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ब्रह्माकुमारी बहिन जी एवं डॉक्टर प्रदीप ‘उत्कृष्ट सेवा सम्मान’ से अलंकृत

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बीके सीता बहन जी को उत्कृष्ट सेवा सम्मान से अलंकृत करते पत्रकार कल्याण परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष वेदांती त्रिपाठी एवं अन्य पदाधिकारी।

 पत्रकार कल्याण परिषद के प्रांतीय सम्मेलन में किया गया सम्मानित

 मासूम को दरिंदगी का शिकार बनने से बचाने वाली किशोरी को मिला वीरता सम्मान

समाजहित में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित करने वरिष्ठ पत्रकार संजय तिवारी ने शुरू की अनूठी पहल 

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) रविवार को पन्ना में सम्पन्न हुए पत्रकार कल्याण परिषद के प्रांतीय कार्यसमिति सम्मेलन में समाजसेवा, चिकित्सा, जनसुरक्षा सहित अन्य क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले आधा दर्जन व्यक्तित्व को सम्मानित किया गया। जिसमें मुख्य रूप से प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की पन्ना स्थित शाखा प्रमुख ब्रह्माकुमारी सीता बहिनजी एवं जिला चिकित्सालय पन्ना में पदस्थ डॉक्टर प्रदीप द्विवेदी को मानव सेवा के लिए उत्कृष्ट सेवा सम्मान से अलंकृत किया गया। इस अवसर पर पत्रकार कल्याण परिषद के शीर्ष पदाधिकारी, पन्ना समेत मध्य प्रदेश के अन्य जिलों के पत्रकार एवं प्रबुद्धजन उपस्थित रहे। जनसेवा के प्रति निःस्वार्थ भाव से समर्पित दोनों व्यक्तित्व को उनके असाधारण योगदान के लिए सम्मानित किए जाने पर उपस्थितजनों ने तालियों की करतल ध्वनि से स्वागत किया।
कोतवाली थाना पन्ना के आरक्षक अभिषेक यादव के अपराधों के खुलासे में सराहनीय योगदान देने के लिए सम्मानित करते पत्रकार कल्याण परिषद के पदाधिकारी।
देश के पत्रकारों के वृहद संगठन पत्रकार कल्याण परिषद की मध्य प्रदेश इकाई का प्रांतीय कार्यसमिति सम्मेलन रविवार 14 सितंबर को जिला मुख्यालय पन्ना में स्थित होटल कुमकुम छाया में आयोजित हुआ। जिसमें प्रदेश के अनेक जिलों के पत्रकारों ने सहभागिता की। सम्मेलन की अध्यक्षता पत्रकार कल्याण परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष वेदांती त्रिपाठी ने की। जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में राष्ट्रीय महासचिव सैय्यद महमूद अली चिश्ती, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्रीनिवास पाठक, राष्ट्रीय संयोजक नईम खान, प्रदेश अध्यक्ष दिवाकर विश्वकर्मा, संजय शर्मा, कमलेश घोष, हमीद खान उपस्थित रहे। सम्मलेन में पत्रकारिता का उद्देश्य, उसका स्वरूप, समाज में पत्रकारिता की उपयोगिता तथा पत्रकार संगठन की भूमिका आदि विषयों पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे। विचार-मंथन पश्चात समाजहित में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। प्रांतीय सम्मेलन के आयोजक एवं पत्रकार कल्याण परिषद पन्ना के जिलाध्यक्ष संजय तिवारी (मंटू भइया) द्वारा उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मान देने की अनूठी पहल को सभी ने खूब सराहा।

नया जीवन देने के लिए हुआ सम्मान

कोरोना की आपदा के दौरान मरीजों के इलाज के लिए जिला अस्पताल पन्ना के डॉक्टर प्रदीप द्विवेदी को पत्रकार कल्याण परिषद द्वारा उत्कृष्ट सेवा सम्मान से नवाजा गया।
पत्रकार कल्याण परिषद द्वारा प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की पन्ना स्थित शाखा प्रमुख ब्रह्माकुमारी सीता बहिनजी को पन्ना जिले के इतिहास में अब तक सबसे अधिक 91 यूनिट रक्तदान करवाने तथा जिले में सैंकड़ा भर से अधिक लोगों को राजयोग के नियमित अभ्यास द्वारा नशे की लत से मुक्ति दिलाने के लिए उत्कृष्ट सेवा सम्मान से अलंकृत किया गया। बता दें पन्ना जिले में रक्तदान को लेकर ग्रामीण अंचल में जागरूकता के आभाव के कारण कई बार लोग जरुरत पड़ने पर अपने सगे-संबंधियों को भी ब्लड डोनेट नहीं करते। ऐसे माहौल में बीके सीता बहनजी की प्रेरणा से संस्था से जुड़े भाई-बहनों ने दादी प्रकाशमणि जी के 18 में पुण्य स्मृति दिवस पर रक्तदान रुपी महादान का रिकार्ड कायम करके कई जरूरतमंदों को नया जीवन देने का पुनीत कार्य किया है। जिला अस्पताल पन्ना के डॉक्टर प्रदीप द्विवेदी को कोरोना की वैश्विक महामारी (आपदा) के दौरान पूर्ण समर्पण, कर्तव्यनिष्ठा एवं सेवाभाव से मरीजों का इलाज करने के लिए उत्कृष्ट सेवा सम्मान से नवाज़ा गया। विदित हो कि, कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज के दौरान डॉ. द्विवेदी स्वयं संक्रमित हो गए थे, लेकिन वे अपनी जान की परवाह न करते हुए आवश्यक सुरक्षात्मक उपायों के साथ लगातार मरीजों की जान बचाने में जुटे रहे। पत्रकार कल्याण परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष वेदांती त्रिपाठी एवं अन्य मंचासीन अतिथियों द्वारा बीके सीता बहनजी और डॉ. प्रदीप द्विवेदी को शॉल-श्रीफल, शील्ड प्रदान कर उनके असाधारण योगदान की मुक्त कंठ से सराहना की गई। अथितियों ने उन्हें रियल हीरो बताते हुए उनसे प्रेरणा लेने की बात कही।

 छात्रा पूनम को मिला वीरता सम्मान

साहस का परिचय देते हुए मासूम बच्ची को दरिंदगी का शिकार बनने से बचाने वाली छात्रा पूनम को वीरता सम्मान प्रदान करते पत्रकार कल्याण परिषद के पदाधिकारी।
प्रांतीय कार्यसमिति सम्मलेन में पन्ना पुलिस के आरक्षक अभिषेक यादव को उत्कृष्ट कार्य करने के लिए अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया। आरक्षक अभिषेक यादव को चोरी समेत विभिन्न अपराधों खुलासे में सराहनीय योगदान देने के लिए उत्कृष्ट सेवा सम्मान प्रदान किया। वहीं मासूम बच्ची को उसके पड़ोसी की हैवानियत से बचाने वाली किशोरी पूनम कुशवाहा को साहसिक कार्य के लिए वीरता सम्मान दिया गया। मालूम हो कि, जिले के देवेन्द्रनगर थाना अंतर्गत विगत दिनों सात वर्षीय एक मासूम बच्ची अपने घर के पास खेल रही थी तभी पड़ोस में रहने वाला युवक बच्ची को बहला-फुसलाकर अपने घर के अंदर ले गया और फिर उसने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। इस घटनाक्रम को देखने वाली दो छोटी बच्चियों ने पूनम उर्फ लल्लो कुशवाहा 16 वर्ष को तुरंत जानकारी दी। अनहोनी की आशंका के चलते तीनों बच्चियों ने आरोपी युवक का दरवाजा खटखटाया जो नहीं खुला। तीनों बेटियां घर के पिछले हिस्से की तरफ पहुंची जहां दीवाल गिरी होने से खण्डहर जैसा स्थल था। हिम्मत करके पूनम खण्डर को पार करते हुए अंदर दाखिल हुई जहां कामांध वहशी मासूम को अपनी हवश का शिकार बनाने ही वाला था। तभी पूनम के जोर-जोर से चिल्लाने पर आरोपी मासूम बच्ची को छोड़कर मौके से तुरंत भाग निकला था। इस तरह नाबालिग पूनम की तत्परता और साहस से मासूम बच्ची दरिंदगी का शिकार होने से बच गई थी। पूनम कक्षा 12वीं की छात्रा है। अतिथियों ने पूनम के साहसिक कार्य के लिए उसकी भूरि-भूरी प्रशंसा की है।
पत्रकार कल्याण परिषद के राष्ट्रीय महासचिव सैय्यद महमूद अली चिश्ती को ईश्वरीय सौगात भेंट करतीं प्रजापिता ब्रह्माकुमारी संस्था पन्ना की प्रमुख बीके सीता बहन जी।

वनाधिकार पट्टों को लेकर मोहन सरकार के उदासीन रवैये से आदिवासी समुदाय नाराज

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विश्व आदिवासी अधिकार दिवस के उपलक्ष्य पर जनजाति समुदाय को वनाधिकार पट्टा प्रदान करने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपते जयस के पदाधिकारी।

*    पन्ना विधानसभा क्षेत्र के सैंकड़ों सुपात्र आदिवासी वनाधिकार से वंचित

*    कब्जे की भूमि से वन विभाग द्वारा बेदखल करने से उपजा आक्रोश

*    प्रभावित परिवारों को उनका हक दिलाने जयस संगठन ने दी आंदोलन की चेतावनी

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) वन अधिकार अधिनियम 2006 का मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में सुचारू तरीके से क्रियान्वयन न होने के कारण आज भी अनुसूचित जनजाति (आदिवासी) एवं अन्य परंपरागत वनवासी बड़ी संख्या में कब्जे की वन भूमि पर मालिकाना हक़ रूपी अधिकार पत्र (भूमि पट्टा) पाने से वंचित हैं। आदिवासी परिवार वषों से जंगल में जहां भी अपनी झोपड़ी बनाकर परिवार के साथ रह रहे या फिर जिस वन भूमि पर खेती-किसानी करके अपना जीविकोपार्जन कर रहे हैं, उस भूमि पर उनके व्यक्तिगत दावे को मान्यता न मिलना आदिवासियों के कल्याण को लेकर सूबे की मोहन सरकार के बड़े-बड़े दावों पर सवाल खड़े करता है। वनाधिकार के व्यक्तिगत तथा सामुदायिक दावों को मान्यता दिलाने के प्रति राज्य सरकार और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता वन भूमि से आदिवासियों की बेदखली का कारण बन रही है। जिसे लेकर जिले की पन्ना विधानसभा क्षेत्र के आदिवासियों में गुस्सा देखा जा रहा है। शनिवार को डोभा ग्राम में जयस के बैनर तले जुटे आदिवासियों ने खुलकर अपनी पीड़ा जाहिर की। इस अवसर पर जयस ने मुख्यमंत्री के नाम पन्ना एसडीओपी एसपी सिंह बघेल को ज्ञापन सौंपते वनाधिकार पट्टों के मामले में कार्रवाई न होने पर आंदोलन करने की चेतावनी दी है।

आदिवासी अधिकार दिवस पर गूंजा वनाधिकार का मुद्दा

विश्व आदिवासी अधिकार दिवस शनिवार 13 सितम्बर को जनपद पंचायत पन्ना की ग्राम पंचायत डोभा में आसपास के आधा दर्जन गांवों में रहने वाले आदिवासी समुदाय के लोग एकत्र हुए। जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) संगठन के तत्वाधान में आयोजित इस कार्यक्रम में वनाधिकार के मालिकाना हक़ से वंचित सुपात्र आदिवासी परिवारों की आवाज़ को बुलंद किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जयस (JAYS) के पन्ना जिलाध्यक्ष मुकेश कुमार गौंड़ एवं विशिष्ट अतिथि मुन्ना सिंह मरकाम रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता बिजू गौड़ ने की। सर्वप्रथम अतिथियों द्वारा धरती आबा बिरसा मुंडा, बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। तदुपरांत आदिवासियों के आराध्य बड़ा देव का पुण्य स्मरण किया गया।

कब्जे की भूमि से बेदखल कर रहा वन विभाग

उल्लेखनीय वन भूमि में निवास करने वाले आदिवासियों तथा अन्य परंपरागत वनवासियों को उनके कब्जे की भूमि का मालिकाना हक़ प्रदान करने के उद्देश्य से वर्ष 2006 में केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस के नेतृत्व वाली मनमोहन सिंह सरकार ने वन अधिकार अधिनियम को लागू किया था। इस ऐतिहासिक कानून के तहत देशभर में लाखों आदिवासियों को व्यक्तिगत वनाधिकार पट्टा देकर उनके कब्जे को क़ानूनी मान्यता दी गई। साथ ही वनों में रहने वालों को बेरोकटोक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मंशा से वनाधिकार के सामुदायिक दावों को मान्य किया गया। लेकिन विडंबना यह है कि पन्ना जिले में आज भी सैंकड़ों सुपात्र वनाधिकार क़ानून के लाभ से वंचित हैं। कारण वन क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय समुदायों और अन्य पारंपरिक वनवासियों के अधिकारों की रक्षा को लेकर राज्य सरकार, जिला प्रशासन एवं क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि घोर उदासीन बरत रहे हैं। कार्यक्रम में जुटे आदिवासियों ने बताया कि वर्षों से या फिर कई पीढ़ियों से वे जिस वन भूमि पर काबिज हैं, वन विभाग द्वारा उन्हें उससे बेदखल किया जा रहा है। कब्जे की भूमि का मालिकाना हक़ देने के बजाए उल्टा वनभूमि से बेदखल किये जाने से प्रभावित आदिवासियों ने गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए इसे वनाधिकार कानून का खुला उल्लंघन करार दिया।

भूख हड़ताल करने की चेतावनी

अतिथियों ने अपने उद्बोधन आदिवासियों पर हो रहे अत्याचार को लेकर गहरा रोष प्रकट किया है। जयस नेताओं ने राज्य सरकार पर आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा को लेकर उदासीन रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि वनाधिकार के व्यक्तिगत एवं सामुदायिक दावों को मान्यता न मिलने के कारण बड़ी संख्या में आदिवासी परिवार सम्मानपूर्वक जीवन यापन नहीं कर पा रहे हैं। वन विभाग के अफसर जंगल का कानून चलाते हुए उनके हक़-अधिकार को कुचल रहे हैं। परिणामस्वरूप वन क्षेत्र में जनजाति समुदाय के लोग न तो चैन से रह पा रहे और ना ही वे वनोपज संग्रहण तथा वन भूमि का उपयोग और प्रबंधन कर पा रहे हैं। जिससे जनजातीय समुदाय का पारम्परिक जीवन और संस्कृति पर संकट में है। जयस ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम ज्ञापन सौंपकर आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए तत्परता से वंचित परिवारों को वनाधिकार पट्टा प्रदान करने की पुरजोर मांग की है। इस संबंध में शीघ्रता से कार्रवाई न होने पर जयस ने भूख हड़ताल करने की चेतावनी दी है। कार्यक्रम में प्रकाश गौंड़ जनपद सदस्य, मनसुख गौंड़ समाना सरपंच, भीम आर्मी जिला अध्यक्ष सुनील टाइगर, रामू गौंड़ पूर्व सरपंच डोभा, एडवोकेट सोनेलाल प्रजापति, सुरेश कुमार गौंड़, रामशरण गौंड़, बीरन सिंह गौंड़, दुर्गेश अरविंद, जोगेंदर, रिंकू, बबलू गौंड़ सहित बड़ी संख्या जनजाति समुदाय के लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम सफल संचालन समाजसेवी रामविशाल गौंड़ एवं उपस्थितों का आभार प्रकट अरविंद कुमार गौंड़ ने किया।

कुल्हाड़ी से हमला कर दलित वृद्ध की जघन्य हत्या, आरोपी गिरफ्तार

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हत्यारोपी की गिरफ्तारी की मांग को लेकर सलेहा थाना परिसर में प्रदर्शन करते बसपा और भीम आर्मी नेतागण।

*    गंभीर रूप से घायल वृद्ध की इलाज के दौरान जबलपुर में हो गई थी मौत

*    आरोपी की गिरफ्तारी को लेकर बसपा और भीम आर्मी ने सौंपा था ज्ञापन

पन्ना। (www.radarnews.in) जिले के सलेहा थाना अंतर्गत बछरवारा ग्राम में पखवाड़े भर पूर्व एक युवक द्वारा कुल्हाड़ी से किए गए प्राणघातक हमले में गंभीर रूप से घायल दलित वृद्ध सुखलाल वर्मा 65 वर्ष की गुरुवार 11 सितंबर को मेडिकल कॉलेज जबलपुर में इलाज के दौरान मौत हो गई। कई दिनों से जिंदगी और मौत से संघर्ष कर रहे वृद्ध की सांसें थमने की दुखद खबर आते ही सलेहा क्षेत्र में तनाव फ़ैल गया था। मृतक के हत्यारोपी की गिरफ्तारी की मांग को लेकर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) एवं भीम आर्मी के नेताओं ने संयुक्त रूप से सलेहा थाना परिसर में प्रदर्शन करते हुए एसडीओपी गुनौर को ज्ञापन सौंपा था। घटना की गंभीरता को देखते थाना प्रभारी सलेहा बलवीर सिंह यादव द्वारा आरोपी अंकित द्विवेदी के विरुद्ध थाना में पूर्व से दर्ज जानलेवा हमले के अपराध में हत्या की धारा का इजाफा किया गया। साथ ही मुखबिर तंत्र एवं साइबर सेल की मदद से आरोपी के संभावित ठिकानों पर दबिश देकर शनिवार को उसे तत्परता से गिरफ्तार कर लिया।
पन्ना जिले के सलेहा थाना परिसर में एकत्र बहुजन समाज पार्टी एवं भीम आर्मी के पदाधिकारी-कार्यकर्ता।
सलेहा थाना प्रभारी एवं उप निरीक्षक बलवीर सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि दिनांक 27 अगस्त 2025 को अनुज वर्मा 36 वर्ष निवासी ग्राम बछरवारा ने थाना आकर रिपोर्ट लिखवाई थी कि, दोपहर के समय उसके पिता सुखलाल वर्मा कछार हार में बकरी चरा रहे थे। उसी समय गांव का अंकित पिता रामजी द्विवेदी 29 वर्ष वहां आया और पुरानी बुराई के चलते बुरी-बुरी जातिसूचक गालियां देने लगा। जब मेरे पिता ने गाली देने से मना किया तो बौखलाए अंकित ने कुल्हाड़ी और कुल्हाड़ी के बेंत से जानलेवा हमला कर बुरी तरह लहूलुहान कर दिया। घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। अनुज की रिपोर्ट पर थाना सलेहा में अंकित के विरुद्ध अपराध क्र. 283/25 धारा 296, 115(2), 118(1), 351(2) बीएनएस 3 (1) (द), 3(1) (ध), 3(2) (वा) एससी एसटी एक्ट के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। उधर परिजन घायल वृद्ध को इलाज के लिए जिला अस्पताल पन्ना ले गए, जहां सुखलाल की नाजुक हालत को देखते हुए चिकित्सक ने मेडिकल कॉलेज जबलपुर रेफर कर दिया था। मेडिकल कॉलेज जबलपुर में कई दिनों से जिंदगी और मौत से संघर्ष कर रहे वृद्ध ने गुरुवार 11 सितंबर की शाम दम तोड़ दिया। वृद्ध सुखलाल की मौत होने की खबर आते ही सलेहा-गुनौर क्षेत्र में तनाव फ़ैल गया। देखते ही देखते यह मामला दलित बनाम सवर्ण का रूप लेने लगा।
दलित वृद्ध की हत्या के मामले में सलेहा थाना पुलिस द्वारा गिरफ्तार आरोपी अंकित द्विवेदी।
वृद्ध की जघन्य हत्या को लेकर शुक्रवार 12 सितंबर को आक्रोश उस समय और अधिक बढ़ गया जब बहुजन समाज पार्टी एवं भीम आर्मी के नेताओं ने फरार आरोपी की गिरफ्तारी एवं पीड़ित परिवार को सुरक्षा प्रदान करने सहित अन्य मांगों को लेकर सलेहा थाना परिसर में धरना-प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा। और न्यायोचित मांगों पर शीघ्र कार्रवाई न होने की स्थिति में उग्र आंदोलन करने की चेतावनी दी। घटना की गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी सलेहा बलवीर सिंह ने मजरूब (वृद्ध) की इलाज के दौरान मेडीकल कॉलेज जबलपुर में मृत्यु हो जाने पर पूर्व से दर्ज प्रकरण में धारा 103(1) बीएनएस (302 भादवि) का इजाफा किया गया। तदुपरांत मुखबिर तंत्र एवं साइबर सेल की मदद से आरोपी के संभावित ठिकानों पर दबिश देकर शनिवार को उसे पुलिस अभिरक्षा में लिया गया। पुलिस का दावा है, पूंछतांछ करने पर आरोपी अंकित ने अपना जुर्म कबूल किया है। पुलिस ने आरोपी से हत्या की वारदात में प्रयुक्त कुल्हाड़ी जब्त की है। पुलिस द्वारा आरोपी को शनिवार को ही न्यायालय में पेश किया जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जिला जेल पन्ना भेजा गया है।

फर्जीवाड़ा | आदिवासी किसान की मृत्यु के बाद फर्जी बेटे से खरीद ली बेशकीमकती जमीन

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पन्ना का नवीन संयुक्त कलेक्ट्रेट भवन। (फाइल फोटो)

  ग्राम मनौर में स्थित गरीब आदिवासी परिवार की अवैध तरीके से भूमि क्रय करने का मामला

*     खनिज ठेकेदार श्रीकांत दीक्षित पप्पू के खिलाफ आदिवासी किसान की बेटियों ने की शिकायत

  शपथ पत्र देकर बताया हमारा कोई भाई नहीं, रिश्तेदारों एवं साक्षियों ने भी की पुष्टि

*     कलेक्टर ने श्रीकांत दीक्षित एवं अनुपम त्रिपाठी को जारी किया कारण बताओ नोटिस

पन्ना। जिले के चर्चित खनिज ठेकेदार एवं कांग्रेस नेता श्रीकांत दीक्षित पप्पू एवं उनके परिजनों की बेशुमार अचल संपत्ति से जुड़े नित नए हैरान करने वाले खुलासे हो रहे हैं, इसी कड़ी में एक और चकित करने वाला मामला उजागर हुआ। पप्पू एवं अनुपम त्रिपाठी पर ग्राम मनौर में स्थित गरीब आदिवासी परिवार की बेशकीमती भूमि को अवैध तरीके से क्रय कर कब्जाने का आरोप लगा है। दो आदिवासी महिलाओं ने पन्ना कलेक्टर से लिखित शिकायत की है कि, उनके पिता जगोला आदिवासी की मृत्यु के पश्चात फर्जी तरीके से राजाराम सौंर को एकमात्र फर्जी पुत्र बनाकर उससे 2 हेक्टेयर कृषि भूमि श्रीकांत दीक्षित एवं अनुपम त्रिपाठी द्वारा कथित तौर पर अवैध तरीके से क्रय की गई। आवेदिकाओं का दावा है कि उनका कोई भाई नहीं है। इस तथ्य की पुष्टि उनके निकट संबंधियों एवं साक्षियों द्वारा शपथ पत्र देकर की गई है। शपथ पत्र में लेख किया गया है कि जगोला की सिर्फ दो पुत्रियां है कोई पुत्र नहीं है।
पन्ना कलेक्टर सुरेश कुमार।
कलेक्टर सुरेश कुमार द्वारा ग्राम मनौर में गरीब आदिवासी परिवार की अवैध रूप से जमीन कब्जाने के प्रकरण में टिकुरिया मोहल्ला पन्ना निवासी श्रीकांत दीक्षित पिता स्व. भास्कर दीक्षित एवं इंद्रपुरी कॉलोनी पन्ना निवासी अनुपम त्रिपाठी पिता रामलखन त्रिपाठी को कारण बताओ नोटिस जारी कर आगामी 15 सितम्बर को अपना पक्ष प्रस्तुत करने के लिए सुबह 11 बजे कलेक्टर न्यायालय में समक्ष में उपस्थित होने के लिए आहूत किया है अन्यथा मामले की सुनवाई और निपटारा के संबंध में आगामी कार्रवाई की जाएगी। जिला कलेक्टर ने तहसीलदार पन्ना को नोटिस की प्रतियां अनावेदकों को व्यक्तिशः तामील कराने तथा तामीली न होने पर संबंधितजन के निवास स्थल पर चस्पा कराने के निर्देश भी दिए हैं।

पिता के मिलते-जुलते नाम का उठाया फायदा

इस संबंध में एक आवेदिका द्वारा 13 जनवरी 2022 को शिकायत प्रस्तुत कर बताया गया था कि मेरे पिता की मृत्यु हो गई है तथा जीवित माता नेत्रहीन हैं। अपने माता-पिता की हम केवल दो संतानें पुत्रियां हैं। ग्राम जैतूपुर तहसील अमानगंज निवासी एक फर्जी व्यक्ति द्वारा अपने एवं हमारे पिता के मिलते-जुलते नाम का फायदा उठाया गया है और हमारा भाई एवं माता-पिता का एक मात्र फर्जी पुत्र बनाकर फर्जी तरीके से हमारी जमीन अनुपम त्रिपाठी एवं श्रीकांत दीक्षित द्वारा क्रय की गई। इस मामले में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व पन्ना से जांच कराई गई।
खनिज ठेकेदार एवं कांग्रेस नेता पप्पू उर्फ़ श्रीकांत दीक्षित।
एसडीएम द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन में लेख किया गया कि शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत शिकायत पत्र और संलग्न दस्तावेज शपथ पत्र में उल्लेख है कि उनके पिता की ग्राम मनौर स्थित भूमि खसरा नंबर 148/4 रकवा 2.000 हेक्टेयर को अनुपम एवं श्रीकांत ने जैतुपुरा के एक फर्जी व्यक्ति राजाराम को आवेदिकाओं का भाई और उनके माता पिता का फर्जी पुत्र बनाकर जमीन अवैध तरीके से क्रय की गई, जबकि दोनों बहनों के संलग्न शपथ पत्र में लेख है कि हमारा कोई भाई नहीं है। आवेदिकाओं के निकट संबंधी एवं दो साक्षियों के प्रस्तुत शपथ पत्र में भी इस बात का उल्लेख है कि दिवंगत पिता की केवल दो पुत्रियां है एवं कोई भाई नहीं है। उक्त खसरा नंबर की भूमि को कुछ लोगों ने धोखाध़ड़ी करके ट्रांसफर करवा ली है। इनमें राजाराम सौंर सहित श्रीकांत दीक्षित एवं अनुपम त्रिपाठी शामिल हैं। शपथ पत्रों में यह भी लेख है कि श्रीकांत दीक्षित एवं रामलखन त्रिपाठी ने इस फर्जी कार्य के लिए राजाराम को 35 हजार रूपए दिए थे।

नामांतरण प्रक्रिया पर भी सवाल

इस प्रकरण में ग्राम मनौर की नामांतरण पंजी प्रविष्टि क्रमांक 10 पर तहसीलदार पन्ना द्वारा पारित आदेश की प्रति के संबंध में मूल नामांतरण पंजी से मिलान की कार्यवाही की गई। इस दौरान पाया गया कि यह प्रविष्टि हल्का पटवारी द्वारा खसरा नंबर के खातेदार की 15 वर्ष पूर्व मृत्यु और उनकी पत्नी 10 वर्ष पूर्व फौत होना लेखकर उनके फर्जी पुत्र के पक्ष में नामांतरण किए जाने के संबंध में दर्ज की गई थी। तहसीलदार पन्ना द्वारा मृतक के स्थान पर वारिश के नाम नामांतरण स्वीकृत किया गया। मूल नामांतरण पंजी के साथ उद्घोषणा पत्र चस्पा है, किंतु तामीली, मुनादी या प्रकाशन कराने संबंधी कोई रिपोर्ट इसमें अंकित नहीं है। 9 नवम्बर 2020 की नकल अनुसार पंजीकृत विक्रय पत्र 05 सितंबर 2020 के आधार पर श्रीकांत दीक्षित एवं अनुपम त्रिपाठी के पक्ष में स्वीकृत किया गया है। इस मामले में दस्तावेजों के अवलोकन उपरांत पाया गया कि प्रश्नाधीन भूमि जगोला पिता बल्दुआ गौड़ निवासी मनौर के नाम दर्ज रही है, जबकि जैतुपुरा निवासी राजाराम आदिवासी गौड़ नहीं बल्कि सौंर जनजाति के हैं।

वैध वारिसों के नाम भूमि दर्ज करने कार्रवाई जारी

अनावेदकों द्वारा फर्जी तरीके से जमीन क्रय करने के बाद प्रभावित परिवार को भूमि पर फसल बोने से मना करने पर जिला कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक को इसकी शिकायत की गई थी। दोनो बहनों द्वारा क्रेता अनुपम त्रिपाठी और श्रीकांत दीक्षित से कई बार संपर्क साधा गया, लेकिन अनावेदकों ने जातिगत अपमान करते हुए गाली-गलौंच कर भगा दिया। ससुराल में भरण पोषण के लिए पर्याप्त भूमि नहीं होने पर उक्त भूमि वापस दिलाने तथा फर्जीवाड़ा करने वाले क्रेताओं के विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही करने की मांग की गई। इस संबंध में प्रश्नाधीन सर्वे नंबर की भूमि के राजाराम सौंर के पक्ष में किए गए नामांतरण आदेश को म.प्र. भू राजस्व संहिता 1959 की धारा 50 के तहत पुनरीक्षण में लिया जाकर तहसीलदार पन्ना का 28 जुलाई 2018 का आदेश निरस्त कर मूल भूमि स्वामी जगोला गौड़ पिता बल्दुआ के वैध वारिसों के नाम पुनः दर्ज करने की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।

जालसाज़ी | शासकीय भूमि बिना किसी सक्षम आदेश के भूमि स्वामी स्वत्व पर दर्ज

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पन्ना का नवीन संयुक्त कलेक्ट्रेट भवन। (फाइल फोटो)

*     कलेक्टर ने तीन अनावेदकों को जारी किया नोटिस

*     इटवांखास की चर्चित भूमि को पुनः शासकीय भूमि दर्ज करने की कार्रवाई जारी

पन्ना। अपर कलेक्टर पन्ना नीलांबर मिश्र के प्रतिवेदन पर कलेक्टर न्यायालय द्वारा पन्ना तहसील के ग्राम इटवांखास की विभिन्न रकवे की भूमि को म.प्र. भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 115 के तहत मध्य प्रदेश शासन दर्ज करने की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। प्रतिवेदन के अवलोकन से प्रथम दृष्टया बगैर किसी सक्षम अधिकारी के आदेश के भू-अभिलेख में फर्जी प्रविष्टि होना पाया गया है। इस संबंध में कलेक्टर सुरेश कुमार द्वारा ग्राम इटवांखास निवासी तीन व्यक्तियों क्रमशः अरूण कुमार तनय नवल किशोर पटेल, रावेन्द्र सिंह तनय गुलाब सिंह एवं देवेन्द्र सिंह तनय गुलाब सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी कर पक्ष प्रस्तुत करने के लिए कलेक्टर न्यायालय में समक्ष में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं, अनुपस्थिति पर मामले की सुनवाई और निपटारा की कार्यवाही की जाएगी।
इटवांखास की प्रश्नाधीन सर्वे नंबर 591/46 रकवा 4.856 हे., सर्वे नंबर 591/40 रकवा 4.047 हे. एवं सर्वे नंबर 591/16 रकवा 4.047 हे. भूमि के संबंध में अनावेदकों को नोटिस जारी किया गया है। विदित हो कि ग्राम इटवांखास की मिसल बंदोबस्त वर्ष 1955-56 में सर्वे नंबर 591 रकवा 535.36 एकड़ म.प्र. सरकार वर्ग 9/5 दर्ज रही है। खसरा वर्ष 1961-62 से 1962-63 एवं वर्ष 1963-64 से 1965-66 में भी उक्त भूमि म.प्र. शासन दर्ज रही, लेकिन आगामी वर्षों में क्रमशः सर्वे नंबर 591 के विभिन्न रकवा पर खातेदारों का नाम सक्षम आदेश के बगैर सीधे भूमि स्वामी स्वत्व पर दर्ज किया गया है। खसरा में भूमि बंटन या भू-स्वामी स्वत्व प्राप्त होने संबंधी कोई टीप दर्ज नहीं है। इसके अलावा वर्ष 2024-25 के खसरा में आराजी नंबर 591 के 63 बटांक दर्ज हैं और कुल रकवा 254.547 हे. है। यह तत्समय मिसल वर्ष के रकवा से 37.897 हे. अधिक है। उक्त भूमि के विक्रय पत्र स्लॉट 3 दिसंबर 2024 के संलग्न आधार कार्ड अनुसार संबंधितजनों की जन्मतिथि तथा खसरा में दर्ज नाम के वर्ष की अवधि में भिन्नता भी पाई गई है।

मध्यप्रदेश | कोर कटिंग से खुली सड़क के भ्रष्टाचार की परतें, कम निकली क्रस्ट की मोटाई

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लोक निर्माण विभाग संभाग पन्ना अंतर्गत नवनिर्मित मकरंदगंज से बरबसपुरा व्याहा नरेंद्रपुरा सड़क।

*    लोक निर्माण विभाग पन्ना की मकरंदगंज-बरबसपुरा सड़क का मामला

*    मासिक निरीक्षण अंतर्गत दो मुख्य अभियंताओं की टीम ने की जांच

पन्ना।(www.radarnews.in) ऊपर से चिकनी और गुणवत्तापूर्ण नजर आने वाली सड़क के अंदर भ्रष्टाचार का खेल किस तरह से खेला जाता है, मकरंदगंज से बरबसपुरा व्याहा नरेंद्रपुरा सड़क इसका उदाहरण है! लोक निर्माण विभाग के दो चीफ इंजीनियरों द्वारा की गई जांच में सड़क निर्माण कार्य की गंभीर गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है। मकरंदगंज सड़क के Crust (क्रस्ट) यानी अर्थवर्क से लेकर डामरीकरण तक सभी परतों की कुल थिकनेस (मोटाई) निर्धारित प्रावधान से कम निकली। आबादी क्षेत्र में बनाई गई सीसी सड़क का कोर काटने पर क्रैक्स पाए गए जिससे प्रथम दृष्टया कंक्रीट मटेरियल की गुणवत्ता मानक अनरूप न होना प्रतीत होता है। मोटी रकम बचाने के चक्कर में सड़क निर्माण कार्य में जमकर की गई लीपापोती की पोल खुलने से संबंधित ठेकेदार और तकनीकी अधिकारियों में हड़कंप मचा है। जांच की आंच में झुलसने की आशंका से भयभीत स्थानीय तकनीकी अधिकारियों ने शीर्ष स्तर पर मामले को सीक्रेट तरीके से मैनेज करने की कवायद शुरू कर दी है। अब देखना यह है कि गंभीर अनियमितताओं के खुलासे पर जिम्मेदारों के खिलाफ कोई ठोस एक्शन लिया जाएगा या फिर मैनेजमेंट फंडा अपना असर दिखाएगा।

सॉफ्टवेयर आधारित प्रक्रिया से हुआ था चयन

लोक निर्माण विभाग संभाग पन्ना द्वारा निर्मित मकरंदगंज से बरबसपुरा मार्ग अंतर्गत नरेंद्रपुरा ग्राम में बनी कंक्रीट सड़क।
मध्य प्रदेश लोक निर्माण विभाग द्वारा निर्माण कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए निरीक्षण की नई व्यवस्था लागू की गई है। विभाग द्वारा प्रत्येक माह रेण्डम आधार पर चयनित निर्माण कार्यों के निरीक्षण हेतु 5 एवं 20 तारीख को मुख्य अभियंताओं के दल भेजे जाते हैं। कार्यों का रेण्डमाईजेशन डब्ल्यूएमएमएस सॉफ्टवेयर के माध्यम से विभाग के उप सचिव के समक्ष किया जाता है। निरीक्षणकर्ता अधिकारियों को जिन कार्यों का निरीक्षण करना है उसकी सूची उन्हें एक दिन पूर्व सॉफ्टवेयर पर लॉगिन के माध्यम से उपलब्ध होती है। इस बार शुक्रवार 5 सितंबर 2025 को सागर परिक्षेत्र अंतर्गत पन्ना जिले के 4 निर्माण कार्य रेण्डम आधार पर चयनित हुए। जिनमें पीडब्ल्यूडी की 3 सड़कें और पीआईयू का एक निर्माणाधीन बिल्डिंग शामिल थी। पन्ना के निर्माण कार्यों के निरीक्षण की जिम्मेदारी इस बार केएस यादव मुख्य अभियंता भवन परिक्षेत्र भोपाल एवं बीएस मीणा मुख्य अभियंता एमपीआरडीसी को मिली थी। दोनों वरिष्ठ तकनीकी अधिकारियों द्वारा मकरंदगंज सड़क का सघन निरीक्षण किया गया। इस दौरान लोनिवि के स्थानीय अधिकारी उपस्थित रहे।

3 करोड़ 68 लाख की प्रशासकीय स्वीकृति

सड़क निर्माण कार्य का साइन बोर्ड।
लोक निर्माण विभाग संभाग पन्ना से प्राप्त जानकारी अनुसार मकरंदगंज से बरबसपुरा व्याहा नरेंद्रपुरा मार्ग की कुल लंबाई 3.20 किलोमीटर है। शासन द्वारा इसके निर्माण हेतु दिनांक 22 दिसंबर 2022 को 3 करोड़ 68 लाख 98 हजार रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई थी। जबकि निविदा की राशि (अनुबंधित राशि) 3 करोड़ 8 लाख 29 हजार रुपए थी। सड़क निर्माण हेतु लोक निर्माण विभाग द्वारा ठेका फर्म मेसर्स मारुति नंदन कंस्ट्रक्शन सतना को कार्यादेश क्रमांक 1280 पन्ना दिनांक 11 अप्रैल 2023 को जारी किया गया। सड़क की निविदा दर एसआर से 24.50 प्रतिशत कम थी। अनुबंध अनुसार मार्ग निर्माण कार्य दिनांक 10 सितंबर 2023 (छह माह की अवधि) में पूर्ण किया जाना था। मकरंदगंज मार्ग का कार्य लोनिवि के तत्कालीन कार्यपालन यंत्री एसके पाण्डेय के कार्यकाल में हुआ। जिसके अनुविभागीय अधिकारी बीके त्रिपाठी एवं प्रभारी उपयंत्री आरएम बागरी रहे।

कार्य की गुणवत्ता से हुआ समझौता

शुक्रवार 5 सितंबर को नवनिर्मित मकरंदगंज मार्ग का सघन निरीक्षण करने वाले चीफ इंजीनियर्स केएस यादव भोपाल एवं बीएस मीणा एमपीआरडीसी द्वारा अपने समक्ष कोर काटा गया। ऊपर से देखने में अच्छी और गुणवत्तापूर्ण नजर आ रही सड़क का कोर कटने पर अंदर दबी परतों का स्याह सच सतह पर आया तो निरीक्षणकर्ता अधिकारी भी दंग रह गए। इस दौरान मौके पर उपस्थित रहे एक अधिकारी ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर जानकारी देते हुए बताया कि, सीसी सड़क के कोर की पूर्णतः मोटाई में क्रैक्स पाए गए। सीसी सड़क की मोटाई (थिकनेस) मानक अनुरूप है लेकिन क्रैक्स होने से पीक्यूसी (Pavment Quality Concrete) की गुणवत्ता से समझौता होना प्रतीत होता है। जिसका सीधा असर सड़क की मजबूती और टिकाऊपन पर पड़ता है। सड़क की विभिन्न परतों क्रस्ट (Crust) की कुल मोटाई जांच में निर्धारित प्रावधान से कम पाई गई। सिर्फ इतना ही नहीं सड़क की डीबीएम एवं बीसी लेयर (डामर की परतें) भी गुणवत्ता की कसौटी पर खरी नहीं उतरीं। हालांकि बीटी कार्य की सतह को निरीक्षणकर्ताओं ने अच्छा बताया है।
फाइल फोटो।
राजधानी भोपाल के एक विभागीय सूत्र ने बताया कि, निरीक्षण में सड़क निर्माण कार्य की लीपापोती की परतें खुलने पर निरीक्षणकर्ता अधिकारियों ने अपनी संक्षिप्त रिपोर्ट में उन्हें गोलमोल तरीके से इंगित करते हुए अधीक्षण यंत्री से विस्तृत जांच कराने का सुझाव दिया है। हैरानी की बात है कि सड़क की जांच करने वाले दोनों वरिष्ठ अधिकारी अब कनिष्ठ अधिकारी से विस्तृत जांच कराने की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं। सूत्र ने बताया कि, रिपोर्ट में प्रायः इस तरह की गुंजाइश सिर्फ इसलिए छोड़ी जाती है, ताकि सिफारिश और मैनेजमेंट फंडे की स्थिति में मामले को सुविधानुसार कोई भी मोड़ दिया जा सके।

इनका कहना है-

“मुख्य अभियंताद्वय ने मकरंदगंज मार्ग का निरीक्षण किया था। जांच प्रतिवेदन उनके द्वारा देर रात्रि में बंद कमरे में तैयार किया गया था इसलिए प्रतिवेदन के तथ्यों की फिलहाल जानकारी नहीं है। समीक्षा बैठक में जांच रिपोर्ट पर चर्चा होती है और जांच के तथ्यों के आधार पर संबंधितों पर कार्यवाही सुनिश्चित की जाती है।”

जे.पी. सोनकर, प्रभारी कार्यपालन यंत्री, लोनिवि, संभाग पन्ना।

पन्ना में निजी भागीदारी से पीपीपी मॉडल पर बनेगा मेडिकल कॉलेज

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*    जबलपुर में आयोजित कार्यक्रम में हुए अनुबंध पत्र पर हस्ताक्षर

  जनवार ग्राम में 25 एकड़ भूमि पर कॉलेज निर्माण प्रस्तावित

पन्ना। शासन द्वारा स्वास्थ्य के क्षेत्र में पन्ना जिले को महत्वपूर्ण सौगात प्रदान की गई है। सोमवार 25 अगस्त को जबलपुर में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में पन्ना सहित चार जिलों में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर स्थापित होने वाले नए चिकित्सा महाविद्यालय के लिए संबंधित निवेशक समूहों के साथ अनुबंध पत्रों पर हस्ताक्षर एवं आदान-प्रदान भी किए गए। पन्ना में विवेकानंद बोधी नॉलेज फाउंडेशन की रूचि कपूर को इस आशय का पत्र सौंपा गया।
स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के लिए यह पहल मील का पत्थर साबित होगी। पीपीपी मोड पर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल खोलने की शुरुआत के फलस्वरूप मेडिकल कॉलेज में 75 प्रतिशत सीटें विद्यार्थियों को निःशुल्क उपलब्ध होंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मात्र 1 रुपए में 25 एकड़ जमीन देकर पीपीपी मोड पर मेडिकल कॉलेज खोलने का नवाचार किया है, जिसके तहत जनवार में 100 एमबीबीएस सीट क्षमता के चिकित्सा महाविद्यालय का निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जाएगा।
पन्ना में निजी भागीदारी से पीपीपी मॉडल पर बनने वाले मेडिकल कॉलेज के अनुबंध हस्ताक्षर कार्यक्रम के मौके पर जिला मलेरिया कार्यालय के निकट स्थित जिला प्रशिक्षण केन्द्र में भी कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर कलेक्टर सुरेश कुमार सहित मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश तिवारी और जिला परिवार कल्याण अधिकारी एवं आयुष्मान के नोडल अधिकारी डॉ. एन.के. गुप्ता भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में वरिष्ठ नागरिकों को वय वंदना कार्ड का वितरण किया गया। साथ ही मातृ-शिशु सुरक्षा को सुदृढ़ करने वाली योजनाओं और डिजिटल नवाचार के रूप में स्मार्ट चैटबॉट की कार्यप्रणाली के बारे में भी जानकारी दी गई। अन्य नवीन स्वास्थ्य कार्याक्रमों के बारे में भी अवगत कराया गया। इस कार्यक्रम में उपस्थितजनों ने एलईडी स्क्रीन के जरिए जबलपुर में आयोजित कार्यक्रम का सीधा प्रसारण भी देखा।

वायरल फीवर का प्रकोप: स्वास्थ्य सेवाएं चरमराईं, प्रतिदिन जिला अस्पताल पहुंच रहे 800 मरीज

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वायरल फीवर के प्रकोप के चलते जिला चिकित्सालय पन्ना में पिछले कुछ दिनों से इलाज करवाने के लिए सैंकड़ों की संख्या में पहुंच रहे मरीज।

  वार्ड फुल होने से फर्श पर लेटकर इलाज कराने को मजबूर हुए लोग 

*    भीषण उमस और गर्मी के चलते मौसमी बीमारियां हुई बेकाबू

*     डीएच की ओपीडी में पर्याप्त समय न देकर अपने घर की ओपीडी चला रहे डॉक्टर्स

*     संवेदनहीन जनप्रतिनिधियों और निकम्मे प्रशासन ने पब्लिक को अपने हाल पर छोड़ा

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) वर्तमान में पन्ना जिले में भीषण उमस एवं तेज गर्मी पड़ने से मौसमी बीमारियों का जबरदस्त प्रकोप देखा जा रहा है। पखवाड़े भर से जिला चिकित्सालय पन्ना में मरीजों की भारी भीड़ उमड़ रही है। चिकित्सालय के अंदर-बाहर हर तरफ सिर्फ मरीज और उनके तीमारदार ही नजर आ रहे हैं। पहले से ही बदहाल जिला अपस्पताल की चिकित्सा एवं उपचार सेवाएं मरीजों की भीड़ के चलते बुरी तरह से चरमरा गईं है। अस्पताल के सभी वार्ड पहले से ही फुल चल रहे थे अब तो फर्श भी मरीजों से पट चुका है। सप्ताह भर के ओपीडी रिकार्ड अनुसार प्रतिदिन औसतन 800 से अधिक मरीज इलाज कराने के लिए जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि, वर्तमान में जिला अस्पताल आने वाले कुल मरीजों में 60-70 फीसदी लोग कई घंटों तक लाइन में लगने के बाद भी डॉक्टर से अपना परीक्षण ही नहीं करा पाते अथवा डॉक्टर से परामर्श लेने से वंचित रह जाते हैं। दरअसल लंबे अर्से से डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे जिला अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर्स इस आपदा को अपनी निजी प्रैक्टिस चमकाने के अवसर में बदलने में जुटे हैं। उनके द्वारा अपने बंगले की ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ाने की मोनोपोली के तहत अस्पताल की ओपीडी में मरीजों को कम से कम समय दिया जाता है। जिला चिकित्सालय में इलाज के लिए भटकते मरीजों को हर दिन जिस परेशानी से गुजरना पड़ता है उसे शब्दों में बयां कर पाना मुश्किल है। डॉक्टरों के रिक्त पदों की पूर्ति करवाकर व्यवस्था सुधारने के बजाए संवेदनहीन जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने आमजनता को उसके हाल पर छोड़ दिया है।

सर्दी-खांसी और बुखार से पीड़ित अधिकांश मरीज

मध्य प्रदेश के अत्यंत ही पिछड़े एवं गरीब जिलों में शामिल पन्ना की बहुसंख्यक आबादी इलाज एवं स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर निर्भर है। विडंबना यह है कि जिला अस्पताल में डॉक्टरों के अधिकांश पद रिक्त होने के साथ आंचलिक अस्पतालों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी डॉक्टरों के लगभग 80 से 90 फीसदी पद वर्षों से खाली पड़े हैं। जिससे आंचलिक क्षेत्र के सामान्य मरीज और आंचलिक स्वास्थ्य संस्थाओं के रेफरल मरीज बेहतर इलाज की उम्मीद में प्रतिदिन बड़ी संख्या में जिला अस्पताल पहुंचते हैं। वर्तमान में वायरल फीवर के जबरदस्त प्रकोप की वजह से जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों की संख्या में तीन गुना तक बढ़ गई। मरीजों की संख्या के बढ़ते दवाब के कारण जिला अस्पताल की उपचार एवं स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह चरमरा गईं है। स्थिति यह है कि सुबह 9 बजे से लेकर दोपहर 2 बजे तक अस्पताल में मरीजों का मेला सा लगता है। इस दौरान ओपीडी पर्ची बनवाने से लेकर डॉक्टर से चिकित्सीय परीक्षण कराने, पैथोलॉजी टेस्ट का सैम्पल देने और फिर निःशुल्क सरकारी दवाएं प्राप्त करने तक हर जगह मरीजों को मुसीबत की लंबी कतार में लगना पड़ रहा है। जिला अस्पताल के एक डॉक्टर ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर बताया कि, तेज धूप और उमस के कारण वायरल फीवर के मामलों में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। अधिकांश मरीज बुखार, सर्दी-खांसी, सिरदर्द, बदन दर्द और जुकाम की शिकायत लेकर आ रहे हैं। कुछ मरीज पेट संबंधी समस्याओं एवं मच्छर जनित बीमारियों से भी पीड़ित रहते हैं।

ओपीडी मरीजों को कम समय दे रहे डॉक्टर्स

जिला चिकित्सालय पन्ना में वार्ड फुल होने के कारण कई मरीजों का फर्श पर लिटाकर किया जा रहा इलाज।
जिला अस्पताल में पहुंचने वाले मरीजों को वर्तमान में सबसे ज्यादा परेशान डॉक्टर से परीक्षण कराने के लिए होना पड़ रहा है। हालात इतने अधिक खराब हैं कि वर्तमान में 60-70 फीसदी मरीज हॉस्पिटल में डॉक्टर को दिखा ही नहीं पाते। मरीज पहले कई घंटे तक डॉक्टर का उनके कक्ष के बाहर इंतजार करते हैं, बाद में जब डॉक्टर वार्ड में भर्ती मरीजों के चेकअप से फ्री होकर अपने कक्ष में आते हैं तब मरीजों को बाहर कतार में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। इस दौरान मरीजों की तकलीफ और निराशा तब काफी बढ़ जाती है जब अपना नंबर आने की प्रतीक्षा के बीच दोपहर में 2 बजने पर डॉक्टर साहब सुबह की ओपीडी ड्यूटी पूरी करके अपने घर चले जाते हैं। जिला अस्पताल के विशेषज्ञ चिकित्सक बमुश्किल 1-2 घंटे ही ओपीडी मरीजों को देखते है। इसलिए अधिकांश मरीजों का नम्बर नहीं लग पाता। इस स्थिति में मरीजों के पास 3 विकल्प बचते या तो वे विशेषज्ञ चिकित्सकों के बंगले में जाकर उनसे परीक्षण करवाने के लिए 400/- (चार सौ) रुपए शुल्क अदा करें। जिनके पास इलाज के लिए रुपये नहीं उन्हें अगले दिन पुनः हॉस्पिटल जाकर अपना नंबर आने का इंतज़ार करना होता है। क्योंकि जिला अस्पताल में शाम की ओपीडी वर्षों से कागजों चल रही है। तीसरा और आखिरी विकल्प किसी झोलाछाप डॉक्टर की सेवाएं लेने का बचता है लेकिन इसके अपने जानलेवा जोखिम हैं। जिला अस्पताल के प्रमुख डॉक्टर्स के बंगलों में जाकर उन्हें दिखाने वाले मरीजों से जुटाई गई जानकारी अनुसार, इन दिनों प्रत्येक डॉक्टर रोजाना 50 से अधिक मरीज देख रहे हैं।

पन्ना जिला चिकित्सालय के ओपीडी मरीजों की दैनिक संख्या

दिनांक
पंजीकृत मरीज

12 अगस्त 2025

855

13 अगस्त 2025

786

14 अगस्त 2025

682

18 अगस्त 2025 

1145

19 अगस्त 2025

943

20 अगस्त 2025

917

21 अगस्त 2025

874

अस्पताल का निजी नर्सिंग होम की तरह उपयोग

पन्ना जिले में वायरल फीवर कहर बरपा रहा है, जिसके चलते पहले से बदहाल सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं चरमराने लगीं।
सरकारी डॉक्टर्स जिला अस्पताल का उपयोग अपने निजी नर्सिंग होम की तरह कर रहे हैं। वे अपने बंगले पर जिन मरीजों को शुल्क लेकर देखते हैं उनमें जिनकी हालत गंभीर होती है उनको जिला अस्पताल जाकर वहां भर्ती हो जाने का परामर्श दिया जाता है। अस्पताल की ड्यूटी के दौरान सभी विशेषज्ञ डॉक्टर रोजाना वार्डों में जाकर इन्हीं मरीजों एवं अन्य भर्ती मरीजों का परीक्षण करने में प्रतिदिन 3-4 घंटे लगा देते हैं। इसलिए ओपीडी मरीजों के लिए समय कम पड़ जाता है। जिला अस्पताल के प्रमुख डॉक्टर्स को लेकर आमलोगों के बीच यह धारणा लगातार मजबूत हो रही है कि वे अपने प्राइवेट प्रैक्टिस को बढ़ावा देने के लिए ड्यूटी टाइम पर जानबूझकर ओपीडी मरीजों को बहुत कम समय देते हैं। मानव सेवा के अपने धर्म को छोड़कर कतिपय डॉक्टर्स पूरी तरह से विशुद्ध व्यवसायिकता पर उतर आए हैं, जिसका दुष्प्रभाव आर्थिक रूप से कमजोर एवं निम्न मध्यम वर्गीय तबके के लोगों पर पड़ रहा है। जिला अस्पताल में एक ही विभाग के एक से अधिक डॉक्टर्स का वार्डों में जाकर भर्ती मरीजों का चेकअप करने पर जानकारों द्वारा कई बार कड़ी आपत्ति जताई गई लेकिन इस पर प्रभावी रोक नहीं लग सकी।

व्यवस्था सुधार से जिम्मेदारों को नहीं सरोकार

जिला अस्पताल पन्ना की व्यवस्था सुधारने को लेकर जिले के जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी तनिक भी संवेदनशील नहीं हैं। डॉक्टरों के रिक्त पदों की पूर्ति करवाने में पूरी तरह नाकाम साबित हुए जनप्रतिनिधि आजकल स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली की बात आने पर मेडीकल कॉलेज का झुनझुना बजाने लगते हैं। पड़ोसी जिला छतरपुर समेत अन्य जिलों में जहां 7 से 10 वर्ष पूर्व मेडिकल कॉलेज स्वीकृत हुए थे वे आज किस स्थिति में हैं, क्या उनका लाभ मिल रहा है, लोगों को इस पर गौर करने की जरुरत है। दरअसल भोपाल, दिल्ली के नामी निजी अस्पतालों में अपना इलाज करवाने वाले जनप्रतिनिधियों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि पन्ना में डॉक्टर है या नहीं हैं और जिला चिकित्सालय की व्यवस्था कैसी है। वहीं उपलब्ध संसाधनों में ही व्यवस्था को बेहतर बनाने और समय-समय पर जिला अस्पताल का नियमित रूप से आकस्मिक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को जांचने-परखने से प्रशासनिक अधिकारियों को भी कोई लेना-देना नहीं है। जानकर बताते हैं यदि डॉक्टर्स टाइम से ड्यूटी पर आएं, जिन विभागों में 2 या उससे अधिक विशेषज्ञ हैं उनमें एक डॉक्टर्स भर्ती मरीजों का चेकअप करें और एक डॉक्टर ओपीडी मरीजों का परीक्षण करें तथा शाम की ओपीडी में नियमित रूप से डॉक्टर्स उपस्थिति दर्ज कराएं तो काफी हद तक मरीजों को राहत मिल सकती है।

शिकायत के बाद महिला डॉक्टर ने मरीज देखना बंद किया

जिला अस्पताल पन्ना में पदस्थ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नीलम पटेल पिछले कुछ समय से चाइल्ड केयर लीव पर हैं। हालांकि, वे अस्पताल परिसर में ही स्थित अपने शासकीय आवास पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में पहुंचने वाली महिला रोगियों को लगातार परामर्श दे रहीं थी। जिसकी शिकायत एक व्यक्ति द्वारा कलेक्टर से करने और बंगले में जुटी मरीजों की भीड़ का वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किए जाने से नाराज डॉ. नीलम पटेल ने गुरुवार दोपहर 3 बजे से मरीजों को देखना पूर्णतः बंद कर दिया। महिला चिकित्सक के इस निर्णय महिला मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। मरीजों का कहना है जिले की आबादी लगभग 12 लाख है, इसमें आधी आबादी यानी महिलाओं के लिए जिले में सिर्फ तीन स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं। डॉक्टरों के वर्षों से खाली पड़े पदों को की पूर्ती के लिए जनहित सार्थक पहल करने के बजाए अनावश्यक शिकवा-शिकायत करके महिला चिकित्सक को परेशान करना गलत है। वहीं डॉ. नीलम पटेल का कहना है, मैं अपने अवकाश का उपभोग कैसे करतीं हूं यह मेरा निजी निर्णय है, इसमें अन्य कोई व्यक्ति हस्तक्षेप नहीं कर सकता है। उन्होंने शिकायतकर्ता पर उन्हें बदनाम करने का आरोप भी लगाया है। इस घटनाक्रम को लेकर लोगों के बीच चर्चाएं डॉ. नेहा खटीक, डॉ. श्रद्धा दक्ष की तरह डॉ. नीलम पटेल को भी सुनियोजित तरीके से परेशान करके पन्ना से भगाने की साजिश की जा रही है।
इनका कहना है-
“डॉक्टर्स को मानव सेवा के धर्म का ईमानदारी से पालन करते हुए ओपीडी मरीजों को ज्यादा से ज्यादा देखने का प्रयास करना चाहिए। शनिवार से मैं भी जिला चिकित्सालय में अपनी पीडियाट्रिक की ओपीडी देखूंगा। आपके द्वारा दिए गए सुझाव अनुरूप ही व्यवस्था होनी चाहिए, इसे बनाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।”

डॉ. राजेश तिवारी, सीएमएचओ, जिला पन्ना।

बड़ी कार्रवाई | खनिज ठेकेदार पप्पू दीक्षित पर 62 करोड़ रुपए से अधिक का जुर्माना

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खनिज ठेकेदार एवं कांग्रेस नेता पप्पू उर्फ़ श्रीकांत दीक्षित।

*     स्वीकृत खदान क्षेत्र से बाहर उत्खनन करने पर कलेक्टर ने थमाया नोटिस

*     तय समयसीमा में राशि जमा न करने पर भरना पड़ेगा 1 अरब से अधिक का जुर्माना

पन्ना। (www.radarnews.in) भू-माफियाओं एवं अवैध कॉलोनाइजर्स के खिलाफ लगातार प्रभावी कार्रवाई कर रहे पन्ना कलेक्टर सुरेश कुमार ने अवैध खनन से संबंधित एक शिकायत का संज्ञान लेकर चर्चित खनिज ठेकेदार एवं कांग्रेस नेता श्रीकांत दीक्षित पप्पू को 62 करोड़ 27 लाख से अधिक की जुर्माना (प्रशमन) राशि का नोटिस थमाया है। यह कार्रवाई स्वीकृत खदान क्षेत्र के बाहर उत्खनन पाए जाने की गई है। प्रशमन राशि जमा न करने पर श्रीकांत पर दोगुनी राशि 1 अरब 24 करोड़ 55 लाख 85 हजार 600 रूपए का जुर्माना लगाया जाएगा। पन्ना कलेक्टर की इस कार्रवाई के बाद से नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ाते हुए खनन करने वाले पत्थर खदान ठेकेदारों, क्रेशर मालिकों एवं खनन माफियाओं में जबरदस्त हड़कंप मचा है।
कलेक्टर सुरेश कुमार ने एक शिकायती आवेदन के आधार पर टिकुरिया मोहल्ला पन्ना निवासी श्रीकांत दीक्षित एवं डायमंड स्टोन क्रेशर के प्रोपराइटर को मध्यप्रदेश खनिज अवैध खनन, परिवहन तथा भण्डारण निवारण नियम 2022 की धाराओं के उल्लंघन पर नियत प्रावधानों के तहत कार्यवाही के लिए नोटिस जारी किया है। इस संबंध में पेशी तिथि आगामी 01 सितम्बर को उपस्थित होकर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं अन्यथा प्रकरण में एकपक्षीय कार्यवाही की जाएगी।
शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन के माध्यम से अवगत कराया कि पप्पू उर्फ श्रीकांत दीक्षित की ग्राम बिलघाड़ी तहसील गुनौर की धुवयाई पत्थर खदान में स्वीकृत क्षेत्र से बाहर उत्खनन किया जा रहा है, जिसका संचालन रोककर नाप कराई जाए तो बड़ी रॉयल्टी बनेगी। इसके अतिरिक्त गुनौर में गिट्टी क्रेशर के लिए जहां से पत्थर निकाला जा रहा है, उसमें भी स्वीकृत क्षेत्र के बाहर खुदाई की जा रही है।

माइनिंग प्लान की शर्तों का भी उल्लंघन

जिला कलेक्टर द्वारा इस मामले में उप संचालक खनिज प्रशासन जिला पन्ना से जांच प्रतिवेदन लिया गया था। जांच के तथ्यों के आधार पर कई प्रकार की अनियमितताएं पाए जाने पर कुल प्रशमन राशि 62 करोड़ 27 लाख 92 हजार 800 रूपए जमा कराया जाना तथा राशि जमा न करने की स्थिति में दोगुनी राशि अर्थात् 1 अरब 24 करोड़ 55 लाख 85 हजार 600 रूपए शास्ति अधिरोपित किया जाना प्रस्तावित है। श्रीकांत दीक्षित द्वारा भौमिकी तथा खनिकर्म क्षेत्रीय कार्यालय जबलपुर की स्वीकृत माइनिंग प्लान में उल्लेखित शर्तों का भी उल्लंघन किया गया है।

शराब के अवैध कारोबार पर इस संगठन ने फिर किया प्रहार, शराब माफिया में मचा हड़कंप

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शराब ठेकेदार के कथित कर्मचारी से जब्त की गई अवैध शराब एवं मोटरसाइकिल।

  बाइक से शराब की तस्करी करते एक युवक को पकड़ा, दूसरा आरोपी भाग निकला

पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में शराब का अवैध कारोबार वृहद स्तर पर चल रहा है। शराब की तस्करी एवं अवैध बिक्री के मामले यहां हर दिन सामने आ रहे हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि शराब के गैरकानूनी कारोबार पर ईमानदारी से कड़ा शिकंजा कसने के बजाए आबकारी एवं पुलिस महकमा तमाशबीन बना बैठा है। अवैध शराब की रोकथाम को लेकर इनकी कार्रवाई महज औपचारिकता निभाने तक ही सीमित है। जिले के आबकारी विभाग के लाइसेंसी ठेकेदार की अवैध शराब पकड़ने पर दोनों ही महकमों में अघोषित तौर पर रोक लगा रखी है। नतीजतन गांव-गांव धड़ल्ले से अवैध शराब पहुंचने के कारण समाज पर व्यापक दुष्प्रभाव पड़ रहा है। जिससे चिंतित भगवती मानव कल्याण संगठन एवं भारतीय शक्ति चेतना पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा शराब के अवैध कारोबार के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। इन संगठनों के कार्यकर्ता अपने सामाजिक दायित्व और नैतिक कर्तव्य को बखूबी निभाते हुए लगातार अवैध शराब पकड़ने की कार्रवाई कर रहे हैं।
पिछले सप्ताह इनके द्वारा रैपुरा क़स्बा में अवैध शराब से लोड पिकअप वाहन को पकड़ा गया था। जिसमें ड्यूटी पैड शराब की चंद पेटियों के साथ भारी मात्रा में लाखों रुपए मूल्य की अवैध शराब मिली थी। इस मामले में आबकारी ठेकेदार आशीष शिवहरे के खिलाफ आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध करवाने के लिए भगवती मानव कल्याण संगठन एवं भारतीय शक्ति चेतना पार्टी के कार्यकर्ताओं को 48 घंटे तक आंदोलन करना पड़ा था। इनके जबरदस्त संघर्ष की चर्चाएं अभी चल ही रहीं थी कि इस बीच सोमवार रात को एक ओर शराब तस्कर को रंगे पकड़कर भगवती मानव कल्याण संगठन एवं भारतीय शक्ति चेतना पार्टी के कार्यकर्ताओं ने साफ़ सन्देश दे दिया है कि वे नशे से समाज को बचाने की अपनी मुहिम हर हाल में जारी रखेंगे। फिर चाहे अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करवाने के लिए उन्हें कितना भी परेशान होना पड़े लेकिन वे हार नहीं मानेंगे।
शराब की तस्करी करते रंगे हाथ पकड़ा गया आरोपी आशीष राय।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिले के सिमरिया थाना अंतर्गत हरदुआ खमरिया ग्राम में सोमवार 18 अगस्त 2025 की रात लगभग 9 बजे बिना नंबर की बाइक से शराब की तस्करी कर रहे दो युवकों को भगवती मानव कल्याण संगठन एवं भारतीय शक्ति चेतना पार्टी के कार्यकर्ताओं ने स्थानीय बस स्टैंड के समीप घेराबंदी करके पकड़ लिया। मौके पर आरोपियों के कब्जे से 2 पेटी अवैध शराब जब्त की गई। आरोपियों को स्थानीय पुलिस चौकी ले जाने के दौरान एक आरोपी मौका पाकर फरार हो गया। संगठन के कार्यकर्ताओं द्वारा आरोपी आशीष राय को हरदुआ चौकी प्रभारी एवं उप निरीक्षक योगेन्द्र गायकवाड़ के हवाले कर जब्त शराब की पेटियां और बिना नंबर की एचएफ डीलक्स मोटरसाइकिल पुलिस को सौंप दी। इस मामले पर पुलिस ने आरोपी आशीष राय व उसके फरार साथी के विरुद्ध मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम की धारा 34(1) के तहत प्रकरण दर्ज कर विवेचना में लिया है। शराब तस्कर की धरपकड़ की साहसिक कार्रवाई में भगवती मानव कल्याण संगठन एवं भारतीय शक्ति चेतना पार्टी के कार्यकर्ता राजू लोधी, नीरज लोधी एवं नंदकुमार साहू की अहम भूमिका रही।