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हज यात्रियों को प्रशिक्षित करने प्रशिक्षकों को दी गई ट्रेनिंग

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पिछड़ा वर्ग तथा अल्प संख्यक कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती ललिता यादव ने हज-यात्रियों के लिए प्रशिक्षण गाइड का विमोचन किया।

राज्य मंत्री श्रीमती ललिता यादव ने दी विभागीय योजनाओं की जानकारी 

भोपाल। हज कमेटी द्वारा हज यात्रियों को प्रशिक्षण देने के लिये प्रशिक्षिकों के विशेष प्रशिक्षण का कार्यक्रम किया गया। कार्यक्रम में पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती ललिता यादव ने प्रशिक्षकों को विभागीय योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हज यात्रियों को बेहतर प्रशिक्षण दें, जिससे उन्हें हज यात्रा के दौरान कोई कठिनाई नहीं हो।

पिछड़ा वर्ग तथा अल्प संख्यक कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती ललिता यादव ने हज-यात्रियों के प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित किया।

श्रीमती यादव ने बताया कि हज-2018 के लिये 4758 यात्रियों का चयन किया गया है। प्रशिक्षण में हज कमेटी के अध्यक्षों को भी प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षिकों को विशेष प्रशिक्षण गाइड तथा अन्य सामग्री उपलब्ध करवाई गई। हज यात्रियों को 26 जून से 25 जुलाई के बीच प्रशिक्षण दिया जायेगा। इस वर्ष सउदी अरब में प्रदेश के हज यात्रियों की सहायता के लिये 23 खादिमुल हुज्जाजों को भेजा जा रहा है। हर 200 हज यात्रियों के बीच में एक खादिमुल हुज्जाज की व्यवस्था की गई है।सचिव एवं कार्यपालन अधिकारी मध्यप्रदेश राज्य हज कमेटी श्री दाऊद अहमद खान ने जानकारी दी है कि मुम्बई इम्बार्केशन पॉइंट से 29 से 31 जुलाई तथा एक से 12 अगस्त तक और भोपाल इम्बार्केशन पॉइंट से 6 एवं 7 अगस्त को विभिन्न फ्लाइटों से हज यात्रियों को हज यात्रा पर भेजा जाना प्रस्तावित है। इस मौके पर अन्य अधिकारी एवं विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित थे।

बुंदेलखंड के वीरों के बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता- राज्यपाल

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राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने बुंदेली समारोह तथा अमृत महोत्सव के अवसर पर आज बुंदेली भाषा के कवि श्री कैलाश मड़बैया सहित अन्य कवियों और पत्रकारों का शाल-श्रीफल और सम्मान पत्र भेंट कर अभिनन्दन किया।

बुंदेली समारोह तथा अमृत महोत्सव कलश स्थापना कार्यक्रम सम्पन्न 

भोपाल। राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने आज यहां बुंदेली समारोह एवं अमृत महोत्सव कलश स्थापना कार्यक्रम में कहा कि बुंदेलखण्ड में महान योद्धा, राजा, साहित्यकार और समाजसेवियों ने जन्म लिया है। बुंदेलखंड के वीरों के बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता।

राज्यपाल श्रीमती पटेल ने कहा कि बुंदेलखण्ड की सांस्कृतिक और साहित्यिक परम्परायें महान और प्राचीन हैं। छत्रसाल ऐसे महान योद्धा थे, जो तलवार के साथ कलम से भी समाज और देश को कुरीतियों से बचाने की कोशिश करते रहे। छत्रसाल ने विस्तृत बुंदेलखंड राज्य की गरिमामय स्थापना ही नहीं की थी, वरन् साहित्य सृजन कर जीवंत काव्य भी रचे।

राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने बुंदेली समारोह तथा अमृत महोत्सव के अवसर पर आज बुंदेली भाषा के कवि श्री कैलाश मड़बैया सहित अन्य कवियों और पत्रकारों का शाल-श्रीफल और सम्मान पत्र भेंट कर अभिनन्दन किया।

राज्यपाल श्रीमती पटेल ने प्रसिद्ध बुंदेली कवी कैशल मड़बैया को अमृत महोत्सव की बधाई दी। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड को आज विकास की बहुत आवश्यकता है। हमारे प्रधानमंत्री ने ‘सबका साथ सबका विकास’ का नारा देकर देश में एकता, विकास, समरसता और सौहार्द्र का वातावरण निर्मित किया है।

राज्यपाल श्रीमती पटेल ने इस अवसर पर बुंदेली भाषा के कवि  कैलाश मड़बैया सहित अन्य कवियों और पत्रकारों को शाल, श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर राज्यपाल ने बुंदेली नृत्य दल द्वारा प्रस्तुत राई नृत्य भी देखा । कार्यक्रम में सांसद आलोक संजर, वरिष्ठ साहित्यकार गंगा प्रसाद बरसैया, तथा बुंदेली साहित्य प्रेमी उपस्थित थे। कार्यक्रम में राज्यपाल ने साहित्कार कैलाश मड़बैया की पुस्तक मयूर पंख, सहित साहित्यकारों और कवियों की पुस्तकों और काव्य ग्रंथों का विमोचन भी किया।

रामलीला में भाग लेने से बच्चों में अच्छे आदर्श उत्पन्न होते हैं : राज्यपाल

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राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल राजभवन के अधिकारियों-कर्मचारियों के बच्चों द्वारा आयोजित रामलीला देखते हुए।

राजभवन के अधिकारियों-कर्मचारियों के बच्चों द्वारा रामलीला का मंचन

भोपाल। राज्यपाल श्रीमती अनंदीबेन ने आज राजभवन के अधिकारियों और कर्मचारियों के बच्चों द्वारा आयोजित रामलीला कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि रामलीला हमें धार्मिक घटनाओं और भगवान श्रीराम के मर्यादापुरूष होने का प्रमाण देती हैं। इससे हमारी धार्मिक आस्था और भावना सुदृढ़ होती है। रामलीला भारतीय प्राचीन संस्कृति, सभ्यता और धार्मिक आस्था को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम है। इससे बच्चों में अच्छे आदर्श और चरित्र का निर्माण करने में मदद मिलती है। इस कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रभाषा प्रचार समिति,युवामंच और हिन्दी भवन के सहयोग से राजभवन सचिवालय द्वारा आयोजित किया गया था।

राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने आयोजकों को साधुवाद देते हुए इस अनुकरणीय पहल की सराहना की। उन्होंने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि जब बच्चे रामलीला में स्वयं राम, सीता और अन्य पात्रों का अनुसरण करेंगे तो उनमें राम के आदर्श, सीता माँ की पवित्रता और भरत, लक्ष्मण जैसे भाईयों के चरित्र उनके अंदर निर्मित हो सकेंगे। माता-पिता और भाई-बहन के प्रति प्रेम, सम्मान और आदर की भावना जागृत हो सकेगी। घर,परिवार और समाज में एकता, सौहार्द्र और सदभाव का वातावरण मजबूत होगा। रामलीला के माध्यम से ही आज पूरे विश्व में भगवान श्रीराम के आदर्श, उपदेश और संदेश को पहुँचाया जा रहा है। देश और विदेश में लोग रामलीला देखकर ही अपने जीवन में बदलाव ला रहे हैं। उन्होंने बच्चों द्वारा प्रस्तुत रामलीला की प्रशंसा करते हुए कहा कि बच्चों ने बहुत परिश्रम किया है। इस अवसर पर पूर्व सांसद एवं राष्ट्रप्रचार भाषा समिति के ट्रस्टी रघुनंदन शर्मा, अध्यक्ष एस.पी. दुबे, हिन्दी भवन के सचिव कैलाश अग्रवाल, राज्यपाल के सचिव भरत महेशवरी, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में रामलीला प्रेमी उपस्थित थे।

समग्र कृषि पैदावार में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिये मध्यप्रदेश पुरस्कृत

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केन्द्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने शनिवार को नई दिल्ली में मध्यप्रदेश को समग्र कृषि पैदावार में अच्छे प्रदर्शन के लिये सर्वश्रेष्ठ राज्य के रूप में पुरस्कृत किया। यह पुरस्कार इण्डिया टुडे पत्रिका के एग्रो समिट अवार्ड-2018 में किसान कल्याण तथा कृषि संचालनालय के संचालक मोहनलाल ने प्राप्त किया।

केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री सिंह ने नई दिल्ली में दिया पुरस्कार 

भोपाल। मध्यप्रदेश को समग्र कृषि पैदावार में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिये शनिवार को नई दिल्ली में सर्वश्रेष्ठ राज्य के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। केन्द्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने यह पुरस्कार इंडिया टुडे पत्रिका के एग्रो समिट एण्ड अवार्ड-2018 समारोह में प्रदान किया। किसान-कल्याण एवं कृषि विभाग के संचालक श्री मोहनलाल ने प्राप्त किया। समग्र कृषि पैदावार में मध्यप्रदेश पहले स्थान पर, उड़ीसा दूसरे, तेलंगाना तीसरे, आंध्रप्रदेश चौथे और महाराष्ट्र पाँचवें स्थान पर रहा है।

इण्डिया टुडे एग्रो अवार्ड के लिये मध्यप्रदेश को कई कसौटियों पर कसा गया। देश के कृषि विशेषज्ञों ने विभिन्न राज्यों की कृषि सांख्यिकी का अध्ययन किया। इसके बाद यह निष्कर्ष निकला कि मध्यप्रदेश ने वर्ष 2015-16 में गेहूँ की पैदावार बढ़ाने में खास उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश में गेहूँ की उत्पादकता 176.80 लाख टन रही है। प्रति हेक्टेयर गेहूँ की उत्पादकता 2,993 किलोग्राम तक पहुँच गई है।

अवार्ड कार्यक्रम में बताया गया कि मध्यप्रदेश देश का वह राज्य है, जिसने खेती में अपना जबरदस्त प्रदर्शन बरकरार रखा है। राज्य सरकार के कृषि पैदावार के आँकड़े बताते हैं कि खराब दौर में भी मध्यप्रदेश ने कृषि विकास में दोहरे अंकों की वृद्धि दर कायम रखी। समारोह में बताया गया कि केन्द्र सरकार के कृषि और किसान विकास मंत्रालय की ओर से कृषि विकास के लिये दिया जाने वाला कृषि कर्मण अवार्ड पिछले 5 साल से मध्यप्रदेश को मिल रहा है।

समारोह में बताया गया कि कृषि के समग्र विकास के लिये यह जरूरी है कि खेती से जुड़े तमाम पहलुओं पर एक साथ काम किया जाये। मध्यप्रदेश ने पिछले एक दशक में यही किया है। मध्यप्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़ाने की सतत कोशिश की गई है। प्रदेश में 700 छोटी सिंचाई परियोजनाओं को वर्ष 2018 के अंत तक पूरा करने का कार्यक्रम बनाया गया है। कृषि केबिनेट जैसी व्यवस्था ने भी मध्यप्रदेश को कृषि में अव्वल बनाये रखा है।

जनसम्पर्क आयुक्त श्री नरहरि से मिले महाराष्ट्र के वरिष्ठ जनसम्पर्क अधिकारी

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आयुक्त जनसम्पर्क श्री पी. नरहरि से आज संचालनालय में महाराष्ट्र राज्य के जनसम्पर्क विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भेंट की और महाराष्ट्र के पब्लिकेशन्स का सैट भेंट किया।

भोपाल। जनसम्पर्क आयुक्त श्री पी. नरहरि से आज संचालनालय में महाराष्ट्र राज्य के जनसम्पर्क विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के प्रतिनिधि मंडल ने सौजन्य भेंट की। दल का नेतृत्व महाराष्ट्र के संचालक जनसम्पर्क श्री शिवाजी मानकर ने किया।

आयुक्त जनसम्पर्क श्री नरहरि ने प्रतिनिधि मंडल को बताया कि मध्यप्रदेश में हाल ही में लागू मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल) योजना विश्व की अनुकरणीय योजना साबित हुई है। इस योजना से राज्य सरकार, समाज के सभी वर्गों के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के जीवन स्तर में व्यापक स्तर पर बदलाव लाने में सफल हुई है। श्री नरहरि ने बताया कि इस योजना में करीब पौने दो करोड़ से अधिक लोगों ने अभी तक पंजीयन करवाया है। यह योजना पंजीबद्ध हितग्राहियों को जन्म से अंतिम समय तक मददगार साबित हो रही है।

सौजन्य भेंट के दौरान महाराष्ट्र एवं मध्यप्रदेश में संचालित जनसम्पर्क विभाग संबंधी गतिविधियों पर विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने विभिन्न योजनाओं के बारे में आपसी तौर पर विचार-विमर्श भी किया।

वीरांगना रानी दुर्गावती के बलिदान-दिवस पर हर वर्ष होंगे तीन दिवसीय कार्यक्रम

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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को आज जबलपुर में वीरागंना रानी दुर्गावती बलिदान दिवस पर आयोजित आदिवासी सम्मेलन में समाधि समारोह में शामिल हुए।

वर्ष 2006 तक वनभूमि पर काबिज वनवासियों को दिये जायेंगे वनाधिकार पट्टे 

दिसम्बर 2018 तक प्रत्येक आदिवासी परिवार के घर पहुँचाई जायेगी बिजली 

वीरांगना रानी दुर्गावती के 455वें बलिदान दिवस समारोह में मुख्यमंत्री श्री चौहान 

भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज जबलपुर में वीरांगना रानी दुर्गावती के समाधि स्थल पर 455वें बलिदान दिवस पर आयोजित विशाल आदिवासी सम्मेलन में घोषणा की कि युवा पीढ़ी को बलिदान और स्वाभिमान की रक्षा के लिये प्रेरित करने के उद्देश्य से समाधि स्थल पर हर वर्ष रानी दुर्गावती के बलिदान-दिवस पर तीन दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। वन भूमि पर वर्ष 2006 तक काबिज वनवासी आदिवासियों को वनाधिकार पट्टे देकर काबिज वनभूमि का मालिक बनाया जायेगा। सौभाग्य योजना के अंतर्गत दिसम्बर 2018 तक प्रत्येक आदिवासी परिवार के घर-घर तक बिजली पहुँचाई जायेगी। इन परिवारों को 200 रूपये प्रतिमाह फ्लेट रेट पर ही बिजली बिल का भुगतान करना होगा। संबल योजना में गरीब आदिवासी परिवारों को शामिल कर योजना के सभी लाभ दिये जायेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रानी दुर्गावती के समाधि स्थल के समीप 10 एकड़ शासकीय भूमि पर वीरांगना के नाम से भव्य स्मारक बनवाया जायेगा। उन्होंने मण्डला जिले के रामनगर में आदिवासी संग्रहालय बनवाने की घोषणा करते हुए कहा कि गरीब आदिवासी परिवारों को आवासीय भूमि का पट्टा दिया जायेगा और अगले चार वर्षों में उन्हें पट्टे की जमीन पर पक्के मकान बनवाकर दिये जायेंगे।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि राज्य सरकार आदिवासी समुदाय के विकास और समृद्धि के साथ-साथ उनके गौरवपूर्ण इतिहास, परम्परा, बलिदान और संस्कृति को अक्षुण्ण बनाये रखेगी। स्वाधीनता की लड़ाई में आदिवासी नायकों के अमूल्य योगदान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वीरांगना रानी दुर्गावती ने जहाँ एक ओर राज्य की स्वतंत्रता और स्वाभिमान की रक्षा के लिये अपना बलिदान दिया, वहीं दूसरी ओर अपने 15 वर्ष के शासनकाल में प्रजा के लिये जनहितैषी कल्याणकारी कार्य करवाये, जिसके प्रमाण आज जबलपुर सहित अन्य स्थानों पर देखे जा सकते हैं। रानी दुर्गावती ने जल संरक्षण के लिये तालाबों का निर्माण करवाया और आम आदमी की सुविधा के लिये धर्मशालाएँ भी बनवाईं।

रानी दुर्गावती के नाम पर होगा डूमना विमानतल का नामकरण-

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने घोषणा की कि जबलपुर के डुमना विमानतल का नामकरण रानी दुर्गावती के नाम पर करने के लिये विधानसभा में राज्य शासन की ओर से प्रस्ताव पारित करवाकर केन्द्र शासन को भेजा जायेगा। श्री चौहान ने कहा कि महिला स्व-सहायता समूह से आदिवासी महिला को जोड़कर उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने के प्रयास किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का पूरा प्रयास है कि आदिवासी के जीवन में समृद्धि और खुशहाली आये इसलिए राज्य सरकार के बजट का बड़ा हिस्सा आदिवासियों और गरीबों के कल्याण और विकास के लिये व्यय करने का निर्णय लिया गया है।

बेटा-बेटी को खूब पढ़ायें आदिवासी परिवार-

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज जबलपुर में वीरागंना रानी दुर्गावती बलिदान दिवस पर आयोजित आदिवासी सम्मेलन मे आदिवासी को गले लगाकर स्वागत किया।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आदिवासी समुदाय से अपील की कि बच्चों को आत्म-निर्भर और सशक्त बनाने के लिये खूब पढ़ाई-लिखाई करवायें। उनके बेटा-बेटी की पढ़ाई का खर्चा राज्य सरकार वहन करेगी। श्री सिंह ने बताया कि केन्द्र और राज्य सरकार देश और प्रदेश में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिये तेजी से प्रयास कर रही है। उन्होंने आदिवासी परिवारों से कहा कि अपने बेटा-बेटियों को खूब पढ़ायें-लिखायें और समाज में आगे बढ़ने का मौका दें। समारोह में मुख्यमंत्री श्री चौहान ने शंकरदयाल भारद्वाज द्वारा लिखित पुस्तक ‘रानी दुर्गावती-एक बलिदान गाथा’ का विमोचन किया। श्री चौहान ने लेखक भारद्वाज को शॉल-श्रीफल देकर सम्मानित भी किया। सांसद राकेश सिंह एवं फग्गन सिंह कुलस्ते ने भी अपने विचार व्यक्त किये।

मुख्यमंत्री का तलवार-ढाल भेंट कर किया सम्मान-

मध्यप्रदेश जनजाति संयुक्त मोर्चा के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री श्री चौहान को बड़ी फूल माला पहनाई और तलवार तथा ढाल भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर सांसद श्रीमती संपतिया उईके, विधायक सुशील तिवारी, श्रीमती प्रतिभा सिंह एवं सुश्री नंदिनी मरावी, मनोनीत विधायक एल.बी. लोबो, महापौर डॉ. स्वाति सदानंद गोडबोले, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मनोरमा पटेल, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक वित्त तथा विकास निगम के उपाध्यक्ष एस.के. मुद्दीन, जबलपुर कृषि उपज मंडी अध्यक्ष राजाबाबू सोनकर, बड़ी संख्या में विशाल आदिवासी समुदाय मौजूद था।

भीषण सड़क हादसों से दहल उठा पन्ना, 2 की मौत, 23 घायल

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शाहनगर-बोरी मार्ग पर उमेही नाला में गिरी बस

रेत लेने जा रहे डम्फर ने बाईक सवाराेें को कुचला

शाहनगर/अजयगढ़। रडार न्‍यूज 24 घंटे के अंदर हुए दो भीषण सड़क हादसों से पन्ना जिला दहल उठा है। यहां शाहनगर-बोरी मार्ग पर एक बस अचानक अनियंत्रित होकर सूखे पड़े उमेही नाला में गिर गई। इस हादसे में बस में सवार रहे 22 यात्री घायल हुए है। जिनमें आधा यात्रियों की गंभीर हालत को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए पड़ोसी जिला कटनी रेफरल किया गया है।

बेलगाम ट्रक की ठोकर लगने से मृत युवक।

सड़क हादसा रविवार की सुबह 9ः30 बजे मेहगवां सरकार ग्राम के समीप हुआ। घायलाेें में महिलायें, बच्चे और वृद्ध शामिल है। वहीं मध्‍य रात्रि में जिले के अजयगढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत अजयगढ़-बीरा मार्ग पर एक तेज रफतार ट्रक के चालक ने अत्यंत ही लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाते हुए सामने से आ रहे तीन बाईक सवारों को कुचल दिया। इस दर्दनाक हादसे में एक ही परिवार के दो युवाओं का दुखांत हो गया। जबकि बाईक में पीछे बैठे तीसरे युवक रामचन्द्र यादव 21 वर्ष की बेहद गंभीर हालत को देखते हुए उसे मेडिकल काॅलेज के लिए रेफरल किया गया है। प्रत्यक्षदर्शी प्रमोद कुमार यादव ने बताया कि ट्रक की ठोकर इतनी भीषण थी कि बाईक सवार रामकिशन यादव की मौके पर ही मौत हो गई।
इलाज में लापरवाही पर परिजनों ने किया हंगामा-

गंभीर रूप से घायल दोनों युवकों को देर रात उपचार हेतु जब सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र अजयगढ़ लाया गया तो वहां ड्यूटी पर तैनात डाॅक्टर व पैरामेडिकल कर्मचारियों की घोर लापरवाही के चलते समय पर समुचित इलाज न मिलने के कारण घायल जगतराज यादव की मौत हो गई। स्वास्थ्य केन्द्र में व्याप्त अव्यवस्थाओं और इलाज के आभाव में घायल युवक की मौत होने से बेहद तनावपूर्ण स्थिति निर्मित हो गई। दो-दो जवान बेटों को खोने से आक्रोशित परिजन भड़क उठे और स्वास्थ्य केन्द्र में जमकर हंगामा करते हुए घायल की मौत के लिए चिकित्सक को दोषी ठहराने लगे। पीड़ित परिजनों का आरोप है कि घायल जगतराज और रामचंद्र यादव का सही तरीके से उपचार नहीं किया गया। जिन्दगी और मौत से जूझ रहे रामचन्द्र को मेडिकल काॅलेज रीवा ले जाने के लिए तत्परता से वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया। प्राईवेट वाहन से घायल रामचन्द्र को ले जाने के लिए उसकी जीवन सुरक्षा और मानवता को दरकिनार करते हुए आक्सीजन सिलेण्डर देने से अस्पताल प्रबंधन ने मना कर दिया। मौके पर मौजूद पुलिस बल ने सूझबूझ काम लेते हुए किसी तरह स्थिति को संभाला। बेलगाम ट्रक की सीधी ठोकर लगने से असमय कालकवलित हुअा रामकिशन यादव पिता राममिलन यादव 35 वर्ष दो मासूम बच्चियों का पिता था। जबकि मृतक जगतराज यादव और घायल रामचन्द्र यादव अविवाहित बताये जा रहे है। हादसा उस समय हुआ जब बेहद तेज गति से दौड़ रहा ट्रक रेत लेेने के लिए बीरा खदान की ओर जा रहा था। ठीक उसी समय एक वैवाहिक कार्यक्रम में शामिल होकर रामकिशन यादव और जयराम यादव या एक अन्य युवक मोटरसाईकिल से वापिस अपने गांव मझगांय लौट रहे थे। रास्ते में तेज रफतार ट्रक ने इन बाईक सवारों को कुचल दिया।
खिड़कियां तोड़कर बाहर निकले यात्री-

रविवार की सुबह करीब 9ः30 बजे मुन्ना राजा कम्पनी की बस क्रमांक-एमपी-19पी – 0271 रैपुरा से वाया बोरी कटनी जा रही थी। रास्ते में ग्राम मेहगवां सरकार के समीप उमेही नाला के रपटे पर बस अचानक अनियंत्रित होकर सूखे नाले में गिर गई। हादसे के समय बस मेें सवार रहे यात्रियों के घायल होने की चीख-पुकार गूंजने लगी। दुर्घटनग्रस्त बस से बाहर निकलने के लिए भगदड़ सी मच गई। बस के क्लीनर की ओर पलटने के कारण दोनों गेट नीचे दब गये। इस स्थिति में यात्री खिड़कियों को तोड़कर किसी तरह बाहर निकल सके। शाहनगर के समीप हुए इस हादसे की सूचना मिलते ही डायल 100 पुलिस और संजीवनी 108 एम्बूलेंस थोड़ी ही देर में मौके पर पहुंच गई। राहगीरों और पुलिस की मदद से सभी घायलाेें को शाहनगर लाकर स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मेें प्राथमिक उपचार कराया गया। इस हादसे में आधा दर्जन ग्रामीणों की नाजुक हालत देखते हुए उन्हें जिला चिकित्सालय कटनी के लिए रेफरल किया गया है।

देशवासियों के लक्ष्य के अनुरूप भारत स्वच्छ होकर रहेगा

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 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राजगढ़ में मोहनपुरा सिंचाई परियोजना के लोकार्पण समरोह में शामिल हुए। इस अवसर पर राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और जनसम्पर्क मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र भी उपस्थित थे।

वर्ष 2022 तक देश के हर परिवार के पास अपना घर होगा : प्रधानमंत्री श्री मोदी

4,713 करोड़ रूपये से अधिक के कार्य लोकार्पित स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 के विजेता पुरस्कृत सूत्र सेवा का शुभारंभ 

भोपाल/इंदौर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि हर देशवासी के लक्ष्य के अनुरूप भारत स्वच्छ होकर रहेगा। महात्मा गाँधी का स्वच्छ भारत का सपना पूरा करने का संकल्प लिया गया है। उन्होंने कहा कि देश, समाज और व्यक्ति को बदलने से पहले सोच को बदलना होता है। स्वच्छता की सोच में बदलाव लाकर देश ने दिखा दिया है। वर्ष 2022 में देश में ऐसा कोई परिवार नहीं होगा, जिसके पास अपना घर नहीं हो। आने वाले तीन-चार वर्षों में देश में दो करोड़ से ज्यादा आवास बनाये जायेंगे। पिछले चार वर्ष में देश में एक करोड़ पन्द्रह लाख आवास का निर्माण किया गया है। प्रधानमंत्री श्री मोदी आज इंदौर में मध्यप्रदेश शहरी विकास महोत्सव एवं स्वच्छता सर्वेक्षण पुरस्कार समारोह को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री श्री मोदी ने करीब 4 हजार 700 करोड़ रूपये की नगरीय विकास परियोजनाओं का ई-लोकार्पण तथा मध्यप्रदेश सरकार की अरबन ट्रांसपोर्ट स्कीम ‘सूत्र सेवा’ का शुभारंभ किया। श्री मोदी ने प्रधानमंत्री आवास योजना के एक लाख से अधिक हितग्राहियों को ई-गृह प्रवेश करवाया। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वच्छता एक दिन में नहीं आती। बल्कि जब सारे नागरिक मिलकर चौबीसों घंटे इसे प्राप्त करने के लिये काम करते हैं, तब यह प्राप्त होती है। मध्यप्रदेश ने अपने पराक्रम और पुरूषार्थ से इस गौरव को प्राप्त किया है। दो शहर इंदौर और भोपाल देश के प्रथम और द्वितीय स्वच्छ शहर है। इंदौर की सफलता की कहानी यहां की जनता की जीवटता, सहयोग और शहर के प्रति अपनेपन का उदाहरण है।

देश की आत्मा गाँव है तो शहर ऊर्जा के केन्द्र-

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने  राजगढ़ जिले के मोहनपुरा में आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश की निर्माणाधीन सिंचाई परियोजना पर केन्द्रित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान तथा जल-संसाधन मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र उपस्थित थे।

श्री मोदी ने कहा कि देश की आत्मा गाँव है तो शहर ऊर्जा के केन्द्र हैं। पिछली केन्द्र सरकार ने शहरों की तरफ ध्यान नहीं दिया जिससे आबादी तो बढ़ती गई पर सुविधाएं नहीं बढ़ी। पिछले चार सालों में शहरी विकास के लिये दो लाख 30 हजार करोड़ रूपये मंजूर किये। जबकि पिछली केन्द्र सरकार ने दस वर्ष में केवल 95 हजार करोड़ रूपये स्वीकृत किये थे। देश के 100 शहरों को स्मार्ट सिटी बनाने का काम तेजी से चल रहा है। अगले पांच वर्षों में स्मार्ट सिटी योजना में 20 हजार करोड़ रूपये का निवेश किया जायेगा। मध्यप्रदेश के शहरों में एक लाख से ज्यादा गरीबों ने अपने घरों में गृह प्रवेश किया, यह एक ऐतिहासिक घटना है। बीते चार वर्षों में पिछली सरकार के दस वर्ष की तुलना में तीन गुना आवास स्वीकृत किये गये। पहले आवास निर्माण का समय 18 माह था अब एक वर्ष के भीतर निर्माण पूरा हो रहा है।

मध्यप्रदेश में विकास के नये आयाम-

मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में विकास के नये आयाम तय किये गये हैं। मानवीय आकांक्षाओं को पूरा करने वाली योजनाएं बनाई गई हैं। नये मध्यप्रदेश और नये भारत के निर्माण की ठोस नीव तैयार की गई है। इसे और गति देने के प्रयास किये जा रहे हैं।

मध्यप्रदेश अब स्मार्ट राज्य – मुख्यमंत्री श्री चौहान

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश पहले बीमारू राज्य था, पर आज प्रदेश स्मार्ट राज्य बन गया है। उन्होंने इंदौर शब्द की व्याख्या करते हुये कहा कि इंदौर का अर्थ इंडियाज नीट, डिसीप्लिंड, आर्गेनाइज्ड, रेडिएंट और इंटरप्राइजड शहर है। श्री मोदी के नेतृत्व में सम्पन्न और समृद्ध भारत के निर्माण के सपने को पूरा किया जा रहा है। स्वच्छता के उनके संकल्प को पूरे देश के साथ मध्यप्रदेश में भी प्राथमिकता से पूरा किया जा रहा है। आयुष्मान भारत योजना पूरे देश को निरोग करेगी। अब प्रदेश का हर शहर स्वच्छ और हरा-भरा होगा।

इंदौर सबसे स्वच्छ शहर – श्रीमती महाजन-

लोकसभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन ने कहा कि देश का सबसे स्वच्छ शहर इंदौर सबके सहयोग से बना है। विश्व में हिन्दुस्तान की बेहतर छवि बनी है। आज हर देश भारत के साथ मित्रता चाहता है। देश में सबके सहयोग से विकास, समृद्धि और सृजन की नयी कहानी लिखी जा रही है। केन्द्रीय शहरी विकास राज्य मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि वर्ष 2016 के स्वच्छता सर्वे में देश के 73 शहरों, वर्ष 2017 के स्वच्छता सर्वे में 430 शहरों और वर्ष 2018 के स्वच्छता सर्वे में 4032 शहरों ने भाग लिया। देश के 71 प्रतिशत शहरों ने खुले में शौच से मुक्ति के लक्ष्यों को पूरा किया है। नगरीय विकास मंत्री श्रीमती माया सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश शहरी विकास की योजनाओं के क्रियान्वयन में देश में अग्रणी है। कार्यक्रम में राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल, वित्त मंत्री जयंत मलैया, छत्तीसगढ़ के मंत्री अमर अग्रवाल, सांसद राकेश सिंह, पूर्व मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, महापौर इंदौर श्रीमती मालिनी गौड़, महापौर भोपाल आलोक शर्मा, मुख्य सचिव बी.पी. सिंह उपस्थित थे।

हितग्राही हुये गदगद-

प्रधानमंत्री से छिन्दवाड़ा, बुरहानपुर, जबलपुर, उज्जैन, सिंगरौली, रतलाम, होशंगाबाद, डिण्डौरी, धरमपुरी, कटनी, भोपाल, भिण्ड, बीजावर, सीहोर और ब्यौहारी के प्रधानमंत्री आवास योजना तथा अन्य योजनाओं के हितग्राहियों ने बात की। हितग्राहियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए आवास के लिये आभार व्यक्त किया। श्री मोदी ने हितग्राहियों को

16 जिलों के कार्यों का इंदौर से ई-लोकार्पण-

प्रधानमंत्री ने प्रदेश के 16 स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से विभिन्न कार्यों का ई-लोकार्पण किया। सभी 374 नगरीय निकायों में एलईडी के माध्यम से कार्यक्रम का सजीव प्रसारण किया गया।

‘सूत्र सेवा’ का शुभारंभ-

नरेन्द्र मोदी मध्यप्रदेश के 20 चुनिंदा शहरों में प्रारंभ की जा रही विश्वसनीय, सुरक्षित एवं किफायती बस सेवा के तहत ‘सूत्र सेवा-म.प्र. की अपनी बस” का शुभारंभ किया। इसके प्रथम चरण में 4 नगर निगम भोपाल, इंदौर, जबलपुर एवं छिन्दवाड़ा तथा 2 नगरपालिका गुना एवं भिण्ड के लिये 127 बसों का संचालन होगा। आवास के लिये बधाई भी दी।

स्वच्छता के लिये राज्य और शहर हुये पुरस्कृत-

प्रधानमंत्री ने स्वच्छता सर्वे 2018 की रिपोर्ट का विमोचन तथा स्वच्छ सर्वे के डेशबोर्ड का लोकार्पण किया। उन्होंने स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 के पुरस्कार वितरित किये। शहरों में इंदौर को प्रथम, भोपाल को द्वितीय और चण्डीगढ़ को तृतीय पुरस्कार दिया। दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में विजयवाड़ा को प्रथम, तीन से दस लाख तक की आबादी में मैसूर को प्रथम, एक से तीन लाख की आबादी में नई दिल्ली को प्रथम पुरस्कार दिया गया। राज्यों के राजधानी में स्वच्छता का प्रथम पुरस्कार ग्रेटर मुम्बई को तथा राज्यों में प्रथम झारखंड को प्रथम, द्वितीय महाराष्ट्र का तथा छत्तीसगढ़ का तृतीय पुरस्कार दिया गया। छावनी परिषदों में प्रथम पुरस्कार दिल्ली छावनी को दिया गया। स्वच्छता के लिये नागरिकों और संस्थाओं को भी पुरस्कृत किया गया।

4063 करोड़ से निर्मित आवासों में गृह-प्रवेश-

इस अवसर पर सभी 374 नगरीय निकायों में 4,063 करोड़ रुपये लागत से निर्मित एक लाख 219 प्रधानमंत्री आवास में हितग्राहियों को एक साथ ई-गृह-प्रवेश करवाया। स्मार्ट सिटी मिशन में 5 स्मार्ट सिटी इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन में 278 करोड़ 26 लाख रुपये लागत से कराये गये 23 कार्यों का लोकार्पण भी किया गया। श्री मोदी ने मुख्यमंत्री शहरी पेयजल योजनार्न्गत 14 नगरीय क्षेत्रों की पेयजल योजनाओं का ई-लोकार्पण किया। 

10 पार्कों का लोकार्पण-

अमृत योजना में सीहोर की सीवरेज परियोजना और 10 नगरीय क्षेत्र खण्डवा, बुरहानपुर, खरगोन, सीहोर, होशंगाबाद, भोपाल, पीथमपुर, गुना, ग्वालियर और रीवा में बनाये गये पार्कों का लोकार्पण किया गया। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 35 करोड़ रूपये लागत से कटनी में बनाये गये इंट्रीग्रटेड़ सॉलीड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट तथा 2.11 करोड़ लागत की छतरपुर-बिजावर रोड का तथा स्मार्ट सिटी योजना से निर्मित भोपाल की मल्टीलेवल पार्किंग का लोकार्पण भी किया गया।

2 अरब 70 करोड़ की रूंज सिंचाई परियोजना निर्माण का हुआ अनुबंध

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सांकेतिक फोटो।

चेन्नई की एलएण्डटी कम्पनी को मिला ठेका

39 ग्रामों की 12 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि होगी सिंचित

प्रभावित ग्रामों में भू-अर्जन कार्य कार्यवाही जारी

पन्ना। रडार न्‍यूज जिले के अजयगढ़ क्षेत्र के रहवासियों के लिए खुशखबरी है कि बहुप्रतीक्षित रूंज मध्यम सिंचाई परियोजना के निर्माण का रास्ता लगभग साफ हो गया है। कतिपय स्थानीय लोगों के विरोध और बांध के फाउण्डेशन निर्माण के लिए हार्ड स्टेटा (मजबूत आधार) न मिलने के कारण लम्बे समय से अधर में लटकी रूंज मध्यम सिंचाई परियोजना के निर्माण से जुड़ी इस तकनीकी समस्या का समाधान हो गया है। जल संसाधन विभाग द्वारा परियोजना कार्य के लिए कुछ समय पूर्व ई-टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से टेंडर बुलाये गये। 2 अरब 70 करोड़ की लागत वाली इस महत्वकांक्षी सिंचाई परियोजना के निर्माण का ठेका देश की प्रतिष्ठित कम्पनी एल.एण्ड.टी. कम्पनी चेन्नई को मिला है। पिछले सप्ताह ठेका कम्पनी के प्रतिनिधियों ने पन्ना आकर जल संसाधन विभाग के साथ कार्य का अनुबंध भी निष्पादित कर लिया है। रूंज मध्यम सिंचाई परियोजना के निर्माण से पन्ना जिले के अजयगढ़ विकासखण्ड के सिंहपुर-धरमपुर क्षेत्र के 39 ग्रामों की 12550 हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होगी। इस परियोजना के पूर्ण होने पर सिंहपुर-धरमपुर क्षेत्र में खेती सच्चे अर्थों में लाभ का धंधा बन पायेगी। फलस्वरूप अन्नदाता किसान परिवार खुशहाल होंगे। जानकारों का मानना है कि कृषि से समृद्धि के मामले में तराई अंचल का यह इलाका पन्ना का पंजाब बन जायेगा। उल्लेखनीय है पन्ना जिले में रुंज नदी ग्राम मुटवाकला से निकलकर बाघिन नदी में मिलती है। अजयगढ़ विकासखण्ड अन्तर्गत अजयगढ़ घाटी के नीचे विश्रामगंज ग्राम के समीप दो पहाड़ाेें को बांध कर रूंज नदी के पानी को रोकने की योजना को मध्यप्रदेश जल संसाधन विभाग द्वारा 22 जुलाई 2011 को 269.79 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई थी। विश्रामगंज में जिस स्थल का चयन रूंज मध्यम सिंचाई परियोजना के निर्माण हेतु किया गया है, वहां तीन तरफ विशाल पहाड़ों के बीच में मैदानी इलाका स्थित होने से प्राकृतिक रूप से यह किसी बांध की तरह नजर आता है।
विश्रामगंज और भुजवई ग्राम होगें प्रभावित-
सिंहपुर-धरमपुर इलाके की तकदीर और तस्वीर बदलने की क्षमता रखने वाली रूंज मध्यम सिंचाई परियोजना के निर्माण से दो ग्राम विश्रामगंज और भुजवई के वाशिंदे प्रभावित होंगे। इस परियोजना में कुल 509.73 हेक्टेयर भूमि डूब में आयेगी। जिसमें निजी, शासकीय एवं वन भूमि शामिल है। परियोजन से प्रभावित विश्रामगंज और भुजवई के 428 परिवारों की डूब मेें आने वाली निजी भूमि 245.10 हेक्टयर के भू-अर्जन की कार्यवाही जारी है। भू-अर्जन हेतु जल संसाधन विभाग द्वारा कलेक्टर पन्ना के खाते में 2974.00 लाख रुपये जमा कराये जा चुके है। विश्रामगंज ग्राम का भू-अर्जन अवार्ड भी पारित हो चुका है। रूंज मध्यम सिंचाई परियोजना से प्रभावित होने वाले ग्राम विश्रामगंज और भुजवई के परिवारों के पुनर्वास हेतु जल संसाधन विभाग द्वारा ग्राम सिमरदा में तकरीबन 28 हेक्टेयर भूमि चिन्हित की गई है। रूंज मध्यम सिंचाई परियोजना में 154.91 हेक्टयर वन भूमि डूूब में आयेगी। वन भूमि के प्रथम चरण की स्वीकृति भारत शासन से प्राप्त हो चुकी है। अंतिम स्वीकृति के लिए पालन प्रतिवेदन मुख्य वन संरक्षक भोपाल द्वारा भारत सरकार पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय नई दिल्ली को भेजा जा चुका है। योजना मेें प्रभावित वन भूमि हेतु 33 करोड़ 81 लाख 46 हजार रुपये की राशि वन विभाग को अलग-अलग मद में जारी की जा चुकी है।
भू-अर्जन के बाद शुरू होगा निर्माण कार्य-
सिंचाई परियोजना का नक्शा।
लगभग सात वर्ष पूर्व स्वीकृत इस सिंचाई योजना के निर्माण की राह में कतिपय स्थानीय लोग और बांध निर्माण हेतु हार्ड स्टेटा का न मिलना दो बड़ी बाधायें रही हैं। जल संसाधन विभाग के तकनीकी अधिकारियों द्वारा विशेष रुचि लेकर योजना के सर्वेक्षण एवं अनुसंधान कार्य कराने के फलस्वरूप रूंज बांध के मजबूत आधार के लिए आखिरकार हार्ड स्टेटा मिल गया। अब जो कानूनी अड़चनें शेष हैं, उनके निराकरण पर पन्ना से लेकर भोपाल तक के अधिकारियों ने पूरा फोकस कर रखा है। इस बीच रूंज बांध की तकनीकी स्वीकृति मुख्य अभियंता धसान-केन कछार सागर द्वारा रुपये 158.61 करोड़ की प्रदाय की गई है। बांध निर्माण हेतु विभाग द्वारा निविदा आमंत्रित की गई जिसमें चेन्नई की लार्सन एंड टर्बो कम्पनी की निविदा स्वीकृत हुई है। भारत की इस बहुराष्ट्रीय कम्पनी के प्रतिनिधियों ने पिछले दिनों पन्ना आकर रूंज मध्यम सिंचाई परियोजना निर्माण कार्य का अनुबंध जल संसाधन विभाग के साथ निष्पादित कर लिया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार निर्माण कार्य की ड्राईंग-डिजाइन स्वीकृत कराने, भू-अर्जन कार्यवाही पूर्ण होने तथा अन्य औपचारिकताओं को पूर्ण करने के बाद निर्माण कार्य प्रारंभ किया जायेगा।
सिंचाई परियोजना के तकनीकी पहलू-
महत्वकांक्षी रूंज मध्यम सिंचाई परियोजना के तकनीकी पहलुओं पर गौर करें तो 1176 हेक्टेयर लम्बाई का मिट्टी बांध और 147 मीटर पक्के बांध का निर्माण कराया जायेगा। इस परियोजना का कुल डूब क्षेत्र 509.73 हेक्टेयर जिसमें वन भूमि 154.91 हेक्टेयर, शासकीय भूमि 87.90 हेक्टेयर और 266.92 हेक्टेयर निजी भूमि सम्मलित है। जल संसाधन विभाग को दावा है इस परियोजना का जल ग्रहण क्षेत्र 226.17 वर्ग किलोमीटर और भराव क्षमता 72 मिलियन घन मीटर होगी। रूंज नदी के पानी को रोकने के लिए पक्के बांध में 6 नग गेट लगाये जायेेंगे। इसके पानी से सिंहपुर-धरपुर क्षेत्र के 39 ग्रामों की 12550 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई हेतु प्रेशर एरीगेशन तकनीक के तहत् जमीन के नीचे 42 किलो मीटर लम्बी पाईप लाईन बिछाई जायेगी। पाईप लाईन के जरिये नहर की तरह खेतों में पानी पहुंचाने का एक बड़ा फायदा यह होगा कि खेती की जमीन अनुपयोगी नहीं होगी, पानी की बर्बादी रूकेगी, नहरों की टूट-फूट भराव आदि की समस्या से छुटकारा मिल जायेगा और किसानों को बड़ी ही सुगमता से उनके खेतों को सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध हो सकेगा। जिन किसानों के खेतों में जमीन के अन्दर पाईप लाइन बिछाई जायेगी उन्हें शासन के नियमानुसार मुआवजा भी दिया जायेगा।
खर्च हुए 66 करोड़ –
फाइल फोटो ।
रूंज सिंचाई परियोजना पर चार साल तक चले सर्वे और 42 करोड़ रुपए खर्च होने के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया था कि बांध के फाउंडेशन निर्माण के लिए जरूरी गहराई तक हार्ड स्टेटा नहीं मिल पा रहा है। जिस गहराई पर हार्ड स्टेटा मिल रहा है उतनी गहराई पर फाउंडेशन (बांध के आधार) को अपेक्षित मजबूती नहीं मिलने की आशंका के चलते यह परियोजना कुछ समय के लिए अघोषित तौर पर स्थगित कर दी गई थी। इसके साथ ही परियोजना को पुनरीक्षित करने के साथ नया नक्शा तैयार करने के लिए प्रस्ताव शासन को भेजे गए थे। इसके बाद बीते दो साल से परियोजना बंद जैसी स्थिति मेें रही। कुछ बदलाव के साथ नये सिरे से स्थल सर्वेक्षण होने पर आखिरकार बांध की मजबूती के लिए हार्ड स्टेटा (ठोस आधार) मिल गया। लेकिन इसके लिए विभाग को परियोजना के सर्वेक्षण कार्य पर 42 लाख से अधिक की राशि खर्च करनी पड़ी। रूंज मध्यम सिंचाई परियोजना को आकार देने के लिए मार्च माह 2018 तक की स्थिति में विभिन्न कार्यों पर 66 करोड़ रुपये का व्यय होना बताया जा रहा है। जिसमें परियोजना के सर्वेक्षण कार्य के अलावा भू-अर्जन पर 2974 लाख, वन भूमि पर 3381.46 लाख और 202.43 अन्य व्यय शामिल है।
अब इन कार्यों पर व्यय होगी राशि-
2 अरब 69 करोड़ 79 लाख रुपये की लागत वाली रूंज मध्यम सिंचाई परियोजना को मूर्तरूप देने के लिए अब जो कार्य कराये जाने शेष हैं, उसमें मुख्य रूप से बांध निर्माण (शीर्ष कार्य) पर 175.68 करोड़ की लागत आयेगी। इसके अलावा नहर कार्य (पाईप लाइन बिछाने) पर 85.03 करोड़, प्रभावित ग्रामीणों के पुनर्वास स्थल पर आधारभूत संरचनाओं के निर्माण पर 21.35 करोड़, विद्युत लाईन शिफ्टिंग पर 20 लाख तथा बांध निर्माण से डूबने वाली रोड के नवीन निर्माण (डायवर्सन रोड) पर 350 लाख खर्च होंगे।
शुगर उत्पादन की बनेगी संभावना –
रूंज मध्यम सिंचाई परियोजना से अजयगढ़ विकासखण्ड के जिस इलाके के वर्ष भर सिंचाई सुविधा प्राप्त होगी वहां के किसान पिछले कई दशकों से गन्ने की खेती सीमित दायरे में कर रहे है। बावजूद इसके सिंहपुर-धरमपुर का इलाका गन्ना उत्पादन के लिए जाना जाता है। गन्ना उगाने के साथ-साथ यहां के कुछ किसान देशी पद्धति से घर पर ही उससे गुड़ तैयार करते हैं। सिंचाई की बेहतर सुविधा मिलने पर इस इलाके में गन्ने का कई गुना बम्फर उत्पादन होना तय है। भविष्य में यहां सुगर फैक्ट्री और गुड़ निर्माण की इकाई स्थापित होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। जल संसाधन विभाग के ही सेवानिवृत्त इंजीनियर एलडी सिंह का मानना है कि रूंज मध्यम सिंचाई परियोजना के निर्माण से अति पिछड़े सिंहपुर-धरमपुर क्षेत्र में हरित क्रांति आयेगी। यहां के किसानों परिवारों का जीवन स्तर बेहतर होगा और गन्ने का उत्पादन बढ़ने से क्षेत्र के औद्योगिक विकास का मार्ग प्रशस्त होगा।
इनका कहना है-
       ‘‘रूंज मध्यम सिंचाई परियोजना का टेण्डर स्वीकृत होने पर इसके निर्माण हेतु एल.एण्ड.टी. कम्पनी के साथ इसी महीने अनुबंध हो चुका है। कार्य कब से प्रारंभ होगा यह बता पाना फिलहाल संभव नहीं है, क्योंकि निविदा शर्तों के अनुसार कम्पनी को इसके पहले अन्य कई औपचारिकतायें पूरी करनी है।‘‘
                                                                 -जेके ठाकुर, कार्यपालन यंत्री जल संसाधन संभाग पन्ना

महिला बाल विकास मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस स्काच स्पेशल अवार्ड से सम्मानित

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केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती मेनका गांधी ने नई दिल्ली में महिला बाल विकास मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस को प्रदेश में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में उल्लेखनीय कार्य के लिए स्काच स्पेशल अवार्ड से सम्मानित किया।

भोपाल। महिला बाल विकास मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस को आज नई दिल्ली में स्काच स्पेशल अवार्ड से सम्मानित किया गया। केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती मेनका गांधी ने श्रीमती चिटनिस को यह अवार्ड उनके नेतृत्व में प्रदेश में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में किये गये उल्लेखनीय कार्यों के लिए प्रदान किया। राष्ट्रीय स्तर पर राज्यों व केन्द्रीय इकाइयों के मूल्यांकन के आधार पर यह पुरस्कार प्रदान किया गया है।

श्रीमती चिटनिस ने बताया कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, मजदूरी में लगी महिलाओं की गर्भावस्था के दौरान सहायता के लिए संचालित की गई है। प्रसव से पहले या बाद के स्वास्थ्य संबंधी व्यवहार में सुधार लाने और इस अवधि में महिलाओं को आराम मिल सके इस उद्देश्य से मजदूरी की आंशिक क्षतिपूर्ति के रूप में महिलाओं को यह आर्थिक सहायता दी जाती है। प्रदेश में वर्ष 2017-18 में दो लाख 31 हजार 276 हितग्राहियों को 28 करोड़ 82 लाख 65 हजार रुपये का भुगतान किया गया है।