* न्यायालय का फैसला आने के बाद कराया विनष्टीकरण
* जेसीबी से गड्ढा खुदवाकर मिट्टी में मिलाया नकली घी
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग पन्ना ने सोमवार को 829 किलो नकली घी (अमानक घी) को सुरक्षित तरीके से नष्ट कर दिया। गड्ढे में दफ़न किए गए नकली घी का बाजार मूल्य लगभग 8 लाख रुपए बताया जा रहा है। विभाग की लैब जांच में घी के सैंपल फेल होने पर इस मामले में न्यायालय अपर कलेक्टर ने कुछ समय पूर्व फैसला सुनाते हुए घी विक्रेता इंद्रजीत गुप्ता पर 1 लाख 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया था। सालभर से प्लास्टिक के डिब्बों में रखे जब्तशुदा नकली घी के विनष्टीकरण की कार्रवाई को इंसानों एवं पशुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए की गई है।
पन्ना में पकड़ी थी नकली घी की फैक्ट्री

प्राप्त जानकारी अनुसार, 30 जून 2024 को थाना प्रभारी कोतवाली पन्ना रोहित मिश्रा को सूचना प्राप्त हुई थी कि इंद्रपुरी कॉलोनी में नकली घी बनाने की फैक्ट्री चल रही है। थाना प्रभारी द्वारा खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजेश राय को जानकारी देकर संयुक्त रूप से छापामार कार्रवाई की गई थी। जहां 15-15 लीटर के 56 डिब्बों में संदिग्ध घी मिलने पर कारखाना (फैक्ट्री) सील करके सैंपल जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए थे। जांच में सैंपल फेल हो जाने पर प्रकरण अपर कलेक्टर के न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। जिस पर अपर कलेक्टर नीलाम्बर मिश्र ने नकली घी विक्रेता इंद्रजीत गुप्ता पर 1 लाख 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाकर नकली घी को सुरक्षित तरीके से नष्ट करने का आदेश पारित किया था।
गड्ढे में घी डालकर मिट्टी का पुराव कराया

अपर कलेक्टर के आदेश के परिपालन में सोमवार 28 जुलाई 2025 को नकली घी से भरे डिब्बों को नगर पालिका के कचरा संग्रहण वाहन से परिवहन कर शहर के बाहरी क्षेत्र में ले जाया गया। जहां डॉ. डीपी प्रजापति एवं खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजेश कुमार राय की उपस्थिति में नकली घी के विनष्टीकरण की कार्रवाई की गई। मौके पर जेसीबी मशीन से गहरा गड्ढा खुदवाकर उसमें नकली घी डाला गया और फिर ऊपर से मिट्टी का पुराव कर दिया।
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बरियारपुर कुर्मियान पहुंच मार्ग की पुलिया एवं सड़क का कुछ हिस्सा शुक्रवार की सुबह जब अचानक पानी में बहा तब वहां बारिश हो रही थी। सड़क के क्षतिग्रस्त होने के 4 दिन पूर्व से उक्त इलाके सहित समूचे पन्ना जिले में रुक-रूककर लगातार भारी बारिश होने के कारण हर तरफ पानी-पानी हो चुका था। केन की सहायक नदियों-नालों के उफान पर होने से पानी की निकासी पर्याप्त मात्रा में संभव नहीं हो पा रही थी। इन परिस्थितियों में बरियारपुर कुर्मियान पहुंच मार्ग पर बने स्लैब कल्वर्ट (पुलिया) के आसपास भरे पानी का दवाब अत्याधिक बढ़ने के कारण सड़क एवं पुलिया को जोड़ने वाले हिस्से एप्रोच स्लैब के नीचे की मिट्टी का कटाव हो गया। जिससे सड़क और पुलिया का खोखला हो चुका हिस्सा पानी में बह गया।









