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“भाजपा शोषण की राजनीति करती है, कांग्रेस सेवा की”- अजय सिंह राहुल

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मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल ने आज जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालय पन्ना में पार्टी कार्यकर्ताओं-पदाधिकरियों को संबोधित किया।

*    बुंदेलखंड दौरे पर पन्ना पहुंचे पूर्व नेता प्रतिपक्ष, कार्यकर्ताओं में भरा जोश

*    सत्तारूढ़ बीजेपी के कुशासन, नाकामियों और भेदभावपूर्ण नीतियों पर बोला हमला

  वीरांगना अवंती बाई लोधी और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. अर्जुन सिंह को अर्पित की श्रद्धांजलि

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता अजय सिंह राहुल भैया ने अपने बुंदेलखंड दौरे के दौरान शुक्रवार को पन्ना पहुंचकर भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा। इंद्रपुरी कॉलोनी स्थित जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने वीरांगना अवंती बाई लोधी के बलिदान दिवस पर उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय अर्जुन सिंह को भी श्रद्धांजलि दी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अजय सिंह राहुल ने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा शोषण की राजनीति करती है, जबकि कांग्रेस हमेशा सेवा की राजनीति में विश्वास रखती है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से जनता के बीच जाकर सेवा भाव से कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वह पिछले तीन दिनों से बुंदेलखंड के दौरे पर हैं और इस यात्रा का उद्देश्य पार्टी के उन पुराने कार्यकर्ताओं से मिलना है, जिन्होंने वर्षों तक निस्वार्थ भाव से संगठन को मजबूत किया। उन्होंने कहा कि ऐसे समर्पित कार्यकर्ताओं का सम्मान और संवाद जरूरी है।

भाजपा के कुशासन के खिलाफ संघर्ष का आव्हान

बुंदेलखंड की राजनीतिक स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के बड़े नेता कांग्रेस नेताओं को दबाने का प्रयास कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस समर्थकों को कम आर्थिक सहायता दी जाती है, जबकि भाजपा से जुड़े लोगों को अधिक लाभ मिलता है। अजय सिंह राहुल ने संगठन में एकजुटता पर जोर देते हुए कहा कि टिकट किसी को भी मिले, लेकिन लक्ष्य पार्टी की जीत होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी मजबूत नहीं होगी, तो व्यक्तिगत जीत का कोई महत्व नहीं रह जाता। उन्होंने कहा कि वर्ष 2028 तक भाजपा सरकार को 25 साल पूरे हो जाएंगे और नई पीढ़ी कांग्रेस के शासन को भूलती जा रही है। ऐसे में जरूरी है कि कांग्रेस कार्यकर्ता मजबूती के साथ जनता के बीच जाकर भाजपा के कुशासन के खिलाफ संघर्ष करें।

जिला अध्यक्ष ने किया स्वागत

मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल ने आज अपने पन्ना जिले के भ्रमण के दौरान जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालय पहुंचकर ध्वजारोहण किया।
इस अवसर पर जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष अनीश खान ने अजय सिंह राहुल का स्वागत करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा सदन और सड़क दोनों जगह दलित, शोषित और कमजोर वर्ग की आवाज उठाई है। उनके पन्ना आगमन से कार्यकर्ताओं में उत्साह का संचार हुआ है। मौसम खराब होने के बाद भी पन्ना में बड़ी संख्या पार्टी कार्यकर्ताओं का जुटना इस बात का प्रमाण है। श्री खान ने आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी को विजयी बनाने के संकल्प को दोहराते हुए कहा, आगामी चुनाव में हमसब मिलकर पूरी एकजुटता के साथ जिले की तीनों विधानसभा सीटों पर पार्टी प्रत्याशियों को प्रचंड बहुमत से जिताने का काम करेंगे। इसके पूर्व वरिष्ठ कांग्रेस नेता अजय सिंह राहुल ने पार्टी कार्यालय में ध्वजारोहण किया। कार्यक्रम में ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष जगदीश यादव अजयगढ़, रामबहोरी लोधी धरमपुर, रमा बुंदेला पन्ना, मिलन कुशवाहा देवेन्द्रनगर, अरुण गौतम गुनौर, सौरभ दुबे अमानगंज, सुरेन्द्र नामदेव पवई, छविलाल चौधरी शाहनगर, मुकेश चौरसिया सिमरिया, प्रेम सिंह परस्ते रैपुरा सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

कांग्रेसियों के निवास पर पहुंचकर की मुलाकात

पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल ने आज पन्ना में अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पार्टी नेताओं के घर पहुंचकर उनसे एवं परिवारजनों से भेंट की। इस दौरान श्री सिंह कांग्रेस के कद्दावर नेता महेंद्र दीक्षित, पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष शिवाजीत सिंह भैया राजा, वरिष्ठ नेता राजेश तिवारी, नगर कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष स्वतंत्र प्रभाकर अवस्थी, पूर्व सदर मरहूम जनाब जमील मोहम्मद जल्ला भाई, वरिष्ठ कांग्रेस नेता रामकिशोर मिश्रा, मार्तंड देव बुंदेला, पार्षद रेहान मोहम्मद, रामदास जाटव, पूर्व जिला युवा कांग्रेस अध्यक्ष दीपक तिवारी, पूर्व नगर पालिका उपाध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह परमार, ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह, पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष दिव्या रानी सिंह के निज निवास पहुंचे। पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने मैस्कॉट हॉस्पिटल पहुंचकर डॉ. केपी सिंह राजपूत से सौजन्य भेंट की। वहीं उन्होंने युवा नेता अंकित शर्मा की माता जी व स्वर्गीय पंडित दिनेश गंगेले के निधन होने पर उनके निवास पर पहुंचकर अपनी शोक संवेदनाएं प्रकट की।

“सुनहरी रेत का काला कारोबार: नदियां उजड़ रहीं, गरीबों की रोजी छिन रही… और सिस्टम मौन!”

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पन्ना जिले में केन नदी पर बीरा ग्राम समीप स्थित अजयगढ़-चंदला पुल के नीचे नदी की जलधारा को बाधित करके खुलेआम प्रतिबंधित मशीनों से पानी के अंदर से निकलवाते खनन माफिया।

*    जल गंगा अभियान आगाज़ के बीच पन्ना की नदियों में विनाशलीला जारी

*    रेत माफिया के कहर से केन, बाघिन और रुंज नदी का अस्तित्व संकट में

  अवैध खनन पर रोक लगाने सरपंच और महिला कृषक ने राजस्व अधिकारियों से लगाई गुहार

शादिक खान,पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिला की अजयगढ़ तहसील एक बार फिर अवैध रेत खनन के गंभीर संकट को लेकर सुर्खियों में है। हाल ही में ग्राम पंचायत कटर्रा की सरपंच श्रीमती कमला यादव और एक पीड़ित महिला द्वारा दिए गए दो अलग-अलग आवेदन पत्रों ने न केवल स्थानीय स्तर पर मचे हाहाकार को उजागर किया है, बल्कि शासन-प्रशासन की भूमिका पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
पन्ना जिले की जनपद पंचायत अजयगढ़ अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत कटर्रा की सरपंच ने रेत माफियाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने खिलाफ एसडीएम से की लिखित शिकायत।
सरपंच कमला यादव द्वारा दिए गए आवेदन में ग्राम कटर्रा के मजरा केवटपुर से गुजरने वाली बाघिन नदी का जिक्र है, जो वर्षों से गरीब केवट समाज के परिवारों की जीवनरेखा रही है। नदी किनारे सब्जी की खेती कर ये परिवार अपना भरण-पोषण करते हैं। लेकिन अब यही जीवनरेखा, अवैध रेत उत्खनन के कारण विनाश के कगार पर पहुंच गई है। आवेदन में स्पष्ट आरोप है कि बालू माफिया दिन-रात मशीनों से नदी का सीना चीर रहे हैं और ग्रामीणों के सब्जी बाग उखाड़कर फेंक रहे हैं। स्थिति इतनी भयावह है कि विरोध करने पर महिलाओं और बच्चों तक को गाली-गलौज और जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। सरपंच ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह विवाद कभी भी हिंसक रूप ले सकता है।

विधवा महिला के खेत को किया खोखला

रेत माफियाओं द्वारा बाघिन नदी में मशीनों से खनन करके खेत को क्षति पहुंचाने से प्रभावित बेवा केशर बाई केवट ने नायब तहसीलदार अजयगढ़ को आवेदन पत्र देकर कार्रवाई की मांग की।
इसी मामले से जुड़ा एक अन्य आवेदन गरीब विधवा महिला केशर बाई पत्नी स्व. राजू केवट निवासी ग्राम कटर्रा द्वारा कुछ दिन पूर्व अजयगढ़ के नायब तहसीलदार को दिया गया है। इसमें रेत माफियाओं (अवैध उत्खनकर्ता) के रूप में सूरज पटेल, निवासी गढ़ा बागेश्वर धाम, जिला छतरपुर तथा नरेश पटेल निवासी अजयगढ़, जिला पन्ना (म.प्र.) का उल्लेख किया गया है। अनियंत्रित रेत खनन से प्रभावित बेवा महिला आरोप है कि उक्त अनावेदकों द्वारा उसकी जमीन (खेत) के पास 10–15 फीट गहरे गड्ढे कर दिए गए हैं, जिससे खेत धंसने लगे हैं और खेती पूरी तरह चौपट होने की कगार पर है। महिला ने यह भी बताया कि शिकायत करने पर उसे डराया-धमकाया जाता है और खुलेआम कहा जाता है कि “जहां शिकायत करनी है कर लो, खनन बंद नहीं होगा।” अजयगढ़ तहसील क्षेत्र अंतर्गत केवल बाघिन ही नहीं, बल्कि केन नदी और रूंज नदी में भी वर्षों से बड़े पैमाने पर संगठित तरीके से रेत का अवैध खनन जारी है। क्षेत्र में आमचर्चा है कि इस पूरे खेल में सत्ताधारी दल भाजपा के जनप्रतिनिधियों, राजस्व, खनिज विभाग और पुलिस अधिकारियों तक की मिलीभगत है, जिससे माफिया बेखौफ होकर काम कर रहे हैं।

जल संरक्षण बनाम रेत माफिया: दोहरी नीति?

विडंबना यह है कि एक ओर राज्य सरकार द्वारा “जल गंगा संवर्धन अभियान” चलाकर जल स्रोतों के संरक्षण की बात की जा रही है, वहीं दूसरी ओर इन्हीं जल स्रोतों-नदियों को अवैध खनन से खत्म होने दिया जा रहा है। यह सवाल अब आम जनता के बीच गूंज रहा है कि आखिर जल संरक्षण के नाम पर अभियान और जमीनी स्तर पर नदियों का विनाश-दोनों साथ कैसे चल रहे हैं? आवेदनों में यह भी उल्लेख है कि माफिया प्रतिबंधित मशीनों का इस्तेमाल कर रहे हैं, नदी के भीतर तक खुदाई कर रहे हैं और पर्यावरण नियमों की खुलेआम अनदेखी कर रहे हैं। इसका असर सिर्फ नदियों तक सीमित नहीं है-भूजल स्तर गिर रहा है, खेती बर्बाद हो रही है और ग्रामीणों की आजीविका छिन रही है।

प्रशासन कटघरे में

अजयगढ़ में स्थित अनुविभागीय अधिकारी राजस्व का कार्यालय। (फाइल फोटो)
दोनों आवेदनों में प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की गई है, लेकिन बड़ा सवाल यही है कि आखिर इतने वर्षों से चल रहे इस खुले खेल पर अब तक प्रभावी अंकुश क्यों नहीं लग पा रहा है? क्या यह महज लापरवाही है या फिर संरक्षण का संगठित खेल? लोगों का मानना है, वृहद पैमाने पर करीब एक दशक से खुलेआम जारी रेत की लूट शासन-प्रशासन के संरक्षण के बगैर संभव ही नहीं है। खनन माफिया नदियों को तबाह-बर्बाद करने के साथ नदी किनारे स्थित निजी भूमियों (खेतों) तथा शासकीय भूमि पर बिना किसी लीज स्वीकृति के गहरी खदानें खोदकर रेत निकाल रहा है। बीरा, भानपुर, जिगनी एवं रामनई ग्राम में धड़ल्ले से निजी एवं शासकीय भूमि पर संचालित करीब दजर्न भर अवैध रेत खदानों से प्रतिदिन सैंकड़ों घनमीटर रेत निकाली जा रही है। पन्ना में रेत का यह काला कारोबार अब सिर्फ अवैध खनन का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह पर्यावरण विनाश, गरीबों की आजीविका छिनने और कानून-व्यवस्था के चरमराने का गंभीर मुद्दा बन चुका है। अब देखना यह होगा कि शासन-प्रशासन इन आवेदनों को गंभीरता से लेकर ठोस कार्रवाई करता है या फिर “रेत का यह खेल” यूं ही चलता रहेगा।

कलेक्टर ने कचरा प्रसंस्करण केन्द्र का किया लोकार्पण

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*      कचरा पृथक्करण व निस्तारण प्रक्रिया की ली जानकारी

पन्ना। कलेक्टर ऊषा परमार ने बुधवार को बायपास रोड स्थित गौशाला के निकट नगर पालिका परिषद पन्ना के कचरा प्रसंस्करण केन्द्र (Waste Processing Center) का लोकार्पण किया। इस अवसर पर प्रसंस्करण केन्द्र में कचरा पृथक्करण व निस्तारण प्रक्रिया की जानकारी लेकर इसे पर्यावरण सुरक्षा (Environmental Protection) व कचरा प्रबंधन (Waste Management) की दिशा में कारगर कदम बताया। साथ ही कहा कि यह प्रयास नगर की स्वच्छता के लिए भी महत्वपूर्ण है। जिला कलेक्टर ने मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (Material Recovery Facility) की अवधारणा पर केन्द्रित कचरा प्रसंस्करण केन्द्र परिसर का अवलोकन भी किया। इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष मीना पाण्डेय, नपा उपाध्यक्ष आशा गुप्ता, पार्षदगण, जिला पंचायत सीईओ उमराव सिंह मरावी, सीएमओ उमाशंकर मिश्रा सहित एसबीआई फाउंडेशन टीम तथा एनजीओ प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

‘आपदा की स्थिति में जीवन रक्षा के उपाय और सावधानियों की जानकारी होना जरुरी’

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*     आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण के समापन कार्यक्रम को कलेक्टर ने किया संबोधित

*     तीन दिवसीय प्रशिक्षण में शामिल प्रतिभागियों को वितरित किए प्रमाण पत्र

पन्ना। जिला आपदा प्रबंधन संस्थान द्वारा आयोजित तीन दिवसीय आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण (Disaster Management Training) का बुधवार को समापन हुआ। इस अवसर पर जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित प्रशिक्षण का कलेक्टर ऊषा परमार ने जायजा लिया और किसी भी प्राकृतिक आपदा से बचाव के लिए प्रशिक्षण और पूर्व तैयारी की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि न केवल भूकंप आपदा, बल्कि सर्पदंश और आकाशीय बिजली गिरने जैसी आपदाओं से भी बचाव के लिए सही मार्गदर्शन आवश्यक है। इस तरह के प्रशिक्षण से आवश्यक जानकारी एवं बारीकियां सीखकर आपदा से बचाव संभव है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण में शामिल अधिकारियों द्वारा मैदानी स्तर तक जानकारियां साझा की जाएं। ग्राम पंचायतों तक भी प्रचार सामग्री के माध्यम से ग्रामीणों को जागरूक करें। वर्तमान में भवन निर्माण सहित सभी पक्के निर्माण कार्यों में आपदा से बचाव के उपाय आवश्यक हैं।
कलेक्टर ने कहा कि सभी प्रशिक्षणार्थी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का गंभीरता के साथ निर्वहन करें। किसी भी आपात स्थिति (Emergency) में जीवन रक्षा के लिए विभिन्न उपायों व सावधानियों की जानकारी होना चाहिए। जिला कलेक्टर ने उम्मीद व्यक्त की कि आपदा प्रबंधन का यह जिला स्तरीय प्रशिक्षण निश्चित तौर पर किसी भी प्राकृतिक आपदा की स्थिति में जान बचाने के लिए अहम साबित होगा। इस दौरान प्रशिक्षणार्थियों (Trainees) से प्रशिक्षण के दौरान सीखी बारीकियों के संबंध में चर्चा कर प्रतिभागियों के प्रश्नों का समाधान भी किया गया।

विशेषज्ञों ने किया प्रशिक्षणार्थियों का मार्गदर्शन

जिला पंचायत सीईओ उमराव सिंह मरावी ने कहा कि एसओपी का पालन कर छोटी-छोटी समस्याओं से बचाव संभव है। तीन दिवसीय प्रशिक्षण की सराहना कर सीईओ द्वारा आगामी कार्ययोजना के बारे में जानकारी ली गई। संयुक्त कलेक्टर कुशल सिंह गौतम ने प्रशिक्षण की रूपरेखा और जागरूकता गतिविधियों के बारे में जानकारी प्रदान की। गृह विभाग के आपदा प्रबंधन संस्थान भोपाल के तकनीकी विशेषज्ञों तथा होमगार्ड पन्ना के अधिकारियों द्वारा भी प्रशिक्षणार्थियों का मार्गदर्शन किया गया। समापन अवसर पर प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।`

रिश्तों का खून: सास ने बहू की ली जान, अंधे हत्याकांड का खुलासा करने का पुलिस का दावा

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मोहन्द्रा चौकी पुलिस ने नीता साहू के अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझाने का दावा करते हुए हत्या के आरोप में उसकी सास को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

*    आपसी विवाद में वारदात, आरोपी सास गिरफ्तार; कुदाली और खून से सनी साड़ी जब्त

*    पुलिस के खुलासे को संदेह की नजर से देख रहे क्षेत्रवासी

पन्ना। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के सिमरिया थाना अंतर्गत मोहन्द्रा चौकी क्षेत्र में हुए गर्भवती महिला के अंधे हत्याकांड का पुलिस ने खुलासा करने का दावा किया है। इस मामले में मृतका की सास को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, शनिवार 14 मार्च 2026 को ग्राम पड़वार निवासी शिक्षक दयाराम साहू ने सूचना दी थी कि उसकी पत्नी नीता साहू घर के कमरे में अचेत अवस्था में पड़ी है, जिसके सिर, माथे और होंठ पर गंभीर चोट के निशान थे। मृतका नीता सात माह की गर्भवती थी।
सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची, जहां महिला मृत पाई गई। प्रारंभिक कार्रवाई के बाद मर्ग कायम कर जांच शुरू की गई। जांच के दौरान घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य एकत्रित किए गए तथा एफएसएल टीम व डॉग स्क्वॉड की मदद ली गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अज्ञात आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की गई।
पुलिस ने बताया कि चौकी प्रभारी मोहन्द्रा उनि दीपक सिंह भदौरिया के नेतृत्व में गठित टीम ने संदेह के आधार पर मृतका की सास को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ के दौरान आरोपी महिला ने आपसी कहासुनी के दौरान विवाद बढ़ने पर कुदाली से हमला कर हत्या करना स्वीकार किया, ऐसा पुलिस का दावा है। नीता की नृशंस हत्या से उसके गर्भ में पल रहे शिशु की भी मौत हो गई थी। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से घटना में प्रयुक्त रक्तरंजित कुदाली और घटना के समय पहनी गई साड़ी जब्त की है। आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया है और मामले की आगे की विवेचना जारी है। पुलिस का कहना है कि मामले में अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
बता दें कि क्षेत्र में कई ऐसे लोग हैं जो पुलिस की कहानी (खुलासे) पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। दरअसल लोगों का मानना है, बहू के हत्याकांड को इतनी बेरहमी से वृद्ध सास अकेले अंजाम नहीं दे सकती है। इसलिए सनसनीखेज अंधे कत्ल के खुलासे को लेकर ग्राम पड़वार सहित क्षेत्र में कई तरह चर्चाओं का बाजार गर्म है। इन चर्चाओं में कितनी सत्यता है यह तो फिलहाल मृतका के ससुराल पक्ष के लोग और पुलिस ही बेहतर बता सकते हैं। अब देखना यह है कि पुलिस जांच में और कौन से नए तथ्य निकलकर सामने आते हैं।

पन्ना को बजट में बड़ी सौगात: 321 करोड़ से संवरेंगी जिले की सड़कें

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कार्यालय कार्यपालन यंत्री लोक निर्माण विभाग संभाग पन्ना। (फाइल फोटो)

*    13 मार्गों पर 143.70 किमी. सड़कों का निर्माण, चौड़ीकरण व मजबूतीकरण

*    बेहतर होगी कनेक्टिविटी और विकास को मिलेगी रफ्तार

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार के बजट वर्ष 2026-27 में पन्ना जिले को सड़क विकास के लिए बड़ी सौगात मिली है। जिले में 13 प्रमुख मार्गों की कुल 143.70 किलोमीटर लंबाई में निर्माण, चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण के कार्य लगभग 321.48 करोड़ रुपये की लागत से कराए जाएंगे। इन परियोजनाओं के पूरा होने से जिले की कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार आएगा और विकास गतिविधियों को नई गति मिलेगी। लोक निर्माण विभाग, संभाग पन्ना के कार्यपालन यंत्री जे.पी. सोनकर ने बताया कि तकनीकी अमले की मेहनत और जनप्रतिनिधियों के प्रयासों से इन कार्यों को स्वीकृति मिली है। सागर संभाग में सड़क निर्माण के लिए पन्ना को सर्वाधिक बजट मिलना जिले के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

मुख्य मार्गों का चौड़ीकरण: घटेगा दबाव, बढ़ेगी रफ्तार

बजट में शामिल प्रमुख मार्गों में टिकरिया-रीठी-व्याहा-रैगवां-बोरी-खमरिया मार्ग का चौड़ीकरण किया जाएगा। इस मार्ग की लंबाई 45 किलोमीटर है और इस पर 114 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसी तरह शाहनगर-बोरी-चमरईया मार्ग, जिसकी लंबाई 40 किलोमीटर है, के चौड़ीकरण पर 110 करोड़ रुपये की लागत आएगी। देवेंद्रनगर-सेलहा मार्ग की लंबाई 23 किलोमीटर है और इसके उन्नयन के लिए 57.50 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। करीब 108 किलोमीटर लंबाई के इन मार्गों के चौड़ीकरण से यातायात का दबाव कम होगा और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूती मिलेगी।

ग्रामीण संपर्क को मजबूती: गांव-गांव पहुंचेगी सड़क

ग्रामीण और आंतरिक क्षेत्रों को जोड़ने के लिए सुरदहा से बिल्हा मार्ग का निर्माण किया जाएगा, जिसकी लंबाई 4.50 किलोमीटर है और इस पर 6.75 करोड़ रुपये खर्च होंगे। टेढ़ी से नयापुरा मार्ग 2.50 किलोमीटर लंबा होगा, जिस पर 3.50 करोड़ रुपये की लागत आएगी। तिलगवां में रामप्रसाद के पुरवा से जमुनहाई खुर्द मार्ग 2 किलोमीटर लंबाई का होगा और इस पर 2 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसी तरह डोभा से लुधगवां मार्ग 2 किलोमीटर लंबा होगा, जिसकी लागत 2 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। ग्राम गहलोदपुरवा से तरौनी मार्ग 1 किलोमीटर लंबा होगा और इस पर 1 करोड़ रुपये खर्च होंगे। मड़वा से बंधा मार्ग की लंबाई 8.60 किलोमीटर है और इसके निर्माण पर 8.74 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इन सड़कों के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी और स्थानीय लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।

इन सड़कों का होगा मजबूतीकरण

कुछ महत्वपूर्ण मार्गों पर मजबूतीकरण कार्य भी किया जाएगा। इसके तहत सप्तैया-झरकुआ-पगरा-बम्होरी मार्ग की लंबाई 8.30 किलोमीटर है, जिस पर 8.24 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। शाहनगर टाउन मार्ग 2 किलोमीटर लंबा है और इसके सुधार पर 2.75 करोड़ रुपये की लागत आएगी। टाईं पहुंच मार्ग 3.60 किलोमीटर लंबा है और इसके लिए 3.90 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। मकरंदगंज-हरद्वाही-गुनौर मार्ग के चयनित 1.20 किलोमीटर हिस्से के मजबूतीकरण पर 1.10 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इन कार्यों से सड़कों की गुणवत्ता बेहतर होगी और आवागमन अधिक सुरक्षित व सुगम बनेगा।

विकास को मिलेगा नया आधार

जानकारों के अनुसार, सड़क अधोसंरचना में यह निवेश पन्ना जिले के आर्थिक और सामाजिक विकास को नई दिशा देगा। बेहतर सड़कों से किसानों और व्यापारियों को बाजार तक पहुंच आसान होगी, वहीं पर्यटन क्षेत्र को भी बढ़ावा मिलेगा। कुल मिलाकर, यह बजट पन्ना के लिए विकास का नया द्वार खोलने वाला साबित होगा।

कॉर्पोरेट जगत ने वन्यजीव संरक्षण के लिए दिया समर्थन का भरोसा 

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*     पन्ना टाइगर रिजर्व में राज्य के पहले वन्यजीव-केंद्रित सीएसआर कॉन्क्लेव का आयोजन

*     दो दिवसीय आयोजन में देश की बड़ी कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल 

पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण और औद्योगिक विकास को साथ लेकर चलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए मध्य प्रदेश वन विभाग (MPFD) और मध्य प्रदेश टाइगर फाउंडेशन सोसाइटी (MPTFS) ने पन्ना टाइगर रिजर्व में राज्य के पहले वन्यजीव-केंद्रित कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) कॉन्क्लेव का सफल आयोजन किया। 6 और 7 मार्च को आयोजित दो दिवसीय इस कॉन्क्लेव में देश की प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और वन्यजीव संरक्षण के लिए सहयोग का भरोसा दिया। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह आयोजन संरक्षण वित्तपोषण (Conservation Financing) के क्षेत्र में एक नई पहल के रूप में देखा जा रहा है, जिससे वन्यजीव संरक्षण के लिए संसाधन जुटाने के नए रास्ते खुलेंगे।

नीति निर्माताओं और वन्यजीव विशेषज्ञों की मौजूदगी

कॉन्क्लेव में मध्य प्रदेश वन विभाग के शीर्ष अधिकारियों ने भाग लिया। इसमें प्रमुख सचिव वन संदीप यादव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख तथा मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक शुभ रंजन सेन, एपीसीएफ (वन्यजीव) एल. कृष्णमूर्ति, एपीसीएफ (भूमि प्रबंधन) एच. एस. मोहंता और एपीसीएफ एवं चीता प्रोजेक्ट के क्षेत्र संचालक उत्तम शर्मा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा राज्य के सभी टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक, वन विहार राष्ट्रीय उद्यान, मुकुंदपुर चिड़ियाघर और गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य के निदेशक भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

देश की बड़ी कंपनियों की भागीदारी

कॉन्क्लेव में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कई प्रमुख कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इनमें ऊर्जा, खनन, इंफ्रास्ट्रक्चर, विनिर्माण और वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल रहे। इन कंपनियों में प्रमुख रूप से कोल इंडिया, साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL), वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL), हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड, ग्रीनको, जियोमिन आयरन मैन्युफैक्चरिंग लिमिटेड, टाटा पावर, एलएंडटी, सुजलॉन, नागार्जुन कंस्ट्रक्शन कंपनी (NCC), जेके सीमेंट, अल्ट्राटेक सीमेंट, बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड, ईकेआई (EKI) एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड और आईसीआईसीआई (ICICI) फाउंडेशन जैसी संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए। कॉर्पोरेट जगत के प्रतिनिधियों ने भारत की प्राकृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति अपनी गहरी प्रतिबद्धता व्यक्त की और विभाग को भविष्य में ऐसे सहयोग का आश्वासन दिया जो सीधे तौर पर जैव विविधता और वन्यजीव आवासों की सुरक्षा में योगदान देंगे।

धरातल पर संरक्षण कार्यों का प्रत्यक्ष अनुभव

कॉन्क्लेव के दौरान कॉर्पोरेट प्रतिनिधियों को पन्ना टाइगर रिजर्व के विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण भी कराया गया, ताकि वे वन्यजीव प्रबंधन की वास्तविक स्थिति को समझ सकें। भ्रमण के दौरान मुख्य रूप से इन पहलुओं को दिखाया गया- वन सुरक्षा: प्रतिनिधियों ने एंटी-पोचिंग (शिकार विरोधी) कैंपों का दौरा किया और वन कर्मचारियों द्वारा की जाने वाली 24 घंटे निगरानी प्रणालियों और पैदल गश्त (Foot Patrolling) को देखा। पर्यावास प्रबंधन (Habitat Management): प्रतिभागियों को वैज्ञानिक हस्तक्षेपों के बारे में जानकारी दी गई, जैसे कि शाकाहारी जीवों की आबादी बढ़ाने के लिए घास के मैदानों का पुनरुद्धार, वर्ष भर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सौर ऊर्जा संचालित बोरवेल के माध्यम से जल निकायों का प्रबंधन, और स्वदेशी वनस्पतियों को पुनर्जीवित करने के लिए ‘लैंटाना’ और ‘वन तुलसी’ जैसी आक्रामक खरपतवार प्रजातियों को हटाना। समुदाय और पर्यटन: यह देखा गया कि कैसे स्थानीय समुदायों को संरक्षण और पर्यटन अर्थव्यवस्था के साथ जोड़ा गया है। टाइगर साइटिंग: इस दौरे का मुख्य आकर्षण बाघों का दर्शन रहा, जिसने राज्य के संरक्षण प्रयासों की सफलता की पुष्टि की। हिनौता में हाथी कैंप: कॉर्पोरेट लीडर्स ने हाथी कैंप का दौरा किया, जहाँ उन्होंने वन गश्त में हाथियों की महत्वपूर्ण भूमिका और उनकी विशेष देखभाल की सराहना की।

CSR दान पोर्टल का शुभारंभ

कॉन्क्लेव के दौरान कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) दान के लिए एक विशेष डिजिटल पोर्टल csr.mptigerfoundation.org का भी शुभारंभ किया गया। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह पोर्टल पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है, जिससे कॉर्पोरेट कंपनियां सीधे और सरल प्रक्रिया के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण परियोजनाओं में योगदान दे सकेंगी।

संरक्षण और विकास को साथ लेकर चलने का संकल्प

कॉन्क्लेव के समापन पर वन विभाग और कॉर्पोरेट प्रतिनिधियों ने इस बात पर सहमति जताई कि आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण एक साथ आगे बढ़ने चाहिए। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वैज्ञानिक संरक्षण रणनीतियों और कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी के सहयोग से मध्य प्रदेश वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में सार्वजनिक-निजी भागीदारी का एक मजबूत मॉडल स्थापित कर सकता है। कॉन्क्लेव का समापन एक साझा संकल्प के साथ हुआ “देश की आर्थिक समृद्धि, इसके वन्य क्षेत्रों की पारिस्थितिक सुरक्षा के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलनी चाहिए।”

“न्याय सत्याग्रह”: पन्ना कलेक्ट्रेट बना आंदोलन का केंद्र, सैंकड़ों आदिवासी-किसानों ने डाला डेरा

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पन्ना के नवीन संयुक्त कलेक्ट्रेट परिसर में धरने पर बैठे केन-बेतवा लिंक सहित अन्य सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित परिवार।

*    केन-बेतवा लिंक सहित अन्य सिंचाई परियोजना प्रभावित ग्रामीणों का धरना-प्रदर्शन

*    न्याय नहीं मिला तो आंदोलन और व्यापक होगा: अमित भटनागर

*    महिलाएं छोटे बच्चों के साथ देर रात तक कलेक्ट्रेट परिसर में डटी रहीं

पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना एवं छतरपुर जिले में निर्माणाधीन वृहद और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित दर्जन भर गांवों के सैंकड़ों आदिवासी-किसान परिवारों ने भू-अर्जन से जुड़ीं समस्याओं, मुआवजा, विस्थापन तथा समुचित पुनर्वास आदि मुद्दों को लेकर बुधवार 11 मार्च को जय किसान संगठन के बैनर तले “न्याय सत्याग्रह” के तहत पन्ना कलेक्ट्रेट का घेराव किया। जिनमें केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगांय मध्यम सिंचाई परियोजना और रूंज मध्यम सिंचाई परियोजना से प्रभावित परिवार शामिल रहे। तेज धूप में पैदल मार्च कर सैंकड़ों की संख्या में नवीन कलेक्ट्रेट भवन पहुंचे किसान और आदिवासी परिवार अपनी मांगों को लेकर डटे रहे। कलेक्ट्रेट परिसर में दोपहर 3 बजे से लेकर रात्रि 10:30 बजे तक ग्रामीणों का शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रहा। यह “न्याय सत्याग्रह” अनिश्चितकालीन बताया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा तब तक आंदोलन जारी रहेगा। रात होते-होते आंदोलन और मजबूत होता नजर आया। कई महिलाएं अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ बिना चादर और बिस्तर के जमीन पर ही रात्रि विश्राम करने को मजबूर रहीं। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर स्पष्ट और न्यायपूर्ण निर्णय नहीं लिया जाएगा, तब तक वे कलेक्ट्रेट से हटने वाले नहीं हैं।

कलेक्टर के न आने से बना रहा गतिरोध

सैंकड़ों प्रभावित ग्रामीण परिवार डायमंड चौराहा से डाइट तिराहा, बलदेव मंदिर, बड़ा बाजार और अजयगढ़ चौराहा होते हुए करीब 6 किलोमीटर की पदयात्रा कर कलेक्ट्रेट पहुंचे। तेज धूप में ग्रामीण अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते हुए ग्रामीण कलेक्ट्रेट परिसर में ही धरने पर बैठ गए। सैंकड़ों लोग कड़कड़ती धूप में करीब चार घंटे तक तेज धूप में बैठे रहे, लेकिन कलेक्टर उनसे मिलने नहीं आईं। इस दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं भी मौजूद थीं, जिनकी गोद में दो-दो, तीन-तीन महीने के बच्चे और कुछ 15 दिन के नवजात शिशु भी थे। ग्रामीणों का आरोप है कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों के बावजूद प्रशासन की ओर से पानी तक की व्यवस्था नहीं की गई। यहां तक कि कार्यालय परिसर के अंदर से जो पानी लिया जा रहा था, उसकी सप्लाई भी बंद कर दी गई। कई महिलाएं अपने छोटे बच्चों के लिए दूर जाकर पानी लाने को मजबूर हुईं। बाद में तहसीलदार के आग्रह पर एक प्रतिनिधिमंडल कलेक्टर से उनके कक्ष में भेंट की। प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर से परियोजना से जुड़े दस्तावेज और जानकारी मांगी। ग्रामीणों का कहना था कि इस संबंध में कई बार आवेदन और आरटीआई के माध्यम से भी जानकारी मांगी गई, लेकिन प्रशासन ने अब तक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई है। कलेक्टर ने प्रशासन की कार्यप्रणाली को पारदर्शी बताते हुए अपनी बात रखी, लेकिन प्रतिनिधिमंडल ने इसे संतोषजनक नहीं माना।

जमीन पर लेटे रहे प्रदर्शनकारी

केन-बेतवा लिंक सहित अन्य सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित सैंकड़ों परिवार पन्ना के डायमंड चौराहा से करीब 6 किलोमीटर की पदयात्रा कर कलेक्ट्रेट पहुंचे।
कलेक्टर से मिलकर बाहर आए प्रतिनिधिमंडल ने पूरी जानकारी उपस्थित किसानों और ग्रामीणों को बताई, तो पहले से नाराज लोगों में आक्रोश और बढ़ गया। इसके बाद हजारों ग्रामीणों ने एक स्वर में निर्णय लिया कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा तब तक आंदोलन जारी रहेगा। रात होने तक बड़ी संख्या में किसान और आदिवासी कलेक्ट्रेट परिसर में ही डटे रहे। कई महिलाएं अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ बिना चादर और बिस्तर के जमीन पर ही रात गुजारने को मजबूर रहीं, जबकि कई लोग भूखे-प्यासे ही आंदोलन स्थल पर बैठे रहे। जय किसान संगठन के नेतृत्व में चल रहा यह “न्याय सत्याग्रह” अनिश्चितकालीन बताया जा रहा है।

आंदोलन की प्रमुख मांगें

प्रभावित किसानों और आदिवासी परिवारों से जबरन गांव न छीने जाएं। विस्थापन की स्थिति में भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन अधिनियम 2013 का पालन हो। आदिवासी संस्कृति को ध्यान में रखते हुए गांव के बदले गांव बसाकर पुनर्वास किया जाए। प्रभावित परिवारों को आजीविका के लिए पर्याप्त कृषि भूमि उपलब्ध कराई जाए। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर ने कहा कि यह लड़ाई सरकार के खिलाफ नहीं बल्कि अन्याय के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि हजारों आदिवासी और किसान परिवारों को उनकी जमीन और संस्कृति से अलग किया जा रहा है, लेकिन कानून का पालन नहीं किया जा रहा। भटनागर ने कहा कि हमारा आंदोलन शांतिपूर्ण है, लेकिन यदि प्रभावित किसानों और आदिवासियों को न्याय नहीं मिला तो आंदोलन और व्यापक होगा।

कई संगठनों ने दिया समर्थन

आंदोलन को विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों का समर्थन भी मिला। आम आदमी पार्टी की नेता अंजली यादव, जय आदिवासी संगठन के जिलाध्यक्ष मुकेश गौंड़ और कांग्रेस नेता भरत मिलन पाण्डेय ने आंदोलन स्थल पहुंचकर समर्थन जताया। कांग्रेस नेता भरत मिलन पांडे ने कहा कि केन-बेतवा लिंक परियोजना पन्ना और बुंदेलखंड के लिए अभिशाप साबित होगी। उन्होंने सिंचाई परियोजना प्रभावित परिवारों को मुआवजा वितरण, विस्थापन-पुनर्वास जैसे संवेदनशील मुद्दों पर प्रशासन के रवैये की कड़ी आलोचना की। श्री पाण्डेय ने ऐलान किया कि, प्रभावितों को उनका हक दिलाने की कानूनी लड़ाई को वे अपने खर्च पर हाईकोर्ट ले जाएंगे। वहीं जय आदिवासी संगठन के जिलाध्यक्ष मुकेश गौंड़ ने कहा कि आदिवासियों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, आवश्यकता पड़ने पर पूरे प्रदेश के कार्यकर्ता इस आंदोलन में शामिल होंगे। पन्ना जिले के इतिहास में संभवतः यह पहला अवसर है जब इतनी बड़ी संख्या में किसान और आदिवासी कलेक्ट्रेट परिसर में रात तक डटे रहे। अब क्षेत्र की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

इनका कहना है-

“केन-बेतवा लिंक सहित अन्य सिंचाई परियोजना प्रभावित परिवारों के भू-अर्जन एवं मुआवजा वितरण की कार्यवाही नियमानुसार पारदर्शी तरीके से की गई है। मुझसे मिलने आए प्रतिनिधिमंडल से भी मैनें पूछा यदि कोई पात्र व्यक्ति छूटा हो तो आप जानकारी दें, हम उसकी जांच कराने और आवश्यक कार्रवाई करने के लिए तत्पर हैं। विस्थापित परिवारों को कृषि भूमि आवंटित करने सहित प्रतिनिधिमंडल की कई ऐसी मांगें हैं जिनका निराकरण जिला प्रशासन स्तर पर संभव नहीं हैं।”

ऊषा परमार, कलेक्टर पन्ना।

शराब माफिया के हौसले बुलंद: अवैध शराब पकड़वाने वाले कार्यकर्ताओं को दी जान से मारने की धमकी

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अवैध शराब पकड़वाने से बौखलाए शराब माफिया के गुर्गों के विरुद्ध क़ानूनी कार्रवाई की मांग को लेकर हरदुआ चौकी प्रभारी को भगवती मानव कल्याण संगठन के कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन सौंपा।

*    गांव-गांव धड़ल्ले से बिक रही शराब, प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल

*    आरोप- आबकारी व पुलिस की निष्क्रियता से ग्रामीणों को खुद पकड़नी पड़ रही शराब

  एसपी के नाम ज्ञापन सौंपकर 7 दिन में कार्रवाई की मांग, आंदोलन की चेतावनी

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) जिले में अवैध शराब कारोबार के खिलाफ आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं को अब शराब माफिया की खुली धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। होली पर्व के दौरान हरदुआ खमरिया बस स्टैंड क्षेत्र में अवैध शराब पकड़वाने के बाद नाराज शराब माफिया के गुर्गों ने संगठन के कार्यकर्ताओं को रास्ते में रोककर गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी। इस पूरे मामले को लेकर भगवती मानव कल्याण संगठन एवं भारतीय शक्ति चेतना पार्टी शाखा जिला इकाई पन्ना के पदाधिकारियों ने हरदुआ चौकी प्रभारी को पुलिस अधीक्षक के नाम ज्ञापन सौंपकर आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

सूचना देकर पकड़वाई 4 पेटी अवैध शराब

पन्ना जिले में आबकारी ठेका की आड़ में खुलेआम माफियाराज चला रहे शराब ठेकेदार के कथित गुर्गे को रंगे हाथ पकड़कर 4 पेटी अवैध शराब जब्त की गई।
भगवती मानव कल्याण संगठन के अनुसार 4 मार्च 2026 की शाम लगभग 7 बजे होली पर्व को देखते हुए संगठन के कार्यकर्ता हरदुआ खमरिया बस स्टैंड (चौकी हरदुआ पटेल क्षेत्र) में अवैध शराब की बिक्री रोकने के लिए निगरानी कर रहे थे। इसी दौरान संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर कार्यकर्ताओं ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद मौके से लगभग 4 पेटी अवैध शराब पकड़ी गई। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में अवैध शराब कारोबार से जुड़े लोगों में हड़कंप मच गया।

रास्ते में रोककर दी धमकी

संगठन का आरोप है कि अवैध शराब पकड़वाने से नाराज शराब कारोबार से जुड़े लोगों ने संगठन के दो कार्यकर्ताओं को रास्ते में तीन अलग-अलग स्थानों पर रोककर घेर लिया। इस दौरान आरोपियों ने गंदी-गंदी गालियां देते हुए उन्हें जान से मारने की धमकी दी और भविष्य में इस प्रकार की कार्रवाई न करने की चेतावनी भी दी। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने संगठन द्वारा संचालित पूजा-पाठ, धार्मिक कार्यक्रमों और जनजागरण गतिविधियों को लेकर भी अपमानजनक और अशोभनीय शब्दों का प्रयोग किया, जिससे संगठन के कार्यकर्ता मानसिक रूप से आहत और भयभीत हैं।

इन लोगों पर लगाए आरोप

भगवती मानव कल्याण संगठन द्वारा पुलिस अधीक्षक के नाम दिए गए आवेदन में आरोप लगाया गया है कि इस पूरे घटनाक्रम में ग्राम मड़वा निवासी छंगे प्रजापति, धर्मेंद्र लोधी उर्फ धम्मा, युवराज ठाकुर, भोला राय और नीरज राय शामिल हैं। उक्त सभी लोग शराब माफिया के गुर्गे बताए जा रहे हैं। कथित तौर पर ये लोग लाइसेंसी दुकानों से शराब की पेटियां लेकर उन्हें अवैध बिक्री के लिए आसपास के गांवों में पहुंचाने का काम करते हैं। संगठन के कार्यकर्ताओं-पधादिकारियों कहना है कि इन लोगों ने रास्ते में रोककर गाली-गलौज की, जान से मारने की धमकी दी और कानून व्यवस्था को खुली चुनौती देते हुए भविष्य में इस प्रकार की कार्रवाई न करने की चेतावनी दी।

आबकारी और पुलिस की भूमिका पर सवाल

पन्ना जिले के आबकारी ठेकेदार के गुर्गे से जब्त की गई अवैध शराब और आरोपी को हरदुआ चौकी पुलिस के सुपुर्द किया गया।
इस घटना के बाद जिले में अवैध शराब कारोबार को लेकर आबकारी विभाग और पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि जिले में अवैध शराब बिक्री के विरुद्ध कार्रवाई को लेकर दोहरा रवैया अपनाया जा रहा है। जीवन लाल विश्वकर्मा, सुरेन्द्र साहू और राजू लोधी का कहना है कि पड़ोसी जिलों से आने वाली शराब को तो तत्परता से पकड़ लिया जाता है, यह अच्छी बात है। लेकिन जिले की लाइसेंसी शराब दुकानों से आसपास के गांवों में खुलेआम पहुंचाई जा रही अवैध शराब पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती। भगवती मानव कल्याण संगठन एवं भारतीय शक्ति चेतना पार्टी का यह भी आरोप है कि कई गांवों और कस्बों में ठेकेदार की शराब अवैध रूप से बेची जा रही है, लेकिन इसके बावजूद संबंधित लोगों पर कार्रवाई नहीं होती। इसी कारण ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध शराब की उपलब्धता लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे युवा पीढ़ी तेजी से नशे की ओर आकर्षित हो रही है और गांवों का सामाजिक माहौल भी प्रभावित हो रहा है।
लाइसेंसी ठेकेदार द्वारा कथित रूप से आबकारी विभाग एवं पुलिस की मिलीभगत से बड़ी मात्रा में शराब की अवैध बिक्री करके प्रतिदिन शासन को लाखों रुपए के राजस्व का चूना भी लगाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जब प्रशासन प्रभावी कार्रवाई नहीं करता, तो मजबूर होकर सामाजिक संगठन और ग्रामीणों को ही अवैध शराब पकड़ने के लिए आगे आना पड़ता है। लेकिन अब ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं, जिनमें अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई करने वाले लोगों को ही धमकाया जा रहा है।

कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी

इस पूरे मामले को लेकर भगवती मानव कल्याण संगठन एवं भारतीय शक्ति चेतना पार्टी के कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों ने पुलिस अधीक्षक पन्ना के नाम ज्ञापन सौंपकर आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि 7 दिन के भीतर आरोपियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो उन्हें धरना-प्रदर्शन और आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। ज्ञापन सौंपने वालों में जीवन लाल विश्वकर्मा, सुरेन्द्र साहू, अरविंद कचेर, राजू लोधी, संजय, गोविन्द सिंह, अनुज विश्वकर्मा सहित अन्य लोग शामिल रहे। उल्लेखनीय है कि, जब इस प्रकरण के संबंध में पुलिस अधीक्षक पन्ना श्रीमती निवेदिता नायडू से कार्रवाई को लेकर बात की गई तो उन्होंने संगठन के ज्ञापन का अवलोकन करने एवं स्थानीय पुलिस अधिकारियों से जानकारी प्राप्त करने की बात कही। वहीं जब यह पूंछा गया कि आबकारी विभाग व पुलिस पर ठेकेदार की अवैध शराब न पकड़ने के आरोप लग रहे हैं, तो आपने इस सवाल को प्रकरण से अलग बताया और फिर उनका फोन कट गया।

जंगलराज: “एक पेड़ मां के नाम…और हजारों पौधे मवेशियों के नाम!”

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पन्ना जिले के अजयगढ़ कस्बा में स्थित वन परिक्षेत्र अधिकारी अजयगढ़ एवं धरमपुर का कार्यालय भवन। (फाइल फोटो)

*    मवेशियों का चारागाह बने करोड़ों की लागत वाले वन विभाग के प्लांटेशन

*    उत्तर वन मण्डल पन्ना की धरमपुर रेन्ज अंतर्गत बीट कुड़रा एवं मैहावा का मामला

  बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार, सुरक्षा में घोर लापरवाही के कारण बदहाली की भेंट चढ़े वृक्षारोपण

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in)  मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में जंगल विभाग जंगलराज का पर्याय बना हुआ है। उत्तर सामान्य वन मण्डल पन्ना अंतर्गत वन तथा वन्यजीवों की सुरक्षा का भार पूरी तरह भगवान भरोसे छोड़कर मैदानी अमले से लेकर बड़े अफसर बजट बंदरबांट के एक सूत्रीय अभियान में जुटे हैं। ज्यादा से ज्यादा नोट छापकर अकूत संपत्ति अर्जित करने की हवश में विभागीय कार्य बेइंतहां भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहे हैं। विभाग द्वारा पूर्व में कराए गए तथा वर्तमान में चल रहे वृक्षारोपण कार्य सरकारी धन को ठिकाने लगाने की परियोजना बन चुके हैं। एक ओर जहां केन्द्र की मोदी तथा राज्य की मोहन यादव सरकार “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के जरिए लोगों को पर्यावरण की रक्षा के साथ मां के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए प्रेरित कर रही है, वहीं दूसरी ओर वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी और मैदानी अमला करोड़ों रुपए खर्च कर लगाए गए हजारों पौधों को मवेशियों की खुराक बनने के लिए छोड़ चुके हैं।
उत्तर सामान्य वन मंडल पन्ना के अंतर्गत धरमपुर रेंज के नरदहा सर्किल की कुड़रा और मैहावा बीट में कराए गए वृक्षारोपणों की स्थिति विभागीय भ्रष्टाचार और लापरवाही की पोल खोल रही है। जिन प्लांटेशन पर लाखों रुपए खर्च किए गए, वे आज खुलेआम मवेशियों के चारागाह में तब्दील हो चुके हैं। सुरक्षा, रखरखाव और निगरानी जैसे कार्य कागजों तक सीमित नजर आते हैं, जबकि जमीन पर पौधों के सूखे डंठल और टूटी फेंसिंग ही नजर आती है। वन विभाग के सूत्रों और मौके पर देखी गई स्थिति से स्पष्ट है कि वृक्षारोपण की सुरक्षा और रखरखाव के लिए निर्धारित राशि का बीटगार्ड से लेकर उच्च अधिकारियों की मिलीभगत से बंदरबांट हो रहा है। परिणाम यह है कि उत्तर वन मण्डल पन्ना अंतर्गत हरित आवरण बढ़ने के बजाए मैदानी अमले से लेकर विभागीय अफसरों की तिजोरी में नोटों की हरियाली का वजन तेजी से बढ़ रहा है।

कहां खर्च हो रही रोपण के रखरखाव की राशि

नरदहा सर्किल की बीट मैहावा में करीब 2 वर्ष पूर्व 40 हेक्टेयर में कराया गया वृक्षारोपण मवेशियों की चराई और समुचित देखरेख के आभाव में उजड़े चमन में तब्दील हो गया।
उल्लेखनीय है कि, कार्य आयोजना एवं कैम्पा सहित अन्य मदों से वन क्षेत्रों में कराए जाने वाले वृक्षारोपण की सुरक्षा और समुचित देखरेख हेतु प्रोजेक्ट रिपोर्ट अनुसार 7 से लेकर 10 वर्ष तक राशि का प्रावधान किया जाता है, ताकि जिस उद्देश्य से वृक्षारोपण कराया गया है वह पूरा हो सके। मध्य प्रदेश राज्य वन सेवा के एक रिटायर अधिकारी ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर बताया कि, वृक्षारोपण कार्य में सबसे ज्यादा राशि प्रथम वर्ष क्षेत्र तैयारी के कार्यों पर व्यय होती है। पहले साल स्थल सफाई से लेकर गड्ढों की खुदाई, गड्ढों में गोबर की खाद डालना और सुरक्षा जाली तार फेंसिंग अथवा पत्थर की दीवार (सीपीडब्ल्यू) से प्लांटेशन क्षेत्र का घेराव किया जाता है। दूसरे वर्ष में मानसून सीजन पर गड्ढों में पौधे रोपित किए जाते हैं। स्वीकृत प्लांटेशन प्रोजेक्ट अनुसार दूसरे वर्ष से लेकर सात या दस वर्ष तक पौधों के आसपास निंदाई-गुड़ाई के साथ फेंसिंग और आंतरिक मार्ग मरम्मत आदि कार्यों के लिए राशि का प्रावधान रहता है। जबकि सुरक्षा कार्य प्रथम वर्ष से शुरू होकर परियोजना समाप्ति तक जारी रहता है। वृक्षारोपण की सुरक्षा सुनिश्चित करने बकायदा चौकीदार (सुरक्षा श्रमिक) के पारिश्रमिक राशि का प्रावधान किया जाता है। इन तथ्यों को दृष्टिगत रखते धरमपुर रेन्ज के नरदहा सर्किल अंतर्गत बीट कुड़रा एवं मैहावा में कुछ वर्ष पूर्व कराए गए वृक्षारोपण को देखें तो पता चलता है, लाखों पौधे रोपित करने के बाद धरातल पर उनकी सुरक्षा पूरी तरह से नदारत है। जिम्मेदार अफसर भी रोपण की सुरक्षा और बदहाली पर आंखें बंद करके बैठे हैं। फलस्वरूप वृक्षारोपण के रखरखाव सहित अन्य मदों की राशि फर्जी बिल-वाउचर के जरिए साल दर साल डकारी जा रही है।

30 हेक्टेयर वृक्षारोपण का बुरा हाल

वन परिक्षेत्र धरमपुर की बीट कुड़रा अंतर्गत वन कक्ष क्रमांक-पी 53 में वर्ष 2023-24 में कार्य आयोजना क्रियान्वयन अंतर्गत आरडीएफ वृक्षारोपण 30 हेक्टेयर क्षेत्र में कराया गया था। स्वीकृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट अनुसार यह वृक्षारोपण वर्तमान में सुरक्षा के साथ रखरखाव की अवधि में है। विगत दिवस कुड़रा के भ्रमण पर पहुंचे पत्रकारों ने पाया कि वृक्षारोपण की सुरक्षा जाली कई जगह से क्षतिग्रस्त थी और कुछ जगह जाली के नीचे गड्ढा बनने से छोटे साइज के मवेशी आसानी से अंदर प्रवेश कर जाते हैं। यहां रोपित पौधों के गड्ढों के आसपास नियमित रूप से निंदाई-गुड़ाई न होने से खरपतवार उग आए हैं। वृक्षारोपण में कई जगह मवेशी चरते हुए नजर आए। फलस्वरूप अधिकांश रोपित पौधे या तो मवेशी चटकर चुके है या फिर उनके अवशेष रुपी सूखे डंठल रोपण की सुरक्षा का सूरत-ए-हाल बयां कर रहे हैं। रोपण में निर्मित मार्ग मरम्मत के आभाव में झाड़ियों और खरपतवार में गुम हो चुके हैं। सुरक्षा जाली फेंसिंग को मजबूती प्रदान करने के लिए तीन कटीले तार लगाने का प्रावधान किया जाता है। लेकिन मौके पर सिर्फ दो कटीले तार नीचे-ऊपर लगे मिले। बीच का तार लगाया ही नहीं गया।

54 हेक्टेयर वृक्षारोपण में टूटे पड़े पोल

बीट कुड़रा के कक्ष क्रमांक-पी- 53 में कैम्पा मद अंतर्गत आरडीएफ वृक्षारोपण वर्ष 2022-23 में 54 हेक्टेयर रकबा में कराया गया था। कुड़रा पहुंच मार्ग के किनारे स्थित इस रोपण की सुरक्षा जाली फेंसिंग के कई सीमेंट पोल टूट चुके हैं। सपोर्ट पोल भी टूटे पड़े हैं। कुछ जगह पोल के स्थान पर बांस बल्ली को लगाया गया। रोपण के पोल टूटने तथा सुरक्षा जाली क्षतिग्रस्त होने के कारण स्थानीय ग्रामीणों के मवेशी बड़े आराम से अंदर घुसकर चरते रहते हैं। पत्रकारों को रोपण के अंदर दो दर्जन से अधिक भैंसें दिनदहाड़े चरते हुए मिलीं। चूंकि भैंसे रोपण के बड़े क्षेत्र में फैली थी और खरपतवार तथा पुराने वृक्षों की आड़ के कारण उन सबको एक फोटो में दिखा पाना संभव नहीं था। फिर भी कुछ भैंस को एक फोटो क्लिक करने की कोशिश की गई, ताकि करोड़ों रुपए खर्च करके कराए गए सुरक्षा की जमीनी सच्चाई को दिखाया जा सके। फेंसिंग की मजबूती के लिए तीन कतार में लगाई जाने वाली कटीली तार की मौके पर सिर्फ दो कतार ही नजर नहीं आ रही है। 2-3 मीटर के अंतराल में लगाए जाने वाले सीमेंट पोल्स भी सभी जगह एक जैसे नजर नहीं आ रहे हैं। इस रोपण में भी अधिकांश पौधों को मवेशी चट कर चुके हैं। जो शेष बचे हैं उनके सूखे डंठल रुपी अवशेष नजर आ रहे हैं। गड्ढों के आसपास खरपतवार की भरमार से प्रतीत होता है कि पौधरोपण के बाद से निंदाई-गुड़ाई का कार्य कागजों तक ही सीमित है।

40 हेक्टेयर पौधारोपण बना उजड़ा चमन

कुड़रा ग्राम के बाहरी क्षेत्र में कराए गए वृक्षारोपण में मौके पर न तो सूचना बोर्ड लगाया गया और ना ही दीवार लेखन के माध्यम से रोपण की जानकारी प्रदर्शित की गई है। मजेदार बात यह है कि, धरमपुर रेंजर वैभव सिंह चंदेल से जब इस रोपण की बुनियादी जानकारी प्राप्त करने के लिए दो-तीन बार संपर्क करने पर उनके द्वारा अति आवश्यक शासकीय कार्य में व्यस्त होने का हवाला देकर जानकारी देने में आनकानी की गई। वन परिक्षेत्र धरमपुर अंतर्गत वन सुरक्षा की अत्यंत ही लचर स्थिति, विभागीय कार्यों में भारी भ्रष्टाचार के मद्देनजर मीडिया को जानकारी देने से बचने रेंजर साहब द्वारा की जाने वाली बहानेबाजी को समझा जा सकता है। उक्त रोपण के संबंध में विभागीय सूत्रों से मिली अपुष्ट जानकारी के अनुसार मैहावा बीट अंतर्गत 40 हेक्टेयर रकबे में मिश्रित रोपण 2 वर्ष पूर्व कराया गया था। स्थानीय नाले और पहाड़ी के किनारे स्थित इस रोपण में दूर-दूर तक फैले तकरीबन आधा सैंकड़ा मवेशी खुलेआम चरते हुए मिले। पत्रकार रोपण की बदहाली, मवेशियों की अवैध चराई को जब अपने कैमरों कैद कर रहे थे तो वहीं नजदीक खड़े वन विभाग के 3-4 सुरक्षा श्रमिक मवेशियों को रोपण से बाहर निकालने के बजाए तमाशबीन की तरह खड़े थे। इस रोपण की सुरक्षा के लिए बनाई गई पत्थरों की खखरी (सुरक्षा दीवार) जगह-जगह ढह चुकी है। महज तीन फिट ऊंची सुरक्षा दीवार मवेशियों को अंदर घुसने से रोक नहीं पा रही है। मौके पर बनाई गई पत्थर की दीवार मानक आकार में नहीं पाई गई। प्लांटेशन के अधिकांश पौधे मवेशी हजम कर चुके, जो कुछ शेष बचे हैं वे सूखे डंठल में तब्दील होकर उजड़े हुए चमन की गवाही दे रहे हैं।

इनका कहना है-

“आपके द्वारा कुड़रा के जंगल में अवैध कटाई होने के संबंध में पूर्व में प्रकाशित खबर में प्रयोग किया गया कत्लेआम शब्द आपत्तिजनक है। क्योंकि कुड़रा जंगल की जांच उड़नदस्ता दल से कराने पर वहां सिर्फ 4 सटकठा पेड़ों के 3-4 माह पुराने ठूंठ पाए गए। सागौन तो बिल्कुल भी नहीं मिला। अभी आपने प्लांटेशन में मवेशियों की अवैध चराई आदि के जो फोटोग्राफ्स भेजे हैं, मैं पहले उनकी जांच करवाऊंगा उसके बाद ही कुछ कहूंगा।”
धीरेन्द्र प्रताप सिंह, डीएफओ, उत्तर सामान्य वन मण्डल पन्ना।
“प्लांटेशन में यदि मवेशी चराई कर रहे हैं तो यह घोर आपत्तिजनक है, आपके द्वारा भेजे गए फोटोग्राफ्स मैंने मुख्य वन संरक्षक वृत छतरपुर को भेजकर कार्रवाई हेतु निर्देशित किया है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख इस समय खजुराहो में हैं, आप उनसे मिलकर स्थानीय मामलों की विस्तृत जानकारी दे सकते हैं।”
मनोज अग्रवाल, पीसीसीएफ, कैम्पा।