बड़ी कार्रवाई: पन्ना में देवनाथ फार्मा एजेंसी के सील परिसर से 1.30 करोड़ की दवाएं जब्त, जांच के दौरान ताला लगाकर गायब हुआ था प्रोप्राइटर

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देवनाथ फार्मा एजेंसी के सील परिसर के खुलने के बाद वहां रखीं दवाओं को जब्त करने की कार्रवाई करती औषधि निरीक्षकों की टीम।
  • 2.39 लाख कोडीन कफ सिरप की खरीद की जांच में बिक्री रिकॉर्ड नहीं मिला, बीते सप्ताह चार दिन चली जब्ती कार्रवाई

  • कफ सिरप बिक्री दस्तावेज नहीं मिलने और एजेंसी दूसरे पते पर संचालित पाए जाने के बाद जुलाई में लाइसेंस हुआ था निरस्त

  • दवा एजेंसी की आड़ में नशे के संगठित कारोबार की आशंका, जांच में अब तक कई गंभीर सवाल

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में देवेंद्रनगर कस्बा स्थित मेसर्स देवनाथ फार्मा के खिलाफ कफ सिरप की असामान्य खरीद और दवा कारोबार से जुड़ी अनियमितताओं की जांच के बीच खाद्य एवं औषधि प्रशासन की कार्रवाई आगे बढ़ी है। जुलाई में जांच के दौरान सील किए गए एजेंसी और मकान को 10 सितंबर को खोलकर शुरू की गई कार्रवाई 13 सितंबर तक चली। इस दौरान जांच दल ने एक करोड़ 30 लाख रुपये से अधिक मूल्य की दवाएं और मेडिकल डिवाइस जब्त किए। जब्त सामग्री में 201 कार्टून एलोपैथिक दवाएं, 13 कार्टून मेडिकल डिवाइस तथा दो कार्टून और तीन बोरियों में एक्सपायर दवाएं शामिल हैं।
यह कार्रवाई उस जांच की अगली कड़ी है, जिसकी शुरुआत जुलाई में देवनाथ फार्मा समेत जिले की दो दवा एजेंसियों में बड़ी मात्रा में ऑनरेक्स कफ सिरप की खरीद की पड़ताल से हुई थी। जांच के दौरान कफ सिरप की बिक्री और वितरण से संबंधित आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जा सके थे। देवनाथ फार्मा में जांच आगे बढ़ने के बीच एजेंसी और संबंधित मकान पर ताला लगा मिला तथा प्रोप्राइटर और मकान मालिक परिवार सहित गायब हो गए थे। इसके बाद परिसर को सील कर दिया गया था।

जुलाई में सामने आई थी 1.34 लाख बोतल कफ सिरप की खरीद

नियंत्रक, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, भोपाल के निर्देश और पन्ना कलेक्टर के मार्गदर्शन में गठित विशेष जांच दल (SIT) ने 3 से 5 जुलाई 2026 तक जिले में कफ सिरप की खरीद-बिक्री की जांच की थी। इस कार्रवाई में ग्राम कटन की मेसर्स बागरी ड्रग एजेंसी और देवेंद्रनगर की मेसर्स देवनाथ फार्मा की जांच की गई। जांच में दोनों एजेंसियों द्वारा महज कुछ महीनों में लगभग 1 लाख 34 हजार बोतल ऑनरेक्स कफ सिरप खरीदे जाने की जानकारी सामने आई थी। बागरी एजेंसी में करीब 45 हजार और देवनाथ फार्मा में करीब 89 हजार बोतल की खरीद का रिकॉर्ड पाया गया था। लेकिन इतनी बड़ी मात्रा में खरीदे गए कफ सिरप की बिक्री अथवा वितरण से संबंधित आवश्यक अभिलेख और चिकित्सकीय प्रिस्क्रिप्शन रिकॉर्ड जांच दल के समक्ष प्रस्तुत नहीं किए जा सके। यही तथ्य पूरे मामले की जांच का प्रमुख आधार बना।

जांच के बीच एजेंसी और मकान पर लगा ताला

(फाइल फोटो)
देवनाथ फार्मा की जांच के दौरान यह भी सामने आया कि फर्म अपने औषधि लाइसेंस में दर्ज स्वीकृत स्थल के बजाय अन्य स्थान से संचालित हो रही थी। जांच दल ने लगातार दो दिनों तक दस्तावेजों की जांच और अन्य औषधियों से संबंधित कार्रवाई की। तीसरे दिन जब जांच दल दोबारा पहुंचा तो प्रतिष्ठान पर ताला लगा मिला। मकान मालिक और दुकान संचालक परिवार सहित वहां मौजूद नहीं थे। इसके बाद नियमानुसार परिसर को सील कर दिया गया। उपलब्ध कार्रवाई विवरण के अनुसार 5 जुलाई को तहसीलदार के समक्ष परिसर सील किया गया था। इस घटनाक्रम के बाद देवनाथ फार्मा की भूमिका और उसके दवा कारोबार के रिकॉर्ड को लेकर जांच और महत्वपूर्ण हो गई।

लाइसेंस पहले ही निरस्त

खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने बागरी एजेंसी में कफ सीरप खरीदी एवं बिक्री की जांच उपरांत एजेंसी को सील कर दिया। (फाइल फोटो)
उल्लेखनीय है कि देवनाथ फार्मा एजेंसी के संचालन में गड़बड़ी पाए जाने पर ड्रग लाइसेंस पूर्व में निरस्त कर दिया गया था। औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 तथा संबंधित नियमों के उल्लंघन के आधार पर औषधि अनुज्ञापन प्राधिकारी, पन्ना द्वारा फर्म का ड्रग लाइसेंस 20 जुलाई 2026 को ही निरस्त किया जा चुका था। लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई फर्म के लाइसेंस में स्वीकृत स्थल बिरवाही रोड गल्ला मंडी के पास के बजाय दूसरे स्थान (मड़ैयन पंचायत रेलवे पुल के आगे देवेंद्रनगर) से संचालन और जांच के दौरान संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाने के आधार पर हुई थी। इसी तरह जुलाई की जांच में शामिल ग्राम कटन स्थित बागरी ड्रग एजेंसी का लाइसेंस भी बिक्री अभिलेख उपलब्ध नहीं कराने और अन्य अनियमितताओं के बाद 14 जुलाई 2026 को निरस्त किया जा चुका है।

सील खुलने के बाद मिलीं बड़ी मात्रा में दवाएं

देवनाथ फार्मा के प्रोपराइटर द्वारा कार्यालय में आवेदन दिए जाने के बाद जांच दल ने 10 सितंबर को सील परिसर को खोलकर कार्रवाई आगे बढ़ाई। पन्ना, छतरपुर और सतना के औषधि निरीक्षकों ने पुलिस बल की मौजूदगी में 10 से 13 सितंबर तक परिसर की जांच की। कार्रवाई में करीब एक करोड़ 30 लाख रुपये से अधिक मूल्य की दवाएं और अन्य सामग्री जब्त की गई। इनमें 201 कार्टून एलोपैथिक दवाएं, 13 कार्टून मेडिकल डिवाइस तथा एक्सपायर दवाओं के दो कार्टून और तीन बोरियां शामिल थीं। इस बरामदगी से जांच का दायरा केवल कफ सिरप की खरीद तक सीमित नहीं रहा है। अब एजेंसी में उपलब्ध अन्य दवाओं की खरीद, बिक्री, स्टॉक और संबंधित दस्तावेजों की भी जांच महत्वपूर्ण हो गई है। बड़ी मात्र में दवाएं एवं मेडिकल डिवाइस एवं जब्त करने की कार्यवाही पन्ना की औषधि निरीक्षक महिमा जैन, छतरपुर के औषधि निरीक्षक अजीत जैन, सतना की औषधि निरीक्षक प्रियंका चौबे की टीम द्वारा की गई।

सबसे बड़ा सवाल- कफ सिरप की बिक्री आखिर कहां हुई?

(फाइल फोटो)
पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल बड़ी मात्रा में खरीदे गए कफ सिरप की बिक्री और वितरण को लेकर है। दोनों एजेंसियों की जांच में कफ सिरप की बड़ी खरीद का रिकॉर्ड सामने आया, लेकिन उसके बाद की बिक्री या वितरण से संबंधित आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जा सके। ऐसे में जांच का प्रमुख बिंदु यह है कि करीब 1.34 लाख बोतल ऑनरेक्स कफ सिरप आखिर किन लोगों, मेडिकल प्रतिष्ठानों या अन्य खरीदारों तक पहुंचा। इसके लिए खरीद-बिक्री बिल, स्टॉक रजिस्टर, वितरण संबंधी रिकॉर्ड और चिकित्सकीय प्रिस्क्रिप्शन समेत उपलब्ध दस्तावेजों की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी।

नशे के संभावित कारोबार को लेकर बढ़ी चिंता

कफ सिरप का चिकित्सकीय उपयोग वैध है, लेकिन कुछ कफ सिरप के दुरुपयोग को लेकर समय-समय पर चिंता सामने आती रही है। ऐसे में कम अवधि में बड़ी मात्रा में कफ सिरप की खरीद, उसकी बिक्री का आवश्यक रिकॉर्ड उपलब्ध न होना और जांच के दौरान एजेंसी प्रोप्राइटर का प्रतिष्ठान बंद कर रहस्मय तरीके से गायब होना पूरे मामले में कई सवाल खड़े करता है। हालांकि उपलब्ध कार्रवाई के आधार पर अभी यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि देवनाथ फार्मा के माध्यम से नशे का कारोबार संचालित हो रहा था। यह जांच का विषय है कि खरीदा गया कफ सिरप वैध चिकित्सकीय उपयोग के लिए वितरित हुआ या नियमविरुद्ध तरीके से कहीं और पहुंचा। यदि जांच में अवैध आपूर्ति या दुरुपयोग के प्रमाण सामने आते हैं तो मामले का स्वरूप और गंभीर हो सकता है।

आगे की जांच में खुलेगा दवा कारोबार का पूरा हिसाब

अब जांच एजेंसियों के सामने देवनाथ फार्मा के दवा कारोबार का विस्तृत हिसाब खंगालने की चुनौती है। कफ सिरप के अलावा सितंबर में जब्त की गई बड़ी मात्रा में अन्य दवाओं और मेडिकल डिवाइस के खरीद-बिक्री रिकॉर्ड की जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि फर्म का वास्तविक कारोबार किस स्तर पर था और उसका रिकॉर्ड कितना व्यवस्थित था। फिलहाल खाद्य एवं औषधि प्रशासन की कार्रवाई जारी है। कफ सिरप की खरीद और बिक्री से जुड़े दस्तावेज, जब्त दवाओं का विवरण और अन्य वैधानिक पहलुओं की जांच के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट होगी।