दिन में रेकी, रात में चोरी; टीआई समेत 6 आरोपी गिरफ्तार, 10 चोरियों के खुलासे का दावा

0
15
देवेंद्रनगर थाना पुलिस टीम की अभिरक्षा में कथित अंतरजिला चोर गिरोह के सदस्य।
  • पुलिस की कथित बड़ी कार्रवाई प्रेस विज्ञप्ति में कई अहम सवालों के जवाब नहीं

  • घटनाओं में चोरी गए कुल माल की कीमत और चोरी हुए आभूषणों का स्पष्ट ब्योरा नहीं

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) पन्ना पुलिस ने सूने मकानों, निर्माणाधीन भवनों और शासकीय उचित मूल्य की दुकानों को निशाना बनाने वाले कथित अंतरजिला चोर गिरोह के छह आरोपियों को गिरफ्तार करने और देवेन्द्रनगर व गुनौर थाना क्षेत्रों की 10 चोरी की घटनाओं का खुलासा करने का दावा किया है। पुलिस की ओर से रविवार 20 सितंबर को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार आरोपियों से चोरी के सामान के रूप में 30 प्लाई, 20 बोरी गेहूं, 4 बोरी चावल और 3 हजार रुपए नकद बरामद किए गए हैं। इसके अलावा चोरी की वारदातों में इस्तेमाल किए जाने का दावा किए गए एक आर्टिका वाहन, एक पिकअप और एक अपाचे मोटरसाइकिल को भी जब्त किया गया है। पुलिस ने इन सभी जब्त वस्तुओं का कुल मूल्य करीब 16 लाख 82 हजार रुपए बताया है।
पुलिस के मुताबिक आरोपियों को सतना और रीवा जिलों से पकड़ा गया। पूछताछ के बाद पुलिस ने देवेन्द्रनगर और गुनौर थाना क्षेत्रों की अलग-अलग 10 चोरी की घटनाओं में उनकी कथित संलिप्तता का दावा किया है। पुलिस के अनुसार देवेन्द्रनगर थाना क्षेत्र में आर्टिका कार चोरी के प्रयास, बड़ागांव में सूने मकान से आभूषण व नकदी चोरी, सिलगी और गिरवारा में निर्माणाधीन भवनों से प्लाई व लोहे की सामग्री चोरी तथा गोल्ही मुड़िया स्थित शासकीय उचित मूल्य की दुकान से खाद्यान्न चोरी की घटनाएं शामिल हैं। इसी तरह गुनौर थाना क्षेत्र के सिली गुनौर, लुहरगांव, हरद्वाही, भटगवां और पटनाकला में चोरी की वारदातों में शामिल होने का भी पुलिस ने दावा किया है।

सतना-रीवा से पकड़े गए छह आरोपी

पुलिस द्वारा गिरफ्तार बताए गए आरोपियों में शिवम पटेल पिता राम मनोहर पटेल 21 वर्ष निवासी ग्राम नंदहा थाना नागौद जिला सतना हाल ढेकहा जिला रीवा, अमन उर्फ नसीम खान 22 वर्ष, टीआई उर्फ राजेश पटेल पिता रामराज पटेल 29 वर्ष, अमर पटेल पिता रामराज पटेल, 22 वर्ष, अजय पाठक पिता रामकृष्ण पाठक 31 वर्ष, सभी निवासी जिला रीवा तथा अनुज विश्वकर्मा पिता राजेंद्र प्रसाद विश्वकर्मा 21 वर्ष, निवासी ग्राम नंदहा जिला सतना शामिल हैं।पुलिस का कहना है कि छहों को सतना और रीवा जिले से पुलिस अभिरक्षा में लिया गया और पूछताछ के बाद चोरी की घटनाओं में उनकी कथित संलिप्तता सामने आई।
वारदात से पहले करते थे रेकी
कथित अंतरजिला चोर गिरोह से बरामद चुराया हुआ सामान और चोरी की घटनाओं में उपयोग में लाए गए वाहन।
पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार आरोपी दिन के समय गांवों और अन्य क्षेत्रों में घूमकर सूने मकान, दुकान और निर्माणाधीन भवनों की रेकी करते थे। स्थान चिन्हित करने के बाद रात में पिकअप वाहन और मोटरसाइकिल से पहुंचकर चोरी की वारदातों को अंजाम देने का दावा किया गया है। पुलिस ने आरोपियों से 30 नग प्लाई की कीमत करीब 53 हजार रुपए, 20 बोरी गेहूं और 4 बोरी चावल की कीमत करीब 26 हजार रुपए तथा 3 हजार रुपए नकद बरामद होना बताया है। इस तरह प्रेस विज्ञप्ति में चोरी के सामान और नकदी के रूप में बताई गई जब्ती का मूल्य करीब 82 हजार रुपए है। इसके अलावा पुलिस ने एक आर्टिका कार की कीमत करीब 5 लाख रुपए, एक पिकअप की कीमत करीब 10 लाख रुपए और एक अपाचे मोटरसाइकिल सहित कुल 16 लाख 82 हजार रुपए का मशरूका जब्त करने की जानकारी दी है।

चोरी हुए माल का कुल मशरूका कितना था?

पुलिस के दावे के अनुसार 10 चोरी की घटनाओं का खुलासा हुआ है, लेकिन प्रेस विज्ञप्ति में यह महत्वपूर्ण जानकारी नहीं दी गई है कि इन 10 घटनाओं में कुल कितने रुपए मूल्य का सामान चोरी हुआ था। यहां दो अलग-अलग आंकड़ों को समझना जरूरी है। पुलिस ने चोरी के सामान और नकदी के रूप में करीब 82 हजार रुपए की जब्ती बताई है। वहीं करीब 16.82 लाख रुपए के कुल मशरूका में वारदातों में इस्तेमाल किए जाने वाले तीन वाहन भी शामिल हैं, जिनकी कीमत ही करीब 16 लाख रुपए बताई गई है। इसलिए 16.82 लाख रुपए को 10 चोरी की घटनाओं में बरामद चोरी का माल मानना सही नहीं होगा। असल सवाल यह है कि जिन 10 घटनाओं का खुलासा करने का पुलिस दावा कर रही है, उन सभी में कुल कितने मूल्य की संपत्ति चोरी हुई थी और उसमें से कितने मूल्य की चोरी की संपत्ति बरामद की गई? प्रेस विज्ञप्ति में इस तुलना के लिए आवश्यक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। परिणामस्वरूप चोरी गए कुल माल और बरामद चोरी के माल के मूल्य के बीच का अंतर भी स्पष्ट नहीं हो पाता।

सोने-चांदी के आभूषणों का क्या हुआ?

मामले में एक और महत्वपूर्ण सवाल चोरी किए गए सोने-चांदी के आभूषणों को लेकर है। पुलिस ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में बड़ागांव के सूने मकान से आभूषण और नकदी चोरी होने का उल्लेख किया है। इसके अलावा शुरुआती विवरण में भी आरोपियों द्वारा सोने-चांदी के आभूषण एवं नकदी चोरी करना स्वीकार किए जाने की बात कही गई है। लेकिन जब्त मशरूका की सूची में किसी भी सोने या चांदी के आभूषण का उल्लेख नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि कथित रूप से चोरी किए गए आभूषण कहां हैं? क्या वे अभी बरामद नहीं हुए हैं, आरोपियों ने उन्हें किसी अन्य व्यक्ति को बेच दिया, या उनकी बरामदगी के लिए पुलिस की कार्रवाई जारी है? प्रेस विज्ञप्ति में इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है।
यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पुलिस ने स्वयं दावा किया है कि छह संदिग्धों को पुलिस अभिरक्षा में लेकर कड़ाई से पूछताछ की गई और पूछताछ में उन्होंने अलग-अलग चोरी की घटनाओं में शामिल होना स्वीकार किया। ऐसे में कथित रूप से चोरी किए गए आभूषणों की बरामदगी और उनकी वर्तमान स्थिति की जानकारी भी सार्वजनिक की जानी चाहिए थी। इन सवालों के साथ 10 चोरी की घटनाओं में चोरी गए कुल माल के मूल्य के संबंध में थाना प्रभारी देवेन्द्रनगर संतोष सिंह यादव से बात की गई, लेकिन इन बिंदुओं पर स्पष्ट और संतोषजनक जानकारी नहीं मिल सकी।

सराहनीय योगदान का उल्लेख, घटनाओं की जवाबदेही पर सवाल

पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति में कार्रवाई में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों के योगदान का विस्तार से उल्लेख किया गया है। अपराध का खुलासा करने वाली टीम के अच्छे काम की सराहना किया जाना स्वाभाविक है। लेकिन इस मामले का एक दूसरा पहलू भी है-जिन क्षेत्रों में ये 10 चोरी की घटनाएं हुईं, वहां अपराधों की रोकथाम और निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी? यदि पुलिस के दावे के अनुसार आरोपी दिन में अलग-अलग क्षेत्रों में घूमकर सूने मकानों, दुकानों और निर्माणाधीन भवनों की रेकी करते थे और रात में वाहनों से पहुंचकर चोरी करते थे, तो यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि संबंधित क्षेत्रों की बीट व्यवस्था, रात्रि गश्त और संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी किस स्तर तक प्रभावी थी।
पुलिस ने प्रेस विज्ञप्ति में सराहनीय योगदान देने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों का नाम तक दर्ज किया है। ऐसे में पारदर्शिता के लिहाज से यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि इन घटनाओं के समय संबंधित क्षेत्रों में तैनात पुलिस अमले की कार्यप्रणाली की समीक्षा हुई या नहीं। यदि विभागीय समीक्षा में किसी स्तर पर लापरवाही या जिम्मेदारी के निर्वहन में कमी सामने आती है तो तत्कालीन बीट प्रभारी सहित संबंधित पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय किया जाना भी जरूरी होगा। अपराध के बाद आरोपियों को पकड़ना महत्वपूर्ण है, लेकिन अपराधों की रोकथाम और प्रभावी निगरानी भी पुलिस की जिम्मेदारी का अहम हिस्सा है।
फिलहाल छह आरोपियों की गिरफ्तारी और 10 चोरी की घटनाओं के खुलासे का दावा पुलिस की ओर से किया गया है। आगे की विवेचना में चोरी गए कुल माल का वास्तविक मूल्य, बरामदगी का पूरा ब्योरा, कथित रूप से चोरी किए गए आभूषणों की स्थिति और प्रत्येक घटना में आरोपियों की भूमिका स्पष्ट होने पर मामले की पूरी तस्वीर सामने आ सकेगी।