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पदोन्नत होकर वनपाल बने महीप रावत, सीएफ और डीएफओ ने लगाए स्टार

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पन्ना के वरिष्ठ वनरक्षक महीप कुमार रावत की वर्दी पर स्टार लगाकर वनपाल के पद पर पदोन्नति प्रदान करते हुए वन विभाग के अधिकारीगण।
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश वन कर्मचारी संघ पन्ना के जिलाध्यक्ष एवं वरिष्ठ वनरक्षक महीप कुमार रावत को गत दिनों वन विभाग द्वारा कार्यवाहक वनपाल के पद पर पदोन्नत किया गया था। इसी क्रम में आज (गुरुवार 3 अप्रैल 2025 को) पन्ना में आयोजित एक गरिमामयी कार्यक्रम में नरेश यादव वन संरक्षक वृत्त छतरपुर, अनुपम शर्मा वनमण्डलाधिकारी दक्षिण वन मण्डल पन्ना एवं गर्वित गंगवार वनमण्डलाधिकारी उत्तर वन मण्डल पन्ना द्वारा श्री रावत की वर्दी पर स्टार लगाकर विधिवत पदोन्नति प्रदान की गई। इस अवसर पर वरिष्ठ अधिकारियों ने निष्ठापूर्वक कार्य करने के लिए उनकी सराहना कर शुभकामनाएं और बधाई दी। कार्यक्रम में बीपी परौंहा मुख्य लिपिक दक्षिण वनमण्डल प्रकाश कुमार खरे वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी दक्षिण वनमण्डल पन्ना, सौरभ दुबे सहायक ग्रेड-3, गणेश सोनी, बैकुण्ठराम गर्ग, उमेश सिंह, राहुल चनपुरिया सहित अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे। वनकर्मियों के हितों से जुड़े मुद्दों पर सदैव सजग और संघर्ष के लिए तत्पर रहने वाले महीप कुमार रावत के पदोन्नत होने पर जिले के वन कर्मचारियों एवं अधिकारियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दी हैं। साथ ही जिले के विभिन्न कर्मचारी संगठनों के अध्यक्ष एवं अन्य पदाधिकारियों ने भी श्री रावत को बधाई दी है।

पूर्व मंत्री मेहदेले से कांग्रेस विधायक रामसिया भारती की मुलाकत ने बढ़ाई सियासी सरगर्मी

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  सफरबाग में दो दिग्गजों के बीच ढाई घण्टे तक आखिर कौन सी खिचड़ी पकी?

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) छतरपुर जिले के बड़ा मलहरा से कांग्रेस की विधायक साध्वी सुश्री रामसिया भारती बुधवार 2 अप्रैल को अचानक पन्ना पहुंचीं। उन्होंने यहां भाजपा की दिग्गज नेत्री एवं पूर्व मंत्री कुसुम सिंह मेहदेले से उनके सफरबाग स्थित निज निवास पर मुलाकत की। लगभग ढाई घण्टे तक चली इस मुलाक़ात की तस्वीरें बाहर आने के बाद अब इसके मायने निकाले जा रहे हैं। लोधी समाज से आने वालीं पिछड़े वर्ग की दोनों नेत्रियों के बीच बंद कमरे में आखिर कौन सी खिचड़ी पकी इसे लेकर अटकलें और कयास लगाए जा रहे हैं। इनकी मुलाकत ने पन्ना में सियासी गलियारों में सरगर्मी बढ़ा दी है। क्योंकि दो सियासतदान मिलें और सियासी चर्चा न हो ऐसा संभव ही नहीं है। कहा जाता है कि राजनीति में कुछ भी बेवजह नहीं होता है। इसलिए संभव है कि इस मुलाकत की वजह बाद में पता चले। इस चर्चित मेल-मुलाकत के दौरान लोधी समाज के कुछ प्रतिष्ठित लोग और मेहदेले के विश्वासपात्र मौजूद रहे।
बता दें कि, 2018 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने बेहद चौंकाने वाला निर्णय लेते हुए पूर्व मंत्री सुश्री कुसुम सिंह मेहदेले की परंपरागत सीट पन्ना से उनका टिकिट काटकर वर्तमान विधायक बृजेन्द्र प्रताप सिंह को दे दिया गया था। तभी से मेहदेले अपनी पार्टी से नाराज चल रहीं। अपने मुखर अंदाज के लिए जानीं जाने वाली मेहदेले की नाराजगी समय-समय पर उनके बेबाक बयानों से साफ़ जाहिर होती रही है। राजनीतिक रूप से हांसिये पर चल रहीं वरिष्ठ नेत्री मेहदेले ने पिछले कुछ समय से अपनी सामाजिक सक्रियता काफी बढ़ा दी है। वे प्रदेश में लोधी समाज समेत पिछड़े वर्ग की अन्य जातियों को गोलबंद करने की मुहिम में पूरी शिद्दत के साथ जुटीं है। इसका पता उस समय चला जब पिछले साल 2024 में वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी की जयंती के अवसर पर पन्ना में आयोजित एक कार्यक्रम में पूर्व कैबिनेट मंत्री कुसुम मेहदेले ने एमपी में लोधी समाज का सीएम बनाने को लेकर बयान दिया था। उनके इस बयान ने सूबे की सियासत में हलचल मचा दी थी। सुश्री महदेले ने कहा था कि, मध्य प्रदेश में लोधी-कुर्मी समाज के लोग अच्छी खासी तादाद में है। हम विधानसभा की एक तिहाई सीटें जीतकर अपना मुख्यमंत्री बना सकते हैं। इस बयान के बाद से ही मेहदेले की मुहिम पर प्रदेश की दोनों ही मुख्य पार्टियां अपनी नजर बनाए हुए हैं।

इस गांव की महिलाएं क्यों हैं आंदोलित: हाथ में लाठी, चेहरे पर गुस्सा; होठों पर शिकायत और रात्रि जागरण

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पन्ना जिले के दूरस्थ ग्राम ताखौरी में शराब दुकान खोलने के विरोधस्वरूप हाथ में लाठी-डण्डा लेकर प्रदर्शन करती महिलाएं।

*    लाड़ली बहनें बोलीं- शराब दुकान खुलने से टूट-बिखर जाएगा परिवार

*    शराब दुकानों की शिफ्टिंग को लेकर पन्ना के चंद गांवों में उपजा आक्रोश

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) प्रदेश के पन्ना समेत 19 धार्मिक महत्व वाले स्थानों की शराब दुकानों को बंद करने (शराबबंदी) के निर्णय पर लोग जहां ख़ुशी जाहिर कर रहे हैं वहीं शराब दुकानों की शिफ्टिंग को लेकर कुछ स्थानों पर गुस्सा भी देखा जा रहा है। जिले के शहरी एवं आंचलिक क्षेत्रों में जिन कस्बों-गांवों में शराब दुकानें कई सालों से संचालित थीं उनको वहां से हटाकर नए स्थान पर शिफ्ट करने संबंधी कार्यवाही को लेकर हंगामा बरपा है। खासकर जिले की रैपुरा तहसील क्षेत्र अंतर्गत शराब दुकानों की मनमानी शिफ्टिंग का कई गांवों में जबरदस्त विरोध हो रहा है। बघवारकला, रैपुरा के बाद तखौरी के वाशिंदे गांव में शराब दुकान खोलने की योजना के खिलाफ विगत दिवस सड़कों पर उतर आए। इस विरोध-प्रदर्शन का नेतृत्व गांव की महिलाओं ने किया। हाथ में लाठी-डण्डे लेकर तखौरी की महिलाओं ने शराब दुकान के खिलाफ जब मोर्चा खोला तो गांव के पुरुष और स्कूली बच्चे भी समर्थन में आ गए। महिलाओं की अगुवाई में एकजुट गांववालों ने सोमवार 31 मार्च की शाम से लेकर मंगलवार 1 अप्रैल की अलसुबह तक रात्रि जागरण किया ताकि रात के सन्नाटे में गुपचुप तरीके से गांव में शराब दुकान स्थापित न होने पाए।
शराब दुकान खोलने का विरोध करने वाली महिलाओं का कहना है कि इससे उनके गांव-घर की शांति भंग हो जाएगी।
महिलाओं के आक्रोश को देखते हुए आबकारी विभाग के अफसर और ठेकेदार अपनी योजना पर अमल करने की हिम्मत नहीं जुटा सके। भारी विरोध से बचने के लिए आबकारी विभाग ने तखौरी एवं बघवारकला को छोड़कर अन्य किसी स्थान को प्रस्तावित करने की कार्यवाही शुरू कर दी है। पन्ना के तखौरी गांव की महिलाओं का शराब दुकान के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन जिले में चर्चा का विषय बना है। इनके प्रदर्शन के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हैं। कम पढ़ी-लिखी ये महिलाएं भलीभांति जानती हैं कि शराब एक सामाजिक बुराई है, यह न सिर्फ व्यक्तिगत स्वास्थ्य पर बुरा असर डालती है, बल्कि इसके मानसिक, आर्थिक और सामाजिक दुष्परिणाम भी काफी गंभीर होते हैं। इसलिए वे गांव में शराब दुकान खोलने का पुरजोर विरोध कर रही हैं।
शराब दुकान की शिफ्टिंग के विरोध स्वरूप तखौरी में महिलाओं के द्वारा किए गए विरोध-प्रदर्शन को गांव के पुरुषों ने भी अपना समर्थन दिया।
बता दें कि तहसील मुख्यालय रैपुरा से सटे भरवारा में स्थित शराब दुक़ान को राजस्व वृद्धि की दृष्टि से रैपुरा, बघवारकला या फिर तखौरी में शिफ्ट करने का प्रस्ताव आबकारी विभाग ने तैयार किया था। विगत दिवस शराब ठेकेदार के प्रतिनिधि और आबकारी विभाग का मैदानी अमला उपयुक्त स्थल चयन के सिलसिले में जब उक्त स्थानों का अवलोकन करने पहुंचा तो रैपुरा से लेकर तखौरी तक तनाव फ़ैल गया। भरवारा शराब दुकान को बघवारकला अथवा रैपुरा में शिफ्ट करने की योजना का स्थानीय लोगों द्वारा कड़ा विरोध किए जाने पर तखौरी को विकल्प के तौर पर चिन्हित किया गया। लेकिन इस पर कोई फैसला हो पाता उसके पहले ही गांव की महिलाएं चूल्हा-चौका छोड़ हाथ में लाठी-डंडे लेकर सड़क पर उतर आईं। सोमवार 31 मार्च 2025 की शाम लेकर 1 अप्रैल की सुबह तक तखौरी की महिलाओं ने रात्रि जागरण किया। क्योंकि रात के अंधेरे में गांव में शराब दुकान को शिफ्ट किए जाने का अंदेशा जताया जा रहा था। दूसरे दिन यानी 1 अप्रैल को भी महिलाएं पूरी तरह अलर्ट रहीं।
शराब दुकान खोलने के विरोध में हुए प्रदर्शन में तखौरी गांव के स्कूली बच्चे में शामिल रहे।
जिला मुख्यालय पन्ना से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित छोटे से गांव में हुए महिलाओं के इस विरोध-प्रदर्शन की खबर ने हर किसी का ध्यान अपनी तरफ खींचा है। गांव की अनपढ़ अथवा कम पढ़ी-लिखी महिलाओं ने स्व प्रेरणा से शराब दुकान के खिलाफ जिस ठेठ अंदाज में मोर्चा खोला उसकी काफी सराहना हो रही है। सबसे अच्छी बात यह रही कि गांव के पुरुषों तथा स्कूली बच्चों ने भी महिलाओं की मांग का पूर्ण समर्थन किया।

भंग होगी शांति, बिखर जाएगा परिवार

प्रदर्शकारी महिलाओं ने स्थानीय मीडियाकर्मी को बताया कि शराब दुकान खुलने पर ताखौरी समेत आसपास के इलाके की शांति भंग हो जाएगी। शराब पीने वाले रोजाना लड़ाई-झगड़ा करके माहौल ख़राब करेंगे। महिलाओं के मुताबिक इसका सबसे अधिक दुष्परिणाम भी उन्हें ही झेलना पड़ेगा। लकड़ी बेंचने अथवा मेहनत-मजदूरी करने पर जो चंद रुपए मिलते हैं उनके पति उस राशि को जबरन छुड़ाकर शराब के नशे में उड़ा देंगे। शराब के सेवन को लेकर हर घर में रोज-रोज कलह होगी और यह परिवारों के टूटने-बिखरने की वजह बनेगी। महिलाओं का मानना है कि घर के बड़ों को शराब पीते देखकर बच्चे भी आगे चलकर नशे को अपना लेंगे। इस तरह शराब दुकान खुलने से उनका वर्तमान और भविष्य दोनों ही तबाह-बर्बाद हो जाएगा। यह सामाजिक बुराई है, इसे ख़त्म करना सबका कर्तव्य है। महिलाओं का कहना है कि, उन्हें पक्का भरोसा है कि प्रदेश के संवेदनशील मुख्यमंत्री उनकी चिंता और परेशानी का संज्ञान लेकर अपनी लाड़ली बहनों के घर को टूटने-बिखरने से रोकने के लिए तखौरी में शराब दुकान खुलने नहीं देंगे।
इनका कहना है-
‘पवई सर्किल अंतर्गत कुछ शराब दुकानों की शिफ्टिंग की गई है। इसी क्रम में भरवारा शराब दुकान को रैपुरा, बघवारकला अथवा ताखौरी में शिफ्ट करना प्रस्तावित किया गया था। लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध और आपत्तियों को देखते हुए फिलहाल भरवारा दुकान की शिफ्टिंग को रोक दिया गया है। वरिष्ठ अधिकारी अब जो निर्णय लेंगे उसके अनुसार आगे की कार्यवाही की जाएगी।’

हरीश पाण्डेय, उप निरीक्षक, आबकारी विभाग, जिला पन्ना।

पन्ना के जंगल में भड़की भीषण आग, 3 सुरक्षा श्रमिक झुलसे

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उत्तर वन मंडल पन्ना अंतर्गत झलाई के जंगल में लगी आग को बुझाने के लिए फायर लाइन काटने एवं अन्य उपाय करते वनकर्मी।

*   आग बुझाने के दौरान लपटों की चपेट में आने से हुई दुर्घटना

*   घायल सुरक्षा श्रमिकों को जिला अस्पताल में कराया भर्ती

पन्ना।(www.radarnews.in) गर्मी के मौसम की दस्तक के साथ ही पन्ना के जंगल में आग लगने की घटनाएं सामने आने लगी हैं। ताजा घटना उत्तर वन मंडल की पन्ना रेंज अंतर्गत आने वाले झलाई के जंगल की है। झलाई ग्राम के नजदीक स्थित प्लांटेशन में आज अज्ञात कारणों के चलते अचानक आग भड़क उठी। हवा के झोकों के चलते देखते ही देखते आग भीषण होकर बड़े क्षेत्र में फ़ैल गई। विकराल रूप ले चुकी आग को बुझाने के दौरान वन विभाग के तीन सुरक्षा श्रमिक लपटों की चपेट में आकर झुलस गए। किसी तरह अपनी जान बचाकर भागे घायल सुरक्षा श्रमिकों को इलाज के लिए आनन-फानन पन्ना लाकर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। घायल श्रमिकों की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। वहीं भीषण आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया गया है।
जिला मुख्यालय पन्ना से महज 6-7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित वन ग्राम झलाई के जंगल में रविवार को दोपहर के समय अचानक आग भड़क उठी। जंगल में आग लगने की सूचना मिलते ही पन्ना से वनकर्मियों की टीम कुछ ही देर में मौके पर पहुँच गई। हालांकि इस बीच हवाओं के चलते आग ने विकराल रूप धारण करते हुए करीब 10-12 हेक्टेयर‌ क्षेत्र को अपने आगोश में ले लिया। सूखी घास और पत्तियों को ख़ाक करके जंगल में की तेजी से फैलती आग को काबू करने के लिए वनकर्मियों ने जगह-जगह फायर लाइन काट दी। आग पर नियंत्रण पाने के प्रयास के दौरान शाम करीब 4 बजे ऊंची उठती लपटों की चपेट में आने से तीन सुरक्षा श्रमिक झुलस गए। अपनी जान बचाकर भागे घायल सुरक्षा श्रमिकों को मौके पर मौजूद वनकर्मियों द्वारा इलाज के लिए तुरंत पन्ना जिला अस्पताल लाया गया। जहां ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने सुरक्षा श्रमिक राजेन्द्र यादव 50 वर्ष को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी। जबकि शेष दो सुरक्षा श्रमिक हरि सिंह यादव 60 वर्ष और कपूर सिंह यादव 55 वर्ष को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है।
उत्तर वन मंडल की पन्ना रेंज के परिक्षेत्राधिकारी अभिषेक दुबे ने रडार न्यूज़ को बताया कि जिला अस्पताल में भर्ती दोनों सुरक्षा श्रमिकों की हालत खतरे से बाहर है। जंगल की आग पर भी सूर्यास्त होने के पहले ही पूरी तरह से नियंत्रण पा लिया गया है। हवाओं के चलते आग का फैलाव लगभग 10-12 हेक्टेयर‌ में  हुआ है लेकिन जंगल को कोई ख़ास क्षति नहीं पहुंची। आग में सूखी घास और पत्तियां ही जलीं है। रेंजर श्री दुबे ने बताया कि झलाई बीट और अमझिरिया बीट के मध्य में स्थित जंगल में आग लगी थी। उक्त क्षेत्र वन कक्ष क्रमांक- 415-416 अंतर्गत आता है। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका। आपने एक सवाल के जवाब में बताया कि उक्त वन क्षेत्र में अभी तक महुआ के पेड़ों में फूल नहीं आए हैं इसलिए महुआ बीनने वालों के द्वारा पेड़ के नीचे जमा घास-पत्तियों को साफ़ करने के लिए आग लगाई जाए इस बात की संभावना नहीं है। आग किन कारणों से लगी इसका पता लगाने के लिए प्रकरण दर्ज कर सभी पहलुओं की बारीकी जांच-पड़ताल की जाएगी।

रिटायर्ड शिक्षक ने किया मीडिया कर्मियों का सम्मान

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रिटायर्ड शिक्षक ने पन्ना के मीडियाकर्मियों को भगवान शिव परिवार के छायाचित्र भेंट कर सम्मानित किया।
पन्ना। (www.radarnews.in) नगर के टिकुरिया मोहल्ला निवासी समाजसेवी एवं रिटायर्ड शिक्षक विजय चंसोरिया व उनकी धर्मपत्नी श्रीमती हेमलता चंसोरिया ने आज शारदा माता मंदिर स्थित अपने निवास स्थान पर स्थानीय प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया बन्धुओं का सम्मान किया। उल्लेखनीय है कि 3 मार्च से लेकर 8 मार्च तक स्थानीय शारदा माता मंदिर में शिव जी के नवनिर्मित मंदिर में शिव परिवार की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसमें मुख्य यजमान की भूमिका में धर्म परायण दंपत्ति विजय चंसोरिया व श्रीमती हेमलता चंसोरिया रहे। इस कार्यक्रम में स्थानीय पत्रकारों द्वारा अपनी सहभागिता का निर्वहन करने पर आज सम्मान कार्यक्रम रखा गया और उपस्थित सभी मीडिया कर्मियों को भगवान शिव परिवार का छायाचित्र भेंट किया गया।

युवाओं को तकनीकी रूप से मजबूत बनाएगा ‘कम्प्यूटर ऑन डिमांड एजुकेशन’ कार्यक्रम

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फाइल फोटो

*    शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज पवई में प्रशिक्षण कार्यक्रम हुआ प्रारंभ

*    पूर्णतः निःशुल्क प्रशिक्षण का विद्यार्थी एवं आम नागरिक उठा सकते हैं लाभ

पन्ना। (www.radarnews.in) डिजिटल इंडिया अभियान को मजबूती देने और ग्रामीण व शहरी क्षेत्र के युवाओं को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज पवई में “कंप्यूटर ऑन डिमांड एजुकेशन” नामक अभिनव कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों एवं आम नागरिकों को कम्प्यूटर शिक्षा में दक्ष बनाना है ताकि वे वर्तमान डिजिटल युग की आवश्यकताओं को समझ सकें और रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त कर सकें। सीमित सीट संख्या वाला यह प्रशिक्षण पूर्णतः निःशुल्क है। पॉलिटेक्निक महाविद्यालय में अध्ययनरत छात्र-छात्राएं, आम नागरिक तथा अन्य संस्थाओं के विद्यार्थी इसका लाभ प्राप्त कर सकते हैं। बशर्ते इसके लिए इच्छुक प्रतिभागियों को महाविद्यालय में कार्यालयीन समय पर सम्पर्क कर शीघ्रता से अपना पंजीयन कराना होगा।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन पॉलिटेक्निक महाविद्यालय पवई के प्राचार्य अरविंद कुमार त्रिपाठी के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। प्राचार्य श्री त्रिपाठी ने जानकारी देते हुए बताया, आयुक्त तकनीकी शिक्षा भोपाल के निर्देशानुसार पवई में कम्प्यूटर ऑन डिमांड एजुकेशन नामक बेहद उपयोगी प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है। कार्यक्रम के नोडल अधिकारी पुष्पेंद्र गौतम एवं सहायक के रूप में दीपचंद अहिरवाल, रमा सोनी, ज्योत्सना पटेल और प्रशांत कुमार द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इस कार्यक्रम अंतर्गत विद्यार्थियों को बेसिक कम्प्यूटर, इंटरनेट का प्रयोग, सीजिटल लाइब्रेरी की जानकारी, कोडिंग की जानकारी, पायथन एवं सी प्लस जैसी कम्प्यूटर की भाषाओं की जानकारी देना है। साथ ही संक्षेप में हार्डवेयर में आने वाली समस्याओं एवं उनके त्वरित समाधान के बारे में भी बताया जाएगा। साइबर सुरक्षा और डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रहने की तकनीक के बारे में भी विशेषज्ञों के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जाएगा।
प्राचार्य श्री त्रिपाठी ने बताया कि, प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रतिदिन शाम 5.00 बजे से 6.00 बजे तक शासकीय पॉलिटेक्निक महाविद्यालय पवई की अत्याधुनिक कम्प्यूटर लैब में आयोजित किया जाएगा। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का लाभ न केवल अध्ययनरत विद्यार्थियों को मिलेगा, बल्कि आम नागरिकों और संस्था के बाहर के दसवीं, ग्यारहवीं एवं बारहवीं के विद्यार्थियों के लिए भी यह एक सुनहरा अवसर है। प्रशिक्षण पूरी तरह निःशुल्क है और सीटें सीमित हैं। इसलिए इच्छुक प्रतिभागी महाविद्यालय के कार्यालयीन समय प्रातः 10.30 से शाम 5.00 बजे तक कम्प्यूटर ब्रांच में संपर्क कर रजिस्ट्रेशन की कार्यवाही कर सकते हैं।

होली की पार्टी के लिए जंगली सूअर का शिकार, वनकर्मियों ने घेराबंदी कर आरोपी को दबोंचा

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*    रात के अंधेरे में प्लास्टिक के डिब्बों में भरकर ले जा रहा था मांस

*    शातिर शिकारी के कब्जे से 30 किलो मांस और मोटरसाइकिल जब्त

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) होली की पार्टी के लिए जंगली सूअर का शिकार करने वाले शातिर शिकारी की चालाकी काम नहीं आई! मांस को प्लास्टिक के डिब्बों में भरकर रात के अंधेरे में बाइक से ले जा रहे आरोपी को वनकर्मियों ने आखिरकार कड़ी मशक्कत के बाद घेराबंदी कर पकड़ लिया। घटना पन्ना टाइगर रिजर्व की पन्ना बफर रेंज के इलाके की है। आरोपी रामू पिता राममिलन सोनकर 28 वर्ष निवासी नरैनी जिला बांदा उत्तर प्रदेश हाल निवास अजयगढ़ जिला पन्ना के कब्जे से वन अमले ने 30 किलोग्राम मांस, मोटरसाइकिल, प्लास्टिक के दो डिब्बे और मांस काटने प्रयुक्त छुरा जब्त किया है। पन्ना बफर रेंज के वन परिक्षेत्राधिकारी अमर सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि होली पर्व के मद्देनजर वन अपराध की रोकथाम को लेकर स्टॉफ अलर्ट मोड में था। रेंज के संवेदनशील इलाकों में रात्रि में सघन गश्ती की जा रही थी। इसी दौरान शुक्रवार 14 मार्च को देर शाम काले रंग की बिना नंबर की स्पलेंडर मोटरसाइकिल से सलैया से अजयगढ़ की ओर जा रहे एक संदिग्ध युवक के संबंध सूचना प्राप्त हुई। बाइक में पीछे प्लास्टिक के दो डिब्बे टांगकर ले जा रहे युवक को सलैया के नजदीक जब वनकर्मियों ने रोकने का प्रयास किया तो वह तेजी से भाग निकला।
रेंजर अमर सिंह के नेतृत्व में वनकर्मियों के द्वारा करीब 15 किलोमीटर तक पीछा करने के बाद हनुमतपुर में घेराबंदी कर आखिरकार आरोपी को दबोंच लिया। दरअसल हनुमतपुर में वनकर्मियों के मुस्तैदी से तैनात होने के चलते शातिर शिकारी भागने में सफल नहीं हो सका। पूछताछ करने पर आरोपी ने अपना नाम-पता रामू पिता राममिलन सोनकर 28 वर्ष निवासी नरैनी हाल निवास अजयगढ़ बताया। प्लास्टिक के डिब्बों को खोलने पर उनमें जंगली सूअर का लगभग 30 किलोग्राम मांस पाया गया। रेंजर अमर सिंह ने बताया कि आरोपी रामू ने सलैया बीट में शिकार की घटना को अंजाम देना स्वीकार किया है। आरोपी के विरुद्ध वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम के तहत वन अपराध पंजीबद्ध कर मामले को जांच में लिया है। आज शाम आरोपी युवक को अजयगढ़ के न्यायालय में पेश किया गया जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जिला जेल पन्ना भेजा गया है।

शिकार मामले में आया ट्विस्ट: वन्य प्राणियों के शवों को ज़मीन खा गई या निगल गया आसमान!

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कुड़रा के जंगल में नीलगाय का शव मिलने का दावा करने वाले व्यक्ति द्वारा उपलब्ध कराया गया फोटो।

*    शिकार से जुड़े वीडियो वायरल होने के बाद गायब हुए शव

*    उत्तर वन मण्डल पन्ना की धरमपुर रेंज के कुड़रा जंगल का मामला

*    डीएफओ बोले- सर्च कराने पर नहीं मिले शव, वीडियो अन्य स्थान के हो सकते हैं

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में सक्रिय सागौन तस्करों की घेराबंदी को लेकर बीते दिवस स्थानीय मीडिया में उत्तर वन मण्डल के मैदानी अमले की सजगता और जांबाजी के चर्चे जब जोरशोर से हो रहे थे उसी समय जंगल के रखवालों की कथित घोर लापरवाही की पोल खोलने वाले कुछ वीडियो वायरल थे। कथित तौर पर जंगल में करंट का तार बिछाकर बेजुबान वन्य जीवों के शिकार की घटना को अज्ञात अपराधियों द्वारा अंजाम देने के सप्ताह भर बाद भी वन अमले को इसकी भनक तक नहीं लग सकी। अत्यंत ही हैरान करने वाली इस घटना का खुलासा उस वक्त हुआ जब कुछ लोग अपनी गुमी हुई भैंस को खोजने जंगल की ख़ाक छान रहे थे। सड़ांध मार रहे नीलगाय के शव एवं एक अन्य वन्य प्राणी के कंकाल के वीडियो, फोटोग्राफ्स उत्तर वन मण्डल के अफसरों को भेजकर घटना की जानकारी दी गई। इसके चंद घण्टे बाद मामले में आए ट्विस्ट ने हर किसी को चकित कर दिया है। अपनी तस्दीक के आधार वन विभाग के अफसर ऐसी किसी भी घटना को सिरे से ख़ारिज कर रहे हैं। मगर कुछ ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब फिलहाल उनके पास नहीं है।

कई दिनों से सड़ रहे थे बेजुबानों के शव

उत्तर वन मण्डल पन्ना की धरमपुर रेन्ज अंतर्गत आने वाली कुड़रा बीट का जंगल वन अपराध की दृष्टि से अत्यंत ही संवेदनशील है। उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे इस इलाके में पूर्व में सागौन की अवैध कटाई, तेंदुए के शिकार सहित अन्य कई गंभीर मामले सामने आए हैं। बुधवार 12 मार्च 2025 को यहां वन्य प्राणियों के शिकार की एक ओर बड़ी घटना का खुलासा होने से हड़कंप मच गया। दरअसल धरमपुर निवासी एक व्यक्ति अपनी गुमशुदा भैंस की खोज में नजदीकी कुड़रा जंगल पहुंचा तो वहां का नजारा देख दंग रह गया। पहुंच मार्ग से करीब 200 मीटर दूर जंगल के अंदर से उठ रही भीषण दुर्गन्ध का सबब जानने उक्त व्यक्ति और उसके साथी मौके पर पहुंचें तो वहां कथित तौर पर नीलगाय का शव और एक अन्य वन्य जीव का क्षत-विक्षत कंकाल पड़ा था। समीप ही जमीन में कुछ दूर तक खूंटिया गड़ी थी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक घटनास्थल को देखने पर ऐसा प्रतीत हो रहा था कि अज्ञात शिकारियों द्वारा खूटियों के सहारे करंट का तार बिछाकर बेजुबान वन्य जीवों का शिकार किया गया है। शवों से उठती भीषण सड़ांध और उनमें बिलबिलाते कीड़ों के मद्देनजर वन्य जीवों की मौत सप्ताह भर पूर्व होने का अनुमान है। प्रत्यक्षदर्शियों द्वारा अपने मोबाइल फोन से घटनास्थल एवं शवों के वीडियो, फोटोग्राफ्स बनाकर मीडियाकर्मियों को भेजे गए। जिसमें मृत नीलगाय और नजदीक ही पड़ा एक अन्य वन्य प्राणी का क्षत-विक्षत कंकाल साफ़ नजर आ रहा है। एक अन्य वीडियो में जमीन पर गड़ी खूटियां भी दिख रही हैं।

5 घण्टे बाद गायब हो गए शव!

कुड़रा के जंगल में नीलगाय के शव के ही समीप एक अन्य वन्यजीव का कंकाल मिलने का भी दावा किया गया था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत उक्त वीडियो, फोटोग्राफ्स और उन्हें भेजने वाले का मोबाइल नंबर उत्तर वन मण्डल पन्ना के डीएफओ गर्वित गंगवार, एसडीओ दिनेश गौर सहित धरमपुर रेंजर वैभव सिंह चंदेल को सेंड किए गए। जिस पर वन अधिकारियों द्वारा स्टॉफ को मौके पर भेजकर घटना की तस्दीक करवाने के बाद ही आधिकारिक तौर पर टिप्पणी करने की बात कही गई। घटना की तस्दीक करने पर शिकार के कथित मामले में आए ट्विस्ट ने सबको चकित कर दिया है! संबंधित व्यक्ति को लेकर मैदानी वन अमला करीब 5 घण्टे बाद जब मौके पर पहुंचा तो वहां मृत वन्य जीव का शव और कंकाल नहीं मिला।

प्रत्यक्षदर्शी और अफसरों के अलग-अलग दावे

बता दें कि, मृत वन्यजीवों के वीडियो और प्रत्यक्षदर्शी का मोबाइल नम्बर डीएफओ व एसडीओ को दोपहर में करीब सवा ग्यारह बजे भेजकर मामले को इनके संज्ञान में लाया गया था। लेकिन पन्ना कोर्ट में पेशी के चलते धरमपुर रेंजर, संबंधित बीटगार्ड और एसडीओ शाम 4 बजे तक मौके पर नहीं पहुंचे। इस बीच प्रत्यक्षदर्शी और डिप्टी रेंजर के बीच घटनास्थल पर चलने को लेकर बात अवश्य हुई। लेकिन इस बातचीत को लेकर उक्त व्यक्ति तथा वन विभाग के अफसरों के दावे आपस में मेल नहीं खाते हैं। प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार डिप्टी रेंजर ने जब उसे कॉल करके साथ में जंगल चलकर घटनास्थल दिखाने को कहा गया तो उसके द्वारा अपनी सहमति दी गई। साथ ही यह कहा गया मैं अपने घर पर हूं आप यहीं आ जाएं, यहां से साथ चलेंगे। जबकि वन विभाग के अफसरों का कहना है कि, उक्त व्यक्ति ने शुरू में जब फोन नहीं उठाया तो उनका मैदानी अमला मौके पर पहुंचकर जंगल के चप्पे-चप्पे को सर्च करता रहा। कई घंटे तक स्टॉफ को जंगल की सघन छानबीन करने के बाद भी वहां कुछ नहीं मिला।

खबर को दबाने सक्रिय रहे बीटगार्ड

बुधवार शाम करीब 4 बजे एसडीओ फॉरेस्ट से जब मीडियाकर्मियों ने शिकार की घटना के संबंध में पूंछा तो वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। उक्त घटना को गंभीरता से न लेने के सवालों से घिरने पर उनके द्वारा प्रत्यक्षदर्शी के साथ तुरंत स्टॉफ को मौके पर भेजने और स्वयं भी घटनास्थल पर पहुंचने की बात कही गई। इस तरह सूचना देने के लगभग 5 घंटे बाद शाम 4.30 बजे डिप्टी रेंजर जब संबंधित व्यक्ति को लेकर जंगल पहुंचे तो वहां शव और कंकाल नहीं मिला। यह बात जैसे ही एसडीओ साहब को पता चली वे तो वह सुस्ती छोड़ अचानक हरकत में आ गए। एसडीओ ने तुरंत मोबाइल पर सम्बंधित व्यक्ति से बात की और उसे हड़काते हुए झूठी सूचना देने का उलाहना दिया। उक्त व्यक्ति ने भी फोन पर एसडीओ को रगड़ते हुए वन अमले पर निकम्मेपन को छुपाने के लिए वन्य प्राणियों के शवों को गायब करवाने का आरोप लगाया है।
गौर करने वाली बात यह है कि कथित तौर मैदानी वन अमला दोपहर में जब अपने स्तर पर अकेले ही जंगल सर्चिंग कर रहा था तब कुड़रा के बीटगार्ड उक्त घटना को दबाने के लिए पन्ना में मीडियाकर्मियों से संपर्क साध रहे थे। यहां सवाल उठता है कि वन अमले को पहले जब अपनी पड़ताल में और बाद में संबंधित व्यक्ति के साथ मौके पर पहुंचने पर किसी तरह की घटना के कोई साक्ष्य ही नहीं मिले तो बीटगार्ड फिर इतना परेशान क्यों थे? उनके द्वारा यह भी कहा गया कि वरिष्ठ अधिकारियों ने आप लोगों से सम्पर्क कर मीडिया मैनेजमेंट फंडा लागू करने को कहा है। फिर वही सवाल जब कुछ हुआ ही नहीं था तो वन महकमे में इतनी बैचेनी क्यों थी?

सच के खुलासे में नहीं दिलचस्पी

वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना देने के 5 घंटे बाद प्रत्यक्षदर्शी को लेकर घटनास्थल पहुंचे डिप्टी रेंजर जंगल सर्चिंग करते हुए।
यहां सवाल यह भी उत्तर वन मण्डल के अफसरों को शिकार की घटना के साक्ष्य के तौर पर जो वीडियो भेजे गए थे क्या वह फर्जी थे या फिर वाकई वन्य जीवों के शिकार की बड़ी घटना को दबाने के लिए वाकई शव गायब कर दिए गए। इस मामले लेकर गहराते रहस्य के बीच एक बात स्पष्ट है, कोई तो है जो झूठ बोल रहा है। लेकिन वह कौन है, इसका पता लगाने को लेकर वन विभाग के अफसरों की उदासीनता समझ से परे है। जिस स्थान पर वन्य जीवों के शव एवं कंकाल देखने का दावा किया गया वहां डॉग स्क्वायड से सर्चिंग कराना भी उचित नहीं समझा। आखिर सच्चाई की तह तक जाकर उसे सामने लाने को लेकर जिम्मेदारों में इतनी अरुचि क्यों है? जबकि इस मामले का खुलासा इसलिए भी जरुरी हो जाता है क्योंकि वीडियो के आधार पर कथित घटना का दावा किया गया है। मीडिया में इसकी खबर भी प्रकाशित-प्रसारित की गई है। जिसमें वन्य प्राणियों के शव और कंकाल दिखाए गए है। इसलिए वन विभाग के अफसरों का सिर्फ यह कह देना कि शव नहीं मिले तो घटना झूठी है, संतोषजनक उत्तर बिल्कुल भी नहीं है। उन वीडियो का क्या जोकि घटना घटित होने के साक्ष्य के तौर पर वायरल हैं। लोग पूँछ रहे हैं कि शवों को ज़मीन खा गई या आसमान निगल गया! अगर यह मान भी लिया जाए कि जंगली जानवरों के शिकार की घटना घटित नहीं हुई तो वन विभाग स्पष्ट करना चाहिए कि उक्त वीडियो कबके और कहां के हैं? यह कवायद इसलिए भी जरुरी है क्योंकि वन विभाग कतिपय अफसर दबी जुबान बीटगार्ड पर दवाब बनाकर उसे ब्लैकमेल करने की बात कह रहे हैं।
बताते चलें कि महीने भर पूर्व उत्तर वन मण्डल की विश्रामगंज रेंज के सीमवर्ती इलाके में एक सांभर जख्मी हालत में मिला था। सांभर के पैर के ऊपर मौजूद जख्म को लेकर यह दावा किया गया था कि अज्ञात शिकारी द्वारा गोली मारने से घायल हुआ है। वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे घायल सांभर को देखा और मैदानी वन अमला करीब 12 घण्टे तक उसकी निगरानी करता रहा। लेकिन आधिकारिक तौर पर इस बात का पता नहीं चल सका कि सांभर घायल कैसे हुआ। अगले दिन सुबह सांभर के लंगड़ाते हुए जंगल की तरफ भाग निकलने के बाद वन महकमे ने राहत की सांस लेते हुए अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली थी। कुछ ऐसा ही कुड़रा के मामले में भी हो रहा है।
नोट: (सुरक्षा कारणों की वजह से प्रत्यक्षदर्शी का नाम गुप्त रखा गया है)

इनका कहना है-

“हमारे स्टॉफ द्वारा अपने स्तर पर छानबीन की गई बाद में घटना के प्रत्यक्षदर्शी व्यक्ति को लेकर भी डिप्टी रेंजर मौके पर गए लेकिन वहां न तो वन्य जीवों के शव मिले और ना ही शिकार की घटना का कोई साक्ष्य मिला। इसलिए डॉग स्क्वायड से सर्च कराने की आवश्यकता नहीं है। पन्ना में वैसे भी एक ही डॉग है टाइगर रिजर्व में, वह भी बीमार है। फिलहाल पुलिस डॉग ही उपलब्ध है। वन्य जीवों के वीडियो पुराने और किसी अन्य स्थान के हो सकते हैं।”

गर्वित गंगवार, वन मण्डलाधिकारी, उत्तर वन मण्डल, पन्ना।

जनता को भिखारी बोलकर बुरे फंसे मंत्री प्रहलाद पटेल, कांग्रेस ने की मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की मांग

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पन्ना में तहसीलदार को मंत्री प्रहलाद पटेल के खिलाफ ज्ञापन सौंपते हुए कांग्रेस नेतागण।

*   सेवादल ने मंत्री के खिलाफ प्रदर्शन कर राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन

*   ‘वोट लेने के समय जनता भगवान, वोट लेने के बाद जनता भिखारी’

पन्ना। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश की जनता को भिखारी कहने वाले पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल विपक्ष के निशाने पर हैं। उनके आपत्तिजनक बयान पर जारी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। कांग्रेस सड़कों पर उतरकर मंत्री के खिलाफ प्रदेश भर में धरना-प्रदर्शन कर रही है। पन्ना में सेवादल ने मंत्री पटेल के बयान की कड़ी निंदा करते हुए इसे प्रदेश की 7 करोड़ जनता का अपमान बताया है। कांग्रेस सेवादल ने राज्यपाल के नाम पर तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर मंत्री पटेल से प्रदेश की जनता से सार्वजानिक रूप से माफ़ी मंगवाने साथ ही उन्हें तत्काल प्रभाव से मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की मांग की है।
मंत्री प्रहलाद पटेल के आपत्तिजनक बयान के बाद उनके खिलाफ विरोध तेज होता जा रहा है। इसी कड़ी में पन्ना में बीते दिवस कांग्रेस के सेवादल प्रकोष्ठ ने मंत्री पटेल के खिलाफ प्रदर्शन कर भारतीय जनता पार्टी को घेरा है। कांग्रेस सेवादल प्रकोष्ठ पन्ना के जिला अध्यक्ष रामबहादुर द्विवेदी भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि मंत्री पटेल का घोर निंदनीय बयान प्रदेश की जनता के प्रति सत्ताधारी दल की घटिया सोच को उजागर करता है। साथ ही इससे भाजपाईयों के दोहरे चरित्र को भलीभांति समझा जा सकता है। चुनाव के समय वोट लेने के लिए ये लोग जनता को भगवान कहते हैं और चुनाव के बाद वही जनता इनके लिए भिखारी हो जाती है। सत्ता के अहंकार में पटेल शायद यह भूल गए हैं कि उन्हें मंत्री के रूप में प्रतिमाह प्राप्त होने वाले वेतन-भत्ते जनता के द्वारा दिए जाने वाले टैक्स से ही मिलते हैं। गरीब जनता को सरकार द्वारा कई तरह की सुविधाएँ देने के एवज में भीख मांगने जैसे अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करते हुए मंत्री ने जनता के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाई है। कांग्रेस सेवादल ने महामहिम राज्यपाल से मंत्री प्रहलाद पटेल से जनता से सार्वजानिक रूप से माफ़ी मंगवाने के साथ ही उन्हें तत्काल प्रभाव से मंत्रिमंडल बर्ख़ास्त करने की मांग की है।

जुमला साबित हो रहे भाजपा के चुनावी वादे

मंत्री प्रहलाद पटेल के आपत्तिजनक बयान के विरोधस्वरूप पन्ना में नारेबाजी करते हुए कांग्रेस नेतागण।
विधानसभा चुनाव के समय भाजपा द्वारा अन्नदाता किसानों समेत महिलाओं, युवाओं से किए गए वादों पर अमल न होने से लोग ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। वोट लेने के लिए भाजपा ने बड़े-बड़े वायदे करते हुए अन्नदाता किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य दिलवाने के लिए गेहूं 2700/-रु ,धान 3100/-रु एवं सोयाबीन 6000/-रु. प्रति क्विंटल खरीदने का ऐलान किया था। लेकिन आज तक चुनावी घोषणाओं पर अमल न करने से जनता जुमलेबाजों की सच्चाई समझ चुकी है। कांग्रेस सेवादल प्रकोष्ठ ने प्रदेश की सरकार को कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर भी पूरी तरह से विफल बताया है। कांग्रेसियों ने आरोप लगाया कि प्रदेश में महिलाओं-बालिकाओं, कमजोर वर्गों एवं मुस्लिमों के खिलाफ हिंसा और नफरत के मामले चिंताजनक तेजी से लगातार बढ़ रहे हैं। ज्ञापन सौंपने वालों में मुख्य रूप से पन्ना जिला कांग्रेस अध्यक्ष शिवजीत सिंह, कांग्रेस सेवादल जिलाध्यक्ष रामबहादुर द्विवेदी, शशिकांत दीक्षित, देवेन्द्र सिंह यादव, स्वतंत्र प्रभाकर अवस्थी, मार्तण्ड देव बुंदेला, कदीर खान, अक्षय तिवारी ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष पन्ना, रेहान मोहम्मद, जमाल, अल्ताफ, सरदार सिंह यादव, वैभव थापक सहित अन्य कांग्रेसजन शामिल थे।

गुनौर के अवैध कॉलोनाइजरों को कलेक्टर ने थमाए नोटिस, 17 मार्च को पेशी पर उपस्थित होने के निर्देश

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फाइल फोटो।

* पन्ना, अजयगढ़, देवेन्द्रनगर में अवैध प्लाटिंग से करोड़ों रुपए छापने वालों पर कब होगी एफआईआर?

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिला मुख्यालय सहित आंचलिक नगरीय क्षेत्रों में पिछले कई सालों से स्थानीय निकायों एवं राजस्व विभाग की सांठगांठ से अवैध कॉलोनियां बसाने का गोरखधंधा बहुत बड़े पैमाने पर चल रहा है। अवैध कॉलोनियों के निर्माण को रोकने के लिए कठोर कानून होने के बाद भी जिम्मेदारों के द्वारा उन पर अमल न करने से जिले अवैध कालोनियों का वार्षिक कारोबार एक लगभग एक अरब के आसपास पहुँच चुका है। नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ाते हुए अवैध प्लाटिंग करके नोट छापने वालों में जनप्रतिनिधि, नेतागण, तथाकथित पत्रकार, भू-माफिया व्यवसायी समेत कतिपय नव धनाढ्य शामिल हैं। हैरानी की बात है कि सिर्फ पन्ना जिला मुख्यालय में ही तकरीबन दो दर्जन से अधिक स्थानों पर तेजी से आकार ले रहीं अवैध कालोनियों में धड़ल्ले से प्लाट बिक्री की जा रही है। पन्ना में बैठे राजस्व समेत अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी निहित स्वार्थपूर्ति के चक्कर में अवैध कॉलोनाइजरों की करतूतों की जानबूझकर अनदेखी कर रहे हैं।
बता दें कि कुछ समय पूर्व भारतीय जनता पार्टी के जिला उपाध्यक्ष अंकुर त्रिवेदी के द्वारा पन्ना एसडीएम से एक अवैध प्लाटिंग की लिखित शिकायत की गई थी। पन्ना में सफेदपोश भू-माफिया अवैध कालोनियां बसाकर करोड़ों रुपए बटोरने के साथ कुछ स्थानों पर सरकारी भूमियों को भी बेंच रहे हैं। पन्ना कलेक्टर सुरेश कुमार ने काफी देर से ही सही पर अवैध कॉलोनाइजरों के खिलाफ कार्रवाई की सुध ली है। हालांकि उनकी कार्रवाई का दायरा फिलहाल गुनौर नगर परिषद क्षेत्र तक ही शामिल है। अब यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि पन्ना कलेक्टर पन्ना, अजयगढ़, देवेन्द्रनगर, सिमरिया, अमानगंज, पवई सहित अन्य स्थानों पर अवैध कॉलोनियां काटकर उनमें करके शासन को राजस्व की बड़ी क्षति पहुँचाने वालों के खिलाफ नियमानुसार एफआईआर दर्ज करवाने की कार्यवाही करते हैं या फिर अवैध कालोनाइजरों पर अपनी सख्ती को वे गुनौर तक ही सीमित रखते हैं।

अवैध प्लाटिंग कर इन नियम-कानूनों का किया उल्लंघन

प्राप्त जानकारी अनुसार कलेक्टर सुरेश कुमार ने नगर परिषद क्षेत्र गुनौर अंतर्गत अवैध कॉलोनी निर्माण पर संबंधितजनों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। जिला कलेक्टर द्वारा अनुविभागीय अधिकारी राजस्व गुनौर के प्रतिवेदन पर ग्राम गुनौर के विभिन्न सर्वे नंबर एवं रकबा की भूमि पर कॉलोनी निर्माण के दौरान म.प्र. नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 339 की विभिन्न धाराओं तथा म.प्र. नगर पालिका कॉलोनी विकास नियम 2021 के प्रावधानों का उल्लंघन पाए जाने पर नोटिस जारी करने की कार्यवाही की गई है। एसडीएम द्वारा प्रेषित प्रतिवेदन में उल्लेख है कि संबंधित द्वारा कॉलोनी निर्माण का रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र एवं कॉलोनी विकास की अनुज्ञा प्राप्त किए बगैर कार्य कराया जा रहा है। इसके अतिरिक्त नगर तथा ग्राम निवेश विभाग से ले-आउट स्वीकृति एवं अनापत्ति प्रमाण पत्र भी प्राप्त नहीं किया गया है। किसी भी प्रकार का आंतरिक विकास किए बगैर तथा बिना रेरा पंजीयन के छोटे-छोटे भूखण्ड विक्रय कर अवैैध कॉलोनी का निर्माण किया जा रहा है।

पेशी में प्रस्तुत करना होगा नोटिस का जवाब

इस संबंध में उपरोक्त कॉलोनी को अनाधिकृत कॉलोनी घोषित करने, उपरोक्त भूमि तथा संबंधित के स्वामित्व की किसी अन्य भूमि को प्रश्नाधीन कॉलोनी में नागरिक अधोसंरचना के विकास कार्य पूर्ण करने के लिए अटैच करने एवं अनाधिकृत कॉलोनी निर्माण का अपराध कारित करने के कारण कारावास व जुर्माना के लिए सक्षम न्यायालय में प्रकरण दर्ज कराने के संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। साथ ही आगामी 17 मार्च को दोपहर 2 बजे कारण बताओ सूचना पत्र का बिन्दुवार प्रत्युत्तर स्वयं अथवा अभिभाषक के माध्यम से अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं अन्यथा एकपक्षीय कार्यवाही कर प्रकरण में प्रस्ताव अनुसार आगामी वैधानिक कार्यवाही की जाएगी। कोई भी व्यक्ति कॉलोनी को अनाधिकृत कॉलोनी घोषित करने के संबंध में कोई आपत्ति होने पर निर्धारित तिथि के पूर्व न्यायालय में प्रस्तुत कर सकता है।

इन्हें थमाए नोटिस

जिला कलेक्टर द्वारा इन्द्रपुरी कॉलोनी पन्ना निवासी रोहित तिवारी, ग्राम एवं तहसील गुनौर निवासी शकुंतला त्रिपाठी, बिन्द्रावन, अर्चना तिवारी, किशोरी लाल, दयाराम, सुनील कुमार, अनबर बक्श, सुरेन्द्र कुमार, नत्थू सिंह, जीवन लाल, मुलायम देवी, कौशिल्या, रामकिशुन, प्रियंका खरे, फूलबाई गर्ग, शशिकांत, अवधेश प्रताप सिंह, माया बाई पटेल, कौशिल्या बाई, सीताराम, संगीता, लक्ष्मी, राजकुमार एवं गंगा प्रसाद, ग्राम सिली तहसील गुनौर निवासी कमलाकांत, भागीरथ, अंकित सोनी, रामप्रताप पटेल, ग्राम एवं तहसील अमानगंज निवासी बल्देव सेन, ग्राम गभौरा तहसील गुनौर निवासी रामप्रताप पटेल एवं ग्राम सिमरी तहसील गुनौर निवासी निर्मला सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।