पन्ना टाइगर रिजर्व की सुरक्षा व्यवस्था पर फिर उठे गंभीर सवाल: कड़ी सुरक्षा वाले कोर एरिया में मेटल डिटेक्टर और जीपीएस लेकर घुसे अपराधी, गढ़ा धन खोजने का सनसनीखेज मामला

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पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र में गढ़ा धन खोदने के इरादे से अवैध प्रवेश करने वाले आरोपीगण।
  • पन्ना पार्क में लचर मॉनिटरिंग और नाकारा प्रबंधन के चलते बाघों की सुरक्षा खतरे में

  • क्या PTR में मंडरा रहा है 2009 जैसा बाघ विहीन होने का खतरा?

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) देश और दुनिया में अपनी जैव-विविधता और बाघों की पुनर्स्थापना के लिए मशहूर पन्ना टाइगर रिजर्व (PTR) अब अपनी ही सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुलने के कारण गंभीर चर्चाओं के केंद्र में आ गया है। पार्क के अति-संवेदनशील और कड़ी सुरक्षा वाले कोर एरिया में मेटल डिटेक्टर, जीपीएस और आधुनिक उपकरणों के साथ गढ़ा धन खोजने पहुंचे चार आरोपियों के अवैध प्रवेश ने पन्ना टाइगर रिजर्व के निगरानी तंत्र को पूरी तरह से कठघरे में खड़ा कर दिया है। इस घटना ने एक बार फिर पार्क में विचरण करने वाले लगभग एक सैकड़ा बाघों और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता पैदा कर दी है।

सुरक्षा हुई तार-तार, नाकारा प्रबंधन पर उठे सवाल

फाइल फोटो।
पन्ना टाइगर रिजर्व का कोर क्षेत्र वह सुरक्षित दायरा माना जाता है जहां इंसानी गतिविधियों पर पूरी तरह प्रतिबंध होता है और परिंदा भी मजाल है कि पर मार सके। लेकिन हालिया घटना ने साबित कर दिया है कि पीटीआर का यह तथाकथित सुरक्षित कोर एरिया अब पूरी तरह असुरक्षित हो चुका है। पार्क के मौजूदा भ्रष्ट और नाकारा प्रबंधन,  के चलते अपराधियों और असामाजिक तत्वों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि वे बिना किसी रोकटोक के मीलों अंदर तक घुसपैठ करने में कामयाब हो रहे हैं। यह घटना महज एक अवैध प्रवेश की नहीं, बल्कि पार्क की सुरक्षा में एक बड़ी सेंध है, जिससे समूचे पार्क प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान लग गए हैं।

3 माह पूर्व कोर एरिया में बंदूक से हुआ था चीतल का शिकार

पार्क की लचर कार्यशैली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह कोई इकलौती लापरवाही नहीं है। इससे पहले माह जुलाई 2026 में पन्ना टाइगर रिजर्व की चंद्रनगर कोर रेंज के अंतर्गत आधा दर्जन से अधिक शिकारियों द्वारा एक चीतल का शिकार करने का बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया था। हालांकि, पार्क प्रबंधन ने दबाव में आरोपियों की गिरफ्तारी का दावा तो कर दिया, लेकिन इस गंभीर घटना में प्रयुक्त मुख्य हथियार (बंदूक) आज तक बरामद नहीं की जा सकी। इस घटना के बमुश्किल तीन महीने के भीतर ही उसी चंद्रनगर कोर रेंज में अपराधियों का इस तरह पूरी तैयारी के साथ मेटल डिटेक्टर और जीपीएस लेकर अंदर तक घुस जाना यह चीख-चीख कर कह रहा है कि मैदानी अमला अपनी ड्यूटी निभाने में पूरी तरह विफल साबित हो रहा है।

गढ़ा धन खोजने की दूसरी बड़ी घटना

पार्क क्षेत्र में गढ़ा धन खोदने के लिए अवैध रूप से प्रवेश करने की यह दूसरी बड़ी और चिंताजनक घटना है। इससे पहले लगभग 2 वर्ष पूर्व भी पन्ना टाइगर रिजर्व की मड़ला रेंज के अंतर्गत इसी तरह गढ़ा धन खोदने की कोशिश का मामला सामने आने पर जबरदस्त हड़कंप मचा था। उस दौरान मड़ला रेंज की बिलैया बीट के महिलन सेहा इलाके से मेटल डिटेक्टर जैसे साजो-सामान के साथ 3-4 व्यक्तियों को पकड़ा गया था। बार-बार इस तरह की घटनाओं का दोहराया जाना यह बताता है कि पार्क प्रबंधन पिछली गलतियों से सबक सीखने के बजाय हाथ पर हाथ धरे बैठा है।

पार्क प्रबंधन के जवाबों से खड़े हुए संदेह

पन्ना टाइगर रिजर्व के उप संचालक वीरेन्द्र पटेल।
हैरानी की बात तो यह है कि इस गंभीर घटना की जानकारी पार्क प्रबंधन द्वारा मीडिया या आम जनता को तब दी गई जब छतरपुर जिले के स्थानीय अखबारों और मीडिया में खबरें प्रमुखता से प्रकाशित होने लगीं। जब इस मामले में पन्ना टाइगर रिजर्व के उप संचालक बीरेंद्र कुमार पटेल से संपर्क किया गया, तो उनके पास कई बुनियादी और महत्वपूर्ण सवालों के कोई संतोषजनक जवाब नहीं थे। पकड़े गए आरोपियों की संख्या को लेकर भी असमंजस की स्थिति है। जहां चर्चाएं हैं कि गढ़ा धन खोदने आए इस गिरोह में कुल 8 से 10 लोग शामिल थे, वहीं पार्क प्रबंधन ने महज 04 लोगों को ही गिरफ्तार करने की बात कही है। जब उप संचालक श्री पटेल से पूछा गया कि अन्य संदिग्ध कहां हैं, तो वे कोई स्पष्ट संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके। इसके अलावा, पूछताछ के नाम पर प्रबंधन क्या कर रहा है और आरोपी गढ़े धन की तलाश किस विशिष्ट स्थान पर करने आए थे, इन सवालों पर भी अधिकारी चुप्पी साधते नजर आए।

कोर्ट के आदेश पर जेल भेजे गए आरोपी

पन्ना टाइगर रिजर्व का मड़ला ग्राम में स्थित प्रवेश द्वार। (फाइल फोटो)
पन्ना टाइगर रिजर्व के चंद्रनगर परिक्षेत्र की राजगढ़ बीट (कोर क्षेत्र) में अवैध रूप से प्रवेश कर गढ़ा धन की खोज कर रहे इस चार सदस्यीय गिरोह को दिनांक 05 अक्टूबर 2026 को पकड़ा गया। आरोपियों के विरुद्ध वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की सुसंगत धाराओं के अंतर्गत वन अपराध प्रकरण (पी.ओ.आर.) पंजीबद्ध किया गया है। पन्ना टाइगर रिजर्व के कार्यालय क्षेत्र संचालक द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार चारों आरोपियों को माननीय न्यायालय, राजनगर में प्रस्तुत किया गया, जहां से न्यायालय के आदेशानुसार सभी को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है। पकड़े गए आरोपियों में- बिहारी पटेल पिता महादेव पटेल 35 वर्ष, निवासी ग्राम टपरियन, तहसील राजनगर, जिला छतरपुर मध्य प्रदेश, चंद्रिका प्रसाद तिवारी पिता केशव दास तिवारी 42 वर्ष, निवासी इंद्रपुरी कॉलोनी, पन्ना, मध्य प्रदेश, छोटेलाल राजपूत पिता शारदा राजपूत 46 वर्ष, निवासी ग्राम तिंदवारा, तहसील बांदा, जिला बांदा, उत्तर प्रदेश और ओम नरेंद्र कोरी पिता कामता प्रसाद कोरी 26 वर्ष, निवासी ग्राम मुरारपुर, तहसील नरैनी, जिला बांदा, उत्तर प्रदेश शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि यह पूरी घटना चंद्रनगर रेंज की राजगढ़ बीट से जुड़ी है। इतिहास के पन्नों में राजगढ़ का यह इलाका पन्ना के बुंदेली शासकों के दौर में एक अहम केंद्र रहा है, जहाँ प्राचीन राजमहल स्थित है जो अब हेरिटेज होटल में तब्दील हो चुका है। ऐतिहासिक धरोहरों के इस क्षेत्र में इस तरह की गतिविधियां सुरक्षा प्रबंधों की पोल खोलती हैं।

…तो फिर दोहराया जा सकता है वर्ष 2009 का काला दौर

फाइल फोटो।
पन्ना टाइगर रिजर्व में आज लगभग एक सैकड़ा बाघ और अनगिनत वन्यजीव मौजूद हैं। लेकिन शिकार की इन वारदातों और गंभीर आपराधिक लापरवाहियों के चलते यह वही पार्क है जो पूर्व में लचर मॉनिटरिंग और सुरक्षा कमियों के कारण वर्ष 2009 में पूरी तरह बाघ विहीन हो चुका है। यदि वर्तमान में मिल रहे इन चिंताजनक संकेतों से सबक नहीं सीखा गया और त्वरित कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो यह कहना अतिश्योक्तिपूर्ण न होगा कि पन्ना पार्क एक बार फिर बाघ विहीन होने के कगार पर पहुंच सकता है। समय की मांग है कि शासन स्तर पर इस पूरे लचर प्रबंधन की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो, अन्यथा पन्ना की शान कहे जाने वाले इन बेजुबानों का वजूद एक बार फिर गहरे संकट में पड़ जाएगा।