* कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने उठाई मतपत्र वापसी की मांग
* बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा- उस वक्त आपको मालूम होगा आपकी हालत क्या है?
नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी ने मतपत्रों से चुनाव कराने की मांग प्रमुखता से उठाई है। मंगलवार को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) पर सवाल उठाते हुए बैलेट पेपर (मतपत्र) से चुनाव कराने की मांग की है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा को ईवीएम अपने पास रखने दीजिए। हमें ईवीएम नहीं चाहिए, हमें मतपत्र पर मतदान चाहिए। तब पता चलेगा कि भाजपा की स्थिति क्या है और वे कहां खड़े हैं। मतपत्र की वापसी के लिए उन्होंने भारत जोड़ो यात्रा की तर्ज पर देशव्यापी जन जागरूकता अभियान चलाने की बात कही।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि मैं जो कहना चाह रहा हूं उसे हमारे विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी मानते हैं। जितनी भी शक्ति लगाकर एससी-एसटी, ओबीसी, गरीब तबके के लोग, छोटे समुदाय के लोग जो अपना वोट दे रहे हैं वो वोट फिजूल (बर्बाद) जा रहा है। हमको ईवीएम नहीं चाहिए। बैलेट पेपर से वोटिंग होनी चाहिए। सभी को एकजुटता के साथ मतपत्र से मतदान की मांग करनी चाहिए।
कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने कहा कि भाजपा को ईवीएम अपने पास रखे या पीएम मोदी के घर में रहने दो या अमित शाह के घर में रहने दो। अहमदाबाद में बहुत सारे गोदाम बने हैं, वहां ले जाकर रख लेने दो। हमें ईवीएम नहीं चाहिए, हमें मतपत्र पर मतदान चाहिए। उन्होंने बीजेपी पर तंज कस्ते हुए कहा कि उस वक्त आपको मालूम होगा कि तुम्हारी (भाजपा) की हालत क्या है और कहां खड़े हैं? खड़गे ने कहा कि कांग्रेस को मतपत्र वापसी के मुद्दे पर सभी को जागरूक करने के लिए अभियान शुरू करना चाहिए। हमें मतपत्र की वापसी की मांग करनी चाहिए। इसके लिए हम अन्य राजनीतिक दलों से भी बात करेंगे। और राहुल गांधी के नेतृत्व में जैसे भारत जोड़ो यात्रा निकली थी, वैसे ही बैलेट पेपर से चुनाव के लिए एक देशव्यापी जागरूकता अभियान चलाएंगे।
भाजपा नफरत फैलाकर लोगों को बांटती है
संविधान रक्षक अभियान कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जाति जनगणना करवाने से डरते हैं क्योंकि तब हर कोई अपना हिस्सा मांगेगा और उस स्थिति में मोदी को अहमदाबाद भागना पड़ेगा। उन्होंने सवाल उठाते कहा, अगर प्रधानमंत्री देश में एकता चाहते हैं तो वे और उनकी पार्टी देश में नफरत फैलाना बंद कर दे। भाजपा के नेता कह रहे हैं कि बटेंगे तो कटेंगे, लेकिन देश को कौन बांट रहा है? यह वे लोग हैं जो नफरत फैलाकर, लोगों को गुमराह करके और धर्म के नाम पर लोगों को बांटकर देश को बांटने की कोशिश कर रहे हैं।
2






वर्ष 1980 में जयपाल सिंह ने पन्ना जिले की पवई सीट से कांग्रेस के टिकिट पर अपना पहला चुनाव लड़ा और बड़े अंतर जीत दर्ज करके विधानसभा पहुंचे। चुनावी राजनीति में सफल इंट्री से चमके जयपाल यहां से लगातार नई ऊंचाइयों को छूते गए। तत्कालीन मुख्यमंत्री कुंवर अर्जुन सिंह ने कैप्टन की प्रतिभा को सम्मान देते हुए उन्हें सर्वप्रथम संसदीय सचिव बनाया फिर अपने मंत्रिमण्डल के दूसरे विस्तार में उप मंत्री बाद में गृह राज्यमंत्री का दायित्व सौंपा। वर्ष 1985 में पवई सीट से लगातार दूसरी बार चुनाव जीतने पर जयपाल सिंह को तत्कालीन मुख्यमंत्री मोतीलाल बोरा ने अपने मंत्री मण्डल में गृह मत्रीं बनाया साथ ही आधा दर्जन अन्य महत्वपूर्ण विभाग भी सौंप रखे थे। तब तक सम्पूर्ण मध्य प्रदेश सहित कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व पन्ना के नायाब हीरे कैप्टन की कार्यकुशलता और बहुमुखी प्रतिभा की चमक का कायल हो चुका था। यह वह दौर था जब अविभाजित मध्य प्रदेश में निर्विवाद रूप से कैप्टन जयपाल सिंह का ओहदा नंबर दो का था। मुख्यमंत्री मोतीलाल बोरा की सरकार में उनका गजब का दबदबा रहा। जिसकी आज के समय कल्पना करना भी मुश्किल है। राजीव गांधी के साथ कैप्टन की कैमिस्ट्री को देखते हुए कांग्रेस के अंदर और विपक्ष समेत प्रशासनिक हलकों में तब तक यह चर्चा होने लगी थी कि एमपी का अगला सीएम जयपाल सिंह होंगे। गृह मंत्री होते हुए भी हर कोई उन्हें भावी मुख्यमंत्री के तौर पर ही देखता था।






धनतेरस और दिवाली पर धनवर्षा जैसे इस लुभावने ऑफर का ग्रामीण महिलाओं पर बड़ा असर हुआ। फिर क्या था, लालच में आकर सरोज सिंह, अंजना सिंह, प्रेमवती, ललिता सिंह, मोनिका सिंह, पुष्पा सिंह एवं लक्ष्मी आदि गृहणियों ने ख़ुशी-ख़ुशी अपने सोने-चांदी के गहने उन महिलाओं को सौंप दिए। शातिर महिलायें रविवार 27 अक्टूबर की शाम वापस हरदी आकर ऑफर के अनुसार डबल गहने और बड़ा उपहार देने का वादा करके फरार हो गईं। उक्त महिलाएं गहने लेकर जब अगले दिन दोपहर तक वापस नहीं आईं तो चिंतित और परेशान गृहणियों के द्वारा ठगी की घटना की जानकारी घर के अन्य सदस्यों को दी गई। ग्रामीण अनुराग तिवारी ने बताया, ठग महिलाओं की धरपकड़ के लिए उनके द्वारा धरमपुर थाना पुलिस से सम्पर्क किया गया। लेकिन ठग महिलाओं को कुछ अतापता नहीं चल सका। मामले की एफआईआर भी अभी तक दर्ज नहीं की गई। पीड़िता प्रेमवती सिंह के अनुसार, आधा दर्जन से अधिक महिलाओं से लगभग 8-10 लाख रूपये के आभूषणों की ठगी हुई है। जिससे पीड़ित महिलाओं के साथ उनके परिवार की धनतेरस-दीवाली की खुशियां अब गम और अफ़सोस में तब्दील हो चुकी हैं।



आंचलिक पत्रकार सतीश विश्कर्मा के संबंध में शाहनगर थाना प्रभारी के द्वारा जानकारी मांगे जाने पर जिला जनसम्पर्क कार्यालय प्रभारी देवेन्द्र सिंह पर अपनी आपराधिक लापरवाही को छिपाने के लिए असत्य जानकारी देकर शासन-प्रशासन को गुमराह करने का गंभीर आरोप लग रहा है। बता दें कि, सतीश ने उन्हें संवाददाता नियुक्त किए जाने संबंधी मीडिया संस्थान का नियुक्ति पत्र जिला जनसम्पर्क कार्यालय में देकर बकायदा पावती प्राप्त की थी। इसके बाद भी जनसम्पर्क कार्यालय प्रभारी ने उनका नाम आंचलिक पत्रकार की सूची में दर्ज नहीं किया। और फिर दुर्भाग्यपूर्ण घटनाक्रम के बाद पुलिस के द्वारा जानकारी मांगे जाने पर सतीश का नाम जनसम्पर्क कार्यालय में दर्ज न होने का पत्र जारी कर दिया। गत दिवस पत्रकारों ने जिला जनसम्पर्क कार्यालय पहुंचकर प्रभारी देवेन्द्र सिंह को सतीश का नियुक्ति पत्र प्राप्त करने के बाद भी उसके संबंध में असत्य और भ्रामक जानकारी देने का कारण पूंछा तो वह कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाया। बहानेबाजी करते हुए देवेन्द्र सिंह ने बताया कि, सतीश पन्ना आकर मुझसे मिलता नहीं है इसलिए उसका नाम दर्ज नहीं किया। इस जवाब से भड़के पत्रकारों ने सवालों की बौछार करते हुए शिकायत करने की बात कही तो जनसम्पर्क कार्यालय प्रभारी ने बिना किसी लागलपेट के अपनी गलती स्वीकर कर ली। देवेन्द्र सिंह ने पुनः नियुक्ति पत्र मांगते हुए नाम दर्ज करने की बात कही लेकिन पत्रकार इसके लिए राजी नहीं हुए। पत्रकारों ने इस मामले में जनसम्पर्क कार्यालय प्रभारी के खिलाफ भी मोर्चा खोलने का निर्णय लिया है।
अपने साथी को न्याय दिलाने के लिए पन्ना जिले के पत्रकार सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर है। बता दें कि, एसआई भानु प्रताप सिंह पत्रकारों के साथ पूर्व में पन्ना जिला चिकित्सालय में एक मामले का कवरेज करने के दौरान अभद्रता कर चुके हैं। पत्रकार सतीश विश्वकर्मा प्रकरण में जिले के पत्रकारों में जनसम्पर्क कार्यालय पन्ना प्रभारी देवेन्द्र सिंह की भूमिका को लेकर भी जबरदस्त आक्रोश व्याप्त है। जनसम्पर्क कार्यालय प्रभारी पन्ना में अपनी पदस्थापना के बाद से ही अंग्रेजों की नीति पर चलते हुए पत्रकारों के बीच फूट डालने और प्रशासन को गुमराह करने का काम कर रहे हैं।









