* परिवार के साथ दो दिन की निजी यात्रा पर रविवार को पन्ना पहुंचे थे मुख्यमंत्री
* केन-बेतवा लिंक को लेकर नाराजगी के बीच पन्ना टाइगर रिजर्व का किया भ्रमण
शादिक खान। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने होली के दिन सोमवार 29 मार्च को पन्ना में बरगद का पौधा लगाया। मुख्यमंत्री ने पौधारोपण के अपने संकल्प के क्रम में पन्ना के नजदीक स्थित ताज़ ग्रुप की पाषाण गृह सफारी परिसर में सुबह बरगद का पौधा रोपित किया। शिवराज ने अपने ट्विटर हैंडल से पौधरोपण की तस्वीरें पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। साथ ही सभी को होली की शुभकामनाएं भी दी है। उन्होंने लिखा-“आज पन्ना में परिवार के साथ हूं, आप सबको होली की हार्दिक शुभकामनाएं! मैंने अपने संकल्प के क्रम में आज बरगद का पौधा लगाया। आपसे भी आग्रह कि इस शुभ अवसर पर पौधरोपण कीजिये। धरती की हरियाली हम सबको और आने वाली पीढ़ियों के जीवन को खुशहाल, स्वस्थ और समृद्ध बनायेगी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पौधरोपण के बाद मुख्यमंत्री ने अपने परिवार के साथ पन्ना टाइगर रिजर्व का भ्रमण किया। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने परिवार सहित रविवार 28 मार्च की शाम हेलीकॉप्टर से पन्ना के पर्यटक ग्राम मड़ला में उतरे थे। और फिर वहाँ से सड़क मार्ग से कार के द्वारा पन्ना के नजदीक स्थित पाषाण गृह सफारी पहुंचे थे।
टाइगर रिजर्व का करेंगे भ्रमण
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की यह निजी यात्रा बताई जा रही है। दो दिन की अपनी इस यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री का आज परिवार के साथ पन्ना टाइगर रिजर्व के भ्रमण का कार्यक्रम रहा। यह महज संयोग ही है कि, मुख्यमंत्री का पार्क भ्रमण ऐसे समय पर हुआ जब केन-बेतवा लिंक परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए सप्ताह भर पूर्व हुए एमओए को लेकर पन्ना के लोगों में गहरी नाराजगी व्याप्त है। सर्विदित है, केन-बेतवा लिंक परियोजना के निर्माण से पन्ना टाइगर रिजर्व का बड़ा क्षेत्र हमेशा के लिए पानी में डूब जायेगा। पर्यावरण के लिहाज से अत्यंत ही नुकसानदेह बताई जा रही इस नदी जोड़ो परियोजना के कारण बाघों के प्राकृतिक रहवास का इलाका काफी सिकुड़ जाएगा। करीब दर्जन भर गांवों के सैंकड़ों लोगों को विस्थापित होना पड़ेगा। साथ ही लाखों पेड़ इस परियोजना की बलि चढ़ जाएंगे। इतनी सब कुर्बानी देने के बाद केन-बेतवा लिंक परियोजना से पन्ना को आखिर हांसिल क्या होगा ? अपने हितों से जुड़े इस बाजिव सवाल का जबाव न मिलने से पन्ना के लोग बैचेन और नाराज़ हैं।
घर पर परिवार के साथ मनाएं होली
प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने एक अन्य ट्वीट में लोगों को होली की शुभकामनाएं दी। साथ ही कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने में अपना योगदान देने के लिए सभी से घर पर परिवार के साथ होली का त्यौहार मानाने की अपील की है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा- “रंगों का यह पर्व आपके जीवन को उल्लास, उत्साह, आनंद के नये रंगों से भर दे। सुख, समृद्धि, खुशहाली का नव सृजन हो; आप हर क्षण प्रसन्न रहें, यही कामना!“ साथ ही यह आग्रह भी कि होली का यह पर्व आप अपने घर पर परिवार के साथ मनायें और #COVID19 के संक्रमण को रोकने में योगदान दें।
2




पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक उत्तम कुमार शर्मा ने जानकारी देते बताया कि पन्ना में बाघों को पुनः बसाने की योजना अंतर्गत वर्ष 2014 में बाघिन टी-6 को प्रदेश के पेंच टाइगर रिजर्व से पन्ना लाया गया था। तब इसकी आयु लगभग 3 वर्ष थी। महज 7 वर्ष की अवधि में 6वीं बार माँ बनीं बाघिन टी-6 ने पन्ना को अब तक कुल 17 बाघ शावक दिए हैं। बाघों की वंशवृद्धि इसका विशेष योगदान रहा है। श्री शर्मा ने बताया कि बाघिन टी-6 और उसके शावक पूरी तरह से स्वस्थ हैं। एक सवाल के जबाव में क्षेत्र संचालक ने कहा कि पन्ना टाइगर रिजर्व में वर्तमान बाघ शावकों की संख्या 20-25 है एवं सभी आयु वर्ग के बाघों की कुल संख्या 70 से ऊपर जा चुकी है। उल्लेखनीय है कि, वर्तमान में बाघों की फेज-4 की गणना जारी है। कुछ समय बाद इसके नतीजे आने पर बाघों की वास्तविक संख्या का पता चल जाएगा।



उल्लेखनीय बड़े पैमाने पर रेत के अवैध खनन के लिए बदनाम जिले का अजयगढ़ विकासखंड पन्ना विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जोकि मध्य प्रदेश के खनिज एवं श्रम विभाग के मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह का निर्वाचन क्षेत्र है। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष एवं खजुराहो सांसद विष्णु दत्त शर्मा के संसदीय क्षेत्र में भी अजयगढ़ का इलाका शामिल है। सत्ता में प्रभावी दखल रखने वाले इन कद्दावर एवं राजनैतिक रूप सक्षम जनप्रतिनिधियों के निर्वाचन क्षेत्र में बेरोकटोक जारी बहुमूल्य खनिज संपदा की लूट का खेल न सिर्फ हैरान करने वाला है बल्कि माननीयों भूमिका पर भी कई गंभीर सवाल खड़े करता है। अजयगढ़ क्षेत्र में पिछले 9 माह से रसमीत सिंह मल्होत्रा के द्वारा आतंक के बल पर जिस तरह ताबड़तोड़ तरीके से मशीनों के जरिए रेत का अवैध खनन किया जा रहा है उसे लेकर क्षेत्रीय लोगों में जबर्दस्त आक्रोश एवं असंतोष व्याप्त है। गुरुवार को फरस्वाहा एवं उदयपुर ग्राम में संपन्न हुई लोक सुनवाई में अवैध खनन के खिलाफ मुखरता से बोलने वालों ग्रामीणों की बातों से तो यही साबित होता है।
मजेदार बात यह है कि रेत ठेकेदार ने जिन 4 स्थानों पर नई खदानों की स्वीकृति के लिए आवेदन दिया है वहाँ कथित तौर पर पिछले 9 माह से उसके द्वारा निजी भूमियों से एवं नदी के अंदर से लिफ्टर और पोकलेन मशीनों के जरिए रेत निकाली जा रही है। ग्रामीणों की मानें तो मझगांय, उदयपुर, फरस्वाहा एवं चंदौरा में पहले से ही चल रही रेत की लूट के साक्ष्य भी मौके पर मौजूद हैं। ग्रामीणों को यह बात जरा भी समझ नहीं आ रही है कि जब बगैर खदान की स्वीकृति के रेत ठेकेदार के द्वारा उक्त चारों स्थानों से धड़ल्ले से लगातार रेत निकाली जा रही है तो अब इन्हें स्वीकृत कराने के पीछे आखिर मंशा क्या है। पूर्व में ठेकेदार रसमीत सिंह अपनी सभी रेत खदानों को सरेंडर करने के लिए आवेदन भी दे चुका है। इस पर अभी भले ही कोई निर्णय नहीं हुआ लेकिन इस बीच चार नई खदानों की स्वीकृति के लिए आवेदन करने का परस्पर विरोधाभासी कदम किसी ख़ास रणनीति की तरफ इशारा करता है। जिसका खुलासा आगामी समय में होने की उम्मीद की जा रही है।बहरहाल यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ग्रामीणों की कड़ी आपत्ती एवं गंभीर आरोपों के मद्देनजर ठेकेदार को नई खदानों की पर्यावर्णीय स्वीकृति को लेकर संबंधित विभाग क्या निर्णय लेता है।








दोपहर करीब 11 चौपरा पहुंची रेस्क्यू टीम के प्रमुख वन्यप्राणी चिकित्सक डॉ. संजीव कुमार गुप्ता के द्वारा अत्यंत ही सावधानी पूर्वक व्यस्क नर तेंदुए को ट्रैंकुलाइज किया गया। तेंदुए के बेहोश होने पर बड़ी ही सतर्कता के साथ उसके शरीर के पिछले हिस्से में कसे फंदे को काटकर उसका प्राथमिक उपचार किया। तत्पश्चात दक्षिण वन की डीएफओ मीना कुमारी मिश्रा के निर्देश पर तेंदुए को रेस्क्यू वाहन के पिंजरे में कैद कर उसे नजदीकी मरहा के जंगल स्वछंद विचरण हेतु छोड़ा गया। तब कहीं जाकर दक्षिण वन मंडल के अधिकारियों एवं मैदानी अमले ने राहत की सांस ली।




