दुखद घटना : युवक ने ससुर से फोन पर कहा “उमा और मैं जा रहे हैं”, थोड़ी देर बाद फांसी के फंदे पर लटके मिले पति-पत्नी के शव

* नव दंपत्ति ने अज्ञात कारणों के चलते लगाई फांसी
* पन्ना जिले के धरमपुर थाना क्षेत्र के ग्राम भोंदू की चक्की की घटना
मुस्तक़ीम खान, अजयगढ़ /पन्ना। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में आज एक अत्यंत ही दुखद घटना सामने आई है। जिले के धरमपुर थाना अंतर्गत ग्राम भोंदू की चक्की में एक नव दम्पति ने अज्ञात कारणों के चलते कथित तौर आत्महत्या कर ली। घर के अंदर पति-पत्नी के शव फांसी के फंदे पर लटके हुए मिले। प्रारंभिक जांच के आधार पर पुलिस घटना को आत्महत्या बता रही है लेकिन फिलहाल यह पता नहीं चल सका है कि, आखिर ऐसी क्या वजह थी जिसके कारण विवाहित जोड़े को जान देने के लिए मजबूर होना पड़ा। पुलिस ने घटना पर मर्ग कायम कर मामले को जांच में लिया है। पति-पत्नी की मौत की खबर आने के बाद से क्षेत्र में शोक की लहर व्याप्त है। वहीं दोनों के इस कदम में उनके परिजन स्तब्ध और ग़मगीन हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरुवार 11 मार्च को राजेन्द्र उर्फ़ भूरा लोधी 23 वर्ष एवं उसकी पत्नी उमा लोधी 22 वर्ष निवासी ग्राम भोंदू की चक्की अपने घर पर थे। जबकि परिवार के अन्य सदस्य खेत गए हुए थे। दोपहर में लगभग 3:30 बजे जब परिवार के सदस्य घर पहुंचे तो अंदर राजेन्द्र व उमा को एक साथ एक ही रस्सी के सहारे फांसी के फंदे पर लटका हुआ देख उनके होश उड़ गए। परिजनों की चींख-पुकार सुनकर पड़ोसी तुरंत मौके पर पहुंचे लेकिन दोनों की सांसें पहले ही थम चुकीं थीं।
नजदीकी ग्राम बहिरवारा निवासी उमा के पिता ने जानकारी देते हुए बताया कि उनकी बेटी का विवाह करीब 2 वर्ष पूर्व राजेन्द्र के साथ हुआ था। उनके अनुसार, राजेन्द्र शराब पीने का आदी था और नशे की हालत में अक्सर अपनी पत्नी से झगड़ा करता था। दो वर्ष के वैवाहिक जीवन में उनको कोई संतान नहीं हुई। उमा के पिता ने बताया कि राजेन्द्र ने आखिरी बार फोन करके उनसे कहा था कि, उमा और मैं जा रहे हैं। लेकिन वह अपने दामाद की बात को समझ नहीं सके। आज जब दोनों की मौत की दुखद खबर आई तो पहले उन्हें यकीन ही नहीं हुआ। दरअसल, उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि राजेन्द्र और उमा सबको छोड़कर हमेशा के लिए इस तरह से चले जाएंगे। इस नव दंपत्ति के परिजन उनके द्वारा आत्मघाती कदम उठाने के फैसले को लेकर स्तब्ध और परेशान। गम और आंसुओं के सैलाब में डूबे परिजन कभी खुद से तो कभी संवेदना व्यक्त करने पहुँचने वाले परचितों से लिपट कर सिर्फ एक ही सवाल पूँछ रहे हैं, राजेन्द्र और उमा ने आखिर ऐसा क्यों किया ? इसका जबाव फिलहाल किसी के पास नहीं है।
नायब तहसीलदार ने की पंचनामा कार्रवाई

नव विवाहित दंपत्ति के द्वारा आत्महत्या करने के की तहरीर मिलने पर अजयगढ़ से नायब तहसीलदार धीरज गौतम तुरंत मौके पर पहुंचे। वहाँ पहले से मौजूद धरमपुर थाना पुलिस की सहायता से उनके द्वारा पंचनामा कार्रवाई पूर्ण कराई गई। तत्पश्चात पुलिस के द्वारा दोनों शवों का पोस्टमार्टम कराने के लिए उन्हें अजयगढ़ रवाना किया गया। समाचार लिखे जाने तक शवों का पोस्टमार्टम नहीं हुआ था। धरमपुर थाना प्रभारी सुधीर कुमार बैगी ने जानकारी देते हुए बताया कि फिलहाल इस घटना पर मर्ग कायम किया गया है। घटना के कारणों का पता लगाने के लिए प्रकरण की सूक्ष्मता से जांच की जा रही है। थाना प्रभारी ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आने तथा जांच पूर्ण होने पर घटना के कारणों का खुलासा होने संभावना जताई है।
MP : खनिज मंत्री के जिले में खनन माफ़िया की “गुण्डागर्दी”

* रेत के परिवहन को लेकर ट्रक चालक व मालिक को दर्जनभर लठैतों ने दिनदहाड़े बेरहमी से पीटा
* घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर हुआ वायरल, मामले की जानकारी देने से पुलिस कर रही आनाकानी
* पन्ना में बहुमूल्य खनिज संपदा को खुलेआम लूटने के साथ-साथ भय और आतंक फैला रहे रेत माफिया
* सड़क निर्माण कर रही रामरज कंपनी ने किसानों के खेतों पर कब्ज़ा कर जबरन खोद डाली खदान
* पूर्व में रेत माफिया से परेशान दलित महिला ने कलेक्ट्रेट कार्यालय में किया था आत्मदाह का प्रयास
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कुछ समय पूर्व माफिया तत्वों को अलग अंदाज में सख्त चेतावनी देते हुए कहा था, “मध्यप्रदेश छोड़ दो, नहीं तो जमीन में 10 फुट नीचे गाड़ दूंगा, कहीं पता भी नहीं चलेगा।” होशंगाबाद जिले के बाबई में सुशासन दिवस के अवसर पर दिए गए अपने चर्चित भाषण में सीएम शिवराज ने कहा था, “आजकल अपन खतरनाक मूड में है, गड़बड़ करने वालों को छोड़ेंगे नहीं, आजकल मामा फार्म में है। दादा, गुंडे, बदमाश ये अब कोई नहीं चलने वाला है, ये सुशासन है।”
मुख्यमंत्री की इतनी स्पष्ट व सख्त चेतावनी के बाद भी मध्य प्रदेश में माफियाओं और अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। अगर यकीन नहीं होता तो पन्ना जिले के वायरल वीडियो को देख लें। यह तो सिर्फ एक नमूना है। बुंदेलखण्ड अंचल के अति पिछड़े पन्ना जिले में हावी खनन माफिया इस जिले को खोखला करने के अभियान में पूरी क्षमता साथ जुटे हैं। नियम-कानूनों की खुलेआम धज्जियां उड़ाते खनन माफियाओं ने रेत व पत्थर के लिए एक ओर जहां बड़े पैमाने पर लूट मचा रखी है वहीं दूसरी तरफ उनके द्वारा भय और आतंक फैलाकर कानून व्यवस्था को खुलेआम चुनौती भी दी जा रही है। जिले में सड़क निर्माण कर रही रामरज कंस्ट्रक्शन कंपनी जोकि लंबे समय से अवैध खनन के आरोपों से घिरी है, उस पर अब कचौरी ग्राम के दलित किसानों ने उनकी निजी भूमि पर जबरन कब्ज़ा कर खदान खोदने का गंभीर आरोप लगाया है।

पीड़ित किसानों ने पन्ना पहुंचकर कलेक्टर संजय कुमार मिश्र को बताया कि अवैध खनन को रोकने पर कम्पनी के कर्मचारियों के द्वारा उन्हें जान से मारने की धमकी दी जा रही है। पूर्व में इसी तरह के एक अन्य प्रकरण में रेत माफिया के आतंक से परेशान दलित महिला ने पन्ना के कलेक्ट्रेट परिसर में अपने ऊपर मिट्टी तेल (केरोसीन) डालकर आत्मदाह करने का प्रयास किया था। विचलित करने वाली इन चंद घटनाओं से पन्ना में निरंकुश खनन माफियाओं के कारण पैदा हुए बेहद चिंताजनक हालात सहज अनुमान लगाया जा सकता है।
वायरल वीडियो में क्या है .. ?
शिवराज सरकार के सुशासन की सड़क पर सरेआम धज्जियां उड़ाते रेत माफिया के लठैतों (गुर्गों) का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल है। जिसमें करीब दर्जन भर लठैत सड़क में पड़े एक युवक को घेरे हुए खड़े हैं और उसे गालियां देते हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो में दो ट्रक भी दिख रहे हैं।

वीडियो को लेकर चर्चा है कि इसे पन्ना जिले के बृजपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत लुहरहाई चेक पोस्ट के आसपास शूट किया गया। जहां शनिवार 6 मार्च की सुबह एक ट्रक में लोड रेत के परिवहन को लेकर ट्रक चालक व चेक पोस्ट पर तैनात रेत ठेकेदार के कर्मचारियों के बीच कहासुनी होने की भनक लगने पर बोलेरो वाहन में सवार होकर आए लठैतों (बाउंसरों) ने सरेआम गुंडागर्दी करते हुए ट्रक चालक व ट्रक मालिक को बड़ी ही बेरहमी से पीटा। मारपीट में गंभीर रूप से घायल युवकों की पहचान एहसान खान पिता रऊफ खान 27 वर्ष एवं ट्रक मालिक इरफान बख्श पिता जामिन 28 वर्ष दोनों निवासी ग्राम अमरछी थाना धरमपुर जिला पन्ना के रूप में हुई है।
रेत से लोड ट्रक को तुरंत न रोकने पर हुआ विवाद
उपचार के लिए पन्ना के जिला चिकित्सालय में भर्ती हुए पीड़ितों ने बताया कि 6 मार्च को अजयगढ़ (पन्ना) की जिगनी खदान से ट्रक में रेत लोड करके वैध पिटपास लेकर पहाड़ीखेरा होते हुए नागौद जिला सतना जा रहे थे। रास्ते में लुहरहाई घाटी पर सुबह लगभग 6 बजे रेत ठेकेदार रश्मीत मल्होत्रा के कर्मचारियों ने ढलान पर गाड़ी रोकनी चाही, जहां पर ट्रक को रोकने से कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती थी। इसलिए ट्रक को आगे बढ़ाकर समतल जगह पर रोका गया। इससे नाराज रश्मीत मल्होत्रा के गुर्गे बोलेरो में सवार होकर आए और रास्ते में ट्रक को रोककर चालक के साथ मारपीट करने लगे। ट्रक मालिक इरफान बख्श ने बीच-बचाव करने का प्रयास किया तो लठैतों ने उसे भी जमकर पीटा। घायलों की ओर से नजदीकी पुलिस चौकी पहाड़ीखेरा पहुँचकर घटना की रिपोर्ट लिखाई गई। बाद में उन्हें इलाज हेतु पन्ना लाकर भर्ती कराया गया। पन्ना जिले की पुलिस और मीडिया ने इस घटनाक्रम को लेकर चुप्पी साध रखी है।
खनन माफिया के सामने जिम्मेदार नतमस्तक

आम आदमी पार्टी के जिला उपाध्यक्ष एवं पन्ना सीट से विधानसभा चुनाव लड़ चुके रामबिहारी गोस्वामी ने बताया कि मैंने इस घटना का वीडियो, घायल ट्रक चालक व ट्रक मालिक के बयान वाले वीडियो को विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर पोस्ट किया साथ ही कई पत्रकारों भी व्यक्तिगत तौर भेजा। वीडियो एवं मैटर को सीन व रीड करने के बाद अधिकांश अखबार या न्यूज़ चैनल में खबर नहीं आई। रामबिहारी कहते हैं, इससे एक बार फिर साबित हो गया है कि, जिले में सक्रिय रेत माफिया के सामने प्रशासन व पुलिस के साथ-साथ स्थानीय मीडिया भी पूरी तरह नतमस्तक है। साल भर पहले तक रेत के अवैध कारोबार के खिलाफ सोशल मीडिया से लेकर अख़बारों-न्यूज़ चैनलों में जमकर हल्ला बोलने वाले पत्रकारों को खुलेआम जारी रेत की लूट अब नजर ही नहीं आती। जबकि रेत ठेकेदार के रूप में पन्ना आए रेत माफिया रसमीत मल्होत्रा ने पिछले 9 माह से जिले में रेत की अब तक सबसे बड़ी लूटपाट मचा रखी है। इस रसूखदार माफिया को सत्ता का खुला संरक्षण प्राप्त होने से जिम्मेदार तमाशबीन बने केन नदी की विनाशलीला में अपना लाभ देख रहे हैं।
न्याय पाने के लिए दर-दर भटक रहे गरीब किसान

जिले की शाहनगर तहसील के दूरस्थ ग्राम कचौरी से बुधवार 9 मार्च को पन्ना पहुंचे दलित किसानों ने यहां संयुक्त कलेक्ट्रेट भवन में कलेक्टर संजय कुमार मिश्र को सड़क निर्माता कंपनी रामराज कंस्ट्रक्शन के खिलाफ शिकायती आवेदन पत्र देते हुए बताया कि उनकी पैतृक कृषि भूमि पर सड़क कंपनी के द्वारा जबरन कब्ज़ा कर गिट्टी के लिए पत्थर का अवैध उत्खनन किया जा रहा है।
गरीब किसानों के खेतों को सड़क निर्माता कंपनी ने पूरी तरह उजाड़ कर पत्थर खदान में तब्दील कर दिया है। शाहनगर में बैठने वाले तहसील स्तरीय अधिकारियों से इन किसानों ने कई बार गुहार लगाई लेकिन उनकी शिकायत पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। पीड़ित किसानों का आरोप है, कंपनी के रसूख के चलते उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। खेतों में अवैध खनन करने से रोकने पर उन्हें कम्पनी के कर्मचारियों द्वारा जान से मारने की धमकी दी जा रही है। किसानों का कहना अगर खेत न बचे तो उनके परिवार के सामने भूखों मरने की नौबत आ सकती है।
दलित महिला ने डाल लिया था कैरोसीन

मालूम हो कि पन्ना जिले में रेत की अधिकांश खदानें पन्ना विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत केन नदी पर स्थित हैं। यह इलाका मध्य प्रदेश के खनिज एवं श्रम विभाग के मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह का निर्वाचन क्षेत्र है। इस क्षेत्र में सक्रिय रेत माफिया के बढ़ते आतंक का सहज अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि लगभग दो माह पूर्व एक दलित महिला संतोष कुमारी पति कामद रजक इतनी मजबूर हो गई थी कि उसने पन्ना के संयुक्त कलेक्ट्रेट परिसर में अपने ऊपर मिट्टी तेल (कैरोसीन) डालकर आत्मदाह करने का प्रयास किया था। मौके पर मौजूद कतिपय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए इस महिला को खुद को आग के हवाले करने से रोक दिया था। छतरपुर जिले की चंदला तहसील के ग्राम हिनौता की रहने वाली संतोष कुमारी का खेत केन नदी के इस पार पन्ना के बीरा ग्राम में स्थित है।

अपनी जीवनलीला समाप्त करने का प्रयास करने वाली इस महिला ने कलेक्टर के नाम पर दिए गए आवेदन पत्र में आरोप लगाया था कि उसके खेत में लगी फसल को उजाड़कर आपराधिक तत्व बब्लू सिंह पिता राम सिंह ठाकुर निवासी सिमरदा तहसील अजयगढ़ जिला पन्ना के द्वारा जबरन मशीनों के जरिए रेत का अवैध खनन किया जा रहा है। मना करने पर उसे जान से मारने की धमकी दी जा रही है। इस मामले में पीड़िता ने नायब तहसीलदार पर भी बेहद गंभीर आरोप लगाए थे।

अन्याय-अत्याचार के आगे बेबश और असहाय दलित महिला को जब अजयगढ़ के अधिकारियों से किसी तरह की किसी तरह की कोई मदद नहीं मिली तो इससे उपजी हताशा-निराशा के चलते पन्ना के कलेक्ट्रेट में उसने खुद को आग लगाने की कोशिश की थी। विचलित करने वाली इस घटना को उस समय भी पन्ना के मेन स्ट्रीम मीडिया ने पूरी तरह से दबा दिया था। अपवाद स्वरूप एक-दो समाचार पत्रों ने ही इस खबर को प्रकाशित किया। उधर, जिला प्रशासन ने इस मामले में अपनी तरफ उंगली उठने की आशंका को देखते हुए आत्महत्या की कोशिश करने के घटनाक्रम को ही पूरी तरह से नकार दिया था।

बहरहाल इन घटनाओं से एक बात स्पष्ट है कि पन्ना जिले में खनन माफिया व आपराधिक तत्वों को प्रत्यक्ष-परोक्ष तौर पर खुला संरक्षण मिल रहा है। शायद इसी का दुष्परिणाम है कि माफिया खनिज संपदा को लूटने के साथ-साथ आज कानून व्यवस्था को खुलेआम चुनौती दे रहे हैं। जिससे मुख्यमंत्री के द्वारा माफियाओं को दी गई चेतावनी मजाक बन चुकी है। उल्लेखनीय है कि इन घटनाओं के संबंध में रामराज कंस्ट्रक्शन कंपनी एवं रसमीत मल्होत्रा के मैनेजर से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।
इनका कहना है –
“ट्रक चालक व ट्रक मालिक के साथ हुई मारपीट की रिपोर्ट पहाड़ीखेरा चौकी पर आईपीसी धारा 323 के तहत दर्ज की गई है। आरोपियों के नाम व संख्या की मुझे जानकारी नहीं है, आप चाहें तो सूचना के अधिकार के तहत आवश्यक जानकारी ले सकते हैं। फिलहाल इस मामले में दोनों पक्षों का आपसी समझौता हो चुका है।”
– बीकेएस परिहार, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, जिला पन्ना।

“इन घटनाओं की मुझे जानकारी नहीं है, आपने बात संज्ञान में लाई है, इस संबंध में कलेक्टर से जानकारी प्राप्त कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाएगी।”
– बृजेन्द्र प्रताप सिंह, मंत्री, खनिज एवं श्रम विभाग मध्यप्रदेश।
वीडियो को देखने के लिए क्लिक करें-
इस साल भी वही…. हम पाखंडी जनम जनम के !
महिला दिवस विशेष /जयराम शुक्ल (वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तम्भकार) संपर्कः 8225812813
“लछमी देवी दर दर भटकें
बेबस निर्धन चार टके को
दुर्गा पर गुंडे लहटे हैंं निर्बल
अबला जान समझ के।
सरस्वती को दिया मजूरी
डाट दपटकर बेलदार ने,
लिया अँगूठा मस्टर बुक पर
काटपीट कर ठेकेदार ने।
मातृशक्ति का पर्व मनाते जाएं हम हर वर्ष,
रातजागरण, भजनकीर्तन क्या बढि़या उत्कर्ष।”
कई साल पहले महिला सशक्तीकरण विषय पर आयोजित भाषण प्रतियोगिता में एक छात्रा ने कुछ ऐसी ही टूटी फूटी कविता के साथ बोलना शुरू किया था। मैं निर्णायक था। इस छात्रा के बोलने के बाद मैंने अनाधिकार ही घोषणा कर दी कि अब इससे ज्यादा बोलने को कुछ नहीं बचा। प्रतियोगिता सरकारी थी लिहाजा आयोजक यह उम्मीद लगाए बैठे थे कि लाड़ली लक्ष्मी, से लेकर महिलाओं से जुड़ी जितनी योजनाएं हैंं प्रतिभागीगण उस पर बोलेंगे। कई छात्राएं तैयारी के साथ अच्छा बोलीं भी,कि सरकार क्या क्या कर रही है, पर उस छात्रा ने नाम के प्रतीकों को जोड़कर महिलाओं की स्थिति को जो सहज बयान किया वह अंतस को झिंझोड़ देने वाला रहा।
अगले पखवाड़े से मातृशक्ति का नौ दिन का पर्व चल शुरू होगा। इसके कुछ माह बाद वैभव की देवी लक्ष्मी मैय्या की दीवाली आएगी। फिर वसंत पंचमी को हम सरस्वती पूजन करेंगे। यह सनातन से करते आ रहे हैं और आगे भी इसी उत्साह और पवित्रता के साथ करते जाएंगे। दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती यही तीन नाम हैं जो हम लोग अपनी बच्चियों का सबसे ज्यादा रखते हैं। नए जमाने में इन नामों के पर्यायवाची ढूंढ के रखते हैं। एक शक्ति की देवी, मधुकैटभ विध्वंसिनी, महिषासुरमर्दनी, रूप, यश, शक्तिदायनी। एक ऐश्वर्य, वैभव की देवी गरीबों का छप्पर फाड़कर धनधान्य से भर देने वाली। एक ग्यान,मेधा बुद्धि,चातुर्य की अधिष्ठात्री। वेद, पुराण कथाओं में अद्भूत बखान है इन देवियों का। कथाओं में तो ये ब्रह्मा, विष्णु, महेश तीनों को अपनी अँगुलियों में नचाए रखती हैं। यह सब कहानियां युगों से चलती चली आ रही हैं।
जिस देश में मातृशक्ति की इतनी महत्ता रही हो उस देश को तो कायदे से स्वर्ग होना चाहिए। महिलाओं की स्थिति हर दृष्टि से विश्व में सर्वोपरि होनी चाहिए। पर है क्या..? चलिए ये भी जानें। दुनिया के प्रायः सभी समर्थ देशों ने पर्यटन पर जाने वाली अपनी महिला नागरिकों को यह एडवायजरी जारी कर रखी है कि यदि वे भारत जाएं तो जरा सँभल के। विश्व में हमारी ख्याति महिलाओं पर बुरी नजर रखने वालों की है, यानी कि वे हमें अव्वल दर्जे के दुष्कर्मी मानते हैं । कब क्या घटित हो जाए भगवान जाने। और अब तो भगवान के आगे ही उनके नाम से घटित हो जाता है। जेल में गुरमीत उर्फ राम उर्फ रहीम उर्फ सिंह उर्फ इंशा की चर्बी अभी तक अच्छे से पिघल भी नहीं पाई कि एक फलाहारी बाबा आ गए। वे भी नारी..उद्धार करते पकड़े गए। कई बाबा लोग जेल में हैं। मुहिम चले तो नब्बे फीसदी जेल पहुंच जाएं। एक बाबा प्रवचन दे रहे ..यत्र नारी पूज्यन्ते तत्र रमंते देवताः..हम लोगों को देवता ही समझो..नारी में रमने का हमें आदियुग से अधिकार प्राप्त है। अब हम देख रहे हैंं कि जेल जाने से पहले तक अपनी अपनी गुफाओं में कैसे रमे रहते हैं।
जो नारी शक्ति की प्रतीक है वह इतनी निर्बल, बेबस। इतने तो जानवर भी नहीं। अभी भी स्त्रीधन, भोग की वस्तु। कहीं भी,कभी भी, कोई भी। मधुकैटभ, महिषासुर, गली-गली, सड़क-सड़क,दफ्तर-दफ्तर, बस,ट्रेन, हवाई जहाज हर जगह। इन राक्षसों की माटी की प्रतिमा को शेरों से नुचवाइए या त्रिशूल से छेदिए। असली तो सड़क पर घूम रहे हैं, मठ-मंदिरों, आश्रमों में घात लगाए बैठे हैं। बडे़ दाँत,नाखून और सींग वाले नहीं। रेशमी अंगवस्त्रम से सुसज्जित। कहाँ बचकर जाइएगा।
शुरुआत ही कुछ ऐसी है। अंकुरण के साथ ही मशीन से पता लगाया पेट में है..गर्भ में पल रही है..। वहीं मार दो। सुपारी लेने के लिए सफेद कोट पहने आलावाले खड़े हैं। कौन भगवान् है यहां जो नृसिंह की तरह आपरेशन थियेटर फाड़ के प्रकट हो जाए और प्रह्लाद की तरह बचा ले उस नन्ही अजन्मी को..। ज़ो बच भी गई उनमें न जाने कितनी दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती नाम वाली होंगी। और उन्हीं के पीछे बचपन से न जाने कितने मधुकैटभ पड़े होंगे। कितने ढोंगी हैं हम। दुर्गा कोख में वध्य। राक्षस सड़क में आजाद। यही चल रहा है यही चलेगा। और ये कोई नई बात, नया ग्यान नहीं। इन सबके बावजूद ..फिर भी जयकारा लगाते जाइए बोलिए दुर्गा मैय्या की जय..।
हर साल नेशनल क्राइम ब्यूरो की रिपोर्ट जारी होती है। प्रदेशों में होड़ सी मची रहती है कि महिलाओं के साथ अत्याचार में कौन आगे..? भ्रूण हत्या कहां ज्यादा होती है। एक प्रदेश के मुखिया ने कैफियत दी कि चूँकि महिलाओं के मामले में हम संवेदनशील हैं,थाने में रिपोर्ट दर्ज करते हैं, इसलिए आँकडे़ हमें ऊपर बताते हैं, ज्यादा दुष्कर्मी त़ो वो प्रदेश है जहाँ अत्याचार भी होता है और कोई रिपोर्ट भी दर्ज नहीं होती। वे शायद सही कहते हैं। महिला अत्याचार के आधे से ज्यादा मामले गरीबी और लोकलाज की वजह से दबे ही रहते हैं। महिलाओं पर जुल्म वहां ज्यादा हैं जहाँ सभ्य लोग रहते हैं। जो जितना बड़ा शहर वो उतना ही बड़ा दुष्कर्मी। दिल्ली में सत्ता का सिंहासन है, यहीं कानून बनता है,यहीं लागू होता, न्याय की सर्वोच्च पीठ भी यहीं, सबसे बड़े मानवाधिकारवादी भी यहीं बैठते हैं पर क्राइम ब्यूरो बताता है कि हर मिनट इस महानगर में कहीं न कहीं किसी की इज्ज्त उतरती है।
इससे बेहतर तो वो असभ्य गांव हैं। जहाँ शिक्षा और संस्कृति नहीं पहुंच पाई। वनवासियों के बीच अभी भी महिलाओं का रसूख है। ग्रामीण क्षेत्रों के परिवारों में महिला मुखियागीरी का औसत 36 प्रतिशत है जबकि शहरों में मात्र 9 प्रतिशत। विधायी संस्थाओं, यानी ल़ोकसभा,विधानसभाओं में हर नौ निर्वीचित पुरुष के बाद एक महिला है। यह औसत वैश्विक पैमाने पर 20 प्रतिशत कम है। महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने के मामले में बांग्लादेश और श्रीलंका हमसे आगे है। नारी अर्धांगिनी कही जाती है। भवानीशंकर जब एकाकार होते हैं तो अर्धनारीश्वर बनते हैंं। नरनारी समानता ई्श्वरीय आदेश है। हर देवी देवता से पहले। राधाकृष्ण, सीताराम, लक्ष्मीनारायण, गौरीशंकर। इस संस्कृति की दुहाई देने वाले देश में नारी अभी तक पुरुष के घुटने से ऊपर नहीं आ पाई। नगरीय और पंचायत चुनावों में जहाँ इन्हें थोडा़ प्रतिनिधित्व मिला वहां पतियों ने इन्हें अपनी छाया से ही मुक्त नहीं किया। नाम के साथ पुछल्ला तो है ही काम में भी यही दल्ला हैं।
हम मातृपूजक लोग कितने ढोंगी हैं। कभी इस बात को तजबीजिए कि मुँह से हर क्षण झरने वाली गाली सबसे ज्यादा किसके नाम से दी जाती है। क्या ये सच नहीं है कि..माँ और बहन के नाम से। गालियाँ पुरुषवाचक क्यों नहीं? हर क्षण हमारे इर्द-गिर्द मातृशक्ति के साथ शाब्दिक व्यभिचार होता है। हम इसे सुनते भर नहीं बल्कि शामिल भी होते हैं। यह व्यभिचार भी एक तरह से भीषण अत्याचार है लेकिन इसकी रपट कहां हो, कौन लिखे और फिर गुनहगार तो हमसब हैंं। सो नौ दिन देवी पूजने का अर्थ कहां रह जाता है। क्यों करते हैं हम नाहक के ये कर्मकाण्ड। उस बच्ची की वो कविता जो शुरुआत में आपने बाँची उससे बड़ी मीमांशा ग्रंथ रच देने पर भी नहीं होगी। चलिए अबकी बार की नवरात्रि में इन्हीं सब मसलों पर विचार करते हैं। क्योंकि यह पंंडालों में डीजे की धुन पर नाचने व दुर्गा मैय्या की जय बुलाने से ज्यादा जरूरी है।

*डिस्क्लेमर – इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति Radar news उत्तरदायी नहीं है। इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार Radar news के नहीं हैं तथा Radar news उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।
आंगनवाड़ी की सेवाओं से वंचित आदिवासी बाहुल्य ग्राम के बच्चे, स्वास्थ्य और पोषण की स्थिति में कैसे होगा सुधार !
* पन्ना की ग्राम पंचायत रहुनिया के ग्राम पाली-बिजवारा व गुढ़हा का मामला
* मासूम बच्चों को पूरक पोषण आहार एवं टेक होम राशन का नहीं मिलता लाभ
* कागजों पर कुपोषण मिटाने में जुटा महिला एवं बाल विकास विभाग का अमला
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश की सरकार महिलाओं और बच्चों के समग्र विकास को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए का बजट खर्च करके महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से अनेकों योजनाएं संचालित की जा रहीं हैं। बावजूद इसके आपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं हो रहे हैं। आज भी मानव विकास सूचकांक में प्रदेश की स्थिति काफी खराब बनी है। पन्ना की बात करें तो कुपोषण, शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर, पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर एवं बच्चों के पोषण स्तर जैसे महत्वपूर्ण सूचकांकों के मामले में इस जिले की गिनती प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर पर अत्यंत ही बदहाल स्थिति वाले जिलों के रूप में होती है। इसका प्रमुख कारण महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं का क्रियान्वयन धरातल पर सही तरीके से न होना है।
विभागीय अधिकारी इस सच्चाई को भली-भांति जानते है लेकिन बजट को ठिकाने लगाने के लिए नीचे से ऊपर तक आंकड़ों का घालमेल करके कागजों पर कुपोषण को मिटाया जा रहा है। विडंबना यह है कि महिलाओं-बच्चों के पोषण स्तर एवं स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रमों/योजनाओं में आंकड़ेबाजी का यह खेल उस प्रदेश में चल रहा है जहाँ के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान महिलाओं को अपनी बहिन बताते और उनके नौनिहालों को भांजा-भांजी कहते हैं।
जिले की पन्ना ग्रामीण परियोजना के अंतर्गत आने वाली आदिवासी बाहुल्य ग्राम पंचायत रहुनिया के ग्राम पल्थरा व गुढ़हा की आंगनवाड़ी का मामला इसका एक उदाहरण मात्र है। जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पल्थरा ग्राम की मिनी आंगनवाड़ी में कुल 52 बच्चे दर्ज हैं। जिसमें 0 से 6 माह के 4, 6 माह से 3 वर्ष के 27 और 3 से 6 वर्ष तक के 21 बच्चे शामिल हैं। पल्थरा से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थिति मजरा ग्राम पाली-बिजवारा के बच्चों के नाम भी इसी मिनी केन्द्र में दर्ज हैं लेकिन उन्हें पूरक पोषण आहार व टीएचआर का लाभ नहीं मिलता है।
पल्थरा की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ईशा बाई बतातीं हैं कि पाली-बिजवारा से केन्द्र की दूरी छोटे बच्चों के लिहाज से अधिक होने के कारण वहाँ के बच्चे पूरक पोषण आहार (नाश्ता और भोजन) गृहण करने कभी भी पल्थरा नहीं आते। ईशा बाई का दावा है कि उक्त दोनों गांवों के बच्चों एवं गर्भवती/धात्री महिलाओं को टीएचआर का नियमित रूप से वितरण उनके द्वारा प्रत्येक सप्ताह मौके पर जाकर किया जा रहा है।

गौरतलब है कि ईशा बाई के अनुसार उसे हर माह 5 बोरी टीएचआर (टेक होम राशन) वितरण हेतु मिलता है जबकि 22 फरवरी अर्थात पिछले माह के तीन सप्ताह तक सिर्फ 1 बोरी टीएचआर का ही वितरण ही हुआ था। हलवा-खिचड़ी (टीएचआर) के पैकेट से भरी 4 बोरी केन्द्र में पैक रखीं थी। इससे स्पष्ट है कि नियमित रूप से प्रत्येक सप्ताह टीएचआर पैकेट वितरण के दावे में सच्चाई नहीं है। इसकी जानकारी मौके से परियोजना अधिकारी अशोक विश्वकर्मा को दी गई। हैरानी की बात तो यह है कि पाली-बिजवारा की महिलाओं-मासूम बच्चों को टीएचआर प्रत्येक सप्ताह नहीं बल्कि कभी-कभार ही मिलता है। बिजवारा की केशारानी आदिवासी कहती हैं कि सालभर में बमुश्किल 8-10 पैकेट टीएचआर ही मिल पाता है। दरअसल, पाली-बिजवारा की महिलाएं टीएचआर लेने के लिए पल्थरा नहीं जातीं जब कभी ईशा बाई उनके गांव में टीएचआर लेकर पहुँचती हैं तो वे उसे वितरित करती हैं।

मालूम हो कि पाली-बिजवारा गांव में 6 माह से लेकर 6 वर्ष तक की आयु के 20 से अधिक बच्चे हैं जोकि पूरक पोषण आहार से तो पूरी तरह से वंचित हैं ही साथ ही उन्हें टीएचआर भी नियमित रूप से नसीब नहीं हो पा रहा है। कोरोना संकटकाल के दौरान करीब 6 तक आंगनवाड़ी केन्द्र बंद रहने के दौरान भी उक्त दोनों गांवों की पात्र महिलाओं और बच्चों को खाद्य सामग्री नहीं मिली। कुल मिलाकर पाली-बिजवारा ग्राम के बच्चों और महिलाओं को पल्थरा केन्द्र के माध्यम से आंगनवाड़ी की सेवाओं का लाभ मिल पाना व्यवहारिक तौर पर सम्भव नहीं है। आवश्यता इस बात की है कि उनके लिए स्थानीय स्तर ही नियमित रूप से पूरक पोषण आहार व टीएचआर वितरण की ठोस व्यवस्था बनाई जाए।
नहीं मिलता नाश्ता

इधर, पल्थरा निवासी कुपोषित बच्चों की माँ आनंदरानी व संगीता बाई ने बताया कि उन्हें हर सप्ताह टीएचआर का सिर्फ एक पैकेट ही मिलता है। इसी तरह पल्थरा की आंगनवाड़ी में बच्चों को सिर्फ भोजन मिलता है नाश्ता इस बार एक भी दिन नहीं मिला। वहां भोजन भी मीनू के अनुसार वितरित नहीं हो रहा है।

रसोईया कौशल रानी से जब इस संबंध में पूंछा गया तो उन्होंने बड़ी ही साफगोई से बताया कि समूह की अध्यक्ष-सचिव के द्वारा जो भी खाद्य सामग्री मुहैया कराई जाती है उसी को पकाकर बच्चों को परोसा जाता है। सवाल यह उठता है कि महिलाओं-बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी योजनाओं का जमीनी स्तर पर सही तरीके से क्रियान्वयन न होने कारण कुपोषण से मुक्त स्वस्थ्य समाज का सपना कैसे साकार हो पाएगा।
महीने भर से वितरित नहीं हुआ पोषण आहार

ग्राम पंचायत रहुनिया के ही अंतर्गत आने वाले ग्राम गुड़हा की मिनी आंगनवाड़ी में करीब एक माह से पूरक पोषण आहार का वितरण ही नहीं हुआ। सांझा चूल्हा समूह के द्वारा आंगनवाड़ी के बच्चों को नाश्ता और भोजन वितरण न करने की लिखित सूचना आंगनवाड़ी कार्यकर्ता रीना बाई के द्वारा बकायदा परियोजना अधिकारी पन्ना ग्रामीण को दी गई लेकिन पूरक पोषण आहार व्यवस्था को शुरू कराने की सुध जिम्मेदारों ने नहीं ली। इसका सीधा दुष्प्रभाव आंगनवाड़ी में दर्ज 57 मासूम बच्चों के पोषण स्तर पर पड़ रहा है।

विदित हो कि कोरोना संकट के चलते कई माह तक बंद रहे आंगनवाड़ी केन्द्रों को 26 जनवरी 2021 से बच्चों के लिए खोला जा चुका है। लेकिन गुड़हा की मिनी आंगनवाड़ी में 26 जनवरी से लेकर अब तक बच्चों को नाश्ता और भोजन वितरण न होने से महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों की उदासीनता का पता चलता है। जिम्मेदार अफसर विभिन्न कार्यक्रमों के आयोजन के माध्यम से विभाग की छवि चमकाने, कागज पर आंकड़ों का खेल दिखाकर बदहाल व्यवस्था और अपनी कारगुजारियों को छिपाने में जुटे हैं। जबकि सच्चाई यह है कि महिलाओं-बच्चों के शारीरिक, मानसिक विकास, स्वास्थ्य एवं पोषण से जुड़ीं योजनाएं भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी की भेंट चढ़ चुकीं हैं। शायद यही वजह है कि पन्ना जिले के माथे पर लगा कुपोषण का कलंक मिट नहीं पा रहा है।
इनका कहना है –
“आपने जानकारी दी है शीघ्र ही मैं स्वयं पल्थरा और गुढ़हा ग्राम की आंगवाड़ी का निरीक्षण कर वस्तुस्थिति की जानकारी प्राप्त करूँगा। पाली-बिजवारा ग्राम की महिलाओं और बच्चों को आंगनवाड़ी सेवाओं का हर हाल में लाभ दिलाया जाएगा।”
– ऊदल सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग, पन्ना।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द दमोह के सिंग्रामपुर में जनजातीय सम्मेलन में भाग लेंगे
* सिंगौरगढ़ किले के संरक्षण कार्य के शिलान्यास कार्यक्रम में भी शामिल होंगे
भोपाल। (www.radarnews.in) राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द 7 मार्च को पूर्वान्ह 11.30 बजे दमोह जिले के ग्राम सिंग्रामपुर में मुख्य अतिथि के रूप में राज्य-स्तरीय जनजातीय सम्मेलन में शामिल होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्यपाल आनंदीबेन पटेल एवं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे। कार्यक्रम में केन्द्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संस्कृति एवं पर्यटन प्रहलाद सिंह पटेल, केन्द्रीय राज्य मंत्री इस्पात मंत्रालय फग्गन सिंह कुलस्ते, जनजातीय कार्य मंत्री सुश्री मीना सिंह मांडवे और नगरीय विकास एवं आवास मंत्री भूपेन्द्र सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे। इस मौके पर राष्ट्रपति सिंगौरगढ़ किले के संरक्षण कार्य के शिलान्यास कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। कार्यक्रम का आयोजन संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार और जनजातीय कार्य विभाग मध्यप्रदेश शासन संयुक्त रूप से कर रहा है।
विरासत को प्रदर्शित करती फिल्म का होगा प्रदर्शन
कार्यक्रम में सिंग्रामपुर की ऐतिहासिक विरासत को प्रदर्शित करती वीडियो फिल्म का प्रदर्शन होगा। इसके साथ ही रानी दुर्गावती की वीरगाथा पर एकलव्य विद्यालयों के विद्यार्थी सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति देंगे। इस मौके पर जनजातीय विभाग की पुस्तिका ‘बानगी’ का विमोचन और जनजातीय कलाकारों द्वारा कला प्रशिक्षण वर्चुअल क्लास के पोर्टल ‘आदिरंग डॉट कॉम’ का शुभारंभ भी राष्ट्रपति करेंगे। पोर्टल का निर्माण वन्या प्रकाशन द्वारा किया गया है।
प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को पुरस्कार वितरण
राष्ट्रपति इस मौके पर जनजातीय वर्ग के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को शंकरशाह और रानी दुर्गावती पुरस्कार से पुरस्कृत करेंगे। सिंग्रामपुर पहुँचने के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द रानी दुर्गावती की मूर्ति पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे और वृक्षारोपण कार्यक्रम में भी शामिल होंगे।
निकाय चुनाव की तैयारियों को लेकर राज्य निर्वाचन आयुक्त करेंगे कलेक्टर्स से चर्चा
भोपाल। (www.radarnews.in) राज्य निर्वाचन आयुक्त बसंत प्रताप सिंह स्थानीय निकायों के आम निर्वाचन 2021 की तैयारियों के संबंध में 6 मार्च को शाम 4 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी कलेक्टर्स से चर्चा करेंगे। श्री सिंह सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी पोर्टल, मॉड्यूल और ईवीएम रेन्डमाइजेशन सहित निर्वाचन तैयारी संबंधित विषयों पर चर्चा करेंगे।
मिड-डे-मील की रसोईयाओं का बढ़ाया जाए मानदेय, समूह की अध्यक्ष व सचिव को मिले प्रोत्साहन राशि

* प्रांतीय महिला स्व सहायता समूह महासंघ ने किया प्रदर्शन
* मुख्यमंत्री के नाम सौंपा दस सूत्रीय का मांगों का ज्ञापन
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) प्रदेश के सरकारी स्कूलों व आंगनवाड़ी केन्द्रों में मध्यान्ह भोजन (मिड-डे-मील) योजना संचालित करने वाले महिला स्व सहायता समूहों से सम्बद्ध महिलाओं, रसोईयाओं की समस्याओं के समाधान और न्यायोचित मांगों के निराकरण को लेकर प्रदेश स्तर पर आंदोलन चलाया जा रहा है। इसी क्रम में मंगलवार 2 मार्च को प्रदेश के सभी जिलों में रसोईयाओं व समूह की महिलाओं के द्वारा धरना-प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री को सम्बोधित 10 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा गया। पन्ना जिला मुख्यालय में भी एमडीएम-सांझा चूल्हा संगठन के बैनर तले स्थानीय बड़ा डाकघर तिराहा पर एक दिवसीय धरना दिया। जिसमें जिले भर की रसोईयाओं व स्व सहायता समूहों से जुड़ीं महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। धरना के समापन उपरांत पैदल मार्च निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंचीं इन महिलाओं के द्वारा अपनी मांगों के निराकरण हेतु ज्ञापन सौंपा गया। जिसमें सरकारी नीतियों-कार्यक्रमों की व्यवहारिक विसंगतियों की ओर ध्यान आकृष्ट कराते हुए महिलाओं की आत्मनिर्भरता की राह में बड़ी बाधा बताया।

ज्ञापन के माध्यम से मध्यान्ह भोजन योजना, स्कूली बच्चों की ड्रेस सिलाई में छिपे तौर जारी ठेका प्रथा पर रोक लगाने, स्कूल व आंगनवाड़ी केन्द्र से जुड़े निर्माण कार्य स्व सहायता समूहों के माध्यम से कराने तथा तेजी से बढ़ती महंगाई के मद्देनजर मध्यान्ह भोजन योजना की राशि में वृद्धि करने आदि की मांग की गई है। अपनी इन मांगों के निराकरण को लेकर सरकार पर दवाब बनाने की रणनीति के तहत प्रांतीय महिला स्व सहायता समूह महासंघ के द्वारा प्रदेश स्तर पर बड़ा प्रदर्शन करने की योजना बनाई जा रही है। जल्द होने वाले इस प्रदर्शन में करीब 1 लाख महिलाओं के राजधानी भोपाल में जुटने की बात कही जा रही है। ज्ञापन सौंपने वालों में प्रभा त्रिपाठी, रचना तिवारी, रहीमा हुसैन, यशकुमारी यादव, रेखा राय, कमलेश सिंह, उर्मिला नामदेव, मालती सहित बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल रहीं।
ये हैं मुख्य मांग








मध्यान्ह भोजन पकाने वालीं रसोईयाओं का मानदेय 2 हजार से बढ़ाकर 5 हजार रुपए किया जाए। स्कूलों को मिलने वाली कंटीजेंसी राशि (आकस्मिकता निधि) का सदुपयोग हो सके इसके लिए शाला प्रबंधन समिति में समूह को शामिल किया जाए। स्कूलों व आंगनवाड़ी केन्द्रों में होने वाले निर्माण कार्य तथा पुताई का कार्य समूह के माध्यम से कराया जाए। जिससे समूह से जुड़ीं महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी। लगातार बढ़ती महंगाई के मद्देनजर बच्चों को मीनू अनुसार गुणवत्तापूर्ण मध्यान्ह भोजन वितरण हेतु मध्यान्ह भोजन की राशि प्राथमिक स्कूल में 10 रुपये एवं माध्यमिक स्कूल में 15 रुपए प्रति छात्र करने सहित अन्य मांगें शामिल हैं।
