Home Blog Page 24

EVM से नहीं मतपत्र से हो चुनाव, जन जागरूकता के लिए देशव्यापी अभियान चलाएगी कांग्रेस

0
मल्लिकार्जुन खड़गे, राष्ट्रीय अध्यक्ष, कांग्रेस पार्टी।

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने उठाई मतपत्र वापसी की मांग

बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा- उस वक्त आपको मालूम होगा आपकी हालत क्या है?

नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी ने मतपत्रों से चुनाव कराने की मांग प्रमुखता से उठाई है। मंगलवार को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) पर सवाल उठाते हुए बैलेट पेपर (मतपत्र) से चुनाव कराने की मांग की है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा को ईवीएम अपने पास रखने दीजिए। हमें ईवीएम नहीं चाहिए, हमें मतपत्र पर मतदान चाहिए। तब पता चलेगा कि भाजपा की स्थिति क्या है और वे कहां खड़े हैं। मतपत्र की वापसी के लिए उन्होंने भारत जोड़ो यात्रा की तर्ज पर देशव्यापी जन जागरूकता अभियान चलाने की बात कही।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि मैं जो कहना चाह रहा हूं उसे हमारे विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी मानते हैं। जितनी भी शक्ति लगाकर एससी-एसटी, ओबीसी, गरीब तबके के लोग, छोटे समुदाय के लोग जो अपना वोट दे रहे हैं वो वोट फिजूल (बर्बाद) जा रहा है। हमको ईवीएम नहीं चाहिए। बैलेट पेपर से वोटिंग होनी चाहिए। सभी को एकजुटता के साथ मतपत्र से मतदान की मांग करनी चाहिए।
कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने कहा कि भाजपा को ईवीएम अपने पास रखे या पीएम मोदी के घर में रहने दो या अमित शाह के घर में रहने दो। अहमदाबाद में बहुत सारे गोदाम बने हैं, वहां ले जाकर रख लेने दो। हमें ईवीएम नहीं चाहिए, हमें मतपत्र पर मतदान चाहिए। उन्होंने बीजेपी पर तंज कस्ते हुए कहा कि उस वक्त आपको मालूम होगा कि तुम्हारी (भाजपा) की हालत क्या है और कहां खड़े हैं? खड़गे ने कहा कि कांग्रेस को मतपत्र वापसी के मुद्दे पर सभी को जागरूक करने के लिए अभियान शुरू करना चाहिए। हमें मतपत्र की वापसी की मांग करनी चाहिए। इसके लिए हम अन्य राजनीतिक दलों से भी बात करेंगे। और राहुल गांधी के नेतृत्व में जैसे भारत जोड़ो यात्रा निकली थी, वैसे ही बैलेट पेपर से चुनाव के लिए एक देशव्यापी जागरूकता अभियान चलाएंगे।

 भाजपा नफरत फैलाकर लोगों को बांटती है

संविधान रक्षक अभियान कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जाति जनगणना करवाने से डरते हैं क्योंकि तब हर कोई अपना हिस्सा मांगेगा और उस स्थिति में मोदी को अहमदाबाद भागना पड़ेगा। उन्होंने सवाल उठाते कहा, अगर प्रधानमंत्री देश में एकता चाहते हैं तो वे और उनकी पार्टी देश में नफरत फैलाना बंद कर दे। भाजपा के नेता कह रहे हैं कि बटेंगे तो कटेंगे, लेकिन देश को कौन बांट रहा है? यह वे लोग हैं जो नफरत फैलाकर, लोगों को गुमराह करके और धर्म के नाम पर लोगों को बांटकर देश को बांटने की कोशिश कर रहे हैं।

मध्यप्रदेश विधानसभा उपचुनाव 2024 : विजयपुर में मंत्री रावत को कांग्रेस ने दी करारी शिकस्त, बुधनी सीट पर खिला कमल

0
विजयपुर सीट उपचुनाव में पराजित बीजेपी प्रत्याशी मंत्री रामनिवास रावत और कांग्रेस के विजयी प्रत्याशी मुकेश मल्होत्रा।

विजयपुर सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी मुकेश मल्होत्रा 7364 मतों से जीते

शिवराज के गढ़ बुधनी में भाजपा उम्मीदवार भार्गव को 13901 वोट से मिली जीत

भोपाल।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश की दो विधानसभा सीटों विजयपुर और बुधनी में हुए उपचुनाव के नतीजे आज आ गए। सूबे की दो सीटों में से एक पर भाजपा को तगड़ा झटका लगा है। बीजेपी ने श्योपुर जिले की हाई प्रोफाइल विजयपुर सीट पर वन मंत्री रामनिवास रावत पर भरोसा जताते हुए चुनावी समर में उतारा था। हालांकि, उनको इस प्रतिष्ठापूर्ण चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा। इस सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार मुकेश मल्होत्रा ने जीत दर्ज कराई है। रावत को कांग्रेस प्रत्याशी मुकेश मल्होत्रा ने 7 हजार से अधिक मतों के अंतर से मात दी है। वहीं सीहोर जिले की बुधनी सीट को बीजेपी का गढ़ माना जाता रहा है। यहां हुए उपचुनाव में बीजेपी अपने गढ़ को अभेद रखने में एकबार फिर कामयाब रही। बुधनी से भाजपा के रमाकांत भार्गव ने कांग्रेस प्रत्याशी राजकुमार पटेल पर 13 हजार से अधिक वोटों के अंतर से जीत दर्ज कराई है। विजयपुर सीट पर मिली जीत ने मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पार्टी में जोश भरने का काम किया है।
बता दें मध्य प्रदेश की दोनों सीटों विजयपुर और बुधनी में हुए उपचुनाव में कांग्रेस और बीजेपी दोनों पार्टियों ने पूरी ताकत झोंक दी थी। बुधनी विधानसभा सीट पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के लोकसभा सदस्य निर्वाचित होने और विजयपुर में कांग्रेस विधायक रामनिवास रावत ने पाला बदलकर भाजपा का दामन थाम लिया था। इसलिए इन दोनों ही सीटों पर उपचुनाव कराने पड़े। कांग्रेस के टिकट पर विजयुपर विधानसभा सीट से 6 बार चुनाव लड़कर विधायक चुने गए रामनिवास रावत ने लोकसभा चुनाव 2024 में मुरैना लोकसभा के लिए टिकट नही मिलने पर पार्टी से किनारा कर लिया था। कांग्रेस छोड़कर वह बीजेपी में शामिल हो गए, लेकिन रामनिवास रावत का यह दांव उनके काम नहीं आया और जिस विजयपुर ने उन्हें 6 बार अपना विधायक चुना, लेकिन पाला बदलने पर जनता ने उन्हें पटखनी देने में जरा भी देर नहीं लगाई। मंत्री बनाने के बाद भी रावत के चुनाव हारने से बीजेपी, मोहन सरकार और खुद उनकी छवि धूमिल हुई है।

बुधनी में भाजपा की जीत

बुधनी विधानसभा सीट को भाजपा का गढ़ माना जाता रहा है। यह सीट पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की परंपरागत सीट रही है। उनके लोकसभा सदस्य निर्वाचित होने पर बुधनी सीट पर हुए उपचुनाव में बीजेपी ने पूर्व सांसद रमाकांत भार्गव को चुनावी मैदान में उतारा था। यहां उपचुनाव में मुख्य मुकाबला भाजपा के रमाकांत भार्गव और कांग्रेस प्रत्याशी राजकुमार पटेल के बीच था। चुनाव आयोग द्वारा शनिवार को घोषित नतीजों के अनुसार बीजेपी प्रत्याशी भार्गव ने कांग्रेस प्रत्याशी राजकुमार को 13901 वोटों से शिकस्त दी है। उपचुनाव में बीजेपी प्रत्याशी रमाकांत भार्गव को 107478 वोट मिले। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी पूर्व मंत्री राजकुमार पटेल को 93577 वोट प्राप्त हुए। बुधनी विधानसभा उपचुनाव में 21 उमीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे थे।

विजयपुर सीट पर किसे कितने मत मिले

भारत निर्वाचन आयोग के अनुसार विजयपुर उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मुकेश मल्होत्रा ने जीत दर्ज की है। उन्होंने बीजेपी प्रत्याशी मंत्री रामनिवास रावत को 7364 मतों के अंतर से पराजित किया। उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मल्होत्रा को 100469 वोट मिले। जबकि भाजपा प्रत्याशी रावत 93105 मतों पर सिमट गए। विजयपुर विधानसभा उपचुनाव में 12 प्रत्याशी मैदान में थे।

स्मृति शेष : कैप्टन जयपाल सिंह (पूर्व मंत्री) | सत्ता के केन्द्र में रहे लेकिन कभी विनम्रता, सादगी और ईमानदारी नहीं छोड़ी

0
अविभाजित मध्यप्रदेश के पूर्व गृह मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता कैप्टन जयपाल सिंह।
(शादिक खान)
विभाजित मध्य प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता कैप्टन जयपाल सिंह अब हमारे बीच नहीं रहे। काफी समय से अस्वस्थ चल रहे 82 वर्षीय जयपाल सिंह ने आज सुबह पन्ना स्थित अपने निज निवास पर अंतिम सांस ली। कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे जयपाल सिंह के दुखद निधन के साथ ही जनसेवा और सिद्धातों पर अटल रहने वाली राजनीति के एक युग का अंत हो गया। कैप्टन साहब का निधन कांग्रेस पार्टी के साथ बुंदेलखंड अंचल और पन्ना के लिए निःसंदेह अपूर्णीय क्षति है जिसकी भरपाई हो पाना संभव नहीं है। अपने चार दशक के लंबे राजनीतिक और सार्वजानिक जीवन में वे योग्य, कुशल और अनुभवी कैप्टन की तरह अपनी दूरदृष्टि, अदम्य साहस, संयम से हर जिम्मेदारी का बखूबी निर्वहन करने के लिए जाने जाते रहे है।
पूर्व प्रधानमंत्री स्व. श्री राजीव गाँधी जी के साथ पूर्व गृह मंत्री स्व. कैप्टन जयपाल सिंह।
मौजूदा युवा पीढ़ी को उनके संबंध में भले ही कुछ ख़ास जानकारी न हो पर जिनकी आयु 50 वर्ष या फिर इससे अधिक है वे भलीभांति जानते है! 80 के दशक में जब देश में विषम परिस्थितियों के बीचकी राजनीति में राजीव गांधी का पदार्पण हुआ तो वे अपने साथ अपने कई दोस्तों को भी ले आए थे। राजीव गांधी का दौर कांग्रेस में युवा नेतृत्व का दौर था। उस दौर में कई उच्च शिक्षित युवा, पायलट, बिजनेसमैन और फिल्म स्टार राजीव जी की प्रेरणा से राजनीति में आये थे। कैप्टन जयपाल सिंह भी उन्हीं में से एक थे। अपने पायलट के पेशे को छोड़ वह कांग्रेस से जुड़कर मध्यप्रदेश की सक्रिय राजनीति में कूद पड़े। चुंबकीय व्यक्तित्व और बहुमुखी प्रतिभा के धनी जयपाल सिंह ने महज कुछ साल में ही सूबे के राजनीतिक फलक पर ऐसी उड़ान भरी कि सब देखते ही रह गए।
वर्ष 1980 में जयपाल सिंह ने पन्ना जिले की पवई सीट से कांग्रेस के टिकिट पर अपना पहला चुनाव लड़ा और बड़े अंतर जीत दर्ज करके विधानसभा पहुंचे। चुनावी राजनीति में सफल इंट्री से चमके जयपाल यहां से लगातार नई ऊंचाइयों को छूते गए। तत्कालीन मुख्यमंत्री कुंवर अर्जुन सिंह ने कैप्टन की प्रतिभा को सम्मान देते हुए उन्हें सर्वप्रथम संसदीय सचिव बनाया फिर अपने मंत्रिमण्डल के दूसरे विस्तार में उप मंत्री बाद में गृह राज्यमंत्री का दायित्व सौंपा। वर्ष 1985 में पवई सीट से लगातार दूसरी बार चुनाव जीतने पर जयपाल सिंह को तत्कालीन मुख्यमंत्री मोतीलाल बोरा ने अपने मंत्री मण्डल में गृह मत्रीं बनाया साथ ही आधा दर्जन अन्य महत्वपूर्ण विभाग भी सौंप रखे थे। तब तक सम्पूर्ण मध्य प्रदेश सहित कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व पन्ना के नायाब हीरे कैप्टन की कार्यकुशलता और बहुमुखी प्रतिभा की चमक का कायल हो चुका था। यह वह दौर था जब अविभाजित मध्य प्रदेश में निर्विवाद रूप से कैप्टन जयपाल सिंह का ओहदा नंबर दो का था। मुख्यमंत्री मोतीलाल बोरा की सरकार में उनका गजब का दबदबा रहा। जिसकी आज के समय कल्पना करना भी मुश्किल है। राजीव गांधी के साथ कैप्टन की कैमिस्ट्री को देखते हुए कांग्रेस के अंदर और विपक्ष समेत प्रशासनिक हलकों में तब तक यह चर्चा होने लगी थी कि एमपी का अगला सीएम जयपाल सिंह होंगे। गृह मंत्री होते हुए भी हर कोई उन्हें भावी मुख्यमंत्री के तौर पर ही देखता था।
पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्य सभा सांसद दिग्विजय सिंह से मुलाकत करते पूर्व मंत्री कैप्टन जयपाल सिंह (दाईं तरफ) बीच में उनके सुपुत्र जगतपाल सिंह बॉबी।
कांग्रेस के नेतागण पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ कैप्टन जयपाल सिंह की निकटता के किस्से सुनाते हुए बताते हैं कि, अपनी हत्या के कुछ वर्ष पूर्व राजीव जी भोपाल में विशाल रैली को संबोधित करने आए थे। तब वे एयरपोर्ट से सभा स्थल तक जिस कार से पहुंचे थे उसे कैप्टन ड्राइव कर रहे थे। इस दौरान राजीव जी पीछे की सीट पर नहीं बल्कि कैप्टन के बगल में बैठे और रास्ते में उनसे प्रदेश के संबंध में बात करते रहे। उन्हें वापस एयरपोर्ट छोड़ने के दौरान भी कैप्टन साहब ही कार चला थे। कैप्टन जयपाल सिंह की सबसे अनूठी बात यह थी कि उनके धुर विरोधी भी उनका सम्मान करते थे। सूबे की सत्ता के केंद्र में रहने के बाद भी सत्ता का अहंकार कभी उन पर हावी नहीं हो हुआ। जीवन पर्यन्त वह विनम्र, शालीन, मृदुभाषी रहे। उनका राजनैतिक जीवन सादगी, ईमानदारी और सहजता की खुली किताब है।
छत्रसाल स्नातकोत्तर महाविद्यालय पन्ना में छात्र संघ के एक कार्यक्रम के दौरान तत्कालीन छात्र संघ अध्यक्ष डीके दुबे का अभिवादन स्वीकार करते हुए पूर्व मंत्री कैप्टन जयपाल सिंह।
राजीव गांधी के असामयिक दुखद निधन के बाद कांग्रेस में मची उथल-पुथल से उभरी गुटीय राजनीति के चलते कैप्टन की उड़ान पर अचानक पावर ब्रेक लग गया। लेकिन अर्श से सीधे हांसिये पर जाने के बाद भी वह जरा भी विचलित नहीं हुए। बदली हुई परिस्थितियों-चुनौतियों का सहजता के साथ सामना करते हुए रिटायरमेंट की उम्र में भी वे पूरी ऊर्जा के साथ कांग्रेस को मजबूत बनाने के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव के साथ मिलकर काम करते रहे। आज की पीढ़ी के नेतागण-जनप्रतिनिधि कैप्टन साहब के जीवन संघर्ष से बहुत कुछ यह प्रेरणा ले सकते है मसलन, सत्ता के केंद्र में रहते हुए भी इसके दंभ से दूर रहकर जनसेवा के पथ पर पूरी प्रतिबद्धता के साथ किस तरह से आगे बढ़ा जाए। और जब सत्ता की चकाचौंध से दूर हों जाएं तो निराश या नाउम्मीद हुए बगैर स्वीकार्य भाव से जीवनपथ पर कर्मयोगी की तरह निरंतर आगे बढ़ते रहें।
(लेखक रडार न्यूज़ के संपादक है। सम्पर्क – 8770221005)

Smart Electricity Meter : लाइन लॉस रोकने घर-घर लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर, विद्युत कंपनी के साथ उपभोक्ताओं को भी फायदा

0

*      रोजाना हर 15 मिनिट में मोबाइल पर मिलेगी बिजली खपत और भार की जानकारी

*      वास्तविक रीडिंग तय सयम-दिन पर बिलिंग में दर्ज होने से मिलेंगे त्रुटिरहित बिल

*      अब समय पर बिल नहीं भरने पर एक क्लिक पर बिजली सप्लाई हाेगी बंद

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) केन्द्र सरकार की आरडीएसएस योजना के तहत मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड अब विद्युत उपभोक्ताओं के घरों एवं व्यवसायिक परिसरों में स्मार्ट मीटर लगाने जा रही है। पन्ना संभाग अंतर्गत स्मार्ट विद्युत मीटर लगाने की शुरुआत पन्ना शहर वितरण केन्द्र (जिला मुख्यालय) से की गई है। लाइन लॉस (बिजली चोरी) रोकने के लिए लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर से विद्युत कंपनी के साथ उपभोक्ताओं को भी फायदा होने का दावा किया जा रहा है। पुराने मीटर के स्थान पर स्मार्ट मीटर लगाने से समय पर मानव हस्तक्षेप (मीटर वाचक) के बिना वास्तविक रीडिंग तय समय व तय दिन पर बिलिंग में दर्ज होने से उपभोक्ता को त्रुटिरहित विद्युत बिल प्राप्त होंगे। बिजली का मीटर आपके मोबाइल से कनेक्ट हो जाएगा। इससे बिजली खपत और उपयोग में लाए जा रहे विद्युत-भार (लोड) की हर 15 मिनट में अद्यतन (रियल टाइम) जानकारी उपभोक्ता के मोबाइल फोन पर उपलब्ध होगी। इससे पता चल जाएगा कि आपके घर या दुकान में इस बार कितनी बिजली की खपत हुई है और कितना बिल इस माह आएगा। मोबाइल पर जानकारी प्राप्त होने से उपभोक्ता विद्युत खपत का बेहतर प्रबंधन करके शासन से बिलिंग में मिलने वाली छूट का लाभ उठा सकेंगे। यही नहीं, मोबाइल फोन रिचार्ज की तरह ही स्मार्ट मीटर को भी रिचार्ज करा सकेंगे।
मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड संभाग पन्ना के कार्यपालन अभियंता अमितेश मिश्रा ने रडार न्यूज़ से अनौपचारिक चर्चा में जानकारी देते हुए बताया कि स्मार्ट बिजली मीटर लगाने का कार्य पन्ना जिला मुख्यालय (शहर वितरण केंद्र) में महीने भर पूर्व शुरू हो चुका है। पन्ना में अब तक 2,000 से अधिक स्मार्ट मीटर सफलतापूर्वक लगाए जा चुके है। जल्द ही पन्ना एवं पवई संभाग के अन्य शहरी क्षेत्रों देवेन्द्रनगर, अजयगढ़, ककरहटी, गुनौर, पवई, अमानगंज में स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य प्रारंभ किया जाएगा। फीडरवार स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य चल रहा है, शहरी क्षेत्र के फीडरों के बाद ग्रामीण क्षेत्र में स्मार्ट मीटर लगाए जायेंगे। कार्यपालन अभियंता श्री मिश्रा ने बताया कि स्मार्ट मीटर से सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं (घरेलू, व्यावसायिक एवं कृषि) के मीटर बदले जाएंगे।
बता दें कि, पन्ना संभाग अंतर्गत समस्त श्रेणी के विद्युत उपभोक्ताओं की कुल संख्या वर्तमान में 1,04,959 है, जिनमें 84,901 घरेलू उपभोक्ता शामिल हैं। जिले के पवई संभाग में कुल 85,905 उपभोक्ता दर्ज हैं। जिसमें घरेलू उपभोक्ताओं की तादाद 71,753 बताई जा रही है। इस तरह जिले के दोनों संभागों में 1,90,864 स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य निर्धारित है। जिले में विजनटेक कंपनी के स्मार्ट मीटर लगाने कार्य गुजरात की कंपनी मोंटेकार्लो के द्वारा पूर्णतः निःशुल्क किया जा रहा है। विजन टेक कंपनी के एक स्मार्ट मीटर का मूल्य करीब 4 से 5 हजार रुपए होने की चर्चा है। कार्यपालन अभियंता पन्ना अमितेश मिश्रा ने उपभोक्ताओं से नगर के वार्डों में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर के कार्य में सहयोग करने की अपील की है। आपने बताया कि सहायक अभियंता राहुल बिरला के नेतृत्व में कर्मचारियों द्वारा पन्ना शहर के वार्डों में स्मार्ट मीटर स्थापित करने का कार्य किया जा रहा है।
मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड संभाग पन्ना के कार्यपालन अभियंता अमितेश मिश्रा।
श्री मिश्रा का कहना है कि, स्मार्ट मीटर को लेकर किसी भी तरह के भ्रम या अफवाहों में न आएं, इनको लगवाने से ईमानदार उपभोक्ताओं का लाभ ही होगा। बिजली चोरी करने वाले अवश्य ही परेशान हो सकते है क्योंकि अब वह ऐसा नहीं कर पाएंगे। विद्युत कंपनी द्वारा स्मार्ट मीटर को लेकर उपभोक्ताओं के बीच फैले भ्रम दूर करने और उनकी संतुष्टि के लिए 5 प्रतिशत घरों एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में पुराने मीटर के समानांतर स्मार्ट मीटर लगाने का विशेष प्रावधान किया गया है। ताकि उपभोक्ता दोनों मीटर में दर्ज होने वाली अपनी विद्युत खपत एक सामान होने आंकलन कर सकें। चेक मीटर लगाने की कवायद से उपभोक्ताओं में पुराने मीटर की तुलना में स्मार्ट मीटर के तेज चलने की अफवाहों पर विराम लग सकेगा।

क्यों लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर?

विद्युत उपभोक्ताओं के घरों एवं व्यावसायिक परिसर में पुराने मीटर के स्थान पर स्मार्ट बिजली मीटर लगाने का काम देश के विभिन्न राज्यों में जोर-शोर से चल रहा है। विद्युत कंपनियां अपने लाइन लॉस (बिजली चोरी) को रोकने के लिए हजारों करोड़ रुपए खर्च करके स्मार्ट मीटर परियोजना को अपना रही हैं। बताया जाता है कि स्मार्ट मीटर बहुत ही सूक्ष्मता के साथ विद्युत खपत की गणना करते हुए किसी भी प्रकार के उतार-चढ़ाव का सटीक विश्लेषण करता है। जबकि वर्तमान में लगे मीटर विद्युत खपत की सूक्ष्मता से गणना करने में सक्षम नहीं है। स्मार्ट मीटर लगने से उपभोक्ताओं की मासिक रीडिंग के लिए विद्युत कंपनियों को मीटर रीडरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। यानी डोर-टू-डोर रीडिंग पूर्णतः बंद हो जाएगी। अब समय पर बिल नहीं भरने पर एक क्लिक पर उपभोक्ता की बिजली सप्लाई हाेगी बंद कर दी जाएगी। और बिल जमा होने पर बिना किसी देरी के विद्युत आपूर्ति बहाल हो जाएगी।
स्मार्ट मीटर में प्री-पेड फीचर्स होने से उपभोक्ता मोबाइल फोन रिचार्ज की तरह मीटर भी रिचार्ज करा सकेंगे। भविष्य में मीटर रिचार्ज (प्री-पेड) व्यवस्था अनिवार्य रूप से प्रारम्भ होने पर बिजली कंपनी को बिल वसूली के दवाब से भी पूर्णतः मुक्ति मिल जाएगी। इस तरह मासिक मीटर रीडिंग और बिल वसूली में लगने वाला मानव श्रम और खर्च बंद होने से जाहिर है विद्युत कंपनियों को राजस्व की बड़ी बचत होगी। लेकिन इस स्थिति में उपभोक्ता को विद्युत आपूर्ति बहाल रखने के लिए अपने मीटर में आवश्यक बैलेंस रखना होगा।

उपभोक्ताआ बिजली खपत की कर सकेंगे निगरानी

मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड का लोगो।
स्मार्ट मीटर उपभोक्ता के मोबाइल फोन से कनेक्ट होंगे। इससे पता चल जाएगा कि उनके घर या दुकान में इस बार कितनी बिजली की खपत हुई है और कितना बिल इस माह आएगा। बिजली खपत और उपयोग में लाए जा रहे विद्युत-भार (लोड) की हर 15 मिनट में वास्तविक अद्यतन (रियल टाइम) जानकारी मोबाइल पर उपलब्ध होगी जिससे बिजली के किफायती उपयोग से बिजली बिल में कटौती की जा सकेगी। इन मीटरों की स्वचलित प्रणाली के माध्यम से मीटर रीडिंग तय समय तय दिन पर बिलिंग में दर्ज होगी। इससे रीडिंग के दौरान भूलवश होने वाली किसी भी प्रकार की त्रुटि से छुटकारा मिलेगा और उपभोक्ताओं को त्रुटिरहित बिल प्राप्त होंगे। प्रतिमाह मीटर रीडिंग में होने वाली मानवीय त्रुटि और बिजली बिलों में सुधार के लिए बिजली कंपनी कार्यालय के बार-बार चक्कर लगाने से छुटकारा मिल जाएगा। विद्युत लाइनों, ट्रांसफार्मर या किसी उपभोक्ता की बिजली आपूर्ति बाधित होने पर विद्युत् व्यवधान का कंपनी के कर्मचारियों द्वारा स्वतः संज्ञान लेकर बिजली आपूर्ति की तुरंत बहाल की जाएगी।

दिवाली स्पेशल ऑफर्स का लालच देकर ग्रामीण महिलाओं से लाखों की ठगी

0
लालच में आकर ठगी की घटना का शिकार हुए परिवार गम और अफ़सोस में डूबे।

*     सोने-चांदी के 10 लाख रुपए के गहने लेकर फरार हुई शातिर ठग महिलाएं

*     गहने डबल करने के साथ स्पेशल गारंटीड गिफ्ट देने का किया था वादा

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) बड़ी पुरानी कहावत है- ‘लालच बुरी बला है’, इसके चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए वरना इंसान को पछताना पड़ सकता है। कुछ ऐसा ही आधा दर्जन से अधिक ग्रामीण महिलाओं के साथ हुआ है। धन दोगुना करने लालच में आकर महिलाएं धनतेरस से पहले अपना धन ही गवां बैठी। ठगी का यह मामला मध्यप्रदेश के पन्ना जिले का है। शातिर ठग महिलाएं हरदी गांव की कुछ गृहणियों को दिवाली स्पेशल ऑफर्स के तहत गहने डबल करने साथ ही गारंटीड गिफ्ट देने का झांसा देकर उनके सोने-चांदी गहने लेकर फरार हो गईं। ग्रामीण महिलाओं से लगभग 8 से 10 लाख रुपए मूल्य के आभूषणों की ठगी होने की जानकारी सामने आई है। धरमपुर थाना पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है। ठगी करने वाली महिलाओं के सीसीटीव्ही फुटेज के आधार पुलिस उन तक पहुँचने का प्रयास कर रही है। इसमें पड़ोसी जिला छतरपुर की पुलिस का भी सहयोग लिया जा रहा है।
ग्राम पंचायत भवन हरदी। (फाइल फोटो)
जिले की अजयगढ़ तहसील के धरमपुर थाना अंतर्गत आने वाले ग्राम हरदी में आधा दर्जन महिलाओं से लाखों रुपए के आभूषणों की ठगी होने के खबर आने के बाद इलाके में हड़कंप मचा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार हरदी गांव में कुछ शातिर ठग महिलाएं पिछले कई दिनों से काफी सक्रिय थीं। इन महिलाओं ने शुरुआत में गृहणियों का भरोसा जीतकर उन्हें अपने जाल में फंसाने के लिए पुराने बर्तन और चंद रुपए लेकर नए बर्तन दिए। बाद में चांदी के आभूषणों के बदले में बर्तन दिए गए। पीड़िता अंजना सिंह ने बताया कि पांच दिवसीय दीपावली पर्व के पूर्व उक्त महिलाओं के द्वारा स्पेशल ऑफर्स के तहत सोने-चांदी के गहने दोगुने करने साथ में फ्रिज, वाशिंग मशीन, एलईडी टीव्ही आदि गारंटीड गिफ्ट का झांसा दिया गया।
धनतेरस और दिवाली पर धनवर्षा जैसे इस लुभावने ऑफर का ग्रामीण महिलाओं पर बड़ा असर हुआ। फिर क्या था, लालच में आकर सरोज सिंह, अंजना सिंह, प्रेमवती, ललिता सिंह, मोनिका सिंह, पुष्पा सिंह एवं लक्ष्मी आदि गृहणियों ने ख़ुशी-ख़ुशी अपने सोने-चांदी के गहने उन महिलाओं को सौंप दिए। शातिर महिलायें रविवार 27 अक्टूबर की शाम वापस हरदी आकर ऑफर के अनुसार डबल गहने और बड़ा उपहार देने का वादा करके फरार हो गईं। उक्त महिलाएं गहने लेकर जब अगले दिन दोपहर तक वापस नहीं आईं तो चिंतित और परेशान गृहणियों के द्वारा ठगी की घटना की जानकारी घर के अन्य सदस्यों को दी गई। ग्रामीण अनुराग तिवारी ने बताया, ठग महिलाओं की धरपकड़ के लिए उनके द्वारा धरमपुर थाना पुलिस से सम्पर्क किया गया। लेकिन ठग महिलाओं को कुछ अतापता नहीं चल सका। मामले की एफआईआर भी अभी तक दर्ज नहीं की गई। पीड़िता प्रेमवती सिंह के अनुसार, आधा दर्जन से अधिक महिलाओं से लगभग 8-10 लाख रूपये के आभूषणों की ठगी हुई है। जिससे पीड़ित महिलाओं के साथ उनके परिवार की धनतेरस-दीवाली की खुशियां अब गम और अफ़सोस में तब्दील हो चुकी हैं।
महिलाओं के साथ ठगी होने की जानकारी देते हुए ग्रामीण युवक अनुराग तिवारी।
उल्लेखनीय है कि, हरदी गांव में कहीं सीसीटीव्ही कैमरे न होने के कारण ठगी करने वाली महिलाओं के गिरोह का प्रारंभिक तौर पर कुछ ज्यादा पता नहीं चल सका, सिर्फ एक महिला की फोटो मौके से किसी ने मोबाइल में खींच ली थी। धरमपुर थाना प्रभारी बलवीर सिंह ने रडार न्यूज़ को बताया कि, ठगी की घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम को मौके पर भेजा था। फरार हुई महिलाओं को ट्रैक करने के दौरान पड़ोसी जिला छतरपुर के चंदला व राजनगर में उनके सीसीटीव्ही फुटेज मिले है। छतरपुर जिले की पुलिस को उनके फोटोग्राफ्स उपलब्ध करवाकर फरार महिलाओं की धरपकड़ में सहयोग मांगा है। आरोपी महिलाओं का खोजबीन लगातार जारी है। उन्होंने बताया कि, इस मामले में जल्द ही एफआईआर दर्ज की जाएगी।

MP : एसआई की गुंडई के खिलाफ पत्रकारों ने दी सामूहिक गिरफ्तारी, सड़क पर उतरकर किया संघर्ष का शंखनाद

0
पत्रकार के साथ मारपीट करने वाले एसआई व पुलिस आरक्षक के खिलाफ आपराधिक मामला पंजीबद्ध न होने पर आंदोलन कर रहे पन्ना के पत्रकारों द्वारा शुक्रवार 25 अक्टूबर को सामूहिक गिरफ्तारी दी गई।

*      पत्रकार के साथ सरेआम मारपीट करने वाले एसआई के खिलाफ FIR न होने से आक्रोश

*      पुलिस एवं प्रशासन की हठधर्मिता से सूबे की मोहन सरकार की जमकर हो रही फ़जीहत

*      जनसम्पर्क कार्यालय प्रभारी ने गलत जानकारी देकर शासन-प्रशासन को किया गुमराह

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) खाकी वर्दी का रौब दिखाकर ग्रामीण पत्रकार के साथ सरेआम गुंडई करने वाले पुलिस उप निरीक्षक भानु प्रताप सिंह के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध करने की मांग को लेकर आंदोलनरत पन्ना के पत्रकारों द्वारा शुक्रवार को सामूहिक गिरफ़्तारी दी गई। पैदल मार्च करते हुए गिरफ़्तारी देने कोतवाली थाना पहुंचें पत्रकारों ने इंसाफ मिलने तक लोकतांत्रिक तरीके से अपने संघर्ष को जारी रखने का ऐलान किया। पुलिसवाला गुंडा की तरह बर्ताव करने वाले एसआई का पुलिस एवं प्रशासन के द्वारा पूरी निर्लज्जता के साथ बचाव करने और इस ज्वलंत मुद्दे पर जिले के जनप्रतिनिधियों के उदासीन रवैये को लेकर पत्रकार बिरादरी के साथ-साथ आमजन में भी जबरदस्त आक्रोश व्याप्त है। लोकहित के सजग प्रहरी की तरह आमजन की आवाज़ बुलंद करने वाले पत्रकारों को शुक्रवार को जब लोगों ने अपने लिए न्याय की गुहार लगाते हुए देखा तो वह निरंकुश हो चुकी अफसरशाही को कोसने से खुद को रोक नहीं सके। एसआई के खिलाफ एफआईआर दर्ज न करके इंसाफ का गला घोंटने पर आमादा कतिपय अफसरों के हठधर्मी रवैये को देखते हुए पत्रकारों ने न्यायलय की शरण लेने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। साथ ही भोपाल जाकर इस मामले को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के समक्ष प्रमुखता से उठाने पर भी सहमति बनीं है।
पत्रकारों के साथ आदतन अभद्रता करने वाले पन्ना पुलिस के उप निरीक्षक भानु प्रताप ने विगत दिनों टिकरिया ग्राम में एक दुकानदार को क़ानूनी प्रक्रिया का मखौल उड़ाते हुए गिरफ्तार करने की कोशिश की थी। इस दौरान मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई थी। स्थानीय पत्रकार सतीश विश्वकर्मा ने वहां पहुंचकर अपना परिचय देते हुए दुकानदार को गिरफ्तार करने का जब सबब पूंछा तो अपनी हनक में रहने वाला एसआई उखड़ गया। दुकान से बाहर निकलकर पत्रकार पुलिस की कार्यवाही का वीडियो बनाने लगा तो एसआई और एक अन्य पुलिसकर्मी अपना आपा खो बैठे। दोनों सरेआम वर्दीवाले गुंडे जैसा बर्ताव करते हुए बेबस और निरीह पत्रकार पर टूट पड़े। अपने मोबाइल फोन पर ‘जन-सेवा की है निष्‍ठा और निर्बल की ताकत हैं हम’ की रिंगटोन बजाने वालों का असली चरित्र सबके सामने आ चुका था। दोनों पुलिसवालों ने पत्रकार के साथ गाली-गलौंज, मारपीट करते हुए उसके हाथ की उंगली तोड़ डाली। और अपने आपराधिक कृत्य का साक्ष्य मिटाने के लिए पत्रकार सतीश विश्वकर्मा का मोबाइल फोन छुड़ा ले गए थे।
हद तो तब हो गई जब सरेआम गुंडई करके पुलिस महकमे की छवि धूमिल करने वाले एसआई ने शाहनगर थाना में पीड़ित पत्रकार के ही खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा डालने का फर्जी प्रकरण पंजीबद्ध करवा दिया। पत्रकार की पिटाई करने का वीडियो वायरल होने के बाद भी आनन-फानन में उल्टा उसी के खिलाफ आपराधिक मामला पंजीबद्ध किये जाने से हर कोई हैरान है। उधर, इस मामले में कतिपय पुलिस अफसर अपने दोनों अधीनस्थों का बेशर्मी के साथ बचाव करते हुए पीड़ित पत्रकार की रिपोर्ट दर्ज करने को तैयार नहीं है।

कानून के शासन और लोकतंत्र के लिए अशुभ संकेत

कोतवाली थाना पन्ना के बाहर सामूहिक गिरफ्तारी देने के लिए जमीन पर बैठे पत्रकारों ने पुलिस अधिकारियों पर मारपीट के आरोपी एसआई व पुलिस आरक्षक का बचाव करने का आरोप लगाया।
पुलिस अफसरों के अन्यायपूर्ण एवं पक्षपाती रवैये से आहत और आक्रोशित पन्ना जिले के पत्रकार अपने साथी को न्याय दिलाने के एक सप्ताह भर से चरणबद्ध तरीके से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं। पत्रकार के साथ अभद्रता करने वाले एसआई व पुलिस आरक्षक के खिलाफ वैधानिक कार्यवाही की मांग को लेकर गत दिनों पत्रकारों के द्वारा सामूहिक रूप से पुलिस अफसरों को ज्ञापन सौंपा गया था। पन्ना विधायक बृजेन्द्र प्रताप सिंह और भाजपा जिलाध्यक्ष बृजेन्द्र मिश्रा को घटनाक्रम की जानकारी देकर ज्ञापन सौंपे गए। फिर भी एसआई के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध नहीं हो सका। लोकतंत्र के अघोषित चौथे स्तंभ के अपमान पर कार्यवाही की जायज मांग को भी पूरा न करवा पाने को माननीयों का नाकारापन समझा जाए या फिर यह माना जाए कि पुलिस स्टेट को उनकी मूक सहमति प्राप्त है? अथवा इसे भारत में लोकतांत्रिक संस्थाओं के कमजोर होने के कारण तेजी से बढ़ती निरकुंशता को लेकर वैश्विक चिंता से जुड़े संकेत के तौर देखा जाए। कारण चाहे जो भी हो पर एक बात स्पष्ट है कलमकार (पत्रकार) को अपना काम करने की स्वतंत्रता न होना, नागरिक अधिकारों पर व्यवस्था की मनमर्जी हावी होना कानून के राज और लोकतंत्र के लिए अशुभ संकेत है।

पुलिस की छवि धूमिल करने वाले का बचाव

जिले भर के पत्रकार पैदल मार्च निकालकर पुलिस एवं प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पन्ना कोतवाली थाना पहुंचे। जहां पन्ना एसडीओपी को पुलिस के अन्यायपूर्ण रवैये के खिलाफ सामूहिक गिरफ़्तारी दी गई।
विदित हो कि, पत्रकार के साथ कथित मारपीट और लूटपाट के आरोपी एसआई भानु प्रताप की रिपोर्ट पर पीड़ित के खिलाफ जिस तत्परता से आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध किया गया उसने पन्ना पुलिस के अफसरों की निष्पक्षता और कार्यशैली की पोल खोलकर रख दी है। विडंबना यह है कि आरोपी की रिपोर्ट दर्ज करने वाले पुलिस अफसर पीड़ित का मामला दर्ज करने के लिए किसी भी सूरत में तैयार नहीं है। दुर्भाग्यपूर्ण घटनाक्रम की सच्चाई की जानकारी होने के साथ तथ्यों से भलीभांति अवगत होने के बाद भी एसआई और उसके सहयोगी पुलिसकर्मी को बचाने के लिए जिम्मेदार अफसर पत्रकारों को गुमराह करने से भी परहेज नहीं कर रहे हैं। कुछ दिन पूर्व पुलिस अधिकारियों के द्वारा इस मामले को शांत कराने के लिए अजयगढ़ एसडीओपी को जांच सौंपकर जांच उपरान्त कार्यवाही करने का आश्वासन दिया गया था। साथ ही यह भी बताया गया कि एसआई एवं थाना प्रभारी बृजपुर भानु प्रताप को बृजपुर से हटाकर तत्काल प्रभाव से लाइन अटैच किया जायेगा। लेकिन इस संबंध में आदेश जारी न किए जाने से पुलिस अफसरों का आश्वासन झूठा निकला। इससे आहत पत्रकारों ने अपने साथी को इंसाफ मिलने तक आंदोलन करने का ऐलान किया है। पन्ना के पुलिस महकमे के अंदरखाने चर्चा है कि, एसआई खिलाफ कार्यवाही की मांग से कतिपय विभागीय अफसरों के अहंकार को चोट लग रही है। क्योंकि वे इसे अपने खिलाफ और महकमे के अपमान के तौर पर देख रहे है। वास्तविक पीड़ित के साथ खड़े न होकर पुलिस अफसर अपनी हठधर्मिता से जाने-अनजाने सूबे की सरकार की फजीहत कराने के साथ पुलिस के दोहरे रवैये को उजागर कर रहे हैं।

झूठी जानकारी देकर जनसम्पर्क प्रभारी ने किया गुमराह

आंचलिक पत्रकार सतीश विश्कर्मा के संबंध में शाहनगर थाना प्रभारी के द्वारा जानकारी मांगे जाने पर जिला जनसम्पर्क कार्यालय प्रभारी देवेन्द्र सिंह पर अपनी आपराधिक लापरवाही को छिपाने के लिए असत्य जानकारी देकर शासन-प्रशासन को गुमराह करने का गंभीर आरोप लग रहा है। बता दें कि, सतीश ने उन्हें संवाददाता नियुक्त किए जाने संबंधी मीडिया संस्थान का नियुक्ति पत्र जिला जनसम्पर्क कार्यालय में देकर बकायदा पावती प्राप्त की थी। इसके बाद भी जनसम्पर्क कार्यालय प्रभारी ने उनका नाम आंचलिक पत्रकार की सूची में दर्ज नहीं किया। और फिर दुर्भाग्यपूर्ण घटनाक्रम के बाद पुलिस के द्वारा जानकारी मांगे जाने पर सतीश का नाम जनसम्पर्क कार्यालय में दर्ज न होने का पत्र जारी कर दिया। गत दिवस पत्रकारों ने जिला जनसम्पर्क कार्यालय पहुंचकर प्रभारी देवेन्द्र सिंह को सतीश का नियुक्ति पत्र प्राप्त करने के बाद भी उसके संबंध में असत्य और भ्रामक जानकारी देने का कारण पूंछा तो वह कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाया। बहानेबाजी करते हुए देवेन्द्र सिंह ने बताया कि, सतीश पन्ना आकर मुझसे मिलता नहीं है इसलिए उसका नाम दर्ज नहीं किया। इस जवाब से भड़के पत्रकारों ने सवालों की बौछार करते हुए शिकायत करने की बात कही तो जनसम्पर्क कार्यालय प्रभारी ने बिना किसी लागलपेट के अपनी गलती स्वीकर कर ली। देवेन्द्र सिंह ने पुनः नियुक्ति पत्र मांगते हुए नाम दर्ज करने की बात कही लेकिन पत्रकार इसके लिए राजी नहीं हुए। पत्रकारों ने इस मामले में जनसम्पर्क कार्यालय प्रभारी के खिलाफ भी मोर्चा खोलने का निर्णय लिया है।

MP : एसआई के खिलाफ कार्यवाही की मांग को लेकर पत्रकार आज देंगे गिरफ्तारी

0
पत्रकार के साथ अभद्रता करने वाले एसआई के खिलाफ कार्यवाही की मांग को लेकर पन्ना जिला मुख्यालय के पत्रकारों ने गत दिवस पुलिस अधीक्षक कार्यालय के बाहर धरना दिया था।

*     पन्ना में पत्रकार के साथ अभद्रता मामले पर चरणबद्ध आंदोलन जारी

*     जिला जनसम्पर्क कार्यालय प्रभारी की भूमिका को लेकर भी जबरदस्त आक्रोश व्याप्त

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) सरेआम वर्दी का रौब दिखाकर आंचलिक पत्रकार के साथ दुर्व्यवहार करने वाले पुलिस उप निरीक्षक भानु प्रताप सिंह के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध न होने से पन्ना जिले के पत्रकारों के साथ आमजन में भी रोष व्याप्त है। बदमिजाज़ उप निरीक्षक के खिलाफ नियमानुसार क़ानूनी कार्यवाही की जायज़ मांग को लेकर जिले के पत्रकार सप्ताह भर से चरणबद्ध आंदोलन कर रहे है। इसी क्रम में शुक्रवार 25 अक्टूबर को समस्त पत्रकार अपनी गिरफ़्तारी देकर पुलिस और प्रसाशन के हठधर्मी रवैये के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज करवाएंगे। जिले के इतिहास में शायद ऐसा पहली बार होगा जब व्यवस्था के अन्यायपूर्ण रवैये से क्षुब्ध कलमकार (पत्रकार) सांकेतिक जेल भरो आंदोलन के तहत अपनी गिरफ्तरी देंगे।
पत्रकार शिवकिशोर पाण्डेय ने जानकारी देते हुए बताया कि, शुक्रवार 25 अक्टूबर को जिले भर के पत्रकार साथी दोपहर 1 बजे श्री जुगुल किशोर जी मंदिर के बाहर एकत्र होंगें। इसके पश्चात दोपहर 2 बजे पैदल मार्च करते हुए कोतवाली थाना पहुंचकर सभी पत्रकार साथी अपनी गिरफ़्तारी देंगे। विदित हो कि, कुछ दिन पूर्व एसआई एवं बृजपुर थाना प्रभारी भानु प्रताप सिंह ने टिकरिया ग्राम में स्थानीय पत्रकार सतीश विश्वकर्मा के साथ सरेआम मारपीट, गाली-गलौंज और अभद्रता करते हुए मोबाइल फोन जबरन छुड़ा लिया था। यह दुर्भाग्यपूर्ण घटनाक्रम उस समय हुआ जब टिकरिया ग्राम के एक दुकानदार को कथित तौर पर एसआई और एक पुलिसकर्मी के द्वारा नियम-प्रक्रिया का पालन न करते हुए गिरफ्तार कर अपने साथ ले जाने रहे थे। मौके पर भीड़ जुटने पर दुकानदार को ले जा रही पुलिस के नकली होने की अफवाह फ़ैल गई।
स्थानीय पत्रकार सतीश विश्वकर्मा ने वहां पहुंचकर पुलिसकर्मियों से उनका परिचय और दुकानदार को गिरफ्तार करने का सबब पूंछा। लेकिन एसआई भानु प्रताप ने स्पष्टता के साथ संतोषजनक उत्तर न देकर पत्रकार से बाहर जाने के लिए कहा गया। बिना किसी देरी के सतीश बाहर निकलकर पुलिस की कार्यवाही का वीडियो बनाने लगे तो यह देखकर एसआई भानु प्रताप अचानक भड़क उठे। उन्होंने सरेआम वर्दी का रौब दिखाते हुए ‘पुलिसवाला गुंडा’ की तरह पत्रकार के साथ मारपीट, गाली-गलौज कर मोबाइल फोन छुड़ा लिया। पत्रकार के साथ अभद्रता करने में एक पुलिसकर्मी भी शामिल था।
लोकतंत्र के अघोषित चौथे स्तंभ के साथ अपराधियों जैसा सुलूक करने के बेहद अफ़सोसनाक घटनाक्रम का सर्वाधिक विचलित और चिंतित करने वाला पहलू यह है कि, निरपराध पत्रकार को सरेआम बेइज्जत करने के बाद एसआई ने उल्टा उसी पर शासकीय कार्य में बाधा डालने सहित अन्य आरोप लगाकर शाहनगर थाना में आनन-फानन में आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध करवा दिया। लेकिन पुलिस ने वास्तविक पीड़ित पत्रकार की शिकायत पर अब तक एसआई व पुलिसकर्मी के खिलाफ आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध नहीं किया। घटना का वीडियो वायरल होने से लेकर सच्चाई सामने आने के बाद भी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की ओर से एसआई के खिलाफ प्रथम दृष्टया सख्त एक्शन भी नहीं लिया गया। जिससे यह मामला लगातार तूल पकड़ रहा है।
अपने साथी को न्याय दिलाने के लिए पन्ना जिले के पत्रकार सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर है। बता दें कि, एसआई भानु प्रताप सिंह पत्रकारों के साथ पूर्व में पन्ना जिला चिकित्सालय में एक मामले का कवरेज करने के दौरान अभद्रता कर चुके हैं। पत्रकार सतीश विश्वकर्मा प्रकरण में जिले के पत्रकारों में जनसम्पर्क कार्यालय पन्ना प्रभारी देवेन्द्र सिंह की भूमिका को लेकर भी जबरदस्त आक्रोश व्याप्त है। जनसम्पर्क कार्यालय प्रभारी पन्ना में अपनी पदस्थापना के बाद से ही अंग्रेजों की नीति पर चलते हुए पत्रकारों के बीच फूट डालने और प्रशासन को गुमराह करने का काम कर रहे हैं।

संत वैराग्यसदन साहेब को चंदन तिलक और पुष्पहार पहनाकर घोषित किया कबीर आश्रम महंत

0
कबीर मंदिर गद्दी रीवा के वरिष्ठ महंत‌ सनाथ साहब ने संत वैराग्यसदन साहेब को तिलक लगाकर सदगुरु कबीर ध्यान-योग मंदिर ट्रस्ट शाला सिमरा खुर्द का महंत घोषित किया।

 पन्ना जिले की पवई तहसील के ग्राम सिमरा खुर्द स्थित कबीर मंदिर में महंती कार्यक्रम‌ संपन्न

  शरदपूर्णिमा के पावन अवसर पर ‌आयोजित कार्यक्रम में कई जिलों के कबीर भक्त हुए शामिल

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) सदगुरु कबीर ध्यान-योग मंदिर ट्रस्ट शाला सिमरा खुर्द के तत्वाधान में ‌बुधवार 16 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा के शुभ अवसर पर महंती कार्यक्रम‌ सैंकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में परंपरनुसार संपन्न हुआ। इस गरिमामयी कार्यक्रम में कबीर मंदिर गद्दी रीवा के वरिष्ठ महंत‌ सनाथ साहब द्वारा ‌संत श्री वैराग्यसदन साहेब का चंदन तिलक करके और पुष्पहार पहनाकर कबीर आश्रम गद्दी सिमरा खुर्द का महंत घोषित किया गया। संत वैराग्यसदन सिमराखुर्द कबीर आश्रम गद्दी के 12वें महंत है। उन्हें सर्वसम्मति से महंत घोषित किए जाने पर कबीर भक्तों द्वारा पुष्प वर्षा और सदगुरु कबीर साहेब, सनाथ साहेब, मंगलदास साहब एवं महाराज पूरनदास का जयघोष करके अपार प्रसन्नता जाहिर की गई।
महंती कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं का आभार ज्ञापित करते हुए नवनियुक्त महंत‌ वैराग्यसदन साहेब और सभी को आशीर्वाद देते वरिष्ठ महंत सनाथ साहब।
कार्यक्रम के मुख्य प्रवक्ता वरिष्ठ महंत‌ सनाथ साहब जी ने नव नियुक्त महंत वैराग्यसदन साहेब का शॉल ओढ़ाकर सम्मान किया। इस अवसर पर सनाथ साहब ने महान आध्यात्मिक सद्गुरु कबीर साहेब के जीवन दर्शन, पारख ज्ञान पर प्रकाश डालते हुए उनकी शिक्षाओं को जीवन में उतारकर आत्मिक उन्नति करने के लिए श्रद्धालुओं को प्रेरित किया। कबीर पंथ की सेवा का अवसर प्राप्त होने पर अनुग्रह के भाव से भरे नवनियुक्त महंत वैराग्यसदन ने विम्रतापूर्वक उपस्थित श्रद्धालुओं के प्रति आभार ज्ञापित करते हुए इसे अपना सौभाग्य माना है। तदुपरांत श्रद्धालुओं ने साधु-संतों को पुष्प अर्पित कर और उनकी आरती उतारकर बंदगी की। साथ ही नए महंत वैराग्य सदन साहेब को शुभकामनाएं देकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। कबीर भक्तों ने उम्मीद जताई है कि नए महंत के प्रयासों एवं सबके सहयोग से सदगुरु कबीर ध्यान योग मंदिर ट्रस्ट शाला सिमरा खुर्द मानव कल्याण और आध्यात्मिक विकास के उच्चतम शिखर पर पहुंचेगी। मंचीय कार्यक्रम के अंत में भंडारे का आयोजन किया जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
पन्ना जिले की पवई तहसील के ग्राम सिमरा खुर्द स्थित कबीर मंदिर में आयोजित महंती कार्यक्रम‌ बड़ी संख्या कबीर भक्त शामिल हुए।
कबीर ध्यान योग मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में  विशिष्ट अतिथि  के रूप में रामबिहारी कुशवाहा (अधिवक्ता नागौद), मोहनलाल कुशवाहा (धनेह, उचेहरा) , रामसजीवन कुशवाहा, डॉ. ईश्वरदीन पटेल (जबलपुर), सामाजिक कार्यकर्ता पन्नालाल पंथ जबलपुर, रूपलाल बम्हौरी, शिवराज पटेल, कन्छेदी, सीताराम, रामस्वरूप, सरूपा, शिवप्रसाद, फदाली, हरीराम (सिमराखुर्द), बलीराम पटेल पूर्व सरपंच सिमराकला, सदगुरु कबीर ध्यान-योग मंदिर ट्रस्ट शाला सिमरा खुर्द के अध्यक्ष  इंजी. जवाहर लाल कुशवाहा, उपाध्यक्ष जवाहर पटेल, महासचिव अजुद्धी पटेल, कोषाध्यक्ष रामखिलावन, सहसचिव गुलजारी पटेल सहित पन्ना जिला के अलावा पड़ोसी जिला सतना, कटनी, जबलपुर और रीवा के सैंकड़ों कबीर भक्त शामिल रहे।

अनियमितता | ठेकेदार को आर्थिक लाभ पहुंचाने नियम-प्रक्रिया को मज़ाक बनाकर किया 35 लाख रुपए का अतिरिक्त भुगतान

0
जिले सिंह बघेल, मुख्य अभियंता, (भवन) लोनिवि, संभाग रीवा।

*     माप पुस्तिका में पेज चस्पा करके तैयार किया गया कूटरचित बिल

*     पन्ना जिले के लोक निर्माण विभाग (भवन) का मामला

*     उपयंत्री ने उजागर किया कार्यपालन यंत्री और सहायक यंत्री का फर्जीवाड़ा

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के अति पिछड़े पन्ना जिले में व्याप्त भ्रष्टाचार सारी सीमाएं लांघ चुका है। जिले के कतिपय प्रशासनिक अधिकारी-कर्मचारियों, सत्ताधारी दल के जनप्रतिनिधि-राजनेता मिलकर संगठित तरीके से सरकारी धन को लूटकर अपनी तिजोरी भरने के एक सूत्रीय अभियान में जुटे है। यहां आए दिन सरकारी योजनाओं एवं कार्यों में गंभीर अनियमितता से जुड़े हैरान करने वाले मामले सामने आने से सूबे की मोहन सरकार का भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने का दावा पूरी तरह खोखला साबित हो रहा है। पन्ना के लोक निर्माण विभाग (भवन) के कार्यपालन यंत्री व सहायक यंत्री का फर्जीवाड़ा इसका ताज़ा उदाहरण है। दोनों ही तकनीकी अधिकारियों पर जिला चिकित्सालय उन्नयन कार्य के ठेकेदार को आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए पद का दुरुपयोग करते हुए भुगतान संबंधी नियम-प्रक्रिया को ठेंगा दिखाने का आरोप लगा है।
कथित तौर पर निहित स्वार्थपूर्ति के चक्कर में तकनीकी अधिकारियों ने माप पुस्तिका के साथ छेड़छाड़ करते हुए कूटरचित बिल तैयार कर हॉस्पिटल ठेकेदार को 35 लाख रुपये का अतिरिक्त भुगतान कर दिया। बिल्डिंग का जो कार्य अभी हुआ भी नहीं ठेकेदार को उसकी राशि का भुगतान कर शासन को आर्थिक क्षति पहुँचाने से जुड़े इस मामले का खुलासा किसी ओर ने नहीं बल्कि संबंधित कार्य के प्रभारी उपयंत्री ने विभाग के प्रमुख सचिव को भेजी गई शिकायत में किया है। कार्यपालन यंत्री के मनमाफिक ठेकेदारों को अतिरिक्त भुगतान करने में आवश्यक सहमति न देने पर उपयंत्री के प्रभार से संबंधित कार्यों में चार साल के अंदर सात बार बदलाव किया गया। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए प्रमुख सचिव ने मामले की जांच के निर्देश दिए है। आर्थिक अनियमितता एवं प्रताड़ना से संबंधित इस प्रकरण की जांच अधीक्षण यंत्री (भवन) लोक निर्माण विभाग मण्डल रीवा ने शुरू कर दी है।
निर्माण एजेंसी लोक निर्माण विभाग (पीआईयू) वर्तमान नाम लोक निर्माण विभाग (भवन) पन्ना ने माह नवंबर 2020 में दो सौ बिस्तरीय जिला चिकित्सालय पन्ना का 300 बिस्तरीय में उन्नयन करने के लिए कार्यादेश जारी किया था। लगभग 11 करोड़ 80 लाख से अधिक की लागत से नवीन हॉस्पिटल बिल्डिंग का निर्माण कार्य ठेके पर लक्ष्मी चन्द एण्ड कम्पनी, ग्वालियर द्वारा कराया जा रहा है। कार्य पूर्णता के लिए निर्धारित समयसीमा दो वर्ष पूर्व समाप्त होने के बाद भी हॉस्पिटल बिल्डिंग अधूरी पड़ी है। घटिया फिनिशिंग वर्क तथा कार्य की गुणवत्ता को लेकर शुरू से ही बिल्डिंग निर्माण पर सवाल उठते रहे हैं। लेकिन कमीशन के चक्कर जिम्मेदार तकनीकी अधिकरियों से लेकर कंसल्टेंट एजेंसी ने निर्माण कार्य को गुणवत्ता के मानकों के अनुरूप कराने के लिए ठेकेदार पर कभी भी जोर डाला। जानबूझकर बरती जाने वाली इस उदासीनता से जिम्मेदार अधिकारीयों और ठेकेदार के बीच सांठगांठ होने के संकेत मिलता है। इनके बीच सांठगांठ कितनी गहरी है, इसका अंदाजा सिर्फ इसी बात से लगाया जा सकता है कि तकनीकी अधिकारियों पर ठेकेदार को आर्थिक लाभ पहुँचाने के बेहद गंभीर आरोप लगे हैं।
जिला अस्पताल पन्ना के उन्नयन भवन का सूचना बोर्ड।
बता दें कि, ठेकेदार को 11(A) रनिंग बिल के जरिए दिनांक 22 मई 2024 को चेक क्रमांक 28040000676 से रुपए 2,0347920/- रुपए का भुगतान किया गया था। हॉस्पिटल बिल्डिंग के प्रभारी उपयंत्री पीके जैन का दावा है, 11(A) रनिंग बिल में ठेकेदार को रुपए 34,70,256/- का अतिरिक्त भुगतान किया गया है। नियम-कायदों से समझौता न करने और ठेकेदारों पर प्रभावी नियंत्रण रखते हुए हर हाल में गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य सुनिश्चित कराने के लिए बाल सी बारीकी को लेकर सजग रहने वाले उपयंत्री जैन ने अतिरिक्त भुगतान मामले में अपने वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका को लेकर हैरान करने वाला खुलासा किया है। इस संबंध में विभाग के प्रमुख सचिव एवं पन्ना कलेक्टर को भेजी गई शिकायत में उपयंत्री ने बताया है कि, उनके द्वारा ठेकेदार का 11(A) रनिंग बिल रुपए 1,68,77,664/- भुगतान हेतु माप पुस्तिका क्रमांक 148 के पृष्ठ क्रमांक 37 पर प्रस्तुत किया गया था। लेकिन तत्कालीन कार्यपालन यंत्री जगदीश प्रसाद सोनकर द्वारा संविदकार को आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए माप पुस्तिका के पेज क्रमांक 38 पर दिनांक 22 मई 2024 को चेक क्रमांक 28040000676 से रुपए 2,0347920/- रुपए का भुगतान कर दिया गया।
यहां गौर करने वाली बात यह है कि, ठेकेदार को रुपए 34,70,256/- का अतिरिक्त भुगतान माप पुस्तिका (मेजरमेंट बुक) क्रमांक 148 के पृष्ठ क्रमांक 37 पर पूर्व से बने बिल के ऊपर अतिरिक्त पृष्ठ चस्पा करके किया था। अर्थात एमबी (मेजरमेंट बुक) के साथ छेड़छाड़ करते हुए कूटरचित बिल तैयार किया गया था। सिर्फ इतना ही नहीं, ठेकेदार को अतिरिक्त भुगतान करने के लिए तत्कालीन कार्यपालन यंत्री जेपी सोनकर व सहायक यंत्री यशवंत सिंह ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना भी उचित नहीं समझा। नियमानुसार भुगतान किए गए बिल पर कार्य की देखरेख करने वाले प्रभारी उपयंत्री जैन के हस्ताक्षर नहीं कराए गए।
उपयंत्री ने अपनी शिकायत में बताया, उनके द्वारा ठेकेदार के 11(A) रनिंग बिल में भुगतान हेतु मेजरमेंट चेक करके जो आइटम स्वीकृत एनआईटी में नहीं है, जिस आइटम में ठकेदार के द्वारा पूरा कार्य नहीं कराया गया अथवा गुणवत्तापूर्ण कार्य नहीं किया गया है, उसमें उचित कारण दर्शाते हुए माप पुस्तिका क्रमांक 183 (पृष्ठ क्रमांक- 6, 9, 14, 22, 23, 57, 63, 71 एवं 78) पर भुगतान कम करके रुपए 1,68,77,664/- का बिल माप पुस्तिका क्रमांक 148 के पृष्ठ क्रमांक 37 पर प्रस्तुत किया गया था। कथित तौर पर ठेकेदार के बिल में कटौती करना वरिष्ठ अधिकारियों को इतना नागवार गुजरा कि उन्होंने भुगतान प्रक्रिया का माखौल उड़ाते हुए उपयंत्री को बाइपास करके ठेकेदार को मनमाने तरीके से रुपए 2,0347920/- का भुगतान कर दिया। पूर्व में छटवें रनिंग बिल का भुगतान भी इसी तर्ज पर उपयंत्री के हस्ताक्षर के बगैर किया गया था। उपयंत्री पीके जैन का आरोप है, बिना मेरे बिल की जांच एवं हस्ताक्षर के संविदाकार को माप पुस्तिका क्रमांक- 99 के पृष्ठ क्रमांक 66 में रुपए 34,31,751/- का भुगतान नियम विरुद्ध तरीके से किया गया था। जिसकी लिखित जानकारी उनके द्वारा दिनांक 22 दिसंबर 2023 तत्कालीन कार्यपालन यंत्री (भवन) को दी गई थी। लेकिन उनके द्वारा आज तक कोई कार्यवाही नहीं की गई।

पीएस से शिकायत के बाद शुरू हुई जांच

प्रमोद कुमार जैन, उपयंत्री।
निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बगैर हॉस्पिटल बिल्डिंग ठेकेदार को बार-बार मनमाने तरीके से लाखों रुपए का भुगतान कर शासन को आर्थिक क्षति पहुंचाने के मामले में स्थानीय स्तर पर कोई कार्यवाही न होने से निराश प्रभारी उपयंत्री पीके जैन काफी समय से मानसिक आघात की स्थिति से जूझ रहे थे। वरिष्ठ तकनीकी अधिकारियों को वस्तुस्थिति से अवगत कराने पर भी अवैध भुगतान पर रोक नहीं लग सकी। इस स्थिति से परेशान होकर उपयंत्री द्वारा अतिरिक्त भुगतान मामले की शिकायत लोक निर्माण विभाग के शीर्ष अधिकारी प्रमुख सचिव से की गई। एमबी से छेड़छाड़ करके कूटरचित बिल तैयार कर संविदाकार को मनमाना भुगतान करने से जुड़ी शिकायत को प्रमुख सचिव ने गंभीरता से लेते हुए मुख्य अभियंता लोक निर्माण विभाग (भवन) संभाग रीवा को कमेटी गठित कर जांच करने के निर्देश दिए है। लेकिन मुख्य अभियंता द्वारा कमेटी गठित न करके प्रभारी अधीक्षण यंत्री मण्डल रीवा केके सिंघारे को जांच के सिलसिले में दिनांक 9 अक्टूबर 2024 को पन्ना भेजा। अधीक्षण यंत्री सिंघारे ने शिकायत की जांच हेतु पन्ना आगमन की पूर्व सूचना शिकायतकर्ता को नहीं दी। उन्होंने पन्ना पहुँचने के बाद उपयंत्री जैन को मोबाइल पर कॉल करके उन्हें निर्माणाधीन हॉस्पिटल बिल्डिंग में बुलाया था। कार्य का सत्यापन करने के लिए जांच अधिकारी के पास मौके पर स्वीकृत एनआईटी, डिटेल स्टीमेट, टाइम एक्सटेंशन लेटर आदि आवश्यक दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं थे।

समझौता न करने पर प्रभार में बदलाव की सजा

अधीक्षण यंत्री एवं जांच अधिकारी श्री सिंघारे को उपयंत्री जैन ने बताया कि, कार्यपालन यंत्री व सहायक यंत्री की ठेकेदार से सांठगांठ के चलते बिल भुगतान के समय प्रभार वाले कार्यों में बार-बार बदलाव करके उन्हें लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है। वर्ष 2015 से लेकर 2018 तक छह बार और वर्ष 2021 से लेकर 2024 तक सात बार प्रभार वाले कार्यों में बदलाव किया गया। उपयंत्री का आरोप है, कार्यों की गुणवत्ता से समझौता न करने और ठेकेदार को अतिरिक्त भुगतान जैसे अवैध कार्य में सहयोग न करने की उन्हें लगातार सजा दी जा रही है। हद तो तब हो गई जब मनमाफिक कार्य करवाने एवं निर्माण कार्यों की प्रगति के कागजी घोड़े दौड़ने के लिए कार्यपालन यंत्री (भवन) लोनिवि पन्ना ने जिले के कार्यों की निगरानी का अतिरिक्त प्रभार पड़ोसी जिला सतना में पदस्थ उपयंत्रियों को सौंपने का आदेश जारी कर दिया। यह अजब-गजब व्यवस्था पिछले कई सालों से चल रही है। इस अव्यवहारिक और अदूरदर्शी फैसले के दुष्परिणाम निर्माण कार्यों की गुणवत्ता प्रभावित होने के तौर पर सामने आने के बाद भी वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी अपनी गलती को सुधारने के लिए तैयार नहीं हैं।

जल उपयोग राशि कटौती में विलंब क्यों ?

जिला चिकित्सालय पन्ना के उन्नयन भवन की ठेका फर्म लक्ष्मी चन्द एण्ड कम्पनी द्वारा पूर्व में साइट पर स्थित कुआं तथा वर्तमान में बोरिंग के पानी का उपयोग निर्माण कार्य में किया जा रहा है। शासन के सर्कुलर अनुसार निर्माण कार्य में शासकीय स्रोत से पानी का उपयोग किए जाने पर निर्माण की कुल लागत की एक प्रतिशत राशि काटकर ठेकेदार को भुगतान किया जाना चाहिए। हॉस्पिटल भवन के प्रभारी उपयंत्री द्वारा जल उपयोग की राशि कटौती का मामला कार्यपालन यंत्री के संज्ञान में लाया गया। बावजूद इसके कार्यपालन यंत्री द्वारा नियम-निर्देशों को ताक पर रखकर शासन को आर्थिक क्षति पहुंचाते हुए लगातार गलत भुगतान किया जा रहा है। ठेकेदार को आर्थिक लाभ पहुंचाकर अपने हित साधने में जुटे तकनीकी अधिकारियों के मनमाने रवैये का अंदाजा इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि पिछले चार साल से ठेकेदार शासकीय स्रोत से पानी का उपयोग कर बिल्डिंग बना रहा है लेकिन माप पुस्तिका में इसे दर्ज नहीं किया गया।

टाइम एक्सटेंशन के बगैर निर्माण और भुगतान जारी

उपयंत्री के द्वारा निर्माण कार्य के टाइम एक्सटेंशन हेतु ठेकेदार को तीन पत्र लिखे गए जिसकी कॉपी सूचनार्थ कार्यपालन यंत्री को प्रेषित की गई।
हॉस्पिटल भवन उन्नयन के लिए निर्माण एजेंसी के द्वारा दिनांक 6 नवंबर 2020 को संविदाकार को जारी किए गए कार्यादेश में कार्य पूर्णता के लिए 2 वर्ष की समयसीमा निर्धारित की गई थी। कथित तौर पर साइट पर अवैध कब्ज़ा होने के कारण तय समयसीमा में निर्माण पूरा नहीं हो सका। कार्य पूर्णता की समयावधि समाप्त हुए करीब दो वर्ष का लंबा अर्सा गुजरने के बाद भी आज तक कार्यपालन यंत्री (भवन) लोक निर्माण विभाग पन्ना ने समय विस्तार हेतु सक्षम अधिकारी से आवश्यक अनुमति प्राप्त नहीं ली। जबकि समयावधि बढ़ाने हेतु आवश्यक अनुमति प्राप्त करने के लिए प्रभारी उपयंत्री की ओर से बकायदा पत्राचार कर संबंधित ठेकेदार और कार्यपालन यंत्री का ध्यान आकृष्ट कराया गया। लेकिन लोनिवि (भवन) पन्ना में व्याप्त हद दर्जे की अंधेरगर्दी का हाल यह है कि, टाइम एक्सटेंशन की अनुमति/स्वीकृति के बगैर पिछले दो साल से नियम-प्रक्रिया का माखौल उड़ाते हुए न सिर्फ ठेकेदार अपनी गति से कार्य करवा रहा है बल्कि विभाग के द्वारा बिना किसी पेनाल्टी के उसके बिलों का भुगतान भी नियमित रूप से किया जा रहा है।

इनका कहना है –

“ठेकेदार को सभी भुगतान नियमनुसार किए गए। किसी भी भुगतान में कहीं कोई फर्जीवाड़ा नहीं हुआ, जिसका सत्यापन मौके पर कार्य की प्रगति का एमबी से मिलान करके किया जा सकता है। शासन ने जांच टीम गठित कर दी है, जांच दल को प्रत्येक आरोप का जवाब दिया जाएगा।”

जगदीश प्रसाद सोनकर, पूर्व कार्यपालन यंत्री (भवन) लोनिवि पन्ना।

“पन्ना के निरीक्षण के दौरान कार्य का सत्यापन करने के लिए मौके पर आवश्यक दस्तावेज मंगाए गए थे। भवन की गुणवत्ता तथा कार्य के अनुपात में भुगतान से संबंधित जो भी कुछ देखा है उसका उल्लेख रिपोर्ट में किया जाएगा। रिपोर्ट तैयार करने के लिए पन्ना से आवश्यक दस्तावेज मंगाए है। अगले सप्ताह तक मुख्य अभियंता को अपनी जांच रिपोर्ट सौंप दूंगा। उपयंत्री के प्रभार में बार-बार बदलाव किया जाना मेरे कार्यक्षेत्र और जांच से संबंधित विषय नहीं है इसलिए मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा।”

केके सिंघारे, अधीक्षण यंत्री (भवन) लोनिवि सर्किल रीवा।

“उपयंत्री प्रमोद कुमार जैन के आरोपों की जांच केके सिंघारे, प्रभारी अधीक्षण यंत्री, (भवन) मण्डल रीवा को सौंपी है। वे पिछले सप्ताह पन्ना जाकर स्थल का निरीक्षण और दस्तावेजों से कार्य का सत्यापन कर चुके है। .संभवतः अगले सप्ताह तक उनके द्वारा रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। जांच रिपोर्ट में जो भी तथ्य सामने आएंगे उनके आधार आगे की कार्यवाही की जाएगी।

जिले सिंह बघेल, मुख्य अभियंता, (भवन) लोनिवि, संभाग रीवा।

स्मार्ट बिजली मीटर परियोजना : हंगामा है क्यूं बरपा!

0
प्री-पेड स्मार्ट बिजली मीटर लगाने का विरोध करते हुए उपभोक्ता। (फाइल फोटो)

(आलेख : संजय पराते)

क्षिण मुंबई में बेस्ट (विद्युत वितरण कंपनी) ने स्मार्ट बिजली मीटर लगाने के काम को स्थगित कर दिया है। इस कंपनी के 10.8 लाख आवासीय और व्यवसायिक उपभोक्ता है और 3 लाख स्मार्ट मीटर वह लगा चुकी है। जिन घरों या दुकानों में ये मीटर लगाए गए हैं, सबकी शिकायत है कि पहले की अपेक्षा दुगुने और तिगुने बिजली बिल आ रहे हैं। उपभोक्ताओं का विरोध इतना जबरदस्त है कि बेस्ट को स्मार्ट बिजली मीटर लगाने की यह परियोजना स्थगित करनी पड़ी है। यह ‘स्थगन’ इसलिए जरूरी था कि कुछ दिनों के बाद ही महाराष्ट्र में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं।
रांची में सरकार द्वारा जोर-जबरदस्ती से स्मार्ट मीटर लगाए जाने की खबरों के बीच एक खबर यह भी है कि बिहार के भागलपुर जिले के जगदीशपुर ब्लॉक में नेहा कुमारी नामक एक बीपीएल उपभोक्ता को 64 लाख रुपये का बिजली बिल भेजा गया है और उसकी शिकायत की कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है। बिहार में स्मार्ट मीटरों के जरिए उपभोक्ताओं को लूटने और फ्रॉड बिलिंग की शिकायतें बहुत बढ़ गई है।
ये स्मार्ट मीटर अडानी और टाटा की कॉर्पोरेट कंपनियों द्वारा बनाए जा रहे हैं। उत्तरप्रदेश में विद्युत वितरण निगम ने अडानी समूह के स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने का 25000 करोड़ रुपयों का टेंडर निरस्त कर दिया है, क्योंकि अडानी प्रति मीटर 10000 रूपये ले रहा था। निगम का मानना है कि इन मीटरों की कीमत वास्तविक लागत से बहुत ज्यादा है।
पूरे देश में इन स्मार्ट मीटरों को लगाए जाने के खिलाफ प्रदर्शनों की बाढ़ आ गई है और जगह-जगह उपभोक्ता इन मीटरों को उखाड़ कर फेंक रहे हैं और पुराने मीटरों को ही लगाने की मांग कर रहे हैं। विभिन्न राज्यों की विद्युत वितरण कंपनियां (डिस्कॉम) भी स्मार्ट बिजली मीटर परियोजना के पक्ष में नहीं है। लेकिन केंद्र की भाजपा सरकार इस परियोजना के पक्ष में अड़ी हुई है। उसका कहना है कि बिजली क्षेत्र के ‘आधुनिकीकरण’ (इसे ‘निजीकरण’ पढ़ें) के लिए यह जरूरी है। लेकिन सरकार के पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि यह कैसा ‘आधुनिकीकरण’ है, जो उपभोक्ताओं पर कहर ढा रहा है!
संजय पराते।
भाजपा सरकार का कहना है कि उपभोक्ताओं को नए स्मार्ट मीटरों का विरोध नहीं करना चाहिए, क्योंकि पुराने और नए में कोई अंतर नहीं है। लेकिन भाजपा सरकार चुप है कि यदि दोनों मीटरों में कोई अंतर नहीं है, तो देश के 28 करोड़ मीटरों को बदलने के लिए 2.80 लाख करोड़ रुपयों को खर्च करने की कवायद क्यों की जा रही है। अंततः इस खर्च से फायदा किसे होना है?
इसी सवाल के जवाब में पूरी ‘राम कहानी’ छिपी है। चूंकि ये स्मार्ट मीटर अडानी और टाटा द्वारा बनाए जा रहे हैं, पुराने मीटरों को बदलने का सीधा फायदा अडानी और टाटा को ही होगा। जिस धनराशि का उपयोग आम जनता के लिए समाज कल्याण कार्यों के लिए होना चाहिए था, उसकी जगह 2.80 लाख करोड़ रुपए इन दो कॉर्पोरेटों की तिजोरियों में डाला जा रहा है।
लेकिन मामला केवल यही तक नहीं है। असली मामला है बिजली क्षेत्र के निजीकरण का और कॉरपोरेट कंपनियों के लिए बाजार बनाने का। इन मीटरों को प्री-पेड योजना से जोड़ा जा रहा है, जिसका अर्थ है कि इन मीटरों को (मोबाइल की तरह) पहले रिचार्ज करना होगा- याने पैसा खतम, बिजली गुल! यदि एजेंसी की किसी तकनीकी खराबी के कारण भी स्मार्ट मीटर नो-बैलेंस दिखाएगा, तो आपकी बिजली कट जायेगी और फिर से जोड़ने के लिए जुर्माना अदा करना पड़ेगा।
लेकिन खतरा केवल यहीं तक नहीं है। यदि बिजली क्षेत्र का निजीकरण होता है, तो बिजली वितरण और इसकी दरों को निर्धारित करने का काम भी अडानी और टाटा की कॉरपोरेट कंपनियां ही करेगी और ये कंपनियां ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए बढ़े-चढ़े दामों पर बिजली बेचने के लिए स्वतंत्र होगी। विद्युत नियामक आयोग निष्प्रभावी हो जाएगा और इनके दामों पर लगाम लगाने के लिए सरकार के पास कोई ताकत नहीं होगी। क्रॉस सब्सिडी, जिसके कारण आज गरीबों, घरेलू उपभोक्ताओं और किसानों को सस्ती बिजली मिलती है, बंद हो जाएगी। आर्थिक रूप से कमजोर ये तबके इन दामों को वहन करने की स्थिति में ही नहीं होंगे। इसके साथ ही, भाजपा सरकार बिजली की कीमतों को टाइम ऑफ डे (टीओडी) से भी जोड़ने जा रही है, जिसका अर्थ है कि रात के समय बिजली महंगी मिलेगी, जबकि सभी लोग बिजली का अधिकतम उपयोग रात को ही करते हैं।
भाजपा सरकार द्वारा प्रस्तावित जन विरोधी बिजली संशोधन विधेयक में ये सभी प्रावधान हैं और पूरे देश में स्मार्ट मीटर लगाने की परियोजना इसी का हिस्सा है। इन मीटरों का जीवनकाल केवल 7 साल है। जैसे कुछ सालों बाद मोबाइल काम करना बंद कर देते हैं, वैसे ही इन मीटरों को 7 साल बाद बदलना जरूरी हो जाएगा। आज सरकार अपने खजाने से पैसा दे रही है, कल उपभोक्ताओं को अपनी जेब से देना होगा। आज इन मीटरों की कीमत 10000 रूपये हैं, 7 साल बाद इनकी कीमत दुगुने से भी ज्यादा होगी।
फाइल फोटो।
आज पूरी दुनिया में बिजली वितरण का 70% से ज्यादा हिस्सा सार्वजनिक स्वामित्व में है, जिसके चलते क्रॉस सब्सिडी देना संभव होता है और कमजोर तबकों को वहनीय कीमतों पर बिजली मिलती है। लेकिन हमारे देश में भाजपा सरकार क्रॉस सब्सिडी को खत्म करने और पूरे बिजली वितरण के काम का निजीकरण करने की दिशा में बढ़ रही है। महंगी बिजली देश के खाद्यान्न उत्पादन और खाद्यान्न सुरक्षा को भी प्रतिकूल रूप से प्रभावित करेगी। वैश्विक भूख सूचकांक में आज देश 105वें स्थान पर है। महंगी बिजली इस दर्जे को और नीचे ले जाएगी। साफ है कि यह नीति कॉर्पोरेटों को मालामाल करेगी और गरीबों को और ज्यादा कंगाल। यह नीति देश को अंधेरे में ढकेलने की साजिश है।
आज आम जनता के लिए बिजली एक बुनियादी जरूरत है, जिसके बिना मानव सभ्यता के विकास की कल्पना भी नहीं की जा सकती। यदि कोई सरकार आम जनता को इस बुनियादी जरूरत से ही वंचित करने की कोशिश करती है, तो ऐसी सरकार को असभ्य और बर्बर ही कहा जाएगा। सभ्यता को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी है कि ऐसी असभ्य सरकार की विदाई सुनिश्चित की जाए। इतिहास बताता है कि आम जनता की लामबंदी और राजनैतिक इच्छा शक्ति से ऐसा होना मुमकिन है।

(लेखक अखिल भारतीय किसान सभा से संबद्ध छत्तीसगढ़ किसान सभा के उपाध्यक्ष हैं। संपर्क : 94242-31650)

डिस्क्लेमर :- इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति “रडार न्यूज़” उत्तरदायी नहीं है।