वनमाला हथिनी ने एक नर बच्चे को दिया जन्म, कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में हाथियों के कुनबे की सदस्य संख्या 18 हुई

ढाई एकड़ से कम जोत वाले किसानों के नाम संबल योजना में जुड़ेंगे !
* किसान कल्याण तथा कृषि विकास मंत्री कमल पटेल ने दिए निर्देश
भोपाल। किसान कल्याण तथा कृषि विकास मंत्री कमल पटेल ने हरदा जिले के मसन गांव में ‘मेरा गांव-मेरा तीर्थ’ अभियान अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम में अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिन किसानों की ढाई एकड़ से कम जोत है, उन्हें संबल योजना के अंतर्गत सम्मिलित किया जाए। उन्होंने कार्यक्रम में विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को हित-लाभ प्रदान कर लाभान्वित किया।
मंत्री श्री पटेल ने कहा कि मेरा गाँव-मेरा तीर्थ अभियान का मूल उद्देश्य गरीबों, किसानों की समस्या को दूर करना है। इस अभियान के माध्यम से गरीबों को प्रदेश सरकार की योजनाओं से घर बैठे लाभान्वित किया जाएगा। मसन गांव में आयोजित कार्यक्रम के दौरान 75 हितग्राहियों को आधार कार्ड, 102 हितग्राहियों को खाद्यान्न पर्ची, 11 हितग्राहियों को मनरेगा जॉब कार्ड, 260 हितग्राहियों को पेंशन योजना, 302 हितग्राहियों को गरीबी रेखा में नाम जोड़ने, 457 हितग्राहियों आयुष्मान कार्ड, 162 हितग्राहियों को तथा प्रधानमंत्री आवास योजना में नाम जोड़ कर हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया।
एक जून से कार्यालय आयेंगे 100 प्रतिशत अधिकारी
* अत्यावश्यक सेवाओं को छोड़कर शेष कार्यालय 50 प्रतिशत कर्मचारियों के साथ संचालित होंगे
भोपाल। राज्य शासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार एक जून 2021 से सभी शासकीय कार्यालयों में शत-प्रतिशत अधिकारी उपस्थित रहेंगे। निर्देशों में कहा गया है कि अत्यावश्यक सेवाएँ देने वाले कार्यालयों को छोडकर शेष कार्यलय 100 प्रतिशत अधिकारियों एवं 50 प्रतिशत कर्मचारियों के साथ संचालित किये जायेंगे।
अत्यावश्यक सेवाओं में कलेक्ट्रेट, पुलिस, आपदा प्रबंधन, फायर, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, जेल, राजस्व, पेयजल आपूर्ति, नगरीय प्रशासन, ग्रामीण विकास, विद्युत प्रदाय, सार्वजनिक परिवहन, कोषालय और पंजीयन सम्मिलित हैं। इसके अतिरिक्त भी अत्यावश्यक सेवाओं का निर्धारण जिला कलेक्टर कर सकेंगे। ये निर्देश 15 जून 2021 तक प्रभावशील रहेंगे। कोविड-19 के प्रोटोकाल का कड़ाई से पालन के निर्देश भी दिये गए हैं।
बेटी से मिलने जा रहे बाइक सवार दंपत्ति को रेत से ओवरलोड तेज़ रफ़्तार ट्रक ने कुचला; महिला की दर्दनाक मौत… पति की हालत गंभीर

* अजयगढ़ क़स्बा के समीप सिंहपुर घाटी मोड़ पर हुआ हादसा
* राहगीरों की लगातार जान ले रहे रेत के ओवरलोड बेलगाम ट्रक
पन्ना। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में रेत ठेका की आड़ में नियम-शर्तों की खुलेआम धज्जियां उड़ाते हुए जारी रेत की संगठित लूट एक ओर जहां जीवनदायिनी केन नदी की विनाश की इबारत लिख रही है तो वहीं दूसरी तरफ रेत परिवहन में लगे ट्रक-डम्फर गंभीर सड़क हादसों का सबब बन रहे हैं। स्वीकृत मात्रा से कई गुना अधिक रेत का परिवहन करते हुए अंधी रफ़्तार से दौड़ने वाले हैवी वाहन चलती-फिरती मौत साबित हो रहे हैं। जिले के अजयगढ़ क़स्बा के नजदीक आज ऐसे ही एक ट्रक ने सड़क किनारे खड़े बाइक सवार दंपत्ति को बुरी तरह कुचल दिया। हृदय विदारक इस हादसे में महिला की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। जबकि उसके पति की हालत नाजुक बनीं है। हादसे के बाद ट्रक का आरोपी चालक एवं हेल्पर तुरंत मौके से फरार हो गए। दिल-दहला देने वाले इस सड़क हादसे की खबर आने से अजयगढ़ और पन्ना में आक्रोश व्याप्त है। हादसे के बाद से अजयगढ़ में आम चर्चा है कि रेत का ट्रक ओवरलोड है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार पन्ना की इन्द्रपुरी कॉलोनी निवासी निहाल मोहम्मद 60 वर्ष अपनी पत्नी अफसाना खातून 55 वर्ष के साथ शनिवार 29 मई की सुबह 10 बजे बाइक क्रमांक- एमपी 35- एमजे- 1452 से अजयगढ़ के लिए निकले थे। वे अपनी बेटी से मिलने उसके ससुराल जाने की बात कहकर रवाना हुए थे। रास्ते में अजयगढ़ के नजदीक सिंहपुर घाटी मोड़ पर सामने से बेहद तेज़ रफ़्तार से ट्रक को आते हुए देख निहाल मोहम्मद सड़क किनारे अपनी बाइक रोककर खड़े हो गए। तभी अंधी रफ़्तार से आए ट्रक क्रमांक-19-एचए- 5288 को अज्ञात चालक ने लापरवाही पूर्वक चलाते हुए सड़क किनारे पटरी पर खड़े पति-पत्नी को कुचल दिया। इस भयानक हादसे में अत्यंत ही गंभीर रूप से घायल अफसाना खातून 55 वर्ष की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। जबकि निहाल मोहम्मद 60 वर्ष की हालत नाजुक बनीं है। उन्हें उपचार हेतु आनन-फानन सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र अजयगढ़ में भर्ती कराया गया।

दुखद हादसे की खबर मिलने पर अजयगढ़ में रहने वाले निहाल मोहम्मद के रिश्तेदार बदहवास हालत में स्वास्थ्य केन्द्र पहुंचे, देखते ही देखते ग़म और गुस्से का माहौल निर्मित हो गया। अजयगढ़ में प्राथमिक उपचार के बाद निहाल मोहम्मद को जिला चिकित्सालय पन्ना के लिए रेफरल किया गया है। सड़क हादसे पर अजयगढ़ थाना पुलिस के द्वारा मर्ग कायम कर आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध करने की कार्रवाई की जा रही है। उल्लेखनीय है कि रेत के ओवरलोड तेज रफ़्तार ट्रक जिले में अब तक कई निर्दोष लोगों की जान ले चुके हैं। वहीं जिले की सड़कें भी रेत की ओवर लोडिंग के कारण तेजी से बेहद तेजी से क्षतिग्रस्त हो रही हैं। इसके बाद भी स्वीकृत क्षमता में रेत परिवहन एवं निर्धारित गति सीमा जैसे जन सुरक्षा से जुड़े मत्वपूर्ण नियमों का पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी जिन अफसरों की वे तमाशबीन बने बैठे हैं। क्योंकि, पन्ना जिले में जारी रेत की लूट को शासन-प्रशासन का खुला संरक्षण प्राप्त है।
दलितों के हक़ की आवाज़ उठाने वाले युवा नेता पर फिर हुआ हमला !

* पन्ना पुलिस ने दर्ज नहीं किया मामला, आवेदन पत्र की जारी है जांच
पन्ना। (www.radarnews.in) युवा एक्टिविस्ट और दलित नेता संजय अहिरवार के ऊपर एक बार फिर कथित तौर हमला हुआ है। घटना शनिवार 22 मई की है। हमला करने का आरोप एक अन्य युवा दलित नेता और उसके साथियों पर है। संजय ने घटना की लिखित रिपोर्ट पन्ना कोतवाली थाना अंतर्गत आने वाली पुलिस चौकी ककरहटी में दी है। जिसमें इस युवा-छात्र नेता ने बताया है कि, घटना दिनांक को वह मोटर साइकिल से अपने साथी मोनू अहिरवार के साथ पन्ना से लक्ष्मीपुर होते हुए देवेन्द्रनगर जा रहा था। रास्ते में ग्राम मुटवाकला के आगे नर्सरी के समीप जीतेन्द्र जाटव, मनोज कुशवाहा एवं उनके साथियों के द्वारा सड़क पर पत्थर रखकर उसका रास्ता रोकने का प्रयास किया गया। मगर किसी तरह पत्थरों से बचकर निकलने के दौरान संजय के गले में पड़े गमछा को खींचकर जबरन रोकने की कोशिश की गई और पीछे से पत्थर फेंक कर मारा गया। पत्थर लगने संजय के सिर से खून बहने लगा और उसकी बाइक भी अनियंत्रित होकर नीचे गिर गई।
घटनास्थल से पुलिस की डायल-100 सेवा पर मदद के लिए कई बार कॉल किया गया लेकिन जब सम्पर्क नहीं हुआ तो शाम के समय अपने दोस्त के साथ ककरहटी पुलिस चौकी पहुंचकर लिखित रिपोर्ट दी गई। घटना के तीन दिन बाद भी इस रिपोर्ट पर प्रकरण दर्ज नहीं हुआ। एक सवाल के जबाव में युवा नेता ने बताया कि जीतेन्द्र जाटव ने उस पर हमला सिर्फ इसलिए किया क्योंकि मेरी राजनैतिक-सामाजिक सक्रियता के चलते वह मुझसे ईर्ष्या और दुर्भावना रखते हैं।
उत्पीड़न के खिलाफ आवाज़ उठाने से नाराज़ है पुलिस

कानून की पढ़ाई कर रहे युवा एक्टिविस्ट और दलित नेता संजय अहिरवार पन्ना जिले में दलितों के हक़ से जुड़े मसलों और उनके उत्पीड़न के खिलाफ उठने वाली सबसे मुखर आवाज़ बनकर तेजी से उभर रहे हैं। कुछ मौकों पर संजय ने लोकतांत्रिक तरीके से पुलिस के कथित उत्पीड़न के खिलाफ जिस तरह से हल्ला बोला उससे कमजोर-बेबस-असहाय को वर्दी का रौब दिखाने वालों में आंतरिक हड़कंप मचा है। संजय का आरोप है कि पुलिसिया उत्पीड़न के खिलाफ खुलकर बोलने के ही कारण पुलिस के कतिपय अफसर नाराज है इसलिए मेरे ऊपर दो-दो बार हमला होने के बाद भी मेरी रिपोर्ट न लिखकर प्रताड़ित करने की नीयत से मेरे ही खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई। मजबूत इरादों वाले इस युवा नेता का कहना है कि इन सब हथकण्डों से अब वह चुप होने या डरने वाला नहीं है, अन्याय के खिलाफ संघर्ष का शंखनाद हो चुका है और यह अंतिम साँस तक जारी रहेगा।
इनका कहना है –
“संजय अहिरवार के आवेदन पत्र की जांच की जा रही है। जहां का घटनास्थल बताया गया है वहाँ के लोगों ने बताया है कि घटना दिनांक को दो युवक मोटर साइकिल से गिरकर घायल हुए थे लेकिन वे उन्हें पहचानते नहीं है। हमने आरोपों की सत्यता की जांच हेतु कथित तौर पर हमला करने वालों की मोबाइल लोकेशन की तस्दीक हेतु साइबर सेल को पत्र भेजा है, शीघ्र ही वस्तु स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। जांच में जो भी तथ्य निकलकर आएंगे उसी के अनुसार आगे कार्रवाई की जाएगी।”
– एन.पी. पटेल, पुलिस चौकी प्रभारी ककरहटी, जिला पन्ना।
“राजनैतिक दुर्भावनावश मुझे बदनाम करने एवं मेरी छवि धूमिल करने के लिए संजय अहिरवार के द्वारा लगातार असत्य और तथ्यहीन आरोप लगाए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी मेरे संबंध में अनर्गल-आपत्तिजनक बातें कहीं गई। अभी तक मैं नजरअंदाज करता रहा लेकिन अब और नहीं करूँगा। न्यायालय के खुलने पर उसके खिलाफ मानहानि का केस फाइल करूँगा। मेरे पास कई साक्ष्य मौजूद हैं।”
– जीतेन्द्र जाटव, कोंग्रेस नेता, पन्ना।
मंदिरों में हुई चोरी का खुलासा, पकड़े गए आरोपी से चोरी का सामान जप्त

* कई दिनों तक मंदिरों की रेकी करने के बाद मौका पाकर रात में करता था चोरी
पन्ना/अजयगढ़। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना जिले की अजयगढ़ थाना पुलिस ने स्थानीय मंदिरों में हुई चोरियों का खुलासा करने का दावा करते हुए एक आरोपी को गिरफ़्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से मंदिरों से चुराया हुआ सामान एवं नकद एक हजार रुपये जप्त होने की जानकारी दी है। सोमवार 24 मई को इस संबंध पुलिस की ओर से सोशल मीडिया पर जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार पकड़े गए आरोपी से कड़ाई से पूँछताछ किये जाने पर उसने अजयगढ़ के खंदियन मंदिर, बागराजन माता मंदिर, महेश्वरी माता मंदिर में चोरी की वारदात को अंजाम देना स्वीकार किया है। आरोपी के कब्जे से पुलिस ने चाँदी के 2 मुकुट, चाँदी की 4 आँखे, 1 हजार 83 रूपये नकद और साइकिल को जप्त किया है।
उल्लेखनीय है कि, लॉकडाउन के दौरान हाल ही में अजयगढ़ के पैलेस मार्ग स्थित महेश्वरी माता मंदिर में चोरी की घटना घटित होने पर स्थानीय लोगों में पुलिस की सुस्ती को लेकर गहरी नाराजगी व्याप्त थी। क्योंकि, इसके पूर्व वर्ष 2020 एवं 2019 में भी अजयगढ़ के दो प्रमुख आस्था के केन्द्रों में हुई चोरी का खुलासा करने में स्थानीय पुलिस नाकाम रही है। 22-23 मई की दरम्यानी रात महेश्वरी माता मंदिर में हुई चोरी की घटना को पन्ना पुलिस अधीक्षक धर्मराज सिंह मीना द्वारा गंभीरता से लेते हुए आरोपियों का सुराग लगाकर उन्हें गिरफ्तार करने के लिए थाना प्रभारी अजयगढ़ निरीक्षक अरविन्द कुजूर के नेतृत्व में एक टीम गठित की गई।
चोरी के खुलासे के लिए पुलिस ने अपने मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया साथ ही पैलेस मार्ग के सीसीटीव्ही कैमरों के फुटेज खंगाले गए। अजयगढ़ में चर्चा है कि कोरोना लॉकडाउन के चलते रात के सन्नाटे में हुई इस चोरी का संदेही आरोपी कई जगह पर सीसीटीव्ही कैमरों में कैद हुआ था इसलिए पुलिस ने उसे आसानी से चिन्हित कर लिया। हालांकि प्रेस विज्ञप्ति में पुलिस ने जानकारी देते हुए बताया मुखबिर की सूचना पर पकड़े गए संदिग्ध आरोपी से सख्ती से पूंछतांछ करने पर उसने अजयगढ़ के खंदियन मंदिर, बागराजन माता मंदिर, महेश्वरी माता मंदिर में चोरी की वारदात को अंजाम देना कबूल किया है। आरोपी ने बताया कि वह चोरी करने के पूर्व मंदिरों के आसपास घूमकर आवश्यक जानकारी एकत्र करता था और फिर मौका पाकर रात्रि में चोरी की घटना को अंजाम देता था।
कोरोना महामारी में शहीद हुए साथियों को श्रद्धांजलि देते भावुक हुए संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी

* कर्तव्य के दौरान जान गंवाने वाले स्वास्थ्य कर्मचारियों को कोरोना योद्धा घोषित करने की मांग
* 90 प्रतिशत वेतन और निष्कासित कर्मचारियों की बहाली को लेकर चरणबद्ध प्रदर्शन जारी
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) कोरोना महामारी के खतरे के बीच ब्लैक फंगस की नई चुनौती के बीच मध्यप्रदेश के 19 हजार संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी राज्य सरकार की भेदभाव पूर्ण नीतियों और उपेक्षा के खिलाफ 17 मई से चरणबद्ध तरीके सांकेतिक विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। अपनी दो सूत्रीय मांगों, संविदा कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों के वेतन का 90 प्रतिशत वेतन भुगतान करने एवं एनएचएम से निकाले गए कर्मचारियों की बहाली को लेकर पिछले दिनों संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ मध्यप्रदेश आव्हान पर प्रदेश के समस्त जिलों में कलेक्टर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी और जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपें गए।
इसके उपरान्त लगातार तीन दिनों तक संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों द्वारा काली पट्टी बांधकर कार्य करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया गया। इसी क्रम शुक्रवार 21 मई को पन्ना जिला मुख्यालय में कोरोना वायरस संक्रमण (कोविड-19) की महामारी के कारण अब तक प्रदेश एवं देश में कर्तव्य के दौरान जान गंवाने वाले समस्त स्वास्थ्य कर्मचारियों को श्रद्धांजलि दी गई। कोरोना संक्रमण से लोगों की जान बचाने एवं असाधारण परिस्थितियों में अपनी जान हथेली पर रखकर स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारु रखने का फ़र्ज निभाते हुए असमय काल-कवलित होने वाले समस्त स्वास्थ्य कर्मचारियों के बलिदान को याद कर प्रतीकात्मक तौर पुष्पांजलि अर्पित की गई।
इस अवसर पर दो मिनिट का मौन धारण कर मृत आत्माओं को श्रद्धांजलि देते हुए उनके परिजनों के प्रति सांत्वना व्यक्त की गई। साथ ही इस गहन दुख को सहन करने की शक्ति शोक संतृप्त परिजनों को प्रदान करने के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। इस दौरान संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी भावुक हो गए। श्रद्धांजलि सभा में संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के प्रमुख सदस्य मनीष विश्वकर्मा, विकास श्रीवास्तव, राजेश आरख, आशीष खरे, अखिलेश श्रीवास, सौरभ गंगेले, अजय प्रकाश गौतम, सजनीश शर्मा, फिरोज खांन, कमल कृष्ण हलदर, सलीम खांन, बृजकिशोर जड़िया उपस्थित रहे।
कोरोना योद्धा सम्मान निधि दी जाए
श्रद्धांजलि सभा में वरिष्ठ संविदा कर्मचारी मनीष विश्वकर्मा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा, इस महामारी ने हमारे कई अपनों को हमसे छीना लिया है। मध्यप्रदेश और देश भर में कई स्वास्थ्य कर्मचारियों ने अपनी जान गंवाई है। कर्तव्य के निर्वाहन के दौरान शहीद होने वाले समस्त स्वास्थ्य कर्मचारियों को कोरोना योद्धा घोषित कर उनके आश्रितों/परिजनों को सम्मान निधि प्रदान की जाए।

मनीष ने कहा कि, हम समस्त संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी इस भयानक महामारी में अल्प वेतन पर पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ शासन के दिशा-निर्देशों का अक्षरशः पालन करते हुए अपनी सेवाएं दे रहे है। लेकिन बड़े अफसोस की बात है कि, राज्य सरकार ने भेदभाव करते हुए सिर्फ हमें हमारे हक़ से वंचित कर रखा है। हम लोगों की न्यायोचित मांग की लगातार उपेक्षा की जा रही है। संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों के हितों पर हो रहे इस कुठाराघात को समाप्त करने के लिए श्री विश्वकर्मा ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि, दिनांक 05 जून 2018 को संविदा कर्मचारियों हेतु जारी नीति अनुसार संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों को नियमित कर्मचारी के वेतन का 90 प्रतिशत वेतन भुगतान किया जाए एवं शासन से निष्कासित कर्मचारियों की वापसी तथा आउटसोर्स किए गए कर्मचारियों की पुन: एनएचएम में वापिसी के तत्काल आदेश जारी किए जाएं।
एमपी : पन्ना जिले में Mucormycosis ब्लैक फंगस की दस्तक , जबलपुर में भर्ती संक्रमित मरीज ने वीडियो जारी कर मदद की गुहार लगाई
-
जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने की पुष्टि
पन्ना। (www.radarnews.in) कोरोना वायरस संक्रमण (कोविड-19) की दूसरी लहर के कहर बरपाने के बाद अब ब्लैक फंगस (Black Fungus) के मामले लगातार सामने आने से देश-प्रदेश में डर और चिंता का माहौल गहरा गया है। ब्लैक फंगस की गंभीरता को देखते हुए कई राज्य सरकारों ने इसे भी महामारी घोषित कर दिया है। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में ब्लैक फंगस (Black Fungus) यानी म्यूकॉरमायकोसिस (Mucormycosis) ने दस्तक दे दी है। इस दुर्लभ व खतरनाक फंगल संक्रमण का पहला मरीज़ जिला मुख्यालय पन्ना के वार्ड क्रमांक-20 में मिला है। यहां रहने अमित श्रीवास्तव उर्फ़ मिट्ठू 45 वर्ष कोरोना संक्रमण के बाद ब्लैक फंगस से पीड़ित बताए जा रहे हैं। पिछले कई दिनों से अमित इलाज हेतु मेडिकल कॉलिज जबलपुर में भर्ती हैं।

पन्ना निवासी इस युवक के Mucormycosis ब्लैक फंगस से संक्रमित होने की पुष्टि पन्ना जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर.एस. पाण्डेय ने की है। मोबाइल पर हुई चर्चा में डॉ. पाण्डेय ने बताया कि अमित सुगर (मधुमेह) से पीड़ित हैं। पिछले माह पन्ना में उसने कोरोना की जांच कराई थी जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। कोरोना संक्रमण की पुष्टि उपरांत वह हॉस्पिटल में भर्ती न होकर अपने घर पर ही आईसोलेट रहा।
कुछ दिन बाद अचानक अमित की दाहिनी आंख में सूजन आने और तबियत बिगड़ने पर परिजन उसे उपचार हेतु सीधे जबलपुर ले गए। जबलपुर मेडिकल कॉलेज में कुछ दिन तक इलाज करवाने के बाद वह एक स्थानीय निजी अस्पताल में भर्ती हुआ। वहां सर्जरी भी करवाई गई लेकिन कोई सुधार नहीं होने पर पुनः जबलपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती हो गया। जहां वर्तमान में उसका इलाज जारी है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर.एस. पाण्डेय ने जानकारी देते हुए बताया कि ब्लैक फंगस का संक्रमण मरीज के मस्तिष्क तक फ़ैल चुका है।
मरीज ने वीडियो जारी कर कहा- “मेरी मदद करो”
जबलपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती ब्लैक फंगस के पन्ना जिले के पहले मरीज अमित श्रीवास्तव उर्फ़ मिट्ठू 45 वर्ष ने अपना एक वीडियो जारी कर मदद की गुहार लगाई है। इस वीडियो में अमित पन्ना विधायक एवं प्रदेश के खनिज मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह का नाम लिए बगैर यह कहते हुए नज़र आ रहे हैं कि- “मेरे पास इलाज के लिए रुपए नहीं हैं, मेरी मदद करो-मेरा इलाज करवा दो। कोरोना के बाद ब्लैक फंगस हो गया है। जबलपुर मेडिकल कॉलेज में में पड़ा हूँ, यहां कोई ट्रीटमेंट (इलाज) नहीं हो रहा है। हम अपने मंत्री जी से यही कहेंगे हमारा किसी तरह इलाज करवा दो, मेरी जान बचा लो।”
मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में Mucormycosis (ब्लैक फंगस) की दस्तक।
जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर. एस. पाण्डेय ने की पुष्टि।
मेडिकल कॉलेज जबलपुर में भर्ती संक्रमित मरीज़ ने वीडियो जारी कर बेहतर इलाज के लिए लगाई मदद की गुहार। #BlackFungus #Mucormycosis pic.twitter.com/rgz9pFuIan
— Radar News (@RadarNews4) May 21, 2021
तौक्ते तूफ़ान का असर : खरीदी केन्द्रों पर खुले आसमान के नीचे रखा हजारों क्विंटल गेहूं बारिश में भीगा, परिवहन और भण्डारण व्यवस्था चौपट होने से हुआ बड़ा नुकसान

* खरीदी बंद करने के बाद भी उपार्जित गेहूं को बचाने में बरती गई घोर लापरवाही
* गेहूं उपार्जन केन्द्रों पर तिरपाल आदि के नहीं दिखे पुख्ता इंतजाम
* जिला प्रशासन की भूमिका सिर्फ निर्देश देने तक रही सीमित
* बारिश से गेहूं को बचाने समय रहते सुनिश्चित नहीं कराए आवश्यक उपाए
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) अरब सागर में उठा चक्रवाती तूफान तौक्ते अब भले ही थम चुका है लेकिन मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में पिछले दो दिनों तक इसका व्यापक असर रहा। तौक्ते तूफ़ान के कारण जिले में 18 एवं 19 मई को कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ तेज बारिश हुई। साथ ही तेज़ हवाएं चलने से सैंकड़ों पेड़ उखड़ गए। मौसम में आये इस अप्रत्याशित बदलाव के चलते वैशाख के महीने में आषाढ़ जैसी झमाझम बारिश का नज़ारा देखने को मिला। बिन मौसम बारिश को लेकर मौसम विभाग एवं जिला प्रशासन के द्वारा अलर्ट जारी करने के बाद भी पन्ना के खरीदी केन्द्रों पर हजारों क्विंटल गेहूं बारिश की भेंट चढ़ गया। खुले आसमान के नीचे रखे उपार्जित गेहूं को बारिश के पानी एवं नमी से बचाने के लिए केन्द्र प्रभारियों के द्वारा समय रहते पुख्ता इंतजाम न कर घोर लापरवाही बरती गई। जिसका दुष्परिणाम तबाही-बर्बादी के रूप में सामने आया है।

यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति तब बनीं जब अलर्ट जारी करने के साथ ही खरीदे जा चुके गेहूं को बारिश से बचाने के लिए किसानों से गेहूं की खरीदी को 4 दिन पूर्व ही अस्थाई तौर पर रोक दिया था। हजारों क्विंटल गेहूं के बारिश के पानी में तरबतर होने से पिछले वर्ष की यादें ताज़ा हो चुकी हैं। मग़र, इस बार हालात पिछले साल से भी कहीं अधिक बद्तर हैं। उपार्जित (खरीदे गए) गेहूं की परिवहन एवं भण्डारण व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। केन्द्रों से 3-4 तक एक भी ट्रक गेहूं का परिवहन नहीं होने से केन्द्र प्रभारी परेशान हैं। मौसम का मिज़ाज और बदइंतजाम देखकर उनकी सांसें फूल रहीं हैं। दरअसल, केन्द्र प्रभारियों की चिंता इस बात को लेकर है कि, भीगा हुआ गेहूं अगर ख़राब हुआ तो इससे होने वाली क्षति की भरपाई उन्हें और संबंधित प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति/स्व सहायता समूह को करनी पड़ेगी।
खरीदी केन्द्रों पर गेहूं की बर्बादी का आंखों देखा हाल
जिला मुख्यालय पन्ना से महज 10 किलोमीटर की दूरी पर मुख्य सड़क किनारे स्थित लक्ष्मीपुर गेहूं खरीदी केन्द्र पर बुधवार 19 मई तक 6,000 (छह हजार) क्विंटल गेहूं परिवहन के इंतज़ार में खुले आसमान के नीचे असुरक्षित रखा था। मंगलवार को हुई बारिश में गेहूं के भीगने पर अगले दिन मौसम साफ़ होने और धूप निकलने पर केन्द्र प्रभारी संतोष शुक्ला एवं लक्ष्मीपुर समिति की प्रशासक अर्चना गुप्ता के द्वारा भीगे हुए बारदानों एवं सूखे बारदानों अलग-अलग कराकर सुरक्षित रखवा रहे थे कि इस बीच दोपहर लगभग 3 बजे अचानक हुई बेहद तेज बारिश में सैंकड़ों क्विंटल गेहूं पुनः भीग गया।
तेज हवा के साथ बारिश होने से बारदानों के स्टेक पर ढंकी पॉलीथीन या तो फट गईं या फिर हवा में उड़ गईं। इस केन्द्र से पिछले 5 दिन में सिर्फ एक ट्रक गेहूं का परिवहन हुआ था। बारिश की चेतावनी को देखते 4 दिन से खरीदी बंद होने के कारण केन्द्र पर गेहूं से लोड किसानों के एक दर्जन ट्रेक्टर-ट्राली पुनः तुलाई शुरू होने के इंतजार में खड़े थे।

पन्ना से लगभग 17 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सारंग में मंदिर के सामने प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति अहिरगुवां के द्वारा बनाए गेहूं खरीदी केन्द्र पर बुधवार 19 मई की स्थिति में 9,000 (नौ हजार) क्विंटल गेहूं खुले आसमान के नीचे अव्यवस्थित और असुरक्षित तरीके से रखा था। इस केन्द्र पर उपार्जित गेहूं की सुरक्षा को लेकर हद दर्जे की लापरवाही देखने को मिली।

गेहूं से भरी बोरियों को बारिश के पानी से बचाने पॉलीथीन/तिरपाल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। केन्द्र प्रभारी के द्वारा केन्द्र पर गेहूं की सुरक्षा के लिए न तो संतोषजनक इंतजाम किए गए और ना ही समय रहते अनाज की बोरियों (बारदानों) को अस्थाई तौर पर आसपास किसी स्थान पर शिफ्ट कराया गया। परिणाम स्वरूप बुधवार को दोपहर में जब पुनः बारिश शुरू हुई तो केन्द्र पर रखी गेहूं की हजारों बोरियां झमाझम बारिश में तरबतर हो गईं।

इस केन्द्र पर कई दिनों से बारदानों का आभाव होने और खरीदी बंद होने के कारण कुछ किसान भी अपना अनाज लिए फंसे हुए थे। इसके अलावा जिले के अन्य गेहूं उपार्जन केन्द्रों जवाहर विपणन समिति गुनौर के झुमटा, गौरा, नरसिंह स्व सहायता समूह के केन्द्र महगवां (पवई), वैष्णो स्व सहयता समूह इटवांखास (तारा), काली स्व सहायता समूह के केन्द्र बराछ पर भी हजारों क्विंटल गेहूं के भीगने की खबर मिली है।
इसलिए चरमराई व्यवस्था

जिले में समर्थन मूल्य पर जारी गेहूं खरीदी की व्यवस्था चौपट होने का बड़ा कारण भंडारण केन्द्रों में स्थान का आभाव एवं कोरोना वायरस संक्रमण की वैश्विक आपदा है। पिछले दो माह से इस महामारी से बचाव एवं रोकथाम के लिए आवश्यक उपाय जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्रकथमिकता में रहे हैं, इस कारण गेहूं उपार्जन की व्यवस्था पर आपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। कोरोना के चलते लॉकडाउन लागू होने से सामान्य प्रशासनिक कार्य ठप्प होने अथवा सामान्य दिनों की तरह प्रशासनिक कार्य का दबाब ना होने के बाद भी गेहूं उपार्जन सरीखे महत्वपूर्ण कार्य को जिम्मेदारों के द्वारा अपने हाल पर छोड़ दिया गया। जिसकी परिणीति हजारों क्विंटल गेहूं के बारिश में भीगने, परिवहन एवं भंडारण व्यवस्था बेपटरी होने के तौर पर सामने आई है।

हालात इतने ज्यादा खराब इसलिए भी हुए क्योंकि गेहूं उपार्जन की निगरानी एवं आवश्यक व्यवस्थाओं से सीधे जुड़े विभाग नागरिक आपूर्ति निगम, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, सहकारिता विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कोरोना संक्रमित हो गए या फिर अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते बीमार होने से अवकाश पर चले गए। इस स्थिति में केन्द्र प्रभारी मनमाफ़िक खरीदी करते रहे, गेहूं परिवहन करने वाले ठेकेदार अलस्याए हुए अपनी चाल से चलते रहे। पन्ना जिले के गोदाम/ओपन कैप फुल होने पर खरीदे गए गेहूं का भंडारण पड़ोसी जिला छतरपुर में कराना पड़ा। इस दौरान पन्ना में कोई यह देखने-पूंछने वाला नहीं रहा कि, छतरपुर में ट्रक 3-4 दिन तक अनलोड क्यों नहीं हो पा रहे हैं।

वहीं पन्ना जिले के उपार्जन केन्द्रों पर खुले आसमान के नीचे रखे गेहूं के भंडारण के लिए वेयर हाउस में लगभग 60 हजार मीट्रिक टन स्थल आवंटन की आवश्यकता थी लेकिन छतरपुर जिले में सिर्फ 40 मीट्रिक टन गेहूं भंडारण की व्यवस्था ही बन सकी। शेष 20 हजार मीट्रिक टन (2 लाख क्विंटल) गेहूं जिले के खरीदी केन्द्रों पर खुले आसमान के नीचे असुरक्षित पड़ा रहा। इस बीच तौक्ते तूफ़ान की वजह से लगातार दो दिन हुई बारिश में यही गेहूं पानी से तरबतर हो गया।







