पन्ना पुलिस में थानों के स्तर से उलट पदस्थापना! टीआई संभाल रहे एसआई स्तर के थाने, एसआई के हाथ टीआई स्तर की कमान

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पुलिस अधीक्षक कार्यालय पन्ना। (फाइल फोटो)
  • सुनवानी-मड़ला में निरीक्षक थाना प्रभारी, गुनौर-देवेंद्रनगर-शाहनगर में एसआई को जिम्मेदारी

  • पदस्थापनाओं के आधार को लेकर पुलिस महकमे के अंदर-बाहर चर्चाएं तेज

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में थाना प्रभारियों की हालिया पदस्थापना को लेकर पुलिस महकमे में चर्चाओं का दौर तेज है। उपलब्ध पदस्थापना सूची में थानों के स्वीकृत स्तर और वहां तैनात थाना प्रभारी के पद के बीच अंतर दिखाई दे रहा है। एसआई स्तर के सुनवानी और मड़ला थानों में निरीक्षक स्तर के अधिकारियों को थाना प्रभारी बनाया गया है, जबकि टीआई स्तर के गुनौर, देवेंद्रनगर और शाहनगर थानों की कमान उप निरीक्षक स्तर के अधिकारियों को सौंपी गई है। इसी अंतर को लेकर अब पन्ना पुलिस की पदस्थापना व्यवस्था और प्रशासनिक निर्णयों पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि थाना प्रभारी की नियुक्ति पुलिस अधीक्षक के प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र में आती है, इसलिए केवल अधिकारी के पद और थाने के स्तर में अंतर को अपने आप में नियमों का उल्लंघन नहीं माना जा सकता। सवाल इस बात को लेकर है कि थानों की श्रेणी और अधिकारियों की उपलब्धता के बावजूद मौजूदा पदस्थापनाओं के लिए कौन-सा प्रशासनिक आधार अपनाया गया है।

सुनवानी-मड़ला में टीआई, बड़े थानों में एसआई

उपलब्ध सूची के अनुसार सुनवानी थाना एसआई स्तर का है, लेकिन इसकी कमान निरीक्षक रतिराम प्रजापति को दी गई है। इसी तरह मड़ला थाने, जिसे एसआई स्तर का बताया गया है, में निरीक्षक बखत सिंह थाना प्रभारी हैं। इसके उलट गुनौर थाना टीआई स्तर का है, जहां उप निरीक्षक बलबीर सिंह प्रभारी हैं। देवेंद्रनगर थाना भी टीआई स्तर का बताया गया है और यहां उप निरीक्षक संतोष यादव को जिम्मेदारी दी गई है। वहीं शाहनगर थाने की कमान उप निरीक्षक रवि सिंह जादौन के पास है।

पदस्थापना का यह पैटर्न क्यों चर्चा में?

पुलिस थानों की संवेदनशीलता, क्षेत्रफल, अपराध का स्वरूप, कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी और कार्यभार के लिहाज से अलग-अलग प्रशासनिक व्यवस्थाएं होती हैं। ऐसे में थाने के स्वीकृत स्तर और प्रभारी के पद में अंतर होने पर यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठता है कि क्या संबंधित थाने के लिए उपलब्ध वरिष्ठता और पद के आधार पर कोई विशेष प्रशासनिक आवश्यकता मानी गई है या फिर यह सामान्य पदस्थापना नीति का हिस्सा है? खास बात यह भी है कि दूसरी ओर कुछ निरीक्षक पुलिस लाइन में संबद्ध बताए जा रहे हैं, जबकि मैदानी थानों की कमान एसआई स्तर के अधिकारियों को दी गई है। इससे विभागीय हलकों में अधिकारियों के पदस्थापन और उपलब्ध मानव संसाधन (पुलिस बल) के उपयोग को लेकर चर्चा हो रही है।

तीन एसडीओपी के एक साथ तबादले ने बढ़ाई चर्चा

इसी बीच जिले के तीन एसडीओपी के एक साथ तबादले का घटनाक्रम भी पुलिस महकमे में चर्चा का विषय बना हुआ है। पन्ना जिले में एसडीओपी के चार पद- पन्ना, पवई, अजयगढ़ और गुनौर में स्वीकृत हैं, जिनमें गुनौर का पद पहले से रिक्त था। तीन अधिकारियों के एक साथ तबादले के बाद पुलिस प्रशासन में इसे लेकर अलग-अलग चर्चाएं हैं। कुछ हलकों में अधिकारियों और पुलिस अधीक्षक के बीच कथित तालमेल को लेकर बातें कही जा रही हैं, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे तथ्य के बजाय विभागीय चर्चाओं के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

पहले भी विवादों में रही पुलिस कप्तान की कार्यप्रणाली

पन्ना पुलिस अधीक्षक निवेदिता नायडू की कार्यप्रणाली एवं निर्णयों को लेकर इससे पहले भी कई विवाद सामने आए हैं। मड़ला क्षेत्र में वाहन चेकिंग के दौरान एक सेवानिवृत्त डीएसपी और पुलिस के बीच हुए विवाद के बाद मामला प्रदेश स्तर तक चर्चा में आया था। मड़ला में वाहन चैकिंग के दौरान सीट बेल्ट नहीं लगाने को लेकर स्थानीय पुलिस और एक सेवानिवृत्त डीएसपी के बीच तीखी नोंकझोंक के वीडियो वायरल हुए थे। इस मामले में डीएसपी के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध किए जाने को लेकर सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों की ओर से कड़ा विरोध दर्ज कराया गया था। यह घटनाक्रम प्रदेश स्तर पर मुद्दा बना और आईपीएस अधिकारी श्रीमती नायडू के खिलाफ डीजीपी से लेकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे गए थे। इसके अलावा हाल के महीनों में पुलिस कार्रवाई और थाना स्तर की कार्यप्रणाली से जुड़े अन्य आरोप भी सार्वजनिक हुए हैं।
अब नई पदस्थापनाओं ने एक बार फिर पन्ना पुलिस में थाना प्रभारियों की नियुक्ति के मानदंड को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब थानों का स्तर अलग-अलग निर्धारित है तो वहां टीआई और एसआई की पदस्थापना का आधार क्या है? पुलिस कप्तान की ओर से यदि इस संबंध में प्रशासनिक आवश्यकता अथवा पदस्थापना नीति स्पष्ट की जाती है तो इन चर्चाओं पर स्थिति अधिक साफ हो सकती है।