रफ्तार का कहर: मोड़ पर अनियंत्रित बाइक, दो युवकों की दर्दनाक मौत
* बृजपुर-पहाड़ीखेरा मार्ग पर जवाहर नवोदय विद्यालय के समीप हुआ भीषण हादसा
पन्ना।(www.radarnews.in) तेज रफ्तार और कथित रूप से शराब के नशे में बाइक चलाना दो युवकों को भारी पड़ गया। बृजपुर-पहाड़ीखेरा मार्ग पर जवाहर नवोदय विद्यालय के समीप स्थित एक मोड़ पर अनियंत्रित होकर बाइक सड़क से करीब 100 फीट दूर जा गिरी, जिससे उस पर सवार दोनों युवकों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। हादसे ने एक बार फिर लापरवाहीपूर्ण ड्राइविंग के खतरनाक परिणामों को उजागर कर दिया है। मंगलवार को दोपहर में लगभग 2 बजे हुए इस हादसे की खबर आने के बाद से इलाके में शोक का माहौल है। सड़क दुर्घटना पर बृजपुर थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले को विवेचना में लिया है।
तेज रफ्तार बनी काल
प्राप्त जानकारी के अनुसार हीरो एक्सट्रीम बाइक (क्रमांक MP- 35 ZE- 6712) बृजपुर से पहाड़ीखेरा की ओर जा रही थी। बाइक की रफ्तार अत्यधिक बताई जा रही है। ग्राम धनौजा के पास स्थित ठाकुर बाबा मोड़ पर चालक संतुलन खो बैठा और बाइक अनियंत्रित होकर सड़क से लगभग 100 फीट दूर जा गिरी। दुर्घटना इतनी भीषण थी कि दोनों आदिवासी युवकों को शरीर में कई जगह गंभीर चोटें आईं और उन्होंने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया। मृतकों की पहचान ग्राम रखैल निवासी कृष्ण कुमार गौंड़ 23 वर्ष पिता मनीराम गौंड़ तथा अर्जन उर्फ कल्लू गौंड़ 22 वर्ष पिता लल्लू गौंड़ के रूप में हुई है। दोनों बृजपुर थाना क्षेत्र के रहने वाले थे। घटना की सूचना मिलते ही परिजन मौके पर पहुंचे, जहां चीख-पुकार और मातम का माहौल बन गया।
हेलमेट नहीं, नशे की आशंका

थाना प्रभारी शक्ति प्रकाश पांडेय ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला तेज रफ्तार का प्रतीत होता है। दोनों युवक बिना हेलमेट के बाइक पर सवार थे, जिससे सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में घातक चोटें आईं। उनके पास से चखना का नमकीन भी बरामद हुआ है, जिससे शराब के सेवन की आशंका जताई जा रही है। पुलिस मामले की विभिन्न पहलुओं से जांच कर रही है।
पुलिस ने किया मर्ग कायम
सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए पन्ना भेजा गया। देर शाम हो जाने के कारण पोस्टमार्टम नहीं हो सका और शवों को सुरक्षित मोर्चरी में रखवाया गया है। बुधवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपे जाएंगे। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच प्रारंभ कर दी है। यह हादसा तेज यातायात नियमों की अनदेखी के गंभीर परिणामों की कड़ी चेतावनी बनकर सामने आया है।
तेंदूपत्ता उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ाने वैज्ञानिक पद्धति से किया जाएगा शाखकर्तन

* तेंदूपत्ता शाखकर्तन कार्य का संयुक्त प्रशिक्षण संपन्न
* 15 से 25 मार्च के मध्य किया जाएगा शाखकर्तन कार्य
* शाखकर्तन कार्य के लिए 62 रुपए प्रति मानक बोरा दर निर्धारित
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) जिले के उत्तर सामान्य वन मण्डल एवं दक्षिण सामान्य वन मण्डल के संयुक्त तत्वावधान में तेंदूपत्ता शाखकर्तन कार्य का प्रशिक्षण का आयोजन गत दिवस स्मृति वन परिसर पन्ना में किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में उत्तर पन्ना वनमण्डल अधिकारी धीरेन्द्र प्रताप सिंह, दक्षिण पन्ना वनमण्डल अधिकारी अनुपम शर्मा, प्रशिक्षु भारतीय वन सेवा अधिकारी अक्षत जैन एवं अंशुल तिवारी, उपवनमण्डल अधिकारी नितिन निगम, प्रशिक्षु राज्य वन सेवा अधिकारी अंकुर गुप्ता सहित दोनों वनमण्डलों के परिक्षेत्र अधिकारी, वनकर्मी, प्राथमिक लघुवनोपज सहकारी समितियों के प्रबंधक, प्रभारी विक्रम सिंह बुंदेला तथा तेंदूपत्ता क्रेता उपस्थित रहे। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को तेंदू पौधों की वैज्ञानिक कटाई एवं शाखकर्तन की विधि का व्यवहारिक प्रदर्शन कराया गया। आगामी तेंदूपत्ता शाखकर्तन कार्य 15 से 25 मार्च के मध्य पन्ना जिले के वन क्षेत्रों में निर्धारित रूप से किया जाएगा।

प्रशिक्षण में बताया गया कि तेंदूपत्ता शाखकर्तन वन प्रबंधन की एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसके अंतर्गत तेंदूपत्ता के छोटे (20 सेंटीमीटर से कम गोलाई के) पौधों की नियंत्रित कटाई की जाती है। इससे पौधों में नई कोपलों का विकास तेजी से होता है तथा समान आकार, कोमल एवं उच्च गुणवत्ता वाले पत्तों की प्राप्ति सुनिश्चित होती है। शाखकर्तन के बाद विकसित होने वाले पत्ते संग्रहण के लिए अधिक उपयुक्त होते हैं, जिससे उत्पादन बढ़ता है। सही समय एवं तकनीक से किया गया शाखकर्तन तेंदूपत्ता उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों को बेहतर बनाता है। शासन ने इस वर्ष तेंदूपत्ता शाखकर्तन कार्य के लिए 62 रुपए प्रति मानक बोरा दर निर्धारित की है।
तेंदूपत्ता संग्रहण प्रदेश के वनाश्रित एवं आदिवासी परिवारों की आजीविका का एक महत्वपूर्ण आधार है। संग्रहण सीजन के दौरान ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध होता है तथा सहकारी समितियों के माध्यम से उन्हें प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ प्राप्त होता है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है और वन संरक्षण में समुदाय की सहभागिता भी बढ़ती है। तेंदूपत्ता से होने वाली आय अनेक परिवारों के लिए अतिरिक्त आर्थिक सहारा प्रदान करती है।
बीजेपी की नई टीम: जिला कार्यकारिणी में कई युवा चेहरों को मिला मौका, सामाजिक प्रतिनिधित्व पर उठे सवाल
* 21 सदस्यीय कार्यकारिणी में सवर्णों का दबदबा
* 5 ब्राह्मण और 5 क्षत्रिय नेताओं को बनाया पदाधिकारी
* एससी के नेता हुए निराश, नहीं मिल सका स्थान
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) भारतीय जनता पार्टी जिला इकाई पन्ना की नई 21 सदस्यीय कार्यकारिणी की घोषणा जिला अध्यक्ष बृजेन्द्र मिश्रा द्वारा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की सहमति से की गई। नई टीम में अनुभवी और जमीनी आधार वाले नेताओं के साथ कई युवा चेहरों को शामिल किया गया है। संगठन ने इसे संतुलित और प्रभावी कार्यकारिणी बताया है। अनुभव और युवा ऊर्जा के समन्वय के साथ नई टीम उतारने का दावा किया है, हालांकि सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर पार्टी के अंदर और बाहर चर्चा भी तेज हो गई है। घोषित कार्यकारिणी में सवर्ण वर्ग के नेताओं का दबदबा स्पष्ट नजर आता है। जारी सूची के अनुसार 21 में से 12 पद सवर्ण समाज से जुड़े नेताओं को मिले हैं, जिनमें 5 ब्राह्मण और 5 क्षत्रिय चेहरों के अलावा वैश्य तथा कायस्थ समाज से 1-1 प्रतिनिधि शामिल हैं। वहीं अनुसूचित जाति वर्ग (एससी) को इस बार जिला कार्यकारिणी में स्थान नहीं मिल पाया है, जिससे राजनीतिक हलकों में सवाल उठ रहे हैं। जिले की तीन विधानसभा सीटों में से गुनौर सीट एससी के लिए आरक्षित है और वहां से भाजपा विधायक भी हैं। ऐसे में एससी वर्ग को प्रतिनिधित्व न मिलना संगठनात्मक संतुलन की दृष्टि से चर्चा का विषय बन गया है। जिला कार्यकारिणी में इस बार आधी आबादी यानी महिलाओं (नेत्रियों) का प्रतिनिधित्व सिर्फ 4 पदों पर सिमट गया।
संतुलित कार्यकारिणी के चक्कर में असंतुलन
वर्तमान राजनीति में सामाजिक/जातिगत समीकरणों की अहम भूमिका को देखते हुए माना जा रहा था कि कार्यकारिणी गठन में व्यापक प्रतिनिधित्व का ध्यान रखा जाएगा। और यह पूरी तरह से समावेशी सोच पर आधारित होगी। जिला अध्यक्ष बृजेन्द्र मिश्रा को संगठनात्मक प्रबंधन में कुशल माना जाता है, लेकिन इस सूची में कुछ वर्गों की अनुपस्थिति को लेकर पार्टी के भीतर ही धीमे स्वर में असंतोष की चर्चा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि घोषित सूची में पन्ना विधायक बृजेन्द्र प्रताप सिंह के करीबी माने जाने वाले नेताओं का प्रभाव अधिक दिखता है, जबकि गुनौर विधायक डॉ. राजेश वर्मा और पवई विधायक प्रहलाद लोधी खेमे के समर्थकों को अपेक्षाकृत कम अवसर मिला है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। सूत्रों के अनुसार एक महामंत्री, दो मंत्री और मीडिया प्रभारी से जुड़े कुछ पदों पर सहमति नहीं बन पाने के कारण उन्हें फिलहाल होल्ड पर रखा गया है। संभावना जताई जा रही है कि आगामी नियुक्तियों के जरिए सामाजिक और राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश की जा सकती है।
मूल कार्यकर्ताओं पर भरोसा
पिछड़ा वर्ग से आने वाले बीजेपी के एक बड़े नेता ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर जिला कार्यकारिणी में सामाजिक असंतुलन पर असंतोष जताया है। उन्होंने तार्किक सवाल उठाते हुए कहा, पन्ना जिलाध्यक्ष व क्षेत्रीय सांसद वीडी शर्मा ब्राह्मण हैं और पन्ना विधायक क्षत्रिय समाज से आते हैं, इसके बाद भी 21 पदाधिकारियों वाली कार्यकारिणी में 10 पदों पर इन्हीं दोनों जातियों के नेताओं को नियुक्त करना क्या उचित है? इनका मानना है अन्य छूटी हुई जातियों के सक्रिय व कर्मठ युवाओं को अगर पदाधिकारी बनाया जाता तो कार्यकर्ताओं में अच्छा संदेश जाता। सामाजिक न्याय की मांग जब हर क्षेत्र में पुरजोर तरीके से उठाई जा रही उस समय इस तरह के मामले सामने आना निश्चित ही बेहद चिंताजनक है। भाजपा नेता ने एक सवाल के जवाब में बताया कि उनकी नजर में नई टीम की एक प्रमुख विशेषता यह है कि संगठन ने लंबे समय से सक्रिय, वैचारिक रूप से प्रतिबद्ध कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी है। बता दें कि, विधानसभा एवं लोकसभा चुनावों के दौरान दलबदल कर भाजपा में आने वाले चेहरों को सूची में स्थान नहीं मिला। इसे संगठन के ‘मूल भाजपाइयों’ पर भरोसे के रूप में देखा जा रहा है।
माधवेन्द्र को बनाया महामंत्री
भाजपा की नई जिला कार्यकारिणी के कुछ सकारात्मक और मजबूत पक्ष भी जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। जिसमें एक प्रमुख पक्ष यह भी है कि संगठन ने जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले नेताओं को तरजीह दी है। मजबूत जनाधार रखने वाले जिला पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष माधवेन्द्र सिंह (मद्धू राजा) को जिला महामंत्री बनाया जाना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। जिला उपाध्यक्ष बनाए गए सुशील त्रिपाठी योग्य, अनुभवी नेता माने जाते हैं। वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप मजूमदार को कार्यालय मंत्री बनाकर भाजपा ने पन्ना विधानसभा के अपने समर्पित बंगाली समुदाय के वोटरों को मैसेज दिया है। राजनीतिक जटिलताओं के साथ पब्लिक के मिजाज को भली-भांति समझकर रणनीति बनाने में माहिर मजूमदार की कार्यकुशलता से सभी परिचित हैं। वहीं पन्ना के व्यापार मंडल में प्रभावी दखल रखने वाले युवा नेता कमल लालवानी, संघर्षशील एवं सक्रिय भास्कर पाण्डेय को जिला उपाध्यक्ष नियुक्त करने के साथ अन्य कई क्षमतावान युवाओं को आगे लाने का काम किया है। पन्ना की पार्षद श्रीमती संगीता राय को जिला मंत्री बनाकर पार्टी ने जिला कार्यकारिणी में महिला प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करते हुए उनकी सक्रियता को सम्मान दिया है।
किसे क्या जिम्मेदारी मिली

भारतीय जनता पार्टी जिला इकाई पन्ना की 25 फरवरी को जारी नई जिला कार्यकारिणी में महामंत्री पद पर माधवेंद्र सिंह (मद्धू राजा) और राजेन्द्र कुशवाहा को नियुक्त किया गया है। जिला उपाध्यक्ष के रूप में श्रीमती सुषमा आदिवासी, दीपेन्द्र सिंह, सुशील त्रिपाठी, कमल लालवानी, श्रीमती पूनम यादव, भास्कर पाण्डेय, शैलेन्द्र श्रीवास्तव और शैलेन्द्र सिंह राजपूत को जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिला मंत्री पद पर कमलेश लोधी, कौशल किशोर लोधी, अवध तिवारी, श्रीमती संगीता राय, श्रीमती विजय राजे और जगदीश पटेल को शामिल किया गया है। वित्तीय प्रबंधन की जिम्मेदारी दशरथ गुप्ता को कोषाध्यक्ष के रूप में दी गई है, जबकि नागेन्द्र सिंह और राकेश चौबे को सह-कोषाध्यक्ष बनाया गया है। कार्यालय संचालन की जिम्मेदारी प्रदीप मजूमदार को कार्यालय मंत्री और ध्रुव चौबे को सह-कार्यालय मंत्री के रूप में सौंपी गई है। नई जिला कार्यकारिणी के सामने संगठन को बूथ स्तर तक सशक्त करने, सामाजिक संतुलन बनाए रखने और आगामी चुनावी रणनीति को धार देने की चुनौती रहेगी। जहां एक ओर भाजपा ने अनुभव, प्रतिबद्धता और युवा ऊर्जा के मिश्रण के साथ टीम घोषित की है वहीं सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान किस तरह होता है, यह आगामी समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल नई कार्यकारिणी के गठन ने पन्ना में सत्ताधारी दल भाजपा की राजनीति में नई हलचल जरूर पैदा कर दी है।
बड़ी कार्रवाई: स्लॉटर हाउस ले जाए जा रहे 105 मूक पशुओं की बचाई जान
* अजयगढ़ थाना पुलिस ने भैंस वंशीय पशुओं से भरे 4 वाहन किए जब्त
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) अवैध पशु परिवहन और पशु क्रूरता के विरुद्ध जिले की अजयगढ़ थाना पुलिस ने बीती रात बड़ी कार्रवाई करते हुए 105 भैंस वंशीय पशुओं को मुक्त कराया है। चार मालवाहक वाहनों में भूसे की तरह ठूंस-ठूंसकर भरे गए बेजुबान एवं निरीह पशुओं को कथित तौर पर उत्तर प्रदेश के बूचड़खाने (स्लॉटर हाउस) ले जाया जा रहा था। कुछ पशुओं के मुंह और पैर रस्सियों से बंधे हुए थे। पुलिस ने मवेशियों से भरे वाहनों को जब्त कर सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। भूख-प्यास से बेहाल पशुओं को समुचित देखभाल के साथ सुरक्षा की दृष्टि से भानपुर ग्राम की गौशाला भेजा गया। यह कार्रवाई नवागत थाना प्रभारी निरीक्षक हरि सिंह ठाकुर के नेतृत्व में हमराही पुलिस बल द्वारा की गई।
मुखबिर की सूचना पर रात में घेराबंदी
पुलिस के अनुसार, 24 फरवरी 2026 की रात्रि थाना प्रभारी को सूचना प्राप्त हुई थी कि पन्ना की ओर से कुछ वाहन मवेशियों को क्रूरतापूर्वक भरकर अजयगढ़ की ओर ले जाए जा रहे हैं, जिन्हें आगे चलकर बूचड़खाने, उत्तर प्रदेश भेजे जाने की तैयारी है। सूचना मिलते ही पुलिस टीमों का गठन कर ग्राम सिंहपुर से कस्बा अजयगढ़ तक विभिन्न स्थानों पर घेराबंदी कर चेकिंग शुरू की गई।
वाहन चेकिंग में सामने आई क्रूरता

जांच के दौरान पिकअप क्रमांक UP-71 AT- 8812 से 16, डीसीएम क्रमांक UP-71 CT- 1253 से 57, पिकअप क्रमांक UP- 71 AT- 1702 से 18 तथा पिकअप क्रमांक UP- 71 AT- 8141 से 14 भैंस वंशीय पशु बरामद किए गए। सभी पशु अत्यंत संकुचित स्थिति में ठूंस-ठूंसकर भरे पाए गए थे। कई पशुओं के मुंह और पैर रस्सियों से बांधे गए थे तथा परिवहन के दौरान उनके लिए खाने-पीने की कोई समुचित व्यवस्था नहीं थी। पुलिस ने सभी 105 भैंस वंशीय पशुओं को सुरक्षित मुक्त कर सुरक्षार्थ गौशाला भानपुर में भिजवाया है, जहां उनकी देखभाल की व्यवस्था की गई है। परिवहन में प्रयुक्त एक डीसीएम और तीन बोलेरो पिकअप वाहन भी जब्त कर लिए गए हैं। पुलिस के अनुसार जब्त मवेशियों एवं वाहनों सहित कुल लगभग 31 लाख रुपये का मशरूका जप्त किया गया है।
पुलिस ने दर्ज किए चार प्रकरण

मामले में पुलिस ने चार अलग-अलग प्रकरण दर्ज कर उत्तर प्रदेश के जिला फतेहपुर निवासी 7 व्यक्तियों को आरोपी बनाया है। जिनमें अमीर हसन (40) निवासी ग्राम सिचोली थाना थरियांव जिला फतेहपुर, असलम खान (24) निवासी ग्राम हनुमानपुर थाना थरियांव जिला फतेहपुर, सलीम (36) निवासी रामपुर थाना थरियांव जिला फतेहपुर, सोहेल (25) निवासी रामपुर थाना थरियांव जिला फतेहपुर, मोहम्मद आलम (20) निवासी ग्राम हनुमानपुर थाना थरियांव जिला फतेहपुर, सुलेमान (26) निवासी खेसहन थाना गाजीपुर जिला फतेहपुर तथा चांद मियां (38) निवासी गोसपुर थाना हथगांव जिला फतेहपुर उत्तर प्रदेश शामिल हैं।
…तो की जाएगी वैधानिक कार्रवाई

थाना प्रभारी निरीक्षक हरि सिंह ठाकुर ने बताया कि आरोपियों के विरुद्ध पशु क्रूरता अधिनियम सहित विभिन्न धाराओं में प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना की जा रही है। थाना क्षेत्र में अवैध पशु परिवहन और पशु क्रूरता के मामलों पर सतत निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून के विरुद्ध किसी भी प्रकार की गतिविधि पाए जाने पर सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस द्वारा जब्त वाहनों के दस्तावेजों और परिवहन संबंधी अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
कुड़रा के जंगल में कुल्हाड़ी का आतंक, बेजुबान पेड़ों का कत्लेआम जारी

उत्तर वन मण्डल पन्ना के परिक्षेत्र धरमपुर अंतर्गत सीमवर्ती जंगल का मामला
* सागौन के ताज़ा ठूंठ बने सबूत, वन अमले की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
* ईमानदारी से जंगल सुरक्षा न कर वन अपराधों पर पर्दा डालने में जुटा मैदानी अमला
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में दोनों सामान्य वन मण्डलों उत्तर-दक्षिण से इन दिनों जिस तरह की खबरें बाहर आ रही हैं वे अत्यंत चिंताजनक होने के साथ स्थिति के पूरी तरह से असमान्य होने का संकेत दे रहीं है। वानिकी एवं निर्माण कार्यों से नोट छापने के चक्कर में वन विभाग का मैदानी अमला जंगल और जानवरों की सुरक्षा से मुंह मोड़ चुका है। दक्षिण वन मण्डल के परिक्षेत्र कल्दा अंतर्गत पौधरोपण कार्य के लिए वन क्षेत्र में कथित तौर पर ब्लास्टिंग कराए जाने, जेसीबी मशीन से खुदाई करवाकर पत्थर निकालने और पौधारोपण कार्य करने वाले मेहनतकश मजदूरों की खून-पसीने की कमाई (मजदूरी) हड़पते हुए उनका शोषण करने की खबर सुर्ख़ियों में बनी है। वहीं उत्तर सामान्य वन मण्डल पन्ना की बात करें तो पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे जंगलों में अवैध कटाई की गतिविधियां जारी होने के गंभीर संकेत मिले हैं। वन परिक्षेत्र धरमपुर अंतर्गत अंतर्गत सर्किल नरदहा की बीट कुड़रा और मैहावा के सीमावर्ती जंगलों में की अवैध कटाई बेरोकटोक चल रही है।

सप्ताह भर के अंदर दूसरी बार शनिवार 21 फरवरी को क्षेत्र के भ्रमण पर पहुंचे पत्रकारों को जंगल के भीतर सागौन सहित जलाऊ लकड़ी के वृक्षों के कई ताज़ा ठूंठ दिखाई दिए। कटे हुए वृक्षों की लाल ताज़ा लकड़ी, आसपास बिखरी छाल और अधकटे तनों के अवशेष यह दर्शा रहे थे कि कटाई हाल के दिनों में ही की गई है। मोटे सागौन के ठूंठ इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं कि इमारती लकड़ी पर भी हाथ साफ किया जा रहा है। भ्रमण के दौरान घने जंगल के भीतर से वृक्ष पर कुल्हाड़ी चलने की “ठक-ठक” की आवाजें भी सुनाई दीं। जैसे ही बाहरी मौजूदगी का आभास हुआ, यह आवाज अचानक बंद हो गई। यह घटनाक्रम स्वयं संकेत देता है कि जंगल के भीतर कुछ छिपाने की कोशिश की जा रही थी। यह बात तब और पुख्ता हो गई जब बियाबान जंगल के अंदर की स्याह हकीकत उजागर होने से भयभीत और परेशान मैदानी वन अमले द्वारा अपने अधिकारियों की शह पर पत्रकारों को जंगल भ्रमण तथा विभागीय कार्यों का अवलोकन करने से रोकने तमाम हथकंडे आजमाए गए।
निगरानी व्यवस्था पर सवाल
वन अपराध की दृष्टि से अत्यंत ही संवेदनशील कुड़रा के जंगल में अवैध कटाई सहित अन्य गतिविधियों के प्रमाण मिलने से वन विभाग की नियमित गश्त और कड़ी निगरानी के दावे पर कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मसलन, कुड़रा ग्राम में जहां दो वन रक्षकों के आवास स्थित हैं और लगभग दर्जनभर श्रमिक जंगल की सुरक्षा के नाम पर तैनात हैं वहां वृक्षों की कटाई बिना जानकारी के कैसे संभव हो रही है? क्या विभाग को वाकई इसकी भनक नहीं लगी या फिर जानबूझकर अवैध कटाई की अनदेखी की जा रही है? जानकारों का मानना है, कुड़रा-मैहवा बीट के जंगल की जटिल भौगोलिक स्थिति, कुड़रा एवं धरमपुर में वन अमले की पर्याप्त संख्या में मौजूदगी के मद्देनजर इनकी सहमति अथवा संलिप्तता के बगैर किसी तरह की अवैध गतिविधि संभव ही नहीं है।
पत्रकारों के मददगार को धमकाया
वन परिक्षेत्र धरमपुर अंतर्गत विभगीय कार्यों की जमीनी हकीकत जानने पहुंचे पत्रकारों को वन अमले के असहयोग का सामना करना पड़ा। पहले तो वन अमले ने मौके तक ले जाने में अनिच्छा दिखाई गई। पत्रकारों ने जब स्थानीय ग्रामीण बब्बू लोध की मदद ली तो उसे सुरक्षा श्रमिकों के द्वारा चेतावनी दी गई। वृद्ध बब्बू को धमकाते हुए एक सुरक्षा श्रमिक बोला यदि वह पत्रकारों को जंगल के भीतर लेकर गया या विभागीय कार्यों से जुड़ी खबरें कवर करवाईं, तो परिणाम अच्छे नहीं होंगे। सुरक्षा श्रमिकों का यह रवैया कई संदेह खड़े करता है। सवाल यह है कि, यदि सब कुछ पारदर्शी है, तो पत्रकारों को रोकने और स्थानीय व्यक्ति पर दबाव बनाने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या यह सब व्यक्तिगत स्तर पर हुआ या फिर किसी वरिष्ठ अधिकारी के निर्देश पर पत्रकारों के भ्रमण को बाधित करने की कोशिश की गई। इसका जबाव तो सुरक्षा श्रमिक, संबंधित सर्किल प्रभारी और परिक्षेत्राधिकारी धरमपुर ही दे सकते हैं। लेकिन इस घटनाक्रम से एक बात पूरी तरह से स्पष्ट है, मैदानी वन अमला अगर निष्ठापूर्वक और ईमानदारी से अपने दायित्वों का निर्वाहन कर रहा होता तो उन्हें पत्रकारों के भ्रमण को रोकने के लिए घटिया हथकंडे आजमाने की जरुरत न पड़ती।
टाइगर मूवमेंट का हवाला, लेकिन चरवाहे बेखौफ
उल्लेखनीय है कि चार दिन पूर्व पत्रकार जब पहली बार कुड़रा जंगल के भ्रमण पहुंचे थे तो धरमपुर रेंजर वैभव सिंह चंदेल ने मैहावा बीट में टाइगर और तेंदुए के मूवमेंट का हवाला देकर पत्रकारों को वहां जाने से रोका था। उन्होंने सुझाव दिया था कि, खतरे को देखते हुए आपको वन अमले को साथ लेकर जाना चाहिए। लेकिन अभी कोई साथ नहीं जा सकता, आप लोग अगली बार जब आएं तो किसी को बोल दूंगा। शनिवार को पुनः कुड़रा पहुंचने से पूर्व रेंजर श्री चंदेल को सूचित किया तो उन्होंने स्टॉफ के गिद्ध गणना में व्यस्त होने का हवाला देकर हाथ खड़े कर दिए। वन अमले की असहजता-असहयोग से उपजीं तमाम शंकाओं के बीच पत्रकारों को भ्रमण के दौरान उसी क्षेत्र में कई चरवाहे भैंस चराते मिले। चरवाहों ने जंगल में टाइगर या लेपर्ड के विचरण को कोरी अफवाह बताया। चरवाहों ने बताया बाहरी लोगों को जंगल में आने से रोकने के लिए टाइगर-तेंदुए की मौजूदगी का भय फैलाया जाता है। यदि विभाग का दावा सही भी माना जाए, तो यह और गंभीर प्रश्न खड़ा करता है,जिस जंगल में टाइगर और तेंदुआ जैसे वन्यजीव मौजूद हों, वहां दिनदहाड़े सागौन की अवैध कटाई कैसे हो रही है? नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर ग्रामीणों ने बताया कि कुड़रा जंगल में अवैध कटाई के साथ अवैध खनन और बेजुबान वन्यजीवों का शिकार भी जारी है। यदि यह सही है, तो यह वन संपदा और वन्यजीवों दोनों के लिए गंभीर खतरा है।
कांग्रेस नेता पप्पू दीक्षित दो दिन की पुलिस रिमांड पर, फरियादी को धमकाने के आरोप में करीबी गिरफ्तार

* गरीब आदिवासी महिला की बेशकीमती जमीन हड़पने का बहुचर्चित मामला
पन्ना।(www.radarnews.in) सुनियोजित षड्यंत्र कर गरीब आदिवासी महिलाओं की बेशकीमती जमीन हड़पने के बहुचर्चित मामले में न्यायिक अभिरक्षा पर जिला जेल पन्ना में बंद कांग्रेस नेता श्रीकांत उर्फ पप्पू दीक्षित को शनिवार को न्यायालय में पेश किया गया। विशेष न्यायाधीश के आदेश पर कोतवाली थाना पुलिस ने पप्पू को दो दिन की रिमांड पर लिया है। इधर, कांग्रेस नेता को आपराधिक मामले में बचाने के लिए फरियादी महिला को धमकाने तथा समझौता करने का दबाव डालने के आरोप पुलिस ने पप्पू के करीबी सहयोगी एवं प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति रैय्यासांटा के प्रबंधक सतीश श्रीवास्तव को गिरफ्तार न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। कथित रूप से सतीश प्लाटिंग के कारोबार में पप्पू दीक्षित का पार्टनर (साझीदार) है। उक्त दोनों घटनाक्रम नगर में चर्चा का विषय रहे।
उल्लेखनीय है कि, जिला मुख्यालय पन्ना से सटे ग्राम मनौर में स्थित स्व. जगोला आदिवासी की बेशकीमती कृषि भूमि को हड़पने के मामले कोतवाली थाना पुलिस ने खनिज ठेकेदार एवं मध्य प्रदेश कांग्रेस के पूर्व महामंत्री पप्पू उर्फ श्रीकांत दीक्षित को पिछले माह 15 जनवरी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था। जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा दिया था। जिला जेल पन्ना में दाखिल होते ही पप्पू की बिगड़ गई थी। उसी रात जेल से उपचार के लिए जिला अस्पताल भेजा गया था। ड्यूटी डॉक्टर ने परीक्षण करने के बाद उसे भर्ती कर लिया था। जिला अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान तबियत बिगड़ने पर बेहतर इलाज हेतु मेडिकल कॉलेज जबलपुर रेफर कर दिया गया था। जहां से दो दिन पूर्व गुरुवार 12 जनवरी की देर शाम उसे वापस पन्ना जिला जेल लाया गया था। पन्ना पहुंचने पर शनिवार की सुबह जिला जेल में डॉक्टरों ने पप्पू का स्वास्थ्य परीक्षण किया। कुछ घंटे बाद उसे विशेष न्यायालय में पेश किया गया। न्यायालय के आदेश पर उसे दो दिन के रिमांड पर पुलिस सौंप दिया। रिमांड के दौरान कोतवाली थाना पुलिस जमीन हड़पने के षड्यंत्र को लेकर विस्तृत पूछताछ करने के साथ प्रकरण से जुड़े आवश्यक साक्ष्यों को जब्त कर सकती है।
पुलिस ने सील कर दिया था ऑफिस
कोतवाली थाना पुलिस ने कुछ दिन पूर्व पन्ना में गल्ला मंडी के सामने स्थित पप्पू के ऑफिस को सील कर दिया था। ऑफिस में जमीन हड़पने के अपराध से जुड़े अहम् साक्ष्य मिलने की संभावना है। पुलिस की इस कार्रवाई से आरोपी के ऑफिस के कर्मचारियों और करीबियों में ख़ासा हड़कंप मचा है। दरअसल, चर्चा यह है यदि ऑफिस की फाइलों और कम्प्यूटर को अगर खंगाला गया तो अन्य कई महत्वपूर्ण जानकारियां पुलिस के हाथ लग सकती हैं। बता दें कि आदिवासी महिला की षड्यंत्रपूर्वक जमीन हड़पने के मामले में पुलिस ने कांग्रेस नेता के बाद अधिवक्ता रामलखन त्रिपाठी को गिरफ्तार किया था। इस मामले में रामलखन का पुत्र अनुपम त्रिपाठी फरार है, जिसकी पुलिस के द्वारा सरगर्मी तलाश की जा रही है।
पार्टनरशिप में चलता है प्लाटिंग का कारोबार
खनिज ठेकेदार पप्पू दीक्षित को बचाने के लिए वेबा आदिवासी महिला को कथित तौर पर धमकाने और समझौता करने का दबाव डालने के आरोप में पुलिस ने शनिवार को प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति रैय्यासांटा के प्रबंधक सतीश श्रीवास्तव को गिरफ्तार न्यायालय में पेश किया। जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जिला जेल पन्ना भेज दिया गया। इस घटनाक्रम के बाद से सतीश की पप्पू से करीबी चर्चा में आ गई है। दमोह जिले के गैसाबाद निवासी सतीश श्रीवास्तव की ससुराल पन्ना पुराना आरपी स्कूल के पास है। ससुराल पक्ष की बेशकीमती जमीन विटनरी हॉस्पिटल के पास स्थित है। इस जमीन से जुड़े विवादों को सुलाझने में कथित तौर पर सतीश और उसके साले प्रमोद खरे ने पप्पू की मदद ली थी। जिसके बाद उक्त भूमि की प्लाटिंग कर आवासीय भूखंड बेचे गए। अपुष्ट चर्चा है, उक्त प्लाटिंग में सतीश व उसके साले प्रमोद ने मदद के एवज में पप्पू को 30 फीसदी की हिस्सेदारी दी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, सतीश अपने साझीदार को आपराधिक मामले से बचाने के लिए आदिवासी वृद्धा पर दबाव बना रहा था कि, कैमरे के सामने बोल दो कि दोनों बेटियां तुम्हारी नहीं हैं।
मध्यप्रदेश के इस जिले में मजदूरों के नाम पर सबसे बड़ा भ्रष्टाचार!

* पौधारोपण के लिए ट्रैक्टर लगाकर खुदवाए करोड़ों गड्ढे, मजदूरों के नाम पर बनाए प्रमाणक
* उत्तर वन मण्डल पन्ना में व्याप्त भ्रष्टाचार की लगातार खुल रही परतें
* पूर्व डीएफओ गंगवार जाते-जाते कर गए थे लगभग 50 फीसदी भुगतान
* वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पूर्व शेष भुगतान को लेकर वन अमला सक्रिय
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिले का उत्तर वन मंडल भ्रष्टाचार का पर्याय बन चुका है। यहां विगत कई वर्षों से जंगलराज कायम होने से चौतरफा लूट-खसोट मची है। जिसका अंदाजा सिर्फ इसी बात से लगाया जा सकता है कि विभागीय निर्माण कार्यों की स्वीकृत राशि में बमुश्किल 30-40 फीसदी राशि ही धरातल पर खर्च की जा रही है। परिक्षेत्र अजयगढ़, धरमपुर में अटल भू-जल योजना तथा दूसरे परिक्षेत्रों में अन्य मद से निर्मित तालाबों, पर्कुलेशन टैंक एवं पर्कुलेशन पिट निर्माण की करोड़ों रुपए की राशि को पलीता लगाने के बाद अब पौधारोपण की तैयारी से जुड़े कार्यों में वृहद स्तर पर खेला चल रहा है। उत्तर वन मण्डल के अजयगढ़ परिक्षेत्र में आगामी मानसून सीजन में पौधारोपण कराने के लिए जो कुछ किया गया वह सिर्फ अनियमितता नहीं बल्कि मजदूरों के हक पर खुला डाका है। पौधारोपण के लिए लाखों गड्ढों की खुदाई ट्रैक्टरों (मशीनों) से कराई जबकि कागजों में इन्हें मजदूरों द्वारा खुदवाया जाना दर्शाया गया। उन्हें मजदूरी देने के नाम पर लगभग 50 फीसदी राशि का भुगतान भी किया जा चुका है। अब वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पूर्व शेष राशि का भुगतान कराने की तैयारी चल रही है। पौधारोपण कार्यों में भ्रष्टाचार सिर्फ अजयगढ़ रेंज तक सीमित नहीं, वनमण्डल की अन्य रेन्जों में भी इसी तर्ज पर मजदूरों के नाम पर फर्जीवाड़ा किया गया। इस खुलासे के बाद भी अगर शेष बचा मजदूरी भुगतान किया जाता है तो संभवतः यह मध्य प्रदेश में किसी एक वित्तीय वर्ष में मजदूरों के नाम पर होने वाला अब तक का सबसे बड़ा घोटाला हो सकता है।
गड्ढे खुद दे रहे मशीनों के कार्य की गवाही

विगत दिवस परिक्षेत्र (रेन्ज) अजयगढ़ की बीट धवारी के वन कक्ष क्रमांक पी-194, बीट टौरिया के कक्ष क्रमांक पी-177 और बीट देवराभापतपुर के भ्रमण पर पहुंचे मीडियाकर्मियों को कई जगह हजारों की तादाद में गोलाकार गड्ढे देखने को मिले। इन अजब-गजब गड्ढों को कैमरों में कैद करने के बाद जब मौके पर उपस्थित वनरक्षक से पूछताछ की तो उन्होंने बिना किसी लाग-लपेट के ऑफ रिकार्ड स्वीकार किया कि गड्ढे ट्रैक्टरों से कराए गए हैं। साथ ही यह भी बताया कि जल्द से जल्द काम कराने के प्रेशर में यह सब करना पड़ा। मजदूरों के नाम पर मशीनों को रोजगार देने का यह फर्जीवाड़ा अजयगढ़ परिक्षेत्र की अन्य बीटों के साथ-साथ वन मण्डल की सभी रेन्जों में हुआ है। इस तरह देखें तो ट्रैक्टर चालकों को ठेके देकर कराए गए गड्ढों की तादाद कई लाखों में पहुंच जाती है। जाहिर है, इतने वृहद पैमाने पर अनियमितता होना रेंजर से लेकर अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की संलिप्तता के बगैर संभव ही नहीं है।
वर्ग की आकृति में होते हैं गड्ढे
वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर बताया कि, विभागीय पौधारोपण कार्यों में आमतौर पौधों की प्रजाति के अनुसार वर्ग की आकृति में चार साइज के गड्ढों की खुदाई की जाती है, जिसका उल्लेख वर्किंग प्लान में है। सबसे छोटी साइज का गड्ढा 30x30x30 सेंटीमीटर का होता है अर्थात फिट में देखें तो इसकी लम्बाई, चौड़ाई और गहराई 1 फिट रहती है। इस साइज के गड्ढों में आमतौर पर सागौन (टीक) का रोपण किया जाता है। इन गड्ढों के बीच की दूरी 2 मीटर होती है। दूसरी साइज का गड्ढा 30x30x45 का होता है। इसकी लंबाई, चौड़ाई एक फिट लेकिन गहराई डेढ़ फिट रहती है। इन गड्ढों में रोपित किए जाने वाले पौधों की आपस की दूरी 2.5 या 3 मीटर हो सकती है। तीसरा साइज 45x45x45 सेंटीमीटर का है, यह मध्यम आकार का गड्ढा होता है जिसकी लंबाई, चौड़ाई और गहराई डेढ़ फिट होती है। इनमें छोटे झाड़ वाले पौधे लगाए जाते हैं। मध्यम आकार वाले गड्ढों का आपस में डिस्टेंस 3 मीटर होता है। चौथा गड्ढा सबसे बड़े साइज का 60x60x60 सेंटीमीटर का रहता है। अर्थात इनकी लम्बाई, चौड़ाई और गहराई सब एक सामान 2 फिट की रहती है। बड़े साइज के गड्ढों में बड़े झाड़ वाले पौधे लगाए जाते हैं। इन गड्ढों के बीच की दूरी 4 मीटर हो सकती है। साइज के हिसाब से अगर गड्ढों की खुदाई की राशि को देखें तो प्रत्येक गड्ढे की खुदाई सहित अन्य कार्य के लिए वर्तमान में प्रचलित दरों के अनुसार 13 रुपए लेकर 25 रुपए तक मजदूरी भुगतान करने का प्रावधान है।
अब मजदूर लगाकर गड्ढों में सुधार
पौधारोपण के लिए वन परिक्षेत्र अजयगढ़ अंतर्गत ट्रैक्टर लगाकर ठेके पर कराए गए गोलाकार गड्ढों का कुछ स्थानों पर मजदूर लगाकर सुधार कराया जा रहा है। रुपए बचाने के चक्कर में मशीनों से कराई गई गड्ढों की खुदाई पर पर्दा डालने के लिए अब मजदूर लगाकर उन्हें निर्धारित आकार-साइज देने काम शुरू हो गया है। मीडियाकर्मियों को निरीक्षण के दौरान कुछ स्थानों पर मजदूर गोलाकार गड्ढों को सही आकार देने के साथ मशीन से कराए गए कार्य के साक्ष्यों को मिटाते हुए नजर आए। वन विभाग के जानकारों की मानें तो पौधारोपण गड्ढा खुदाई के दोहरे कार्य के बावजूद प्रत्येक गड्ढे की मजदूरी राशि का अधिकतम 50 फीसदी ही खर्च आएगा। इस तरह गड्ढों की मजदूरी की शेष 50 फीसदी राशि का कार्य प्रभारी वनरक्षक से लेकर भुगतान कर्ता अधिकारी के बीच बंदरबांट हो जाएगा। और गड्ढों में सुधार करते मजदूरों के फोटोग्राफ्स निकालकर कागजों में साबित कर दिया जाएगा कि काम मशीनों ने नहीं बल्कि मजदूरों/श्रमिकों ने ही किया है। दरअसल, जहां पूरा तंत्र ही भ्रष्टाचार में आकण्ठ डूबा हो वहां सब संभव है। मशीनों से लाखों-करोड़ों गड्ढों की खुदाई पर विभागीय अधिकारियों द्वारा सख्ती से रोक न लगाना फर्जीवाड़े में उनकी संलिप्तता का स्पष्ट संकेत है।
सीमेंट पोल में अंदर मिट्टी, ऊपर कंक्रीट

पौधारोपण तैयारी कार्य में भ्रष्टाचार सिर्फ गड्ढों की खुदाई तक सीमित नहीं है। स्थल पर इससे जुड़े अब तक जितने भी कार्य हुए हैं सभी में हद दर्जे की लीपापोती की गई। पौधों की सुरक्षा के लिए फेंसिंग जाली लगाने खड़े किये गए सीमेंट पोल के होल से कंक्रीट मसाला गायब है। अभी जिन बीटों में पोल (खम्भे) लगाए गए उनकी फिलिंग प्रोजेक्ट रिपोर्ट अनुसार कंक्रीट मटेरियल से न करके मिट्टी से कर दी गई। सीमेंट पोल के होल में झोल करने वालों ने निरीक्षणकर्ताओं की नजर में धूल झोंकने के लिए जमीन की सतह पर लगभग 10 सेंटीमीटर कंक्रीट मसाला पोल के चारों तरफ डाला है। ताकि ऊपर से देखने पर ऐसा प्रतीत हो कि अंदर भी कंक्रीट मटेरियल लगाया है। जानकारों के मुताबिक, कंक्रीट मसाले की चोरी का सीधा असर सीमेंट पोल की मजबूती पर पड़ना तय है। बता दें कि, सीमेंट पोल को तमाम विषम परिस्थितियों में को सालों-साल तक मजबूती से खड़े रखने के लिए जमीन के अंदर डेढ़ फिट की गहराई तक कंक्रीट मटेरियल से कवर किया जाता है। जबकि जमीन की ऊपरी सतह पर 10 सेंटीमीटर कंक्रीट पोल के चारों तरफ लगाया जाता है। पोल के गड्ढे में कंक्रीट मसाला न डालने से उनके लूज होकर गिरने का खतरा बना रहेगा। पौधारोपण सुरक्षा जाली फेंसिंग भार सीमेंट पोल झेल सकें, इसके लिए प्रत्येक 3 पोल्स के बाद सपोर्टिंग पोल (दो पोल) खड़े किये जाते हैं।
नवागत डीएफओ की कार्रवाई पर रहेगी नजर

उत्तर वन मण्डल पन्ना अंतर्गत पौधारोपण कार्य में व्यापक पैमाने पर हुई अनियमितताएं कथित तौर पर पूर्व डीएफओ गर्वित गंगवार के कार्यकाल के अंतिम दिनों में की गई हैं। डीएफओ ऑफिस के सूत्रों की मानें तो गंगवार साहब जाते-जाते पौधारोपण के प्रमाणकों का बड़ी तादाद में भुगतान भी कर गए हैं। अब जो राशि शेष बची है उसका भुगतान चालू वित्तीय वर्ष की समाप्ति के पूर्व कराने के लिए कार्य प्रभारी बीट गार्ड से लेकर संबंधित परिक्षेत्राधिकारी (रेंज ऑफिसर) सक्रिय हैं। पौधारोपण कार्य में फर्जीवाड़ा और कार्य की गुणवत्ता से समझौते का मामला उत्तर वन मण्डल के नवागत धीरेन्द्र प्रताप सिंह डीएफओ के संज्ञान में है। ऐसे में अब आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नवागत डीएफओ लंबित भुगतान करके इस भ्रष्टाचार को आगे बढ़ाते हैं या फिर फर्जी प्रमाणकों के भुगतान पर रोक लगाकर तत्परता से गहन जांच उपरांत दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करते हैं।
इनका कहना है-
“पौधारोपण कार्य में अनियमितताएं होने का मामला संज्ञान में आने पर जांच के आदेश दिए हैं। आप सोमवार को कार्यालय आएं बैठकर बात करते हैं, आप जहां भी मेरे वन मण्डल के कार्यों को देखना चाहते हैं मेरे साथ मेरी गाड़ी से चलिए, मैं स्वयं आपको लेकर चलूंगा।”
धीरेन्द्र प्रताप सिंह, वनमण्डलाधिकारी, उत्तर वन मण्डल, पन्ना।
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वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर बताया कि, विभागीय पौधारोपण कार्यों में आमतौर पौधों की प्रजाति के अनुसार वर्ग की आकृति में चार साइज के गड्ढों की खुदाई की जाती है, जिसका उल्लेख वर्किंग प्लान में है। सबसे छोटी साइज का गड्ढा 30x30x30 सेंटीमीटर का होता है अर्थात फिट में देखें तो इसकी लम्बाई, चौड़ाई और गहराई 1 फिट रहती है। इस साइज के गड्ढों में आमतौर पर सागौन (टीक) का रोपण किया जाता है। इन गड्ढों के बीच की दूरी 2 मीटर होती है। दूसरी साइज का गड्ढा 30x30x45 का होता है। इसकी लंबाई, चौड़ाई एक फिट लेकिन गहराई डेढ़ फिट रहती है। इन गड्ढों में रोपित किए जाने वाले पौधों की आपस की दूरी 2.5 या 3 मीटर हो सकती है। तीसरा साइज 45x45x45 सेंटीमीटर का है, यह मध्यम आकार का गड्ढा होता है जिसकी लंबाई, चौड़ाई और गहराई डेढ़ फिट होती है। इनमें छोटे झाड़ वाले पौधे लगाए जाते हैं। मध्यम आकार वाले गड्ढों का आपस में डिस्टेंस 3 मीटर होता है। चौथा गड्ढा सबसे बड़े साइज का 60x60x60 सेंटीमीटर का रहता है। अर्थात इनकी लम्बाई, चौड़ाई और गहराई सब एक सामान 2 फिट की रहती है। बड़े साइज के गड्ढों में बड़े झाड़ वाले पौधे लगाए जाते हैं। इन गड्ढों के बीच की दूरी 4 मीटर हो सकती है। साइज के हिसाब से अगर गड्ढों की खुदाई की राशि को देखें तो प्रत्येक गड्ढे की खुदाई सहित अन्य कार्य के लिए वर्तमान में प्रचलित दरों के अनुसार 13 रुपए लेकर 25 रुपए तक मजदूरी भुगतान करने का प्रावधान है।
