पंचायत चुनाव | जिला पंचायत के वार्डों में चुनावी मुकाबले की साफ़ हुई तस्वीर, उम्मीदवारों को चुनाव चिन्ह आवंटित
वार्ड क्रमांक 3 – उम्मीदवार अरविन्द सिंह को तीर कमान, ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह (बड़े मुन्ना राजा) को दो पत्तियां, जनार्दन को ऊगता सूरज, नरेन्द्र कुमार को पतंग, ओंकार सिंह को छाता, पुष्पेन्द्र कुमार प्यासी को गाड़ी, रामेश्वर को लालटेन, लोधी संजय सिंह राजपूत को फावड़ा और बेलचा तथा तोषेन्द्र सिंह लोधी को बिजली का बल्ब चुनाव चिन्ह मिला है।
पंचायत चुनाव | पंच-सरपंच पद की मतगणना विकासखंड मुख्यालय स्तर पर कराई जाए

* पोलिंग स्तर पर परिणामों की घोषणा होने से बनती है अप्रिय स्थिति
* अनावश्यक विवादों और आरोपों से बचाव हेतु कर्मचारी संगठनों ने की मांग
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) प्रदेश में वर्तमान में जारी त्रि-स्तरीय पंचायतों के आम निर्वाचन 2021-22 की प्रक्रिया के बीच पंच/सरपंच पद की मतगणना तथा परिणामों की घोषणा पोलिंग स्तर के बजाए जनपद/विकासखंड मुख्यालय स्तर पर कराये जाने की मांग उठने लगी है। पन्ना में अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त मोर्चा जिलाध्यक्ष कृष्ण पाल सिंह यादव के नेतृत्व में मंगलवार 21 दिसम्बर को इस संबंध जिला कलेक्टर/जिला निर्वाचन अधिकारी के नाम पर विभिन्न कर्मचारी संगठनों के नेताओं द्वारा पन्ना एडीएम जेपी धुर्वे को एक ज्ञापन सौंपा गया।
कर्मचारी नेताओं ने ज्ञापन में अपनी बाजिव चिंताओं तथा व्यवहारिक कठिनाइयों का उल्लेख करते हुए बताया है, पंचायत चुनाव में जिले के कर्मचारियों का बहुत बड़ा अमला संलग्न रहता है। पोलिंग बूथ स्तर पर मतगणना एवं परिणामों की घोषणा होने की स्थिति में प्रायः यह देखा गया है कि मतदान वाले दिन पूरे दिन मतदान होने के बाद पोलिंग स्तर पर ही परिणाम की घोषणा करने पर प्रत्याशियों के द्वारा ना सिर्फ मतदान दल पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए जाते है बल्कि कुछ स्थानों पर अप्रिय घटना भी घटित होने की स्थिति निर्मित हो जाती है। इसके अलावा मतपत्रों, EVM आदि की सुरक्षा का गंभीर खतरा भी बना रहता है। इसलिए विवाद की स्थितियों को टालने और कर्मचारियों/मतदान दलों की सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए पंचायत के आम निर्वाचन में शिवपुरी जिला की तरह पन्ना जिला में भी पंच/सरपंच के चुनाव की मतगणना जनपद/विकासखंड स्तर पर कराये जाने की मांग की गई है।
ज्ञापन सौंपने वालों में प्रमुख रूप से आरडी चौरसिया अध्यक्ष लिपिक वर्गीय कर्मचारी संघ, बीपी परौहा जिलाध्यक्ष तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ, कमलेश कुमार त्रिपाठी अध्यक्ष शिक्षक कांग्रेस, महीप कुमार रावत जिलाध्यक्ष वन कर्मचारी संघ, पुष्पराज सिंह परमार जिलाध्यक्ष राज्य शिक्षक संघ, दिनेश कुमार पटेल जिलाध्यक्ष पशु चिकित्सा क्षेत्राधिकारी संघ, सलीम खान जिलाध्यक्ष हेल्थ डिपार्टमेंट अधिकारी संघ पन्ना, राजेश मिश्रा अध्यक्ष राज्य कर्मचारी संघ, राजकिशोर शर्मा जिलाध्यक्ष समग्र शिक्षक संघ, अशोक कुमार पाण्डेय जिलाध्यक्ष लघुवेतन कर्मचारी संघ, विजय सिंह जिलाध्यक्ष अजाक्स, विमल कुमार यादव अध्यक्ष पटवारी संघ, विनोद कुमार अवस्थी संयोजक आजाद अध्यापक शिक्षक संघ, एसपी राय जिलाध्यक्ष कर्मचारी कांग्रेस, आरके चौरहा जिलाध्यक्ष शासकीय स्वास्थ्य कर्मचारी संघ, रामकिशोर कोंदर जिलाध्यक्ष शासकीय वाहन चालक यांत्रिकी संघ पन्ना आदि शामिल रहे।
गुड न्यूज़ | पन्ना-पहाड़ीखेरा सड़क की बढ़ेगी चौड़ाई, अब साढ़े सात मीटर में होगा डामरीकरण
* सड़क चौड़ीकरण के लिए केन्द्रीय सड़क निधि से 67 करोड़ स्वीकृत
* सांसद वीडी शर्मा और मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह की पहल रंग लाई
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) जिले की पन्ना-पहाड़ीखेरा सड़क के बहुप्रतीक्षति चौड़ीकरण कार्य को मंजूरी मिल गई है। पन्ना को उत्तर प्रदेश और सुप्रसिद्ध धार्मिक स्थल चित्रकूट से जोड़ने वाली इस सड़क का चौड़ीकरण कार्य केन्द्रीय सड़क एवं अधोसंरचना निधि के तहत कराया जाएगा। इसके लिए केन्द्र सरकार ने 67 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। क्षेत्रीय सांसद वीडी शर्मा एवं खनिज साधन मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह के विशेष प्रयास के फलस्वरूप पन्ना-पहाड़ीखेरा मार्ग के चौड़ीकरण कार्य को केन्द्र सरकार से मंजूरी मिली है। पन्ना नगर के विस्तार में सहायक साबित वाली पहाड़ीखेरा सड़क का चौड़ीकरण होने पर इस मार्ग पर आए दिन होने वाले सड़क हादसों में जहां कमी आएगी वहीं दूसरी तरफ आवागमन सुगम एवं सुविधाजनक होने से क्षेत्र के विकास को भी गति मिलेगी।
उल्लेखनीय है कि पन्ना जिला मुख्यालय तीन तरफ से पहाड़ और जंगल घिरा होने के कारण प्रदेश के अन्य जिला मुख्यालय की तुलना क्षेत्रफल की दृष्टि काफी छोटा है। पन्ना नगर के विस्तार की एकमात्र गुंजाइश पहाड़ीखेरा जाने वाले मार्ग की तरफ स्थित मैदानी इलाके में है। इसीलिये नगर का विस्तार इस मार्ग के दोनों तरफ लगातार आकर ले रहा है।
परिणामस्वरूप पहाड़ीखेरा मार्ग पर वाहनों का दवाब पिछले कुछ सालों कई गुना बढ़ गया है। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत निर्मित यह मार्ग सिर्फ 3.75 मीटर चौंड़ा है, जोकि ट्रैफिक की स्थिति के लिहाज से काफी संकीर्ण है, इस कारण पन्ना-पहड़ीखेड़ा मार्ग पर आए दिन सड़क दुर्घटनाएं घटित हो रही हैं।
चिंताजनक रूप से बढ़ते सड़क हादसों की प्रभावी रोकथाम के लिए इस मार्ग के चौड़ीकरण की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। क्षेत्रवासियों लंबे समय से इसकी मांग कर रहे थे। जिसे दृष्टिगत रखते हुए पन्ना विधायक एवं खनिज साधन मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह और सांसद वीडी शर्मा के द्वारा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को मार्ग की समस्याओं से अवगत कराकर उसके चौड़ीकरण को स्वीकृति प्रदान करने का आग्रह किया था। मार्ग के चौड़ीकरण के लिए दोनों ही जनप्रतिनिधियों के द्वारा निरंतर प्रयास किया गया। सांसद और मंत्री की पहल के फलस्वरूप पन्ना-पहाड़ीेखेरा मार्ग के चौड़ीकरण की विगत दिनों केन्द्र सरकार ने मंजूरी प्रदान कर दी है।
लगभग 38 किलोमीटर लम्बी सड़क के चौड़ीकरण के लिए केन्द्रीय सड़क एवं अधोसंरचना निधि से 67.10 करोड़ रुपये स्वीकृत प्राप्त हुई है। अब निर्माण कार्य शुरू करने के लिए शीघ्र ही आगामी जरूरी कार्यवाही की जायेगी। क्षेत्रवासियों ने सड़क के चौड़ीकरण के प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने पर अपार प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सांसद और खनिज मंत्री का धन्यवाद ज्ञापित किया है। इधर, खनिज मंत्री बृजेन्द्र ने भी जनहित से जुड़ी मांग को प्राथमिकता से मंजूरी प्रदान करने के लिए केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और सांसद वीडी शर्मा का आभार व्यक्त किया है।
दोगुनी से अधिक होगी सड़क की चौड़ाई
प्राप्त जानकारी अनुसार वर्तमान में पन्ना-पहाड़ीखेरा सड़क पर डामरीकरण की चौड़ाई सिर्फ 3.75 मीटर है, जबकि हालिया स्वीकृत प्रस्ताव अनुसार इसे बढ़ाकर लगभग 7.5 मीटर किया जाएगा। अर्थात सड़क का कैरिजवे (डामरीकरण) 7.5 मीटर का होगा। जबकि दोनों तरफ की पटरी (साइड शोल्डर) की चौड़ाई लगभग 2-2 मीटर होगी। इस तरह तरह सड़क की कुल चौड़ाई को बढ़ाकर करीब 11 मीटर किया जायेगा। इसके अलावा मार्ग पर स्थित पुल-पुलियों का भी उन्नयन किया जाएगा। साथ ही आवश्यकतानुसार नवीन पुल-पुलियों का निर्माण कराया जाएगा। कुल मिलाकर सड़क चौड़ीकरण के बाद पन्ना-पहाड़ीखेरा मार्ग से होकर आवागमन करना सुगम-सुविधाजनक-सुरक्षित हो जाएगा।
पर्यटन गतिविधियां बढ़ेंगी

पन्ना-पहाड़ीखेरा मार्ग का चौड़ीकरण होने पर इस इलाके में पर्यटन गतिविधियां बढ़ने की संभावना व्यक्त की जा रही है। बृजपुर के नजदीक स्थित बृहस्पति कुण्ड, सारंग धाम तथा आसपास स्थित चित्रकूट, कालिंजर समेत कई धार्मिक-प्राकृतिक एवं ऐतिहासिक महत्व के प्रसिद्ध स्थल मौजूद जहां वर्ष भर बड़ी संख्या में पर्यटक पहुँचते है। आवागमन सुगम होने पर यहां पर्यटकों की तादाद निश्चित ही बढ़ेगी जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। लोक निर्माण संभाग पन्ना के कार्यपालन यंत्री एबी साहू ने सड़क के चौड़ीकरण को अनुमति मिलने की पुष्टि करते हुए बताया कि कार्य का डिटेल प्रोजेक्ट तैयार कर अन्य औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी ताकि निर्माण कार्य जल्द से जल्द शुरू हो सके।
ओबीसी के लिए आरक्षित पदों पर त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव प्रकिया स्थगित
* सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने लिया फैसला
नई दिल्ली/भोपाल। (www.radarnews.in) सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग ने अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित समस्त पदों पर पंचायत चुनाव की प्रक्रिया को रोक दिया है। देश की शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को पंचायत चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण को रद्द करते हुए इन ओबीसी सीटों को सामान्य सीट के रूप में नोटिफाई करने का आदेश दिया था। आयोग के इस फैसले से दावेदारों की उम्मीदों को एक बार फिर झटका लगा है।
जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस सीटी कुमार की बेंच ने शुक्रवार को ये आदेश दिए। यानी अब सरकार को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) हेतु आरक्षित समस्त पदों को सामान्य पदों के रूप में फिर से अधिसूचित करना होगा।
हिदायत- नया प्रयोग नहीं करें
बेंच ने सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से कहा, “हम नहीं चाहते कि मध्य प्रदेश में कोई नया प्रयोग किया जाए। इसे संविधान पीठ के फैसले के अनुरूप होना चाहिए, जैसा तीन न्यायाधीशों की पीठ द्वारा दोहराया भी गया था और अभी हाल में महराष्ट्र से जुड़े आदेश में भी कहा गया था। उसके अनुसार इसे बनाइए।” बेंच ने टिप्पणी की- स्थानीय निकाय के लिए ओबीसी के लिए आरक्षित सीटों पर चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाने की आवश्यकता है क्योंकि यह संविधान पीठ के फैसले के अनुरूप नहीं है जिसे तीन न्यायधीशों की पीठ ने भी दोहराया था।
सुको की सख्ती- हम पूरा चुनाव रोक सकते हैं
ट्रिपल टेस्ट पूर्ति के बिना ओबीसी तुरंत नहीं हो सकता है, अगर ऐसा हो रहा है तो आप इसे सही करें। हम पूरे चुनाव को रोक सकते हैं। आप वही सूचित करें जो महाराष्ट्र मामले में हुआ था। आपको तुरंत अपनी कार्यवाही में सुधार करना चाहिए। राज्य जो आपको बता रहा है, उस पर ना जाएँ। क़ानून जो कह रहा है, उस पर ध्यान दें। यदि आप अपने आपको सही करते हैं तो हम अवमानना में डाल देंगे।
जिला पंचायत अध्यक्ष आरक्षण प्रक्रिया स्थगित
प्रदेश के 52 जिला पंचायत के अध्यक्ष पद के आरक्षण की प्रक्रिया शनिवार 18 दिसम्बर को तय थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट का निर्देश आने के बाद यह स्थगित कर दी गई। प्रदेश में 52 जिले हैं, इस हिसाब से 26 तक सीटें रिजर्व हो सकती हैं, लेकिन वर्तमान में 35 प्रतिशत सीटें रिजर्व हैं। यानी 9 सीटें सामन्य करना होंगी। इसके लिए आरक्षण प्रक्रिया नए सिरे से करनी होगी।
रेत खनन घोटाला | BJP के शीर्ष नेताओं के संरक्षण में पन्ना से निकाली गई 3 हजार करोड़ की रेत : दिग्विजय सिंह
* राज्यसभा सांसद ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को लिखा पत्र
* खनिज मंत्री बृजेन्द्र को बर्खास्त करने और वीडी शर्मा की जांच कराने उठाई मांग
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने का दावा करने वाली मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार के दामन पर पिछले डेढ़ दशक में घपलों-घोटालों के अनेक अमिट दाग़ लगे हैं। इसी क्रम में एक नया और बेहद हैरान करने वाला घोटाला सामने आया है। रेत खनन का यह घोटाला हजारों करोड़ रुपये का है। राज्यसभा सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इस घोटाले को तथ्यों के साथ प्रमुखता से उठाया है। जिसकी हर तरफ काफी चर्चा हो रही है।
सूबे की शिवराज सरकार के लिए रेत खनन घोटाला राजनैतिक तौर न सिर्फ शर्मिंदगी का सबब बन चुका है बल्कि इसे लेकर सत्ता और संगठन में महत्वपूर्ण पदों पर बैठे लोगों में जबर्दस्त बैचेनी-घबराहट है। दिग्विजय का दावा है, पन्ना जिले में हुआ यह घोटाला मध्य प्रदेश का अब तक का सबसे बड़ा खनन घोटाला है। भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेताओं एवं क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के संरक्षण में माफियाओं के द्वारा खुलेआम पूर्णतः अवैध तरीके से हजारों करोड़ की रेत निकालकर बेंची गई। उन्होंने रेत खनन घोटाले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराने के संबंध मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखा है।
चार पेज के इस पत्र में दिग्विजय सिंह ने पन्ना जिले की अपनी हालिया यात्रा का जिक्र करते हुए वहां बड़े पैमाने पर किए गए अवैध रेत खनन की आंखों देखी हैरान करने वाली हक़ीक़त बताई है। साथ ही खनन माफिया के आतंक-अत्याचार और बेइंतहा शोषण का शिकार बने पन्ना के गरीब किसानों की दर्द भरी दास्तां बयां की है।
राज्यसभा सांसद ने पत्र में एक जगह लिखा है, ‘‘पन्ना जिला का करोड़ों रूपये का रेत खनन घोटाला’’ यह बताता है कि सत्ताधारी दल के शीर्ष नेताओं का राजनैतिक संरक्षण मिलने पर किस तरह सिस्टम को खोखला कर दिया जाता है।” वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने पत्र के माध्यम से प्रदेश के खनिज मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष एवं सांसद वीडी शर्मा की भूमिका की जांच कराने की मांग की है। पन्ना जिले के इन दोनों ही जनप्रतिनिधियों पर रेत माफिया को संरक्षण देने की आम चर्चा है।
दिग्विजय ने लिखा है कि, पन्ना जिले की अजयगढ़ तहसील में पिछले डेढ़ साल से बड़े पैमाने पर किसानों के खेतों और चरनोई भूमि पर अवैध खनन हो रहा है। होशंगाबाद निवासी रसमीत सिंह मल्होत्रा को पन्ना की रेत खदानों के समूह का तीन साल के लिए 31 करोड़ रुपये में दिया गया है। यहाँ राजनैतिक संरक्षण प्राप्त कर ठेकेदार से रेत माफिया बने रसमीत ने करीब डेढ़ साल की अवधि में 3 हजार करोड़ रुपए की रेत निकालकर बेंच डाली। पन्ना जिले के भ्रमण के दौरान मुझे इस संबंध अनेक शिकायतें मिली हैं।
बहुचर्चित रेत खनन घोटाले के संबंध में अपने पाठकों को विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय के पत्र को रडार न्यूज़ यहां ज्यों का त्यों (अक्षरश:) प्रकाशित कर रहा है–
प्रिय श्री शिवराज सिंह चौहान जी,

विगत माह मेरे द्वारा लोकायुक्त महोदय जी को इस संबंध में शिकायत कर अनेक पेपर्स भी सौंपे थे और लोकायुक्त में प्रकरण दर्ज किया जाकर रेत माफिया के खिलाफ सख्त कार्यवाही की मांग की थी। उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे पन्ना जिले की अजयगढ़ तहसील के अनेक गांवों में विगत डेढ़ साल से हजारों करोड़ रूपये की रेत अवैध रूप से निकालकर रेत माफियाओं द्वारा बेची जा रही है। कई गांव टापू जैसे बन गये हैं, रेत माफियाओं ने गांवों के चारों तरफ से रेत निकाल ली है।
इसी क्रम में मेरे द्वारा पिछले सप्ताह पन्ना जिले का दौरा किया गया। इस दौरान अवैध रेत खनन की हैरान कर देने वाली वस्तुस्थिति देखी। सैकड़ों किलोमीटर में रेत खोदने से गड्डे ही गड्डे है। जहॉ तक भी नजर जाती थी, रेत के टीले नजर आ रहे थे। कई स्थानों पर तो सैकड़ों फुट गहरी जमीन से रेत निकाली गई थी। यह मंजर करोड़ों रूपये की रेत खनन की सच्चाई बयां कर रहा था। ग्रामवासियों ने बताया कि जिला प्रशासन, खनिज विभाग और पुलिस बल के संरक्षण में हजारों डम्पर रेत प्रतिदिन निकाली जाकर पन्ना सहित उत्तरप्रदेश की सीमा से लगे जिलों में बड़ी कीमत में बेची जा रही है।
रेत माफिया ने गरीब वर्ग के अनुसूचित जाति, जनजाति सहित कमजोर वर्ग के लघु और सीमांत किसानों को डरा धमकाकर उनके खेतों को रेत निकालकर खोखला कर दिया। विगत एक वर्ष में इन पीड़ित किसानों ने कई बार थानेदार, तहसीलदार, एस.डी.एम., एस.पी. और कलेक्टर से शिकायत की पर उनकी पूर्ण रूप से मिली भगत होने से कोई सुनवाई नही की गई। कई मामलों में पीड़ितों को ही थाने बुलाकर शिकायत करने पर डराया धमकाया जाता रहा है। पीड़ितों द्वारा की गई शिकायतें संलग्न है।

अजयगढ़ क्षेत्र के दौरे में स्थानीय किसानों ने बताया कि केन नदी के पास बसे गांवों में रोजाना सैकड़ों ट्रक और डम्फरों से रेत भरी जा रही है। यहां की 70 प्रतिशत रेत उत्तरप्रदेश के 8-10 जिलों में फर्जी टी.पी. के माध्यम से भेजी जा रही है। रेत माफियाओं द्वारा नकली टी.पी. के पोटर्ल से जारी एक रसीद निकटवर्ती जिले सतना में पकड़ी गई थी। बताया गया है कि सतना जिले में इस संबंध में एक मामला भी दर्ज है। ग्रामवासियों ने बताया कि भोपाल से भी अनेक डंफर पन्ना भेजे गये है जो रेत के कारोबार में दिन रात दौड़ रहे है। यहां के अधिकांश गांवों में जे.सी.बी. सहित पोकलेन मशीनें चौबीसों घंटे रेत खनन में लगी है।
होशंगाबाद निवासी रसमीत सिंह मल्होत्रा को 3 साल के लिये पन्ना जिले की रेत का ठेका 31 करोड़ रूपये में दिया गया। स्थानीय जानकारों ने बताया कि ठेकेदार ने रेत माफियाओं के साथ मिलकर विगत डेढ़ वर्ष में तीन हजार करोड़ रूपये से अधिक की रेत बेच डाली है। जिन गरीब किसानों के खेत हमेशा के लिये लूट लिये गये है, उन्हें करोड़ों रूपये वसूली के नोटिस भेजे गये है।

पन्ना के गांवों में भ्रमण के दौरान कई लोगों ने मुझे रेत माफियाओं की प्रताड़ना से संबंधित पत्र दिये है। इनमें से कई पत्र वे है जो उन्होने जिले के कलेक्टर, एस.पी., एस.डी.एम., तहसीलदार और थानेदार को दिये थे पर किसी स्तर पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। उल्टे छोटे-छोटे किसानों को लाखों-करोड़ों रूपये की वसूली के नोटिस दिये गये है। यह जॉच का विषय है कि रेत माफियाओं ने गैर कानूनी रूप से पहले तो गरीबों के खेत खोदकर करोड़ों रूपयें की रेत बेच डाली इसके बाद खनिज विभाग के अधिकारी गरीब किसानों को करोड़ों रूपये की वसूली का नोटिस भेज रहे है। जब रेत माफिया रेत निकाल रहा था, तब खनिज विभाग के लोग हिस्सेदार थे। जब इस मामले को उठाया गया तो दोष गरीब किसानों पर मढा जा रहा है, जो आज भी कच्चे मकानों और झुग्गियों में रह रहे है उन पर अवैध रेत खनन का प्रकरण दर्ज किया जा रहा है।
पन्ना की अजयगढ़ तहसील के ग्राम रामनई में कुछ किसानों को भेजे नोटिस की राशि निम्नानुसार हैः- बददू मुसलमान 15 करोड़ रूपये, प्रहलाद फरेब 5 करोड़ 88 लाख रूपये, राम आंसरे 2 करोड़ 88 लाख रूपये, श्रीपाल सुखलाल 1 करोड़ 32 लाख रूपये। यह जांच का विषय है कि रेत माफिया द्वारा रेत निकालकर बेंच दी गई और गरीब किसानों को वसूली के नोटिस दिये जा रहे है। इस तरह मध्यप्रदेश शासन को हजारों करोड़ रूपये के राजस्व की क्षति पहुंचाई गई है। यह पूरा माफिया तंत्र स्थानीय प्रशासन के संरक्षण में फल-फूल रहा है।
मध्यप्रदेश में सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्री वी.डी. शर्मा पन्ना-खजुराहो संसदीय क्षेत्र से सांसद है। मध्यप्रदेश शासन के खनिज मंत्री श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह यहॉ से विधायक है। यह ‘‘हजारों करोड़ रूपये का रेत घोटाला’’ इन्हीं जनप्रतिनिधियों के क्षेत्र में चल रहा है। जन चर्चा है कि रेत माफियाओं को दोनों नेताओं का खुला संरक्षण है। इसलिये शासन प्रशासन में किसी अधिकारी की हिम्मत नहीं है कि वो रेत माफियाओं पर कार्यवाही कर सके।
खनिज मंत्री श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह की अपनी विधानसभा में रेत माफियाओं ने हजारो करोड़ रूपये के राजस्व की क्षति पहुंचाई है। बताया गया है कि उनके परिवार के कई सदस्य, रिश्तेदार रेत के धंधे में भी शामिल है। उनके नाम से क्रेशर खदानें है। यह कृत्य मंत्रीपद के संवैधानिक दायित्वों के विरूद्ध है। मंत्री पद की शपथ में कहा गया कि ‘‘मैं बिना किसी भय या पक्षपात के दायित्वों का निर्वहन करूँगा।’’ पर खनिज मंत्री ने रेत माफिया को संरक्षण देकर शपथ का उल्लंघन किया है।
मेरी मांग है कि रेत घोटाले में मंत्री महोदय की संलिप्तता को देखते हुए उन्हें मंत्रिमंडल से बर्खास्त किया जाये और सम्पूर्ण रेत घोटाले की उच्च स्तर से जांच कराई जाये। भिंड निवासी और पन्ना से सांसद श्री वी.डी. शर्मा के रेत माफियाओं से संबंध उजागर होना चाहिये। क्षेत्र में जन-जन में चर्चा है कि ये दोनों नेता रेत माफियाओं से मिले हुए है।
‘‘पन्ना जिला का करोड़ों रूपये का रेत खनन घोटाला’’ यह बताता है कि सत्ताधारी दल के शीर्ष नेताओं का राजनैतिक संरक्षण मिलने पर किस तरह सिस्टम को खोखला कर दिया जाता है। पन्ना टाईगर रिजर्व क्षेत्र से लगे ईको सेंसटिव जोन में यह घोटाला किया गया है। केन नदी के किनारों को कई किलोमीटर तक खोदकर किनारे खत्म कर दिये गये है। भविष्य में यहां के पर्यावरण के साथ-साथ पारिस्थितिकीय संतुलन भी बिगड़ेगा। नदी के तट के खत्म होने से गांवों में बाढ़ का खतरा होगा। किसानों की फसले बाढ़ में खराब हो जायेगी। खनिज माफिया ने सैकड़ों एकड़ जमीन से चरोखर उजाड़ दी है। चरोखर सहित पड़ती जमीन पर चारों तरफ रेत के गड्डे नजर आ रहे है। भविष्य में पालतू पशुओं को चरोखर नहीं मिलेगी।
इस संबंध में कुछ सामाजिक कार्यकर्ता एन.जी.टी. भी गये। जिला प्रशासन ने एन.जी.टी. के आदेशों का भी पालन नहीं किया। रामनई नाम का गांव अब टापू में बदल गया है। इसको चारों तरफ से रेत निकालकर समतल कर दिया है। ‘‘यह एक संगठित अपराध है जिसमें राजनेता, अधिकारी और माफिया सब शामिल है। सिर्फ रामनई और बीरा गांव से ही हजारों करोड़ रूपये की रेत निकाली गई है। ये दोनो गांव भयावह रेत खनन का प्रत्यक्ष उदाहरण है। पूरा गांव दहशत में है। शिकायत करने पर पुलिस थाने में कई दिन तक बैठाकर रखती है वे पुलिस प्रताड़ना का शिकार बन रहे है।
मेरा मानना है कि पन्ना जिले के कलेक्टर, एस.पी. सहित विगत डेढ़ वर्ष से जिले में ‘‘रेत घोटाले’’ वाले क्षेत्र में पदस्थ माइनिंग इंस्पेक्टर सहित एस.डी.एम., तहसीलदार और थानेदार, पटवारियों सहित समस्त अमले का जिले के बाहर स्थानांतरण किया जाये। तभी इस हजारों करोड़ रूपये के रेत घोटाले की निष्पक्ष जांच हो सकेगी। इस अवधि में वहां पदस्थ अधिकारियों के फोन, मोबाईल रिकार्ड की भी जांच की जाये। जिससे राजनेता, अधिकारी, रेत माफिया और अपराधियों का गठजोड़ उजागर हो सकेगा। इस क्षेत्र की विगत माह की सेटलाइट से ली गई फोटो से भी यह रेत घोटाला पकड़ा जा सकता है।

मेरे द्वारा जिले के दौरे के समय प्राप्त सभी आवेदन क्रम से इस पत्र के साथ संलग्न है। इन सभी आवेदनों को जांच से संबंधित दस्तावेजों में शामिल किया जाये। जिन किसानों से नियम विरूद्ध रेत खनन, संग्रहण के इकरारनामे किये गये थे। ऐसे तत्वों पर एफ.आई.आर. दर्ज की जाये। भ्रमण के साथ तैयार रेत खनन से संबंधित वीडियो रिकार्डिंग दस्तावेज के तौर पर पत्र के साथ संलग्न कर रहा हूँ। ये रिकार्डिंग भी सबूत का हिस्सा मानी जाये। इस मामले में मेरा आपसे अनुरोध है कि जांच की प्रक्रिया समयसीमा तय करते हुए पूरी की जाये। क्योंकि मेरे द्वारा शिकायत किये जाने के बाद से क्षेत्र में गरीब वर्ग के किसानों को डराया, धमकाया जा रहा है। सैकड़ों जे.सी.बी. मशीनों से रेत खदानों में बने बड़े-बड़े गड्डे भरकर उन्हें समतल करने का अभियान चल रहा है ताकि रेत खनन के सबूत मिटाये जा सके।

मेरा मानना है कि सेटलाईट तस्वीरों को निकालकर ‘‘हजारों करोड़ का रेत घोटाला’’ पकड़ा जाना चाहिये। ये माफिया समतल कर जमीनों पर फसल बोने की तैयारी में है। इससे पहले कि माफिया सबूतों से छेड़छाड़ करें पूरे क्षेत्र की वीडियोग्राफी करा ली जानी चाहिये। क्या बिना कलेक्टर की अनुमति के रेत माफिया किसानों से रेत खनन का अनुबंध कर सकते है ? पर यहॉ यह सब हुआ है। ग्राम बीरा में 43, रामनई में 29, बरौली में 13, चंदौरा में 10, भानपुर में 8 सहित बल्दूपुरवा, मझगांय, अहिरन, फरस्वाहा, खरौनी, भीना, उदयपुर, कगरेकाबारा, देहगांव में रहने वाले किसानों से अनुबंध कर खेत खोखले कर दिये है।
मेरा आपसे पुनः अनुरोध है कि मैं पत्र के साथ संलग्न पेपर्स एवं वीडियोग्राफी की सी.डी. दे रहा हूँ। आपकी जांच में इन दस्तावेजों को भी शामिल कर लिया जाये। इसके आधार पर प्रदेश के अब तक के सबसे बड़े रेत खनन घोटाले में प्रकरण दर्ज कर प्रभावी कार्यवाही की जाये और हजारों करोड़ रूपये की रेत बेचने वालों पर नियम संगत धाराओं में मुकदमें दर्ज किये जाये। सहयोग के लिए मैं आपका आभारी रहूँगा।
सादर,
आपका
(दिग्विजय सिंह)
बड़ी खबर : पन्ना जिले की रेत खदानों के ई-ऑक्शन पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक
* देवेन्द्र शर्मा ने हाईकोर्ट जबलपुर में दाखिल की थी याचिका
* चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली युगलपीठ ने जारी किया स्टे आदेश
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना जिले की समूहवार रेत खदानों के ई-ऑक्शन (ऑनलाइन नीलामी) पर हाईकोर्ट जबलपुर ने आगामी आदेश तक के लिए रोक लगा दी है। ग्वालियर निवासी देवेन्द्र शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली युगलपीठ ने रेत खदानों के ई-ऑक्शन के विरुद्ध बुधवार 8 दिसम्बर को स्टे आदेश जारी करते हुए की समस्त कार्यवाही पर आगामी आदेश तक के लिए रोक लगा दी है।
उल्लेखनीय है कि, राज्य शासन द्वारा प्रदेश में मध्यप्रदेश रेत (खनन, परिवहन, भंडारण एवं व्यापार) नियम, 2019 अंतर्गत समूहवार रेत खदानों के निविदाओं के माध्यम से संचालन के लिए निविदाएं आमंत्रित करने हेतु जिला कलेक्टर को अधिकृत किया है। जिसके परिपालन में कार्यालय कलेक्टर (खनिज शाखा) जिला पन्ना के द्वारा जिले के दो समूहों की कुल 27 रेत खदानों की ई-नीलामी सूचना दिनांक 16 नवंबर 2021 को जारी की गई थी। समूहवार रेत खदानों का आगामी 30 जून 2023 तक संचालन करने के ई-निविदा सूचना जारी करके इच्छुक निविदाकारों से एन आईसी. के ऑनलाईन पोर्टल https://mptenders.gov.in के माध्यम से तकनीकि प्रस्ताव एवं वित्तीय निविदाएं आमंत्रित की गईं। प्रत्येक समूह की 25 प्रतिशत सुरक्षा निधि के साथ तकनीकी प्रस्ताव एवं वित्तीय निविदा जमा करने की अवधि 20 नवम्बर 2021 से 11 दिसम्बर 2021 अपरान्ह में 5:00 बजे तक निर्धारित की गई थी।
इसके विरुद्ध ग्वालियर निवासी देवेन्द्र शर्मा के द्वारा मध्यप्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर में अपने अधिवक्ता के माध्यम से याचिका प्रस्तुत की। याचिका में प्रमुख सचिव खनिज साधन विभाग मध्यप्रदेश शासन भोपाल, संचालक संचालनालय भौमिकी तथा खनिकर्म मध्य प्रदेश भोपाल, कलेक्टर जिला पन्ना, खनिज अधिकारी जिला पन्ना को प्रतिवादी बनाया गया था।
पन्ना के पूर्व रेत ठेकेदार देवेन्द्र शर्मा की याचिका पर चीफ जस्टिस रवि मालिमथ की अध्यक्षता वाली युगल पीठ के द्वारा सुनवाई की गई। जिसमें जस्टिस विजय कुमार शुक्ला भी शामिल रहे। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता द्वय नमन नागरथ, रोहित जैन ने युगल पीठ के समक्ष अपनी दलीलें पेश की। सभी पक्षों के विद्वान अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने के पश्चात युगल पीठ ने दिनांक 8 दिसम्बर को आदेश जारी करते हुए पन्ना जिले की रेत खदानों के ई-ऑक्शन की समस्त कार्यवाही पर आगामी आदेश तक के लिए रोक लगा दी है।
एमपी : अवैध खनन के मामले में तीन कंपनियों पर साढ़े चार करोड़ का जुर्माना लगाया
* पन्ना जिले के खनिज विभाग ने की बड़ी कार्यवाही
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के खनिज मंत्री मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह के गृह जिला पन्ना में बड़े पैमाने पर चौतरफा हो रहे अवैध खनन को लेकर गंभीर सवालों और तीखी आलोचनाओं से घिरे स्थानीय खनिज विभाग के अफसर आखिरकार एक्शन मोड में आ गए हैं। अवैध उत्खनन कर्ताओं के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करके खनिज महकमे के अफसरों ने अपनी भूमिका को लेकर उठ रहे तमाम सवालों का जवाब देने का प्रयास किया है। “देर आए, पर दुरुस्त आए” वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए खनिज विभाग पन्ना के द्वारा की गई कार्रवाई से जिले मे सक्रिय अवैध उत्खनन कर्ताओ में जबर्दस्त हडंकप मचा है। बहुमूमूल्य खनिज सम्पदा की लूट पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से प्रथम चरण में तीन बड़ी कंपनियों पर कार्रवाई की गई है। जिले में सड़क और बांध का निर्माण कर रही तीन कंपनियों के खिलाफ अवैध खनन के प्रकरण दर्ज कर उन पर साढ़े चार करोड़ का जुर्माना लगाया गया है।

जिला खनिज अधिकारी रवि पटेल ने जानकारी देते हुए बताया कि सड़क निर्माण कंपनी रामरज कंस्ट्रक्शन के द्वारा 28 हजार घनमीटर बोल्डर पत्थर का अवैध खनन करने पर प्रकरण दर्ज कर सर्वाधिक साढ़े तीन करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। एक अन्य सड़क निर्माण कंपनी हिलवेज कंस्ट्रक्शन के द्वारा बीरा ग्राम में 1486 घन मीटर पत्थर गिट्टी का अवैध खनन करने के मामले में प्रकरण दर्ज करते हुए 48 लाख रुपए के जुर्माना का नोटिस भेजा गया है। जिले की अजयगढ़ तहसील अन्तर्गत रून्ज बांध का निर्माण कर रही बहुराष्ट्रीय कंपनी एल.एण्ड. टी पर ग्रेवल (हीरा चाल) के अवैध खनन का प्रकरण दर्ज कर 50 लाख रुपए का जुर्माना प्रस्तावित किया गया है।

जिला खनिज अधिकारी पन्ना रवि पटेल ने एक सवाल के जवाब में जोर देते हुए कहा कि अवैध खनन को किसी भी सूरत मे बर्दाश्त नही किया जायेगा। अवैध खनन करने वाले चाहे जो भी हों उनके खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी। आपने कहा कि अवैध खनन के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। कई महीने बाद कार्यवाही करने के सवाल पर आपने कहा कि अवैध खनन के मामलों में कार्यवाही करने में थोड़ा समय तो लगता है। क्योंकि इसमें अन्य विभागों से भी मदद लेनी पड़ती है। आपने बताया कि मंगलवार 7 दिसंबर को खनिज के द्वारा दमचुआ ग्राम में दो अवैध हीरा खदानों पर भी छापमार कार्रवाई की गई है। जहां अवैध रूप से संचालित दो मोबाइल क्रेशर भी जप्त किये गए हैं। उधर, रेत के अवैध खनन के मामले में अजयगढ के अनुविभागीय अधिकारी राजस्व के द्वारा प्रकरण पंजीबद्ध करने की कार्यवाही की जा रही है।

उल्लेखनीय है कि पन्ना जिले के अजयगढ़ तहसील क्षेत्र अंतर्गत केन नदी के घाटों, निजी तथा शासकीय भूमियों पर बड़े पैमाने पर रेत का अवैध खनन हुआ है। पन्ना के रेत खनन घोटाले के मामले को प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने प्रभावी तरीके से उठाते हुए लोकायुक्त जस्टिस से इसकी लिखित शिकायत की है। पिछले माह राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने पन्ना जिले के अजयगढ़ तहसील क्षेत्र का सघन दौरा कर अवैध रेत खदानों का निरीक्षण किया था। रेत की लूट के लिए आधा दर्जन से अधिक ग्रामों में सैंकड़ों एकड़ भूमि को अवैध खनन से खोखला करने वाले रेत माफियाओं के द्वारा अनुबंध की आड़ में क्षेत्र के किसानों पर किये जा रहे अत्याचार की जानकारी भी उन्होंने सीधे पीड़ितों की जुबानी सुनीं थी।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने रेत की बेतहाशा खुली लूट के मुद्दे पर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों, खनिज मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह तथा भाजपा प्रदेशाध्यक्ष एवं खजुराहो सांसद विष्णु दत्त शर्मा पर रेत माफिया को संरक्षण देकर काली कमाई करने का बेहद गंभीर आरोप लगाया था। ऐसा माना जा रहा है कि राज्यसभा सांसद के दौरे से हुई शिवराज सरकार बदनामी के बाद प्रशासन ने अवैध रेत खनन के मामले में कार्यवाही की सुध ली है।
केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने केन-बेतवा रिवर लिंक परियोजना को दी मंजूरी, 44 हजार करोड़ की लागत से 8 वर्षों पूर्ण होगा निर्माण
* परियोजना से 103 मेगावॉट पन बिजली और 27 मेगावॉट सौर ऊर्जा पैदा होने का दावा
* परियोजना के क्रियान्वयन के लिये केन-बेतवा लिंक परियोजना प्राधिकरण (केबीएलपीए) नामक विशेष प्रयोजन संस्था बनाई जायेगी
* मध्यप्रदेश के तथा उत्तरप्रदेश के 10.62 लाख हेक्टेयर रकबे को सिंचाई की सुविधा मिलेगी
* 62 लाख लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिये नहर को जोड़ा जायेगा
नई दिल्ली। (www.radarnews.in) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज केन-बेतवा नदी को आपस में जोड़ने की परियोजना के लिये वित्तपोषण तथा क्रियान्वयन को मंजूरी दे दी है। केन-बेतवा लिंक परियोजना की कुल लागत 44,605 करोड़ रुपये का अनुमान किया गया है, जो 2020-21 की कीमतों के आधार पर है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने परियोजना के लिये केंद्रीय समर्थन के रूप में 39,317 करोड़ रुपये, सहायक अनुदान के रूप में 36,290 करोड़ रुपये और ऋण के रूप में 3,027 करोड़ रुपये की धनराशि को मंजूर किया है।
यह परियोजना भारत में नदियों को आपस में जोड़ने की अन्य परियोजनाओं का भी मार्ग प्रशस्त करेगी तथा विश्व के सामने हमारी बुद्धिमत्ता और दृष्टिकोण का भी परिचय देगी।
इस परियोजना के तहत केन का पानी बेतवा नदी में भेजा जायेगा। यह दौधन बांध के निर्माण तथा दोनों नदियों से नहर को जोड़ने, लोअर उर परियोजना, कोठा बैराज और बीना कॉम्प्लेक्स परियोजना के जरिये पूरा किया जायेगा। परियोजना से 10.62 लाख हेक्टेयर रकबे की वार्षिक सिंचाई हो सकेगी, लगभग 62 लाख की आबादी को पीने का पानी मिलेगा तथा 103 मेगावॉट पन बिजली और 27 मेगावॉट सौर ऊर्जा पैदा होगी। परियोजना को उत्कृष्ट प्रौद्योगिकी के साथ आठ वर्षों में क्रियान्वित कर लेने का प्रस्ताव है।
यह परियोजना पानी की कमी से जूझते बुंदेलखंड इलाके के लिये बहुत फायदेमंद है। यह पूरा इलाका मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश राज्यों में फैला है। इस परियोजना से मध्यप्रदेश के पन्ना, टीकमगढ़, सागर, दमोह, दतिया, विदिशा, शिवपुरी और रायसेन तथा उत्तरप्रदेश के बांदा, महोबा, झांसी और ललितपुर को बहुत लाभ होगा।
इस परियोजना से कृषि गतिविधियों के बढ़ने और रोजगार सृजन से बुंदेलखंड के पिछड़े इलाके में सामाजिक-आर्थिक समृद्धि में तेजी आने की संभावना है। इससे क्षेत्र में संकट की वजह से होने वाले विस्थापन को भी रोकने में मदद मिलेगी।
इस परियोजना से पर्यावरण प्रबंधन और सुरक्षा समग्र रूप से संभव होगी। इस उद्देश्य के लिये एक समग्र परिदृश्य प्रबंधन योजना को भारतीय वन्यजीव संस्थान अंतिम रूप दे रहा है।
उल्लेखनीय है कि 22 मार्च, 2021 को देश में नदियों को आपस में जोड़ने की पहली प्रमुख केंद्रीय परियोजना को क्रियान्वित करने के लिये केंद्रीय जल शक्ति मंत्री तथा मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्रियों के बीच एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे।
त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव : पन्ना जिले में 13 से 20 दिसम्बर तक प्राप्त किए जाएंगे नाम निर्देशन पत्र
* आरक्षित वर्गों और महिलाओं के लिए नामांकन शुल्क में मिलेगी छूट
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) त्रि-स्तरीय पंचायतों के आम निर्वाचन 2021-22 के तहत पन्ना जिले में पंच-सरपंच सहित जिला एवं जनपद पंचायत सदस्य पद के लिए चुनाव लड़ने के इच्छुक अभ्यर्थी आगामी 13 से 20 दिसम्बर तक नाम निर्देशन पत्र प्रस्तुत कर सकते हैं। इसके लिए सुबह 10:30 बजे से अपरान्ह 03 बजे तक का समय निर्धारित किया गया है। रविवार, 19 दिसम्बर को नाम निर्देशन पत्र जमा नहीं होंगे।
नाम निर्देशन पत्रों की जांच 21 दिसम्बर को सुबह 10:30 बजे से की जाएगी, जबकि अभ्यर्थी 23 दिसम्बर को अपरान्ह 03 बजे तक अभ्यर्थिता से नाम वापस ले सकते हैं। इसी दिन निर्वाचन लड़ने वाले उम्मीदवारों की सूची तैयार कर प्रतीक चिन्ह आवंटित किए जाएंगे। जिले के सभी 5 विकासखण्ड में 4 पदों के लिए 28 जनवरी को सुबह 07 बजे से अपरान्ह 03 बजे तक मतदान होगा और इसके तुरन्त बाद मतदान केन्द्रों पर ही पंच और सरपंच पद के लिए मतगणना होगी।
दिनांक 01 फरवरी को सुबह 08 बजे से जिला एवं जनपद पंचायत सदस्य की विकासखण्ड मुख्यालय पर मतगणना की जाएगी। पंच-सरपंच की मतदान केन्द्र पर की गई मतगणना का सारणीकरण तथा निर्वाचन परिणाम की घोषणा 02 फरवरी को सुबह 10:30 बजे से की जाएगी, जबकि जनपद पंचायत सदस्य के लिए मतों का सारणीकरण तथा निर्वाचन परिणाम की घोषणा और जिला पंचायत सदस्य के लिए मतों का विकासखण्ड स्तरीय सारणीकरण 22 फरवरी को सुबह 10:30 बजे से होगा। जिला पंचायत सदस्य के लिए मतों का जिला मुख्यालय पर सारणीकरण तथा निर्वाचन परिणाम की घोषणा 23 फरवरी को सुबह 10:30 बजे से की जाएगी।
नाम निर्देशन पत्र प्रस्तुत करने की व्यवस्था
जिला एवं जनपद पंचायत सदस्य पद के लिए ऑनलाइन अथवा ऑफलाइन नाम निर्देशन पत्र प्रस्तुत किया जा सकता है। जबकि पंच और सरपंच पद के लिए केवल ऑफलाइन नाम निर्देशन पत्र प्राप्त किए जाएंगे। जिला और जनपद पंचायत सदस्य पद के लिए अभ्यर्थी को ऑनलाइन नाम निर्देशन पत्र प्रस्तुत करने के बाद रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष निर्धारित समयावधि में मूल नाम निर्देशन पत्र और वांछित दस्तावेज प्रस्तुत करना जरूरी है। इस तरह विकासखण्ड स्तरीय रिटर्निंग अधिकारी के पास जनपद पंचायत सदस्य, सरपंच और पंच पद के लिए नामांकन प्रस्तुत किया जा सकता है। सरपंच और पंच पद के लिए कलस्टर एआरओ के पास ऑफलाइन नाम निर्देशन पत्र प्रस्तुत करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।
सरपंच पद के लिए नामांकन शुल्क 2 हजार रुपए
जिला पंचायत सदस्य के लिए 8 हजार रूपये, जनपद पंचायत सदस्य के लिए 4 हजार रूपये, सरपंच पद के लिए 2 हजार रूपये और पंच पद का चुनाव लड़ने के इच्छुक अभ्यर्थी को 4 सौ रूपये नाम निर्देशन शुल्क जमा करना अनिवार्य है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और सभी वर्ग की महिलाओं को निर्धारित शुल्क की आधी राशि जमा करनी होगी।
नो-ड्यूज प्रमाण पत्र के लिए निर्देश
राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार पंचायत चुनाव लड़ने वाले अभ्यर्थियों को नामांकन के साथ विद्युत विभाग का नो-ड्यूज प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य किया गया है। इस संबंध में म.प्र. पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी के कार्यपालन यंत्री को नामांकन स्थल पर कर्मचारियों को तैनात कर आवश्यक कार्यवाही के लिए निर्देशित किया गया है। इससे सभी अभ्यर्थियों को समय पर नो-ड्यूज प्रमाण पत्र मिल सकेगा और अभ्यर्थी नाम निर्देशन पत्र प्रस्तुत करने से वंचित नहीं होंगे।
नामांकन के साथ जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा
त्रि-स्तरीय पंचायत आम निर्वाचन में आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नाम निर्देशन पत्र के साथ जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य किया गया है। उप जिला निर्वाचन अधिकारी जे.पी. धुर्वे ने इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही के लिए जिला पंचायत पन्ना के सहायक रिटर्निंग अधिकारी राजेेन्द्र मिश्र और एस.के. तोमर सहित पन्ना, पवई, अजयगढ़, गुनौर और शाहनगर के रिटर्निंग अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं।
जिले में 82 मतदान केन्द्र अतिसंवेदनशील
पन्ना जिले में 1 हजार 194 मतदान केन्द्रों में से 820 सामान्य, 292 संवेदनशील और 82 अतिसंवेदनशील घोषित किए गए हैं। जनपद पंचायत पन्ना के 228 मतदान केन्द्रों में से 141 सामान्य, 83 संवेदनशील और 4 अतिसंवेदनशील है। इसी तरह पवई के 249 मतदान केन्द्रों में से 189 सामान्य, 42 संवेदनशील और 18 अतिसंवेदनशील, अजयगढ़ के 209 मतदान केन्द्रों में से 148 सामान्य, 46 संवदेनशील ओैर 15 अतिसंवेदनशील, गुनौर के 259 मतदान केन्द्रों में से 183 सामान्य, 56 संवदेनशील और 20 अतिसंवेदनशील तथा शाहनगर के 249 मतदान केन्द्रों में से 159 सामान्य, 65 संवेदनशील और 25 अतिसंवेदनशील मतदान केन्द्र हैं।
त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव की आरक्षण प्रक्रिया को हाईकोर्ट में दी चुनौती










