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जीवन को अर्थपूर्ण बनाता है योग – मुख्यमंत्री श्री चौहान

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अन्तर्राट्रीय योग दिवस पर मुख्यमत्री शिवराज सिंह चौहान और केन्द्रीय मंत्री थावरचंद गेहलोत ने योगाभ्यास किया।

मुख्यमंत्री निवास में मनाया गया अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 

भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि योग जीवन को अर्थपूर्ण बनाता है। श्री चौहान आज मुख्यमंत्री निवास में आयोजित चौथे अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम में स्कूली बच्चों को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन स्कूल शिक्षा विभाग के तत्वावधान में राज्य-स्तरीय योग प्रशिक्षण केन्द्र द्वारा किया गया।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री निवास पर छात्र-छात्राओं के साथ।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बच्चों से कहा कि रोज आधा घंटा योग करें। नियमित योगाभ्यास से ही योग के फायदे मिलेंगे। योगासन, प्राणायाम को जीवन का अभिन्न अंग बनायें। उन्होंने कहा कि योग से शरीर मजबूत होता है। मन प्रसन्न और बुद्धि प्रखर बनती है। खूब मन लगाकर पढ़ें। अच्छे अंक लायें। उच्च शिक्षा की फीस राज्य सरकार भरवाएगी।

योगाभ्यास में भोपाल के विभिन्न स्कूलों के 500 से अधिक बच्चे शामिल हुए। बच्चों ने योगासन और प्राणायाम का अभ्यास किया।

स्व-सहायता समूह से जुड़कर आत्म-निर्भर हुईं महिलाएँ

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मोमिना बेगम

भोपाल। प्रदेश में जरूरतमंद महिलाएँ स्व-सहायता समूह से जुड़कर अपने परिवार की आय बढ़ाने में सहयोग कर रही है। इन महिलाओं को सिलाई मशीन जैसे फुटकर व्यापार के लिये स्व-सहायता समूह से आर्थिक मदद मिली है। सिंगरौली में मोमिना बेगम घर के ही काम-काज किया करती थी। उनकी इच्छा थी कि परिवार की आमदनी बढ़ाने के लिये स्वयं का छोटा-मोटा रोजगार करें। इसके लिये वे शिवदया स्व-सहायता समूह की सदस्य बन गईं। समूह के सदस्य के रूप में उन्होंने सिलाई मशीन खरीद ली और घर पर ही सिलाई का काम करने लगीं। समूह के बैंक लिंकेज होने के कारण उन्हें बैंक से सिलाई कार्य को बढ़ाने के लिये 10 हजार रुपये का ऋण भी मिल गया। आज वे परिवार के खर्च में सहयोग कर रही हैं और के लिये बचत भी शुरू कर दी है। मोमिना बताती हैं कि स्व-सहायता समूह में बड़ी ताकत होती है।

गीता सिलाई कार्य से बनी आत्म-निर्भर : सिंगरौली में डे-राष्ट्रीय आजीविका मिशन योजना के माध्यम से महिलाओं के स्व-सहायता समूह गठित किये जा रहे हैं। गीता सोनी मिशन के माध्यम से गीतांजलि स्व-सहायता समूह से जुड़ गई है। गीता पहले घर के ही काम-काज किया करती थी। उनकी इच्छा थी कि वे घर खर्च में सहायता करें। इसके लिये उन्होंने स्व-सहायता समूह के माध्यम से सिलाई मशीन खरीद ली। उन्हें इस कार्य के लिये स्व-सहायता समूह के माध्यम से 10 हजार रुपये की राशि मिली। इससे उन्होंने अपने सिलाई कार्य को बढ़ाया है। आज वे प्रतिदिन 150 से 200 रुपये का सिलाई कार्य कर लेती हैं। गीता अपने मोहल्ले की अन्य महिलाओं को भी स्व-सहायता समूह से जुड़ने के लिये प्रेरित कर रही हैं। 

आश्रय-स्थल से नरेन्द्र को मिला आश्रय : नरेन्द्र त्रिपाठी रोजगार के लिये सीधी से सिंगरौली के बैढ़न आये थे। पहले तो वे कुछ दिन रिश्तेदारों के यहाँ ठहरे। इसके बाद उन्होंने आश्रय-स्थल में अपना ठिकाना ढूँढा। आश्रय-स्थल में उनका पंजीयन बेघर व्यक्ति के रूप में हुआ। आश्रय-स्थल को चलाने वाली संस्था ने इनकी योग्यता को देखकर आश्रय-स्थल के संचालन के लिये केयर-टेकर की जिम्मेदारी सौंपी। आज वे सफलतापूर्वक इस काम को कर रहे हैं। नरेन्द्र कहते हैं कि आश्रय-स्थल ने उन्हें आश्रय ही नहीं, बल्कि रोजगार भी दिया है।

जल संसाधन मंत्री डॉ. मिश्र ने मोहनपुरा पहुँचकर देखीं प्रधानमंत्री की यात्रा की तैयारियां

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जल संसाधन, जनसम्पर्क और संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने आज राजगढ़ के नज़दीक मोहनपुरा पहुँचकर आगामी 23 जून को प्रधानमंत्री जी के कार्यक्रम की तैयारियों की जानकारी प्राप्त की।

भोपाल। जल संसाधन, जनसम्पर्क और संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने आज राजगढ़ के नज़दीक मोहनपुरा पहुँचकर आगामी 23 जून को प्रधानमंत्री जी के कार्यक्रम की तैयारियों की जानकारी प्राप्त की। मंत्री डॉ. मिश्र के साथ राजगढ़ जिले के जनप्रतिनिधि, जिला प्रशासन के अधिकारी, जल संसाधन विभाग के अपर मुख्य सचिव आर.एस. जुलानिया उपस्थित थे। जल संसाधन मंत्री डॉ. मिश्र ने मोहनपुरा में सभा स्थल, बांध, हेलीपेड इत्यादि का अवलोकन किया। जनसम्पर्क मंत्री ने जिला पंचायत राजगढ़ के सभा कक्ष में जिले के जनप्रतिनिधियों के साथ प्रधानमंत्री जी की यात्रा के संबंध में चर्चा की। जनप्रतिनिधियों ने बताया की मोहनपुरा सिंचाई परियोजना से संपूर्ण जिले को लाभ प्राप्त होगा।

सर्वसमाज की बैठक के बाद हिन्दू संगठनों ने स्थगित किया चक्काजाम

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कलेक्टर मनोज खत्री को सौंपते मुस्लिम समाज के लोग।

अजयगढ़ में तनाव को कम करने प्रशासन ने आयोजित की सर्वसमाज की बैठक

गौवंश का सिर मिलने के बाद से में निर्मित है तनाव

अज्ञात आरोपी की गिरफ्तारी की मांग को लेकर बंद रहा अजयगढ़

मौत के बाद धड़ से अलग हुआ बछड़े का सिर पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुआ खुलासा

पन्ना/अजयगढ़ रडार न्यूज। पन्ना जिले के अजयगढ़ कस्बा में विगत दिनों गाय के बछड़े का सिर मिलने के बाद से तनावपूर्ण स्थिति निर्मित है। इस कृत्य को अंजाम देने वाले अज्ञात आरोपी का सुराग लगाकर उसे गिरफ्तार करने की मांग को लेकर मंगलवार को हिन्दू संगठनों के आव्हान पर अजयगढ़ कस्बा पूर्णतः बंद रहा। पूर्व घोषित बंद के ऐलान के मद्देनजर अधिकांश व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखे। वहीं तनाव और अक्रोश को कम करने की दिशा में जिला प्रशासन की ओर से सार्थक पहल करते हुए मंगलवार शाम को सर्वसमाज और संगठनों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। हिन्दूवादी संगठनों के प्रतिनिधियों, मुस्लिम समाज के लोगों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच घटना को लेकर विस्तृत चर्चा हुई और सभी पक्षों की बात सुनकर उन्हें आवश्यक कार्रवाई करने का भरोसा दिलाया गया। साथ ही नगर में सामाजिक सौहार्द और अमन-चैन बनाये रखने के लिए सभी पक्षों को समझाइश दी गई। फलस्वरूप हिंदूवादी संगठनों ने अपनी और से सकारात्मक पहल करते हुए बुधवार 20 जून को घोषित अपने चक्काजाम प्रदर्शन को स्थगित कर दिया है । इस महत्वपूर्ण बैठक में जिला मजिस्ट्रेट एवं पन्ना कलेक्टर मनोज खत्री, डीआईजी छतरपुर रेंज अनिल महेश्वरी, पन्ना पुलिस अधीक्षक रियाज इकबाल और अजयगढ़ एसडीएम जेएस बघेल उपस्थित रहे। इस बैठक में डीआईजी अनिल महेश्वरी ने जानकारी देते हुए बताया कि जिस बछड़े का सिर मिला था, उसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि बछड़े की मौत के बाद सिर धड़ से अलग हुआ था। उल्लेखनीय है कि ईद के त्यौहार के समय अजयगढ़ कस्बा में पुराना पावर हाउस के पास बछड़े का सिर मिलने के बाद से यह अंदेशा जताया जा रहा था कि कतिपय असमाजिक तत्वों ने सोची-समझी साजिश के तहत आपसी सद्भाव और शांति को बिगाड़ने के उद्देश्य से यह घिनौना कृत्य किया है। इस घटना को लेकर मंगलवार को हिन्दू संगठनों के आव्हान पर अजयगढ़ बंद के चलते प्रशासन सतर्क रहा। कानून व्यवस्था और शांति बनाये रखने के लिए विशेष इंतजाम करते हुए अजयगढ़ में भारी तादाद में पुलिस बल को तैनात किया गया। जिससे दिन भर पूरा नगर पुलिस छावनी बना रहा। इस संवेदनसील मामले के प्रकाश में आने के बाद से ही प्रशासन और पुलिस सतर्क व मुस्तैद है। हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही है।

उग्र नारेबाजी से बढ़ रहा तनाव-

उधर मंगलवार की ही शाम को पन्ना पहुंचे मुस्लिम समाज के एक प्रतिनिधि मंडल ने यहां कलेक्टर मनोज खत्री और पुलिस अधीक्षक से मिलकर उन्हे ज्ञापन सौंपा गया। जिसमें आरोप लगाया है कि कतिपय धार्मिक संगठनों से जुड़े लोग अजयगढ़ में साम्प्रदायिक सौहार्द, अमन-चैन और भाईचारे को बिगाड़ने के लिए वर्ष 2017 से लगातार षड़यंत्र कर रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों पर राजनैतिक दबाव बनाकर मुस्लिमों के खिलाफ झूठे प्रकरण पंजीबद्ध कराये जा रहे हैं। साथ ही अजयगढ़ की मुस्लिम बस्तियों से रैली निकालकर कतिपय धार्मिक संगठनों से जुड़े लोगों द्वारा भड़काऊ और उग्र नारेबाजी कर लगातार अपमानित किया जा रहा है, जिससे शांति व्यवस्था को गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है।

दबाब में निर्दोष पर ना हो कार्यवाही-

ज्ञापन में उल्लेख है कि उक्त संगठनों के दबाव में अजयगढ़ थाना पुलिस 18 जून 2018 को दोपहर 11ः00 बजे अय्यूब बक्स पिता करीम बक्स को उसके घर से उठा ले गई। बगैर किसी अपराध के अय्यूब बक्स को गैरकानूनी तरीके से 24 घंटे से अधिक समय से पुलिस हिरासत में थाना में ही रखा गया है। परिवारजनों को इसका कारण भी नहीं बताया गया। मुस्लिम समाज के लोगों ने यह आशंका जताई है कि दबाव में आकर अजयगढ थाना पुलिस निर्दोष अय्यूब बक्स को  गौवंश हत्या के मामले में आरोपी बना सकती है। कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने मुस्लिम समाज के प्रतिनिधि मंडल को आश्वस्त किया कि किसी के दबाब या सिर्फ आरोप के आधार पर अपराधिक प्रकरण दर्ज कर किसी के भी साथ अन्याय नहीं किया जायेगा। दोनों अधिकारियों ने मुस्लिम समाज के प्रतिनिधि मंडल से शांति और सद्भाव बनाये रखने और गौवंश मामले की जांच में मदद करने की बात कही। जिस पर उन्होंने अपनी और पूर्ण सहयोग का भरोसा दिलाते हुए कहा की वे स्वयं भी यह चाहते हैं की इस मामले का जल्द से जल्द खुलासा हो ताकि समाज विरोधी तत्व पकड़ा जाये और सम्पूर्ण मुस्लिम समाज को बदनाम करने की साजिश का भंडाफोड़ हो सके।

देश, किसान और रोजगार के लिए दौड़े युवा

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मैराथन मैं दौड़ने के लिए तैयार बैठे धावक और उनके पीछे खड़े कांग्रेस के नेतागण।

युवक कांग्रेस की मैराथन में धावक राजेन्द्र और अन्नू रहीं अव्वल

राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी का उत्साह के साथ मनाया गया जन्मदिन

पन्ना। रडार न्यूज़ अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राहुल गांधी का जन्मदिन आज पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा उत्साहपूर्वक मनाया गया।  युवक कांग्रेस के पन्ना विधानसभा अध्यक्ष दीपक तिवारी के संयोजन में सुबह युवाओं के लिये मैराथन दौड़ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। रन फॉर नेशन, रन फॉर एम्लॉयमेंट, रन फॉर फॉर्मर की थीम पर आयोजित मैराथन दौड़ में दो दर्जन से भी अधिक युवक-युवतियों ने भाग लिया। नगर के अजयगढ़ चौराहा में सुबह 8 बजे आयोजित मैराथन दौड़ में शामिल प्रतिभागियों को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शिवजीत सिंह द्वारा हरी झण्डी दिखायी गयी। उत्साहिक प्रतिभागियों द्वारा अजयगढ़ चौराहा से बड़ा बाजार, बल्देव चौराहा होते हुये सर्किट हाउस चौराहा की दौड़ पूरी की गयी। जिसमें युवा वर्ग में राजेन्द्र कुशवाहा ने प्रथम, गोरे लाल लोध ने द्वितीय, सत्यम तिवारी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। लड़कियों के वर्ग में कुमारी अन्नू चौधरी प्रथम, निकिता सिंह द्वितीय, दीप्ति झा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। दौड़ प्रतियोगिता सम्पन्न होने के उपरांत विजेता प्रतिभागियों को नगद राशि के रूप में दोनो वर्गो में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को 2100 रूपयें, द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागी को 1100 रूपये तथा तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागी को 500 रूपये का पुरूस्कार युवक कांग्रेस की ओर से दिया गया। इसके साथ ही साथ उपस्थित कांग्रेस नेताओं शिवजीत सिंह, मीना यादव, शशिकांत दीक्षित, मनोज गुप्ता, वैभव थापक, मनीष मिश्रा, जीतेन्द्र जाटव द्वारा व्यक्तिशः नगद राशि देकर दौड़ प्रतियोगिता में शामिल अन्य प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया गया। इस मौके पर उपस्थित कांग्रेस नेताओं ने कहा कि अखिल भारतीय कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी देश के भविष्य है। राहुल गांधी देश के युवाओं के लिये आदर्श है। उन्होने कहा कि देश में बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है और देश का अन्नदाता किसान संकट में है और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी बेरोजगारों तथा अन्य किसानों को लेकर सर्वाधिक चिन्तित है और इनके लिये कांग्रेस पार्टी पूरे देश में संघर्ष कर रही है। विधानसभा युवक कांग्रेस के उपाध्यक्ष वैभव थापक ने इस मौके पर बताया कि युवा की समस्यायें एवं बेरोजगारी को लेकर युवक कांग्रेस शहर से लेकर गांव-गांव तक युवाओं से फॉर्म भरवाने का काम कर रही है और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्देशों पर शुरू किये गये इस कार्यक्रम के जरिये युवाओं का एजेण्डा तैयार होगा और उस एजेण्डे को पार्टी अपने घोषणा पत्र में शामिल करेगे। आयोजित कार्यक्रम में मुख्य रूप से ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष पन्ना अनीष खान, मनोज सेन, धर्मेन्द्र प्रताप सिंह, रामदास जाटव सहित युवक कांग्रेस कार्यकर्ताओं में सौरभ पटैरिया, दीपू दीक्षित, अमित शर्मा, नरेन्द्र तिवारी, अरविन्द विश्वकर्मा, सौरभ रैकवार, राजा तिवारी, अनीष पिंकू सिद्दीकी, पंकज बाजपेयी, राजेश कुशवाहा, मोहम्मद शेख, मोहम्मद फैज, मोहम्मद फैयाद, अब्दुल हमीद, खज्जू राजा, पुनीत तिवारी, विकास तिवारी, आशू पाण्डेय, राजेश मिश्रा, मुलायम यादव, मोहम्मद जफार, कुंतेश शर्मा, रवि साहू, बादशाह खान सहित बड़ी संख्या में युवक कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुये। दौड़ प्रतियोगिता के आयोजन में रेफरी की सराहनीय भूमिका इरफान उल्ला खान द्वारा करायी गयी।

बेटियों को लखपति बनाने में ठगे जा रहे माँ-बाप

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प्रतीकात्मक फोटो ।

बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के नाम पर चल रहा है ठगी का धंधा

सीएससी सेन्टरों में 200-500 रुपये खर्च कर फार्म भरने पहुंच रहे अभिभावक

पन्ना। रडार न्यूज़ प्रधानमंत्री की महत्वकांक्षी बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के नाम पर कतिपय शातिर तत्वों द्वारा बड़े पैमाने पर ठगी किये जाने का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। बुन्देलखण्ड अंचल के पन्ना जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में अब तक सैंकड़ों अभिभावक इस योजना के तहत अपनी बेटी को लखपति बनाने के चक्कर में ठगी का शिकार बन चुके है। महत्वपूर्ण बात यह है कि डिजिटल इंडिया प्रोग्राम अन्तर्गत स्थापित कॉमन सर्विस सेन्टर (सीएससी) के कतिपय संचालक ठगी के इस गोरखधंधे में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहे है। 8 से 32 वर्ष की आयु की बेटियों को दो लाख रूपये दिलाने के लिए अभिभावक अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेन्टरों में पहुंच कर करीब 200 से 500 रूपये खर्च कर योजना का लाभ लेने के लिए बकायदा फर्जी फार्म भर रहे है। फार्म में उल्लेख है कि प्रधानमंत्री बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना की शुरूआत देश के 120 शहरों में 2 सौ करोड़ रूपये के बजट से की गई है। इस फर्जी योजना का पहले चरण में ही अपने बेटी को लाभ दिलाने के लिए अभिभावकों के बीच होड़ सी मची है। बड़ी ही उम्मीद और अरमानों के साथ अनपढ़ माता-पिता से लेकर पढ़े लिखे लोग तक ठगों के झांसे में आ कर अभिदाता पंजीकरण फार्म को भरकर उसमें दिये गये पता -भारत सरकार रक्षा मंत्रालय एवं बाल विकास मंत्रालय शास्त्री भवन नई दिल्ली-110001 पर भेजने में जुटे है। कई महीनों से चल रही इस ठगी का पता पिछले दिनों उस समय चला जब पन्ना के जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता रामऔतार तिवारी के पास राधेश्याम अहिरवार निवासी ग्राम गहरा अपनी बेटी सोनिया अहिरवार 9 वर्ष का फार्म भरवाने पहुंचे। फार्म के कॉलम और उसमें उल्लेखित जानकारी देख कर संदेह होने पर श्री तिवारी ने भारत सरकार के महिला बाल मंत्रालय नई दिल्ली की बेवसाईट पर दिये गये फोन नम्बर पर जब संपर्क किया तो उन्हें बताया गया कि महिला बाल विकास मंत्रालय द्वारा इस तरह की कोई भी योजना संचालित नहीं की जा रही है। जिस विज्ञापन को आधार बना कर ठगी की जा रही है उसे भी महिला बाल विकास विभाग ने जारी नहीं किया है।
ठगों तक पहुंच रही निजी जानकारियां-
अभिभावकों द्वारा भरे जा रहे फर्जी योजना के फार्म का फोटो।
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के तहत बेटियों को 2 लाख रुपये प्रदान किये जाने की लालच में आकर अभिभावक अपनी निजी जानकारियां फार्म में भरकर फार्म में उल्लेखित पते पर भेज रहे है। चिन्ताजनक बात यह है कि फार्म में अभिभावक अपना आधार नम्बर, मोबाईल नम्बर, बेटी का अधार नम्बर, बैंक खाता नम्बर आदि जानकारी दर्ज कर रहे है। सर्वविदित है कि देश के विभिन्न स्थानों से लम्बे समय से ऑन लाइन ठगी की खबरें लगातार आ रही है। लोगों को कॉल करके शातिर ठग खुद को कभी बैक अफसर बता कर या फिर किसी लॉटरी का लालच देकर बैंक खाता नम्बर, एटीएम नम्बर और उसका पासवर्ड आदि पूंछकर खातों से ऑन लाइन पैसा निकाल लेते हैं। इस तरह अब तक हजारों लोगों को ठगा जा चुका है। ऐसी आशंका है कि ठगी के नये-नये तरीके ईजाद करने वाले शातिर दिमाग आपराधिक तत्व बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना की राशि खाते में जारी करने का झांसा देते हुए अभिभावकों से उनके मोबाईल फोन पर आने वाले मैसेज का कोड संख्या पूंछकर उनके खातों में जमा राशि उड़ा सकते है। यदि ऐसा हुआ तो कई अभिभावक कंगाल हो जायेगें।
क्यों जाल में फंस रहे अभिभावक-
शातिर दिमाग ठग यह बात भली भांति जानते हैं कि बेटी के लालन-पालन से लेकर उसकी शिक्षा और सबसे ज्यादा उसके विवाह में होने वाले खर्च की चिंता अभिभावकों को हर समय सताती रहती है। बेटी के विवाह के लिए दान-दहेज और खर्च की व्यवस्था को लेकर गरीब, निम्न मध्यमवर्गीय परिवार सबसे ज्यादा परेशान रहते हैं। अभिभावकों की इसी चिंता का अनुचित फायदा उठाने के लिए बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के तहत बेटियों को दो लाख रुपये मिलने का दुष्प्रचार किया जा रहा है। जिसके लालच में अथवा बेटी के विवाह हेतु रुपयों की व्यवस्था सुनिश्चित करने के झांसे में आकर भोले-भाले अभिभावकों को शातिर ठग बड़ी ही आसानी से अपने जाल में फंसा रहे हैं।
ठगी के धंधे पर खामोश है जिम्मेदार-
जिले में केंद्र सरकार की फ्लैगशिप स्कीम की बदनामी के साथ उसके नाम पर हो रही ठगी की जानकारी महिला बाल विकास विभाग के मैदानी अमले से लेकर पन्ना के जिला कार्यक्रम अधिकारी तक को है, इसके बाद भी अभिभाक को लुटने से बचाने के लिए अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई। जिम्मेदारों के इस उदासीतापूर्ण रवैये के कारण ठगों का धंधा पिछले कई महीनों से पन्ना जिले में तेजी से फल-फूल रहा है। कतिपय सीएससी संचालक सच्चाई जानने के बाद भी अपनी कमाई के चक्कर में अभिभावकों को सही जानकारी न देकर गुमराह कर रहे है। कुछ साल पहले जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पन्ना में पदस्थ लिपिक खुमान प्रजापति अपनी बेटी को ऐसी ही एक योजना का लाभ दिलाने और नौकरी के झांसे में आकर लाखां रुपये की ठगी का शिकार हो चुके है। पुलिस द्वारा ठगों को पकड़ कर उनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किये जाने से यह मामला काफी चर्चित हुआ था। वर्तमान में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के नाम पर चल रही ठगी को यदि शीघ्र ही नहीं रोका गया तो योजना का लाभ लेने के लिए फार्म भरने वाले अभिभावक कहीं अधिक बड़ी ठगी का शिकार हो सकते हैं।
इनका कहना है-
तीन माह पूर्व मेरे संज्ञान में यह बात आई थी कि बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के तहत बेटियों को दो लाख रूपये मिलने के झांसे में आकर अभिभावक ठगी का शिकार हो रहे है। इसे रोकने के लिए मैनें अखबारों में समाचार प्रकाशित कराया था साथ ही अभिभावकों जागरूक करने मैदानी अमले को निर्देशित किया था। पुनः अखबारों में समाचार प्रकाशित कराया जायेगा ताकि अभिभावक भ्रामक और फर्जी विज्ञापन के लालच में न आयें। इस तरह की कोई भी योजना संचालित नहीं है।
भरत सिंह राजपूत, डीपीओ महिला एवं बाल विकास विभाग पन्ना

पवई जेल ब्रेक कांडः जांच करने भोपाल से आये एडीजी  

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फाईल फोटो

बोले, जेल प्रबंधन की लापरवाही से फरार हुए कैदी

प्रथम दृष्टया दोषियों के खिलाफ मंगलवार को होगी कार्रवाई

फरार कैदियों का 36 घण्टे बाद भी नहीं लगा सुराग

पन्ना- रडार न्यूज  मध्यप्रदेश के पन्ना जिले की पवई उप जेल से रविवार 17 जून की सुबह हत्या के आरोपी दो खूूंखार कैदियों के फरार होने की सनसनीखेज घटना के 36 घंटे बाद भी दोनों का कोई सुराग नहीं लग पाया है। इस घटना से उप जेल पवई की की लचर सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुलने के साथ ड्यूटी पर तैनात रहे प्रहरियों की संदिग्ध भूमिका पर लगातार सवाल उठ रहे है। इस बीच सोमवार 18 जून को भोपाल से आये अतिरिक्त महानिर्देशक गाजीराम मीणा ने पवई उप जेल का निरीक्षण कर घटना की जानकारी प्राप्त की। इस दौरान पन्ना पुलिस रियाज इकबाल भी उनके साथ रहे। करीब पौन घंटे तक जेल के अन्दर रहे श्री मीणा ने सहायक जेलर पवई कुलदीप सिंह तथा घटना के समय ड्यूटी पर तैनात रहे प्रहरियों से वन- टू-वन चर्चा कर विस्तारपूर्वक जानकारी प्राप्त की । साथ ही उस स्थान को भी देखा जहां से दोनों हवालाती जेल की दो-दो दीवारों को फांद कर आसानी से फरार हो गये। श्री मीणा जेल की उन बैरकों में भी गये जिनमें दोनों कैदी बंद थे। इसके अलावा अन्य कैदियों से भी घटना के संबंध में पूंछतांछ की गई। मालूम हो कि रविवार की 17 जून की सुबह करीब 8ः30 बजे जब कैदी नारायण पटेल पुत्र कल्लू पटेल निवासी ग्राम खम्हरिया व शिव सिंह राठौर पुत्र राजेन्द्र सिंह राठौर निवासी ग्राम धरमपुरा थाना शाहनगर जेल से फरार हुए उस समय सहायक जेलर कुलदीप सिंह बाजार गये थे। नाश्ता के समय जब कैदियों की गिनती की गई तो जेल में बंद 48 में से  2 कैदी गायब थे। इसका पता चलते ही उप जेल पवई की चार दीवारी के अन्दर हड़कम्प मच गया। दिनदहाड़े हुई इस घटना की भनक दूसरे कैदियों को ना लगना संदेह पैदा करता है   ।
नई कहानी आई सामने – 
एडीजी जेल गाजीराम मीणा द्वारा पवई उप जेल का निरीक्षण करने के पश्चात् बाहर खड़े मीडियाकर्मियों से  चर्चा करते हुए कैदियों फरार होने की घटना के संबंध में नया खुलासा किया गया। उन्होंने बताया कि जेल के अंदर दीवार के समीप लगे एक पेड़ की शाखा कुछ दिन पूर्व गिर गई थी। जिसकी लकड़ी को जेल प्रबंधन द्वारा मौके से नहीं हटाया गया और चादरों की गिनती भी नहीं की गई। इस घोर लापरवाही का फायदा उठाते हुए कैदियों ने चार चादर छुपा दिये। मौका पाकर लकड़ी में चादर बांधकर दोनों कैदी जेल की एक 10 फिट ऊंची और दूसरी 20 फिट ऊंची दीवार फांदकर फरार हो गये।
लापरवाहों पर होगी सख्त कार्यवाही-
एडीजी श्री मीणा ने बड़ी ही स्पष्ट शब्दों में यह स्वीकार किया कि जेल प्रबंधन यदि लापरवाही नहीं करता और आवश्यक सावधानी बरती जाती तो जेल ब्रेक की शर्मनाक घटना घटित नहीं होती। उल्लेखनीय है कि रविवार को कैदियों के जेल से फरार होने के बाद मीडियाकर्मियों को सहायक जेलर कुलदीप सिंह ने जो जानकारी दी थी उसमें उन्होंने सिर्फ चादर की रस्सी के सहारे भागना बताया था। पेड़ की टूटी हुई शाखा का इसमें उपयोग किये जाने का उन्होंने कोई उल्लेख नहीं किया था। एडीजी श्री मीणा ने स्थानीय पत्रकार राकेश पाठक को बताया कि जेल से हत्या के दो हवालातियों का एक साथ फरार होना बेहद गंभीर मामला है। इससे जेल की सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगी है। इस मामले में प्रथम दृष्टया लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जायेगी। उनका निलंबन करने से लेकर विभागीय जांच कराई जायेगी और दोष सिद्धि के आधार पर आगे की कार्यवाही की जायेगी। श्री मीणा ने कहा कि मंगलवार को इस संबंध में आदेश जारी किया जायेगा।
योगा करने के बाद हुए थे फरार –
 हवालाती नारायण पटेल पुत्र कल्लू पटेल निवासी खम्हरिया व शिव सिंह राठौर पुत्र राजेन्द्र सिंह राठौर निवासी धरमपुरा थाना शाहनगर जिला पन्ना की उप जेल पवई की सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए रविवार की सुबह वहां से आसानी से भाग निकले। जेलर कुलदीप सिंह के अनुसार सुबह कैदियों को योगा के लिए बैरकों से बाहर निकाला गया था। नाश्ता के समय करीब 8 से 8ः30 बजे के बीच जब कैदियों की गिनती की गई तो 48 में से सिर्फ 46 कैदी ही मौजूद रहे। कैदियों के गायब होने की जब छानबीन की गई तो जेल की दीवार के पास से वे चादरें बरामद हुई जिनके सहारे वे दो-दो दीवारें फांदकर फरार हुए। प्राप्त जानकारी के अनुसार फरार हवालाती नारायण पटेल 29 मार्च 2018 और शिव राठौर 18 मई 2018 को ही उप जेल पवई में दाखिल हुआ था।

चादर की रस्सी बनाकर जेल से भागे हत्या के दो आरोपी

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पुलिस ने शुरू की इलाके की सर्चिंग

उप जेल पवई की सुरक्षा व्यवस्था मेें लगी सेंध

एक पर पत्‍नी दूसरे पर प्रेमिका के कत्‍ल का है आरोप

पन्ना/पवई। रडार न्‍यूज  मध्यप्रदेश के पन्ना जिले की उप जेल पवई में बंद हत्या के दो आरोपी जेल की दीवार फांदकर फरार हो गये। सुबह-सुबह हुई इस घटना की भनक जब उप जेल प्रबंधन को लगी तो हड़कम्प मच गया। पुलिस ने जेल से फरार हुए हवालातियाेें की सरगर्मी से तालाश शुरू कर दी है। इलाके की नाकाबंदी कर सघन सर्चिंग की जा रही है। पवई जेल ब्रेक काण्ड से वहां की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई है।

दिन-दहाड़े हत्या के दो-दो आरोपी जेल की सुरक्षा मेें सेंध लगाते हुए आसानी से फरार हो गये और ड्यूटी पर तैनात प्रहरियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। स्थानीय संवाददाता सतीष पटेल व अजित बढ़ौलिया को पवई के सहायक जेलर कुलदीप सिंह ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि हवालाती नारायण पटेल पुत्र कल्लू पटेल 22 वर्ष निवासी खम्हरिया व शिव सिंह राठौर पुत्र राजेन्द्र सिंह राठौर 25 वर्ष निवासी धरमपुरा थाना शाहनगर चादर की रस्सी के सहारे 15 सेे 18 फिट ऊंची दीवार फांदकर भाग गये। सुबह 9:45 बजे नाश्ता के समय जब बंदियों की गिनती की गई तो 48 में 46 बंदी ही मौजूद रहे। सहायक जेल अधीक्षक कुलदीप सिंह ने बताया कि फरार हुए दोनों हवालाती हत्या के आरोप में जेल में बंद थे, उनके विरूद्ध न्यायालय में विचाराधीन है। रिकार्ड के अनुसार फरार हवालाती नारायण पटेल 29 मार्च 2018 और शिव राठौर 18 मई 2018 को ही उप जेल पवई में दाखिल हुआ था। महज दो-तीन माह पहले आये हवालातियों की जेल की सुरक्षा-व्यवस्था को धता बताते हुए असानी से फरार होने से ड्यूटी पर तैनात रहे प्रहरियों की भूमिका भी संदिग्ध प्रतीत हो रही है। उधर इस घटना की खबर मिलते ही जिला जेल पन्ना के उप अधीक्षक सत्यभान मिश्रा पवई के लिए रवाना हो गये। सोशल मीडिया मेें आ रही खबरों के अनुसार विचाराधीन कैदी शिव सिंह राठौर पर अपनी प्रेमिका और नारायण सिंह पर अपनी पत्नी की हत्या का आरोप है।

बुलेट और पत्थरों के बीच कश्मीर में रिपोर्टिंग कितनी मुश्किल

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”पहाड़ों के जिस्मों पे बर्फों की चादर
चिनारों के पत्तों पे शबनम के बिस्तर
हसीं वादियों में महकती है केसर
कहीं झिलमिलाते हैं झीलों के जेवर
है कश्मीर धरती पे जन्नत का मंजर”
आलोक श्रीवास्तव की लिखी ये पंक्तियां धरती का जन्नत कहे जाने वाले कश्मीर की ख़ूबसूरती बयां करती हैं। एक ऐसी जगह जहां प्रकृति ने दिल खोल कर अपना प्यार बरसाया है। बर्फ से ढकी पहाड़ियों के साथ बहती डल झील किसी का भी मन मोह लेती है।
लेकिन इंसानी नफरत ने प्रकृति के प्यार को स्याह करने का काम किया है। इस जन्नत का एक दूसरा रूप भी है जो डर और दहशत से भरा हुआ है। भारत प्रशासित कश्मीर नफरत की आग में झुलस रहा है।
दंगे, विरोध प्रदर्शन, सड़कों पर पथराव, कर्फ्यू और सैन्य कार्रवाइयां यहां आम-सी बात हैं। कश्मीर के इन हालात को देश और दुनिया के बाकी हिस्सों से रूबरू करवाने वाली जमात यानी यहां काम करने वाले पत्रकार भी अक्सर इनका शिकार होते रहते हैं।
हाल में श्राइजिंग कश्मीरश् अख़बार के संपादक शुजात बुखारी की हत्या ने वादी में काम करने वाले पत्रकारों के भीतर दबे डर को एक बार फिर उजागर कर दिया है।

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भारत प्रशासित कश्मीर के ही रहने वाले शुजात बुखारी पिछले 30 सालों से पत्रकार के तौर पर काम कर रहे थे। वे कश्मीर में शांति स्थापित करने की कोशिशों में भी लगे रहते थे।
उनके साथ काम करने वाले तमाम पत्रकार उन्हें कश्मीर की एक आजाद आवाज कहते हैं। शुजात जितनी गहराई से अलगाववादियों की बात जनता के सामने रखते थे उतनी ही तल्लीनता से वे सरकार का पक्ष भी बताते थे।
कश्मीर में रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार सोहैल शाह ने अपने करियर की शुरुआत राइजिंग कश्मीर से ही की थी।
रिपोर्टिंग के दौरान आने वाली मुश्किलों के बारे में सोहैल बताते हैं कि यहां सबसे बड़ी समस्या है कि आप पूरी तरह निष्पक्ष नहीं रह पाते। अगर आप निष्पक्ष रहते हैं तो दोनों ही तरफ से मार खाते हैं।
सोहैल कहते हैं, ”कश्मीर एक संघर्षरत इलाका है, आमतौर पर ऐसी जगह जहां दंगे हो रहे हों वहां पत्रकारों के लिए सुरक्षा के इंतजाम होते हैं। लेकिन कश्मीर में ऐसा बिल्कुल नहीं होता। यहां तक कि कई ऐसे मौके होते हैं जब किसी दंगे या संघर्ष को कवर करते हुए रिपोर्टर को ही पीट दिया जाता है।”

साल 2010 में कश्मीर में पत्रकारों पर हमले हुए थे, उस समय हमलों के विरोध में प्रदर्शन करते स्थानीय पत्रकार

मीडिया की तरफ कश्मीरी लोगों का रुख
कश्मीर में रहने वाले लोग अक्सर शिकायत करते हैं कि उन्हें मुख्यधारा की मीडिया में जगह नहीं दी जाती। कई बार ऐसी ख़बरें भी सुनने को मिलती हैं कि कश्मीर से समाचारों को श्फिल्टरश् करने के बाद देश के बाकी हिस्से तक पहुंचाया जाता है।
ऐसे हालात में कश्मीरी लोगों का मीडिया की तरफ कैसा रुख रहता है, यह जानना बेहद अहम हो जाता है। इस बारे में सोहैल बताते हैं कि कश्मीर के लोग आमतौर पर पत्रकारों को भरोसे की नजरों से नहीं देखते।
वे कहते हैं, ”जिस तरह से राष्ट्रीय चैनलों में कश्मीर की रिपोर्टिंग होती है, उनमें बहुत-सी चीजें अपने अनुसार ढाल दी जाती हैं। इससे कश्मीर की अवाम काफी नाराज रहती है और उनकी यह नाराजगी हम जैसे स्थानीय रिपोर्टरों को झेलनी पड़ती है। आम लोग राष्ट्रीय चैनल और स्थानीय चैनलों का फर्क नहीं समझते और इसी वजह से हमें भी शक की नजरों से देखते हैं।”

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बंदूक और राजनीति का दबाव-
पत्रकारिता के दौरान रिपोर्टर को कई तरह के दबाव का सामना करना पड़ता है, इसमें राजनीतिक और सामाजिक दबाव दोनों शामिल होते हैं।
कश्मीर में रिपोर्टिंग की बात करें तो वहां रिपोर्टर को राजनीतिक दबाव के साथ-साथ बंदूक का दबाव भी झेलना पड़ता है। कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन इस बारे में कहती हैं कि इतने दबाव के बीच अपनी ख़बरों में संतुलन बनाए रखना बहुत मुश्किल होता है।
वे बताती हैं, कश्मीर में दोनों तरफ से बंदूकों का दबाव होता है, उसके बाद राजनीतिक दबाव हमेशा रहता ही है, इन सब के बाद जनता के गुस्से का दबाव रिपोर्टिंग को प्रभावित करता है। ऐसे में अपनी रिपोर्ट में संतुलन बनाए रखना बहुत मुश्किल हो जाता है। शुजात बुखारी इन्हीं दबावों के बीच अपनी रिपोर्टिंग में संतुलन बनाने की कोशिशें कर रहे थे और काफी हद तक उसमें कामयाब भी रहे थे।

राइज़िंग कश्मीर के संपादक शुजात बुखारी

बाहरी रिपोर्टर के लिए कश्मीर की रिपोर्टिंग
जब कश्मीर में रहने वाले स्थानीय रिपोर्टर को ही अपने इलाके में इतनी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है तो ऐसे में देश के दूसरे हिस्सों से कश्मीर पहुंचकर रिपोर्टिंग करना कितना चुनौतीपूर्ण होगा इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। साल 2016 में जब हिज्बुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी की पुलिस एनकाउंटर में मौत हुई तो पूरे कश्मीर में विरोध प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया। कई जगह पत्थरबाजी की घटनाएं बढ़ गई थीं और इस दौरान कर्फ्यू भी लगाया गया था। ऐसे ही माहौल में दिल्ली से कश्मीर पहुंची स्वतंत्र पत्रकार प्रदीपिका सारस्वत अपने अनुभव के बारे में बताती हैं कि पहली बार किसी एनकाउंटर को क़वर करना उनके लिए बेहद मुश्किल और चुनौतीपूर्ण था।
वे कहती हैं, मैं पुलवामा के पास त्राल इलाके में थी, वहां एक एनकाउंटर चल रहा था और मैं कुछ स्थानीय लोगों से बातें कर रही थी। इस बीच मैंने अपना फोन देखा तो उसमें सिग्नल गायब थे। इंटरनेट तो दूर आप किसी को कॉल भी नहीं कर सकते थे। बाहर से आने वालों को यह सब बहुत अजीब लगता है, हालांकि धीरे-धीरे हमें इसकी आदत होने लगती है।

यहां आम लोग ही मांगते हैं रिपोर्टर से आईडी-

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एक सवाल यह भी उठता है कि आखिर देश के बाकी हिस्सों से कश्मीर में रिपोर्टिंग किस तरह अलग हो जाती है। इसका जवाब प्रदीपिका कुछ यूं देती हैं, कश्मीर एक ऐसी जगह है जहां लगभग हर कोई एक-दूसरे को पहचान रहा होता है, बहुत जल्दी ही रिपोर्टर तमाम तरह के समूह और एजेंसियों के रडार में आने लगते हैं। उनकी रिपोर्टों पर चर्चाएं होने लगती हैं, यह जांचा जाने लगता है कि किस रिपोर्टर का झुकाव किस तरफ है।
प्रदीपिका कहती हैं, मुझे बाकी पत्रकारों से मालूम चलता था कि कश्मीर के लोग मेरे बारे में जानकारी जुटा रहे हैं, फोन कॉल टेप होने जैसी बातें मालूम चलती थीं तो डर लगने लगता था। दिल्ली में रिपोर्टिंग करते हुए यह सब नहीं होता। ऊपर से एक लड़की होना और हिंदू होने पर स्थानीय लोग ही आईडी मांगने लगते थे।
बुरहान वानी एनकाउंटर के वक्त भारत प्रशासित कश्मीर में रिपोर्टिंग के लिए पहुंचे बीबीसी संवाददाता जुबैर अहमद ने भी अपने अनुभव उस समय साझा किए थे, जिसमें उन्होंने भारत प्रशासित कश्मीर में रिपोर्टिंग को सबसे कठिन काम बताया था। जनता की आंख-नाक-कान कहे जाने वाले रिपोर्टर एक बार फिर कश्मीर में डरा हुआ महसूस कर रहे हैं। साथ ही वादी में निष्पक्ष आवाज के मूक हो जाने का डर फिर से सताने लगा है।

                                                                                       (साभार: बीबीसी हिन्दी)

अमेरीका में तेलुगू अभिनेत्रियों के ”सैक्स रैकेट” का खुलासा

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टूरिस्ट वीजा पर भारत से तेलुगू लड़कियों को बुलाकर कराई जाती थी वैश्यावृत्ति

पति-पत्नि मिलकर चलाते थे रैकेट, घर पर पड़े छापों में मिले अहम सबूत

अमेरीका में पुलिस को एक सेक्स रैकेट के बारे में पता चला है जिसमें तेलुगू सिनेमा से जुड़ी लड़कियां और हीरोइनें शामिल हैं। शिकागो इस रैकेट का केंद्र है। पुलिस ने एक तेलुगू जोड़े को गिरफ्तार किया है जिन पर ये रैकेट चलाने का आरोप है। फेडरल पुलिस के मुताबिक अमरीका में होने वाले तेलुगू और अन्य सांस्कृतिक आयोजनों में हिस्सा लेने के नाम पर तेलुगू सिनेमा के कलाकारों को बुलाया जाता है और उनसे वेश्यावृत्ति कराई जाती है।
होमलैंड सिक्योरिटी के स्पेशल एजेंट ब्रायन जिन ने बताया, 34 साल के किशन मोडुगमुडी इस रैकेट के मास्टरमाइंड हैं और उनकी पत्नी चंद्रकला मोडुगमुडी उसकी बिजनेस पार्टनर। उन्होंने इलिनॉय कोर्ट में एक याचिका भी डाली है।
किशन को लोग राज चेन्नुपति के नाम से भी जानते हैं। उसकी पत्नी चंद्रकला को विभा और विभा जया के नाम से भी जाना जाता है। कोर्ट में दाखिल 42 पेज की याचिका में सेक्स रैकेट में शामिल महिलाओं की पहचान नहीं बताई गई है। याचिका में उन्हें ए, बी, सी, डी जैसे कोड नाम दिए गए हैं।
जांच अधिकारियों ने सेक्स रैकेट की पीड़ित लड़कियों के अलावा कुछ ग्राहकों से भी पूछताछ की है। अधिकारियों ने कोर्ट को बताया है कि आरोपियों के घर से कुछ डायरियां और धंधे के हिसाब-किताब भी मिले हैं। डायरियों और खाते में हीरोइनों के साथ-साथ उनके ग्राहकों के भी नाम दर्ज हैं।

सेक्स रैकेट का पता कैसे चला?-

प्रतीकात्‍मक फो

स्पेशल एजेंट ब्रायन के हलफनामे के मुताबिक 20 नवंबर 2017 को दिल्ली से एक लड़की शिकागो के ओश्हेयर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंची थी। हलफनामे में उस लड़की को श्एश् कहा गया है। उसके पास बी1ध्बी2 टूरिस्ट वीजा था जो दिल्ली में अमरीकी दूतावास से जारी हुआ था। एयरपोर्ट पर उस लड़की ने इमिग्रेशन के जो कागजात सौंपे, उसके मुताबिक उसे 18 नवंबर 2017 को दक्षिण कैलिफोर्निया तेलुगू एसोसिएशन की ओर से सम्मानित किया जाना था। दूसरे कागजातों में कहा गया था कि उसे कैलिफोर्निया तेलुगू एसोसिएशन की स्टार नाइट में शामिल होना था और वह अमरीका में 10 दिन रहने वाली थी। इमिग्रेशन अधिकारियों को शक हुआ क्योंकि लड़की को 18 नवंबर को कैलिफोर्निया में होने वाले इवेंट में शामिल होना था, जबकि वह दो दिन बाद शिकागो एयरपोर्ट पर उतरी थी। जब उससे इस बारे में पूछताछ की गई तो उसने बताया कि वह नॉर्थ अमरीका तेलुगू सोसाइटी के कार्यक्रम में हिस्सा लेने आई है। उसने एक चिट्ठी भी दिखाई जिसमें कहा गया था कि वह 25 नवंबर 2017 को इलिनॉय के स्कैमबर्ग में होने वाले एक कांफ्रेंस में मेहमान है।

तेलुगू एसोसिएशनों को हीरोइन की जानकारी नहीं-

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अधिकारियों ने जब दक्षिण कैलिफोर्निया के तेलुगू एसोसिएशन के अध्यक्ष से बात की तो उन्होंने बताया कि 18 नवंबर को कैलिफोर्निया में उनका एक कार्यक्रम था, मगर वे उस हीरोइन को नहीं जानते। ना ही वह उनकी मेहमान है। उत्तर अमरीका तेलुगू एसोसिएशन के अफसरों ने बताया कि न तो वे उस हीरोइन को जानते हैं, न ही 25 नवंबर को उनका कोई कार्यक्रम था। इतनी जानकारियां मिलने के बाद अधिकारियों ने उस लड़की से अमरीका आने की असल वजह पूछी। उसने बताया कि तेलुगू एसोसिएशनों के ये निमंत्रण पत्र उसे राजू नाम के एक व्यक्ति ने दिए थे, जिससे वह भारत में मिली थी। राजू ने ही उसके एयर टिकट और होटल का किराया भरा था। वह एयरपोर्ट पर भी उसे रिसीव करने आने वाले थे। उस लड़की ने अधिकारियों को राजू की ई-मेल आईडी और फोन नंबर भी दिए। जांच में अधिकारियों को एक इंटरनेट पोस्ट का पता चला जिसमें कहा गया था कि किशन मोडुगमुडी उर्फ राज चेन्नुपति कुछ फिल्मी कलाकारों को वेश्यावृत्ति में शामिल करना चाह रहा है, वह फर्जी वीजे पर लड़कियों को अमरीका बुलाता है और उन्हें सेक्स रैकेट में शामिल करता है। शिकागो में विभा जयम उसका सहयोग करती है। दिल्ली से आई लड़की से मिली ई-मेल आईडी और फोन नंबर से पता चला कि वे किशन मोडुगमुडी के हैं। उसके पास एक अन्य ईमेल आईडी भी है। ई-मेल आईडी से ही शिकागो में उसके घर का पता लगाया गया।

नेवार्क एयरपोर्ट पर दूसरी हीरोइन-

इमिग्रेशन अधिकारियों ने नेवार्क एयरपोर्ट पर एक दूसरी महिला से पूछताछ की जो 26 नवंबर 2017 को मुंबई से आई थी। वीजा कागजातों से पता चला कि वह कई अलग-अलग सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शामिल हुई थी और तीन महीने तक अमरीका में रहने वाली थी। वीजा कागजातों में कहा गया था कि वह एक अदाकारा है और एक इवेंट में सम्मानित अतिथि के तौर पर आई है। इस महिला ने अधिकारियों को बताया कि उन्हें वीजा दिलाने में श्राजू गारूश् नाम के एक व्यक्ति ने मदद की थी। यह महिला टेक्सस के इरविंग में नए साल के जश्न के मौके पर हॉलीवुड डांस में परफॉर्म करना चाहती थी।

वेश्यावृत्ति की ओर धकेला-

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हीरोइन ने बताया कि वह राजू गारू की ओर से आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने पेन्सिलवेनिया भी आ चुकी हैं। उस दौरे में उनसे जबरन वेश्यावृत्ति कराई गई थी। उन्होंने बताया कि वह वेश्यावृत्ति में शामिल नहीं है। उन्होंने ग्राहकों के साथ कुछ वक्त बिताया था और उनसे वहां से निकलने का रास्ता पूछा था। उन ग्राहकों ने ही उन्हें यह सलाह दी थी कि वह विभा को बताए कि उसका काम हो गया है जिससे कि वह वापसी के टिकट का इंतजाम कर दे। पिछले दौरे पर विभा के साथ वह चार अलग-अलग शहरों में गई थीं, जहां ग्राहकों को उनके कमरे में भेजा जाता था। शिकागो में उन्हें एक घर में रखा गया था। कोर्ट में दाखिल याचिका के अनुसार इस महिला को वीजा नहीं दिया गया और नेवार्क से वापस भेज दिया गया।

पीड़ित लड़कियों को फोन पर धमकी-
जांच के दौरान इस महिला से नई दिल्ली में भी पूछताछ की गई। तस्वीर देखकर उन्होंने किशन मोडुगमुडी उर्फ राजू की पहचान कर ली। वीजा नहीं मिलने पर राजू ने उन्हें फोन पर धमकी दी कि वह उसके बिजनेस के बारे में किसी को कुछ ना बताए वरना उसकी हत्या कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि शिकागो में उन्हें जिस घर में रखा गया था, वहां से उन्हें अकेले बाहर जाने की इजाजत नहीं थी। उन पर नजर रखने के लिए हर वक्त किसी ना किसी को उनके साथ भेजा जाता था।

और भी कई पीड़ित-

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पीड़ित लड़की ने दो और चिट्ठियां दिखाईं जो उनके वीजा आवेदन में लगाए गए थे। ये तेलंगाना पीपुल्स एसोसिएशन ऑफ डलास और तेलुगू एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमरीका के थे। दोनों ही संस्थाओं ने उन चिट्ठियों को फर्जी बताया। जांच से पता चला कि 2016 से 2017 के दौरान कई लड़कियां किशन की मदद से अमरीका आईं। याचिका में उन्हें पीड़ित बी, सी, डी, ई कहा गया है। एक महिला (पीड़ित बी) 24 दिसंबर 2017 को शिकागो पहुंची थीं और 8 जनवरी 2018 को वापस लौटीं।
वीजा खत्म, फिर भी अमरीका में रहे किशन और विभा-
किशन तेलुगू फिल्मों के प्रोड्यूसर नहीं हैं। उन्होंने कुछ फिल्मों को को-प्रोड्यूस किया है। 2014 में उन्होंने दो बार वीजा के लिए आवेदन किया। लेकिन उन्होंने फर्जी कागजात पेश किए थे, इसलिए उन्हें वीजा नहीं मिला। बाद में 2015 में वीजा मिलने पर वह 6 अप्रैल को शिकागो आए। उनका वीजा 5 अक्टूबर 2015 तक वैध था। लेकिन वह वापस नहीं लौटे। इसी तरह चंद्रकला मोडुगमुडी 11 अगस्त को शिकागो पहुंची थीं। उसका वीजा 10 फरवरी 2016 तक वैध था, जिसे उन्होंने 8 अगस्त 2016 तक बढ़वा लिया। अगस्त में जब वह दूसरी बार वीजा अवधि बढ़वाने के लिए पहुंचीं, तब अधिकारियों ने उनकी अर्जी खारिज कर दी। 23 जनवरी को किशन और चंद्रकला को ओहायो के टिफिन से गिरफ्तार कर लिया गया। उनको यूएस बॉर्डर पेट्रोल के अधिकारियों ने पकड़ा। 23 फरवरी को उनको जमानत पर रिहा किया गया, लेकिन वे जांच में शामिल नहीं हुए।
ग्राहकों से फोन पर सौदेबाजी-
16 फरवरी 2018 को अधिकारियों ने किशन और चंद्रकला के घरों पर छापे मारे तो वहां से 70 कंडोम, फर्जी आवासीय कार्ड, अमरीकी तेलुगू एसोसिएशनों के लेटर हेड वाली फर्जी चिट्ठियां, विजिटिंग कार्ड, डायरी और हिसाब-किताब मिले। डायरियों और 4 मोबाइल फोन से सेक्स रैकेट की बात सामने आई।
वे ग्राहकों से एक बार के हजार डॉलर, दो बार के दो हजार डॉलर और 100 डॉलर की टिप पर बात करते थे। वे ग्राहकों को बताते थे कि तेलुगू सिनेमा की हीरोइन या एंकर बहुत कम दिनों के लिए अमरीका में रहेगी। हर सौदे, लेन-देन और आने-जाने का ब्योरा डायरियों में लिखा जाता था।
जांच अधिकारियों ने कोर्ट में ग्राहकों से बातचीत के कुछ ब्योरे भी जमा कराए हैं। इन ब्योरों की मदद से एक ग्राहक से और जानकारियां जुटाई गईं। इन ब्योरों से यह साफ होता है किशन और चंद्रकला भारत से जवान लड़कियों को अमरीका लाकर वेश्यावृत्ति करा रहे थे। अभियुक्तों को 29 अप्रैल को इलिनॉय कोर्ट में पेश किया गया। जांच अभी जारी है।
 (साभार: बीबीसी हिन्दी)