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राजस्व, कृषि, पंचायत और उद्यानिकी विभाग के अमले को जिम्मेदारी
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मौके पर फसल क्षति की प्रमाणित जानकारी जुटाई जाएगी
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) जिले में अगस्त के अंतिम दिनों से सितंबर के पहले सप्ताह तक हुई लगातार बारिश और अतिवृष्टि से प्रभावित खरीफ फसलों की वास्तविक क्षति का संयुक्त सर्वे सोमवार से शुरू हो गया। जिले के सभी अनुविभागों में गठित संयुक्त टीमें अब गांव-गांव और खेत-खेत पहुंचकर जलभराव एवं अतिवृष्टि से फसलों को हुए नुकसान का मौके पर आकलन कर प्रमाणित जानकारी जुटाएंगी। सर्वे की प्रक्रिया 25 सितंबर तक चलेगी। सर्वे दलों में राजस्व, कृषि, पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों को शामिल किया गया है। खेतों में पहुंचकर फसल की स्थिति, प्रभावित रकबे और नुकसान की वास्तविक स्थिति का आकलन निर्धारित मापदंडों एवं प्रपत्रों के अनुसार किया जाएगा। सर्वे पूरा होने के बाद ही जिले में अतिवृष्टि से वास्तविक रूप से प्रभावित फसल क्षेत्र और पात्र किसानों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
खेतों में जलभराव से उड़द-मूंग को ज्यादा नुकसान
हालिया अतिवृष्टि का सबसे अधिक असर खरीफ की दलहनी फसलों पर दिखाई दिया है। लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों के अनेक खेतों में कई दिनों तक पानी भरा रहा। फूल आने के दौर में खड़ी उड़द और मूंग की फसल लंबे समय तक पानी में डूबे रहने के कारण सड़ने लगी। तिल की फसल को भी नुकसान पहुंचा है, हालांकि किसानों के अनुसार उड़द और मूंग की तुलना में तिल की फसल पर नुकसान अपेक्षाकृत कम है। पूर्व में कृषि विभाग के प्राथमिक आंकड़ों के अनुसार जिले में इस खरीफ सीजन में करीब 2.08 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसलों की बोवनी बताई गई थी। इसमें करीब 1.40 लाख हेक्टेयर धान, 33 हजार हेक्टेयर तिल तथा लगभग 40 हजार हेक्टेयर में मूंग, उड़द और अरहर जैसी दलहनी फसलें शामिल थीं। इस तरह दलहन-तिलहन का कुल बोवनी रकबा करीब 73 हजार हेक्टेयर बताया गया था।हालांकि यह कुल बोवनी का आंकड़ा है, इसे क्षतिग्रस्त क्षेत्रफल नहीं माना जा सकता। अतिवृष्टि से वास्तव में कितने क्षेत्र में फसल को नुकसान हुआ है, इसका प्रमाणित आंकड़ा संयुक्त स्थलीय सर्वे पूरा होने के बाद ही सामने आएगा।
25 सितंबर तक चलेगा खेत-खेत आकलन
सोमवार से शुरू हुए सर्वे के दौरान संयुक्त दल संबंधित गांवों और खेतों में पहुंचकर फसल की वास्तविक स्थिति दर्ज करेंगे। लगातार बारिश के कारण जलमग्न रहे खेतों में फसल की स्थिति, नुकसान का स्वरूप और प्रभावित क्षेत्र का मौके पर आकलन किया जाएगा। गुनौर एसडीएम कार्यालय से 18 सितंबर को जारी आदेश में कलेक्टर पन्ना के 16 सितंबर के पत्र के पालन में अतिवृष्टि से प्रभावित फसलों के सर्वे के लिए संयुक्त दल गठित किए जाने की जानकारी दी गई थी। आदेश में राजस्व पुस्तक परिपत्र खंड-6 क्रमांक-4 में निर्धारित मापदंडों के अनुसार फसल क्षति का सर्वे कर निर्धारित प्रपत्रों में जानकारी तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। गुनौर अनुभाग में तहसीलदार गुन्नौर एवं अमानगंज, संबंधित नायब तहसीलदार, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत गुन्नौर, वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी तथा वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी को सर्वे की जिम्मेदारी दी गई है। आदेश के साथ जारी सूची में समस्त ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकाय क्षेत्रों के लिए हल्का पटवारी, पंचायत सचिव/रोजगार सहायक और संबंधित कृषि विस्तार अधिकारी की 99 टीम निर्धारित की गई हैं। इसी तर्ज पर जिले के अन्य अनुविभागों में भी संयुक्त दल गठित किए गए हैं।
सर्वे रिपोर्ट से तय होगी वास्तविक क्षति
लगातार बारिश और जलभराव के कारण फसलों को हुए नुकसान को लेकर किसान लंबे समय से सर्वे और राहत की मांग कर रहे थे। अब संयुक्त दलों के खेतों में पहुंचने के बाद किसानों की निगाहें सर्वे की पारदर्शिता और तैयार होने वाली क्षति रिपोर्ट पर हैं। मौके पर जुटाई जाने वाली जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि अतिवृष्टि से कितने किसानों की कितनी फसल प्रभावित हुई है और नुकसान किस स्तर का है। इसके बाद तैयार होने वाली रिपोर्ट के आधार पर शासन के निर्धारित प्रावधानों के अनुसार राहत एवं अन्य सहायता की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद तेज हुई प्रक्रिया







