* भारतीय किसान यूनियन के आव्हान पर पन्ना की महारैली में जुटे सैंकड़ों किसान
* किसान विरोधी काले कानूनों की वापसी तक संघर्ष जारी रखने का किया ऐलान
* अधर्म और नफरत की अफीम पिलाकर देश को लूट रही है मोदी सरकार- जगदीश
* आक्रोशित किसान ट्रेक्टर महारैली ने रचा इतिहास, पहली बार देखे इतने ट्रेक्टर
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस के एक दिन पूर्व मध्यप्रदेश के बुन्देलखण्ड अंचल के पन्ना जिले की सड़कों पर अनूठा नजारा देखने को मिला। सोमवार 25 जनवरी को पन्ना में ऐतिहासिक ट्रेक्टर परेड निकाली गई। भारतीय किसान यूनियन (अरा.) के तत्वाधान में जिला मुख्यालय में निकली विशाल ट्रेक्टर परेड को “आक्रोशित किसान ट्रेक्टर महारैली” का नाम दिया गया। कड़ाके की सर्दी के बावजूद महारैली में सैकड़ों की संख्या में किसानों ने अपने ट्रेक्टरों के साथ शामिल होकर इतिहास रच दिया।

इस दौरान सभी ने किसान विरोधी-जन विरोधी काले कानूनों की वापसी तक संघर्ष जारी रखने ऐलान किया। कृषि कानूनों के विरोध में पिछले दो माह से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे किसानों के प्रति केन्द्र की मोदी सरकार के रवैये की तीखी आलोचना करते हुए उसे अहंकारी और तानाशाह सरकार करार दिया।
पन्ना जिले में आज पहली बार विशुद्ध रूप से किसानों का इतना व्यापक और विशाल गैर राजनैतिक प्रदर्शन देखने को मिला। जिसकी चर्चा गली-कूचों, चौक-चौराहों, सोशल मीडिया से लेकर हर तरफ हो रही है। मध्यप्रदेश के किसानों को विवादित कृषि कानूनों एवं मोदी के समर्थन में खड़ा करने का भ्रामक प्रचार वालों को पन्ना के किसानों ने ट्रेक्टर महारैली के जरिए आईना दिखाने का काम किया है। वहीं इसे आक्रोशित किसानों के शक्ति प्रदर्शन के तौर पर भी देखा जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि, पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार पन्ना के पॉलिटेक्निक कॉलिज ग्राउण्ड से निकाली गई आक्रोशित किसान ट्रेक्टर महारैली में जिले के सैंकड़ों किसान अपने ट्रेक्टरों के साथ शामिल हुए। गलन भरी सर्दी के बावजूद रैली में सम्मलित हुए किसानों का हौसला और जज्बा देखते ही बनता था। पॉलिटेक्निक कॉलिज का विशाल ग्राउण्ड दोपहर 3 बजे तक ट्रेक्टरों व किसानों से पूरी तरह भर चुका था। इस अवसर पर एक आमसभा आयोजित हुई जिसे भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष जगदीश सिंह ने सम्बोधित किया।
देश को लूटने में मोदी ने अंग्रेजों को भी पीछे छोड़ा

भारतीय किसान यूनियन की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष एवं वयोवृद्ध किसान नेता जगदीश सिंह ने पन्ना में आक्रोशित किसान ट्रेक्टर महारैली को सम्बोधित करते हुए केन्द्र की मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश का किसान काले कानूनों के खिलाफ उठ खड़ा हुआ है। केन्द्र की हठधर्मी-अहंकारी सरकार अब चाहे जितने भी हथकंडे अपना ले, चाहे जितना भी अत्याचार कर ले पर एक बात साफ़ है कि काले कानूनों की वापसी और फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारण्टी से कम हमें कुछ भी मंजूर नहीं है। खुद को किसान हितैषी बताने वाली यह सरकार असल में कार्पोरेट घरानों की कठपुतली है। यह बात पूरा देश भलीभांति समझ चुका है।
श्री सिंह ने कहा कि, पिछले दो माह से दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन कर रहे लाखों किसान भाईयों को इस सरकार ने बदनाम करने से लेकर उनके आंदोलन को कुचलने के लिए जितना अत्याचार किया है, उसे पूरी दुनिया ने देखा है। यह लोकतांत्रिक सरकार नहीं बल्कि तानशाह सरकार है। उन्होंने मोदी सरकार को घोर सांप्रदायिक और विभाजनकारी एजेण्डे चलने वाली सरकार बताते हुए कहा कि धर्म के नाम अधर्म व नफ़रत फैलाकर यह सरकार सत्ता में आई है।

किसान नेता जगदीश सिंह ने लोगों को आगाह किया कि साम्प्रदायिक एजेण्डे के जाल में अब न फंसना वरना हमारा प्यारा देश बर्बाद हो जाएगा। वैसे भी इस सरकार ने अपने 7 साल के कार्यकाल में देश को लूटने के मामले में अंग्रेजों को भी पीछे छोड़ दिया है। काली चमड़ी वाले इन अंग्रेजों से हमें सतर्क रहना होगा।
कॉन्ट्रेक्ट खेती से गुलाम बन जाएंगे किसान

किसान नेता जगदीश सिंह ने कहा कि कृषि सुधार के नाम पर किसानों को कॉर्पोरेट क्क गुलाम बनाने वाले कानून केन्द्र की भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने कोरोना संकटकाल में संसद में पारित कराए हैं। इन काले कानूनों के लागू होने से अन्नदाता किसानों की जमीनों पर बड़े उद्योगपतियों-पूजीपतियों का कब्जा हो जाएगा। कॉन्ट्रेक्ट खेती में शर्तों का उल्लंघन होने की सूरत में किसानों को न्याय मिलना संभव नहीं होगा। उन्होंने बताया, मैनें कई देशों का भ्रमण कर यह अनुभव किया है, कॉन्ट्रेक्ट खेती घाटे का सौदा है।

इसी तरह यह सरकार बिजली से सब्सिडी ख़त्म करना चाहती है। अगर ऐसा हुआ तो किसानों के 3 हार्स पावर एवं 5 हार्स पावर पम्प का बिजली बिल दोगुना से भी अधिक आएगा। भारतीय किसान यूनियन की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष जगदीश सिंह ने बताया कि पराली (प्याँर) जलाने संबंधी कानून में सरकार ने किसानों के लिए 5 साल की सजा का प्रावधान किया है। जबकि उद्योगपतियों के कल-कारखानों की जो चिमनियां रात-दिन जहरीला धुंआं उगल रहीं उसकी चिंता किसी को नहीं है।
आपने फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य देने के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी के दोहरे रवैये को उजागर करते हुए बताया कि वे जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को इस मुद्दे पर पत्र लिखकर किसानों को फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य देने की मांग करते थे लेकिन आज मोदी जब स्वयं प्रधानमंत्री हैं तो वे अपनी ही माँग से मुँह चुरा रहे हैं।
किसान ट्रेक्टर परेड- “ऐसा नजारा पहले नहीं देखा”
पन्ना के पॉलिटेक्नि ग्राउण्ड से किसान जब ट्रेक्टरों में सवार होकर ज्ञापन सौंपने के लिए इन्द्रपुरी कॉलोनी स्थित नवीन कलेक्ट्रेट भवन के लिए कतारबद्ध अनुशासित तरीके से निकले तो लोग ट्रेक्टरों के इस सैलाब को अपलक बस देखते ही रह गए। नारेबाज़ी करते हुए चल रहे किसानों की ट्रेक्टर परेड 2 किलोमीटर से अधिक लम्बी रही जिसमें लगभग 400 ट्रेक्टर शामिल हुए। पुराना पावर हाऊस से गाँधी चौक एवं कचेहरी चौराहा होते विशाल किसान ट्रेक्टर परेड जब निकली तो घरों के बाहर और छतों पर चढ़कर लोग इसे निहारते रहे।
इस दौरान लोगों की सिर्फ एक ही तरह की प्रतिक्रिया सामने आई कि उन्होंने पहले कभी ऐसा नजारा नहीं देखा। यह वाकई अभूतपूर्व और ऐतिहासिक था। पहली बार किसी प्रदर्शन में सैंकड़ों ट्रेक्टरों को एक साथ देख लोग हैरान रह गए। महारैली में शामिल ट्रेक्टर किसान यूनियन का एवं राष्ट्रीय ध्वज लगाकर चल रहे थे।
कलेक्टर के न आने से नाराज हुए किसान

किसान ट्रेक्टर परेड के आयोजन के मद्देनजर शहर में सुरक्षा व्यवस्था के सख्त इंतजाम रहे। किसानों के इस विशाल प्रदर्शन को लेकर प्रशासन की घबराहट कलेक्ट्रेट के मेन गेट की बैरिकेटिंग कर उसे बंद करने एवं बड़ी संख्या में पुलिस बल को तैनात करने के रूप में देखने को मिली। सुरक्षा कारणों का हवाला देकर किसानों के ट्रेक्टरों को नगर सेना के मैदान में ही रोक दिया गया। जहाँ किसानों का ज्ञापन लेने के लिए पन्ना एसडीएम शेर सिंह मीना(आईएएस) भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मौजूद रहे। लेकिन पन्ना कलेक्टर संजय कुमार मिश्र के द्वारा मौक पर आकर स्वयं ज्ञापन न लेने से नाराज किसान नारेबाजी करने लगे।
हालाँकि बाद में उन्होंने प्रधानमंत्री को संबोधित अपना ज्ञापन एसडीएम श्री मीना को सौंप दिया। ज्ञापन के माध्यम से किसान विरोधी-जन विरोधी काले कानूनों को तत्काल वापस लेने व फसलों की खरीदी के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था को कानूनी रूप देने की पुरजोर माँग की। ज्ञापन सौंपने के बाद महारैली शांतिपूर्वक संपन्न हो गई।
महारैली में ये रहे शामिल
आक्रोशित किसान ट्रेक्टर महारैली भारतीय किसान यूनियन के संभागीय अध्यक्ष सेवालाल पटेल व भारतीय किसान यूनियन के पन्ना जिलाध्यक्ष बसंतलाल पटेल के संयोजन में सफलतापूर्वक आयोजित हुई। जिसमें गुनौर विधायक शिवदयाल बागरी, शिवजीत सिंह, देशपाल पटेल, अनीस खान, किसान नेता जयराम यादव, नंदकिशोर पटेल, आनंद शुक्ला, संजय अहिरवार, केशरी अहिरवार, दीपक तिवारी, रामबहादुर द्विवेदी, खुशीराम प्रजापति, आनंद पटेल, हाजी अब्दुल हमीद, संतोष सिंह यादव, नत्थू सिंह यादव, विनय चनपुरिया, रियासत खान, डॉ. कदीर खान, अनीस पिंटू सिद्दीकी, कृष्णपाल पटेल, कमलेश पटेल बाबाजी, विनोद कुशवाहा, बद्री पटेल, सुशील चनपुरिया, जीतेन्द्र जाटव, संतोष लोधी, मनीष यादव सहित सैंकड़ों लोग उपस्थित रहे।






उल्लेखनीय है कि पन्ना के समीपी ग्राम रानीपुर-सरकोहा क्षेत्र में लम्बे समय से ताबड़तोड़ तरीके से वन, राजस्व एवं निजी भूमि पर हीरों की वैध-अवैध खदानें चल रही हैं। संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी निहित स्वार्थ पूर्ती के चलते इसे घोषित-अघोषित तौर पर इन्हें संरक्षण दे रहे थे। बीते दिनों प्रदेश के मुख्यमंत्री के द्वारा माफियाओं-गुण्डों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सख्त निर्देश देने के बाद पन्ना जिला प्रशासन ने सॉफ्ट टारगेट से कार्रवाई की शुरुआत करते हुए रानीपुर की कथित तौर अवैध हीरा खदानों पर छापा मारा।




ढावा संचालक पिंटू सेन (बंगाली) जरुआपुर ने बताया कि उसे सिर्फ फ्रिज और नाममात्र का समान ही निकालने दिया। इसके बाद बगैर किसी नोटिस के तुरंत ढाबे पर बुल्डोजर चलवा दिया। ढावे को ध्वस्त किए जाने से उसके अंदर रखा अघिकांश समान भी मलबे में तब्दील हो गया। इस कार्रवाई के चलते मौके पर स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा रही। पिन्टू के ढावे को गिराने के दौरान पुलिस को वहाँ से अवैध शराब बरामद हुई है। हालाँकि समाचार लिखे जाने तक शराब की मात्रा पता नहीं चल सकी। ढावों को नेस्तनाबूद किए जाने से व्यथित संचालकों ने बताया कि उन्हें 5-5 लाख से अधिक का नुकसान हुआ है।
छतरपुर-पन्ना मार्ग किनारे स्थित पिन्टू के ढाबे को तोड़ने की कार्रवाई के दौरान भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष सतानंद गौतम मौके पर पहुंचे। उनके द्वारा गरीबों पर कार्रवाई किए जाने का खुलकर विरोध किया गया। श्री गौतम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व गृह मंत्री अमित शाह गरीबों के कल्याण के लिए उन्हें आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दे रहे हैं और आप लोग उनकी मंशा के विपरीत गरीबों पर स्ट्राइक कर रहे हैं। अगर अतिक्रमण हटाना ही है तो माफियाओं के खिलाफ अभियान चलाओ जोकि बेशकीमती जमीनों पर कब्ज़ा करके बैठे हैं और प्लाट बेंच रहे है। किसी तरह अपना जीविकोपार्जन करने वाले गरीबों पर कार्रवाई करके आप लोग क्या साबित करना चाहते हैं।






इस स्थिति में ग्राम के जागरूक लोगों ने राष्ट्रीय खाद्य आपूर्ति विभाग मजदूर संघ जिलाध्यक्ष पन्ना केपी सिंह बुन्देला के नेतृत्व में ग्राम पंचायत बख़्तरी का घेराव कर दिया। श्री बुन्देला ग्राम बख़्तरी के ही निवासी हैं साथ ही वे और उनका परिवार भी गंदे पानी की निकासी की समस्या से काफी समय से परेशान रहा है।


विधायक बागरी ने कोंग्रेस जनों से कहा कि टिकिट के लिए दावेदारी करना पार्टी के प्रत्येक कार्यकर्ता का अधिकार है लेकिन दावेदारों के बीच से टिकिट किसी एक सुयोग्य व्यक्ति को ही मिलता है। इसलिए टिकिट जिसे भी मिले हम सबको एकजुटता के साथ नगर परिषद अध्यक्ष एवं अधिक से अधिक वार्ड पार्षद प्रत्याशियों को जिताकर आगामी चुनाव को हमेशा के लिए इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज कराना है। विधायक शिवदयाल बागरी एवं पर्यवेक्षक मनीष शर्मा ने अपने उद्बोधन में स्पष्ट किया कि टिकट वितरण में उन्हीं लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी जोकि पार्टी में पूरी निष्ठा एवं ईमानदारी के साथ समर्पित रहकर निरंतर कार्य कर रहे हैं।
रायशुमारी की बैठक में महामंत्री जिला कोंग्रेस दीपचन्द्र अग्रवाल, हीरा सिंह डिघौरा, बिहारी तिवारी पूर्व सरपंच सिली, जिला मीडिया प्रभारी जुबेर खान, ब्लाक कोंग्रेस कमेटी गुनौर के अध्यक्ष जयनरेश द्विवेदी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इसके पश्चात गुनौर विधायक एवं पर्यवेक्षक ने टिकिट के दावेदारों से बारी-बारी से मुलाक़ात कर उनके बायोडाटा प्राप्त किए। साथ ही टिकिट की मांग को लेकर उनके आधार एवं चुनावी जीत के दावों की टोह ली। इस बैठक में बड़ी संख्या में गुनौर एवं क्षेत्र के कोंग्रेस जन उपस्थित रहे।