48 घंटे तक मोर्चरी में क्यों रखा रहा मृत बाघिन का शव! आखिर दो दिन बाद क्यों हुआ शवदाह?

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फाइल फोटो।

   एनटीसीए की गाइडलाइन बनी वजह, फील्ड डायरेक्टर की मौजूदगी में पूरी हुई अंतिम प्रक्रिया

  पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघ के हमले में हुई थी डेढ़ वर्षीय अर्धवयस्क बाघिन की मौत, पी-151 की थी संतान

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व (पीटीआर) में बाघ के हमले में मृत अर्धवयस्क बाघिन का शवदाह उसकी मौत के करीब 48 घंटे बाद किए जाने का मामला सामने आया है। सामान्य परिस्थितियों में वन्यजीवों का पोस्टमार्टम और शवदाह (भस्मीकरण) आवश्यक औपचारिकताओं के बाद शीघ्र कर दिया जाता है, लेकिन इस मामले में मृत बाघिन का शव दो दिनों तक वन्यप्राणी चिकित्सालय की मोर्चरी के फ्रीजर में सुरक्षित रखा गया। इससे स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठने लगा कि आखिर इस असामान्य विलंब की वजह क्या थी?
जानकारी के अनुसार मंगलवार 30 जून को पन्ना टाइगर रिजर्व की मड़ला रेंज के कंचन नाला क्षेत्र में बाघ पी-661 के साथ हुए आपसी संघर्ष (In-fighting) में लगभग डेढ़ वर्षीय अर्धवयस्क बाघिन की मौत हो गई थी। मृत बाघिन, बाघिन पी-151 की संतान थी। घटना के बाद उसका शव बरामद कर निर्धारित प्रक्रिया के तहत वन्यप्राणी चिकित्सालय की मोर्चरी में सुरक्षित रख दिया गया।

एनटीसीए की प्रक्रिया के कारण करना पड़ा इंतजार

पड़ताल में सामने आया कि शवदाह में हुई देरी की मुख्य वजह राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की निर्धारित प्रक्रिया थी। एनटीसीए के Standard Operating Procedure (SOP) के अनुसार बाघ, तेंदुआ, चीता एवं हाथी जैसे संरक्षित वन्यजीवों की मृत्यु होने पर पोस्टमार्टम तथा शवदाह की पूरी प्रक्रिया वरिष्ठ वन अधिकारियों की उपस्थिति में कराई जाती है। सामान्यतः यह कार्रवाई संबंधित टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर (क्षेत्र संचालक) अथवा उनके समकक्ष मुख्य वन संरक्षक की निगरानी में संपन्न होती है।
संयोगवश जिस दिन बाघिन की मौत हुई, उसी समय पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक बृजेन्द्र श्रीवास्तव सहित प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर एवं मुख्य वन संरक्षक स्तर के अधिकारी विभागीय बैठक में शामिल होने भोपाल गए हुए थे। बताया जाता है कि छतरपुर और रीवा वृत्त के मुख्य वन संरक्षक भी उसी बैठक में मौजूद थे। ऐसे में निर्धारित प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करने के लिए मृत बाघिन के शव को मोर्चरी के फ्रीजर में सुरक्षित रखा गया और वरिष्ठ अधिकारी के लौटने की प्रतीक्षा की गई। भोपाल से क्षेत्र संचालक के वापस लौटने के बाद गुरुवार 2 जुलाई को उनकी उपस्थिति में पोस्टमार्टम की शेष औपचारिकताएं पूरी की गईं तथा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार मृत बाघिन का अंतिम दाह संस्कार कर दिया गया।

हर पहलू की होती है वैज्ञानिक जांच

फाइल फोटो।
एनटीसीए (National Tiger Conservation Authority) की मानक प्रक्रिया के अनुसार बाघ, तेंदुआ, चीता एवं हाथी की मृत्यु होने पर पोस्टमार्टम से पहले शव का विस्तृत परीक्षण किया जाता है। इस दौरान दांत, नाखून, त्वचा, हड्डियां, मूंछ के बाल, शरीर पर मौजूद घावों की संख्या, आकार और गहराई सहित अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्यों का परीक्षण एवं दस्तावेजीकरण किया जाता है। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी कराई जाती है तथा आवश्यक नमूने संरक्षित किए जाते हैं। पोस्टमार्टम कम से कम दो अधिकृत पशु चिकित्सकों द्वारा किया जाता है। प्रक्रिया के दौरान वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा प्रशासनिक प्रतिनिधि (तहसीलदार), स्थानीय जनप्रतिनिधि तथा अन्य अधिकृत पर्यवेक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाती है। इसके बाद पूरी रिपोर्ट और आवश्यक विवरण एनटीसीए के निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किए जाते हैं। पीटीआर में संभवतः यह पहला अवसर माना जा रहा है, जब किसी मृत बाघिन का शव निर्धारित प्रक्रिया के पालन के लिए लगभग 48 घंटे तक मोर्चरी के फ्रीजर में सुरक्षित रखने के बाद शवदाह किया गया।