाम किया गया।
इस दौरान प्रदर्शनकारी एक ही मांग पर अड़े रहे जिन 3 कथित हत्यारोपियों के नाम प्रकरण में दर्ज नहीं किए गए थे उनके नाम जोड़कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए। मौके पर मौजूद एसडीएम सुरेश गुप्ता, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बीकेएस परिहार, पवई एसडीओपी रक्षपाल सिंह यादव, तहसीलदार अवंतिका तिवारी एवं अमानगंज समेत अन्य थानों के थाना प्रभारी प्रदर्शनकारियों को लगातार समझाइश और कार्रवाई का आश्वासन देते रहे लेकिन कई घंटे बाद भी गतिरोध समाप्त नहीं हो सका।
पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने पीड़ित पक्ष से आवेदन पत्र लेकर उन्हें भरोसा दिलाने का प्रयास किया कि, प्रकरण में जिन 3 व्यक्तियों के नाम छूटने की बात कही जा रही है उनकी संलिप्तता की जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। पूर्व में जिन 3 आरोपियों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज हुआ था उन्हें गिरफ्तार किए जाने की जानकारी भी दी गई लेकिन बात नहीं बन सकी। कारण, स्पष्ट है इस प्रकरण में पुलिस की भूमिका को लेकर पीड़ित पक्ष में गहरा संदेह और की गई कार्रवाई को लेकर पहले से ही असंतोष व्याप्त था। इसलिए आश्वासन काम नहीं आया।
लगभग 5 घण्टे तक चले इस प्रदर्शन को समाप्त कराने देर शाम पुलिस ने शव को सम्मानपूर्वक अपने कब्जे में लेकर ग्राम चाका के लिए रवाना कर दिया। जिससे आक्रोशित लोग भड़क उड़े और उनके द्वारा पुलिस थाना, पुलिस वाहनों एवं पुलिस कर्मियों के ऊपर जमकर पथराव किया गया। जबरदस्त तनाव और उपद्रव के बीच पुलिस को हालात को काबू करने के लिए हल्का बल प्रयोग करते हुए लाठी चार्ज करना पड़ा। तब कहीं जाकर बमुश्किल स्थिति सामान्य हो सकी। उपद्रवियों के द्वारा किया गया बवाल, पथराव, तोड़फोड़ घोर निंदनीय और अस्वीकार्य है।
मगर, कल जो कुछ भी हुआ उसके पीछे तात्कालिक कारणों के साथ-साथ एक पृष्ठभूमि भी है। बताते चलें कि पिछले कुछ महीनों में पन्ना जिले में दलित समाज से जुड़े लोगों के साथ पुलिस के द्वारा दुर्व्यवहार करने, शिकायतों पर पक्षपात पूर्ण कार्रवाई करते हुए प्रकरण दर्ज किए जाने और उत्पीड़न से जुड़े कुछ मामलों में सुनवाई न होने के गंभीर आरोप लगते रहें हैं। पुलिसवालों के द्वारा दलित महिलाओं को अपमानित करने के ऑडियो भी वायरल हुए लेकिन इन मामलों में संबंधितों के खिलाफ कोई कार्रवाई न होने के कारण भी दलितों में पुलिस एवं प्रशासन को लेकर अविश्वास बढ़ा है।
चिंताजनक पहलू यह भी है कि जिले में धारा-144 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू होने के दौरान अमानगंज के घटनाक्रम ने कानून-व्यवस्था की बेहद लचर स्थिति की पोल खोलकर रख दी है। करीब 5 घण्टे तक चले प्रदर्शन का पटाक्षेप जबरदस्त बवाल और लाठी चार्ज से होना यह बताता है कि मौके पर मौजूद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी स्थिति को संभालने में बुरी तरह नाकाम साबित हुए हैं।
इनका कहना है –
” अमानगंज क्षेत्र में स्थित पूरी तरह सामान्य है और शान्ति व्यवस्था कायम है। सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन करने वाले लोगों को काफी समझाइश दी गई और उनकी मांग पर उचित कार्यवाही करने का आश्वासन भी दिया गया था लेकिन इसके बाद भी उनके द्वारा उपद्रव किया गया। जबकि पुलिस ने मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर प्रकरण में पहले ही धारा 307 बढ़ाने के साथ-साथ तीनों आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया था। जबलपुर से केस डायरी प्राप्त होने पर धारा 302 बढ़ाई जाएगी। अमानगंज में उपद्रव करने वालों के विरुद्ध भी प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है।”
– धर्मराज मीना, पुलिस अधीक्षक, जिला पन्ना।
“अमानगंज क्षेत्र में स्थिति पूर्णतः सामान्य है, पुलिस ने लाठीचार्ज नहीं किया है। प्रदर्शनकारियों को पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा काफी समझाइश दी गई लेकिन वे लोग बात समझने को तैयार ही नहीं थे।”
– संजय कुमार मिश्र, कलेक्टर, जिला पन्ना।
— Radar News (@RadarNews4) June 27, 2021







