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Breaking News: पन्ना टाइगर रिजर्व में मेल टाइगर की संदिग्ध मौत, कंकाल की हालत में शव बरामद

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फाइल फोटो।

*         बाघ की मौत ने पार्क की गश्त और निगरानी व्यवस्था की खोली पोल

*        मुख्य मार्ग से 100 मीटर दूर जंगल में 10 दिन तक सड़ता रहा शव, सोता रहा पार्क प्रबंधन

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) टाइगर स्टेट मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में आज सुबह एक नर बाघ का शव मिला है। शव कंकाल की स्थिति में मिलने से बाघ की मौत लगभग 10 दिन पूर्व होने का अनुमान लगाया जा रहा है। प्रथम दृष्ट्या बाघ की मौत संदिग्ध परिस्थतियों में होना प्रतीत होता है। घटना पन्ना टाइगर रिजर्व के गंगऊ अभ्यारण अंतर्गत आने वाली कटरिया बीट के वन कक्ष क्रमांक पी-278 की है। रेंजर गंगऊ अभ्यारण सागर शुक्ला सुबह से ही वन अमले के साथ मौके पर मौजूद हैं। क्षेत्र संचालक बृजेन्द्र श्रीवास्तव एवं उप संचालक बीरेन्द्र कुमार पटेल को घटना की जानकारी दी जा चुकी है, लेकिन सुबह 10 बजे तक दोनों ही वरिष्ठ अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे थे। एक स्थानीय व्यक्ति ने जानकारी देते हुए बताया कि, बाघ की मौत मनौर-मझगवां (हिनौता) मुख्य मार्ग से महज 100 मीटर की दूरी पर जंगल में हुई है। मृत बाघ पूर्ण वयस्क बताया जा रहा है, जिसकी आयु लगभग 5-6 वर्ष हो सकती है।
इस घटना का सबसे चिंताजनक और विचारणीय पहलू यह है, पन्ना पार्क क्षेत्र में वन एवं वन्यजीवों की चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था और सतत सघन निगरानी का दावा करने वाले पीटीआर प्रबंधन को मेल टाइगर (नर बाघ) की संदिग्ध मौत की कई दिनों तक भनक तक नहीं लगी। मुख्य मार्ग किनारे चंद कदम की दूरी पर स्थित जंगल में प्रचंड गर्मी में लगभग 10 दिन तक बाघ का शव सड़ता रहा लेकिन संबंधित बीट गार्ड, सर्किल प्रभारी और रेंजर से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों को इसका पता नहीं चल सका। बाघ का शव कंकाल की हालत में मिलना पार्क प्रबंधन के निगरानी व्यवस्था से जुड़े दावों को खोखला साबित करता है। बता दें कि, पार्क के हिनौता स्थित प्रवेश द्वारा तक जाने वाले इस मार्ग से होकर पीटीआर के अधिकारी और मैदानी अमला प्रतिदिन कई बार गुजरता है लेकिन किसी को भी बाघ के सड़ते शव की दुर्गन्ध महसूस नहीं हुई।
फाइल फोटो।
सूत्र बताते हैं कि महुआ संग्रहण करने वाले एक ग्रामीण के द्वारा वन अमले को जंगल में टाइगर का शव मिलने की सूचना दी गई। कुछ देर बाद जैसे ही यह खबर फैली तो पन्ना टाइगर रिजर्व के घोर लापरवाह, नाकार और भ्रष्ट प्रबंधन में आंतरिक खलबली मच गई। समाचार लिखे जाने तक इस घटना की आधिकारिक तौर पर पुष्टि, बाघ की पहचान और उसके शरीर के विभिन्न महत्वपूर्ण अंगों की जानकारी के संबंध उप संचालक बीरेन्द्र कुमार पटेल से संपर्क करने का प्रयास किया गया। लेकिन कई बार रिंग बजने के बाद भी उनका फोन रिसीव नहीं हुआ।
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पद की हनक में कानून ध्वस्त: आईएफएस अफसर ने वन क्षेत्र में जेसीबी चलवाकर बनाया ‘गुप्त मार्ग’

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फाइल फोटो।

*       बिना अनुमति पहाड़ी काटी, बांस-भिर्रा उखाड़े; बाद में पत्र लिखने की बात

*        सौंदर्यीकरण के नाम पर निर्माण, नियमों की अनदेखी पर उठे गंभीर सवाल

*        वन संरक्षण अधिनियम 1980 की खुली अवहेलना, जिम्मेदार ही कटघरे में

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में वन एवं वन्यजीव संरक्षण की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी ही अब कानून की धज्जियां उड़ाते नजर आ रहे हैं। ताजा मामला न केवल वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि जब जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग ही नियमों को दरकिनार करें तो संरक्षण की पूरी व्यवस्था कितनी कमजोर पड़ जाती है। पन्ना टाइगर रिजर्व (PTR) के उप संचालक द्वारा अपने शासकीय बंगले से कार्यालय और मुख्य मार्ग तक आम लोगों की नजरों से बचकर आवागमन करने के लिए वन क्षेत्र में बिना अनुमति जेसीबी मशीन चलवाकर एक कच्चे “गुप्त मार्ग” का निर्माण कराया गया।
गुप्त मार्ग निर्माण के लिए जेसीबी मशीन से जड़ समेत उखड़वाए गए बांस-भिर्रा के झाड़।
इस दौरान वर्षों पुराने बांस-भिर्रा समेत कई वनस्पतियों को जड़ सहित उखाड़ दिया गया और संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्र की संरचना में व्यापक बदलाव कर दिया गया। मौके पर स्वयं उप संचालक अपने तीन रेंजरों के साथ मौजूद थे और जेसीबी चालक से अपनी देखरेख में कार्य करा रहे थे। पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक का कार्यालय परिसर उत्तर सामान्य वन मण्डल पन्ना अंतर्गत आता है। नियमानुसार कार्य कराने से पूर्व संबंधित वन मण्डल से अनुमति/अनापत्ति लेना अनिवार्य है। लेकिन पद की हनक में साहब ने उन नियम-कानूनों को ही जेसीबी तले रौंदते हुए निर्माण करा डाला कि जिनका पालन स्वयं करना तथा दूसरों से करवाना उनका पदीय दायित्व है। अपनी इस आपराधिक लापरवाही को उप संचालक पीटीआर वीरेन्द्र पटेल (IFS) ने स्वयं स्वीकार किया है।

छुट्टी के दिन निर्माण, मौके पर मौजूद रहे अधिकारी

पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र संचालक कार्यालय भवन के पीछे परिसर में अवैध रूप से मार्ग का निर्माण कार्य करवाकर स्थल की संरचना में व्यापक बदलाव किया गया।
घटनाक्रम शनिवार 18 अप्रैल का बताया जा रहा है। अवकाश के दिन दोपहर करीब 3 बजे जगात चौकी इलाके में स्थित क्षेत्र संचालक कार्यालय परिसर के पीछे पहाड़ी की ओर जेसीबी मशीन से तेजी से खुदाई कर रास्ता बनाया जा रहा था। यह पूरा क्षेत्र उत्तर वन मण्डल पन्ना की पन्ना रेंज के वन कक्ष क्रमांक पी-410 के अंतर्गत आता है। इसी दौरान मीडिया कर्मियों के अचानक मौके पर पहुंचने से हड़कंप मच गया और कुछ ही देर में जेसीबी मशीन को मौके से हटा दिया गया। इस मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि यह पूरा कार्य संबंधित वन मण्डल उत्तर पन्ना से आवश्यक अनुमति या अनापत्ति लिए बगैर मनमाने तरीके से कराया गया।
उप संचालक पन्ना टाइगर रिजर्व वीरेन्द्र पटेल जेसीबी मशीन से मौके पर सड़क निर्माण कार्य कराने के दौरान अपने तीन रेंजरों के साथ उपस्थित रहे।
उप संचालक ने स्वयं स्वीकार किया कि कार्य कराने से पहले उनके द्वारा आवश्यक अनुमति नहीं ली गई। मामला मीडिया के संज्ञान में आने पर अब वे पत्र लिखकर उत्तर वन मण्डल पन्ना से आवश्यक अनुमति शीघ्रता से प्राप्त करने की बात कर रहे हैं। इस स्वीकारोक्ति के बाद साहब को जब मामला बिगड़ने का एहसास हुआ तो अपनी अक्षम्य लापरवाही पर पर्दा डालते हुए उन्होंने कराए गए कार्य को “कार्यालय परिसर की सामान्य साफ-सफाई और सौंदर्यीकरण” योजना का हिस्सा बता दिया। लेकिन जिस पैमाने पर खुदाई और वनस्पतियों को उखाड़ा गया, वह इस दावे पर कई गंभीर सवाल खड़े करता है। बता दें कि कार्यस्थल पर उप संचालक अपने सहयोगी परिक्षेत्र अधिकारी हिनौता राजेन्द्र अरजरिया, परिक्षेत्र अधिकारी पन्ना कोर अजीत जाट एवं राहुल सिकरवार परिक्षेत्र अधिकारी पन्ना बफर के साथ मौजूद रहे।

सिर्फ साफ-सफाई या संरचना में बदलाव? 

संवेदनशील पहाड़ी की तलछट पर खुदाई करके कच्चे मार्ग का निर्माण कार्य करती जेसीबी मशीन।
पन्ना टाइगर रिजर्व के उप संचालक वीरेन्द्र पटेल (IFS) ने अपने कक्ष में मीडिया से बात करते हुए एक सवाल के जवाब में बताया, ऑफिस कैम्पस के सौंदर्यीकरण का कार्य मैं और समस्त विभागीय कर्मचारी मिलकर अपनी स्वेच्छा तथा स्वयं के खर्च से करा रहे हैं। इसके तहत पुराने बांस-भिर्रा, शो बबूल एवं झाड़ियों की साफ़-सफाई करवाकर छायादार-फलदार पौधे लगाए जाएंगे। रास्ते का निर्माण निरीक्षण पथ के तौर पर आवागमन के लिए किया जाएगा। लेकिन स्थल की वास्तविक स्थिति यह संकेत देती है कि यह सामान्य सफाई कार्य नहीं, बल्कि पहाड़ी क्षेत्र की भौगोलिक संरचना में हस्तक्षेप का मामला है। विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह की गतिविधियां भू-क्षरण को जन्म दे सकती है। सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या सफाई के नाम पर जेसीबी से खुदाई और बड़े पैमाने पर वनस्पतियों को उखाड़ना नियमों के अनुरूप माना जा सकता है, और क्या बिना अनुमति वन क्षेत्र में इस तरह का बदलाव वैध है? श्री पटेल ने स्पष्ट तौर पर स्वीकार किया कि उत्तर वन मण्डल से आवश्यक अनुमति/अनापत्ति लिए बगैर उक्त कार्य कराया जा रहा था, लेकिन अब पत्र लिखकर अनुमति प्राप्त करने की कही जा रही है।

‘गुप्त मार्ग’ की मंशा और विभागीय व्यवस्था पर सवाल

वन क्षेत्र में निर्माण कार्य कराने से पूर्व उत्तर वन मण्डल पन्ना से नियमानुसार आवश्यक अनुमति न लेकर वन संरक्षण कानून का गंभीर उल्लंघन किया गया। मार्ग निर्माण के लिए तोड़ी गई क्षेत्र संचालक कार्यालय पन्ना टाइगर रिजर्व की बाउंड्रीवॉल।
सूत्रों के मुताबिक यह मार्ग केवल निरीक्षण या सफाई के लिए नहीं, बल्कि उप संचालक के आवास से सीधे कार्यालय और आगे मुख्य सड़क तक पहुंच बनाने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा था। इसके लिए बाउंड्री वॉल तक तोड़ दी गई। जबकि पहले से एक सुगम पक्का मार्ग मौजूद है, ऐसे में इस नए रास्ते की आवश्यकता पर सवाल उठ रहे हैं। वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के तहत किसी भी वन भूमि के उपयोग में बदलाव, खुदाई या निर्माण के लिए पूर्व अनुमति अनिवार्य है। यहां न केवल इस प्रावधान की अनदेखी की गई, बल्कि युवा आईएफएस अफसर द्वारा स्वयं अपनी मौजूदगी में यह कार्य कराया गया, जिससे मामला और गंभीर हो जाता है। उप संचालक वीरेन्द्र पटेल (IFS) ने अपनी इस कारगुजारी को उजागर होने से रोकने के लिए खबर को प्रकाशित न करने का कई बार आग्रह किया। साथ ही मीडिया के बाहर निकलते ही कार्य बंद करवाकर तुरंत जेसीबी मशीन को मौके से हटवा दिया गया, जिससे पूरे घटनाक्रम पर संदेह और गहरा गया है।
बिना पूर्व अनुमति के वन क्षेत्र में मार्ग निर्माण कराने के संबंधी मीडिया के सवालों का पन्ना टाइगर रिजर्व के उप संचालक वीरेन्द्र पटेल ने जवाब दिया।
पन्ना टाइगर रिजर्व में हाल के महीनों में वनरक्षक द्वारा अवैध कटाई, फर्जी पर्यटक टिकट, कोर क्षेत्र में अवैध रिसोर्ट निर्माण और अन्य गंभीर गड़बड़ियों के मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे में यह घटना उस धारणा को और मजबूत करती है कि कहीं न कहीं वन संरक्षण की जिम्मेदारी संभालने वाले कतिपय वन कर्मचारी-अधिकारी  नियमों-कानूनों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। सवाल उठता है, जब वन संरक्षण की शपथ लेने वाले अधिकारी ही कानून का उल्लंघन करें, तो क्या जंगल सुरक्षित रह पाएंगे? क्या ऐसे मामलों में वास्तविक कार्रवाई होगी या सब कुछ कागजों तक सीमित रह जाएगा? यह प्रकरण अब केवल एक “गुप्त मार्ग” निर्माण का नहीं, बल्कि पूरे तंत्र की जवाबदेही की परीक्षा बन चुका है।

इनका कहना है-

“स्थल का निरीक्षण कर आवश्यक जानकारी प्राप्त की जाएगी। इसमें जो भी तथ्य निकलकर आएंगे उनके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।”

धीरेन्द्र प्रताप सिंह, डीएफओ, उत्तर सामान्य वन मण्डल पन्ना।

“आपके द्वारा भेजे गए वीडियो-फोटोग्राफ्स देखकर संबंधितों से वस्तुस्थिति की जानकारी लूंगा, इसके बाद ही कुछ बता पाऊंगा। मैं अपने स्तर से मामले को देखता हूं, लेकिन आप इस प्रकरण से पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ को भी अवगत करा दें।”

शुभरंजन सेन, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख, भोपाल।

“संबंधितों से इस प्रकरण पर बात करती हूं, भेजी गई सामग्री को देखूंगी। सच्चाई क्या है, जानकारी लेने के बाद ही कोई प्रतिक्रिया दे पाउंगी।”

समीता राजौरा, मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक, भोपाल।

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आमने-सामने भिड़ंत में बोलेरो नियो और मिनी ट्रक क्षतिग्रस्त, दो गंभीर घायल

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  तेज रफ्तार और स्पीड ब्रेकर न होना बना हादसे की वजह

देवीदीन कबीरदास, नरदहा।(www.radarnews.in) पन्ना जिले के दूरस्थ सीमावर्ती ग्राम नरदहा में कालिंजर-चित्रकूट मार्ग पर शुक्रवार दोपहर एक भीषण सड़क दुर्घटना हो गई, जिसमें बोलेरो नियो और एक मिनी ट्रक आमने-सामने टकरा गए। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बोलेरो का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, वहीं मिनी ट्रक को भी भारी नुकसान पहुंचा। हादसे में दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार घटना विंदा प्रसाद उर्फ छोटू के साइकिल रिपेयरिंग सेंटर के सामने शुक्रवार 17 अप्रैल को करीब 3:30 बजे हुई। बताया गया कि बोलेरो नियो कालिंजर की ओर से आ रही थी, जबकि मिनी ट्रक चित्रकूट की तरफ से तेज रफ्तार में आ रहा था। इसी दौरान दोनों वाहनों की आमने-सामने जोरदार भिड़ंत हो गई, जिससे तेज धमाका हुआ और आसपास अफरा-तफरी मच गई।
हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने तत्काल डायल 102 पर सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस चौकी के स्टाफ ने घायलों को एंबुलेंस की मदद से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अजयगढ़ भेजा। दुर्घटना में एक व्यक्ति के सिर में गंभीर चोट आई है और वह बेहोश हो गया, जबकि दूसरे व्यक्ति का पैर टूटने की जानकारी सामने आई है। ग्रामीणों ने बताया कि नरदहा के मुख्य मार्ग किनारे बस्ती आबाद होने के बावजूद स्पीड ब्रेकर नहीं हैं, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। उन्होंने प्रशासन से यहां जल्द से जल्द स्पीड ब्रेकर बनाने और सड़क सुरक्षा उपाय बढ़ाने की मांग की है। इधर चौकी नरदहा से प्राप्त जानकारी के आधार पर थाना धरमपुर पुलिस ने मामला दर्ज कर दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है।
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हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने पवई व अजयगढ़ में मीडिएशन सेंटर का ई-लोकार्पण किया

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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर भवन। (प्रतीकात्मक चित्र)

*          पवई में न्यायिक अधिकारियों के नवीन आवास भी हुए लोकार्पित

पन्ना।(www.radarnews.in) जिले की पवई और अजयगढ़ तहसील में बने नए मीडिएशन सेंटर तथा पवई में न्यायिक अधिकारियों के आवासीय भवनों का ई-लोकार्पण शुक्रवार शाम मुख्य अतिथि चीफ जस्टिस मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मुख्य संरक्षक संजीव सचदेवा के करकमलों से संपन्न हुआ। कार्यक्रम में न्यायपालिका के वरिष्ठ अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर चीफ जस्टिस श्री सचदेवा ने अपने उद्बोधन में कहा कि मीडिएशन सेंटर से विवादों का जल्दी और आपसी सहमति से समाधान संभव होगा। इससे न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ कम होने में मदद मिलेगी। न्यायिक अधिकारियों को बेहतर आवास मिलने से कार्यक्षमता बढ़ेगी एवं सेवाओं की गुणवत्ताओं में वृद्धि होगी।
तहसील विधिक सेवा समिति पवई और अजयगढ़ में तैयार मीडिएशन सेंटर तथा पवई में न्यायिक अधिकारियों के लिए बने आवासीय भवनों का ई-लोकार्पण 17 अप्रैल को शाम 5 बजे ऑनलाइन माध्यम से किया गया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा मुख्य अतिथि के रूप में जुड़े। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रशासनिक जज मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष विवेक रूसिया ने की, जबकि पोर्टफोलियो जज पन्ना देवनारायण मिश्रा विशेष रूप से उपस्थित रहे। तहसील पवई के मध्यस्थता केन्द्र के ई-लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान अध्यक्ष तहसील विधिक सेवा समिति पवई सोम पाण्डेय, न्यायिक मजिस्ट्रेट पुनीता चौहान, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण राजकुमार गौड़, अध्यक्ष अधिवक्ता संघ तहसील पवई राजेश कुमार नगायच सहित बड़ी संख्या में अधिवक्तागण, न्यायिक एवं विधिक सेवा प्राधिकरण के कर्मचारी एवं आईटी टीम भी उपस्थित थी।
तहसील अजयगढ़ के मध्यस्थता केन्द्र के ई-लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान तृतीय जिला न्यायाधीश अरविन्द शर्मा, अध्यक्ष तहसील विधिक सेवा समिति उपमा भार्गव, जिला विधिक सहायता अधिकारी अतुल सेन सहित बड़ी संख्या में अधिवक्तागण, लोक निर्माण विभाग पीआईयू के अनुविभागीय अधिकारी यशवंत सिंह, न्यायिक एवं विधिक सेवा प्राधिकरण के कर्मचारी भी उपस्थित रहे। तहसील पवई में न्यायिक अधिकारियों के लिये निर्मित आवासीय भवनों के ई-लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश शरतचन्द्र सक्सेना, विशेष न्यायाधीश प्रदीप कुशवाहा, न्यायिक मजिस्ट्रेट अमित शर्मा सहित पीडब्ल्यूडी, राजस्व, पुलिस विभाग के अधिकारीगण के साथ-साथ आईटी टीम एवं न्यायिक कर्मचारीगण भौतिक रूप से उपस्थित रहे।
चीफ जस्टिस, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर श्री सचदेवा ने ई-लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान अपने उद्बोधन में नवनिर्मित मध्यस्थता केन्द्रों, जिला न्यायालय एवं तहसील न्यायालयों के भवनों एवं न्यायिक अधिकारियों के आवासीय भवनों के निर्माण में सहयोग प्रदान करने वाले समस्त संबंधितों को शुभकामनाएं प्रदान कीं। साथ ही कहा कि भवन का निर्माण करना जितना महत्वपूर्ण है, उससे अधिक कहीं चुनौतीपूर्ण कार्य उसका सतत् संरक्षण एवं समुचित रखरखाव सुनिश्चित करना है। ज्ञात हो कि जहां मध्यस्थता केन्द्र विवादों के त्वरित, सुलभ एवं सौहार्दपूर्ण निस्तारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे तथा न्यायालयों में लंबित प्रकरणों के भार को कम करने में सहायक सिद्ध होंगे, वहीं न्यायिक अधिकारियों हेतु बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध होने से कार्यकुशलता एवं सेवाओं की गुणवत्ताओं में वृद्धि होगी।
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केन-बेतवा लिंक परियोजना: आश्वासन पर आंदोलन 10 दिन के लिए स्थगित, लेकिन बड़ी मांगों पर बना संशय

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केन-बेतवा लिंक परियोजना सहित अन्य सिंचाई परियोजनाओं से विस्थापित हो रहे ग्रामीणों ने प्रशासन द्वारा दिए गए आश्वासन पर सामूहिक चर्चा के बाद अपने आंदोलन को 10 दिन के लिए स्थगित कर दिया।

 12 दिन के सत्याग्रह के बाद विस्थापितों ने सर्वसम्मति से लिया निर्णय

  जल सत्याग्रह से चिता आंदोलन तक विरोध, अब प्रशासन के वादों का इम्तिहान

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना सहित बुंदेलखंड अंचल की अन्य सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित आदिवासी-किसानों का 12 दिन से जारी सत्याग्रह आंदोलन प्रशासन के साथ लंबी चर्चा और आश्वासनों के बाद गुरुवार को 10 दिनों के लिए स्थगित कर दिया गया है। हालांकि आंदोलन थमने के साथ ही यह सवाल भी प्रमुखता से उभरकर सामने आया है कि विस्थापितों द्वारा उठाई गई अहम मांगों पर वास्तव में अमल हो पाएगा या नहीं। पन्ना टाइगर रिजर्व के अंदर केन नदी के तट पर ढोड़न बांध निर्माण स्थल पर चले इस आंदोलन में हजारों ग्रामीणों की भागीदारी और लगातार दबाव के चलते प्रशासन को वार्ता के लिए आगे आना पड़ा। आंदोलन के दौरान धारा 163 (पूर्व में धारा 144) लागू रहने के बावजूद लोग डटे रहे और जल सत्याग्रह, मिट्टी सत्याग्रह, चिता आंदोलन, चूल्हा बंद और सांकेतिक फांसी जैसे तरीकों से प्रभावी विरोध दर्ज कराते हुए देश भर का ध्यान अपनी ओर खींचने में सफल रहा।

इन मांगों पर बनी सहमति

बुंदेलखंड अंचल के पन्ना एवं छतरपुर जिले में निर्माणाधीन सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित आदिवासी-किसानों की मांगों पर दोनों जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों और आंदोलनकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने विस्तृत चर्चा की।
सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित आदिवासी-किसानों एवं ग्रामीणों का आंदोलन जय किसान संगठन के बैनर तले चला। गुरुवार 16 अप्रैल की शाम संगठन के मीडिया सेल द्वारा प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जानकारी दी गई कि, पन्ना एवं छतरपुर जिले के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ लंबी चली बातचीत में कई बिंदुओं पर सहमति बनी है। जिनमें मुख्य रूप से
डिप्टी कलेक्टर/तहसीलदार स्तर के अधिकारियों द्वारा 7 दिन में पारदर्शी सर्वे पूरा करने का आश्वासन।
गांव के बदले गांव, विशेष पैकेज मुआवजा और कटऑफ डेट जैसे मुद्दों पर सहमति, जिन पर पर चर्चा होगी।
जिला प्रशासन ने पारदर्शी सर्वे सहित स्थानीय स्तर की अन्य मांगों पर तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी गई है, जबकि नीतिगत और बड़े फैसलों से जुड़े मुद्दों पर राज्य और केंद्र सरकार के जिम्मेदार अधिकारियों के साथ किसानों के प्रतिनिधिमंडल की बातचीत कराई जाएगी।

प्रशासन को अंतिम अवसर

केन-बेतवा लिंक सहित अन्य सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित ग्रामीणों ने ढोड़न बांध निर्माण स्थल पर 12 दिन के आंदोलन के दौरान सांकेतिक फांसी लगाकर विरोध-प्रदर्शन किया।
पूर्व में कई बार आश्वासन देकर प्रशासन के मुकरने के कारण आंदोलनकारियों में अविश्वास बना रहा, इसके बाद तय हुआ कि अगले दिन बैठकर प्रशासन के प्रस्ताव पर सभी से चर्चा की जाएगी। गुरुवार को आंदोलन स्थल पर बड़ी संख्या में सिंचाई परियोजनाओं से विस्थापित हो रहे परिवार एकत्र हुए और सामूहिक चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया कि मांगों के निराकरण पर कार्रवाई करने प्रशासन को अंतिम अवसर दिया जाए। इसलिए सर्वसम्मति से आंदोलन को 10 दिनों के लिए स्थगित कर दिया गया। बता दें कि इस आंदोलन में केन-बेतवा लिंक परियोजना, नैगुवां परियोजना, मझगांय और रुन्ज मध्यम सिंचाई परियोजना प्रभावित परिवारों की सक्रिय भागीदारी रही।

वादे पूरे नहीं हुए तो फिर होगा आंदोलन

केन-बेतवा लिंक सहित अन्य सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित ग्रामीणों ने 12 दिन तक ढोड़न बांध निर्माण स्थल पर अपनी मांगों को लेकर किये गए आंदोलन के दौरान अपने शरीर पर मिट्टी मलकर मिट्टी सत्याग्रह किया।
सामूहिक चर्चा के बाद आंदोलन को स्थगित करने का निर्णय लेने के दौरान बताया गया यदि मांगों पर ठोस प्रगति नहीं हुई, तो आगे की रणनीति 10 दिन बाद तय की जाएगी। विस्थापितों के सत्याग्रह का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने चेतावनी भरे शब्दों में स्पष्ट किया है कि “आंदोलन रुका है, खत्म नहीं हुआ। अगर इस बार भी आश्वासन पर अमल नहीं हुआ, तो और बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।” आंदोलन की समाप्ति पर उपस्थित लोगों ने केन नदी में उतरकर उसे साक्षी मानते हुए संकल्प लिया कि- वे जल, जंगल जमीन और आदिवासी अधिकारों पर किसी भी अन्याय को स्वीकार नहीं करेंगे। 10 दिनों तक प्रशासन का पूरा सहयोग करेंगे लेकिन यदि प्रशासन ने पुनः झूठे आश्वासन दिए तो इस बार आंदोलन और भी व्यापक और उग्र रूप से किया जाएगा। आंदोलन में पन्ना और छतरपुर जिले के हजारों आदिवासी, किसान और महिलाएं शामिल रहीं, जिन्होंने पूरे समय शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ता के साथ अपनी आवाज बुलंद की।

सवाल: क्या 10 दिन में हो पाएगा समाधान?

आंदोलन के दौरान जिन प्रमुख मांगों पर सहमति जताई गई है, वे सीधे तौर पर नीतिगत निर्णयों से जुड़ी हैं। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि भू-अर्जन, मुआवजा, पुर्नव्यवस्थापन और पुनर्वास पैकेज पहले से दिए जाने के बावजूद क्या वास्तव में विशेष पैकेज के रूप में मुआवजा बढ़ाया जाएगा। इसी तरह पन्ना और छतरपुर जिलों में अलग-अलग निर्धारित कटऑफ तिथियों को एक समान 1 अप्रैल 2026 करने का निर्णय लिया जाएगा या नहीं, और यदि लिया भी जाता है तो क्या यह सिर्फ केन-बेतवा लिंक परियोजना तक सीमित रहेगा या मझंगाय, रूंज और नैगुवां जैसी अन्य परियोजनाओं के विस्थापितों पर भी लागू होगा- यह स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। वहीं पुनर्वास पैकेज दिए जाने के बाद “गांव के बदले गांव” की मांग को स्वीकार किया जाएगा या नहीं, इस पर भी संशय बना हुआ है। इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या महज 10 दिनों की समयसीमा में इन व्यापक और जटिल मुद्दों पर कोई ठोस निर्णय संभव हो पाएगा, जबकि पूर्व में मिले आश्वासनों पर अमल न होने के कारण ही विस्थापितों को बार-बार आंदोलन का सहारा लेना पड़ा है। अब सबकी नजरें इस बात टिकी हैं कि 10 दिन बाद आंदोलनकारी क्या निर्णय लेते हैं।
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एमपी बोर्ड रिजल्ट: प्रदेश के फलक पर चमका पन्ना, प्रतिभा सिंह बनीं स्टेट टॉपर; 14 छात्र मेरिट लिस्ट में शामिल

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हाईस्कूल परीक्षा में मध्य प्रदेश की मेरिट सूची में पहला स्थान प्राप्त करने वाली पन्ना जिले की होनहार छात्रा प्रतिभा सिंह सोलंकी का गुनौर विधायक राजेश वर्मा ने सम्मान किया।
पन्ना।(www.radarnews.in) माध्यमिक शिक्षा मंडल मध्य प्रदेश भोपाल द्वारा कक्षा 10वीं के घोषित परीक्षा परिणाम में इस बार पन्ना जिले ने शानदार प्रदर्शन कर पूरे प्रदेश में अपनी अलग पहचान बनाई है। जिले की होनहार छात्रा प्रतिभा सिंह सोलंकी ने 500 में से 499 अंक प्राप्त कर प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। उनकी इस अभूतपूर्व सफलता ने न केवल पन्ना बल्कि पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित किया है। प्रतिभा सिंह की इस उपलब्धि के साथ ही पन्ना जिले के कुल 14 अन्य छात्रों ने भी स्टेट मेरिट लिस्ट में स्थान बनाकर जिले का नाम रोशन किया है। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में छात्रों का मेरिट में आना जिले के शिक्षा स्तर और विद्यार्थियों की मेहनत का प्रमाण माना जा रहा है। इस वर्ष जिले का हाईस्कूल (कक्षा 10वीं) परीक्षा परिणाम 77.78 प्रतिशत एवं हायर सेकेण्डरी (कक्षा 12वीं) का रिजल्ट 77.94 दर्ज किया गया।

500 में 499 अंक हासिल कर रचा कीर्तिमान

प्रतिभा सिंह सोलंकी ने कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा में लगभग पूर्णांक प्राप्त कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। उनकी इस विशिष्ट उपलब्धि से जिले में हर्ष और गर्व का माहौल है। बुधवार को रिजल्ट घोषित होने के बाद से ही होनहार बेटी को बधाई देने वालों का तांता लगा है। प्रतिभा सिंह सोलंकी पुत्री भारतेंदु सिंह सोलंकी, सरस्वती ज्ञान मंदिर हाईस्कूल की छात्रा हैं। उनकी इस सफलता के पीछे उनकी कड़ी मेहनत, अनुशासन और शिक्षकों का मार्गदर्शन महत्वपूर्ण रहा। परिवार और शिक्षकों ने भी इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए इसे जिले के लिए गर्व का क्षण बताया है।

8 किमी दूर जाकर की पढ़ाई, मेहनत ने दिलाई सफलता

हाई स्कूल परीक्षा की स्टेट टॉपर बनीं पन्ना की होनहार छात्रा प्रतिभा सिंह सोलंकी।
प्रतिभा के लिए यह सफलता आसान नहीं थी। उनके गांव हिनौती से स्कूल की दूरी लगभग 8 किलोमीटर है। वह प्रतिदिन बस से गुनौर स्थित सरस्वती ज्ञान मंदिर हाई स्कूल पढ़ने जाती थीं। कड़ी मेहनत, लगन और निरंतर अध्ययन के बल पर प्रतिभा ने प्रदेश में शीर्ष स्थान हासिल कर अपनी क्षमता को साबित किया है। प्रतिभा के पिता भारतेंद्र सिंह ग्राम रोजगार सहायक हैं, जबकि उनकी मां सरकारी टीचर हैं। परिवार ने उनकी पढ़ाई में पूरा सहयोग दिया। प्रतिभा ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता एवं शिक्षकों को दिया है। उन्होंने आगे चलकर यूपीएससी की तैयारी कर प्रशासनिक सेवा में जाने का लक्ष्य बताया है। सरस्वती ज्ञान मंदिर गुन्नौर के प्राचार्य मनीष सिंह यादव के अनुसार प्रदेश मेरिट सूची में 14 विद्यार्थियों में से विद्यालय के 8 छात्रों ने मेरिट सूची में स्थान बनाया है, जो स्कूल के लिए गर्व की बात है। खजुराहो सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने इस उपलब्धि पर फोन के माध्यम से बधाई दी। वहीं गुनौर विधायक डॉ. राजेश वर्मा प्रतिभा के घर पहुंचे जहां उन्होने होनहार बेटी प्रतिभा का सम्मान कर बधाई दी है।

14 छात्रों ने भी बढ़ाया पन्ना का मान

केवल एमपी टॉपर ही नहीं, बल्कि जिले के 14 कुल विद्यार्थियों ने मेरिट सूची में स्थान बनाकर यह साबित कर दिया कि हीरों की धरती पन्ना प्रतिभाओं से भरा हुआ है। इन विद्यार्थियों की सफलता ने यह संदेश दिया है कि छोटे जिलों के छात्र भी बड़े लक्ष्य हासिल करने में सक्षम हैं। इस शानदार परिणाम के बाद जिले में खुशी का माहौल है। प्रदेश की मेरिट सूची में प्रतिभा सिंह सोलंकी, पिता भारतेंदु सिंह सोलंकी, सरस्वती ज्ञान मंदिर हाई स्कूल, गुनौर 499 प्रथम स्थान, अर्जुन सिंह राजपूत, पिता मंगल सिंह राजपूत सरस्वती जान मंदिर हाई स्कूल, गुनौर 497 तृतीय स्थान, प्रियंका यादव, पिता नन्द किशोर यादव, शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय अजयगढ़ 496 चतुर्थ स्थान, उदय मित्रा, पिता राजेश मिश्रा, सरस्वती ज्ञान मंदिर हाई स्कूल गुनौर 496 चतुर्थ स्थान, हर्ष त्रिपाठी पिता रामफल त्रिपाठी सरस्वती ज्ञान मंदिर हाई स्कूल गुनौर 494 छठवां स्थान, विधान त्रिपाठी पिता रामेश्वर प्रसाद त्रिपाठी, सरस्वती ज्ञान मंदिर हाई स्कूल गुनौर 494 छठवां स्थान, आयुष तिवारी पिता रामराज तिवारी शा. हाई स्कूल गुखौर 493 सातवां स्थान, नमन मिश्रा पिता प्रमोद मिश्रा सरस्वती ज्ञान मंदिर हाई स्कूल गुनौर 492 आठवां स्थान आदित्य सोनी पिता राजेश सोनी शा. उमावि पहाड़ीखेरा 492 आठवां स्थान, नमन शुक्ला पिता देवेंद्र कुमार शुक्ला, शा. हाई स्कूल बड़ागांव 491 नौवां स्थान, नेहा प्रजापति पिता विधाधर प्रजापति सरस्वती ज्ञान मंदिर हाई स्कूल गुनौर 491 नौवां स्थान, प्रिंस सिंह राजपूत पिता हरिचरण सिंह राजपूत सरस्वती जान मंदिर हाई स्कूल गुनौर 490, अमर सिंह लोधी पिता राम स्वरूप सिंह लोधी नेशनल पब्लिक स्कूल पन्ना 490 दसवां स्थान, अवध बिहारी चौहान पिता राम दयाल लुनिया शासकीय हाई स्कूल गुखौर ने 490 अंकों के साथ दसवां स्थान अर्जित किया है। इस शानदार उपलब्धि पर पूरे जिले में जश्न ख़ुशी माहौल है। अभिभावकों, शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने सभी सफल विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

12वीं के दो विद्यार्थी प्रदेश की मेरिट में

हायर सेकेंडरी परिक्षा में कला संकाय की मेरिट लिस्ट में आठवां स्थान प्राप्त करने वाली छात्रा काजल द्विवेदी को विद्यालय स्टॉफ से सम्मानित किया।
माध्यमिक शिक्षा मण्डल मध्य प्रदेश भोपाल द्वारा बुधवार 15 अप्रैल को हाईस्कूल के साथ हायर सेकेण्डरी परीक्षा के भी नतीजे घोषित किये गए। हायर सेकेंडरी (कक्षा 12वीं) परीक्षा परिणाम में पन्ना जिले का प्रदर्शन अच्छा रहा। इस वर्ष जिले का कुल परीक्षा परिणाम 77.94 प्रतिशत रहा। विशेष उपलब्धि यह रही कि जिले के दो मेधावी छात्रों ने प्रदेश की मेरिट सूची स्थान बनाकर पन्ना का नाम रोशन किया है। होनहार छात्रा काजल द्विवेदी पिता विजय कुमार द्विवेदी शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय हरदी ने कला संकाय में कुल 500 में से 482 अंक हासिल कर प्रदेश की मेरिट में आठवां स्थान प्राप्त किया। जबकि नंदकिशोर पटेल पिता बृजकिशोर पटेल सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गुनौर ने विज्ञान और गणित संकाय में कुल 500 में से 483 अंक प्राप्त कर प्रदेश में दसवां स्थान हासिल किया है।
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केन-बेतवा लिंक परियोजना: ‘चिता आंदोलन’ के बीच प्रशासन का बड़ा फैसला, 15 अप्रैल से 4 गांवों को खाली कराने की कार्रवाई

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केन बेतवा लिंक परियोजना प्रभावित ग्रामों के वांशिदों द्वारा संयुक्त रूप से ढोड़न बांध स्थल पर चलाए जा रहे चिता आंदोलन का दृश्य।

*     मुआवजा भुगतान पूरा होने का दावा, वन विभाग को सौंपी जाएगी जमीन

*     पन्ना जिले के कटहरी बिलहटा, कोनी, मझौली और डोड़ी से शुरू होगा विस्थापन का पहला चरण

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) केन-बेतवा लिंक परियोजना से विस्थापित होने वाले पन्ना एवं छतरपुर जिले के डेढ़ दर्जन गांवों के वाशिंदों द्वारा संयुक्त रूप से किए जा रहे ‘चिता आंदोलन’ के बीच पन्ना जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाते हुए चार गांवों को खाली कराने की कार्रवाई 15 अप्रैल 2026 से शुरू करने का निर्णय लिया है। ढोड़न बांध स्थल पर बीते 9 दिनों से मुआवजा विसंगतियों और पुनर्वास की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे ग्रामीणों के बीच इस फैसले ने नई चिंता पैदा कर दी है। प्रशासन के अनुसार पहले चरण में ग्राम कटहरी बिलहटा, कोनी, मझौली और डोड़ी से ग्रामीणों को हटाया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इन गांवों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और प्रभावित परिवारों को मुआवजा भी वितरित किया जा चुका है। साथ ही, मानवीय आधार पर मकान और खेत खाली करने के लिए दी गई मोहलत भी अब समाप्त हो चुकी है। ऐसे में अब इन गांवों की भूमि और परिसंपत्तियों को खाली कराकर वन विभाग, पन्ना टाइगर रिजर्व (PTR) को सौंपा जाएगा।

पहले से दी गई थी चेतावनी

प्रशासन द्वारा जारी सूचना के मुताबिक 15 अप्रैल को सुबह 9 बजे से संबंधित गांवों में जमीन, मकान और अन्य परिसंपत्तियों को खाली कराने की कार्रवाई शुरू की जाएगी। अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कार्यालय पन्ना की ओर से सार्वजनिक सूचना जारी कर ग्रामीणों को पूर्व में ही अपने कब्जे हटाने के लिए निर्देशित किया गया था। पन्ना एसडीएम संजय कुमार नागवंशी ने स्पष्ट किया है कि अधिग्रहण के बाद संपत्ति खाली नहीं करने की स्थिति में प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी और किसी भी प्रकार की हानि के लिए संबंधित व्यक्ति स्वयं जिम्मेदार होंगे। इसके साथ ही ग्राम स्तर पर मुनादी कराकर और सार्वजनिक स्थानों पर सूचना चस्पा कर लोगों को अवगत कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। इस निर्णय के बीच एक ओर जहां प्रशासन मुआवजा प्रक्रिया पूरी होने का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रभावित ग्रामीण पुनर्वास और मुआवजे में पारदर्शिता की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं, जिससे आने वाले दिनों में स्थिति और संवेदनशील होने की संभावना बनी हुई है।
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केन की लहरों पर ‘चिताएं’, 18 गांवों की जलसमाधि; विस्थापितों की मांग- हमें नया गांव दो या मार दो

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केन-बेतवा लिंक परियोजना प्रभावित आदिवासी और ग्रामीणों का ढोड़न बांध स्थल पर केन नदी में अपनी चिता पर लेटकर आंदोलन-प्रदर्शन आठवें दिन भी जारी रहा।

*      केन-बेतवा लिंक परियोजना विस्थापितों के “चिता आंदोलन” 8वां दिन

*      भूख हड़ताल से तेज हुआ आंदोलन, हजारों घरों में नहीं जला चूल्हा

*      धारा 163 की सख्ती के बीच नदी में उतरे ग्रामीण, महिलाएं-बच्चे भी मोर्चे पर

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) बुंदेलखंड अंचल की जीवनदायनी केन नदी इन दिनों एक ऐसे ऐतिहासिक सत्याग्रह की साक्षी बन गई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। केन-बेतवा लिंक परियोजना से विस्थापित हो रहे पन्ना और छतरपुर जिले के 18 गांवों के हजारों आदिवासी और ग्रामीण नदी की लहरों के बीच लकड़ियों से बनी प्रतीकात्मक चिताओं पर लेटकर जलसमाधि लेने के संकल्प के साथ आंदोलन कर रहे हैं। उनकी आवाज साफ है- “हमें न्याय दो या फिर मौत दो।” आंदोलन के आठवें दिन रविववार को यह संघर्ष अपने चरम पर पहुंच गया, जब हजारों परिवारों ने सामूहिक भूख हड़ताल करते हुए अपने घरों में चूल्हा तक नहीं जलाया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने अन्न त्यागकर यह संदेश देने की कोशिश की कि वे सिर्फ मुआवजा नहीं, बल्कि सम्मानजनक पुनर्वास के तहत गांव के बदले गांव चाहते हैं।
निर्माणाधीन ढोड़न बांध स्थल पर चल रहे विस्थापितों के आंदोलन के तेज होने के साथ ही इसे दबाने के लिए सरकारी मशीनरी सक्रिय हो चुकी है। छतरपुर जिला मजिस्ट्रेट की ओर से क्षेत्र में धारा 163 लागू कर सख्ती बढ़ा दी गई है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर के विरुद्ध पन्ना टाइगर रिजर्व द्वारा वन अपराध दर्ज कर लिया गया है। आंदोलन स्थल पर भीड़ को पहुंचने से रोकने के लिए पन्ना टाइगर रिजर्व के भुसौर गेट की नाकेबंदी कर बाहर से आने वालों के प्रवेश पर रोक लगा दी है। आंदोलन स्थल तक राशन-पानी व चिकित्सा सुविधा पहुंचने में बाधाओं के आरोपों के बीच यह संघर्ष अब मानवीय संकट का रूप लेता जा रहा है।

दर्द और विरोध का चरम

केन नदी का यह दृश्य किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को भीतर तक विचलित कर देता है। नदी के बीचों-बीच सजी चिताओं पर लेटे ग्रामीण मानो अपने ही अस्तित्व के अंत की प्रतीक्षा कर रहे हों। महिलाएं अपने दुधमुंहे बच्चों को सीने से लगाए, झुलसा देने वाली धूप-गर्मी और भूख-प्यास के बीच डटी हैं। चारों ओर गूंजते नारे- “न्याय दो या मौत दो” इस आंदोलन को सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि एक भावनात्मक पुकार बना देते हैं। यह दृश्य साफ कर देता है कि यह लड़ाई अब जमीन से आगे बढ़कर अस्मिता और अस्तित्व की हो चुकी है। उल्लेखनीय है कि देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना अंतर्गत केन बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना के तहत पन्ना टाइगर रिजर्व के अंदर केन नदी पर ढोड़न बांध का निर्माण किया जा रहा है। छतरपुर जिले की बिजावर तहसील के अंतर्गत आने वाले इस विशाल बांध में छतरपुर के 8 गांव डूब में आ रहे हैं। वहीं परियोजना के तहत डूब से प्रभावित वन भूमि के बदले पन्ना जिले के 10 ग्रामों में भू-अर्जन कर ग्रामीणों को विस्थापित किया जा रहा है।

“हक नहीं, सिर्फ कोरे आश्वासन मिले

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर प्रशासन पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि पन्ना और छतरपुर जिले में भूमि अधिग्रहण की कानूनी प्रक्रियाओं का सही तरीके से पालन नहीं किया गया और ग्राम सभाओं के दस्तावेजों में भी पारदर्शिता नहीं है। केन बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना अंतर्गत बांध निर्माण के लिए और प्रभावित वन भूमि के बदले भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 सही तरीके से लागू नहीं किया गया। दोनों जिलों में 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले प्रभावित परिवारों के सदस्यों को साढे़ 12 लाख रूपए का पुनर्वास पैकेज प्रदान करने के लिए अलग-अलग समय-सीमा निर्धारित की गई। इस अन्यायपूर्ण व्यवस्था के चलते विस्थापित हो रहे सैंकड़ों पात्र व्यक्ति व्यक्ति पुनर्वास पैकेज से वंचित हो जाएंगे। अमित का आरोप है प्रशासन विस्थापितों की समस्याओं और मांगों का निराकरण करने के बजाए कोरे आश्वासन दे रहा है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि उन्हें उचित पुनर्वास के बजाय सिर्फ अधूरा मुआवजा देकर हटाने की कोशिश की जा रही है। वे स्पष्ट रूप से गांव के बदले गांव की मांग पर अड़े हुए हैं, ताकि उनकी सामाजिक संरचना और जीवनशैली सुरक्षित रह सके। भूख हड़ताल को वे अपनी मजबूरी बताते हैं। उनका कहना है कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा, यह संघर्ष और तेज होता जाएगा।

विकास बनाम अस्तित्व की जंग

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर उस बहस को जिंदा कर दिया है, जिसमें विकास और विस्थापन आमने-सामने खड़े नजर आते हैं। सरकार जहां केन-बेतवा लिंक परियोजना को बुंदेलखंड के जल संकट के समाधान के रूप में पेश कर रही है, वहीं स्थानीय आदिवासी-किसान इसे अपने जल, जंगल और जमीन पर हमला मान रहे हैं। छतरपुर कलेक्टर पार्थ जैसवाल का दावा है कि अधिकांश प्रभावितों को मुआवजा दिया जा चुका है और कानून-व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है। इसी के तहत धारा 163 लागू कर दी गई है और किसी भी तरह की भीड़ या विरोध पर रोक लगाई गई है। लेकिन दूसरी ओर, आंदोलनकारी इसे दमनात्मक कार्रवाई मानते हुए आरोप लगा रहे हैं कि उनकी आवाज को दबाने के लिए सख्ती की जा रही है। केन नदी की लहरों पर लेटी ये प्रतीकात्मक ‘चिताएं’ आज सिर्फ एक आंदोलन का हिस्सा नहीं, बल्कि उस पीड़ा का प्रतीक बन चुकी हैं, जिसे हजारों लोग अपने भीतर लिए बैठे हैं। एक ओर विकास की बड़ी तस्वीर है, तो दूसरी ओर उजड़ते घरों की हकीकत। ऐसे में सवाल यही उठता है- ‘क्या इन लोगों को उनका हक और सम्मानजनक पुनर्वास मिलेगा, या केन की धार में उनकी यह पुकार यूं ही गूंजती रह जाएगी’?

बातचीत बेनतीजा, जारी रहेगा आंदोलन

पन्ना एसडीएम ने केन-बेतवा लिंक परियोजना प्रभावितों से बातचीत कर मांगों के निराकरण का आश्वासन देते हुए आंदोलन समाप्त करने की अपील की।
जय किसान संगठन के बैनर तले चल रहे केन-बेतवा लिंक परियोजना प्रभावितों के आंदोलन ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। सप्ताह भर से जारी ‘चिता आंदोलन’ के बीच आज हजारों परिवारों के घरों में चूल्हा न जलने की खबर के बाद दोपहर में पन्ना से एसडीएम संजय कुमार नागवंशी, अजयगढ़ एसडीएम आलोक मार्को और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने भारी पुलिस बल के साथ आंदोलन स्थल ढोड़न बांध पहुंचकर आंदोलनकारियों से चर्चा की। पन्ना एसडीएम ने चिताओं पर लेटी महिलाओं से आंदोलन खत्म करने और भूख हड़ताल तोड़ने की अपील की। उन्होंने आश्वासन दिया कि शासन-प्रशासन उनकी समस्याओं को सुनने और निराकरण करने लिए तैयार है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने अधिकारियों के सामने ग्रामीणों का पक्ष रखते हुए सीधा सवाल किया कि धारा 11, 15, 18 और 19 के तहत विस्थापन की जो वैधानिक प्रक्रिया होनी चाहिए थी, उसे दरकिनार क्यों किया गया? उन्होंने मांग की कि अगर कोई ग्राम सभा हुई है, तो उसके दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं। वहीं ग्रामीणों ने अधिकारियों से कहा कि वे पिछले कई वर्षों से केवल ‘झूठे आश्वासन’ सुन रहे हैं। जब तक जमीन पर ठोस कार्यवाही और पूर्ण न्याय नहीं दिखता, वे बांध स्थल पर ही अपनी जान दे देंगे लेकिन वहां से नहीं हटेंगे। देर शाम तक अधिकारियों और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत का कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका। गतिरोध बरकरार रहने से अधिकारी वापस लौट गए।
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पौधारोपण में ‘पैसों की खेती’! गड्ढों से लेकर फेंसिंग तक हुआ करोड़ों का वारा-न्यारा

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वन परिक्षेत्र धरमपुर के नरदहा सर्किल अंतर्गत बीट कुड़रा में पौधारोपण के लिए गड्ढों की खुदाई श्रमिकों के बजाए ट्रैक्टरों से कराई गई। पौधारोपण कार्यों में हुए फर्जीवाड़े का सबूत हैं गोलाकार गड्ढे।

   मशीनों से काम कराकर श्रमिकों के नाम फर्जी भुगतान

   पुराने वृक्षों के बीच पौधारोपण, स्थल चयन पर उठे सवाल

*      उत्तर वन मण्डल पन्ना अंतर्गत कैम्पा और आरडीएफ वृक्षारोपण में भ्रष्टाचार

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में उत्तर वन मण्डल अंतर्गत विभागीय कार्यों के बजट बंदरबांट का अभियान काफी लंबे समय से लगातार चल रहा है। सरकारी धन की लूट-खसोट का सीधा असर विभाग द्वारा कराए जाने वाले निर्माण सहित पौधरोपण कार्यों की गुणवत्ता पर पड़ रहा है। पौधारोपण कार्य अब पर्यावरण संरक्षण के बजाए ‘पैसों की खेती’ का जरिया बनते नजर आ रहे हैं। अटल भूजल योजना अंतर्गत तालाबों के निर्माण में सामने आए भ्रष्टाचार का मुद्दा अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि अब कैम्पा और आरडीएफ मद से कराए गए पौधारोपण (वृक्षारोपण) तैयारी कार्यों में भी बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की परतें खुलने लगी हैं। तालाब और परकोलेशन पिट निर्माण की तर्ज पर पौधारोपण कार्यों में भी कुल स्वीकृत राशि का धरातल पर 50 फीसदी से भी कम खर्च करने के चक्कर में मजदूरों का काम ठेके पर मशीनों से कराया गया।
वन परिक्षेत्र अजयगढ़ की बीट सिमरा में कैम्पा मद पौधारोपण कराने के लिए स्थल सफाई कराए बगैर ठेके पर ट्रैक्टरों से गोल गड्ढों की खुदाई करा दी।
उत्तर वन मण्डल पन्ना अंतर्गत आने वाली समस्त रेन्जों में आगामी मानसून सीजन में करीब आधा सैंकड़ा स्थानों पर लाखों पौधे रोपित करने के लिए ट्रेक्टरों से गोलाकार गड्ढों की खुदाई करा दी गई। जबकि गड्ढों की खुदाई वर्गाकार आकृति में की होनी थी। अपवाद स्वरूप कुछेक बीटों को छोड़ दें शेष सभी जगह नजर आ रहे पौधारोपण के गोल गड्ढे खुद ही भ्रष्टाचार की गवाही दे रहे हैं। कार्य प्रभारी बीटगार्ड से लेकर डीएफओ की मिलीभगत के चलते गड्ढों की खुदाई खुलेआम ट्रैक्टरों से कराने के बाबजूद मजदूरों के नाम बनाए गए करोड़ों रुपए के फर्जी प्रमाणकों का भुगतान हो गया। मामला मीडिया के संज्ञान में आने पर अंदरखाने मचे हड़कंप के चलते अब कुछ स्थानों पर गोल गड्ढों का गोलमाल छिपाने मजदूर लगाकार गड्ढों को निर्धारित आकृति (आकार) देने का कार्य ठेके पर कराया जा रहा है। पौधारोपण तैयारी कार्यों व्यापक पैमाने पर की गई धांधली सिर्फ गड्ढों तक सीमित नहीं, यह स्थल चयन से शुरू होकर चेन लिंक फेंसिंग मटेरियल की गुणवत्ता तक जाती है।

स्थल चयन की स्वीकृति पर सवाल

वन परिक्षेत्र धरमपुर के नरदहा सर्किल अंतर्गत बीट नरदहा में पहले से लगे पेड़ों के बीच नए पौधारोपण के लिए गड्ढों की खुदाई कराई गई।
उत्तर वन मण्डल पन्ना के वन परिक्षेत्र धरमपुर में सर्किल नरदहा अंतर्गत ग्राम नरदहा से सटे वन क्षेत्र में पौधारोपण के लिए जिस स्थल का चयन किया गया है वहां पहले से 15 से 20 वर्ष पुराने पेड़ अच्छी-खासी तादाद में खड़े हैं। पहले से खड़े वृक्षों के आसपास या बीच में खाली जगह पर नए पौधे रोपित करने गड्ढों की खुदाई के पूर्व खरपतवार हटाने स्थल सफाई तक नहीं कराई गई। इतना ही ज्यादा से ज्यादा गड्ढे खोदने के चक्कर में उनके बीच निर्धारित दूरी का मापदंड यहां मजाक बन चुका है। गड्ढों की लंबाई, चौड़ाई और गहराई भी एक समान नहीं है।
वन परिक्षेत्र धरमपुर के नरदहा सर्किल अंतर्गत छनिहापुरवा में पुराने सघन जंगल के बीच में रिक्त भूमि को नए पौधारोपण के लिए चुना गया।
नरदहा बीट में ही छनिहपुरवा गांव के सिंचाई जलाशय के बगल में भी जहां 20 से 50 वर्ष पुराने वृक्षों का घना जंगल खड़ा है वहां बीच-बीच में रिक्त स्थान पर गड्ढों की खुदाई करवाकर आगामी बारिश के सीजन पौधे रोपित कराने की तैयारी चल रही है। वन विभाग के जानकार उक्त दोनों स्थानों पर पौधारोपण कार्यों को स्वीकृति मिलने पर ही सवाल उठा रहे हैं। उनका मानना है कि, स्थानीय अधिकारियों के द्वारा ज्यादा से ज्यादा पौधारोपण कार्य स्वीकृत करवाकर नोट छापने के लिए भोपाल में बैठे वन विभाग के शीर्ष अधिकारियों को गुमराह किया। दोनों ही जगह पौधों की सुरक्षा पुख्ता करने खड़े किए गए सीमेंट पोल और सुरक्षा जाली की गुणवत्ता भी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है।

ट्रैक्टरों से कराई गड्ढों की खुदाई

विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार वन परिक्षेत्र अजयगढ़ की बीट बरकोला में 20 हेक्टेयर, बीट सिमरा 50 हेक्टेयर और वन परिक्षेत्र धरमपुर की बीट कुड़रा में 40 हेक्टेयर वन भूमि पर कैम्पा मद से वृक्षरोपण कराने के लिए पिछले माह ट्रैक्टर लगवाकर ठेके पर हजारों गड्ढे खुदवाए गए। सूत्रों ने बताया कि ट्रैक्टर से प्रत्येक गड्ढे की खुदाई का ठेका साइज के हिसाब से 3 से 4 रुपए में दिया गया। जबकि मजदूरों (श्रमिकों) के नाम पर बनाए गए फर्जी प्रमाणकों में प्रत्येक गड्ढे की खुदाई की मजदूरी न्यूनतम 12-13 रुपए से लेकर अधिकतम 25 रुपए तक दर्ज की गई। ठेके पर मशीनों से काम करवाने के बाद कार्य प्रभारी बीटगार्ड, संबंधित सर्किल प्रभारी और रेंजरों सुनियोजित तरीके से अपने विश्वासपात्र तथा करीबी लोगों के नाम बिल-बाउचर (प्रमाणक) में मजदूरी करने वाले श्रमिकों के रूप दर्ज कर दिए। ताकि उनके खातों में होने वाले मजदूरी भुगतान की राशि आसानी से उन तक पहुंच सके।
वन परिक्षेत्र धरमपुर के नरदहा सर्किल अंतर्गत छनिहापुरवा में सिंचाई जलाशय के समीप कराए जा रहे पौधारोपण की फेंसिंग सामग्री मानक स्तर की नहीं।
फील्ड में हुए कार्यों की सच्चाई जांनने के बाद भी डीएफओ साहब ने समाप्त हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतिम माह पौधारोपण तैयारी कार्य के करोड़ों रुपए के प्रमाणकों का भुगतान कर दिया। जबकि इन बीटों में भी चेन लिंक फेंसिंग में लगाए गए सीमेंट पोल और लोहे की जाली आदि सामग्री की गुणवत्ता मानक स्तर की नहीं है। पौधारोपण स्थल पर तालाब और परकुलेशन पिट का निर्माण कार्य भी पूर्णतः मशीनों से ही कराया गया। बता दें कि इसके पूर्व रडार न्यूज़ ने वन परिक्षेत्र अजयगढ़ की बीट धवारी, टौरिया और देवरभापतपुर में स्वीकृत पौधारोपण हेतु ट्रैक्टरों से ठेके पर हजारों की तादाद में गोल गड्ढों की खुदाई के मामले को उजागर किया था।

जानकारी मांगने पर अफसरों से साधी चुप्पी

उत्तर वन मण्डल कार्यालय पन्ना। (फाइल फोटो)
उल्लेखनीय है कि, जब इस मामले से संबंधित अधिकारियों से जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया गया तो अजयगढ़-धरमपुर रेंजर से लेकर एसडीओ, डीएफओ धीरेन्द्र प्रताप सिंह और मुख्य वन संरक्षक वृत छतरपुर नरेश यादव तक ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। पौधरोपण तैयारी कार्यों में हुई अनियमितताओं को लेकर खबर प्रकाशित करने के लिए आवशयक बुनियादी जानकारी मसलन प्रोजेक्ट रिपोर्ट अनुसार उक्त कार्यों की लागत, रोपित किए जाने वाले पौधों की संख्या, क्षेत्रफल और अब तक व्यय हुई राशि आदि का डिटेल जानने जब उक्त अधिकारियों से संपर्क किया गया तो उनकी प्रतिक्रिया ऐसी थी जैसे कि उन्हें ‘सांप सूंघ गया हो’। करीब 2 सप्ताह से जानकारी देने में आनाकानी और टालमटोल करते हुए रेंज अफसर अब अपने अधीनस्थों से कई तरह के संदेश पहुंचा रहे हैं। फोन कॉल, व्हाट्सएप्प पर और समक्ष में उपस्थित होकर जानकारी मांगे जाने के बाबजूद जानकारी नहीं दी गई। अधिकारियों की यह चुप्पी न सिर्फ पूरे मामले को संदिग्ध बनाती है बल्कि शासकीय कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही के दावों पर भी प्रश्नचिन्ह खड़े करती है।
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तेल का खेल! पार्ट-1: जल संसाधन संभाग पन्ना में 29 लाख का घोटाला

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कार्यालय कार्यपालन यंत्री जल संसाधन संभाग पन्ना। (फाइल फोटो)

*     कार्यपालन यंत्री पर नियमों की अनदेखी कर व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने का आरोप

*      52 माह तक बिना बिल के डीजल का हुआ भुगतान, ईएनसी के निर्देशों की खुली अवहेलना

*     एक ही कार्यालय में वाहनों के लिए डीजल भुगतान में अपनाई जा रही अलग-अलग प्रक्रिया

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) गुणवत्ताहीन निर्माण कार्यों एवं आर्थिक अनियमितता के लिए बदनाम कार्यालय जल संसाधन संभाग पन्ना में बड़ा घोटाला उजागर हुआ है। कार्यपालन यंत्री सतीष शर्मा पर व्यक्ति विशेष को आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए गंभीर वित्तीय अनियमितता करने के आरोप लगे हैं। विभागीय दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि कार्यपालन यंत्री द्वारा अपने स्वयं के उपयोग के लिए लगाए गए वाहन के भुगतान में शासन के स्पष्ट नियमों और प्रमुख अभियंता के निर्देशों की जानबूझकर अनदेखी कर 29.55 लाख रुपए से अधिक राशि का भुगतान किया गया। जबकि कार्यालयीन अनुविभागीय अधिकारियों (एसडीओ) के लिए लगाए गए वाहनों के डीजल भुगतान में अलग प्रक्रिया अपनाई जा रही है। दस्तावेजों की जांच में यह तथ्य सामने आया है कि कार्यपालन यंत्री द्वारा वाहन के प्रत्येक मासिक भुगतान में डीजल देयकों (बिल) को कार्यालय में उपलब्ध नहीं कराया जाता। बिल प्रस्तुत कराए बिना ही वाहन का कुल भुगतान (मासिक किराया+डीजल) निर्धारित लिमिट के आधार पर लगातार वाहन मालिक के खाते में किया जाता रहा है। यह गड़बड़झाला पिछले 52 माह से चल रहा था।

ईएनसी ने दिशा-निर्देशों की अवहेलना

शासकीय कार्य हेतु टैक्सी/वाहन किराए पर लिए जाने के संबंध में कार्यालय प्रमुख अभियंता, जल संसाधन विभाग, भोपाल (म.प्र.) द्वारा पत्र क्र. 333/4/759/भू. अ./2011 भोपाल, दिनांक 09 सितंबर 2011 को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इस पत्र में बताया गया है शासकीय वाहन उपलब्ध न होने पर किराए पर वाहन अधीक्षण यंत्री की अनुमति से लगाए जा सकते हैं। जिसमें कार्यपालन यंत्री तथा अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओ) के लिए वाहन पर डीजल एवं किराया का कुल मासिक व्यय की अधिकतम लिमिट क्रमशः 630D/550D निर्धारित की गई है। 24 शर्तों वाले पत्र में स्पष्ट किया गया है कि ‘D’ का अर्थ अधीक्षण यंत्री के मुख्यालय पर उपलब्ध न्यूनतम डीजल दर प्रति लीटर टैक्स सहित है। पत्र के बिंदु क्रमांक 2 में स्पष्ट उल्लेख है, प्रमुख अभियंता एवं शासन के आदेशों में कहीं विरोधाभास होने पर शासन के आदेश का पालन किया जाएगा। इसी तरह बिंदु क्रमांक 6 में कहा गया है ‘वाहन का मालिक विभाग के किसी भी प्रथम अथवा द्वितीय श्रेणी अधिकारी का निकट या दूर का रिश्तेदार नहीं होना चाहिए। यदि रिश्तेदार होना पाया जाता है, तो भुगतान किए गए किराए की दुगुनी राशि सिंचाई राजस्व में उस अधिकारी के वेतन से जमा कराई जाएगी साथ ही दंडित भी किया जाएगा।’

52 माह तक लगातार बिना बिल के 29 लाख का भुगतान

कार्यपालन यंत्री सतीष शर्मा ने जल संसाधन संभाग पन्ना में माह अगस्त 2021 को अपनी पदस्थापना के बाद से ही हद दर्जे की मनमानी करते हुए तेल का खेल शुरू कर दिया था। मुख्य अभियंता कार्यालय सागर के एक विश्वसनीय सूत्र से प्राप्त दस्तावेजों को देखने से पता चलता है शर्मा द्वारा अपने स्वयं के लिए लगाए गए वाहन के प्रत्येक मासिक भुगतान में डीजल के बिलों को कार्यालय में उपलब्ध नहीं कराया जाता। डीजल के बिल प्रस्तुत कराए बगैर ही माह सितंबर 2021 से वाहन का कुल भुगतान (वाहन किराया+डीजल) 630D की लिमिट के आधार पर वाहन मालिक के खाते में माह दिसंबर 2025 तक लगातार किया जाता रहा है। कार्यपालन यंत्री द्वारा अपने लिए लगाए गए वाहन के मासिक भुगतान में प्रमुख अभियंता के निर्देशों की खुली अवहेलना की गई। डीजल के बिल कार्यालय में उपलब्ध कराए बगैर ही 52 माह का कुल भुगतान (वाहन किराया+डीजल) रुपए 29,55,996/- किसी व्यक्ति विशेष (वाहन मालिक) के खाते में किया गया। जबकि नियमानुसार वाहन के डीजल के बिल कार्यालय में उपलब्ध कराए जाने के बाद संबंधित पेट्रोल पम्प मालिक को इसका भुगतान किया जाना चाहिए था। कार्यपालन यंत्री की इस मेहरबानी के मद्देनजर वाहन मालिक उनका नजदीकी या दूर का रिश्तेदार होने की संभावना जताई जा रही है। बता दें कि, शर्मा साहब की ससुराल ग्वालियर क्षेत्र में है, पन्ना में उनकी पदस्थी के बाद से ही जिले के जल संसाधन विभाग में ग्वालियर-चंबल अंचल के ठेकेदारों का दखल लगातार बढ़ता जा रहा है।

भुगतान की अलग-अलग प्रक्रिया पर सवाल

जल संसाधन संभाग पन्ना में किराए पर लगाए गए वाहनों के भुगतान में नियम विरुद्ध अलग-अलग प्रक्रिया अपनाए जाने पर कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कार्यपालन यंत्री द्वारा स्वयं को नियम-निर्देशों से ऊपर रखते हुए अपने लिए लगाए गए वाहन के डीजल बिल कार्यालय में उपलब्ध कराए बिना ही 52 माह का कुल भुगतान (वाहन किराया+डीजल) रुपए 29,55,996/- किसी व्यक्ति विशेष के खाते में लगातार किया जाता रहा है। वहीं कार्यालयीन अनुविभागीय अधिकारियों (एसडीओ) के लिए लगाए गए वाहनों का किराया रुपए 26,950/- प्रतिमाह तथा मासिक डीजल का भुगतान क्रमशः वाहन मालिक और डीजल के बिल कार्यालय में उपलब्ध कराए जाने के उपरांत संबंधित पेट्रोल पम्प मालिक के खाते में किया जा रहा है। अर्थात एक ही कार्यालय में वाहनों के डीजल की भुगतान की अलग-अलग प्रक्रिया अपनाए जाने से नियम-निर्देशों का मजाक उड़ रहा है। कार्यपालन यंत्री द्वारा वाहन मालिक को मासिक किराया के साथ वाहन के डीजल का नियम विरुद्ध भुगतान करके व्यक्ति विशेष (वाहन मालिक) को सीधे तौर पर आर्थिक लाभ पहुंचाया गया। उनका यह कृत्य अनियमित भुगतान के साथ शासकीय निधि के दुरूपयोग की श्रेणी में आता है।

भ्रष्टाचार को नजरअंदाज कर रहे शीर्ष अधिकारी

गंभीर वित्तीय अनियमितता के इस मामले की सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि, कार्यपालन यंत्री की कारगुजारी का कच्चा चिट्ठा सप्रमाण जनवरी 2026 में प्रमुख अभियंता भोपाल तथा मुख्य अभियंता सागर को भेजा गया था, लेकिन शीर्ष अधिकारियों ने लाखों रुपए के नियम विरुद्ध भुगतान पर अब तक कोई एक्शन नहीं लिया। शीर्ष अफसरों द्वारा जानबूझकर की जा रही इस अनदेखी से न सिर्फ उनकी भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं बल्कि इससे जल संसाधन विभाग में भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है। उल्लेखनीय है कि, डीजल के अनियमित भुगतान से जुड़े आरोपों पर जल संसाधन संभाग पन्ना के कार्यपालन यंत्री सतीष शर्मा का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने पर उनका मोबाइल फोन रिसीव नहीं हुआ। श्री शर्मा ने 4 दिन पूर्व टेक्स्ट मैसेज भेजकर रडार न्यूज़ को बताया था कि शासकीय कार्य और न्यायालीन प्रकरण के सिलसिले में राजधानी भोपाल आया हूं। आपसे फ्री होकर बात करूंगा, लेकिन इसके बाद समाचार लिखे जाने तक न तो उनका फोन आया और ना ही कोई मैसेज आया है।
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