हत्या के मामले में सजा सुनाए जाने के बाद न्यायालय में गश खाकर गिरा अभियुक्त, हॉस्पिटल में डॉक्टर ने बताया खाया है जहर

* हालत गंभीर होने पर पन्ना से मेडिकल कॉलिज के लिए किया रेफर
* बहुचर्चित कल्लू द्विवेदी हत्याकाण्ड में अभियुक्त है अनिल कुमार
पन्ना। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में हत्या के एक प्रकरण में अभियुक्त को न्यायालय के द्वारा दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाने के बाद वह उल्टी करते हुए गश खाकर कठघरे में ही गिर गया। जैसे ही यह खबर बाहर आई तो जिला एवं सत्र न्यायालय पन्ना के परिसर में हड़कंप मच गया। बिना किसी देरी के अभियुक्त अनिल कुमार शिवहरे निवासी नरैनी जिला बांदा उत्तर प्रदेश को सुरक्षाकर्मी इलाज हेतु जिला चिकित्सालय ले गए। जहां ड्यूटी पर उपस्थित डॉक्टर प्रदीप कुमार द्विवेदी ने गहन परीक्षण करने के उपरांत बताया कि अनिल ने जहर खाया है। अनिल की गंभीर हालत को देखते हुए चिकित्सक ने प्राथमिक उपचार के बाद उसे मेडिकल कॉलिज रीवा के लिए रेफर कर दिया।

अनिल के पिता रामगोपाल शिवहरे ने पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि कल्लू द्विवेदी की हत्या के मामले में उनका पुत्र एवं 5 अन्य व्यक्ति अभियुक्त है। इस प्रकरण में वह जमानत पर रहा है। सोमवार 22 फरवरी को प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायालय पन्ना के द्वारा हत्याकाण्ड का निर्णय पारित करते हुए अभियुक्तगणों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। जिसके बाद अभियुक्त अनिल कुमार शिवहरे 40 वर्ष कठघरे में ही उल्टी करते हुए अचानक गश खाकर गिर पड़ा। पुलिस कर्मियों के द्वारा उसे उपचार हेतु आनन-फानन जिला चिकित्सालय ले जाया गया। ड्यूटी डॉक्टर प्रदीप कुमार द्विवेदी ने अनिल का चेकअप करने के बाद जानकारी देते हुए बताया कि उसने जहर का सेवन किया है। डॉक्टर श्री द्विवेदी के द्वारा इसकी तहरीर कोतवाली थाना पुलिस को भेजी गई। कुछ ही देर में नायब तहसीलदार (कार्यपालिक मजिस्ट्रेट) ममता शर्मा जिला चिकित्सालय पहुंचीं गईं। मेल मेडिकल वार्ड में गंभीर हालत में भर्ती अभियुक्त के उनके द्वारा मृत्यु पूर्व कथन दर्ज किये गए।

नायब तहसीलदार ने पत्रकारों को बताया कि न्यायालय के द्वारा मांगे जाने पर उक्त कथन बंद लिफाफे पेश किए जाएंगे। अनिल को गंभीर हालत में रात्रि करीब 8 बजे एम्बुलेंस से सुरक्षा व्यवस्था के बीच रीवा के लिए रवाना किया गया। इस दौरान मौके पर पन्ना एसडीएम बीबी पाण्डेय उपस्थित रहे। फिलहाल यह साफ़ नहीं हो सका कि हत्या के मामले के अभियुक्त ने जहर का सेवन कब और कहां किया। मालूम होकि धरमपुर थाना अंतर्गत कुछ साल पहले कल्लू द्विवेदी का शव बाघिन नदी में मिला था। पुलिस ने कल्लू की हत्या के प्रकरण में उसकी पत्नी कल्ली बाई, शेरा, सियाराम, अनिल कुमार शिवहरे व दो अन्य लोगों को आरोपी बनाया था। पुलिस के मुताबिक कल्ली बाई ने अन्य लोगों की मदद से अपने पति की हत्या कर दी थी।
मुख्यालय में नहीं रहतीं कार्यकर्ता-सहायिका, कागजों पर संचालित आधा सैंकड़ा से अधिक आंगनवाड़ी केन्द्र !
* जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास ने सेवा समाप्त करने की दी चेतावनी
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के अति पिछड़े पन्ना जिले के माथे पर लगा कुपोषण व मातृ एवं शिशु मृत्यु दर की अधिकता का कलंक न मिट पाने का एक बड़ा कारण ग्रामीण अंचल में स्थित आंगनवाड़ी केन्द्रों का शासन की मंशानुरूप सुचारु रूप से संचालन न होना है। जबकि आधा सैंकड़ा से अधिक आंगनवाड़ी केन्द्र ऐसे हैं जिनका संचालन करीब-करीब कागजों पर हो रहा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि संबंधित आंगनवाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका अपने मुख्यालय में निवास नहीं करती हैं। जिससे उन केन्द्रों में दर्ज गर्भवती/धात्री महिलाओं एवं बच्चों को स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाएं नहीं मिल पा रहीं हैं। आंगनवाड़ी केन्द्रों के निरीक्षण, भ्रमण, सूचना एवं शिकायत के आधार पर यह जानकारी निकल कर सामने आई है कि कुछ कार्यकर्ताऐं-सहायिकाऐं अपने पदस्थापना के ग्राम में निवासरत न होकर अन्यत्र निवास करती हैं। जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास पन्ना ऊदल सिंह ने इसे संज्ञान लेते हुए संबंधितों को सेवा समाप्ति की चेतावनी दी है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी द्वारा बताया गया की कार्यकर्ता-सहायिका की नियुक्ति की पहली शर्त यही है की वह उस ग्राम की मूल निवासी हो। अपने पदस्थापना के ग्राम में निवास न करने वाली कार्यकर्ताओं/ सहायिकाओं को निर्देशित किया गया है कि वह ग्राम में स्थायी रूप से रहकर शासकीय योजनाओं का लाभ हितग्राहियों को सुचाए रूप से पहुॅचाऐं। संबंधितों को चेतावनी दी गयी की वह आगामी सात दिवस में संबंधित ग्राम में स्थायी रूप से रहना प्रांरभ नहीं करती है तो उनकी सेवा समाप्ति की कार्यवाही की जायेगी।
ऐसी कार्यकर्ताऐं-सहायिकाऐं जो अन्यत्र निवास करती हैं-
परियोजना गुनौर- आंगनवाड़ी कार्यकर्ता श्रीमति किरन लोधी (आंगनवाड़ी केन्द्र शेल्हा), श्रीमति शैलेन्द्र कुमारी (भुलगंवा), श्रीमति राम कुमारी कोरी (गौरा), श्रीमति सविता द्विवेदी (उजनेही), श्रीमति उमाशशि (नैगुआ),श्रीमति संध्या पांडे (कठवारिया), श्रीमति पुष्पा शर्मा (पटनाकला), श्रीमति मुलायम चौधरी (सलेहा मिनी), श्रीमति सीता ताम्रकार (जैतुपुरा), श्रीमति अंजना पाठक (मझगवाॅ शेख) श्रीमति शुभराज कुमारी (पगरा) . श्रीमति प्रिया द्विवेदी (हिनौता दुबे) एवं श्रीमति ममता खरे केन्द्र कमताना।
परियोजना अजयगढ़- आंगनवाड़ी कार्यकर्ता श्रीमति माया (केन्द्र राजापुर), श्रीमति फूला प्रजापति ( मेहंदी पुरवा), श्रीमति बबली (रामनई पुरवा), श्रीमति आरती कोरी (रामनई 02), श्रीमति रेखा अहिरवार (गुमानगंज मिनी), श्रीमति नीलम गुप्ता (अदिवासी वस्ती गुमानगंज 02), श्रीमति नीलम सिंह (भापतपुर कुर्मी 03), श्रीमति मनीषा गुप्ता (बगहा), श्रीमति अनीता पटेल (बीहरचौकी) श्रीमति रोहणी अग्निहोत्री (लौलास मिनी), श्रीमति जानकी शुक्ला (पिष्टा 03), श्रीमति रखी श्रीवास्तव (गुरदीनपुरवा), श्रीमति पूजा गुप्ता (हरदी मिनी) श्रीमति ममता देवी (चुन्हा), श्रीमति अर्चना सिंह (गेहलोद पुरवा), श्रीमति सुनीता सोनी (सिंहपुर 02), स्नेहालता वर्मन (गुठला), श्रीमति रामलली वर्मा (नयागाॅव 1), श्रीमति रूकमिन अहिरवार (रमजुपुर), श्रीमति रामप्यारी यादव (बनहरी 02), श्रीमति श्यामलता गुप्ता (बनहरी 03), श्रीमति गार्गी (बनहरी 01) श्रीमति माया केवट (निमहा), श्रीमति रजनी यादव (पड़हा 02), श्रीमति विद्या अहिरवार (निम्हा मिनी) एवं श्रीमति मीरा सिंह केन्द्र हरसाधार मिनी। आंगनवाड़ी सहायिका- श्रीमति रामलली मिश्रा केन्द्र पिष्ठा 03 श्रीमति राजपति सिंह केन्द्र गेहलोद पुरवा।
परियोजना शाहनगर- आंगनवाड़ी कार्यकर्ता श्रीमति निशा राजा (मढ़िया), श्रीमति सरस्वती सोनी (मनकी), श्रीमति स्वाति तिवारी (झालामुरी), श्रीमति संध्या लोधी (चंगेरी), श्रीमति सुनीता (रामपुर), श्रीमति साधना त्रिपाठी (सुगरहा), श्रीमति अराधना गुप्ता (पुरैना स) श्रीमति चमेली बाई (सरईखेड़ा), श्रीमति रेखा (झीरिया), श्रीमति राजकुमारी (बीजखेड़ा), श्रीमति कपास परोहा (लमतरा स) एवं श्रीमति उषा मिश्रा केन्द्र लमतरा ब।
परियोजना पन्ना ग्रामीण- आंगनवाड़ी कार्यकर्ता श्रीमति कला बागरी (फुलदरी), श्रीमति रीता पांडे (बड़ागाॅव 5), श्रीमति गायत्री वर्मा (गुखोर 03), श्रीमति अंजू चौधरी (बड़वारा मिनी), श्रीमति अभिलाषा (रमखिरिया), श्रीमति अनीता अदिवासी (इटवांखास 01), श्रीमति अनीता मिश्रा (सरकोहा), श्रीमति कमला जैन (इटवांखास 03), श्रीमति वंदना पाण्डेय (जमुनिहा), श्रीमति शोभा यादव (जनवार), श्रीमति नयनतारा श्रीवास्तव (नवीनझलार), श्रीमति नीलम शर्मा (रानीपुर), श्रीमति साधना तिवारी (अहिरगुवां 01), श्रीमति प्रीति यादव (हरदुआ मिनी), श्रीमति अंजना मिश्रा (मझौली), श्रीमति विमला यादव (कटहरी), श्रीमति सिलोचना बाई केन्द्र कोनी। आंगनवाड़ी सहायिका- श्रीमति दुर्गा बाई (बड़वारा 1), श्रीमति प्रेम बाई कोंदर (मड़ैयनपुरा), श्रीमति प्रिंयका केन्द्र कूड़न।
परियोजना पवई- आंगनवाड़ी कार्यकर्ता श्रीमति महिमा राजा (सिंगवारा बी), श्रीमति उर्मिला चौरसिया (सिंगवारा ए), कुसुम खरे (हरदुआ व्यारमा), श्रीमति रामलली (राजपुर), श्रीमति अभिलाषा कुशवाहा (इटाय ए), श्रीमति गौरी बाई (शिकारपुरा), श्रीमति रानी निशा (कुॅवरपुर सी), श्रीमति वर्षा शर्मा (कुॅवरपुर 01), श्रीमति छोटी राजा (कोलकरहिया), श्रीमति प्रीति सोनी (सिमरिया बी), श्रीमति अरूणा सिंह (पिपरिया तिवारी), श्रीमति उर्मिला द्विवेदी (गणेशगंज), श्रीमति प्रभा तिवारी (चंदनपुर), श्रीमति सपना गुप्ता (बनौली मिनी), श्रीमति अर्चना केन्द्र धैरा खुर्द। आंगनवाड़ी सहायिका- श्रीमति धन बाई (हरदुआ), श्रीमति नत्थी बाई (देवई), श्रीमति सरोज यादव (मोहडरिया), श्रीमति निर्मला चौरसिया (मोहन्द्रा 07), श्रीमति राज्य शर्मा (धैरी खेड़ा), श्रीमति आजाद बुंदेला (मनिया) एवं श्रीमति बृजेश कुमारी केन्द्र बनौली डी शामिल है।
उल्लेखनीय है कि उक्त कार्यकर्ताओं/ सहायिकाओं के संबंध में पूर्व में भी यह बात कई बार प्रकाश में आ चुकी है कि वे अपने पदस्थापना के ग्राम (मुख्यालय) में स्थाई रूप से निवास नहीं करती हैं। वहीं कुछ स्थानों पर आंगनवाड़ी केन्द्रों को कार्यकर्ताओं ने पूरी तरह से सहायिकाओं के भरोसे छोड़ रखा है। बावजूद इसके फ़िलहाल उन्हें सिर्फ चेतावनी देकर छोड़ने की खबर आने से महिला एवं बाल विकास विभाग के ही अंदरखाने कई तरह की चर्चाओं को बल मिल रहा है।
बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष कर रहे झुग्गी बस्ती के लोग, जोखिम उठाकर पहाड़ से लाते हैं पानी

* पन्ना में कलेक्टर बंगला के सामने ही पानी की भारी किल्लत
* बस्ती से निकली पाईप लाइन से शहर में पेयजल की सप्लाई लेकिन झुग्गीवासियों को नहीं मिलता पानी
* सुबह से सब काम छोड़कर पहाड़ी से भरते हैं पानी, समस्या के समाधान को लेकर संजीदा नहीं जिम्मेदार
इदरीश मोहम्मद, पन्ना। (www.radarnews.in) झीलनुमा विशाल तालाबों एवं अनूठी भूमिगत जल सुरगों वाले पन्ना नगर की बड़ी आबादी को बूंद-बूंद पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। जल-जीवन मिशन के इस दौर में भी पन्ना की झुग्गी बस्तियों में पीने के पानी के लिए जद्दोजहद जारी है। यहां कलेक्टर एवं नगर पालिका सीएमओ के बंगले के ठीक सामने स्थित झुग्गी बस्ती के लोग पानी के लिए पहाड़ चढ़ने को मजबूर हैं। गरीब महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को अपनी जान जोखिम में डालने के बाद बमुश्किल पानी नसीब हो पाता है। अपने वजन से भी ज्यादा भारी पानी से पीपे-डिब्बे सिर पर रखकर चलते नाबालिग, कांपते हुए हाथों में पानी से भरे बर्तन को थामे वृद्ध और पहाड़ से साइकिल में पानी डिब्बे टांगकर ले जाते लोगों को जिम्मेदार रोजाना देखते हैं लेकिन उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। रहीम का प्रसिद्द दोहा- “रहिमन पानी राखिये बिन पानी सब सून, पानी गये न ऊबरे मोती, मानुष, चून।“ यहां के हालात पर सटीक बैठता है।
दरअसल,पन्ना नगर पालिका के वार्ड नंबर-17 मदार टेकरी की झुग्गी बस्ती में जल संकट के चलते जहां वाकई सब सूना है, वहीं जिम्मेदार अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के व्यवहार में पानी रुपी संवेदनशीलता का आभाव है। इस कारण जल संकट समाप्त नहीं हो पा रहा है। इससे बड़ी विडंबना भला और क्या होगी जिस बस्ती से निकली पाईप लाइनों से समूचे पन्ना नगर में पेयजल की सप्लाई होती है उस बस्ती के लोगों को उन्हीं पाईप लाइनों से आज तक नल कनेक्शन नहीं मिले। जिससे पन्ना नगर की प्यास बुझाने के नाम पर यूआईडीएसएसएमटी योजना अंतर्गत पेयजल व्यवस्था पर करोड़ों रूपये की राशि के खर्च को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
पहाड़कोठी की झुग्गी बस्ती के लोग आजादी के 70 साल बाद भी बूंद-बूंद पानी को तरस रहे है। यहां आज भी लोग मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। लोगों को पीने व निस्तार का पानी भरने के लिए अपनी हर रोज जान जोखिम में डालनी पड़ती है। पहाड़ कोठी में स्थित पानी टंकी का लीकेज पानी पहाड़ के नीचे से निकलता जिसे भरकर बस्ती के लोग अपना काम चलाते हैं। इस पानी को भरने के लिए वैसे तो दिन भर लोग पहुँचते हैं लेकिन सुबह-शाम भीड़-भाड़ अधिक रहती है। पहाड़ चढ़कर पानी लाने की जद्दोजहद में ही बस्ती के लोगों का 3-4 घण्टे का समय गुजर जाता है। इस कारण बस्ती के अधिकांश लोग सुबह बगैर कुछ खाए अर्थात भूखे ही मजदूरी करने के लिए निकल जाते हैं। शाम को घर लौटने पर ही उन्हें भोजन नसीब हो पाता है। जल संकट इन गरीबों के जीवन पर कितना व्यापक असर डाल रहा है इसका सहज ही अंदजा लगाया जा सकता है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि कई बार चट्टानों और कच्चे रास्ते में फिसलने से महिलाएं, बच्चे और वृद्ध गंभीर रूप से घायल हो चुके है। पानी के लिए होने वाली परेशानी से निजात दिलाने के लिए बस्ती के लोगों ने नगर पालिका परिषद, प्रशासनिक अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों से कई बार गुहार लगाई लेकिन किसी ने इनकी सुध नहीं ली। जबकि वर्तमान में पानी की जब इतनी किल्लत है तो गर्मियों के मौसम में आलम क्या होगा इसका अंदाज लगाया जा सकता है ।

झुग्गी बस्ती में रहने वाली शीला बाई बताती हैं कि सुबह से पानी भरने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ती है। पहाड़ से नीचे उतरते समय अगर सावधानी न बरती जाए तो अक्सर दुर्घटनायें हो जाती है। छोटे-छोटे बच्चे फिसलने की वजह से अक्सर घायल हो जाते हैं। बस्ती के लोग कई सालों से लगातार नल कनेक्शन दिलाए जाने की मांग कर रहे हैं लेकिन अब तक इन्हें झूठे आश्वासन ही मिले। नगर पालिका के अफसर पेयजल समस्या के समाधान को लेकर अपनी उदासीनता को छिपाने के लिए बहानेबाजी करते हैं।
स्थानीय निवासी कैलाश चौधरी का कहना है कि यहां के अधिकांश लोग मजदूरी करने जाते है कई बार पानी भरने के चक्कर में लेट होने के कारण मजदूरी नहीं मिल पाती। वहीं टंकी से निकलने वाला लीकेज पानी कभी-कभी इतना गंदा आता है कि कई घण्टों तक पानी के साफ होने का इंतजार करना पड़ता है। बस्ती के लोगों से बात करने पर जान पड़ता है कि पहाड़ कोठी की पेयजल समस्या इतनी जटिल नहीं जितना इसे नगर पालिका परिषद के अकर्मण्य अमले ने बना रखा है। गौर करने वाली बात यह है कि जिला मुख्यालय में बड़े प्रशासनिक अफसरों की आखों के सामने जब इस तरह के हालात अभी निर्मित हैं तो दूरस्थ ग्रामीण अंचल की स्थिति क्या होगी, कहना मुश्किल पर समझना आसान है।
इनका कहना है-
“यह बड़ी विडंबना है कि आजादी के 70 साल बाद भी जिला मुख्यालय पन्ना के लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे है। मैनें स्वयं पहाड़कोठी में पानी के लिए लंबी-लंबी लाइनें लगी देखी हैं, नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों को इस ओर ध्यान देना चाहिए। अगर जल्द ही समस्या का समाधान नहीं होता है तो युवक कोंग्रेस स्थानीय लोगों के साथ मिलकर नगर पालिका का धेराव करेगी।”
– स्वतंत्र प्रभाकर अवस्थी, अध्यक्ष, युवक कांग्रेस, पन्ना।
“फॉरेस्ट का एरिया होने की वजह से ओर टेक्निकल दृष्टि से वहां पाइप लाइन बिछाना संभव नहीं है। लेकिन फिर वहां के लोगों को पानी की सुविधा प्रदान करने का प्रयास किया जाएगा।”
– यशवंत वर्मा, सीएमओ, नगर पालिका परिषद, पन्ना।
पात्र व्यक्तियों को निःशुल्क उपचार योजना का लाभ दिलाने पन्ना में शिविर लगाकर बनाए जा रहे “आयुष्मान कार्ड”
पन्ना। “सभी सुखी हो-सभी निरोगी हो“ इसी भावना को लेकर केन्द्र की मोदी सरकार के द्वारा आयुष्मान कार्ड योजना संचालित की जा रही है। इस महत्वकांक्षी योजना का प्रत्येक पात्र व्यक्ति को लाभ दिलाने के लिए खजुराहो सांसद बीडी शर्मा के मार्गदर्शन में पन्ना नगर में 20 एवं 21 फरवरी को दो दिवसीय आयुष्मान कार्ड शिविर आयोजित किया जा रहा है। पहले दिन शनिवार 20 फरवरी को शिविर का आयोजन पन्ना के हृदय स्थल गांधी चौक के यादवेंद्र वार्ड क्रमांक-22 में हुआ। इस वार्ड की पूर्व पार्षद व जिला महामंत्री चंद्रप्रभा तिवारी ने शिविर में सैकड़ों लोगों को उनके घर से बुलाकर योजना का लाभ दिलाया।

इस अवसर पर श्री मती तिवारी ने समस्त नगर वासियों से अपील भी की है कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में लोग शिविर में पहुंचकर निःशुल्क आयुष्मान कार्ड बनवाकर इस योजना का लाभ उठाएं। आपने कहा कि हमारे सांसद जी की मंशा है कि प्रत्येक सुपात्र व्यक्ति का आयुष्मान कार्ड बने ताकि आवश्यकता पड़ने पर यह कार्ड उपयोग में आ सके। पूर्व पार्षद चंद्रप्रभा तिवारी ने बताया कि आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए स्वयं का आधार कार्ड एवं परिवार की समग्र आईडी आवश्यक रूप से साथ में लेकर शिविर में आएं।
भू-माफिया के खिलाफ बड़ा फैसला देने वाले ईमानदार IAS अफसर के तबादले पर घिरी “शिवराज सरकार” विरोध में उतरीं पूर्व मंत्री कुसुम सिंह मेहदेले ने दिया बड़ा बयान
* पत्रकारों से बोलीं- सीएम से मिलकर कहूँगी किसी के दबाव में नहीं होना चाहिए तबादला
* युवा आईएएस के तबादले की टाइमिंग को लेकर नाराज हैं पन्ना जिले के लोग
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) ईमानदार युवा आईएएस अफसर शेर सिंह मीना का तबादला करके शिवराज सरकार चौतरफा घिर गई है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के द्वारा आईएएस के तबादले पर सवाल उठाने के बाद अब इस मामले में पर भाजपा की दिग्गज़ नेत्री व पूर्व मंत्री सुश्री कुसुम सिंह मेहदेले का बड़ा बयान आया है। अपने बेबाक़ बयानों के लिए चर्चित वरिष्ठ भाजपा नेत्री सुश्री मेहदेले ने पन्ना में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि ईमानदार और न्याय प्रिय अधिकारी का किसी के दबाव में तबादला किया जाना उचित नहीं है।

पन्ना में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व के पद पर पदस्थ रहे शेर सिंह मीना (आईएएस) ने हाल ही में भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़े भू-माफिया अंकुर त्रिवेदी के खिलाफ अहम फैसला सुनाकर गरीब आदिवासियों एवं नयापुरा-मुड़िया पहाड़ की झुग्गी बस्ती के सैंकड़ों परिवारों को न्याय दिया था। एसडीएम कोर्ट से इस ऐतिहासिक फैसले के आने के बाद राज्य सरकार ने आनन-फानन में शेर सिंह मीना को पन्ना से हटाते हुए उनका तबादला शहडोल जिले के लिए कर दिया। वहीं तबादला आदेश आने के तुरंत बाद मीना को पन्ना से रिलीव भी कर दिया गया। उनकी विदाई की खबर मीडिया में आने के बाद से ही पन्ना के लोगों में शिवराज सरकार के इस फैसले को लेकर गहरी नाराजगी व्याप्त है।
सार्वजानिक मंच से माफिया के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की बात करने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की “कथनी और करनी” की आलोचना करते हुए पन्ना के लोग सोशल मीडिया पर उनकी मंशा पर सवाल उठा रहे हैं। इस बीच आईएएस अफसर शेर सिंह मीना के तबादले को लेकर पूर्व मंत्री सुश्री कुसुम सिंह का बयान आने से सियासी हलचल काफी बढ़ गई है।
सुश्री मेहदेले ने आज पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि “ऐसे ईमानदार और न्याय प्रिय अफसर को पन्ना में रहना चाहिए उनका तबादला नहीं होना चाहिए था। मीना जैसे अधिकारी कभी-कभार ही आते हैं, ऐसे अधिकारियों के रहने से गरीबों को न्याय मिलता और सुविधा हो जाती है। जिस तरह से युवा आईएएस का तबादला हुआ है वह उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी से मिलकर मैं कहूँगी अच्छा काम करने वाले ईमानदार अफसर जहाँ भी हैं उनको रहने दिया जाए। ऐसे अफसरों को किसी के दबाव में आकर न हटाया जाए।”
उल्लेखनीय है कि जिला मुख्यालय पन्ना के नजदीक नेशनल हाइवे क्रमांक-39 के दोनों तरफ नयापुरा-मुड़िया पहाड़ ग्राम में स्थित गरीब आदिवासियों की बेशकीमती 18 एकड़ जमीन भाजपा के स्थानीय दबंग नेता अंकुर त्रिवेदी ने छल-कपट पूर्वक हड़प ली थी। करोड़ों रुपए मूल्य की इन जमीन पर बनीं झुग्गियों में कई पीढ़ियों से रह रहे सैंकड़ों गरीब परिवारों को भू-माफिया के द्वारा जबरन बेदखल किए जाने का पुरजोर विरोध सबसे पहले पूर्व मंत्री सुश्री कुसुम सिंह महदेले ने ही किया था। लेकिन स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी तथा विपक्षी दल कोंग्रेस के नेताओं ने इस मुद्दे से दूरी बनाए रखी।

इस स्थिति में प्रभावित परिवार न्याय पाने के लिए मामले को अनुविभागीय अधिकारी राजस्व तहसील पन्ना के न्यायालय में ले गए। इस बहुचर्चित मामले में 11 फरवरी को शेर सिंह मीना (आईएएस) अनुविभागीय अधिकारी राजस्व तहसील पन्ना ने तथ्यों व साक्ष्यों के आधार पर गरीब आदिवासियों के पक्ष बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था। मध्यप्रदेश भाजपा के अध्यक्ष एवं खजुराहो सांसद विष्णु दत्त शर्मा के करीबी माने-जाने वाले अंकुर त्रिवेदी के खिलाफ फैसला आने के बाद युवा आईएएस अधिकारी शेर सिंह मीना के तबादले को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।
अन्याय-अत्याचार का हमेशा विरोध करती रहूंगी

लगभग तीन दशक तक पन्ना का प्रतिनिधित्व करने वालीं पूर्व मंत्री सुश्री कुसुम सिंह आज भले ही किसी पद पर नहीं हैं लेकिन इसके बाद भी पन्ना के लोगों का भरोसा उनके प्रति कायम है। भू-माफिया से प्रताड़ित नयापुरा-मुड़िया पहाड़ के गरीब-कमजोर लोग जब पद में बैठे जिम्मेदारों के रवैये से हताश-निराश होकर सुश्री कुसुम सिंह महदेले के पास पहुंचे तो उन्हें पूरा साथ मिला। सर्वविदित है कि सुश्री मेहदेले गरीब-कमजोर, शोषित, पीड़ित लोगों के हितों व अधिकारों से जुड़े मसलों पर हमेशा दृढ़ता के साथ उनके पक्ष में खड़ी होने वाली जिले की अकेली नेत्री हैं।
बताते चलें कि नयापुरा मुड़िया पहाड़ का मामला भाजपा के दबंग नेता से जुड़ा होने के कारण उनकी पार्टी के अन्य नेताओं एवं विपक्षी कोंग्रेसियों ने जब इस ज्वलंत मुद्दे से दूरी बनाते हुए मौन साध लिया तब सुश्री मेहदले ने आगे आकर इस अन्याय के खिलाफ आवाज़ बुलंद की थी। इस मामले में राजस्व न्यायालय का फैसला आने पर नयापुरा-मुड़िया पहाड़ के वाशिंदे शनिवार 20 फरवरी की सुबह सफरबाग़ स्थित उनके निवास पहुंचे और उनको फूलों का गुलदस्ता भेंटकर समर्थन के लिए हृदय से आभार जताया। इस मौके पर सुश्री महदेले ने पुनः दोहराया कि वे अन्याय-अत्याचार करने वालों का हमेशा विरोध करती रहेंगी, फिर चाहे वह कोई भी हो।
पूर्व मंत्री सुश्री कुसुम सिंह मेहदेले का बयान सुनने के लिए इस वीडियो को क्लिक करें –
BJP से जुड़े भू-माफिया के खिलाफ बड़ा फैसला देने वाले ईमानदार IAS अफसर का हुआ तबादला
* माफिया के खिलाफ मुहिम छेड़ने वाली शिवराज सरकार के फैसले को लेकर पन्ना में गुस्सा
* पन्ना जिले में ठप्प पड़ सकती है वास्तविक माफियाओं के खिलाफ जारी मुहिम
* बुंदेलखंड के अति पिछड़े इस जिले में आज भी चलती है माफियाओं की हुकूमत
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में भारतीय जनता पार्टी से जुड़े दबंग भू-माफिया अंकुर त्रिवेदी के खिलाफ सप्ताह भर पूर्व अहम फैसला सुनाकर गरीब आदिवासियों को न्याय देने वाले ईमानदार युवा IAS अफसर शेर सिंह मीना का राज्य सरकार ने आनन-फानन में पन्ना से शहडोल जिले के लिए तबादला कर दिया है। पन्ना जिले के लोग शिवराज सरकार के इस फैसले से बेहद नाराज हैं। इस मामले में सोशल मीडिया पर लोग शिवराज सरकार के फैसले के खिलाफ तल्ख़ टिप्पणी कर रहे है। मध्यप्रदेश में माफिया, गुण्डे-बदमाशों के खिलाफ मुहिम छेड़ने के लिए सार्वजानिक तौर पर बड़ी-बड़ी बातें करने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की कथनी व करनी पर भी लोग सवाल उठा रहे हैं। सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने तंज भरे अंदाज में टिप्पणी करते हुए IAS अफसर के स्थानांतरण को सत्ताधारी दल के भू-माफिया के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने के लिए उन्हें राज्य सरकार की ओर से दिया गया ईनाम (पुरूष्कार) बताया है। दरअसल, स्थानांतरण की टाइमिंग ही कुछ ऐसी जिससे शिवराज सरकार के फैसले और उसकी मंशा पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

उल्लेखनीय है कि, मध्यप्रदेश के पन्ना जिला मुख्यालय के नजदीक नेशनल हाइवे क्रमाँक-39 के दोनों तरफ स्थित नयापुरा-मुड़िया पहाड़ की लगभग 18 एकड़ बेशकीमती भूमि के बहुचर्चित विवाद मामले में शेर सिंह मीना (IAS) अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, तहसील पन्ना ने दिनांक 11 फ़रवरी को ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। अपने फैसले में उन्होंने कहा कि, अंकुर त्रिवेदी पिता खुन्ना उर्फ़ अवधेश त्रिवेदी ने छल-कपट पूर्वक साम-दाम-दण्ड-भेद का इस्तेमाल कर गरीब आदिवासियों की भूमियों पर पहले कब्ज़ा किया। इसके बाद अंकुर ने अपने बंधुआ मजदूर हीरालाल आदिवासी का इस्तेमाल कर उन भूमियों को हड़प लिया।
अनुविभागीय अधिकारी राजस्व न्यायालय ने विवादित जमीनों (आराजियों) को उनके मूल भूमिस्वामियों (गरीब आदिवासियों) के नाम पर दर्ज करने का आदेश दिया है। जिसमें कहा गया है, तहसीलदार पन्ना आदेशानुसार (फैसले के मुताबिक) पटवारी व अभिलेख दुरुस्त (सुधार) कराकर प्रकरण में संलग्न करें। विधि अनुसार मूल भूमि स्वामियों (गरीब आदिवासियों) को उनकी भूमियों का कब्ज़ा दिलाएं। आवश्यकता पड़ने पर पुलिस की सहायता से कब्ज़ा दिलाने की कार्रवाई की जाए। श्री मीना ने इस मामले में एसडीओपी पन्ना को अंकुर त्रिवेदी व उनकी माँ के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध कर एफआईआर की कॉपी उनके न्यायालय में प्रस्तुत करने का आदेश भी दिया था।
प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के लिए लिखा था पत्र

मालूम हो कि पन्ना के भाजपा नेता अंकुर त्रिवेदी को खजुराहो सांसद एवं मध्यप्रदेश के भाजपा अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा का करीबी माना जाता है। कुछ माह पूर्व नयापुरा-मुड़िया पहाड़ की झुग्गी बस्ती के रहवासियों ने अंकुर पर आरोप लगाते हुए लिखित शिकायत की थी जिसमें कहा गया था कि उसके द्वारा अपने राजनैतिक रसूख के दम पर उन्हें पुश्तैनी कब्जे की भूमि से जबरन बेदखल किया जा रहा है। इसके अलावा कुछ आदिवासियों ने भी अंकुर पर उनकी जमीनों को हड़पने का बेहद गंभीर आरोप लगाया था। प्रभावित लोगों ने महारानी पन्ना जीतेश्वरी देवी की अगुवाई में कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च निकालते हुए अंकुर के साथ-साथ खजुराहो सांसद विष्णु दत्त शर्मा के भी खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाए थे।
बेहद गंभीर प्रकृति की इन शिकायतों एवं भाजपा नेता अंकुर के विरुद्ध दर्ज आपराधिक प्रकरणों की लंबी फेहरिस्त को दृष्टिगत रखते हुए तत्कालीन अनुविभागीय दंडाधिकारी पन्ना शेर सिंह मीना (IAS) ने दिनांक 27 अक्टूबर 2020 को थाना प्रभारी कोतवाली थाना पन्ना को पत्र लिखकर अंकुर त्रिवेदी और उनके पिता खुन्ना उर्फ़ अवधेश त्रिवेदी के विरुद्ध क्रमशः प्रतिबंधात्मक कार्रवाई तथा एन.एस.ए. (NSA) की कार्रवाई हेतु न्यायालय में प्रकरण प्रस्तुत करने का आदेश दिया था। लगभग चार माह पूर्व दिए गए इस आदेश पर क्या कार्रवाई हुई इसका अब तक पता नहीं चल सका।
माफियाओं के लिए परेशानी का सबब बन गए थे मीना

भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयनित होने के पश्चात युवा IAS शेर सिंह मीना की परवीक्षा अवधि की पहली पोस्टिंग पन्ना जिले की पन्ना तहसील में SDM के पद पर हुई। श्री मीना के करीब डेढ़ वर्ष के कार्यकाल के दौरान पन्ना जिले में कुल तीन IAS अफसर पदस्थ रहे लेकिन अपनी कार्यशैली, दिए गए फैसलों, ईमानदारी, तत्परता से प्रकरणों के निराकरण, कर्मठता, विनम्र व्यवहार, संजीदगी, और अपने शानदार व्यक्तित्व से जनमानस के बीच अच्छी छवि सिर्फ शेर सिंह मीना ही बना सके। महत्वपूर्ण बात यह रही कि उन्होंने कभी भी मीडिया के लिए हेडलाइंस बनाने की मंशा से कोई काम नहीं किया। अपने नंबर बढ़ाने या फिर कुर्सी के लिए सत्ता के इशारों पर नाचने वाली कठपुतली भी वे नहीं बने।
समाजसेवी एवं चिंतक देशपाल पटेल का मानना है कि पन्ना जिले के प्रशासन में महत्वपूर्ण पदों पर काबिज़ गुलाम रूहों की जमात के बीच शेर सिंह मीना अपवाद स्वरूप उन चुनिंदा अफसरों में शामिल रहे जिन्होंने स्वतंत्र व निष्पक्ष तरीके से अपने पदीय दायित्वों का पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निर्वाहन करते हुए अपने नाम को साबित किया है। शायद यही वजह रही कि पन्ना के ताकतवर लोगों को वे पूरे समय खटकते रहे। सबसे ज़्यादा हैरानी की बात तो यह है कि माफिया खिलाफ कार्रवाई दम भरने वाली शिवराज सरकार भी इस ईमानदार अफसर बर्दाश्त नहीं कर सकी।

विदित हो कि नयापुरा-मुड़िया पहाड़ मामले में प्रभावितों को न्याय देने के आलावा श्री मीना ने रेलवे लाइन के लिए अधिग्रहीत की गई भूमियों के मामले में गड़बड़ी करने वाले अधीनस्थ अमले पर भी कार्रवाई की, तथ्यों को नजरअंदाज करके विधि विरुद्ध कार्य करने वाले राजस्व अधिकारियों को भी उन्होंने नहीं बख्शा। पन्ना की गल्ला मण्डी के प्रांगण में शासकीय दुकानों के दुरूपयोग से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण कार्रवाई की गई। जिससे भाजपा के नेता और पन्ना के बड़े व्यापारी सीधे तौर पर प्रभावित हुए। नवीन फल सब्जी मण्डी में साप्ताहिक रविवारीय बाजार के दिन दुकानें लगाने के जटिल विवाद का हल निकाला। कोविड संक्रमण के समय भी अपने दायित्वों का बखूबी निर्वाहन करते हुए महामारी की रोकथाम में अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा और भी बहुत से महत्वपूर्ण कार्य उनके द्वारा किए गए।
वरिष्ठ पत्रकार राकेश शर्मा के अनुसार पन्ना जिले में सेवाएं देने वाले आईएएस अफसरों की लम्बी सूची में शेर सिंह मीना उन चुनिंदा अफसरों में शामिल हैं जिन्हें इस जिले के लोग लंबे समय तक याद रखेंगे। अपने कथन के समर्थन में श्री शर्मा कहते हैं मौजूदा भ्रष्ट व्यवस्था में वे आमलोगों के अधिकारों के सच्चे रक्षक साबित हुए। पन्ना अनुभाग अंतर्गत राजस्व कार्यालयों में घूसखोरी पर प्रभावी अंकुश लगाया, राजस्व प्रकरणों व आमजन से जुड़े कार्यों का तत्परता से विधि अनुसार निराकरण किया, अपनी विशिष्ट कार्यशैली, विनम्रता-सहजता से जन सामान्य में प्रशासन के प्रति भरोसे को मजबूत बनाने में उनकी अहम भूमिका रही।
इसके विपरीत पन्ना में सक्रिय भू-माफियाओं, अवैध तरीके से प्लाटिंग करने वाले कॉलोनाइजरों, खनन माफियाओं, कामचोर तथा भ्रष्ट अधिकारी-कर्मचारी श्री मीना के नाम से ही पूरे समय ख़ौफ़ खाते रहे। पत्रकार श्री शर्मा कहते हैं अगर कोरोना महामारी ना आती तो शायद युवा आईएएस के कुछ और भी काम लोगों को देखने को मिलते। बहरहाल जिले से इतनी जल्दी श्री मीना का तबादला होना पन्ना के लोगों के लिए किसी बड़ी क्षति से कम नहीं है।
माफिया पर नकेल कसने वाले अफसर नहीं टिक पाते
माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सत्तासीनों की लोक-लुभावन भाषणबाजी की कड़वी सच्चाई उनकी कथनी और करनी के अंतर के रूप में समय-समय पर उजागर होती रही है। इनका चरित्र हाथी के दांतों की तरह होता है। यही कारण है कि नेताओं व जनप्रतिनिधियों की विश्सनीयता जनमानस के बीच तेजी से गिर रही है। बताते चलें कि मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड का पन्ना जिला प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध होने के बावजूद भौतिक विकास के मामले काफी पिछड़ा हुआ है। पन्ना की प्रचुर वन सम्पदा एवं खनिज सम्पदा को यहाँ पर सक्रिय विभिन्न दलों के राजनेता-जनप्रतिनिधि, आपराधिक तत्व व माफिया मिलकर खुलेआम लूट रहे हैं। प्रशासन से सांठगांठ और सत्ता के संरक्षण में रेत-पत्थर व हीरे के अवैध खनन का खेल यहां पर खुलेआम चल रहा है। खनन माफिया रेत-पत्थर-हीरे के लिए तमाम नियम-कानूनों धज्जियां उड़ाते हुए नदी-पहाड़ और वन भूमि को रात-दिन खोखला करने में जुटे हैं।

जिले में खनन माफिया के अलावा भू-माफिया, शिक्षा माफिया, खाद्यान्न माफिया, वन्यजीवों के अंगों के तस्कर, सागौन तस्कर, शराब माफिया, परिवहन माफिया भी जबरदस्त तरीके से सक्रिय है। प्रदेश में सरकार चाहे जिस भी दल की रही हो पन्ना में इन माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई करने का साहस जिस भी अधिकारी ने दिखाया उसका स्थानांतरण हो गया।

थोड़ा फ्लैश बैक में जाकर देखें तो अजयगढ़ की एसडीएम रहीं सुश्री आयुषी जैन के द्वारा स्थानीय कोंग्रेस नेता भरत मिलन पाण्डेय के रेत से भरे डम्फरों को पकड़ने की कार्रवाई को लेकर हुए विवाद के बाद कमलनाथ सरकार ने उनका तबादला कर दिया था। लगभग 5-6 वर्ष पूर्व उत्तर वन मण्डल पन्ना की डीएफओ रहीं बासु कन्नौजिया ने वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए भू-माफियाओं के खिलाफ अभियान चलाया था। साथ ही खनन माफिया के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई की थी। इन सबसे मचे हड़कंप के चलते शिवराज सरकार ने आनन-फानन में बासु कन्नौजिया का पन्ना से हटा दिया था। भारतीय वन सेवा की यह महिला अधिकारी पन्ना में सालभर भी नहीं रही। इसी क्रम में ईमानदार आईएएस अफसर शेर सिंह मीना का तबादला सियासतदानों की दोगली नीति का ताजा उदाहरण हैं।
स्थानांतरण पर दी गई विदाई
जिला जनसम्पर्क कार्यालय पन्ना के द्वारा बुधवार 17 फरवरी को जारी नियमित समाचार में बताया गया है कि कलेक्टर संजय कुमार मिश्र ने पन्ना में पदस्थ रहे अनुविभागीय अधिकारी राजस्व शेर सिंह मीना (आईएएस) का पन्ना से शहडोल जिले के सुहागपुर राजस्व अनुभाग स्थानान्तरित होने पर भावभीनी विदाई दी गयी। उन्होंने श्री मीना को पुष्पगुच्छ, शाल, श्रीफल भेंटकर विदाई दी। श्री मिश्र ने इस अवसर पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भविष्य में आप एक अच्छे कलेक्टर बनने के साथ सचिव बनेंगे। आप निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर रहे। यही मेरी मंगल कामना है।

विदाई समारोह में शेर सिंह मीना ने अपने उद्बोधन में कहा कि मैं पढने के बाद प्रशासनिक सेवा में चयनित होकर पन्ना आया तब मुझे कार्यालयीन कामकाज का ज्ञान नहीं था। यहां आकर मैंने कार्यालयीन प्रक्रियाओं का ज्ञान अर्जित किया। पन्ना में अधिकारियों, कर्मचारियों का मुझे हमेशा सहयोग मिला। वरिष्ठ अधिकारियों ने मेरा निरंतर मार्गदर्शन किया, जोकि मेरे शासकीय सेवाकाल के लिए बहुत उपयोगी सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि यहां के लोग बहुत अच्छे है। उनका भी निरंतर सहयोग मिलता रहा है। कार्यक्रम में अपर कलेक्टर जे.पी. धुर्वे के साथ नवीन कलेक्ट्रेट भवन में स्थित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
इनका कहना है —
“हमारी सरकार कथनी-करनी में कहीं कोई अंतर नहीं है, सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों के स्थानांतरण होना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है। शेर सिंह मीना जी का स्थानांतरण भी इसी प्रक्रिया तहत हुआ है, इसमें कहीं कोई असमान्य बात नहीं है। यह कहना पूर्णतः गलत व निराधार है कि मीना जी का तबादला हमारी पार्टी के नेता के खिलाफ फैसला देने की वजह से हुआ है। फैसला तो उन्होंने तथ्यों व कानून के आधार पर दिया है। पन्ना में माफिया के खिलाफ जहां तक कार्रवाई का सवाल है तो वह आगे भी जारी रहेगी।”
– रामबिहारी चौरसिया, भाजपा जिलाध्यक्ष पन्ना।
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बेशक़ीमती भूमि के विवाद मामले में आया बड़ा फैसला, गरीब आदिवासियों की जमीनें हड़पने वाले भू-माफिया को लगा तगड़ा झटका, मूल भूमिस्वामियों के नाम पर पुनः दर्ज होगी 18 एकड़ भूमि
* पन्ना के बहुचर्चित नयापुरा-मुड़िया पहाड़ भूमि प्रकरण में एसडीओ राजस्व के न्यायालय ने दिया फैसला
* आदिवासियों की जमींने हड़पकर बीजेपी नेता फर्जी तरीके से बन गया था मालिक
* भू-माफिया के खिलाफ आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध करने एसडीओपी को दिया आदेश
* न्यायालय एसडीओ राजस्व पन्ना के ऐतिहासिक फैसले का जनमानस ने किया स्वागत
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना जिला मुख्यालय के नजदीक नेशनल हाइवे क्रमांक-39 के दोनों तरफ स्थित नयापुरा-मुड़िया पहाड़ की लगभग 18 एकड़ बेशकीमती भूमि के विवाद मामले में न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी राजस्व पन्ना ने अपना फैसला सुना दिया। शेर सिंह मीना (IAS) अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, तहसील पन्ना ने अपने फैसले में कहा है कि, अंकुर त्रिवेदी पिता खुन्ना उर्फ़ अवधेश त्रिवेदी ने छल-कपट पूर्वक साम-दाम-दण्ड-भेद का इस्तेमाल कर आदिवासियों की भूमियों पर पहले कब्ज़ा किया। इसके बाद अंकुर ने अपने बंधुआ मजदूर हीरालाल आदिवासी का इस्तेमाल कर उन भूमियों को हड़प लिया।

राजस्व न्यायालय ने विवादित जमीनों (आराजियों) को उनके मूल भूमिस्वामियों (गरीब आदिवासियों) के नाम पर दर्ज करने का आदेश दिया है। जिसमें कहा गया है, तहसीलदार पन्ना आदेशानुसार (फैसले के मुताबिक) पटवारी व कम्प्यूटर अभिलेख दुरुस्त (सुधार) कराकर एक प्रति प्रकरण में संलग्न करें। विधि अनुसार मूल भूमि स्वामियों को उनकी भूमियों का कब्ज़ा दिलाएं। आवश्यकता पड़ने पर पुलिस की सहायता से कब्ज़ा दिलाने की कार्रवाई की जाए। श्री मीना ने इस मामले में एसडीओपी पन्ना को अंकुर त्रिवेदी व उनकी माँ के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध कर एफआईआर की कॉपी उनके न्यायालय में प्रस्तुत करने का आदेश भी दिया है।

बहुचर्चित भूमि विवाद मामले में न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी राजस्व तहसील पन्ना के फैसले पर स्थानीय नागरिकों ने ख़ुशी जाहिर करते हुए इसका स्वागत किया है। अधिकाँश लोगों ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि धन-बल के जोर पर फर्जीवाड़ा करके कमजोर तबके के लोगों की जमीनों को हड़पने वाले भूमाफियाओं में इससे कड़ा सन्देश जाएगा। साथ ही यह फैसला जन मानस में राजस्व न्यायालय के प्रति उनके विश्वास को और अधिक मजबूती प्रदान करने का काम करेगा। दिनाँक 11 फरवरी को पारित इस महत्वपूर्ण फैसले की खबर आने के बाद से ही लोग हर तरफ इसकी चर्चा कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि, खजुराहो सांसद एवं मध्यप्रदेश भाजपा के अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा (V.D. Sharma) के बेहद करीब माने-जाने वाले बीजेपी के दबंग नेता अंकुर त्रिवेदी पर अपने रसूख के दम पर आदिवासियों की बेशकीमती जमीनों को हड़पने के बेहद गंभीर आरोप लगे थे। यह मामला पिछले कई माह से सुर्ख़ियों में बना था। पन्ना के नजदीक नयापुरा-मुड़िया में स्थित उक्त भूमियों पर झोपड़ी बनाकर कई पीढ़ियों से रह रहे गरीब परिवारों को बेदखल करने के लिए भाजपा नेता के द्वारा दबाव बनाने एवं धमकाने के चलते प्रभावित लोगों के द्वारा चरणबद्ध आंदोलन चलाया गया।

सैंकड़ों गरीबों के आशियाने व आदिवासियों के साथ हुए अन्याय से जुड़े इस ज्वलंत मुद्दे पर पन्ना के पत्रकारों का एक बड़ा तबका पूरी तरह मौन रहा। माफियाओं की गोदी में बैठे मेन स्ट्रीम मीडिया के तथाकथित पत्रकारों की उपेक्षा के बावजूद कमजोर वर्गों के आंदोलन की गूँज से पन्ना से लेकर राजधानी भोपाल तक प्रशासनिक व सियासी गलियारे कंपित हो ऊठे। पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्य सभा सांसद दिग्विजय सिंह ने इस प्रकरण की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए प्रभावित परिवारों एवं आदिवासियों के संघर्ष में अपनी एकजुटता दिखाई साथ ही उन्हें न्याय दिलाने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखा। इस मामले की सच्चाई को सामने लाने के लिए उनके द्वारा पूर्व विधायक नन्हेलाल धुर्वे के नेतृत्व में कोंग्रेस विधायकों की एक जांच टीम को भी पन्ना भेजा गया।

राज्य सभा सांसद दिग्विजय सिंह ने कुछ समय पूर्व इस मामले में एक वीडियो सन्देश जारी करते कोंग्रेस जनों से प्रभावित आदिवासियों एवं नयापुरा-मुड़िया पहाड़ के वाशिंदों के साथ खड़े होने का आव्हान किया। बताते चलें कि इस अन्याय-अत्याचार व शोषण के खिलाफ सबसे पहले-सबसे सशक्त और मुखर आवाज पूर्व मंत्री सुश्री कुसुम सिंह मेहदेले के रूप में सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी के अंदर से ही उठी। लेकिन दबंग भाजपा नेता अंकुर की प्रदेश स्तर पर सत्ता-संगठन में शीर्ष स्तर पर पैठ के चलते उनके विरोध का कुछ ख़ास असर नहीं हुआ। वहीं कोंग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने जब इस मुद्दे पर सक्रियता दिखानी शुरू की तो भाजपा के खेमे में खलबली मचने लगी। इधर, कथित तौर अंकुर को प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से संरक्षण दे रहे बीजेपी के बड़े नेताओं पर प्रदर्शनकारियों के द्वारा खुलकर गंभीर आरोप लगाने के चलते सत्ता-संगठन भी बैकफुट पर आ गया।

नयापुरा-मुड़िया पहाड़ के लोगों के आंदोलन का नेतृत्व कर रहे उच्च शिक्षित युवा बृजेश गौतम व अन्य प्रभावित आदिवासी जमीन हड़पने के इस मामले को अनुविभागीय अधिकारी राजस्व पन्ना के न्यायालय में ले गए। इनके द्वारा मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा-115 खसरे में अवैध प्रविष्टि के तहत मौजा पन्ना की आराजी खसरा नंबर 1235/01, 1235/02, 239, 251, 252, 260, 360, एवं 1211 के संबंध में संबंध आपत्ति प्रस्तुत की गई। जिसमें अनावेदक हीरालाल पिता करताली गौंड़ निवासी रानीबाग हाल नयापुरवा पन्ना, अंकुर त्रिवेदी पिता खुन्ना उर्फ़ अवधेश त्रिवेदी व सुमिला पत्नी खुन्ना उर्फ़ अवधेश त्रिवेदी निवासी रानीबाग पन्ना पर छल-कपट पूर्वक उक्त आराजी (भूमि) पर कब्ज़ा करने का आरोप लगाया गया।
फैसले का निष्कर्ष

नयापुरा-मुड़िया पहाड़ में स्थित करोड़ों रूपये मूल्य की बेशकीमती भूमियों के विवाद के मामले की तह तक जाकर दस्तावेजों की गहनता से पड़ताल करने, भूमि के क्रय-विक्रय में अपनाई गई प्रक्रिया की वैधानिकता को जांचने-परखने, आवेदकों की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों, हितबद्ध पक्षकारों तथा बंधुआ मजदूर हीरालाल गौंड़ (आदिवासी) के कथनों पर गौर करने के पश्चात न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी राजस्व तहसील पन्ना ने अपना फैसला सुनाया है। इस अहम फैसले में कहा गया है कि सम्पूर्ण भूमि के क्रय-विक्रय में अंकुर त्रिवेदी के द्वारा छल-कपट पूर्वक साम-दाम-दण्ड-भेद का इस्तेमाल कर डर-भय दिखाकर पहले जमीनों में कब्ज़ा किया गया फिर आदिवासियों से हीरालाल गौंड़ (आदिवासी) बंधुआ मजदूर के नाम पर अंकुर त्रिवेदी के द्वारा भूमि क्रय की गई।
जांच में फर्जी पाया गया नामांतरण
मौजा पन्ना की भूमि खसरा नंबर 251, 252 रकवा 0.016 व 0.08 हेक्टेयर बाला प्रसाद तनय भगोला गौंड़ के नाम थी। इस मामले की जांच में यह तथ्य प्रकाश में आया है कि भूमि का विक्रय पत्र निष्पादित है किन्तु नामांतरण फर्जी है। पन्ना मौजा की भूमि खसरा नम्बर 1235/2 रकवा 4.047 मध्यप्रदेश शासन की भूमि थी। इसका पट्टा दशरथ तनय मराखन गौंड़ को पूर्व में प्राप्त हुआ था। उक्त भूमि का विक्रय पत्र निष्पादित नहीं हुआ केवल फर्जी प्रविष्टि (एंट्री) से नामांतरण दर्ज कराया गया। दरअसल, पूर्व की प्रविष्टि फर्जी व अवैधानिक है इस कारण उसके बाद की सभी प्रविष्टियों की कोई वैधानिकता नहीं होने से शून्यवत हैं।
95 लाख की जमीन बेंची लेकिन रुपए नहीं मिले

हीरालाल गौंड़ कथनानुसार फैसले में उल्लेख किया गया है कि भूमि के क्रय-विक्रय में उसे एक भी पैसा नहीं दिया गया। उसको यह भी जानकारी नहीं दी गई कि कौन सी भूमि खरीदी-बेंची जा रही है। हीरलाल के अनुसार उक्त जमीनें उसके नाम पर अंकुर त्रिवेदी ने अपना पैसा लगाकर उसकी बिना जानकारी के छल पूर्वक क्रय करवाई। महत्वपूर्ण बात यह है कि विक्रय पत्रों (रजिस्ट्री दस्तावेजों) के अनुसार 95.5 लाख की जमीन हीरालाल गौंड़ की अंकुर त्रिवेदी ने अपने नाम कराई। लेकिन उसे डरा-धमकाकर हस्ताक्षर करा लिए और राशि नहीं दी गई। हीरालाल को राशि देने का कोई सबूत भी नहीं है। यह तथ्य उसने अपने बयानों में उजागर किए।
बंधुआ मजदूर हीरालाल ने वनाधिकार अधिनियम अंतर्गत वन भूमि का पट्टा प्राप्त करने के लिए आवेदन पत्र प्रस्तुत किया है जिसमें उसने स्वयं को भूमिहीन बताया है। इस तरह प्रकरण में मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 (संशोधन अधिनियम 2018) के विभिन्न प्रावधानों का उल्लंघन किया गया। इस आधार पर उक्त भूमि मूलतः आवेदक/हितबद्ध पक्षकार को वापस कर कब्ज़ा दिलाने का आदेश पारित किया गया है।
इन्हें वापस मिलेगी बेशकीमती जमीनें
अनुविभागीय अधिकारी राजस्व तहसील पन्ना शेर सिंह मीना (IAS) ने राजस्व प्रकरण क्रमांक/0016/अ-6-अ/2020-21 में दिनाँक 11 फरवरी को फैसला सुनाते हुए आदेश पारित किया है कि मौजा पन्ना की भूमि खसरा नम्बर 251, 252 रकवा 0. 016 व 0.08 हेक्टेयर पर अंकुर त्रिवेदी पिता अवधेश त्रिवेदी का नाम निरस्त कर मूल भूमिस्वामी दसिया गौंड़ के वारिश दारा गौंड़ पिता बाला गौंड़, अग्गनबाई, कल्ली बाई पुत्री बाला गौंड़ के नाम दर्ज की जाए।

मौजा पन्ना की भूमि खसरा नम्बर 1235/2 रकवा 4.047 हेक्टेयर पर अंकुर त्रिवेदी पिता अवधेश उर्फ़ खुन्ना त्रिवेदी व सुमिला त्रिवेदी का नाम निरस्त कर मूल भूमिस्वामी गिल्ली बेवा दशरथ के वारिस ठुठिया किशन तनय शंभुवा, गेंदाबाई पुत्री दशरथ गौंड़ के नाम दर्ज करने का आदेश पारित किया गया। इसी तरह मौजा पन्ना की भूमि खसरा नम्बर 239, 260 रकवा 0.547 व 0.073 हेक्टेयर पर अंकुर त्रिवेदी के बजाए मूल भूमिस्वामी सुरेश, स्वरूप, रामखिलावन पिता शारदा, कल्लूबाई, राजबाई, गीताबाई, पुत्री शारदा गौंड़ फग्गी बेवा शारदा गौंड़ के नाम दर्ज करने का आदेश पारित किया।

मौजा मनौर की भूमि खसरा नम्बर 24/2 रकवा 1.132 हेक्टेयर पर अंकुर के बजाए मूल भूमिस्वामी रामआसरे पिता दयाराम गौंड़ शासकीय पट्टेदार के नाम पर दर्ज करने का आदेश दिया है। इसके आलावा मौजा पन्ना की भूमि खसरा नम्बर 1211 रकवा 0.506 हेक्टेयर पर अंकुर त्रिवेदी पिता अवधेश त्रिवेदी की बजाए मूल भूमिस्वामी नंदुवा तनय बसोरा कोंदर के नाम पर दर्ज करने तथा तहसीलदार पन्ना को आदेशानुसार पटवारी अभिलेख एवं कम्प्यूटर अभिलेख दुरुस्त कराकर एक प्रति प्रकरण में संलग्न करने के आदेश दिए हैं। साथ ही मूल भूमि स्वामियों को उनकी भूमि का कब्ज़ा आवश्यकता पड़ने पर पुलिस बल की सहायता से दिलाने की कार्रवाई करने का भी आदेश भी पारित किया गया।

शेर सिंह मीना (IAS) अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, तहसील पन्ना के इस बेहद अहम फैसले के आने के बाद से पन्ना के ऐसे तमाम सफेदपोश लोगों व माफियाओं की धड़कनें तेज़ हो गई हैं जोकि लंबे समय से गरीब-कमजोर वर्गों का हक़ दबाकर बैठे हैं या फिर उनके नाम पर खदान, दूकान, मकान, बैंक लोन, पेट्रोल पंप जमीन सहित तमाम चल-अचल संपत्ति का स्वयं उपभोग कर रहे हैं। पन्ना के युवा अधिवक्ता एवं भ्रष्टाचार विरोधी मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष शैलेष विश्वकर्मा का कहना है यह फैसला ऐसे तमाम कमजोर लोगों को शोषण व अन्याय के खिलाफ अपने अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायालय की शरण में जाने को प्रेरित करेगा।वहीं इस फैसले के संबंध में भाजपा नेता अंकुर त्रिवेदी से उनकी प्रतिक्रिया जानने के लिए मोबाइल पर जब सम्पर्क किया गया तो उन्होंने कोई भी टिप्पणी करने से साफ़ इंकार कर दिया।
कलेक्ट्रेट के बाहर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे छात्र-छात्राओं से देर रात बात करने भारी पुलिस बल लेकर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारी

* कोरोना संक्रमण के कारण कई माह से बंद पड़े छात्रावासों को खोलने की मांग कर रहे हैं छात्र
* हड़ताल समाप्त कराने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों पर दवाब बनाने का लगाया आरोप
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्यप्रदेश में कोरोना संकट के चलते लगभग एक साल से बंद पड़े छात्रावासों को खोलने की मांग को लेकर पन्ना जिला मुख्यालय में आरक्षित वर्गों के छात्र-छात्राएं मंगलवार 16 फरवरी से नवीन कलेक्ट्रट के बाहर स्थित यात्री प्रतीक्षालय में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ हैं। पन्ना में कल देर शाम मौसम के मिजाज आए में बदलाव के चलते अचानक बारिश होने व ठण्ड बढ़ने के मद्देनजर हड़ताल कर रहे छात्रों को लेकर चिंतित जिले के प्रशासनिक मुखिया कलेक्टर संजय कुमार मिश्र मध्य रात्रि में उनसे बात करके हड़ताल को समाप्त कराने दल-बल के साथ पहुंचे। लेकिंन वे स्वयं छात्र-छात्राओं से सीधे बात करने के लिए उनके पास नहीं गए बल्कि अपर कलेक्टर जे.पी. धुर्वे से संदेश भेजकर हड़ताल पर बैठे छात्र-छात्राओं को संयुक्त कलेक्ट्रेट में स्थित अपने कक्ष में चर्चा करने के लिए बुलाया।
देर रात हड़ताली छात्रों ने जब वहां जाकर बात करने से इंकार किया तो साहब का संदेशा लेकर आए प्रशासनिक अधिकारी कथित तौर पर नाराज हो गए। छात्रों की मनाही से प्रशासनिक अफसरों के अहम व रुतबे को इतना जोर का झटका लगा कि अगले ही पल उनका रवैया ही अप्रत्याशित रूप से बदल गया।
हड़ताली छात्रों का आरोप है कि जिला प्रशासन के द्वारा भूख हड़ताल रुपी अहिंसक व शांतिपूर्ण प्रतिरोध को समाप्त कराने के लिए उनके ऊपर अनुचित दवाब डाला गया। मौके पर मौजूद भारी पुलिस बल का भय दिखाकर जबरन हड़ताल से उठाने की कोशिश की गई। इतना ही नहीं उनके माता-पिता को भी कॉल करके पर डराया-धमकाया गया। हलाँकि इन तमाम हथकंडों को आजमाने के बावजूद मध्य रात्रि के सन्नाटे लिखित आश्वासन के बगैर हड़ताल को समाप्त कराने प्रशासन सफल नहीं हो सका। अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का नेतृत्व कर रहे युवा छात्र नेता संजय अहिरवार ने मंगलवार-बुधवार की मध्य रात्रि के घटनाक्रम को लेकर जिला प्रशासन के रवैए की कड़ी आलोचना की है।
संजय के अनुसार दरम्यानी रात जन के ऊपर तंत्र के द्वारा अपनी इच्छा को जबरिया थोपने का प्रयास किया गया। प्रशासन का यह कृत्य घोर निंदनीय है। उनका कहना है कि भारत का संविधान देश के प्रत्येक नागरिक को विचार की अभिव्यक्ति के अधिकार के तहत शांतिपूर्ण तरीके से धरना-प्रदर्शन करने का हक प्रदान करता है। कानून के दायरे में रहकर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन का अधिकार हर नागरिक का लोकतांत्रिक व संवैधानिक अधिकार है। लेकिन मंगलवार-बुधवार की रात इसे हमसे छीनने की कोशिश की गई। राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी व अन्य महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और क्रांतिकारियों ने देश को अंग्रेजों की गुलामी से आजादी दिलाने के लिए उपवास/भूख हड़ताल को आंदोलन का एक शक्तिशाली अस्त्र बना बनाया था।
संजय पूंछते हैं कि हम छात्र-छात्राएं अपने अधिकार को पाने के लिए आज अगर शांतिपूर्वक भूख हड़ताल कर रहे हैं तो इसमें गलत क्या है। वे स्वयं ही इसका जवाब देते हुए तंज भरे अंदाज में कहते हैं दरअसल, “आंदोलनजीवी अर्थात परजीवी” वाली संकीर्ण सोच मौजूदा व्यवस्था (तंत्र) के अंतर्मन में गहरे तक बैठ चुकी है। इसलिए बीती रात जो कुछ हुआ वह आजादी के 70 साल बाद संविधान और लोकतंत्र के मूल्यों से इतर गढ़े जा रहे “न्यू इण्डिया” में नागरिक अधिकारों व अहिंसक प्रतिरोध के दमन की मानसिकता का ही सूचक है। हड़ताली छात्र-छात्राओं का कहना है कि हम इसका लोकतांत्रिक तरीके से मुकाबला करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
सिनेमाघर खुल सकते हैं तो छात्रावास क्यों नहीं …










